पूर्ण संख्याएँ
इस अध्याय में हम पूर्ण संख्याओं के बारे में, संख्या रेखा पर उनके प्रदर्शन,
क्रमागत संख्याएँ, तथा पूर्ण संख्याओं पर विभिन्न संक्रियाओं के गुणधर्मों के बारे में जानेंगे।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
प्राकृतिक संख्याएँ: 1, 2, 3, 4, 5, ... — वस्तुओं को गिनने के लिए प्रयुक्त संख्याएँ।
प्रश्न: क्या हमारा काम इन्हीं संख्याओं से चल सकता है? 🤔
❓ चित्र 3 में किसी चिड़िया की अनुपस्थिति को किस संख्या से बताएँ?
➡️ हमें संख्या 0 (शून्य) की आवश्यकता है!
🌿 शून्य (0): वह संख्या जो किसी वस्तु की अनुपस्थिति (कोई वस्तु नहीं) को दर्शाती है।
पूर्ण संख्याएँ (Whole Numbers): 0, 1, 2, 3, 4, 5, ...
- पूर्ण संख्याएँ = प्राकृतिक संख्याएँ + 0 (शून्य)
- सबसे छोटी पूर्ण संख्या: 0
- सबसे बड़ी पूर्ण संख्या: कोई नहीं — क्योंकि प्रत्येक पूर्ण संख्या से बड़ी पूर्ण संख्या होती है।
- 0 की पूर्ववर्ती पूर्ण संख्या: कोई नहीं (क्योंकि -1 पूर्ण संख्या नहीं है)
🔹 पूर्ववर्ती एवं उत्तरवर्ती पूर्ण संख्याएँ
| पूर्ण संख्या | पूर्ववर्ती | उत्तरवर्ती |
|---|---|---|
| 0 | कोई नहीं | 1 |
| 5 | 4 | 6 |
| 13 | 12 | 14 |
| 20 | 19 | 21 |
🔢 पूर्ण संख्याएँ: 0, 1, 2, 3, 4, ... — सबसे छोटी 0, सबसे बड़ी कोई नहीं।
संख्या-रेखा (Number Line): एक सरल रेखा जिस पर बराबर अन्तराल पर पूर्ण संख्याओं को दर्शाया जाता है।
- संख्या-रेखा पर 0 से प्रारम्भ करते हैं।
- बराबर दूरी पर 1, 2, 3, 4, ... को प्रदर्शित करते हैं।
- दायीं ओर जाने पर संख्याएँ बढ़ती हैं।
- बायीं ओर जाने पर संख्याएँ घटती हैं।
🔹 संख्या-रेखा पर बिन्दुओं द्वारा निरूपित संख्याएँ
📏 संख्या-रेखा: 0 से प्रारम्भ — दायीं ओर बड़ी, बायीं ओर छोटी संख्याएँ।
क्रमागत संख्याएँ (Consecutive Numbers): वे संख्याएँ जो क्रम से एक के बाद एक आती हैं और जिनके बीच का अन्तर 1 होता है।
- उदाहरण: 2, 3, 4 — (2,3,4) क्रमागत हैं क्योंकि 3 = 2+1 और 4 = 3+1
- उदाहरण: 7, 8, 9 — (7,8,9) क्रमागत हैं।
- उदाहरण (नहीं): 15, 17, 20 — क्रमागत नहीं हैं (अन्तर 2 और 3 है)
- दो क्रमागत पूर्ण संख्याओं का अन्तर सदैव 1 होता है।
🔹 तीन क्रमागत संख्याओं का विशेष गुण
3 + 5 = 8 → 8 ÷ 2 = 4 → बीच की संख्या = 4 ✅
पहली और तीसरी संख्या का योगफल = 40
∴ योगफल का आधा = 40 ÷ 2 = 20
∴ बीच की संख्या = 20
अतः संख्याएँ = 19, 20, 21
🔗 क्रमागत संख्याएँ: अन्तर 1 — पहली और तीसरी का योगफल का आधा = बीच की संख्या।
🔹 (i) योग का संवरक गुण (Closure Property)
- दो पूर्ण संख्याओं का योगफल सदैव पूर्ण संख्या होता है।
- उदाहरण: 5 + 7 = 12 (पूर्ण संख्या), 3 + 4 = 7 (पूर्ण संख्या), 0 + 3 = 3 (पूर्ण संख्या)
🔹 (ii) योग का क्रम-विनिमेय गुण (Commutative Property)
- दो पूर्ण संख्याओं को जोड़ते समय क्रम बदलने पर योगफल में कोई अन्तर नहीं होता।
- नियम: a + b = b + a
- उदाहरण: 3 + 5 = 8 और 5 + 3 = 8 → 3 + 5 = 5 + 3
🔹 (iii) योग का तत्समक अवयव (Additive Identity)
- किसी पूर्ण संख्या में 0 (शून्य) जोड़ने पर योगफल वही संख्या होती है।
- नियम: a + 0 = a = 0 + a
- 0 को पूर्ण संख्याओं में योग का तत्समक अवयव (Additive Identity) कहते हैं।
🔹 (iv) योग का साहचर्य गुण (Associative Property)
- तीन पूर्ण संख्याओं को जोड़ते समय किन्हीं दो को पहले जोड़ने से योगफल में कोई अन्तर नहीं होता।
- नियम: (a + b) + c = a + (b + c)
- उदाहरण: (2 + 3) + 4 = 5 + 4 = 9 और 2 + (3 + 4) = 2 + 7 = 9
➕ योग के गुण: संवरक, क्रम-विनिमेय, तत्समक (0), साहचर्य — सभी पूर्ण संख्याओं के लिए सत्य।
🔹 (i) गुणन का संवरक गुण (Closure Property)
- दो पूर्ण संख्याओं का गुणनफल सदैव पूर्ण संख्या होता है।
- उदाहरण: 3 × 5 = 15 (पूर्ण संख्या), 0 × 8 = 0 (पूर्ण संख्या)
🔹 (ii) गुणा का क्रम-विनिमेय गुण (Commutative Property)
- दो पूर्ण संख्याओं को गुणा करते समय क्रम बदलने पर गुणनफल में कोई अन्तर नहीं होता।
- नियम: a × b = b × a
- उदाहरण: 3 × 5 = 15 और 5 × 3 = 15 → 3 × 5 = 5 × 3
🔹 (iii) शून्य का गुणन गुण (Zero Property)
- किसी भी पूर्ण संख्या को 0 से गुणा करने पर गुणनफल 0 होता है।
- नियम: a × 0 = 0 = 0 × a
- उदाहरण: 5 × 0 = 0, 0 × 3 = 0, 0 × 0 = 0
🔹 (iv) गुणन का तत्समक अवयव (Multiplicative Identity)
- किसी पूर्ण संख्या में 1 से गुणा करने पर गुणनफल वही संख्या होती है।
- नियम: a × 1 = a = 1 × a
- 1 को पूर्ण संख्याओं में गुणन का तत्समक अवयव कहते हैं।
🔹 (v) गुणन का साहचर्य गुण (Associative Property)
- तीन पूर्ण संख्याओं को गुणा करते समय किन्हीं दो को पहले गुणा करने से गुणनफल में कोई अन्तर नहीं होता।
- नियम: (a × b) × c = a × (b × c)
- उदाहरण: (2 × 3) × 4 = 6 × 4 = 24 और 2 × (3 × 4) = 2 × 12 = 24
🔹 (vi) गुणन का वितरण गुण (Distributive Property)
- गुणन, योग और घटाना दोनों पर वितरित होता है।
- योग पर वितरण: a × (b + c) = a × b + a × c
- उदाहरण: 3 × (4 + 5) = 3 × 9 = 27 और 3 × 4 + 3 × 5 = 12 + 15 = 27
- घटाना पर वितरण: a × (b − c) = a × b − a × c
✖️ गुणा के गुण: संवरक, क्रम-विनिमेय, शून्य (0), तत्समक (1), साहचर्य, वितरण (योग/घटाना पर)।
🔹 प्रश्न 1 – सबसे छोटी पूर्ण संख्या
🔹 प्रश्न 2 – संख्या रेखा पर प्रदर्शित करें
🔹 प्रश्न 3 – तीन क्रमागत संख्याएँ
पहली + तीसरी = 28
∴ योगफल का आधा = 28 ÷ 2 = 14
∴ बीच की संख्या = 14
अतः संख्याएँ = 13, 14, 15
🔹 प्रश्न 4 – मध्य संख्या दी हो
मध्य संख्या = 39
∴ पहली संख्या = 39 − 1 = 38
∴ तीसरी संख्या = 39 + 1 = 40
अतः संख्याएँ = 38, 39, 40
🔹 प्रश्न 5 – प्राकृतिक से पूर्ण संख्या
🔹 प्रश्न 1 – योगफल ज्ञात करें
🔹 प्रश्न 2 – संख्या रेखा पर दिखाएँ
🔹 प्रश्न 3 – रिक्त स्थान भरें
🔹 प्रश्न 4 – घटाना क्रम-विनिमेय नहीं
🔹 प्रश्न 1 – गुणा के गुण
🔹 प्रश्न 2 – गुणनफल ज्ञात करें (वितरण गुण से)
🔹 प्रश्न 3 – गुणनफल ज्ञात करें
🔹 प्रश्न 1 – 12 ÷ 2 = 6
🔹 प्रश्न 2 – गुणात्मक तथ्य
🔹 प्रश्न 3 – 117 को गुणा के रूप में
🔹 प्रश्न 4 – स्वयं से विभाजित
🔹 प्रश्न 5 – क्रम बदलने पर भाग
📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)
🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)
📝 अभ्यास क्विज़
✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।