वैद्युतचुंबकीय तरंगें — सम्पूर्ण अध्याय
कक्षा-12 • भौतिकी • अध्याय 8

वैद्युतचुंबकीय तरंगें

मैक्सवेल की विस्थापन धारा से लेकर वैद्युतचुंबकीय तरंगों की प्रकृति और सम्पूर्ण स्पेक्ट्रम (गामा किरणों से रेडियो तरंगों तक) — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, आरेख, त्वरित तथ्य और सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।

id = ε₀ dΦE/dt — विस्थापन धारा
c = 1/√(μ₀ε₀) — निर्वात में प्रकाश की चाल
E₀/B₀ = c — विद्युत व चुंबकीय क्षेत्र आयामों का संबंध
★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित

1 भूमिका

विद्युत, चुंबकत्व एवं प्रकाश का एकीकरण

अध्याय 4 में हमने अध्ययन किया कि विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है तथा दो धारावाही तार परस्पर एक-दूसरे पर चुंबकीय बल आरोपित करते हैं। अध्याय 6 में हम देख चुके हैं कि समय के साथ परिवर्तनशील चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। परंतु, क्या इसका विलोम भी सत्य है? क्या समय के साथ परिवर्तित होता हुआ विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र को उत्पन्न करता है?

जेम्स क्लार्क मैक्सवेल (1831-1879) ने तर्क प्रस्तुत किया कि वास्तव में ऐसा ही होता है। केवल विद्युत धारा ही नहीं वरन् समय के साथ परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र भी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। समय के साथ परिवर्तनशील धारा से जुड़े संधारित्र के बाहर किसी बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करने के लिए ऐम्पियर के नियम को लागू करते समय मैक्सवेल का ध्यान इस नियम संबंधी एक असंगति की ओर गया। इस असंगति को दूर करने के लिए उन्होंने एक अतिरिक्त धारा के अस्तित्व का सुझाव दिया, जिसे विस्थापन धारा नाम दिया।

उन्होंने विद्युत व चुंबकीय क्षेत्रों तथा उनके स्रोतों — आवेश एवं धारा-घनत्व को सम्मिलित करते हुए समीकरणों का एक समुच्चय प्रस्तुत किया। इन समीकरणों को मैक्सवेल समीकरण कहते हैं। लोरेंज का बल सूत्र (अध्याय 4) साथ मिला लें तो ये समीकरण विद्युत-चुंबकत्व के सभी आधारभूत नियमों को गणितीय रूप में व्यक्त करते हैं।

मैक्सवेल के समीकरणों से उभरने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रागुक्ति वैद्युतचुंबकीय तरंगों का अस्तित्व है — ये अंतरिक्ष में संचरित, समय के साथ बदलते (युग्मित) विद्युतीय एवं चुंबकीय क्षेत्र हैं। मैक्सवेल के समीकरणों के अनुसार इन तरंगों की चाल, प्रकाशीय मापन द्वारा प्राप्त प्रकाश की चाल (3 × 10⁸ m/s) के लगभग बराबर होती है। इससे हम इस महत्वपूर्ण निष्कर्ष पर पहुँचे कि प्रकाश एक वैद्युतचुंबकीय तरंग है।

1885 में हर्ट्ज़ ने प्रयोग द्वारा वैद्युतचुंबकीय तरंगों के अस्तित्व को प्रदर्शित किया। मार्कोनी एवं अन्य आविष्कर्ताओं ने यथासमय, संचार के क्षेत्र में इसके तकनीकी उपयोग से जो क्रांति की, उसके हम आज प्रत्यक्षदर्शी हैं।

JM
जेम्स क्लार्क मैक्सवेल (1831–1879) स्कॉटलैंड · उन्नीसवीं शती के महानतम भौतिकविद्

एडिनबर्ग में जन्मे मैक्सवेल ने गैस के अणुओं की तापीय गतियों के वितरण के लिए व्यंजक व्युत्पन्न किया तथा श्यानता आदि मापनीय राशियों का उपयोग कर आणविक प्राचलों के विश्वसनीय आकलन प्राप्त किए। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि — विद्युत एवं चुंबकत्व के (कूलॉम, ऑस्टेंड, ऐम्पियर एवं फैराडे द्वारा खोजे गए) नियमों के एकीकरण द्वारा संगत समीकरणों का समुच्चय प्रस्तुत करना था। इनके आधार पर वे इस महत्वपूर्ण निष्कर्ष पर पहुँचे कि प्रकाश, वैद्युतचुंबकीय तरंग ही है।

त्वरित तथ्य
  • मैक्सवेल ने प्रश्न उठाया: क्या परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र भी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकता है — फैराडे के नियम का विलोम।
  • मैक्सवेल ने ऐम्पियर के परिपथीय नियम में एक असंगति पाई और उसे दूर करने के लिए "विस्थापन धारा" का सुझाव दिया।
  • विद्युत व चुंबकीय क्षेत्रों तथा उनके स्रोतों (आवेश व धारा-घनत्व) को जोड़ने वाले समीकरणों को मैक्सवेल समीकरण कहते हैं।
  • मैक्सवेल समीकरणों की सबसे महत्वपूर्ण प्रागुक्ति: वैद्युतचुंबकीय तरंगों का अस्तित्व, जिनकी चाल प्रकाश की चाल (3×10⁸ m/s) के बराबर होती है — अतः प्रकाश एक वैद्युतचुंबकीय तरंग है।
  • 1885 में हर्ट्ज़ ने प्रयोग द्वारा वैद्युतचुंबकीय तरंगों के अस्तित्व को सिद्ध किया।
  • मैक्सवेल के कार्य ने विद्युत, चुंबकत्व एवं प्रकाश — तीनों क्षेत्रों को एकीकृत कर दिया।

2 विस्थापन धारा

मैक्सवेल की मूल खोज

अध्याय 4 में हम देख चुके हैं कि विद्युत धारा अपने चारों ओर एक चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। मैक्सवेल ने दर्शाया कि तार्किक संगति के लिए यह आवश्यक है कि परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र भी चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करे। यह प्रभाव अत्यंत महत्व का है, क्योंकि यह रेडियो तरंगों, गामा किरणों एवं दृश्य प्रकाश के अतिरिक्त भी अन्य सभी वैद्युतचुंबकीय तरंगों के अस्तित्व की व्याख्या करता है।

माना समांतर प्लेट संधारित्र C, ऐसे परिपथ का भाग है जिसमें समय के साथ परिवर्तनशील धारा i(t) प्रवाहित हो रही है। संधारित्र के बाह्य क्षेत्र में स्थित किसी बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात करने के लिए ऐम्पियर के परिपथीय नियम का उपयोग करें:

ऐम्पियर का परिपथीय नियम∮B·dl = μ₀ i(t)   (8.1)
i(t) + + − − P वृत्ताकार लूप (r) C
चित्र 8.1(a) — समांतर प्लेट संधारित्र; r त्रिज्या के वृत्ताकार लूप द्वारा बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र ज्ञात किया जाता है।

तार की दिशा के लंबवत तल वाला r त्रिज्या का समतल वृत्ताकार लूप लेने पर, सममिति के आधार पर B(2πr) = μ₀ i(t) प्राप्त होता है। अब इसी परिसीमा वाली एक अन्य सतह पर विचार करें — यह घड़े के आकार की एक सतह है जो धारा को कहीं भी नहीं छूती (टिफिन बॉक्स के आकार की, बिना ढक्कन के), जिसकी तली संधारित्र की दोनों प्लेटों के बीच में है।

विरोधाभास: समान परिमिति (rim) वाली दोनों सतहों के लिए ऐम्पियर का नियम लगाने पर समीकरण (8.1) के बाईं ओर का मान तो नहीं बदलता, पर दाईं ओर का मान शून्य है — न कि μ₀i(t) — क्योंकि "टिफिन बॉक्स" वाली सतह से कोई धारा नहीं गुजरती। एक प्रकार से गणना करने पर बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र है; दूसरी प्रकार गणना करने पर P पर चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है — यह विरोधाभास ऐम्पियर के परिपथीय नियम में किसी छूटे हुए पद के कारण उत्पन्न होता है।

छूटा हुआ यह पद ऐसा होना चाहिए कि चाहे हम किसी भी सतह का उपयोग करें, बिंदु P पर चुंबकीय क्षेत्र का समान मान प्राप्त हो। संधारित्र की प्लेटों के बीच की सतह S से गुजरती हुई राशि जिसका मान बदल रहा है, वह है — प्लेटों के बीच का विद्युत क्षेत्र। यदि संधारित्र की प्लेटों का क्षेत्रफल A हो एवं इस पर कुल आवेश Q हो तो प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E का परिमाण (Q/A)/ε₀ होता है। अतः सतह S से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स (गाउस के नियम से):

विद्युत फ्लक्सΦE = |E| A = (1/ε₀)(Q/A)A = Q/ε₀   (8.3)

यदि प्लेटों पर आवेश Q समय के साथ परिवर्तित हो तो यहाँ एक धारा i = dQ/dt होगी। अतः:

ऐम्पियर के नियम में संगति के लिएε₀ (dΦE/dt) = i   (8.4)

यही ऐम्पियर के परिपथीय नियम का छूटा हुआ पद है। इसे विस्थापन धारा अथवा मैक्सवेल की विस्थापन धारा कहा जाता है — यह परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र (या विद्युतीय विस्थापन) के कारण अस्तित्व में आती है।

व्यापकीकृत ऐम्पियर के परिपथीय नियम — कुल धारा i = ic + id = ic + ε₀ (dΦE/dt)   (8.5)
ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम ∮B·dl = μ₀ ic + μ₀ ε₀ (dΦE/dt)   (8.6)

सुस्पष्ट शब्दों में इसका अर्थ है कि संधारित्र की प्लेटों के बाहर केवल चालन धारा ic = i होती है, तथा कोई विस्थापन धारा नहीं होती (id=0)। दूसरी ओर संधारित्र के अंदर कोई चालन धारा नहीं होती (ic=0) और केवल विस्थापन धारा होती है जिससे id=i।

विस्थापन धारा के भौतिक प्रभाव चालन धारा के समान हैं — किसी भी दृष्टि से इसे भिन्न नहीं माना जाना चाहिए। "ऐसी किसी भी सतह, जिसकी परिमिति बंद लूप से गुजरने वाली कुल धारा चालन धारा एवं विस्थापन धारा का योग होती है" — यही व्यापकीकृत तथा यथार्थ नियम है। सर्वाधिक रोचक तथ्य: किसी विशाल क्षेत्र में जहाँ कोई भी चालन धारा नहीं होती, समय के साथ परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र के कारण केवल विस्थापन धारा ही होती है — ऐसे क्षेत्र में, आसपास कोई (चालन) धारा स्रोत न होने पर भी चुंबकीय क्षेत्र विद्यमान होगा।
NEET फोकस
  • विस्थापन धारा id = ε₀ (dΦE/dt) — परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र (फ्लक्स) के कारण उत्पन्न।
  • विस्थापन धारा भी ठीक उसी प्रकार चुंबकीय क्षेत्र के स्रोत का कार्य करती है जैसे चालन धारा।
  • संधारित्र की प्लेटों के बाहर: केवल चालन धारा (ic=i), विस्थापन धारा शून्य।
  • संधारित्र की प्लेटों के अंदर: केवल विस्थापन धारा (id=i), चालन धारा शून्य।
  • व्यापकीकृत ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम: ∮B·dl = μ₀ic + μ₀ε₀(dΦE/dt), जो सभी सतहों के लिए संगत परिणाम देता है।
  • कुल धारा i = ic + id — यह हमेशा एक जैसी होती है, चाहे किसी भी सतह का चयन करें।

निर्वात में मैक्सवेल के समीकरण

क्र.समीकरणनाम
1∮E·dA = Q/ε₀विद्युत संबंधी गाउस नियम
2∮B·dA = 0चुंबकत्व संबंधी गाउस नियम
3∮E·dl = −dΦB/dtफैराडे नियम
4∮B·dl = μ₀ic + μ₀ε₀ dΦE/dtऐम्पियर-मैक्सवेल नियम
सममिति की सुंदरता: फैराडे का प्रेरण संबंधी नियम बताता है कि समय के साथ परिवर्तनशील चुंबकीय क्षेत्र विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है। यह तथ्य कि समय के साथ परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है — फैराडे के नियम का सममितीय प्रतिरूप है और विस्थापन धारा के चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत होने का परिणाम है। अतः समय पर निर्भर वैद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे की उत्पत्ति के कारण हैं। (ये अभी भी पूर्णतः सममितीय नहीं हैं — विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए विद्युत आवेशों के सादृश्य चुंबकीय क्षेत्र के स्रोत, चुंबकीय एकल ध्रुव ज्ञात नहीं हैं।)

3 वैद्युतचुंबकीय तरंगें

तरंगों का जन्म एवं स्वरूप

तरंगों के स्रोत

वैद्युतचुंबकीय (electromagnetic, संक्षेप में em) तरंगें उत्पन्न कैसे होती हैं? न तो स्थिर आवेश, न ही एकसमान गति से चलते हुए आवेश (स्थिर धारा), वैद्युतचुंबकीय तरंगों के स्रोत हो सकते हैं। क्योंकि स्थिर आवेश तो केवल स्थिरवैद्युत क्षेत्र उत्पन्न करते हैं, जबकि गतिमान आवेश चुंबकीय क्षेत्र भी उत्पन्न करते हैं, पर वह समय के साथ परिवर्तित नहीं होता।

मैक्सवेल के सिद्धांत की महत्वपूर्ण निष्पत्ति: त्वरित आवेश वैद्युतचुंबकीय तरंगें विकिरित करते हैं। मान लीजिए एक आवेश किसी निश्चित आवृत्ति से दोलन कर रहा है (कोई दोलन करता हुआ आवेश भी एक त्वरित आवेश का उदाहरण है)। यह उस क्षेत्र में एक दोलित विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करता है जो पुनः एक दोलित चुंबकीय क्षेत्र को जन्म देता है जो पुनः एक दोलित विद्युत क्षेत्र की उत्पत्ति का कारण बनता है — और यह प्रक्रिया चलती रहती है। अतः दोलित विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे को संपोषित करते हैं, अर्थात तरंग गमन करती है।

स्वाभाविक रूप से वैद्युतचुंबकीय तरंगों की आवृत्ति, आवेश के दोलनों की आवृत्ति के बराबर होती है। गमनकारी तरंगों से जुड़ी ऊर्जा, स्रोत अर्थात त्वरित आवेश की ऊर्जा से ही प्राप्त होती है।

दृश्य प्रकाश (माना पीला) उत्पन्न करने के लिए एक आवेश को उस प्रकाश की आवृत्ति से दोलन कराने के लिए ac परिपथ चाहिए — लेकिन पीले प्रकाश की आवृत्ति लगभग 6×10¹⁴ Hz है, जबकि अत्यधिक आधुनिक इलैक्ट्रॉनिक परिपथों से भी जो अधिकतम आवृत्ति हम प्राप्त कर पाते हैं वह लगभग 10¹¹ Hz होती है। यही कारण है कि जब वैद्युतचुंबकीय तरंगों का प्रायोगिक प्रदर्शन हुआ तो वह निम्न आवृत्ति की तरंगों (रेडियो तरंगों के परिसर में) के लिए ही हुआ, जैसा हर्ट्ज़ के प्रयोग (1887) के प्रकरण में देख सकते हैं।

HH
हेनरिच रूडोल्फ हर्ट्ज़ (1857–1894) जर्मन भौतिकविद्

जिन्होंने पहली बार रेडियो तरंगों को प्रसारित किया और ग्रहण किया। उन्होंने वैद्युतचुंबकीय तरंगें पैदा कीं, उन्हें आकाश में भेजा और उनका तरंगदैर्घ्य तथा चाल ज्ञात की। उन्होंने दर्शाया कि वैद्युतचुंबकीय तरंगों के कंपनों की प्रकृति, परावर्तन एवं अपवर्तन ठीक वैसे ही थे जैसे प्रकाश एवं ऊष्मा तरंगों में — और इस प्रकार पहली बार इनकी अभिन्नता सिद्ध की। उन्होंने गैसों में विद्युत विसर्जन संबंधी शोध की अगुवाई की और प्रकाश-विद्युत प्रभाव की खोज की।

हर्ट्ज़ के सफल प्रयोग ने सनसनी फैला दी तथा ये प्रयोग इस क्षेत्र में अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए प्रेरणा का आधार बने। हर्ट्ज़ के प्रयोग के सात साल बाद, जगदीश चंद्र बसु ने कलकत्ता में कार्य करते हुए काफी कम तरंगदैर्घ्य (25 mm से 5 mm) की वैद्युतचुंबकीय तरंगें उत्पन्न करने और उन्हें प्रेषित करने में सफलता प्राप्त की। लगभग उसी समय इटली में गुगलीओ मार्कोनी ने हर्ट्ज़ के कार्य का अनुसरण करते हुए कई किलोमीटर तक की दूरियों तक वैद्युतचुंबकीय तरंगें संप्रेषित करने में सफलता प्राप्त की — जिससे संचार के क्षेत्र में वैद्युतचुंबकीय तरंगों के उपयोग का प्रारंभ हुआ।

वैद्युतचुंबकीय तरंगों की प्रकृति

मैक्सवेल के समीकरणों के आधार पर यह दर्शाया जा सकता है कि किसी वैद्युतचुंबकीय तरंग में विद्युतीय एवं चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के लंबवत होते हैं और इसके गमन की दिशा के भी। चित्र 8.3 में z दिशा में गमन करती हुई एक समतल वैद्युतचुंबकीय तरंग का प्रारूपिक उदाहरण दर्शाया गया है — विद्युत क्षेत्र Ex, x-अक्ष के अनुदिश है और चुंबकीय क्षेत्र By, y-अक्ष के अनुदिश है, दोनों z के साथ ज्यावक्रीय रूप में परिवर्तित होते हैं।

z E (x-दिशा) B (y-दिशा, तल में) x y
चित्र 8.3 — z-दिशा में गमन करती रेखीय ध्रुवित em तरंग: दोलनकारी विद्युत क्षेत्र E, x-दिशा के अनुदिश एवं दोलनकारी चुंबकीय क्षेत्र B, y-दिशा के अनुदिश — दोनों एक-दूसरे के व एक-दूसरे व गमन-दिशा (z) के लंबवत।
तरंग का गणितीय स्वरूप Ex = E₀ sin(kz − ωt)   [8.7(a)]
By = B₀ sin(kz − ωt)   [8.7(b)]

यहाँ k तरंग सदिश (या गमन सदिश) है, तथा k एवं तरंगदैर्घ्य λ में सामान्य संबंध k = 2π/λ (8.8) है। ω कोणीय आवृत्ति है। तरंग की गमन चाल (ω/k) है।

सभी तरंगों के लिए प्रामाणिक संबंध ω = ck,   जहाँ c = 1/√(μ₀ε₀)   [8.9(a)]
अथवा   νλ = c   [8.9(b)]
E तथा B के आयामों का संबंध B₀ = E₀/c   (8.10)
वैद्युतचुंबकीय तरंगों का विशेष गुण: ये मुक्त स्थान या निर्वात में, विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों के स्व:संपोषित दोलन हैं। ये इस अर्थ में अभी तक अध्ययन की गई अन्य तरंगों (जैसे ध्वनि तरंग) से भिन्न हैं कि इनमें विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों के दोलनों के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।

यदि कोई भौतिक माध्यम वास्तव में विद्यमान हो (उदाहरण: प्रकाश काँच में से गमन करता है), तो किसी माध्यम में कुल विद्युत एवं चुंबकीय क्षेत्रों को उस माध्यम की आपेक्षिक विद्युतशीलता ε एवं आपेक्षिक चुंबकशीलता μ के पदों में वर्णित किया जाता है। आपेक्षिक विद्युतशीलता ε एवं आपेक्षिक चुंबकशीलता μ वाले किसी माध्यम में प्रकाश का वेग हो जाता है:

माध्यम में प्रकाश का वेगv = 1/√(με)   (8.11)
NEET फोकस
  • न स्थिर आवेश, न स्थिर (एकसमान गति से चलती) धारा — केवल त्वरित आवेश ही em तरंगों के स्रोत हैं।
  • दोलन करता आवेश भी त्वरित आवेश का उदाहरण है — उत्पन्न em तरंग की आवृत्ति, आवेश के दोलनों की आवृत्ति के बराबर होती है।
  • 1887 में हर्ट्ज़ ने प्रयोगशाला में सबसे पहले em तरंगें उत्पन्न व संसूचित कीं — मैक्सवेल की भविष्यवाणी की पुष्टि।
  • जगदीश चंद्र बसु (कलकत्ता) ने बहुत कम तरंगदैर्घ्य (25mm–5mm) की em तरंगें उत्पन्न कीं।
  • मार्कोनी ने कई किलोमीटर दूर तक em तरंगें संप्रेषित करने में सफलता पायी — जिससे संचार क्रांति शुरू हुई।
  • em तरंग में E व B एक-दूसरे के लंबवत तथा दोनों तरंग की गमन दिशा के भी लंबवत होते हैं (अनुप्रस्थ तरंग)।
  • E व B दोनों समान कला (phase) में दोलन करते हैं — दोनों साथ-साथ शून्य व साथ-साथ अधिकतम होते हैं।
  • महत्वपूर्ण सूत्र: ω = ck; νλ = c; B₀ = E₀/c।
  • em तरंगों को दोलनों के लिए किसी भौतिक माध्यम की आवश्यकता नहीं — यह ध्वनि तरंगों से इनका बड़ा अंतर है।
  • किसी माध्यम में प्रकाश का वेग v = 1/√(με) — यह माध्यम के वैद्युत (ε) एवं चुंबकीय (μ) गुणों पर निर्भर करता है।
  • निर्वात में em तरंगों की चाल c = 1/√(μ₀ε₀) ≈ 3×10⁸ m/s — एक मौलिक भौतिक नियतांक, जो तरंगदैर्घ्य पर निर्भर नहीं करता।
उदाहरण 8.1

25 MHz आवृत्ति की एक समतल वैद्युतचुंबकीय तरंग निर्वात में x-दिशा के अनुदिश गतिमान है। दिक्काल में किसी विशिष्ट बिंदु पर इसका E = 6.3 ĵ V/m है। इस बिंदु पर B का मान क्या है?

B व E के परिमाण संबंधित हैं: B = E/c = 6.3/(3×10⁸) = 2.1×10⁻⁸ T
दिशा: E, y-दिशा के अनुदिश है और तरंग x-दिशा के अनुदिश गमन कर रही है। अतः B, x व y दोनों अक्षों के लंबवत होना चाहिए। सदिश बीजगणित से E×B को x-दिशा में होना चाहिए। चूँकि (+ĵ)×(+k̂) = î, अतः B, z-दिशा के अनुदिश है।
B = 2.1 × 10⁻⁸ k̂ T
उदाहरण 8.2

किसी समतल वैद्युतचुंबकीय तरंग में चुंबकीय क्षेत्र By = (2×10⁻⁷) T sin(0.5×10³x + 1.5×10¹¹t) है। (a) तरंग की आवृत्ति तथा तरंगदैर्घ्य क्या है? (b) विद्युत क्षेत्र के लिए व्यंजक लिखिए।

(a) दिए गए समीकरण की By=B₀ sin[2π(x/λ + t/T)] से तुलना करने पर: λ = 2π/(0.5×10³) m = 1.26 cm; तथा 1/T = ν = (1.5×10¹¹)/2π = 23.9 GHz
(b) E₀ = B₀c = 2×10⁻⁷ × 3×10⁸ = 60 V/m; विद्युत क्षेत्र घटक, तरंग की गमन दिशा एवं चुंबकीय क्षेत्र की दिशा के लंबवत होता है, अतः z-अक्ष के अनुदिश:
λ ≈ 1.26 cm; ν ≈ 23.9 GHz; Ez = 60 sin(0.5×10³x + 1.5×10¹¹t) V/m

4 वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम

गामा किरणों से रेडियो तरंगों तक

जिस समय मैक्सवेल ने वैद्युतचुंबकीय तरंगों संबंधी अपना सिद्धांत प्रस्तुत किया था, तो दृश्य प्रकाश तरंगें ही एकमात्र सुपरिचित em तरंगें थीं। अब हम जानते हैं कि दृश्य प्रकाश तरंगें, X-किरणें, गामा किरणें, रेडियो तरंगें, सूक्ष्म (माइक्रो) तरंगें, पराबैंगनी एवं अवरक्त तरंगें — ये सभी em तरंगें हैं। तरंगों का आवृत्ति के क्रम में वर्गीकरण वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम कहलाता है।

ध्यान दें: एक प्रकार की तरंग और उसके निकटवर्ती दूसरे प्रकार की तरंग के बीच कोई स्पष्ट विभाजन रेखा नहीं है। वर्गीकरण मोटे तौर पर इस बात पर आधारित है कि तरंगें किस प्रकार उत्पन्न एवं/अथवा संसूचित की जाती हैं।
आवृत्ति (Hz) तरंगदैर्घ्य (m) 10²³–10¹⁹ Hz गामा किरणें 10¹⁹–10¹⁶ Hz X-किरणें 10¹⁶–10¹⁵ Hz पराबैंगनी 10¹⁵–4×10¹⁴ Hz दृश्य प्रकाश 4×10¹⁴–10¹² Hz अवरक्त 10¹¹–10⁹ Hz सूक्ष्म तरंगें 10⁹–5×10⁵ Hz रेडियो/TV/FM <5×10⁵ Hz दीर्घ रेडियो तरंगें
चित्र 8.4 — वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम, जिसमें विभिन्न भागों के सामान्य नाम दर्शाए गए हैं। विभिन्न भागों के बीच कोई स्पष्ट विभाजन रेखा नहीं है।

4.1 रेडियो तरंगें

रेडियो तरंगें चालक तारों में आवेशों की त्वरित गति से उत्पन्न होती हैं। इनका उपयोग रेडियो एवं दूरदर्शन की संचार प्रणालियों में किया जाता है। इनका आवृत्ति परास सामान्यतः 500 kHz से लगभग 1000 MHz के बीच होता है।

बैंडआवृत्ति परास
AM (आयाम मॉड्यूलित)530 kHz – 1710 kHz
लघुतरंग बैंड1710 kHz – 54 MHz
टी.वी. तरंगें54 MHz – 890 MHz
FM (आवृत्ति मॉड्यूलित) रेडियो88 MHz – 108 MHz

सेल्यूलर फोनों में अत्युच्च आवृत्ति (UHF) बैंड की रेडियो तरंगों का उपयोग करके ध्वनि संदेशों के आदान-प्रदान की व्यवस्था की जाती है।

4.2 सूक्ष्म तरंगें

सूक्ष्म तरंगों (लघु तरंगदैर्घ्य की रेडियो तरंगें) की आवृत्तियाँ गिगा हर्ट्ज़ (GHz) के परास में होती हैं। ये विशेष प्रकार की निर्वात नलिकाओं (vacuum tubes) — क्लाइस्ट्रॉन, मेगनेट्रॉन अथवा गन डायोड — द्वारा उत्पन्न होती हैं। अपने लघु तरंगदैर्घ्य के कारण विमान संचालन में रडार प्रणाली के लिए उपयुक्त हैं। रडार का उपयोग तेज गेंदों (टेनिस), वाहनों की गति ज्ञात करने वाले चाल-गन (speed guns) में होता है।

माइक्रोवेव ऑवन: इन ऑवनों में सूक्ष्म तरंगों की आवृत्ति इस प्रकार चुनी जाती है कि वे जल के अणुओं की अनुनाद आवृत्ति से मेल खा सकें, ताकि तरंगों की ऊर्जा प्रभावी रूप से अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ाने के लिए स्थानांतरित की जा सके — इससे किसी भी जलयुक्त खाद्य पदार्थ का ताप बढ़ जाता है।

4.3 अवरक्त तरंगें

अवरक्त तरंगें (Infrared Waves) गर्म पिंडों एवं अणुओं से उत्पन्न होती हैं। इन्हें कभी-कभी ऊष्मा तरंगें भी कहा जाता है, क्योंकि अधिकांश पदार्थों में विद्यमान जल के अणु अवरक्त तरंगों को तुरंत अवशोषित कर लेते हैं (CO₂, NH₃ आदि अन्य अणु भी अवशोषित करते हैं) जिससे उनकी तापीय गति बढ़ जाती है — अर्थात वे गर्म हो जाते हैं और अपने परिवेश को गर्म करने लगते हैं।

अवरक्त विकिरण की पृथ्वी की गर्मी अर्थात माध्य ताप बनाए रखने में भी हरित गृह प्रभाव के द्वारा अहम भूमिका है — पृथ्वी पर आने वाला दृश्य प्रकाश वायुमंडल से आसानी से गुजरकर पृथ्वी के पृष्ठ द्वारा अवशोषित हो जाता है और दीर्घ तरंगदैर्घ्य की अवरक्त तरंगों के रूप में पुनर्विकिरित होता है — जिसे CO₂ एवं जल वाष्प जैसी हरित गृह प्रभावकारी गैसें वायुमंडल में रोक लेती हैं। उपग्रहों में लगे अवरक्त संसूचकों का उपयोग सैनिक उद्देश्यों एवं फसलों की वृद्धि का प्रेक्षण करने के लिए किया जाता है। इलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ (जैसे प्रकाश उत्सर्जक डायोड) भी अवरक्त तरंगें उत्सर्जित करती हैं और घरेलू रिमोट नियंत्रकों में बहुलता से प्रयोग होती हैं।

4.4 दृश्य प्रकाश तरंगें

यह वैद्युतचुंबकीय तरंगों का सर्वाधिक सुपरिचित रूप है — यह उस स्पेक्ट्रम का भाग है जिसके लिए मानवीय नेत्र संवेदनशील होते हैं। इसका आवृत्ति परास लगभग 4×10¹⁴ Hz से 7×10¹⁴ Hz या तरंगदैर्घ्य परास लगभग 700–400 nm होता है। विभिन्न जंतु तरंगदैर्घ्यों के विभिन्न परासों के लिए संवेदनशील होते हैं — उदाहरणार्थ, सर्प अवरक्त तरंगों को संसूचित कर सकते हैं; कई कीटों का दृश्य परास पराबैंगनी तरंगों तक पहुँचता है।

400 nm (बैंगनी) 700 nm (लाल)
दृश्य स्पेक्ट्रम: बैंगनी (400nm) → नीला → हरा → पीला → नारंगी → लाल (700nm)।

4.5 पराबैंगनी तरंगें

इसमें लगभग 4×10⁻⁷ m (400 nm) से 6×10⁻¹⁰ m (0.6 nm) तरंगदैर्घ्य परास की तरंगें सम्मिलित हैं। पराबैंगनी (UV) विकिरण विशिष्ट लैंपों एवं बहुत गर्म पिंडों से उत्पन्न होते हैं। सूर्य पराबैंगनी प्रकाश का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, परंतु सौभाग्य से इसका अधिकांश भाग वायुमंडल की लगभग 40–50 km की ऊँचाई पर स्थित ओजोन परत में अवशोषित हो जाता है। अधिक परिमाण में UV प्रकाश के संपर्क में आने का मानवों पर हानिकारक प्रभाव होता है — त्वचा में अधिक मेलानिन का उत्पादन होता है जिससे त्वचा ताम्र रंग की हो जाती है।

चिंता का विषय: ओजोन परत एक संरक्षक की भूमिका अदा करती है, इसलिए क्लोरोफ्लोरो-कार्बन (CFCs) गैसों (जैसे फ्रीऑन) द्वारा इसका ह्रास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय है।

अपनी छोटी तरंगदैर्घ्यों के कारण, पराबैंगनी किरणों को अति परिशुद्ध अनुप्रयोगों, जैसे लासिक (LASIK) नेत्र शल्यता में उपयोग हेतु अत्यंत संकीर्ण किरण-पुंजों में फोकसित किया जा सकता है। जल शोधक में पराबैंगनी (UV) लैंपों का उपयोग जीवाणुओं को मारने में होता है।

4.6 X-किरणें

वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के UV भाग के पश्चात X-किरणों का क्षेत्र है। चिकित्सीय उपयोगिता के कारण हम X-किरणों से परिचित हैं। इसका परास तरंगदैर्घ्य 10⁻⁸ m (10 nm) से लेकर नीचे 10⁻¹³ m (10⁻⁴ nm) तक फैला है। X-किरणों के उत्पादन की एक सामान्य विधि किसी धात्वीय लक्ष्य पर उच्च ऊर्जा के इलेक्ट्रॉनों की बौछार करना है। चिकित्सा में X-किरणों को नैदानिक साधन के रूप में तथा कुछ प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए उपयोग में लाते हैं।

सावधानी: चूँकि X-किरणें सजीव ऊतकों तथा जीवों को हानि पहुँचाती हैं या नष्ट कर देती हैं, इसलिए इनसे अनावश्यक अथवा अधिक उद्भासन (exposure) से बचने की सावधानी बरतनी चाहिए।

4.7 गामा किरणें

ये वैद्युतचुंबकीय स्पेक्ट्रम के ऊपरी आवृत्ति के क्षेत्र में होती हैं तथा इनकी तरंगदैर्घ्य लगभग 10⁻¹⁰ m से लेकर 10⁻¹⁴ m से भी कम होती है। उच्च आवृत्ति का यह विकिरण नाभिकीय अभिक्रियाओं में उत्पन्न होता है। यह रेडियोधर्मी नाभिकों द्वारा भी उत्सर्जित होता है। ये चिकित्सा में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए भी उपयोगी हैं।

विभिन्न वैद्युतचुंबकीय तरंगों के अभिलक्षण

प्रकारतरंगदैर्घ्य का परासउत्पादनसंसूचन
रेडियो तरंगें> 0.1 mएरियल में इलेक्ट्रॉनों का द्रुत त्वरण या मंदनअभिग्राहक के एरियल
सूक्ष्म तरंगें0.1 m से 1 mmक्लेस्ट्रॉन या मेगनेट्रॉन वाल्वबिंदु संपर्क डायोड
अवरक्त तरंगें1 mm से 700 nmपरमाणुओं एवं अणुओं के कंपनथर्मोपाइल, बोलोमीटर, अवरक्त फोटोग्राफिक फिल्म
प्रकाश तरंगें700 nm से 400 nmपरमाणु में इलेक्ट्रॉन, उच्चतर से निम्नतर ऊर्जा स्तर पर संक्रमणमानवीय नेत्र, फोटो सेल, फोटोग्राफिक फिल्म
पराबैंगनी प्रकाश तरंगें400 nm से 1 nmपरमाणु के आंतरिक शैलों में इलेक्ट्रॉनों का संक्रमणफोटो सेल, फोटोग्राफिक फिल्म
X-किरणें1 nm से 10⁻³ nmX-किरण नलिका अथवा आंतरिक शैलों के इलेक्ट्रॉनफोटोग्राफिक फिल्म, गीगर ट्यूब, आयनीकरण प्रकोष्ठ
गामा किरणें< 10⁻³ nmनाभिकों का रेडियोऐक्टिव क्षयफोटोग्राफिक फिल्म, गीगर ट्यूब, आयनीकरण प्रकोष्ठ
NEET फोकस — em स्पेक्ट्रम
  • घटते तरंगदैर्घ्य (बढ़ती आवृत्ति) का क्रम: रेडियो तरंगें → सूक्ष्म तरंगें → अवरक्त → दृश्य प्रकाश → पराबैंगनी → X-किरणें → गामा किरणें।
  • रेडियो तरंगें चालक तारों में आवेशों की त्वरित गति से उत्पन्न होती हैं (परास: 500 kHz–1000 MHz)।
  • सूक्ष्म तरंगें क्लाइस्ट्रॉन/मेगनेट्रॉन/गन डायोड से उत्पन्न होती हैं; रडार व माइक्रोवेव ऑवन में उपयोग।
  • अवरक्त तरंगों को "ऊष्मा तरंगें" भी कहा जाता है; हरित गृह प्रभाव में भूमिका।
  • दृश्य प्रकाश परास: लगभग 700 nm (लाल) से 400 nm (बैंगनी); मानव नेत्र इसी परास के प्रति संवेदनशील।
  • पराबैंगनी (UV) तरंगें ओजोन परत (40–50 km ऊँचाई) द्वारा अधिकांशतः अवशोषित होती हैं।
  • CFC गैसें ओजोन परत को नष्ट करती हैं — अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय।
  • X-किरणें उच्च ऊर्जा इलेक्ट्रॉनों को धात्विक लक्ष्य पर टकराने से उत्पन्न होती हैं; चिकित्सा निदान व कैंसर उपचार में उपयोग।
  • गामा किरणें सबसे अधिक ऊर्जावान/उच्च आवृत्ति की em तरंगें हैं; नाभिकीय अभिक्रियाओं व रेडियोधर्मी क्षय से उत्पन्न।
  • विभिन्न प्रकार की em तरंगों में मौलिक अंतर उनकी तरंगदैर्घ्य/आवृत्ति में है — निर्वात में सभी की चाल समान (c)।

✓ सारांश व सूत्र-सूची

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

विस्थापन धारा

id = ε₀(dΦE/dt); कुल धारा i = ic + id

मैक्सवेल समीकरण

चार समीकरण — विद्युत व चुंबकत्व के गाउस नियम, फैराडे नियम, ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम

em तरंग के स्रोत

केवल त्वरित आवेश (स्थिर आवेश या एकसमान गति वाले आवेश नहीं)

em तरंग की प्रकृति

E व B परस्पर लंबवत व गमन-दिशा के भी लंबवत (अनुप्रस्थ); दोनों समान कला में

मूल संबंध

ω = ck; νλ = c; B₀ = E₀/c

चाल

निर्वात में c = 1/√(μ₀ε₀) ≈ 3×10⁸ m/s; माध्यम में v = 1/√(με)

em स्पेक्ट्रम क्रम

रेडियो → सूक्ष्म → अवरक्त → दृश्य → पराबैंगनी → X-किरणें → गामा किरणें

फोटॉन ऊर्जा

E = hν; तरंगदैर्घ्य जितना कम, फोटॉन ऊर्जा उतनी अधिक

ऊर्जा घनत्व

⟨uE⟩ = ⟨uB⟩; कुल ऊर्जा दोनों में समान रूप से बँटी

📊 भौतिक राशियाँ तालिका

प्रतीक, मात्रक एवं सूत्र

भौतिक राशिप्रतीकमात्रकसूत्र / टिप्पणी
विस्थापन धाराidAid = ε₀(dΦE/dt)
कुल धाराiAi = ic + id
समांतर प्लेट संधारित्र की धारिताCFC = ε₀A/d = ε₀πR²/d
संधारित्र के बीच चुंबकीय क्षेत्र (r≤R)BTB = μ₀i₀r/(2πR²)
तरंग सदिश (परिमाण)krad/mk = 2π/λ
कोणीय आवृत्तिωrad/sω = 2πν = ck
निर्वात में em तरंग की चालcm/sc = 1/√(μ₀ε₀) ≈ 3×10⁸ m/s
माध्यम में em तरंग/प्रकाश की चालvm/sv = 1/√(με)
E, B आयाम संबंधE₀, B₀—E₀ = B₀c
तरंग की मूल पहचानνλm/sνλ = c
फोटॉन ऊर्जाEJ या eVE = hν, h=6.63×10⁻³⁴ J·s
विद्युत क्षेत्र की औसत ऊर्जा घनत्व⟨uE⟩J/m³⟨uE⟩ = (1/4)ε₀E₀²
चुंबकीय क्षेत्र की औसत ऊर्जा घनत्व⟨uB⟩J/m³⟨uB⟩ = B₀²/(4μ₀)
नियतांक: ε₀ = 8.854×10⁻¹² C²N⁻¹m⁻²; μ₀ = 4π×10⁻⁷ T·m/A; c = 3×10⁸ m/s; h = 6.63×10⁻³⁴ J·s; 1 eV = 1.6×10⁻¹⁹ J

★ NEET फैक्ट-शीट

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

अवधारणाप्रमुख तथ्य
विस्थापन धाराid = ε₀(dΦE/dt); कुल धारा = चालन + विस्थापन
मैक्सवेल समीकरणचार समीकरण — विद्युत/चुंबकत्व के गाउस नियम, फैराडे नियम, ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम
em तरंग के स्रोतत्वरित/त्वरित होता आवेश
em तरंग की प्रकृतिअनुप्रस्थ; E व B परस्पर व गमन-दिशा के लंबवत; E, B समान कला में
चाल (निर्वात)c = 1/√(μ₀ε₀) ≈ 3×10⁸ m/s
चाल (माध्यम)v = 1/√(με) = c/n
E व B का संबंधE₀ = B₀c
तरंग संबंधω = ck; νλ = c
em स्पेक्ट्रम क्रमरेडियो → सूक्ष्म → अवरक्त → दृश्य → UV → X-किरणें → गामा किरणें
रेडियो तरंगेंचालक तारों में त्वरित आवेशों से; AM/FM, TV संचार
सूक्ष्म तरंगेंक्लाइस्ट्रॉन/मेगनेट्रॉन से; रडार, माइक्रोवेव ऑवन
अवरक्तगर्म पिंडों से; रिमोट कंट्रोल, हरित गृह प्रभाव
दृश्य प्रकाश700–400 nm; मानव नेत्र संवेदनशील
पराबैंगनी (UV)ओजोन परत द्वारा अवशोषण; जल-शुद्धिकरण, LASIK
X-किरणेंउच्च ऊर्जा इलेक्ट्रॉन-टक्कर; चिकित्सा निदान, कैंसर उपचार
गामा किरणेंनाभिकीय क्षय; कैंसर कोशिका-नाशन, सबसे अधिक ऊर्जा
फोटॉन ऊर्जाE = hν = hc/λ; तरंगदैर्घ्य जितना कम, ऊर्जा उतनी अधिक
ऊर्जा घनत्व समता⟨uE⟩ = ⟨uB⟩ — EM तरंग की कुल ऊर्जा दोनों में समान बँटी

📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न

विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु

1 सूक्ष्म तरंगें, UV किरणें, गामा किरणें तथा रेडियो तरंगें — इनके सही अनुप्रयोगों (जल-शुद्धिकरण, भोजन गर्म करना, AM/FM संचार, कैंसर-कोशिका उपचार) से सुमेलन कीजिए।

उत्तर: सूक्ष्म तरंगें–भोजन गर्म करना, UV–जल-शुद्धिकरण, गामा–कैंसर उपचार, रेडियो–AM/FM संचार

प्रत्येक तरंग की ऊर्जा/प्रकृति के अनुसार उसका विशिष्ट उपयोग है।

2 परावैद्युत माध्यम (εᵣ=9, μᵣ=1) में EM तरंग का विद्युत क्षेत्र Ex=E₀sin(kz−2π×10⁶t) V/m है। चाल व तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।

उत्तर: v = 10⁸ m/s, λ = 100 m

v = c/√(μᵣεᵣ) = 3×10⁸/3 = 10⁸ m/s; f = 10⁶ Hz; λ = v/f = 100 m

3 सूची-I (वैद्युतचुंबकीय तरंग) व सूची-II (उत्पादन विधि) का सही सुमेलन कीजिए: (A) सूक्ष्म तरंगें (B) दृश्य प्रकाश (C) गामा किरणें (D) अवरक्त किरणें — (I) परमाणुओं में इलेक्ट्रॉन संक्रमण (II) नाभिक का रेडियोसक्रिय क्षय (III) परमाणुओं/अणुओं का कंपन (IV) क्लिस्ट्रॉन/मैग्नेट्रॉन वाल्व

उत्तर: A–IV, B–I, C–II, D–III

प्रत्येक तरंग की विशिष्ट उत्पादन-प्रक्रिया होती है।

4 समतल EM तरंग का विद्युत क्षेत्र Ez=60cos(5x+1.5×10⁹t) V/m है। संगत चुंबकीय क्षेत्र के लिए सही व्यंजक चुनिए।

उत्तर: By = 2×10⁻⁷cos(5x+1.5×10⁹t) T

तर्क के धनात्मक चिह्न से −x दिशा में प्रसार; E z-दिशा में ⟹ B y-दिशा में; B₀=E₀/c=2×10⁻⁷ T

5 सबसे कम तरंगदैर्घ्य वाला वैद्युतचुंबकीय विकिरण कौन-सा है?

उत्तर: गामा किरणें

em स्पेक्ट्रम में गामा किरणों की तरंगदैर्घ्य सबसे कम (तथा ऊर्जा सबसे अधिक) होती है।

6 किसी माध्यम में आपेक्षिक चुंबकनशीलता (μᵣ) व आपेक्षिक विद्युतशीलता (εᵣ) का अनुपात 1:4 है। EM तरंग के लिए E/H अनुपात ज्ञात कीजिए (√(μ₀/ε₀)=120π)।

उत्तर: 60π

E/H = √(μᵣ/εᵣ)×√(μ₀/ε₀) = (1/2)×120π = 60π

7 निर्वात में गमन कर रही EM तरंग के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा गुणधर्म सत्य नहीं है?

उत्तर: "यह गमन के लिए किसी माध्यम की अनिवार्य आवश्यकता रखती है" — यह कथन असत्य है।

EM तरंगें निर्वात (पूर्ण रिक्त स्थान) में भी c चाल से गमन कर सकती हैं।

8 समतल EM तरंग का विद्युत क्षेत्र घटक 2.0×10¹⁰ Hz आवृत्ति व 48 Vm⁻¹ आयाम पर ज्यावक्रीय दोलन करता है। चुंबकीय क्षेत्र का आयाम ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 1.6 × 10⁻⁷ T

B₀ = E₀/c = 48/(3×10⁸) = 1.6×10⁻⁷ T

9 समतल EM तरंग का चुंबकीय क्षेत्र B = 3×10⁻⁸cos(1.6×10³x + 48×10¹⁰t)ĵ T है। संगत विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

उत्तर: E = 9cos(1.6×10³x+48×10¹⁰t) k̂ V/m

प्रसार −x दिशा में; B y-दिशा में ⟹ E z-दिशा में; E₀=B₀c=9 V/m

10 निर्वात में EM तरंग के लिए B/E का अनुपात क्या है?

उत्तर: 1/c

E = cB ⟹ B/E = 1/c

11 निम्नलिखित का सुमेलन कीजिए: (a) AM रेडियो तरंगें (b) सूक्ष्म तरंगें (c) अवरक्त विकिरण (d) X-किरणें — (i) 10⁻¹⁰ m (ii) 10² m (iii) 10⁻² m (iv) 10⁻⁴ m

उत्तर: a–ii, b–iii, c–iv, d–i

AM ≈ 100 m; सूक्ष्म ≈ 1 cm = 10⁻² m; अवरक्त ≈ 10⁻⁴ m (माइक्रोन कोटि); X-किरणें ≈ 10⁻¹⁰ m

12 पदार्थ-माध्यम में प्रकाश की चाल v का सूत्र क्या होगा (c = निर्वात में चाल)?

उत्तर: v = c/√(εᵣμᵣ)

v = 1/√(με) = c/√(εᵣμᵣ)

13 +x दिशा में गमन कर रही समतल EM तरंग का विद्युत क्षेत्र +y दिशा में है। चुंबकीय क्षेत्र की सही दिशा क्या होगी?

उत्तर: +z दिशा

E×B = प्रसार-दिशा (ĵ×k̂ = î) ⟹ B, +z दिशा में

14 EM तरंग की तीव्रता में विद्युत क्षेत्र-घटक तथा चुंबकीय क्षेत्र-घटक द्वारा किए गए योगदानों का अनुपात क्या है?

उत्तर: 1 : 1

⟨uE⟩ = ⟨uB⟩ — दोनों घटक तीव्रता में बराबर योगदान करते हैं।

15 दृश्य प्रकाश स्पेक्ट्रम में किस रंग की तरंगदैर्घ्य सबसे अधिक होती है?

उत्तर: लाल

दृश्य स्पेक्ट्रम में तरंगदैर्घ्य: लाल (≈700nm) > ... > बैंगनी (≈400nm)

16 EM तरंग v = v î से गमन कर रही है, विद्युत क्षेत्र +y अक्ष के अनुदिश है। चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी?

उत्तर: +z अक्ष

E×B = प्रसार-दिशा ⟹ ĵ×B = î ⟹ B, +k̂ दिशा में

17 मुक्त आकाश में EM तरंग का Erms = 6 V/m है। चुंबकीय क्षेत्र का शिखर मान ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 2.83 × 10⁻⁸ T

E₀ = Erms√2 = 8.485 V/m; B₀ = E₀/c = 2.83×10⁻⁸ T

18 प्रसारी EM तरंग उत्पन्न करने के लिए किसका उपयोग किया जा सकता है?

उत्तर: कोई त्वरित होता विद्युत आवेश

केवल त्वरित आवेश (दोलायमान सहित) EM तरंगें उत्पन्न करता है; स्थिर या एकसमान-वेग आवेश नहीं।

19 EM तरंग की ऊर्जा लगभग 15 keV की कोटि की है। यह स्पेक्ट्रम के किस भाग से संबंधित है?

उत्तर: X-किरणें

X-किरणों की ऊर्जा ≈ 100 eV से 100 keV की कोटि की होती है (UV ≈ कुछ-100 eV; गामा ≈ MeV+)।

20 ऊर्जा E का विकिरण किसी पूर्णतः परावर्तक सतह पर लंबवत आपतित है। सतह पर स्थानांतरित संवेग ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 2E/c

परावर्तक सतह पर संवेग-परिवर्तन दोगुना — 2E/c

21 25×10⁴ W/m² ऊर्जा-फ्लक्स का प्रकाश किसी पूर्णतः परावर्तक सतह (15 cm²) पर लंबवत आपतित है। सतह पर औसत बल ज्ञात कीजिए।

उत्तर: 2.5 × 10⁻⁶ N

P = I×A = 375 W; F = 2P/c = 2×375/(3×10⁸) = 2.5×10⁻⁶ N

22 आवृत्ति 3.0 MHz की EM तरंग निर्वात से परावैद्युत माध्यम (εᵣ=4) में प्रवेश करती है। आवृत्ति व तरंगदैर्घ्य पर प्रभाव बताइए।

उत्तर: आवृत्ति अपरिवर्तित रहेगी, तरंगदैर्घ्य आधी हो जाएगी

v = c/√εᵣ = c/2 ⟹ λ = v/ν = λ₀/2

23 माइक्रोवेव ओवन जल-अणुओं वाले खाद्य पदार्थ को सर्वाधिक कुशलतापूर्वक कब गर्म करता है?

उत्तर: जब माइक्रोवेव की आवृत्ति, जल-अणुओं की अनुनाद-आवृत्ति के निकट हो

अनुनाद पर ऊर्जा-अवशोषण अधिकतम होता है — जल-अणुओं के द्विध्रुवीय घूर्णन से ऊष्मा।

➕ अतिरिक्त NEET तथ्य

सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं

महत्वपूर्ण
  • इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (~8–12 अंक) पूछे जाते हैं; सर्वाधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — em स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों की पहचान (आवृत्ति परास व उपयोग), विस्थापन धारा, तथा E₀/B₀=c व ऊर्जा घनत्व की समता संबंधी संख्यात्मक प्रश्न।
तथ्य
  • विस्थापन धारा — मैक्सवेल का योगदान — संधारित्र के आवेशन के दौरान प्लेटों के बीच के रिक्त स्थान में परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र के कारण "विस्थापन धारा" Id=ε₀(dΦE/dt) उत्पन्न मानी जाती है; मैक्सवेल ने इसे जोड़कर ऐम्पियर के नियम को संशोधित किया — यह वैद्युतचुंबकीय तरंगों की सैद्धांतिक भविष्यवाणी की कुंजी थी।
तथ्य
  • संशोधित ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम — ∮B·dl = μ₀(Ic+Id) = μ₀Ic+μ₀ε₀(dΦE/dt); यह दर्शाता है कि चुंबकीय क्षेत्र न केवल चालन धारा (Ic) द्वारा, बल्कि परिवर्तनशील विद्युत क्षेत्र (विस्थापन धारा के रूप में) द्वारा भी उत्पन्न हो सकता है — यह फैराडे के नियम का ठीक सममित प्रतिरूप है।
तुलनात्मक
  • प्रत्येक स्पेक्ट्रमी क्षेत्र की विशिष्ट आवृत्ति परास — रेडियो (<3 GHz, तार में दोलायमान आवेशों से); सूक्ष्म तरंगें (3–300 GHz, क्लाइस्ट्रॉन/मैग्नेट्रॉन से); अवरक्त (300 GHz–4×10¹⁴ Hz, तप्त वस्तुओं से); दृश्य (4×10¹⁴–7×10¹⁴ Hz); पराबैंगनी (8×10¹⁴–3×10¹⁷ Hz); X-किरणें (3×10¹⁶–3×10²¹ Hz); γ-किरणें (>3×10¹⁸ Hz)।
तथ्य
  • मुक्त आकाश की अभिलाक्षणिक प्रतिबाधा — निर्वात के लिए Z₀=√(μ₀/ε₀)≈377Ω; यह राशि एंटीना अभिकल्पन व em तरंगों के संचरण संबंधी उन्नत-स्तरीय प्रश्नों में प्रयुक्त होती है।
तथ्य
  • X-किरण उत्पादन व चिकित्सीय उपयोग — X-किरणें उच्च ऊर्जा इलेक्ट्रॉनों को धातु लक्ष्य पर आपतित कराकर उत्पन्न की जाती हैं; चिकित्सा क्षेत्र में अस्थि-भंग के निदान (हड्डियाँ नरम ऊतकों से अधिक अवशोषण करती हैं) व कैंसर चिकित्सा में प्रयुक्त होती हैं।
तुलनात्मक
  • X-किरण बनाम γ-किरण की उत्पत्ति में अंतर — दोनों उच्च-ऊर्जा होने के बावजूद X-किरणें परमाण्विक प्रक्रियाओं (इलेक्ट्रॉन संक्रमण/मंदन) से उत्पन्न होती हैं, जबकि γ-किरणें नाभिकीय प्रक्रियाओं (रेडियोऐक्टिव क्षय) से उत्पन्न होती हैं — उत्पत्ति का स्रोत ही इनके वर्गीकरण का आधार है।
तथ्य
  • पराबैंगनी (UV) किरणों के जैविक प्रभाव — विटामिन-D संश्लेषण हेतु आवश्यक (सीमित मात्रा में लाभदायक); अधिक मात्रा में त्वचा-कैंसर व नेत्र-क्षति का कारण; जल-शोधन व निर्जर्मीकरण में उपयोग — ओज़ोन परत इन हानिकारक किरणों को अवशोषित कर पृथ्वी की रक्षा करती है।
तथ्य
  • em तरंग में E, B व संचरण-दिशा के मध्य संबंध — E, B, तथा संचरण-दिशा तीनों परस्पर लंबवत्; संचरण-दिशा सदैव E×B की दिशा में होती है (दायें-हस्त नियम) — E व B की दिशाएँ दी हों, तो संचरण-दिशा सीधे E×B से ज्ञात की जा सकती है।
तथ्य
  • पॉयंटिंग सदिश — किसी em तरंग द्वारा प्रति एकांक क्षेत्रफल प्रति एकांक समय स्थानांतरित ऊर्जा (तीव्रता) को पॉयंटिंग सदिश S=(1/μ₀)(E×B) द्वारा व्यक्त किया जाता है; औसत तीव्रता ⟨S⟩=(1/2)ε₀cE₀²।
तुलनात्मक
  • विकिरण-दाब — अवशोषक बनाम परावर्तक — पूर्णतः अवशोषक सतह पर दाब p=I/c; पूर्णतः परावर्तक सतह पर दाब दोगुनी p=2I/c (संवेग-परिवर्तन दोगुना) — यह सौर पाल (solar sail) प्रौद्योगिकी का सैद्धांतिक आधार है।
तथ्य
  • em तरंगों को संचरण हेतु माध्यम की आवश्यकता नहीं — ध्वनि तरंगों (यांत्रिक, जिन्हें माध्यम आवश्यक) के विपरीत, वैद्युतचुंबकीय तरंगें निर्वात में भी संचरित हो सकती हैं (जैसे सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश) — यही कारण है कि अंतरिक्ष में ध्वनि नहीं सुनी जा सकती परन्तु प्रकाश देखा जा सकता है।
तथ्य
  • माध्यम में em तरंग की चाल — निर्वात में c=1/√(μ₀ε₀)≈3×10⁸ m/s; किसी माध्यम (अपवर्तनांक n) में v=c/n=1/√(με), जो सदैव c से कम होती है — यही अपवर्तन का मूल कारण है।
रणनीति
  • मैक्सवेल-हर्ट्ज़-मार्कोनी का ऐतिहासिक कालक्रम — 1864: मैक्सवेल ने सैद्धांतिक भविष्यवाणी (प्रकाश = em तरंग); 1887: हर्ट्ज़ ने प्रयोगात्मक पुष्टि; तत्पश्चात जगदीश चंद्र बसु व मार्कोनी ने व्यावहारिक संचार-अनुप्रयोग विकसित किए।
रणनीति
  • विस्थापन धारा — वैचारिक स्पष्टीकरण — विस्थापन धारा कोई वास्तविक आवेश-प्रवाह नहीं है, बल्कि परिवर्तनशील विद्युत फ्लक्स के कारण उत्पन्न एक "प्रभावी" धारा है जो चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने में चालन धारा जैसा ही प्रभाव डालती है।
तथ्य
  • दृश्य प्रकाश की परास व रंग-क्रम — मानव नेत्र द्वारा संसूचनीय दृश्य प्रकाश की तरंगदैर्घ्य परास लगभग 400 nm (बैंगनी) से 700 nm (लाल); इंद्रधनुष के रंगों का क्रम (VIBGYOR) तरंगदैर्घ्य के बढ़ते क्रम में।

? अभ्यास प्रश्न-उत्तर

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प्रश्न 8.1 12 cm त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों को 5.0 cm की दूरी पर रखकर बने संधारित्र को आवेशित किया जा रहा है (आवेशकारी धारा 0.15A, नियत)। (a) धारिता एवं dV/dt ज्ञात कीजिए। (b) प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए। (c) क्या किरखोफ का प्रथम नियम प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है?
उत्तर

R = 0.12 m, d = 0.05 m, i = 0.15 A

(a) C = ε₀πR²/d = (8.854×10⁻¹²×0.04524)/0.05 ≈ 8.01 pF; dV/dt = i/C = 0.15/(8.01×10⁻¹²) ≈ 1.87×10¹⁰ V/s

(b) विस्थापन धारा, चालन धारा के बराबर: id = ic = 0.15 A

(c) हाँ, यदि विस्थापन धारा को भी सम्मिलित किया जाए (कुल धारा = चालन + विस्थापन) — तब संशोधित किरखोफ का प्रथम नियम प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है।

प्रश्न 8.2 समांतर प्लेट संधारित्र (R=6.0 cm, C=100 pF) को 230 V, 300 rad/s के स्रोत से जोड़ा गया है। (a) चालन धारा का rms मान? (b) क्या चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर है? (c) अक्ष से 3.0 cm दूरी पर B का आयाम?
उत्तर

R = 0.06 m, C = 100 pF, V = 230 V, ω = 300 rad/s

(a) Irms = VωC = 230×300×100×10⁻¹² = 6.9 × 10⁻⁶ A = 6.9 μA

(b) हाँ, चालन धारा = विस्थापन धारा (ऐम्पियर-मैक्सवेल नियम के अनुसार) — दोनों rms मान भी समान।

(c) i₀ = √2×6.9×10⁻⁶ ≈ 9.76×10⁻⁶ A; B = μ₀i₀r/(2πR²) = 2×10⁻⁷×9.76×10⁻⁶×0.03/(0.06)² ≈ 1.63 × 10⁻¹¹ T

प्रश्न 8.3 10⁻¹⁰ m तरंगदैर्घ्य की X-किरणों, 6800 Å तरंगदैर्घ्य के प्रकाश तथा 500 m की रेडियो तरंगों के लिए किस भौतिक राशि का मान समान है?
उत्तर

ये तीनों em तरंगें हैं; सभी की निर्वात में चाल समान होती है — c = 3 × 10⁸ m/s (तरंगदैर्घ्य पर निर्भर नहीं करती)।

प्रश्न 8.4 समतल em तरंग निर्वात में z-अक्ष के अनुदिश चल रही है। E व B की दिशा बताइए। यदि आवृत्ति 30 MHz हो तो तरंगदैर्घ्य कितनी होगी?
उत्तर

E व B परस्पर लंबवत तथा दोनों z-अक्ष (गमन-दिशा) के भी लंबवत — x-y तल में स्थित होंगे (E×B = z-दिशा)।

λ = c/ν = (3×10⁸)/(30×10⁶) = 10 m

प्रश्न 8.5 एक रेडियो 7.5 MHz से 12 MHz बैंड के किसी स्टेशन से समस्वरित हो सकता है। संगत तरंगदैर्घ्य बैंड क्या होगा?
उत्तर

λ₁ = c/ν₁ = (3×10⁸)/(7.5×10⁶) = 40 m (निम्न आवृत्ति, अधिकतम तरंगदैर्घ्य)

λ₂ = c/ν₂ = (3×10⁸)/(12×10⁶) = 25 m (उच्च आवृत्ति, न्यूनतम तरंगदैर्घ्य)

तरंगदैर्घ्य बैंड: 25 m से 40 m

प्रश्न 8.6 आवेशित कण अपनी माध्य साम्यावस्था के दोनों ओर 10⁹ Hz आवृत्ति से दोलन करता है। दोलक द्वारा जनित em तरंगों की आवृत्ति कितनी है?
उत्तर

दोलायमान आवेश त्वरित आवेश का उदाहरण है; उत्पन्न em तरंगों की आवृत्ति = आवेश के दोलन की आवृत्ति।

आवृत्ति = 10⁹ Hz (1 GHz)

प्रश्न 8.7 निर्वात में आवर्त em तरंग के चुंबकीय क्षेत्र का आयाम B₀ = 510 nT है। तरंग के विद्युत क्षेत्र का आयाम क्या है?
उत्तर

B₀ = 510×10⁻⁹ T; E₀ = B₀×c = 510×10⁻⁹ × 3×10⁸

E₀ = 153 N/C

प्रश्न 8.8 em तरंग के विद्युत क्षेत्र का आयाम E₀ = 120 N/C तथा आवृत्ति ν = 50.0 MHz है। (a) B₀, ω, k, λ ज्ञात कीजिए। (b) E व B के लिए व्यंजक लिखिए।
उत्तर

(a) B₀ = E₀/c = 120/(3×10⁸) = 4×10⁻⁷ T; ω = 2πν = 3.14×10⁸ rad/s; k = ω/c = 1.05 rad/m; λ = c/ν = 6 m

(b) मानें तरंग x-दिशा में गमन करती है (E, y-दिशा में; B, z-दिशा में):

E = 120 sin(1.05x−3.14×10⁸t) ĵ N/C; B = 4×10⁻⁷ sin(1.05x−3.14×10⁸t) k̂ T

प्रश्न 8.9 सूत्र E=hν का उपयोग करके em वर्णक्रम के विभिन्न भागों के लिए eV में फोटॉन ऊर्जा निकालिए तथा स्रोतों से संबंध स्पष्ट कीजिए।
उत्तर

E = hc/λ; h=6.63×10⁻³⁴ J·s, 1 eV = 1.6×10⁻¹⁹ J

प्रारूपिक फोटॉन ऊर्जाएँ: रेडियो (~100 m) ≈ 10⁻⁸ eV; सूक्ष्म (~1 cm) ≈ 10⁻⁴ eV; अवरक्त (~1 μm) ≈ 1 eV; दृश्य (~500 nm) ≈ 2.5 eV; पराबैंगनी (~200 nm) ≈ 6 eV; X-किरणें (~0.1 nm) ≈ 10⁴ eV; गामा (~10⁻⁴ nm) ≈ 10⁷ eV

स्रोत संबंध: फोटॉन ऊर्जा जितनी अधिक, उत्पन्न करने वाली प्रक्रिया उतनी ही अधिक ऊर्जावान — रेडियो (परिपथ में त्वरित इलेक्ट्रॉन) → अवरक्त (आणविक कंपन) → दृश्य/UV (परमाण्विक इलेक्ट्रॉन संक्रमण) → X-किरणें (आंतरिक कोश संक्रमण/उच्च ऊर्जा टक्कर) → गामा (नाभिकीय प्रक्रियाएँ)।

प्रश्न 8.10 समतल em तरंग में विद्युत क्षेत्र 2.0×10¹⁰ Hz आवृत्ति तथा 48 Vm⁻¹ आयाम पर ज्यावक्रीय दोलन करता है। (a) तरंगदैर्घ्य? (b) चुंबकीय क्षेत्र का आयाम? (c) दर्शाइए कि ⟨uE⟩ = ⟨uB⟩।
उत्तर

(a) λ = c/ν = (3×10⁸)/(2.0×10¹⁰) = 1.5 × 10⁻² m = 1.5 cm

(b) B₀ = E₀/c = 48/(3×10⁸) = 1.6 × 10⁻⁷ T

(c) सिद्ध कीजिए: ⟨uE⟩=ε₀E₀²/4; ⟨uB⟩=B₀²/(4μ₀)। चूँकि E₀=B₀c तथा c²=1/(μ₀ε₀): B₀²/(4μ₀)=E₀²/(4μ₀c²)=ε₀E₀²/4=⟨uE⟩।

संख्यात्मक सत्यापन: ⟨uE⟩ ≈ 5.10×10⁻⁹ J/m³; ⟨uB⟩ ≈ 5.09×10⁻⁹ J/m³ — लगभग बराबर।

यह अध्ययन सामग्री वैद्युतचुंबकीय तरंगें — मैक्सवेल के समीकरण, विस्थापन धारा, em तरंगों की प्रकृति एवं सम्पूर्ण स्पेक्ट्रम — को सरल, मौलिक एवं परीक्षा-अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिसमें NEET-स्तरीय तथ्य, तुलनात्मक तालिकाएँ एवं विस्तृत प्रश्नोत्तर सम्मिलित हैं।

वैद्युतचुंबकीय तरंगें — विद्युत, चुंबकत्व एवं प्रकाश के एकीकरण का सुंदर प्रमाण।

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