रसायन विज्ञान की मूल अवधारणाएँ — अध्याय 1
रसायन विज्ञान • कक्षा 11 • एकक 1

रसायन विज्ञान की मूल अवधारणाएँ

द्रव्य की प्रकृति, अवस्थाएँ, SI मात्रक, सार्थक अंक, रासायनिक संयोजन के नियम, परमाणु-आणविक द्रव्यमान, मोल-संकल्पना, प्रतिशत संघटन और स्टॉइकियोमीट्री — पूरे अध्याय का समग्र अध्ययन।

N × 10ⁿ — वैज्ञानिक संकेतन
n = m/M — मोलों की संख्या
NA = 6.022×10²³ — आवोगाद्रो संख्या
★ NEET फोकस तथ्य

रसायन विज्ञान : परिचय

रसायन विज्ञान को अणुओं एवं उनके रूपांतरणों का विज्ञान कहा जाता है। यह विज्ञान की उन शाखाओं में से एक है जो पदार्थों की संरचना, संश्लेषण, गुणधर्मों एवं अभिक्रियाओं का अध्ययन करती है। प्राचीन काल में इसका विकास कीमिया (ऐल्किमी) और औषधि निर्माण के रूप में हुआ। भारतीय संदर्भ में रसायन शास्त्र या रसतन्त्र नाम से जाना जाने वाला यह विज्ञान धातुकर्म, काँच, रंजक तथा औषधियों में अपनी गहरी छाप रखता है।

N
आचार्य नागार्जुन — प्राचीन भारत के महान रसायनज्ञ एवं धातुविज्ञानी; इनकी कृति रसरत्नाकर में पारद यौगिकों का विस्तृत वर्णन मिलता है।
NEET फोकस
  • रसायन विज्ञान का विकास मुख्यतः 1300–1600 CE में कीमिया एवं औषध रसायन के रूप में हुआ।
  • आचार्य कणाद (≈600 BCE) ने 'परमाणु' शब्द दिया — यह डाल्टन से लगभग 2500 वर्ष पूर्व की अवधारणा है।

1.2 द्रव्य : प्रकृति एवं अवस्थाएँ

वह सब कुछ जिसका द्रव्यमान हो तथा जो स्थान घेरता है, द्रव्य कहलाता है। द्रव्य तीन भौतिक अवस्थाओं — ठोस, द्रव तथा गैस — में पाया जाता है।

ठोस द्रव गैस
चित्र 1.1 — ठोस, द्रव एवं गैस में कणों की व्यवस्था।
अवस्थाआयतनआकारकण व्यवस्था
ठोसनिश्चितनिश्चितक्रमबद्ध, पास-पास, कम गतिशील
द्रवनिश्चितअनिश्चित (पात्रानुसार)पास-पास, गतिशील
गैसअनिश्चितअनिश्चित (पूरे पात्र में फैलती)दूर-दूर, अत्यधिक गतिशील

द्रव्य को शुद्ध पदार्थ (तत्त्व/यौगिक) तथा मिश्रण (समांगी/विषमांगी) में वर्गीकृत किया जाता है।

द्रव्य मिश्रण शुद्ध पदार्थ समांगी विषमांगी तत्त्व यौगिक
चित्र 1.2 — द्रव्य का वर्गीकरण।
NEET फोकस
  • ठोस: निश्चित आयतन + निश्चित आकार; द्रव: निश्चित आयतन + अनिश्चित आकार; गैस: अनिश्चित आयतन + अनिश्चित आकार।
  • शुद्ध पदार्थ का संघटन निश्चित होता है; मिश्रण का संघटन परिवर्तनशील होता है।
  • मिश्रण के घटक भौतिक विधियों से पृथक होते हैं; यौगिक के घटक रासायनिक विधियों से।

1.3 द्रव्य के गुणधर्म

गुणधर्म दो प्रकार के होते हैं — भौतिक (जैसे रंग, गलनांक, घनत्व) जिन्हें संघटन बदले बिना मापा जा सकता है; तथा रासायनिक (जैसे अम्लता, दाह्यता) जिन्हें मापने हेतु रासायनिक परिवर्तन आवश्यक है।

1.3.3 SI मात्रक पद्धति

SI पद्धति में सात आधार मात्रक हैं — लंबाई (m), द्रव्यमान (kg), समय (s), विद्युत धारा (A), ताप (K), पदार्थ की मात्रा (mol), ज्योति-तीव्रता (cd)।

भौतिक राशिSI मात्रकप्रतीक
लंबाईमीटरm
द्रव्यमानकिलोग्रामkg
समयसेकंडs
विद्युत धाराऐम्पीयरA
तापकेल्विनK
पदार्थ की मात्रामोलmol
ज्योति-तीव्रताकेंडेलाcd

1 mol में 6.02214076 × 10²³ मूलभूत कण होते हैं (आवोगाद्रो स्थिरांक)।

1.3.4–1.3.7 द्रव्यमान, आयतन, घनत्व, ताप

घनत्व = द्रव्यमान / आयतन   (SI: kg m⁻³, सामान्य: g cm⁻³)

ताप परिवर्तन सूत्र: K = °C + 273.15; °F = (9/5)°C + 32। केल्विन पैमाने पर ऋणात्मक ताप संभव नहीं है।

केल्विन सेल्सियस फारेनहाइट 373 K100°C212°F 273.15 K0°C32°F जल का हिमांक
चित्र 1.5 — ताप पैमानों की तुलना।
NEET फोकस
  • द्रव्यमान स्थिर; भार गुरुत्व के साथ बदलता है।
  • 1 L = 1000 mL = 1000 cm³ = 1 dm³।
  • घनत्व = द्रव्यमान/आयतन; SI मात्रक kg m⁻³।

1.4 वैज्ञानिक संकेतन

N × 10ⁿ   (1 ≤ N < 10)

उदाहरण: 232.508 = 2.32508 × 10²; 0.00016 = 1.6 × 10⁻⁴

1.4.2 सार्थक अंक

नियम
  • सभी गैर-शून्य अंक सार्थक होते हैं (285 → 3)।
  • प्रथम गैर-शून्य अंक से पहले के शून्य सार्थक नहीं (0.0052 → 2)।
  • दो गैर-शून्य अंकों के बीच के शून्य सार्थक होते हैं (2.005 → 4)।
  • दशमलव के दाएँ अंतिम शून्य सार्थक होते हैं यदि दशमलव उपस्थित हो (0.200 → 3)।

परिशुद्धता (Precision) बनाम यथार्थता (Accuracy)

परिशुद्धता — मापनों का आपसी सामीप्य; यथार्थता — मापन का वास्तविक मान से मेल।

ट्रैप: योग/घटाव में दशमलव स्थान सबसे कम वाली संख्या के अनुसार; गुणा/भाग में सार्थक अंक सबसे कम वाली संख्या के अनुसार।

1.4.3 विमीय विश्लेषण

इकाई गुणक विधि से मात्रकों का रूपांतरण — जैसे 3 in × (2.54 cm / 1 in) = 7.62 cm।

1.5 रासायनिक संयोजन के नियम

पाँच नियम
  • द्रव्यमान-संरक्षण (लावुसिए, 1789): द्रव्य न बनाया न नष्ट किया जा सकता।
  • स्थिर अनुपात (प्राउस्ट): यौगिक में तत्त्वों का द्रव्यमान-अनुपात सदैव समान।
  • गुणित अनुपात (डाल्टन, 1803): एक तत्त्व के साथ दूसरे का द्रव्यमान सरल पूर्णांक अनुपात में।
  • गै-लुसैक (1808): गैसों के आयतन सरल अनुपात में संयोजित होते हैं।
  • आवोगाद्रो (1811): समान ताप-दाब पर समान आयतन में समान अणु-संख्या।
H₂ का 1 आयतन + O₂ का 1 आयतन जलवाष्प के 2 आयतन
चित्र 1.6 — हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन के आयतन अनुपात की व्याख्या।

1.6 डाल्टन का परमाणु सिद्धांत (1808)

  • द्रव्य अविभाज्य परमाणुओं से बना है।
  • एक तत्त्व के सभी परमाणु समान द्रव्यमान एवं गुणधर्म वाले होते हैं; भिन्न तत्त्वों के परमाणु भिन्न होते हैं।
  • यौगिक विभिन्न तत्त्वों के परमाणुओं के निश्चित अनुपात में संयोग से बनते हैं।
  • रासायनिक अभिक्रिया में परमाणुओं का पुनर्व्यवस्थापन होता है; न तो बनते हैं, न नष्ट होते हैं।
आचार्य कणाद (≈600 BCE) ने 'परमाणु' की अवधारणा डाल्टन से ~2500 वर्ष पूर्व वैशेषिका सूत्र में दी थी।

1.7 परमाणु एवं आण्विक द्रव्यमान

1 amu (u) = ¹²C परमाणु के द्रव्यमान का 1/12 = 1.66056 × 10⁻²⁴ g

आण्विक द्रव्यमान — अणु में सभी परमाणुओं के द्रव्यमानों का योग (जैसे CH₄ = 12.011 + 4×1.008 = 16.043 u)।

आयनिक ठोस (NaCl) के लिए सूत्र-द्रव्यमान (NaCl = 23.0 + 35.5 = 58.5 u) प्रयुक्त होता है।

1.8 मोल संकल्पना एवं मोलर द्रव्यमान

1 मोल = 6.02214076 × 10²³ कण (आवोगाद्रो संख्या)
मोलर द्रव्यमान (g/mol) = ग्राम में एक मोल का द्रव्यमान

मोलों की संख्या: n = दिया गया द्रव्यमान (g) / मोलर द्रव्यमान (g/mol)

1.9 प्रतिशत संघटन

तत्त्व का % = (यौगिक में तत्त्व का द्रव्यमान / यौगिक का मोलर द्रव्यमान) × 100

मूलानुपाती सूत्र — सरलतम पूर्णांक अनुपात; आणविक सूत्र — वास्तविक परमाणु-संख्या (आणविक सूत्र = n × मूलानुपाती सूत्र, जहाँ n = मोलर द्रव्यमान / मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान)।

1.10 स्टॉइकियोमीट्री

रासायनिक समीकरणों में अभिक्रियकों एवं उत्पादों के मोल-अनुपात का अध्ययन। सीमांत अभिकर्मक वह है जो पहले समाप्त होकर उत्पाद की मात्रा सीमित करता है।

CH₄(g) + 2O₂(g) → CO₂(g) + 2H₂O(g)
1 मोल CH₄ + 2 मोल O₂ → 1 मोल CO₂ + 2 मोल H₂O

1.10.2 विलयन सांद्रता

विधिसूत्र
द्रव्यमान%(विलेय द्रव्यमान / विलयन द्रव्यमान) × 100
मोल-अंशघटक के मोल / कुल मोल
मोलरता (M)मोल / आयतन (L)
मोललता (m)मोल / विलायक द्रव्यमान (kg)
मोलरता ताप-निर्भर (आयतन के कारण); मोललता ताप-स्वतंत्र (द्रव्यमान के कारण)।
तनुकरण सूत्र: M₁V₁ = M₂V₂

तथ्य सारणी (एक नज़र में)

संकल्पनामहत्वपूर्ण तथ्य
वैज्ञानिक संकेतनN × 10ⁿ, 1 ≤ N < 10
सार्थक अंकअंतिम अंक में ±1 अनिश्चितता
1 u¹²C के 1/12 भाग = 1.66056×10⁻²⁴ g
आवोगाद्रो संख्या6.022×10²³ mol⁻¹
मोलों की संख्याn = द्रव्यमान / मोलर द्रव्यमान
द्रव्यमान %(तत्त्व का द्रव्यमान/यौगिक मोलर द्रव्यमान)×100
मोलरता (M)मोल/आयतन(L)
मोललता (m)मोल/विलायक(kg)
तनुकरणM₁V₁ = M₂V₂
सीमांत अभिकर्मकपहले समाप्त होने वाला अभिकर्मक

📝 NEET विगत वर्ष प्रश्न

1 3.0 × 10⁸ m s⁻¹ प्रकाश वेग से 2.0 ns में तय दूरी क्या होगी?
हल

दूरी = 3.0×10⁸ × 2.0×10⁻⁹ = 6.0×10⁻¹ = 0.60 m

2 0.5 mol Na₂CO₃ एवं 0.50 M Na₂CO₃ में क्या अंतर है?
उत्तर

0.5 mol — पदार्थ की निश्चित मात्रा (3.011×10²³ सूत्र-इकाई), आयतन से स्वतंत्र।

0.50 M — सांद्रता, अर्थात 1 L विलयन में 0.50 mol Na₂CO₃।

3 1 g ऑरेन्ज (Au), 1 g सोडियम (Na), 1 g लिथियम (Li) में से किसमें परमाणुओं की संख्या सर्वाधिक होगी?
हल

परमाणु-संख्या ∝ 1/परमाणु द्रव्यमान। Li का द्रव्यमान सबसे कम (6.94 u) है, अतः 1 g Li में परमाणु सर्वाधिक होंगे।

4 116 g n-ब्यूटेन (C₄H₁₀) के दहन पर CO₂ का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए। (C=12, H=1, O=16)
हल

C₄H₁₀ + 13/2 O₂ → 4CO₂ + 5H₂O

ब्यूटेन के मोल = 116/58 = 2 mol → CO₂ के मोल = 4×2 = 8 mol → द्रव्यमान = 8×44 = 352 g

5 1.0 g H₂ में जितने अणु हैं, उतने ही अणु किसमें हैं — 14 g N₂, 16 g O₂, 28 g CO?
हल

1 g H₂ के मोल = 1/2 = 0.5 mol।

14 g N₂ (M=28) के मोल = 14/28 = 0.5 mol — अतः 14 g N₂ में समान अणु-संख्या।

अतिरिक्त NEET तथ्य

महत्वपूर्ण
  • इस अध्याय से NEET में प्रायः 1–3 संख्यात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं — मोल, सीमान्त अभिकारक, प्रतिशत संघटन, मोलरता/मोललता पर आधारित।
तथ्य
  • 2019 SI पुनर्परिभाषा: आवोगाद्रो संख्या अब 6.02214076×10²³ /mol (ठीक) है; मोल की परिभाषा अब कार्बन-12 पर आधारित नहीं है।
  • किलोग्राम (kg) की परिभाषा अब प्लांक स्थिरांक (h) पर आधारित है।
ट्रैप
  • यथार्थता (accuracy) बनाम परिशुद्धता (precision) — यथार्थता = मापित मान का वास्तविक मान से निकट होना; परिशुद्धता = बार-बार मापनों का आपस में निकट होना।
  • मोलरता बनाम मोललता — मोलरता ताप-निर्भर (आयतन के कारण), मोललता ताप-स्वतंत्र (द्रव्यमान के कारण)।
तथ्य
  • STP का ट्रैप: पुराना STP (0°C, 1 atm) → 22.4 L/mol; IUPAC STP (0°C, 1 bar) → 22.7 L/mol।
  • वाष्प घनत्व: आणविक द्रव्यमान = 2 × वाष्प घनत्व (गैसों के लिए शॉर्टकट)।
सूत्र
  • मूलानुपाती सूत्र से आणविक सूत्र: आणविक सूत्र = n × मूलानुपाती सूत्र, n = मोलर द्रव्यमान / मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान।
  • सीमान्त अभिकारक पहचान: प्रत्येक अभिकारक के मोल को स्टॉइकियोमीट्रिक गुणांक से भाग दें; सबसे छोटा भागफल वाला सीमान्त है।

अध्याय अभ्यास — प्रश्न 1.1 से 1.36 तक (हल सहित)

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके विस्तृत, चरणबद्ध हल देखें। सभी हल NCERT के परमाणु द्रव्यमानों (H=1.008, C=12.011, O=16.00, Na=23.0, Cl=35.45, Fe=55.85, Cu=63.5, S=32.00, N=14.007) पर आधारित हैं।

1.1 H₂O, CO₂, CH₄ का मोलर द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
H₂O = 2×1.008 + 16.00 = 18.016 ≈ 18.02 g/mol
CO₂ = 12.011 + 2×16.00 = 44.011 g/mol
CH₄ = 12.011 + 4×1.008 = 16.043 g/mol
1.2 Na₂SO₄ में तत्त्वों का द्रव्यमान % ज्ञात कीजिए।
M(Na₂SO₄) = 2×23.0 + 32.00 + 4×16.00 = 142.0 g/mol
Na% = (46.0/142.0)×100 = 32.39%
S% = (32.0/142.0)×100 = 22.54%
O% = (64.0/142.0)×100 = 45.07%
1.3 69.9% Fe और 30.1% O वाले ऑक्साइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिए।
Fe के मोल = 69.9/55.85 = 1.251; O के मोल = 30.1/16.00 = 1.881
अनुपात Fe:O = 1.251:1.881 ≈ 2:3 → Fe₂O₃
1.4 1 मोल C को (i) हवा में (ii) 16 g O₂ में जलाने पर CO₂ की मात्रा।
(i) पर्याप्त O₂ → 1 mol CO₂ = 44 g
(ii) 16 g O₂ = 0.5 mol → O₂ सीमान्त → 0.5 mol CO₂ = 22 g
1.5 500 mL, 0.375 M सोडियम ऐसीटेट (M=82.0245) के लिए आवश्यक द्रव्यमान।
मोल = 0.375 × 0.500 = 0.1875 mol
द्रव्यमान = 0.1875 × 82.0245 = 15.38 g
1.6 69% HNO₃ (घनत्व 1.41 g/mL) की मोलरता।
1 L विलयन का द्रव्यमान = 1000×1.41 = 1410 g; HNO₃ = 0.69×1410 = 972.9 g
HNO₃ के मोल = 972.9/63.01 = 15.44 → 15.44 M
1.7 100 g CuSO₄ से प्राप्त Cu का द्रव्यमान।
M(CuSO₄) = 63.5 + 32.0 + 64.0 = 159.5 g/mol; मोल = 100/159.5 = 0.627
Cu द्रव्यमान = 0.627 × 63.5 = 39.8 g
1.8 69.9% Fe, 30.1% O ऑक्साइड का सूत्र (प्रश्न 1.3 के समान)।
Fe₂O₃
1.9 ³⁵Cl (75.77%, 34.9689 u) व ³⁷Cl (24.23%, 36.9659 u) का औसत परमाणु द्रव्यमान।
= (0.7577×34.9689) + (0.2423×36.9659) = 26.496 + 8.960 = 35.456 u
1.10 3 mol C₂H₆ में C व H के मोल तथा अणुओं की संख्या।
C के मोल = 3×2 = 6 mol; H के मोल = 3×6 = 18 mol
अणु = 3×6.022×10²³ = 1.807×10²⁴
1.11 20 g चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) को 2 L में घोलने पर मोलरता।
M(चीनी) = 342.31 g/mol; मोल = 20/342.31 = 0.05843
मोलरता = 0.05843/2 = 0.0292 M
1.12 0.25 M, 2.5 L मेथेनॉल (घनत्व 0.793 g/mL) के लिए आयतन।
मोल = 0.25×2.5 = 0.625; द्रव्यमान = 0.625×32.04 = 20.03 g
आयतन = 20.03/0.793 = 25.25 mL
1.13 1034 g/cm² वायु-द्रव्यमान से दाब (Pa में)।
1034 g/cm² = 10340 kg/m²; बल = 10340×9.8 = 101332 N
दाब = 1.013×10⁵ Pa
1.14 द्रव्यमान का SI मात्रक एवं परिभाषा।
SI मात्रक किलोग्राम (kg) है; परिभाषा प्लांक स्थिरांक (h) के नियत मान 6.62607015×10⁻³⁴ Js पर आधारित है।
1.15 पूर्वलग्न — माइक्रो, डेका, मेगा, गिगा, फेम्टो को गुणांक से मिलाएँ।
माइक्रो=10⁻⁶, डेका=10¹, मेगा=10⁶, गिगा=10⁹, फेम्टो=10⁻¹⁵
1.16 सार्थक अंक क्या हैं?
मापन में निश्चित अंक + एक अनिश्चित (अंतिम) अंक; मापन की यथार्थता का सूचक।
1.36 5.0 g MnO₂ के साथ HCl के कितने ग्राम अभिक्रिया करेंगे? (4HCl + MnO₂ → MnCl₂ + Cl₂ + 2H₂O)
M(MnO₂) = 54.94 + 32.00 = 86.94 g/mol; मोल = 5.0/86.94 = 0.05752
HCl के मोल = 4×0.05752 = 0.2301; द्रव्यमान = 0.2301×36.46 = 8.39 g

NCERT रसायन विज्ञान, कक्षा 11, एकक 1 — "रसायन विज्ञान की कुछ मूल अवधारणाएँ" पर आधारित संपूर्ण अध्याय नोट्स। NEET प्रश्न-संग्रह आधिकारिक AIPMT/NEET प्रश्नपत्रों पर आधारित है।

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