खनिज एवं धातु
इस अध्याय में हम खनिजों का परिचय, धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक एवं रासायनिक गुण,
उनके उपयोग, संक्षारण, गैल्वोनीकरण तथा मिश्र धातुओं के बारे में विस्तार से जानेंगे।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
खनिज (Mineral): पृथ्वी की भू-पर्पटी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले अकार्बनिक तत्व अथवा यौगिक।
- उदाहरण: क्वार्टज़, माइका (अभ्रक), हेमेटाइट, बॉक्साइट, अर्जेन्टाइट, ग्रेनाइट।
- स्थान: पृथ्वी के तल पर, भू-पर्पटी में तथा समुद्र में।
- समुद्री खनिज: सोडियम क्लोराइड (NaCl), सोडियम आयोडाइड, सोडियम आयोडेट।
- प्रकार: धातु खनिज (जैसे- बॉक्साइट) तथा अधातु खनिज (जैसे- स्फटिक, क्वार्टज़, अभ्रक)।
- यौगिक खनिज: बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O) – ऐलुमीनियम + ऑक्सीजन; कॉपर ग्लॉस (Cu₂S) – ताँबा + सल्फर।
💡 महत्व: खनिज प्राकृतिक संसाधन हैं – ये धातुओं के स्रोत हैं और अर्थव्यवस्था का आधार हैं।
🔹 खनिजों की उपलब्धता (भारत में)
| धातु | अयस्क | प्राप्ति स्थान |
|---|---|---|
| लोहा | हेमेटाइट | बिहार, उड़ीसा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ |
| ताँबा | कॉपर पाइराइट | आन्ध्र प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान |
| सोना | मुक्त अवस्था | कोलार खान-कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश |
| ऐलुमीनियम | बॉक्साइट | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, तमिलनाडु, गुजरात, जम्मू-कश्मीर |
| कैल्सियम | चूना पत्थर | सभी राज्यों में; संगमरमर – राजस्थान, मध्य प्रदेश |
अयस्क (Ore): वे खनिज जिनसे धातु का निष्कर्षण (extraction) अधिक मात्रा में, सरलता से एवं कम लागत में हो सकता है।
- सभी अयस्क खनिज होते हैं, परन्तु सभी खनिज अयस्क नहीं होते।
- अयस्क मुख्यतः ऑक्साइड, सल्फाइड, सल्फेट तथा कार्बोनेट के रूप में पाए जाते हैं।
- अधिकांश अयस्कों में केवल एक ही धातु उपस्थित होती है।
| धातु | अयस्क का नाम | रासायनिक सूत्र | रूप |
|---|---|---|---|
| मैग्नीशियम | मैग्नेसाइट | MgCO₃ | कार्बोनेट |
| जिंक (जस्ता) | कैलेमाइन | ZnCO₃ | कार्बोनेट |
| लेड (सीसा) | गैलेना | PbS | सल्फाइड |
| कॉपर (ताँबा) | कॉपर ग्लॉस | Cu₂S | सल्फाइड |
| आयरन (लोहा) | हेमेटाइट | Fe₂O₃ | ऑक्साइड |
| ऐलुमीनियम | बॉक्साइट | Al₂O₃·2H₂O | ऑक्साइड |
| सिल्वर (चाँदी) | अर्जेन्टाइट | Ag₂S | सल्फाइड |
| कैल्सियम | जिप्सम | CaSO₄·2H₂O | सल्फेट |
📌 उदाहरण: बॉक्साइट (Al₂O₃·2H₂O) – ऐलुमीनियम का अयस्क; हेमेटाइट (Fe₂O₃) – लोहे का अयस्क।
🔹 धातुओं के भौतिक गुण
- कठोरता: अधिकांश धातुएँ कठोर होती हैं (सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, पारा को छोड़कर)।
- धात्विक चमक (Metallic Lustre): धातुओं की सतह चमकदार होती है – आभूषण बनाने में उपयोगी।
- आघातवर्धनीयता (Malleability): पीटकर चादरों के रूप में परिवर्तित करने का गुण – सोना, चाँदी में अधिक, जस्ता में कम।
- तन्यता (Ductility): खींचकर तार बनाने का गुण – ताँबा, ऐलुमीनियम, लोहा।
- विद्युत चालकता: सभी धातुएँ विद्युत की सुचालक होती हैं – ताँबा, ऐलुमीनियम।
- ऊष्मा चालकता: धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं – बर्तन, बॉयलर बनाने में उपयोगी।
- घनत्व: धातुओं का घनत्व अधिक होता है (सोडियम, पोटैशियम हल्की धातुएँ)।
🔸 अधातुओं के भौतिक गुण
- कठोरता: अधिकांश अधातुएँ मुलायम होती हैं (हीरा – कार्बन का अपररूप – सबसे कठोर)।
- चमक: अधातुएँ धातुओं की तरह चमकीली नहीं होतीं (ग्रेफाइट चमकीला होता है)।
- आघातवर्धनीयता: अधातुएँ पीटने पर भंगुर (Brittle) हो जाती हैं।
- तन्यता: अधातुएँ तन्य नहीं होतीं – तार नहीं बनाए जा सकते।
- चालकता: अधिकांश अधातुएँ विद्युत एवं ऊष्मा की कुचालक होती हैं (ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक)।
🔹 विशेष तथ्य:
- सोने की 20 लाख चादरों की मोटाई केवल 1 सेमी होती है।
- 1 ग्राम सोने से लगभग 2 किमी लम्बा तार बनाया जा सकता है।
- उपधातु (Metalloid): जरमेनियम, आर्सेनिक, ऐन्टीमनी – इनमें धातु एवं अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं।
🔹 1. ऑक्सीजन से अभिक्रिया
- धातु + ऑक्सीजन → धातु ऑक्साइड
- सोडियम, पोटैशियम कमरे के ताप पर ऑक्सीजन से क्रिया करते हैं – इन्हें मिट्टी के तेल में रखा जाता है।
- मैग्नीशियम: 2Mg + O₂ → 2MgO (सफेद पाउडर – मैग्नीशियम ऑक्साइड)
- कार्बन (अधातु): C + O₂ → CO₂ (कार्बन डाइऑक्साइड) – जलने पर CO₂ बनता है।
- 3C + 2O₂ → 2CO + CO₂ (अपूर्ण दहन पर CO भी बनता है)।
🔹 2. जल से अभिक्रिया
- सक्रिय धातु + जल → धातु हाइड्रॉक्साइड/ऑक्साइड + हाइड्रोजन गैस
- सोडियम + जल: 2Na + 2H₂O → 2NaOH + H₂↑ (बहुत तीव्र अभिक्रिया, H₂ गैस निकलती है)
- मैग्नीशियम + भाप/गर्म जल: Mg + H₂O → MgO + H₂↑
🔹 3. अम्ल से अभिक्रिया
- धातु + अम्ल → लवण + हाइड्रोजन गैस
- जस्ता (Zn) + हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
- हाइड्रोजन गैस 'पॉप' की ध्वनि के साथ जलती है (परीक्षण)।
- सल्फर (अधातु) + नाइट्रिक अम्ल: 2S + 10HNO₃ → H₂SO₄ + SO₂ + 10NO₂ + 4H₂O
💡 महत्वपूर्ण: धातुएँ ऑक्सीजन, जल एवं अम्ल से क्रिया करती हैं – इन गुणों के आधार पर इन्हें पहचाना जाता है।
- लोहा (Iron): सबसे अधिक उपयोग में आने वाली धातु – पिन, कील से लेकर भारी उपकरण, पुल, रेलगाड़ियाँ, वाहन।
- ऐलुमीनियम (Aluminium): घरेलू बर्तन, हवाई जहाज, उपग्रह, फ़ॉइल (पन्नियाँ) – खाने की वस्तुओं, दवाइयों, चॉकलेट की पैकिंग।
- ताँबा (Copper): विद्युत केबल, तार, बर्तन, बॉयलर – विद्युत चालकता के लिए महत्वपूर्ण।
- सोना (Gold) और चाँदी (Silver): आभूषण, सजावट – अत्यधिक आघातवर्धनीय (पतली चादरें/पन्नियाँ बनायी जाती हैं – वरक़)।
- चाँदी की पन्नियाँ: मिठाइयों को सजाने के लिए उपयोग।
- ऐलुमीनियम की पन्नियाँ: खाने की वस्तुओं, दवाइयों, चॉकलेट एवं सिगरेट की पैकिंग।
संक्षारण (Corrosion): धातु की सतह पर उसका यौगिक बनकर धातु की परतों के नष्ट होने की प्रक्रिया।
🔹 जंग (Rusting) – लोहे का संक्षारण
- लोहे पर भूरी परत (आयरन ऑक्साइड – Fe₂O₃) जम जाती है।
- शर्त: जंग लगने के लिए ऑक्सीजन (वायु) एवं नमी (जल) दोनों की उपस्थिति आवश्यक है।
- प्रयोग: तीन परखनलियों में लोहे की कीलें –
- 1st (निर्जल CaCl₂ – नमी अवशोषक) → कोई जंग नहीं
- 2nd (उबला जल – ऑक्सीजन रहित) → कोई जंग नहीं
- 3rd (साधारण नल का जल) → जंग लगता है
- निष्कर्ष: जंग लगने के लिए वायु (O₂) एवं नमी (H₂O) दोनों आवश्यक हैं।
🔹 अन्य धातुओं का संक्षारण
- ताँबा: हरे रंग की कॉपर कार्बोनेट (CuCO₃) की परत।
- चाँदी: काली सिल्वर सल्फ़ाइड (Ag₂S) की परत।
- ऐलुमीनियम: ऐलुमीनियम ऑक्साइड (Al₂O₃) की परत – चमक नष्ट हो जाती है।
🔹 संक्षारण रोकने के उपाय
- पेंट: लोहे के फर्नीचर, पुल, रेल डिब्बे, बस, ट्रक पर पेंट किया जाता है।
- ग्रीस या तेल: नए औजारों (कैंची, चाकू) पर तेल/ग्रीस लगाया जाता है।
- गैल्वोनीकरण (Galvanization): लोहे पर जस्ते की परत चढ़ाना (छत, बाल्टी, ड्रम)।
- विद्युत लेपन (Electroplating): क्रोमियम, निकिल, टिन की परत चढ़ाना।
- मिश्र धातु बनाना: स्टेनलेस स्टील (लोहा + क्रोमियम) – जंग नहीं लगता।
⚠️ संक्षारण से अर्थव्यवस्था को बहुत हानि होती है – समय पर धातुओं की सुरक्षा करना आवश्यक है।
गैल्वोनीकरण (Galvanization): लोहे पर जस्ता (Zinc) की पतली परत चढ़ाने की प्रक्रिया।
- विधि: लोहे की चादर या पात्र को पिघले हुए जस्ते में डुबोया जाता है – जस्ते की परत जम जाती है।
- उद्देश्य: लोहे को जंग (संक्षारण) से बचाना।
- उपयोग: छतों की लोहे की चादरें, बाल्टियाँ, ड्रम, गैल्वनाइज्ड लोहे (GI) के पाइप।
- जस्ता (Zn) वायु एवं नमी से क्रिया नहीं करता – इसलिए लोहा सुरक्षित रहता है।
मिश्र धातु (Alloy): दो या अधिक धातुओं (या धातु एवं अधातु) का समांगी मिश्रण।
- धातुओं को पिघली हुई अवस्था में मिलाकर मिश्र धातु बनाया जाता है।
- मिश्र धातु के गुण, उसके अवयवी धातुओं के गुणों से भिन्न एवं श्रेष्ठ होते हैं।
🔹 मिश्र धातुओं की विशेषताएँ
- कठोरता: मिश्र धातु प्रायः मूल धातु से अधिक कठोर होती है (सोना + ताँबा = आभूषण योग्य)।
- संक्षारण प्रतिरोध: लोहा + क्रोमियम = स्टेनलेस स्टील (जंग नहीं लगता)।
- रासायनिक स्थायित्व: मिश्र धातुओं का रासायनिक यौगिकों द्वारा क्षरण नहीं होता।
- गलनांक में परिवर्तन: सोल्डर (सीसा+टिन) का गलनांक सीसा और टिन दोनों से कम – विद्युत परिपथों में टाँका लगाने के लिए उपयोगी।
| मिश्र धातु | अवयव | उपयोग |
|---|---|---|
| पीतल (Brass) | ताँबा + जस्ता | बर्तन, तार, वाद्ययन्त्र, सजावट |
| काँसा (Bronze) | ताँबा + टिन | सिक्का, घण्टा, मेडल, गहने |
| सोल्डर (Solder) | सीसा + टिन | विद्युत परिपथ, टाँका लगाना |
| स्टेनलेस स्टील | लोहा + क्रोमियम + निकिल | बर्तन, उपकरण, चाकू, काँटे |
🔹 पिग आयरन एवं इस्पात (Steel)
- पिग आयरन (कच्चा/ढलवा लोहा): 93% Fe, 4-5% C, शेष अशुद्धियाँ (S, P, Si) – भंगुर, कम गलनांक – पाइप, टंकी, टब, कूड़ादान।
- इस्पात (Steel): 98.8-99.8% Fe, 0.25-1.5% C – मोटरगाड़ी, नट-बोल्ट, मशीनरी।
- पिग आयरन एवं इस्पात भी मिश्र धातुओं के ही रूप हैं।
💡 मिश्र धातु का लाभ: मूल धातु के दोषों को दूर करके अधिक उपयोगी एवं टिकाऊ पदार्थ प्राप्त होता है।
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