मात्रक एवं मापन — सम्पूर्ण अध्ययन
भौतिक विज्ञान • मात्रात्मक सोच की नींव

मात्रक एवं मापन

हर भौतिक नियम, हर सूत्र और हर प्रयोग की शुरुआत एक साधारण सवाल से होती है — "कितना?" इस अध्याय में हम सीखेंगे कि भौतिक राशियों को किस मानकीकृत तरीके से मापा जाता है, माप में कितनी सटीकता भरोसेमंद है, और विमाओं की मदद से किसी भी सूत्र को बिना प्रयोग किए भी परखा जा सकता है। साथ ही, वर्ष 2000 से 2026 तक NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए सभी प्रश्न हल सहित यहाँ संकलित किए गए हैं।

भूमिका मापन क्या है और क्यों ज़रूरी है

किसी भौतिक राशि का मापन दरअसल उस राशि की तुलना एक मान्यताप्राप्त संदर्भ-मानक — यानी मात्रक — से करने की प्रक्रिया है। जब हम कहते हैं कि किसी मेज़ की लंबाई 2 मीटर है, तो असल में हम यह कह रहे हैं कि वह लंबाई "मीटर" नामक मानक इकाई से दोगुनी है। इसलिए हर मापन को दो हिस्सों में लिखा जाता है — एक आंकिक संख्या और एक मात्रक।

मूल बनाम व्युत्पन्न राशियाँ भौतिकी में सात मूल राशियाँ (Base Quantities) हैं — लंबाई, द्रव्यमान, समय, विद्युत धारा, ऊष्मागतिक ताप, पदार्थ की मात्रा और ज्योति-तीव्रता। इनके अलावा बाकी सभी राशियाँ — जैसे वेग, बल, ऊर्जा या दाब — इन्हीं मूल राशियों के संयोजन से बनती हैं, इसलिए इन्हें व्युत्पन्न राशियाँ (Derived Quantities) कहा जाता है। जिस तरह राशियाँ मूल और व्युत्पन्न होती हैं, उसी तरह उन्हें व्यक्त करने वाले मात्रक भी मूल मात्रक और व्युत्पन्न मात्रक कहलाते हैं, और इनके पूरे समुच्चय को मात्रक-प्रणाली कहा जाता है।
प्रणालीलंबाईद्रव्यमानसमय
CGSसेंटीमीटरग्रामसेकंड
FPS (ब्रिटिश)फुटपाउंडसेकंड
MKSमीटरकिलोग्रामसेकंड
SI (वर्तमान अंतरराष्ट्रीय मानक)मीटरकिलोग्रामसेकंड

इनके अतिरिक्त दो पूरक मात्रक (Supplementary Units) भी हैं — समतलीय कोण θ = ds/r के लिए रेडियन (rad), और घन कोण Ω = dA/r² के लिए स्टेरेडियन (sr)। दोनों ही राशियाँ प्रकृति से विमाहीन (dimensionless) हैं, क्योंकि इनमें लंबाई की इकाई ऊपर-नीचे दोनों जगह कट जाती है।

NEET फोकस
  • सात मूल राशियाँ — M, L, T, A, K, mol, cd
  • पूरक मात्रक — रेडियन (rad), स्टेरेडियन (sr) — दोनों विमाहीन

1 मात्रकों की SI प्रणाली

Système International d'Unités — आज विश्वभर में मान्य एकमात्र मानक प्रणाली

SI प्रणाली में कुल 7 मूल मात्रक परिभाषित किए गए हैं, जो हर वैज्ञानिक क्षेत्र में एक जैसी भाषा की तरह काम करते हैं।

मूल राशिमात्रक का नामप्रतीक
लंबाईमीटरm
द्रव्यमानकिलोग्रामkg
समयसेकंडs
विद्युत धाराऐम्पियरA
ऊष्मागतिक तापकेल्विनK
पदार्थ की मात्रामोलmol
ज्योति-तीव्रताकैंडेलाcd
2018 का बड़ा बदलाव 2018 के महासम्मेलन के बाद SI मात्रकों को अब किसी भौतिक वस्तु (जैसे पेरिस में रखे प्लैटिनम बार) पर नहीं, बल्कि मूलभूत भौतिक स्थिरांकों — प्रकाश की चाल c, प्लांक नियतांक h, बोल्ट्ज़मान नियतांक k, और आवोगाद्रो संख्या NA — के निश्चित संख्यात्मक मानों से परिभाषित किया गया है। यानी अब मीटर और किलोग्राम प्रकृति के स्थिरांकों में "बंधे" हुए हैं, किसी भौतिक वस्तु में नहीं।

कुछ सामान्य प्रयोग के अतिरिक्त मात्रक

नामप्रतीकSI मात्रक में मान
मिनटmin60 s
घंटाh3600 s
दिनd86400 s
वर्षy3.156 × 10⁷ s
लीटरL10⁻³ m³
टनt10³ kg
बारbar10⁵ Pa
मानक वायुमंडलीय दाबatm1.013 × 10⁵ Pa
क्यूरीCi3.7 × 10¹⁰ s⁻¹
ऐंग्स्ट्रमÅ10⁻¹⁰ m
प्रकाश वर्षly≈ 9.46 × 10¹⁵ m
पारसेकpc≈ 3.08 × 10¹⁶ m
खगोलीय इकाईAU1.496 × 10¹¹ m
मापन के परिशुद्ध यंत्र वर्नियर कैलिपर्स न्यूनतम माप ≈ 0.01 cm स्क्रूगेज न्यूनतम माप ≈ 0.001 cm
चित्र 1.1 — परिशुद्ध लंबाई-मापन के यंत्र (स्वनिर्मित)
NEET फोकस
  • वर्नियर कैलिपर्स LC = 1 MSD / N (सामान्यतः 0.01 cm)
  • स्क्रूगेज LC = पिच / वृत्तीय भागों की संख्या (सामान्यतः 0.001 cm)
  • 2018 से SI मात्रक भौतिक स्थिरांकों पर आधारित

2 सार्थक अंक (Significant Figures)

माप की सटीकता को ईमानदारी से बताने का तरीका

किसी मापित संख्या में विश्वसनीय अंक + पहला अनिश्चित अंक मिलकर सार्थक अंक बनाते हैं। ये अंक सीधे-सीधे बताते हैं कि हमारा मापन कितना परिशुद्ध है — जितने ज़्यादा सार्थक अंक, उतनी बेहतर परिशुद्धता।

गिनने के नियम 1. सभी शून्येतर अंक सार्थक होते हैं (2308 → 4 सार्थक अंक)।
2. दो शून्येतर अंकों के बीच के शून्य भी सार्थक होते हैं (2.008 → 4 सार्थक अंक)।
3. दशमलव से पहले, प्रथम शून्येतर अंक से पहले के शून्य सार्थक नहीं होते (0.002308 → 4 सार्थक अंक)।
4. बिना दशमलव वाली संख्या के अंत के शून्य सार्थक नहीं (123 m = 12300 cm में केवल 3 सार्थक अंक)।
5. दशमलव बिंदु सहित संख्या के अनुगामी शून्य सार्थक होते हैं (3.500 → 4 सार्थक अंक)।
6. वैज्ञानिक संकेत (a × 10b) में आधार संख्या a के सभी अंक (अनुगामी शून्य सहित) सार्थक होते हैं — संदेह होने पर यही तरीका सबसे भरोसेमंद है।
7. पूर्णांकित गुणक (जैसे r = d/2 में 2) यथार्थ माने जाते हैं — इनमें अनंत सार्थक अंक होते हैं, इन्हें गिनती में शामिल नहीं करते।

अंकीय संक्रियाओं में सार्थक अंकों के नियम

गुणा/भाग परिणाम में उतने ही सार्थक अंक रखें जितने सबसे कम सार्थक अंकों वाली मूल संख्या में हों — जैसे 4.237 g ÷ 2.51 cm³ = 1.69 g/cm³ (3 सार्थक अंक, क्योंकि 2.51 में केवल 3 हैं)।
जोड़/घटाव परिणाम में उतने ही दशमलव स्थान रखें जितने सबसे कम दशमलव स्थान वाली संख्या में हों — जैसे 436.32 + 227.2 + 0.301 = 663.8 g (227.2 में केवल 1 दशमलव स्थान है)।

पूर्णांकन (Rounding Off) का नियम

अगर उपेक्षणीय अंक 5 से अधिक हो तो पूर्ववर्ती अंक में 1 जोड़ें (2.746 → 2.75), और 5 से कम हो तो अपरिवर्तित रहने दें (2.743 → 2.74)। अगर उपेक्षणीय अंक ठीक 5 हो, तो "सम संख्या नियम" लागू होता है — पूर्ववर्ती अंक सम हो तो वही रहेगा (2.745 → 2.74), विषम हो तो 1 बढ़ जाएगा (2.735 → 2.74)।

व्यावहारिक सुझाव जटिल बहुपदीय परिकलनों में मध्यवर्ती पदों में 1 अतिरिक्त सार्थक अंक रखें, और केवल अंतिम उत्तर में ही उचित सार्थक अंकों तक पूर्णांकित करें — इससे संचयी पूर्णांकन त्रुटि नहीं होती।
NEET फोकस
  • गुणा/भाग — न्यूनतम सार्थक अंक निर्णायक
  • जोड़/घटाव — न्यूनतम दशमलव स्थान निर्णायक
  • 5 के लिए सम-संख्या नियम लागू होता है

3 भौतिक राशियों की विमाएँ

कोई भी राशि किस "प्रकार" की है, इसका गणितीय हस्ताक्षर

किसी भौतिक राशि की विमाएँ वे घातें हैं जिन्हें मूल राशियों (M, L, T, A, K, mol, cd) पर चढ़ाकर उस राशि को व्यक्त किया जाता है। यांत्रिकी में सामान्यतः केवल [M], [L], [T] का उपयोग होता है। जैसे आयतन = लंबाई³ ⟹ विमीय सूत्र [L³], और बल = द्रव्यमान × त्वरण ⟹ [MLT⁻²]।

याद रखने वाली बात विमाओं में राशि के परिमाण (magnitude) पर ध्यान नहीं दिया जाता, केवल राशि के प्रकार पर। इसीलिए वेग, चाल और औसत वेग — तीनों की विमा एक जैसी [LT⁻¹] होती है, भले ही वे अलग-अलग भौतिक अर्थ रखते हों।
NEET फोकस
  • विमाएँ केवल राशि का प्रकार बताती हैं, परिमाण नहीं
  • समान विमा वाली भिन्न राशियाँ — कार्य व टॉर्क, दाब व यंग गुणांक

4 विमीय सूत्र एवं विमीय समीकरणें

NEET/JEE में सबसे ज़्यादा पूछी जाने वाली संदर्भ-तालिका

विमीय सूत्र वह व्यंजक है जो दर्शाता है कि किसी राशि में मूल राशियों की कितनी घातें हैं। इसे बराबर लिखने पर बनने वाली समीकरण विमीय समीकरण कहलाती है। नीचे दी गई तालिका NE

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