📚 कक्षा 8 · विज्ञान · अध्याय 10

फसल उत्पादन एवं पशुपालन

इस अध्याय में हम फसल उत्पादन के विभिन्न चरणों, मृदा की तैयारी, बुवाई, उर्वरक, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, कटाई, भण्डारण, हरित क्रान्ति, तथा पशुपालन (दुग्ध, कुक्कुट, मत्स्य पालन) के बारे में विस्तार से जानेंगे।

🌾 1 फसल – परिचय एवं प्रकार

फसल (Crop): उगाए जाने वाले एक ही प्रकार (किस्म) के पौधे फसल कहलाते हैं।

  • खरीफ फसलें (Kharif Crops): बरसात के मौसम (जून-सितम्बर) में उगाई जाती हैं – धान, मक्का, मूँगफली, कपास, ज्वार, बाजरा
  • रबी फसलें (Rabi Crops): सर्दी के मौसम (अक्टूबर-मार्च) में उगाई जाती हैं – गेहूँ, चना, मटर, सरसों, आलू

📌 फसलें: खरीफ (बरसात) – धान, मक्का; रबी (सर्दी) – गेहूँ, चना।

🌱 2 मृदा की तैयारी – जुताई एवं गुड़ाई
  • जुताई (Ploughing): मिट्टी को पलटना, ढीला करना – हल (लकड़ी/लोहे) द्वारा।
  • गुड़ाई (Harrowing): मिट्टी के ढेलों को तोड़ना, समतल करना – पाटल (पटरे) द्वारा।
  • मिट्टी को भुरभुरी बनाना, जड़ों को आसानी से फैलने में मदद, वायु संचार, पानी रिसाव।
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हल (Plough)
जुताई हेतु
🧹
पाटल (Harrow)
गुड़ाई हेतु
चित्र 10.1: मृदा तैयार करने के उपकरण

🌱 मृदा तैयारी: जुताई (हल) + गुड़ाई (पाटल) – मिट्टी को भुरभुरी बनाना।

🌿 3 बुवाई (Sowing) – विधियाँ एवं यंत्र
  • बुवाई: बीजों को मिट्टी में डालना – हाथों द्वारा (छितराव) या यंत्रों द्वारा।
  • सीड ड्रिल (Seed Drill): बीजों को समान दूरी पर तथा निश्चित गहराई तक बोता है – पक्षियों से बचाता है, पौधों को पर्याप्त धूप, जल, पोषक तत्व मिलते हैं।
  • डिबलर (Dibbler): बीज बोने का छोटा यंत्र – छिद्र करके बीज डालना।
  • धान की बुवाई: पौधघर (nursery) में बीज बोए जाते हैं, फिर पौधों को खेत में रोपा जाता है (रोपाई)।
🚜
सीड ड्रिल
समान दूरी, गहराई
🔧
डिबलर
छिद्र कर बीज डालना
चित्र 10.2: बुवाई के यंत्र

🌿 बुवाई: सीड ड्रिल से बीज समान दूरी पर बोये जाते हैं – पक्षियों से सुरक्षा।

🧪 4 पोषक तत्व, खाद एवं उर्वरक

🔹 पोषक तत्वों के प्रकार

  • मुख्य पोषक तत्व: कार्बन (C), हाइड्रोजन (H), ऑक्सीजन (O) – जल एवं वायु से; नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K) – मृदा से।
  • गौण पोषक तत्व: कैल्सियम (Ca), मैग्नीशियम (Mg), सल्फर (S) – मृदा से कम मात्रा में।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व: लोहा (Fe), ताँबा (Cu), जिंक (Zn) – अति सूक्ष्म मात्रा में आवश्यक।

🔹 खाद (Manure) एवं उर्वरक (Fertilizer)

  • खाद: पौधों एवं जानवरों के अपशिष्ट (गोबर, सब्जी, पत्तियाँ) – सूक्ष्मजीवों द्वारा अपघटन – कम्पोस्ट बनता है।
  • उर्वरक: रासायनिक लवण/यौगिक – यूरिया, अमोनियम सल्फेट, पोटेशियम नाइट्रेट, सुपर फास्फेट – जल में घुलनशील, शीघ्र अवशोषित।
  • फसल चक्रण (Crop Rotation): एक फसल के बाद दलहन (जैसे गेहूँ के बाद चना) – भूमि की उर्वरता बनाए रखता है।

🧪 पोषक तत्व: मुख्य (N,P,K), गौण (Ca,Mg,S), सूक्ष्म (Fe,Cu,Zn) – उर्वरकों द्वारा पूर्ति।

🔄 5 नाइट्रोजन चक्र एवं स्थिरीकरण

नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation): वायुमण्डल की नाइट्रोजन (N₂) को घुलनशील नाइट्रेट्स (NO₃⁻) में बदलना।

  • सूक्ष्मजीवों द्वारा: एजोटोबैक्टर (मिट्टी में), राइजोबियम (दलहन जड़ों की गाँठों में)।
  • विद्युत एवं वर्षा द्वारा: आकाशीय विद्युत से N₂ के ऑक्साइड बनते हैं, वर्षा के साथ भूमि पर गिरते हैं।
  • रासायनिक उर्वरक: कारखानों में N₂ को यौगिकों (यूरिया) में बदलना।

नाइट्रोजन चक्र: वायु → पौधे → जन्तु (भोजन) → मृत जीव → सूक्ष्मजीव (अपघटन) → वायु (पुनः)।

🌬️ N₂ 🦠 स्थिरीकरण 🌱 नाइट्रेट (NO₃⁻) 🍞 पौधे/जन्तु 💀 अपघटन 🌬️ N₂
चित्र 10.3: नाइट्रोजन चक्र

🔄 नाइट्रोजन चक्र: वायुमण्डल में N₂ की मात्रा स्थिर बनी रहती है।

💧 6 सिंचाई (Irrigation)

सिंचाई: फसलों को निश्चित समयान्तराल पर जल आपूर्ति करना।

  • जल स्रोत: नहर, नदियाँ, कुँए, ट्यूबवेल, वर्षा।
  • मिट्टी के प्रकार: बलुई मिट्टी (जल धारण कम) – अधिक बार सिंचाई; चिकनी/दोमट (अधिक धारण) – कम बार।
  • अनियमित/अनावश्यक सिंचाई से फसल नष्ट हो सकती है – सूखा या बाढ़ भी हानिकारक।

💧 सिंचाई: फसल की आवश्यकता एवं मिट्टी की प्रकृति के अनुसार करें।

🌿 7 खरपतवार नियंत्रण (Weed Control)

खरपतवार: अवांछनीय पौधे जो फसल के साथ उगते हैं और पोषक तत्व, जल, प्रकाश छीनते हैं।

  • उदाहरण: जंगली घास, बथुआ, काँस।
  • नियंत्रण विधियाँ: हाथ से निकालना, कुदाल, खरपतवार नाशी (herbicides) – 2,4-D, मेटाक्लोर
  • कीटों से बचाव – पीड़कनाशी (insecticides), फफूंदनाशी (fungicides)

🌿 खरपतवार नियंत्रण: 2,4-D, मेटाक्लोर – फसल की उत्पादकता बढ़ाना।

🔪 8 कटाई (Harvesting) एवं मड़ाई (Threshing)
  • कटाई: पकी फसल को काटना – हँसिया/दरांती (मैन्युअल) या कंबाइन (यांत्रिक)।
  • मड़ाई: दानों को भूसा से अलग करना – थ्रेशर (श्रेसर) द्वारा या बैलों द्वारा रौंदकर।
  • कंबाइन कटाई एवं मड़ाई दोनों एक साथ करता है।
  • धान के लिए पैडी थ्रेशर, गेहूँ के लिए सामान्य थ्रेशर।
  • छोटे किसान फटककर (winnowing) बीजों को भूसा से अलग करते हैं – हवा के साथ भूसा उड़ जाता है, बीज गिरते हैं।
🌾
हँसिया
हाथ से कटाई
🚜
कंबाइन
कटाई + मड़ाई
चित्र 10.4: कटाई एवं मड़ाई के उपकरण

🔪 कटाई/मड़ाई: हँसिया या कंबाइन – दानों को भूसा से अलग करना।

🏚️ 9 भण्डारण (Storage)
  • भण्डारण का महत्व: चूहे, कीड़े, कवक से बचाव; वर्ष भर उपलब्धता; आपदा के समय आपूर्ति।
  • साधन: बड़े गोदाम, साइलो (silo) (धातु के बर्तन), पक्के भण्डार।
  • तापमान: अनाज, दालें (कम नमी) – कमरे के ताप; फल-सब्जियाँ (अधिक नमी) – 0°C-1°C पर (शीतगृह)।
  • भारतीय खाद्य निगम (FCI) – केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा भण्डारण।

🏚️ भण्डारण: गोदामों/साइलो में – फल-सब्जियाँ 0-1°C पर – FCI द्वारा प्रबंधन।

🌿 10 हरित क्रान्ति एवं फसल समुन्नति
  • हरित क्रान्ति (Green Revolution): 1960 के दशक में आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों, उर्वरकों, सिंचाई से फसल उत्पादन में वृद्धि।
  • फसल समुन्नति (Crop Improvement): दो भिन्न किस्मों के संकरण (hybridisation) द्वारा वांछित गुणों (उच्च उत्पादन, रोग प्रतिरोध) वाली नयी किस्में विकसित करना।
  • उदाहरण: गेहूँ (उच्च उत्पादन + कवक प्रतिरोध), सोनालिका (गेहूँ की उन्नत किस्म) – संकरण द्वारा प्राप्त।
  • चेतावनी: अत्यधिक उर्वरक/सिंचाई से भू-जल स्तर घट रहा है – जल संरक्षण एवं वर्षा जल संवर्धन आवश्यक।

🌿 हरित क्रान्ति: उन्नत बीजों, उर्वरकों से उत्पादन वृद्धि – संकरण द्वारा समुन्नति।

🐄 11 जन्तुओं से प्राप्त खाद्य – पशुपालन

🔹 दुग्ध उत्पादन (डेयरी फार्मिंग)

  • दुधारू पशु: गाय, भैंस – दूध मुख्य स्रोत (कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन, Ca, विटामिन) – सम्पूर्ण आहार।
  • पशु आहार: घास, सूखा चारा (भूसा), दलहन हरा चारा (बरसीम, अल्फा-अल्फा), सरसों/कपास की खली।
  • नस्लें: गाय (देशी – साहीवाल, गिर, देवनी; विदेशी – होल्स्टीन फ्रीजियन), भैंस (मुरा, मेहसाना, सुरती, जाफराबादी)।
  • आवास: स्वच्छ, हवादार – पुआल बिछावन, मल-मूत्र निष्कासन की व्यवस्था।
  • रोग: मुँह-खुर रोग, एन्थ्रेक्स – टीकाकरण एवं पशु चिकित्सक की नियमित जाँच।
  • संकरण: देशी × विदेशी – उच्च दुग्ध उत्पादन एवं रोग प्रतिरोध।

🔹 कुक्कुट पालन (Poultry)

  • मुर्गी, बतख – अण्डे एवं माँस के लिए – अण्डे में प्रोटीन एवं विटामिन प्रचुर।
  • उन्नत नस्लें: व्हाइट लेगहॉर्न, एसिल, कैरोनेल – अधिक अण्डे उत्पादन।
  • फार्म हाउस – स्वच्छता, संतुलित आहार, रोगों से बचाव।

🔹 मत्स्य पालन (Fisheries)

  • मछली: प्रोटीन, विटामिन A और D (तेल) का स्रोत – मछली के अवशेष खाद के रूप में।
  • अलवण जल मछली: तालाब, झील, नहर – कटला, रोहू, मृगल
  • लवण जल मछली: समुद्र – टूना, कॉड, सालमॉन
  • मत्स्य पालन (Pisciculture): नर्सरी तालाब → स्फुटन → संवर्धन तालाब (प्रकाश, ऑक्सीजन, आहार, स्वच्छता) – उन्नत नस्लें (संकरण) तीव्र वृद्धि।
🐄
दुग्ध
🐔
कुक्कुट
🐟
मत्स्य
चित्र 10.5: पशुपालन के मुख्य स्रोत

🐄 पशुपालन: दुग्ध (साहीवाल, मुरा), कुक्कुट (व्हाइट लेगहॉर्न), मत्स्य (कटला, सालमॉन)।

📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)

🌾 फसलें: खरीफ (धान, मक्का) – बरसात; रबी (गेहूँ, चना) – सर्दी।
🌱 मृदा तैयारी: जुताई (हल) + गुड़ाई (पाटल) – भुरभुरी मिट्टी।
🌿 बुवाई: सीड ड्रिल – समान दूरी/गहराई – पक्षियों से बचाव।
🧪 पोषक तत्व: N,P,K (मुख्य), Ca,Mg,S (गौण), Fe,Cu,Zn (सूक्ष्म)।
🔄 नाइट्रोजन चक्र: N₂ → नाइट्रेट → पौधे → जन्तु → अपघटन → N₂।
💧 सिंचाई: नहर, कुँआ, ट्यूबवेल – फसल व मिट्टी के अनुसार।
🌿 खरपतवार: 2,4-D, मेटाक्लोर – फसल से हटाना आवश्यक।
🔪 कटाई/मड़ाई: हँसिया, कंबाइन – दानों को भूसा से अलग करना।
🏚️ भण्डारण: गोदाम, साइलो – FCI – फल/सब्जी 0-1°C पर।
🐄 पशुपालन: दुग्ध (गाय/भैंस), कुक्कुट (मुर्गी), मत्स्य (मछली)।

🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)

📝 अभ्यास क्विज़

स्कोर: 0/0

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