वंशागति के आणविक आधार
DNA की संरचना, पैकेजिंग, आनुवंशिक पदार्थ की खोज, प्रतिकृति, अनुलेखन, आनुवंशिक कूट, स्थानांतरण, जीन नियमन (लैक ओपेरॉन), मानव जीनोम परियोजना एवं DNA अंगुलिछापी — परीक्षा‑केंद्रित विस्तृत विवेचन।
★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित1 DNA — संरचना एवं पैकेजिंग
न्यूक्लियोटाइड, द्विकुंडली एवं क्रोमेटिन पैकेजिंग
DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) न्यूक्लियोटाइड्स का एक दीर्घ बहुलक है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में तीन घटक होते हैं — नाइट्रोजनी क्षार, पेंटोस शर्करा (DNA में डीऑक्सीराइबोज, RNA में राइबोज) तथा एक फॉस्फेट समूह।
नाइट्रोजनी क्षार दो प्रकार के:
- प्यूरीन: एडेनीन (A), ग्वानीन (G)
- पिरिमिडीन: साइटोसीन (C), थाइमीन (T), यूरेसिल (U)
वाटसन-क्रिक द्विकुंडली मॉडल (1953)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
- फ्रेडरिक मेस्चर (1869): केंद्रक में अम्लीय पदार्थ 'न्यूक्लिन' (DNA) की खोज।
- चारगाफ़ का नियम: A = T तथा G = C (प्यूरीन = पिरिमिडीन)।
- मॉरिस विल्किंस एवं रोजलिंड फ्रैंकलिन: X-रे विवर्तन आँकड़े।
- जेम्स वाटसन एवं फ्रांसिस क्रिक (1953): DNA की द्विकुंडली संरचना का प्रस्ताव।
| विशेषता | मान |
|---|---|
| संरचना | दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड शृंखलाएँ (प्रतिसमानांतर) |
| क्षार युग्मन | A=T (2 H-बंध), G≡C (3 H-बंध) |
| कुंडली पिच | 3.4 nm (प्रति घुमाव ~10 क्षार युग्म) |
| क्षार युग्म दूरी | 0.34 nm |
| कुंडली दिशा | दक्षिणावर्ती (सर्पिल) |
DNA की पैकेजिंग — न्यूक्लियोसोम
मानव कोशिका में DNA की लंबाई लगभग 2.2 मीटर होती है, जो केंद्रक (~10⁻⁶ मीटर) में समा जाती है। DNA ऋणावेशित होता है, जो धनावेशित हिस्टोन प्रोटीनों से बँधकर क्रोमेटिन बनाता है।
- हिस्टोन अष्टक: 8 हिस्टोन अणु (2 प्रत्येक H2A, H2B, H3, H4)
- DNA: ~200 क्षार युग्म हिस्टोन अष्टक के चारों ओर लिपटा
- दृश्यता: इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में "डोरी पर बीड्स" जैसी
- मेस्चर (1869) — DNA/न्यूक्लिन की खोज; वाटसन-क्रिक (1953) — द्विकुंडली मॉडल।
- चारगाफ़ का नियम — A = T, G = C (A+G = T+C)
- न्यूक्लियोसोम — ~200 bp DNA + हिस्टोन अष्टक
- यूक्रोमैटिन (सक्रिय) बनाम हेटरोक्रोमैटिन (निष्क्रिय)
2 आनुवंशिक पदार्थ की खोज
ग्रिफिथ, एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी तथा हर्षे-चेस प्रयोग
ग्रिफिथ का रूपांतरण प्रयोग (1928)
ग्रिफिथ ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनी पर प्रयोग किया।
| प्रयोग | परिणाम |
|---|---|
| S-प्रभेद (जीवित, विषाणुजनित) | चूहा मरता है |
| R-प्रभेद (जीवित, अविषाणुजनित) | चूहा जीवित रहता है |
| S-प्रभेद (ताप-मृत) | चूहा जीवित रहता है |
| S (ताप-मृत) + R (जीवित) | चूहा मरता है — रूपांतरण |
एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी (1933-44)
ताप-मृत S कोशिकाओं से विभिन्न जैव रसायन अलग किए:
- प्रोटीन-पाचक (प्रोटीएज़): रूपांतरण प्रभावित नहीं
- RNA-पाचक (RNase): रूपांतरण प्रभावित नहीं
- DNA-पाचक (DNase): रूपांतरण रुक गया
हर्षे-चेस प्रयोग (1952) — निर्णायक प्रमाण
अल्फ्रेड हर्षे एवं मार्था चेस ने जीवाणुभोजी (T2 फेज) पर प्रयोग किया।
| लेबल | रेडियोधर्मी तत्व | परिणाम |
|---|---|---|
| ³²P (DNA-लेबल) | फॉस्फोरस (DNA में) | जीवाणु में रेडियोधर्मी पाया गया |
| ³⁵S (प्रोटीन-लेबल) | सल्फर (प्रोटीन में) | जीवाणु में रेडियोधर्मी नहीं पाया गया |
- ग्रिफिथ (1928) — रूपांतरण सिद्धांत
- एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी — DNA रूपांतरण कारक
- हर्षे-चेस (1952) — DNA आनुवंशिक पदार्थ का निर्णायक प्रमाण
- कुछ विषाणुओं (TMV, रेट्रोवायरस) में RNA आनुवंशिक पदार्थ होता है
3 DNA प्रतिकृति
अर्धसंरक्षी प्रतिकृति, मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग
अर्धसंरक्षी प्रतिकृति
वाटसन एवं क्रिक ने प्रस्तावित किया कि DNA प्रतिकृति अर्धसंरक्षी (सेमीकंजरवेटिव) है — प्रत्येक संतति DNA अणु में एक पैतृक रज्जुक व एक नवसंश्लेषित रज्जुक होती है।
मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग (1958)
मैथ्यू मेसेल्सन एवं फ्रैंकलिन स्टाल ने E. coli में अर्धसंरक्षी प्रतिकृति सिद्ध की:
- चरण 1: E. coli को ¹⁵NH₄Cl (भारी नाइट्रोजन) में वृद्धि → ¹⁵N-DNA
- चरण 2: ¹⁴NH₄Cl (सामान्य नाइट्रोजन) में स्थानांतरण
- चरण 3: विभिन्न समयों पर DNA निकालकर सीज़ियम क्लोराइड घनत्व प्रवणता में अपकेंद्रीकरण
| पीढ़ी | DNA प्रकार |
|---|---|
| 0 (पैतृक) | भारी (¹⁵N/¹⁵N) |
| I (20 मिनट) | संकर (¹⁵N/¹⁴N) — एक पट्टी |
| II (40 मिनट) | संकर + हल्का (¹⁴N/¹⁴N) — दो पट्टियाँ |
प्रतिकृति की क्रियाविधि
| एंजाइम/कारक | कार्य |
|---|---|
| DNA पॉलीमरेज़ | न्यूक्लियोटाइडों का बहुलकन (5'→3' दिशा) |
| DNA लाइगेज | ओकाज़ाकी खंडों को जोड़ना |
| प्रतिकृति उद्गम (ori) | प्रतिकृति आरंभ का स्थल |
| अग्रगामी रज्जुक | निरंतर (सतत्) संश्लेषण |
| पश्चगामी रज्जुक | असंतत संश्लेषण (ओकाज़ाकी खंड) |
- DNA प्रतिकृति — अर्धसंरक्षी; प्रमाण — मेसेल्सन-स्टाल (1958, E. coli)
- DNA पॉलीमरेज़ — केवल 5'→3' दिशा में संश्लेषण
- ओकाज़ाकी खंड — पश्चगामी रज्जुक पर बनते हैं
- E. coli में यह कार्य ~2000 bp/सेकंड की दर से ~18 मिनट में पूर्ण
4 अनुलेखन (ट्रांसक्रिप्शन)
DNA से RNA का निर्माण
अनुलेखन DNA की एक रज्जुक से RNA में सूचना के प्रतिलिपिकरण की प्रक्रिया है। इसमें भी पूरकता का सिद्धांत लागू होता है — एडेनिन (A) यूरेसिल (U) के साथ युग्म बनाता है (थाइमीन नहीं)।
अनुलेखन इकाई
| भाग | कार्य |
|---|---|
| उन्नायक (प्रोमोटर) | RNA पॉलीमरेज़ बंधन स्थल; 5' सिरे पर |
| संरचनात्मक जीन | अनुलेखित होने वाला DNA खंड |
| समापक (टर्मिनेटर) | अनुलेखन समाप्ति का संकेत |
| टेम्पलेट रज्जु | 3'→5' — RNA संश्लेषण का साँचा |
| कोडिंग रज्जु | 5'→3' — mRNA के समान (T→U) |
सुकेंद्रकी में RNA प्रक्रमण
सुकेंद्रकी में जीन विखंडित होते हैं — एक्जॉन (व्यक्त/अभिव्यक्त) एवं इंट्रॉन (अव्यक्त/मध्यवर्ती)।
- कैपिंग: 5' सिरे पर मेथिल ग्वानोसीन ट्राइफॉस्फेट जुड़ना
- टेलिंग: 3' सिरे पर पॉली-A पुच्छ (200–300 एडेनीन) जुड़ना
- स्प्लाइसिंग: इंट्रॉन हटाकर एक्जॉन जोड़ना
| RNA पॉलीमरेज़ | उत्पाद |
|---|---|
| RNA पॉलीमरेज़ I | rRNA (28S, 18S, 5.8S) |
| RNA पॉलीमरेज़ II | hnRNA → mRNA |
| RNA पॉलीमरेज़ III | tRNA, 5S rRNA, snRNA |
- RNA में एडेनिन-यूरेसिल क्षार युग्म (A=U)
- सुकेंद्री में 3 RNA पॉलीमरेज़ (I, II, III)
- एक्जॉन — अभिव्यक्त (परिपक्व RNA में); इंट्रॉन — हटाए जाते हैं
- जीवाणु में अनुलेखन व स्थानांतरण एक साथ (केंद्रक झिल्ली नहीं)
5 आनुवंशिक कूट एवं स्थानांतरण
कोडोन, tRNA, प्रोटीन संश्लेषण
आनुवंशिक कूट
आनुवंशिक कूट न्यूक्लियोटाइड त्रिक (कोडोन) तथा एमीनो अम्लों के बीच संबंध है।
- त्रिक: 3 क्षार एक कोडोन बनाते हैं
- असंदिग्ध: एक कोडोन = एक अमीनो अम्ल
- अपह्रासित: एक अमीनो अम्ल के लिए >1 कोडोन
- अल्पविराम-रहित: कोडोन लगातार पढ़े जाते हैं
- सार्वभौमिक: लगभग सभी जीवों में समान
- AUG: मेथियोनीन + प्रारंभक कोडोन
- स्टॉप कोडोन: UAA, UAG, UGA
- जॉर्ज गेमो: कूट त्रिक की परिकल्पना
- हर गोविंद खुराना: RNA का रासायनिक संश्लेषण
- मार्शल नीरेनबर्ग: कूट का अर्थ निकालना
- सेवेरो ओकोआ: पॉलीन्यूक्लियोटाइड फॉस्फोरीलेज़ एंजाइम
tRNA — अनुकूलक अणु
tRNA (अंतरण RNA) फ्रांसिस क्रिक द्वारा परिकल्पित "अनुकूलक अणु" है।
- अमीनो अम्ल स्वीकार्य छोर: 3' सिरा — विशिष्ट एमीनो अम्ल जुड़ता है
- एंटीकोडान फंदा: mRNA कोडोन का पूरक त्रिक
- द्वितीयक संरचना: क्लोवर पत्ती (तिपतिया) जैसी
- तृतीयक संरचना: उल्टे L (L) जैसी सघन
स्थानांतरण (ट्रांसलेशन) — प्रोटीन संश्लेषण
| चरण | विवरण |
|---|---|
| अमीनोएसिलेशन | एमीनो अम्ल + ATP + tRNA → अमीनोएसिल-tRNA |
| प्रारंभन | राइबोसोम mRNA के AUG (स्टार्ट) से बँधता है |
| दीर्घीकरण | पेप्टाइड बंध निर्माण, राइबोसोम कोडोन-दर-कोडोन बढ़ता है |
| समापन | स्टॉप कोडोन पर रिलीज़ फैक्टर जुड़ता है; पॉलीपेप्टाइड मुक्त |
- 64 कोडोन में 61 अर्थपूर्ण + 3 स्टॉप (UAA, UAG, UGA)
- AUG — मेथियोनीन + स्टार्ट कोडोन (दोहरा कार्य)
- tRNA — "अनुकूलक अणु" (क्रिक द्वारा परिकल्पित)
- rRNA — राइबोज़ाइम (उत्प्रेरक) का कार्य
6 जीन अभिव्यक्ति का नियमन — लैक ओपेरॉन
प्रोकैरियोट्स में अनुलेखन नियमन का मॉडल
फ्रेंक्वास जैकब एवं जैक्वे मोनाड ने E. coli में लैक ओपेरॉन की खोज की — अनुलेखन स्तर पर जीन नियमन का प्रथम स्पष्ट मॉडल।
लैक ओपेरॉन की संरचना
| जीन | उत्पाद | कार्य |
|---|---|---|
| i (आई) जीन | दमनकारी (रिप्रेसर) प्रोटीन | प्रचालक स्थल से बँधकर अनुलेखन रोकता है |
| Z (जेड) जीन | β-गैलेक्टोसाइडेज़ | लैक्टोज → ग्लूकोज + गैलेक्टोज |
| Y (वाई) जीन | परमिएज़ | लैक्टोज को कोशिका में प्रवेश कराता है |
| A (ए) जीन | ट्रांसएसिटाइलेज़ | लैक्टोज उपापचय में गौण भूमिका |
क्रियाविधि
प्रेरक (लैक्टोज) की अनुपस्थिति में
- दमनकारी प्रोटीन प्रचालक (ऑपरेटर) से बँधता है
- RNA पॉलीमरेज़ उन्नायक से नहीं बँध पाता
- अनुलेखन बंद — एंजाइम नहीं बनते
प्रेरक (लैक्टोज) की उपस्थिति में
- लैक्टोज (प्रेरक) दमनकारी से बँधता है
- दमनकारी निष्क्रिय हो जाता है
- RNA पॉलीमरेज़ उन्नायक से बँधता है
- अनुलेखन सक्रिय — Z, Y, A जीन अभिव्यक्त
- लैक ओपेरॉन — जैकब एवं मोनाड द्वारा खोजा गया
- 1 नियामक जीन (i) + 3 संरचनात्मक जीन (Z, Y, A)
- प्रेरक (इंड्यूसर): लैक्टोज (या एलोलैक्टोज)
- नियमन — ऋणात्मक (नेगेटिव रेगुलेशन)
7 मानव जीनोम परियोजना (HGP)
13 वर्षीय महापरियोजना — 1990 से 2003
HGP एक अंतर्राष्ट्रीय महापरियोजना थी, जिसका उद्देश्य मानव जीनोम के सभी क्षारों का अनुक्रमण करना था।
- मानव जीनोम में ~20,000–25,000 जीनों की पहचान
- 3 अरब क्षार युग्मों का अनुक्रमण
- आँकड़ों का संग्रहण एवं विश्लेषण
- नई तकनीकों का विकास
- नैतिक, कानूनी एवं सामाजिक मुद्दों (ELSI) पर विचार
| विशेषता | तथ्य |
|---|---|
| कुल क्षार युग्म | ~3164.7 करोड़ (3.16×10⁹) |
| जीन संख्या | ~30,000 (पूर्व अनुमान 80,000–1,40,000 से कम) |
| प्रोटीन-कोडिंग भाग | 2% से कम |
| समरूपता | ~99.9% न्यूक्लियोटाइड सभी मनुष्यों में समान |
| सबसे बड़ी जीन | डिस्ट्रॉफिन (~2.4 करोड़ क्षार) |
| सर्वाधिक जीन | क्रोमोसोम 1 (2968 जीन) |
| न्यूनतम जीन | Y क्रोमोसोम (231 जीन) |
| SNPs | ~1.4 करोड़ एकल न्यूक्लियोटाइड बहुरूपता |
- HGP — 1990–2003 (13 वर्ष)
- जीन संख्या — ~30,000 (न कि 80,000–1,40,000)
- सर्वाधिक जीन — क्रोमोसोम 1 (2968); न्यूनतम — Y (231)
- प्रोटीन-कोडिंग DNA — 2% से कम
- संवाहक — BAC, YAC; सीक्वेंसर — सेंगर विधि पर आधारित
8 DNA अंगुलिछापी
VNTR, सदर्न ब्लॉट, व्यक्ति-विशिष्ट प्रोफाइल
DNA अंगुलिछापी (फिंगरप्रिंटिंग) व्यक्ति-विशिष्ट DNA प्रोफाइल बनाने की तकनीक है, जो VNTR (Variable Number of Tandem Repeats — अनुबद्ध पुनरार्तक की विभिन्न संख्या) स्थलों पर बहुरूपता पर आधारित है।
- DNA विलगन: नमूने से DNA निकालना
- प्रतिबंधन एंजाइम पाचन: DNA को खंडों में काटना
- वैद्युतकणसंचलन (इलेक्ट्रोफोरेसिस): खंडों को आकारानुसार पृथक करना
- ब्लॉटिंग: खंडों को झिल्ली पर स्थानांतरित करना (सदर्न ब्लॉट)
- संकरण (हाइब्रिडाइजेशन): लेबल्ड VNTR प्रोब का उपयोग
- स्वविकिरण चित्रण (ऑटोरेडियोग्राफी): पट्टी प्रारूप का पता लगाना
- न्यायालयीन विज्ञान (फोरेंसिक): अपराध स्थल पर मिले DNA से संदिग्ध की पहचान
- पैतृत्व परीक्षण: जैविक माता-पिता की पुष्टि
- जनसंख्या एवं विविधता अध्ययन
- आपदा पीड़ितों की पहचान
- DNA अंगुलिछापी — एलेक जेफ़रीज द्वारा विकसित
- आधार — VNTR (अनुबद्ध पुनरार्तक की विभिन्न संख्या)
- विधि — सदर्न ब्लॉट हाइब्रिडाइजेशन पर आधारित
- PCR से संवेदनशीलता में वृद्धि
★ NEET फैक्ट‑शीट
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
| अवधारणा | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| DNA संरचना | वाटसन-क्रिक (1953), द्विकुंडली, A=T, G≡C |
| न्यूक्लियोसोम | ~200 bp DNA + हिस्टोन अष्टक (8 अणु) |
| रूपांतरण खोज | ग्रिफिथ (1928) — S/R प्रभेद |
| DNA आनुवंशिक पदार्थ | एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी; हर्षे-चेस (1952) |
| प्रतिकृति | अर्धसंरक्षी — मेसेल्सन-स्टाल (1958) |
| अनुलेखन | DNA→RNA; A→U; 3 RNA पॉलीमरेज़ (सुकेंद्री) |
| आनुवंशिक कूट | 61 अर्थपूर्ण + 3 स्टॉप (UAA, UAG, UGA); AUG = स्टार्ट |
| लैक ओपेरॉन | जैकब-मोनाड; i, Z, Y, A; प्रेरक = लैक्टोज |
| HGP | 1990–2003; ~30,000 जीन; 2% कोडिंग |
| DNA अंगुलिछापी | एलेक जेफ़रीज; VNTR; सदर्न ब्लॉट |
📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु
1 DNA की अर्धसंरक्षी प्रतिकृति सर्वप्रथम किस जीव में प्रदर्शित की गई?
उत्तर: E. coli
मेसेल्सन एवं स्टाल (1958) ने E. coli में ¹⁵N/¹⁴N समस्थानिक विधि द्वारा अर्धसंरक्षी प्रतिकृति सिद्ध की।
2 रूपांतरण (ट्रांसफॉर्मेशन) की खोज किसने की?
उत्तर: फ्रेडरिक ग्रिफिथ (1928)
ग्रिफिथ ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनी पर प्रयोग कर रूपांतरण सिद्धांत प्रस्तुत किया।
3 हर्षे-चेस प्रयोग में किस रेडियोधर्मी समस्थानिक का उपयोग DNA को लेबल करने के लिए किया गया?
उत्तर: ³²P (फॉस्फोरस)
³²P केवल DNA में मिलता है (प्रोटीन में नहीं); ³⁵S का उपयोग प्रोटीन को लेबल करने के लिए किया गया।
4 AUG कोडोन का क्या विशेष कार्य है?
उत्तर: मेथियोनीन कोडोन + प्रारंभक कोडोन
AUG एकमात्र कोडोन है जो मेथियोनीन कोड करता है तथा स्थानांतरण का प्रारंभ (स्टार्ट) भी करता है।
5 स्टॉप कोडोन कौन-से हैं?
उत्तर: UAA, UAG, UGA
ये तीनों कोडोन किसी भी एमीनो अम्ल को कोड नहीं करते; ये स्थानांतरण की समाप्ति का संकेत देते हैं।
6 लैक ओपेरॉन में Z जीन किस एंजाइम को कोड करता है?
उत्तर: β-गैलेक्टोसाइडेज़
Z जीन β-गैलेक्टोसाइडेज़ को कोड करता है, जो लैक्टोज को ग्लूकोज एवं गैलेक्टोज में तोड़ता है।
7 मानव जीनोम में प्रोटीन-कोडिंग DNA का प्रतिशत कितना है?
उत्तर: 2% से कम
मानव जीनोम का अत्यधिक बड़ा भाग गैर-कोडिंग (इंट्रॉन, पुनरावृत्ति अनुक्रम आदि) है।
8 DNA अंगुलिछापी का आधार क्या है?
उत्तर: VNTR (Variable Number of Tandem Repeats)
VNTR स्थलों पर पुनरावृत्ति संख्या में बहुरूपता (व्यक्ति-विशिष्ट भिन्नता) DNA अंगुलिछापी का आधार है।
9 सुकेंद्रकी में कितने प्रकार के RNA पॉलीमरेज़ पाए जाते हैं?
उत्तर: 3 (RNA पॉलीमरेज़ I, II, III)
RNA पॉलीमरेज़ I (rRNA), II (mRNA), III (tRNA, 5S rRNA, snRNA) का संश्लेषण करता है।
10 DNA में क्षार युग्मों के बीच की दूरी क्या होती है?
उत्तर: 0.34 nm
DNA द्विकुंडली में लगातार दो क्षार युग्मों के बीच 0.34 nm की दूरी होती है; एक पूर्ण घुमाव (3.4 nm) में 10 क्षार युग्म होते हैं।
➕ अतिरिक्त NEET तथ्य
सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं
- इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (~8–12 अंक) पूछे जाते हैं — सर्वाधिक प्रश्न-घनत्व वाले अध्यायों में से एक।
- सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — आनुवंशिक पदार्थ की खोज (ग्रिफिथ, हर्षे-चेस), प्रतिकृति (मेसेल्सन-स्टाल), आनुवंशिक कूट की विशेषताएँ, लैक ओपेरॉन।
- DNA बनाम RNA: DNA अधिक स्थायी (2'-OH नहीं, थाइमीन); RNA अस्थायी, सूचना स्थानांतरण हेतु उपयुक्त।
- एक्जॉन बनाम इंट्रॉन: एक्जॉन परिपक्व mRNA में रहते हैं; इंट्रॉन स्प्लाइसिंग द्वारा हटाए जाते हैं।
- डगमगाहट परिकल्पना (Wobble hypothesis): कोडोन का तीसरा क्षार लचीला होता है, जिससे एक tRNA एक से अधिक कोडोन पहचान सकता है।
- केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma): DNA → RNA → प्रोटीन; रेट्रोवायरस में RNA → DNA (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन) भी संभव।
- चारगाफ़ का नियम: केवल द्विरज्जुकीय DNA पर लागू — एकरज्जुकीय RNA/DNA पर नहीं।
- लैक ओपेरॉन: नियमन ऋणात्मक है (दमनकारी द्वारा), धनात्मक नहीं।
- इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — प्रयोगों के परिणाम (ग्रिफिथ, हर्षे-चेस, मेसेल्सन-स्टाल), आनुवंशिक कूट सारणी की विशेषताएँ, तथा लैक ओपेरॉन की संरचना — इन तीनों पर विशेष ध्यान दें।
✓ संक्षिप्त सार
DNA संरचना
वाटसन-क्रिक द्विकुंडली; A=T, G≡C; न्यूक्लियोसोम (हिस्टोन अष्टक + ~200 bp DNA)
आनुवंशिक पदार्थ
ग्रिफिथ (रूपांतरण), एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी (DNA), हर्षे-चेस (DNA निर्णायक)
प्रतिकृति एवं अनुलेखन
अर्धसंरक्षी प्रतिकृति (मेसेल्सन-स्टाल); अनुलेखन (DNA→RNA); 3 RNA पॉलीमरेज़
आनुवंशिक कूट
61 कोडोन (20 अमीनो अम्ल), 3 स्टॉप (UAA, UAG, UGA); AUG = स्टार्ट + मेथियोनीन
लैक ओपेरॉन
जैकब-मोनाड; i, Z, Y, A; प्रेरक = लैक्टोज; ऋणात्मक नियमन
HGP & DNA फिंगरप्रिंटिंग
HGP (1990-2003, ~30,000 जीन); DNA अंगुलिछापी (VNTR, एलेक जेफ़रीज)
? अभ्यास प्रश्न-उत्तर
प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें
प्रश्न 1 DNA में पाए जाने वाले चार नाइट्रोजनी क्षारों के नाम लिखिए तथा उनके युग्मन नियम बताइए।
चार क्षार: एडेनीन (A), थाइमीन (T), ग्वानीन (G), साइटोसीन (C)
क्षार युग्मन नियम:
- एडेनीन (A) ⇔ थाइमीन (T) — 2 हाइड्रोजन बंध
- ग्वानीन (G) ⇔ साइटोसीन (C) — 3 हाइड्रोजन बंध
- चारगाफ़ नियम: A = T, G = C (अतः A+G = T+C)
प्रश्न 2 ग्रिफिथ के रूपांतरण प्रयोग की व्याख्या कीजिए।
ग्रिफिथ (1928) ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनी के दो प्रभेदों पर प्रयोग किया:
- S-प्रभेद: विषाणुजनित, चिकनी कैप्सूलयुक्त — चूहे की मृत्यु
- R-प्रभेद: अविषाणुजनित, कैप्सूल-रहित — चूहा जीवित
- ताप-मृत S-प्रभेद — चूहा जीवित
- ताप-मृत S + जीवित R — चूहा मरता है; मृत चूहे से जीवित S-प्रभेद प्राप्त
निष्कर्ष: R-प्रभेद, ताप-मृत S-प्रभेद द्वारा "रूपांतरित" हुआ — कोई "रूपांतरण कारक" आनुवंशिक सूचना स्थानांतरित करता है।
प्रश्न 3 हर्षे-चेस प्रयोग से DNA आनुवंशिक पदार्थ कैसे सिद्ध हुआ?
हर्षे एवं चेस (1952) ने T2 जीवाणुभोजी पर प्रयोग किया:
- ³²P-लेबल्ड फेज: DNA रेडियोधर्मी (प्रोटीन नहीं) — जीवाणु रेडियोधर्मी पाया गया
- ³⁵S-लेबल्ड फेज: प्रोटीन रेडियोधर्मी (DNA नहीं) — जीवाणु रेडियोधर्मी नहीं पाया गया
निष्कर्ष: केवल DNA ही विषाणु से जीवाणु में प्रवेश करता है — DNA आनुवंशिक पदार्थ है।
प्रश्न 4 DNA प्रतिकृति की अर्धसंरक्षी प्रकृति को मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग द्वारा कैसे सिद्ध किया गया?
- चरण 1: E. coli को ¹⁵NH₄Cl (भारी नाइट्रोजन) में वृद्धि → DNA भारी (¹⁵N/¹⁵N)
- चरण 2: ¹⁴NH₄Cl (सामान्य) माध्यम में स्थानांतरण
- चरण 3: विभिन्न समयों पर DNA निकालकर सीज़ियम क्लोराइड घनत्व प्रवणता में अपकेंद्रीकरण
परिणाम:
- पीढ़ी I (20 मिनट) — एक पट्टी (संकर ¹⁵N/¹⁴N)
- पीढ़ी II (40 मिनट) — दो पट्टियाँ (संकर + हल्का ¹⁴N/¹⁴N)
निष्कर्ष: DNA प्रतिकृति अर्धसंरक्षी है — प्रत्येक संतति DNA में एक पैतृक व एक नई रज्जुक।
प्रश्न 5 अनुलेखन इकाई के विभिन्न भागों के नाम एवं उनके कार्य लिखिए।
- उन्नायक (प्रोमोटर): 5' सिरे पर — RNA पॉलीमरेज़ बंधन स्थल
- संरचनात्मक जीन: अनुलेखित होने वाला DNA खंड
- समापक (टर्मिनेटर): 3' सिरे पर — अनुलेखन समाप्ति का संकेत
- टेम्पलेट रज्जु: 3'→5' — RNA संश्लेषण का साँचा
- कोडिंग रज्जु: 5'→3' — mRNA के समान अनुक्रम (T→U)
प्रश्न 6 आनुवंशिक कूट की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
- त्रिक: 3 न्यूक्लियोटाइड एक कोडोन बनाते हैं
- असंदिग्ध: एक कोडोन केवल एक एमीनो अम्ल कोड करता है
- अपह्रासित (डिजेनेरेट): एक एमीनो अम्ल के लिए एक से अधिक कोडोन
- अल्पविराम-रहित: कोडोन लगातार, बिना अंतराल के पढ़े जाते हैं
- सार्वभौमिक: लगभग सभी जीवों में समान
- AUG: मेथियोनीन + प्रारंभक कोडोन (दोहरा कार्य)
- स्टॉप कोडोन: UAA, UAG, UGA — स्थानांतरण समाप्ति
प्रश्न 7 लैक ओपेरॉन की संरचना एवं क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
संरचना:
- i जीन: दमनकारी (रिप्रेसर) प्रोटीन को कोड करता है
- Z जीन: β-गैलेक्टोसाइडेज़
- Y जीन: परमिएज़
- A जीन: ट्रांसएसिटाइलेज़
क्रियाविधि:
- प्रेरक (लैक्टोज) अनुपस्थित: दमनकारी प्रचालक (ऑपरेटर) से बँधता है → अनुलेखन बंद
- प्रेरक (लैक्टोज) उपस्थित: लैक्टोज दमनकारी को निष्क्रिय करता है → RNA पॉलीमरेज़ उन्नायक से बँधता है → अनुलेखन सक्रिय
नियमन ऋणात्मक (नेगेटिव) है।