जीव जगत
ठंडे पर्वतों से लेकर गरम झरनों तक, हर वास स्थान में जीवों की एक अद्भुत श्रृंखला बसती है। पर इस विशाल विविधता को समझने, नाम देने और वर्गीकृत करने के लिए विज्ञान को एक सुव्यवस्थित पद्धति की आवश्यकता होती है। इस अध्याय में हम द्विपदनाम पद्धति, वर्गिकी के मूल सिद्धांत तथा स्पीशीज से जगत तक के वर्गिकी संवर्गों को विस्तार से समझेंगे।
जीव जगत में विविधता
जीव विज्ञान सभी प्रकार के जीवों की रचना एवं जैव प्रक्रमों का विज्ञान है। जीव जगत कौतुहल जैव विविधताओं से परिपूर्ण है। आदि मानव आसानीपूर्वक निर्जीव पदार्थ एवं सजीवों के बीच अंतर कर सकता था। आदि मानव ने कुछेक निर्जीव पदार्थों (जैसे वायु, समुंद्र, आग आदि) तथा कुछ सजीव प्राणियों एवं पौधों में भेद किया था। इन सभी प्रकार के जीवित एवं जीवहीन स्वरूप में, उन्होंने जो सर्वसामान्य विशिष्टताएं पाईं, वे उनके द्वारा भय या दूर भागने के भाव पर आधारित थीं।
जीव स्वरूप के वर्गिकी विज्ञान एवं स्मारकीय विवरण ने विस्तृत पहचान प्रणाली, नाम-पद्धति तथा वर्गीकरण पद्धति की आवश्यकता प्रदान की है। इस प्रकार के अध्ययनों का सबसे बड़ा प्रचक्रण सजीवों द्वारा ऊर्ध्वाधर एवं क्षैतिज, दोनों ही समानताओं की भागीदारी को मान्यता देना था। इस इकाई के अनुगामी अध्यायों में आप वर्गीकरण-परिप्रेक्ष्य वैज्ञानिक प्राणियों एवं पादपों के वर्गीकरण सहित वर्णन के बारे में पढ़ेंगे।
★ एर्न्स्ट मेयर
एर्न्स्ट मेयर का जन्म 5 जुलाई, 1904 में केंपटन, जर्मनी में हुआ था। आप हावर्ड विश्वविद्यालय के विकासपरक जीव वैज्ञानिक थे, जिन्हें '20वीं शती का डार्विन' कहा गया। आप अब तक के 100 महान वैज्ञानिकों में से एक थे। मेयर ने सन् 1953 में हावर्ड विश्वविद्यालय की कला एवं विज्ञान संकाय में नौकरी प्राप्त की और 1975 में एलेक्जेंडर अगासीज प्रोफ़ेसर ऑफ जुलोजी एमीरिटस की पदवी के साथ अवकाश प्राप्त किया।
अपने 80 सालों के कार्य जीवन में आपका पक्षी-विज्ञान, वर्गीकरण-विज्ञान, प्राणि-भूगोल, विकास, वर्गिकी तथा जीव विज्ञान के इतिहास एवं दर्शन आदि पर अनुसंधान केंद्रित रहा। आप ने लगभग अकेले ही विकासीय जीव विज्ञान के केंद्रीय प्रश्न जाति विविधता की उत्पत्ति को खड़ा किया, जो कि आज सच है। इसके साथ ही आपने हाल ही में स्वीकृत जीव वैज्ञानिक जाति वर्गिकी की परिभाषा की अगुवाई की।
मेयर को तीन पुरस्कार दिए गए, जिन्हें व्यापक तौर पर जीव विज्ञान के तीन ताजों की संज्ञा दी जाती है: 1983 में बालजॉन प्राइज, 1998 में जीव विज्ञान के लिए इंटरनेशनल प्राइज और 1999 में क्राफूर्ड प्राइज। मेयर 100 वर्ष की आयु में 2005 में स्वर्गवासी हुए।
1.1 जीव जगत में विविधता
जीव जगत कैसा निराला है? जीवों के विस्तृत प्रकारों की शृंखला विस्मयकारी है।
असाधारण वास स्थान चाहे वे ठंडे पर्वत, पर्णपाती वन, महासागर, अलवणीय (मीठा) जलीय झीलें, मरूस्थल अथवा गरम झरनों जिनमें जीव रहते हैं, वे हमें आश्चर्यचकित कर देते हैं। सरपट दौड़ते घोड़े, प्रवासी पक्षियों, घाटियों में खिलते फूल अथवा आक्रमणकारी शार्क की सुंदरता विस्मय तथा चमत्कार का आह्वान करती है। पारिस्थितिक विरोध, तथा समष्टि के सदस्यों तथा समष्टि और समुदाय में सहयोग अथवा यहां तक कि कोशिका में आण्विक गतिविधि से पता चलता है कि वास्तव में जीवन क्या है?
यदि आप अपने आस-पास देखें तो आप जीवों की बहुत सी किस्में देखेंगे, ये किस्में, गमले में उगने वाले पौधे, कीट, पक्षी, पालतू अथवा अन्य प्राणी व पौधे हो सकती हैं। बहुत से ऐसे जीव भी होते हैं जिन्हें आप आँखों की सहायता से नहीं देख सकते, लेकिन आपके आस-पास ही हैं। यदि आप अपने अवलोकन के क्षेत्र को बढ़ाते हैं तो आपको विविधता की एक बहुत बड़ी शृंखला दिखाई पड़ेगी। स्पष्टत: यदि आप किसी सघन वन में जाएं तो आपको जीवों की बहुत बड़ी संख्या तथा उनकी कई किस्में दिखाई पड़ेंगी।
प्रत्येक प्रकार के पौधे, जंतु अथवा जीव जो आप देखते हैं किसी एक जाति (स्पीशीज) का प्रतीक हैं। अब तक की ज्ञात तथा वर्णित स्पीशीज की संख्या लगभग 1.7 मिलियन से लेकर 1.8 मिलियन तक हो सकती है। हम इसे जैविक विविधता अथवा पृथ्वी पर स्थित जीवों की संख्या तथा प्रकार कहते हैं। हमें यह स्मरण रखना चाहिए कि जैसे-जैसे हम नए तथा यहां तक कि पुराने क्षेत्रों की खोज करते हैं, हमें नए-नए जीवों का पता लगता रहता है।
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि विश्व में कई मिलियन पौधे तथा प्राणी हैं। हम पौधों तथा प्राणियों को उनके स्थानीय नाम से जानते हैं। ये स्थानीय नाम एक ही देश के विभिन्न स्थान के अनुसार बदलते रहते हैं। यदि हमने कोई ऐसी विधि नहीं निकाली जिसके द्वारा हम किसी जीव के विषय में चर्चा कर सकें तो शायद इससे भ्रमकारी स्थिति पैदा हो सकती है।
अध्ययन को सरल करने के लिए अनेकों वैज्ञानिकों ने प्रत्येक ज्ञात जीव को वैज्ञानिक नाम देने की प्रक्रिया बनाई है। इस प्रक्रिया को विश्व में सभी जीव वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया है। पौधों के लिए वैज्ञानिक नाम का आधार सर्वमान्य नियम तथा कसौटी है, जिनको इंटरनेशनल कोड ऑफ बोटैनिकल नोमेनक्लेचर (ICBN) में दिया गया है। प्राणी वर्गिकीविदों ने इंटरनेशनल कोड ऑफ जूलॉजीकल नोमेनक्लेचर (ICZN) बनाया है। वैज्ञानिक नाम की यह गारंटी है कि प्रत्येक जीव का एक ही नाम रहे, तथा वे यह भी सुनिश्चित करते हैं कि एक ही नाम किसी दूसरे ज्ञात जीव का न हो।
द्विपदनाम पद्धति
जीव विज्ञानी ज्ञात जीवों के वैज्ञानिक नाम देने के लिए सार्वजनिक मान्य नियमों का पालन करते हैं। प्रत्येक नाम के दो घटक होते हैं: वंशनाम तथा जाति संकेत पद। इस प्रणाली को जिसमें दो नाम के दो घटक होते हैं, उसे द्विपदनाम पद्धति कहते हैं। इस नामकरण प्रणाली को कैरोलस लीनियस ने सुझाया था, तथा इसका उपयोग सारे विश्व के जीवविज्ञानी करते हैं।
आम का वैज्ञानिक नाम मैंजीफेरा इंडिका है। इस नाम में मैंजीफेरा वंशनाम है जबकि इंडिका एक विशिष्ट स्पीशीज अथवा जाति संकेत पद है।
नाम पद्धति के सार्वजनिक नियम
- जैविक नाम प्राय: लैटिन भाषा में होते हैं और तिरछे अक्षरों में लिखे जाते हैं। इनका उद्भव चाहे कहीं से भी हुआ हो। इन्हें लैटिनीकरण अथवा इन्हें लैटिन भाषा का व्युत्पन्न समझा जाता है।
- जैविक नाम में पहला शब्द वंशनाम होता है जबकि दूसरा शब्द जाति संकेत पद होता है।
- जैविक नाम को जब हाथ से लिखते हैं तब दोनों शब्दों को अलग-अलग रेखांकित अथवा छपाई में तिरछा लिखना चाहिए। यह रेखांकन उनके लैटिन उद्भव को दिखाता है।
- पहला अक्षर जो वंश नाम को बताता है, वह बड़े अक्षर में होना चाहिए जबकि जाति संकेत पद में छोटा अक्षर होना चाहिए। मैंजीफेरा इंडिका के उदाहरण से इसकी व्याख्या कर सकते हैं।
जाति संकेत पद के बाद अर्थात् जैविक नाम के अंत में लेखक का नाम लिखते हैं और इसे संक्षेप में लिखा जाता है। उदाहरणत: मैंजीफेरा इंडिका (लिन)। इसका अर्थ है सबसे पहले स्पीशीज का वर्णन लीनियस ने किया था।
यद्यपि सभी जीवों का अध्ययन करना लगभग असंभव है, इसलिए ऐसी युक्ति बनाने की आवश्यकता है जो इसे संभव कर सके। इस प्रक्रिया को वर्गीकरण कहते हैं।
इसी प्रकार, मान लो हमें 'स्तनधारी' कहना है तो आप ऐसे जंतु के विषय में सोचोगे जिसके बाह्य कान और शरीर पर बाल होते हैं। इसी प्रकार पौधों में यदि हम 'गेहूँ' के विषय में चर्चा करें तो हमारे मस्तिष्क में गेहूँ का पौधा आ जाएगा। इसलिए ये सभी 'कुत्ता', 'बिल्ली', 'स्तनधारी', 'गेहूँ', 'चावल', 'पौधे', 'जंतु' आदि सुविधाजनक वर्ग हैं जिनका उपयोग हम पढ़ने में करते हैं। इन वर्गों की वैज्ञानिक शब्दावली टैक्सा है।
इसलिए, गुणों के आधार पर सभी जीवों को विभिन्न टैक्सा में वर्गीकृत कर सकते हैं। गुण जैसे प्रकार, रचना, कोशिका की रचना, विकासीय प्रक्रम तथा जीव की पारिस्थितिक सूचनाएं आवश्यक हैं और ये आधुनिक वर्गीकरण अध्ययन के आधार हैं। इसलिए, विशेषीकरण, पहचान (अभिज्ञान), वर्गीकरण तथा नाम पद्धति आदि ऐसे प्रक्रम (प्रणाली) हैं जो वर्गिकी (वर्गीकरण विज्ञान) के आधार हैं।
वर्गिकी कोई नई नहीं है। मानव सदैव विभिन्न प्रकार के जीवों के विषय में अधिकाधिक जानने का प्रयत्न करता रहा है, विशेष रूप से उनके विषय में जो उनके लिए अधिक उपयोगी थे। आदिमानव को अपनी मूलभूत आवश्यकताओं जैसे- भोजन, कपड़े तथा आश्रय के लिए नए-नए स्रोत खोजने पड़ते थे। इसलिए विभिन्न जीवों के वर्गीकरण का आधार 'उपयोग' पर आधारित था।
काफी समय से मानव विभिन्न प्रकार के जीवों के विषय में जानने और उनकी विविधता सहित उनके संबंध में रुचि लेता रहा है। अध्ययन की इस शाखा को वर्गीकरण पद्धति (सिस्टेमेटिक्स) कहते हैं। 'सिटेमेटिक्स' शब्द लैटिन शब्द 'सिस्टेमा' से आया है जिसका अर्थ है जीवों की नियमित व्यवस्था। लीनियस ने अपने पब्लिकेशन का टाइटल 'सिस्टेमा नेचर' चुना। वर्गीकरण पद्धति में पहचान, नाम पद्धति तथा वर्गीकरण को शामिल करके इसके क्षेत्र को बढ़ा दिया गया है। वर्गीकरण पद्धति में जीवों के विकासीय संबंध का भी ध्यान रखा गया है।
1.2 वर्गिकी संवर्ग
वर्गीकरण एकल सोपान प्रक्रम नहीं है — इसमें पदानुक्रम सोपान होते हैं।
वर्गीकरण एकल सोपान प्रक्रम नहीं है; बल्कि इसमें पदानुक्रम सोपान होते हैं जिसमें प्रत्येक सोपान पद अथवा वर्ग को प्रदर्शित करता है। चूँकि संवर्ग समस्त वर्गिकी व्यवस्था है इसलिए इसे वर्गिकी संवर्ग कहते हैं और तभी सारे संवर्ग मिलकर वर्गिकी पदानुक्रम बनाते हैं। प्रत्येक संवर्ग वर्गीकरण की एक इकाई को प्रदर्शित करता है। वास्तव में, यह एक पद को दिखाता है और इसे प्राय: वर्गक (टैक्सॉन) कहते हैं।
वर्गिकी संवर्ग तथा पदानुक्रम का वर्णन एक उदाहरण द्वारा कर सकते हैं। कीट जीवों के एक वर्ग को दिखाता है जिसमें एक समान गुण जैसे तीन जोड़ी संधिपाद (टाँगें) होती हैं। इसका अर्थ है कि कीट स्वीकारणीय सुस्पष्ट जीव है जिसका वर्गीकरण किया जा सकता है, इसलिए इसे एक पद अथवा संवर्ग का दर्जा दिया गया है।
सभी ज्ञात जीवों के वर्गिकीय अध्ययन से सामान्य संवर्ग जैसे जगत (किंगडम), संघ (फाइलम) अथवा भाग (पौधों के लिए), वर्ग (क्लास), गण (आर्डर), कुल (फैमिली), वंश (जीनस) तथा जाति (स्पीशीज) का विकास हुआ। पौधों तथा प्राणियों दोनों में स्पीशीज सबसे निचले संवर्ग में आती है। किसी जीव को विभिन्न संवर्गों में रखने के लिए मूलभूत आवश्यकता व्यष्टि अथवा उसके वर्ग के गुणों का ज्ञान होना है। यह समान प्रकार के जीवों तथा अन्य प्रकार के जीवों में समानता तथा विभिन्नता को पहचानने में सहायता करता है।
1.2.1 स्पीशीज (जाति)
वर्गिकी अध्ययन में जीवों के वर्ग, जिसमें मौलिक समानता होती है, उसे स्पीशीज कहते हैं। हम किसी भी स्पीशीज को उसमें समीपस्थ संबंधित स्पीशीज से, उनके आकारिकीय विभिन्नता के आधार पर उन्हें एक दूसरे से अलग कर सकते हैं।
मैंजीफेरा इंडिका (आम), सोलेनम ट्यूबरोसम (आलू) तथा पेंथरा लिओ (शेर) — इन सभी तीनों नामों में इंडिका, ट्यूबरोसम तथा लिओ जाति संकेत पद हैं। जबकि पहले शब्द मैंजीफेरा, सोलेनम तथा पेंथरा वंश के नाम हैं। पेंथरा में एक अन्य जाति संकेत पद है जिसे टिगरिस कहते हैं। सोलेनम वंश में नाइग्रिम, मेलांजेना भी आते हैं। मानव की जाति सेपियंस है, जो होमो वंश में आता है — इसलिए मानव का वैज्ञानिक नाम होमोसेपियंस है।
1.2.2 वंश (जीनस)
वंश में संबंधित स्पीशीज का एक वर्ग आता है जिसमें स्पीशीज के गुण अन्य वंश में स्थित स्पीशीज की तुलना में समान होते हैं। हम कह सकते हैं कि वंश समीपस्थ संबंधित स्पीशीज का एक समूह है।
उदाहरणार्थ आलू, टमाटर तथा बैंगन; ये दोनों अलग-अलग स्पीशीज हैं, लेकिन ये सभी सोलेनम वंश में आती हैं। शेर (पेंथरा लिओ), चीता (पेंथर पारडस) तथा (पेंथर टिगरिस) जिनमें बहुत से गुण हैं, वे सभी पेंथरा वंश में आते हैं। यह वंश दूसरे वंश फेलिस, जिसमें बिल्ली आती है, से भिन्न है।
1.2.3 कुल
अगला संवर्ग कुल है जिसमें संबंधित वंश आते हैं। वंश स्पीशीज की तुलना में कम समानता प्रदर्शित करते हैं। कुल के वर्गीकरण का आधार पौधों के कायिक तथा जनन गुण हैं।
उदाहरणार्थ; पौधों में तीन विभिन्न वंश सोलेनम, पिट्यूनिआ तथा धतूरा को सोलेनेसी कुल में रखते हैं। जबकि प्राणी वंश पेंथरा जिसमें शेर, बाघ, चीता आते हैं को फेलिस (बिल्ली) के साथ फेलिडी कुल में रखे जाते हैं। इसी प्रकार, यदि आप बिल्ली तथा कुत्ते के लक्षण को देखो तो आपको दोनों में कुछ समानताएं तथा कुछ विभिन्नताएं दिखाई पड़ेंगी। उन्हें क्रमश: दो विभिन्न कुलों कैनीडी तथा फेलिडी में रखा गया है।
1.2.4 गण (आर्डर)
संवर्ग जैसे स्पीशीज, वंश तथा कुल समान तीनों लक्षणों पर आधारित हैं। प्राय: गण तथा अन्य उच्चतर वर्गिकी संवर्ग की पहचान लक्षणों के समूहन के आधार पर करते हैं। गण में उच्चतर वर्ग होने के कारण कुलों के समूह होते हैं, जिनके कुछ लक्षण एक समान होते हैं। इसमें एक जैसे लक्षण कुल में शामिल विभिन्न वंश की अपेक्षा कम होते हैं।
पादप कुल जैसे कोनवोल्व्युलेसी, सोलेनेसी को पॉलिसोनिएलस गण में रखा गया है। इसका मुख्य आधार पुष्पी लक्षण है। जबकि प्राणी कारनीवोरा गण में फेलिडी तथा कैनीडी कुलों को रखा गया है।
1.2.5 वर्ग (क्लास)
इस संवर्ग में संबंधित गण आते हैं। उदाहरणार्थ प्राइमेटा गण जिसमें बंदर, गोरिला तथा गिब्बॉन आते हैं, और कारनीवोरा गण जिसमें बाघ, बिल्ली तथा कुत्ता आते हैं, को मैमेलिया वर्ग में रखा गया है। इसके अतिरिक्त मैमेलिया वर्ग में अन्य गण भी आते हैं।
1.2.6 संघ (फाइलम)
वर्ग जिसमें जंतु जैसे मछली, उभयचर, सरीसृप, पक्षी तथा स्तनधारी आते हैं, अगले उच्चतर संवर्ग, जिसे संघ कहते हैं, का निर्माण करते हैं। इन सभी को एक समान गुणों जैसे पृष्ठरज्जु (नोटोकॉर्ड) तथा पृष्ठीय खोखला तंत्रिका तंत्र के होने के आधार पर कॉर्डेटा संघ में रखा गया है। पौधों में इन वर्गों, जिसमें कुछ ही एक समान लक्षण होते हैं, को उच्चतर संवर्ग भाग (डिविजन) में रखा गया है।
1.2.7 जगत (किंगडम)
जंतु के वर्गिकी तंत्र में विभिन्न संघों के सभी प्राणियों को उच्चतम संवर्ग जगत में रखा गया है। जबकि पादप जगत में विभिन्न भाग (डिविजन) के सभी पौधों को रखा गया है। विभिन्न संघों के सभी प्राणियों को एक अलग जगत एनिमेलिया में रखा गया है जिससे कि उन्हें पौधों से अलग किया जा सके। पौधों को प्लांटी जगत में रखा गया है। भविष्य में हम इन दो वर्गों को जंतु तथा पादप जगत कहेंगे।
चित्र 1.1 — आरोही क्रम में पदानुक्रम वर्गिकी संवर्ग। जैसे-जैसे हम स्पीशीज से जगत की ओर ऊपर जाते हैं, वैसे ही समान गुणों में कमी आती जाती है।
तालिका 1.1 — वर्गिकी संवर्ग सहित कुछ जीव
| सामान्य नाम | जैविक नाम | वंश | कुल | गण | वर्ग | संघ/भाग |
|---|---|---|---|---|---|---|
| मानव | होमो सेपियन्स | होमो | होमोनिडी | प्राइमेट | मैमेलिया | कॉर्डेटा |
| घरेलू मक्खी | मस्का डोमेस्टिका | मस्का | म्यूसीडी | डिप्टेरा | इंसेक्टा | आर्थ्रोपोडा |
| आम | मेंजीफेरा इंडिका | मेंजीफेरा | एनाकरडिएसी | सेपिंडेल्स | डाइकोटीलिडनी | एंजियोस्पर्मी |
| गेहूँ | ट्रीटीकम एइस्टीवम | ट्रीटीकम | पोएसी | पोएलस् | मोनोकोटीलिडनी | एंजियोस्पर्मी |
✓ सारांश
जैविक विविधता
जीव जगत में प्रचुर मात्रा में विविधताएं दिखाई पड़ती हैं। असंख्य पादप तथा प्राणियों की पहचान तथा उनका वर्णन किया गया है; परंतु अब भी इनकी बहुत बड़ी संख्या अज्ञात है।
वर्गिकी की आवश्यकता
जीवों की विविधता तथा इनकी किस्मों के अध्ययन को सुसाध्य एवं सरल बनाने के लिए जीव वैज्ञानियों ने कुछ नियमों तथा सिद्धांतों का प्रतिपादन किया, जिससे पहचान, नाम पद्धति तथा वर्गीकरण संभव हो सके।
द्विपदनाम पद्धति
समरूपता तथा विभिन्नताओं को आधार मानकर प्रत्येक जीव को पहचाना जाता है तथा उसे द्विपद नाम दिया जाता है, जो दो शब्दों से मिलकर बना होता है।
वर्गिकी संवर्ग
जीव वर्गीकरण तंत्र में बहुत से वर्ग/पद होते हैं जिन्हें प्राय: वर्गिकी संवर्ग अथवा टैक्सा कहते हैं। यह सभी वर्ग वर्गिकी पदानुक्रम बनाते हैं।
? अभ्यास
सभी प्रश्नों के उत्तर – प्रत्येक accordion बंद (closed) है, विवरण के लिए क्लिक करें।
प्रश्न 1 जीवों को वर्गीकृत क्यों करते हैं?
जीवों को वर्गीकृत करने का मुख्य उद्देश्य जीवों की विशाल विविधता को व्यवस्थित करना, उनकी पहचान, नामकरण और उनके बीच संबंधों को समझना है। वर्गीकरण से हम जीवों को उनके गुणों के आधार पर समूहों में बाँटकर अध्ययन को सरल व सुव्यवस्थित बना सकते हैं। इससे जीवों के विकासवादी संबंधों को भी समझने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 2 वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार क्यों बदलते हैं?
वर्गीकरण प्रणाली को बार-बार बदला जाता है क्योंकि विज्ञान में नई खोजें होती रहती हैं — नए जीवों की खोज, जीवों की आणविक व जैवरासायनिक संरचना की बेहतर समझ, तथा जीवों के बीच विकासवादी संबंधों की नई जानकारी प्राप्त होती रहती है। इससे पुरानी वर्गीकरण प्रणालियों में संशोधन की आवश्यकता पड़ती है ताकि वे अधिक वैज्ञानिक व तर्कसंगत बन सकें।
प्रश्न 3 जिन लोगों से आप प्राय: मिलते रहते हैं, आप उनको किस आधार पर वर्गीकृत करना पसंद करेंगे?
संकेत: ड्रेस, मातृभाषा, प्रदेश जिसमें वे रहते हैं, आर्थिक स्तर आदि。
मॉडल उत्तर: मैं लोगों को निम्न आधारों पर वर्गीकृत कर सकता/सकती हूँ —
- पेशा / व्यवसाय: शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर, किसान, व्यापारी आदि।
- रहन-सहन व क्षेत्र: ग्रामीण / शहरी, भौगोलिक क्षेत्र (पर्वतीय, मैदानी, तटीय)।
- भाषा / मातृभाषा: हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, बांग्ला, मराठी आदि।
- खान-पान व वेशभूषा (ड्रेस): पारंपरिक / आधुनिक, शाकाहारी / मांसाहारी।
- आर्थिक स्तर: उच्च, मध्यम, निम्न आय वर्ग।
इस प्रकार का वर्गीकरण हमें समाज को बेहतर ढंग से समझने और अध्ययन को सरल बनाने में मदद करता है।
प्रश्न 4 व्यष्टि तथा समष्टि की पहचान से हमें क्या शिक्षा मिलती है?
व्यष्टि (individual) की पहचान से हमें यह शिक्षा मिलती है कि प्रत्येक जीव अपने गुणों में अद्वितीय (unique) होता है — उसकी बनावट, आकार, रंग, व्यवहार आदि उसे दूसरों से अलग बनाते हैं।
समष्टि (population) की पहचान से हमें किसी समूह में उभयनिष्ठ (common) गुणों को समझने में सहायता मिलती है — जैसे एक ही स्पीशीज के सभी सदस्यों में कुछ मूलभूत लक्षण समान होते हैं।
शिक्षा: व्यष्टि व समष्टि दोनों का अध्ययन आवश्यक है — व्यष्टि हमें विविधता (diversity) सिखाता है, जबकि समष्टि हमें सामान्यता (commonness) और वर्गीकरण का आधार प्रदान करती है। इससे हम जीवों को सही ढंग से पहचान व वर्गीकृत कर सकते हैं।
प्रश्न 5 आम का वैज्ञानिक नाम निम्नलिखित हैं। इसमें से कौन सा सही है?
मेंजीफेरा इंडिका / मेंजीफेरा इंडिका
सही उत्तर: मेंजीफेरा इंडिका (तिरछे अक्षरों में)।
द्विपदनाम पद्धति के नियमों के अनुसार वैज्ञानिक नाम तिरछे (इटैलिक) अक्षरों में लिखा जाता है। अतः बिना तिरछे लिखा गया मेंजीफेरा इंडिका सही नहीं है, जबकि मेंजीफेरा इंडिका (तिरछा) सही है।
प्रश्न 6 टैक्सॉन की परिभाषा दीजिए। विभिन्न पदानुक्रम स्तर पर टैक्सा के कुछ उदाहरण दीजिए।
टैक्सॉन (Taxon) — वर्गीकरण की कोई भी इकाई (unit) जो किसी विशिष्ट स्तर पर जीवों के एक समूह को दर्शाती है। बहुवचन में टैक्सा कहलाते हैं।
विभिन्न स्तरों पर टैक्सा के उदाहरण:
- जाति (स्पीशीज): इंडिका (आम की जाति)
- वंश (जीनस): मेंजीफेरा
- कुल (फैमिली): एनाकरडिएसी
- गण (आर्डर): सेपिंडेल्स
- वर्ग (क्लास): डाइकोटीलिडनी
- संघ/भाग (फाइलम/डिविजन): एंजियोस्पर्मी
- जगत (किंगडम): प्लांटी
इन सभी में से प्रत्येक एक टैक्सॉन (taxon) है, क्योंकि प्रत्येक वर्गीकरण की एक इकाई को दर्शाता है।
प्रश्न 7 क्या आप वर्गिकी संवर्ग का सही क्रम पहचान सकते हैं?
(अ) जाति (स्पीशीज) → गण (आर्डर) → संघ (फाइलम) → जगत (किंगडम)
(ब) वंश (जीनस) → जाति → गण → जगत
(स) जाति → वंश → गण → संघ
(ब) वंश (जीनस) → जाति → गण → जगत
(स) जाति → वंश → गण → संघ
सही उत्तर: (स) जाति → वंश → गण → संघ
यह आरोही क्रम (ascending order) है — सबसे निचले संवर्ग (जाति) से ऊपर की ओर (संघ तक)।
विकल्प (अ) में वंश (जीनस) को छोड़ दिया गया है, जो गलत है।
विकल्प (ब) में क्रम गड़बड़ है — वंश से पहले जाति आनी चाहिए, फिर वंश, फिर गण, फिर जगत।
पूर्ण सही आरोही क्रम: जाति → वंश → कुल → गण → वर्ग → संघ → जगत
प्रश्न 8 जाति शब्द के सभी मानवीय वर्तमान कालिक अर्थों को एकत्र कीजिए। क्या आप अपने शिक्षक से उच्च कोटि के पौधों तथा प्राणियों तथा बैक्टीरिया की स्पीशीज का अर्थ जानने के लिए चर्चा कर सकते हैं?
"जाति" शब्द के विभिन्न अर्थ:
- जैविक अर्थ (Biological): समान गुणों वाले जीवों का समूह जो परस्पर प्रजनन कर सकते हैं और उपजाऊ संतति उत्पन्न कर सकते हैं (जैविक स्पीशीज अवधारणा)।
- सामाजिक अर्थ: जाति-व्यवस्था (caste system) — समाज में जन्म-आधारित वर्गीकरण।
- भाषाई अर्थ: प्रकार, क़िस्म, श्रेणी — "किसी जाति के लोग" अर्थात समान विशेषताओं वाला समूह।
शिक्षक से चर्चा हेतु बिंदु:
- उच्च कोटि के पौधे व प्राणी: इनमें स्पीशीज की परिभाषा अपेक्षाकृत स्पष्ट है — ये यौन प्रजनन करते हैं और जैविक स्पीशीज अवधारणा (biological species concept) लागू होती है।
- बैक्टीरिया: ये अलैंगिक प्रजनन (द्विखंडन) करते हैं, जिससे जैविक स्पीशीज अवधारणा लागू नहीं होती। इनकी स्पीशीज की पहचान के लिए आणविक फाइलोजेनी (molecular phylogeny), DNA अनुक्रमण, जैवरासायनिक लक्षण आदि का उपयोग किया जाता है। बैक्टीरिया में स्पीशीज की परिभाषा अधिक जटिल है।
प्रश्न 9 निम्नलिखित शब्दों को समझिए तथा परिभाषित कीजिए —
(i) संघ (ii) वर्ग (iii) कुल (iv) गण (v) वंश
(i) संघ (फाइलम / Phylum): वर्गों से ऊपर का संवर्ग, जिसमें संबंधित वर्गों (classes) को रखा जाता है। प्राणियों में प्रयुक्त होता है। उदा: कॉर्डेटा।
(ii) वर्ग (क्लास / Class): संबंधित गणों (orders) का समूह। उदा: मैमेलिया (स्तनधारी)।
(iii) कुल (फैमिली / Family): संबंधित वंशों (genera) का समूह। उदा: एनाकरडिएसी (आम का कुल), फेलिडी (बिल्ली कुल)।
(iv) गण (आर्डर / Order): संबंधित कुलों (families) का समूह। इसमें कुलों की तुलना में समान गुण कम होते हैं। उदा: कारनीवोरा (मांसाहारी गण), सेपिंडेल्स (आम का गण)।
(v) वंश (जीनस / Genus): समीपस्थ संबंधित स्पीशीज (species) का समूह। उदा: सोलेनम (आलू, टमाटर, बैंगन), पेंथरा (शेर, बाघ, चीता)।
प्रश्न 10 पौधों तथा प्राणियों के उचित उदाहरण देते हुए वर्गिकी पदानुक्रम का चित्रण कीजिए।
पादप (आम) — मेंजीफेरा इंडिका
- जाति (स्पीशीज): इंडिका
- वंश (जीनस): मेंजीफेरा
- कुल (फैमिली): एनाकरडिएसी
- गण (आर्डर): सेपिंडेल्स
- वर्ग (क्लास): डाइकोटीलिडनी
- भाग (डिविजन): एंजियोस्पर्मी
- जगत (किंगडम): प्लांटी
प्राणी (मानव) — होमो सेपियन्स
- जाति (स्पीशीज): सेपियन्स
- वंश (जीनस): होमो
- कुल (फैमिली): होमोनिडी
- गण (आर्डर): प्राइमेट
- वर्ग (क्लास): मैमेलिया
- संघ (फाइलम): कॉर्डेटा
- जगत (किंगडम): एनिमेलिया
ध्यान दें: जैसे-जैसे हम जाति से जगत की ओर ऊपर जाते हैं, समान गुणों में कमी आती जाती है।
NEET फोकस इस अध्याय के वे तथ्य जो NEET में पूछे जा सकते हैं
नाम-पद्धति व वर्गिकी संवर्ग से जुड़े वे बिंदु, जो परीक्षा की दृष्टि से बार-बार MCQ का आधार बनते हैं — रटने के बजाय समझकर याद करें।
जैविक विविधता व नाम-पद्धति
- अब तक ज्ञात व वर्णित स्पीशीज की संख्या लगभग 1.7 से 1.8 मिलियन है — यह आँकड़ा NEET में सीधे पूछा जा सकता है।NEET
- पादपों के लिए नामकरण के नियम ICBN (International Code of Botanical Nomenclature) में तथा प्राणियों के लिए ICZN (International Code of Zoological Nomenclature) में दिए गए हैं।NEET
- द्विपदनाम पद्धति (Binomial Nomenclature) कैरोलस लीनियस ने दी थी — यह तथ्य अक्सर गलत विकल्प (जैसे R.H. Whittaker) के साथ भ्रमित करने के लिए पूछा जाता है।NEET
- जैविक स्पीशीज की परिभाषा (Biological Species concept) एर्न्स्ट मेयर ने दी थी।NEET
द्विपदनाम पद्धति के सार्वभौमिक नियम (बार-बार पूछे जाते हैं)
- जैविक नाम सामान्यतः लैटिन भाषा में होते हैं व तिरछे (इटैलिक) अक्षरों में लिखे जाते हैं — "किसी भी भाषा में लिखे जा सकते हैं" जैसा कथन गलत माना जाता है।NEET
- नाम का पहला शब्द वंश (genus) को तथा दूसरा शब्द जाति संकेत पद (specific epithet) को दर्शाता है — इसे उल्टा लिखना NEET में एक सामान्य "गलत कथन" का आधार है।NEET
- हाथ से लिखते समय दोनों शब्दों को अलग-अलग रेखांकित करना चाहिए (छपाई में तिरछा अक्षर इसका विकल्प है)।NEET
- वंश नाम का पहला अक्षर बड़ा (capital) तथा जाति संकेत पद का पहला अक्षर छोटा (small) होना चाहिए — जैसे मैंजीफेरा इंडिका।NEET
- नाम के अंत में लेखक का संक्षिप्त नाम लिखा जाता है, जैसे मैंजीफेरा इंडिका Linn. — यह दर्शाता है कि इस स्पीशीज का वर्णन सबसे पहले लीनियस ने किया था।NEET
वर्गिकी संवर्ग (टैक्सोनॉमिक हायरार्की) — क्रम याद रखें
- आरोही क्रम (सबसे छोटे से सबसे बड़े संवर्ग तक) — जाति (स्पीशीज) → वंश (जीनस) → कुल (फैमिली) → गण (आर्डर) → वर्ग (क्लास) → संघ/भाग (फाइलम/डिविजन) → जगत (किंगडम)। यह क्रम NEET में सीधे या उलट-पुलट करके लगभग हर वर्ष पूछा जाता है।NEET
- वंश (genus) समीपस्थ संबंधित स्पीशीज का समूह है — जैसे आलू, टमाटर, बैंगन तीनों अलग स्पीशीज होते हुए भी सोलेनम वंश में आते हैं।NEET
- जितना नीचे के संवर्ग (जैसे स्पीशीज) की ओर जाएँ, सदस्यों में उतने ही अधिक समान गुण होंगे; जितना ऊपर के संवर्ग (जैसे जगत) की ओर जाएँ, समानता उतनी ही कम होती जाती है।NEET
- दो जीवों में अधिकतम समानता सबसे निचले साझा संवर्ग पर होती है — जैसे आलू व टमाटर दोनों सोलेनम वंश के हैं, इसलिए इनमें अधिकतम समानता वंश (genus) के स्तर पर होती है, न कि कुल या गण के स्तर पर।NEET
- पौधों में जिस संवर्ग को भाग (डिविजन) कहते हैं, प्राणियों में उसी संवर्ग को संघ (फाइलम) कहा जाता है।NEET
तालिका 1.1 के उदाहरण से जुड़े तथ्य (मैच व हायरार्की प्रश्नों के लिए)
- आम (मैंजीफेरा इंडिका) — वंश: मैंजीफेरा, कुल: एनाकरडिएसी, गण: सेपिंडेल्स, वर्ग: डाइकोटीलिडनी, संघ/भाग: एंजियोस्पर्मी। यह हायरार्की स्वयं में एक संभावित मिलान-प्रश्न है।NEET
- मानव (होमो सेपियन्स) — वंश: होमो, कुल: होमोनिडी, गण: प्राइमेट, वर्ग: मैमेलिया, संघ: कॉर्डेटा।NEET
- घरेलू मक्खी (मस्का डोमेस्टिका) — कुल: म्यूसीडी, गण: डिप्टेरा, वर्ग: इंसेक्टा, संघ: आर्थ्रोपोडा।NEET
Extra अन्य NEET संबंधित तथ्य
परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु व तुलनाएँ — ऊपर दी गई "NEET हेतु महत्वपूर्ण तथ्य" सूची से अलग।
- उपापचय (metabolism) ही एकमात्र ऐसी विशेषता है जो सभी सजीवों में उभयनिष्ठ (universal) व अद्वितीय है — यह निर्जीव वस्तुओं में कभी नहीं पाई जाती। इसके विपरीत, वृद्धि व जनन जैसी विशेषताएँ प्रत्येक सजीव में अनिवार्य नहीं हैं — जैसे खच्चर/बाँझ श्रमिक मधुमक्खियाँ जनन नहीं करतीं फिर भी सजीव हैं; तथा क्रिस्टल भी वृद्धि दर्शाते हैं परन्तु सजीव नहीं होते।
- उपापचयी प्रतिक्रियाओं को परखनली में (इन विट्रो, in vitro) पृथक् रूप से प्राप्त किया जा सकता है, परन्तु उस स्थिति में यह "सजीव" नहीं कहलातीं — केवल किसी जीव के भीतर (इन वीवो, in vivo) होने वाला उपापचय ही सजीवता का लक्षण माना जाता है। "उपापचय जहाँ भी हो, वह सजीवता का प्रमाण है" जैसा कथन सदैव गलत है।
- वर्गिकी (Taxonomy) शब्द सर्वप्रथम A.P. डी कैंडोल ने प्रयोग किया था; जबकि क्रमबद्धिकी (systematics) शब्द जी.जी. सिम्पसन (G.G. Simpson) ने दिया, जो लैटिन शब्द "सिस्टेमा" (systema, अर्थात व्यवस्थित क्रम) से लिया गया है। क्रमबद्धिकी में जीवों के मध्य विकासवादी संबंध (evolutionary relationships) भी सम्मिलित होते हैं, केवल पहचान व नामकरण नहीं — यही इसे पारंपरिक वर्गिकी से अधिक व्यापक बनाता है।
- वर्गिकी की प्रक्रिया के चार मूल घटक होते हैं — अभिलक्षण (characterisation), पहचान (identification), नामकरण (nomenclature) व वर्गीकरण (classification)। वर्गीकरण इन चारों में से केवल एक उप-प्रक्रिया है, अतः "वर्गीकरण व वर्गिकी पर्यायवाची हैं" जैसा कथन सही नहीं माना जाता।
- किसी भी वर्गिकीय संवर्ग (taxonomic category) की प्रत्येक इकाई को टैक्सॉन (taxon, बहुवचन टैक्सा) कहा जाता है — अर्थात जाति, वंश, कुल, गण आदि में से प्रत्येक स्वयं में एक टैक्सॉन है। "टैक्सॉन" शब्द को केवल जाति (स्पीशीज) तक सीमित समझना एक सामान्य त्रुटि है।
- शाकाश्रय (herbarium) में सुखाए व दबाए गए पादप नमूनों को एक शीट पर आरोपित (mounted) कर, एक लेबल के साथ संरक्षित किया जाता है — जिस पर संग्रहण की तिथि, स्थान, अंग्रेज़ी/स्थानीय/वानस्पतिक नाम, कुल का नाम व संग्राहक का नाम अंकित होता है। यह विवरण संग्रहालय-आधारित पहचान-प्रश्नों में महत्वपूर्ण है।
- भारत के प्रमुख वानस्पतिक उद्यान — इंडियन बॉटैनिकल गार्डन, हावड़ा (कोलकाता) तथा राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान (NBRI), लखनऊ; विश्व का सबसे पुराना व प्रसिद्ध वानस्पतिक उद्यान रॉयल बॉटैनिक गार्डन, क्यू (इंग्लैंड) है — नाम-स्थान मिलान वाले प्रश्नों में इन्हें बार-बार पूछा गया है।
- संग्रहालय (museum) में पादप व प्राणी नमूनों को परिरक्षक द्रव (preservative solution) में सुरक्षित रखा जाता है, कीटों को सुखाकर व पिन लगाकर (pinned) संरक्षित किया जाता है, तथा बड़े प्राणियों के कंकाल भी रखे जाते हैं — यह जन्तु उद्यान (zoological park) से इस मायने में सर्वथा भिन्न है कि वहाँ प्राणी जीवित रखे जाते हैं, ताकि उनके खान-पान व व्यवहार (feeding habits and behaviour) का अध्ययन किया जा सके।
- कुंजी (Key, identification key) सामान्यतः परस्पर विरोधाभासी लक्षणों (contrasting characters) के युग्मों (couplets) पर आधारित होती है, जिन्हें "लीड्स (leads)" कहा जाता है — यह पहचान (identification) का एक प्रमुख वर्गिकीय साधन है, तथा प्रत्येक वर्गिकीय समूह (जैसे किसी कुल विशेष) के लिए पृथक-पृथक कुंजी बनाई जाती है।
- फ्लोरा (Flora), मैनुअल (Manual), मोनोग्राफ (Monograph) व कैटलॉग (Catalogue) — ये सभी महत्वपूर्ण वर्गिकीय साधन (taxonomic aids) हैं जिन्हें न उलझाएँ: फ्लोरा किसी क्षेत्र-विशेष के पौधों के वास्तविक आवास व वितरण (habitat and distribution) का विवरण देता है; मैनुअल किसी क्षेत्र में उपस्थित नामों की पहचान हेतु जानकारी देता है; मोनोग्राफ किसी एक टैक्सॉन-विशेष पर विस्तृत जानकारी प्रदान करता है।
- आज तक विश्व में लगभग 3,50,000 (साढ़े तीन लाख के लगभग) पादप स्पीशीज का ही वर्णन किया जा चुका है — यह आँकड़ा कुल वर्णित स्पीशीज की संख्या (1.7 से 1.8 मिलियन, सभी जीवों सहित) से भिन्न व कहीं अधिक विशिष्ट (केवल पादपों तक सीमित) है। दोनों आँकड़ों को एक-दूसरे से न उलझाएँ, क्योंकि परीक्षा में दोनों में से कोई भी अलग-अलग पूछा जा सकता है।
- "चेतना (consciousness)" जैसी सजीव-विशेषता को केवल तंत्रिका-तंत्र वाले उच्चतर प्राणियों तक सीमित न समझें — पादप भी बाह्य उद्दीपनों (जैसे प्रकाश, स्पर्श, जल, ताप) के प्रति अनुक्रिया प्रदर्शित करते हैं, जैसे लाजवंती (टचमीनॉट) की पत्तियों का स्पर्श करने पर सिकुड़ जाना — यह सिद्ध करता है कि पर्यावरणीय उद्दीपनों के प्रति अनुक्रिया-क्षमता सभी सजीवों (पादप व प्राणी दोनों) में उपस्थित होती है।
- वर्गिकीय अध्ययन में केवल बाह्य संरचनात्मक (morphological) लक्षणों तक सीमित न रहकर जैवरासायनिक व्यवहार (biochemical behaviour), शरीरक्रियात्मक (physiological) विवरण तथा विकासवादी संबंधों (evolutionary relationships) को भी सम्मिलित करना क्रमबद्धिकी (systematics) का ही विस्तारित रूप है — यह परंपरागत रूपात्मक वर्गिकी से कहीं अधिक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
- टैक्सोनॉमिक अध्ययन के लिए मुद्रित (printed) साधनों के अतिरिक्त कैटलॉग (catalogue) भी एक सहायक वर्गिकीय साधन है, जो किसी संग्रहालय अथवा क्षेत्र-विशेष में उपलब्ध नमूनों की एक सूचीबद्ध (indexed) जानकारी प्रदान करता है — फ्लोरा, मैनुअल व मोनोग्राफ की तरह यह भी पहचान में सहायक तो है, परन्तु इसका उद्देश्य केवल सूचीकरण (indexing) तक सीमित है, विस्तृत वर्णन तक नहीं।
- चूँकि यह अध्याय परिभाषाओं व वर्गिकीय साधनों (taxonomic aids) पर आधारित तथ्यात्मक अध्याय है, अंतिम रिवीज़न में इन तीन बिंदुओं को प्राथमिकता दें — (1) सजीवों की विशेषताओं में से "उपापचय" की विशिष्टता व अन्य विशेषताओं (वृद्धि, जनन) की सीमाएँ, (2) वर्गिकीय साधन — शाकाश्रय, वानस्पतिक उद्यान, संग्रहालय, जन्तु उद्यान व कुंजी के बीच स्पष्ट भेद, (3) वर्गिकी बनाम क्रमबद्धिकी बनाम वर्गीकरण की परिभाषाएँ व इनसे जुड़े वैज्ञानिकों के नाम — इन्हीं तीन विषयों से अधिकांश वैचारिक प्रश्न बनते हैं।
NEET PYQs NEET परीक्षा में अब तक पूछे गए प्रश्न (Previous Year Questions)
इस अध्याय (जीव जगत) से NEET/AIPMT परीक्षा में अब तक पूछे गए प्रश्न, वर्ष के संदर्भ सहित। हर प्रश्न पर क्लिक करके रंगीन पृष्ठभूमि वाला उत्तर देखें। सभी accordion बंद (closed) हैं।
AIPMT 2001 वंश (genus) की तुलना में निम्न में से किसमें लक्षण कम व्यापक (less general) होते हैं?
(अ) कुल (फैमिली) (ब) गण (आर्डर) (स) जाति (स्पीशीज) (द) वर्ग (क्लास)
उत्तर: (स) जाति (स्पीशीज)। जैसे-जैसे हम जाति से जगत की ओर ऊपर जाते हैं, समान लक्षणों में कमी आती जाती है। इसलिए वंश से नीचे स्थित जाति में लक्षण सबसे कम व्यापक (सबसे अधिक विशिष्ट) होते हैं, जबकि कुल, गण व वर्ग — ये सभी वंश से ऊपर के संवर्ग हैं जिनमें लक्षण अधिक व्यापक (सामान्य) होते हैं।
NEET 2013 (कर्नाटक) टमाटर व आलू के बीच उभयनिष्ठ (common) लक्षण किस संवर्ग के स्तर पर सर्वाधिक होंगे?
(अ) कुल (फैमिली) (ब) गण (आर्डर) (स) भाग (डिविजन) (द) वंश (जीनस)
उत्तर: (द) वंश (जीनस)। टमाटर व आलू दोनों ही सोलेनम (Solanum) वंश की भिन्न-भिन्न स्पीशीज हैं। चूँकि जितना नीचे का संवर्ग होगा, समानता उतनी ही अधिक होगी, इसलिए दोनों में अधिकतम समानता वंश के स्तर पर पाई जाएगी, न कि कुल, गण या भाग के व्यापक स्तर पर।
NEET 2016 (प्रथम पाली) नाम-पद्धति के सार्वभौमिक नियमों में से कौन-सा कथन इन नियमों के विपरीत (contrary) है?
(अ) नाम लैटिन भाषा में होते हैं व तिरछे लिखे जाते हैं (ब) हाथ से लिखते समय नामों को रेखांकित किया जाता है (स) जैविक नाम किसी भी भाषा में लिखे जा सकते हैं (द) नाम का पहला शब्द वंश तथा दूसरा जाति संकेत पद दर्शाता है
उत्तर: (स) जैविक नाम किसी भी भाषा में लिखे जा सकते हैं — यह कथन नियमों के विपरीत है। सही नियम यह है कि जैविक नाम सदैव लैटिन भाषा में (या लैटिनीकृत रूप में) लिखे जाते हैं, चाहे उनका मूल कहीं से भी हो। शेष तीनों कथन (अ, ब, द) नाम-पद्धति के सही नियमों को दर्शाते हैं।
NEET 2016 (द्वितीय पाली) निम्न चार कथनों (A–D) में से दो सही कथन चुनें: A. जैविक स्पीशीज की परिभाषा एर्न्स्ट मेयर ने दी। B. प्रकाशकाल (photoperiod) पौधों में जनन को प्रभावित नहीं करता। C. द्विपदनाम पद्धति आर.एच. व्हिटेकर ने दी। D. एककोशिकीय जीवों में जनन, वृद्धि के समरूप ही होता है।
उत्तर: A व D सही हैं। जैविक स्पीशीज की परिभाषा वास्तव में एर्न्स्ट मेयर ने दी थी (कथन A सही), तथा एककोशिकीय जीवों में जनन व वृद्धि एक जैसी प्रक्रिया मानी जाती है (कथन D सही)। द्विपदनाम पद्धति वास्तव में कैरोलस लीनियस ने दी थी, न कि आर.एच. व्हिटेकर ने (जो पाँच-जगत वर्गीकरण के लिए जाने जाते हैं) — इसलिए C गलत है। तथा प्रकाशकाल वास्तव में पौधों में पुष्पन व जनन को प्रभावित करता है — इसलिए B भी गलत है।
NEET 2022 (प्रथम पाली) प्राणियों के संदर्भ में वर्गिकी संवर्गों की कौन-सी आरोही क्रम व्यवस्था सही है?
(अ) जगत, संघ, वर्ग, गण, कुल, वंश, जाति (ब) जगत, वर्ग, संघ, कुल, गण, वंश, जाति (स) जगत, गण, वर्ग, संघ, कुल, वंश, जाति (द) जगत, गण, संघ, वर्ग, कुल, वंश, जाति
उत्तर: (अ) जगत, संघ, वर्ग, गण, कुल, वंश, जाति। ध्यान दें कि यहाँ क्रम अवरोही (जगत से जाति की ओर) दिखाया गया है, फिर भी सही अनुक्रम यही है — जगत → संघ → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति। शेष विकल्पों में संघ, वर्ग व गण का क्रम आपस में उलट दिया गया है।
AIPMT 2012 Mains निम्नलिखित में से किस जीव का वैज्ञानिक नाम अंतर्राष्ट्रीय नाम-पद्धति नियमों के अनुसार सही ढंग से लिखा व सही ढंग से वर्णित है?
(अ) मस्का डोमेस्टिका — घरेलू छिपकली, एक सरीसृप (ब) प्लाज्मोडियम फैल्सिपेरम — एक प्रोटोजोआ परजीवी, जो मलेरिया के सबसे गंभीर प्रकार का कारण है (स) फेलिस टिग्रिस — भारतीय बाघ, गिर वनों में संरक्षित (द) ई.कोलाई — पूरा नाम एंटअमीबा कोलाई, मानव आँत में पाया जाने वाला जीवाणु
उत्तर: (ब) प्लाज्मोडियम फैल्सिपेरम — सही नाम व सही विवरण। शेष तीनों विकल्पों में तथ्यात्मक गलती है — मस्का डोमेस्टिका वास्तव में घरेलू मक्खी है, छिपकली नहीं; भारतीय बाघ का सही वैज्ञानिक नाम पेंथरा टिगरिस है, फेलिस टिग्रिस नहीं; तथा ई.कोलाई का पूरा नाम एस्केरिशिया कोलाई (Escherichia coli) है, एंटअमीबा कोलाई नहीं।
RE-NEET 2026 वंश (genus) निम्नलिखित में से क्या दर्शाता है?
(अ) समीपस्थ संबंधित कुलों का समूह (ब) एक अकेला पौधा या प्राणी (स) पौधों व प्राणियों की एक समष्टि (द) समीपस्थ संबंधित स्पीशीज का समूह
उत्तर: (द) समीपस्थ संबंधित स्पीशीज का समूह। जैसा कि अध्याय में बताया गया है, वंश उन जातियों (स्पीशीज) का समूह है जिनमें एक-दूसरे से मिलते-जुलते गुण होते हैं — उदाहरण के लिए आलू, टमाटर व बैंगन तीन अलग स्पीशीज होते हुए भी एक ही वंश सोलेनम में आते हैं।
RE-NEET 2026 निम्नलिखित वर्गिकी संवर्गों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें: (a) वंश (b) वर्ग (c) गण (d) संघ (e) कुल (f) जगत (g) जाति
उत्तर: जाति (g) → वंश (a) → कुल (e) → गण (c) → वर्ग (b) → संघ (d) → जगत (f)। यह ठीक वही आरोही क्रम है जो अध्याय में पिरामिड चित्र (चित्र 1.1) के माध्यम से दर्शाया गया है — सबसे नीचे जाति व सबसे ऊपर जगत।
RE-NEET 2026 सूची-I को सूची-II से मिलाएँ (आम के उदाहरण पर आधारित)
सूची-I: A. कुल B. वंश C. वर्ग D. संघ/भाग E. गण | सूची-II: I. सेपिंडेल्स II. डाइकोटीलिडनी III. एनाकरडिएसी IV. एंजियोस्पर्मी V. मैंजीफेरा
उत्तर: A–III (एनाकरडिएसी), B–V (मैंजीफेरा), C–II (डाइकोटीलिडनी), D–IV (एंजियोस्पर्मी), E–I (सेपिंडेल्स)। यह ठीक अध्याय की तालिका 1.1 में दी गई आम (मैंजीफेरा इंडिका) की संपूर्ण वर्गिकी हायरार्की है — इसे याद रखना ऐसे मिलान-प्रश्नों के लिए बहुत उपयोगी है।
NEET 2026 द्विपदनाम पद्धति के सार्वभौमिक नियमों के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
(अ) जैविक नाम सामान्यतः लैटिन भाषा में होते हैं (ब) हाथ से लिखते समय दोनों शब्दों को अलग-अलग रेखांकित किया जाता है (स) जाति संकेत पद छोटे अक्षर से शुरू होता है (द) नाम का पहला शब्द जाति संकेत पद तथा दूसरा शब्द वंश को दर्शाता है
उत्तर: (द) असत्य कथन — नाम का पहला शब्द जाति संकेत पद तथा दूसरा शब्द वंश को दर्शाता है। यह कथन उल्टा है; सही नियम यह है कि नाम का पहला शब्द वंश (genus) को तथा दूसरा शब्द जाति संकेत पद को दर्शाता है। शेष तीनों कथन (अ, ब, स) नाम-पद्धति के सही नियमों को दर्शाते हैं।