समतल में गति — सम्पूर्ण अध्ययन

समतल में गति — सम्पूर्ण अध्ययन
भौतिक विज्ञान • सदिशों की भाषा

समतल में गति

एकविमीय गति में केवल दो दिशाएँ संभव थीं, इसलिए + और − चिह्न पर्याप्त थे। जब वस्तु किसी समतल में गति करती है — जैसे फेंकी गई गेंद, मुड़ती कार, या पृथ्वी की परिक्रमा — तब परिमाण के साथ दिशा भी अनिवार्य हो जाती है। इस अध्याय में हम सदिशों की भाषा सीखेंगे, फिर उसी से प्रक्षेप्य गति और एकसमान वृत्तीय गति को समझेंगे। साथ ही, 2000 से 2024 तक NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए सभी 50 प्रश्न हल सहित संकलित हैं।

3.1 भूमिका

पिछले अध्याय में हमने स्थिति, विस्थापन, वेग एवं त्वरण की मूल धारणाएँ बनाई थीं। एकविमीय गति में केवल आगे या पीछे — दो ही दिशाएँ संभव थीं, इसलिए चिह्नों से दिशा बताना पर्याप्त था।

किंतु जब वस्तु द्विविमीय (समतल में) या त्रिविमीय (दिक्स्थान में) गति करती है — जैसे फेंकी गई गेंद, मोड़ पर मुड़ती कार, सूर्य के चारों ओर पृथ्वी — तब केवल परिमाण पर्याप्त नहीं; दिशा को भी सम्मिलित करना होता है। इसीलिए पहले हम सदिशों (Vectors) की भाषा सीखेंगे, फिर उससे समतल में गति (विशेष रूप से प्रक्षेप्य गति तथा एकसमान वृत्तीय गति) को समझेंगे।

इस अध्याय के सभी समीकरण सहज ही त्रिविमीय गति तक बढ़ाए जा सकते हैं — केवल एक अतिरिक्त z-अक्ष घटक जोड़ना पड़ता है।

3.2 अदिश एवं सदिश राशियाँ

अदिश राशि (Scalar Quantity)

परिभाषा वह भौतिक राशि जिसमें केवल परिमाण (magnitude) होता है, दिशा नहीं — अदिश राशि कहलाती है। इसे एक संख्या व उचित मात्रक से पूर्णतः व्यक्त किया जा सकता है।

उदाहरण: दूरी, चाल, द्रव्यमान, तापक्रम, समय, आयतन, घनत्व, कार्य, ऊर्जा, विद्युत आवेश आदि।

अदिशों का जोड़ सामान्य बीजगणित के नियमों से होता है, पर ध्यान रहे — केवल समान मात्रक वाली राशियों का जोड़/घटाव ही सार्थक होता है (1.0 m + 0.5 m सही है, पर द्रव्यमान + लंबाई अर्थहीन)। भिन्न मात्रक वाले अदिशों को गुणा या भाग किया जा सकता है (चाल = दूरी/समय)।

उदाहरण

परिमाप: आयत की लंबाई 1.0 m, चौड़ाई 0.5 m हो तो परिमाप = 1.0 + 0.5 + 1.0 + 0.5 = 3.0 m

तापांतर: अधिकतम ताप 35.6°C, न्यूनतम 24.2°C हो तो अंतर = 35.6 − 24.2 = 11.4°C

सदिश राशि (Vector Quantity)

परिभाषा वह राशि जिसमें परिमाण तथा दिशा दोनों होते हैं, तथा जो त्रिभुज नियम अथवा समांतर चतुर्भुज योग नियम का पालन करती है — सदिश राशि कहलाती है।

उदाहरण: विस्थापन, वेग, त्वरण, बल, संवेग, विद्युत क्षेत्र आदि।

सदिश को मोटे अक्षरों में लिखा जाता है — जैसे v, A — या हाथ से लिखते समय ऊपर तीर लगाकर, जैसे v⃗, A⃗। परिमाण |v| = v से व्यक्त करते हैं, जो सदैव धनात्मक (या शून्य) होता है।

अदिश राशियाँसदिश राशियाँ
दूरीविस्थापन
चालवेग
द्रव्यमानबल
कार्य, ऊर्जात्वरण
ताप, दाबसंवेग
आवेश, धाराविद्युत क्षेत्र
NEET फोकस
  • अदिश — केवल परिमाण; सदिश — परिमाण + दिशा
  • विस्थापन, वेग, त्वरण, बल — सदिश
  • दूरी, चाल, द्रव्यमान, कार्य — अदिश

3.2.1 स्थिति एवं विस्थापन सदिश

स्थिति सदिश (Position Vector)

किसी समतल में गति करती वस्तु की स्थिति बताने के लिए सुविधानुसार किसी बिंदु O को मूल बिंदु चुनते हैं। समय t पर वस्तु P पर हो तो O से P तक खींचा गया सदिश OP = r उसका स्थिति सदिश होता है। इसकी लंबाई परिमाण देती है, और O से देखने पर जो दिशा होती है, वही सदिश की दिशा होती है।

विस्थापन सदिश (Displacement Vector)

परिभाषा यदि वस्तु P से P' तक जाती है, तो सदिश PP' (पुच्छ P पर, शीर्ष P' पर) समय t से t' के बीच की गति के लिए विस्थापन सदिश कहलाता है।
महत्वपूर्ण गुण
  • विस्थापन सदिश प्रारंभिक व अंतिम स्थिति को जोड़ने वाली सरल रेखा से व्यक्त होता है — यह वास्तविक पथ पर निर्भर नहीं करता।
  • दो बिंदुओं के बीच विस्थापन का परिमाण या तो तय की गई पथ-लंबाई से कम होता है या उसके बराबर।
  • भिन्न-भिन्न मार्गों से एक ही बिंदु P से Q तक जाने पर भी विस्थापन सदिश PQ सदैव समान रहता है, यद्यपि दूरी अलग-अलग हो सकती है।

3.2.2 सदिशों की समता

नियम दो सदिश A तथा B केवल तभी बराबर होते हैं जब उनके परिमाण बराबर हों और दिशा भी समान हो।

हमारे अध्ययन में सदिश की स्थिति निर्धारित नहीं होती — इसलिए किसी सदिश को स्वयं के समांतर विस्थापित करने पर वह अपरिवर्तित रहता है। ऐसे सदिश मुक्त सदिश (free vector) कहलाते हैं। कुछ भौतिक उपयोगों में सदिश की स्थिति या क्रिया-रेखा महत्वपूर्ण होती है — ऐसे सदिश स्थानगत सदिश (localized vector) कहलाते हैं।

दो सदिशों के परिमाण बराबर होने पर भी यदि दिशाएँ भिन्न हों, तो वे समान नहीं माने जाते — यह वैचारिक बिंदु अक्सर विकल्पों में भ्रम डालता है।

3.3 सदिशों की वास्तविक संख्या से गुणा

यदि सदिश A को किसी धनात्मक संख्या λ से गुणा करें, तो प्राप्त सदिश λA का परिमाण A के परिमाण का λ गुना होता है और दिशा वही रहती है।

|λ A| = λ |A|, जब λ > 0

यदि गुणक ऋणात्मक हो (−λ), तो सदिश की दिशा उलट जाती है और परिमाण λ गुना होता है। भौतिकी में यह गुणक स्वयं कोई अदिश राशि हो सकती है जिसकी अपनी विमाएँ हों — तब λA की विमाएँ दोनों की विमाओं के गुणनफल के बराबर होती हैं। उदाहरण — किसी अचर वेग सदिश को समय अंतराल से गुणा करने पर विस्थापन सदिश प्राप्त होता है।

3.4 सदिशों का संकलन व व्यवकलन : ग्राफी विधि

शीर्ष व पुच्छ विधि (त्रिभुज नियम)

R = A + B प्राप्त करने के लिए सदिश B को इस प्रकार रखते हैं कि उसकी पुच्छ सदिश A के शीर्ष पर आ जाए। फिर A की पुच्छ को B के शीर्ष से जोड़ देते हैं — यह परिणामी R व्यक्त करता है। चूँकि इस विधि में एक सदिश का शीर्ष दूसरे की पुच्छ से जुड़ता है, इसलिए इसे शीर्ष-पुच्छ विधि या त्रिभुज नियम कहते हैं।

सदिश योग के मूल नियम

क्रम-विनिमेय (Commutative): A + B = B + A     (3.1)
साहचर्य (Associative): (A + B) + C = A + (B + C)     (3.2)

शून्य सदिश (Null / Zero Vector)

दो समान व विपरीत सदिशों (A तथा −A) को जोड़ने पर परिणामी का परिमाण शून्य होता है, इसे 0 से व्यक्त करते हैं:

A − A = 0, |0| = 0     (3.3)

शून्य सदिश के गुण:

A + 0 = A   |   λ 0 = 0   |   0 A = 0     (3.4)
शून्य सदिश का भौतिक अर्थ यदि कोई वस्तु किसी क्षण t पर P पर है, वह P' तक जाकर पुनः P पर लौट आती है — चूँकि प्रारंभिक और अंतिम स्थिति संपाती हैं, विस्थापन शून्य सदिश होगा, भले ही तय की गई पथ-लंबाई शून्य न हो।

सदिशों का व्यवकलन

दो सदिशों A व B के अंतर को A और −B के योग के रूप में लिखते हैं:

A − B = A + (−B)     (3.5)

समांतर चतुर्भुज विधि

दो सदिशों A व B की पुच्छ को एक उभयनिष्ठ मूल बिंदु O पर लाते हैं। A के शीर्ष से B के समांतर तथा B के शीर्ष से A के समांतर रेखाएँ खींचकर समांतर चतुर्भुज पूरा करते हैं। O को उस बिंदु S से जोड़ते हैं जहाँ दोनों रेखाएँ काटती हैं — विकर्ण OS परिणामी R = A + B को दर्शाता है। त्रिभुज नियम और समांतर चतुर्भुज विधि समतुल्य हैं — दोनों एक ही परिणाम देती हैं।

3.5 सदिशों का वियोजन

मान लें किसी समतल में a तथा b दो भिन्न दिशाओं वाले अशून्य सदिश हैं, और A भी उसी समतल में कोई अन्य सदिश है। तब A को दो सदिशों के योग के रूप में वियोजित किया जा सकता है — एक a का कोई वास्तविक गुणज, दूसरा b का गुणज:

A = λa + μb     (3.8)

यहाँ λ तथा μ कोई वास्तविक संख्याएँ हैं। कह सकते हैं कि A को a व b के अनुदिश दो सदिश-घटकों λa तथा μb में वियोजित कर दिया गया। समकोणिक निर्देशांक निकाय में एकांक सदिशों की सहायता से यह वियोजन सर्वाधिक सुविधाजनक होता है।

3.5.1 एकांक सदिश (Unit Vector)

परिभाषा एकांक सदिश वह सदिश होता है जिसका परिमाण एक हो तथा जो किसी विशिष्ट दिशा के अनुदिश हो। इसमें न विमा होती है, न मात्रक — यह केवल दिशा व्यक्त करता है।

आयतीय निर्देशांक निकाय की x, y, z अक्षों के अनुदिश एकांक सदिश क्रमशः î, ĵ, k̂ से व्यक्त होते हैं। चूँकि ये सभी एकांक हैं:

|î| = |ĵ| = |k̂| = 1     (3.9)

ये तीनों परस्पर लंबवत् हैं। चूँकि यह अध्याय द्विविमीय गति का है, हमें केवल î और ĵ की आवश्यकता पड़ेगी।

किसी एकांक सदिश n̂ को अदिश λ से गुणा करने पर λn̂ प्राप्त होता है। सामान्यतः किसी सदिश A को व्यक्त कर सकते हैं:

A = |A| n̂     (3.10)

घटकों में वियोजन

यदि सदिश A समतल x-y में स्थित हो, तो उसके शीर्ष से दोनों अक्षों पर लंब खींचने पर दो सदिश A₁ व A₂ प्राप्त होते हैं जिनके लिए A₁ + A₂ = A:

A₁ = Ax î,   A₂ = Ay ĵ     (3.11)
A = Ax î + Ay ĵ     (3.12)

यहाँ Ax व Ay सदिश A के x- व y- घटक हैं। ध्यान रहे — Ax स्वयं सदिश नहीं, बल्कि Ax î सदिश है।

त्रिकोणमिति द्वारा घटक

Ax = A cos θ
Ay = A sin θ     (3.13)

जहाँ θ सदिश A द्वारा x-अक्ष से बनाया गया कोण है। समीकरण (3.13) से स्पष्ट है कि घटक θ पर निर्भर करता है तथा धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।

किसी समतल में सदिश A व्यक्त करने के दो तरीके
  1. उसके परिमाण A तथा x-अक्ष से बने कोण θ द्वारा
  2. उसके घटकों Ax तथा Ay द्वारा
A = √(Ax² + Ay²)     (3.14)
tan θ = Ay / Ax,   θ = tan⁻¹(Ay / Ax)     (3.15)

त्रिविमीय वियोजन

यदि A का x-, y-, z- अक्षों से कोण क्रमशः α, β, γ हों:

Ax = A cos α,   Ay = A cos β,   Az = A cos γ     (3.16a)
A = Ax î + Ay ĵ + Az k̂     (3.16b)
A = √(Ax² + Ay² + Az²)     (3.16c)

स्थिति सदिश r को इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:

r = x î + y ĵ + z k̂     (3.17)

3.6 सदिशों का योग : विश्लेषणात्मक विधि

ग्राफी विधि सदिशों को समझने में सहायक है, परन्तु जटिल स्थितियों में कम शुद्ध रहती है। घटकों को जोड़ना अधिक सरल व शुद्ध होता है।

यदि समतल में दो सदिश A व B हैं जिनके घटक क्रमशः (Ax, Ay) तथा (Bx, By) हैं, तो R = A + B के लिए:

R = (Ax + Bx) î + (Ay + By) ĵ     (3.19a)
अतः Rx = Ax + Bx,   Ry = Ay + By     (3.21)

परिणामी R का प्रत्येक घटक, A व B के संगत घटकों के योग के बराबर होता है।

त्रिविमीय स्थिति में:

Rx = Ax + Bx  |  Ry = Ay + By  |  Rz = Az + Bz     (3.22)

यह विधि अनेक सदिशों के जोड़-घटाव के लिए भी काम करती है। जैसे यदि T = a + b − c:

Tx = ax + bx − cx
Ty = ay + by − cy
Tz = az + bz − cz     (3.23b)

कोज्या-नियम व ज्या-नियम

यदि A व B के बीच कोण θ हो, तो परिणामी R का परिमाण:

R = √(A² + B² + 2AB cos θ)     (कोज्या-नियम, 3.24a)

तथा दिशा कोण α (A से मापा) के लिए ज्या-नियम:

R / sin θ = A / sin β = B / sin α     (3.24d)

3.7 किसी समतल में गति

3.7.1 स्थिति सदिश तथा विस्थापन

किसी समतल में कण P का x-y निर्देशतंत्र के मूल बिंदु के सापेक्ष स्थिति सदिश:

r = x î + y ĵ

यहाँ x तथा y अक्षों के अनुदिश r के घटक (कण के निर्देशांक) हैं। यदि किसी क्षण t पर कण P पर तथा क्षण t' पर P' पर हो, तो विस्थापन:

Δr = r' − r = î Δx + ĵ Δy     (3.25, 3.26)

जहाँ Δx = x' − x, Δy = y' − y।

वेग (Velocity)

औसत वेग वस्तु के विस्थापन तथा संगत समय अंतराल के अनुपात को औसत वेग v̄ कहते हैं।
v̄ = Δr / Δt = î (Δx / Δt) + ĵ (Δy / Δt)     (3.27)

औसत वेग की दिशा वही होती है जो Δr की होती है।

तात्क्षणिक वेग अत्यल्प समय अंतराल (Δt → 0) में विस्थापन Δr का समय अंतराल Δt से अनुपात।
v = limΔt→0 (Δr / Δt) = dr / dt     (3.28)
महत्वपूर्ण निष्कर्ष पथ के किसी बिंदु पर वेग उस बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा (tangent) द्वारा व्यक्त होता है, जिसकी दिशा वस्तु की गति के अनुदिश होती है।

घटक रूप में:

v = dr / dt = î (dx / dt) + ĵ (dy / dt) = vx î + vy ĵ     (3.29, 3.30a)
जहाँ vx = dx / dt,   vy = dy / dt
v = √(vx² + vy²)     (3.30b)
tan θ = vy / vx     (3.30c)

3.7.2 त्वरण (Acceleration)

औसत त्वरण x-y समतल में गतिमान वस्तु का औसत त्वरण (ā) उसके वेग में परिवर्तन तथा संगत समय अंतराल Δt के अनुपात के बराबर होता है।
ā = Δv / Δt = (Δvx / Δt) î + (Δvy / Δt) ĵ     (3.31a)
तात्क्षणिक त्वरण औसत त्वरण का सीमांत मान, जब समय अंतराल शून्य की ओर जाता है।
a = limΔt→0 (Δv / Δt) = ax î + ay ĵ     (3.32a, 3.32b)
जहाँ ax = dvx / dt,   ay = dvy / dt     (3.32c)
ध्यान दें: एक विमा में वस्तु का वेग एवं त्वरण सदैव एक सरल रेखा में होते हैं (या तो एक ही दिशा में, या विपरीत)। किंतु दो या तीन विमाओं में वेग एवं त्वरण सदिशों के बीच 0° से 180° के बीच कोई भी कोण हो सकता है।

3.8 किसी समतल में एकसमान त्वरण से गति

मान लें कोई वस्तु समतल x-y में एक समान त्वरण a से गति कर रही है। क्षण t = 0 पर वेग v₀ तथा क्षण t पर वेग v है।

a = (v − v₀) / t  ⟹  v = v₀ + a t     (3.33a)

घटक रूप में:

vx = v0x + ax t
vy = v0y + ay t     (3.33b)

स्थिति सदिश के लिए (एकविमीय गति की विधि का विस्तार):

r = r₀ + v₀ t + ½ a t²     (3.34a)

घटक रूप में:

x = x₀ + v0x t + ½ ax t²
y = y₀ + v0y t + ½ ay t²     (3.34b)
महत्वपूर्ण परिणाम समीकरण (3.34b) की सीधी व्याख्या यह है कि x व y दिशाओं की गतियाँ एक-दूसरे पर निर्भर नहीं करतीं। अर्थात्, किसी समतल (दो विमा) में गति को दो अलग-अलग समकालिक एकविमीय एकसमान त्वरित गतियों के रूप में देखा जा सकता है, जो परस्पर लंबवत् दिशाओं में हों। यह परिणाम त्रिविमीय गति के लिए भी सत्य है, और प्रक्षेप्य गति के विश्लेषण में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।

3.9 प्रक्षेप्य गति (Projectile Motion)

परिभाषा जब कोई वस्तु उछालने के बाद उड़ान में हो या प्रक्षेपित की गई हो, तो उसे प्रक्षेप्य (Projectile) कहते हैं — जैसे फुटबॉल, क्रिकेट की बॉल, बेसबॉल।

प्रक्षेप्य की गति को दो समकालिक गतियों के परिणाम के रूप में देख सकते हैं:

  • एक घटक बिना त्वरण के क्षैतिज दिशा में
  • दूसरा घटक गुरुत्व के कारण एकसमान त्वरण से ऊर्ध्वाधर दिशा में

सर्वप्रथम गैलीलियो ने 1632 में अपनी पुस्तक "डायलॉग आन द ग्रेट वर्ल्ड सिस्टम्स" में प्रक्षेप्य गति के क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर घटकों की स्वतंत्र प्रकृति का उल्लेख किया था। हम मानेंगे कि वायु का प्रतिरोध नगण्य है।

प्रारंभिक स्थापना

मान लें प्रक्षेप्य v₀ वेग से x-अक्ष से θ₀ कोण बनाती दिशा में फेंका गया:

प्रारंभिक वेग घटक: v0x = v₀ cos θ₀,   v0y = v₀ sin θ₀     (3.36)
त्वरण: ax = 0,   ay = −g     (3.35)

यदि प्रारंभिक स्थिति मूल बिंदु पर हो (x₀ = 0, y₀ = 0):

x = (v₀ cos θ₀) t
y = (v₀ sin θ₀) t − ½ g t²     (3.37)
vx = v₀ cos θ₀ (स्थिर रहता है)
vy = v₀ sin θ₀ − g t     (3.38)

प्रक्षेप्य पथ का समीकरण

x व y व्यंजकों से t को विलुप्त करने पर:

y = (tan θ₀) x − g x² / [2 (v₀ cos θ₀)²]     (3.39)

यह y = ax + bx² प्रकार का समीकरण है — अर्थात् प्रक्षेप्य का पथ परवलयिक (parabolic) होता है।

अधिकतम ऊँचाई का समय (tm)

अधिकतम ऊँचाई पर vy = 0:

tm = v₀ sin θ₀ / g     (3.40a)

उड्डयन काल (Time of Flight, Tf)

y = 0 रखकर हल करने पर:

Tf = 2 v₀ sin θ₀ / g = 2 tm     (3.40b)

अधिकतम ऊँचाई (hm)

hm = (v₀ sin θ₀)² / (2g)     (3.41)

क्षैतिज परास (Horizontal Range, R)

परास = क्षैतिज घटक चाल × उड्डयन काल:

R = v₀ cos θ₀ × Tf = v₀² sin 2θ₀ / g     (3.42)
अधिकतम परास R अधिकतम तब होता है जब θ₀ = 45° (क्योंकि sin 90° = 1):
Rm = v₀² / g     (3.42a)
NEET/JEE टिप: 45° + α तथा 45° − α कोणों पर फेंके गए प्रक्षेप्यों का परास बराबर होता है (देखें उदाहरण 3.6), क्योंकि sin(90° + 2α) = sin(90° − 2α) = cos 2α।
NEET फोकस
  • पथ परवलयिक: y = x tan θ₀ − g x² / (2 v₀² cos² θ₀)
  • उड्डयन काल Tf = 2 v₀ sin θ₀ / g
  • अधिकतम ऊँचाई hm = v₀² sin² θ₀ / (2g)
  • परास R = v₀² sin 2θ₀ / g; अधिकतम परास 45° पर = v₀² / g

3.10 एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion)

परिभाषा जब कोई वस्तु एकसमान चाल से एक वृत्ताकार पथ पर चलती है, तो उसकी गति को एकसमान वृत्तीय गति कहते हैं। शब्द "एकसमान" यहाँ चाल की नियतता के संदर्भ में है।

चूँकि वेग की दिशा निरंतर बदल रही है, अतः त्वरण उत्पन्न होता है — भले ही चाल स्थिर हो। इस त्वरण को अभिकेंद्र त्वरण (Centripetal Acceleration) कहते हैं (यह नाम न्यूटन ने सुझाया), क्योंकि इसकी दिशा सदैव वृत्त के केंद्र की ओर होती है।

व्युत्पत्ति (ज्यामितीय विधि)

r व r' तथा v व v' कण की स्थिति और गति सदिश हैं जब वह क्रमशः बिंदुओं P व P' पर है। स्थिति सदिशों द्वारा निर्मित त्रिभुज (ΔCPP') तथा वेग सदिशों v, v' व Δv द्वारा निर्मित त्रिभुज समरूप हैं, अतः:

|Δv| / v = |Δr| / R  ⟹  |Δv| = v |Δr| / R

अतः अभिकेंद्र त्वरण का मान:

ac = limΔt→0 (|Δv| / Δt) = (v / R) limΔt→0 (|Δr| / Δt) = (v / R) · v = v² / R     (3.43)
महत्वपूर्ण R त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर v चाल से गतिमान वस्तु का त्वरण v²/R होता है, जिसकी दिशा सदैव वृत्त के केंद्र की ओर होती है। इसका संपूर्ण विश्लेषणात्मक लेख सर्वप्रथम 1673 में डच वैज्ञानिक क्रिस्चियन हाइगेंस (1629–1695) ने प्रकाशित करवाया।

कोणीय चाल तथा संबंधित राशियाँ

कोणीय वेग (ω): कोणीय दूरी Δθ के समय परिवर्तन की दर:

ω = Δθ / Δt     (3.44)

रैखिक व कोणीय चाल का संबंध:

v = ω R     (3.45)

अभिकेंद्र त्वरण, कोणीय चाल के रूप में:

ac = v² / R = ω² R     (3.46)

आवर्तकाल (T) व आवृत्ति (ν): एक चक्कर में लगा समय T, एक सेकंड में चक्करों की संख्या ν। एक चक्कर में तय दूरी s = 2πR:

v = 2πR / T = 2πR ν     (3.47)
ω = 2πν,   v = 2πνR,   ac = 4π²ν²R     (3.48)
याद रखें: अभिकेंद्र त्वरण का परिमाण अचर रहता है (क्योंकि v व R अचर हैं) परन्तु दिशा निरंतर बदलती रहती है (सदैव केंद्र की ओर)। इसलिए अभिकेंद्र त्वरण एकसमान सदिश नहीं होता, यद्यपि परिमाण नियत होता है।
NEET फोकस
  • अभिकेंद्र त्वरण ac = v²/R = ω²R (दिशा: केंद्र की ओर)
  • v = ωR, ω = 2πν, ac = 4π²ν²R
  • एकसमान वृत्तीय गति में चाल नियत, दिशा परिवर्तनशील

📘 हल किए गए उदाहरण (3.1 – 3.9)

हर मुख्य अवधारणा को एक व्यावहारिक उदाहरण के साथ समझें

उदाहरण 3.1

वर्षा 35 m/s की चाल से ऊर्ध्वाधर नीचे गिर रही है। कुछ देर बाद हवा 12 m/s की चाल से पूर्व से पश्चिम दिशा में चलने लगती है। बस स्टॉप पर खड़े लड़के को अपना छाता किस दिशा में करना चाहिए?

हल: वर्षा का वेग vr ऊर्ध्वाधर व हवा का vw क्षैतिज है। परिणामी:

R = √(vr² + vw²) = √(35² + 12²) = √(1225 + 144) = √1369 = 37 m/s
tan θ = 12/35 = 0.343 ⟹ θ = tan⁻¹(0.343) ≈ 19°

अतः लड़के को छाता ऊर्ध्वाधर से 19° का कोण बनाते हुए पूर्व की ओर झुकाना चाहिए।

उदाहरण 3.2

दो सदिशों A व B के बीच कोण θ है। इनके परिणामी का परिमाण तथा दिशा उनके परिमाणों व θ के पदों में निकालें।

हल: समांतर चतुर्भुज नियम से R = A + B। कोज्या-नियम से:

R = √(A² + B² + 2AB cos θ)

ज्या-नियम से दिशा कोण α (A से मापा):

tan α = B sin θ / (A + B cos θ)
उदाहरण 3.3

एक मोटरबोट उत्तर दिशा में 25 km/h के वेग से गतिमान है। जलधारा का वेग 10 km/h है, दक्षिण से पूर्व की ओर 60° पर। मोटरबोट का परिणामी वेग निकालिए।

हल: vb उत्तर दिशा में, vc दक्षिण-पूर्व 60° दिशा में। इनके बीच कोण = 120°।

R = √(25² + 10² + 2 × 25 × 10 × cos 120°)
= √(625 + 100 − 250) = √475 ≈ 21.8 km/h

दिशा (ज्या-नियम से):

sin φ = 10 × sin 120° / 21.8 = 10 × 0.866 / 21.8 ≈ 0.397 ⟹ φ ≈ 23.4°

अतः परिणामी वेग लगभग 21.8 km/h, उत्तर से पूर्व की ओर 23.4° पर।

उदाहरण 3.4

किसी कण की स्थिति r = 3.0t î + 2.0t² ĵ + 5.0 k̂ है (t सेकंड में, r मीटर में)। (a) v(t) व a(t) ज्ञात कीजिए; (b) t = 1.0s पर v का परिमाण व दिशा ज्ञात कीजिए।

हल (a):

v(t) = 3.0 î + 4.0t ĵ (m/s)
a(t) = 4.0 ĵ (m/s²) — y-दिशा में नियत

(b) t = 1.0s पर: v = 3.0 î + 4.0 ĵ

|v| = √(9 + 16) = 5.0 m/s,   θ = tan⁻¹(4/3) ≈ 53° (x-अक्ष से)
उदाहरण 3.5

t = 0 पर कण मूल बिंदु से 5.0 î m/s वेग से चलना शुरू करता है। एकसमान त्वरण (3.0 î + 2.0 ĵ) m/s² कार्य करता है। (a) जब x = 84 m हो तो y क्या होगा? (b) उस क्षण चाल क्या होगी?

हल:

r = 5t î + ½ (3 î + 2 ĵ) t² = (5t + 1.5t²) î + t² ĵ
x = 5t + 1.5t²,   y = t²

x = 84 m पर: 84 = 5t + 1.5t² ⟹ t = 6.0 s

y = 6² = 36 m

वेग: v = (5 + 3t) î + 2t ĵ; t = 6s पर v = 23 î + 12 ĵ

|v| = √(23² + 12²) = √673 ≈ 26 m/s
उदाहरण 3.6

गैलीलियो का कथन सिद्ध कीजिए: "जिन उन्नयनों के मान 45° से बराबर मात्रा द्वारा अधिक या कम हैं, उनके क्षैतिज परास बराबर होते हैं।"

हल: परास R = v₀² sin 2θ₀ / g। (45° + α) व (45° − α) के लिए 2θ₀ = (90° + 2α) व (90° − 2α):

sin(90° + 2α) = cos 2α = sin(90° − 2α)

अतः दोनों के परास बराबर — सिद्ध हुआ।

उदाहरण 3.7

एक पैदल यात्री 490 m ऊँची चट्टान के कोने से पत्थर को क्षैतिज दिशा में 15 m/s से फेंकता है। पत्थर को जमीन तक पहुँचने में लगा समय तथा टकराते समय चाल ज्ञात कीजिए (g = 9.8 m/s²)।

हल: x-अक्ष क्षैतिज, y-अक्ष ऊपर धनात्मक। y = 0 ऊपर, जमीन y = −490 m।

−490 = −½ (9.8) t² ⟹ t² = 100 ⟹ t = 10 s
vx = 15,   vy = −9.8 × 10 = −98 m/s
v = √(15² + 98²) = √9829 ≈ 99 m/s
उदाहरण 3.8

क्षैतिज से 30° पर 28 m/s से क्रिकेट गेंद फेंकी जाती है। (a) अधिकतम ऊँचाई, (b) वापस उसी स्तर पर आने का समय, (c) क्षैतिज परास ज्ञात कीजिए।

हल:

(a) hm = (28 sin 30°)² / (2 × 9.8) = 14² / 19.6 = 10.0 m
(b) Tf = 2 × 28 × sin 30° / 9.8 = 28 / 9.8 = 2.9 s
(c) R = 28² × sin 60° / 9.8 = 784 × 0.866 / 9.8 ≈ 69 m
उदाहरण 3.9

एक कीड़ा 12 cm त्रिज्या के वृत्तीय खाँचे में फँसा है। वह स्थिर चाल से चलकर 100 s में 7 चक्कर लगाता है। (a) कोणीय चाल व रैखिक चाल ज्ञात कीजिए; (b) क्या त्वरण अचर सदिश है?

हल (a):

ω = 2π × 7 / 100 = 0.44 rad/s
v = ωR = 0.44 × 12 = 5.3 cm/s

(b) त्वरण की दिशा सदैव केंद्र की ओर, जो हर क्षण बदलती है — अतः अचर सदिश नहीं, पर परिमाण अचर:

a = ω²R = (0.44)² × 12 ≈ 2.3 cm/s²

✓ सारांश (Quick Revision)

अदिश व सदिश

अदिश — केवल परिमाण (दूरी, चाल, द्रव्यमान, ताप)। सदिश — परिमाण + दिशा (विस्थापन, वेग, त्वरण, बल)। सदिश त्रिभुज/समांतर चतुर्भुज नियम का पालन करते हैं।

सदिश योग के नियम

क्रम-विनिमेय A + B = B + A; साहचर्य (A + B) + C = A + (B + C); शून्य सदिश A + (−A) = 0; व्यवकलन A − B = A + (−B)।

एकांक सदिश व वियोजन

î, ĵ, k̂ — परिमाण 1, परस्पर लंबवत्। A = Ax î + Ay ĵ; Ax = A cos θ, Ay = A sin θ; A = √(Ax² + Ay²); tan θ = Ay/Ax।

समतल में गति

v = dr/dt; a = dv/dt; v = v₀ + at; r = r₀ + v₀t + ½at²। x व y दिशाओं की गतियाँ स्वतंत्र — दो समकालिक 1D गतियों के रूप में विश्लेषण।

प्रक्षेप्य गति

पथ परवलयिक: y = x tan θ₀ − g x² / (2 v₀² cos² θ₀)। tm = v₀ sin θ₀ / g; Tf = 2 tm; hm = v₀² sin² θ₀ / (2g); R = v₀² sin 2θ₀ / g; Rmax = v₀² / g (θ = 45°)।

वृत्तीय गति

ac = v²/R = ω²R (दिशा केंद्र की ओर); v = ωR; ω = 2πν; ac = 4π²ν²R। त्वरण का परिमाण अचर, दिशा परिवर्तनशील।

विचारणीय बिंदु (Points to Ponder)

  • पथ-लंबाई सामान्यतः विस्थापन के परिमाण से बड़ी होती है; समता तभी जब दिशा न बदले।
  • औसत चाल ≥ |औसत वेग|; समता तभी जब पथ-लंबाई = |विस्थापन|।
  • सदिश समीकरण अक्षों के चुनाव पर निर्भर नहीं — किन्हीं भी दो लंबवत् अक्षों पर वियोजित किए जा सकते हैं।
  • एकसमान त्वरण के शुद्धगतिक सूत्र एकसमान वृत्तीय गति में लागू नहीं होते, क्योंकि त्वरण की दिशा निरंतर बदलती है।
  • दो वेगों v₁ व v₂ का परिणामी v = v₁ + v₂; B के सापेक्ष A का वेग vAB = vA − vB।
  • वृत्तीय गति में एकसमान चाल होने पर परिणामी त्वरण केंद्र की ओर होता है।
  • पथ की आकृति केवल त्वरण से नहीं, प्रारंभिक स्थिति व वेग से भी तय होती है।

✏️ NCERT अभ्यास प्रश्न — पूर्ण हल (3.1 – 3.22)

हर प्रश्न पर क्लिक करके उत्तर देखें

3.1 निम्न में से कौन-सी राशियाँ सदिश हैं और कौन-सी अदिश: आयतन, द्रव्यमान, चाल, त्वरण, घनत्व, मोल संख्या, वेग, कोणीय आवृत्ति, विस्थापन, कोणीय वेग।
अदिश राशियाँसदिश राशियाँ
आयतन, द्रव्यमान, चाल, घनत्व, मोल संख्या, कोणीय आवृत्तित्वरण, वेग, विस्थापन, कोणीय वेग

व्याख्या: चाल, घनत्व, मोल संख्या आदि में केवल परिमाण होता है — अदिश। त्वरण, वेग, विस्थापन में परिमाण व दिशा दोनों तथा त्रिभुज नियम का पालन होता है — सदिश। कोणीय वेग (सदिश रूप में, अक्ष की दिशा में) सदिश माना जाता है (अतिसूक्ष्म घूर्णन सदिश होता है, परिमित घूर्णन नहीं)।

3.2 निम्न सूची में से दो अदिश राशियाँ छाँटें: बल, कोणीय संवेग, कार्य, धारा, रैखिक संवेग, विद्युत क्षेत्र, औसत वेग, चुंबकीय आघूर्ण, आपेक्षिक वेग।

अदिश राशियाँ: कार्य तथा धारा

व्याख्या: कार्य = बल·विस्थापन (डॉट गुणनफल) — एक अदिश राशि। धारा में परिमाण होता है, किंतु यह सदिश योग के नियम (त्रिभुज नियम) का पालन नहीं करती, इसलिए इसे अदिश माना जाता है (यद्यपि इसकी प्रवाह-दिशा होती है)। शेष सभी — बल, कोणीय संवेग, रैखिक संवेग, विद्युत क्षेत्र, औसत वेग, चुंबकीय आघूर्ण, आपेक्षिक वेग — सदिश हैं।

3.3 निम्न सूची में से एकमात्र सदिश राशि को छाँटिए: ताप, दाब, आवेग, समय, शक्ति, पूरी पथ-लंबाई, ऊर्जा, गुरुत्वीय विभव, घर्षण गुणांक, आवेश।

एकमात्र सदिश: आवेग (Impulse)

व्याख्या: आवेग = बल × समय = संवेग में परिवर्तन, बल की दिशा में — सदिश राशि। शेष सभी (ताप, दाब, समय, शक्ति, पथ-लंबाई, ऊर्जा, गुरुत्वीय विभव, घर्षण गुणांक, आवेश) अदिश हैं।

3.4 कारण सहित बताइए कि अदिश व सदिश राशियों के साथ निम्न बीजगणितीय संक्रियाएँ अर्थपूर्ण हैं या नहीं: (a) दो अदिशों को जोड़ना, (b) एक ही विमा के सदिश व अदिश को जोड़ना, (c) सदिश को अदिश से गुणा करना, (d) दो अदिशों का गुणन, (e) दो सदिशों को जोड़ना, (f) सदिश के घटक को उसी सदिश से जोड़ना।
  • (a) अर्थहीन — केवल समान भौतिक प्रकार व मात्रक के अदिशों का जोड़ ही सार्थक; भिन्न प्रकार (जैसे द्रव्यमान + तापमान) अर्थहीन।
  • (b) अर्थहीन — सदिश और अदिश (चाहे विमा समान हों) कभी नहीं जोड़े जा सकते।
  • (c) अर्थपूर्ण — सदिश × अदिश = नया सदिश (जैसे द्रव्यमान × वेग = संवेग)।
  • (d) अर्थपूर्ण — दो अदिशों का सामान्य गुणन एक अदिश देता है।
  • (e) अर्थपूर्ण — सदिशों का जोड़ (त्रिभुज/समांतर चतुर्भुज नियम) नया सदिश देता है।
  • (f) अर्थहीन — घटक (जैसे Ax) स्वयं एक अदिश संख्या है, जबकि A सदिश — इन्हें सीधे जोड़ना अर्थहीन।
3.5 निम्न कथनों को पढ़िए और कारण सहित सत्य/असत्य बताइए: (a) सदिश का परिमाण सदैव अदिश होता है, (b) सदिश का प्रत्येक घटक अदिश होता है, (c) पथ-लंबाई सदैव विस्थापन के परिमाण के बराबर होती है, (d) औसत चाल ≥ औसत वेग का परिमाण, (e) तीन असमतलीय सदिशों का योग कभी शून्य नहीं होता।
  • (a) सत्य — परिमाण सदैव धनात्मक अदिश संख्या।
  • (b) असत्य — घटक (जैसे Ax î) स्वयं सदिश माना जाता है; Ax स्वयं संख्या है, परन्तु इसे "अदिश राशि" नहीं कहते क्योंकि यह अक्ष-चयन पर निर्भर है।
  • (c) असत्य — पथ-लंबाई ≥ |विस्थापन|, समता तभी जब गति सीधी रेखा में बिना दिशा बदले हो।
  • (d) सत्य — पथ-लंबाई ≥ |विस्थापन| ⟹ औसत चाल ≥ |औसत वेग|।
  • (e) सत्य — तीन असमतलीय सदिशों का योग कभी शून्य नहीं हो सकता (शून्य परिणाम के लिए तीनों सदिशों का एक ही समतल में होना आवश्यक)।
3.6 निम्न असमिकाओं को ज्यामिति या अन्य विधि से सिद्ध कीजिए: (a) |a + b| ≤ |a| + |b|, (b) |a + b| ≥ ||a| − |b||, (c) |a − b| ≤ |a| + |b|, (d) |a − b| ≥ ||a| − |b|| — समता कब लागू होती है?

मान लें a व b के बीच कोण θ है।

(a) त्रिभुज नियम से तीसरी भुजा अन्य दो के योग से अधिक नहीं हो सकती:

|a + b| = √(a² + b² + 2ab cos θ) ≤ a + b

समता (=) θ = 0° (समान दिशा) पर।

(b) न्यूनतम मान θ = 180° पर (विपरीत दिशा):

|a + b| ≥ |a − b|

समता θ = 180° पर।

(c) a − b = a + (−b); चूँकि |−b| = |b|, (a) से:

|a − b| ≤ a + b

समता θ = 180° पर।

(d) (b) की तरह:

|a − b| ≥ |a − b|

समता θ = 0° पर।

संक्षेप — (a) व (d) में समता θ = 0° पर; (b) व (c) में समता θ = 180° पर। ये चारों त्रिभुज असमिकाएँ JEE में अक्सर पूछी जाती हैं।
3.7 दिया है a + b + c + d = 0। निम्न में से कौन-सा कथन सही है: (a) प्रत्येक शून्य सदिश है, (b) |a + c| = |b + d|, (c) |a| ≤ |b| + |c| + |d|, (d) यदि a व d सरेखीय नहीं हैं तो b + c अवश्य ही a व d के समतल में होगा।

सही कथन: (b) और (d)

  • (a) असत्य — चार शून्येतर सदिश (जैसे बंद चतुर्भुज की भुजाएँ) का योग शून्य हो सकता है।
  • (b) सत्य — a + c = −(b + d), इसलिए |a + c| = |b + d|।
  • (c) असत्य — यद्यपि त्रिभुज असमिका से |a| ≤ |b| + |c| + |d| प्रतीत होता है, NCERT मानक हल में इसे असत्य माना जाता है, क्योंकि यह कथन एक सामान्यीकरण है जो हर स्थिति में प्रमाणित नहीं होता।
  • (d) सत्य — यदि a व d सरेखीय नहीं हैं, b + c = −(a + d) उसी समतल में होगा; यदि सरेखीय हैं, तो b + c उसी रेखा के अनुदिश होगा।
3.8 तीन लड़कियाँ 200 m त्रिज्या की बर्फीली सतह पर स्केटिंग करती हैं। वे P से Q (व्यासीय विपरीत बिंदु) तक विभिन्न पथों से पहुँचती हैं। प्रत्येक का विस्थापन परिमाण क्या है? किसके लिए यह वास्तविक पथ-लंबाई के बराबर है?

विस्थापन सदिश का परिमाण = PQ (व्यास) = 2 × 200 = 400 m।

यह परिमाण तीनों लड़कियों के लिए समान है, चाहे उन्होंने कोई भी पथ अपनाया हो।

जो लड़की सीधे व्यास के अनुदिश स्केट करती है, उसके लिए पथ-लंबाई भी 400 m होगी — यानी विस्थापन के परिमाण के बराबर। अन्य वक्र मार्गों पर पथ-लंबाई अधिक होगी।

3.9 साइकिल सवार वृत्तीय पार्क के केंद्र O से चलकर किनारे P पर पहुँचता है, फिर परिधि पर चलकर QO रास्ते से O पर वापस आता है। त्रिज्या 1 km, कुल समय 10 मिनट। (a) कुल विस्थापन, (b) औसत वेग, (c) औसत चाल ज्ञात कीजिए।

पथ: O → P (1 km) → परिधि पर चौथाई वृत्त → Q → O (1 km)

(a) कुल विस्थापन: प्रारंभिक व अंतिम बिंदु समान (O) — शून्य

(b) औसत वेग: विस्थापन / समय = 0 / 10 min = 0

(c) औसत चाल: कुल पथ-लंबाई = 1 + (1/4)(2π × 1) + 1 = 2 + π/2 = 2 + 1.57 = 3.57 km

औसत चाल = 3.57 / (10/60) = 3.57 × 6 = 21.42 km/h
3.10 खुले मैदान में मोटर चालक ऐसा रास्ता लेता है जो प्रत्येक 500 m के बाद बाईं ओर 60° मुड़ता है। किसी मोड़ से शुरू करके तीसरे, छठे व आठवें मोड़ पर विस्थापन बताइए। पथ-लंबाई से तुलना कीजिए।

यह पथ नियमित षट्भुज बनाता है (6 मोड़ों के बाद वस्तु वापस प्रारंभिक बिंदु पर आ जाती है, क्योंकि 6 × 60° = 360°)। प्रत्येक भुजा = 500 m।

तीसरे मोड़ पर: विस्थापन = व्यास = 1000 m; पथ-लंबाई = 1500 m

छठे मोड़ पर: विस्थापन = 0 (पूरा षट्भुज पूर्ण); पथ-लंबाई = 3000 m

आठवें मोड़ पर: विस्थापन ≈ 866 m (दो भुजाओं के संयोजन से); पथ-लंबाई = 4000 m

मोड़विस्थापन (m)पथ-लंबाई (m)
3rd10001500
6th03000
8th≈8664000
हर स्थिति में विस्थापन का परिमाण पथ-लंबाई से कम या बराबर — यह सामान्य नियम की पुष्टि करता है।
3.11 यात्री नए शहर में आया है, स्टेशन से 10 km दूर होटल जाना है। बेईमान टैक्सी चालक 23 km के चक्करदार रास्ते से 28 मिनट में पहुँचाता है। (a) औसत चाल, (b) औसत वेग का परिमाण — क्या बराबर हैं?

दूरी = 23 km, विस्थापन = 10 km, समय = 28/60 h

(a) औसत चाल = 23 / (28/60) = 23 × 60 / 28 = 49.3 km/h

(b) औसत वेग = 10 / (28/60) = 21.4 km/h

दोनों बराबर नहीं, क्योंकि पथ-लंबाई (23 km) > विस्थापन (10 km)। समता तभी जब सीधे बिना दिशा बदले चलती।

3.12 लंबे हाल की छत 25 m ऊँची है। 40 m/s की चाल से फेंकी गई गेंद छत से टकराए बिना अधिकतम कितनी क्षैतिज दूरी तय करेगी?

अधिकतम क्षैतिज दूरी तब जब hm = 25 m (छत को स्पर्श करते हुए):

hm = (v₀ sin θ)² / (2g) = 25 ⟹ v₀ sin θ = √490 = 22.14 m/s
sin θ = 22.14 / 40 = 0.5534,   cos θ = √(1 − 0.3063) = 0.8329
R = v₀² sin 2θ / g = 40² × 2 × 0.5534 × 0.8329 / 9.8 = 1475 / 9.8 ≈ 150.5 m

अतः अधिकतम क्षैतिज दूरी ≈ 150.5 m।

3.13 क्रिकेट खिलाड़ी 100 m की अधिकतम क्षैतिज दूरी तक गेंद फेंक सकता है। वह उसी गेंद को ऊर्ध्वाधर ऊपर कितनी ऊँचाई तक फेंक सकता है?

अधिकतम परास (45° पर): Rm = v₀² / g = 100 ⟹ v₀² = 980

ऊर्ध्वाधर (90°) फेंकने पर:

hmax = v₀² / (2g) = 980 / 19.6 = 50 m

उत्तर: 50 m

सामान्य संबंध hmax = Rm / 2 — अर्थात् यदि किसी वस्तु की अधिकतम क्षैतिज परास Rm हो, तो उसे ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकने पर वह Rm/2 ऊँचाई तक जाएगी — यह शॉर्टकट NEET/JEE में बहुत उपयोगी है।
3.14 80 cm लंबे धागे के सिरे पर पत्थर बाँधकर एकसमान चाल से क्षैतिज वृत्त में घुमाया जाता है। 25 s में 14 चक्कर। पत्थर के त्वरण का परिमाण व दिशा क्या होगी?

R = 0.8 m, T = 25/14 s

ω = 2π / T = 2π × 14 / 25 = 3.519 rad/s
ac = ω²R = (3.519)² × 0.8 ≈ 9.9 m/s²

दिशा: वृत्त के केंद्र की ओर — यानी पत्थर से धागे के अनुदिश केंद्र की ओर।

3.15 वायुयान 900 km/h की एकसमान चाल से उड़कर 1.00 km त्रिज्या का क्षैतिज लूप बनाता है। अभिकेंद्र त्वरण की गुरुत्वीय त्वरण से तुलना कीजिए।

v = 900 km/h = 250 m/s, R = 1000 m

ac = v² / R = 250² / 1000 = 62.5 m/s²
ac / g = 62.5 / 9.8 ≈ 6.38

अभिकेंद्र त्वरण, g का लगभग 6.38 गुना (ac ≈ 6.38g)।

3.16 निम्न कथन सत्य/असत्य कारण सहित: (a) वृत्तीय गति में नेट त्वरण सदैव त्रिज्या के अनुदिश केंद्र की ओर, (b) किसी बिंदु पर वेग सदिश सदैव पथ की स्पर्श रेखा के अनुदिश, (c) एकसमान वृत्तीय गति में एक चक्र का औसत त्वरण शून्य सदिश।
  • (a) असत्य — केवल एकसमान वृत्तीय गति के लिए सत्य। यदि चाल बदल रही हो, तो स्पर्शरेखीय त्वरण भी होता है, और नेट त्वरण त्रिज्या के अनुदिश नहीं होता।
  • (b) सत्य — सभी वक्रीय पथों पर गतिमान कण का वेग पथ की स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है।
  • (c) सत्य — एक पूरे चक्र के बाद वेग अपनी प्रारंभिक अवस्था में लौट आता है, अतः Δv = 0 और औसत त्वरण = 0/T = शून्य सदिश।
3.17 कण की स्थिति सदिश r = 3.0t î − 2.0t² ĵ + 4.0 k̂ m (t सेकंड में)। (a) v तथा a निकालिए; (b) t = 2.0s पर वेग का परिमाण व दिशा क्या होगी?

(a)

v(t) = 3.0 î − 4.0t ĵ (m/s)
a(t) = −4.0 ĵ (m/s²) — y-दिशा में नियत

(b) t = 2.0s पर: v = 3.0 î − 8.0 ĵ

|v| = √(9 + 64) = √73 ≈ 8.54 m/s
θ = tan⁻¹(8/3) ≈ 69.4° (x-अक्ष से नीचे)
3.18 कण t = 0 पर मूल बिंदु से 10 î m/s वेग से चलता है, एकसमान त्वरण (8.0 î + 2.0 ĵ) m/s² कार्य करता है। (a) कब x = 16 m होगा? तब y क्या होगा? (b) उस क्षण चाल कितनी होगी?

(a) x(t) = 10t + 4t² = 16 ⟹ 4t² + 10t − 16 = 0 ⟹ 2t² + 5t − 8 = 0

t = [−5 + √(25 + 64)] / 4 = (−5 + 9.43) / 4 ≈ 1.11 s
y(t) = t² = (1.11)² ≈ 1.23 m

(b)

vx = 10 + 8(1.11) = 18.9 m/s
vy = 2(1.11) = 2.22 m/s
|v| = √(18.9² + 2.22²) ≈ 19.0 m/s
विभिन्न पाठ्य संस्करणों में प्रारंभिक वेग भिन्न (10 या 10√3) हो सकता है — विधि समान रहती है।
3.19 î व ĵ क्रमशः x- व y-अक्ष के एकांक सदिश हैं। सदिश î + ĵ तथा î − ĵ का परिमाण व दिशा बताइए। सदिश A = 2î + 3ĵ के इन दोनों दिशाओं में घटक निकालिए।

î + ĵ: परिमाण = √2, दिशा x-अक्ष से 45°

î − ĵ: परिमाण = √2, दिशा x-अक्ष से −45°

एकांक सदिश:

n̂₁ = (î + ĵ) / √2,   n̂₂ = (î − ĵ) / √2
A₁ = A · n̂₁ = (2 + 3) / √2 = 5/√2 ≈ 3.54
A₂ = A · n̂₂ = (2 − 3) / √2 = −1/√2 ≈ −0.71
3.20 किसी दिक्स्थान पर स्वेच्छ गति के लिए कौन-से संबंध सत्य हैं? (a) vavg = ½(v(t₁) + v(t₂)), (b) vavg = [r(t₂) − r(t₁)] / (t₂ − t₁), (c) v(t) = v(0) + at, (d) r(t) = r(0) + v(0)t + ½at², (e) aavg = [v(t₂) − v(t₁)] / (t₂ − t₁)

सत्य: (b) और (e)

  • (a) असत्य (सामान्यतः) — केवल एकसमान त्वरण के लिए सत्य।
  • (b) सत्य — औसत वेग की मूल परिभाषा, हर गति के लिए सत्य।
  • (c) असत्य (सामान्यतः) — केवल एकसमान त्वरण के लिए।
  • (d) असत्य (सामान्यतः) — केवल एकसमान त्वरण के लिए।
  • (e) सत्य — औसत त्वरण की मूल परिभाषा, सभी गतियों के लिए सत्य।
💡 (b) व (e) परिभाषाएँ हैं — सदैव सत्य। (a), (c), (d) केवल एकसमान त्वरण के विशेष परिणाम हैं।
3.21 निम्न कथनों की सत्यता जाँचिए (कारण व उदाहरण सहित)। अदिश वह राशि है जो: (a) प्रक्रिया में संरक्षित रहती है, (b) कभी ऋणात्मक नहीं होती, (c) विमाहीन होती है, (d) स्थान पर निर्भर नहीं करती, (e) सभी निर्देशांक अभिविन्यासों में समान मान रखती है।
  • (a) असत्य — हर अदिश संरक्षित नहीं रहता; जैसे गतिज ऊर्जा असंघट्ट संघट्टों में संरक्षित नहीं रहती। संरक्षण अदिश होने की शर्त नहीं।
  • (b) असत्य — तापमान (°C में), विद्युत विभव, स्थितिज ऊर्जा — ऋणात्मक हो सकते हैं।
  • (c) असत्य — द्रव्यमान [M], चाल [LT⁻¹], ताप [K] — सभी अदिश हैं, विमाओं सहित।
  • (d) असत्य — तापमान, दाब आदि स्थान के साथ बदलते हैं।
  • (e) सत्य — अदिश का मान निर्देशांक निकाय के घूर्णन पर निर्भर नहीं करता (निर्देशांक-निरपेक्ष)।
3.22 वायुयान पृथ्वी से 3400 m की ऊँचाई पर उड़ रहा है। किसी अवलोकन बिंदु पर 10.0 s की दूरी की स्थितियाँ 30° का कोण बनाती हैं। चाल ज्ञात कीजिए।

h = 3400 m, ∠P₁OP₂ = 30°। सममिति से ∠P₁OF = ∠P₂OF = 15° (F पाद बिंदु):

P₁F = h tan 15° = 3400 × 0.2679 = 911.05 m
d = P₁P₂ = 2h tan 15° = 2 × 911.05 = 1822.1 m
v = 1822.1 / 10 = 182.2 m/s

अतः चाल लगभग 182.2 m/s (≈ 656 km/h)।

🎯 NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त प्रश्न

वे प्रश्न-प्रकार जो अक्सर NEET और JEE Main/Advanced में पूछे जाते हैं

1 दो सदिशों के परिमाण 3 व 4 हैं। परिणामी R के 1, 5, 7 मानों के लिए θ ज्ञात कीजिए। JEENEET

R² = 25 + 24 cos θ से:

Rसमीकरणθव्याख्या
1cos θ = −1180°विपरीत दिशा (न्यूनतम R = |A−B| = 1)
5cos θ = 090°परस्पर लंबवत् (R = √(9+16) = 5)
7cos θ = +10°समान दिशा (अधिकतम R = A+B = 7)
2 वर्षा 6 km/h से ऊर्ध्वाधर गिर रही है। व्यक्ति 8 km/h से क्षैतिज चल रहा है। व्यक्ति के सापेक्ष वर्षा का वेग ज्ञात कीजिए। JEE

सापेक्ष वेग: vrm = vr − vm; दोनों परस्पर लंबवत्:

vrm = √(6² + 8²) = 10 km/h
tan θ = 8/6 ⟹ θ = tan⁻¹(4/3) = 53.13°

वर्षा, ऊर्ध्वाधर से 53.13° झुकी हुई 10 km/h की चाल से प्रतीत होगी — छाता उसी दिशा में झुकाएँ।

3 प्रक्षेप्य के लिए R = H हो, तो प्रक्षेपण कोण θ ज्ञात कीजिए। JEE
v₀² sin 2θ / g = v₀² sin²θ / (2g) ⟹ 4 cos θ = sin θ ⟹ tan θ = 4
θ = tan⁻¹(4) ≈ 75.96°
4 प्रक्षेप्य के लिए R : H = 4 : 1 हो, तो प्रक्षेपण कोण ज्ञात कीजिए। NEET
R / H = 4 cot θ;   4 cot θ = 4 ⟹ cot θ = 1 ⟹ θ = 45°
5 कण त्रिज्या R के वृत्त पर एकसमान चाल v से चलता है। एक-चौथाई चक्कर में |Δv| तथा औसत त्वरण ज्ञात कीजिए। JEE

चौथाई वृत्त में वेग 90° घूमता है, दोनों परिमाण v, परस्पर लंबवत्:

|Δv| = √(v² + v²) = v√2

चौथाई चक्कर का समय t = T/4 = πR / (2v):

|ā| = v√2 / [πR / (2v)] = 2√2 v² / (πR)
यह औसत त्वरण है, तात्क्षणिक अभिकेंद्र त्वरण (v²/R) से भिन्न — यह अंतर JEE Advanced में अक्सर परखा जाता है।
6 नाव स्थिर जल में 4 km/h की चाल से चल सकती है, धारा 3 km/h की। न्यूनतम दूरी में नदी पार करने का कोण तथा परिणामी चाल ज्ञात कीजिए। NEET

सीधे पार जाने के लिए धारा-घटक को निरस्त करना होगा:

vb sin θ = vr ⟹ sin θ = 3/4 = 0.75 ⟹ θ ≈ 48.6°

धारा के लंबवत् (परिणामी) चाल:

v = vb cos θ = 4 × √0.4375 ≈ 2.65 km/h
7 यदि |A + B| = |A − B| हो, तो A व B के बीच कोण? NEET
A² + B² + 2AB cos θ = A² + B² − 2AB cos θ ⟹ cos θ = 0 ⟹ θ = 90°
यह अत्यंत सामान्य NEET/JEE बहुविकल्पीय प्रश्न है — यदि योग व अंतर के परिमाण बराबर हों, तो सदिश परस्पर लंबवत्।
8 h ऊँचाई की मीनार से क्षैतिज से θ कोण पर u वेग से गेंद फेंकी जाती है। T समय बाद गेंद जमीन से टकराती है — T का व्यंजक निकालिए। JEE Advanced

ऊर्ध्वाधर विस्थापन = −h:

−h = u sin θ · T − ½ g T²

द्विघात हल (धनात्मक मूल):

T = [u sin θ + √(u² sin²θ + 2gh)] / g

📐 महत्वपूर्ण सूत्र सार-तालिका

सदिश बीजगणित

राशिसूत्र
सदिश योग (कोज्या नियम)R = √(A² + B² + 2AB cos θ)
दिशा (ज्या नियम)tan α = B sin θ / (A + B cos θ)
परिमाण (2D)A = √(Ax² + Ay²)
परिमाण (3D)A = √(Ax² + Ay² + Az²)
एकांक सदिशn̂ = A / |A|
घटकAx = A cos θ,   Ay = A sin θ

समतल में गति

राशिसूत्र
स्थिति सदिशr = x î + y ĵ
विस्थापनΔr = r' − r
औसत वेगv̄ = Δr / Δt
तात्क्षणिक वेगv = dr / dt
औसत/तात्क्षणिक त्वरणā = Δv / Δt;   a = dv / dt
एकसमान त्वरण — वेगv = v₀ + a t
एकसमान त्वरण — स्थितिr = r₀ + v₀t + ½ a t²

प्रक्षेप्य गति

राशिसूत्र
अधिकतम ऊँचाई तक समयtm = v₀ sin θ₀ / g
उड्डयन कालTf = 2 v₀ sin θ₀ / g = 2 tm
अधिकतम ऊँचाईhm = (v₀ sin θ₀)² / (2g)
क्षैतिज परासR = v₀² sin 2θ₀ / g
अधिकतम परास (θ = 45°)Rm = v₀² / g
पथ समीकरणy = x tan θ₀ − g x² / (2 v₀² cos² θ₀)
ऊर्ध्वाधर फेंकने पर अधिकतम ऊँचाईh = Rm/2 = v₀² / (2g)

वृत्तीय गति

राशिसूत्र
कोणीय चालω = Δθ / Δt = v / R
रैखिक-कोणीय संबंधv = ω R
अभिकेंद्र त्वरणac = v²/R = ω²R
आवर्तकाल व आवृत्तिv = 2πR / T = 2πR ν
ω व ν संबंधω = 2πν
त्वरण व आवृत्तिac = 4π²ν²R

त्रिभुज असमिकाएँ

असमिकासमता कब?
|a + b| ≤ |a| + |b|θ = 0° (समान दिशा)
|a + b| ≥ ||a| − |b||θ = 180° (विपरीत दिशा)
|a − b| ≤ |a| + |b|θ = 180°
|a − b| ≥ ||a| − |b||θ = 0°
🔑 परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य
  • प्रक्षेप्य का पथ परवलयिक होता है (वायु प्रतिरोध नगण्य मानने पर)।
  • 45° पर अधिकतम परास; θ व (90° − θ) का परास समान।
  • अधिकतम ऊँचाई पर vy = 0 पर vx अपरिवर्तित।
  • वृत्तीय गति में त्वरण का परिमाण स्थिर, दिशा परिवर्तनशील — इसलिए यह "एकसमान त्वरण" नहीं कहलाता।
  • एक चक्र का औसत त्वरण शून्य, पर तात्क्षणिक त्वरण शून्य नहीं।
  • अदिश जोड़ने के लिए समान विमा आवश्यक; सदिशों में दिशा अनिवार्य।

🏆 NEET/AIPMT में पूछे जा चुके प्रश्न (2000 – 2024)

इस अध्याय से पूछे गए 50 प्रश्न — कालानुक्रम में (नवीनतम पहले), विस्तृत चरण-दर-चरण हल सहित

इस अध्याय का महत्व इस अध्याय से NEET में सामान्यतः 2–3 प्रश्न (8–12 अंक) पूछे जाते रहे हैं। सर्वाधिक बार दोहराए गए विषय: (1) दो सदिशों के योग/अंतर के परिमाण संबंधी प्रश्न (|A+B| = |A−B| प्रकार), (2) प्रक्षेप्य गति के अधिकतम ऊँचाई/परास सूत्र, (3) एकसमान वृत्तीय गति में अभिकेंद्र त्वरण, तथा (4) आपेक्षिक वेग (नदी-नाव, वर्षा-मानव)।
1 एक गेंद (bob) को डोरी की सहायता से क्षैतिज वृत्त में 10 rpm की प्रारंभिक चाल से घुमाया जाता है। यदि त्रिज्या स्थिर रखते हुए डोरी का तनाव चार गुना कर दिया जाए, तो नई चाल क्या होगी? NEET 2024 (Re-Exam)

चरण 1 — तनाव ही अभिकेंद्र बल: T = m v² / r ⟹ v ∝ √T

चरण 2 — तनाव 4 गुना: v₂ = v₁ √4 = 2 × 10 = 20 rpm

उत्तर: 20 rpm

2 घड़ी की सेकंड, मिनट व घंटे की सुइयों की कोणीय चाल क्रमशः ω₁, ω₂, ω₃ हैं। यदि x₁, x₂, x₃ इनके 1 मिनट में तय कोणीय विस्थापन हों, तो कौन-सा गुणनखंड (k) स्थिर रहता है? NEET 2024 (Re-Exam)

चरण 1 — कोणीय विस्थापन: xi = ωi × t, सभी सुइयों के लिए t = 1 मिनट समान

उत्तर: k = x / ω = 1 मिनट (तीनों सुइयों के लिए समान)

3 गेंद को बिंदु A से 20 m/s की चाल से क्षैतिज से 60° के कोण पर प्रक्षेपित किया जाता है। पथ के उच्चतम बिंदु B पर गेंद का वेग ज्ञात कीजिए। NEET 2023 (Manipur)

संकल्पना: उच्चतम बिंदु पर केवल क्षैतिज घटक शेष रहता है, जो अपरिवर्तित रहता है।

vB = u cos θ = 20 × cos 60° = 20 × 0.5 = 10 m/s

उत्तर: 10 m/s (क्षैतिज दिशा में)

4 कण वेग v̅ व त्वरण ā के साथ एकसमान वृत्तीय गति कर रहा है। निम्न में से कौन-सा सत्य है? NEET 2023 (Manipur)

संकल्पना: एकसमान वृत्तीय गति में चाल स्थिर, दिशा निरंतर परिवर्तनशील। अभिकेंद्र त्वरण सदैव वेग के लंबवत् तथा केंद्र की ओर।

उत्तर: v̅ · ā = 0 अर्थात् v̅ ⊥ ā तथा |v̅| स्थिर रहता है

5 बंदूक से 280 m/s की चाल से क्षैतिज से 30° के कोण पर गोली दागी जाती है। अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (g = 9.8 m/s², sin 30° = 0.5) NEET 2023
hm = (u sin θ)² / (2g) = (280 × 0.5)² / 19.6 = 19600 / 19.6 = 1000 m

उत्तर: 1000 m

6 क्षैतिज पुल पर खड़ा विद्यार्थी गेंद को 4 m/s से ऊर्ध्वाधर ऊपर फेंकता है। गेंद 4 s बाद जल-सतह से टकराती है। पुल की ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (g = 10 m/s²) NEET 2023

चरण 1 — ऊपर की दिशा धनात्मक, कुल विस्थापन −h:

−h = ut − ½ gt² = 4 × 4 − ½ × 10 × 16 = 16 − 80 = −64

उत्तर: h = 64 m

7 क्रिकेट बॉल को क्षैतिज से 30° पर 20 m/s से फेंका जाता है। अधिकतम ऊँचाई ज्ञात कीजिए। (g = 10 m/s²) NEET 2022 Phase 2
hm = (20 × 0.5)² / 20 = 100 / 20 = 5 m

उत्तर: 5 m

8 गेंद को ऊर्ध्वाधर से 60° पर 10 m/s से प्रक्षेपित किया जाता है। उच्चतम बिंदु पर चाल ज्ञात कीजिए। NEET 2022 Phase 1

संकल्पना: ऊर्ध्वाधर से 60° ⟹ क्षैतिज से 30°। उच्चतम बिंदु पर वेग = क्षैतिज घटक = u sin 60°

v = 10 × (√3/2) = 5√3 ≈ 8.66 m/s

उत्तर: 5√3 ≈ 8.66 m/s

9 त्रिज्या R व आवर्तकाल T वाले वृत्त में एकसमान चाल से गतिमान कण को उसी चाल से कोण θ पर प्रक्षेपित किया जाए तो अधिकतम ऊँचाई 4R प्राप्त होती है। θ ज्ञात कीजिए। NEET 2021
v = 2πR / T,   hm = v² sin²θ / (2g) = 4R
sin²θ = 8gR / v² = 8gR T² / (4π²R²) = 2gT² / (π²R)
θ = sin⁻¹[√(2gT² / (π²R))]

उत्तर: θ = sin⁻¹[√(2gT² / (π²R))]

10 कार विराम से 5 m/s² की दर से त्वरित होती है। t = 4s पर कार में बैठा व्यक्ति खिड़की से गेंद गिराता है। t = 6s पर गेंद का वेग व त्वरण ज्ञात कीजिए। (g = 10 m/s²) NEET 2021

चरण 1 — t = 4s पर कार (व गेंद) का क्षैतिज वेग: vx = 5 × 4 = 20 m/s

चरण 2 — छोड़ने के बाद क्षैतिज वेग अपरिवर्तित, ऊर्ध्वाधर गुरुत्व से: vy = g × 2 = 20 m/s (नीचे)

vnet = √(20² + 20²) = 20√2 m/s, क्षैतिज से 45° नीचे

त्वरण: केवल गुरुत्व ⟹ a = 10 m/s² (ऊर्ध्वाधर नीचे)

11 वस्तु को 60° झुके घर्षणरहित आनत तल पर फेंकने पर x₁ दूरी तय करती है; 30° झुकाव पर वही वेग देने पर x₂ दूरी। x₁ : x₂ ज्ञात कीजिए। NEET 2019

चरण 1 — अवमंदन = g sin θ: x = u² / (2g sin θ)

x₁ / x₂ = sin 30° / sin 60° = (1/2) / (√3/2) = 1 / √3

उत्तर: x₁ : x₂ = 1 : √3

12 कण वेग V̅ से गतिमान है, तीन बल सदिश त्रिभुज PQR (बंद) द्वारा दर्शाए गए हैं। कण का वेग क्या होगा? NEET 2019

संकल्पना: बंद त्रिभुज ⟹ परिणामी बल शून्य ⟹ त्वरण शून्य

उत्तर: कण अपरिवर्तित (नियत) वेग V̅ से गति करता रहेगा (न्यूटन का प्रथम नियम)

13 कण के निर्देशांक x = 5t − 2t², y = 10t। t = 2s पर त्वरण ज्ञात कीजिए। NEET 2017
vx = 5 − 4t ⟹ ax = −4 m/s²;   vy = 10 ⟹ ay = 0

उत्तर: a = −4 î m/s², परिमाण 4 m/s², −x दिशा में (समय-निरपेक्ष)

14 R = 2.5 m त्रिज्या के वृत्त में दक्षिणावर्त गतिमान कण का कुल त्वरण 15 m/s², त्रिज्या से 30° झुका है। चाल ज्ञात कीजिए। NEET 2016 Phase 2

चरण 1 — त्रिज्य घटक: ac = 15 cos 30° = 12.99 m/s²

v² = ac × R = 12.99 × 2.5 = 32.48

उत्तर: v ≈ 5.7 m/s

15 कण की स्थिति सदिश r = cos ωt x̂ + sin ωt ŷ। निम्न में से कौन-सा सत्य है? NEET 2016 Phase 1

चरण 1 — वेग: v = −ω sin ωt x̂ + ω cos ωt ŷ

चरण 2 — डॉट गुणनफल: v · r = 0 ⟹ v ⊥ r

चरण 3 — त्वरण: a = −ω²r, केंद्र की ओर

उत्तर: वेग r के लंबवत्, त्वरण मूल बिंदु (केंद्र) की ओर — एकसमान वृत्तीय गति

16 यदि दो सदिशों के योग का परिमाण, उनके अंतर के परिमाण के बराबर हो, तो उनके बीच कोण? NEET 2016 Phase 1
A² + B² + 2AB cos θ = A² + B² − 2AB cos θ ⟹ cos θ = 0

उत्तर: θ = 90°

17 कण का स्थिति सदिश R = 4 sin(2πt) î + 4 cos(2πt) ĵ (R मीटर में, t सेकंड में)। कौन-सा कथन गलत है? (a) वेग का परिमाण 8 m/s है (b) पथ त्रिज्या 4 m का वृत्त (c) त्वरण सदिश −R दिशा में (d) त्वरण परिमाण v²/R AIPMT 2015

चरण 1 — त्रिज्या: |R| = √(16(sin² + cos²)) = 4 m (कथन b सही)

चरण 2 — वेग: v = 8π cos(2πt) î − 8π sin(2πt) ĵ; |v| = 8π ≈ 25.13 m/s

उत्तर: (a) गलत — वेग का परिमाण 8π m/s है, 8 m/s नहीं

18 A = cos ωt î + sin ωt ĵ तथा B = cos(ωt/2) î + sin(ωt/2) ĵ। किस समय परस्पर लंबवत्? AIPMT 2015
A · B = cos(ωt − ωt/2) = cos(ωt/2) = 0
ωt/2 = π/2 ⟹ t = π/ω

उत्तर: t = π/ω

19 जलयान A, 10 km/h से पश्चिम की ओर; A से 100 km दक्षिण में B, 10 km/h से उत्तर की ओर। दोनों के बीच दूरी न्यूनतम कब होगी? AIPMT 2015 (Cancelled Paper)

चरण 1 — स्थान समीकरण: A(−10t, 0), B(0, −100 + 10t)

d² = (10t)² + (100 − 10t)² = 200t² − 2000t + 10000

चरण 2 — न्यूनतम के लिए d(d²)/dt = 0: 400t − 2000 = 0

उत्तर: t = 5 घंटे

20 कण के निर्देशांक t = 0 पर (2, 3), t = 2s पर (6, 7), t = 5s पर (13, 14) m। t = 0 से 5s तक औसत वेग सदिश ज्ञात कीजिए। AIPMT 2014
vav = [(13 − 2) î + (14 − 3) ĵ] / 5 = 2.2 î + 2.2 ĵ m/s

उत्तर: |vav| = 2.2√2 ≈ 3.11 m/s, x-अक्ष से 45°

21 पृथ्वी से 5 m/s व कोण θ पर प्रक्षेप्य किसी अन्य ग्रह पर 3 m/s व समान θ पर समरूप पथ अनुसरण करता है। उस ग्रह का g ज्ञात कीजिए। AIPMT 2014

समरूप पथ के लिए g/u² समान:

gp = ge (up/ue)² = 9.8 × (3/5)² = 9.8 × 0.36 = 3.528

उत्तर: ≈ 3.5 m/s²

22 A · B = 0 व A · C = 0। A के समांतर सदिश? NEET 2013 (Karnataka)

संकल्पना: A, B व C दोनों के लंबवत् ⟹ A, (B × C) के समांतर

उत्तर: λ(B × C)

23 प्रक्षेप्य का A पर वेग (2 î + 3 ĵ) m/s है। B, A जैसी ही ऊँचाई पर सममित बिंदु है। B पर वेग ज्ञात कीजिए। NEET 2013

संकल्पना: सममित बिंदु पर ऊर्ध्वाधर घटक विपरीत, क्षैतिज अपरिवर्तित।

उत्तर: vB = (2 î − 3 ĵ) m/s

24 कण का प्रारंभिक वेग (2 î + 3 ĵ), त्वरण (0.3 î + 0.2 ĵ)। 10s पश्चात् वेग का परिमाण? AIPMT 2012 (Prelims)
v = (2 + 0.3 × 10) î + (3 + 0.2 × 10) ĵ = 5 î + 5 ĵ
|v| = √(25 + 25) = 5√2 ≈ 7.07 m/s
25 किसी प्रक्षेप्य का क्षैतिज परास व अधिकतम ऊँचाई बराबर हैं। प्रक्षेपण कोण ज्ञात कीजिए। AIPMT 2012 (Prelims)
R = H ⟹ 4 sin θ cos θ = sin²θ ⟹ tan θ = 4

उत्तर: θ = tan⁻¹(4) ≈ 75.96°

26 प्रक्षेप्य क्षैतिज से 45° पर फेंका जाता है। पथ के उच्चतम बिंदु का प्रक्षेपण बिंदु से उन्नयन कोण ज्ञात कीजिए। AIPMT 2011 (Mains)
H = u²/(4g),   R/2 = u²/(2g),   tan φ = H / (R/2) = 1/2

उत्तर: φ = tan⁻¹(1/2) ≈ 26.57°

27 पिंड 30 m/s से पूर्व दिशा में गतिमान है। 10s बाद वेग 40 m/s उत्तर दिशा में। औसत त्वरण ज्ञात कीजिए। AIPMT 2011 (Prelims)
Δv = 40 ĵ − 30 î ⟹ |Δv| = 50 m/s
|ā| = 50 / 10 = 5 m/s²

उत्तर: 5 m/s², पश्चिम से उत्तर की ओर ≈ 53° पर (उत्तर-पश्चिम चतुर्थांश)

28 20 m/s के प्रारंभिक वेग से अधिकतम परास के लिए मिसाइल दागी जाती है। परास ज्ञात कीजिए। (g = 10 m/s²) AIPMT 2011 (Prelims)
Rm = u² / g = 400 / 10 = 40 m

उत्तर: 40 m

29 कण 5 cm त्रिज्या के वृत्त में नियत चाल से 0.2π s के आवर्तकाल में गति कर रहा है। त्वरण ज्ञात कीजिए। AIPMT 2011 (Prelims)
ω = 2π / 0.2π = 10 rad/s
a = ω²r = 100 × 0.05 = 5 m/s²

उत्तर: 5 m/s²

30 कण x = a sin ωt, y = a cos ωt से गति करता है। पथ की आकृति? AIPMT 2010 (Mains)
x² + y² = a²

उत्तर: मूल बिंदु पर केंद्रित त्रिज्या a के वृत्त पर एकसमान वृत्तीय गति

31 प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई पर चाल, प्रारंभिक चाल की आधी है। प्रक्षेपण कोण? AIPMT 2010 (Mains)
u cos θ = u/2 ⟹ cos θ = 1/2 ⟹ θ = 60°
32 कण का प्रारंभिक वेग (3 î + 4 ĵ), त्वरण (0.3 î + 0.4 ĵ)। 10s पश्चात् चाल ज्ञात कीजिए। AIPMT 2010 (Prelims)
v = 6 î + 8 ĵ ⟹ |v| = √(36 + 64) = 10 m/s
33 छह सदिश a से f तक चित्र में दर्शाए गए हैं। कौन-सा कथन सत्य है? AIPMT 2010 (Prelims)

विश्लेषण: d (उत्तर) व e (पश्चिम) का योग परिणामी उत्तर-पश्चिम दिशा में — जो f की दिशा से मेल खाता है।

उत्तर: d + e = f

34 कण का दूरी-समय वक्र दिया है (क्रमागत बिंदु A, B, C, D)। अधिकतम तात्क्षणिक वेग किस बिंदु के आसपास? AIPMT 2008

संकल्पना: तात्क्षणिक वेग = ds/dt = वक्र की प्रवणता

उत्तर: बिंदु C पर (सर्वाधिक तीव्र ढाल)

35 कण मूल बिंदु से चलकर सरल रेखा में (√3, 3) पर पहुँचता है। पथ x-अक्ष से कितना कोण बनाता है? AIPMT 2007
tan θ = 3 / √3 = √3 ⟹ θ = 60°
36 |A × B| = √3 (A · B)। A व B के बीच कोण? AIPMT 2007
AB sin θ = √3 AB cos θ ⟹ tan θ = √3 ⟹ θ = 60°
37 |A + B| = |A − B|। A व B के बीच कोण? AIPMT 2006
cos θ = 0 ⟹ θ = 90°
यह अत्यंत सामान्य प्रश्न है (प्रश्न 7 व 16 भी देखें) — अवश्य याद रखें।
38 (45° − θ) व (45° + θ) कोणों पर प्रक्षेपित प्रक्षेप्यों के परासों का अनुपात? AIPMT 2006
R₁ ∝ sin[2(45° − θ)] = sin(90° − 2θ) = cos 2θ
R₂ ∝ sin[2(45° + θ)] = sin(90° + 2θ) = cos 2θ

उत्तर: 1 : 1 (पूरक कोणों पर परास समान)

39 सदिश (2 î + 3 ĵ + 8 k̂), सदिश (4 ĵ − 4 î + α k̂) के लंबवत् है तो α? AIPMT 2005
2(−4) + 3(4) + 8α = 0 ⟹ −8 + 12 + 8α = 0 ⟹ α = −0.5
40 (B × A) · A का मान? AIPMT 2005

संकल्पना: B × A, A व B दोनों के लंबवत् ⟹ A के भी लंबवत् ⟹ डॉट गुणनफल शून्य।

उत्तर: सदैव शून्य

41 दो लड़के A व B, AB = a दूरी पर। B, AB के लंबवत् v₁ से दौड़ता है; A उसी क्षण v से दौड़कर t समय में B को पकड़ता है। t का मान? AIPMT 2005

अनुगमन समस्या (pursuit problem) का मानक हल:

t = a v / (v² − v₁²)
यह परिणाम तभी वैध जब v > v₁।
42 |A × B| = √3 A · B हो तो |A + B| का मान? AIPMT 2004
tan θ = √3 ⟹ θ = 60°
|A + B| = √(A² + B² + AB)
43 दो बलों का सदिश योग उनके सदिश अंतर के लंबवत् है। निष्कर्ष? AIPMT 2003
(A + B) · (A − B) = A² − B² = 0 ⟹ A = B

उत्तर: दोनों बल परिमाण में बराबर

44 कण A को ऊँचाई से गिराया जाता है; कण B को उसी ऊँचाई से क्षैतिज 5 m/s से प्रक्षेपित। कौन-सा कथन सही? AIPMT 2002

संकल्पना: प्रक्षेप्य गति में क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर गतियाँ स्वतंत्र; ऊर्ध्वाधर प्रारंभिक वेग दोनों का शून्य, समान ऊँचाई h, समान g।

उत्तर: दोनों एक ही समय पर भूमि पर पहुँचेंगे

45 M व m द्रव्यमान के दो कण क्रमशः R व r त्रिज्या पर गति करते हैं, आवर्तकाल समान। कोणीय चाल का अनुपात? AIPMT 2001
ω = 2π / T; T समान ⟹ ω समान

उत्तर: 1 : 1

46 |A + B| = |A| + |B|। A व B के बीच कोण? AIPMT 2001

त्रिभुज असमिका में समता तभी जब सदिश समान दिशा में।

उत्तर: θ = 0°

47 व्यक्ति घर्षणरहित आनत तल पर फिसल रहा है; थैला उसी ऊँचाई से मुक्त रूप से गिर रहा है। वेगों में संबंध? AIPMT 2000

ऊर्जा संरक्षण: mgh = ½ mv² ⟹ v = √(2gh) — दोनों के लिए समान

उत्तर: नीचे पहुँचने पर दोनों की चाल समान (पथ भिन्न, समय भिन्न)

48 समान द्रव्यमान व वेग के दो प्रक्षेप्य क्रमशः 60° व 30° पर फेंके जाते हैं। कौन-सा गुण समान? AIPMT 2000

पूरक कोण: 60° व 30° पर sin 120° = sin 60° = √3/2

उत्तर: क्षैतिज परास समान (अधिकतम ऊँचाई व उड्डयन-काल भिन्न)

49 नदी की चौड़ाई 1 km, नाव की चाल 5 km/h। न्यूनतम समय में पार करने पर 15 मिनट लगते हैं। धारा का वेग ज्ञात कीजिए। AIPMT 2000

चरण 1 — लंबवत् घटक चाल: v⊥ = 1 / (15/60) = 4 km/h

चरण 2 — पाइथागोरस (5-4 त्रिक):

vstream = √(5² − 4²) = 3 km/h

उत्तर: 3 km/h

50 1 m डोरी से बंधा पत्थर क्षैतिज वृत्त में नियत चाल से; 44 s में 22 चक्कर। त्वरण का परिमाण व दिशा? AIPMT 2005 (MCQ More than one correct)
ν = 22/44 = 0.5 चक्कर/s ⟹ ω = 2πν = π rad/s
a = ω²r = π² × 1 ≈ 9.87 m/s²

उत्तर: परिमाण ≈ π² m/s², दिशा सदैव केंद्र की ओर (निरंतर परिवर्तनशील)

✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य

परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु, जो अक्सर विकल्पों में उलझन पैदा करते हैं

महत्वपूर्ण
  • यह अध्याय NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (8–12 अंक) रखता है; सर्वाधिक बार पूछे गए उप-विषय — सदिश योग/अंतर के परिमाण संबंधी प्रश्न, प्रक्षेप्य गति की अधिकतम ऊँचाई/परास, अभिकेंद्र त्वरण तथा आपेक्षिक वेग (नदी-नाव, वर्षा-मानव) हैं।
  • यह अध्याय आगे के अध्यायों (गति के नियम, कार्य-ऊर्जा-शक्ति, घूर्णी गति) की नींव है — बल, संवेग, कोणीय संवेग जैसी अनेक राशियाँ सदिश रूप में ही परिभाषित होती हैं, अतः सदिश बीजगणित की ठोस समझ अत्यंत आवश्यक है।
तथ्य
  • अदिश गुणनफल (dot/scalar product) — दो सदिशों A व B का अदिश गुणनफल A · B = |A| |B| cos θ होता है, जिसका परिणाम एक अदिश राशि है; कार्य (W = F · d) व शक्ति (P = F · v) इसके प्रमुख भौतिक उदाहरण हैं।
  • सदिश गुणनफल (cross/vector product) — A × B = |A| |B| sin θ n̂ (n̂ दोनों के लंबवत् एकांक सदिश, दिशा दायें हाथ के नियम से), परिणाम स्वयं एक सदिश; बल आघूर्ण (τ = r × F) व कोणीय संवेग (L = r × p) इसके प्रमुख उदाहरण हैं। यह उप-विषय NCERT में परिशिष्ट रूप में है किंतु NEET/JEE दोनों में अक्सर पूछा जाता है।
तुलनात्मक
  • त्रिभुज नियम बनाम समांतर चतुर्भुज नियम — दोनों सदिश योग के लिए तुल्य (equivalent) हैं, केवल ज्यामितीय निरूपण भिन्न; त्रिभुज नियम में एक सदिश की पूँछ दूसरे के सिरे पर रखते हैं, समांतर चतुर्भुज नियम में दोनों की पूँछ एक उभयनिष्ठ बिंदु पर।
  • सदिश योग के गुण — क्रमविनिमेय (A + B = B + A) तथा साहचर्य ((A + B) + C = A + (B + C)) दोनों नियमों का पालन करता है, किंतु सदिश व्यवकलन क्रमविनिमेय नहीं (A − B ≠ B − A, परिमाण समान पर दिशा विपरीत)।
तथ्य
  • प्रक्षेप्य पथ का समीकरण — y = x tan θ − g x² / (2 u² cos² θ), जो x व y के मध्य परवलयिक संबंध दर्शाता है — किसी दिए गए बिंदु पर प्रक्षेप्य की स्थिति व प्रक्षेपण कोण से जुड़े प्रश्नों में प्रत्यक्ष रूप से प्रयुक्त।
  • पूरक कोणों के लिए समान परास — नियत प्रारंभिक चाल u के लिए, θ व (90° − θ) दोनों के लिए क्षैतिज परास समान (चूँकि sin 2θ = sin(180° − 2θ)); अधिकतम परास 45° पर।
तुलनात्मक
  • क्षैतिज प्रक्षेप्य (ऊँचाई से क्षैतिज फेंकी वस्तु) — गिरने का समय केवल ऊँचाई h पर निर्भर (t = √(2h/g)), प्रारंभिक क्षैतिज चाल u पर नहीं; क्षैतिज दूरी x = u √(2h/g) — यह भेद परीक्षा में बार-बार जाँचा जाता है।
  • तिरछे प्रक्षेप्य के सूत्र — T = 2u sin θ / g, H = u² sin²θ / (2g), R = u² sin 2θ / g; अधिकतम ऊँचाई पर वेग का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य पर क्षैतिज (u cos θ) अपरिवर्तित — इसीलिए उच्चतम बिंदु पर वेग शून्य नहीं होता, केवल ऊर्ध्वाधर घटक शून्य।
तथ्य
  • अभिकेंद्र त्वरण — एकसमान वृत्तीय गति में परिमाण नियत (a = v²/r = ω²r) पर दिशा निरंतर केंद्र की ओर; यही कारण है कि वेग का परिमाण नियत होते हुए भी वस्तु त्वरित मानी जाती है।
  • अपकेंद्री बल (centrifugal force) एक छद्म बल (pseudo force) है, जो केवल घूर्णनशील (non-inertial) निर्देश तंत्र में अनुभव होता है; जड़त्वीय निर्देश तंत्र से देखने पर वास्तविक बल केवल अभिकेंद्र बल (केंद्र की ओर) होता है — यह वैचारिक भेद अक्सर विकल्पों में भ्रम उत्पन्न करता है।
तथ्य
  • शून्य सदिश के गुण — परिमाण शून्य, दिशा अनिर्धारित; A + 0 = A, A + (−A) = 0; शून्य सदिश से किसी सदिश का गुणनफल भी शून्य सदिश।
  • स्थिति सदिश बनाम विस्थापन सदिश — स्थिति सदिश सदैव एक निश्चित मूल बिंदु से वस्तु तक खींचा जाता है (मूल बिंदु बदलने पर बदल जाता है), जबकि विस्थापन सदिश प्रारंभिक व अंतिम स्थिति के मध्य होता है (मूल बिंदु के चुनाव से स्वतंत्र); विस्थापन = r₂ − r₁।
रणनीति
  • समतल में आपेक्षिक वेग हल करने की युक्ति — B के सापेक्ष A का वेग vAB = vA − vB (सदिश व्यवकलन); नदी-नाव व वर्षा-मानव जैसे प्रश्नों में भू-स्थिर निर्देश तंत्र में सभी वेगों को घटकों (x, y) में तोड़कर संबंधित सदिश समीकरण से अज्ञात राशि ज्ञात करना ही सर्वाधिक विश्वसनीय विधि है।
  • घटकों में वियोजन की व्यूहरचना — किसी भी 2D प्रश्न में पहले उपयुक्त निर्देशांक तंत्र चुनकर सभी सदिशों (वेग, त्वरण, विस्थापन) को x व y घटकों में तोड़ना सबसे विश्वसनीय; प्रक्षेप्य गति में क्षैतिज घटक (नियत वेग) व ऊर्ध्वाधर घटक (नियत त्वरण −g) को सदैव स्वतंत्र रूप से विश्लेषित करना चाहिए।

यह विस्तृत अध्ययन सामग्री NCERT कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 3 — समतल में गति — को नोट्स, हल किए गए उदाहरण, NCERT अभ्यास हल, अतिरिक्त NEET/JEE प्रश्न तथा 2000–2024 तक के संपूर्ण NEET/AIPMT प्रश्न-बैंक (50 प्रश्न, विस्तृत हल सहित) के साथ प्रस्तुत करती है।

सदिशों की भाषा सीखना ही समतल और दिक्स्थान की गति समझने का पहला कदम है।

↑
Scroll to Top