नाभिक — सम्पूर्ण अध्याय
कक्षा-12 • भौतिकी • अध्याय 13

नाभिक

परमाणु की संरचना से लेकर बंधन-ऊर्जा, रेडियोऐक्टिवता, विखंडन और संलयन तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, त्वरित तथ्य, आरेख और सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।

E = mc² द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता
R = R₀A¹ᐟ³ नाभिकीय त्रिज्या
1u = 931.5 MeV/c²
★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित

1 भूमिका

नाभिक की खोज एवं परमाणु में उसका स्थान

पिछले अध्याय में हमने पढ़ा है कि प्रत्येक परमाणु का धनावेश घनीभूत होकर इसके केंद्र में संकेंद्रित हो जाता है और परमाणु का नाभिक बनाता है। नाभिक का कुल साइज़ परमाणु के साइज़ की तुलना में काफ़ी कम होता है। α-कणों के प्रकीर्णन संबंधी प्रयोगों ने यह प्रदर्शित किया है कि नाभिक की त्रिज्या, परमाणु की त्रिज्या की तुलना में 10⁴ गुने से भी कम होनी चाहिए।

इसका अर्थ है कि नाभिक का आयतन परमाणु के आयतन के 10⁻¹² गुने के लगभग है। दूसरे शब्दों में कहें तो परमाणु में अधिकांशत: रिक्त स्थान ही है। यदि हम परमाणु का साइज़ बढ़ाकर कक्षा के कमरे के बराबर कर दें तो नाभिक इसमें एक पिन के शीर्ष के साइज़ का दिखाई देगा। तथापि, परमाणु का लगभग संपूर्ण द्रव्यमान (99.9% से अधिक) नाभिक में ही समाहित होता है।

परमाणु की संरचना के समरूप क्या नाभिक की भी कोई संरचना है? यदि ऐसा है तो इसके अवयव क्या-क्या हैं? वे परस्पर किस प्रकार जुड़े हैं? इस अध्याय में हम इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर खोजने का प्रयास करेंगे। हम नाभिकों के विशिष्ट गुणों — जैसे उनके साइज़, द्रव्यमान तथा स्थायित्व — की चर्चा के साथ इनसे संबद्ध रेडियोऐक्टिवता, विखंडन एवं संलयन जैसी नाभिकीय परिघटनाओं की भी विवेचन करेंगे।
त्वरित तथ्य
  • नाभिक की त्रिज्या, परमाणु की त्रिज्या से 10⁴ गुने से भी कम होती है।
  • नाभिक का आयतन, परमाणु के आयतन के 10⁻¹² गुने के लगभग होता है।
  • परमाणु का 99.9% से अधिक द्रव्यमान नाभिक में ही समाहित होता है।
  • परमाणु अधिकांशतः रिक्त स्थान (खाली) है।

2 परमाणु द्रव्यमान एवं नाभिक की संरचना

द्रव्यमान मात्रक, समस्थानिक एवं न्यूट्रॉन की खोज

परमाणु का द्रव्यमान किलोग्राम की तुलना में बहुत कम होता है। उदाहरण के लिए, कार्बन के परमाणु ¹²C का द्रव्यमान 1.992647 × 10⁻²⁶ kg है। इतनी छोटी राशियों को मापने के लिए किलोग्राम बहुत सुविधाजनक मात्रक नहीं है। अतः परमाणु द्रव्यमानों को व्यक्त करने के लिए द्रव्यमान का एक अन्य मात्रक — परमाणु द्रव्यमान मात्रक (u) — प्रस्तुत किया गया। इसको ¹²C परमाणु के द्रव्यमान के बारहवें (1/12ᵗʰ) भाग से व्यक्त करते हैं।

परमाणु द्रव्यमान मात्रक की परिभाषा1u = (¹²C परमाणु का द्रव्यमान)/12 = 1.660539 × 10⁻²⁷ kg

परमाणु द्रव्यमान मात्रक (u) में व्यक्त करने पर विभिन्न तत्वों के परमाणु द्रव्यमान, हाइड्रोजन परमाणु के द्रव्यमान के पूर्ण गुणज के निकट पाए जाते हैं (परंतु क्लोरीन जैसे कई प्रभावशाली अपवाद भी हैं — इसका परमाणु द्रव्यमान 35.46 u है)।

समस्थानिक (Isotopes)

परमाणु द्रव्यमानों के मापन से पता चलता है कि एक ही तत्व के विभिन्न प्रकार के ऐसे परमाणुओं का अस्तित्व है जिनके रासायनिक गुण तो समान होते हैं पर इनके द्रव्यमानों में अंतर होता है। एक ही तत्व की ऐसी परमाणु प्रजातियाँ जिनके द्रव्यमानों में अंतर होता है, समस्थानिक (isotope) कहलाती हैं (यूनानी शब्द आइसोटॉप का अर्थ हिंदी में समस्थानिक है — तत्वों की आवर्त सारणी में ये सभी एक ही स्थान पर पाए जाते हैं)।

उदाहरण — क्लोरीन: क्लोरीन के दो समस्थानिक हैं जिनके द्रव्यमान क्रमशः 34.98 u एवं 36.98 u हैं। इनकी सापेक्ष बहुलता क्रमशः 75.4% एवं 24.6% है। प्राकृतिक क्लोरीन परमाणु का द्रव्यमान इन समस्थानिकों का भारित-औसत है = (75.4×34.98 + 24.6×36.98)/100 = 35.47 u, जो क्लोरीन का ज्ञात परमाणु द्रव्यमान है।

हाइड्रोजन के समस्थानिक

सबसे हलके तत्व हाइड्रोजन के भी तीन समस्थानिक हैं जिनके द्रव्यमान 1.0078 u, 2.0141 u एवं 3.0160 u हैं। सबसे हल्के हाइड्रोजन परमाणु (सापेक्ष बहुलता 99.985%) का नाभिक, प्रोटॉन कहलाता है।

प्रोटॉन द्रव्यमानmp = 1.00727 u = 1.67262 × 10⁻²⁷ kg

हाइड्रोजन के दूसरे दो समस्थानिक ड्यूटीरियम एवं ट्राइटियम कहलाते हैं। ट्राइटियम नाभिक अस्थायी होने के कारण प्रकृति में नहीं पाए जाते और कृत्रिम विधियों द्वारा प्रयोगशालाओं में निर्मित किए जाते हैं।

नाभिक में धन आवेश प्रोटॉनों का ही होता है। प्रोटॉन पर एकांक मूल आवेश होता है और यह स्थायी कण है। किसी परमाणु के नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या, तथ्यत: इसका परमाणु क्रमांक (Z) होती है, क्योंकि परमाणु विद्युतीय रूप से उदासीन होता है (नाभिक का आवेश +Ze, बाहरी इलेक्ट्रॉनों का आवेश −Ze)।

न्यूट्रॉन की खोज

चूँकि ड्यूटीरियम एवं ट्राइटियम हाइड्रोजन के ही समस्थानिक हैं, इनमें से प्रत्येक के नाभिक में एक प्रोटॉन होना चाहिए। लेकिन हाइड्रोजन, ड्यूटीरियम एवं ट्राइटियम के नाभिकों के द्रव्यमानों में अनुपात 1:2:3 है। इसलिए इनमें प्रोटॉन के अतिरिक्त कुछ उदासीन द्रव्य भी होना चाहिए।

इस परिकल्पना की पुष्टि 1932 में जेम्स चैडविक ने की, जिन्होंने देखा कि जब बेरिलियम नाभिकों पर ऐल्फ़ा कणों की बौछार की जाती है, तो इनसे कुछ उदासीन विकिरण उत्सर्जित होते हैं। ऊर्जा एवं संवेग संरक्षण के नियमों का प्रयोग करके पता चला कि यह उदासीन विकिरण फ़ोटॉनों का बना नहीं हो सकता — इसमें एक नए प्रकार के उदासीन कण होते हैं जिन्हें न्यूट्रॉन कहते हैं।

न्यूट्रॉन द्रव्यमानmn = 1.00866 u = 1.6749 × 10⁻²⁷ kg
न्यूट्रॉन की खोज के लिए चैडविक को 1935 का नोबेल पुरस्कार मिला। एक मुक्त प्रोटॉन के विपरीत, एक मुक्त न्यूट्रॉन अस्थायी होता है — यह एक प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन एवं एक प्रतिन्यूट्रिनो के रूप में क्षयित हो जाता है (औसत आयु ~1000 s)। तथापि, नाभिक के भीतर यह स्थायी होता है।

नाभिक की संरचना — संकेत चिह्न

प्रतीकनामअर्थ
Zपरमाणु क्रमांकप्रोटॉनों की संख्या
Nन्यूट्रॉन संख्यान्यूट्रॉनों की संख्या
Aद्रव्यमान संख्याA = Z + N (न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों की कुल संख्या)

प्रोटॉन एवं न्यूट्रॉन के लिए न्यूक्लिऑन शब्द का उपयोग किया जाता है — अतः किसी परमाणु में न्यूक्लिऑन संख्या उसकी द्रव्यमान संख्या A होती है। किसी नाभिकीय प्रजाति को संकेत चिह्न ᴬZX द्वारा प्रदर्शित करते हैं, जहाँ X उस प्रजाति का रासायनिक चिह्न है। उदाहरण: स्वर्ण-नाभिक को ¹⁹⁷₇₉Au द्वारा व्यक्त करते हैं — इसमें 197 न्यूक्लिऑन होते हैं जिनमें 79 प्रोटॉन एवं 118 न्यूट्रॉन होते हैं।

समभारिक व समन्यूट्रॉनिक

पदपरिभाषाउदाहरण
समस्थानिक (Isotopes)समान Z (प्रोटॉन संख्या), भिन्न N¹H, ²H, ³H
समभारिक (Isobars)समान द्रव्यमान संख्या A³₁H एवं ³₂He
समन्यूट्रॉनिक (Isotones)समान न्यूट्रॉन संख्या N, भिन्न Z¹⁹⁸₈₀Hg एवं ¹⁹⁷₇₉Au
NEET फोकस
  • 1u = 1.660539 × 10⁻²⁷ kg (¹²C परमाणु द्रव्यमान का 1/12वाँ भाग)।
  • समस्थानिक: समान Z, भिन्न द्रव्यमान (N भिन्न) — रासायनिक गुण समान।
  • समभारिक: समान द्रव्यमान संख्या A।
  • समन्यूट्रॉनिक: समान न्यूट्रॉन संख्या N।
  • प्रोटॉन द्रव्यमान m_p = 1.00727 u; न्यूट्रॉन द्रव्यमान m_n = 1.00866 u।
  • जेम्स चैडविक ने 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की; उन्हें 1935 का नोबेल पुरस्कार मिला।
  • मुक्त न्यूट्रॉन अस्थायी है (औसत आयु ~1000 s); नाभिक के भीतर यह स्थायी है।
  • नाभिक में केवल प्रोटॉन धन आवेश रखते हैं; इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं होते।
  • नाभिकीय संकेत चिह्न: ᴬZX (उदा. सोना: ¹⁹⁷₇₉Au)।

3 नाभिक का साइज़

रदरफोर्ड प्रकीर्णन एवं नाभिकीय घनत्व

रदरफोर्ड वह अग्रणी वैज्ञानिक थे जिन्होंने परमाणु नाभिक के अस्तित्व की परिकल्पना एवं स्थापना की। रदरफोर्ड के सुझाव पर गीगर एवं मार्सडन ने स्वर्ण के वर्क पर ऐल्फ़ा कणों के प्रकीर्णन से संबंधित प्रसिद्ध प्रयोग किया। उनके प्रयोगों से यह स्पष्ट हुआ कि 5.5 MeV गतिज ऊर्जा के ऐल्फ़ा कणों की स्वर्ण नाभिकों के निकटस्थ पहुँच की दूरी लगभग 4.0 × 10⁻¹⁴ m है।

ऐसे प्रकीर्णन प्रयोग करके जिनमें α-कणों के स्थान पर तीव्र गति इलेक्ट्रॉनों की विभिन्न तत्वों के ऊपर बौछार की गई हो, इन तत्वों के नाभिकीय साइज़ अत्यंत परिशुद्धता से ज्ञात किए गए। यह पाया गया कि A द्रव्यमान संख्या के नाभिक की त्रिज्या है:

नाभिकीय त्रिज्या का सूत्रR = R₀ A1/3   जहाँ R₀ = 1.2 × 10⁻¹⁵ m (= 1.2 fm; 1 fm = 10⁻¹⁵ m)

इसका अर्थ है कि नाभिक का आयतन (जो R³ के अनुक्रमानुपाती है) द्रव्यमान संख्या A के अनुक्रमानुपाती होता है। अतः नाभिक का घनत्व नियत होता है — सभी नाभिकों के लिए इसका मान A पर निर्भर नहीं करता। विभिन्न नाभिक इस नियत घनत्व के द्रव की बूँद की तरह होते हैं।

नाभिकीय द्रव्य का घनत्व: लगभग 2.3 × 10¹⁷ kg m⁻³ — सामान्य पदार्थों (जैसे जल का घनत्व केवल 10³ kg m⁻³) की तुलना में यह मान अत्यंत अधिक है। न्यूट्रॉन तारे (खगोल भौतिकीय पिंड) में पदार्थ का घनत्व इस घनत्व के साथ तुलनीय है — इन तारों में द्रव्य इस सीमा तक संपीडित हो गया है कि न्यूट्रॉन तारे स्वयं एक बड़े नाभिक की तरह व्यवहार करते हैं।
द्रव्यमान संख्या (A) → नाभिकीय त्रिज्या R →
चित्र 13.1 — R = R₀A¹ᐟ³ के अनुसार नाभिकीय त्रिज्या का द्रव्यमान संख्या के साथ परिवर्तन।
उदाहरण 13.1 (हल सहित): लोहे के नाभिक का द्रव्यमान 55.85u एवं A=56 है। नाभिकीय घनत्व = द्रव्यमान/आयतन = (55.85×1.66×10⁻²⁷)/[(4π/3)(1.2×10⁻¹⁵)³×56] ≈ 2.29 × 10¹⁷ kg m⁻³।
NEET फोकस
  • नाभिकीय त्रिज्या सूत्र: R = R₀A^(1/3), जहाँ R₀ = 1.2 fm।
  • नाभिकीय घनत्व नियत (लगभग 2.3×10¹⁷ kg/m³) होता है, A पर निर्भर नहीं करता।
  • ऐल्फ़ा कणों की स्वर्ण नाभिक से निकटस्थ पहुँच की दूरी ≈ 4.0×10⁻¹⁴ m (5.5 MeV ऊर्जा पर)।
  • नाभिक का घनत्व सामान्य द्रव्य के घनत्व से लगभग 10¹⁴ गुना अधिक है।
  • न्यूट्रॉन तारों का घनत्व नाभिकीय द्रव्य के घनत्व से तुलनीय होता है।

4 द्रव्यमान-ऊर्जा तथा नाभिकीय बंधन-ऊर्जा

आइंस्टाइन का द्रव्यमान-ऊर्जा सिद्धांत एवं द्रव्यमान क्षति

द्रव्यमान-ऊर्जा

आइंस्टाइन ने अपने विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत के आधार पर यह दर्शाया कि द्रव्यमान ऊर्जा का ही एक दूसरा रूप है। विशिष्ट आपेक्षिकता सिद्धांत से पहले यह माना जाता था कि किसी अभिक्रिया में द्रव्यमान एवं ऊर्जा अलग-अलग संरक्षित होते हैं। परंतु आइंस्टाइन ने यह दर्शाया कि द्रव्यमान केवल ऊर्जा का दूसरा रूप है और हम द्रव्यमान-ऊर्जा को ऊर्जा के अन्य रूपों में परिवर्तित कर सकते हैं तथा विपरीत प्रक्रम अर्थात ऊर्जा को द्रव्यमान में रूपांतरित करना भी संभव है।

द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता संबंधE = mc²

यहाँ E, द्रव्यमान m के समतुल्य ऊर्जा है एवं c निर्वात में प्रकाश का वेग है जिसका सन्निकट मान 3×10⁸ m s⁻¹ है। आइंस्टाइन के द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध की प्रायोगिक पुष्टि, न्यूक्लियॉनों, नाभिकों, इलेक्ट्रॉनों एवं अन्य हाल ही में खोजे गए कणों के बीच होने वाली नाभिकीय अभिक्रियाओं के अध्ययन में हो चुकी है।

उदाहरण 13.2: 1 g पदार्थ के समतुल्य ऊर्जा E = 10⁻³ × (3×10⁸)² J = 9 × 10¹³ J। इससे स्पष्ट है कि यदि एक ग्राम पदार्थ को भी ऊर्जा में रूपांतरित किया जाए तो इससे ऊर्जा की विशाल मात्रा मुक्त होती है।

नाभिकीय बंधन-ऊर्जा

नाभिक न्यूट्रॉन एवं प्रोटॉन का बना है। अतः यह अपेक्षित है कि नाभिक का द्रव्यमान, इसमें विद्यमान न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों के द्रव्यमानों के कुल योग Σm के बराबर होगा। लेकिन, नाभिकीय द्रव्यमान M, सदैव Σm से कम पाया जाता है।

द्रव्यमान क्षतिΔM = [Z mp + (A−Z) mn] − M

द्रव्यमान-क्षति का अर्थ क्या है? यहीं पर आइंस्टाइन का द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता सिद्धांत अपनी भूमिका निभाता है। यदि आप नाभिक को उसके घटक प्रोटॉनों एवं न्यूट्रॉनों में विखंडित करना चाहें तो आपको यह अतिरिक्त ऊर्जा, ΔM c², इस नाभिक को प्रदान करनी होगी। इसके लिए आवश्यक यह ऊर्जा Eb, द्रव्यमान क्षति से निम्नलिखित समीकरण द्वारा संबंधित होती है:

नाभिकीय बंधन-ऊर्जाEb = ΔM c²
उदाहरण 13.3 (महत्वपूर्ण परिणाम): 1u के समतुल्य ऊर्जा = 1.4924×10⁻¹⁰ J = 931.5 MeV। अर्थात, 1u = 931.5 MeV/c²। ¹⁶₈O के लिए ΔM = 0.13691 u = 127.5 MeV/c² — इस नाभिक को इसके घटकों में विभाजित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा।

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा (Ebn)

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जाEbn = Eb / A

प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा को ऐसा मान सकते हैं कि यह किसी नाभिक को इसके न्यूक्लिऑनों में पृथक्कृत करने के लिए आवश्यक औसत ऊर्जा है।

द्रव्यमान संख्या (A) → प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा (MeV) → Fe-56 (शिखर ≈8.75 MeV) U-238 (≈7.6 MeV) हलके नाभिक — कम
चित्र 13.2 — प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा का द्रव्यमान संख्या A के साथ परिवर्तन (30 < A < 170 में लगभग नियत)।

बंधन-ऊर्जा वक्र से निष्कर्ष

#लक्षणव्याख्या
(i)मध्यवर्ती A (30<A<170) में Ebn लगभग नियत (~8.0 MeV)A=56 पर अधिकतम ≈8.75 MeV, A=238 पर ≈7.6 MeV
(ii)हलके (A<30) एवं भारी (A>170) नाभिकों में Ebn कममध्यवर्ती नाभिकों की तुलना में अपेक्षाकृत कम बंधन
(iii)नाभिकीय बल लघु-परासी होते हैं (संतृप्ति गुण)प्रत्येक न्यूक्लिऑन केवल अपने पास-पड़ोस के न्यूक्लिऑनों से प्रभावित होता है
(iv)भारी नाभिक का विखंडन (जैसे A=240 → दो A=120)ऊर्जा विमुक्त होती है (Ebn बढ़ता है)
(v)हलके नाभिकों (A≤10) का संलयनऊर्जा विमुक्त होती है — सूर्य की ऊर्जा का स्रोत
NEET फोकस
  • E = mc² — आइंस्टाइन का द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता संबंध।
  • द्रव्यमान क्षति ΔM = [Zm_p + (A−Z)m_n] − M (हमेशा धनात्मक)।
  • बंधन-ऊर्जा E_b = ΔM c²; प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा E_bn = E_b/A।
  • 1u = 931.5 MeV/c² — यह रूपांतरण कारक अभ्यास हल करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा 30<A<170 के लिए लगभग नियत (~8 MeV), A=56 (लोहा) पर अधिकतम ≈8.75 MeV।
  • हलके व भारी दोनों प्रकार के नाभिकों में E_bn मध्यवर्ती नाभिकों से कम होती है।

5 नाभिकीय बल

लघु-परासी प्रबल आकर्षण बल

वह बल जो परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की गति नियंत्रित करता है हमारा सुपरिचित कूलॉम बल है। औसत द्रव्यमान के नाभिक के लिए प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा लगभग 8 MeV है जो परमाणु की बंधन-ऊर्जा की तुलना में बहुत अधिक है। अतः नाभिक में कणों को परस्पर बाँधे रखने के लिए एक भिन्न प्रकार के शक्तिशाली आकर्षण बल — नाभिकीय बल — की आवश्यकता है।

r₀ ≈ 0.8 fm दूरी r (fm) → स्थितिज ऊर्जा (MeV) → तीव्र प्रतिकर्षण आकर्षण क्षेत्र
चित्र 13.3 — नाभिकीय युग्म की स्थितिज ऊर्जा दूरी के फलन के रूप में; r₀(≈0.8 fm) से अधिक दूरी पर आकर्षण, कम दूरी पर तीव्र प्रतिकर्षण।

नाभिकीय बलों के अभिलक्षण

#अभिलक्षण
(i)नाभिकीय बल, कूलॉम बल एवं गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में अत्यधिक शक्तिशाली होता है (कूलॉम प्रतिकर्षण पर आधिपत्य करने में सक्षम)।
(ii)न्यूक्लिऑनों के बीच दूरी बढ़ाकर कुछ फेम्टोमीटर से अधिक करने पर नाभिकीय बल तेज़ी से घटकर शून्य हो जाता है — यह लघु-परासी (short-range) बल है।
(iii)न्यूट्रॉन-न्यूट्रॉन, न्यूट्रॉन-प्रोटॉन एवं प्रोटॉन-प्रोटॉन के बीच नाभिकीय बल लगभग समान परिमाण के होते हैं — यह आवेश-स्वतंत्र होता है।
(iv)लगभग 0.8 fm (r₀) की दूरी पर स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम (सर्वाधिक आकर्षण)। r₀ से कम दूरी पर तीव्र प्रतिकर्षण बल कार्य करता है।
कूलॉम के नियम अथवा न्यूटन के गुरुत्वीय नियम की भाँति नाभिकीय बलों का कोई सरल गणितीय रूप नहीं है।
NEET फोकस
  • नाभिकीय बल कूलॉम बल एवं गुरुत्वाकर्षण बल दोनों से अत्यधिक शक्तिशाली होता है।
  • नाभिकीय बल लघु-परासी (short-range) होता है — कुछ फेम्टोमीटर से अधिक दूरी पर शून्य हो जाता है।
  • नाभिकीय बल आवेश-स्वतंत्र है: n-n, n-p, p-p बल लगभग समान परिमाण के हैं।
  • r₀ ≈ 0.8 fm पर स्थितिज ऊर्जा न्यूनतम (सर्वाधिक आकर्षण बल); इससे कम दूरी पर प्रबल प्रतिकर्षण।
  • नाभिकीय बलों का कोई सरल गणितीय रूप नहीं है।
  • नाभिकीय बलों की संतृप्ति गुण के कारण प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा नियत रहती है।

6 रेडियोऐक्टिवता

बैकेरल की खोज व क्षय के प्रकार

रेडियोऐक्टिवता की खोज ए.एच. बैकेरल ने सन् 1896 में संयोगवश की। यौगिकों को दृश्य प्रकाश से विकीर्णित करके उनकी प्रतिदीप्ति एवं स्फुरदीप्ति का अध्ययन करते हुए बैकेरल ने एक रोचक परिघटना देखी। यूरेनियम-पोटैशियम सल्फेट के कुछ टुकड़ों पर दृश्य प्रकाश डालने के बाद उसने उनको काले कागज़ में लपेट दिया। इस पैकेट और फ़ोटोग्राफ़िक प्लेट के बीच एक चाँदी का टुकड़ा रखा। कई घंटे तक रखने के बाद जब फ़ोटोग्राफ़िक प्लेट को डेवेलप किया गया तो यह पाया गया कि यह प्लेट काली पड़ चुकी थी — यह किसी ऐसी चीज़ के कारण हुआ होगा जो यौगिक से उत्सर्जित हुई होगी तथा काले कागज़ और चाँदी दोनों को भेद कर फ़ोटोग्राफ़िक प्लेट तक पहुँच गई होगी।

बाद में किए गए प्रयोगों ने दर्शाया कि रेडियोऐक्टिवता एक नाभिकीय परिघटना है जिसमें अस्थायी नाभिक क्षयित होता है। इसे रेडियोऐक्टिव क्षय कहते हैं।

प्रकृति में तीन प्रकार के रेडियोऐक्टिव क्षय

क्षय प्रकारउत्सर्जित कण/विकिरणविवरण
α-क्षयहीलियम नाभिक (⁴₂He)α-कण उत्सर्जित होते हैं
β-क्षयइलेक्ट्रॉन अथवा पॉज़ीट्रॉनपॉज़ीट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के बराबर होता है, पर आवेश ठीक इलेक्ट्रॉन के विपरीत
γ-क्षयउच्च ऊर्जा फ़ोटॉनऊर्जा 100 keV अथवा अधिक
अस्थायी नाभिक α-क्षय → ⁴₂He उत्सर्जन β-क्षय → e⁻ / पॉज़ीट्रॉन उत्सर्जन γ-क्षय → उच्च ऊर्जा फ़ोटॉन उत्सर्जन
चित्र 13.4 — रेडियोऐक्टिव क्षय के तीन प्रकार: α, β तथा γ-क्षय।
MC
मैरी स्क्लाडोवका क्यूरी (1867–1934) पोलिश-फ्रांसीसी भौतिकविद् एवं रसायनज्ञ

1896 में हेनरी बैकेरल द्वारा रेडियोऐक्टिवता की खोज ने मैरी और उनके पति पियरे क्यूरी को अनुसंधानों के लिए प्रेरित किया, जिसके फलस्वरूप रेडियम एवं पोलोनियम तत्वों का पृथक्करण संभव हुआ। वह प्रथम वैज्ञानिक थीं जिन्हें दो नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुए: पहला 1903 में भौतिकी के लिए और दूसरा 1911 में रसायनविज्ञान के लिए।

NEET फोकस
  • ए.एच. बैकेरल ने सन् 1896 में रेडियोऐक्टिवता की खोज संयोगवश की।
  • रेडियोऐक्टिवता एक नाभिकीय परिघटना है — अस्थायी नाभिक क्षयित होते हैं।
  • तीन प्रकार के क्षय: α-क्षय (हीलियम नाभिक), β-क्षय (इलेक्ट्रॉन/पॉज़ीट्रॉन), γ-क्षय (फ़ोटॉन)।
  • पॉज़ीट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के बराबर, आवेश विपरीत — यह प्रतिकण (antiparticle) है।
  • मैरी क्यूरी को 1903 (भौतिकी) व 1911 (रसायन) — दो नोबेल पुरस्कार मिले।
  • इलेक्ट्रॉन-पॉज़ीट्रॉन एक कण-प्रतिकण युग्म है; एक साथ आने पर विलोपन (annihilation) करके γ-किरण फ़ोटॉन के रूप में ऊर्जा प्रदान करते हैं।

7 नाभिकीय ऊर्जा

विखंडन एवं संलयन

बंधन-ऊर्जा वक्र में A=30 एवं A=170 के बीच एक लंबा सपाट भाग है, जहाँ प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा लगभग अचर (8.0 MeV) है। हलके नाभिकों (A<30) एवं भारी नाभिकों (A>170) दोनों के भाग में प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा 8.0 MeV से कम है। यदि बंधन-ऊर्जा अधिक हो तो उस बंधित निकाय (जैसे नाभिक) का कुल द्रव्यमान कम होगा। परिणामस्वरूप यदि कोई कम कुल बंधन-ऊर्जा वाला नाभिक किसी अधिक बंधन-ऊर्जा वाले नाभिक में रूपांतरित हो तो कुल ऊर्जा विमुक्त होगी।

ऊर्जा तुलना: कोयले एवं पेट्रोलियम जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों में ऊष्माक्षेपी रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं जिनमें विमुक्त ऊर्जा eV की कोटि की होती है। किसी नाभिकीय प्रक्रिया में, MeV कोटि की ऊर्जा विमुक्त होती है। अतः द्रव्य की समान मात्रा के लिए, रासायनिक स्रोतों की अपेक्षा नाभिकीय स्रोत लाखों गुना अधिक ऊर्जा विमुक्त करते हैं। उदाहरण के लिए, 1 kg यूरेनियम के विखंडन से लगभग 10¹⁴ J ऊर्जा प्राप्त होती है, जबकि 1 kg कोयले के दहन से केवल 10⁷ J ऊर्जा प्राप्त होती है।

विखंडन

विखंडन एक महत्वपूर्ण न्यूट्रॉन-प्रेरक नाभिकीय प्रक्रिया है। जब किसी यूरेनियम समस्थानिक ²³⁵₉₂U पर न्यूट्रॉन से प्रहार कराया जाता है तो वह दो माध्यमिक द्रव्यमान वाले नाभिकीय खंडों में विखंडित हो जाता है:

विखंडन अभिक्रिया का उदाहरण¹₀n + ²³⁵₉₂U → ²³⁶₉₂U → ¹⁴⁴₅₆Ba + ⁸⁹₃₆Kr + 3¹₀n

इसी क्रिया में माध्यमिक द्रव्यमान वाले नाभिकों के भिन्न युग्म भी उत्पन्न हो सकते हैं (जैसे Sb+Nb या Xe+Sr)। ये विखंडित उत्पाद रेडियोऐक्टिव नाभिक होते हैं और इनमें तब तक β-क्षय का क्रम चलता रहता है जब तक कि अंत में स्थायी खंड प्राप्त न हो जाएँ।

यूरेनियम जैसे नाभिक की विखंडन अभिक्रिया में निर्मुक्त ऊर्जा (Q-मान) प्रति विखंडित नाभिक 200 MeV की कोटि की होती है — इसका आकलन बंधन-ऊर्जा वक्र से प्राप्त Ebn मानों के अंतर द्वारा किया जा सकता है (उदाहरणतः A=240 का नाभिक A=120 के दो खंडों में विखंडित होने पर लगभग 216 MeV ऊर्जा मुक्त होती है)।

विखंडन की घटनाओं की विघटन ऊर्जा पहले क्षय-उत्पादों तथा न्यूट्रॉनों की गतिज ऊर्जा के रूप में संलग्नित होती है, अंत में यह आसपास के द्रव्य को हस्तांतरित होकर ऊष्मा के रूप में परिणित हो जाती है। नाभिकीय रिएक्टरों में नाभिकीय विखंडन ऊर्जा से विद्युत उत्पादन होता है। परमाणु बम में विमुक्त होने वाली बृहत ऊर्जा अनियंत्रित नाभिकीय विखंडन से ही उत्पन्न होती है।

नाभिकीय संलयन-तारों में ऊर्जा जनन

बंधन-ऊर्जा वक्र यह भी दर्शाता है कि यदि दो हलके नाभिक मिलकर एक अपेक्षाकृत बड़ा नाभिक बनाएँ तो ऊर्जा निर्मुक्त होती है — इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते हैं।

प्रोटॉन-प्रोटॉन (p–p) चक्र — सूर्य में ऊर्जा जनन ¹₁H + ¹₁H → ²₁H + e⁺ + ν + 0.42 MeV
e⁺ + e⁻ → γ + γ + 1.02 MeV
²₁H + ¹₁H → ³₂He + γ + 5.49 MeV
³₂He + ³₂He → ⁴₂He + ¹₁H + ¹₁H + 12.86 MeV

चौथी अभिक्रिया होने के लिए यह आवश्यक है कि पहली तीन अभिक्रियाएँ दो-दो बार हों। कुल मिलाकर: चार हाइड्रोजन परमाणु मिलकर एक ⁴₂He परमाणु बनाते हैं और इस प्रक्रिया में 26.7 MeV ऊर्जा निर्मुक्त होती है।

संलयन के लिए दो नाभिकों का इतने अधिक पास आना आवश्यक है जिससे कि उनके बीच आकर्षित लघु-परासीय नाभिकीय बल कार्य कर सके। चूँकि दोनों नाभिक धनात्मक आवेशित हैं, अतः उनके बीच कूलॉम प्रतिकर्षण होगा। इस कूलॉम अवरोध को पार करने के लिए समुचित ऊर्जा आवश्यक है — दो प्रोटॉनों के लिए यह अवरोधतुंगता (barrier height) लगभग 400 keV है।

कूलॉम अवरोध की ऊँचाईV = k e² / r   (k = 1/4πε₀ = 9×10⁹ N m²/C²)

इस अवरोध को पार करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा किसी प्रोटॉन गैस में 3×10⁹ K ताप पर प्राप्त हो सकती है (सूत्र (3/2)kT = K में K=400 keV रखने पर)। ऊर्जा की उपयोगी मात्रा उत्पन्न करने के लिए नाभिकीय संलयन स्थूल-द्रव्य में होना चाहिए — यह प्रक्रिया ताप नाभिकीय संलयन कहलाती है।

तारों के अंतःपटल में निर्गत ऊर्जा का स्रोत ताप नाभिकीय संलयन है। सूर्य के क्रोड का ताप लगभग 1.5×10⁷ K है, जो औसत ऊर्जा के कणों के संलयन के लिए आवश्यक अनुमानित ताप से काफ़ी कम है। स्पष्टत: सूर्य में होने वाली संलयन प्रक्रियाओं में औसत ऊर्जाओं से बहुत अधिक ऊर्जा वाले प्रोटॉन भाग लेते हैं।

सूर्य की आयु लगभग 5×10⁹ वर्ष है तथा यह अनुमान लगाया जाता है कि सूर्य को और 5 अरब वर्षों तक बनाये रखने के लिए आवश्यक हाइड्रोजन उपलब्ध है। इसके पश्चात हाइड्रोजन का जलना रुक जाएगा तथा सूर्य ठंडा होने लगेगा — इससे सूर्य अपने गुरुत्व के कारण संकुचित होगा, क्रोड का ताप बढ़ेगा, और सूर्य का बाहरी आवरण फैलने लगेगा जिससे सूर्य एक लाल दानव (red giant) में परिवर्तित हो जाएगा।

नियंत्रित ताप नाभिकीय संलयन

किसी तारे में होने वाली ताप-नाभिकीय प्रक्रिया का रूपांतरण एक ताप-नाभिकीय युक्ति से किया जाता है। किसी नियंत्रित संलयन रिएक्टर का उद्देश्य नाभिकीय ईंधन को 10⁸K ताप के परास में गरम कर स्थायी शक्ति जनन करना होता है। इस ताप पर ईंधन धनात्मक आयनों तथा इलेक्ट्रॉनों (प्लाज़्मा) का मिश्रण होता है। चूँकि इस ताप को बनाये रखने के लिए कोई वस्तु उपलब्ध नहीं है, अतः इस ताप को बनाये रखना एक चुनौती है। भारत सहित विश्व के कई देश इस संबंध में युक्तियों के विकास में प्रयासरत हैं।

NEET फोकस
  • 1 kg यूरेनियम के विखंडन से ≈10¹⁴ J ऊर्जा; 1 kg कोयले के दहन से ≈10⁷ J ऊर्जा।
  • ²³⁵U पर न्यूट्रॉन प्रहार से विखंडन होता है — यह न्यूट्रॉन-प्रेरक प्रक्रिया है।
  • यूरेनियम विखंडन में प्रति विखंडित नाभिक ऊर्जा (Q-मान) लगभग 200 MeV की कोटि की होती है।
  • विखंडित उत्पाद रेडियोऐक्टिव होते हैं और β-क्षय के माध्यम से स्थायी अवस्था तक पहुँचते हैं।
  • संलयन में हलके नाभिक मिलकर बड़ा नाभिक बनाते हैं — यह भी ऊर्जा विमुक्त करने वाली प्रक्रिया है।
  • सूर्य व सभी तारों में हाइड्रोजन नाभिकों का हीलियम नाभिकों में संलयन ऊर्जा का स्रोत है (p-p चक्र)।
  • 4 हाइड्रोजन परमाणु मिलकर 1 हीलियम परमाणु बनाते हैं; 26.7 MeV ऊर्जा निर्मुक्त होती है।
  • संलयन के लिए कूलॉम अवरोध पार करना आवश्यक है — दो प्रोटॉनों के लिए अवरोधतुंगता ≈400 keV।
  • ताप नाभिकीय संलयन के लिए आवश्यक ताप ≈3×10⁹ K (प्रोटॉन गैस में)।
  • सूर्य के क्रोड का ताप ≈1.5×10⁷ K है; सूर्य की आयु ≈5×10⁹ वर्ष है।
  • नियंत्रित संलयन रिएक्टर में ईंधन को ≈10⁸ K तक गरम करना पड़ता है (प्लाज़्मा अवस्था)।

✓ सारांश व सूत्र-सूची

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

परमाणु द्रव्यमान मात्रक

1u = 1.660539 × 10⁻²⁷ kg = 931.5 MeV/c²

नाभिकीय त्रिज्या

R = R₀A¹ᐟ³, R₀ = 1.2 fm

नाभिकीय घनत्व

नियत, ≈ 2.3 × 10¹⁷ kg/m³

द्रव्यमान-ऊर्जा

E = mc²; 1u = 931.5 MeV/c²

बंधन-ऊर्जा

E_b = ΔM c²; E_bn = E_b/A

नाभिकीय बल

प्रबल, लघु-परासी, आवेश-स्वतंत्र; r₀ ≈ 0.8 fm

रेडियोऐक्टिवता

तीन प्रकार: α (He-नाभिक), β (e⁻/पॉज़ीट्रॉन), γ (फ़ोटॉन)

विखंडन व संलयन

विखंडन ~200 MeV/नाभिक; संलयन (p-p चक्र) ~26.7 MeV प्रति चक्र

ऊर्जा तुलना

नाभिकीय स्रोत रासायनिक स्रोतों से लाखों गुना अधिक ऊर्जा देते हैं

📊 भौतिक राशियाँ तालिका

प्रतीक, मात्रक एवं सूत्र

भौतिक राशिप्रतीकसूत्रमात्रक / मान
परमाणु द्रव्यमान इकाईu= ¹²C परमाणु द्रव्यमान/121.660539×10⁻²⁷ kg = 931.5 MeV/c²
परमाणु क्रमांकZ= प्रोटॉनों की संख्या—
न्यूट्रॉन संख्याN= न्यूट्रॉनों की संख्या—
द्रव्यमान संख्याAA = Z + N—
नाभिकीय त्रिज्याRR = R₀A^(1/3)R₀ = 1.2 fm
द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यताEE = mc²J
द्रव्यमान क्षतिΔMΔM = [Zmp+(A−Z)mn] − Mu
बंधन-ऊर्जाEbEb = ΔM c²MeV
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जाEbnEbn = Eb/AMeV
नाभिकीय अभिक्रिया का Q-मानQQ = [mA+mb−mC−md]c²MeV
कूलॉम अवरोध ऊँचाईVV = ke²/rJ या eV
नाभिकीय घनत्वρρ = द्रव्यमान/[(4/3)πR³]kg/m³ (≈2.3×10¹⁷)

प्रश्न हल करने हेतु उपयोगी नियतांक

नियतांकमान
e1.6×10⁻¹⁹ C
N (आवोगाद्रो संख्या)6.023×10²³ प्रति मोल
1/(4πε₀) = k9×10⁹ N m²/C²
बोल्ट्ज़मान स्थिरांक k1.381×10⁻²³ J/K
1 MeV1.6×10⁻¹³ J
1 u931.5 MeV/c²
1 वर्ष3.154×10⁷ s
mH1.007825 u
mn1.008665 u
m(⁴₂He)4.002603 u
me0.000548 u

★ NEET फैक्ट-शीट

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

अवधारणाप्रमुख तथ्य
परमाणु द्रव्यमान इकाई1u = 931.5 MeV/c²
प्रोटॉन/न्यूट्रॉन द्रव्यमानm_p = 1.00727 u; m_n = 1.00866 u
न्यूट्रॉन की खोजचैडविक (1932), नोबेल 1935
समस्थानिक/समभारिक/समन्यूट्रॉनिकसमान Z / समान A / समान N
नाभिकीय त्रिज्याR = R₀A¹ᐟ³, R₀ = 1.2 fm
नाभिकीय घनत्वलगभग 2.3 × 10¹⁷ kg/m³ (नियत)
द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यताE = mc²
द्रव्यमान क्षतिΔM = [Zm_p + (A−Z)m_n] − M
बंधन-ऊर्जाE_b = ΔM c²; 1u = 931.5 MeV
प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा30<A<170 में लगभग 8 MeV; Fe-56 पर अधिकतम ≈8.75 MeV
नाभिकीय बलप्रबल, आकर्षक, लघु-परासी, आवेश-स्वतंत्र
नाभिकीय बल की परासr₀ ≈ 0.8 fm पर अधिकतम आकर्षण
रेडियोऐक्टिवता की खोजबैकेरल, 1896
α-क्षयA में 4 की कमी, Z में 2 की कमी
β-क्षयZ में ±1 परिवर्तन (A अपरिवर्तित)
γ-क्षयA व Z दोनों अपरिवर्तित (केवल ऊर्जा)
विखंडनभारी नाभिक का टूटना; ~200 MeV प्रति विखंडन
संलयनहलके नाभिकों का जुड़ना; सूर्य का ऊर्जा स्रोत
p-p चक्र4H → He + 26.7 MeV
कूलॉम अवरोध (दो प्रोटॉन)≈ 400 keV
ताप-नाभिकीय संलयन हेतु ताप≈ 3 × 10⁹ K (प्रोटॉन गैस)
सूर्य की आयु≈ 5 × 10⁹ वर्ष

📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न

विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु

1 प्रोटॉन का द्रव्यमान 1.0073u तथा न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 1.0087u है (u = परमाणु द्रव्यमान मात्रक)। ₂He⁴ की बंधन-ऊर्जा ज्ञात कीजिए। (हीलियम नाभिक का द्रव्यमान ≈4.0015u)

उत्तर: 28.4 MeV

Δm = (2×1.0073+2×1.0087) − 4.0015 = 0.0305u

बंधन-ऊर्जा = 0.0305×931 ≈ 28.4 MeV

2 Li-7 (₃Li⁷) व He-4 (₂He⁴) की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा क्रमशः 5.60 MeV व 7.06 MeV है। नाभिकीय अभिक्रिया ₃Li⁷+₁H¹→₂He⁴+₂He⁴+Q में मुक्त ऊर्जा Q ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 17.3 MeV

Li-7 की बंधन-ऊर्जा = 7×5.60 = 39.2 MeV; H-1 की = 0 (एकल न्यूक्लिऑन)

दो He-4 की बंधन-ऊर्जा = 2×(4×7.06) = 56.48 MeV

Q = 56.48 − 39.2 = 17.28 MeV

3 किसी रेडियोआइसोटोप X की अर्धायु 1.4×10⁹ वर्ष है, जो स्थिर तत्व Y में क्षय होता है। किसी गुफा से प्राप्त चट्टान के नमूने में X व Y का अनुपात 1:7 पाया गया। चट्टान की आयु ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 4.20 × 10⁹ वर्ष

X:Y = 1:7 ⟹ X का केवल 1/8 भाग शेष है; (1/2)ⁿ=1/8 ⟹ n=3 अर्धायु

आयु = 3 × 1.4×10⁹ = 4.2×10⁹ वर्ष

4 किसी रेडियोऐक्टिव न्यूक्लाइड की अर्धायु 100 घंटे है। 150 घंटे पश्चात् इसकी मूल सक्रियता का कौन-सा भिन्नात्मक भाग शेष रहेगा?

उत्तर: 1/(2√2)

n = 150/100 = 1.5 अर्धायु; शेष भिन्न = (1/2)^1.5 = 1/(2×√2) ≈ 0.354

5 ड्यूटीरियम व हीलियम नाभिकों की प्रति न्यूक्लिऑन बंधन-ऊर्जा क्रमशः 1.1 MeV व 7.0 MeV है। जब दो ड्यूटीरियम नाभिक संलयित होकर हीलियम नाभिक बनाते हैं, तो संलयन में मुक्त ऊर्जा ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 23.6 MeV

दो D-नाभिकों की कुल बंधन-ऊर्जा = 2×(2×1.1) = 4.4 MeV; He-4 की बंधन-ऊर्जा = 4×7.0 = 28.0 MeV

मुक्त ऊर्जा = 28.0 − 4.4 = 23.6 MeV

6 किसी नमूने में 4×10¹⁶ सक्रिय (रेडियोऐक्टिव) नाभिक हैं। तत्व की अर्धायु 10 दिन है। 30 दिनों पश्चात् क्षय हुए नाभिकों की संख्या ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 3.5 × 10¹⁶

30 दिन = 3 अर्धायु; बचे नाभिक = 4×10¹⁶×(1/2)³ = 0.5×10¹⁶

क्षय हुए = 4×10¹⁶ − 0.5×10¹⁶ = 3.5×10¹⁶

➕ अतिरिक्त NEET तथ्य

सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं

महत्वपूर्ण
  • यह अध्याय NEET में प्रतिवर्ष 1–2 प्रश्न (4–8 अंक) रखता है; सर्वाधिक बार पूछे गए उप-विषय — बंधन-ऊर्जा व द्रव्यमान क्षति परिकलन, रेडियोऐक्टिव क्षय व अर्धायु आधारित आयु-निर्धारण, तथा नाभिकीय अभिक्रियाओं में Q-मान हैं।
तथ्य
  • घातांकी क्षय नियम — dN/dt = −λN; समाकलित रूप N(t) = N₀e^(−λt), जहाँ λ क्षय नियतांक है।
तुलनात्मक
  • अर्ध-आयु (T½) बनाम माध्य आयु (τ) — T½ = 0.693/λ; τ = 1/λ; T½ = 0.693τ (माध्य आयु सदैव अर्ध-आयु से अधिक)।
तथ्य
  • कार्बन-14 काल-निर्धारण — जीवित जीवों में C-14/C-12 अनुपात स्थिर रहता है; मृत्यु के पश्चात C-14 क्षय होने लगता है (अर्ध-आयु ≈5730 वर्ष); इस अनुपात से पुरातात्विक आयु-निर्धारण होता है।
तथ्य
  • α-क्षय का नाभिकीय रूपांतरण — ᴬZX → ᴬ⁻⁴Z−2Y + ⁴₂He; भेदन क्षमता सबसे कम, आयनकारी क्षमता सबसे अधिक।
तथ्य
  • β-क्षय का नाभिकीय रूपांतरण — β⁻: Z बढ़ता है (n → p + e⁻ + ν̄); β⁺: Z घटता है (p → n + e⁺ + ν); A अपरिवर्तित।
तुलनात्मक
  • तीनों विकिरणों की तुलना — भेदन क्षमता: γ > β > α; आयनकारी क्षमता इसके ठीक विपरीत: α > β > γ।
तथ्य
  • नाभिकीय रिएक्टर के घटक — मंदक (भारी जल, ग्रेफाइट) न्यूट्रॉन धीमा करता है; नियंत्रण छड़ें (कैडमियम, बोरॉन) न्यूट्रॉन अवशोषित करके दर नियंत्रित करती हैं।
तथ्य
  • क्रांतिक द्रव्यमान — स्वतः बनाए रखने योग्य शृंखला अभिक्रिया के लिए विखंडनीय पदार्थ की न्यूनतम मात्रा।
तुलनात्मक
  • विखंडन बनाम संलयन — विखंडन: भारी नाभिक टूटता है, सामान्य ताप पर न्यूट्रॉन-प्रेरक, ~200 MeV प्रति नाभिक; संलयन: हलके नाभिक जुड़ते हैं, अत्यंत उच्च ताप (~10⁷K) आवश्यक, प्रति न्यूक्लिऑन अधिक ऊर्जा।
तथ्य
  • सूर्य का ऊर्जा स्रोत — p-p चक्र; 4 हाइड्रोजन नाभिक मिलकर 1 हीलियम नाभिक बनाते हैं, ~26.7 MeV ऊर्जा मुक्त होती है।
तथ्य
  • नाभिकीय बल के गुण — आवेश-निरपेक्ष, अल्प परासी (~2–3 fm), संतृप्ति गुण दर्शाता है।
तुलनात्मक
  • नाभिकीय बल बनाम कूलॉम बल — 1–3 fm की दूरी पर नाभिकीय बल कूलॉम बल से लगभग 100 गुना अधिक प्रबल; बड़े नाभिकों में कूलॉम प्रतिकर्षण की तुलनात्मक भूमिका बढ़ जाती है।
तथ्य
  • समस्थानिक/समभारिक/समन्यूट्रॉनिक — समान Z (समस्थानिक), समान A (समभारिक), समान N (समन्यूट्रॉनिक)।
रणनीति
  • Q-मान व संकेत — Q = (अभिकारक द्रव्यमान − उत्पाद द्रव्यमान)×c²; धनात्मक Q → ऊष्माक्षेपी; ऋणात्मक Q → ऊष्माशोषी।
तथ्य
  • नाभिकीय त्रिज्या व घनत्व — R = R₀A¹ᐟ³; आयतन ∝ A; अतः घनत्व सभी नाभिकों के लिए नियत (~2.3×10¹⁷ kg/m³)।
रणनीति
  • इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — बंधन-ऊर्जा का सूत्र (E_b=ΔM×931.5 MeV), नाभिकीय त्रिज्या (R=R₀A¹ᐟ³), क्षय नियम (N=N₀e⁻λt), अर्ध-आयु व माध्य आयु, Q-मान की गणना, तथा विखंडन/संलयन की मूल अवधारणाएँ — इन छह टॉपिक पर विशेष ध्यान दें।

? अभ्यास प्रश्न-उत्तर

NCERT अध्याय 13 के सभी 10 प्रश्नों के विस्तृत हल — प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें

प्रश्न 13.1 नाइट्रोजन नाभिक (¹⁴₇N) की बंधन-ऊर्जा MeV में ज्ञात कीजिए। mN = 14.00307 u
उत्तर

Z=7, A=14, N=7; m_H=1.007825 u, m_n=1.008665 u

ΔM = [7×1.007825 + 7×1.008665] − 14.00307 = 0.112360 u

E_b = 0.112360 × 931.5 ≈ 104.66 MeV

प्रश्न 13.2 ⁵⁶₂₆Fe एवं ²⁰⁹₈₃Bi नाभिकों की बंधन-ऊर्जा MeV में ज्ञात कीजिए। m(Fe)=55.934939 u, m(Bi)=208.980388 u
उत्तर

Fe-56: ΔM = [26×1.007825 + 30×1.008665] − 55.934939 = 0.528461 u; E_b = 492.26 MeV (प्रति न्यूक्लिऑन ≈ 8.79 MeV)

Bi-209: ΔM = [83×1.007825 + 126×1.008665] − 208.980388 = 1.760877 u; E_b = 1640.26 MeV (प्रति न्यूक्लिऑन ≈ 7.85 MeV)

प्रश्न 13.3 3.0 g सिक्के के सभी न्यूट्रॉनों एवं प्रोटॉनों को अलग करने के लिए आवश्यक ऊर्जा ज्ञात कीजिए (मानिए सिक्का पूर्णतः ⁶³₂₉Cu का बना है, m=62.92960 u)।
उत्तर

Cu-63 में: Z=29, A=63, N=34; ΔM = [29×1.007825 + 34×1.008665] − 62.9296 = 0.591935 u; E_b(प्रति परमाणु) ≈ 551.39 MeV

परमाणुओं की संख्या = (3.0/62.9296)×6.023×10²³ ≈ 2.871×10²²

कुल ऊर्जा ≈ 551.39 × 2.871×10²² ≈ 1.583×10²⁵ MeV

कुल आवश्यक ऊर्जा ≈ 2.53 × 10¹² J

प्रश्न 13.4 स्वर्ण ¹⁹⁷₇₉Au एवं रजत ¹⁰⁷₄₇Ag की नाभिकीय त्रिज्या का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर

R_Au/R_Ag = (A_Au/A_Ag)^(1/3) = (197/107)^(1/3)

(1.8411)^(1/3) ≈ 1.2256

R_Au : R_Ag ≈ 1.23 : 1

प्रश्न 13.5 निम्नलिखित अभिक्रियाओं का Q-मान ज्ञात कीजिए और बताइए कि वे ऊष्माक्षेपी हैं या ऊष्माशोषी: (i) ¹₁H+³₁H→²₁H+²₁H (ii) ¹²₆C+¹²₆C→²⁰₁₀Ne+⁴₂He
उत्तर

(i) Q = [1.007825+3.016049 − 2×2.014102]×931.5 ≈ −4.03 MeV — ऊष्माशोषी

(ii) Q = [2×12.000000 − 19.992439 − 4.002603]×931.5 ≈ +4.62 MeV — ऊष्माक्षेपी

प्रश्न 13.6 क्या ⁵⁶₂₆Fe का ²⁸₁₃Al में विखंडन ऊर्जा की दृष्टि से संभव है? m(Fe)=55.93494 u, m(Al)=27.98191 u
उत्तर

Q = [m(Fe) − 2m(Al)]×931.5 = [55.93494 − 55.96382]×931.5 ≈ −26.90 MeV

Q ऋणात्मक है — यह विखंडन ऊर्जा की दृष्टि से संभव नहीं है (यह ऊष्माशोषी है), क्योंकि Fe-56 बंधन-ऊर्जा वक्र के शिखर के निकट है।

प्रश्न 13.7 1 kg शुद्ध ²³⁹₉₄Pu के सभी परमाणु विखंडित हों (180 MeV प्रति विखंडन) तो कितनी ऊर्जा मुक्त होगी?
उत्तर

परमाणुओं की संख्या = (1000/239)×6.023×10²³ ≈ 2.5201×10²⁴

कुल ऊर्जा = 2.5201×10²⁴ × 180

कुल मुक्त ऊर्जा ≈ 4.536 × 10²⁶ MeV

प्रश्न 13.8 2.0 kg ड्यूटीरियम के संलयन से 100 W का लैंप कितनी देर प्रकाशित रखा जा सकता है? (²₁H+²₁H→³₂He+n+3.27 MeV)
उत्तर

D-परमाणुओं की संख्या = (2000/2.0141)×6.023×10²³ ≈ 5.981×10²⁶

अभिक्रियाओं की संख्या = 5.981×10²⁶/2 ≈ 2.990×10²⁶

कुल ऊर्जा ≈ 2.990×10²⁶×3.27 ≈ 9.783×10²⁶ MeV ≈ 1.565×10¹⁴ J

समय = 1.565×10¹⁴/100 ≈ 1.565×10¹² s ≈ 4.96 × 10⁴ वर्ष

प्रश्न 13.9 दो ड्यूटरॉनों के आमने-सामने की टक्कर के लिए कूलॉम अवरोध की ऊँचाई ज्ञात कीजिए (प्रभावी त्रिज्या 2.0 fm)।
उत्तर

संपर्क पर केंद्रों की दूरी: r = 2.0+2.0 = 4.0 fm = 4.0×10⁻¹⁵ m

V = ke²/r = (9×10⁹×(1.6×10⁻¹⁹)²)/(4.0×10⁻¹⁵) = 5.76×10⁻¹⁴ J

eV में: 5.76×10⁻¹⁴/1.6×10⁻¹⁹

कूलॉम अवरोध की ऊँचाई V = 3.6 × 10⁵ eV = 360 keV (≈0.36 MeV)

प्रश्न 13.10 समीकरण R = R₀A^(1/3) के आधार पर दर्शाइए कि नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर है।
उत्तर

आयतन V = (4/3)πR³ = (4/3)πR₀³A (चूँकि R³=R₀³A)

द्रव्यमान ≈ mA (प्रति न्यूक्लिऑन औसत द्रव्यमान m के लिए)

घनत्व ρ = mA/[(4/3)πR₀³A] = m/[(4/3)πR₀³]

A पूर्णतः रद्द हो जाता है ⟹ घनत्व A पर निर्भर नहीं करता, अर्थात् सभी नाभिकों के लिए लगभग अचर है (≈ 2.3 × 10¹⁷ kg/m³)

यह अध्ययन सामग्री नाभिक — परमाणु की संरचना, द्रव्यमान क्षति व बंधन-ऊर्जा, रेडियोऐक्टिवता, विखंडन एवं संलयन — को सरल, मौलिक एवं परीक्षा-अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिसमें NEET-स्तरीय तथ्य, तुलनात्मक तालिकाएँ एवं विस्तृत प्रश्नोत्तर सम्मिलित हैं।

नाभिक — द्रव्य एवं ऊर्जा की मूल संरचना का परम रहस्य।

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