रासायनिक बलगतिकी — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 3)
रसायन विज्ञान • कक्षा-12 • अध्याय 3

रासायनिक बलगतिकी (Chemical Kinetics)

अभिक्रिया वेग, वेग नियम, कोटि व आण्विकता से लेकर समाकलित वेग समीकरण, अर्धायु, आर्रेनियस समीकरण, उत्प्रेरक तथा संघट्टवाद तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, त्वरित तथ्य, आरेख और सभी पाठ्यनिहित व अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही जगह।

k = Ae⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ आर्रेनियस समीकरण
t½ = 0.693/k प्रथम कोटि अर्धायु
वेग = k[A]ˣ[B]ʸ वेग नियम
★ NEET फोकस तथ्य
परिभाषा व मापन

3.1 रासायनिक अभिक्रिया वेग

रासायनिक बलगतिकी (Kinetics, ग्रीक शब्द 'Kinesis' अर्थात् गति से व्युत्पन्न) वह शाखा है जो अभिक्रिया के वेग तथा इसकी क्रियाविधि का अध्ययन करती है। ऊष्मागतिकी केवल अभिक्रिया की संभाव्यता बताती है (ΔG<0), जबकि बलगतिकी अभिक्रिया की गति बताती है — जैसे हीरे का ग्रैफाइट में परिवर्तन ऊष्मागतिकीय रूप से संभाव्य है, परंतु इतना मंद है कि परिलक्षित ही नहीं होता।

कुछ अभिक्रियाएँ (जैसे आयनिक अभिक्रियाएँ — AgNO₃ व NaCl का संयोग) अत्यंत तीव्र होती हैं; कुछ (जैसे लोहे पर जंग लगना) अत्यंत मंद; तथा कुछ (जैसे इक्षु-शर्करा का प्रतिलोमन) मध्यम वेग से होती हैं।

अभिक्रिया R → P के लिए R में ह्रास होने की दर = −Δ[R]/Δt   (3.1)
P में वृद्धि की दर = +Δ[P]/Δt   (3.2)
(वेग सदैव धनात्मक राशि — अतः अभिक्रियक-पद को −1 से गुणा किया जाता है)
समय (s) → अभिकारकों की सांद्रता → स्पर्श रेखा (ढाल = तात्क्षणिक वेग) [R]₀
चित्र 3.1 — अभिकारक की सांद्रता–समय वक्र; स्पर्श रेखा का ढाल तात्क्षणिक वेग देता है, दो बिंदुओं के बीच सरल रेखा का ढाल औसत वेग देता है

तात्क्षणिक व औसत वेग

औसत वेग rav = −Δ[R]/Δt = Δ[P]/Δt   (3.3)
तात्क्षणिक वेग (जब Δt → 0) rinst = −d[R]/dt = d[P]/dt

औसत वेग किसी क्षण-विशेष का वेग व्यक्त नहीं कर सकता क्योंकि यह चुने गए समयांतराल पर निर्भर करता है। तात्क्षणिक वेग, सांद्रता–समय वक्र पर किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा का ढाल मापकर ज्ञात किया जाता है।

वेग की इकाई: सांद्रता समय⁻¹, अर्थात् mol L⁻¹ s⁻¹ (गैसीय अभिक्रियाओं में जब सांद्रता आंशिक दाब से व्यक्त की जाती है, तब atm s⁻¹)।

स्टॉइकियोमीट्री गुणांकों के आधार पर वेग

जब अभिक्रियक व उत्पादों के स्टॉइकियोमीट्री गुणांक समान हों (जैसे Hg(l)+Cl₂(g)→HgCl₂(s)), तो वेग सीधे लिखा जा सकता है। परंतु 2HI(g)→H₂(g)+I₂(g) जैसी अभिक्रियाओं में, जहाँ गुणांक भिन्न हैं, प्रत्येक पद को उसके स्टॉइकियोमीट्री गुणांक से भाग देना आवश्यक है:

सामान्य नियम 5Br⁻(aq)+BrO₃⁻(aq)+6H⁺(aq)→3Br₂(aq)+3H₂O(l) के लिए:
वेग = −(1/5)Δ[Br⁻]/Δt = −Δ[BrO₃⁻]/Δt = −(1/6)Δ[H⁺]/Δt = (1/3)Δ[Br₂]/Δt = (1/3)Δ[H₂O]/Δt
त्वरित तथ्य — 3.1
  • बलगतिकी वेग व क्रियाविधि बताती है; ऊष्मागतिकी केवल संभाव्यता बताती है (ΔG<0 = संभाव्य)।
  • औसत वेग rav=−Δ[R]/Δt=Δ[P]/Δt; तात्क्षणिक वेग rinst=−d[R]/dt=d[P]/dt (स्पर्श रेखा का ढाल)।
  • वेग की इकाई: mol L⁻¹ s⁻¹ (गैसों में atm s⁻¹ भी प्रयुक्त)।
  • वेग सदैव धनात्मक होता है; अभिकारकों की सांद्रता घटने के कारण Δ[R] ऋणात्मक होता है, अतः −1 से गुणा किया जाता है।
  • असमान स्टॉइकियोमीट्री गुणांक वाली अभिक्रिया में प्रत्येक पद को उसके गुणांक से भाग देकर वेग समान किया जाता है।
वेग नियम, कोटि व आण्विकता

3.2 अभिक्रिया वेग को प्रभावित करने वाले कारक

अभिक्रिया वेग प्रायोगिक परिस्थितियों — अभिक्रियकों की सांद्रता (गैसों के संदर्भ में दाब), ताप तथा उत्प्रेरक — पर निर्भर करता है।

3.2.1 सांद्रता पर निर्भरता

सामान्य अभिक्रिया aA+bB→cC+dD के लिए वेग व्यंजक:

वेग व्यंजक (वेग नियम) वेग ∝ [A]x[B]y   (3.4)
वेग = k[A]x[B]y   (3.4क)
−d(r)/dt = k[A]x[B]y  (अवकल वेग समीकरण)   (3.4ख)

3.2.2 वेग व्यंजक एवं वेग स्थिरांक

k समानुपाती स्थिरांक है जिसे वेग स्थिरांक कहते हैं। वेग नियम वह व्यंजक है जिसमें अभिक्रिया के वेग को अभिक्रियकों की मोलर सांद्रता के पद पर घातांक लगाकर व्यक्त करते हैं — ये घातांक संतुलित समीकरण के स्टॉइकियोमीट्री गुणांकों के समान अथवा भिन्न भी हो सकते हैं।

अभिक्रियाप्रायोगिक वेग समीकरण
2NO(g)+O₂(g)→2NO₂(g)वेग = k[NO]²[O₂]
CHCl₃+Cl₂→CCl₄+HClवेग = k[CHCl₃][Cl₂]½
CH₃COOC₂H₅+H₂O→CH₃COOH+C₂H₅OHवेग = k[CH₃COOC₂H₅][H₂O]⁰
महत्वपूर्ण: वेग नियम को किसी संतुलित अभिक्रिया को देखकर प्रागुक्त नहीं किया जा सकता — इसका निर्धारण सैद्धांतिक रूप से नहीं, बल्कि सदैव प्रायोगिक रूप से किया जाता है।

3.2.3 अभिक्रिया की कोटि

वेग नियम व्यंजक में प्रयुक्त सांद्रताओं के घातांकों का योग उस अभिक्रिया की कोटि (Order) कहलाती है। कोटि 0, 1, 2, 3 अथवा भिन्नात्मक भी हो सकती है — शून्य कोटि का अर्थ है वेग सांद्रता पर निर्भर नहीं करता।

कोटिk की इकाई (सांद्रता व समय की SI इकाई mol L⁻¹, s)
शून्य कोटिmol L⁻¹ s⁻¹
प्रथम कोटिs⁻¹
द्वितीय कोटिmol⁻¹ L s⁻¹ (L mol⁻¹ s⁻¹)

3.2.4 अभिक्रिया की आण्विकता

प्राथमिक अभिक्रिया में भाग लेने वाली स्पीशीज़ (परमाणु, आयन अथवा अणु) जो एक साथ संघट्ट के फलस्वरूप रासायनिक अभिक्रिया करती हैं, की संख्या को आण्विकता (Molecularity) कहते हैं।

प्रकारउदाहरण
एक-अणुकNH₄NO₂→N₂+2H₂O
द्वि-परमाणुक2HI→H₂+I₂
त्रि-परमाणुक2NO+O₂→2NO₂

तीन से अधिक अणुओं के एक साथ उचित विन्यास के साथ संघट्ट की संभाव्यता अत्यंत कम होती है, अतः त्रिअणुक आण्विकता की अभिक्रियाएँ कम व धीमी गति से होती हैं। जटिल अभिक्रियाएँ (जैसे तीन से अधिक अणु वाली स्टॉइकियोमीट्री) कई पदों में संपन्न होती हैं — जिनमें सबसे मंद पद वेग निर्धारक पद कहलाता है।

क्षारीय माध्यम में H₂O₂ का I⁻ उत्प्रेरित अपघटन पद(i): H₂O₂+I⁻→H₂O+IO⁻ (मंद पद — वेग निर्धारक) पद(ii): H₂O₂+IO⁻→H₂O+I⁻+O₂ (द्रुत पद) वेग = −d[H₂O₂]/dt = k[H₂O₂][I⁻] (दोनों के प्रति प्रथम कोटि) IO⁻ मध्यवर्ती स्पीशीज़ है — संतुलित समीकरण में नहीं दिखती
चित्र — मंद पद द्वारा वेग निर्धारण; जटिल अभिक्रिया में कोटि सबसे मंद पद की आण्विकता के समान होती है
त्वरित तथ्य — 3.2
  • वेग नियम/व्यंजक प्रायोगिक रूप से निर्धारित होता है, संतुलित समीकरण से प्रागुक्त नहीं किया जा सकता।
  • अभिक्रिया की कोटि 0, 1, 2, 3 अथवा भिन्नात्मक हो सकती है; शून्य कोटि का अर्थ है वेग सांद्रता से स्वतंत्र।
  • आण्विकता केवल प्राथमिक अभिक्रियाओं के लिए परिभाषित; यह 1 से 3 तक सीमित होती है, शून्य/अपूर्णांक नहीं हो सकती।
  • कोटि प्राथमिक व जटिल दोनों अभिक्रियाओं पर लागू; जटिल अभिक्रियाओं में आण्विकता का कोई अर्थ नहीं।
  • जटिल अभिक्रिया में कोटि सबसे मंद पद (वेग निर्धारक पद) की आण्विकता के समान होती है।
  • प्राथमिक अभिक्रिया में आण्विकता = कोटि; जटिल अभिक्रिया कई प्राथमिक पदों से मिलकर बनती है।
शून्य व प्रथम कोटि

3.3 समाकलित वेग समीकरण

तात्क्षणिक वेग का निर्धारण (स्पर्श रेखा खींचकर) सदैव आसान नहीं होता, अतः वेग समीकरण को समाकलित कर समाकलित वेग समीकरण प्राप्त किया जाता है, जिससे सीधे मापे गए प्रायोगिक आँकड़ों (सांद्रता व समय) से वेग स्थिरांक ज्ञात हो जाता है।

3.3.1 शून्य कोटि की अभिक्रियाएँ

व्युत्पत्ति वेग = −d[R]/dt = k[R]⁰ = k
समाकलन पर: [R] = −kt + [R]₀   (3.6)
वेग स्थिरांक: k = ([R]₀−[R])/t   (3.7)
समय → R की सांद्रता [R]₀ ढाल = −k
चित्र 3.3 — शून्य कोटि की अभिक्रिया के लिए [R] बनाम t आलेख: सीधी रेखा, ढाल = −k, अंत:खंड = [R]₀

शून्य कोटि की अभिक्रियाएँ अपेक्षाकृत असामान्य हैं — कुछ एन्जाइम उत्प्रेरित अभिक्रियाएँ तथा धातु सतहों पर होने वाली अभिक्रियाएँ इसके उदाहरण हैं। उदाहरणतः उच्च दाब पर प्लैटिनम सतह पर अमोनिया का तप्त वियोजन:

शून्य कोटि उदाहरण 2NH₃(g) →(Pt उत्प्रेरक, 1130K)→ N₂(g)+3H₂(g);   वेग = k[NH₃]⁰ = k

3.3.2 प्रथम कोटि की अभिक्रियाएँ

व्युत्पत्ति वेग = −d[R]/dt = k[R]
समाकलन पर: ln[R] = −kt + ln[R]₀   (3.9)
[R] = [R]₀ e−kt   (3.14)
k = (2.303/t) log([R]₀/[R])   (3.15)
समय → ln[R] ln[R]₀ ढाल = −k
चित्र 3.4 — प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए ln[R] बनाम t आलेख: सीधी रेखा, ढाल = −k

प्रथम कोटि की अभिक्रियाओं के उदाहरण: एथीन का हाइड्रोजनन (वेग=k[C₂H₄]), सभी रेडियोऐक्टिव क्षय (वेग=k[Ra]), N₂O₅ व N₂O का अपघटन।

गैसीय अवस्था की प्रथम कोटि अभिक्रिया — दाब पद में समाकलित वेग समीकरण

A(g)→B(g)+C(g) के लिए, यदि प्रारंभिक दाब pi तथा t समय पर कुल दाब pt हो:

दाब पद में सूत्र pA = 2pi − pt
k = (2.303/t) log[pi/(2pi−pt)]   (3.16)

3.3.3 अभिक्रिया की अर्धायु

अभिक्रियक की प्रारंभिक सांद्रता के आधे होने में लगने वाला समय अर्धायु (t½) कहलाता है।

अर्धायु सूत्र शून्य कोटि: t½ = [R]₀/2k  (अर्थात् t½ ∝ [R]₀)
प्रथम कोटि: t½ = 0.693/k   (3.17)  (अर्थात् t½, [R]₀ पर निर्भर नहीं)
कोटिअवकल वेग नियमसमाकलन वेग नियमसरल रेखा आलेखअर्धायुk की इकाई
0d[R]/dt=−kkt=[R]₀−[R][R] व t[R]₀/2kmol L⁻¹s⁻¹
1d[R]/dt=−k[R]kt=ln{[R]₀/[R]}ln[R] व t0.693/ks⁻¹

छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया

ऐथिल ऐसीटेट का जल अपघटन (CH₃COOC₂H₅+H₂O→CH₃COOH+C₂H₅OH) वास्तव में द्वितीय कोटि है, परंतु जल अत्यधिक आधिक्य में लिया जाता है, अतः इसकी सांद्रता व्यावहारिक रूप से स्थिर रहती है — केवल एथिल ऐसीटेट की सांद्रता वेग पर प्रभाव डालती है। ऐसी अभिक्रियाओं को छद्म प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते हैं। इक्षु-शर्करा (सूक्रोस) का प्रतिलोमन भी इसका उदाहरण है — वेग = k[C₁₂H₂₂O₁₁]।

त्वरित तथ्य — 3.3
  • शून्य कोटि: [R]=−kt+[R]₀ — [R] बनाम t का आलेख सरल रेखा (ढाल=−k)।
  • प्रथम कोटि: ln[R]=−kt+ln[R]₀ — ln[R] बनाम t का आलेख सरल रेखा (ढाल=−k); या k=(2.303/t)log([R]₀/[R])।
  • शून्य कोटि t½ = [R]₀/2k (प्रारंभिक सांद्रता पर निर्भर); प्रथम कोटि t½=0.693/k (प्रारंभिक सांद्रता से स्वतंत्र)।
  • प्रथम कोटि अभिक्रिया में 99.9% पूर्णता का समय = अर्धायु का 10 गुना।
  • छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया: वास्तविक कोटि उच्च होती है परंतु एक अभिकारक (जैसे जल) आधिक्य में होने से प्रथम कोटि जैसा व्यवहार करती है।
  • गैसीय प्रथम कोटि अभिक्रिया A→B+C में pA=2pi−pt
आर्रेनियस समीकरण व उत्प्रेरक

3.4 अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता

अधिकांश अभिक्रियाएँ ताप वृद्धि के साथ त्वरित होती हैं — सामान्यतः 10° ताप वृद्धि से वेग स्थिरांक में लगभग दुगुनी वृद्धि होती है। अभिक्रिया वेग की ताप पर निर्भरता की व्याख्या आर्रेनियस समीकरण से की जाती है (सर्वप्रथम जे. एच. वान्ट हॉफ ने प्रस्तावित किया, स्वीडन के रसायनज्ञ आर्रेनियस ने भौतिक सत्यापन किया)।

आर्रेनियस समीकरण k = A e−Ea/RT   (3.18)
यहाँ A = आर्रेनियस गुणक (आवृत्ति गुणक); Ea = सक्रियण ऊर्जा (J mol⁻¹); R = गैस स्थिरांक; T = परम ताप
अभिक्रिया निर्देशांक → स्थितिज ऊर्जा सक्रियित संकुल C Ea H₂+I₂ (A) 2HI (B) ΔH
चित्र 3.7 — स्थितिज ऊर्जा एवं अभिक्रिया निर्देशांक के मध्य आलेख: H₂+I₂→2HI अभिक्रिया में सक्रियित संकुल के निर्माण के लिए आवश्यक ऊर्जा Ea (सक्रियण ऊर्जा)

H₂(g)+I₂(g)→2HI(g) अभिक्रिया में, हाइड्रोजन का अणु आयोडीन के अणु से संघट्ट कर एक अस्थायी मध्यवर्ती (सक्रियित संकुल) बनाता है, जिसके विरचन के लिए आवश्यक ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा (Ea) कहलाती है।

गतिज ऊर्जा → अणुओं का अंश ताप T ताप (T+10) Ea
चित्र 3.9 — मैक्सवेल-बोल्ट्समान ऊर्जा वितरण वक्र: ताप बढ़ने पर Ea से अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश (छायांकित क्षेत्रफल) बढ़ जाता है
आर्रेनियस समीकरण — लघुगणकीय व दो-ताप रूप ln k = −Ea/RT + ln A   (3.19)
log(k₂/k₁) = (Ea/2.303R)[1/T₁ − 1/T₂]   (3.22)
= (Ea/2.303R)[(T₂−T₁)/(T₁T₂)]
1/T → ln k अंत:खंड = ln A ढाल = −Ea/R
चित्र 3.10 — ln k एवं 1/T के मध्य आलेख: ढाल=−Ea/R, अंत:खंड=ln A

3.4.1 उत्प्रेरक का प्रभाव

उत्प्रेरक वह पदार्थ है जो स्वयं स्थायी रासायनिक परिवर्तन हुए बिना अभिक्रिया के वेग को बढ़ाता है (जैसे MnO₂, 2KClO₃→2KCl+3O₂ को उत्प्रेरित करता है)। यदि मिलाया गया पदार्थ अभिक्रिया की दर को कम करता है तो उसे निरोधक कहते हैं, 'उत्प्रेरक' नहीं।

अभिक्रिया निर्देशांक → अभिक्रियक उत्पाद उत्प्रेरक के बिना पथ उत्प्रेरक द्वारा पथ
चित्र 3.11 — सक्रियण ऊर्जा पर उत्प्रेरक का प्रभाव: उत्प्रेरक वैकल्पिक निम्न-ऊर्जा पथ प्रदान कर Ea घटाता है
महत्वपूर्ण गुण: उत्प्रेरक अभिक्रिया की गिब्ज़ ऊर्जा (ΔG) में बदलाव नहीं करता; यह स्वतः प्रवर्तित अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करता है परंतु स्वतः अप्रवर्तित अभिक्रिया को नहीं। यह साम्य स्थिरांक में परिवर्तन नहीं करता, परंतु साम्य को शीघ्र स्थापित करने में सहायता करता है (अग्र व प्रतीप दोनों अभिक्रियाओं को समान रूप से उत्प्रेरित करता है)।
त्वरित तथ्य — 3.4
  • 10° ताप वृद्धि से वेग स्थिरांक लगभग दुगुना हो जाता है।
  • आर्रेनियस समीकरण: k=Ae⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ; A=आवृत्ति गुणक (पूर्व-घातांकी गुणक), Ea=सक्रियण ऊर्जा।
  • ln k बनाम 1/T का आलेख सरल रेखा; ढाल=−Ea/R, अंत:खंड=ln A।
  • सक्रियित संकुल (मध्यवर्ती) के विरचन के लिए आवश्यक ऊर्जा = सक्रियण ऊर्जा।
  • मैक्सवेल-बोल्ट्समान वितरण वक्र का शीर्ष अतिसंभाव्य गतिज ऊर्जा दर्शाता है; ताप बढ़ने पर शीर्ष अधिक ऊर्जा की ओर विस्थापित होता है।
  • उत्प्रेरक Ea कम कर वेग बढ़ाता है परंतु ΔG व साम्य स्थिरांक अपरिवर्तित रखता है; साम्य शीघ्र स्थापित करने में मदद करता है।
  • निरोधक वह पदार्थ है जो वेग को घटाता है — इसे 'उत्प्रेरक' नहीं कहते।
संघट्टवाद

3.5 रासायनिक अभिक्रिया का संघट्ट सिद्धांत

संघट्टवाद (Collision Theory), जिसे मेक्स ट्राउट्ज़ तथा विलियम लुईस ने 1916-18 में प्रतिपादित किया, गैस की गतिक परिकल्पना पर आधारित है। इस सिद्धांत के अनुसार अभिक्रियक के अणुओं को कठोर गोले माना जाता है तथा अभिक्रिया अणुओं के आपस में संघट्ट होने के कारण होती है।

संघट्ट सिद्धांत — द्विअणुक अभिक्रिया A+B→उत्पाद वेग = ZAB e−Ea/RT   (3.23)
यहाँ ZAB = A व B के संघट्ट की आवृत्ति (संघट्ट आवृत्ति); e−Ea/RT = Ea के बराबर अथवा अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश

समीकरण 3.23 सामान्य अणु/परमाणु वाली अभिक्रियाओं के वेग स्थिरांक की सटीक प्रागुक्ति करती है, परंतु जटिल अणुओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण विचलन होता है — क्योंकि सभी संघट्ट उत्पाद में विरचित नहीं होते। केवल वे संघट्ट जिनमें अणुओं की पर्याप्त गतिज ऊर्जा (देहली ऊर्जा = सक्रियण ऊर्जा + अभिक्रियक स्पीशीज़ की ऊर्जा) तथा सही अभिविन्यास होता है, प्रभावी संघट्ट कहलाते हैं।

CH₃Br + OH⁻ का अभिविन्यास अनुपयुक्त अभिविन्यास Br की ओर से OH⁻ का संघट्ट → कोई उत्पाद नहीं उपयुक्त अभिविन्यास C की ओर से OH⁻ का संघट्ट → CH₃OH + Br⁻ बनता है
चित्र 3.12 — अणुओं का उपयुक्त एवं अनुपयुक्त अभिविन्यास: प्रभावी संघट्ट के लिए सही अभिविन्यास व पर्याप्त ऊर्जा दोनों आवश्यक
त्रिविम कारक सहित संशोधित समीकरण वेग = P ZAB e−Ea/RT
यहाँ P = प्रायिकता (त्रिविम) कारक — संघट्ट में अणुओं के उपयुक्त अभिविन्यास को समाहित करता है
सारांश: संघट्ट सिद्धांत में सक्रियण ऊर्जा एवं उपयुक्त अभिविन्यास दोनों ही साथ-साथ प्रभावी संघट्ट का मानक निर्धारित करते हैं अर्थात् अभिक्रिया वेग को निर्धारित करते हैं। इस सिद्धांत की कमी यह है कि इसमें परमाणुओं/अणुओं को कठोर गोले माना गया है तथा इनके संरचना पहलू को नकारा गया है।
त्वरित तथ्य — 3.5
  • संघट्ट सिद्धांत गैस की गतिक परिकल्पना पर आधारित; ट्राउट्ज़ व लुईस द्वारा 1916-18 में प्रतिपादित।
  • वेग = ZABe⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ (सरल रूप); ZAB = संघट्ट आवृत्ति।
  • देहली ऊर्जा = सक्रियण ऊर्जा + अभिक्रियक स्पीशीज़ की ऊर्जा।
  • प्रभावी संघट्ट के लिए दो शर्तें आवश्यक: (i) पर्याप्त गतिज ऊर्जा (देहली ऊर्जा के बराबर या अधिक), (ii) उपयुक्त अभिविन्यास।
  • संशोधित समीकरण: वेग = PZABe⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ, जहाँ P त्रिविम/प्रायिकता कारक है।
  • सीमा: कठोर गोला मॉडल अणुओं की संरचना (structure) को नकारता है — जटिल अणुओं के लिए यह मॉडल कम सटीक है।
रिवीज़न पैक

संपूर्ण अध्याय — एक-पंक्ति तथ्य सूची

अभिक्रिया वेग व वेग को प्रभावित करने वाले कारक (3.1–3.2)
  • बलगतिकी वेग व क्रियाविधि बताती है; ऊष्मागतिकी केवल संभाव्यता (ΔG<0)।
  • औसत वेग = ∓Δ[R या P]/Δt; तात्क्षणिक वेग = स्पर्श रेखा का ढाल (dt→0 पर)।
  • वेग की SI इकाई: mol L⁻¹ s⁻¹ (गैसों में atm s⁻¹)।
  • असमान स्टॉइकियोमीट्री गुणांक होने पर प्रत्येक पद को उसके गुणांक से भाग देते हैं।
  • वेग नियम व्यंजक: वेग=k[A]ˣ[B]ʸ; घातांक x,y प्रायोगिक रूप से ज्ञात होते हैं, स्टॉइकियोमीट्री गुणांकों के समान होना आवश्यक नहीं।
  • वेग नियम/कोटि किसी संतुलित समीकरण से प्रागुक्त नहीं की जा सकती — केवल प्रयोग से।
  • कोटि = वेग नियम में सभी सांद्रता घातांकों का योग; 0,1,2,3 या भिन्नात्मक हो सकती है।
  • आण्विकता केवल प्राथमिक अभिक्रिया के लिए परिभाषित; मान 1–3 तक सीमित, शून्य/भिन्नात्मक नहीं।
  • जटिल अभिक्रिया में कोटि = सबसे मंद पद (वेग निर्धारक पद) की आण्विकता।
  • वेग स्थिरांक इकाइयाँ: शून्य कोटि—mol L⁻¹s⁻¹; प्रथम कोटि—s⁻¹; द्वितीय कोटि—L mol⁻¹s⁻¹।
समाकलित वेग समीकरण (3.3)
  • शून्य कोटि: [R]=[R]₀−kt; k=([R]₀−[R])/t; t½=[R]₀/2k।
  • प्रथम कोटि: ln[R]=ln[R]₀−kt अथवा k=(2.303/t)log([R]₀/[R]); t½=0.693/k।
  • प्रथम कोटि अर्धायु सांद्रता-स्वतंत्र होती है; शून्य कोटि अर्धायु प्रारंभिक सांद्रता के समानुपाती।
  • प्रथम कोटि अभिक्रिया में 99.9% पूर्णता का समय = 10×t½।
  • गैसीय प्रथम कोटि अभिक्रिया A(g)→B(g)+C(g) में pA=2pi−pt
  • छद्म प्रथम कोटि अभिक्रिया: वास्तविक कोटि अधिक, परंतु एक अभिकारक (जैसे जल) आधिक्य में होने से प्रथम कोटि जैसी दिखती है (एथिल ऐसीटेट जल-अपघटन, सूक्रोस प्रतिलोमन)।
ताप निर्भरता, उत्प्रेरक व संघट्ट सिद्धांत (3.4–3.5)
  • 10° ताप वृद्धि से k लगभग दुगुना हो जाता है।
  • आर्रेनियस समीकरण: k=Ae⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ; log(k₂/k₁)=(Ea/2.303R)[1/T₁−1/T₂]।
  • ln k बनाम 1/T आलेख सरल रेखा, ढाल=−Ea/R, अंत:खंड=ln A।
  • सक्रियण ऊर्जा = सक्रियित संकुल व अभिकारक अणुओं के मध्य ऊर्जा का अंतर।
  • मैक्सवेल-बोल्ट्समान वितरण: ताप बढ़ने पर Ea से अधिक ऊर्जा वाले अणुओं का अंश बढ़ता है।
  • उत्प्रेरक Ea कम करता है, वेग बढ़ाता है; ΔG व K (साम्य स्थिरांक) अपरिवर्तित रहते हैं; साम्य शीघ्र स्थापित होता है।
  • संघट्ट सिद्धांत: वेग=PZABe⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ; P=त्रिविम/प्रायिकता कारक (उपयुक्त अभिविन्यास)।
  • प्रभावी संघट्ट के लिए देहली ऊर्जा (Ea के बराबर या अधिक) व उपयुक्त अभिविन्यास दोनों आवश्यक।
  • R (गैस स्थिरांक) = 8.314 J K⁻¹ mol⁻¹; इकाई रूपांतरण: 2.303RT का प्रयोग log आधारित सूत्रों में।
सूत्र संग्रह

महत्वपूर्ण राशियाँ, सूत्र व तुलना तालिका

राशि/संबंधसूत्रटिप्पणी
औसत वेगrav=−Δ[R]/Δt=Δ[P]/Δtसमयांतराल पर निर्भर
तात्क्षणिक वेगrinst=−d[R]/dt=d[P]/dtस्पर्श रेखा का ढाल
वेग नियम (व्यंजक)वेग=k[A]ˣ[B]ʸप्रायोगिक रूप से निर्धारित
अभिक्रिया की कोटिn=x+y0,1,2,3 या भिन्नात्मक
शून्य कोटि समाकलित समीकरण[R]=[R]₀−ktk=([R]₀−[R])/t
शून्य कोटि अर्धायुt½=[R]₀/2k[R]₀ के समानुपाती
प्रथम कोटि समाकलित समीकरणln[R]=ln[R]₀−kt अथवा [R]=[R]₀e⁻ᵏᵗk=(2.303/t)log([R]₀/[R])
प्रथम कोटि अर्धायुt½=0.693/k[R]₀ से स्वतंत्र
गैसीय प्रथम कोटि (दाब पद)k=(2.303/t)log[pᵢ/(2pᵢ−pₜ)]pA=2pᵢ−pₜ
आर्रेनियस समीकरणk=Ae⁻ᴱᵃ/ᴿᵀA=आवृत्ति गुणक
आर्रेनियस — लघुगणकीय रूपln k=−Ea/RT+ln Aln k बनाम 1/T सरल रेखा
दो-ताप आर्रेनियस सूत्रlog(k₂/k₁)=(Ea/2.303R)[1/T₁−1/T₂]Ea व A ज्ञात करने हेतु
संघट्ट सिद्धांत (सरल)वेग=ZABe⁻ᴱᵃ/ᴿᵀZAB=संघट्ट आवृत्ति
संघट्ट सिद्धांत (त्रिविम कारक सहित)वेग=PZABe⁻ᴱᵃ/ᴿᵀP=प्रायिकता कारक

शून्य व प्रथम कोटि की तुलना

गुणशून्य कोटिप्रथम कोटि
अवकल वेग नियमd[R]/dt=−kd[R]/dt=−k[R]
समाकलन वेग नियमkt=[R]₀−[R]kt=ln{[R]₀/[R]}
सरल रेखा आलेख[R] बनाम tln[R] बनाम t
अर्धायु[R]₀/2k0.693/k
k की इकाईmol L⁻¹s⁻¹s⁻¹
उदाहरणPt सतह पर NH₃ का वियोजनN₂O₅ अपघटन, रेडियोऐक्टिव क्षय
याद रखने योग्य स्थिरांक: R=8.314 J K⁻¹ mol⁻¹; 2.303R≈19.147 J K⁻¹ mol⁻¹; ln 2=0.693; log x = ln x / 2.303

पाठ्यनिहित प्रश्न (3.1 – 3.9) — विस्तृत हल

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके हल देखें।

3.1 R→P, अभिक्रिया के लिए अभिकारक की सांद्रता 0.03M से 25 मिनट में परिवर्तित हो कर 0.02M हो जाती है। औसत वेग की गणना सेकेंड तथा मिनट दोनों इकाइयों में कीजिए।
Δ[R] = 0.02−0.03 = −0.01M; Δt = 25 min
औसत वेग = −Δ[R]/Δt = 0.01/25 = 4.0×10⁻⁴ mol L⁻¹ min⁻¹
सेकेंड में: 25 min = 1500 s; औसत वेग = 0.01/1500 = 6.66×10⁻⁶ mol L⁻¹ s⁻¹
औसत वेग = 4.0×10⁻⁴ mol L⁻¹ min⁻¹ = 6.66×10⁻⁶ mol L⁻¹ s⁻¹
3.2 2A→उत्पाद, अभिक्रिया में A की सांद्रता 10 मिनट में 0.5 mol L⁻¹ से घट कर 0.4 mol L⁻¹ रह जाती है। इस समयांतराल के लिए अभिक्रिया वेग की गणना कीजिए।
Δ[A] = 0.4−0.5 = −0.1 mol L⁻¹; Δt = 10 min
स्टॉइकियोमेट्री से: वेग = −(1/2)Δ[A]/Δt = −(1/2)×(−0.1)/10 = 0.005 mol L⁻¹ min⁻¹
अभिक्रिया वेग = 0.005 mol L⁻¹ min⁻¹
3.3 एक अभिक्रिया A+B→उत्पाद, के लिए वेग नियम r=k[A]1/2[B]² से दिया गया है। अभिक्रिया की कोटि क्या है?
कुल कोटि = घातांकों का योग = 1/2 + 2 = 5/2
अभिक्रिया की कोटि = 2.5 (5/2)
3.4 अणु X का Y में रूपांतरण द्वितीय कोटि की बलगतिकी के अनुरूप होता है। यदि X की सांद्रता तीन गुनी कर दी जाए तो Y के निर्माण होने के वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
द्वितीय कोटि के लिए: वेग = k[X]²
नया वेग = k(3[X])² = 9k[X]²
Y के निर्माण का वेग 9 गुना बढ़ जाएगा
3.5 एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक 1.15×10⁻³ s⁻¹ है। इस अभिक्रिया में अभिकारक की 5g मात्रा को घटकर 3g होने में कितना समय लगेगा?
t = (2.303/k) log([R]₀/[R]) = (2.303/1.15×10⁻³) log(5/3)
log(5/3)=0.2218; t = 2003.5×0.2218 ≈ 444 s
t ≈ 444 सेकंड
3.6 SO₂Cl₂ को अपनी प्रारंभिक मात्रा से आधी मात्रा में वियोजित होने में 60 मिनट का समय लगता है। यदि अभिक्रिया प्रथम कोटि की हो तो वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।
t½ = 60 min, k = 0.693/60 = 0.01155 min⁻¹ = 1.925×10⁻⁴ s⁻¹
k = 1.925×10⁻⁴ s⁻¹
3.7 ताप का वेग स्थिरांक पर क्या प्रभाव होगा?
आर्रेनियस समीकरण k=Ae⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ से, T बढ़ने पर घातांक कम ऋणात्मक होता है, अतः k बढ़ता है।
ताप बढ़ने पर वेग स्थिरांक k बढ़ता है — सामान्यतः 10° वृद्धि से k दुगुना होता है।
3.8 परमताप, 298K में 10K की वृद्धि होने पर रासायनिक अभिक्रिया का वेग दुगुना हो जाता है। इस अभिक्रिया के लिए Ea की गणना कीजिए।
log(k₂/k₁)= (Ea/2.303R)(1/T₁−1/T₂) ⇒ 0.301 = (Ea/19.147)×1.089×10⁻⁴
Ea = 0.301×19.147/1.089×10⁻⁴ ≈ 52,897 J mol⁻¹
Ea = 52.9 kJ mol⁻¹
3.9 581K ताप पर अभिक्रिया 2HI(g)→H₂(g)+I₂(g) के लिए सक्रियण ऊर्जा का मान 209.5 kJ mol⁻¹ है। अणुओं के उस अंश की गणना कीजिए जिसकी ऊर्जा सक्रियण ऊर्जा के बराबर अथवा इससे अधिक है।
अंश = e⁻ᴱᵃ/ᴿᵀ; Ea/RT = 209500/(8.314×581) = 43.37
अंश = e⁻⁴³·³⁷ = 10⁻¹⁸·⁸³ ≈ 1.47×10⁻¹⁹
अणुओं का अंश ≈ 1.47×10⁻¹⁹

अध्याय अभ्यास (3.1 – 3.30) — विस्तृत हल

NCERT पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।

3.1 निम्न अभिक्रियाओं के वेग व्यंजकों से इनकी अभिक्रिया कोटि तथा वेग स्थिरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए। (i)–(iv)
(i) 3NO→N₂O, वेग=k[NO]²: कोटि=2; k की इकाई = mol⁻¹L s⁻¹ (L mol⁻¹s⁻¹)
(ii) H₂O₂+3I⁻+2H⁺→2H₂O+I₃⁻, वेग=k[H₂O₂][I⁻]: कोटि=2; k की इकाई = L mol⁻¹s⁻¹
(iii) CH₃CHO→CH₄+CO, वेग=k[CH₃CHO]³/²: कोटि=3/2; k की इकाई = mol⁻¹/² L¹/² s⁻¹
(iv) C₂H₅Cl→C₂H₄+HCl, वेग=k[C₂H₅Cl]: कोटि=1; k की इकाई = s⁻¹
3.2 अभिक्रिया 2A+B→A₂B के लिए वेग=k[A][B]², k=2.0×10⁻⁶ mol⁻²L²s⁻¹। प्रारंभिक वेग की गणना कीजिए जब [A]=0.1 M, [B]=0.2 M तथा वेग जब [A] घटकर 0.06 M हो जाए।
प्रारंभिक वेग = 2.0×10⁻⁶×0.1×(0.2)² = 8.0×10⁻⁹ mol L⁻¹s⁻¹
[A] में 0.04 M कमी ⇒ [B] में 0.02 M कमी (स्टॉइकियोमेट्री से), नया [B]=0.18 M
नया वेग = 2.0×10⁻⁶×0.06×(0.18)² = 3.89×10⁻⁹ mol L⁻¹s⁻¹

🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (रासायनिक बलगतिकी)

NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

NEET 2024 ln k बनाम 1/T का आलेख किस अभिक्रिया के लिए सही है?
ln k = ln A − Ea/(RT) ⇒ ln k बनाम 1/T सरल रेखा, ढाल = −Ea/R (ऋणात्मक)।
सही उत्तर: ऋणात्मक ढाल वाली सरल रेखा।
NEET 2023 वेग स्थिरांक 0.03 s⁻¹ है। 7.2 mol L⁻¹ से 0.9 mol L⁻¹ होने में समय ज्ञात कीजिए (log2=0.301)।
प्रथम कोटि: t = (1/k) ln([A]₀/[A]) = (1/0.03) ln(8) = 33.33×2.079 ≈ 69.3 s
t = 69.3 s
NEET 2022 प्रथम कोटि अभिक्रिया A→उत्पाद में [A]₀=0.1M, 5 मिनट बाद 0.001M। वेग स्थिरांक (min⁻¹) ज्ञात कीजिए।
k = (2.303/5) log(0.1/0.001) = (2.303/5)×2 = 0.9212 min⁻¹
k = 0.9212 min⁻¹
NEET 2021 अभिक्रिया A→B के लिए ΔH=−4.2 kJ/mol, Ea=9.6 kJ/mol। सही स्थितिज ऊर्जा प्रोफ़ाइल पहचानिए।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (ΔH<0) ⇒ B की ऊर्जा A से कम; संक्रमण अवस्था A से 9.6 kJ ऊपर।
विकल्प जिसमें A ऊँचा, संक्रमण 9.6 kJ ऊपर, B 4.2 kJ नीचे हो।
NEET 2020 सांद्रता बढ़ाने से निम्न में से किस राशि में वृद्धि होती है?
संघट्ट सिद्धांत के अनुसार, सांद्रता बढ़ने पर प्रति इकाई आयतन संघट्टों की संख्या (संघट्ट आवृत्ति) बढ़ती है।
सही उत्तर: संघट्ट आवृत्ति

NEET सम्बंधित तथ्य Anya तथ्य

प्रश्न-पैटर्न, भार-विभाजन व बार-बार दोहराई जाने वाली अवधारणाएँ।

प्रश्न-पैटर्न व भार-विभाजन
  • NEET में इस अध्याय से प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (8–12 अंक) पूछे जाते हैं।
  • सर्वाधिक पूछे जाने वाले विषय: प्रथम कोटि अर्धायु, ऐरेनियस समीकरण, वेग स्थिरांक की इकाइयाँ, कोटि निर्धारण।
बार-बार पूछी जाने वाली अवधारणाएँ
  • t₁/₂ (प्रथम कोटि) = 0.693/k — सांद्रता-स्वतंत्र।
  • log(k₂/k₁) = (Ea/2.303R)(1/T₁−1/T₂) — Ea ज्ञात करने हेतु सबसे अधिक प्रयुक्त सूत्र।
  • उत्प्रेरक केवल Ea कम करता है, ΔG, K या ΔH नहीं बदलता।
  • आण्विकता केवल प्राथमिक अभिक्रियाओं के लिए, कोटि भिन्नात्मक भी हो सकती है।
तैयारी हेतु सुझाव: इन प्रश्नों को बिना उत्तर देखे हल करें, गलती होने पर संबंधित अनुभाग में वापस जाएँ।

अन्य NEET संबंधित तथ्य

तुलनात्मक
  • कोटि बनाम आण्विकता: कोटि प्रायोगिक, भिन्नात्मक हो सकती है; आण्विकता सैद्धान्तिक, पूर्णांक (1–3) तथा केवल प्राथमिक अभिक्रियाओं के लिए।
  • शून्य कोटि अर्धायु ∝ [A]₀, जबकि प्रथम कोटि अर्धायु [A]₀ से स्वतंत्र — यह अंतर बार-बार पूछा गया है।
तथ्य
  • देहली ऊर्जा = सक्रियण ऊर्जा + अभिकारकों की औसत ऊर्जा।
  • संघट्ट सिद्धांत में त्रिविम कारक P, अणुओं के उचित अभिविन्यास की प्रायिकता को दर्शाता है।
  • प्रथम कोटि अभिक्रिया में 99% पूर्णता के लिए t = 4.606/k; 99.9% के लिए t = 6.909/k (≈10×t½)।

रासायनिक बलगतिकी — NCERT कक्षा 12, अध्याय 3 · संपूर्ण अध्ययन नोट्स, सूत्र, आरेख, सभी पाठ्यनिहित तथा अभ्यास प्रश्नों के हल, तथा NEET में पूछे गए सभी प्रश्न सहित।

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