परमाणु
टॉमसन के मॉडल से लेकर रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल, बोर की क्वांटम कक्षाओं, हाइड्रोजन के रेखीय स्पेक्ट्रम और दे ब्रॉग्ली की अप्रगामी तरंगों तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, आरेख, त्वरित तथ्य और सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।
1 भूमिका
टॉमसन का मॉडल तथा वर्णक्रम की पृष्ठभूमि
सन् 1897 में जे.जे. टॉमसन ने गैसों के विद्युत विसर्जन प्रयोगों द्वारा ज्ञात किया कि विभिन्न तत्वों के परमाणुओं में उपस्थित ऋणात्मक आवेशित संघटक (इलेक्ट्रॉन) सभी परमाणुओं के लिए पूर्णतया समान हैं। चूँकि परमाणु स्वयं में वैद्युत रूप से उदासीन होते हैं, इलेक्ट्रॉन के ऋण आवेश को निष्प्रभावित करने के लिए परमाणु में धनात्मक आवेश भी अवश्य होना चाहिए।
सन् 1898 में जे.जे. टॉमसन ने परमाणु का पहला मॉडल प्रस्तावित किया — प्लम पुडिंग मॉडल (या तरबूज़ मॉडल)। इस मॉडल के अनुसार, परमाणु का धन आवेश परमाणु में पूर्णतया एकसमान रूप से वितरित है तथा ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन इसमें ठीक उसी प्रकार अंतःस्थापित हैं जैसे किसी तरबूज़ में बीज। तथापि, बाद के अध्ययनों ने दर्शाया कि परमाणु में इलेक्ट्रॉनों तथा धन आवेशों का वितरण इस प्रस्तावित मॉडल से बहुत भिन्न है।
- जे.जे. टॉमसन ने 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की।
- टॉमसन का मॉडल (1898) — "प्लम पुडिंग" या "तरबूज़" मॉडल; धन आवेश परमाणु में एकसमान वितरित।
- 1885 में जान जेकब बामर ने हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की दृश्य रेखाओं के लिए सरल आनुभविक सूत्र दिया।
- प्रत्येक तत्व का अपना अभिलाक्षणिक स्पेक्ट्रम होता है — यह तत्व की पहचान का "फिंगरप्रिंट" है।
2 ऐल्फा-कण प्रकीर्णन तथा रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल
स्वर्ण पन्नी प्रयोग एवं नाभिक की खोज
सन् 1911 में रदरफोर्ड के सुझाव पर एच. गाइगर तथा ई. मार्सडन ने एक प्रयोग किया जिसमें रेडियोऐक्टिव स्रोत 21483Bi से उत्सर्जित 5.5 MeV ऊर्जा वाले α-कणों के एक पुंज को पतली स्वर्ण पन्नी (2.1×10⁻⁷ m मोटी) पर दिष्ट कराया गया। प्रकीर्णित α-कणों का विक्षेप मापने के लिए एक घूर्णी संसूचक (ZnS पर्दा + सूक्ष्मदर्शी) का प्रयोग किया गया।
मुख्य प्रेक्षण: आपतित α-कणों में से केवल 0.14% (लगभग) का 1° के कोण से अधिक प्रकीर्णन होता है तथा 8000 में से लगभग 1 कण 90° से अधिक विक्षेपित होता है — कुछ तो लगभग विपरीत दिशा (θ≅180°) में भी प्रतिक्षिप्त होते हैं!
रदरफोर्ड ने तर्क दिया कि α-कणों को विपरीत दिशा में विक्षेपित करने के लिए इन पर बहुत अधिक प्रतिकर्षण बल लगना चाहिए, जो तभी संभव है यदि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान तथा इसका धन-आवेश इसके केंद्र पर दृढ़तापूर्वक संकेंद्रित हो। इससे नाभिकीय परमाणु की परिकल्पना की पुष्टि हुई।
रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल
परमाणु का कुल धनावेश तथा अधिकांश द्रव्यमान एक सूक्ष्म आयतन (नाभिक) में संकेंद्रित होता है, और इसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन उसी प्रकार परिक्रमा करते हैं जैसे सूर्य के चारों ओर ग्रह। रदरफोर्ड के प्रयोगों ने सुझाया कि नाभिक का साइज़ लगभग 10⁻¹⁵ m से 10⁻¹⁴ m हो सकता है, जबकि परमाणु का साइज़ लगभग 10⁻¹⁰ m होता है — अर्थात् नाभिक के साइज़ से लगभग 10,000 से 100,000 गुना बड़ा। इस प्रकार परमाणु के भीतर का अधिकांश भाग खाली है।
रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल में, नाभिक (त्रिज्या ≈10⁻¹⁵ m) सूर्य के सदृश है, जिसके परितः इलेक्ट्रॉन अपनी कक्ष (त्रिज्या ≈10⁻¹⁰ m) में इसी प्रकार परिक्रमा करता है जैसे पृथ्वी सूर्य के चारों ओर। यदि सौर परिवार की विमाएँ उसी अनुपात में होतीं जो किसी परमाणु में हैं, तो क्या पृथ्वी अपनी वास्तविक स्थिति की अपेक्षा सूर्य के पास होगी या दूर?
ऐल्फा-कण प्रक्षेप-पथ
ऐल्फा-कण द्वारा अनुरेखित प्रक्षेप पथ, संघट्ट के संघट्ट प्राचल (impact parameter) b पर निर्भर करता है — यह α-कण के प्रारंभिक वेग सदिश की नाभिक के केंद्र से अभिलंबीय दूरी है। नाभिक के समीप कम संघट्ट प्राचल वाला α-कण अधिक प्रकीर्णित होता है; प्रत्यक्ष संघट्ट (b न्यूनतम) में α-कण पीछे की ओर प्रतिक्षिप्त होता है (θ≅π); बड़े b के लिए विक्षेप बहुत कम होता है (θ≅0)।
गाइगर-मार्सडन प्रयोग में 7.7 MeV के किसी α-कण की स्वर्ण-नाभिक से क्षण भर के लिए विरामावस्था में आने से पहले (दिशा प्रतिलोमन से पूर्व) समीपतम दूरी क्या है?
K = 7.7 MeV = 1.2×10⁻¹² J; Z(स्वर्ण) = 79; e = 1.6×10⁻¹⁹ C
d = (2×9×10⁹×(1.6×10⁻¹⁹)²×79)/(1.2×10⁻¹²) = 3.0×10⁻¹⁴ m
इलेक्ट्रॉन कक्षाएँ
परिक्रमा करते इलेक्ट्रॉनों तथा नाभिक के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बल Fe, इलेक्ट्रॉन को कक्ष में बनाए रखने के लिए आवश्यक अभिकेंद्री बल Fc प्रदान करता है:
इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा ऋणात्मक है — यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से परिबद्ध है। यदि E धनात्मक होता तो इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर बंद कक्ष में नहीं घूमता।
प्रयोग द्वारा यह पाया गया कि हाइड्रोजन परमाणु को एक प्रोटॉन तथा एक इलेक्ट्रॉन में पृथक करने के लिए 13.6 eV ऊर्जा की आवश्यकता है। कक्षीय-त्रिज्या तथा इलेक्ट्रॉन का वेग परिकलित कीजिए।
समीकरण (12.4) से: r = −e²/(8πε₀E) = 5.3×10⁻¹¹ m
समीकरण (12.3) से: v = e/√(4πε₀mr) = 2.2×10⁶ m/s
- रदरफोर्ड मॉडल: नाभिक त्रिज्या ~10⁻¹⁵–10⁻¹⁴ m; परमाणु त्रिज्या ~10⁻¹⁰ m।
- गाइगर-मार्सडन प्रयोग: ~0.14% α-कण 1° से अधिक; ~1/8000 90° से अधिक विक्षेपित।
- निकटतम पहुँच की दूरी: d = 2Ze²/(4πε₀K)।
- कुल ऊर्जा सदैव ऋणात्मक — इलेक्ट्रॉन की बद्ध अवस्था।
3 परमाण्वीय स्पेक्ट्रम
उत्सर्जन एवं अवशोषण रैखिक स्पेक्ट्रम
जब कोई परमाण्वीय गैस अथवा वाष्प निम्न दाब पर विद्युत धारा प्रवाहित करके उत्सर्जित की जाती है, तो उत्सर्जित विकिरण से स्पेक्ट्रम प्राप्त होता है जिसमें कुछ विशिष्ट तरंगदैर्घ्य ही होती हैं — इसे उत्सर्जन रैखिक स्पेक्ट्रम कहते हैं। जब श्वेत प्रकाश किसी गैस से गुज़रता है और स्पेक्ट्रोमीटर द्वारा पारगत प्रकाश का विश्लेषण करते हैं तो स्पेक्ट्रम में कुछ अदीप्त रेखाएँ दिखाई देती हैं — यह उस गैस का अवशोषण स्पेक्ट्रम कहलाता है, जिसकी अदीप्त रेखाएँ उन्हीं तरंगदैर्घ्यों से मेल खाती हैं जो उस गैस के उत्सर्जन स्पेक्ट्रम में पाई जाती हैं।
किसी पदार्थ के उत्सर्जन रैखिक स्पेक्ट्रम का अध्ययन, गैस की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट के रूप में कार्य कर सकता है।
- उत्सर्जन स्पेक्ट्रम — दीप्त रेखाएँ (उच्च से निम्न ऊर्जा स्तर में संक्रमण)।
- अवशोषण स्पेक्ट्रम — सतत स्पेक्ट्रम पर अदीप्त रेखाएँ (निम्न से उच्च ऊर्जा स्तर में संक्रमण)।
- अवशोषण रेखाओं की स्थिति (आवृत्तियाँ) उत्सर्जन रेखाओं से मेल खाती हैं।
- प्रत्येक तत्व का स्पेक्ट्रम अद्वितीय होता है — तत्व की पहचान का आधार।
4 हाइड्रोजन परमाणु का बोर मॉडल
रदरफोर्ड मॉडल की कठिनाई एवं बोर के तीन अभिगृहीत
रदरफोर्ड के नाभिकीय मॉडल में गंभीर कठिनाई यह थी कि शास्त्रीय वैद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार त्वरित इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा निरंतर विकिरित करते हुए सर्पिल पथ पर नाभिक में गिर जाना चाहिए — जिससे परमाणु अस्थायी होता, तथा उत्सर्जित प्रकाश की आवृत्ति निरंतर बदलनी चाहिए (एक संतत स्पेक्ट्रम), जो वास्तव में प्रेक्षित रैखिक स्पेक्ट्रम के विपरीत है।
नील्स बोर (1885-1962) ने रदरफोर्ड के मॉडल में नई क्वांटम परिकल्पना के विचार जोड़कर तीन अभिगृहीतों के रूप में अपना सिद्धांत प्रस्तुत किया:
- प्रथम (स्थिर कक्षाएँ): किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन निश्चित स्थायी कक्षाओं में विकिरण ऊर्जा उत्सर्जित किए बिना परिक्रमण कर सकता है — इन्हें स्थिर अवस्थाएँ कहते हैं।
- द्वितीय (क्वांटमीकरण प्रतिबंध): इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में परिक्रमण कर सकता है जिनके लिए कोणीय संवेग h/2π का पूर्णांक गुणज हो: L = nh/2π (n=1,2,3...)
- तृतीय (संक्रमण नियम): उच्च ऊर्जा कक्षा से निम्न ऊर्जा कक्षा में संक्रमण करते समय एक फोटॉन उत्सर्जित होता है: hν = Ei − Ef
n-वीं कक्षा की त्रिज्या व ऊर्जा
शास्त्रीय वैद्युतचुंबकीय सिद्धांत के अनुसार, हाइड्रोजन परमाणु में प्रोटॉन के चारों ओर परिक्रामी इलेक्ट्रॉन द्वारा उत्सर्जित प्रकाश की प्रारंभिक आवृत्ति परिकलित कीजिए।
परिक्रमण आवृत्ति ν = v/(2πr) = 2.2×10⁶/(2π×5.3×10⁻¹¹) ≈ 6.6×10¹⁵ Hz
ऊर्जा स्तर
n=1 (निम्नतम अवस्था/भूमि अवस्था) पर ऊर्जा न्यूनतम (E₁=−13.6 eV) होती है। हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था से इलेक्ट्रॉन को मुक्त कराने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा 13.6 eV है — इसे आयनन ऊर्जा कहते हैं। कमरे के ताप पर, अधिकांश हाइड्रोजन परमाणु अपनी निम्नतम अवस्था में रहते हैं।
n के बढ़ने पर उत्तेजित अवस्थाओं की ऊर्जाएँ पास-पास आती जाती हैं; n=∞ के संगत ऊर्जा 0 eV है (इलेक्ट्रॉन पूर्णतः मुक्त)।
5 हाइड्रोजन परमाणु का लाइन स्पेक्ट्रम
बामर, लाइमैन एवं पाशन श्रेणियाँ
बोर के तृतीय अभिगृहीत के अनुसार, जब कोई परमाणु उच्च ऊर्जा स्थिति (ni) से निम्न ऊर्जा स्थिति (nf, nf<ni) में संक्रमण करता है, तो ऊर्जा के इस अंतर को आवृत्ति νif का एक फोटॉन वहन करता है:
चूँकि nf और ni दोनों पूर्णांक हैं, अतः परमाण्वीय स्तरों के मध्य संक्रमणों में विविक्त आवृत्तियों के प्रकाश ही उत्सर्जित होते हैं — यही रैखिक स्पेक्ट्रम की व्याख्या करता है।
| श्रेणी | nf | ni | क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| लाइमैन श्रेणी | 1 | 2, 3, 4... | पराबैंगनी (UV) |
| बामर श्रेणी | 2 | 3, 4, 5... | दृश्य |
| पाशन श्रेणी | 3 | 4, 5, 6... | अवरक्त (IR) |
सन् 1922 में बोर को हाइड्रोजन परमाणु स्पेक्ट्रम के इस प्रतिभाशाली स्पष्टीकरण हेतु भौतिकी में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- यदि कोई इलेक्ट्रॉन n-वीं उत्तेजित अवस्था से सभी संभव मार्गों से नीचे की ओर संक्रमण करे, तो उत्सर्जित रेखाओं की कुल संख्या = n(n−1)/2।
- उदाहरण: n=4 से कुल रेखाएँ = 4×3/2 = 6।
6 बोर के क्वांटमीकरण का दे ब्रॉग्ली द्वारा स्पष्टीकरण
अप्रगामी तरंगें एवं बोर मॉडल की सीमाएँ
सन् 1923 में लुइस दे ब्रॉग्ली ने तर्क दिया कि इलेक्ट्रॉन को बोर द्वारा प्रस्तावित इसकी वृत्ताकार कक्षा में, एक कण-तरंग के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी डोरी में केवल वही तरंगदैर्घ्य विद्यमान रह पाती हैं जो अप्रगामी तरंग बनाती हैं — इसी प्रकार वृत्ताकार कक्षा में अप्रगामी तरंगें तभी बनेंगी जब कक्षा की परिधि में तय की गई कुल दूरी, तरंगदैर्घ्य के पूर्णांक गुणज के बराबर हो:
चूँकि λ = h/p = h/(mvn), समीकरण (12.12) से: mvnrn = nh/2π — यही बोर द्वारा प्रस्तावित इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग का क्वांटम प्रतिबंध है [समीकरण (12.5)]। इस प्रकार दे ब्रॉग्ली की परिकल्पना, परिक्रामी इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग के क्वांटमीकरण की बोर के द्वितीय अभिगृहीत के लिए व्याख्या प्रस्तुत करती है।
बोर मॉडल की सीमाएँ
- बोर मॉडल केवल हाइड्रोजनसम परमाणुओं (एकल इलेक्ट्रॉन) के लिए उपयुक्त है — द्वि-इलेक्ट्रॉन परमाणु जैसे हीलियम के लिए इसे विस्तारित नहीं किया जा सकता। बोर मॉडल के संरूपण में इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन के मध्य विद्युत बल सम्मिलित नहीं है, जो बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में आवश्यक रूप से प्रकट होता है।
- यह मॉडल स्पेक्ट्रम में आवृत्तियों की सही भविष्यवाणी तो करता है, परंतु आपेक्षिक तीव्रताओं की व्याख्या नहीं कर पाता — कुछ संक्रमण दूसरों की अपेक्षा अधिक स्वीकार्य हैं, बोर-मॉडल इसकी व्याख्या नहीं कर सकता।
- दे ब्रॉग्ली: 2πrn = nλ — अप्रगामी तरंग की शर्त।
- यह बोर के कोणीय संवेग क्वांटीकरण (L=nh/2π) के ठीक तुल्य है।
- बोर मॉडल की सीमाएँ — केवल हाइड्रोजनसम परमाणुओं पर लागू; सापेक्ष तीव्रताओं की व्याख्या नहीं।
✓ सारांश व सूत्र-सूची
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
टॉमसन मॉडल
"प्लम पुडिंग" — धन आवेश एकसमान वितरित
रदरफोर्ड मॉडल
नाभिक (10⁻¹⁵ m) में संकेंद्रित धनावेश व द्रव्यमान; परमाणु (10⁻¹⁰ m)
बोर के तीन अभिगृहीत
स्थिर कक्षाएँ; L=nh/2π; hν=Ei−Ef
कक्षा त्रिज्या
rn = n² × 0.529 Å (हाइड्रोजन)
कक्षा ऊर्जा
En = −13.6/n² eV (हाइड्रोजन); आयनन ऊर्जा 13.6 eV
ऊर्जा संबंध
K=−En, U=2En, En=K+U
स्पेक्ट्रमी श्रेणियाँ
लाइमैन (nf=1, UV); बामर (nf=2, दृश्य); पाशन (nf=3, IR)
दे ब्रॉग्ली
2πrn = nλ — अप्रगामी तरंग की शर्त
हाइड्रोजनसम
rn=(0.529n²/Z)Å; En=−13.6Z²/n² eV
📊 भौतिक राशियाँ तालिका
प्रतीक, मात्रक एवं सूत्र
| भौतिक राशि | सूत्र | टिप्पणी |
|---|---|---|
| कूलॉम बल (α-कण व नाभिक) | F = (1/4πε₀)(2e)(Ze)/r² | α-कण आवेश = 2e |
| निकटतम पहुँच दूरी | d = 2Ze²/(4πε₀K) | K = α-कण की गतिज ऊर्जा |
| कोणीय संवेग | L = nh/2π | n = 1, 2, 3... |
| बोर त्रिज्या (n=1) | a₀ = 0.529 Å = 5.29×10⁻¹¹ m | हाइड्रोजन के लिए |
| n-वीं कक्षा त्रिज्या | rn = n²a₀ | हाइड्रोजन के लिए |
| हाइड्रोजनसम के लिए त्रिज्या | rn = (0.529 n²/Z) Å | Z = परमाणु क्रमांक |
| हाइड्रोजन कक्षा ऊर्जा | En = −13.6/n² eV | n=1 पर E₁ = −13.6 eV |
| हाइड्रोजनसम कक्षा ऊर्जा | En = −13.6 Z²/n² eV | हाइड्रोजनसम आयनों के लिए |
| चाल (n-वीं कक्षा) | vn = 2.18×10⁶ Z/n m/s | हाइड्रोजन के लिए v₁ = 2.18×10⁶ m/s |
| संक्रमण नियम | hν = Ei − Ef | फोटॉन ऊर्जा |
| स्पेक्ट्रमी रेखाओं की संख्या | n(n−1)/2 | n = उच्चतम उत्तेजित स्तर |
| ऊर्जा रूपांतरण | λ(nm) ≈ 1240/E(eV) | hc ≈ 1240 eV·nm |
★ NEET फैक्ट-शीट
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
| अवधारणा | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| टॉमसन मॉडल | "प्लम पुडिंग"/"तरबूज़" मॉडल (1898) |
| गाइगर-मार्सडन प्रयोग | स्वर्ण पन्नी पर α-कण प्रकीर्णन (1911) |
| रदरफोर्ड मॉडल | धनावेश व द्रव्यमान नाभिक में संकेंद्रित |
| नाभिक त्रिज्या | ~10⁻¹⁵ से 10⁻¹⁴ m |
| परमाणु त्रिज्या | ~10⁻¹⁰ m |
| बोर त्रिज्या (a₀) | 0.529 Å (n=1 पर) |
| बोर की कक्षा त्रिज्या | rn = n²a₀ |
| बोर कक्षा ऊर्जा | En = −13.6/n² eV |
| कोणीय संवेग क्वांटीकरण | L = nh/2π |
| आयनन ऊर्जा (H) | 13.6 eV |
| K, U, E संबंध | U = −2K, E = −K, U = 2E |
| लाइमैन श्रेणी | nf=1, UV क्षेत्र |
| बामर श्रेणी | nf=2, दृश्य क्षेत्र |
| पाशन श्रेणी | nf=3, IR क्षेत्र |
| H-α रेखा | n=3→2, λ=656.3 nm (लाल) |
| स्पेक्ट्रमी रेखाओं की संख्या | n(n−1)/2 |
| दे ब्रॉग्ली शर्त | 2πrn = nλ (अप्रगामी तरंग) |
| हाइड्रोजनसम आयन | He⁺, Li²⁺ (एकल इलेक्ट्रॉन) |
| बोर मॉडल की सीमा | केवल हाइड्रोजनसम के लिए; तीव्रता की व्याख्या नहीं |
📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु
1 हाइड्रोजन परमाणु के किसी बोर कक्ष में परिक्रमा करते इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा तथा कुल ऊर्जा का अनुपात क्या है?
उत्तर: 1 : −1
बोर मॉडल में: U = −2K, अतः E = K+U = −K; K:E = K:(−K) = 1:(−1)
2 निम्नतम अवस्था में विद्यमान हाइड्रोजन परमाणु को λ=975Å तरंगदैर्घ्य के एकवर्णी विकिरण से उत्तेजित किया जाता है। परिणामी स्पेक्ट्रम में उत्सर्जित स्पेक्ट्रमी रेखाओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 6
E = 1240/97.5 ≈ 12.72 eV; En = −13.6+12.72 = −0.88 eV ⟹ n² ≈ 15.45 ⟹ n ≈ 4
रेखाओं की संख्या = 4×3/2 = 6
3 α-कण, β-कण तथा γ-किरण — यदि इनकी ऊर्जा समान हो, तो किसी दिए माध्यम में इनकी वेधन क्षमता (penetrating power) का आरोही क्रम क्या होगा?
उत्तर: α < β < γ
α-कण सबसे भारी व सर्वाधिक आवेशित होने से सबसे कम वेधन क्षमता रखता है; γ-किरण आवेशरहित होने से सबसे अधिक।
4 किसी हाइड्रोजन परमाणु द्वारा अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्घ्यों का अनुपात ज्ञात कीजिए, जब यह क्रमशः n=2→n=3 तथा n=4→n=6 संक्रमण करता है।
उत्तर: 1/4
ΔE₁ = 13.6×(1/4−1/9) = 13.6×(5/36); ΔE₂ = 13.6×(1/16−1/36) = 13.6×(5/144)
λ ∝ 1/ΔE ⟹ λ₁/λ₂ = (5/144)/(5/36) = 1/4
5 बोर का परमाण्वीय मॉडल किस प्रकार के परमाणु/आयन के स्पेक्ट्रम की व्याख्या करने में सक्षम है?
उत्तर: एक इलेक्ट्रॉन युक्त किसी परमाणु या आयन (हाइड्रोजनसम) के स्पेक्ट्रम की
बोर मॉडल हाइड्रोजनसम (एकल इलेक्ट्रॉन) निकायों — जैसे H, He⁺, Li²⁺ आदि — के लिए मान्य है।
6 121.5 nm तरंगदैर्घ्य की रेखा, हाइड्रोजन परमाणु के स्पेक्ट्रम की किस श्रेणी में स्थित है?
उत्तर: लाइमैन श्रेणी
121.5 nm ≈ लाइमैन-α रेखा (n=2→1), जो UV क्षेत्र में आती है।
➕ अतिरिक्त NEET तथ्य
सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं
- इस अध्याय से NEET में सामान्यतः 1–2 प्रश्न (4–8 अंक) पूछे जाते हैं; सर्वाधिक बार दोहराए गए विषय — बोर मॉडल सूत्र (त्रिज्या, ऊर्जा, वेग), हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम व स्पेक्ट्रमी श्रेणी पहचान, तथा K.E./स्थितिज ऊर्जा/कुल ऊर्जा के अनुपात हैं।
- फ्रैंक-हर्ट्ज़ प्रयोग (1914) — पारे की वाष्प में इलेक्ट्रॉनों की बमबारी करके यह प्रायोगिक रूप से सिद्ध किया गया कि परमाणु केवल असतत (विविक्त) ऊर्जा-मात्राओं का ही अवशोषण करते हैं — यह बोर मॉडल के लिए महत्वपूर्ण प्रायोगिक समर्थन है।
- ब्रैकेट व फंड श्रेणी — ब्रैकेट श्रेणी (nf=4, दूर अवरक्त) व फंड श्रेणी (nf=5, दूर अवरक्त) — ये NEET में कम पूछी जाती हैं।
- रदरफोर्ड प्रकीर्णन में निकटतम पहुँच की दूरी — d = (1/4πε₀)(2Ze²)/K; यह दूरी नाभिक के आकार का ऊपरी सीमा अनुमान देती है।
- थॉमसन मॉडल बनाम रदरफोर्ड मॉडल — थॉमसन में धनावेश व द्रव्यमान संपूर्ण परमाणु में समान रूप से वितरित माना गया; रदरफोर्ड के α-प्रकीर्णन प्रयोग में कुछ α-कणों के बड़े कोण (180°) से प्रकीर्णन ने सिद्ध किया कि धनावेश व द्रव्यमान एक अत्यंत छोटे नाभिक में संकेंद्रित है।
- संगतता सिद्धांत (correspondence principle) — बड़ी क्वांटम संख्याओं (n→∞) की सीमा में, क्वांटम भौतिकी के परिणाम शास्त्रीय भौतिकी के परिणामों में परिवर्तित हो जाते हैं।
- स्पेक्ट्रमी रेखाओं की संख्या — n(n−1)/2 सूत्र संयोजिकी के nC2 के समतुल्य है।
- ऊर्जा-तरंगदैर्ध्य रूपांतरण की त्वरित युक्ति — λ(nm) ≈ 1240/E(eV); hc ≈ 1240 eV·nm।
- ऋणात्मक कुल ऊर्जा का भौतिक अर्थ — En सदैव ऋणात्मक, जो इलेक्ट्रॉन के बद्ध होने को दर्शाती है; n बढ़ने पर En शून्य के निकट पहुँचता है।
- K, U, E के मध्य संबंध — K=−En, U=2En; विरिअल प्रमेय का विशेष प्रकरण।
- हाइड्रोजनसम आयनों के सूत्र — rn=(0.529n²/Z)Å, En=−13.6Z²/n² eV, vn=(2.18×10⁶Z/n) m/s।
- इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — बोर मॉडल के सभी सूत्र, हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की तीन श्रेणियाँ, ऊर्जा संबंध (K,U,E), स्पेक्ट्रमी रेखाओं की संख्या, हाइड्रोजनसम सूत्र — इन पाँचों पर विशेष ध्यान दें।
? अभ्यास प्रश्न-उत्तर
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प्रश्न 12.1 प्रत्येक कथन के अंत में दिए गए संकेतों में से सही विकल्प का चयन कीजिए (5 उपप्रश्न)।
(a) टॉमसन मॉडल में परमाणु का साइज़, रदरफोर्ड मॉडल में परमाणवीय साइज़ से भिन्न नहीं होता।
(b) टॉमसन मॉडल में इलेक्ट्रॉन स्थायी साम्य में होते हैं; रदरफोर्ड मॉडल में इलेक्ट्रॉन सदैव नेट बल अनुभव करते हैं।
(c) रदरफोर्ड मॉडल पर आधारित परमाणु का नष्ट होना निश्चित है।
(d) टॉमसन मॉडल में लगभग संतत द्रव्यमान वितरण; रदरफोर्ड मॉडल में असमान द्रव्यमान वितरण।
(e) दोनों मॉडलों में धनावेशित भाग का द्रव्यमान सर्वाधिक होता है।
प्रश्न 12.2 स्वर्ण पन्नी के स्थान पर ठोस हाइड्रोजन की पतली शीट का उपयोग करके α-कण प्रकीर्णन प्रयोग दोहराने पर क्या परिणाम अपेक्षित है?
हाइड्रोजन नाभिक (प्रोटॉन) का द्रव्यमान α-कण के द्रव्यमान से बहुत कम है, अतः लक्ष्य नाभिक हल्का होने से α-कण अपनी दिशा लगभग अविचलित रखते हुए हल्के हाइड्रोजन नाभिक को आगे धकेल देगा।
बड़े कोणों पर कोई सार्थक प्रकीर्णन नहीं मिलेगा — पश्च-प्रकीर्णन (90°+) नहीं होगा।
प्रश्न 12.3 2.3 eV ऊर्जा अंतर किसी परमाणु में दो ऊर्जा स्तरों को पृथक करता है — उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
ν = ΔE/h = (2.3×1.6×10⁻¹⁹)/(6.63×10⁻³⁴) = 3.68×10⁻¹⁹/6.63×10⁻³⁴
ν ≈ 5.55 × 10¹⁴ Hz
प्रश्न 12.4 हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में ऊर्जा −13.6 eV है। इस अवस्था में इलेक्ट्रॉन की गतिज व स्थितिज ऊर्जाएँ क्या होंगी?
E = K+U तथा U = −2K ⟹ E = K−2K = −K ⟹ K = −E
K = 13.6 eV; U = −2K = −27.2 eV
K = 13.6 eV; U = −27.2 eV
प्रश्न 12.5 निम्नतम अवस्था में हाइड्रोजन परमाणु एक फोटॉन को अवशोषित करता है जो इसे n=4 स्तर तक उत्तेजित कर देता है। फोटॉन की तरंगदैर्घ्य तथा आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
E₄ = −13.6/16 = −0.85 eV; E₁ = −13.6 eV
ΔE = E₄−E₁ = 12.75 eV; ν = ΔE/h ≈ 3.08×10¹⁵ Hz
λ = c/ν ≈ 9.75×10⁻⁸ m
λ ≈ 975 Å (97.5 nm); ν ≈ 3.08 × 10¹⁵ Hz
प्रश्न 12.6 (a) बोर मॉडल से n=1,2,3 पर इलेक्ट्रॉन की चाल परिकलित कीजिए (b) प्रत्येक के लिए कक्षीय अवधि ज्ञात कीजिए।
(a) vn = v₁/n, v₁ = 2.18×10⁶ m/s
v₁ = 2.18×10⁶ m/s; v₂ = 1.09×10⁶ m/s; v₃ = 7.27×10⁵ m/s
(b) rn=n²×5.3×10⁻¹¹ m; Tn=2πrn/vn
T₁ ≈ 1.53×10⁻¹⁶ s; T₂ ≈ 1.22×10⁻¹⁵ s; T₃ ≈ 4.12×10⁻¹⁵ s
प्रश्न 12.7 हाइड्रोजन परमाणु में अंतरतम इलेक्ट्रॉन-कक्षा की त्रिज्या 5.3×10⁻¹¹ m है। कक्षा n=2 और n=3 की त्रिज्याएँ क्या हैं?
rn = n²×5.3×10⁻¹¹ m
r₂ = 4×5.3×10⁻¹¹ = 2.12×10⁻¹⁰ m
r₃ = 9×5.3×10⁻¹¹ = 4.77×10⁻¹⁰ m
प्रश्न 12.8 कमरे के ताप पर गैसीय हाइड्रोजन पर 12.5 eV की इलेक्ट्रॉन पुंज से बमबारी की गई। किन तरंगदैर्घ्यों की श्रेणी उत्सर्जित होगी?
E₃−E₁ = 12.09 eV (≤12.5, संभव); E₄−E₁ = 12.75 eV (>12.5, असंभव) ⟹ अधिकतम n=3
संभावित संक्रमण: 2→1 (λ=121.6nm, लाइमैन-α); 3→1 (λ=102.6nm, लाइमैन-β); 3→2 (λ=656.3nm, H-α बामर)
तीन तरंगदैर्घ्य उत्सर्जित होंगी: ≈121.6nm, ≈102.6nm (लाइमैन), ≈656.3nm (बामर)
प्रश्न 12.9 बोर मॉडल के अनुसार सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती पृथ्वी की अभिलाक्षणिक क्वांटम संख्या ज्ञात कीजिए।
L = mvr = nh/2π ⟹ n = 2πmvr/h
m = 6.0×10²⁴ kg, v = 3×10⁴ m/s, r = 1.5×10¹¹ m
n = (2π×6×10²⁴×3×10⁴×1.5×10¹¹)/(6.63×10⁻³⁴) ≈ 1.696×10⁴¹/6.63×10⁻³⁴
n ≈ 2.6 × 10⁷⁴ — विशाल संख्या; वृहत् स्तर पर क्वांटमीकरण अप्रेक्षणीय हो जाता है।