सूक्ष्मजीव (Microorganisms)
इस अध्याय में हम सूक्ष्मजीवों का परिचय, उनके प्रक उपयोगी एवं हानिकारक सूक्ष्मजीव, भोजन संरक्षण, रोगों का संचरण टीकाकरण तथा एड्स के बारे में विस्तार से जानेंगे।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
सूक्ष्मजीव (Microorganisms): वे जीव जिन्हें नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता – सूक्ष्मदर्शी (Microscope) की आवश्यकता होती है।
🔹 सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति (सर्वव्यापी)
- हवा, पानी, मिट्टी – सभी जगह पाए जाते हैं।
- पौधों एवं जन्तुओं के शरीर के अन्दर एवं बाहर।
- अत्यन्त विषम परिस्थितियों में – बर्फ, गर्म पानी के झरने, समुद्र की तली, दलदल।
- मृतोपजीवी (Saprophytes): सड़े-गले पदार्थों में रहते हैं।
- परजीवी (Parasites): जन्तुओं और पौधों में परजीवी के रूप में (जैसे – एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका – मनुष्य की आँत में पेचिस रोग उत्पन्न करता है)।
💡 महत्वपूर्ण: सूक्ष्मजीव उपयोगी एवं हानिकारक दोनों होते हैं – ये हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं।
सूक्ष्मजीवों को सामान्यतः पाँच समूहों में बाँटा गया है:
🔹 1. जीवाणु (Bacteria)
- एककोशिकीय – हवा, मिट्टी, जल सभी जगह (नमी युक्त स्थानों पर अधिक)।
- आकार: गोलाकार, दण्डाकार या सर्पाकार।
- कोशिका में केन्द्रक नहीं होता।
- कैप्सूल: कुछ जीवाणुओं के चारों ओर कठोर आवरण।
- कशाभिका (Flagella): धागे जैसी संरचना – गति में सहायक।
- साइनोबैक्टीरिया (Cyanobacteria): नीला-हरित शैवाल – प्रकाश-संश्लेषण द्वारा स्वपोषी, नाइट्रोजन स्थिरीकरण करते हैं। स्पाइरूलीना – भोजन के रूप में उपयोगी।
🔹 2. विषाणु (Virus)
- सबसे सूक्ष्म – न्यूक्लिक अम्ल + प्रोटीन।
- पूर्ण परजीवी – स्वतंत्र रूप से विभाजन नहीं कर सकते – जीवित कोशिका की आवश्यकता।
- उदाहरण: HIV (एड्स), COVID-19, इन्फ्लुएंज़ा।
🔹 3. प्रोटोजोआ (Protozoa)
- एककोशिकीय यूकेरियोटिक जीव।
- उदाहरण: प्लाज्मोडियम – मलेरिया; एण्टअमीबा – पेचिस।
🔹 4. कवक (Fungi)
- बहुकोशिकीय (यीस्ट एककोशिकीय – कवक)।
- पौधों एवं जन्तुओं के मृत शरीर पर पलते हैं (अपघटक)।
- उदाहरण: पेनीसिलियम – पेनिसिलिन प्रतिजैविक; यीस्ट – ब्रेड, शराब; एगैरिकस, मोरेल (गुच्छी) – सब्जी/भोजन के रूप में; राइजोपस, म्यूकर – रोटी, अचार को नष्ट करना।
🔹 5. शैवाल (Algae)
- एककोशिकीय या बहुकोशिकीय – जड़, तना, पत्ती का अभाव।
- प्रकाश-संश्लेषण द्वारा स्वपोषी।
- उपयोग: भोजन, चारा; क्लोरेला – क्लोरेलिन (प्रतिजैविक); डायटम्स – टूथपेस्ट, तापरोधी ईंट, वार्निश/पेंट।
- हानिकारक: सीफेल्यूरोस वाइरीसेन्स – चाय की फसलों पर रोग।
🔹 1. प्रतिजैविक दवाएँ (Antibiotics)
- प्रतिजैविक: वे दवाएँ जो रोग फैलाने वाले जीवाणुओं को नष्ट करती हैं।
- पेनिसिलिन: पेनीसिलियम (कवक) से – पहली प्रतिजैविक दवा।
- स्ट्रेप्टोमाइसिन: स्ट्रेप्टोमाइसिस (जीवाणु) से।
- क्लोरेलिन: क्लोरेला (शैवाल) से।
- उपयोग: टी.बी., हैजा, टायफायड, निमोनिया आदि के उपचार में।
🔹 2. नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation)
- राइजोबियम (Rhizobium): चना, मटर, अरहर की जड़ों की गाँठों में – नाइट्रोजन को नाइट्रेट/नाइट्राइट में बदलता है → भूमि उर्वरता बढ़ती है।
- एजोटोबैक्टर: स्वतंत्र रूप से मिट्टी में नाइट्रोजन स्थिरीकरण।
- साइनोबैक्टीरिया (नॉस्टाक, एनाबीना, साइटोनिमा, ऑसीलेटोरिया): जैव उर्वरक – धान के खेतों में।
🔹 3. कार्बनिक पदार्थों का अपघटन (Decomposition)
- अपघटक: जीवाणु एवं कवक – मृत पौधों/जन्तुओं को सड़ाकर सरल अकार्बनिक पदार्थों में बदलते हैं।
- मृदा में पोषक तत्व संचित करते हैं – भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाते हैं।
🔹 4. भोजन के रूप में
- यीस्ट: प्रोटीन से भरपूर – खाद्य पदार्थ।
- एगैरिकस, मोरेला (गुच्छी): कवक – सब्जी के रूप में प्रयोग।
- स्पाइरूलीना: साइनोबैक्टीरिया – प्रोटीन की अत्यधिक मात्रा – भोजन के रूप में।
🔹 5. उद्योग धन्धों में
- यीस्ट: ब्रेड (डबल रोटी) बनाना।
- जीवाणु: दुग्ध उद्योग (दही – लैक्टोबैसिलस), सिरका उद्योग, तम्बाकू, चाय, चमड़े के उद्योग।
- लैक्टोबैसिलस: दूध से दही बनाना।
🔹 6. आनुवंशिक अभियांत्रिकी में
- इशेरीकिया कोलाई (E. coli), यीस्ट: आनुवंशिक अभियांत्रिकी में उपयोगी।
💡 दही कैसे बनता है? दूध में लैक्टोबैसिलस जीवाणु मिलाने से दही बनता है।
🔹 मनुष्य में रोग
- जीवाणु द्वारा: क्षय रोग (टी.बी.), हैजा, निमोनिया, टायफायड।
- विषाणु द्वारा: खसरा, चिकनपॉक्स, पोलियो, हेपेटाइटिस, जुकाम, इन्फ्लुएंज़ा।
- प्रोटोजोआ द्वारा: मलेरिया (प्लाज्मोडियम), पेचिस (एण्टअमीबा हिस्टोलिटिका)।
- कवक द्वारा: दाद (ट्राइकोफाइटन, माइक्रोस्पोरम)।
🔹 पशुओं में रोग
- एंथ्रेक्स (भेड़): बैसीलस एंथ्रेसिस (जीवाणु) द्वारा।
🔹 पौधों में रोग
- नींबू का कैंकर: जैन्योमोनास (जीवाणु)।
- आलू की पछेता अंगमारी: फाइटोप्थोरा इन्फेस्टैन्स (कवक)।
- गेहूँ का काला (स्मट): पक्सीनिया (कवक)।
- गेहूँ की गेरुई: कवक द्वारा।
- गेहूँ का कन्डुआ: कवक द्वारा।
- तम्बाकू का मोजेक रोग: विषाणु द्वारा।
- लौकी में लीफ कर्ल: विषाणु द्वारा।
- आलू में रिंग रॉट: जीवाणु द्वारा।
🔹 खाद्य पदार्थ नष्ट करना
- राइजोपस, म्यूकर (कवक): रोटी, ब्रेड, अचार, मिर्च आदि को नष्ट करते हैं।
- क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम: खाद्य पदार्थ को विषाक्त करता है।
🔹 भूमि की उर्वरता में कमी
- थायोबैसिलस डिनाइट्रीफिकेन्स: नाइट्रेट को नाइट्रोजन और अमोनिया में बदलता है – भूमि उर्वरता कम करता है।
⚠️ सावधानी: सूक्ष्मजीव अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं – स्वच्छता बहुत आवश्यक है।
भोजन संरक्षण: खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजीवों से नष्ट होने से बचाने की विधियाँ।
🔹 संरक्षण के तरीके
- नमक मिलाना (Salting): अचार में नमक – संरक्षक का कार्य करता है – एंजाइम निष्क्रिय हो जाते हैं।
- चीनी मिलाना: जैम, जेली, शरबत – चीनी संरक्षक का कार्य करती है।
- तापन (Heating): 120°C-126°C, 12-19 मिनट, 15 पौण्ड दाब – डिब्बों में भरने से पहले।
- बोतलों को पानी में उबालना: जैम, जेली, शरबत की बोतलों को – जीवाणु रहित/संक्रमण मुक्त करना।
- रसायन मिलाना:
- सोडियम मेटा बाई सल्फाइट
- सोडियम बेंजोएट
- एसीटिक अम्ल – सॉस, चटनी में संरक्षक।
- कीटनाशक दवाएँ: नेप्थीलीन की गोलियाँ – कपड़ों को कीटों से सुरक्षित।
- गैमेक्सीन (Gammexane): वस्तुओं को कीट संक्रमण से बचाना।
- सूर्य प्रकाश: पुस्तकों, वस्त्रों को धूप में रखना – सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं।
📌 महत्वपूर्ण: दूषित जल/भोजन हानिकारक हैं – स्वच्छ, ताजा एवं उचित रूप से संग्रहीत भोजन का ही प्रयोग करें।
रोगाणु (Pathogens): रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव।
🔹 संक्रमण के तरीके (Modes of Transmission)
- वायु द्वारा: छींक, खाँसी – जुकाम, इन्फ्लुएंज़ा (विषाणु – लाखों बूँदों में)।
- दूषित जल द्वारा: हैजा, टायफायड – रोगी के अपशिष्ट के मिश्रण से।
- मिट्टी द्वारा: सब्जियों के साथ प्रोटोजोआ – फोड़े-फुन्सी, पेट के कीड़े।
- संक्रमित व्यक्ति/वाहक द्वारा:
- मलेरिया: मादा एनाफिलीज़ मच्छर (वाहक – प्लाज्मोडियम)।
- डेंगू, चिकनगुनिया: टाइगर मच्छर – एडीज़ एजिप्टी (विषाणु) – दिन में काटता है।
- जापानी मस्तिष्क ज्वर (JE): मादा क्यूलेक्स मच्छर।
- फाइलेरिया (हाथीपाँव): मादा क्यूलेक्स मच्छर।
- सीधे सम्पर्क द्वारा: चिकनपॉक्स, खसरा।
🔹 संक्रामक रोग (Communicable Diseases)
वे रोग जो रोगी से स्वस्थ व्यक्ति में वायु, जल, भोजन अथवा सम्पर्क द्वारा फैलते हैं – जैसे: सर्दी, जुकाम, क्षय रोग, हैजा, चेचक।
| रोग | रोगकारक | संचरण | बचाव |
|---|---|---|---|
| क्षय रोग | जीवाणु | वायु | टीकाकरण |
| खसरा | विषाणु | वायु | टीकाकरण |
| चिकनपॉक्स | विषाणु | वायु/सम्पर्क | टीकाकरण |
| पोलियो | विषाणु | वायु/जल | टीकाकरण |
| हैजा | जीवाणु | जल/भोजन | स्वच्छता, टीकाकरण |
| टायफायड | जीवाणु | जल | उबला जल, टीकाकरण |
| हेपेटाइटिस | विषाणु | जल | उबला जल, टीकाकरण |
| मलेरिया | प्रोटोजोआ | मच्छर | मच्छरदानी, कीटनाशक |
| डेंगू | विषाणु | टाइगर मच्छर | मच्छरदानी, नीम खली |
| चिकनगुनिया | विषाणु | टाइगर मच्छर | मच्छरदानी, कीटनाशक |
💡 डेंगू के लक्षण: तीव्र ज्वर, सिरदर्द, आँखों के पीछे दर्द, शरीर पर चकते, नाक/मुँह से रक्तस्राव।
🔹 रोगों से बचाव के उपाय
- मच्छरों से बचाव: मच्छरदानी, मच्छर भगाने वाले रसायन, कीटनाशक छिड़काव, पानी एकत्र न होने दें, नीम की खली (खेतों में)।
- शुद्ध जल: उबालकर पीना, क्लोरीन युक्त जल, बर्तनों को ढकना।
- स्वच्छता: व्यक्तिगत स्वच्छता, अच्छी आदतें, भलीभाँति पका भोजन।
- पौधों में रोग: बीजों को कवकनाशी/जीवाणुनाशी से उपचारित करें।
- रसायन: पेस्टीसाइड (इन्सेक्टीसाइड, हर्बीसाइड, रोडेन्टीसाइड, फन्जीसाइड) – डीडीटी, बीएचसी, एलडिन, क्लोरोडेन।
🔹 टीकाकरण (Vaccination)
- टीका (Vaccine): मृत अथवा निष्क्रिय सूक्ष्मजीव – शरीर प्रतिरक्षी बनाता है – सदा के लिए सुरक्षा।
- टीकाकरण: टीके द्वारा रोगों का उपचार/रोकथाम।
- रोग जिनका टीका है: चेचक, क्षय रोग (BCG), हेपेटाइटिस, पोलियो (OPV/IPV), खसरा, डिप्थीरिया, काली खाँसी, टिटनेस (DPT), JE।
| उम्र | वैक्सीन |
|---|---|
| जन्म | BCG, OPV, हेप-B |
| 6 सप्ताह | OPV-1 + पेन्टावैलेन्ट-1 |
| 10 सप्ताह | OPV-2 + पेन्टावैलेन्ट-2 |
| 14 सप्ताह | OPV-3 + पेन्टावैलेन्ट-3 + IPV |
| 9 माह | खसरा-1, विटामिन A-1, JE-1 |
| 16-24 माह | DPT बूस्टर, OPV बूस्टर, खसरा-2, JE-2 |
| 5-6 वर्ष | DPT बूस्टर-2 |
| 10, 16 वर्ष | TT |
💡 टीकाकरण का महत्व: यह रोगों से आजीवन सुरक्षा प्रदान करता है – राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम अनिवार्य है।
एड्स (AIDS): Acquired Immuno Deficiency Syndrome – HIV (Human Immunodeficiency Virus) द्वारा होता है।
🔹 एड्स के लक्षण
- भूख न लगना
- वजन में कमी
- ज्वर
- त्वचा पर ददोरे
- थकावट
- रोग से लड़ने की क्षमता में कमी
- निमोनिया, त्वचा कैंसर अधिक होता है।
🔹 HIV का प्रभाव
- शरीर की श्वेत रुधिर कणिकाओं (WBC) एवं मस्तिष्क की कोशिकाओं को प्रभावित करता है।
- प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर हो जाता है – सामान्य रोगों से भी बचाव नहीं कर पाता।
- अन्ततः रोगी की मृत्यु हो जाती है।
- एड्स लाइलाज एवं जानलेवा रोग है।
🔹 एड्स का प्रतीक – Red Ribbon (♥️)
- एड्स जागरूकता के लिए लाल रिबन का प्रयोग किया जाता है।
🔹 एड्स संचरण के मार्ग
- असुरक्षित यौन सम्बन्ध
- संक्रमित रक्त चढ़ाना
- संक्रमित सूइयों/सिरिंजों का साझा उपयोग
- संक्रमित माँ से बच्चे में (गर्भावस्था, प्रसव, स्तनपान)
🔹 एड्स से बचाव
- सुरक्षित यौन सम्बन्ध (कंडोम का प्रयोग)
- संक्रमित सूइयों/सिरिंजों का प्रयोग न करें
- रक्त चढ़ाने से पहले HIV जाँच
- एड्स के प्रति जागरूकता फैलाना
⚠️ एड्स जागरूकता: एड्स से पीड़ित व्यक्ति को HIV धनात्मक कहते हैं – इनके साथ भेदभाव न करें, सहानुभूति रखें।
📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)
🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)
📝 अभ्यास क्विज़
✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।