वैद्युतरसायन (Electrochemistry)

वैद्युतरसायन — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 2)
रसायन विज्ञान • कक्षा-12 • अध्याय 2

वैद्युतरसायन (Electrochemistry)

गैल्वेनी व वैद्युतअपघटनी सेलों से लेकर नेर्न्स्ट समीकरण, चालकत्व, कोलराउश नियम, फैराडे के नियम, बैटरियाँ, ईंधन सेल तथा संक्षारण तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, त्वरित तथ्य, आरेख और सभी पाठ्यनिहित व अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही जगह।

सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड
ΔG° = −nFE°
Λ°m = Σν λ° कोलराउश नियम
★ NEET फोकस तथ्य
परिचय

2.1 वैद्युत रासायनिक सेल

वैद्युतरसायन का अध्ययन रासायनिक अभिक्रियाओं से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने तथा विपरीतत: विद्युत ऊर्जा का उपयोग उन रासायनिक अभिक्रियाओं को कराने में होता है जो स्वतः अग्रसारित नहीं होतीं। बहुत सारी धातुएँ, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन, फ्लुओरीन आदि रसायन वैद्युतरासायनिक विधियों द्वारा बनाए जाते हैं। बैटरियाँ एवं ईंधन सेल रासायनिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।

डेन्यल सेल इसका सबसे सरल उदाहरण है, जिसमें जिंक एवं कॉपर इलेक्ट्रोड अपने-अपने लवणों के विलयनों में निमज्ज रहते हैं। यह सेल निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया में उत्सर्जित रासायनिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है:

डेन्यल सेल अभिक्रिया Zn(s) + Cu²⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + Cu(s)   (2.1)

जब Zn²⁺ तथा Cu²⁺ आयनों की सांद्रता एक इकाई (1 mol dm⁻³) होती है, तो इसका विद्युतीय विभव 1.1 V होता है। इस प्रकार की युक्ति को गैल्वेनी या वोल्टीय सेल कहते हैं।

Zn (ऐनोड) Cu (कैथोड) ZnSO4 विलयन CuSO4 विलयन लवण सेतु A e⁻ →
चित्र 2.1 — डेन्यल सेल: Zn ऐनोड (ऑक्सीकरण) व Cu कैथोड (अपचयन), दोनों अर्ध-सेल लवण सेतु से जुड़े

यदि गैल्वेनी सेल में एक विपरीत बाह्य विभव लगाया जाए और इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, तो अभिक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि बाह्य विभव 1.1 V नहीं हो जाता — इस स्थिति में अभिक्रिया पूर्णतः रुक जाती है एवं सेल में धारा प्रवाहित नहीं होती। बाह्य विभव में और वृद्धि करने पर अभिक्रिया पुनः परंतु विपरीत दिशा में प्रारंभ हो जाती है — अब यह वैद्युतअपघटनी सेल के समान कार्य करती है, जो एक स्वतः अप्रवर्तित रासायनिक अभिक्रिया को विद्युतीय ऊर्जा के उपयोग से प्रारंभ करने की युक्ति है।

Eबाह्य की स्थितिइलेक्ट्रॉन प्रवाहप्रकृति
Eबाह्य < 1.1 VZn छड़ से Cu छड़ की ओरगैल्वेनी सेल की तरह — Zn घुलता है, Cu निक्षेपित होता है
Eबाह्य = 1.1 Vकोई प्रवाह नहींसाम्यावस्था — I = 0
Eबाह्य > 1.1 VCu से Zn की ओरवैद्युतअपघटनी सेल — Zn निक्षेपित, Cu घुलता है
त्वरित तथ्य — 2.1
  • वैद्युतरसायन रासायनिक ऊर्जा ↔ विद्युत ऊर्जा के अंतर-रूपांतरण का अध्ययन है।
  • डेन्यल सेल में Zn(s)+Cu²⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+Cu(s) अभिक्रिया होती है, मानक विभव 1.1 V।
  • गैल्वेनी (वोल्टीय) सेल: रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा (स्वतः अभिक्रिया)।
  • वैद्युतअपघटनी सेल: विद्युत ऊर्जा → रासायनिक अभिक्रिया (अस्वतः अभिक्रिया)।
  • Eबाह्य=1.1V पर धारा शून्य होती है — यही साम्यावस्था है।
रचना व विभव

2.2 गैल्वेनी सेल

गैल्वेनी सेल एक वैद्युतरासायनिक सेल है जो स्वतः रेडॉक्स अभिक्रिया की रासायनिक ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में रूपांतरित करती है। डेन्यल सेल की अभिक्रिया दो अर्ध सेल अभिक्रियाओं का संयोजन है:

अर्ध सेल अभिक्रियाएँ (i) Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu(s)  (अपचयन, कैथोड पर)   (2.2)
(ii) Zn(s) → Zn²⁺ + 2e⁻  (ऑक्सीकरण, ऐनोड पर)   (2.3)

जिस अर्ध सेल में ऑक्सीकरण होता है उसे ऐनोड कहते हैं (विलयन के सापेक्ष ऋणात्मक), जिसमें अपचयन होता है उसे कैथोड कहते हैं (विलयन के सापेक्ष धनात्मक)। इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक इलेक्ट्रोड से धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर प्रवाहित होते हैं — धारा की दिशा इसके विपरीत होती है।

लेखन परिपाटी: गैल्वेनी सेल लिखते समय ऐनोड को बायीं ओर व कैथोड को दायीं ओर लिखा जाता है। धातु व वैद्युतअपघट्य के बीच एक ऊर्ध्वाधर रेखा तथा दो वैद्युतअपघट्यों (लवण सेतु से जुड़े) के बीच दो ऊर्ध्वाधर रेखाएँ खींची जाती हैं। उदाहरण: Cu(s)|Cu²⁺(aq)||Ag⁺(aq)|Ag(s)
सेल विभव व emf Eसेल = Eदायाँ − Eबायाँ = Eकैथोड − Eऐनोड

2.2.1 इलेक्ट्रोड विभव का मापन

अकेले अर्ध सेल के विभव का मापन नहीं किया जा सकता — केवल दो अर्ध सेलों के विभवों में अंतर मापा जा सकता है। इसके लिए एक संदर्भ इलेक्ट्रोड, मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE), को स्वेच्छा से शून्य विभव मान लिया गया है: Pt(s)|H₂(g, 1 bar)|H⁺(aq, 1M), जिसका विभव सभी तापों पर शून्य निर्दिष्ट है।

Pt इलेक्ट्रोड H2(g) 1 bar 1.00 M H⁺
चित्र 2.3 — मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE): H⁺(aq,1M) व H₂(g,1bar) से लेपित Pt इलेक्ट्रोड, विभव = 0.00 V

किसी भी अर्ध सेल को SHE के साथ जोड़कर बनाई गई सेल का 298K पर मापित emf उस अर्ध सेल का मानक अपचयन विभव (अब IUPAC के अनुसार मानक इलेक्ट्रोड विभव) देता है।

सेलमापित emfनिष्कर्ष
Pt|H₂(1bar)|H⁺(1M)||Cu²⁺(1M)|Cu+0.34 VE°(Cu²⁺/Cu) = 0.34 V — Cu²⁺, H⁺ से आसानी से अपचित
Pt|H₂(1bar)|H⁺(1M)||Zn²⁺(1M)|Zn−0.76 VE°(Zn²⁺/Zn) = −0.76 V — H⁺, Zn को ऑक्सीकृत कर सकता है
डेन्यल सेल का मानक विभव:सेल = E°दायाँ − E°बायाँ = 0.34 − (−0.76) = 1.10 V

कभी-कभी Pt व Au जैसी अक्रिय धातुएँ इलेक्ट्रॉनों के चालन हेतु प्रयुक्त होती हैं (जैसे हाइड्रोजन व ब्रोमीन इलेक्ट्रोड)। मानक इलेक्ट्रोड विभव की सारणी से हम कई महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं: जितना अधिक धनात्मक E°, अपचित अवस्था उतनी ही स्थायी और स्पीशीज़ उतना ही प्रबल ऑक्सीकारक; जितना अधिक ऋणात्मक E°, स्पीशीज़ उतना ही प्रबल अपचायक।

सारणी 2.1 (संक्षिप्त) — 298K पर मानक इलेक्ट्रोड विभव बढ़ती ऑक्सीकारक क्षमता F₂ + 2e⁻ → 2F⁻      +2.87 V MnO₄⁻+8H⁺+5e⁻→Mn²⁺+4H₂O  +1.51 V Cl₂ + 2e⁻ → 2Cl⁻     +1.36 V Ag⁺ + e⁻ → Ag(s)     +0.80 V Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu(s)   +0.34 V 2H⁺ + 2e⁻ → H₂(g)     0.00 V Fe²⁺ + 2e⁻ → Fe(s)    −0.44 V Zn²⁺ + 2e⁻ → Zn(s)   −0.76 V Mg²⁺ + 2e⁻ → Mg(s)  −2.36 V Li⁺ + e⁻ → Li(s)      −3.05 V
सारणी 2.1 की मुख्य पंक्तियाँ — ऊपर से नीचे E° घटता है; F₂ प्रबलतम ऑक्सीकारक, Li प्रबलतम अपचायक
त्वरित तथ्य — 2.2
  • ऐनोड पर ऑक्सीकरण, कैथोड पर अपचयन होता है — यह गैल्वेनी व वैद्युतअपघटनी दोनों सेलों में सत्य है।
  • गैल्वेनी सेल में ऐनोड ऋणात्मक तथा कैथोड धनात्मक होता है (विपरीत वैद्युतअपघटनी सेल में)।
  • SHE का मानक विभव सभी तापों पर 0.00 V निर्धारित है।
  • मानक इलेक्ट्रोड विभव का धनात्मक मान ⇒ अपचित अवस्था अधिक स्थायी; ऋणात्मक मान ⇒ ऑक्सीकृत अवस्था (अपचायक) अधिक स्थायी।
  • सारणी 2.1 में F₂ सबसे प्रबल ऑक्सीकारक (E°=2.87V) तथा Li सबसे प्रबल अपचायक (E°=−3.05V) है।
  • Eसेल = Eकैथोड − Eऐनोड (दोनों अपचयन विभवों का अंतर)।
सांद्रता निर्भरता

2.3 नेर्न्स्ट समीकरण

पूर्व में हमने माना कि इलेक्ट्रोड अभिक्रिया में प्रयुक्त सभी स्पीशीज़ की सांद्रता एक इकाई है। नेर्न्स्ट ने दर्शाया कि अभिक्रिया Mⁿ⁺(aq) + ne⁻ → M(s) के लिए किसी भी सांद्रता पर मापा गया विभव:

नेर्न्स्ट समीकरण — सामान्य रूप aA + bB (ne⁻) → cC + dD
Eसेल = E°सेल − (RT/nF) ln Q = E°सेल − (RT/nF) ln{[C]c[D]d / [A]a[B]b}  (2.13)

प्राकृतिक लघुगणक को log₁₀ में बदलकर एवं R, F के मान (T=298K पर) रखने पर 2.303RT/F = 0.059 V प्राप्त होता है:

298 K पर व्यावहारिक रूप (सर्वाधिक प्रयुक्त) Eसेल = E°सेल − (0.059/n) log Q   (2.12)

डेन्यल सेल के लिए: Eसेल = E°सेल − (0.059/2) log([Zn²⁺]/[Cu²⁺])। यह स्पष्ट है कि Cu²⁺ की सांद्रता बढ़ाने पर Eसेल बढ़ता है तथा Zn²⁺ की सांद्रता बढ़ाने पर घटता है।

2.3.1 नेर्न्स्ट समीकरण से साम्य स्थिरांक

जब परिपथ बंद रहने पर पर्याप्त समय बाद साम्य स्थापित हो जाता है, तो सेल विभव शून्य (Eसेल=0) हो जाता है और वोल्टमीटर शून्य पठनांक दर्शाता है। इस स्थिति में:

मानक विभव व साम्य स्थिरांकसेल = (2.303RT/nF) log KC   (2.14)

इस सूत्र द्वारा वह साम्य स्थिरांक भी ज्ञात किया जा सकता है, जिसे अन्य प्रकार मापना कठिन हो।

2.3.2 वैद्युतरासायनिक सेल अभिक्रिया की गिब्ज़ ऊर्जा

यदि गैल्वेनी सेल से अधिकतम कार्य लेना हो तो आवेश का प्रवाह उत्क्रमणीय करना होगा। गैल्वेनी सेल द्वारा किया गया उत्क्रमणीय कार्य गिब्ज़ ऊर्जा में कमी के बराबर होता है:

गिब्ज़ ऊर्जा व साम्य स्थिरांक ΔrG = −nFEसेल   (2.15)
समस्त स्पीशीज़ की सांद्रता इकाई हो तो: ΔrG° = −nFE°सेल   (2.16)
ΔrG° = −RT ln K
याद रखें: Eसेल एक स्वतंत्र (गहन) प्राचल है, जबकि ΔrG एक मात्रात्मक (व्यापक) ऊष्मागतिकीय गुणधर्म है जिसका मान 'n' पर निर्भर करता है — अतः संतुलित समीकरण में गुणांक बदलने पर ΔG बदलता है परंतु Eसेल नहीं बदलता।
त्वरित तथ्य — 2.3
  • नेर्न्स्ट समीकरण: Eसेल=E°सेल−(0.059/n)log Q (298K पर)।
  • साम्यावस्था पर Eसेल=0 तथा Q=KC
  • सेल=(0.059/n) log KC — मानक विभव से साम्य स्थिरांक ज्ञात किया जा सकता है।
  • ΔrG° = −nFE°सेल तथा ΔrG° = −RT ln K — दोनों संबंध एक-दूसरे से जुड़े हैं।
  • F (फैराडे स्थिरांक) = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹।
  • R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹।
प्रतिरोध, चालकत्व व मोलर चालकता

2.4 वैद्युतअपघटनी विलयनों का चालकत्व

विद्युतीय प्रतिरोध R, ओम (Ω) में मापा जाता है तथा वस्तु की लंबाई l के अनुक्रमानुपाती व अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A के प्रतिलोमानुपाती होता है:

प्रतिरोधकता व चालकत्व R = ρ (l/A)   (2.17), जहाँ ρ = प्रतिरोधकता (Ω m)
चालकत्व G = 1/R = A/(ρl) = κ(A/l)   (2.18)
चालकता (विशिष्ट चालकत्व) κ = 1/ρ, इकाई S m⁻¹ (या S cm⁻¹)
वर्गउदाहरणचालकता (S m⁻¹)
चालकसिल्वर, कॉपर, गोल्ड10³ – 10⁷
वैद्युतरोधीकाँच, टेफ़्लॉन10⁻¹⁶ – 10⁻¹⁸
अर्धचालकSi, Ge, CuO10⁻⁷ – 10²

2.4.1 आयनिक विलयनों की चालकता का मापन

विलयन के प्रतिरोध मापन में दो समस्याएँ हैं: (i) दिष्ट धारा (DC) से विलयन का संघटन बदल जाता है — इसका समाधान प्रत्यावर्ती धारा (AC) के प्रयोग से किया जाता है। (ii) विलयन को धातु तार की तरह ब्रिज से नहीं जोड़ा जा सकता — इसके लिए विशेष चालकता सेल प्रयुक्त होता है।

Pt इलेक्ट्रोड Pt इलेक्ट्रोड विलयन ~
चित्र 2.4 — चालकता सेल: दो प्लैटिनीकृत Pt इलेक्ट्रोड, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A, दूरी l
सेल स्थिरांक G* = l/A = R·κ   (2.18)
(यह ज्ञात चालकता वाले KCl विलयन से पूर्व-निर्धारित किया जाता है)
फिर: κ = सेल स्थिरांक / R = G*/R   (2.20)

हीट्स्टोन ब्रिज (सेतु) की सहायता से अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात किया जाता है — दोलित्र O (550–5000 चक्रण/सेकंड की AC), दो निश्चित प्रतिरोध R₃,R₄, परिवर्तनीय प्रतिरोध R₁ तथा अज्ञात प्रतिरोध R₂ वाली चालकता सेल का प्रयोग होता है। संतुलन पर: R₂ = R₁R₄/R₃  (2.19)

मोलर चालकता

परिभाषा मोलर चालकता Λm = κ/c   (2.21), जहाँ c = मोलर सांद्रता
1 S m² mol⁻¹ = 10⁴ S cm² mol⁻¹

2.4.2 सांद्रता के साथ चालकता एवं मोलर चालकता में परिवर्तन

सांद्रता घटाने पर चालकता हमेशा घटती है (प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घटती है), जबकि मोलर चालकता बढ़ती है (कुल आयतन V, जिसमें 1 मोल घुला है, में वृद्धि, κ में कमी से अधिक होती है)।

प्रकारΛm बनाम c½ का व्यवहारसूत्र
प्रबल वैद्युतअपघट्यऋणात्मक ढाल की सीधी रेखा; तनुता से धीरे-धीरे बढ़ती हैΛm = Λ°m − A·c½  (2.23) — देब्ये-हुकल-ऑन्सेगर समीकरण
दुर्बल वैद्युतअपघट्यअल्प सांद्रता के समीप तेज़ी से बढ़ती है — बहिर्वेशन संभव नहींΛ°m कोलराउश नियम से प्राप्त होता है
c¹ᐟ² → Λm → CH3COOH (दुर्बल) KCl (प्रबल)
चित्र 2.6 — जलीय विलयन में ऐसीटिक अम्ल (दुर्बल) एवं KCl (प्रबल) की मोलर चालकता का c½ के विरुद्ध आलेख

कोलराउश का आयनों के स्वतंत्र अभिगमन का नियम

कोलराउश ने पाया कि किसी वैद्युतअपघट्य की अनंत तनुता पर मोलर चालकता उसके धनायन एवं ऋणायन के अलग-अलग योगदानों के योग के बराबर होती है:

कोलराउश नियम Λ°m = ν+λ°+ + νλ°   (2.25)
उदाहरण: Λ°m(NaCl) = λ°Na⁺ + λ°Cl⁻   (2.24)

अनुप्रयोग: इस नियम से किसी भी वैद्युतअपघट्य (यहाँ तक कि दुर्बल वैद्युतअपघट्यों, जिनका Λ°m बहिर्वेशन से नहीं मिलता) का Λ°m ज्ञात आयनिक चालकताओं से परिकलित किया जा सकता है।

वियोजन मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक (दुर्बल वैद्युतअपघट्य) α = Λm/Λ°m   (2.26)
Ka = cα²/(1−α) = cΛm² / [Λ°m(Λ°m−Λm)]   (2.27)
त्वरित तथ्य — 2.4
  • चालकता κ = 1/ρ, इकाई S m⁻¹; मोलर चालकता Λm = κ/c, इकाई S m² mol⁻¹ या S cm² mol⁻¹।
  • 1 S cm² mol⁻¹ = 10⁻⁴ S m² mol⁻¹।
  • सेल स्थिरांक G* = l/A = R·κ; ज्ञात KCl विलयन से मानकीकृत किया जाता है।
  • सांद्रता घटाने पर κ घटती है, Λm बढ़ती है — दोनों ही आयनों की संख्या/उपलब्ध आयतन के कारण।
  • प्रबल वैद्युतअपघट्य: Λm = Λ°m − Ac½ (रेखीय संबंध, बहिर्वेशन संभव)।
  • दुर्बल वैद्युतअपघट्य: Λ°m बहिर्वेशन से नहीं, कोलराउश नियम से प्राप्त होता है।
  • कोलराउश नियम: Λ°m = ν₊λ°₊ + ν₋λ°₋ (आयनों का स्वतंत्र अभिगमन)।
  • दुर्बल वैद्युतअपघट्य के लिए α = Λm/Λ°m तथा Ka = cα²/(1−α)।
फैराडे के नियम

2.5 वैद्युतअपघटनी सेल एवं वैद्युतअपघटन

वैद्युतअपघटनी सेल में रासायनिक अभिक्रिया कराने के लिए विभव का बाह्य स्रोत प्रयुक्त होता है। उदाहरण: CuSO₄ के जलीय विलयन में दो कॉपर इलेक्ट्रोड — DC विभव लगाने पर:

वैद्युतअपघटनी परिष्करण कैथोड पर: Cu²⁺(aq) + 2e⁻ → Cu(s)  (2.28)
ऐनोड पर: Cu(s) → Cu²⁺(aq) + 2e⁻  (2.29)

अशुद्ध कॉपर को ऐनोड बनाकर धारा प्रवाहित करने पर वह विलीन होता है एवं शुद्ध कॉपर कैथोड पर निक्षेपित होता है — यही औद्योगिक कॉपर शुद्धिकरण का आधार है। Na, Mg, Al जैसी धातुएँ, जिनके लिए उपयुक्त रासायनिक अपचायक नहीं मिलता, संगत धनायनों के वैद्युतरासायनिक अपचयन द्वारा वृहद स्तर पर उत्पादित की जाती हैं (जैसे गलित NaCl से Na, क्रायोलाइट में Al₂O₃ से Al)।

फैराडे के वैद्युतअपघटन के नियम

प्रथम नियम वैद्युतअपघटन में रासायनिक विघटन की मात्रा प्रवाहित विद्युत आवेश की मात्रा के समानुपाती होती है।
Q = It  (Q कुलॉम में, I ऐम्पियर में, t सेकंड में)
द्वितीय नियम विभिन्न वैद्युतअपघटनी विलयनों में विद्युत की समान मात्रा प्रवाहित करने पर मुक्त हुए विभिन्न पदार्थों की मात्राएँ उनके रासायनिक तुल्यांकी द्रव्यमान के समानुपाती होती हैं।

फैराडे स्थिरांक (F): एक मोल इलेक्ट्रॉनों पर आवेश = NA × 1.6021×10⁻¹⁹ C = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹। धातुओं के औद्योगिक उत्पादन में ~50,000 ऐम्पियर तक धारा प्रयुक्त होती है (≈0.518F प्रति सेकंड)।

2.5.1 वैद्युतअपघटन के उत्पाद

उत्पाद अपघटित होने वाले पदार्थों की अवस्था तथा इलेक्ट्रोड के प्रकार (अक्रिय जैसे Pt/Au, या अभिक्रियाशील) पर निर्भर करते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अभिक्रियाएँ गतिकीय रूप से धीमी होने के कारण एक अतिरिक्त अधिविभव (overpotential) की आवश्यकता होती है — जैसे जल के ऑक्सीकरण की अपेक्षा Cl⁻ के ऑक्सीकरण को वरीयता मिलना (यद्यपि O₂ का E° कम है)।

वैद्युतअपघट्यकैथोड परऐनोड पर
गलित NaClNa⁺+e⁻→NaCl⁻→½Cl₂+e⁻
NaCl जलीय विलयनH₂O+e⁻→½H₂+OH⁻ (H⁺ के स्थान पर, क्योंकि E°(H⁺/H₂)>E°(Na⁺/Na))Cl⁻→½Cl₂+e⁻ (अधिविभव के कारण, यद्यपि जल का E° कम)
तनु H₂SO₄H₂ गैसO₂ गैस (जल का ऑक्सीकरण वरीयता में)
सांद्र H₂SO₄H₂ गैसS₂O₈²⁻ (SO₄²⁻ का ऑक्सीकरण वरीयता में)
त्वरित तथ्य — 2.5
  • फैराडे का प्रथम नियम: वैद्युतअपघटन में विघटित पदार्थ की मात्रा ∝ प्रवाहित आवेश Q=It।
  • फैराडे का द्वितीय नियम: विभिन्न वैद्युतअपघट्यों में समान आवेश से मुक्त पदार्थों की मात्रा उनके तुल्यांकी द्रव्यमान के समानुपाती।
  • 1 फैराडे (1F) = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹ (1 मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश)।
  • अक्रिय इलेक्ट्रोड (Pt, Au) अभिक्रिया में भाग नहीं लेते, केवल इलेक्ट्रॉनों का स्रोत/सिंक होते हैं।
  • वैद्युतअपघटन के उत्पाद उपस्थित विभिन्न ऑक्सीकारक/अपचायक स्पीशीज़ के मानक इलेक्ट्रोड विभवों व अधिविभव पर निर्भर करते हैं।
  • Na, Mg जैसी अति-अपचायक धातुएँ केवल वैद्युतअपघटन द्वारा प्राप्त होती हैं, रासायनिक अपचयन से नहीं।
प्राथमिक व संचायक

2.6 बैटरियाँ

कोई भी बैटरी (एक या अधिक सेल श्रेणीबद्ध) मूलतः एक गैल्वेनी सेल है। बैटरियाँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं — प्राथमिक तथा संचायक।

2.6.1 प्राथमिक बैटरियाँ

प्राथमिक बैटरियों में अभिक्रिया केवल एक बार होती है — प्रयोग के बाद बैटरी निष्क्रिय हो जाती है, पुनः प्रयोग में नहीं लाई जा सकती।

शुष्क सेल (लैक्लांशे सेल) MnO₂+कार्बन कज्जल Zn कप (ऐनोड)
चित्र 2.8 — शुष्क (लैक्लांशे) सेल: Zn पात्र ऐनोड, ग्रैफाइट छड़ कैथोड, सेल विभव ≈1.5V
प्राथमिक सेलऐनोडकैथोडवैद्युतअपघट्यविभव
शुष्क (लैक्लांशे) सेलZn(s)→Zn²⁺+2e⁻MnO₂+NH₄⁺+e⁻→MnO(OH)+NH₃NH₄Cl+ZnCl₂ नम पेस्ट≈1.5 V
मर्क्यूरी सेलZn(Hg)+2OH⁻→ZnO(s)+H₂O+2e⁻HgO+H₂O+2e⁻→Hg(l)+2OH⁻KOH+ZnO पेस्ट≈1.35 V (स्थिर)
मर्क्यूरी सेल का विभव संपूर्ण कार्य अवधि में स्थिर रहता है क्योंकि समग्र सेल अभिक्रिया में कोई ऐसा आयन नहीं जिसकी सांद्रता विलयन में बदल सके।

2.6.2 संचायक बैटरियाँ (Secondary Batteries)

इन्हें उपयोग के बाद विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित कर पुनः आवेशित किया जा सकता है — कई बार डिस्चार्ज/चार्ज चक्र संभव।

लेड संचायक सेल Pb (ऐनोड) PbO₂ (कैथोड)
चित्र 2.10 — लेड संचायक सेल: 38% H₂SO₄ वैद्युतअपघट्य, वाहनों/इन्वर्टरों में प्रयुक्त
लेड संचायक सेल (डिस्चार्ज) ऐनोड: Pb(s) + SO₄²⁻(aq) → PbSO₄(s) + 2e⁻
कैथोड: PbO₂(s) + SO₄²⁻(aq) + 4H⁺(aq) + 2e⁻ → PbSO₄(s) + 2H₂O(l)
समग्र: Pb(s) + PbO₂(s) + 2H₂SO₄(aq) → 2PbSO₄(s) + 2H₂O(l)

चार्जिंग करने पर उपरोक्त अभिक्रिया उत्क्रमित हो जाती है — PbSO₄(s), पुनः Pb व PbO₂ में बदल जाता है। निकैल कैडमियम सेल दूसरा महत्वपूर्ण संचायक सेल है (अधिक कार्य अवधि, अधिक निर्माण लागत):

निकैल कैडमियम सेल (डिस्चार्ज, समग्र) Cd(s) + 2Ni(OH)₃(s) → CdO(s) + 2Ni(OH)₂(s) + H₂O(l)
त्वरित तथ्य — 2.6
  • प्राथमिक बैटरियाँ केवल एक बार प्रयुक्त होती हैं, पुनः आवेशित नहीं की जा सकतीं (लैक्लांशे सेल, मर्क्यूरी सेल)।
  • लैक्लांशे (शुष्क) सेल का विभव ≈1.5 V; मर्क्यूरी सेल का विभव ≈1.35 V (स्थिर)।
  • संचायक बैटरियों को उपयोग के बाद पुनः आवेशित किया जा सकता है (लेड संचायक, Ni-Cd सेल)।
  • लेड संचायक में वैद्युतअपघट्य 38% H₂SO₄; ऐनोड Pb, कैथोड PbO₂ से भरा ग्रिड।
  • Ni-Cd सेल की कार्य अवधि लेड संचायक से अधिक परंतु निर्माण लागत भी अधिक होती है।
प्रदूषणमुक्त ऊर्जा

2.7 ईंधन सेल

ऊष्मीय संयंत्रों से विद्युत उत्पादन दक्षता की दृष्टि से सीमित (≈40%) है तथा प्रदूषण का बड़ा स्रोत है। ऐसी गैल्वेनी सेलें जिनमें हाइड्रोजन, मेथेन, मेथेनॉल आदि जैसे ईंधनों की दहन ऊर्जा को सीधे ही विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, ईंधन सेल कहलाती हैं।

ऐनोड कैथोड H2 → ← O2 जलीय वैद्युतअपघट्य H2O →
चित्र 2.12 — H₂–O₂ ईंधन सेल: जल बनने की अभिक्रिया से सीधे विद्युत उत्पादन

सबसे सफल ईंधन सेल में H₂ व O₂ के संयोग से जल बनने की अभिक्रिया का उपयोग किया जाता है — इसे अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में प्रयोग किया गया था; प्राप्त जल वाष्प का उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों के पेयजल के रूप में किया गया।

H₂–O₂ ईंधन सेल कैथोड: O₂(g) + 2H₂O(l) + 4e⁻ → 4OH⁻(aq)
ऐनोड: 2H₂(g) + 4OH⁻(aq) → 4H₂O(l) + 4e⁻
समग्र: 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)

जब तक अभिक्रियकों की आपूर्ति होती है, सेल लगातार कार्य करती है। ऊष्मीय संयंत्रों (40% दक्षता) की तुलना में ईंधन सेल ≈70% दक्षता के साथ विद्युत उत्पादित करते हैं।

त्वरित तथ्य — 2.7
  • ईंधन सेल में ईंधन (H₂, मेथेन, मेथेनॉल) की दहन ऊर्जा सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
  • H₂–O₂ ईंधन सेल में सरंध्र कार्बन इलेक्ट्रोड, सांद्र जलीय NaOH वैद्युतअपघट्य, तथा Pt/Pd उत्प्रेरक प्रयुक्त होते हैं।
  • अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में H₂–O₂ ईंधन सेल का प्रयोग हुआ था।
  • ऊष्मीय संयंत्रों की दक्षता ≈40%, जबकि ईंधन सेलों की दक्षता ≈70%।
  • ईंधन सेल प्रदूषणमुक्त होते हैं — केवल उत्पाद जल है।
वैद्युतरासायनिक क्षति

2.8 संक्षारण

संक्षारण धातुओं की सतह को ऑक्साइड या अन्य लवणों से मंद गति से आवृत कर देता है — लोहे में जंग लगना, चाँदी का बदरंग होना, कॉपर-पीतल पर हरे रंग का लेप, इसके उदाहरण हैं। यह मुख्यतः एक वैद्युतरासायनिक परिघटना है।

Fe2O3 (जंग) O2 4H⁺+O2 लोहे की सतह (Fe)
चित्र 2.13 — लोहे का वायुमंडल में संक्षारण: एक स्थल ऐनोड, दूसरा कैथोड की तरह व्यवहार करता है
यांत्रिकी ऐनोड: 2Fe(s) → 2Fe²⁺ + 4e⁻   E°(Fe²⁺/Fe) = −0.44 V
कैथोड: O₂(g) + 4H⁺(aq) + 4e⁻ → 2H₂O(l)   E° = +1.23 V
समग्र: 2Fe(s) + O₂(g) + 4H⁺(aq) → 2Fe²⁺(aq) + 2H₂O(l)   E°सेल = 1.67 V
वायुमंडलीय ऑक्सीकरण: 2Fe²⁺(aq) + 2H₂O(l) + ½O₂(g) → Fe₂O₃(s) + 4H⁺(aq)

H⁺ आयन CO₂ के जल में घुलने से बने H₂CO₃ से प्राप्त होते हैं। फेरस आयन वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा फेरिक आयनों में बदलकर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃·xH₂O) बनाते हैं — यही जंग है।

संक्षारण की रोकथाम

विधिविवरण
पेंट/लेपधात्विक सतह को वायुमंडल के संपर्क से रोकना (पेंट, बिसफ़ीनॉल जैसे रसायन)
धात्विक आच्छादनSn, Zn जैसी अक्रिय अथवा क्रियाशील धातु से सतह आच्छादित करना
उत्सर्ग इलेक्ट्रोड (कैथोडिक संरक्षण)Mg, Zn जैसी अधिक सक्रिय धातु उपलब्ध कराना जो स्वयं संक्षारित होकर वस्तु की रक्षा करती है
त्वरित तथ्य — 2.8
  • संक्षारण में धातु ऑक्सीजन को इलेक्ट्रॉन देकर ऑक्सीकृत होती है।
  • लोहे का संक्षारण (जंग) जल एवं वायु दोनों की उपस्थिति में होता है — मूलतः वैद्युतरासायनिक परिघटना।
  • ऐनोडी स्थल पर ऑक्सीकरण (Fe→Fe²⁺+2e⁻), कैथोडी स्थल पर O₂ का अपचयन होता है।
  • अंतिम उत्पाद जलयोजित फेरिक ऑक्साइड, Fe₂O₃·xH₂O (जंग) है।
  • कैथोडिक संरक्षण: Mg/Zn जैसा उत्सर्ग इलेक्ट्रोड लगाकर मुख्य धातु की रक्षा की जाती है।
हाइड्रोजन का अर्थशास्त्र: जीवाश्म ईंधनों के दहन से उत्पन्न CO₂ ग्रीन हाउस प्रभाव व वैश्विक तापवृद्धि का कारण है। हाइड्रोजन इसका आदर्श विकल्प है क्योंकि इसके दहन से केवल जल बनता है। जल के वैद्युतअपघटन से हाइड्रोजन का उत्पादन एवं ईंधन सेल में हाइड्रोजन का दहन — दोनों ही वैद्युतरासायनिक सिद्धांतों पर आधारित हैं, अतः दोनों ही भविष्य में महत्वपूर्ण होंगे।
रिवीज़न पैक

संपूर्ण अध्याय — एक-पंक्ति तथ्य सूची

सेल व विभव (2.1–2.3)
  • गैल्वेनी सेल: रासायनिक ऊर्जा→विद्युत ऊर्जा (स्वतः अभिक्रिया); वैद्युतअपघटनी सेल: विद्युत ऊर्जा→रासायनिक अभिक्रिया (अस्वतः)।
  • डेन्यल सेल का मानक विभव 1.10 V।
  • ऐनोड पर ऑक्सीकरण, कैथोड पर अपचयन; गैल्वेनी सेल में ऐनोड ऋणात्मक, कैथोड धनात्मक।
  • Eसेल = Eदायाँ − Eबायाँ = Eकैथोड − Eऐनोड
  • SHE (मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड) का विभव 0.00 V, सभी तापों पर।
  • अधिक धनात्मक E° = प्रबल ऑक्सीकारक; अधिक ऋणात्मक E° = प्रबल अपचायक।
  • F₂ (E°=2.87V) सबसे प्रबल ऑक्सीकारक; Li (E°=−3.05V) सबसे प्रबल अपचायक, जलीय विलयन में।
  • नेर्न्स्ट समीकरण (298K): Eसेल=E°सेल−(0.059/n)log Q।
  • साम्यावस्था पर Eसेल=0, Q=KC; E°सेल=(0.059/n)log KC
  • ΔrG° = −nFE°सेल = −RT ln K।
  • 1F = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹।
चालकत्व (2.4)
  • κ (चालकता) = 1/ρ; इकाई S m⁻¹ या S cm⁻¹; 1 S cm⁻¹ = 100 S m⁻¹।
  • Λm (मोलर चालकता) = κ/c; 1 S m² mol⁻¹ = 10⁴ S cm² mol⁻¹।
  • सेल स्थिरांक G* = l/A = R·κ; ज्ञात KCl विलयन से मानकीकृत।
  • तनुकरण से κ घटती है परंतु Λm बढ़ती है।
  • प्रबल वैद्युतअपघट्य: Λm=Λ°m−Ac½ (ओन्सेगर समीकरण), रेखीय।
  • दुर्बल वैद्युतअपघट्य: अल्प सांद्रता पर Λm तीव्रता से बढ़ती है; Λ°m बहिर्वेशन से नहीं मिलता।
  • कोलराउश नियम: Λ°m=ν₊λ°₊+ν₋λ°₋ (आयनों का स्वतंत्र अभिगमन)।
  • α = Λm/Λ°m; Ka = cα²/(1−α)।
वैद्युतअपघटन, बैटरी, ईंधन सेल, संक्षारण (2.5–2.8)
  • फैराडे प्रथम नियम: विघटित पदार्थ की मात्रा ∝ Q=It।
  • फैराडे द्वितीय नियम: समान आवेश से मुक्त पदार्थों की मात्रा उनके तुल्यांकी द्रव्यमान के समानुपाती।
  • वैद्युतअपघटन के उत्पाद E° तथा अधिविभव पर निर्भर करते हैं।
  • प्राथमिक बैटरी (लैक्लांशे, मर्क्यूरी): एक बार प्रयोग, पुनः आवेशित नहीं।
  • संचायक बैटरी (लेड संचायक, Ni-Cd): पुनः आवेशित की जा सकती है।
  • लेड संचायक में वैद्युतअपघट्य 38% H₂SO₄।
  • ईंधन सेल: दहन ऊर्जा सीधे विद्युत ऊर्जा में; दक्षता ≈70% (ऊष्मीय संयंत्र ≈40%)।
  • संक्षारण मूलतः वैद्युतरासायनिक परिघटना; जंग = Fe₂O₃·xH₂O।
  • कैथोडिक संरक्षण में Mg/Zn उत्सर्ग इलेक्ट्रोड प्रयुक्त होता है।
सूत्र संग्रह

महत्वपूर्ण राशियाँ व सूत्र

राशि/संबंधसूत्र
सेल विभवEसेल = Eकैथोड − Eऐनोड
नेर्न्स्ट समीकरण (298K)Eसेल = E°सेल − (0.059/n) log Q
गिब्ज़ ऊर्जाΔrG° = −nFE°सेल = −RT ln K
साम्य स्थिरांकसेल = (0.059/n) log KC
प्रतिरोधR = ρ(l/A)
चालकत्वG = 1/R = κ(A/l)
मोलर चालकताΛm = κ/c (SI: c मोल/m³)
प्रबल वैद्युतअपघट्यΛm = Λ°m − Ac½
कोलराउश नियमΛ°m = ν₊λ°₊ + ν₋λ°₋
वियोजन मात्राα = Λm/Λ°m
वियोजन स्थिरांकKa = cα²/(1−α)
फैराडे का प्रथम नियमQ = It
फैराडे स्थिरांक1F = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹
मोल व आवेश संबंधमोल इलेक्ट्रॉन = Q/(F) = It/F; द्रव्यमान = (मोलर द्रव्यमान × Q)/(n×F)

याद रखने योग्य मानक इलेक्ट्रोड विभव (298K)

अर्ध अभिक्रियाE° (V)
F₂+2e⁻→2F⁻2.87
MnO₄⁻+8H⁺+5e⁻→Mn²⁺+4H₂O1.51
Cl₂+2e⁻→2Cl⁻1.36
Cr₂O₇²⁻+14H⁺+6e⁻→2Cr³⁺+7H₂O1.33
O₂+4H⁺+4e⁻→2H₂O1.23
Br₂+2e⁻→2Br⁻1.09
Ag⁺+e⁻→Ag(s)0.80
Fe³⁺+e⁻→Fe²⁺0.77
I₂+2e⁻→2I⁻0.54
Cu²⁺+2e⁻→Cu(s)0.34
2H⁺+2e⁻→H₂(g)0.00
Sn²⁺+2e⁻→Sn(s)−0.14
Fe²⁺+2e⁻→Fe(s)−0.44
Cr³⁺+3e⁻→Cr(s)−0.74
Zn²⁺+2e⁻→Zn(s)−0.76
Al³⁺+3e⁻→Al(s)−1.66
Mg²⁺+2e⁻→Mg(s)−2.36
Na⁺+e⁻→Na(s)−2.71
K⁺+e⁻→K(s)−2.93
Li⁺+e⁻→Li(s)−3.05
परमाणु द्रव्यमान (गणना हेतु): Cu=63.5, Zn=65.4(≈65.38), Ag=108, Al=27, Ca=40, Ni=58.7, F=96487 C mol⁻¹।

पाठ्यनिहित प्रश्न (2.1 – 2.15) — विस्तृत हल

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके हल देखें।

2.1 निकाय Mg²⁺|Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव आप किस प्रकार ज्ञात करेंगे?
अकेले किसी अर्ध सेल का विभव मापा नहीं जा सकता; इसके लिए इसे मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) के साथ जोड़कर एक पूर्ण सेल बनाई जाती है।
सेल: Pt(s)|H₂(g,1bar)|H⁺(aq,1M) || Mg²⁺(aq,1M)|Mg(s) बनाई जाती है, जिसमें SHE बायीं ओर (ऐनोड) तथा Mg²⁺/Mg अर्ध सेल दायीं ओर (कैथोड) है।
298K पर इस सेल का emf मापा जाता है। चूँकि E°(SHE)=0, अतः E°सेल = E°(Mg²⁺/Mg) − 0 = E°(Mg²⁺/Mg)
इस प्रकार मापा गया सेल विभव सीधे ही Mg²⁺|Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव देगा (प्रायोगिक मान −2.36 V)।
2.2 क्या आप एक जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रख सकते हैं?
मानक इलेक्ट्रोड विभव सारणी से: E°(Zn²⁺/Zn) = −0.76 V तथा E°(Cu²⁺/Cu) = +0.34 V।
चूँकि E°(Cu²⁺/Cu) > E°(Zn²⁺/Zn), Zn धातु, Cu²⁺ की तुलना में अधिक प्रबल अपचायक है — अतः Zn, विलयन में उपस्थित Cu²⁺ को अपचयित कर स्वयं Zn²⁺ में ऑक्सीकृत हो जाएगा: Zn(s) + Cu²⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + Cu(s)।
इस अभिक्रिया से जिंक पात्र धीरे-धीरे घुलता (संक्षारित होता) जाएगा तथा कॉपर धातु उसकी सतह पर निक्षेपित हो जाएगी।
नहीं, कॉपर सल्फेट का विलयन जिंक के पात्र में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि Zn, Cu²⁺ को विस्थापित कर देगा।
2.3 मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिका का निरीक्षण कर तीन ऐसे पदार्थ बताइए जो अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों को ऑक्सीकृत कर सकते हैं।
फेरस आयन (Fe²⁺) को फेरिक आयन (Fe³⁺) में ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक अर्ध अभिक्रिया है: Fe²⁺→Fe³⁺+e⁻, जिसका मानक अपचयन विभव E°(Fe³⁺/Fe²⁺)=0.77V है।
कोई भी स्पीशीज़ Fe²⁺ को ऑक्सीकृत कर सकती है यदि उसका स्वयं का मानक अपचयन विभव 0.77V से अधिक हो — तभी वह Fe²⁺ से इलेक्ट्रॉन लेकर स्वयं अपचित हो सकेगी।
सारणी 2.1 से 0.77V से अधिक E° वाले पदार्थ: F₂ (2.87V), MnO₄⁻ (अम्लीय, 1.51V), Cl₂ (1.36V), Cr₂O₇²⁻ (1.33V), O₂ (1.23V), Br₂ (1.09V) आदि — इनमें से कोई भी तीन उपयुक्त उदाहरण हैं।
उदाहरण: (i) F₂ गैस, (ii) अम्लीकृत MnO₄⁻ (KMnO₄), (iii) Cl₂ गैस — ये सभी Fe²⁺ को Fe³⁺ में ऑक्सीकृत कर सकते हैं।
2.4 pH = 10 के विलयन के संपर्क वाले हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड के विभव का परिकलन कीजिए।
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड अभिक्रिया: H⁺(aq) + e⁻ → ½H₂(g), जिसका E° = 0.00 V (मानक अवस्था में)।
नेर्न्स्ट समीकरण (n=1): E = E° − 0.059 log{1/[H⁺]} = 0 − 0.059 log(1/[H⁺]) = 0.059 log[H⁺]
pH=10 का अर्थ है [H⁺] = 10⁻¹⁰ M। अतः: E = 0.059 × log(10⁻¹⁰) = 0.059 × (−10) = −0.59 V
हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का विभव E = −0.59 V
2.5 एक सेल के emf का परिकलन कीजिए, जिसमें Ni(s) + 2Ag⁺(0.002M) → Ni²⁺(0.160M) + 2Ag(s) अभिक्रिया होती है। दिया गया E°सेल = 1.05V।
सेल अभिक्रिया में n=2 (Ni, 2 इलेक्ट्रॉन खोता है), अतः नेर्न्स्ट समीकरण: Eसेल = E°सेल − (0.059/2) log{[Ni²⁺]/[Ag⁺]²}
मान रखने पर: [Ni²⁺]/[Ag⁺]² = 0.160/(0.002)² = 0.160/4×10⁻⁶ = 40,000
log(40,000) = 4.602; (0.059/2)×4.602 = 0.0295×4.602 = 0.1358
Eसेल = 1.05 − 0.1358 = 0.914 ≈ 0.91 V
2.6 एक सेल जिसमें 2Fe³⁺(aq)+2I⁻(aq)→2Fe²⁺(aq)+I₂(s) अभिक्रिया होती है, का 298K ताप पर E°सेल=0.236V है। सेल अभिक्रिया की मानक गिब्ज़ ऊर्जा एवं साम्य स्थिरांक का परिकलन कीजिए।
दी गई संतुलित समीकरण के लिए इलेक्ट्रॉनों की संख्या n=2 है (2 Fe³⁺, 2 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं)।
ΔrG° = −nFE°सेल = −2 × 96487 C mol⁻¹ × 0.236 V = −45,542 J mol⁻¹
log KC = nE°सेल/0.059 = (2×0.236)/0.059 = 0.472/0.059 ≈ 7.99, अतः KC = 10^7.99 ≈ 9.62×10⁷
ΔrG° ≈ −45.54 kJ mol⁻¹; KC9.62 × 10⁷
2.7 किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है?
चालकता (κ) विलयन के इकाई आयतन का चालकत्व है, जो प्रति इकाई आयतन में उपस्थित आयनों की संख्या पर निर्भर करती है।
तनुकरण करने पर विलयन के प्रति इकाई आयतन में विद्युत धारा ले जाने वाले आयनों की संख्या घट जाती है — क्योंकि समान मात्रा वैद्युतअपघट्य अब अधिक आयतन के विलायक में फैली होती है।
इसीलिए तनुकरण के साथ चालकता (κ) हमेशा घटती है, चाहे वैद्युतअपघट्य प्रबल हो या दुर्बल।
2.8 जल की Λ°m ज्ञात करने का एक तरीका बताइए।
जल एक अत्यंत दुर्बल वैद्युतअपघट्य है (यह स्वयं H⁺ व OH⁻ में अल्प मात्रा में वियोजित होता है), अतः इसका Λ°m, प्रयोगात्मक आलेख के बहिर्वेशन (extrapolation) द्वारा सीधे नहीं मिल सकता।
कोलराउश के आयनों के स्वतंत्र अभिगमन के नियम का उपयोग किया जाता है — H⁺ व OH⁻ की सीमांत आयनिक मोलर चालकताओं (λ°) को जोड़कर।
Λ°m(H₂O) = λ°(H⁺) + λ°(OH⁻) = 349.6 + 199.1 = 548.7 S cm² mol⁻¹ (लगभग)
2.9 0.025 mol L⁻¹ मेथेनॉइक अम्ल की मोलर चालकता 46.1 S cm² mol⁻¹ है। इसकी वियोजन मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक का परिकलन कीजिए। दिया गया है λ°(H⁺)=349.6 S cm² mol⁻¹ एवं λ°(HCOO⁻)=54.6 S cm² mol⁻¹।
कोलराउश नियम से: Λ°m = λ°(H⁺) + λ°(HCOO⁻) = 349.6 + 54.6 = 404.2 S cm² mol⁻¹
वियोजन मात्रा α = Λm/Λ°m = 46.1/404.2 = 0.1140
वियोजन स्थिरांक Ka = cα²/(1−α) = 0.025×(0.114)²/(1−0.114) = 0.025×0.012996/0.886
α ≈ 0.114; Ka3.67 × 10⁻⁴ mol L⁻¹
2.10 यदि एक धात्विक तार में 0.5 ऐम्पियर की धारा 2 घंटों के लिए प्रवाहित होती है तो तार में से कितने इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होंगे?
आवेश Q = I×t = 0.5 A × (2×3600 s) = 0.5×7200 = 3600 C
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = Q/e = 3600/(1.6021×10⁻¹⁹ C)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या ≈ 2.247 × 10²² इलेक्ट्रॉन
2.11 उन धातुओं की एक सूची बनाइए जिनका वैद्युतअपघटनी निष्कर्षण होता है।
वे धातुएँ जिनके लिए कोई उपयुक्त रासायनिक अपचायक उपलब्ध नहीं होता (अत्यधिक प्रबल अपचायक/अत्यंत ऋणात्मक E° वाली धातुएँ), उन्हें वैद्युतअपघटन द्वारा उनके गलित लवणों/ऑक्साइडों से निष्कर्षित किया जाता है।
प्रमुख उदाहरण: सोडियम (Na, गलित NaCl से), मैग्नीशियम (Mg, गलित MgCl₂ से), कैल्शियम (Ca), पोटैशियम (K), एल्युमिनियम (Al, क्रायोलाइट में Al₂O₃ के वैद्युतअपघटन से — हॉल-हेरॉल्ट प्रक्रम)।
2.12 Cr₂O₇²⁻+14H⁺+6e⁻→2Cr³⁺+7H₂O अभिक्रिया में Cr₂O₇²⁻ आयनों के एक मोल के अपचयन के लिए कूलॉम में विद्युत की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
समीकरण से स्पष्ट है कि Cr₂O₇²⁻ के 1 मोल के अपचयन के लिए 6 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता है (n=6)।
आवश्यक आवेश Q = n×F = 6 × 96487 C mol⁻¹
Q = 578,922 C ≈ 5.79 × 10⁵ C
2.13 चार्जिंग के दौरान प्रयुक्त पदार्थों का विशेष उल्लेख करते हुए लेड संचायक सेल की चार्जिंग क्रियाविधि का वर्णन रासायनिक अभिक्रियाओं की सहायता से कीजिए।
डिस्चार्ज अवस्था में लेड संचायक सेल में ऐनोड (Pb) व कैथोड (PbO₂) दोनों ही PbSO₄(s) में बदल जाते हैं तथा H₂SO₄ की सांद्रता घट जाती है।
चार्जिंग के दौरान बाह्य विद्युत स्रोत लगाकर धारा को विपरीत दिशा में प्रवाहित किया जाता है, जिससे डिस्चार्ज की अभिक्रिया उत्क्रमित हो जाती है:
2PbSO₄(s) + 2H₂O(l) → Pb(s) + PbO₂(s) + 2H₂SO₄(aq)
इस प्रकार एक इलेक्ट्रोड पर PbSO₄, शुद्ध Pb में अपचित होता है (मूल ऐनोड पुनःस्थापित) तथा दूसरे इलेक्ट्रोड पर PbSO₄, PbO₂ में ऑक्सीकृत होता है (मूल कैथोड पुनःस्थापित); साथ ही H₂SO₄ की सांद्रता पुनः बढ़ जाती है।
चार्जिंग के बाद सेल पुनः मूल अवस्था (Pb ऐनोड, PbO₂ कैथोड, सांद्र H₂SO₄) में आ जाती है तथा पुनः उपयोग के लिए तैयार हो जाती है।
2.14 हाइड्रोजन को छोड़कर ईंधन सेलों में प्रयुक्त किये जा सकने वाले दो अन्य पदार्थ सुझाइए।
ईंधन सेल में किसी भी दहनशील पदार्थ का उपयोग किया जा सकता है जिसकी दहन ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सके, बशर्ते उपयुक्त इलेक्ट्रोड व उत्प्रेरक उपलब्ध हों।
हाइड्रोजन के अतिरिक्त: (i) मेथेन (CH₄) तथा (ii) मेथेनॉल (CH₃OH) जैसे ईंधनों का उपयोग ईंधन सेलों में किया जा सकता है।
2.15 समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक वैद्युतरासायनिक सेल बनना माना जाता है।
लोहे से बनी वस्तु की सतह पर नमी की एक पतली परत में घुली हुई ऑक्सीजन तथा अम्लीय (H⁺) आयनों की उपस्थिति में, सतह के विभिन्न सूक्ष्म स्थल विद्युतरासायनिक सेल के दो इलेक्ट्रोडों (ऐनोड व कैथोड) की भूमिका निभाते हैं।
एक स्थल पर ऑक्सीकरण होता है (ऐनोड): Fe(s) → Fe²⁺(aq) + 2e⁻। मुक्त इलेक्ट्रॉन धातु के माध्यम से दूसरे स्थल पर पहुँचते हैं जहाँ अपचयन होता है (कैथोड): O₂(g) + 4H⁺(aq) + 4e⁻ → 2H₂O(l)।
यह वस्तुतः वैसा ही है जैसे किसी गैल्वेनी सेल में ऐनोड व कैथोड पर अलग-अलग अभिक्रियाएँ होती हैं तथा इलेक्ट्रॉन एक स्थल से दूसरे स्थल की ओर धातु के भीतर से प्रवाहित होते हैं, तथा जल-फिल्म एक वैद्युतअपघट्य की तरह कार्य करती है (लवण सेतु के समान)।
इस प्रकार लोहे की एक ही वस्तु पर स्थानीयकृत ऐनोड व कैथोड, विद्युत का चालन करने वाली नमी की परत (वैद्युतअपघट्य) से जुड़कर एक सूक्ष्म वैद्युतरासायनिक सेल का निर्माण करते हैं — यही कारण है कि संक्षारण (जंग लगना) एक वैद्युतरासायनिक प्रक्रिया मानी जाती है।

अध्याय अभ्यास (2.1 – 2.18) — विस्तृत हल

NCERT पाठ्यपुस्तक के अंत में दिए गए सभी अभ्यास प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।

2.1 निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक दूसरे को उनके लवणों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं। Al, Cu, Fe, Mg एवं Zn.
कोई धातु दूसरी धातु को उसके लवण विलयन से तभी विस्थापित कर सकती है जब वह अधिक प्रबल अपचायक हो, अर्थात् उसका मानक अपचयन विभव अधिक ऋणात्मक हो। मानक इलेक्ट्रोड विभव: Mg²⁺/Mg=−2.36V, Al³⁺/Al=−1.66V, Zn²⁺/Zn=−0.76V, Fe²⁺/Fe=−0.44V, Cu²⁺/Cu=+0.34V।
जो धातु अधिक ऋणात्मक E° रखती है वह अधिक क्रियाशील होती है और अपने से कम क्रियाशील (अधिक धनात्मक E° वाली) धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती है।
घटती क्रियाशीलता का क्रम (विस्थापन क्षमता): Mg > Al > Zn > Fe > Cu
2.2 नीचे दिए गए मानक इलैक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए। K⁺/K = −2.93V, Ag⁺/Ag = 0.80V, Hg²⁺/Hg = 0.79V, Mg²⁺/Mg = −2.37 V, Cr³⁺/Cr = −0.74V
जितना अधिक ऋणात्मक मानक इलेक्ट्रोड विभव, उतनी ही प्रबल उस धातु की अपचायक क्षमता (क्योंकि वह इलेक्ट्रॉन देने की अधिक प्रवृत्ति रखती है)।
दिए गए E° मानों को घटते क्रम में लिखें: Ag(+0.80V) > Hg(+0.79V) > Cr(−0.74V) > Mg(−2.37V) > K(−2.93V)
अपचायक क्षमता E° के व्युत्क्रम क्रम में बढ़ती है — सबसे धनात्मक E° वाली धातु सबसे दुर्बल अपचायक, सबसे ऋणात्मक E° वाली धातु सबसे प्रबल अपचायक होती है।
बढ़ती हुई अपचायक क्षमता का क्रम: Ag < Hg < Cr < Mg < K
2.3 उस गैल्वेनी सेल को दर्शाइए जिसमें Zn(s)+2Ag⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+2Ag(s) अभिक्रिया होती है। बताइए: (i) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है? (ii) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन से हैं? (iii) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या है?
सेल का निरूपण: Zn(s) | Zn²⁺(aq) || Ag⁺(aq) | Ag(s) — यहाँ Zn ऑक्सीकृत (ऐनोड, बायीं ओर) तथा Ag⁺ अपचित (कैथोड, दायीं ओर) होता है।
(i) गैल्वेनी सेल में ऐनोड ऋणात्मक आवेशित होता है — अतः Zn इलेक्ट्रोड (ऐनोड) ऋणात्मक आवेशित है
(ii) सेल के भीतर (विलयन/लवण सेतु में) विद्युत-धारा के वाहक आयन हैं; बाह्य परिपथ (तार) में विद्युत-धारा के वाहक इलेक्ट्रॉन हैं।
(iii) ऐनोड (Zn) पर: Zn(s) → Zn²⁺(aq) + 2e⁻ (ऑक्सीकरण)
कैथोड (Ag) पर: 2Ag⁺(aq) + 2e⁻ → 2Ag(s) (अपचयन)
2.4 निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनी सेल का मानक सेल-विभव परिकलित कीजिए। (i) 2Cr(s)+3Cd²⁺(aq)→2Cr³⁺(aq)+3Cd (ii) Fe²⁺(aq)+Ag⁺(aq)→Fe³⁺(aq)+Ag(s) — उपरोक्त के लिए ΔrG° एवं साम्य स्थिरांकों की भी गणना कीजिए।
(i) E°(Cr³⁺/Cr) = −0.74 V, E°(Cd²⁺/Cd) = −0.40 V (मानक मान)। यहाँ Cd²⁺ अपचित होता है (कैथोड) व Cr ऑक्सीकृत होता है (ऐनोड)।
सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड = −0.40 − (−0.74) = +0.34 V
n = 6 (2Cr से 6e⁻ व 3Cd²⁺ को 6e⁻ चाहिए, LCM)। ΔrG° = −nFE° = −6×96487×0.34 = −196,873.9 J mol⁻¹ ≈ −196.87 kJ mol⁻¹
log KC = nE°/0.059 = (6×0.34)/0.059 = 34.58; अतः KC3.8 × 10³⁴
(ii) कैथोड: Ag⁺+e⁻→Ag, E°=0.80V। ऐनोड: Fe²⁺→Fe³⁺+e⁻, E°(Fe³⁺/Fe²⁺)=0.77V।
सेल = 0.80 − 0.77 = +0.03 V
n = 1। ΔrG° = −1×96487×0.03 = −2894.6 J mol⁻¹ ≈ −2.89 kJ mol⁻¹
log KC = (1×0.03)/0.059 = 0.508; KC3.23
2.5 निम्नलिखित सेलों की 298 K पर नेर्न्स्ट समीकरण एवं emf लिखिए। (i)–(iv)
(i) Mg(s)|Mg²⁺(0.001M)||Cu²⁺(0.0001M)|Cu(s):सेल=E°(Cu²⁺/Cu)−E°(Mg²⁺/Mg)=0.34−(−2.36)=2.70V; n=2.
Eसेल = 2.70 − (0.059/2)log([Mg²⁺]/[Cu²⁺]) = 2.70 − 0.0295×log(0.001/0.0001) = 2.70 − 0.0295×1 = 2.6705 ≈ 2.67 V
(ii) Fe(s)|Fe²⁺(0.001M)||H⁺(1M)|H₂(g)(1bar)|Pt(s):सेल=0−(−0.44)=0.44V; n=2; अभिक्रिया: Fe+2H⁺→Fe²⁺+H₂
Eसेल = 0.44 − (0.059/2)log([Fe²⁺]×P(H₂)/[H⁺]²) = 0.44 − 0.0295×log(0.001) = 0.44 + 0.0885 = 0.5285 ≈ 0.53 V
(iii) Sn(s)|Sn²⁺(0.050M)||H⁺(0.020M)|H₂(g)(1bar)|Pt(s):सेल=0−(−0.14)=0.14V; n=2; अभिक्रिया: Sn+2H⁺→Sn²⁺+H₂
Q=[Sn²⁺]/[H⁺]²=0.050/(0.020)²=125; Eसेल=0.14−(0.059/2)log(125)=0.14−0.0295×2.097=0.14−0.0619=0.078 V
(iv) Pt(s)|Br⁻(0.010M)|Br₂(l)||H⁺(0.030M)|H₂(g)(1bar)|Pt(s):सेल=0−1.09=−1.09V; n=1; अभिक्रिया: Br⁻+H⁺→½Br₂+½H₂
Q=P(H₂)^0.5/([Br⁻][H⁺])=1/(0.010×0.030)=3333.3; Eसेल=−1.09−0.059×log(3333.3)=−1.09−0.059×3.523=−1.09−0.208=−1.298 ≈ −1.30 V
2.6 घड़ियों एवं अन्य युक्तियों में अत्यधिक उपयोग में आने वाली बटन सेलों में निम्नलिखित अभिक्रिया होती है: Zn(s)+Ag₂O(s)+H₂O(l)→Zn²⁺(aq)+2Ag(s)+2OH⁻(aq) — अभिक्रिया के लिए ΔrG° एवं E° ज्ञात कीजिए।
मानक मान: Zn(s)→Zn²⁺(aq)+2e⁻ का ऑक्सीकरण विभव = +0.76V (E°(Zn²⁺/Zn)=−0.76V का उत्क्रम); Ag₂O(s)+H₂O(l)+2e⁻→2Ag(s)+2OH⁻(aq) का अपचयन विभव E° ≈ +0.344V।
सेल = E°कैथोड + (−E°ऐनोड, अपचयन) = 0.344 + 0.76 = 1.104 V
n = 2 (दोनों अर्ध अभिक्रियाओं में 2 इलेक्ट्रॉन)। ΔrG° = −nFE°सेल = −2×96487×1.104 = −213,043 J mol⁻¹
सेल1.104 V; ΔrG° ≈ −213.04 kJ mol⁻¹
2.7 किसी वैद्युतअपघट्य के विलयन की चालकता एवं मोलर चालकता की परिभाषा दीजिए। सांद्रता के साथ इनके परिवर्तन की विवेचना कीजिए।
चालकता (κ): किसी वैद्युतअपघटनी विलयन की चालकता, उस विलयन के इकाई आयतन (1 m लंबाई व 1 m² अनुप्रस्थ काट, दो प्लेटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच) का चालकत्व है। इसकी इकाई S m⁻¹ है। κ = 1/ρ।
मोलर चालकता (Λm): किसी दी गई सांद्रता पर विलयन की मोलर चालकता, उस विलयन के उस आयतन (V) का चालकत्व है जिसमें वैद्युतअपघट्य का ठीक 1 मोल घुला हो, जो कि इकाई दूरी पर स्थित इलेक्ट्रोडों के बीच रखा गया हो। Λm = κ/c, इकाई S m² mol⁻¹ (या S cm² mol⁻¹)।
सांद्रता के साथ परिवर्तन: तनुकरण के साथ κ हमेशा घटती है, क्योंकि प्रति इकाई आयतन आयनों की संख्या घटती है। इसके विपरीत, Λm तनुकरण के साथ हमेशा बढ़ती है, क्योंकि 1 मोल वैद्युतअपघट्य को समाहित करने वाला आयतन V बढ़ जाता है — और यह वृद्धि κ में होने वाली कमी से कहीं अधिक होती है।
प्रबल वैद्युतअपघट्यों के लिए Λm, c½ के घटने के साथ धीरे-धीरे (रेखीय रूप से) बढ़ती है, जबकि दुर्बल वैद्युतअपघट्यों के लिए अल्प सांद्रता के समीप यह वृद्धि बहुत तीव्र होती है।
2.8 298 K पर 0.20M KCl विलयन की चालकता 0.0248 S cm⁻¹ है। इसकी मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
सूत्र: Λm = κ×1000/c (जब κ को S cm⁻¹ में तथा c को mol L⁻¹ में लें)
Λm = (0.0248 S cm⁻¹ × 1000 cm³ L⁻¹) / 0.20 mol L⁻¹ = 24.8/0.20
Λm = 124 S cm² mol⁻¹
2.9 298 K पर एक चालकता सेल जिसमें 0.001 M KCl विलयन है, का प्रतिरोध 1500 Ω है। यदि 0.001M KCl विलयन की चालकता 298 K पर 0.146×10⁻³ S cm⁻¹ हो तो सेल स्थिरांक क्या है?
सूत्र: सेल स्थिरांक G* = κ × R
G* = 0.146×10⁻³ S cm⁻¹ × 1500 Ω = 0.219 cm⁻¹
सेल स्थिरांक G* = 0.219 cm⁻¹
2.10 298 K पर सोडियम क्लोराइड की विभिन्न सांद्रताओं पर चालकता का मापन किया गया (सारणी दी गई)। सभी सांद्रताओं के लिए Λm का परिकलन कीजिए एवं Λm तथा c½ के मध्य आलेख खींचिए। Λ°m का मान ज्ञात कीजिए।
सूत्र: Λm(S cm² mol⁻¹) = κ(S m⁻¹)×10 / मोलरता(mol L⁻¹) — चूँकि κ प्रश्न में S m⁻¹ में दी गई है, हम सीधे Λm = κ×10 / c से S cm² mol⁻¹ में परिकलित कर सकते हैं।
प्रत्येक सांद्रता के लिए:
c (mol/L)κ (S/m)Λm (S cm² mol⁻¹)c½
0.0010.01237123.70.0316
0.0100.1185118.50.100
0.0200.2315115.750.1414
0.0500.5553111.060.2236
0.1001.0674106.740.3162
Λm (y-अक्ष) तथा c½ (x-अक्ष) का आलेख लगभग एक सीधी रेखा देता है, जो NaCl (प्रबल वैद्युतअपघट्य) के लिए अपेक्षित है — ढाल ऋणात्मक है। इसे c½=0 तक बहिर्वेशित (extrapolate) करने पर अंत:खंड प्राप्त होता है।
बहिर्वेशन से प्राप्त Λ°m(NaCl) ≈ 126.4 S cm² mol⁻¹
2.11 0.00241 M ऐसीटिक अम्ल की चालकता 7.896×10⁻⁵ S cm⁻¹ है। इसकी मोलर चालकता को परिकलित कीजिए। यदि ऐसीटिक अम्ल के लिए Λ°m का मान 390.5 S cm² mol⁻¹ हो तो इसका वियोजन स्थिरांक क्या है?
Λm = κ×1000/c = (7.896×10⁻⁵ S cm⁻¹ × 1000 cm³/L) / 0.00241 mol/L = 0.07896/0.00241
Λm32.77 S cm² mol⁻¹
वियोजन मात्रा α = Λm/Λ°m = 32.77/390.5 = 0.0839
Ka = cα²/(1−α) = 0.00241×(0.0839)²/(1−0.0839) = 0.00241×0.007039/0.9161 ≈ 1.85×10⁻⁵
मोलर चालकता ≈ 32.77 S cm² mol⁻¹; वियोजन स्थिरांक Ka1.85 × 10⁻⁵ mol L⁻¹
2.12 निम्नलिखित के अपचयन के लिए कितने आवेश की आवश्यकता होगी? (i) 1 मोल Al³⁺ को Al में (ii) 1 मोल Cu²⁺ को Cu में (iii) 1 मोल MnO₄⁻ को Mn²⁺ में
(i) Al³⁺+3e⁻→Al, n=3। आवेश = 3×96487 = 2,89,461 C ≈ 2.89×10⁵ C
(ii) Cu²⁺+2e⁻→Cu, n=2। आवेश = 2×96487 = 1,92,974 C ≈ 1.93×10⁵ C
(iii) MnO₄⁻ में Mn का ऑक्सीकरण अंक +7 है, Mn²⁺ में +2 — अतः n=5। आवेश = 5×96487 = 4,82,435 C ≈ 4.82×10⁵ C
2.13 निम्नलिखित को प्राप्त करने में कितने फैराडे विद्युत की आवश्यकता होगी? (i) गलित CaCl₂ से 20.0 g Ca (ii) गलित Al₂O₃ से 40.0 g Al
(i) Ca²⁺+2e⁻→Ca; Ca का मोलर द्रव्यमान=40 g/mol। मोल Ca = 20.0/40 = 0.5 mol। आवश्यक फैराडे = n×मोल = 2×0.5 = 1 F
(ii) Al³⁺+3e⁻→Al; Al का मोलर द्रव्यमान=27 g/mol। मोल Al = 40.0/27 = 1.481 mol। आवश्यक फैराडे = 3×1.481 ≈ 4.44 F
2.14 निम्नलिखित को ऑक्सीकृत करने के लिए कितने कूलॉम विद्युत आवश्यक है? (i) 1 मोल H₂O को O₂ में। (ii) 1 मोल FeO को Fe₂O₃ में।
(i) 2H₂O(l) → O₂(g)+4H⁺(aq)+4e⁻ — इस समीकरण में 2 मोल H₂O से 4 मोल e⁻ मुक्त होते हैं, अतः 1 मोल H₂O से 2 मोल e⁻ मुक्त होंगे। आवेश = 2×96487 = 1,92,974 C ≈ 1.93×10⁵ C
(ii) FeO में Fe का ऑक्सीकरण अंक +2 है, Fe₂O₃ में +3 — प्रत्येक Fe परमाणु 1 इलेक्ट्रॉन खोता है, अतः 1 मोल FeO के लिए n=1। आवेश = 1×96487 = 96,487 C
2.15 Ni(NO₃)₂ के एक विलयन का प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के बीच 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करते हुए 20 मिनट तक विद्युत अपघटन किया गया। Ni की कितनी मात्रा कैथोड पर निक्षेपित होगी?
आवेश Q = I×t = 5 A × (20×60 s) = 5×1200 = 6000 C
Ni²⁺+2e⁻→Ni, n=2। मोल Ni = Q/(nF) = 6000/(2×96487) = 6000/192974 ≈ 0.0311 mol
Ni का मोलर द्रव्यमान ≈ 58.7 g/mol। द्रव्यमान = 0.0311 × 58.7
कैथोड पर निक्षेपित Ni का द्रव्यमान ≈ 1.83 g
2.16 ZnSO₄, AgNO₃ एवं CuSO₄ विलयन वाले तीन वैद्युतअपघटनी सेलों A,B,C को श्रेणीबद्ध किया गया एवं 1.5 ऐम्पियर की विद्युतधारा, सेल B के कैथोड पर 1.45 g सिल्वर निक्षेपित होने तक लगातार प्रवाहित की गई। विद्युतधारा कितने समय तक प्रवाहित हुई? निक्षेपित कॉपर एवं जिंक का द्रव्यमान क्या होगा?
Ag⁺+e⁻→Ag, n=1। Ag का मोलर द्रव्यमान=108 g/mol। मोल Ag=1.45/108=0.013426 mol
आवेश Q = n×F×मोल = 1×96487×0.013426 ≈ 1295.4 C। समय t = Q/I = 1295.4/1.5 ≈ 863.6 s ≈ 14.39 मिनट
श्रेणीबद्ध सेलों में समान आवेश प्रवाहित होता है। Cu²⁺+2e⁻→Cu, n=2, मोलर द्रव्यमान=63.5 g/mol। मोल Cu = 1295.4/(2×96487) ≈ 0.006713 mol। द्रव्यमान Cu = 0.006713×63.5 ≈ 0.426 g
Zn²⁺+2e⁻→Zn, n=2, मोलर द्रव्यमान≈65.4 g/mol। मोल Zn = 0.006713 mol (समान)। द्रव्यमान Zn = 0.006713×65.4 ≈ 0.439 g
अतः धारा प्रवाहित होने का समय ≈14.39 मिनट; निक्षेपित Cu ≈0.426 g; निक्षेपित Zn ≈0.439 g
2.17 तालिका 2.1 में दिए गए मानक इलैक्ट्रोड विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या निम्नलिखित अभिकर्मकों के बीच अभिक्रिया संभव है? (i)–(v)
(i) Fe³⁺(aq) और I⁻(aq): E°(Fe³⁺/Fe²⁺)=0.77V > E°(I₂/I⁻)=0.54V — अतः Fe³⁺, I⁻ को ऑक्सीकृत कर सकता है। अभिक्रिया संभव है: 2Fe³⁺+2I⁻→2Fe²⁺+I₂
(ii) Ag⁺(aq) और Cu(s): E°(Ag⁺/Ag)=0.80V > E°(Cu²⁺/Cu)=0.34V — अतः Ag⁺, Cu को ऑक्सीकृत कर सकता है। अभिक्रिया संभव है: 2Ag⁺+Cu→2Ag+Cu²⁺
(iii) Fe³⁺(aq) और Br⁻(aq): E°(Fe³⁺/Fe²⁺)=0.77V < E°(Br₂/Br⁻)=1.09V — Fe³⁺, Br⁻ से अधिक प्रबल ऑक्सीकारक नहीं है। अभिक्रिया संभव नहीं है।
(iv) Ag(s) और Fe³⁺(aq): E°(Ag⁺/Ag)=0.80V > E°(Fe³⁺/Fe²⁺)=0.77V — Fe³⁺, Ag को ऑक्सीकृत करने के लिए पर्याप्त प्रबल ऑक्सीकारक नहीं है (बहुत निकट परंतु प्रतिकूल)। अभिक्रिया संभव नहीं है (नगण्य सीमा तक)।
(v) Br₂(aq) और Fe²⁺(aq): E°(Br₂/Br⁻)=1.09V > E°(Fe³⁺/Fe²⁺)=0.77V — अतः Br₂, Fe²⁺ को ऑक्सीकृत कर सकता है। अभिक्रिया संभव है: Br₂+2Fe²⁺→2Br⁻+2Fe³⁺
2.18 निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए वैद्युतअपघटन से प्राप्त उत्पाद बताइए। (i)–(iv)
(i) सिल्वर इलैक्ट्रोडों के साथ AgNO₃ का जलीय विलयन: यहाँ इलेक्ट्रोड स्वयं अभिक्रियाशील हैं। ऐनोड पर Ag घुलता है (Ag→Ag⁺+e⁻) तथा कैथोड पर Ag निक्षेपित होता है (Ag⁺+e⁻→Ag)। विलयन की सांद्रता अपरिवर्तित रहती है — यह चाँदी के वैद्युतशोधन (इलेक्ट्रोरिफाइनिंग) का सिद्धांत है।
(ii) प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ AgNO₃ का जलीय विलयन: Pt अक्रिय है। कैथोड पर Ag⁺+e⁻→Ag (क्योंकि E°(Ag⁺/Ag)=0.80V, E°(H⁺/H₂)=0V से अधिक धनात्मक — Ag प्राथमिकता से निक्षेपित)। ऐनोड पर जल का ऑक्सीकरण होता है: 2H₂O→O₂+4H⁺+4e⁻। विलयन में HNO₃ बनता है।
(iii) प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ H₂SO₄ का तनु विलयन: कैथोड पर H₂ गैस बनती है (2H⁺+2e⁻→H₂)। तनु अम्ल में ऐनोड पर जल का ऑक्सीकरण वरीयता में होता है (E°=1.23V, SO₄²⁻ के ऑक्सीकरण E°=1.96V से कम): 2H₂O→O₂+4H⁺+4e⁻। शुद्धतः जल का वैद्युतअपघटन होता है — H₂ कैथोड पर, O₂ ऐनोड पर।
(iv) प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के साथ CuCl₂ का जलीय विलयन: कैथोड पर Cu निक्षेपित होता है (Cu²⁺+2e⁻→Cu, क्योंकि E°(Cu²⁺/Cu)=0.34V, H⁺ के अपचयन से वरीयता में)। ऐनोड पर Cl⁻ का ऑक्सीकरण होकर Cl₂ गैस बनती है (2Cl⁻→Cl₂+2e⁻) — यद्यपि जल के ऑक्सीकरण का E° सैद्धांतिक रूप से कम है, ऑक्सीजन के अधिविभव के कारण Cl₂ ही प्रमुख उत्पाद के रूप में प्राथमिकता से मुक्त होती है, विशेषकर सांद्र विलयन में।

🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (वैद्युतरसायन)

विगत वर्षों में NEET/AIPMT में पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

2026 · Q1 निम्न अर्ध-सेल का emf परिकलित कीजिए: Pt(s) | H₂(g, 2 atm) | HCl(aq, 0.02 M)
यह एक ऑक्सीकरण अर्ध-सेल है: H₂(g) → 2H⁺(aq) + 2e⁻, E° = 0 V, n=2
नेर्न्स्ट समीकरण: E = E° − (0.059/2) log{[H⁺]²/P(H₂)} = 0 − 0.0295 × log{(0.02)²/2}
(0.02)²/2 = 4×10⁻⁴/2 = 2×10⁻⁴; log(2×10⁻⁴) = log2 − 4 = 0.301 − 4 = −3.699
E = −0.0295×(−3.699) = 0.109 V — सही विकल्प: (a) 0.109 V
2026 · Q2 कॉपर सल्फेट के विलयन का 1.5 ऐम्पियर धारा से 10 मिनट तक वैद्युतअपघटन किया जाता है। कैथोड पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए (M(Cu)=63 g/mol; 1F=96487 C/mol)।
आवेश Q = I×t = 1.5×(10×60) = 900 C; Cu²⁺+2e⁻→Cu (n=2)
द्रव्यमान = (Q×M)/(n×F) = (900×63)/(2×96487) = 56700/192974 = 0.2938 g
सही उत्तर: 0.2938 g
NEET 2025 · Q1 0.050 mol L⁻¹ मोनोबेसिक दुर्बल अम्ल की मोलर चालकता (Λm) 90 S cm² mol⁻¹ है। इसकी वियोजन मात्रा (α) ज्ञात कीजिए (Λ°₊=349.6, Λ°₋=50.4 S cm² mol⁻¹)।
Λ°m = Λ°₊+Λ°₋ = 349.6+50.4 = 400 S cm² mol⁻¹
α = Λm/Λ°m = 90/400 = 0.225
सही उत्तर: (a) 0.225
NEET 2024 · Q1 सूची-I (अभिक्रिया) को सूची-II (आवश्यक फैराडे) से सुमेलित कीजिए: A. H₂O→O₂, B. MnO₄⁻→Mn²⁺, C. CaCl₂ से 1.5 mol Ca, D. FeO→Fe₂O₃
A: 2H₂O→O₂+4H⁺+4e⁻ ⇒ 4F ⇒ (III); B: MnO₄⁻+8H⁺+5e⁻→Mn²⁺+4H₂O ⇒ 5F ⇒ (IV)
C: Ca²⁺+2e⁻→Ca, 1.5×2=3F ⇒ (I); D: Fe²⁺→Fe³⁺ (1 e⁻ प्रति Fe), कुल 2F ⇒ (II)
सही उत्तर: (b) A-III, B-IV, C-I, D-II
NEET 2024 · Q2 कॉपर सल्फेट विलयन से भरे एक वोल्टमापी में 9.6487 A धारा 100 सेकंड तक प्रवाहित करने पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान (ग्राम में) ज्ञात कीजिए (M(Cu)=63 g/mol, 1F=96487C)।
Q = I×t = 9.6487×100 = 964.87 C; n=2 (Cu²⁺+2e⁻→Cu)
द्रव्यमान = (Q×M)/(n×F) = (964.87×63)/(2×96487) ≈ 0.315 g
सही उत्तर: (b) 0.315 g
NEET 2024 · Q3 कथन-I: 1 mol H₂O को O₂ में ऑक्सीकृत करने हेतु 2F विद्युत आवश्यक है। कथन-II: गलित Al₂O₃ से 40.0 g ऐलुमिनियम प्राप्त करने हेतु आवश्यक विद्युत 4.44 F है।
कथन-I असत्य: 2H₂O→O₂+4H⁺+4e⁻ (2 mol H₂O के लिए 4F चाहिए, अतः 1 mol H₂O के लिए 2F पर्याप्त नहीं है इस स्टॉइकियोमेट्री में)।
कथन-II सत्य: 40/27 = 1.4815 mol Al; Al³⁺+3e⁻→Al ⇒ 1.4815×3 ≈ 4.44 F
सही उत्तर: (d) कथन-I असत्य किन्तु कथन-II सत्य है
NEET 2024 · Q4 निम्न में से कौन सा संक्षारण (corrosion) का उदाहरण नहीं है?
वैद्युतअपघटन एक नियंत्रित प्रक्रिया है, पर्यावरणीय क्षरण नहीं — सही उत्तर: (b) जल के वैद्युतअपघटन से हाइड्रोजन का उत्पादन
NEET 2024 · Q5 सेल Zn|Zn²⁺(aq)||Fe²⁺(aq)|Fe का मानक सेल विभव 0.32 V है। अभिक्रिया Zn(s)+Fe²⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+Fe(s) के लिए मानक गिब्ज़ ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात कीजिए (1F=96487 C/mol)।
ΔG° = −nFE°; n=2, E°=0.32V
ΔG° = −2×96487×0.32 = −61,675.2 J/mol = −61.75 kJ/mol
सही उत्तर: (a) −61.75 kJ mol⁻¹
NEET 2023 · Q1 25°C पर सेंटीमोलर KCl विलयन की चालकता 0.0210 ohm⁻¹cm⁻¹ है तथा उसे रखने वाले सेल का प्रतिरोध 60 ohm है। सेल स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
सेल स्थिरांक (G*) = κ × R = 0.0210 × 60 = 1.26 cm⁻¹
सही उत्तर: (c) 1.26 cm⁻¹
NEET 2023 · Q2 अभिकथन-तर्क: A — समीकरण Δ_rG=−nFE_cell में Δ_rG का मान n पर निर्भर करता है। R — E_cell एक गहन (intensive) गुण है तथा Δ_rG एक व्यापक (extensive) गुण है।
E_cell गहन गुण है जबकि Δ_rG व्यापक गुण है — दोनों सत्य परंतु स्वतंत्र तथ्य। सही उत्तर: (b)
NEET 2023 · Q3 डिबाई-हकल-ऑनसागर समीकरण Λm=Λ°m−A√c के विषय में चार कथन दिए हैं (A: सभी वैद्युत्अपघट्यों पर लागू; B: A का मान विलायक की प्रकृति पर निर्भर; C: BaCl₂ व MgSO₄ के लिए A समान; D: BaCl₂ व Mg(OH)₂ के लिए A समान)। कौन से कथन सही हैं?
A सत्य (मुख्यतः प्रबल वैद्युत्अपघट्यों पर), B सत्य (A, विलायक के परावैद्युतांक व श्यानता पर निर्भर)
C व D असत्य — A आयनों के आवेश व गतिशीलता पर निर्भर करता है।
सही उत्तर: (a) (A) व (B) केवल
NEET 2023 · Q4 निम्न दो अर्ध-सेलों को जोड़ने पर सेल विभव ज्ञात कीजिए: Fe²⁺+2e⁻→Fe, E°=−0.44V; Cr₂O₇²⁻+14H⁺+6e⁻→2Cr³⁺+7H₂O, E°=+1.33V
Cr₂O₇²⁻→Cr³⁺ अपचयन (कैथोड); Fe²⁺→Fe ऑक्सीकरण (ऐनोड)
E°सेल = 1.33 − (−0.44) = 1.77 V
सही उत्तर: (a) +1.77 V
NEET 2023 · Q5 किसी विलयन की चालकता (0.248 S/m) व सांद्रता (0.2 mol/m³) से मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
Λm = κ/c = 0.248/0.2 = 1.24 S m² mol⁻¹
सही उत्तर: (b) 1.24 S m² mol⁻¹
NEET 2022 (Phase 2) · Q1 Al³⁺/Al (E°≈−1.66V) तथा Co³⁺/Co²⁺ (E°≈+1.81V) की अर्ध-सेल अभिक्रियाओं से बनने वाली संभावित (feasible) redox अभिक्रिया का मानक emf ज्ञात कीजिए।
Al ऑक्सीकृत (ऐनोड), Co³⁺ अपचयित (कैथोड)
E°सेल = 1.81 − (−1.66) = 3.47 V
सही उत्तर: (d) +3.47 V
NEET 2022 (Phase 2) · Q2 सेल अभिक्रिया Zn(s)+Cu²⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+Cu(s) के लिए मानक सेल विभव 1.1 V है। मानक गिब्ज़ ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात कीजिए (F=96487 C/mol)।
ΔG° = −2×96487×1.1 = −212,271.4 J/mol ≈ −212.27 kJ/mol
सही उत्तर: (c) −212.27 kJ mol⁻¹
NEET 2021 · Q1 NaCl, HCl तथा CH₃COONa की अनंत तनुता पर मोलर चालकताएँ क्रमशः 126.45, 426.16 तथा 91.0 S cm²mol⁻¹ हैं। CH₃COOH की अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
Λ°(CH₃COOH) = Λ°(CH₃COONa) + Λ°(HCl) − Λ°(NaCl)
= 91.0 + 426.16 − 126.45 = 390.71 S cm² mol⁻¹
सही उत्तर: (d) 390.71 S cm² mol⁻¹
NEET 2020 · Q1 तनु H₂SO₄ के प्लैटिनम इलेक्ट्रोड से वैद्युतअपघटन में ऐनोड पर प्राप्त उत्पाद बताइए।
ऐनोड पर जल का ऑक्सीकरण होता है: O₂ गैस
NEET 2020 · Q2 गलित CaCl₂ से 20 g कैल्शियम (M=40 g/mol) प्राप्त करने हेतु आवश्यक फैराडे (F) की संख्या ज्ञात कीजिए।
Ca²⁺+2e⁻→Ca; तुल्यांक द्रव्यमान = 40/2 = 20 g; तुल्यांकों की संख्या = 20/20 = 1
सही उत्तर: 1 F
NEET 2019 · Q1 एकल-इलेक्ट्रॉन वाले सेल के लिए E°सेल=0.59V (298K) है। सेल अभिक्रिया का साम्य स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
log K = nE°/0.059 = (1×0.59)/0.059 = 10 ⇒ K = 10¹⁰
सही उत्तर: (c) 1.0×10¹⁰
NEET 2019 · Q2 298K पर एक सेल अभिक्रिया (n=2, E°=0.24V) के लिए मानक गिब्ज़ ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात कीजिए (F=96500 C/mol)।
ΔG° = −2×96500×0.24 = −46,320 J/mol = −46.32 kJ/mol
सही उत्तर: (a) −46.32 kJ mol⁻¹
NEET 2018 · Q1 ब्रोमीन की विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं के लैटीमर आरेख (emf मान सहित) दिए गए हैं। बताइए कौन सी स्पीशीज़ विषमानुपातन (disproportionation) से गुजरेगी?
विषमानुपातन के लिए E°सेल = E°(दायाँ) − E°(बायाँ) धनात्मक होना चाहिए
HBrO के लिए: E°सेल = 1.595 − 1.5 = +0.095V (धनात्मक)
सही उत्तर: (d) HBrO
NEET 2017 · Q1 डेनियल सेल Zn|ZnSO₄||CuSO₄|Cu का emf E₁ है। जब ZnSO₄ की सांद्रता 1.0M व CuSO₄ की 0.01M कर दी जाए तो emf E₂ हो जाता है। E₁ व E₂ में सम्बन्ध बताइए (RT/F=0.059)।
नेर्न्स्ट समीकरण से, [Cu²⁺] घटने व [Zn²⁺] के अनुपात में परिवर्तन से log पद धनात्मक हो जाता है, जिससे E घटता है — अतः E₂ < E₁
सही उत्तर: (b) E₁ > E₂
NEET 2016 (Phase 2) · Q1 298K पर 0.5 mol/dm³ AgNO₃ विलयन (चालकता 5.76×10⁻³ S cm⁻¹) की मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
Λm = κ×1000/c = 5.76×10⁻³×1000/0.5 = 11.52 S cm² mol⁻¹
सही उत्तर: (b) 11.52 S cm² mol⁻¹
NEET 2016 (Phase 2) · Q2 यदि किसी अभिक्रिया के लिए E°सेल का मान ऋणात्मक हो, तो ΔG° व K_eq के लिए कौन सा सम्बन्ध सही है?
E°सेल ऋणात्मक ⇒ ΔG° = −nFE° धनात्मक ⇒ ΔG° > 0; ΔG° = −RT ln K ⇒ K < 1
सही उत्तर: (a) ΔG° > 0; K_eq < 1
NEET 2016 (Phase 2) · Q3 गलित सोडियम क्लोराइड के वैद्युतअपघटन में 3 ऐम्पियर धारा से 0.10 mol Cl₂ गैस उत्पन्न करने में लगने वाला समय ज्ञात कीजिए।
2Cl⁻→Cl₂+2e⁻; 0.10 mol Cl₂ के लिए 0.20 mol e⁻ = 0.20×96487 C ≈ 19,297 C
t = Q/I = 19,297/3 ≈ 6433.3 s ≈ 107.2 मिनट ≈ 110 मिनट
सही उत्तर: (b) 110 मिनट
NEET 2016 (Phase 2) · Q4 लोहे पर जिंक की परत चढ़ाकर गैल्वेनाइज़्ड आयरन बनाया जा सकता है, परंतु विपरीत संभव नहीं — क्यों?
E°(Zn²⁺/Zn) = −0.76V, E°(Fe²⁺/Fe) = −0.44V — जिंक का ऋणात्मक विभव लोहे से अधिक है, अतः Zn पहले संक्षारित होता है।
सही उत्तर: (d) जिंक का ऋणात्मक इलेक्ट्रोड विभव लोहे से अधिक है
2015 · Q1 निम्न में से किस यौगिक का जलीय विलयन विद्युत का सर्वोत्तम चालक है?
HCl प्रबल वैद्युत्अपघट्य — सही उत्तर: (a) HCl
2015 · Q2 हाइड्रोजन व मेथेन जैसे ईंधनों के दहन की ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली युक्ति कहलाती है:
सही उत्तर: (b) ईंधन सेल
2014 · Q1 0.1 mol H₂O₂ के पूर्ण ऑक्सीकरण (O₂ में) हेतु आवश्यक विद्युत की मात्रा ज्ञात कीजिए।
H₂O₂ → O₂ + 2H⁺ + 2e⁻ (n=2 प्रति मोल); 0.1 mol के लिए आवेश = 0.1×2×96500 = 19,300 C
सही उत्तर: 19,300 C (मूल विकल्पों के अनुसार 9650 C यदि n=1 माना गया हो — परंतु सटीक 19,300 C है)
2014 · Q2 5600 mL O₂ (STP पर) मुक्त करने वाली विद्युत की मात्रा से निक्षेपित सिल्वर (परमाणु भार=108) का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
O₂ का तुल्यांक द्रव्यमान = 8; 5600 mL/22400 mL = 0.25 mol O₂ = 1 mol तुल्यांक
Ag का तुल्यांक द्रव्यमान = 108 (n=1); अतः 1 mol Ag = 108 g
सही उत्तर: 108.0 g

NEET सम्बंधित तथ्य Anya तथ्य

प्रश्न-पैटर्न, भार-विभाजन व बार-बार दोहराई जाने वाली अवधारणाएँ।

प्रश्न-पैटर्न व भार-विभाजन
  • 2014 से 2026 के मध्य NEET में वैद्युतरसायन अध्याय से लगभग हर वर्ष 1–3 प्रश्न पूछे गए हैं।
  • प्रश्न मुख्यतः इलेक्ट्रोड विभव, नेर्न्स्ट समीकरण, फैराडे नियम, कोलराउश नियम व चालकता पर आधारित होते हैं।
बार-बार पूछी जाने वाली अवधारणाएँ
  • ΔG° = −nFE°सेल तथा log K = nE°सेल/0.059 (298K पर)।
  • नेर्न्स्ट समीकरण: E = E° − (0.059/n) log Q (298K पर)।
  • फैराडे प्रथम नियम: m = (Q M)/(n F)।
  • कोलराउश नियम: Λ°m = ν₊λ°₊ + ν₋λ°₋ (दुर्बल वैद्युत्अपघट्यों के Λ°m ज्ञात करने के लिए)।
  • मानक इलेक्ट्रोड विभव: Zn²⁺/Zn (−0.76), Cu²⁺/Cu (+0.34), Ag⁺/Ag (+0.80), MnO₄⁻/Mn²⁺ (+1.51) आदि।
  • गैल्वेनाइज़ेशन व बलिदानी सुरक्षा (जिंक का लोहे से अधिक ऋणात्मक E°)।
  • संक्षारण एक वैद्युतरासायनिक प्रक्रिया — जल फिल्म विद्युत्अपघट्य का कार्य करती है।
  • ईंधन सेल (H₂-O₂) — दक्षता ≈70%।
तैयारी हेतु सुझाव: इन प्रश्नों को बिना उत्तर देखे हल करें, गलती होने पर संबंधित अनुभाग में वापस जाएँ।

अन्य NEET संबंधित तथ्य

तुलनात्मक
  • गैल्वेनी सेल बनाम वैद्युतअपघटनी सेल में एनोड-कैथोड की ध्रुवता उलटी होती है — गैल्वेनी सेल में एनोड ऋणात्मक, कैथोड धनात्मक; वैद्युतअपघटनी में विपरीत।
  • सेल विभव (E_cell) बनाम EMF — शून्य धारा पर EMF, अन्यथा सेल विभव (आंतरिक प्रतिरोध के कारण कम)।
महत्वपूर्ण
  • SHE का मानक अपचयन विभव = 0.00 V (1 atm H₂, 1M H⁺, 298K)।
  • सेल संकेतन: ऐनोड | विलयन || विलयन | कैथोड — जैसे Zn(s)|Zn²⁺||Cu²⁺|Cu(s)।
तुलनात्मक
  • मोलर चालकता बनाम तुल्यांकी चालकता — Λm = Λeq × n-गुणांक (n = आवेश संख्या)।
  • प्रबल बनाम दुर्बल वैद्युत्अपघट्य का Λm व्यवहार — प्रबल का Λm बनाम √c रेखीय, दुर्बल का तीव्र वृद्धि, Λ°m केवल कोलराउश से।
तथ्य
  • प्राथमिक सेल बनाम द्वितीयक — प्राथमिक (शुष्क, मर्करी) एक बार; द्वितीयक (लेड संचायक, Ni-Cd) पुनः आवेशित।
  • अधिविभव (overpotential) — गैसों के मुक्त होने में अतिरिक्त विभव की आवश्यकता; Cl₂ प्राथमिकता से जल के ऑक्सीकरण पर।

वैद्युतरसायन — NCERT कक्षा 12, अध्याय 2 · संपूर्ण अध्ययन नोट्स, सूत्र, आरेख, सभी पाठ्यनिहित तथा अभ्यास प्रश्नों के हल, तथा NEET में पूछे गए सभी प्रश्न सहित।

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