📚 कक्षा 8 · विज्ञान · अध्याय 9

दिव्यांगता एवं प्राथमिक उपचार

इस अध्याय में हम दिव्यांगता के प्रकार, श्रवण दिव्यांगता, डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया,
प्राथमिक उपचार, प्राथमिक उपचार पेटी, चोट लगने पर प्राथमिक उपचार
तथा दिव्यांग जनों के प्रति सामाजिक दायित्व के बारे में जानेंगे।

1 दिव्यांगता – परिचय एवं परिभाषा

दिव्यांगता (Disability): शारीरिक एवं मानसिक अक्षमताओं को दिव्यांगता कहते हैं।

  • शब्द का अर्थ: 'दिव्य' + 'अंग' – अर्थात् दिव्य अंग – भगवान का विशेष आशीर्वाद।
  • वर्तमान में: 21 प्रकार की अक्षमताओं को दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है।
  • दिव्यांगता किसी भी व्यक्ति को जन्म से या दुर्घटना/बीमारी के कारण हो सकती है।
  • यह कोई अभिशाप नहीं है – यह एक अलग क्षमता है।

💡 दिव्यांगता: शारीरिक एवं मानसिक अक्षमता – 21 प्रकार – समाज का अभिन्न अंग।

🧠 2 दिव्यांगता के प्रकार (Types of Disability)

🔹 प्रमुख प्रकार

1. शारीरिक दिव्यांगता
हाथ, पैर या शरीर के किसी अंग का अभाव या अकार्यक्षम होना।
2. बौद्धिक दिव्यांगता
बुद्धि लिखत (IQ) सामान्य से कम – सीखने, समझने में कठिनाई।
3. दृष्टि बाधिता
देखने की क्षमता का आंशिक या पूर्ण अभाव।
4. श्रवण दिव्यांगता
सुनने की क्षमता का आंशिक या पूर्ण अभाव – बोलने में भी कठिनाई।
5. लोकोमोटर दिव्यांगता
हड्डियों, जोड़ों या ग्रसपेशियों की अधिकता – चलने-फिरने में कठिनाई।
6. मानसिक दिव्यांगता
बुद्धि लिखत (IQ) 70 से कम – सामान्य से काफी कम बुद्धि।
शारीरिक
🧠
बौद्धिक
👁️
दृष्टि बाधिता
👂
श्रवण
🦽
लोकोमोटर
💭
मानसिक
चित्र 9.1: दिव्यांगता के प्रमुख प्रकार

📌 महत्वपूर्ण: वर्तमान में 21 प्रकार की अक्षमताओं को दिव्यांगता की श्रेणी में रखा गया है।

👂 3 श्रवण दिव्यांगता (Hearing Disability)

श्रवण दिव्यांगता: किसी व्यक्ति का पूरी तरह से ध्वनि सुनने में अक्षम होना।

  • कारण:
    • कान का पूर्ण विकास न होना
    • कान की बीमारी
    • कान में चोट लगना
  • प्रभाव: सुनना, बोलने एवं भाषा के लिए प्रथम आवश्यकता है।
  • बच्चा परिवार या आस-पास के वातावरण में लोगों की बोली सुनकर ही बोलना सीखता है।
  • श्रवण बाधिता के कारण बच्चा बोलने में सक्षम नहीं हो पाता है।
  • श्रवण दिव्यांगता जन्म से या बाद में हो सकती है।
👂
सुनने की क्षमता
भाषा सीखने के लिए आवश्यक
🔊
ध्वनि
श्रवण से ही अनुभव
चित्र 9.2: श्रवण दिव्यांगता – सुनना, बोलने की प्रथम आवश्यकता

👂 श्रवण दिव्यांगता: ध्वनि सुनने में असमर्थता – बोलने में भी कठिनाई – कान के विकास/बीमारी/चोट से।

📖 4 डिस्लेक्सिया (Dyslexia) – पढ़ने में विकार

डिस्लेक्सिया (Dyslexia): पढ़ने से संबंधित विकार जिसमें बच्चों को शब्द पहचानने, पढ़ने, याद करने और बोलने में परेशानी होती है।

  • लक्षण:
    • अक्षरों और शब्दों को उल्टा पढ़ना
    • कुछ अक्षरों का उच्चारण न कर पाना
    • उच्चारण क्षमता सामान्य बच्चों की अपेक्षा काफी कम
  • आयु सीमा: 3-15 साल के बच्चों में सामान्यतः पाया जाता है।
  • महत्वपूर्ण: डिस्लेक्सिया कोई मानसिक रोग नहीं है।
  • यह एक सीखने की अक्षमता है – सही मार्गदर्शन से सुधार संभव।

📖 डिस्लेक्सिया: पढ़ने में विकार – उल्टा पढ़ना, उच्चारण में कठिनाई – 3-15 वर्ष – मानसिक रोग नहीं।

✍️ 5 डिसग्राफिया (Dysgraphia) – लिखने में विकार

डिसग्राफिया (Dysgraphia): सुसंगत (अच्छे ढंग से) रूप से न लिख पाने की अक्षमता।

  • परिभाषा: यह एक मस्तिष्कीय बीमारी की पहचान के रूप में चिह्नित है।
  • प्रभाव: लेखन कौशल पर असर – स्पेलिंग, हस्तलेखन और शब्दों, वाक्यों और पैराग्राफों को संयोजित करने जैसे कौशल बाधित होते हैं।
  • लक्षण:
    • सही रूप में लिखने में कठिनाई
    • लिखने की गति धीमी होना
  • यह लेखन विकार है – सही मार्गदर्शन एवं अभ्यास से सुधार संभव।
✍️
डिसग्राफिया
सुसंगत रूप से न लिख पाना
📝
प्रभावित क्षेत्र
स्पेलिंग, हस्तलेखन, गति
चित्र 9.3: डिसग्राफिया – लिखने में अक्षमता

✍️ डिसग्राफिया: लिखने में विकार – स्पेलिंग, हस्तलेखन, शब्द संयोजन में कठिनाई – गति धीमी।

🏥 6 प्राथमिक उपचार (First Aid) – परिचय एवं महत्व

प्राथमिक उपचार (First Aid): चोट लगने या बीमार होने पर तुरन्त दिया जाने वाला प्रारम्भिक उपचार

  • उद्देश्य: व्यावसायिक चिकित्सा सुविधा मिलने के पहले तक पीड़ित व्यक्ति की स्थिति को बिगड़ने से बचाना तथा कुछ आराम देना।
  • महत्व: प्राथमिक उपचार चिकित्सक का विकल्प नहीं है – यह एक प्रारम्भिक सहायता है।
  • समय: चोट लगने पर तुरन्त उपचार दिया जाना चाहिए – देरी से स्थिति बिगड़ सकती है।
🩹
प्राथमिक उपचार
तुरन्त सहायता
🏥
चिकित्सक
व्यावसायिक उपचार
चित्र 9.4: प्राथमिक उपचार – समय पर सहायता

🏥 प्राथमिक उपचार: चिकित्सक के पास ले जाने से पहले तुरन्त सहायता – स्थिति बिगड़ने से बचाना।

📦 7 प्राथमिक उपचार पेटी (First Aid Box) – सामग्री एवं सावधानियाँ

प्राथमिक उपचार पेटी: वह बॉक्स या पेटी जिसमें प्राथमिक उपचार के लिए आवश्यक सामग्री रखी जाती है।

🔹 प्राथमिक उपचार पेटी में रखी जाने वाली वस्तुएँ

🧰 सामान्य वस्तुएँ
रुई, पट्टियाँ, गाँज, पिन, कैंची, डॉक्टरी थर्मामीटर, चम्मच, गिलास, साबुन, तौलिया, माचिस, टॉर्च, खपच्ची
💊 दवाइयाँ
पैरासिटामॉल (बुखार), डिटॉल, टिंचर, ग्लूकोज, O.R.S., पेन बॉम, एंटीसेप्टिक क्रीम, नमक, शक्कर

🔹 दवाइयों के बारे में महत्वपूर्ण बातें

  • पैरासिटामॉल: बुखार उतारने का काम करता है।
  • ग्लूकोज एवं O.R.S.: उल्टी, चक्कर रोकने में सहायक।
  • एंटीसेप्टिक क्रीम एवं डिटॉल: घाव को संक्रमण से बचाने के लिए।

🔹 सावधानियाँ (ध्यान रखने योग्य बातें)

  • ⚠️ डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा नहीं खानी चाहिए।
  • ⚠️ मलहम और तेज गंध वाली दवाओं को खाने की दवाओं से अलग-अलग रखना चाहिए।
  • ⚠️ दवाइयाँ खरीदते एवं उपयोग करते समय निर्माण दिनांक (Mfg. D.) तथा अंतिम दिनांक (Exp. D.) अवश्य देखें।
  • ⚠️ समाप्ति तिथि (Exp. D.) वाली दवाइयों का सेवन न करें – ये हानिकारक होती हैं।
  • ⚠️ यात्रा पर जाते समय प्राथमिक उपचार पेटी अवश्य साथ ले जाएँ।
🩹
पट्टी
💊
दवाइयाँ
🧴
एंटीसेप्टिक
🌡️
थर्मामीटर
✂️
कैंची
चित्र 9.5: प्राथमिक उपचार पेटी की आवश्यक वस्तुएँ

📦 प्राथमिक उपचार पेटी: रुई, पट्टी, पैरासिटामॉल, डिटॉल, O.R.S. – Exp. D. अवश्य देखें।

🩹 8 चोट लगने पर प्राथमिक उपचार

हमारे आस-पास किसी को भी चोट, जलन, पानी में डूबना, जहरीले जानवर का काटना, नकसीर, कुत्ते का काटना जैसी दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।

🔹 प्राथमिक उपचार के मुख्य बिंदु

  • डॉक्टर को बुलाएँ: यदि चोट गम्भीर हो तो तुरन्त चिकित्सक को बुलाएँ या पीड़ित को ले जाएँ।
  • रक्त बहाव रोकें: घायल अंग से रक्त बह रहा हो तो बन्द करें – अधिक रक्त बहने से प्राणों का खतरा।
  • हाथ को ऊँचा रखें: तेज बहते रक्त को रोकने के लिए हाथ को हृदय से ऊँचा रखना चाहिए।
  • बर्फ का प्रयोग: बर्फ को साफ कपड़े में लपेटकर चोट वाले स्थान पर रखें – रक्त बहाव कम होता है।
  • चोट को साफ रखें: चोट को रेत व मिट्टी से बचाएँ – मक्खी न बैठने दें।
  • साधारण चोट: एंटीसेप्टिक घोल से साफ करके दवा लगाकर पट्टी बाँध दें।
  • गम्भीर चोट: घायल व्यक्ति को तुरन्त चिकित्सक के पास ले जाएँ।
🩸
रक्त रोकें
🧊
बर्फ लगाएँ
🧹
साफ रखें
🩹
पट्टी बाँधें
🏥
डॉक्टर के पास
चित्र 9.6: चोट लगने पर प्राथमिक उपचार के मुख्य बिंदु

🩹 चोट लगने पर: रक्त बहाव रोकें, बर्फ लगाएँ, साफ रखें, पट्टी बाँधें – गम्भीर होने पर डॉक्टर के पास ले जाएँ।

🤝 9 दिव्यांग जनों के प्रति सामाजिक दायित्व

सामाजिक दायित्व: हमारा दायित्व है कि दिव्यांगों की शारीरिक स्थिति को नजरअंदाज करते हुए उनके आत्मविश्वास एवं मनोबल को बढ़ाएँ।

  • मुख्य धारा से जोड़ना: उनकी कार्य क्षमताओं को देखते हुए समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का प्रयास।
  • सोच में बदलाव: यह सोच बदलनी होगी कि दिव्यांग व्यक्ति घर, परिवार एवं समाज पर बोझ हैं।
  • समानता के अवसर: उन्हें समानता के अवसर मिलने चाहिए।
  • दया नहीं, सहानुभूति नहीं: उनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ न करें – दया का पात्र न बनाएँ।
  • जागरूकता: सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करें – सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं का लाभ दिलाएँ।

🔹 विशेष तथ्य

  • पैरा ओलम्पिक खेल: अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों के लिए।
  • पहला पैरा ओलम्पिक: 1960 में रोम में आयोजित।
  • विश्व दिव्यांग दिवस: प्रत्येक वर्ष 3 दिसम्बर को मनाया जाता है।
🤝
समानता
🏅
पैरा ओलम्पिक
1960, रोम
📅
3 दिसम्बर
विश्व दिव्यांग दिवस
चित्र 9.7: दिव्यांग जनों के प्रति सामाजिक दायित्व

🤝 सामाजिक दायित्व: दिव्यांगों को मुख्य धारा से जोड़ें – आत्मविश्वास बढ़ाएँ – समानता के अवसर दें।

📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)

दिव्यांगता: शारीरिक एवं मानसिक अक्षमता – 21 प्रकार।
👂 श्रवण दिव्यांगता: सुनने में अक्षमता – बोलने में कठिनाई – कान की बीमारी/चोट से।
📖 डिस्लेक्सिया: पढ़ने में विकार – उल्टा पढ़ना – मानसिक रोग नहीं।
✍️ डिसग्राफिया: लिखने में विकार – स्पेलिंग, हस्तलेखन, गति प्रभावित।
🏥 प्राथमिक उपचार: चिकित्सक से पहले तुरन्त सहायता – स्थिति बिगड़ने से बचाना।
📦 प्राथमिक उपचार पेटी: रुई, पट्टी, पैरासिटामॉल, डिटॉल, O.R.S. – Exp. D. देखें।
🏅 पैरा ओलम्पिक: 1960, रोम – विश्व दिव्यांग दिवस: 3 दिसम्बर।
🤝 सामाजिक दायित्व: दिव्यांगों को मुख्य धारा से जोड़ें – आत्मविश्वास बढ़ाएँ।

🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)

📝 अभ्यास क्विज़

स्कोर: 0/0

✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।

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