विलयन — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (एकक 1)
रसायन विज्ञान • कक्षा 12 • एकक 1

विलयन (Solutions)

विलयनों के प्रकार, सांद्रता व्यक्त करने की विधियाँ, हेनरी व राउल्ट के नियम, आदर्श-अनादर्श विलयन, अणुसंख्य गुणधर्म — वाष्पदाब अवनमन, क्वथनांक उन्नयन, हिमांक अवनमन, परासरण दाब — तथा असामान्य मोलर द्रव्यमान। संपूर्ण अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, हल किए गए उदाहरण, त्वरित तथ्य, पाठ्यनिहित प्रश्न (1.1–1.12) तथा अभ्यास प्रश्न (1.1–1.41) के विस्तृत हल — एक ही स्थान पर।

p = p°x राउल्ट का नियम
p = K_H x हेनरी का नियम
Π = iCRT परासरण दाब
★ NEET फोकस तथ्य
परिचय व वर्गीकरण

1 विलयनों के प्रकार

शरीर के लगभग सभी जैविक प्रक्रम किसी न किसी विलयन में घटित होते हैं। सामान्य जीवन में हम अधिकांशतः शुद्ध पदार्थों के स्थान पर मिश्रणों के संपर्क में आते हैं। विलयन दो या अधिक शुद्ध पदार्थों का समांगी मिश्रण होता है — अर्थात मिश्रण के प्रत्येक भाग में संघटन व गुण एक समान रहते हैं।

जो अवयव अधिक मात्रा में उपस्थित होता है वह विलायक कहलाता है — यह विलयन की भौतिक अवस्था (ठोस/द्रव/गैस) का निर्धारण करता है। शेष अवयव विलेय कहलाते हैं। इस अध्याय में हम द्विअंगी विलयनों (दो अवयव वाले) का अध्ययन करेंगे, जिनमें प्रत्येक अवयव गैस, द्रव अथवा ठोस अवस्था में हो सकता है।

विलयन के प्रकारविलेयविलायकसामान्य उदाहरण
गैसीय विलयनगैसगैसऑक्सीजन व नाइट्रोजन का मिश्रण (वायु)
द्रवगैसक्लोरोफॉर्म वाष्प का नाइट्रोजन में विलयन
ठोसगैसकपूर वाष्प का नाइट्रोजन में विलयन
द्रव विलयनगैसद्रवजल में घुली हुई ऑक्सीजन
द्रवद्रवजल में घुली हुई एथेनॉल
ठोसद्रवजल में घुला हुआ ग्लूकोस
ठोस विलयनगैसठोसहाइड्रोजन का पैलेडियम में विलयन
द्रवठोसपारे का सोडियम के साथ अमलगम
ठोसठोसताँबे का सोने में विलयन (मिश्रधातु)
पीतल (जिंक + ताँबा), जर्मन सिल्वर (ताँबा + जिंक + निकैल), काँसा (ताँबा + टिन) — ये सभी ठोस विलयन के उदाहरण हैं। जल में 1.0 ppm फ्लुओराइड दंत क्षरण को रोकती है, जबकि 1.5 ppm से अधिक सांद्रता पर दांतों में पीलापन आ सकता है।
त्वरित तथ्य
  • विलयन दो या अधिक शुद्ध पदार्थों का समांगी मिश्रण है — संघटन व गुण हर जगह समान रहते हैं।
  • अधिक मात्रा वाला अवयव विलायक तथा शेष अवयव विलेय कहलाते हैं।
  • विलायक ही विलयन की भौतिक अवस्था (ठोस/द्रव/गैस) निर्धारित करता है।
  • द्विअंगी विलयन में केवल दो अवयव होते हैं; कुल 9 प्रकार के द्विअंगी विलयन संभव हैं (3×3 संयोजन)।
  • ठोस विलयन जिसमें गैस विलेय हो — उदाहरण: H₂ गैस का पैलेडियम (Pd) धातु में विलयन।
सांद्रता के मात्रक

2 विलयनों की सांद्रता व्यक्त करना

विलयन के संघटन को गुणात्मक रूप से "तनु" या "सांद्र" कहना पर्याप्त नहीं है — मात्रात्मक मापन आवश्यक है। सांद्रता व्यक्त करने की सात प्रमुख विधियाँ नीचे दी गई हैं।

(i) द्रव्यमान प्रतिशत (w/w)

सूत्र 1.1अवयव का द्रव्यमान % = (विलयन में उपस्थित अवयव का द्रव्यमान / विलयन का कुल द्रव्यमान) × 100

उदाहरण: 10% ग्लूकोस (w/w) जलीय विलयन का अर्थ है — 10 g ग्लूकोस को 90 g जल में घोलने पर 100 g विलयन प्राप्त होता है।

(ii) आयतन प्रतिशत (V/V)

सूत्र 1.2अवयव का प्रतिशत आयतन = (अवयव का आयतन / विलयन का कुल आयतन) × 100

उदाहरण: एथिलीन ग्लाइकॉल का 35% (V/V) जलीय विलयन वाहनों के इंजन को ठंडा करने में प्रयुक्त होता है; यह जल के हिमांक को 255.4 K (−17.6°C) तक घटा देता है।

(iii) द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (w/V)

औषधियों व फार्मेसी में उपयोग — 100 mL विलयन में घुले विलेय का द्रव्यमान।

(iv) पार्ट्स पर मिलियन (ppm)

सूत्र 1.3ppm = (अवयव के भागों की संख्या / विलयन में उपस्थित सभी अवयवों के कुल भागों की संख्या) × 10⁶

अत्यंत सूक्ष्म सांद्रता के लिए उपयुक्त — समुद्री जल में O₂ की सांद्रता लगभग 5.8 ppm होती है। जल/वायुमंडल में प्रदूषकों की सांद्रता प्रायः µg mL⁻¹ या ppm में व्यक्त होती है।

(v) मोल-अंश (x)

सूत्र 1.4–1.7अवयव का मोल-अंश = अवयव के मोलों की संख्या / सभी अवयवों के कुल मोलों की संख्या
द्विअंगी विलयन में: xₐ = nₐ / (nₐ + n_B)
सभी अवयवों के मोल-अंशों का योग सदैव 1 होता है: x₁ + x₂ + ... + xᵢ = 1

मोल-अंश विलयनों के भौतिक गुणों — जैसे वाष्पदाब — से संबंध दर्शाने में तथा गैसीय मिश्रणों की गणना में अत्यंत उपयोगी है।

उदाहरण 1.1

प्रश्न: एथिलीन ग्लाइकॉल (C₂H₆O₂) के मोल-अंश की गणना करो यदि विलयन में इसका 20% द्रव्यमान उपस्थित हो।

हल: 100 g विलयन लें ⇒ 20 g C₂H₆O₂ व 80 g जल। M(C₂H₆O₂) = 62 g/mol।
C₂H₆O₂ के मोल = 20/62 = 0.322 mol; जल के मोल = 80/18 = 4.444 mol
x(ग्लाइकॉल) = 0.322/(0.322+4.444) = 0.068; x(जल) = 1 − 0.068 = 0.932

(vi) मोलरता (M)

सूत्र 1.8मोलरता (M) = विलेय के मोल / विलयन का लीटर में आयतन

उदाहरण: NaOH का 0.25 mol L⁻¹ (0.25 M) विलयन — 0.25 मोल NaOH को 1 लीटर विलयन में घोला गया है।

उदाहरण 1.2

प्रश्न: उस विलयन की मोलरता ज्ञात करो जिसमें 5 g NaOH, 450 mL विलयन में घुला है।

हल: NaOH के मोल = 5/40 = 0.125 mol; आयतन = 0.450 L
मोलरता = 0.125/0.450 = 0.278 mol L⁻¹ (0.278 M)

(vii) मोललता (m)

सूत्र 1.9मोललता (m) = विलेय के मोल / विलायक का किलोग्राम में द्रव्यमान

उदाहरण: 1.00 mol kg⁻¹ (1.00 m) KCl जलीय विलयन में 1 mol (74.5 g) KCl को 1 kg जल में घोला गया है।

उदाहरण 1.3

प्रश्न: 2.5 g एथेनोइक अम्ल (CH₃COOH) के 75 g बेंज़ीन में विलयन की मोललता ज्ञात करो।

हल: M(C₂H₄O₂)=60 g/mol; मोल = 2.5/60 = 0.0417 mol
बेंज़ीन = 75×10⁻³ kg; मोललता = 0.0417/0.075 = 0.556 mol kg⁻¹

महत्वपूर्ण अंतर: द्रव्यमान%, ppm, मोल-अंश तथा मोललता ताप पर निर्भर नहीं करते (क्योंकि द्रव्यमान ताप से अप्रभावित रहता है), जबकि मोलरता ताप पर निर्भर करती है क्योंकि आयतन ताप के साथ बदलता है।
त्वरित तथ्य
  • द्रव्यमान%, ppm, मोल-अंश व मोललता — ताप-स्वतंत्र हैं; मोलरता ताप पर निर्भर है (आयतन ताप के साथ बदलता है)।
  • मोल-अंश इकाई है, इसका कोई मात्रक नहीं होता; सभी मोल-अंशों का योग सदैव 1 होता है।
  • मोलरता = विलेय के मोल / विलयन का आयतन (लीटर में); मोललता = विलेय के मोल / विलायक का द्रव्यमान (kg में)।
  • ppm = (अवयव के भागों की संख्या / कुल भागों की संख्या) × 10⁶ — अत्यंत तनु सांद्रता के लिए उपयुक्त।
विलेयता व साम्यावस्था

3 विलेयता

किसी अवयव की विलेयता एक निश्चित ताप पर विलायक की निश्चित मात्रा में घुली हुई उस पदार्थ की अधिकतम मात्रा होती है। यह विलेय व विलायक की प्रकृति, ताप तथा दाब पर निर्भर करती है।

3.1 ठोसों की द्रवों में विलेयता

"समान-समान को घोलता है" — ध्रुवीय विलेय ध्रुवीय विलायकों में तथा अध्रुवीय विलेय अध्रुवीय विलायकों में घुलते हैं। जब ठोस विलेय द्रव विलायक में डाला जाता है तो विलीनीकरण (घुलना) व क्रिस्टलीकरण दोनों साथ-साथ होते हैं; जब दोनों की दर समान हो जाती है तो गतिक साम्य स्थापित होता है:

सूत्र 1.10विलेय + विलायक ⇌ विलयन

ऐसा विलयन जिसमें दिए गए ताप व दाब पर और अधिक विलेय न घुल सके, संतृप्त विलयन कहलाता है; जिसमें और अधिक घोला जा सके वह असंतृप्त विलयन कहलाता है।

ताप का प्रभाव (ठोस-द्रव): ले-शातैलिये नियम के अनुसार — यदि विलीनीकरण ऊष्माशोषी (ΔविलयनH > 0) हो तो ताप बढ़ने पर विलेयता बढ़ती है; यदि ऊष्माक्षेपी (ΔविलयनH < 0) हो तो विलेयता घटती है।
दाब का प्रभाव: ठोसों की द्रवों में विलेयता पर दाब का कोई सार्थक प्रभाव नहीं होता, क्योंकि ठोस व द्रव अत्यधिक असंपीड्य होते हैं।

3.2 गैसों की द्रवों में विलेयता — हेनरी का नियम

गैस की विलायक में विलेयता तथा दाब के बीच मात्रात्मक संबंध हेनरी के नियम द्वारा दिया गया है:

सूत्र 1.11 — हेनरी का नियमp = KH · x
यहाँ p = गैस का वाष्प अवस्था में आंशिक दाब, x = विलयन में गैस का मोल-अंश, KH = हेनरी स्थिरांक।

कथन: स्थिर ताप पर किसी गैस की द्रव में विलेयता, द्रव अथवा विलयन की सतह पर पड़ने वाले गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होती है — अर्थात विलयन में गैस का मोल-अंश, उस विलयन के ऊपर उपस्थित गैस के आंशिक दाब के समानुपाती होता है।

विलयन में गैस का मोल-अंश (x) गैस का आंशिक दाब (p) ढाल = KH
चित्र 1.2 — हेनरी नियम का आलेख: p बनाम x एक सरल रेखा है, जिसका ढाल हेनरी स्थिरांक KH को व्यक्त करता है
गैस (293 K)KH / kbarगैस (298 K)KH / kbar
He144.97आर्गन40.3
H₂69.16CO₂1.67
N₂76.48मेथेन0.413
O₂34.86वाइनिल क्लोराइड0.611
उदाहरण 1.4

प्रश्न: 293 K पर N₂ का आंशिक दाब 0.987 bar है, KH(N₂) = 76.48 kbar। 1 लीटर जल में विलेय N₂ की मिलीमोल संख्या ज्ञात करो।

हल: x(N₂) = p/KH = 0.987/76,480 = 1.29×10⁻⁵
1 L जल ≈ 55.5 mol; n/55.5 = 1.29×10⁻⁵ ⇒ n = 7.16×10⁻⁴ mol = 0.716 mmol

हेनरी नियम के अनुप्रयोग:
  • सोडा-जल व शीतल पेयों में CO₂ की विलेयता बढ़ाने हेतु बोतल को अधिक दाब पर बंद किया जाता है।
  • गहरे समुद्र में गोताखोरों के टैंकों में हीलियम मिलाकर तनु वायु (11.7% He, 56.2% N₂, 32.1% O₂) भरी जाती है ताकि "बेंड्स" रोग से बचा जा सके।
  • अधिक ऊँचाई पर O₂ का आंशिक दाब कम होने से रुधिर में O₂ सांद्रता घट जाती है, जिससे "एनॉक्सिया" होता है।
ताप का प्रभाव (गैस-द्रव): ताप बढ़ने पर गैस की द्रवों में विलेयता सदैव घटती है, क्योंकि विलीनीकरण संघनन के समकक्ष एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है — ले-शातैलिये नियमानुसार ताप बढ़ने से साम्य पीछे की ओर विस्थापित होता है।
त्वरित तथ्य
  • हेनरी का नियम: p = KH·x — स्थिर ताप पर गैस की विलेयता उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है।
  • दिए गए दाब पर KH जितना अधिक, द्रव में गैस की विलेयता उतनी ही कम होती है।
  • राउल्ट का नियम हेनरी नियम की एक विशेष स्थिति है, जिसमें KH का मान p° (शुद्ध विलायक के वाष्पदाब) के बराबर हो जाता है।
  • ठोस-द्रव विलेयता पर दाब का सार्थक प्रभाव नहीं होता; गैस-द्रव विलेयता दाब बढ़ने पर बढ़ती है।
  • ताप बढ़ने पर: ठोस की विलेयता (ऊष्माशोषी प्रक्रम हेतु) बढ़ती है, जबकि गैस की विलेयता सदैव घटती है।
राउल्ट का नियम

4 द्रवीय विलयनों का वाष्प दाब

4.1 द्रव-द्रव विलयनों का वाष्प दाब

फ्रांसीसी रसायनज्ञ फ्रेंसिस मार्टे राउल्ट (1886) ने वाष्पशील द्रवों के विलयन के लिए एक मात्रात्मक संबंध दिया, जिसे राउल्ट का नियम कहते हैं: वाष्पशील द्रवों के विलयन में प्रत्येक अवयव का आंशिक दाब, विलयन में उसके मोल-अंश के समानुपाती होता है।

सूत्र 1.12–1.16p₁ = p₁° x₁ , p₂ = p₂° x₂
डाल्टन के आंशिक दाब नियमानुसार: pकुल = p₁ + p₂
pकुल = p₁° + (p₂° − p₁°) x₂

निष्कर्ष: (i) विलयन का कुल वाष्पदाब किसी भी अवयव के मोल-अंश से संबंधित किया जा सकता है, (ii) pकुल, x₂ के साथ रेखीय रूप से परिवर्तित होता है, (iii) pकुल का न्यूनतम मान p₁° तथा अधिकतम मान p₂° होता है।

मोल-अंश x₂ → p₁ p₂ pकुल p₂° p₁°
चित्र 1.3 — स्थिर ताप पर आदर्श विलयन के वाष्पदाब का मोल-अंश के साथ रेखीय आलेख
उदाहरण 1.5

प्रश्न: 298 K पर CHCl₃ व CH₂Cl₂ के वाष्पदाब क्रमशः 200 व 415 mm Hg हैं। 25.5 g CHCl₃ व 40 g CH₂Cl₂ मिलाने पर विलयन का वाष्पदाब व वाष्पीय प्रावस्था में मोल-अंश ज्ञात करो।

हल: CH₂Cl₂ मोल = 40/85 = 0.47; CHCl₃ मोल = 25.5/119.5 = 0.213
x(CH₂Cl₂) = 0.688, x(CHCl₃) = 0.312
pकुल = 200 + (415−200)×0.688 = 347.9 mm Hg
y(CH₂Cl₂) = 285.5/347.9 = 0.82; y(CHCl₃) = 62.4/347.9 = 0.18 — वाष्प प्रावस्था सदैव अधिक वाष्पशील अवयव की धनी होती है।

4.2 राउल्ट का नियम — हेनरी नियम की एक विशेष स्थिति

राउल्ट के नियम pᵢ = xᵢ pᵢ° तथा हेनरी नियम p = KH x की तुलना करने पर स्पष्ट है कि दोनों में गैस/वाष्पशील घटक का आंशिक दाब मोल-अंश के समानुपाती है — केवल समानुपाती स्थिरांक (KH बनाम pᵢ°) में भिन्नता है। इस प्रकार राउल्ट का नियम, हेनरी नियम की वह विशेष स्थिति है जिसमें KH का मान pᵢ° के बराबर हो जाता है।

4.3 ठोस पदार्थों का द्रवों में विलयन एवं वाष्पदाब

जब किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय घोला जाता है, तो विलयन का वाष्पदाब शुद्ध विलायक से कम हो जाता है — क्योंकि सतह का कुछ भाग विलेय के कणों से घिर जाता है। यह कमी उपस्थित अवाष्पशील विलेय की मात्रा पर निर्भर करती है, उसकी प्रकृति पर नहीं।

सूत्र 1.20p₁ = x₁ p₁° (यहाँ 1 = विलायक; विलेय अवाष्पशील है)
शुद्ध विलायक विलयन (कम वाष्पदाब)
चित्र 1.4 — विलेय की उपस्थिति के फलस्वरूप विलायक के वाष्पदाब में कमी
त्वरित तथ्य
  • राउल्ट का नियम: pᵢ = xᵢ pᵢ° — विलयन में प्रत्येक वाष्पशील अवयव का आंशिक दाब उसके मोल-अंश के समानुपाती होता है।
  • डाल्टन के आंशिक दाब नियम से pकुल = p₁ + p₂; वाष्प प्रावस्था में मोल-अंश yᵢ = pᵢ/pकुल
  • वाष्प प्रावस्था सदैव अधिक वाष्पशील अवयव (अधिक p° वाले) की धनी होती है।
  • राउल्ट का नियम हेनरी नियम की विशेष स्थिति है जब KH = pᵢ°।
  • अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलायक का वाष्पदाब घटता है — यह कमी विलेय की मात्रा पर निर्भर, प्रकृति पर नहीं।
वर्गीकरण

5 आदर्श एवं अनादर्श विलयन

5.1 आदर्श विलयन

ऐसे विलयन जो सभी सांद्रताओं पर राउल्ट के नियम का पालन करते हैं, आदर्श विलयन कहलाते हैं। इनके दो अन्य गुण भी होते हैं:

सूत्र 1.21Δमिश्रणH = 0 , Δमिश्रणV = 0

अर्थात मिश्रण बनाने पर न ऊष्मा का उत्सर्जन/अवशोषण होता है और न ही आयतन में परिवर्तन। यह तभी संभव है जब A-A, B-B व A-B अंतराआण्विक आकर्षण बल लगभग समान हों। उदाहरण: n-हेक्सेन व n-हेप्टेन, ब्रोमोएथेन व क्लोरोएथेन, बेंज़ीन व टॉल्यूईन।

5.2 अनादर्श विलयन

जब विलयन सभी सांद्रताओं पर राउल्ट के नियम का पालन नहीं करता तो वह अनादर्श विलयन कहलाता है। इसका वाष्पदाब राउल्ट नियम द्वारा प्रागुक्त मान से अधिक (धनात्मक विचलन) या कम (ऋणात्मक विचलन) हो सकता है।

धनात्मक विचलन मोल-अंश x₂ → वास्तविक pकुल ऋणात्मक विचलन मोल-अंश x₂ → वास्तविक pकुल
चित्र 1.6 — धनात्मक व ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले द्विघटकीय विलयनों के वाष्पदाब आलेख (हरी रेखा वास्तविक, नारंगी बिंदुदार रेखा राउल्ट-नियम आदर्श)
विशेषताधनात्मक विचलनऋणात्मक विचलन
A-B अंतराआण्विक आकर्षणA-A / B-B से कमज़ोरA-A / B-B से अधिक मज़बूत
वाष्पदाबप्रागुक्त से अधिकप्रागुक्त से कम
Δमिश्रणHधनात्मक (ऊष्माशोषी)ऋणात्मक (ऊष्माक्षेपी)
Δमिश्रणVधनात्मकऋणात्मक
उदाहरणएथेनॉल+ऐसीटोन, CS₂+ऐसीटोनक्लोरोफॉर्म+ऐसीटोन (H-बंध), फीनॉल+ऐनिलीन
स्थिरक्वाथी मिश्रण (Azeotrope): कुछ द्रव मिश्रण स्थिरक्वाथी बनाते हैं, जिनमें द्रव व वाष्प प्रावस्था का संघटन समान होता है तथा ये एक स्थिर ताप पर उबलते हैं — प्रभाजी आसवन से पृथक नहीं किए जा सकते।
  • न्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी: अत्यधिक धनात्मक विचलन से बनते हैं। उदा. एथेनॉल-जल (95.4% एथेनॉल, आयतन आधार) — क्वथनांक जल से कम।
  • अधिकतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी: अत्यधिक ऋणात्मक विचलन से बनते हैं। उदा. नाइट्रिक अम्ल-जल (68% HNO₃, 32% जल, क्वथनांक 393.5 K)।
त्वरित तथ्य
  • आदर्श विलयन: सभी सांद्रताओं पर राउल्ट नियम पालन, Δमिश्रणH = 0, Δमिश्रणV = 0।
  • धनात्मक विचलन में A-B आकर्षण A-A/B-B से कमज़ोर होता है ⇒ वाष्पदाब बढ़ता है (उदा. एथेनॉल+ऐसीटोन)।
  • ऋणात्मक विचलन में A-B आकर्षण A-A/B-B से अधिक मज़बूत होता है ⇒ वाष्पदाब घटता है (उदा. क्लोरोफॉर्म+ऐसीटोन)।
  • स्थिरक्वाथी मिश्रणों को प्रभाजी आसवन से अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि द्रव व वाष्प का संघटन समान होता है।
  • एथेनॉल-जल न्यूनतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी है; HNO₃-जल अधिकतम क्वथनांकी स्थिरक्वाथी (393.5 K, 68% HNO₃) है।
कणों की संख्या पर आधारित गुण

6 अणुसंख्य गुणधर्म

वे गुण जो विलयन में उपस्थित कुल कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, न कि विलेय कणों की प्रकृति पर, अणुसंख्य गुणधर्म (colligative properties) कहलाते हैं। चार प्रमुख अणुसंख्य गुणधर्म हैं: (1) वाष्पदाब का आपेक्षिक अवनमन, (2) क्वथनांक का उन्नयन, (3) हिमांक का अवनमन, (4) परासरण दाब।

6.1 वाष्पदाब का आपेक्षिक अवनमन

सूत्र 1.22–1.28p₁ = x₁ p₁° ⇒ Δp₁ = p₁° − p₁ = x₂ p₁°
आपेक्षिक अवनमन: (p₁° − p₁)/p₁° = x₂ = n₂/(n₁+n₂)
तनु विलयन के लिए (n₂ ≪ n₁): (p₁°−p₁)/p₁° = (w₂ × M₁)/(M₂ × w₁)
उदाहरण 1.6

प्रश्न: शुद्ध बेंज़ीन का वाष्पदाब 0.850 bar है। 0.5 g अवाष्पशील ठोस को 39.0 g बेंज़ीन (M=78) में घोलने पर विलयन का वाष्पदाब 0.845 bar होता है। ठोस का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करो।

हल: (0.850−0.845)/0.850 = (0.5×78)/(M₂×39) ⇒ M₂ = 170 g mol⁻¹

6.2 क्वथनांक का उन्नयन

द्रव उस ताप पर उबलता है जिस पर उसका वाष्पदाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है। अवाष्पशील विलेय की उपस्थिति से वाष्पदाब घटता है, इसलिए विलयन का क्वथनांक शुद्ध विलायक से सदैव अधिक होता है।

सूत्र 1.29–1.33ΔTb = Tb − Tb° , ΔTb ∝ m ⇒ ΔTb = Kb m
M₂ = (Kb × w₂ × 1000) / (ΔTb × w₁)

Kb = क्वथनांक उन्नयन स्थिरांक (मोलल उन्नयन स्थिरांक), मात्रक K kg mol⁻¹।

Tb° Tb विलायक विलयन ΔTb = क्वथनांक का उन्नयन
चित्र 1.7 — विलयन का वाष्पदाब वक्र शुद्ध जल के वक्र के नीचे रहता है, जिससे क्वथनांक ΔTb से बढ़ जाता है
उदाहरण 1.7

प्रश्न: 18 g ग्लूकोस को 1 kg जल में घोला गया। यह किस ताप पर उबलेगा? Kb(जल)=0.52 K kg mol⁻¹।

हल: मोललता = (18/180)/1 = 0.1 mol kg⁻¹; ΔTb = 0.52×0.1 = 0.052 K
क्वथनांक = 373.15 + 0.052 = 373.202 K

6.3 हिमांक का अवनमन

किसी पदार्थ का हिमांक वह ताप है जिस पर द्रव अवस्था का वाष्पदाब उसकी ठोस अवस्था के वाष्पदाब के बराबर होता है। विलयन का हिमांक शुद्ध विलायक से सदैव कम होता है।

सूत्र 1.34–1.38ΔTf = Tf° − Tf , ΔTf = Kf m
M₂ = (Kf × w₂ × 1000) / (ΔTf × w₁)
Kf = (R × M₁ × Tf²)/(1000 × ΔगलनH) , Kb = (R × M₁ × Tb²)/(1000 × Δवाष्पनH)
विलायकb.p./KKb/K kg mol⁻¹f.p./KKf/K kg mol⁻¹
जल373.150.52273.01.86
एथेनॉल351.51.20155.71.99
बेंज़ीन353.32.53278.65.12
क्लोरोफॉर्म334.43.63209.64.79
कार्बन टेट्राक्लोराइड350.05.03250.531.8
एसीटिक अम्ल391.12.93290.03.90
उदाहरण 1.9–1.10

1.9: 45 g एथिलीन ग्लाइकॉल को 600 g जल में मिलाया गया। मोललता = 1.2 mol kg⁻¹; ΔTf = 1.86×1.2 = 2.2 K; हिमांक = 273.15 − 2.2 = 270.95 K

1.10: 1.00 g वैद्युत-अनअपघट्य को 50 g बेंज़ीन में घोलने पर हिमांक में 0.40 K की कमी। Kf(बेंज़ीन)=5.12। M₂ = (5.12×1.00×1000)/(0.40×50) = 256 g mol⁻¹

6.4 परासरण एवं परासरण दाब

अर्धपारगम्य झिल्ली (SPM) केवल विलायक के अणुओं को गुज़रने देती है, विलेय के बड़े अणुओं का गमन बाधित करती है। जब विलायक स्वतः अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर प्रवाहित होता है, इसे परासरण कहते हैं।

परासरण दाब (Π) वह अतिरिक्त दाब है जो परासरण को रोकने के लिए विलयन पर लगाना पड़ता है।

सूत्र 1.39–1.42Π = C R T (व्हांट हॉफ-बॉयल समीकरण सदृश)
Π V = (w₂/M₂) R T ⇒ M₂ = (w₂ R T)/(Π V)
विलयन विलायक SPM Π
चित्र 1.10 — परासरण को रोकने के लिए विलयन पर लगाया गया अतिरिक्त दाब (परासरण दाब Π)
उदाहरण 1.11

प्रश्न: 200 cm³ जलीय प्रोटीन विलयन में 1.26 g प्रोटीन है। 300 K पर Π = 2.57×10⁻³ bar। M₂ ज्ञात करो।

हल: M₂ = (1.26×0.083×300)/(2.57×10⁻³×0.200) = 61,022 g mol⁻¹

समपरासारी विलयन: दिए गए ताप पर समान परासरण दाब वाले दो विलयन समपरासारी कहलाते हैं (उदा. 0.9% w/V NaCl "सामान्य लवण विलयन", रुधिर कोशिका के परासरण दाब के तुल्य)। इससे अधिक सांद्रता वाला विलयन अतिपरासरी तथा कम सांद्रता वाला अल्पपरासरी कहलाता है।

6.5 प्रतिलोम परासरण एवं जल शोधन

यदि विलयन पर परासरण दाब से अधिक दाब लगाया जाए तो परासरण की दिशा प्रतिवर्तित हो जाती है — शुद्ध विलायक अर्धपारगम्य झिल्ली से विलयन में से पारगमन करता है। इसे प्रतिलोम परासरण कहते हैं, जो समुद्री जल के विलवणीकरण (desalination) में प्रयुक्त होता है। इसके लिए सेल्युलोस ऐसीटेट की फिल्म से बनी झिल्ली उपयोग की जाती है, जो जल के लिए पारगम्य किंतु अशुद्धियों/आयनों के लिए अपारगम्य होती है।

त्वरित तथ्य — अणुसंख्य गुणधर्म
  • अणुसंख्य गुणधर्म विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, प्रकृति पर नहीं।
  • वाष्पदाब का आपेक्षिक अवनमन = विलेय का मोल-अंश x₂ = Δp/p°।
  • क्वथनांक उन्नयन ΔTb = Kb·m; Kb को मोलल उन्नयन/इबुलियोस्कोपिक स्थिरांक कहते हैं।
  • हिमांक अवनमन ΔTf = Kf·m; Kf को मोलल अवनमन/क्रायोस्कोपिक स्थिरांक कहते हैं।
  • परासरण दाब Π = CRT (व्हांट हॉफ समीकरण); R = 0.0821 L atm K⁻¹ mol⁻¹ = 0.083 L bar K⁻¹ mol⁻¹।
  • परासरण दाब विधि मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने की सर्वाधिक उपयोगी विधि है — कमरे के ताप पर मापी जाती है व तनु विलयनों में भी परिमाण अधिक होता है; प्रोटीन/बहुलकों हेतु सर्वोत्तम।
  • प्रतिलोम परासरण में परासरण दाब से अधिक बाहरी दाब लगाकर शुद्ध विलायक को विलयन से बाहर निकाला जाता है — समुद्री जल विलवणीकरण में प्रयुक्त।
वियोजन व संगुणन

7 असामान्य मोलर द्रव्यमान

जब आयनिक पदार्थ जल में घुलते हैं तो धनायनों व ऋणायनों में वियोजित हो जाते हैं — इससे विलयन में कणों की संख्या बढ़ जाती है और प्रायोगिक मोलर द्रव्यमान वास्तविक मान से कम प्राप्त होता है। इसके विपरीत, बेंज़ीन में एथेनॉइक अम्ल हाइड्रोजन बंध के कारण द्वितयन (dimerization) कर लेता है, जिससे कणों की संख्या घटती है और प्रायोगिक मोलर द्रव्यमान वास्तविक मान से अधिक प्राप्त होता है।

सूत्र — द्वितयन2 CH₃COOH ⇌ (CH₃COOH)₂

व्हांट हॉफ गुणक (i)

1880 में व्हांट हॉफ ने वियोजन/संयोजन की सीमा दर्शाने के लिए एक गुणक i प्रतिपादित किया:

व्हांट हॉफ गुणकi = सामान्य मोलर द्रव्यमान / असामान्य (प्रायोगिक) मोलर द्रव्यमान
i = प्रेक्षित अणुसंख्य गुण / परिकलित अणुसंख्य गुण
i = संगुणन/वियोजन के पश्चात् कणों के कुल मोलों की संख्या / संगुणन/वियोजन-पूर्व मोलों की संख्या

संगुणन में i < 1 (जैसे बेंज़ीन में एथेनॉइक अम्ल के लिए i ≈ 0.5); वियोजन में i > 1 (जैसे जलीय KCl के लिए i ≈ 2)।

व्हांट हॉफ गुणक सहित संशोधित सूत्रवाष्पदाब आपेक्षिक अवनमन: (p₁°−p₁)/p₁° = i·(n₂/n₁)
ΔTb = i Kb m , ΔTf = i Kf m , Π = (i n₂ RT)/V
लवणi (0.1 m)i (0.01 m)i (0.001 m)पूर्ण वियोजन पर i
NaCl1.871.941.972.00
KCl1.851.941.982.00
MgSO₄1.211.531.822.00
K₂SO₄2.322.702.843.00
उदाहरण 1.12–1.13

1.12: 2g बेंज़ोइक अम्ल 25g बेंज़ीन में — हिमांक अवनमन 1.62 K, Kf=4.9। M₂(प्रायोगिक) = 241.98 g/mol। द्वितयन साम्य से x/2 भाग जुड़ते हैं ⇒ i = 1−x/2 = 122/241.98 ⇒ x = 0.992 ⇒ संगुणन 99.2%

1.13: ऐसीटिक अम्ल का 0.0106 mol kg⁻¹ विलयन — ΔTf(प्रेक्षित)=0.0205K, ΔTf(परिकलित)=0.0197K ⇒ i=1.041 ⇒ वियोजन मात्रा x=0.041 ⇒ Ka = 1.86×10⁻⁵ (दुर्बल वैद्युत-अपघट्य का वियोजन स्थिरांक)।

त्वरित तथ्य
  • वियोजन होने पर प्रायोगिक मोलर द्रव्यमान वास्तविक मान से कम प्राप्त होता है; संगुणन होने पर अधिक प्राप्त होता है।
  • व्हांट हॉफ गुणक i = सामान्य मोलर द्रव्यमान / असामान्य मोलर द्रव्यमान।
  • संगुणन में i < 1; वियोजन में i > 1; कोई वियोजन/संगुणन न होने पर i = 1।
  • जलीय KCl, NaCl के लिए i, तनुता बढ़ने पर 2 के निकट पहुँचता है; K₂SO₄ के लिए 3 के निकट पहुँचता है।
  • व्हांट हॉफ गुणक सहित संशोधित सूत्र: ΔTb = iKbm, ΔTf = iKfm, Π = inRT/V।
रिवीज़न — संपूर्ण अध्याय

एक-पंक्ति तथ्य सूची

परिभाषाएँ व प्रकार
  • विलयन = दो या अधिक शुद्ध पदार्थों का समांगी मिश्रण; विलायक अधिक मात्रा में, विलेय कम मात्रा में उपस्थित होता है।
  • ठोस विलयन में गैस विलेय का उदाहरण: H₂ गैस का पैलेडियम (Pd) धातु में विलयन।
  • "समान-समान को घोलता है" — ध्रुवीय विलेय ध्रुवीय विलायक में, अध्रुवीय अध्रुवीय में घुलता है।
सांद्रता के सूत्र
  • द्रव्यमान% = (विलेय का द्रव्यमान/विलयन का कुल द्रव्यमान)×100
  • ppm = (अवयव के भाग/कुल भाग)×10⁶
  • मोल-अंश x = अवयव के मोल/कुल मोल; सभी मोल-अंशों का योग = 1
  • मोलरता M = विलेय के मोल/विलयन का आयतन (लीटर)
  • मोललता m = विलेय के मोल/विलायक का द्रव्यमान (kg)
  • मोलरता ताप-निर्भर; द्रव्यमान%, मोल-अंश, मोललता ताप-स्वतंत्र।
विलेयता व हेनरी नियम
  • हेनरी नियम: p = KH·x; KH जितना अधिक, विलेयता उतनी कम।
  • ताप बढ़ने पर गैस की द्रव में विलेयता सदैव घटती है (विलीनीकरण ऊष्माक्षेपी है)।
  • गैस-द्रव विलेयता पर दाब बढ़ने से विलेयता बढ़ती है; ठोस-द्रव विलेयता पर दाब का सार्थक प्रभाव नहीं।
वाष्पदाब व राउल्ट नियम
  • राउल्ट नियम: pᵢ = xᵢ·pᵢ°; pकुल = p₁+p₂ = p₁°+(p₂°−p₁°)x₂ (द्रव-द्रव आदर्श विलयन)
  • वाष्प प्रावस्था में मोल-अंश yᵢ = pᵢ/pकुल
  • राउल्ट नियम, हेनरी नियम की विशेष स्थिति है जब KH = pᵢ°
  • आदर्श विलयन: Δमिश्रणH = 0, Δमिश्रणV = 0, सभी सांद्रताओं पर राउल्ट नियम पालन
  • धनात्मक विचलन ⇒ वाष्पदाब बढ़ता है, ऊष्माशोषी मिश्रण; ऋणात्मक विचलन ⇒ वाष्पदाब घटता है, ऊष्माक्षेपी मिश्रण
अणुसंख्य गुणधर्म सूत्र (i के साथ सामान्यीकृत)
  • वाष्पदाब आपेक्षिक अवनमन: (p°−p)/p° = i·x₂ = i·n₂/n₁ (तनु विलयन)
  • क्वथनांक उन्नयन: ΔTb = i·Kb·m
  • हिमांक अवनमन: ΔTf = i·Kf·m
  • परासरण दाब: Π = i·C·R·T = i·(n₂/V)·R·T
  • M₂ = (Kf × w₂ × 1000)/(ΔTf × w₁) [हिमांक विधि]
  • M₂ = (Kb × w₂ × 1000)/(ΔTb × w₁) [क्वथनांक विधि]
  • M₂ = (w₂ R T)/(Π V) [परासरण दाब विधि]
  • i = सामान्य मोलर द्रव्यमान/असामान्य मोलर द्रव्यमान; वियोजन में i>1, संगुणन में i<1
  • दुर्बल वैद्युत-अपघट्य के लिए i = 1+α(n−1), जहाँ α = वियोजन की मात्रा, n = वियोजन से बने कणों की संख्या
  • जल के लिए: Kb = 0.52 K kg mol⁻¹, Kf = 1.86 K kg mol⁻¹, सामान्य क्वथनांक 373.15 K, हिमांक 273.15 K
  • R = 0.0821 L atm K⁻¹mol⁻¹ = 0.083 L bar K⁻¹mol⁻¹ = 8.314 J K⁻¹mol⁻¹
  • 1 atm = 760 mm Hg = 760 Torr; 1 bar = 750.06 mm Hg (लगभग)
फॉर्मूला संग्रह

सूत्र सारांश

राशिसूत्र
द्रव्यमान प्रतिशत(w₂/wविलयन)×100
आयतन प्रतिशत(V₂/Vविलयन)×100
ppm(भाग/कुल भाग)×10⁶
मोल-अंशxᵢ = nᵢ/Σn
मोलरताM = n₂/V(L)
मोललताm = n₂/w₁(kg)
हेनरी नियमp = KH·x
राउल्ट नियम (द्रव-द्रव)pᵢ = xᵢ pᵢ°; pकुल = p₁°+(p₂°−p₁°)x₂
राउल्ट नियम (ठोस-द्रव)p₁ = x₁ p₁°
वाष्पदाब आपेक्षिक अवनमन(p°−p)/p° = x₂ = i n₂/n₁
क्वथनांक उन्नयनΔTb = i Kb m
हिमांक अवनमनΔTf = i Kf m
परासरण दाबΠ = i C R T
व्हांट हॉफ गुणकi = सामान्य M / असामान्य M

पाठ्यनिहित प्रश्न (1.1 – 1.12)

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके विस्तृत हल देखें।

1.1 22g बेंज़ीन में 22g CCl₄ मिलाने पर प्राप्त विलयन में C₆H₆ तथा CCl₄ का द्रव्यमान प्रतिशत ज्ञात करो।
कुल द्रव्यमान = 22+22 = 44g
C₆H₆ का द्रव्यमान% = (22/44)×100 = 50%; CCl₄ का द्रव्यमान% = 50%
1.2 30% CCl₄ (द्रव्यमान) वाले बेंज़ीन विलयन में बेंज़ीन के मोल-अंश की गणना करो।
100g विलयन में 30g CCl₄ (M=154) व 70g बेंज़ीन (M=78)
मोल CCl₄ = 30/154 = 0.1948; मोल बेंज़ीन = 70/78 = 0.8974
x(बेंज़ीन) = 0.8974/(0.8974+0.1948) = 0.822; x(CCl₄) = 0.178
1.3 30g Co(NO₃)₂·6H₂O को 4.3 L विलयन में घोलने पर मोलरता ज्ञात करो।
M(Co(NO₃)₂·6H₂O) = 291 g/mol; मोल = 30/291 = 0.1031
मोलरता = 0.1031/4.3 = 0.024 M
1.4 0.25 M यूरिया विलयन का 2.5 L बनाने के लिए यूरिया की आवश्यक मात्रा ज्ञात करो।
मोल = 0.25 × 2.5 = 0.625 mol; M(यूरिया)=60 g/mol
द्रव्यमान = 0.625×60 = 37.5 g
1.5 20% (w/w) KI विलयन (घनत्व 1.202 g mL⁻¹) की (क) मोललता, (ख) मोलरता, (ग) मोल-अंश ज्ञात करो।
(क) 20g KI (M=166) + 80g जल ⇒ मोल = 20/166 = 0.1205; मोललता = 0.1205/0.080 = 1.51 mol kg⁻¹
(ख) 100g विलयन का आयतन = 100/1.202 = 83.19 mL = 0.08319 L; M = 0.1205/0.08319 = 1.45 mol L⁻¹
(ग) मोल जल = 80/18 = 4.444; x(KI) = 0.1205/(0.1205+4.444) = 0.0264
1.6 H₂S की जल में STP पर विलेयता 0.195 M है। हेनरी स्थिरांक KH ज्ञात करो।
x(H₂S) = 0.195/55.5 = 3.51×10⁻³; p = 1 atm (STP)
KH = p/x = 1/3.51×10⁻³ = ≈ 285 atm
1.7 500mL सोडा जल 2.5 atm पर CO₂ से संतृप्त है। CO₂ के मोल ज्ञात करो (KH=1.67×10⁸ Pa)।
p = 2.5 atm = 2.533×10⁵ Pa; x = p/KH = 2.533×10⁵/1.67×10⁸ = 1.517×10⁻³
n(CO₂) = x × 55.5 = 1.517×10⁻³×55.5 = 0.0842 mol
1.8 350 K पर शुद्ध A,B के वाष्पदाब 450 व 750 mmHg हैं। pकुल=600 mmHg हो तो द्रव व वाष्प संघटन ज्ञात करो।
600 = 450 + (750−450)x₂ ⇒ x₂ = 0.5; x₁=0.5
p₁ = 0.5×450 = 225; p₂ = 0.5×750 = 375
y₁ = 225/600 = 0.375; y₂ = 375/600 = 0.625
1.9 850g जल में 50g यूरिया घोलने पर वाष्पदाब ज्ञात करो (शुद्ध जल का वाष्पदाब 23.8 mmHg)।
मोल यूरिया = 50/60 = 0.833; मोल जल = 850/18 = 47.22
x₂ = 0.833/(0.833+47.22) = 0.01736; Δp = 23.8×0.01736 = 0.413
p = 23.8−0.413 = 23.39 mmHg
1.10 750 mmHg पर जल का क्वथनांक 99.63°C है। सुक्रोस से 100°C पर क्वथन हेतु आवश्यक द्रव्यमान ज्ञात करो।
ΔTb = 100−99.63 = 0.37 K; m = ΔTb/Kb = 0.37/0.52 = 0.7115 mol/kg
100g जल में सुक्रोस (M=342) का द्रव्यमान = 0.7115×0.1×342 = 24.33 g
1.11 75g ऐसीटिक अम्ल में 1.5°C हिमांक अवनमन हेतु ऐस्कॉर्बिक अम्ल (M=176) की मात्रा ज्ञात करो (Kf=3.9)।
m = 1.5/3.9 = 0.3846 mol/kg; मोल = 0.3846×0.075 = 0.02885
द्रव्यमान = 0.02885×176 = 5.08 g
1.12 185,000 g/mol बहुलक 1.0g/450mL जल, 37°C पर परासरण दाब ज्ञात करो।
C = (1.0/185000)/0.45 = 1.201×10⁻⁵ mol/L; T = 310K
Π = C×R×T = 1.201×10⁻⁵×0.083×310 = 3.09×10⁻⁴ bar

अभ्यास प्रश्न (1.1 – 1.41)

NCERT पाठ्यपुस्तक के अंत में दिए गए सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।

1.1 विलयन को परिभाषित कीजिए। कितने प्रकार के विलयन संभव हैं?
विलयन दो या अधिक शुद्ध पदार्थों का समांगी मिश्रण है, जिसमें संघटन व गुण संपूर्ण मिश्रण में एक समान होते हैं।
कुल 9 प्रकार के द्विअंगी विलयन संभव हैं — गैस-गैस, द्रव-गैस, ठोस-गैस, गैस-द्रव, द्रव-द्रव, ठोस-द्रव, गैस-ठोस, द्रव-ठोस, ठोस-ठोस।
1.2 एक ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए जिसमें विलेय कोई गैस हो।
हाइड्रोजन (H₂) गैस का पैलेडियम (Pd) धातु में विलयन — Pd, H₂ गैस को बड़ी मात्रा में अवशोषित करता है।
1.3 मोल-अंश, मोललता, मोलरता व द्रव्यमान प्रतिशत को परिभाषित कीजिए।
मोल-अंश (x): किसी अवयव के मोलों की संख्या का कुल मोलों से अनुपात। xᵢ = nᵢ/Σn
मोललता (m): 1 kg विलायक में घुले विलेय के मोल। m = n₂/w₁(kg)
मोलरता (M): 1 L विलयन में घुले विलेय के मोल। M = n₂/V(L)
द्रव्यमान%: (विलेय का द्रव्यमान/विलयन का कुल द्रव्यमान)×100
1.4 68% HNO₃ (घनत्व 1.504 g mL⁻¹) की मोलरता ज्ञात करो।
1L विलयन का द्रव्यमान = 1000×1.504 = 1504 g; HNO₃ = 68%×1504 = 1022.72 g
M(HNO₃)=63; मोल = 1022.72/63 = 16.23 mol
मोलरता = 16.23 M
1.5 10% (w/w) ग्लूकोस विलयन (घनत्व 1.2 g mL⁻¹) की मोललता, मोल-अंश व मोलरता ज्ञात करो।
100g विलयन में 10g ग्लूकोस (M=180), 90g जल (M=18)
मोल ग्लूकोस=0.0556; मोल जल=5; मोललता=0.0556/0.090=0.618 m
x(ग्लूकोस)=0.0556/(5.0556)=0.0110; x(जल)=0.989
आयतन=100/1.2=83.33 mL; M=0.0556/0.08333=0.667 M
1.6 1g मिश्रण (Na₂CO₃+NaHCO₃) जिसमें दोनों के मोल बराबर हों, को पूर्ण क्रिया हेतु 0.1 M HCl के mL ज्ञात करो।
माना प्रत्येक के x mol; 106x+84x=1 ⇒ x=0.005263 mol
Na₂CO₃ के लिए 2x mol HCl; NaHCO₃ के लिए x mol HCl; कुल HCl = 3x = 0.01579 mol
आयतन = 0.01579/0.1 = 0.1579 L = 157.9 mL
1.7 25% के 300g व 40% के 400g मिश्रण का द्रव्यमान% ज्ञात करो।
विलेय = 25%×300 + 40%×400 = 75+160 = 235g; कुल = 700g
द्रव्यमान% = (235/700)×100 = 33.57%
1.8 222.6g एथिलीन ग्लाइकॉल + 200g जल की मोललता व मोलरता (घनत्व 1.072 g mL⁻¹) ज्ञात करो।
M(C₂H₆O₂)=62; मोल=222.6/62=3.59; मोललता=3.59/0.200=17.95 m
आयतन=422.6/1.072=394.2 mL; M=3.59/0.3942=9.11 M
1.9 15 ppm क्लोरोफॉर्म संदूषण को द्रव्यमान% व मोललता में व्यक्त करो।
(i) 15 ppm = (15/10⁶)×100% = 0.0015%
(ii) M(CHCl₃)=119.5; मोल=15/119.5=0.1255; मोललता=0.1255/1000=1.255×10⁻⁴ m
1.10 ऐल्कोहॉल-जल विलयन में अंतराआण्विक अन्योन्यक्रिया की भूमिका बताइए।
एथेनॉल में प्रबल H-बंध होते हैं। जल मिलाने पर ये H-बंध टूटते हैं, जिससे A-B आकर्षण A-A से कमज़ोर हो जाता है।
परिणाम: एथेनॉल-जल धनात्मक विचलन दर्शाता है तथा 95.4% स्थिरक्वाथी बनाता है।
1.11 ताप बढ़ने पर गैसों की द्रवों में विलेयता क्यों घटती है?
गैस का द्रव में घुलना ऊष्माक्षेपी प्रक्रम है (संघनन तुल्य)।
ले-शातैलिये नियमानुसार ताप बढ़ने पर साम्य पीछे की ओर विस्थापित होता है, अतः विलेयता घटती है।
1.12 हेनरी का नियम व उसके अनुप्रयोग लिखिए।
नियम: p = KH·x — स्थिर ताप पर गैस की विलेयता उसके आंशिक दाब के समानुपाती होती है।
अनुप्रयोग 1: सोडा-जल में CO₂ की उच्च दाब पर बॉटलिंग।
अनुप्रयोग 2: गोताखोरों के टैंकों में He+O₂ मिश्रण (हीलियम की निम्न विलेयता से बेंड्स रोग से बचाव)।
अनुप्रयोग 3: अधिक ऊँचाई पर O₂ के निम्न आंशिक दाब से एनॉक्सिया।

🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (विलयन)

NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए वास्तविक प्रश्न, हल सहित।

NEET 2024 तीन गैसों A, B, C के KH क्रमशः 145, 2×10⁻⁵ तथा 35 kbar हैं। विलेयता का क्रम होगा:
विलेयता ∝ 1/KH — KH जितना अधिक, विलेयता उतनी कम।
सही उत्तर: B > C > A
NEET 2024 किसी विलयन के Π बनाम C का आलेख ढाल 25.73 L bar mol⁻¹ देता है। ताप ज्ञात करो (R=0.083 L bar mol⁻¹ K⁻¹)।
Π=CRT ⇒ ढाल=RT ⇒ T=25.73/0.083=310 K
सही उत्तर: 37°C
NEET 2023 अभिकथन (A): गोताखोरी उपकरण में O₂ को तनु करने हेतु हीलियम प्रयुक्त होती है। तर्क (R): हीलियम की O₂ में उच्च विलेयता होती है।
हीलियम वास्तव में निम्न विलेयता रखती है — इसी कारण बेंड्स रोग से बचाव होता है।
सही उत्तर: A सत्य किन्तु R असत्य
NEET 2022 KH मान: HCHO < CO₂ < CH₄ < Ar (बढ़ते क्रम)। जल में विलेयता का क्रम होगा:
विलेयता KH के व्युत्क्रम क्रम में होती है।
सही उत्तर: Ar < CO₂ < CH₄ < HCHO
NEET 2021 250 mL जल में 10g ग्लूकोस (P₁), 10g यूरिया (P₂), 10g सुक्रोस (P₃) के परासरण दाब का क्रम:
मोलर द्रव्यमान: यूरिया(60) < ग्लूकोस(180) < सुक्रोस(342)
Π ∝ मोलों की संख्या — अतः सर्वाधिक मोल यूरिया के, फिर ग्लूकोस, फिर सुक्रोस
सही उत्तर: P₂ > P₁ > P₃
NEET 2020 निम्न में से कौन सा मिश्रण राउल्ट नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है?
एथेनॉल + ऐसीटोन — एथेनॉल के H-बंध नेटवर्क को ऐसीटोन तोड़ता है, A-B आकर्षण कमज़ोर होता है।
सही उत्तर: एथेनॉल + ऐसीटोन
NEET 2019 आदर्श विलयन के लिए सही विकल्प चुनिए:
आदर्श विलयन: Δमिश्रणH=0, Δमिश्रणV=0
सही उत्तर: Δमिश्रणH = 0
NEET 2017 यदि तनु विलयन की मोललता दोगुनी कर दी जाए तो Kf का मान:
Kf किसी विलायक विशेष के लिए एक स्थिरांक है — यह मोललता पर निर्भर नहीं करता।
सही उत्तर: अपरिवर्तित
NEET 2016 Ba(OH)₂ के तनु जलीय विलयन के लिए वान्ट हॉफ गुणक (i) होगा:
Ba(OH)₂ → Ba²⁺ + 2OH⁻ (कुल 3 कण); प्रबल वैद्युत-अपघट्य ⇒ पूर्ण वियोजन
सही उत्तर: 3
NEET 2015 Al₂(SO₄)₃ के समान वान्ट हॉफ गुणक वाला वैद्युत-अपघट्य है:
Al₂(SO₄)₃ → 2Al³⁺+3SO₄²⁻ ⇒ i=5
K₄[Fe(CN)₆] → 4K⁺+[Fe(CN)₆]⁴⁻ ⇒ i=5 — सही उत्तर: K₄[Fe(CN)₆]
अतिरिक्त परीक्षा-उपयोगी तथ्य

अन्य NEET संबंधित तथ्य

तथ्य
  • वाष्पदाब न्यूनता एक शुद्ध अणुसंख्य गुण है — यह विलेय की प्रकृति पर नहीं, केवल कणों की संख्या पर निर्भर करती है।
  • द्विअंगी आदर्श द्रव-द्रव विलयन के लिए Pकुल = P°A·xA + P°B·xB — इस अध्याय का सबसे बुनियादी सूत्र।
  • वियोजन के लिए i = 1+(n−1)α; संगुणन के लिए i = 1−(1−1/n)α — दोनों दिशाओं से प्रश्न आते हैं।
  • i का मान 1 से कम केवल संगुणन में होता है — क्लासिक उदाहरण: बेंज़ीन में बेंज़ोइक अम्ल का द्विलकीकरण।
  • गैसों की विलेयता ताप बढ़ने पर घटती है; अधिकांश ठोसों की विलेयता ताप बढ़ने पर बढ़ती है (Ce₂(SO₄)₃ अपवाद)।
  • प्रतिलोम परासरण में सांद्र विलयन की ओर Π से अधिक दाब लगाना आवश्यक है — समुद्री जल विलवणीकरण में उपयोगी।
  • परासरण दाब मापने की अत्यंत परिशुद्ध विधि बर्कले-हार्टली विधि है — NCERT में उल्लेखित।
  • Kb और Kf की मात्रक समान: K·kg·mol⁻¹; किसी विलायक के लिए सामान्यतः Kf > Kb होता है।
  • समपरासरी विलयनों का Π बराबर होता है — 0.9% NaCl (सामान्य लवण विलयन) RBC के साथ समपरासरी है।
  • राउल्ट का नियम तनु विलयनों पर ही सटीक लागू होता है — सांद्र विलयनों पर आदर्श व्यवहार अपेक्षित नहीं।
  • प्रेक्षित i प्रायः सैद्धांतिक i से कम होता है — इसका कारण आयन-युग्मन (ion-pairing) है।
  • रिवीज़न में इन तीन विषयों को प्राथमिकता दें: (1) सांद्रता मात्रक व ताप-निर्भरता, (2) अणुसंख्य गुणधर्मों के सूत्र, (3) राउल्ट नियम से विचलन व ऐज़ियोट्रोप के उदाहरण।

यह अध्ययन-सामग्री NCERT रसायन विज्ञान, कक्षा 12, एकक 1 — "विलयन" (Solutions) पर आधारित है। सभी सूत्र, तथ्य, अभ्यास-हल तथा NEET प्रश्न मानक स्रोतों पर आधारित हैं तथा स्वतंत्र रूप से पुनर्लेखित किए गए हैं।

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