जीव और समष्टियाँ
पारिस्थितिकी के स्तर, समष्टि गुण (जन्मदर, मृत्युदर, लिंगानुपात, आयु पिरैमिड), घनत्व, वृद्धि मॉडल (चरघातांकी एवं लॉजिस्टिक), जीवन-वृत्त विभिन्नता, तथा समष्टि अंतर्क्रियाएँ (परभक्षण, स्पर्धा, परजीविता, सहभोजिता, सहोपकारिता) — परीक्षा‑केंद्रित विस्तृत विवेचन।
★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित1 पारिस्थितिकी — मूल अवधारणा
जीव विज्ञानी संगठन के स्तर एवं पारिस्थितिकी का दायरा
जैविक विश्व अत्यंत विविधतापूर्ण एवं जटिल है। पारिस्थितिकी जीवों के अपने पर्यावरण के अजीवीय (भौतिक-रासायनिक) कारकों तथा जैविक घटकों (अन्य जातियों) के साथ होने वाली अंतर्क्रियाओं का अध्ययन है। पारिस्थितिकी जीव विज्ञानी संगठन के चार स्तरों — जीव, समष्टि, समुदाय एवं जीवोम — से संबंधित है।
बृहतअणु → कोशिकाएँ → ऊतक → अंग → व्यष्टि जीव → समष्टियाँ → समुदाय → पारितंत्र → जीवोम
- पारिस्थितिकी — जीव, समष्टि, समुदाय, जीवोम — चार स्तर
- प्राकृतिक वरण — समष्टि स्तर पर कार्य करता है
2 समष्टि — परिभाषा एवं गुण
समष्टि पारिस्थितिकी — विकास एवं आनुवंशिकी का संधि-बिंदु
प्रकृति में किसी भी जाति के पृथक, एकल व्यष्टि विरले ही मिलते हैं। अधिकांश जीव सुपरिभाषित भौगोलिक क्षेत्र में समूह में रहते हैं, समान संसाधनों का साझा उपयोग करते हैं या उनके लिए स्पर्धा करते हैं, तथा आपस में संकरण (जनन) करते हैं — इस प्रकार वे समष्टि का निर्माण करते हैं।
- समष्टि — एक ही जाति के व्यष्टियों का सीमांकित क्षेत्र में समूह
- समष्टि पारिस्थितिकी — समष्टि आनुवंशिकी एवं विकास को जोड़ती है
3 समष्टि गुण
जन्मदर, मृत्युदर, लिंगानुपात, आयु वितरण
समष्टि में कुछ ऐसे गुण होते हैं जो व्यष्टि जीव में नहीं होते। व्यष्टि जन्मता और मरता है, लेकिन समष्टि में जन्म दरें और मृत्यु दरें होती हैं — इन्हें प्रति व्यक्ति जन्म दर और मृत्यु दर कहते हैं।
| गुण | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| जन्म दर | प्रति व्यक्ति प्रति इकाई समय नई संतति | तालाब में कमल: 8/20 = 0.4 प्रति वर्ष |
| मृत्यु दर | प्रति व्यक्ति प्रति इकाई समय मृत्यु | फलमक्खी: 4/40 = 0.1 प्रति सप्ताह |
| लिंगानुपात | समष्टि में नर व मादा का अनुपात | 60% स्त्री, 40% नर |
| आयु वितरण | विभिन्न आयु वर्गों में व्यष्टियों का वितरण | आयु पिरैमिड (बढ़ती/स्थिर/घटती) |
- जन्मदर एवं मृत्युदर — प्रति व्यक्ति दरें
- लिंगानुपात — समष्टि स्तर का गुण
- आयु पिरैमिड — बढ़ती (त्रिभुजाकार), स्थिर (घंटाकार), घटती (कलशाकार)
4 समष्टि घनत्व
समष्टि के आकार का मापन
समष्टि घनत्व (N) — इकाई क्षेत्र/आयतन में व्यष्टियों की संख्या। यह समष्टि के आकार व आवास में उसकी स्थिति का महत्वपूर्ण सूचक है। घनत्व निरपेक्ष (वास्तविक संख्या) या सापेक्ष (अनुमानित) हो सकता है।
- निरपेक्ष घनत्व: प्रति इकाई क्षेत्र वास्तविक संख्या (जहाँ संभव हो)
- सापेक्ष घनत्व: प्रति पाश मछलियाँ, पगचिह्न/मल गुटिकाएँ (बाघ गणना), प्रतिशत आवरण (पादप)
- जीव भार (बायोमास): बड़े वृक्षों के लिए अधिक अर्थपूर्ण
- समष्टि घनत्व — N द्वारा निरूपित
- सापेक्ष घनत्व — बाघ गणना (पगचिह्न/मल) पर आधारित
5 समष्टि वृद्धि
चरघातांकी एवं लॉजिस्टिक मॉडल
समष्टि का घनत्व चार मूलभूत प्रक्रमों — जन्मदर (B), आप्रवासन (I), मृत्युदर (D), उत्प्रवासन (E) — के कारण बदलता रहता है।
Nt+1 = Nt + [(B + I) − (D + E)]
चरघातांकी (एक्सपोनेंशियल) वृद्धि
जब संसाधन असीमित हों, तो समष्टि चरघातांकी (J-आकार) वृद्धि करती है।
dN/dt = rN → Nt = N0 ert
जहाँ r = प्राकृतिक वृद्धि की इंट्रीन्जिक दर, e = 2.71828
लॉजिस्टिक (संभार तंत्र) वृद्धि
प्रकृति में संसाधन सीमित होते हैं, अतः समष्टि किसी पोषण क्षमता (K) तक पहुँचकर स्थिर हो जाती है — यह लॉजिस्टिक (S-आकार/सिग्मॉइड) वृद्धि है।
dN/dt = rN (K − N) / K
जहाँ K = पोषण क्षमता (वहन क्षमता)
| प्रावस्था | विवरण |
|---|---|
| पश्चता (लैग) | आरंभिक धीमी वृद्धि |
| त्वरण | वृद्धि दर तेजी से बढ़ती है |
| मंदन | K के निकट वृद्धि दर घटती है |
| अनंतस्पर्शी | N = K (वृद्धि शून्य) |
जीवन-वृत्त विभिन्नता
समष्टियाँ अपनी डार्विनी योग्यता (उच्च r मान) को अधिकतम करने के लिए विभिन्न जीवन-वृत्त रणनीतियाँ अपनाती हैं।
| रणनीति | उदाहरण |
|---|---|
| जीवन में एक बार प्रजनन | प्रशांत सामन मछली, बाँस |
| जीवन में कई बार प्रजनन | अधिकांश पक्षी एवं स्तनधारी |
| छोटी संतति, अधिक संख्या | ऑयस्टर, पैलेजिक मछलियाँ |
| बड़ी संतति, कम संख्या | पक्षी एवं स्तनधारी |
- चरघातांकी वृद्धि — dN/dt = rN (असीमित संसाधन)
- लॉजिस्टिक वृद्धि — dN/dt = rN(K−N)/K (सीमित संसाधन)
- r — प्राकृतिक वृद्धि की इंट्रीन्जिक दर
- K — पोषण क्षमता (वहन क्षमता)
- r-चयनित (तीव्र गुणन) बनाम K-चयनित (स्थिर समष्टि)
6 समष्टि अंतर्क्रियाएँ
अंतरजातीय संबंध — लाभ, हानि, उदासीनता
प्रकृति में कोई भी आवास एकल-जातीय नहीं होता। अंतरजातीय अंतर्क्रियाएँ दो भिन्न जातियों की समष्टियों के बीच होती हैं — ये एक या दोनों जातियों के लिए हितकारी (+), हानिकारक (−), या उदासीन (0) हो सकती हैं।
| जाति A | जाति B | अंतर्क्रिया का नाम |
|---|---|---|
| + | + | सहोपकारिता |
| − | − | स्पर्धा |
| + | − | परभक्षण |
| + | − | परजीविता |
| + | 0 | सहभोजिता |
| − | 0 | असहभोजिता |
परभक्षण (Predation)
परभक्षण ऊर्जा को निम्न पोषी स्तर से उच्च पोषी स्तर तक स्थानांतरित करता है। यह समुदाय की जातीय विविधता को बनाए रखने तथा शिकार समष्टि के घनत्व को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- ऊर्जा संनाल: पोषी स्तरों तक ऊर्जा पहुँचाना
- शिकार समष्टि नियंत्रण: अतिवृद्धि रोकना
- विदेशज जातियों का नियंत्रण: नागफनी–कैक्टोब्लास्टिस उदाहरण
- जातीय विविधता बनाए रखना: पाइसैस्टर तारामीन का अध्ययन
स्पर्धा (Competition)
स्पर्धा — वह प्रक्रम जिसमें एक जाति की योग्यता (r) दूसरी जाति की उपस्थिति में घट जाती है।
समान संसाधनों के लिए स्पर्धा करने वाली दो निकट-संबंधित जातियाँ अनंतकाल तक साथ-साथ नहीं रह सकतीं — कम स्पर्धी जाति विलुप्त हो जाती है।
| उदाहरण | विवरण |
|---|---|
| गैलापैगोस बकरियाँ | बकरियों के आने पर एबिंग्डन कछुए विलुप्त |
| कॉनेल का बार्नेकल प्रयोग | बैलेनस ने चैथेमैलस को अंतरज्वारीय क्षेत्र से निकाल दिया |
| संसाधन विभाजन | वार्बलर पक्षी — एक ही पेड़ पर भिन्न भागों में आहार |
परजीविता (Parasitism)
परजीवी को लाभ, परपोषी को हानि — परपोषी की उत्तरजीविता, वृद्धि व जनन घट जाता है।
| प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| बाह्य परजीवी | जूँ (मानव), चिचिड़ियाँ (कुत्ते) |
| अंतः परजीवी | यकृत पर्णाभ (मानव यकृत) |
| परजीवी पादप | कस्कुटा (अमरबेल) |
| ब्रूड परजीविता | कोयल (अंडे कौवे के घोंसले में) |
सहभोजिता (Commensalism)
एक जाति को लाभ (+), दूसरी को न हानि न लाभ (0)।
| उदाहरण | विवरण |
|---|---|
| ऑर्किड (आम की शाखा पर) | ऑर्किड को आवास, आम को कोई प्रभाव नहीं |
| बार्नेकल (व्हेल की पीठ पर) | बार्नेकल को आवास, व्हेल को कोई प्रभाव नहीं |
| बगुला व चारण पशु | बगुले को कीट, पशु को कोई प्रभाव नहीं |
| समुद्री ऐनिमोन व क्लाउन मछली | मछली को सुरक्षा, ऐनिमोन को कोई प्रभाव नहीं |
सहोपकारिता (Mutualism)
दोनों जातियों को लाभ (+ +)।
| उदाहरण | विवरण |
|---|---|
| लाइकेन | कवक + शैवाल/सायनोबैक्टीरिया |
| कवकमूल (माइकोराइजी) | कवक → पोषक; पादप → कार्बोहाइड्रेट |
| अंजीर व बर्र | बर्र → परागण; अंजीर → डिंबक (आहार) |
| ऑर्किड व मक्खी (ऑफ्रिस) | लैंगिक कपट — मक्खी परागण करती है |
- परभक्षण (+−) — पाइसैस्टर तारामीन, नागफनी–कैक्टोब्लास्टिस
- स्पर्धा (−−) — गॉसे का अपवर्जन नियम, संसाधन विभाजन
- परजीविता (+−) — बाह्य/अंतः/ब्रूड परजीवी
- सहभोजिता (+0) — ऑर्किड–आम, बगुला–पशु
- सहोपकारिता (++) — लाइकेन, कवकमूल, अंजीर–बर्र
- असहभोजिता (−0) — पेनिसिलियम–जीवाणु
★ NEET फैक्ट‑शीट
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
| अवधारणा | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| पारिस्थितिकी स्तर | जीव, समष्टि, समुदाय, जीवोम |
| समष्टि गुण | जन्मदर, मृत्युदर, लिंगानुपात, आयु वितरण |
| जन्मदर उदाहरण | कमल: 8/20 = 0.4 प्रति वर्ष |
| आयु पिरैमिड | बढ़ती (त्रिभुजाकार), स्थिर (घंटाकार), घटती (कलशाकार) |
| चरघातांकी वृद्धि | dN/dt = rN; Nt = N0ert |
| लॉजिस्टिक वृद्धि | dN/dt = rN(K−N)/K |
| r-चयनित | तीव्र गुणन, अल्पजीवी, अधिक संतति |
| K-चयनित | धीमी गुणन, दीर्घजीवी, कम संतति |
| परभक्षण | पाइसैस्टर तारामीन, नागफनी–शलभ |
| स्पर्धा | गॉसे का अपवर्जन नियम, कॉनेल का बार्नेकल प्रयोग |
| परजीविता | बाह्य (जूँ), अंतः (यकृत पर्णाभ), ब्रूड (कोयल) |
| सहभोजिता | ऑर्किड–आम, बगुला–पशु |
| सहोपकारिता | लाइकेन, कवकमूल, अंजीर–बर्र |
| असहभोजिता | पेनिसिलियम–जीवाणु |
📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु
1 निम्नलिखित में से कौन-सा समष्टि का गुण है?
उत्तर: लिंगानुपात
व्यष्टि या तो नर है या मादा, परंतु लिंगानुपात (नर:मादा अनुपात) केवल समष्टि स्तर पर ही सार्थक होता है। जन्मदर, मृत्युदर, आयु वितरण भी समष्टि के गुण हैं।
2 चरघातांकी वृद्धि का समीकरण क्या है?
उत्तर: dN/dt = rN
असीमित संसाधनों की परिस्थिति में समष्टि चरघातांकी वृद्धि करती है — dN/dt = rN, जहाँ r = इंट्रीन्जिक दर। समाकलित रूप: Nt = N0ert।
3 लॉजिस्टिक वृद्धि समीकरण में K क्या दर्शाता है?
उत्तर: पोषण क्षमता (वहन क्षमता)
लॉजिस्टिक समीकरण dN/dt = rN(K−N)/K में K उस आवास की पोषण क्षमता (carrying capacity) है, जहाँ समष्टि अंततः स्थिर हो जाती है।
4 गॉसे के स्पर्धी अपवर्जन नियम के अनुसार, दो निकट-संबंधित जातियाँ अनंतकाल तक साथ-साथ नहीं रह सकतीं यदि —
उत्तर: वे समान सीमित संसाधन के लिए स्पर्धा करती हैं
जब दो जातियाँ एक ही सीमित संसाधन के लिए स्पर्धा करती हैं, तो अधिक स्पर्धी जाति कम स्पर्धी जाति को विलुप्त कर देती है — यही गॉसे का स्पर्धी अपवर्जन नियम है।
5 निम्नलिखित में से कौन-सी अंतर्क्रिया सहभोजिता का उदाहरण है?
उत्तर: आम की शाखा पर उगने वाला ऑर्किड
सहभोजिता (+0) में एक जाति को लाभ होता है, दूसरी को न हानि न लाभ। ऑर्किड (आवास) को लाभ, आम को कोई प्रभाव नहीं — यह सहभोजिता है।
6 निम्नलिखित में से कौन-सी अंतर्क्रिया सहोपकारिता का उदाहरण है?
उत्तर: लाइकेन (कवक + शैवाल)
सहोपकारिता (++ ) में दोनों जातियों को लाभ होता है। लाइकेन में कवक को शैवाल से पोषण, शैवाल को कवक से सुरक्षा मिलती है।
7 परजीविता में परजीवी एवं परपोषी के बीच संबंध होता है —
उत्तर: +, − (एक को लाभ, दूसरे को हानि)
परजीविता में परजीवी (जैसे यकृत पर्णाभ) को लाभ होता है, जबकि परपोषी (मानव) को हानि — उसकी उत्तरजीविता, वृद्धि या जनन घट जाता है।
8 आयु पिरैमिड का कलशाकार (संकरा आधार) आकार किस समष्टि को दर्शाता है?
उत्तर: घटती हुई समष्टि
आयु पिरैमिड की तीन आकृतियाँ — त्रिभुजाकार (बढ़ती), घंटाकार (स्थिर), कलशाकार (घटती)। कलशाकार में आधार संकरा होता है, अर्थात युवा व्यष्टियाँ कम हैं।
9 लॉजिस्टिक वृद्धि वक्र में उस प्रावस्था का नाम क्या है जहाँ N, K के निकट पहुँचने पर वृद्धि दर घटती है?
उत्तर: मंदन (Deceleration)
लॉजिस्टिक वृद्धि की चार प्रावस्थाएँ — पश्चता → त्वरण → मंदन → अनंतस्पर्शी। मंदन प्रावस्था में K के निकट वृद्धि दर घटने लगती है।
10 निम्नलिखित में से कौन-सा परभक्षण का उदाहरण नहीं है?
उत्तर: लाइकेन
लाइकेन सहोपकारिता (++ ) का उदाहरण है — कवक व शैवाल दोनों को लाभ। परभक्षण (+−) में एक को लाभ, दूसरे को हानि होती है।
➕ अतिरिक्त NEET तथ्य
सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं
- इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (~8–12 अंक) पूछे जाते हैं।
- सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — समष्टि वृद्धि सूत्र, अंतर्क्रियाओं के उदाहरण, आयु पिरैमिड की आकृतियाँ।
- r-चयनित vs K-चयनित: r-चयनित (जीवाणु, कीट) — तीव्र गुणन, अल्पजीवी, अधिक संतति; K-चयनित (हाथी, मानव) — धीमी गुणन, दीर्घजीवी, कम संतति, संतान देखभाल।
- छह अंतर्क्रियाएँ: परभक्षण (+−), स्पर्धा (−−), परजीविता (+−), सहभोजिता (+0), सहोपकारिता (++), असहभोजिता (−0)।
- कॉनेल का बार्नेकल प्रयोग: स्कॉटलैंड के चट्टानी समुद्र तटों पर — बैलेनस ने चैथेमैलस को अंतरज्वारीय क्षेत्र से निकाल दिया (स्पर्धा का प्रमाण)।
- मैकआर्थर का वार्बलर अध्ययन: एक ही पेड़ पर भिन्न भागों में आहार — संसाधन विभाजन का उदाहरण।
- असहभोजिता (Amensalism): छठी अंतर्क्रिया — एक को हानि (−), दूसरी को कोई प्रभाव (0)। उदाहरण — पेनिसिलियम कवक (जीवाणुओं को मारता है, स्वयं अप्रभावित)।
- सहभोजिता में दूसरी जाति 'अप्रभावित' होती है — हानि नहीं उठाती (परजीविता से भिन्न)।
- इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — वृद्धि सूत्र (चरघातांकी/लॉजिस्टिक), छह अंतर्क्रियाओं के उदाहरण, आयु पिरैमिड की आकृतियाँ — इन तीनों पर विशेष ध्यान दें, इनसे 80%+ प्रश्न कवर हो जाते हैं।
✓ संक्षिप्त सार
समष्टि एवं गुण
समष्टि — एक जाति के व्यष्टियों का सीमांकित क्षेत्र में समूह। गुण — जन्मदर, मृत्युदर, लिंगानुपात, आयु वितरण।
समष्टि वृद्धि
चरघातांकी (dN/dt = rN) — असीमित संसाधन; लॉजिस्टिक (dN/dt = rN(K−N)/K) — सीमित संसाधन (अधिक यथार्थपूर्ण)।
आयु पिरैमिड
त्रिभुजाकार (बढ़ती), घंटाकार (स्थिर), कलशाकार (घटती) — समष्टि की वृद्धि-प्रवृत्ति बताता है।
अंतर्क्रियाएँ
परभक्षण (+−), स्पर्धा (−−), परजीविता (+−), सहभोजिता (+0), सहोपकारिता (++), असहभोजिता (−0)।
प्रमुख उदाहरण
परभक्षण — पाइसैस्टर; स्पर्धा — गॉसे का नियम, कॉनेल; सहोपकारिता — लाइकेन, कवकमूल, अंजीर–बर्र।
NEET फोकस
वृद्धि सूत्र, अंतर्क्रिया उदाहरण, आयु पिरैमिड आकृतियाँ — सर्वाधिक पूछे जाने वाले टॉपिक।
? अभ्यास प्रश्न-उत्तर
प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें
प्रश्न 1 वे गुण क्या हैं जो व्यष्टियों में नहीं, परंतु समष्टियों में होते हैं?
व्यष्टि जीव में नहीं, पर समष्टि में पाए जाने वाले गुण हैं:
- जन्म दर — प्रति व्यक्ति प्रति इकाई समय नई संतति
- मृत्यु दर — प्रति व्यक्ति प्रति इकाई समय मृत्यु
- लिंगानुपात — नर एवं मादा का अनुपात
- आयु वितरण (आयु पिरैमिड)
- समष्टि घनत्व — इकाई क्षेत्र/आयतन में व्यष्टियों की संख्या
प्रश्न 2 यदि कोई समष्टि 3 वर्ष में दोगुनी हो जाती है, तो उसकी वृद्धि की इंट्रीन्जिक दर (r) क्या होगी?
चरघातांकी समीकरण: Nt = N0ert
दिया है: t = 3 वर्ष, Nt = 2N0
2N0 = N0e3r → 2 = e3r
ln(2) = 3r → 0.693 = 3r
r = 0.693/3 = 0.231 प्रति वर्ष
प्रश्न 3 पादपों में शाकाहारिता के विरुद्ध रक्षा करने की विधियाँ बताइए।
पादप शाकाहारियों से बचने के लिए दो मुख्य रक्षाविधियाँ अपनाते हैं:
- आकारिकीय: काँटे — ऐकेशिया, कैक्टस
- रासायनिक: विषाक्त पदार्थ — कैलोट्रोपिस (हृदय ग्लाइकोसाइड), निकोटीन, कैफीन, क्वीनीन, स्ट्रिकनीन, अफीम
प्रश्न 4 आम की शाखा पर उगने वाले ऑर्किड और आम के पेड़ के बीच अंतर्क्रिया का वर्णन कीजिए।
ऑर्किड एक अधिपादप (एपीफाइट) है — यह केवल आधार/आश्रय के लिए आम का उपयोग करता है, पोषण नहीं लेता।
ऑर्किड को लाभ (आवास) मिलता है, जबकि आम अप्रभावित रहता है — यह सहभोजिता (Commensalism) है।
प्रश्न 5 कीट पीड़कों के जैव-नियंत्रण के पीछे क्या पारिस्थितिक सिद्धांत है?
जैव-नियंत्रण परभक्षण के सिद्धांत पर आधारित है — परभक्षी अपनी शिकार जाति की समष्टि को नियंत्रित/नियमित करने की क्षमता रखते हैं।
उदाहरण: ऑस्ट्रेलिया में नागफनी (कैक्टस) को उसके प्राकृतिक परभक्षी (कैक्टोब्लास्टिस शलभ) द्वारा नियंत्रित किया गया।
प्रश्न 6 समष्टि और समुदाय की परिभाषा दीजिए।
समष्टि (Population): किसी दी गई जाति के व्यष्टियों का वह समूह, जो किसी सीमांकित भौगोलिक क्षेत्र में रहता है, आपस में जनन-सक्षम होता है।
समुदाय (Community): किसी दिए गए क्षेत्र में एक साथ रहने वाली और परस्पर अंतर्क्रिया करने वाली विभिन्न जातियों की समष्टियों का समूह।
प्रश्न 7 परिभाषा दीजिए एवं प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए — (क) सहभोजिता, (ख) परजीविता, (ग) छद्मावरण, (घ) सहोपकारिता, (च) अंतरजातीय स्पर्धा
- सहभोजिता (+0): एक को लाभ, दूसरी को न हानि न लाभ — ऑर्किड–आम
- परजीविता (+−): एक को लाभ, दूसरी को हानि — यकृत पर्णाभ–मानव
- छद्मावरण: परिवेश के अनुसार रंग बदलकर छिपना — कीट/मेंढक
- सहोपकारिता (++): दोनों को लाभ — कवकमूल (माइकोराइजी)
- अंतरजातीय स्पर्धा (−−): दोनों को हानि — बैलेनस–चैथेमैलस बार्नेकल
प्रश्न 8 लॉजिस्टिक समष्टि वृद्धि का आरेख सहित वर्णन कीजिए।
लॉजिस्टिक वृद्धि — dN/dt = rN(K−N)/K
यह S-आकार (सिग्मॉइड) वक्र बनाती है, जिसकी चार प्रावस्थाएँ हैं:
- पश्चता (लैग): धीमी आरंभिक वृद्धि
- त्वरण: वृद्धि दर तेज होना
- मंदन: K के निकट वृद्धि दर घटना
- अनंतस्पर्शी: N = K (वृद्धि शून्य)
यह अधिक यथार्थपूर्ण है क्योंकि प्रकृति में संसाधन सीमित होते हैं (चित्र 11.3 देखें)।
प्रश्न 9 कौन-सा कथन परजीविता को सर्वोत्तम रूप से स्पष्ट करता है?
(घ) एक जीव को लाभ होता है, दूसरा प्रभावित होता है
परजीविता (+−) में परजीवी को लाभ होता है, जबकि परपोषी को हानि — उसकी उत्तरजीविता, वृद्धि व जनन घट जाता है।
प्रश्न 10 समष्टि की तीन महत्वपूर्ण विशेषताएँ बताइए।
- जन्म दर व मृत्यु दर: प्रति व्यक्ति दरें — व्यष्टि में नहीं, समष्टि में होती हैं।
- लिंगानुपात: नर एवं मादा का अनुपात — केवल समष्टि स्तर पर सार्थक।
- आयु वितरण (आयु पिरैमिड): विभिन्न आयु वर्गों में व्यष्टियों का वितरण — समष्टि की वृद्धि-प्रवृत्ति बताता है।