जैव-विविधता एवं संरक्षण — सम्पूर्ण अध्ययन
कक्षा-12 • अध्याय 13

जैव-विविधता एवं संरक्षण

जैव-विविधता के स्तर, विश्व एवं भारत की जातीय समृद्धि, अक्षांशीय प्रवणता, जातीय-क्षेत्र संबंध, पारितंत्र में विविधता का महत्त्व, क्षति के कारण, संरक्षण के तर्क तथा स्वस्थाने-बाह्यस्थाने संरक्षण विधियाँ — परीक्षा‑केंद्रित विस्तृत विवेचन।

★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित

1 जैव-विविधता — मूल अवधारणा

पृथ्वी पर जीवन की अकल्पनीय विविधता

पृथ्वी पर जीवों की विशालता एवं विविधता अद्भुत है। यदि कोई अन्यग्रही (एलियन) हमारे ग्रह पर आए, तो उसे सबसे अधिक चकित करने वाली बात होगी — लाखों प्रकार की चींटियाँ, भृंग, मछलियाँ तथा अधिपादप (ऑर्किड) एक साथ इस पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बनाए हुए हैं।

जैव-विविधता — परिभाषा एवं इतिहास
  • जैव-विविधता — जैविक संगठन के प्रत्येक स्तर (अणु से जीवोम तक) पर उपस्थित विविधता।
  • यह शब्द एडवर्ड विलसन द्वारा प्रचलित किया गया।
  • यह विविधता विकास के लाखों वर्षों में संचित हुई है — यदि क्षति इसी दर से जारी रही, तो हम इसे दो शताब्दी से भी कम समय में खो सकते हैं।
पारिस्थितिकीविदों के प्रमुख प्रश्न: इतनी अधिक जातियाँ क्यों अस्तित्व में हैं? यह विविधता कब और कैसे उत्पन्न हुई? यदि विविधता कम हो जाए तो जीवमंडल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
NEET फोकस
  • जैव-विविधता शब्द — एडवर्ड विलसन
  • यह जैविक संगठन के सभी स्तरों पर विद्यमान है

2 जैव-विविधता के स्तर

आनुवंशिक, जातीय एवं पारिस्थितिकीय विविधता

जैव-विविधता केवल जाति (स्पीशीज़) स्तर पर सीमित नहीं है — यह जैविक संगठन के प्रत्येक स्तर पर विद्यमान है। इसे तीन प्रमुख श्रेणियों में बाँटा गया है:

जैव-विविधता के तीन स्तर आनुवंशिक विविधता एक ही जाति में जीन-स्तरीय भिन्नता उदा. धान की 50,000+ किस्में जातीय (स्पीशीज़) विविधता जाति स्तर पर भिन्नता उदा. पश्चिमी घाट में उभयचर पारिस्थितिकीय विविधता पारितंत्र स्तर पर भिन्नता रेगिस्तान, वर्षावन, मैंग्रोव
चित्र 13.1 — जैव-विविधता के तीन स्तर (स्वनिर्मित)
विविधता का स्तरपरिभाषाउदाहरण
आनुवंशिक विविधताएक ही जाति के भीतर आनुवंशिक स्तर पर भिन्नताभारत में धान की 50,000+ किस्में; राऊवोल्फिया वोमिटोरिया की विभिन्न रेसरपिन क्षमता
जातीय विविधताकिसी क्षेत्र में उपस्थित विभिन्न जातियों की संख्यापश्चिमी घाट में उभयचरों की अधिक विविधता
पारिस्थितिकीय विविधतापारितंत्र स्तर पर विविधताभारत में रेगिस्तान, वर्षावन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति
NEET फोकस
  • आनुवंशिक विविधता — राऊवोल्फिया (रेसरपिन) उदाहरण
  • जातीय विविधता — पश्चिमी घाट (उभयचर) उदाहरण
  • पारिस्थितिकीय विविधता — भारत की विविधता नॉर्वे से अधिक

3 विश्व एवं भारत की जातीय समृद्धि

ज्ञात जातियाँ, आंकलन, भारत की स्थिति

IUCN (2004) के अनुसार अब तक 1.5 मिलियन (15 लाख) जातियों का औपचारिक विवरण किया जा चुका है। रॉबर्ट मे का सर्वाधिक स्वीकृत आंकलन वैश्विक जातीय विविधता को लगभग 7 मिलियन (70 लाख) मानता है।

वैश्विक जैव-विविधता — जातियों का अनुपातिक वितरण 70%+ जंतु ~22% पादप कवक > कशेरुकी कवक कुल जंतुओं का 70% कीट
चित्र 13.2 — ज्ञात जातियों में 70%+ जंतु, जिनमें 70%+ अकेले कीट (स्वनिर्मित)
भारत — एक महाविविध देश
  • विश्व भूमि का 2.4% — किंतु वैश्विक जातीय विविधता का 8.1%
  • 12 महाविविध (मेगाडाइवर्स) देशों में एक
  • अभिलिखित पादप जातियाँ — ~45,000; जंतु — ~91,000 (पादपों से दोगुनी)
  • यदि 22% वैश्विक अनुपात मानें तो भारत में अभी 1,00,000+ पादप व 3,00,000+ जंतु जातियों की खोज शेष
रोचक तथ्य: ज्ञात जातियों में 70% से अधिक जंतु हैं, जिनमें अकेले कीट सभी जंतु जातियों के 70% से अधिक हैं — अर्थात् प्रत्येक 10 जंतुओं में 7 कीट होते हैं। कवक जातियों की संख्या मछली, उभयचर, सरीसृप व स्तनधारियों — सभी को मिलाकर भी अधिक है।
NEET फोकस
  • IUCN (2004) — 1.5 मिलियन ज्ञात जातियाँ
  • रॉबर्ट मे — 7 मिलियन (70 लाख) आंकलन
  • भारत — विश्व भूमि का 2.4%, विविधता का 8.1%
  • ज्ञात जातियों में कीट सर्वाधिक समृद्ध

4 जैव-विविधता के प्रतिरूप

अक्षांशीय प्रवणता एवं जातीय-क्षेत्र संबंध

अक्षांशीय प्रवणता

भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर जातीय विविधता क्रमशः घटती है — इसे अक्षांशीय प्रवणता कहते हैं। उष्ण कटिबंध (23.5°N–23.5°S) में अधिकतम जाति-समृद्धि पाई जाती है।

अक्षांशीय प्रवणता — पक्षी विविधता जाति विविधता → अक्षांश (भूमध्य → ध्रुव) → कोलम्बिया — 1400 भारत — 1200+ न्यूयॉर्क — 105 ग्रीनलैंड — 56
चित्र 13.3 — पक्षी जातीय विविधता की अक्षांशीय प्रवणता (स्वनिर्मित)
उष्ण कटिबंध में अधिक विविधता — तीन कारण
  • अधिक समय: उष्ण कटिबंध लाखों वर्षों से अपेक्षाकृत अबाधित (शीतोष्ण में बार-बार हिमनदन)
  • स्थिर पर्यावरण: कम मौसमी परिवर्तन → निकेत विशिष्टीकरण को बढ़ावा
  • अधिक सौर ऊर्जा: उच्च प्राथमिक उत्पादकता → अधिक जातियों को सहारा

जातीय-क्षेत्र संबंध

अलेक्जैंडर वॉन हम्बोल्ट ने प्रतिपादित किया कि क्षेत्रफल बढ़ने पर जातीय समृद्धि एक सीमा तक बढ़ती है। यह संबंध समीकरण द्वारा व्यक्त होता है:

log S = log C + Z log A
S = जातीय समृद्धि, A = क्षेत्र, Z = ढाल (रिग्रेशन गुणांक), C = अंत:खंड
अध्ययन पैमानाZ (ढाल) मानउदाहरण
छोटा क्षेत्र / एकल वर्गकी समूह0.1–0.2ब्रिटेन के पादप, कैलिफोर्निया के पक्षी
बड़ा समूह (महाद्वीपीय)0.6–1.2उष्णकटिबंधीय वनों के फलाहारी पक्षी (Z = 1.15)
महत्वपूर्ण: छोटे पैमाने पर Z मान आश्चर्यजनक रूप से समान (0.1–0.2) रहता है, भले ही वर्गकी समूह या क्षेत्र कोई भी हो — इसे "जीव विज्ञान के सर्वोत्तम-स्थापित नियमों" में से एक माना जाता है।
NEET फोकस
  • अक्षांशीय प्रवणता — भूमध्य → ध्रुव: विविधता घटती
  • उष्ण कटिबंध — 23.5°N–23.5°S
  • अमेजन वर्षावन — सर्वाधिक विविधता
  • जातीय-क्षेत्र संबंध — हम्बोल्ट
  • समीकरण — log S = log C + Z log A

5 पारितंत्र में जातीय विविधता का महत्त्व

स्थिरता, उत्पादकता, रिवेट पॉपर परिकल्पना

डेविड टिलमैन के दीर्घकालिक आउटडोर प्रयोगों ने दिखाया कि अधिक जाति-समृद्ध भूखंड अधिक स्थिर (जैवभार में कम परिवर्तनशीलता) व अधिक उत्पादक होते हैं।

रिवेट पॉपर परिकल्पना

पॉल एहरलिक (स्टैंडफोर्ड) द्वारा प्रस्तुत यह रूपक पारितंत्र की तुलना एक वायुयान से करता है — जातियाँ उसके रिवेट (कीलक) हैं। कुछ रिवेट (जातियाँ) हटाने से आरंभ में कोई अंतर नहीं पड़ता, परंतु अधिक रिवेट हटने पर वायुयान (पारितंत्र) खतरनाक रूप से कमजोर हो जाता है।

रिवेट पॉपर परिकल्पना पारितंत्र (धड़) कीस्टोन जातियाँ (पंख के रिवेट) सामान्य जातियाँ (सीट के रिवेट) हर हटाया गया रिवेट = एक जाति की विलुप्ति
चित्र 13.4 — रिवेट पॉपर परिकल्पना (स्वनिर्मित)
महत्वपूर्ण: "कौन-सा" रिवेट हटाया गया, "कितने" से भी अधिक महत्वपूर्ण है — कीस्टोन जातियों (वायुयान के पंख के रिवेट) की क्षति सामान्य जातियों की तुलना में कहीं अधिक घातक है।
NEET फोकस
  • टिलमैन — अधिक विविधता = अधिक स्थिरता व उत्पादकता
  • रिवेट पॉपर — पॉल एहरलिक
  • कीस्टोन जातियाँ — अत्यंत महत्वपूर्ण (पंख के रिवेट)

6 जैव-विविधता की क्षति

छठा सामूहिक विलोपन, ईविल क्वार्टेट

जाति-उद्भवन (स्पीशिएशन) से कुछ नई जातियाँ अवश्य बनती हैं, परंतु मानव क्रियाकलापों के कारण हमारे ग्रह की जैव-सम्पदा में तीव्र गति से हानि हो रही है।

तथ्यआँकड़ा (IUCN लाल सूची, 2004)
पिछले 500 वर्षों में विलुप्त जातियाँ784 (338 कशेरुकी + 359 अकशेरुकी + 87 पादप)
पिछले 20 वर्षों में विलुप्त27
विलुप्ति के कगार पर15,500+
खतरे में पक्षी12%
खतरे में स्तनधारी23%
खतरे में उभयचर32% (सबसे अधिक)
खतरे में आवृत्तबीजी31%

छठा सामूहिक विलोपन

विलोपन दर: पूर्व की अपेक्षा 100–1000 गुना अधिक तीव्र। पिछले पाँच विलोपन प्राकृतिक कारणों (उल्कापात, ज्वालामुखी) से हुए, जबकि छठा विलोपन मानव-जनित है।

क्षति के चार कारण — "ईविल क्वार्टेट"

आवासीय क्षति व विखंडन

सबसे महत्वपूर्ण कारण। वर्षावन 14% से घटकर 6% से कम; अमेजन का कटाव (सोयाबीन/चारागाह)।

अतिदोहन

"आवश्यकता" का "लालच" में बदलना। स्टेलर समुद्री गाय, पैसेंजर कबूतर — अतिदोहन से विलुप्त।

विदेशी जातियों का आक्रमण

नील पर्च (विक्टोरिया झील) → 200+ सिचलिड विलुप्त। भारत: पार्थेनियम, लैंटाना, जलकुंभी।

सहविलुप्तता

एक जाति के विलुप्त होने पर उस पर आधारित (परजीवी/सहोपकारी) जातियाँ भी विलुप्त हो जाती हैं।

NEET फोकस
  • छठा विलोपन — मानव-जनित, दर 100–1000 गुना तीव्र
  • ईविल क्वार्टेट — आवासीय क्षति, अतिदोहन, विदेशी आक्रमण, सहविलुप्तता
  • उभयचर — 32% खतरे में (सर्वाधिक)
  • नील पर्च (विक्टोरिया झील) — 200+ सिचलिड विलुप्त

7 संरक्षण क्यों आवश्यक है?

तीन तर्क — संकुचित, व्यापक, नैतिक

तर्क प्रकारविवरण
संकुचित उपयोगितावादीप्रत्यक्ष आर्थिक लाभ — खाद्य, ईंधन, रेशा, इमारती सामान, औषधियाँ (विश्व बाजार की 25%+ औषधियाँ पादप-आधारित; 25,000+ पादप जातियाँ पारंपरिक दवाइयों में)
व्यापक उपयोगितावादीपारितंत्र सेवाएँ — अमेजन वन ~20% O₂ प्रदान करता है; परागण (मधुमक्खियाँ, पक्षी, चमगादड़); जलवायु नियमन, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन/सौंदर्यात्मक मूल्य
नैतिकप्रत्येक जाति का अपना नैज मूल्य (इंट्रिंज़िक वैल्यू) होता है, चाहे उसका हमारे लिए कोई प्रत्यक्ष उपयोग न हो — अगली पीढ़ी के लिए इस धरोहर को सुरक्षित रखना हमारा नैतिक दायित्व है।
विचारणीय प्रश्न: क्या हम मधुमक्खियों के बिना परागण की लागत आँक सकते हैं? क्या हम प्रकृति द्वारा प्रदत्त ऑक्सीजन-सेवा का अनुमान लगा सकते हैं?
NEET फोकस
  • संरक्षण के तीन तर्क — संकुचित, व्यापक, नैतिक
  • 25%+ औषधियाँ — पादप-आधारित
  • अमेजन — ~20% O₂ प्रदाता

8 संरक्षण विधियाँ

स्वस्थाने (इन-सीटू) एवं बाह्यस्थाने (एक्स-सीटू)

स्वस्थाने बनाम बाह्यस्थाने संरक्षण स्वस्थाने (इन-सीटू) प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षा राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य, बायोस्फीयर बाह्यस्थाने (एक्स-सीटू) प्राकृतिक आवास से बाहर सुरक्षा जंतु उद्यान, बीज बैंक, क्रायोप्रिजर्वेशन
चित्र 13.5 — स्वस्थाने व बाह्यस्थाने संरक्षण (स्वनिर्मित)

स्वस्थाने (इन-सीटू) संरक्षण

जाति को उसके प्राकृतिक आवास में ही सुरक्षित रखना।

विधिभारत में संख्याविवरण
राष्ट्रीय उद्यान90कड़ाई से संरक्षित क्षेत्र
वन्यजीव अभ्यारण्य448वन्यजीव संरक्षण हेतु
जीवमंडल आरक्षिती14तीन क्षेत्र — कोर, बफर, परिवर्तन
पवित्र उपवनधार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा से संरक्षित (मेघालय, अरावली, पश्चिमी घाट)
जैवविविधता हॉट-स्पॉट: उच्च स्थानिकता, उच्च जातीय समृद्धि व 70%+ आवास-क्षति वाले क्षेत्र। विश्व में 34 हॉट-स्पॉट (नॉर्मन मायर्स द्वारा पहचान); भारत में 3 (पश्चिमी घाट-श्रीलंका, इंडो-बर्मा, हिमालय) — ये विश्व भूमि का 2% से कम क्षेत्र घेरते हैं, परंतु इनकी विशेष सुरक्षा से विलोपन दर 30% तक कम हो सकती है।

बाह्यस्थाने (एक्स-सीटू) संरक्षण

संकटोत्पन्न जातियों को उनके प्राकृतिक आवास से हटाकर विशेष स्थान पर संरक्षित करना।

विधिविवरण
जंतु उद्यान / वनस्पति उद्यानजीवित जातियों का संरक्षण
बीज बैंकव्यावसायिक महत्त्व के पौधों के बीज दीर्घकाल संरक्षण
क्रायोप्रिजरवेशनयुग्मक, बीज, ऊतक — द्रव नाइट्रोजन (−196°C) में संरक्षण
पात्रे (In vitro) निषेचन / ऊतक संवर्धनप्रयोगशाला में प्रजनन व प्रवर्धन

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग

  • 1992 — रियो डी जेनेरो (पृथ्वी सम्मेलन): जैव-विविधता संरक्षण हेतु वैश्विक प्रतिबद्धता
  • 2002 — जोहान्सबर्ग (विश्व सतत विकास सम्मेलन): 190 देशों ने 2010 तक विलोपन दर में सार्थक कमी लाने की शपथ ली
  • IUCN — "रेड लिस्ट" (रेड डेटा बुक) प्रकाशित करता है
  • भारतीय जैवविविधता अधिनियम (2002): राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण (NBA) — चेन्नई में मुख्यालय
NEET फोकस
  • हॉट-स्पॉट — 34 विश्व में; भारत — 3 (पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, हिमालय)
  • स्वस्थाने — राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य, बायोस्फीयर, पवित्र उपवन
  • बाह्यस्थाने — जंतु उद्यान, बीज बैंक, क्रायोप्रिजर्वेशन (−196°C)
  • रियो — 1992; जोहान्सबर्ग — 2002; भारतीय अधिनियम — 2002
  • IUCN — रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक)

NEET फैक्ट‑शीट

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

अवधारणाप्रमुख तथ्य
"जैव-विविधता" शब्दएडवर्ड विलसन
जैव-विविधता के स्तरआनुवंशिक, जातीय, पारिस्थितिकीय
ज्ञात जातियाँ (IUCN 2004)1.5 मिलियन
रॉबर्ट मे आंकलन7 मिलियन
भारत (भूमि 2.4%, विविधता 8.1%)महाविविध (मेगाडाइवर्स) देश
जातीय-क्षेत्र संबंधहम्बोल्ट; log S = log C + Z log A
अमेजन वर्षावनसर्वाधिक विविधता
रिवेट पॉपरपॉल एहरलिक
ईविल क्वार्टेटआवासीय क्षति, अतिदोहन, विदेशी आक्रमण, सहविलुप्तता
उभयचर खतरे में32% (सर्वाधिक)
हॉट-स्पॉट (विश्व)34
हॉट-स्पॉट (भारत)3 (पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, हिमालय)
स्वस्थाने संरक्षणराष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य, बायोस्फीयर
बाह्यस्थाने संरक्षणजंतु उद्यान, बीज बैंक, क्रायोप्रिजर्वेशन
क्रायोप्रिजर्वेशन तापमान−196°C (द्रव नाइट्रोजन)
रियो पृथ्वी सम्मेलन1992
जोहान्सबर्ग सम्मेलन2002
भारतीय जैवविविधता अधिनियम2002
IUCN रेड लिस्टसंकटग्रस्त जातियों की सूची

📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न

विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु

1 रॉबर्ट मे के अनुसार वैश्विक जातीय विविधता लगभग कितनी है?

उत्तर: 7 मिलियन (70 लाख)

रॉबर्ट मे का यह सर्वाधिक स्वीकृत आंकलन है। IUCN (2004) के अनुसार अब तक केवल ~1.5 मिलियन जातियों का ही औपचारिक विवरण किया जा सका है।

2 जातीय-क्षेत्र संबंध सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया?

उत्तर: अलेक्जैंडर वॉन हम्बोल्ट

हम्बोल्ट ने दक्षिणी अमेरिका के जंगलों के अध्ययन के आधार पर जातीय-क्षेत्र संबंध को प्रतिपादित किया, जो बाद में log S = log C + Z log A समीकरण द्वारा व्यक्त किया गया।

3 "ईविल क्वार्टेट" में कौन-से कारण सम्मिलित हैं?

उत्तर: आवासीय क्षति व विखंडन, अतिदोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण, सहविलुप्तता

ये चारों जैव-विविधता क्षति के प्रमुख मानव-जनित कारण हैं, जिनमें आवासीय क्षति व विखंडन को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

4 विश्व में कुल कितने जैवविविधता हॉट-स्पॉट हैं?

उत्तर: 34

नॉर्मन मायर्स ने मूलतः 25 हॉट-स्पॉट पहचाने थे, जो बाद में बढ़कर 34 हो गए। भारत में 3 (पश्चिमी घाट, इंडो-बर्मा, हिमालय) हैं।

5 निम्न में से कौन-सी स्वस्थाने (इन-सीटू) संरक्षण की विधि है?

उत्तर: राष्ट्रीय उद्यान

राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभ्यारण्य, जीवमंडल आरक्षिती व पवित्र उपवन — ये सभी स्वस्थाने संरक्षण की विधियाँ हैं। जंतु उद्यान, बीज बैंक व क्रायोप्रिजर्वेशन बाह्यस्थाने हैं।

6 क्रायोप्रिजर्वेशन में किस तापमान का उपयोग होता है?

उत्तर: −196°C (द्रव नाइट्रोजन)

यह अति-निम्न तापमान पर युग्मकों, बीजों व ऊतकों को दीर्घकाल तक जीवनक्षम अवस्था में संरक्षित रखने की तकनीक है।

7 रियो पृथ्वी सम्मेलन किस वर्ष आयोजित हुआ था?

उत्तर: 1992

रियो डी जेनेरो (ब्राज़ील) में आयोजित इस ऐतिहासिक सम्मेलन में जैव-विविधता संरक्षण हेतु वैश्विक प्रतिबद्धता व्यक्त की गई थी।

8 विक्टोरिया झील में नील पर्च के कारण कौन-सी जातियाँ विलुप्त हुईं?

उत्तर: सिचलिड मछलियों की 200+ स्थानिक जातियाँ

नील पर्च (विदेशी शिकारी मछली) को विक्टोरिया झील में डालने से सिचलिड मछलियों की 200 से अधिक स्थानिक (एंडेमिक) जातियाँ विलुप्त हो गईं — यह विदेशी जातियों के आक्रमण का उत्कृष्ट उदाहरण है।

9 किसी विशेष क्षेत्र तक सीमित व अन्यत्र कहीं न पाई जाने वाली जाति को क्या कहते हैं?

उत्तर: स्थानिक (एंडेमिक) जाति

स्थानिक जातियाँ उच्च संरक्षण मूल्य रखती हैं, क्योंकि इनकी क्षति का अर्थ वैश्विक विलुप्ति है।

10 IUCN द्वारा प्रकाशित "रेड लिस्ट" का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: संकटग्रस्त जातियों की सूची व उनकी संरक्षण-स्थिति प्रकाशित करना

IUCN रेड लिस्ट जातियों को उनके विलुप्ति-जोखिम के आधार पर वर्गीकृत करती है — अतिसंकटग्रस्त (CR), संकटग्रस्त (EN), सुभेद्य (VU) आदि।

अतिरिक्त NEET तथ्य

सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं

महत्वपूर्ण
  • इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (~8–12 अंक) पूछे जाते हैं — 91+ PYQs उपलब्ध हैं।
  • सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — हॉट-स्पॉट, ईविल क्वार्टेट, स्वस्थाने/बाह्यस्थाने विधियाँ, जातीय-क्षेत्र संबंध
तुलनात्मक
  • स्वस्थाने vs बाह्यस्थाने: स्वस्थाने — जाति प्राकृतिक आवास में; बाह्यस्थाने — आवास से हटाकर (उद्यान, बीज बैंक, क्रायोप्रिजर्वेशन)।
  • रिवेट पॉपर vs अनावश्यक जाति: रिवेट पॉपर — प्रत्येक जाति महत्वपूर्ण; अनावश्यक जाति — कुछ जातियाँ अनावश्यक (विपरीत दृष्टिकोण)।
तथ्य
  • हॉट-स्पॉट पहचान मापदंड: ≥1500 स्थानिक संवहनी पादप + ≥70% आवास-क्षति (नॉर्मन मायर्स)।
  • भारतीय जैवविविधता अधिनियम (2002): राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण (NBA) — चेन्नई मुख्यालय।
ट्रैप
  • बायोस्फीयर रिजर्व के तीन क्षेत्र: कोर (पूर्ण संरक्षण), बफर (सीमित मानवीय गतिविधि), परिवर्तन (सामान्य मानवीय गतिविधि)।
  • भारत के हॉट-स्पॉट: 3 (पश्चिमी घाट-श्रीलंका, इंडो-बर्मा, हिमालय) — सुंडालैंड को कभी-कभी चौथा माना जाता है।
रणनीति
  • इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — ईविल क्वार्टेट के उदाहरण, हॉट-स्पॉट संख्या व मापदंड, स्वस्थाने/बाह्यस्थाने विधियों का वर्गीकरण, महत्वपूर्ण वर्ष (1992, 2002) — इन चारों पर विशेष ध्यान दें, इनसे 80%+ प्रश्न कवर हो जाते हैं।

संक्षिप्त सार

जैव-विविधता के स्तर

आनुवंशिक (जीन-स्तर), जातीय (स्पीशीज़-स्तर), पारिस्थितिकीय (पारितंत्र-स्तर) — तीनों स्तरों पर विविधता।

जातीय गणना

ज्ञात ~1.5 मिलियन; रॉबर्ट मे आंकलन ~7 मिलियन; भारत (2.4% भूमि, 8.1% विविधता) — महाविविध देश।

प्रतिरूप

अक्षांशीय प्रवणता — भूमध्य से ध्रुव तक विविधता घटती; जातीय-क्षेत्र संबंध (हम्बोल्ट): log S = log C + Z log A.

महत्त्व एवं क्षति

टिलमैन — अधिक विविधता = अधिक स्थिरता; रिवेट पॉपर (एहरलिक); ईविल क्वार्टेट — 4 कारण।

संरक्षण

स्वस्थाने (राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य, बायोस्फीयर, पवित्र उपवन); बाह्यस्थाने (जंतु उद्यान, बीज बैंक, क्रायोप्रिजर्वेशन).

NEET फोकस

हॉट-स्पॉट, ईविल क्वार्टेट, स्वस्थाने/बाह्यस्थाने विधियाँ, महत्वपूर्ण वर्ष (1992, 2002) — सर्वाधिक पूछे जाने वाले टॉपिक।

? अभ्यास प्रश्न-उत्तर

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें

प्रश्न 1 जैव-विविधता के तीन आवश्यक घटकों के नाम बताइए।
उत्तर
  • आनुवंशिक विविधता: एक ही जाति के भीतर जीन-स्तरीय भिन्नता (उदा. धान की 50,000+ किस्में)
  • जातीय विविधता: किसी क्षेत्र में उपस्थित विभिन्न जातियों की संख्या (उदा. पश्चिमी घाट में उभयचर)
  • पारिस्थितिकीय विविधता: पारितंत्र स्तर पर विविधता (उदा. रेगिस्तान, वर्षावन, मैंग्रोव)
प्रश्न 2 पारिस्थितिकीविद् विश्व की कुल जातियों का आंकलन किस प्रकार करते हैं?
उत्तर

वैज्ञानिक किसी गहनता से अध्ययन किए गए वर्गकी समूह (जैसे कीट) की उष्ण कटिबंधीय व शीतोष्ण जातियों की संख्या की सांख्यिकीय तुलना करके प्राप्त अनुपात को अन्य समूहों पर अनुमानित करते हैं।

रॉबर्ट मे का सर्वाधिक स्वीकृत आंकलन — ~7 मिलियन (70 लाख) जातियाँ।

प्रश्न 3 उष्ण कटिबंध में अधिक जाति-समृद्धि के तीन कारण बताइए।
उत्तर
  • अधिक समय: उष्ण कटिबंध लाखों वर्षों से अबाधित (शीतोष्ण में बार-बार हिमनदन)
  • स्थिर पर्यावरण: कम मौसमी परिवर्तन → निकेत विशिष्टीकरण
  • अधिक सौर ऊर्जा: उच्च प्राथमिक उत्पादकता → अधिक जातियों को सहारा
प्रश्न 4 जातीय-क्षेत्र संबंध में Z (ढाल) का क्या महत्त्व है?
उत्तर

समीकरण log S = log C + Z log A में Z (ढाल) यह बताता है कि क्षेत्रफल बढ़ने पर जातीय समृद्धि किस दर से बढ़ती है।

छोटे पैमाने पर Z ≈ 0.1–0.2 (लगभग स्थिर); महाद्वीपीय पैमाने पर Z ≈ 0.6–1.2 (अधिक तीव्र)।

प्रश्न 5 जैव-विविधता क्षति के चार मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर
  • आवासीय क्षति व विखंडन (सबसे महत्वपूर्ण)
  • अतिदोहन (स्टेलर समुद्री गाय, पैसेंजर कबूतर)
  • विदेशी जातियों का आक्रमण (नील पर्च → 200+ सिचलिड विलुप्त)
  • सहविलुप्तता (एक जाति के साथ उस पर आधारित अन्य)
प्रश्न 6 पारितंत्र के कार्यों के लिए जैव-विविधता किस प्रकार उपयोगी है?
उत्तर
  • स्थिरता: टिलमैन के प्रयोगों से — अधिक जाति-समृद्ध पारितंत्र अधिक स्थिर
  • उत्पादकता: विविधता में वृद्धि → उत्पादकता में वृद्धि
  • रिवेट पॉपर: पॉल एहरलिक — प्रत्येक जाति (रिवेट) पारितंत्र की स्थिरता में योगदान देती है
  • पारितंत्र सेवाएँ: O₂ उत्पादन, परागण, जलवायु नियमन, बाढ़ नियंत्रण
प्रश्न 7 पवित्र उपवन क्या हैं? इनकी संरक्षण में भूमिका क्या है?
उत्तर

पवित्र उपवन — धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं के कारण स्थानीय समुदायों द्वारा संरक्षित वन-खंड (मेघालय, अरावली, पश्चिमी घाट, मध्यप्रदेश)।

ये स्वस्थाने संरक्षण की प्रभावी विधि हैं — बिना कानून के भी पूर्ण सुरक्षा प्रदान करते हैं और दुर्लभ/संकटोत्पन्न जातियों की अंतिम शरणस्थली होते हैं।

प्रश्न 8 पारितंत्र सेवा के अंतर्गत बाढ़ व भू-अपरदन नियंत्रण किस प्रकार पूर्ण होता है?
उत्तर
  • जड़ें: मिट्टी को बांधकर कटाव रोकती हैं
  • वनस्पति आवरण: वर्षा की बूंदों की गति कम करती है, मिट्टी का कटाव घटाती है
  • वन-तल का मलबा (लिटर): जल सोखकर तेज बहाव (रन-ऑफ) कम करता है
  • आर्द्रभूमि/मैंग्रोव: प्राकृतिक "स्पंज" — अतिरिक्त जल सोखकर बाढ़ नियंत्रित करते हैं
प्रश्न 9 जंतुओं में पादपों की अपेक्षा अधिक विविधता क्यों है?
उत्तर
  • छोटा आकार: अधिक सूक्ष्म-निकेतों में अनुकूलन
  • पुष्पीय पादपों के साथ सहविकास: परागण संबंधों में विशिष्टीकरण
  • उच्च जनन-दर व अनुकूलन क्षमता: तीव्र स्पीशिएशन
  • विविध पोषण-व्यवहार: परपोषी, परजीवी, मांसाहारी, मृतजीवी — अधिक लचीलापन
प्रश्न 10 क्या हम किसी जाति को जानबूझकर विलुप्त करना चाह सकते हैं? क्या यह उचित है?
उत्तर

हाँ, ऐसी स्थितियाँ सोची जा सकती हैं — जैसे चेचक वायरस, या आक्रामक विदेशी जातियाँ (पार्थेनियम, लैंटाना) का उन्मूलन।

उचितता: यह निर्णय अत्यंत सावधानी से लिया जाना चाहिए — रिवेट पॉपर परिकल्पना के अनुसार प्रत्येक जाति (रिवेट) की अपनी भूमिका होती है, जिसे हम पूर्णतः नहीं समझ पाते। सहविलुप्तता का खतरा भी है। नैतिक रूप से, प्रत्येक जाति का अपना नैज मूल्य (इंट्रिंज़िक वैल्यू) होता है।

निष्कर्ष: "सामान्यतः उचित" नहीं ठहराया जा सकता — प्रत्येक मामले का वैज्ञानिक, पारिस्थितिक व नैतिक पहलुओं के आधार पर अलग-अलग मूल्यांकन करना चाहिए।

यह अध्ययन सामग्री जैव-विविधता एवं संरक्षण — स्तर, जातीय गणना, प्रतिरूप, महत्त्व, क्षति के कारण, संरक्षण के तर्क एवं विधियाँ — को सरल, मौलिक एवं परीक्षा-अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिसमें NEET-स्तरीय तथ्य, तुलनात्मक तालिकाएँ एवं विस्तृत प्रश्नोत्तर सम्मिलित हैं।

जैव-विविधता — पृथ्वी की जीवन-सम्पदा, जिसे संरक्षित करना हमारा साझा दायित्व है।

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