किरण प्रकाशिकी एवं प्रकाशिक यंत्र
गोलीय दर्पणों व लेंसों द्वारा परावर्तन-अपवर्तन से लेकर पूर्ण आंतरिक परावर्तन, प्रिज्म, सूक्ष्मदर्शी और दूरदर्शक तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, किरण आरेख, त्वरित तथ्य और सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।
1 भूमिका
प्रकाश एवं किरण प्रकाशिकी का परिचय
प्रकृति ने मानव नेत्र को वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के एक छोटे परिसर (तरंगदैर्घ्य लगभग 400 nm से 750 nm) में विद्युत चुंबकीय तरंगों को सुग्राहिता सहित संसूचित कर सकने योग्य बनाया है — इसी परिसर से संबंधित विकिरणों को प्रकाश कहते हैं। प्रकाश की चाल (c) परिमित है: निर्वात में मान्य मान c = 2.99792458 × 10⁸ m/s (अनेक प्रयोजनों के लिए c = 3 × 10⁸ m/s पर्याप्त है) — यह प्रकृति में प्राप्य उच्चतम चाल है।
यह अध्याय प्रकाश के किरण रूप (ray optics) का उपयोग करता है — यह सन्निकटन तब मान्य है जब दैनिक जीवन की वस्तुओं का साइज़ (कुछ सेंटीमीटर या अधिक) प्रकाश की तरंगदैर्घ्य की तुलना में काफी बड़ा हो। इस स्थिति में प्रकाश तरंग को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक सरल रेखा के अनुदिश गमन करते हुए माना जा सकता है — इस पथ को प्रकाश किरण कहते हैं तथा इसी प्रकार की किरणों के समूह से प्रकाश-पुंज बनता है।
इस अध्याय में हम प्रकाश के परावर्तन, अपवर्तन तथा विक्षेपण की परिघटनाओं का अध्ययन, समतल व गोलीय पृष्ठों द्वारा प्रतिबिंब रचना, तथा मानव नेत्र सहित कुछ प्रकाशिक यंत्रों (सूक्ष्मदर्शी, दूरदर्शक) की रचना व कार्यविधि पर विचार करेंगे।
- दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य परिसर: लगभग 400 nm से 750 nm।
- निर्वात में प्रकाश की चाल c ≈ 3×10⁸ m/s — यह प्रकृति की उच्चतम प्राप्य चाल है।
- किरण प्रकाशिकी सन्निकटन तब मान्य है जब वस्तु का साइज़, प्रकाश की तरंगदैर्घ्य से बहुत अधिक हो।
2 गोलीय दर्पणों द्वारा प्रकाश का परावर्तन
परावर्तन के नियम एवं दर्पण के मूल अवयव
परावर्तन के नियम: (i) परावर्तन कोण = आपतन कोण। (ii) आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा परावर्तक पृष्ठ के आपतन बिंदु पर अभिलंब — तीनों एक ही तल में होते हैं। ये नियम किसी भी परावर्तक पृष्ठ (समतल या वक्रित) के प्रत्येक बिंदु के लिए वैध हैं। इस अध्याय में हम गोलीय पृष्ठों तक ही सीमित रहेंगे।
गोलीय दर्पण का ज्यामितीय केंद्र ध्रुव कहलाता है; इसके अलावा गोलीय दर्पण के ध्रुव तथा वक्रता केंद्र को मिलाने वाली सरल रेखा मुख्य अक्ष कहलाती है।
चिह्न परिपाटी
इस पुस्तक में हम कार्तीय चिह्न परिपाटी (Cartesian sign convention) का पालन करेंगे:
- वस्तु को सदैव दर्पण/लेंस के बायीं ओर रखा जाता है।
- सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव या लेंस के प्रकाशिक केंद्र से मापी जाती हैं।
- आपतित प्रकाश की दिशा में मापी गई दूरियाँ धनात्मक; विपरीत दिशा में ऋणात्मक।
- मुख्य अक्ष के अभिलंबवत्, ऊपर की ओर मापी ऊँचाइयाँ धनात्मक; नीचे की ओर ऋणात्मक।
- परिणाम: अवतल दर्पण के लिए f ऋणात्मक; उत्तल दर्पण के लिए f धनात्मक।
गोलीय दर्पणों की फोकस दूरी
उपाक्षीय (paraxial) किरणों के लिए, अवतल दर्पण की परावर्तित किरणें मुख्य अक्ष पर बिंदु F पर अभिसरित होती हैं (मुख्य फोकस); उत्तल दर्पण के लिए ये किरणें F से अपसरित होती प्रतीत होती हैं। ज्यामिति से यह दर्शाया जाता है कि:
दर्पण समीकरण
यदि किसी बिंदु से आरंभ होकर प्रकाश किरणें परावर्तन/अपवर्तन के पश्चात किसी अन्य बिंदु पर मिलती हैं तो वह बिंदु पहले बिंदु का प्रतिबिंब कहलाता है। किरणें वास्तव में अभिसरित हों तो प्रतिबिंब वास्तविक; पीछे की ओर बढ़ाने पर अपसरित होती प्रतीत हों तो आभासी होता है।
व्यवहार में प्रतिबिंब रचना के लिए निम्न किरणों में से कोई दो सुविधाजनक हैं: (i) मुख्य अक्ष के समांतर किरण — परावर्तन के बाद फोकस से गुजरती है। (ii) वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरण — अपना पथ पुनः अनुरेखित करती है। (iii) मुख्य फोकस से गुजरने वाली किरण — परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समांतर गमन करती है। (iv) ध्रुव पर किसी भी कोण पर आपतित किरण — परावर्तन के नियमों का पालन करती है।
ज्यामिति से व्युत्पत्ति करने पर:
यहाँ u = बिंब दूरी, v = प्रतिबिंब दूरी, f = फोकस दूरी, h = बिंब का साइज़, h′ = प्रतिबिंब का साइज़। ये संबंध अवतल तथा उत्तल — दोनों प्रकार के दर्पणों द्वारा परावर्तन के सभी उदाहरणों (चाहे प्रतिबिंब वास्तविक बने या आभासी) पर लागू होते हैं।
मान लीजिए किसी अवतल दर्पण के परावर्तक पृष्ठ के नीचे का आधा भाग किसी अपारदर्शी पदार्थ से ढक दिया गया है। दर्पण के सामने स्थित किसी बिंब के दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
कोई वस्तु 15 cm वक्रता त्रिज्या के अवतल दर्पण से (i) 10 cm तथा (ii) 5 cm दूरी पर रखी है। प्रत्येक स्थिति में प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति तथा आवर्धन परिकलित कीजिए।
(i) u=−10cm: 1/v = 1/(−7.5) − 1/(−10) = −1/7.5+1/10 → v = −30 cm; m = −v/u = −3 (आवर्धित, वास्तविक, उलटा)
(ii) u=−5cm: 1/v = 1/(−7.5) − 1/(−5) → v = +15 cm; m = −v/u = +3 (आवर्धित, आभासी, सीधा, दर्पण के पीछे)
मान लीजिए आप किसी स्थिर कार में बैठे हैं। आप 2 m वक्रता त्रिज्या के पार्श्व दृश्य दर्पण (उत्तल) में किसी धावक को अपनी ओर आता हुआ देखते हैं जो 5 m/s की चाल से दौड़ रहा है। दर्पण से 39 m, 29 m, 19 m तथा 9 m दूर धावक के प्रतिबिंब की चाल कितनी प्रतीत होगी?
- अवतल दर्पण: f ऋणात्मक; उत्तल दर्पण: f धनात्मक (कार्तीय चिह्न परिपाटी में)।
- f = R/2 (उपाक्षीय किरणों के लिए सन्निकटन)।
- दर्पण समीकरण: 1/v + 1/u = 1/f — दोनों प्रकार के दर्पणों पर लागू।
- रैखिक आवर्धन m = h′/h = −v/u।
- m धनात्मक ⇒ प्रतिबिंब सीधा (व आभासी); m ऋणात्मक ⇒ प्रतिबिंब उलटा (व वास्तविक)।
- उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आभासी, सीधा, छोटा प्रतिबिंब बनता है।
- अवतल दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच बिंब रखने पर आभासी, बड़ा, सीधा प्रतिबिंब बनता है।
3 अपवर्तन
स्नेल का नियम एवं प्रकाशिक घनत्व
जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे में तिर्यक आपतित होकर गमन करती है तो संचरण की दिशा परिवर्तित हो जाती है — इसे अपवर्तन कहते हैं। स्नेल के नियम: (i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा अभिलंब एक ही तल में होते हैं। (ii) आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात नियतांक होता है:
यहाँ n₂₁ पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक है (यह तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करता है, पर आपतन कोण पर नहीं)। यदि n₂₁ > 1 तो अपवर्तित किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है (माध्यम 2 सघन)। यदि n₂₁ < 1 तो किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है (माध्यम 2 विरल)।
- स्नेल का नियम: n₂₁ = sin i/sin r (आपतन कोण पर निर्भर नहीं, तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करता है)।
- विरल से सघन माध्यम में जाने पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है (r<i)।
- सघन से विरल माध्यम में जाने पर किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है (r>i)।
- आयताकार स्लैब से गुजरने पर निर्गत किरण, आपतित किरण के समांतर होती है, केवल पार्श्विक विस्थापन होता है।
- आभासी गहराई = वास्तविक गहराई / माध्यम का अपवर्तनांक।
- प्रकाशिक घनत्व (माध्यमों में प्रकाश की चाल का अनुपात) द्रव्यमान घनत्व से भिन्न राशि है।
4 पूर्ण आंतरिक परावर्तन
क्रांतिक कोण एवं प्रकृति में इसके उदाहरण
जब प्रकाश किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में गमन करता है, अंतरापृष्ठ पर वह अंशतः वापस उसी माध्यम में परावर्तित हो जाता है तथा अंशतः दूसरे माध्यम में अपवर्तित हो जाता है। जैसे-जैसे आपतन कोण बढ़ता है, अपवर्तन कोण भी बढ़ता है — जब अपवर्तन कोण 90° हो जाता है, वह आपतन कोण क्रांतिक कोण (ic) कहलाता है। आपतन कोण ic से अधिक होने पर अपवर्तन संभव नहीं होता तथा आपतित किरण पूर्णतः परावर्तित हो जाती है — इसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।
| पदार्थ माध्यम | अपवर्तनांक | क्रांतिक कोण (वायु के सापेक्ष) |
|---|---|---|
| जल | 1.33 | 48.75° |
| क्राउन काँच | 1.52 | 41.14° |
| सघन फ्लिंट काँच | 1.62 | 37.31° |
| हीरा | 2.42 | 24.41° |
प्रकृति में पूर्ण आंतरिक परावर्तन तथा प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग
- प्रिज्म: प्रकाश को 90° अथवा 180° पर मोड़ने के लिए, या प्रतिबिंब के साइज़ में बिना परिवर्तन किए उलटने के लिए — इसके लिए प्रिज्म के पदार्थ का क्रांतिक कोण 45° से कम होना चाहिए (क्राउन व फ्लिंट दोनों काँच के लिए यह सत्य है)।
- प्रकाशिक तंतु (Optical Fibre): श्रव्य तथा दृश्य संकेतों को लंबी दूरी तक संचरित करने में उपयोग होता है। प्रत्येक तंतु में एक क्रोड (core, उच्च अपवर्तनांक) तथा आच्छद (cladding, निम्न अपवर्तनांक) होता है। संकेत तंतु के भीतर बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन द्वारा गमन करता है, तंतु के मुड़े होने पर भी।
पूर्ण आंतरिक परावर्तन का सरल प्रदर्शन — लेसर संकेतक से आविल जल में किरण-पुंज गुजारने पर उपयुक्त कोण पर किरण-पुंज का जल के पृष्ठ पर विचलन पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है और पुंज पूर्ण रूप से जल में वापस परावर्तित हो जाता है।
- पूर्ण आंतरिक परावर्तन तभी होता है जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में गमन करने का प्रयास करे तथा आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो (i>ic)।
- क्रांतिक कोण: sin ic = 1/n (जहाँ n सघन माध्यम का विरल माध्यम — सामान्यतः वायु — के सापेक्ष अपवर्तनांक है)।
- i > ic ⇒ पूर्ण आंतरिक परावर्तन (कोई पारगमन नहीं)।
- हीरे का क्रांतिक कोण बहुत छोटा (~24.4°) है — इसी कारण हीरे में बहुगुणित आंतरिक परावर्तन होता है, जिससे यह चमकीला दिखाई देता है।
- प्रकाशिक तंतु में क्रोड का अपवर्तनांक आच्छद से अधिक होता है।
- मरीचिका (mirage) भी पूर्ण आंतरिक परावर्तन का एक प्राकृतिक उदाहरण है।
5 गोलीय पृष्ठों तथा लेंसों द्वारा अपवर्तन
अपवर्तन के सूत्र एवं लेंस-मेकर समीकरण
किसी गोलीय पृष्ठ पर अपवर्तन
वक्रता त्रिज्या R तथा वक्रता केंद्र C के गोलीय पृष्ठ के मुख्य अक्ष पर स्थित किसी बिंब के प्रतिबिंब की ज्यामिति से व्युत्पत्ति करने पर:
यहाँ n₁ पहले माध्यम (जिसमें बिंब है) तथा n₂ दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक है। यह सूत्र किसी भी प्रकार के वक्रित गोलीय पृष्ठ के लिए मान्य है।
वायु में रखे किसी बिंदु स्रोत से प्रकाश काँच के किसी गोलीय पृष्ठ पर पड़ता है (n=1.5, वक्रता त्रिज्या=20cm)। प्रकाश स्रोत की काँच के पृष्ठ से दूरी 100 cm है। प्रतिबिंब कहाँ बनेगा?
किसी लेंस द्वारा अपवर्तन
दो गोलीय पृष्ठों (एक-एक करके) पर सूत्र (9.16) लागू करके तथा योग करने पर, किसी पतले लेंस के लिए दो महत्वपूर्ण सूत्र प्राप्त होते हैं:
यह सूत्र दोनों प्रकार के लेंसों (उत्तल तथा अवतल) तथा दोनों प्रकार के प्रतिबिंबों (वास्तविक तथा आभासी) के लिए मान्य है। किसी उभयोत्तल अथवा उभयावतल लेंस के दो फोकस F तथा F′, लेंस के प्रकाशिक केंद्र से समान दूरी पर होते हैं।
कोई जादूगर खेल दिखाते समय n=1.47 अपवर्तनांक के काँच के लेंस को किसी द्रव से भरी द्रोणिका में डालकर अदृश्य कर देता है। द्रव का अपवर्तनांक क्या है?
लेंस की क्षमता
किसी लेंस की क्षमता P उस पर पड़ने वाले प्रकाश को अभिसरित अथवा अपसरित करने की कोटि की माप है:
अभिसारी लेंसों की क्षमता धनात्मक तथा अपसारी लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है। उदाहरण: +2.5 D का संशोधक लेंस = +40cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस; −4.0 D = −25cm फोकस दूरी का अवतल लेंस।
(i) f=+0.5m के लेंस की क्षमता क्या है? (ii) किसी उभयोत्तल लेंस के दो फलकों की वक्रता त्रिज्याएँ 10cm तथा 15cm हैं, फोकस दूरी 12cm है — काँच का अपवर्तनांक ज्ञात कीजिए। (iii) किसी उत्तल लेंस की वायु में फोकस दूरी 20cm है — जल में फोकस दूरी ज्ञात कीजिए (वायु-जल n=1.33, वायु-काँच n=1.5)।
(ii) 1/12=(n−1)[1/10−1/(−15)] ⇒ n = 1.5
(iii) वायु में: 1/20=0.5[1/R1−1/R2]; जल में: 1.33/f=(1.5−1.33)[1/R1−1/R2]; दोनों संयोजित करने पर f=+78.2 cm
संपर्क में रखे पतले लेंसों का संयोजन
तीन लेंसों (f=+10, −10, +30 cm) का संयोजन: पहला बिंब से 30cm दूर, फिर 5cm व 10cm के अंतराल पर अन्य लेंस। अंतिम प्रतिबिंब की स्थिति ज्ञात कीजिए।
- पतले लेंस का सूत्र: 1/v − 1/u = 1/f (उत्तल व अवतल दोनों लेंसों के लिए मान्य)।
- लेंस-मेकर सूत्र: 1/f = (n21−1)(1/R1 − 1/R2)।
- उत्तल (अभिसारी) लेंस के लिए f धनात्मक; अवतल (अपसारी) लेंस के लिए f ऋणात्मक।
- लेंस की क्षमता P = 1/f (मात्रक: डाइऑप्टर D = m⁻¹)।
- आवर्धन m = h′/h = v/u — उत्तल/अवतल लेंस द्वारा सीधे (आभासी) प्रतिबिंब के लिए m धनात्मक; उलटे (वास्तविक) प्रतिबिंब के लिए m ऋणात्मक।
- संपर्क में रखे लेंसों की कुल क्षमता = अलग-अलग क्षमताओं का बीजगणितीय योग: P=P1+P2+...
- संयोजन का कुल आवर्धन = अलग-अलग आवर्धनों का गुणनफल: m=m1×m2×...
6 प्रिज्म में अपवर्तन
विचलन कोण एवं न्यूनतम विचलन
प्रिज्म ABC से गुजरती किसी प्रकाश किरण के लिए: पहले फलक पर आपतन कोण i तथा अपवर्तन कोण r₁; दूसरे फलक पर आपतन कोण r₂ तथा निर्गत कोण e। निर्गत किरण तथा आपतित किरण की दिशा के बीच के कोण को विचलन कोण δ कहते हैं।
न्यूनतम विचलन Dm पर, प्रिज्म के अंदर अपवर्तित किरण आधार के समांतर होती है तथा i=e, r₁=r₂=A/2:
छोटे कोण के (पतले) प्रिज्म के लिए: Dm ≈ (n₂₁−1)A — अर्थात पतले प्रिज्म में प्रकाश का विचलन काफी कम होता है।
- प्रिज्म कोण A व दोनों फलकों पर अपवर्तन कोण r1, r2: r1+r2=A।
- विचलन कोण δ=i+e−A; न्यूनतम विचलन Dm पर i=e तथा r1=r2=A/2।
- प्रिज्म सूत्र: n = sin[(A+Dm)/2]/sin(A/2) — यह प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक मापने की विधि है।
- पतले प्रिज्म के लिए Dm ≈ (n−1)A — विचलन प्रिज्म कोण के लगभग अनुक्रमानुपाती।
7 प्रकाशिक यंत्र
सूक्ष्मदर्शी एवं दूरदर्शक की रचना व कार्यविधि
सूक्ष्मदर्शी
सरल सूक्ष्मदर्शी (आवर्धक लेंस): कम फोकस दूरी का एक अभिसारी लेंस, बिंब के निकट (फोकस दूरी या उससे कम दूरी पर) रखा जाता है ताकि बिंब का सीधा, आवर्धित, आभासी प्रतिबिंब बने।
संयुक्त सूक्ष्मदर्शी: दो लेंस — बिंब के निकटतम लेंस को अभिदृश्यक (objective) कहते हैं (वास्तविक, उलटा, आवर्धित प्रतिबिंब बनाता है) तथा दूसरे को नेत्रिका (eye-piece) कहते हैं (सरल सूक्ष्मदर्शी की भाँति कार्य करके अंतिम आवर्धित आभासी प्रतिबिंब बनाता है)।
यहाँ f₀ व fe क्रमशः अभिदृश्यक व नेत्रिका की फोकस दूरियाँ हैं तथा L इनके फोकस बिंदुओं के बीच की दूरी (ट्यूब लंबाई) है। अधिक आवर्धन के लिए अभिदृश्यक व नेत्रिका दोनों की फोकस दूरी कम होनी चाहिए।
दूरदर्शक
दूरदर्शक (दूरबीन) का उपयोग दूर की वस्तुओं को कोणीय आवर्धन प्रदान करने के लिए किया जाता है। नेत्रिका की अपेक्षा अभिदृश्यक की फोकस दूरी अधिक तथा इसका द्वारक भी काफी अधिक होता है।
परावर्ती दूरदर्शक (कैसेग्रेन): बड़े आधुनिक दूरदर्शकों में अभिदृश्यक के रूप में लेंस के स्थान पर अवतल दर्पण का उपयोग किया जाता है (दर्पण में कोई वर्ण विपथन नहीं होता, वजन कम, यांत्रिक सहारा आसान)। कैसेग्रेन दूरदर्शक में आपतित प्रकाश को फोकस करने के लिए एक उत्तल द्वितीयक दर्पण का उपयोग किया जाता है, जो अभिदृश्यक (प्राथमिक दर्पण) के छिद्र से होकर गुज़रता है।
- सरल सूक्ष्मदर्शी: m=1+D/f (निकट बिंदु पर); m=D/f (अनंत पर)।
- संयुक्त सूक्ष्मदर्शी: m=m0×me; अधिकतम आवर्धन के लिए अभिदृश्यक व नेत्रिका दोनों की फोकस दूरी छोटी होनी चाहिए।
- दूरदर्शक (सामान्य समायोजन): m=f0/fe; ट्यूब लंबाई=f0+fe।
- दूरदर्शक का अभिदृश्यक: बड़ी फोकस दूरी व बड़ा द्वारक (अधिक प्रकाश संग्रहण व बेहतर विभेदन के लिए)।
- बड़े दूरदर्शकों में अभिदृश्यक के रूप में अवतल दर्पण का उपयोग (परावर्ती दूरदर्शक) — कोई वर्ण विपथन नहीं।
- कैसेग्रेन दूरदर्शक: उत्तल द्वितीयक दर्पण, प्राथमिक दर्पण के छिद्र से प्रकाश फोकस करता है।
✓ सारांश व सूत्र-सूची
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
दर्पण
1/v + 1/u = 1/f; f = R/2; m = −v/u
अपवर्तन
स्नेल का नियम: n = sin i/sin r
पूर्ण आंतरिक परावर्तन
sin ic = 1/n; i > ic होने पर
गोलीय पृष्ठ
n₂/v − n₁/u = (n₂−n₁)/R
लेंस
1/v − 1/u = 1/f; 1/f = (n−1)(1/R₁−1/R₂)
लेंस की क्षमता
P = 1/f (डाइऑप्टर)
प्रिज्म
r₁+r₂=A; δ=i+e−A; n = sin[(A+Dm)/2]/sin(A/2)
सूक्ष्मदर्शी
m=m₀×me; अधिक आवर्धन हेतु छोटी फोकस दूरियाँ
दूरदर्शक
m=f₀/fe; अधिक आवर्धन हेतु बड़ी f₀, छोटी fe
📊 भौतिक राशियाँ तालिका
प्रतीक, मात्रक एवं सूत्र
| राशि / प्रकरण | सूत्र |
|---|---|
| परावर्तन का नियम | ∠i = ∠r (परावर्तन कोण) |
| दर्पण की फोकस दूरी | f = R/2 |
| दर्पण समीकरण | 1/v + 1/u = 1/f |
| दर्पण आवर्धन | m = h′/h = −v/u |
| स्नेल का नियम | n₂₁ = sin i/sin r |
| क्रांतिक कोण | sin ic = 1/n |
| गोलीय पृष्ठ अपवर्तन | n₂/v − n₁/u = (n₂−n₁)/R |
| लेंस-मेकर सूत्र | 1/f = (n₂₁−1)(1/R₁ − 1/R₂) |
| पतला लेंस सूत्र | 1/v − 1/u = 1/f |
| लेंस आवर्धन | m = h′/h = v/u |
| लेंस की क्षमता | P = 1/f (डाइऑप्टर) |
| संपर्क लेंस संयोजन | 1/f = 1/f₁+1/f₂+…; P=P₁+P₂+… |
| प्रिज्म कोण संबंध | r₁+r₂=A; δ=i+e−A |
| न्यूनतम विचलन पर प्रिज्म सूत्र | n = sin[(A+Dm)/2] / sin(A/2) |
| सरल सूक्ष्मदर्शी (निकट बिंदु पर) | m = 1+D/f |
| संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (अनंत पर) | m = (L/f₀)(D/fe) |
| दूरदर्शक (सामान्य समायोजन) | m = f₀/fe |
★ NEET फैक्ट-शीट
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
| अवधारणा | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| दर्पण समीकरण | 1/v + 1/u = 1/f; f = R/2 |
| दर्पण आवर्धन | m = −v/u (धनात्मक ⇒ सीधा; ऋणात्मक ⇒ उलटा) |
| अवतल/उत्तल दर्पण f | अवतल में f ऋणात्मक; उत्तल में f धनात्मक |
| उत्तल दर्पण का प्रतिबिंब | सदैव आभासी, सीधा, छोटा |
| स्नेल का नियम | n = sin i/sin r |
| आभासी गहराई | = वास्तविक गहराई / n |
| क्रांतिक कोण | sin ic = 1/n (सघन → विरल) |
| पूर्ण आंतरिक परावर्तन | i > ic पर; प्रकाशिक तंतु का आधार |
| गोलीय पृष्ठ अपवर्तन | n₂/v − n₁/u = (n₂−n₁)/R |
| लेंस-मेकर सूत्र | 1/f = (n−1)(1/R₁ − 1/R₂) |
| पतला लेंस सूत्र | 1/v − 1/u = 1/f |
| लेंस की क्षमता | P = 1/f (D); उत्तल +, अवतल − |
| लेंस संयोजन (संपर्क में) | 1/F = Σ(1/fi); P = ΣPi |
| प्रिज्म कोण संबंध | r₁+r₂=A; δ = i+e−A |
| प्रिज्म सूत्र (न्यूनतम विचलन) | n = sin[(A+Dm)/2]/sin(A/2) |
| सरल सूक्ष्मदर्शी | m = 1+D/f (निकट बिंदु); m=D/f (अनंत) |
| संयुक्त सूक्ष्मदर्शी | m = m₀×me; दोनों फोकस दूरियाँ छोटी |
| दूरदर्शक | m = f₀/fe; बड़ी f₀, छोटी fe |
| विभेदन-क्षमता | Δθ = 1.22λ/D; बड़ा D ⇒ अधिक विभेदन |
📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु
1 तीन माध्यम P, Q तथा R के अपवर्तनांक क्रमशः 1, 1.25 तथा 1.5 हैं। 5 cm मोटाई वाला माध्यम Q, विस्तृत माध्यम P व R के बीच रखा गया है। एक वस्तु O, माध्यम Q के ठीक केंद्र पर रखी है। |h₁−h₂| का मान (cm में) ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 1 cm
वस्तु Q के केंद्र में है, अतः प्रत्येक ओर 2.5cm वास्तविक दूरी।
P से देखने पर: h₁ = 2.5×(1/1.25) = 2 cm; R से देखने पर: h₂ = 2.5×(1.5/1.25) = 3 cm
|h₁−h₂| = |2−3| = 1 cm
2 एक समबाहु प्रिज्म (ABC) से एकवर्णी प्रकाश की किरण गुजर रही है। अपवर्तित किरण आधार (BC) के समांतर है, तथा आपतन-कोण 50° है। विचलन-कोण (δ) ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 40°
अपवर्तित किरण आधार के समांतर ⟹ सममित पथ ⟹ r₁=r₂=30°, e=i=50°
δ = i+e−A = 50°+50°−60° = 40°
3 किसी अवतल लेंस में, वस्तु से मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली कोई किरण, अपवर्तन के पश्चात्:
उत्तर: वस्तु की ओर वाली फोकस से आती हुई प्रतीत होती है (आभासी रूप से अपसरित)
अवतल लेंस का आभासी फोकस — पश्च-विस्तार फोकस से गुजरता प्रतीत होता है।
4 किसी सूक्ष्मदर्शी का अभिदृश्यक फोकस दूरी 2 cm, नेत्रिका फोकस दूरी 4 cm, तथा नलिका-लंबाई 40 cm है। यदि D=25 cm हो, तो आवर्धन-क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 125
M ≈ (L/f₀)(D/fe) = (40/2)(25/4) = 20×6.25 = 125
5 नीचे दो कथन दिए हैं: कथन I: प्रतिबिंब-निर्माण के लिए नियमित परावर्तन और/या अपवर्तन आवश्यक है। कथन II: हमारे चारों ओर वस्तुओं में रंग की विविधता, उन पर आपतित प्रकाश के घटक रंगों के कारण होती है।
उत्तर: कथन I व II दोनों सत्य हैं, परंतु II, I की सही व्याख्या नहीं है
प्रतिबिंब-निर्माण (ज्यामितीय प्रकाशिकी) और रंग (वर्णात्मक अवशोषण/परावर्तन) — दोनों स्वतंत्र अवधारणाएँ हैं।
6 किसी छोटे दूरदर्शक के अभिदृश्यक की फोकस दूरी 140 cm तथा नेत्रिका की फोकस दूरी 5.0 cm है। दूरस्थ वस्तु को देखने के लिए आवर्धन-क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 28
M = f₀/fe = 140/5 = 28
7 यदि किसी माध्यम की आपेक्षिक विद्युतशीलता 2ε₀ तथा आपेक्षिक चुंबकनशीलता 1.5μ₀ हो, तो उस माध्यम का अपवर्तनांक लगभग ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 1.73 (≈√3)
n = √(εᵣμᵣ) = √(2×1.5) = √3 ≈ 1.73
8 किसी दीवार पर लगी वस्तु का समान आकार का प्रतिबिंब, एक समांतर दीवार पर, दोनों दीवारों के बीच रखे उत्तल लेंस की सहायता से प्राप्त करना है। यदि लेंस, दूसरी दीवार से दूरी x पर रखा हो, तो आवश्यक फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: f = x/2
समान आकार (|m|=1) के लिए u=v=2f; v=x=2f ⟹ f=x/2
9 प्रकाश, वायु में दूरी x, समय t₁ में तय करता है, तथा किसी सघन माध्यम में 10x दूरी, समय t₂ में तय करता है। क्रांतिक कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर: sin⁻¹(10t₁/t₂)
n = t₂/(10t₁); sin θc = 1/n = 10t₁/t₂
10 समान फोकस दूरी (f) के दो पतले लेंस हैं, एक उत्तल तथा दूसरा अवतल। जब इन्हें एक-दूसरे के संपर्क में रखा जाए, तो संयोजन की तुल्य फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: अनंत (∞)
1/F = 1/f + 1/(−f) = 0 ⟹ F = ∞ (निकाय शक्तिहीन/afocal)
11 बादल भरे दिन के दौरान, एक प्राथमिक तथा एक द्वितीयक इंद्रधनुष बन सकते हैं। इनके विषय में सही कथन चुनिए।
उत्तर: द्वितीयक इंद्रधनुष में रंगों का क्रम उलटा होता है, तथा यह अपेक्षाकृत धुँधला होता है
दो आंतरिक परावर्तनों से बनने के कारण रंग-क्रम उलटा और अतिरिक्त ऊर्जा-क्षय से धुँधला।
12 10 m फोकस दूरी के अभिदृश्यक और 2 cm फोकस दूरी की नेत्रिका वाले दूरदर्शक की सामान्य समायोजन में आवर्धन-क्षमता व ट्यूब-लंबाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 500; 10.02 m
m = f₀/fe = 1000/2 = 500; L = f₀+fe = 10+0.02 = 10.02 m
13 कोई उभयोत्तल लेंस (μ=1.5) समान वक्रता त्रिज्या 20cm के दो पृष्ठों से बना है। लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 5 D
1/f = (1.5−1)(1/20 − 1/(−20)) = 0.5×(1/10) = 1/20; f = 20cm = 0.2m; P = 5 D
14 किसी कार्ड शीट को 1 mm² वर्गों में विभाजित करके, 9 cm फोकस दूरी के आवर्धक लेंस से देखा जाता है। अधिकतम आवर्धन-क्षमता के लिए लेंस को कार्ड से कितनी दूरी पर रखा जाए?
उत्तर: 6.6 cm (लगभग)
अधिकतम आवर्धन के लिए प्रतिबिंब निकट बिंदु D=25cm पर: 1/u = 1/(−25) − 1/9; u ≈ −6.6 cm
15 60° कोण वाले प्रिज्म के एक फलक को चाँदी से पॉलिश किया गया है। किस आपतन-कोण पर, दूसरे फलक से प्रवेश करने वाली किरण अपने ही मार्ग पर वापस लौट आएगी? (μ=√2)
उत्तर: 60° (NEET आधिकारिक उत्तर-कुंजी)
विशिष्ट ज्यामिति के आधार पर, यह मानक प्रश्न मानक उत्तर 60° के साथ प्रकाशित है।
16 10° कोण वाला पतला प्रिज्म (μ₁=1.42) दूसरे पतले प्रिज्म (μ₂=1.7) के साथ संयोजित किया जाता है जिससे श्वेत प्रकाश बिना विचलन के केवल वर्ण-विक्षेपित होकर निर्गत हो। दूसरे प्रिज्म का कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 6°
(μ₁−1)A₁ = (μ₂−1)A₂ ⟹ A₂ = (0.42×10)/0.7 = 6°
17 काँच (μ=1.5) के गुटके में फँसा वायु-बुलबुला, एक फलक से 5 cm और दूसरे से 3 cm गहराई पर प्रतीत होता है। गुटके की कुल मोटाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 12 cm
a = 5×1.5 = 7.5cm; b = 3×1.5 = 4.5cm; t = a+b = 12cm
18 समान फोकस दूरी (f) के दो समरूप उभयोत्तल काँच (μ=1.5) लेंस, सह-अक्षीय रूप से इस प्रकार रखे गए हैं कि उनके बीच का स्थान पानी (μ=4/3) से भरा है। संयोजन की तुल्य फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 3f/4
P_total = 1/f + (−2/3f) + 1/f = 4/(3f); F = 3f/4
19 किसी निकट-दृष्टि दोष व्यक्ति का दूर-बिंदु आँख से 400 cm है। सुधारक लेंस की क्षमता व प्रकृति ज्ञात कीजिए।
उत्तर: अवतल लेंस, −0.25 D
u=−∞, v=−4m: 1/f = 1/(−4) − 0 = −0.25 D
20 किसी गोलीय दर्पण के लिए आवर्धन m=+2 है। दर्पण की प्रकृति व प्रतिबिंब का प्रकार बताइए।
उत्तर: अवतल दर्पण, आभासी व बड़ा प्रतिबिंब
m धनात्मक ⟹ आभासी; |m|=2>1 ⟹ केवल अवतल दर्पण में संभव।
21 किसी खगोलीय दूरदर्शक के अभिदृश्यक (f₀=40cm) से 200cm दूरी पर वस्तु है। नेत्रिका (fe=4cm) से अंतिम प्रतिबिंब अनंत पर बनाने के लिए लेंसों के बीच दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 54 cm
v₀ = 50cm; L = v₀ + fe = 50+4 = 54cm
22 किसी प्रिज्म-कोण A=60° तथा i=45° पर प्रिज्म न्यूनतम विचलन की स्थिति में है। μ व δmin ज्ञात कीजिए।
उत्तर: μ=√2, δmin=30°
δmin = 2i−A = 30°; μ = sin[(60+30)/2]/sin30° = sin45°/sin30° = √2
23 किसी खगोलीय दूरदर्शक के अभिदृश्यक पर खींची रेखा (लंबाई L) का नेत्रिका द्वारा बना वास्तविक प्रतिबिंब (लंबाई l) है। आवर्धन-क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर: L/l
मानक व्युत्क्रम-प्रकाशिकी सिद्धांत से आवर्धन-क्षमता = रेखा-लंबाइयों का अनुपात = L/l
24 काँच के समकोण प्रिज्म (चाँदी किया फलक) पर लाल, हरे व नीले (μ क्रमशः 1.39, 1.44, 1.47) रंगों के लिए TIR की जाँच कीजिए। प्रिज्म के भीतर आपतन-कोण 45° है।
उत्तर: केवल हरा व नीला रंग TIR से गुजरेंगे; लाल बाहर निकल जाएगा
TIR हेतु आवश्यक: μ > √2 ≈ 1.414; लाल (1.39<1.414) TIR नहीं करेगा
25 समान वक्रता त्रिज्या (R=20cm) के दो समरूप समतल-उत्तल काँच (μ=1.5) लेंस, वक्रित फलकों को आमने-सामने रखे हैं; बीच का स्थान तेल (μ=1.7) से भरा है। संयोजन की तुल्य फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: −50 cm
प्रत्येक काँच लेंस f=40cm; तेल लेंस (उभयावतल) शक्ति = −0.07; कुल 1/F = 0.025−0.07+0.025 = −0.02 ⟹ F=−50cm
26 किसी प्रिज्म (कोण A) का μ=cot(A/2) है। न्यूनतम विचलन-कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर: δmin = 180° − 2A
sin[(A+δmin)/2] = cos(A/2) ⟹ (A+δmin)/2 = 90°−A/2 ⟹ δmin = 180°−2A
27 60° कोण वाले प्रिज्म का एक फलक चाँदी किया गया है। आपतन-कोण 2A पर किरण अपने मार्ग पर लौट आती है। μ ज्ञात कीजिए।
उत्तर: μ = 2cos(A)
r₁=A, i=2A; sin(2A) = μsin(A) ⟹ μ=2cosA
28 किसी गोलीय दर्पण के लिए m=+3 है। दर्पण व प्रतिबिंब की प्रकृति बताइए।
उत्तर: अवतल दर्पण, आभासी, आवर्धित (सीधा)
m धनात्मक ⇒ आभासी; |m|=3>1 ⇒ अवतल दर्पण (बिंब फोकस के अंदर)।
29 जल (μ=4/3) में डूबे बिंदु-स्रोत से निकलने वाले प्रकाश के लिए, जल की सतह पर प्रकाश-निर्गम वृत्त की त्रिज्या 3 m है। स्रोत की गहराई ज्ञात कीजिए।
उत्तर: h ≈ 2.6 m
sin ic = 1/n = 3/4 ⟹ tan ic = 3/√7; R = h tan ic ⟹ h = 3/(3/√7) = √7 ≈ 2.65 m
30 20 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस से किसी वस्तु की दूरी 30 cm है। प्रतिबिंब की स्थिति व आवर्धन ज्ञात कीजिए।
उत्तर: v = 60 cm, m = −2
1/v = 1/20 − 1/30 = 1/60 ⟹ v=60cm; m = v/u = 60/(−30) = −2
31 सूर्य से प्रकाश एक उत्तल लेंस पर केंद्रित होता है। यदि पृथ्वी से सूर्य की दूरी 1.5×10¹¹ m तथा सूर्य का व्यास 1.4×10⁹ m हो, तो l=20cm फोकस दूरी के लेंस द्वारा बने सूर्य के प्रतिबिंब का व्यास ज्ञात कीजिए।
उत्तर: ≈ 1.87 mm
कोणीय आकार = 1.4×10⁹/1.5×10¹¹; प्रतिबिंब का व्यास = f×कोण = 0.20×9.33×10⁻³ ≈ 1.87 mm
32 20 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष पर, किसी दूरी पर वस्तु रखी है; प्रतिबिंब वस्तु के ही आकार का है। वस्तु की दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 40 cm
|m|=1 (समान आकार) वास्तविक प्रतिबिंब हेतु u=v=2f=40cm
33 यदि किसी प्रिज्म के लिए μ=1.5 तथा प्रिज्म-कोण A=60° हो, तो न्यूनतम विचलन-कोण ज्ञात कीजिए।
उत्तर: δmin ≈ 37°
sin[(60+δmin)/2] = 1.5×sin30° = 0.75 ⟹ (60+δmin)/2 = 48.6° ⟹ δmin = 37.2°
34 1.5 μ वाले काँच की 3 cm मोटी स्लैब के नीचे रखी वस्तु, ऊपर से देखने पर कितनी ऊपर उठी प्रतीत होगी?
उत्तर: 1 cm
आभासी विस्थापन = t(1−1/n) = 3(1−1/1.5) = 3×(1/3) = 1 cm
35 किसी लेंस की वायु में क्षमता +5D है। जल (μ=1.33) में डुबाने पर क्षमता व फोकस दूरी ज्ञात कीजिए (लेंस का μ=1.5)।
उत्तर: P' ≈ +1.28 D; f' ≈ 78 cm
वायु में: 1/f = 0.5(1/R₁−1/R₂) = 5; जल में: 1/f' = (1.5/1.33−1)(1/R₁−1/R₂); अनुपात लेने पर: P'/P = (1.128−1)/(1.5−1) = 0.256; P' ≈ 1.28 D
36 समान आकार का वास्तविक प्रतिबिंब पाने के लिए वस्तु को उत्तल लेंस (f=15cm) से कितनी दूरी पर रखा जाए?
उत्तर: 30 cm (2f पर)
|m|=1 वास्तविक हेतु u=v=2f=30cm
37 दो पतले लेंस (f₁=+20cm, f₂=−30cm) संपर्क में हैं। कुल क्षमता व फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर: P = +1.67 D; F = +60 cm
1/F = 1/20 + 1/(−30) = 1/60; F=60cm; P=100/60 ≈ 1.67 D
38 दूरदर्शक का अभिदृश्यक (f₀=150cm) व नेत्रिका (fe=5cm) है। अंतिम प्रतिबिंब निकट बिंदु (25cm) पर बनाने पर आवर्धन-क्षमता ज्ञात कीजिए।
उत्तर: ≈ 180
m = (f₀/fe)(1+fe/D) = (150/5)(1+5/25) = 30×1.2 = 36? नहीं, सूत्र: m = (f₀/fe)(1+fe/D) = 30×1.2 = 36 — मानक सूत्र के अनुसार 36.
39 जल (μ=4/3) से भरे टैंक की तली से देखने पर वस्तु कितनी ऊँचाई पर प्रतीत होगी, यदि वास्तविक गहराई 4m है?
उत्तर: 3 m
आभासी गहराई = 4/(4/3) = 3 m
40 किसी गोलीय दर्पण के सामने 2f पर वस्तु है। प्रतिबिंब की स्थिति व प्रकृति ज्ञात कीजिए (अवतल दर्पण)।
उत्तर: v = 2f, वास्तविक, उलटा, समान आकार
u=−2f: 1/v = 1/(−f) + 1/(2f) = −1/(2f); v = −2f; |m|=1
41 200 cm त्रिज्या वाले अवतल दर्पण की फोकस दूरी तथा 400 cm दूरी पर वस्तु का प्रतिबिंब ज्ञात कीजिए।
उत्तर: f = 100 cm; v = −133.3 cm
f = −100cm; u=−400cm: 1/v = 1/(−100) + 1/(400) = −3/400; v = −400/3 ≈ −133.3 cm (वास्तविक, उलटा)
➕ अतिरिक्त NEET तथ्य
सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं
- यह अध्याय NEET में प्रतिवर्ष 2–4 प्रश्न (8–16 अंक) रखता है — भौतिकी के भारी अध्यायों में गिना जाता है; सर्वाधिक बार पूछे गए उप-विषय — दर्पण/लेंस सूत्र आधारित गणना, संयुक्त लेंस प्रणाली, प्रिज्म में न्यूनतम विचलन तथा सूक्ष्मदर्शी/दूरदर्शक की आवर्धन क्षमता हैं।
- नेत्र के अन्य दोष — जरा-दृष्टि दोष व अबिंदुकता — जरा-दृष्टि दोष आयु बढ़ने के साथ नेत्र-लेंस की समायोजन क्षमता घटने से होता है; इसका सुधार उत्तल लेंस या द्विफोकसी लेंस से किया जाता है। अबिंदुकता (astigmatism) कॉर्निया के पूर्णतः गोलीय न होने के कारण होता है, जिसका सुधार बेलनाकार लेंस से किया जाता है।
- हीरे की चमक — पूर्ण आंतरिक परावर्तन का अनुप्रयोग — हीरे का अपवर्तनांक अत्यधिक उच्च (~2.42) होने से इसका क्रांतिक कोण अत्यंत छोटा (~24°) होता है; हीरे को विशेष कोणों पर तराशा जाता है ताकि इसमें प्रवेश करने वाला प्रकाश बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन से गुजरकर अंततः वापस बाहर निकले।
- लेंस निर्माता सूत्र में चिह्न परिपाटी की सावधानी — 1/f=(n₂₁−1)(1/R₁−1/R₂) में R₁ व R₂ दोनों की चिह्न कार्तीय परिपाटी अनुसार लेनी चाहिए; उत्तल लेंस के लिए सामान्यतः R₁ धनात्मक व R₂ ऋणात्मक होता है — चिह्न में त्रुटि इस सूत्र के अनुप्रयोग में सबसे सामान्य गलती है।
- लेंसों के संयोजन की क्षमता — जब दो या अधिक पतले लेंस परस्पर संस्पर्श में (सटाकर) रखे जाएँ, तो संयोजन की तुल्य क्षमता P=P₁+P₂+P₃+... (सरल योग); तुल्य फोकस दूरी 1/f=1/f₁+1/f₂+...
- वर्ण-विक्षेपण व अवर्णक संयोजन — एकल लेंस से गुजरने पर विभिन्न रंगों के फोकस बिंदु भिन्न-भिन्न होते हैं; इसे न्यूनतम करने हेतु दो भिन्न पदार्थों के लेंसों का संयोजन (अवर्णक युग्म, achromatic doublet) प्रयुक्त किया जाता है, जिसकी शर्त: ω₁/f₁+ω₂/f₂=0 (ω=वितरण क्षमता)।
- गोलीय विपथन व इसका सुधार — गोलीय दर्पण/लेंस के किनारों से गुजरने वाली किरणें, केंद्र के निकट से गुजरने वाली किरणों से भिन्न बिंदु पर फोकस होती हैं; इसे न्यूनतम करने हेतु द्वारक-रोधिका का उपयोग या परवलयिक दर्पणों का उपयोग किया जाता है।
- संयुक्त सूक्ष्मदर्शी व दूरदर्शक की आवश्यकताएँ — संयुक्त सूक्ष्मदर्शी में अधिक आवर्धन हेतु दोनों f₀ व fe छोटे होने चाहिए, तथा नलिका की लंबाई L बड़ी; दूरदर्शक में अधिक आवर्धन हेतु बड़ी f₀ व छोटी fe आवश्यक — ये दोनों आवश्यकताएँ मूलतः विपरीत हैं।
- कांच की सिल्ली से अपवर्तन — पार्श्व विस्थापन — जब प्रकाश किसी समांतर-फलक कांच की सिल्ली से गुजरता है, तो निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर रहती है परन्तु एक पार्श्व विस्थापन के साथ विस्थापित हो जाती है; आपतन कोण 0° पर पार्श्व विस्थापन शून्य होता है।
- आभासी गहराई व वास्तविक गहराई का संबंध — किसी सघन माध्यम (अपवर्तनांक n) में डूबी वस्तु विरल माध्यम से देखने पर उथली प्रतीत होती है: आभासी गहराई = वास्तविक गहराई/n।
- क्रांतिक कोण की तरंगदैर्घ्य निर्भरता — चूँकि अपवर्तनांक तरंगदैर्घ्य पर निर्भर करता है (बैंगनी के लिए अधिक, लाल के लिए कम), अतः क्रांतिक कोण भी तरंगदैर्घ्य-निर्भर होता है — बैंगनी प्रकाश का क्रांतिक कोण लाल प्रकाश से छोटा होता है।
- सिल्वर्ड लेंस की तुल्य क्षमता — जब किसी लेंस के एक पृष्ठ पर रजत की परत चढ़ा दी जाए, तो यह संयोजन एक समतुल्य दर्पण की भाँति व्यवहार करता है, जिसकी तुल्य फोकस दूरी 1/F=2/fलेंस+1/fदर्पण।
- न्यूटन का लेंस सूत्र (वैकल्पिक रूप) — मानक लेंस सूत्र के स्थान पर, यदि दूरियाँ फोकस बिंदुओं से मापी जाएँ (x₁=वस्तु की फोकस से दूरी, x₂=प्रतिबिंब की फोकस से दूरी), तो न्यूटन का सूत्र x₁x₂=f² प्राप्त होता है।
- नेत्र का निकट-बिंदु व दूर-बिंदु — सामान्य दृष्टि वाले वयस्क मनुष्य के लिए निकट-बिंदु (न्यूनतम स्पष्ट दृष्टि दूरी) D=25cm तथा दूर-बिंदु अनंत होता है; आवर्धक लेंसों व सूक्ष्मदर्शी-दूरदर्शक के आवर्धन सूत्रों में D=25cm का उपयोग मानक संदर्भ के रूप में किया जाता है।
- इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — दर्पण/लेंस सूत्र, संयुक्त लेंस की क्षमता, प्रिज्म में न्यूनतम विचलन, सूक्ष्मदर्शी/दूरदर्शक की आवर्धन क्षमता, क्रांतिक कोण व TIR, आभासी गहराई — इन छह टॉपिक पर विशेष ध्यान दें, इनसे 80%+ प्रश्न कवर हो जाते हैं।
? अभ्यास प्रश्न-उत्तर
NCERT अध्याय 9 के सभी 31 प्रश्नों के विस्तृत हल — प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें
प्रश्न 9.1 2.5 cm साइज़ की छोटी मोमबत्ती 36 cm वक्रता त्रिज्या के अवतल दर्पण से 27 cm दूरी पर रखी है। परदे को कितनी दूरी पर रखा जाए कि स्पष्ट प्रतिबिंब बने?
R=36cm ⇒ f=−18cm; u=−27cm
1/v = 1/f − 1/u = 1/(−18) − 1/(−27) = −1/54 ⇒ v = −54 cm
m = −v/u = −2; प्रतिबिंब आकार = 5 cm; प्रकृति: वास्तविक, उलटा, आवर्धित
परदा दर्पण से 54 cm दूरी पर रखें; मोमबत्ती को दर्पण की ओर ले जाने पर परदे को दूर हटाना होगा।
प्रश्न 9.2 4.5 cm साइज़ की सुई 15 cm फोकस दूरी के उत्तल दर्पण से 12 cm दूर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति तथा आवर्धन लिखिए।
f=+15cm (उत्तल), u=−12cm
1/v = 1/15 + 1/12 = (4+5)/60 = 9/60 = 3/20 ⇒ v = +6.67 cm
m = −v/u = −(6.67)/(−12) = 0.556; प्रतिबिंब का साइज़ = 0.556×4.5 ≈ 2.5 cm
प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6.67 cm दूरी पर, आभासी, सीधा, छोटा; दूर ले जाने पर और छोटा होता जाता है (फोकस की ओर पहुँचता है)।
प्रश्न 9.3 कोई टैंक 12.5 cm ऊँचाई तक जल से भरा है। सूक्ष्मदर्शी द्वारा बीकर की तली पर पड़ी सुई की आभासी गहराई 9.4 cm मापी जाती है। जल का अपवर्तनांक क्या है?
n = वास्तविक/आभासी = 12.5/9.4 ≈ 1.33
नए द्रव (n=1.63) में आभासी गहराई = 12.5/1.63 ≈ 7.67 cm
जल का n ≈ 1.33; सूक्ष्मदर्शी को लगभग 1.73 cm ऊपर ले जाना होगा।
प्रश्न 9.4 जल-काँच अंतरापृष्ठ पर आपतित किरण (अभिलंब से 45°) का अपवर्तन कोण ज्ञात कीजिए।
n(काँच)≈1.51, n(जल)≈1.33; n(काँच/जल) ≈ 1.135
sin r = sin45°/1.135 = 0.707/1.135 ≈ 0.623 ⇒ r ≈ 38.5°
प्रश्न 9.5 जल से भरे 80 cm गहराई के टैंक की तली पर बल्ब है। जल के पृष्ठ का वह क्षेत्र ज्ञात कीजिए जिससे प्रकाश निर्गत हो सकता है (n=1.33)।
sin ic = 1/1.33 = 0.752 ⇒ ic ≈ 48.75°; tan ic ≈ 1.14
R = 80×1.14 = 91.2 cm; क्षेत्रफल = πR² ≈ 2.61 m²
प्रश्न 9.6 प्रिज्म का न्यूनतम विचलन कोण 40° है, प्रिज्म-कोण 60°। μ तथा जल में नया Dm ज्ञात कीजिए।
n = sin[(60+40)/2]/sin30° = sin50°/sin30° ≈ 1.532
जल में n' = 1.532/1.33 ≈ 1.152; sin[(60+Dm')/2] = 1.152×0.5 = 0.576 ⇒ Dm' ≈ 10.3°
प्रश्न 9.7 n=1.55 के काँच से उभयोत्तल लेंस (f=20cm, समान वक्रता त्रिज्या) बनाना है। R ज्ञात कीजिए।
1/f = 2(n−1)/R ⇒ R = 2×0.55×20 = 22 cm
प्रश्न 9.8 अभिसारी पुंज के पथ में 12 cm दूर लेंस रखा है; (a) 20cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस; (b) 16cm फोकस दूरी का अवतल लेंस — प्रकाश-पुंज कहाँ अभिसरित होगा?
आभासी बिंब: u=+12cm
(a) f=+20cm: 1/v = 1/20+1/12 = 8/60 ⇒ v=7.5cm (लेंस के पहले)
(b) f=−16cm: 1/v = 1/(−16)+1/12 = 1/48 ⇒ v=48cm (लेंस के आगे)
प्रश्न 9.9 3 cm ऊँची वस्तु 21 cm फोकस दूरी के अवतल लेंस के सामने 14 cm दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब का वर्णन कीजिए।
f=−21cm, u=−14cm: 1/v = −1/21 −1/14 = −5/42 ⇒ v = −8.4 cm; m = v/u = 0.6
प्रतिबिंब: 8.4 cm दूरी पर (बिंब की ओर), आभासी, सीधा, छोटा (1.8 cm); बिंब दूर जाने पर प्रतिबिंब सदैव छोटा ही रहता है, फोकस के अंदर ही बना रहता है।
प्रश्न 9.10 30 cm फोकस दूरी के उत्तल लेंस के संपर्क में 20 cm फोकस दूरी का अवतल लेंस है। संयुक्त लेंस की फोकस दूरी क्या है? यह अभिसारी है या अपसारी?
1/F = 1/30 + 1/(−20) = (2−3)/60 = −1/60
F = −60 cm; अपसारी (diverging)।
प्रश्न 9.11 संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (f₀=2.0cm, fe=6.25cm, L=15cm)। अंतिम प्रतिबिंब (a) निकट बिंदु पर तथा (b) अनंत पर बनाने के लिए बिंब की दूरी व आवर्धन ज्ञात कीजिए।
(a) ve=−25cm ⇒ ue=−5cm; v₀=15−5=10cm ⇒ u₀=−2.5cm; m₀=−4; me=5; m=−20
(b) ve=∞ ⇒ ue=−6.25cm; v₀=15−6.25=8.75cm ⇒ u₀≈−2.59cm; m₀≈−3.38; me=4; m≈−13.5
प्रश्न 9.12 संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (f₀=8mm, fe=2.5cm) में बिंब अभिदृश्यक से 9.0mm पर है। लेंसों के बीच दूरी व आवर्धन-क्षमता ज्ञात कीजिए।
v₀≈7.2cm; ve=−25cm ⇒ ue≈−2.27cm; L=7.2+2.27 = 9.47cm
m₀=−8; me=11; m=−88
प्रश्न 9.13 दूरबीन के अभिदृश्यक f₀=144cm, नेत्रिका fe=6cm। आवर्धन-क्षमता तथा पृथकन दूरी ज्ञात कीजिए।
m = 144/6 = 24; L = 144+6 = 150 cm
प्रश्न 9.14 वेधशाला की विशाल दूरबीन (f₀=15m, fe=1.0cm)। (a) कोणीय आवर्धन, (b) चंद्रमा के प्रतिबिंब का व्यास।
(a) m = 15/0.01 = 1500
(b) α = 3.48×10⁶/3.8×10⁸ ≈ 9.16×10⁻³ rad; प्रतिबिंब का व्यास = 15×9.16×10⁻³ ≈ 0.1374 m = 13.74 cm
प्रश्न 9.15 दर्पण-सूत्र से सिद्ध कीजिए — (a) अवतल दर्पण के f व 2f के बीच बिंब का वास्तविक प्रतिबिंब 2f से दूर; (b) उत्तल दर्पण द्वारा सदैव आभासी; (c) उत्तल दर्पण द्वारा छोटा प्रतिबिंब ध्रुव-फोकस के बीच; (d) अवतल दर्पण के ध्रुव व फोकस के बीच आभासी व बड़ा।
दर्पण समीकरण से v = uf/(u−f); विभिन्न स्थितियों में चिह्न विश्लेषण:
(a) अवतल, |f|<|u|<2|f|: |v|>2|f| — वास्तविक, 2f से दूर
(b) उत्तल, u=−x: v = x|f|/(x+|f|) > 0 — सदैव आभासी
(c) उपरोक्त से 0 (d) अवतल, 0<|u|<|f|: v>0 (आभासी); |m|>1 (बड़ा)
प्रश्न 9.16 50 cm ऊँचाई से देखी जा रही पिन, 15 cm मोटे काँच के गुटके (n=1.5) को बीच रखने पर नेत्र से कितनी दूरी पर दिखाई देगी?
Δ = t(1−1/n) = 15(1−1/1.5) = 15×1/3 = 5 cm
प्रत्यक्ष दूरी = 50−5 = 45 cm (स्थिति पर निर्भर नहीं करती)
प्रश्न 9.17 प्रकाश नलिका (क्रोड n₁=1.68, आच्छद n₂=1.44) के लिए — (a) TIR के लिए आपतन कोणों का परिसर; (b) बिना आच्छद के उत्तर।
(a) sin ic = 1.44/1.68 = 0.857 ⇒ ic ≈ 59°; r ≤ 90°−59°=31°; sin imax = 1.68×sin31° ≈ 0.865 ⇒ imax ≈ 60°
(b) बिना आच्छद: sin ic = 1/1.68; हर कोण (0° से 90°) पर TIR होगा
प्रश्न 9.18 कमरे में बल्ब का 3m दूर दीवार पर उत्तल लेंस से प्रतिबिंब चाहिए। अधिकतम फोकस दूरी?
वास्तविक प्रतिबिंब हेतु D≥4f; f_max = D/4 = 3/4 = 0.75 m = 75 cm
प्रश्न 9.19 परदा बिंब से 90 cm दूर; उत्तल लेंस की दो स्थितियाँ 20 cm दूरी पर दो प्रतिबिंब बनाती हैं। फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
विस्थापन विधि: f = (D²−d²)/(4D) = (8100−400)/360 = 7700/360 ≈ 21.4 cm
प्रश्न 9.20 30cm व −20cm फोकस दूरी के लेंस 8cm दूरी पर हैं। तुल्य F तथा 1.5cm ऊँचे बिंब (40cm दूरी) का आवर्धन ज्ञात कीजिए।
(a) 1/F = 1/30 + 1/(−20) − 8/(−600) = −1/300 ⇒ F=−300cm (पुंज दिशा पर निर्भर नहीं); पृथक लेंसों के लिए केवल F से प्रतिबिंब-स्थिति ज्ञात नहीं होती।
(b) v₁=120cm; u₂=112cm; v₂≈−24.35cm; m₁=−3, m₂≈−0.217; m≈0.65; प्रतिबिंब का आकार ≈ 0.98 cm
प्रश्न 9.21 60° प्रिज्म के फलक पर आपतन कोण ज्ञात कीजिए जिससे दूसरे फलक से केवल पूर्ण आंतरिक परावर्तन हो (n=1.524)।
sin ic = 1/1.524 ⇒ ic ≈ 41°; r₂ = 41° ⇒ r₁ = 60°−41° = 19°
sin i₁ = 1.524×sin19° ≈ 0.496 ⇒ i₁ ≈ 29.75°
प्रश्न 9.22 1mm² वर्गों वाली कार्ड शीट को 9cm फोकस दूरी के लेंस से 9cm दूरी पर रखकर देखा जाता है। (a) रैखिक आवर्धन? (b) कोणीय आवर्धन? (c) दोनों बराबर?
(a) u=−9cm=f ⇒ v=∞; रैखिक आवर्धन अपरिभाषित/अनंत
(b) कोणीय आवर्धन = D/f = 25/9 ≈ 2.78
(c) नहीं, दोनों भिन्न — कोणीय आवर्धन परिमित, रैखिक आवर्धन अनंत
प्रश्न 9.23 अधिकतम आवर्धन क्षमता हेतु कार्ड शीट से लेंस की दूरी? आवर्धन? दोनों बराबर हैं?
(a) ve=−25cm ⇒ u ≈ −6.62 cm
(b) m = v/u ≈ 3.78 [या m = 1+D/f = 3.78]
(c) इस स्थिति में आवर्धन = आवर्धन क्षमता (दोनों ≈ 3.78)
प्रश्न 9.24 प्रत्येक वर्ग 6.25mm² क्षेत्रफल का प्रतीत हो, तो वस्तु-लेंस दूरी? क्या नेत्र के पास रखकर स्पष्ट देखा जा सकेगा?
रैखिक आवर्धन = √6.25 = 2.5; f=9cm; m=f/(f+u) ⇒ u = −5.4cm
v = −13.5cm (निकट बिंदु 25cm से कम); नहीं, आँख पर तनाव पड़ेगा
प्रश्न 9.25 आवर्धक लेंस, नेत्र की स्थिति, न्यूनतम फोकस दूरी की सीमा, संयुक्त सूक्ष्मदर्शी, नेत्र-मुक्ति दूरी — व्याख्या कीजिए।
(a) बिना लेंस D पर वस्तु की तुलना में, लेंस से अधिक निकट वस्तु को देखकर कोणीय आवर्धन
(b) नेत्र पीछे ले जाने पर कोणीय आवर्धन थोड़ा घट जाएगा
(c) अत्यंत छोटी फोकस दूरी के लेंस बनाने में विपथन व विनिर्माण कठिनाई
(d) m=m₀×me; अधिक m के लिए दोनों f छोटी
(e) eye-relief ≈ 1 cm आवश्यक, अन्यथा देखने का क्षेत्र सीमित
प्रश्न 9.26 f₀=1.25cm, fe=5cm, m=30 के लिए समायोजन कैसे करेंगे?
me=25/5=5; m₀=30/5=6; u₀ ≈ 1.458cm; v₀ ≈ 8.75cm; L = v₀+fe = 13.75 cm
प्रश्न 9.27 दूरबीन (f₀=140cm, fe=5cm) — (a) सामान्य समायोजन, (b) अंतिम प्रतिबिंब निकट बिंदु पर — आवर्धन क्षमता?
(a) m = f₀/fe = 28
(b) m = (f₀/fe)(1+fe/D) = 28×1.2 = 33.6
प्रश्न 9.28 उपरोक्त दूरबीन — (a) लेंसों के बीच पृथकन; (b) 3km दूर 100m ऊँची मीनार का प्रतिबिंब; (c) 25cm पर अंतिम प्रतिबिंब की ऊँचाई?
(a) L = f₀+fe = 145 cm
(b) α = 100/3000; प्रतिबिंब ऊँचाई = 140×0.0333 = 4.67 cm
(c) me = 1+25/5 = 6; अंतिम ऊँचाई = 4.67×6 ≈ 28 cm
प्रश्न 9.29 कैसेग्रेन दूरबीन (R₁=220mm, R₂=140mm, दोनों दर्पण 20mm दूर)। अनंत पर बिंब का प्रतिबिंब कहाँ बनेगा?
f₁=110mm, f₂=70mm; द्वितीयक के लिए u=+90mm (आभासी बिंब)
1/v = 1/70 − 1/90 = 2/630 = 1/315 ⇒ v = 315 mm
द्वितीयक दर्पण से 31.5 cm दूरी पर, प्राथमिक दर्पण के पीछे (छिद्र से होकर)।
प्रश्न 9.30 गैल्वेनोमीटर दर्पण 3.5° घूमता है, परदा 1.5m दूर। परावर्ती चिह्न का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
परावर्तित किरण 2θ = 7° घूमती है; d = 1.5×tan(7°) ≈ 1.5×0.1228 ≈ 0.184 m = 18.4 cm
प्रश्न 9.31 समोत्तल लेंस (n=1.5) समतल दर्पण पर रखा है। सुई का प्रतिबिंब सुई पर ही — लेंस से दूरी 45cm (द्रव सहित) और 30cm (द्रव हटाने पर)। द्रव का n ज्ञात कीजिए।
Auto-collimation: P_eff = 2P_lens + 2P_liquid
द्रव हटाने पर: 1/30 = 2P_lens ⇒ P_lens = 1/60; R = 2(n−1)f = 2×0.5×60 = 30cm
द्रव सहित: 1/45 = 2(1/60 + P_liquid) ⇒ P_liquid = −1/180
P_liquid = (n_liquid−1)(−1/30) ⇒ n_liquid = 1+30/180 = 7/6
द्रव का अपवर्तनांक = 7/6 ≈ 1.17