वैद्युतरसायन (Electrochemistry)
गैल्वेनी व वैद्युतअपघटनी सेलों से लेकर नेर्न्स्ट समीकरण, चालकत्व, कोलराउश नियम, फैराडे के नियम, बैटरियाँ, ईंधन सेल तथा संक्षारण तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, त्वरित तथ्य, आरेख और सभी पाठ्यनिहित व अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही जगह।
2.1 वैद्युत रासायनिक सेल
वैद्युतरसायन का अध्ययन रासायनिक अभिक्रियाओं से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने तथा विपरीतत: विद्युत ऊर्जा का उपयोग उन रासायनिक अभिक्रियाओं को कराने में होता है जो स्वतः अग्रसारित नहीं होतीं। बहुत सारी धातुएँ, सोडियम हाइड्रॉक्साइड, क्लोरीन, फ्लुओरीन आदि रसायन वैद्युतरासायनिक विधियों द्वारा बनाए जाते हैं। बैटरियाँ एवं ईंधन सेल रासायनिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
डेन्यल सेल इसका सबसे सरल उदाहरण है, जिसमें जिंक एवं कॉपर इलेक्ट्रोड अपने-अपने लवणों के विलयनों में निमज्ज रहते हैं। यह सेल निम्नलिखित रेडॉक्स अभिक्रिया में उत्सर्जित रासायनिक ऊर्जा को वैद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है:
जब Zn²⁺ तथा Cu²⁺ आयनों की सांद्रता एक इकाई (1 mol dm⁻³) होती है, तो इसका विद्युतीय विभव 1.1 V होता है। इस प्रकार की युक्ति को गैल्वेनी या वोल्टीय सेल कहते हैं।
यदि गैल्वेनी सेल में एक विपरीत बाह्य विभव लगाया जाए और इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाए, तो अभिक्रिया तब तक चलती रहती है जब तक कि बाह्य विभव 1.1 V नहीं हो जाता — इस स्थिति में अभिक्रिया पूर्णतः रुक जाती है एवं सेल में धारा प्रवाहित नहीं होती। बाह्य विभव में और वृद्धि करने पर अभिक्रिया पुनः परंतु विपरीत दिशा में प्रारंभ हो जाती है — अब यह वैद्युतअपघटनी सेल के समान कार्य करती है, जो एक स्वतः अप्रवर्तित रासायनिक अभिक्रिया को विद्युतीय ऊर्जा के उपयोग से प्रारंभ करने की युक्ति है।
| Eबाह्य की स्थिति | इलेक्ट्रॉन प्रवाह | प्रकृति |
|---|---|---|
| Eबाह्य < 1.1 V | Zn छड़ से Cu छड़ की ओर | गैल्वेनी सेल की तरह — Zn घुलता है, Cu निक्षेपित होता है |
| Eबाह्य = 1.1 V | कोई प्रवाह नहीं | साम्यावस्था — I = 0 |
| Eबाह्य > 1.1 V | Cu से Zn की ओर | वैद्युतअपघटनी सेल — Zn निक्षेपित, Cu घुलता है |
- वैद्युतरसायन रासायनिक ऊर्जा ↔ विद्युत ऊर्जा के अंतर-रूपांतरण का अध्ययन है।
- डेन्यल सेल में Zn(s)+Cu²⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+Cu(s) अभिक्रिया होती है, मानक विभव 1.1 V।
- गैल्वेनी (वोल्टीय) सेल: रासायनिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा (स्वतः अभिक्रिया)।
- वैद्युतअपघटनी सेल: विद्युत ऊर्जा → रासायनिक अभिक्रिया (अस्वतः अभिक्रिया)।
- Eबाह्य=1.1V पर धारा शून्य होती है — यही साम्यावस्था है।
2.2 गैल्वेनी सेल
गैल्वेनी सेल एक वैद्युतरासायनिक सेल है जो स्वतः रेडॉक्स अभिक्रिया की रासायनिक ऊर्जा को विद्युतीय ऊर्जा में रूपांतरित करती है। डेन्यल सेल की अभिक्रिया दो अर्ध सेल अभिक्रियाओं का संयोजन है:
(ii) Zn(s) → Zn²⁺ + 2e⁻ (ऑक्सीकरण, ऐनोड पर) (2.3)
जिस अर्ध सेल में ऑक्सीकरण होता है उसे ऐनोड कहते हैं (विलयन के सापेक्ष ऋणात्मक), जिसमें अपचयन होता है उसे कैथोड कहते हैं (विलयन के सापेक्ष धनात्मक)। इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक इलेक्ट्रोड से धनात्मक इलेक्ट्रोड की ओर प्रवाहित होते हैं — धारा की दिशा इसके विपरीत होती है।
2.2.1 इलेक्ट्रोड विभव का मापन
अकेले अर्ध सेल के विभव का मापन नहीं किया जा सकता — केवल दो अर्ध सेलों के विभवों में अंतर मापा जा सकता है। इसके लिए एक संदर्भ इलेक्ट्रोड, मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE), को स्वेच्छा से शून्य विभव मान लिया गया है: Pt(s)|H₂(g, 1 bar)|H⁺(aq, 1M), जिसका विभव सभी तापों पर शून्य निर्दिष्ट है।
किसी भी अर्ध सेल को SHE के साथ जोड़कर बनाई गई सेल का 298K पर मापित emf उस अर्ध सेल का मानक अपचयन विभव (अब IUPAC के अनुसार मानक इलेक्ट्रोड विभव) देता है।
| सेल | मापित emf | निष्कर्ष |
|---|---|---|
| Pt|H₂(1bar)|H⁺(1M)||Cu²⁺(1M)|Cu | +0.34 V | E°(Cu²⁺/Cu) = 0.34 V — Cu²⁺, H⁺ से आसानी से अपचित |
| Pt|H₂(1bar)|H⁺(1M)||Zn²⁺(1M)|Zn | −0.76 V | E°(Zn²⁺/Zn) = −0.76 V — H⁺, Zn को ऑक्सीकृत कर सकता है |
कभी-कभी Pt व Au जैसी अक्रिय धातुएँ इलेक्ट्रॉनों के चालन हेतु प्रयुक्त होती हैं (जैसे हाइड्रोजन व ब्रोमीन इलेक्ट्रोड)। मानक इलेक्ट्रोड विभव की सारणी से हम कई महत्वपूर्ण सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं: जितना अधिक धनात्मक E°, अपचित अवस्था उतनी ही स्थायी और स्पीशीज़ उतना ही प्रबल ऑक्सीकारक; जितना अधिक ऋणात्मक E°, स्पीशीज़ उतना ही प्रबल अपचायक।
- ऐनोड पर ऑक्सीकरण, कैथोड पर अपचयन होता है — यह गैल्वेनी व वैद्युतअपघटनी दोनों सेलों में सत्य है।
- गैल्वेनी सेल में ऐनोड ऋणात्मक तथा कैथोड धनात्मक होता है (विपरीत वैद्युतअपघटनी सेल में)।
- SHE का मानक विभव सभी तापों पर 0.00 V निर्धारित है।
- मानक इलेक्ट्रोड विभव का धनात्मक मान ⇒ अपचित अवस्था अधिक स्थायी; ऋणात्मक मान ⇒ ऑक्सीकृत अवस्था (अपचायक) अधिक स्थायी।
- सारणी 2.1 में F₂ सबसे प्रबल ऑक्सीकारक (E°=2.87V) तथा Li सबसे प्रबल अपचायक (E°=−3.05V) है।
- Eसेल = Eकैथोड − Eऐनोड (दोनों अपचयन विभवों का अंतर)।
2.3 नेर्न्स्ट समीकरण
पूर्व में हमने माना कि इलेक्ट्रोड अभिक्रिया में प्रयुक्त सभी स्पीशीज़ की सांद्रता एक इकाई है। नेर्न्स्ट ने दर्शाया कि अभिक्रिया Mⁿ⁺(aq) + ne⁻ → M(s) के लिए किसी भी सांद्रता पर मापा गया विभव:
Eसेल = E°सेल − (RT/nF) ln Q = E°सेल − (RT/nF) ln{[C]c[D]d / [A]a[B]b} (2.13)
प्राकृतिक लघुगणक को log₁₀ में बदलकर एवं R, F के मान (T=298K पर) रखने पर 2.303RT/F = 0.059 V प्राप्त होता है:
डेन्यल सेल के लिए: Eसेल = E°सेल − (0.059/2) log([Zn²⁺]/[Cu²⁺])। यह स्पष्ट है कि Cu²⁺ की सांद्रता बढ़ाने पर Eसेल बढ़ता है तथा Zn²⁺ की सांद्रता बढ़ाने पर घटता है।
2.3.1 नेर्न्स्ट समीकरण से साम्य स्थिरांक
जब परिपथ बंद रहने पर पर्याप्त समय बाद साम्य स्थापित हो जाता है, तो सेल विभव शून्य (Eसेल=0) हो जाता है और वोल्टमीटर शून्य पठनांक दर्शाता है। इस स्थिति में:
इस सूत्र द्वारा वह साम्य स्थिरांक भी ज्ञात किया जा सकता है, जिसे अन्य प्रकार मापना कठिन हो।
2.3.2 वैद्युतरासायनिक सेल अभिक्रिया की गिब्ज़ ऊर्जा
यदि गैल्वेनी सेल से अधिकतम कार्य लेना हो तो आवेश का प्रवाह उत्क्रमणीय करना होगा। गैल्वेनी सेल द्वारा किया गया उत्क्रमणीय कार्य गिब्ज़ ऊर्जा में कमी के बराबर होता है:
समस्त स्पीशीज़ की सांद्रता इकाई हो तो: ΔrG° = −nFE°सेल (2.16)
ΔrG° = −RT ln K
- नेर्न्स्ट समीकरण: Eसेल=E°सेल−(0.059/n)log Q (298K पर)।
- साम्यावस्था पर Eसेल=0 तथा Q=KC।
- E°सेल=(0.059/n) log KC — मानक विभव से साम्य स्थिरांक ज्ञात किया जा सकता है।
- ΔrG° = −nFE°सेल तथा ΔrG° = −RT ln K — दोनों संबंध एक-दूसरे से जुड़े हैं।
- F (फैराडे स्थिरांक) = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹।
- R = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹।
2.4 वैद्युतअपघटनी विलयनों का चालकत्व
विद्युतीय प्रतिरोध R, ओम (Ω) में मापा जाता है तथा वस्तु की लंबाई l के अनुक्रमानुपाती व अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A के प्रतिलोमानुपाती होता है:
चालकत्व G = 1/R = A/(ρl) = κ(A/l) (2.18)
चालकता (विशिष्ट चालकत्व) κ = 1/ρ, इकाई S m⁻¹ (या S cm⁻¹)
| वर्ग | उदाहरण | चालकता (S m⁻¹) |
|---|---|---|
| चालक | सिल्वर, कॉपर, गोल्ड | 10³ – 10⁷ |
| वैद्युतरोधी | काँच, टेफ़्लॉन | 10⁻¹⁶ – 10⁻¹⁸ |
| अर्धचालक | Si, Ge, CuO | 10⁻⁷ – 10² |
2.4.1 आयनिक विलयनों की चालकता का मापन
विलयन के प्रतिरोध मापन में दो समस्याएँ हैं: (i) दिष्ट धारा (DC) से विलयन का संघटन बदल जाता है — इसका समाधान प्रत्यावर्ती धारा (AC) के प्रयोग से किया जाता है। (ii) विलयन को धातु तार की तरह ब्रिज से नहीं जोड़ा जा सकता — इसके लिए विशेष चालकता सेल प्रयुक्त होता है।
(यह ज्ञात चालकता वाले KCl विलयन से पूर्व-निर्धारित किया जाता है)
फिर: κ = सेल स्थिरांक / R = G*/R (2.20)
हीट्स्टोन ब्रिज (सेतु) की सहायता से अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात किया जाता है — दोलित्र O (550–5000 चक्रण/सेकंड की AC), दो निश्चित प्रतिरोध R₃,R₄, परिवर्तनीय प्रतिरोध R₁ तथा अज्ञात प्रतिरोध R₂ वाली चालकता सेल का प्रयोग होता है। संतुलन पर: R₂ = R₁R₄/R₃ (2.19)
मोलर चालकता
1 S m² mol⁻¹ = 10⁴ S cm² mol⁻¹
2.4.2 सांद्रता के साथ चालकता एवं मोलर चालकता में परिवर्तन
सांद्रता घटाने पर चालकता हमेशा घटती है (प्रति इकाई आयतन में आयनों की संख्या घटती है), जबकि मोलर चालकता बढ़ती है (कुल आयतन V, जिसमें 1 मोल घुला है, में वृद्धि, κ में कमी से अधिक होती है)।
| प्रकार | Λm बनाम c½ का व्यवहार | सूत्र |
|---|---|---|
| प्रबल वैद्युतअपघट्य | ऋणात्मक ढाल की सीधी रेखा; तनुता से धीरे-धीरे बढ़ती है | Λm = Λ°m − A·c½ (2.23) — देब्ये-हुकल-ऑन्सेगर समीकरण |
| दुर्बल वैद्युतअपघट्य | अल्प सांद्रता के समीप तेज़ी से बढ़ती है — बहिर्वेशन संभव नहीं | Λ°m कोलराउश नियम से प्राप्त होता है |
कोलराउश का आयनों के स्वतंत्र अभिगमन का नियम
कोलराउश ने पाया कि किसी वैद्युतअपघट्य की अनंत तनुता पर मोलर चालकता उसके धनायन एवं ऋणायन के अलग-अलग योगदानों के योग के बराबर होती है:
उदाहरण: Λ°m(NaCl) = λ°Na⁺ + λ°Cl⁻ (2.24)
अनुप्रयोग: इस नियम से किसी भी वैद्युतअपघट्य (यहाँ तक कि दुर्बल वैद्युतअपघट्यों, जिनका Λ°m बहिर्वेशन से नहीं मिलता) का Λ°m ज्ञात आयनिक चालकताओं से परिकलित किया जा सकता है।
Ka = cα²/(1−α) = cΛm² / [Λ°m(Λ°m−Λm)] (2.27)
- चालकता κ = 1/ρ, इकाई S m⁻¹; मोलर चालकता Λm = κ/c, इकाई S m² mol⁻¹ या S cm² mol⁻¹।
- 1 S cm² mol⁻¹ = 10⁻⁴ S m² mol⁻¹।
- सेल स्थिरांक G* = l/A = R·κ; ज्ञात KCl विलयन से मानकीकृत किया जाता है।
- सांद्रता घटाने पर κ घटती है, Λm बढ़ती है — दोनों ही आयनों की संख्या/उपलब्ध आयतन के कारण।
- प्रबल वैद्युतअपघट्य: Λm = Λ°m − Ac½ (रेखीय संबंध, बहिर्वेशन संभव)।
- दुर्बल वैद्युतअपघट्य: Λ°m बहिर्वेशन से नहीं, कोलराउश नियम से प्राप्त होता है।
- कोलराउश नियम: Λ°m = ν₊λ°₊ + ν₋λ°₋ (आयनों का स्वतंत्र अभिगमन)।
- दुर्बल वैद्युतअपघट्य के लिए α = Λm/Λ°m तथा Ka = cα²/(1−α)।
2.5 वैद्युतअपघटनी सेल एवं वैद्युतअपघटन
वैद्युतअपघटनी सेल में रासायनिक अभिक्रिया कराने के लिए विभव का बाह्य स्रोत प्रयुक्त होता है। उदाहरण: CuSO₄ के जलीय विलयन में दो कॉपर इलेक्ट्रोड — DC विभव लगाने पर:
ऐनोड पर: Cu(s) → Cu²⁺(aq) + 2e⁻ (2.29)
अशुद्ध कॉपर को ऐनोड बनाकर धारा प्रवाहित करने पर वह विलीन होता है एवं शुद्ध कॉपर कैथोड पर निक्षेपित होता है — यही औद्योगिक कॉपर शुद्धिकरण का आधार है। Na, Mg, Al जैसी धातुएँ, जिनके लिए उपयुक्त रासायनिक अपचायक नहीं मिलता, संगत धनायनों के वैद्युतरासायनिक अपचयन द्वारा वृहद स्तर पर उत्पादित की जाती हैं (जैसे गलित NaCl से Na, क्रायोलाइट में Al₂O₃ से Al)।
फैराडे के वैद्युतअपघटन के नियम
Q = It (Q कुलॉम में, I ऐम्पियर में, t सेकंड में)
फैराडे स्थिरांक (F): एक मोल इलेक्ट्रॉनों पर आवेश = NA × 1.6021×10⁻¹⁹ C = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹। धातुओं के औद्योगिक उत्पादन में ~50,000 ऐम्पियर तक धारा प्रयुक्त होती है (≈0.518F प्रति सेकंड)।
2.5.1 वैद्युतअपघटन के उत्पाद
उत्पाद अपघटित होने वाले पदार्थों की अवस्था तथा इलेक्ट्रोड के प्रकार (अक्रिय जैसे Pt/Au, या अभिक्रियाशील) पर निर्भर करते हैं। इसके अतिरिक्त कुछ अभिक्रियाएँ गतिकीय रूप से धीमी होने के कारण एक अतिरिक्त अधिविभव (overpotential) की आवश्यकता होती है — जैसे जल के ऑक्सीकरण की अपेक्षा Cl⁻ के ऑक्सीकरण को वरीयता मिलना (यद्यपि O₂ का E° कम है)।
| वैद्युतअपघट्य | कैथोड पर | ऐनोड पर |
|---|---|---|
| गलित NaCl | Na⁺+e⁻→Na | Cl⁻→½Cl₂+e⁻ |
| NaCl जलीय विलयन | H₂O+e⁻→½H₂+OH⁻ (H⁺ के स्थान पर, क्योंकि E°(H⁺/H₂)>E°(Na⁺/Na)) | Cl⁻→½Cl₂+e⁻ (अधिविभव के कारण, यद्यपि जल का E° कम) |
| तनु H₂SO₄ | H₂ गैस | O₂ गैस (जल का ऑक्सीकरण वरीयता में) |
| सांद्र H₂SO₄ | H₂ गैस | S₂O₈²⁻ (SO₄²⁻ का ऑक्सीकरण वरीयता में) |
- फैराडे का प्रथम नियम: वैद्युतअपघटन में विघटित पदार्थ की मात्रा ∝ प्रवाहित आवेश Q=It।
- फैराडे का द्वितीय नियम: विभिन्न वैद्युतअपघट्यों में समान आवेश से मुक्त पदार्थों की मात्रा उनके तुल्यांकी द्रव्यमान के समानुपाती।
- 1 फैराडे (1F) = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹ (1 मोल इलेक्ट्रॉनों का आवेश)।
- अक्रिय इलेक्ट्रोड (Pt, Au) अभिक्रिया में भाग नहीं लेते, केवल इलेक्ट्रॉनों का स्रोत/सिंक होते हैं।
- वैद्युतअपघटन के उत्पाद उपस्थित विभिन्न ऑक्सीकारक/अपचायक स्पीशीज़ के मानक इलेक्ट्रोड विभवों व अधिविभव पर निर्भर करते हैं।
- Na, Mg जैसी अति-अपचायक धातुएँ केवल वैद्युतअपघटन द्वारा प्राप्त होती हैं, रासायनिक अपचयन से नहीं।
2.6 बैटरियाँ
कोई भी बैटरी (एक या अधिक सेल श्रेणीबद्ध) मूलतः एक गैल्वेनी सेल है। बैटरियाँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं — प्राथमिक तथा संचायक।
2.6.1 प्राथमिक बैटरियाँ
प्राथमिक बैटरियों में अभिक्रिया केवल एक बार होती है — प्रयोग के बाद बैटरी निष्क्रिय हो जाती है, पुनः प्रयोग में नहीं लाई जा सकती।
| प्राथमिक सेल | ऐनोड | कैथोड | वैद्युतअपघट्य | विभव |
|---|---|---|---|---|
| शुष्क (लैक्लांशे) सेल | Zn(s)→Zn²⁺+2e⁻ | MnO₂+NH₄⁺+e⁻→MnO(OH)+NH₃ | NH₄Cl+ZnCl₂ नम पेस्ट | ≈1.5 V |
| मर्क्यूरी सेल | Zn(Hg)+2OH⁻→ZnO(s)+H₂O+2e⁻ | HgO+H₂O+2e⁻→Hg(l)+2OH⁻ | KOH+ZnO पेस्ट | ≈1.35 V (स्थिर) |
2.6.2 संचायक बैटरियाँ (Secondary Batteries)
इन्हें उपयोग के बाद विपरीत दिशा में धारा प्रवाहित कर पुनः आवेशित किया जा सकता है — कई बार डिस्चार्ज/चार्ज चक्र संभव।
कैथोड: PbO₂(s) + SO₄²⁻(aq) + 4H⁺(aq) + 2e⁻ → PbSO₄(s) + 2H₂O(l)
समग्र: Pb(s) + PbO₂(s) + 2H₂SO₄(aq) → 2PbSO₄(s) + 2H₂O(l)
चार्जिंग करने पर उपरोक्त अभिक्रिया उत्क्रमित हो जाती है — PbSO₄(s), पुनः Pb व PbO₂ में बदल जाता है। निकैल कैडमियम सेल दूसरा महत्वपूर्ण संचायक सेल है (अधिक कार्य अवधि, अधिक निर्माण लागत):
- प्राथमिक बैटरियाँ केवल एक बार प्रयुक्त होती हैं, पुनः आवेशित नहीं की जा सकतीं (लैक्लांशे सेल, मर्क्यूरी सेल)।
- लैक्लांशे (शुष्क) सेल का विभव ≈1.5 V; मर्क्यूरी सेल का विभव ≈1.35 V (स्थिर)।
- संचायक बैटरियों को उपयोग के बाद पुनः आवेशित किया जा सकता है (लेड संचायक, Ni-Cd सेल)।
- लेड संचायक में वैद्युतअपघट्य 38% H₂SO₄; ऐनोड Pb, कैथोड PbO₂ से भरा ग्रिड।
- Ni-Cd सेल की कार्य अवधि लेड संचायक से अधिक परंतु निर्माण लागत भी अधिक होती है।
2.7 ईंधन सेल
ऊष्मीय संयंत्रों से विद्युत उत्पादन दक्षता की दृष्टि से सीमित (≈40%) है तथा प्रदूषण का बड़ा स्रोत है। ऐसी गैल्वेनी सेलें जिनमें हाइड्रोजन, मेथेन, मेथेनॉल आदि जैसे ईंधनों की दहन ऊर्जा को सीधे ही विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है, ईंधन सेल कहलाती हैं।
सबसे सफल ईंधन सेल में H₂ व O₂ के संयोग से जल बनने की अभिक्रिया का उपयोग किया जाता है — इसे अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में प्रयोग किया गया था; प्राप्त जल वाष्प का उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों के पेयजल के रूप में किया गया।
ऐनोड: 2H₂(g) + 4OH⁻(aq) → 4H₂O(l) + 4e⁻
समग्र: 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)
जब तक अभिक्रियकों की आपूर्ति होती है, सेल लगातार कार्य करती है। ऊष्मीय संयंत्रों (40% दक्षता) की तुलना में ईंधन सेल ≈70% दक्षता के साथ विद्युत उत्पादित करते हैं।
- ईंधन सेल में ईंधन (H₂, मेथेन, मेथेनॉल) की दहन ऊर्जा सीधे विद्युत ऊर्जा में बदलती है।
- H₂–O₂ ईंधन सेल में सरंध्र कार्बन इलेक्ट्रोड, सांद्र जलीय NaOH वैद्युतअपघट्य, तथा Pt/Pd उत्प्रेरक प्रयुक्त होते हैं।
- अपोलो अंतरिक्ष कार्यक्रम में H₂–O₂ ईंधन सेल का प्रयोग हुआ था।
- ऊष्मीय संयंत्रों की दक्षता ≈40%, जबकि ईंधन सेलों की दक्षता ≈70%।
- ईंधन सेल प्रदूषणमुक्त होते हैं — केवल उत्पाद जल है।
2.8 संक्षारण
संक्षारण धातुओं की सतह को ऑक्साइड या अन्य लवणों से मंद गति से आवृत कर देता है — लोहे में जंग लगना, चाँदी का बदरंग होना, कॉपर-पीतल पर हरे रंग का लेप, इसके उदाहरण हैं। यह मुख्यतः एक वैद्युतरासायनिक परिघटना है।
कैथोड: O₂(g) + 4H⁺(aq) + 4e⁻ → 2H₂O(l) E° = +1.23 V
समग्र: 2Fe(s) + O₂(g) + 4H⁺(aq) → 2Fe²⁺(aq) + 2H₂O(l) E°सेल = 1.67 V
वायुमंडलीय ऑक्सीकरण: 2Fe²⁺(aq) + 2H₂O(l) + ½O₂(g) → Fe₂O₃(s) + 4H⁺(aq)
H⁺ आयन CO₂ के जल में घुलने से बने H₂CO₃ से प्राप्त होते हैं। फेरस आयन वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा फेरिक आयनों में बदलकर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃·xH₂O) बनाते हैं — यही जंग है।
संक्षारण की रोकथाम
| विधि | विवरण |
|---|---|
| पेंट/लेप | धात्विक सतह को वायुमंडल के संपर्क से रोकना (पेंट, बिसफ़ीनॉल जैसे रसायन) |
| धात्विक आच्छादन | Sn, Zn जैसी अक्रिय अथवा क्रियाशील धातु से सतह आच्छादित करना |
| उत्सर्ग इलेक्ट्रोड (कैथोडिक संरक्षण) | Mg, Zn जैसी अधिक सक्रिय धातु उपलब्ध कराना जो स्वयं संक्षारित होकर वस्तु की रक्षा करती है |
- संक्षारण में धातु ऑक्सीजन को इलेक्ट्रॉन देकर ऑक्सीकृत होती है।
- लोहे का संक्षारण (जंग) जल एवं वायु दोनों की उपस्थिति में होता है — मूलतः वैद्युतरासायनिक परिघटना।
- ऐनोडी स्थल पर ऑक्सीकरण (Fe→Fe²⁺+2e⁻), कैथोडी स्थल पर O₂ का अपचयन होता है।
- अंतिम उत्पाद जलयोजित फेरिक ऑक्साइड, Fe₂O₃·xH₂O (जंग) है।
- कैथोडिक संरक्षण: Mg/Zn जैसा उत्सर्ग इलेक्ट्रोड लगाकर मुख्य धातु की रक्षा की जाती है।
★ संपूर्ण अध्याय — एक-पंक्ति तथ्य सूची
- गैल्वेनी सेल: रासायनिक ऊर्जा→विद्युत ऊर्जा (स्वतः अभिक्रिया); वैद्युतअपघटनी सेल: विद्युत ऊर्जा→रासायनिक अभिक्रिया (अस्वतः)।
- डेन्यल सेल का मानक विभव 1.10 V।
- ऐनोड पर ऑक्सीकरण, कैथोड पर अपचयन; गैल्वेनी सेल में ऐनोड ऋणात्मक, कैथोड धनात्मक।
- Eसेल = Eदायाँ − Eबायाँ = Eकैथोड − Eऐनोड।
- SHE (मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड) का विभव 0.00 V, सभी तापों पर।
- अधिक धनात्मक E° = प्रबल ऑक्सीकारक; अधिक ऋणात्मक E° = प्रबल अपचायक।
- F₂ (E°=2.87V) सबसे प्रबल ऑक्सीकारक; Li (E°=−3.05V) सबसे प्रबल अपचायक, जलीय विलयन में।
- नेर्न्स्ट समीकरण (298K): Eसेल=E°सेल−(0.059/n)log Q।
- साम्यावस्था पर Eसेल=0, Q=KC; E°सेल=(0.059/n)log KC।
- ΔrG° = −nFE°सेल = −RT ln K।
- 1F = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹।
- κ (चालकता) = 1/ρ; इकाई S m⁻¹ या S cm⁻¹; 1 S cm⁻¹ = 100 S m⁻¹।
- Λm (मोलर चालकता) = κ/c; 1 S m² mol⁻¹ = 10⁴ S cm² mol⁻¹।
- सेल स्थिरांक G* = l/A = R·κ; ज्ञात KCl विलयन से मानकीकृत।
- तनुकरण से κ घटती है परंतु Λm बढ़ती है।
- प्रबल वैद्युतअपघट्य: Λm=Λ°m−Ac½ (ओन्सेगर समीकरण), रेखीय।
- दुर्बल वैद्युतअपघट्य: अल्प सांद्रता पर Λm तीव्रता से बढ़ती है; Λ°m बहिर्वेशन से नहीं मिलता।
- कोलराउश नियम: Λ°m=ν₊λ°₊+ν₋λ°₋ (आयनों का स्वतंत्र अभिगमन)।
- α = Λm/Λ°m; Ka = cα²/(1−α)।
- फैराडे प्रथम नियम: विघटित पदार्थ की मात्रा ∝ Q=It।
- फैराडे द्वितीय नियम: समान आवेश से मुक्त पदार्थों की मात्रा उनके तुल्यांकी द्रव्यमान के समानुपाती।
- वैद्युतअपघटन के उत्पाद E° तथा अधिविभव पर निर्भर करते हैं।
- प्राथमिक बैटरी (लैक्लांशे, मर्क्यूरी): एक बार प्रयोग, पुनः आवेशित नहीं।
- संचायक बैटरी (लेड संचायक, Ni-Cd): पुनः आवेशित की जा सकती है।
- लेड संचायक में वैद्युतअपघट्य 38% H₂SO₄।
- ईंधन सेल: दहन ऊर्जा सीधे विद्युत ऊर्जा में; दक्षता ≈70% (ऊष्मीय संयंत्र ≈40%)।
- संक्षारण मूलतः वैद्युतरासायनिक परिघटना; जंग = Fe₂O₃·xH₂O।
- कैथोडिक संरक्षण में Mg/Zn उत्सर्ग इलेक्ट्रोड प्रयुक्त होता है।
★ महत्वपूर्ण राशियाँ व सूत्र
| राशि/संबंध | सूत्र |
|---|---|
| सेल विभव | Eसेल = Eकैथोड − Eऐनोड |
| नेर्न्स्ट समीकरण (298K) | Eसेल = E°सेल − (0.059/n) log Q |
| गिब्ज़ ऊर्जा | ΔrG° = −nFE°सेल = −RT ln K |
| साम्य स्थिरांक | E°सेल = (0.059/n) log KC |
| प्रतिरोध | R = ρ(l/A) |
| चालकत्व | G = 1/R = κ(A/l) |
| मोलर चालकता | Λm = κ/c (SI: c मोल/m³) |
| प्रबल वैद्युतअपघट्य | Λm = Λ°m − Ac½ |
| कोलराउश नियम | Λ°m = ν₊λ°₊ + ν₋λ°₋ |
| वियोजन मात्रा | α = Λm/Λ°m |
| वियोजन स्थिरांक | Ka = cα²/(1−α) |
| फैराडे का प्रथम नियम | Q = It |
| फैराडे स्थिरांक | 1F = 96487 C mol⁻¹ ≈ 96500 C mol⁻¹ |
| मोल व आवेश संबंध | मोल इलेक्ट्रॉन = Q/(F) = It/F; द्रव्यमान = (मोलर द्रव्यमान × Q)/(n×F) |
याद रखने योग्य मानक इलेक्ट्रोड विभव (298K)
| अर्ध अभिक्रिया | E° (V) |
|---|---|
| F₂+2e⁻→2F⁻ | 2.87 |
| MnO₄⁻+8H⁺+5e⁻→Mn²⁺+4H₂O | 1.51 |
| Cl₂+2e⁻→2Cl⁻ | 1.36 |
| Cr₂O₇²⁻+14H⁺+6e⁻→2Cr³⁺+7H₂O | 1.33 |
| O₂+4H⁺+4e⁻→2H₂O | 1.23 |
| Br₂+2e⁻→2Br⁻ | 1.09 |
| Ag⁺+e⁻→Ag(s) | 0.80 |
| Fe³⁺+e⁻→Fe²⁺ | 0.77 |
| I₂+2e⁻→2I⁻ | 0.54 |
| Cu²⁺+2e⁻→Cu(s) | 0.34 |
| 2H⁺+2e⁻→H₂(g) | 0.00 |
| Sn²⁺+2e⁻→Sn(s) | −0.14 |
| Fe²⁺+2e⁻→Fe(s) | −0.44 |
| Cr³⁺+3e⁻→Cr(s) | −0.74 |
| Zn²⁺+2e⁻→Zn(s) | −0.76 |
| Al³⁺+3e⁻→Al(s) | −1.66 |
| Mg²⁺+2e⁻→Mg(s) | −2.36 |
| Na⁺+e⁻→Na(s) | −2.71 |
| K⁺+e⁻→K(s) | −2.93 |
| Li⁺+e⁻→Li(s) | −3.05 |
पाठ्यनिहित प्रश्न (2.1 – 2.15) — विस्तृत हल
प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके हल देखें।
2.1 निकाय Mg²⁺|Mg का मानक इलेक्ट्रोड विभव आप किस प्रकार ज्ञात करेंगे?
2.2 क्या आप एक जिंक के पात्र में कॉपर सल्फेट का विलयन रख सकते हैं?
2.3 मानक इलेक्ट्रोड विभव की तालिका का निरीक्षण कर तीन ऐसे पदार्थ बताइए जो अनुकूल परिस्थितियों में फेरस आयनों को ऑक्सीकृत कर सकते हैं।
2.4 pH = 10 के विलयन के संपर्क वाले हाइड्रोजन इलैक्ट्रोड के विभव का परिकलन कीजिए।
2.5 एक सेल के emf का परिकलन कीजिए, जिसमें Ni(s) + 2Ag⁺(0.002M) → Ni²⁺(0.160M) + 2Ag(s) अभिक्रिया होती है। दिया गया E°सेल = 1.05V।
2.6 एक सेल जिसमें 2Fe³⁺(aq)+2I⁻(aq)→2Fe²⁺(aq)+I₂(s) अभिक्रिया होती है, का 298K ताप पर E°सेल=0.236V है। सेल अभिक्रिया की मानक गिब्ज़ ऊर्जा एवं साम्य स्थिरांक का परिकलन कीजिए।
2.7 किसी विलयन की चालकता तनुता के साथ क्यों घटती है?
2.8 जल की Λ°m ज्ञात करने का एक तरीका बताइए।
2.9 0.025 mol L⁻¹ मेथेनॉइक अम्ल की मोलर चालकता 46.1 S cm² mol⁻¹ है। इसकी वियोजन मात्रा एवं वियोजन स्थिरांक का परिकलन कीजिए। दिया गया है λ°(H⁺)=349.6 S cm² mol⁻¹ एवं λ°(HCOO⁻)=54.6 S cm² mol⁻¹।
2.10 यदि एक धात्विक तार में 0.5 ऐम्पियर की धारा 2 घंटों के लिए प्रवाहित होती है तो तार में से कितने इलेक्ट्रॉन प्रवाहित होंगे?
2.11 उन धातुओं की एक सूची बनाइए जिनका वैद्युतअपघटनी निष्कर्षण होता है।
2.12 Cr₂O₇²⁻+14H⁺+6e⁻→2Cr³⁺+7H₂O अभिक्रिया में Cr₂O₇²⁻ आयनों के एक मोल के अपचयन के लिए कूलॉम में विद्युत की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
2.13 चार्जिंग के दौरान प्रयुक्त पदार्थों का विशेष उल्लेख करते हुए लेड संचायक सेल की चार्जिंग क्रियाविधि का वर्णन रासायनिक अभिक्रियाओं की सहायता से कीजिए।
2PbSO₄(s) + 2H₂O(l) → Pb(s) + PbO₂(s) + 2H₂SO₄(aq)
2.14 हाइड्रोजन को छोड़कर ईंधन सेलों में प्रयुक्त किये जा सकने वाले दो अन्य पदार्थ सुझाइए।
2.15 समझाइए कि कैसे लोहे पर जंग लगने का कारण एक वैद्युतरासायनिक सेल बनना माना जाता है।
अध्याय अभ्यास (2.1 – 2.18) — विस्तृत हल
NCERT पाठ्यपुस्तक के अंत में दिए गए सभी अभ्यास प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।
2.1 निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक दूसरे को उनके लवणों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं। Al, Cu, Fe, Mg एवं Zn.
2.2 नीचे दिए गए मानक इलैक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए। K⁺/K = −2.93V, Ag⁺/Ag = 0.80V, Hg²⁺/Hg = 0.79V, Mg²⁺/Mg = −2.37 V, Cr³⁺/Cr = −0.74V
2.3 उस गैल्वेनी सेल को दर्शाइए जिसमें Zn(s)+2Ag⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+2Ag(s) अभिक्रिया होती है। बताइए: (i) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है? (ii) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन से हैं? (iii) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या है?
कैथोड (Ag) पर: 2Ag⁺(aq) + 2e⁻ → 2Ag(s) (अपचयन)
2.4 निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनी सेल का मानक सेल-विभव परिकलित कीजिए। (i) 2Cr(s)+3Cd²⁺(aq)→2Cr³⁺(aq)+3Cd (ii) Fe²⁺(aq)+Ag⁺(aq)→Fe³⁺(aq)+Ag(s) — उपरोक्त के लिए ΔrG° एवं साम्य स्थिरांकों की भी गणना कीजिए।
E°सेल = E°कैथोड − E°ऐनोड = −0.40 − (−0.74) = +0.34 V
E°सेल = 0.80 − 0.77 = +0.03 V
2.5 निम्नलिखित सेलों की 298 K पर नेर्न्स्ट समीकरण एवं emf लिखिए। (i)–(iv)
Eसेल = 2.70 − (0.059/2)log([Mg²⁺]/[Cu²⁺]) = 2.70 − 0.0295×log(0.001/0.0001) = 2.70 − 0.0295×1 = 2.6705 ≈ 2.67 V
Eसेल = 0.44 − (0.059/2)log([Fe²⁺]×P(H₂)/[H⁺]²) = 0.44 − 0.0295×log(0.001) = 0.44 + 0.0885 = 0.5285 ≈ 0.53 V
Q=[Sn²⁺]/[H⁺]²=0.050/(0.020)²=125; Eसेल=0.14−(0.059/2)log(125)=0.14−0.0295×2.097=0.14−0.0619=0.078 V
Q=P(H₂)^0.5/([Br⁻][H⁺])=1/(0.010×0.030)=3333.3; Eसेल=−1.09−0.059×log(3333.3)=−1.09−0.059×3.523=−1.09−0.208=−1.298 ≈ −1.30 V
2.6 घड़ियों एवं अन्य युक्तियों में अत्यधिक उपयोग में आने वाली बटन सेलों में निम्नलिखित अभिक्रिया होती है: Zn(s)+Ag₂O(s)+H₂O(l)→Zn²⁺(aq)+2Ag(s)+2OH⁻(aq) — अभिक्रिया के लिए ΔrG° एवं E° ज्ञात कीजिए।
2.7 किसी वैद्युतअपघट्य के विलयन की चालकता एवं मोलर चालकता की परिभाषा दीजिए। सांद्रता के साथ इनके परिवर्तन की विवेचना कीजिए।
2.8 298 K पर 0.20M KCl विलयन की चालकता 0.0248 S cm⁻¹ है। इसकी मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
2.9 298 K पर एक चालकता सेल जिसमें 0.001 M KCl विलयन है, का प्रतिरोध 1500 Ω है। यदि 0.001M KCl विलयन की चालकता 298 K पर 0.146×10⁻³ S cm⁻¹ हो तो सेल स्थिरांक क्या है?
2.10 298 K पर सोडियम क्लोराइड की विभिन्न सांद्रताओं पर चालकता का मापन किया गया (सारणी दी गई)। सभी सांद्रताओं के लिए Λm का परिकलन कीजिए एवं Λm तथा c½ के मध्य आलेख खींचिए। Λ°m का मान ज्ञात कीजिए।
| c (mol/L) | κ (S/m) | Λm (S cm² mol⁻¹) | c½ |
|---|---|---|---|
| 0.001 | 0.01237 | 123.7 | 0.0316 |
| 0.010 | 0.1185 | 118.5 | 0.100 |
| 0.020 | 0.2315 | 115.75 | 0.1414 |
| 0.050 | 0.5553 | 111.06 | 0.2236 |
| 0.100 | 1.0674 | 106.74 | 0.3162 |
2.11 0.00241 M ऐसीटिक अम्ल की चालकता 7.896×10⁻⁵ S cm⁻¹ है। इसकी मोलर चालकता को परिकलित कीजिए। यदि ऐसीटिक अम्ल के लिए Λ°m का मान 390.5 S cm² mol⁻¹ हो तो इसका वियोजन स्थिरांक क्या है?
2.12 निम्नलिखित के अपचयन के लिए कितने आवेश की आवश्यकता होगी? (i) 1 मोल Al³⁺ को Al में (ii) 1 मोल Cu²⁺ को Cu में (iii) 1 मोल MnO₄⁻ को Mn²⁺ में
2.13 निम्नलिखित को प्राप्त करने में कितने फैराडे विद्युत की आवश्यकता होगी? (i) गलित CaCl₂ से 20.0 g Ca (ii) गलित Al₂O₃ से 40.0 g Al
2.14 निम्नलिखित को ऑक्सीकृत करने के लिए कितने कूलॉम विद्युत आवश्यक है? (i) 1 मोल H₂O को O₂ में। (ii) 1 मोल FeO को Fe₂O₃ में।
2.15 Ni(NO₃)₂ के एक विलयन का प्लैटिनम इलैक्ट्रोडों के बीच 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करते हुए 20 मिनट तक विद्युत अपघटन किया गया। Ni की कितनी मात्रा कैथोड पर निक्षेपित होगी?
2.16 ZnSO₄, AgNO₃ एवं CuSO₄ विलयन वाले तीन वैद्युतअपघटनी सेलों A,B,C को श्रेणीबद्ध किया गया एवं 1.5 ऐम्पियर की विद्युतधारा, सेल B के कैथोड पर 1.45 g सिल्वर निक्षेपित होने तक लगातार प्रवाहित की गई। विद्युतधारा कितने समय तक प्रवाहित हुई? निक्षेपित कॉपर एवं जिंक का द्रव्यमान क्या होगा?
अतः धारा प्रवाहित होने का समय ≈14.39 मिनट; निक्षेपित Cu ≈0.426 g; निक्षेपित Zn ≈0.439 g
2.17 तालिका 2.1 में दिए गए मानक इलैक्ट्रोड विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या निम्नलिखित अभिकर्मकों के बीच अभिक्रिया संभव है? (i)–(v)
2.18 निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए वैद्युतअपघटन से प्राप्त उत्पाद बताइए। (i)–(iv)
🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (वैद्युतरसायन)
विगत वर्षों में NEET/AIPMT में पूछे गए प्रश्न, हल सहित।
2026 · Q1 निम्न अर्ध-सेल का emf परिकलित कीजिए: Pt(s) | H₂(g, 2 atm) | HCl(aq, 0.02 M)
2026 · Q2 कॉपर सल्फेट के विलयन का 1.5 ऐम्पियर धारा से 10 मिनट तक वैद्युतअपघटन किया जाता है। कैथोड पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए (M(Cu)=63 g/mol; 1F=96487 C/mol)।
NEET 2025 · Q1 0.050 mol L⁻¹ मोनोबेसिक दुर्बल अम्ल की मोलर चालकता (Λm) 90 S cm² mol⁻¹ है। इसकी वियोजन मात्रा (α) ज्ञात कीजिए (Λ°₊=349.6, Λ°₋=50.4 S cm² mol⁻¹)।
NEET 2024 · Q1 सूची-I (अभिक्रिया) को सूची-II (आवश्यक फैराडे) से सुमेलित कीजिए: A. H₂O→O₂, B. MnO₄⁻→Mn²⁺, C. CaCl₂ से 1.5 mol Ca, D. FeO→Fe₂O₃
NEET 2024 · Q2 कॉपर सल्फेट विलयन से भरे एक वोल्टमापी में 9.6487 A धारा 100 सेकंड तक प्रवाहित करने पर निक्षेपित कॉपर का द्रव्यमान (ग्राम में) ज्ञात कीजिए (M(Cu)=63 g/mol, 1F=96487C)।
NEET 2024 · Q3 कथन-I: 1 mol H₂O को O₂ में ऑक्सीकृत करने हेतु 2F विद्युत आवश्यक है। कथन-II: गलित Al₂O₃ से 40.0 g ऐलुमिनियम प्राप्त करने हेतु आवश्यक विद्युत 4.44 F है।
NEET 2024 · Q4 निम्न में से कौन सा संक्षारण (corrosion) का उदाहरण नहीं है?
NEET 2024 · Q5 सेल Zn|Zn²⁺(aq)||Fe²⁺(aq)|Fe का मानक सेल विभव 0.32 V है। अभिक्रिया Zn(s)+Fe²⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+Fe(s) के लिए मानक गिब्ज़ ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात कीजिए (1F=96487 C/mol)।
NEET 2023 · Q1 25°C पर सेंटीमोलर KCl विलयन की चालकता 0.0210 ohm⁻¹cm⁻¹ है तथा उसे रखने वाले सेल का प्रतिरोध 60 ohm है। सेल स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
NEET 2023 · Q2 अभिकथन-तर्क: A — समीकरण Δ_rG=−nFE_cell में Δ_rG का मान n पर निर्भर करता है। R — E_cell एक गहन (intensive) गुण है तथा Δ_rG एक व्यापक (extensive) गुण है।
NEET 2023 · Q3 डिबाई-हकल-ऑनसागर समीकरण Λm=Λ°m−A√c के विषय में चार कथन दिए हैं (A: सभी वैद्युत्अपघट्यों पर लागू; B: A का मान विलायक की प्रकृति पर निर्भर; C: BaCl₂ व MgSO₄ के लिए A समान; D: BaCl₂ व Mg(OH)₂ के लिए A समान)। कौन से कथन सही हैं?
NEET 2023 · Q4 निम्न दो अर्ध-सेलों को जोड़ने पर सेल विभव ज्ञात कीजिए: Fe²⁺+2e⁻→Fe, E°=−0.44V; Cr₂O₇²⁻+14H⁺+6e⁻→2Cr³⁺+7H₂O, E°=+1.33V
NEET 2023 · Q5 किसी विलयन की चालकता (0.248 S/m) व सांद्रता (0.2 mol/m³) से मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
NEET 2022 (Phase 2) · Q1 Al³⁺/Al (E°≈−1.66V) तथा Co³⁺/Co²⁺ (E°≈+1.81V) की अर्ध-सेल अभिक्रियाओं से बनने वाली संभावित (feasible) redox अभिक्रिया का मानक emf ज्ञात कीजिए।
NEET 2022 (Phase 2) · Q2 सेल अभिक्रिया Zn(s)+Cu²⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+Cu(s) के लिए मानक सेल विभव 1.1 V है। मानक गिब्ज़ ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात कीजिए (F=96487 C/mol)।
NEET 2021 · Q1 NaCl, HCl तथा CH₃COONa की अनंत तनुता पर मोलर चालकताएँ क्रमशः 126.45, 426.16 तथा 91.0 S cm²mol⁻¹ हैं। CH₃COOH की अनंत तनुता पर मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
NEET 2020 · Q1 तनु H₂SO₄ के प्लैटिनम इलेक्ट्रोड से वैद्युतअपघटन में ऐनोड पर प्राप्त उत्पाद बताइए।
NEET 2020 · Q2 गलित CaCl₂ से 20 g कैल्शियम (M=40 g/mol) प्राप्त करने हेतु आवश्यक फैराडे (F) की संख्या ज्ञात कीजिए।
NEET 2019 · Q1 एकल-इलेक्ट्रॉन वाले सेल के लिए E°सेल=0.59V (298K) है। सेल अभिक्रिया का साम्य स्थिरांक ज्ञात कीजिए।
NEET 2019 · Q2 298K पर एक सेल अभिक्रिया (n=2, E°=0.24V) के लिए मानक गिब्ज़ ऊर्जा परिवर्तन ज्ञात कीजिए (F=96500 C/mol)।
NEET 2018 · Q1 ब्रोमीन की विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं के लैटीमर आरेख (emf मान सहित) दिए गए हैं। बताइए कौन सी स्पीशीज़ विषमानुपातन (disproportionation) से गुजरेगी?
NEET 2017 · Q1 डेनियल सेल Zn|ZnSO₄||CuSO₄|Cu का emf E₁ है। जब ZnSO₄ की सांद्रता 1.0M व CuSO₄ की 0.01M कर दी जाए तो emf E₂ हो जाता है। E₁ व E₂ में सम्बन्ध बताइए (RT/F=0.059)।
NEET 2016 (Phase 2) · Q1 298K पर 0.5 mol/dm³ AgNO₃ विलयन (चालकता 5.76×10⁻³ S cm⁻¹) की मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।
NEET 2016 (Phase 2) · Q2 यदि किसी अभिक्रिया के लिए E°सेल का मान ऋणात्मक हो, तो ΔG° व K_eq के लिए कौन सा सम्बन्ध सही है?
NEET 2016 (Phase 2) · Q3 गलित सोडियम क्लोराइड के वैद्युतअपघटन में 3 ऐम्पियर धारा से 0.10 mol Cl₂ गैस उत्पन्न करने में लगने वाला समय ज्ञात कीजिए।
NEET 2016 (Phase 2) · Q4 लोहे पर जिंक की परत चढ़ाकर गैल्वेनाइज़्ड आयरन बनाया जा सकता है, परंतु विपरीत संभव नहीं — क्यों?
2015 · Q1 निम्न में से किस यौगिक का जलीय विलयन विद्युत का सर्वोत्तम चालक है?
2015 · Q2 हाइड्रोजन व मेथेन जैसे ईंधनों के दहन की ऊर्जा को सीधे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने वाली युक्ति कहलाती है:
2014 · Q1 0.1 mol H₂O₂ के पूर्ण ऑक्सीकरण (O₂ में) हेतु आवश्यक विद्युत की मात्रा ज्ञात कीजिए।
2014 · Q2 5600 mL O₂ (STP पर) मुक्त करने वाली विद्युत की मात्रा से निक्षेपित सिल्वर (परमाणु भार=108) का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
NEET सम्बंधित तथ्य Anya तथ्य
प्रश्न-पैटर्न, भार-विभाजन व बार-बार दोहराई जाने वाली अवधारणाएँ।
- 2014 से 2026 के मध्य NEET में वैद्युतरसायन अध्याय से लगभग हर वर्ष 1–3 प्रश्न पूछे गए हैं।
- प्रश्न मुख्यतः इलेक्ट्रोड विभव, नेर्न्स्ट समीकरण, फैराडे नियम, कोलराउश नियम व चालकता पर आधारित होते हैं।
- ΔG° = −nFE°सेल तथा log K = nE°सेल/0.059 (298K पर)।
- नेर्न्स्ट समीकरण: E = E° − (0.059/n) log Q (298K पर)।
- फैराडे प्रथम नियम: m = (Q M)/(n F)।
- कोलराउश नियम: Λ°m = ν₊λ°₊ + ν₋λ°₋ (दुर्बल वैद्युत्अपघट्यों के Λ°m ज्ञात करने के लिए)।
- मानक इलेक्ट्रोड विभव: Zn²⁺/Zn (−0.76), Cu²⁺/Cu (+0.34), Ag⁺/Ag (+0.80), MnO₄⁻/Mn²⁺ (+1.51) आदि।
- गैल्वेनाइज़ेशन व बलिदानी सुरक्षा (जिंक का लोहे से अधिक ऋणात्मक E°)।
- संक्षारण एक वैद्युतरासायनिक प्रक्रिया — जल फिल्म विद्युत्अपघट्य का कार्य करती है।
- ईंधन सेल (H₂-O₂) — दक्षता ≈70%।
✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य
- गैल्वेनी सेल बनाम वैद्युतअपघटनी सेल में एनोड-कैथोड की ध्रुवता उलटी होती है — गैल्वेनी सेल में एनोड ऋणात्मक, कैथोड धनात्मक; वैद्युतअपघटनी में विपरीत।
- सेल विभव (E_cell) बनाम EMF — शून्य धारा पर EMF, अन्यथा सेल विभव (आंतरिक प्रतिरोध के कारण कम)।
- SHE का मानक अपचयन विभव = 0.00 V (1 atm H₂, 1M H⁺, 298K)।
- सेल संकेतन: ऐनोड | विलयन || विलयन | कैथोड — जैसे Zn(s)|Zn²⁺||Cu²⁺|Cu(s)।
- मोलर चालकता बनाम तुल्यांकी चालकता — Λm = Λeq × n-गुणांक (n = आवेश संख्या)।
- प्रबल बनाम दुर्बल वैद्युत्अपघट्य का Λm व्यवहार — प्रबल का Λm बनाम √c रेखीय, दुर्बल का तीव्र वृद्धि, Λ°m केवल कोलराउश से।
- प्राथमिक सेल बनाम द्वितीयक — प्राथमिक (शुष्क, मर्करी) एक बार; द्वितीयक (लेड संचायक, Ni-Cd) पुनः आवेशित।
- अधिविभव (overpotential) — गैसों के मुक्त होने में अतिरिक्त विभव की आवश्यकता; Cl₂ प्राथमिकता से जल के ऑक्सीकरण पर।