परमाणु की संरचना

परमाणु की संरचना — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 2)
रसायन विज्ञान • कक्षा-11 • अध्याय 2

परमाणु की संरचना

कैथोड किरणों से इलेक्ट्रॉन की खोज, थॉमसन व रदरफोर्ड मॉडल, प्लांक का क्वांटम सिद्धांत, बोर मॉडल, डी ब्रॉग्ली व हाइज़ेनबर्ग के सिद्धांत, क्वांटम यांत्रिकी मॉडल और कक्षकों की आकृतियाँ — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, चित्र, त्वरित तथ्य और सभी 67 अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही जगह।

e, p, n — मूल कण
Hψ = Eψ — श्रोडिंजर समीकरण
n, l, mₗ, mₛ — क्वांटम संख्याएँ
★ NEET फोकस तथ्य

2.1 अवपरमाण्विक कणों की खोज

1808 में जॉन डाल्टन ने परमाणु सिद्धांत दिया — परमाणु को द्रव्य का मूल, अविभाज्य कण माना। परंतु 19वीं सदी के अंत में प्रयोगों ने सिद्ध कर दिया कि परमाणु स्वयं विभाज्य है तथा तीन मूल कणों — इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन — से बना होता है।

कैथोड (−) ऐनोड (+) कैथोड किरणें (इलेक्ट्रॉन) → स्फुरदीप्त पर्दा आंशिक निर्वातित कैथोड किरण नलिका
चित्र 2.1 — कैथोड किरण नलिका (इलेक्ट्रॉन की खोज का आधार)

मुख्य प्रयोग व खोजें

  • जे.जे. थॉमसन (1897) — कैथोड किरण नलिका द्वारा इलेक्ट्रॉन की खोज; e/me अनुपात मापा। कैथोड किरणों का व्यवहार नलिका के पदार्थ व गैस की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता — अतः इलेक्ट्रॉन सभी परमाणुओं का मूल घटक हैं।
  • आर.ए. मिलिकन (1906–14) — तेल बूँद प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन का यथार्थ आवेश ज्ञात किया।
  • परिवर्तित कैथोड किरण नलिका से धनावेशित केनाल किरणें मिलीं — इनसे सबसे हल्का धनायन प्रोटॉन (हाइड्रोजन से, 1919) प्राप्त हुआ।
  • चैडविक (1932) — बेरीलियम पर α-कणों की बमबारी से न्यूट्रॉन की खोज।
कणचिह्नसापेक्ष आवेशद्रव्यमान (kg)द्रव्यमान (u)
इलेक्ट्रॉनe−19.109×10⁻³¹≈0
प्रोटॉनp+11.6726×10⁻²⁷≈1
न्यूट्रॉनn01.6749×10⁻²⁷≈1
त्वरित तथ्य
  • e/me = 1.758820 × 10¹¹ C kg⁻¹ (थॉमसन); इलेक्ट्रॉन आवेश e = −1.602 × 10⁻¹⁹ C (मिलिकन)।
  • इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.1094 × 10⁻³¹ kg — प्रोटॉन के द्रव्यमान का लगभग 1/1837 भाग।

2.2 परमाणु मॉडल

थॉमसन मॉडल (प्लम-पुडिंग)
α-कण पुंज सोने की पन्नी
रदरफोर्ड का α-कण प्रकीर्णन प्रयोग (1909)

थॉमसन मॉडल (1898)

परमाणु एक समान धनावेशित गोला (त्रिज्या ≈10⁻¹⁰m) है, जिसमें इलेक्ट्रॉन ऐसे धँसे रहते हैं कि स्थायी स्थिर वैद्युत व्यवस्था बनी रहे — "प्लम पुडिंग" या "तरबूज़ मॉडल"। यह परमाणु की विद्युत उदासीनता स्पष्ट करता था, परंतु भविष्य के प्रयोगों (α-प्रकीर्णन) के परिणामों से मेल नहीं खाया।

रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल (1911)

प्रेक्षण: अधिकांश α-कण बिना विक्षेपित निकल गए • कुछ ही धनावेशित α-कण विक्षेपित हुए • बहुत कम (20,000 में 1) लगभग 180° लौटे।
  • परमाणु के भीतर अधिकांश स्थान रिक्त है।
  • धनावेश व द्रव्यमान अत्यंत सूक्ष्म क्षेत्र — नाभिक — में संकेंद्रित है (नाभिक त्रिज्या ≈10⁻¹⁵m, परमाणु त्रिज्या ≈10⁻¹⁰m)।
  • इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर वृत्ताकार कक्षा में घूमते हैं — सौरमंडल जैसा मॉडल।
रदरफोर्ड मॉडल के दोष
  • मैक्सवेल के विद्युत-चुंबकीय सिद्धांतानुसार त्वरित आवेशित इलेक्ट्रॉन ऊर्जा विकिरित करते हुए सर्पिल पथ से नाभिक में गिर जाना चाहिए — परमाणु की स्थिरता स्पष्ट नहीं करता।
  • इलेक्ट्रॉनिक संरचना (इलेक्ट्रॉनों का वितरण व उनकी ऊर्जा) के बारे में कुछ नहीं बताता।

2.2.3 परमाणु संख्या, द्रव्यमान संख्या तथा समस्थानिक

परमाणु संख्याZ = प्रोटॉन संख्या = उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन संख्या
द्रव्यमान संख्याA = Z + n (न्यूट्रॉन संख्या)

निरूपण: AZX — जहाँ X तत्व का प्रतीक है।

पदपरिभाषाउदाहरण
समस्थानिक (Isotopes)Z समान, A भिन्न¹H, ²D, ³T
समभारिक (Isobars)A समान, Z भिन्न¹⁴₆C व ¹⁴₇N
त्वरित तथ्य
  • समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं (इलेक्ट्रॉन संख्या समान), भौतिक गुण भिन्न (द्रव्यमान भिन्न)।
  • धनायन में प्रोटॉन > इलेक्ट्रॉन; ऋणायन में इलेक्ट्रॉन > प्रोटॉन; न्यूट्रॉन संख्या सदैव A − Z।

2.3 विद्युत-चुंबकीय विकिरण

γ-किरणें X-किरणें पराबैंगनी दृश्य अवरक्त सूक्ष्म तरंग रेडियो c = ν λ (निर्वात में सभी विद्युत-चुंबकीय तरंगों की गति समान, c = 3.0×10⁸ m s⁻¹)
चित्र 2.7 — विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम
मूल संबंधc = ν λ
तरंग संख्याν̄ = 1/λ = ν/c

ν = आवृत्ति (Hz), λ = तरंगदैर्घ्य (m), c = प्रकाश की गति (3.0×10⁸ m s⁻¹)। स्पेक्ट्रम क्रम (ν बढ़ती हुई): रेडियो < सूक्ष्म तरंग < अवरक्त < दृश्य (बैंगनी→लाल) < पराबैंगनी < X-किरणें < γ-किरणें।

2.3.2 प्लांक क्वांटम सिद्धांत व प्रकाश-विद्युत प्रभाव

प्लांक ऊर्जा संबंधE = h ν = hc / λ    (h = 6.626×10⁻³⁴ J s)

विकिरण ऊर्जा विविक्त पैकेट (क्वांटा) के रूप में उत्सर्जित/अवशोषित होती है — E = 0, hν, 2hν, ... nhν (कभी बीच का मान नहीं)।

निष्कासित इलेक्ट्रॉन धातु सतह पर फोटॉन का टकराना
चित्र 2.9 — प्रकाश-विद्युत प्रभाव
कार्यफलनW₀ = h ν₀
आइंस्टीन समीकरणhν = hν₀ + ½ me
त्वरित तथ्य
  • ν > ν₀ (देहली आवृत्ति) पर ही इलेक्ट्रॉन निष्कासित होते हैं; निष्कासन तुरंत होता है (कोई समय-अंतराल नहीं)।
  • निष्कासित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ∝ तीव्रता; उनकी गतिज ऊर्जा ∝ आवृत्ति (तीव्रता पर निर्भर नहीं)।
  • आइंस्टीन (1905) ने प्लांक के क्वांटम सिद्धांत का उपयोग करके प्रकाश-विद्युत प्रभाव समझाया, इसके लिए 1921 में नोबेल पुरस्कार मिला।

2.3.3 परमाणु स्पेक्ट्रम — रिडबर्ग सूत्र

रिडबर्ग सूत्र (हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम)ν̄ = RH ( 1/n₁² − 1/n₂² ) cm⁻¹    RH = 109,677 cm⁻¹ ; n₂ > n₁
n=1 n=2 n=3 n=4 n=5 n=∞ लाइमैन श्रेणी (पराबैंगनी) बामर श्रेणी (दृश्य) पाशन श्रेणी (अवरक्त)
चित्र 2.11 — हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन संक्रमण (लाइमैन, बामर, पाशन श्रेणियाँ)
श्रेणीn₁स्पेक्ट्रमी क्षेत्र
लाइमैन1पराबैंगनी
बामर2दृश्य
पाशन3अवरक्त
ब्रेकेट4अवरक्त
फंड5अवरक्त

2.4 हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोर मॉडल

नील बोर (1913) ने रदरफोर्ड मॉडल में सुधार करते हुए स्थिरता की समस्या हल की — इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित (क्वांटित) ऊर्जा वाली कक्षाओं में घूम सकता है।

कक्षा त्रिज्याrn = 0.529 (n²/Z) Å = n² a₀
कक्षा ऊर्जाEn = −2.18×10⁻¹⁸ (Z²/n²) J atom⁻¹
कोणीय संवेगmevr = nh/2π
संक्रमण ऊर्जाΔE = Ef − Ei = hν
ऊर्जा में ऋण चिह्न दर्शाता है कि बद्ध इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा मुक्त इलेक्ट्रॉन (n=∞, E=0) से कम है। n=1 पर ऊर्जा सर्वाधिक ऋणात्मक — यह तलस्थ अवस्था (सर्वाधिक स्थायी) है।
बोर मॉडल की सीमाएँ
  • हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की सूक्ष्म संरचना (द्विक रेखाएँ) व अन्य परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं कर सका।
  • जीमन प्रभाव (चुंबकीय क्षेत्र में विपाटन) व स्टार्क प्रभाव (विद्युत क्षेत्र में विपाटन) स्पष्ट नहीं कर सका।
  • रासायनिक आबंध बनाने की व्याख्या नहीं कर सका। मूल कारण: बोर ने इलेक्ट्रॉन के तरंग-लक्षण व हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितता सिद्धांत की अनदेखी की।

2.5.1 द्रव्य का द्वैत व्यवहार — डी ब्रॉग्ली संबंध

लुई डी ब्रॉग्ली (1924) — विकिरण की तरह द्रव्य भी द्वैत व्यवहार (कण + तरंग) प्रदर्शित करता है।

डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्यλ = h / (mv) = h / p

यह सिद्धांत इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के विकास का आधार बना — साधारण वस्तुओं का द्रव्यमान अधिक होने से उनकी तरंगदैर्घ्य नगण्य होती है, परंतु इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म कणों की तरंगदैर्घ्य प्रयोगों द्वारा पहचानी जा सकती है।

2.5.2 हाइज़ेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत

वर्नर हाइज़ेनबर्ग (1927) — किसी इलेक्ट्रॉन की सही स्थिति और सही वेग का निर्धारण एक साथ करना असंभव है।

सामान्य रूपΔx · Δpx ≥ h / 4π
वेग रूपΔx · Δvx ≥ h / (4π m)
इसका मुख्य निहितार्थ: यह निश्चित प्रक्षेप-पथ (trajectory) के अस्तित्व का खंडन करता है — अतः बोर की कक्षाओं की अवधारणा अप्रामाणिक है और इलेक्ट्रॉन की स्थिति को प्रायिकता के रूप में व्यक्त किया जाता है। प्रभाव केवल सूक्ष्म कणों के लिए सार्थक है, स्थूल पिंडों के लिए नगण्य।

2.6 परमाणु का क्वांटम यांत्रिकी मॉडल व क्वांटम संख्याएँ

सन् 1926 में इरविन श्रोडिंजर ने तरंग समीकरण Hψ = Eψ दिया। इसे हल करने पर तीन क्वांटम संख्याएँ (n, l, ml) प्राप्त होती हैं; चौथी क्वांटम संख्या (प्रचक्रण, ms) उहलेनबैक व गाउडस्मिट (1925) द्वारा दी गई।

क्वांटम संख्याप्रतीकमानबताती है
मुख्यn1,2,3...कोश, आकार व मुख्यतः ऊर्जा
दिगंशी (कक्षक)l0 से (n−1)उपकोश, आकृति
चुंबकीय कक्षकml−l से +l (2l+1)त्रिविम अभिविन्यास
प्रचक्रणms+½ या −½प्रचक्रण दिशा
l01234
उपकोशspdfg
कक्षक संख्या (2l+1)13579
कोश में अधिकतम e⁻2n²
कक्षक कुल संख्या

नोड की कुल संख्या = n − 1; कोणीय नोड = l; त्रिज्य नोड = n − l − 1।

2.6.2 कक्षकों की आकृतियाँ

s कक्षक (गोलाकार) p कक्षक (डम्बल) d कक्षक (चतुष्पालि)
चित्र 2.13–2.15 — s, p, d कक्षकों के परिसीमा-सतह आरेख
  • s कक्षक — गोलाकार सममित; n बढ़ने से आकार बढ़ता है (4s > 3s > 2s > 1s)।
  • p कक्षक — दो पालियों वाला डम्बल आकार; तीन p कक्षक (2px, 2py, 2pz) परस्पर लंबवत, ऊर्जा व आकृति समान।
  • d कक्षक — पाँच d कक्षक (dxy, dyz, dxz, dx²−y², d); पहले चार की आकृति समान, पाँचवें की भिन्न, ऊर्जा सभी की बराबर।
  • बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में कक्षक ऊर्जा n तथा l दोनों पर निर्भर; हाइड्रोजन परमाणु में केवल n पर।

2.6.4–6 आफबाऊ, पाउली व हुंड नियम

1s 2s2p 3s3p3d 4s4p4d4f 5s5p 6s
चित्र 2.17 — कक्षकों को भरने का क्रम (आफबाऊ नियम)
1s < 2s < 2p < 3s < 3p < 4s < 3d < 4p < 5s < 4d < 5p < 6s < 4f < 5d < 6p < 7s ...

पाउली अपवर्जन सिद्धांत

किसी परमाणु में उपस्थित दो इलेक्ट्रॉनों की चारों क्वांटम संख्याएँ एक समान नहीं हो सकतीं — किसी कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन, विपरीत प्रचक्रण के साथ।

हुंड का अधिकतम बहुलता नियम

एक ही उपकोश के समभ्रंश कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक शुरू नहीं होता, जब तक प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए (सभी समांतर प्रचक्रण)।

त्वरित तथ्य
  • p³, p⁶, d⁵, d¹⁰, f⁷, f¹⁴ विन्यास अधिक स्थायी (सममित वितरण + अधिकतम विनिमय ऊर्जा)।
  • अपवाद: Cr = [Ar]3d⁵4s¹ (न कि 3d⁴4s²); Cu = [Ar]3d¹⁰4s¹ (न कि 3d⁹4s²)।
  • क्रोड इलेक्ट्रॉन = पूर्ण भरे भीतरी कोशों के इलेक्ट्रॉन; संयोजकता इलेक्ट्रॉन = उच्चतम n वाले कोश के इलेक्ट्रॉन।

संपूर्ण अध्याय की एक-पंक्ति तथ्य सूची

अवपरमाण्विक कण
  • थॉमसन (1897) — कैथोड किरण नलिका से इलेक्ट्रॉन की खोज; e/m = 1.758820×10¹¹ C kg⁻¹।
  • मिलिकन (1906-14) — तेल बूँद प्रयोग से इलेक्ट्रॉन आवेश e = −1.602×10⁻¹⁹ C ज्ञात किया।
  • केनाल किरणों से प्रोटॉन (1919, हाइड्रोजन से); चैडविक (1932) — बेरीलियम पर α-कण बमबारी से न्यूट्रॉन।
  • इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान = 9.109×10⁻³¹ kg; प्रोटॉन = 1.6726×10⁻²⁷ kg; न्यूट्रॉन = 1.6749×10⁻²⁷ kg।
परमाणु मॉडल
  • थॉमसन मॉडल (1898): धनावेशित गोले में इलेक्ट्रॉन धँसे — प्लम-पुडिंग/तरबूज़ मॉडल; α-प्रकीर्णन परिणामों से मेल नहीं खाया।
  • रदरफोर्ड (1911): नाभिक में धनावेश व द्रव्यमान संकेंद्रित; परमाणु अधिकांशतः रिक्त; इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में घूमते हैं।
  • परमाणु त्रिज्या ≈10⁻¹⁰m, नाभिक त्रिज्या ≈10⁻¹⁵m — नाभिक का आयतन नगण्य।
  • रदरफोर्ड मॉडल परमाणु की स्थिरता व इलेक्ट्रॉनिक संरचना स्पष्ट नहीं कर सका (मैक्सवेल सिद्धांत अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक में गिर जाना चाहिए)।
परमाणु व द्रव्यमान संख्या
  • Z = प्रोटॉन संख्या = इलेक्ट्रॉन संख्या (उदासीन परमाणु); A = Z + न्यूट्रॉन संख्या।
  • समस्थानिक: Z समान, A भिन्न (¹H,²D,³T); समभारिक: A समान, Z भिन्न (¹⁴C व ¹⁴N)।
  • समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान होते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन संख्या समान होती है।
विकिरण, क्वांटम सिद्धांत व प्रकाश-विद्युत प्रभाव
  • c = νλ; ν̄ = 1/λ; निर्वात में सभी EM तरंगों की गति समान (3×10⁸ m/s)।
  • प्लांक (1900): E = hν = hc/λ; h = 6.626×10⁻³⁴ J s; ऊर्जा विविक्त क्वांटा में उत्सर्जित/अवशोषित।
  • हर्ट्ज़ (1887) ने प्रकाश-विद्युत प्रभाव खोजा; आइंस्टीन (1905) ने क्वांटम सिद्धांत से इसे समझाया।
  • ν>ν₀ पर ही इलेक्ट्रॉन निकलते हैं; निष्कासन तुरंत; इलेक्ट्रॉन संख्या ∝ तीव्रता, गतिज ऊर्जा ∝ आवृत्ति।
परमाणु स्पेक्ट्रम व बोर मॉडल
  • रिडबर्ग सूत्र: ν̄ = RH(1/n₁²−1/n₂²); RH=109677 cm⁻¹।
  • लाइमैन (n₁=1, UV), बामर (n₁=2, दृश्य), पाशन (n₁=3, IR), ब्रेकेट (n₁=4, IR), फंड (n₁=5, IR)।
  • बोर (1913): rn=0.529(n²/Z)Å; En=−2.18×10⁻¹⁸(Z²/n²)J; कोणीय संवेग mevr=nh/2π।
  • बोर मॉडल हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की सूक्ष्म संरचना, बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु स्पेक्ट्रम, जीमन/स्टार्क प्रभाव व रासायनिक आबंध व्याख्या नहीं कर सका।
द्वैत व्यवहार, अनिश्चितता व क्वांटम मॉडल
  • डी ब्रॉग्ली (1924): λ = h/mv — द्रव्य का द्वैत (कण+तरंग) व्यवहार।
  • हाइज़ेनबर्ग (1927): Δx·Δp ≥ h/4π — निश्चित प्रक्षेप-पथ का खंडन; बोर कक्षा अप्रामाणिक।
  • श्रोडिंजर (1926): Hψ=Eψ; तीन क्वांटम संख्याएँ n,l,ml हल से प्राप्त; चौथी ms उहलेनबैक-गाउडस्मिट (1925) द्वारा।
  • ψ² = प्रायिकता घनत्व; कक्षक = एक-इलेक्ट्रॉन तरंग-फलन; कोश में अधिकतम e⁻=2n²; कक्षक संख्या=n²; उपकोश में कक्षक=2l+1।
  • नोड कुल = n−1; कोणीय नोड = l; त्रिज्य नोड = n−l−1; s गोलाकार, p डम्बल (3), d चतुष्पालि (5, dz² भिन्न)।
इलेक्ट्रॉनिक विन्यास नियम
  • आफबाऊ नियम: (n+l) कम = ऊर्जा कम; बराबर (n+l) पर कम n पहले भरता है।
  • पाउली अपवर्जन सिद्धांत: कक्षक में अधिकतम 2 e⁻, विपरीत प्रचक्रण के साथ; कोश में अधिकतम e⁻ = 2n²।
  • हुंड नियम: समभ्रंश कक्षकों में युग्मन तब तक नहीं, जब तक हर कक्षक में एक-एक e⁻ न आ जाए।
  • अर्धपूरित व पूर्णपूरित उपकोश (p³,p⁶,d⁵,d¹⁰) अधिक स्थायी — सममित वितरण + अधिकतम विनिमय ऊर्जा।

सूत्र-सूची

विषयसूत्र
परमाणु संख्याZ = प्रोटॉन संख्या = इलेक्ट्रॉन संख्या
द्रव्यमान संख्याA = Z + n (न्यूट्रॉन)
प्रकाश की गतिc = ν λ
तरंग संख्याν̄ = 1/λ = ν/c
फोटॉन ऊर्जाE = hν = hc/λ
प्रकाश-विद्युत प्रभावhν = hν₀ + ½ mev² ; W₀ = hν₀
हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम (रिडबर्ग)ν̄ = RH(1/n₁² − 1/n₂²), RH=109677 cm⁻¹
बोर त्रिज्याrn = 0.529(n²/Z) Å = 52.9(n²/Z) pm
बोर ऊर्जाEn = −2.18×10⁻¹⁸(Z²/n²) J atom⁻¹
संक्रमण ऊर्जाΔE = Ef − Ei = hν
कोणीय संवेगmevr = nh/2π
डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्घ्यλ = h/mv = h/p
हाइज़ेनबर्ग अनिश्चितताΔx·Δp ≥ h/4π ; Δx·Δv ≥ h/4πm
कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन2n²
कक्षकों की कुल संख्या (n वें कोश में)
उपकोश में कक्षक संख्या2l + 1
नोड (कुल / कोणीय / त्रिज्य)(n−1) / l / (n−l−1)
स्थिरांकमान
प्लांक स्थिरांक (h)6.626 × 10⁻³⁴ J s
प्रकाश की गति (c)3.0 × 10⁸ m s⁻¹
रिडबर्ग स्थिरांक (RH)109,677 cm⁻¹ = 2.18×10⁻¹⁸ J atom⁻¹
एवोगाद्रो संख्या (NA)6.022 × 10²³ mol⁻¹
इलेक्ट्रॉन आवेश (e)−1.602 × 10⁻¹⁹ C
इलेक्ट्रॉन द्रव्यमान (me)9.109 × 10⁻³¹ kg
प्रोटॉन/न्यूट्रॉन द्रव्यमान≈1.673–1.675 × 10⁻²⁷ kg
प्रथम बोर त्रिज्या (a₀)52.9 pm = 0.529 Å
1 eV1.602 × 10⁻¹⁹ J

अध्याय अभ्यास — प्रश्न 2.1 से 2.67 तक (विस्तृत हल सहित)

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके विस्तृत हल देखें। सभी गणनाओं में उपरोक्त 'सूत्र-सूची' व 'स्थिरांक' का उपयोग किया गया है।

2.1 (i) एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या का परिकलन कीजिए। (ii) एक मोल इलेक्ट्रॉनों के द्रव्यमान और आवेश का परिकलन कीजिए।
(i) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.108×10⁻²⁸ g। 1 ग्राम में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 1 / 9.108×10⁻²⁸ = 1.098×10²⁷ इलेक्ट्रॉन
(ii) 1 मोल इलेक्ट्रॉन = 6.022×10²³ इलेक्ट्रॉन। द्रव्यमान = 6.022×10²³ × 9.108×10⁻³¹ kg = 5.48×10⁻⁷ kg। आवेश = 6.022×10²³ × 1.602×10⁻¹⁹ C = 9.65×10⁴ C (यह मान 1 फैराडे कहलाता है)।
उत्तर: (i) 1.098×10²⁷ इलेक्ट्रॉन (ii) द्रव्यमान = 5.48×10⁻⁷ kg, आवेश = 9.65×10⁴ C
2.2 (i) मेथेन के एक मोल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (ii) 7 mg ¹⁴C में न्यूट्रॉनों की कुल संख्या व द्रव्यमान (iii) STP पर 34 mg NH₃ में प्रोटॉनों की कुल संख्या व द्रव्यमान।
(i) CH₄ अणु में इलेक्ट्रॉन = C(6) + 4×H(1) = 10। 1 मोल CH₄ = 6.022×10²³ अणु ⇒ कुल इलेक्ट्रॉन = 10 × 6.022×10²³ = 6.022×10²⁴
(ii) ¹⁴C का मोलर द्रव्यमान = 14 g/mol। मोल = 7×10⁻³/14 = 5×10⁻⁴ mol। परमाणु = 5×10⁻⁴ × 6.022×10²³ = 3.011×10²⁰। प्रत्येक परमाणु में न्यूट्रॉन = 14−6 = 8। कुल न्यूट्रॉन = 3.011×10²⁰ × 8 = 2.409×10²¹। द्रव्यमान = 2.409×10²¹ × 1.675×10⁻²⁷ kg = 4.035×10⁻⁶ kg
(iii) NH₃ का मोलर द्रव्यमान = 17 g/mol। मोल = 34×10⁻³/17 = 2×10⁻³ mol। अणु = 2×10⁻³ × 6.022×10²³ = 1.2044×10²¹। प्रत्येक अणु में प्रोटॉन = N(7)+3H(3)=10। कुल प्रोटॉन = 1.2044×10²² । द्रव्यमान = 1.2044×10²² × 1.6726×10⁻²⁷ kg = 2.014×10⁻⁵ kg।
दाब व ताप में परिवर्तन से उत्तर नहीं बदलेगा, क्योंकि यह गणना केवल द्रव्यमान (34 mg) पर आधारित है, आयतन/दाब पर नहीं — मोलों की संख्या स्थिर रहती है।
उत्तर: (i) 6.022×10²⁴ इलेक्ट्रॉन (ii) 2.409×10²¹ न्यूट्रॉन, 4.035×10⁻⁶ kg (iii) 1.2044×10²² प्रोटॉन, 2.014×10⁻⁵ kg

NEET विगत वर्ष प्रश्न

AIPMT 2000 से NEET 2026 तक — इस अध्याय से NTA/CBSE द्वारा पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

NEET 2026 सूची I (n, l) को सूची II (कक्षक) से मिलाइए: A. n=2,l=1 B. n=4,l=0 C. n=5,l=3 D. n=3,l=2 — कक्षक: I.3d II.2p III.4s IV.5f
A: n=2,l=1 → 2p (II) ; B: n=4,l=0 → 4s (III) ; C: n=5,l=3 → 5f (IV) ; D: n=3,l=2 → 3d (I)
उत्तर: A-II, B-III, C-IV, D-I

अन्य NEET संबंधित तथ्य

महत्वपूर्ण
  • यह अध्याय NEET में 2–3 प्रश्नों (3–6% वेटेज) के साथ आता है; क्वांटम संख्याएँ, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, बोर मॉडल के सूत्र सर्वाधिक बार पूछे जाते हैं।
तथ्य
  • बोर मॉडल की सीमाएँ: यह बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं, सूक्ष्म संरचना, जीमन/स्टार्क प्रभाव की व्याख्या नहीं करता; यह इलेक्ट्रॉन को निश्चित पथ पर मानता है।
  • त्रिज्य नोड = n − l − 1, कोणीय नोड = l, कुल = n − 1 — इस भेद को बार-बार परखा जाता है।
  • आफबाऊ नियम के अपवाद: Cr: [Ar]3d⁵4s¹, Cu: [Ar]3d¹⁰4s¹ — अर्ध/पूर्ण भरे d-उपकोश की अतिरिक्त स्थिरता के कारण।

NCERT रसायन विज्ञान, कक्षा 11, एकक 2 — "परमाणु की संरचना" (Reprint 2026‑27) पर आधारित संपूर्ण अध्याय नोट्स। NEET प्रश्न-संग्रह आधिकारिक AIPMT/NEET प्रश्नपत्रों पर आधारित है।

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