चुंबकत्व एवं द्रव्य
छड़ चुंबक की चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं से लेकर गाउस के नियम, चुंबकीकरण-तीव्रता तथा प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय व लौहचुंबकीय पदार्थों तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, त्वरित तथ्य, आवश्यक चित्र और सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।
1 भूमिका
चुंबकत्व — प्रकृति में सार्वभौमिक परिघटना
चुंबकीय परिघटनाएँ प्रकृति में सर्वव्यापी हैं। दूरस्थ आकाशगंगाओं से लेकर अत्यंत सूक्ष्म परमाणुओं तक, तथा मनुष्य व जंतुओं में भी विविध स्रोतों से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र विद्यमान हैं। भू-चुंबकत्व मानव सभ्यता के विकास से भी पूर्व से उपस्थित है। 'चुंबक' शब्द यूनान के मैग्नेशिया नामक द्वीप से व्युत्पन्न हुआ, जहाँ लगभग 600 ईसा पूर्व चुंबकीय अयस्क के भंडार पाए गए थे।
पिछले अध्याय में हमने जाना कि गतिशील आवेश अथवा विद्युत धारा चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करती है। यह खोज उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध में हुई, जिसका श्रेय ऑस्टेंड, ऐम्पियर, बायो, सावर्ट तथा अन्य वैज्ञानिकों को दिया जाता है।
इस अध्याय में हम चुंबकत्व को एक स्वतंत्र विषय के रूप में अध्ययन करेंगे।
- पृथ्वी एक विशाल चुंबक की भाँति व्यवहार करती है, जिसका चुंबकीय क्षेत्र लगभग भौगोलिक दक्षिण से उत्तर की ओर संकेत करता है।
- स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने या शांत जल पर तैराने पर छड़ चुंबक उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है। भौगोलिक उत्तर की ओर संकेत करने वाला सिरा उत्तरी ध्रुव तथा भौगोलिक दक्षिण की ओर संकेत करने वाला सिरा दक्षिणी ध्रुव कहलाता है।
- दो चुंबकों के समान ध्रुव (उत्तर-उत्तर या दक्षिण-दक्षिण) परस्पर विकर्षित होते हैं, जबकि विपरीत ध्रुव (उत्तर-दक्षिण) परस्पर आकर्षित होते हैं।
- किसी चुंबक के उत्तर व दक्षिण ध्रुवों को पृथक नहीं किया जा सकता। छड़ चुंबक को तोड़ने पर दो छोटे चुंबक प्राप्त होते हैं। विद्युत आवेशों की भाँति पृथक चुंबकीय ध्रुव — जिन्हें चुंबकीय एकध्रुव कहते हैं — का अस्तित्व नहीं होता।
- लोहे तथा उसके मिश्रातुओं से चुंबक बनाया जा सकता है।
- 'चुंबक' शब्द — मैग्नेशिया (यूनान) से व्युत्पन्न
- चुंबकीय एकध्रुव का अस्तित्व नहीं
- समान ध्रुव विकर्षण, विपरीत ध्रुव आकर्षण
2 छड़ चुंबक
ध्रुव, क्षेत्र रेखाएँ एवं परिनालिका से साम्य
काँच की शीट पर बिखेरी लौह-रेतन (iron filings) छड़ चुंबक के चारों ओर एक विशिष्ट प्रतिरूप बनाती है, जो यह दर्शाता है कि चुंबक के दो ध्रुव होते हैं — ठीक वैसे ही जैसे विद्युत द्विध्रुव के धनात्मक व ऋणात्मक आवेश। स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर ये ध्रुव क्रमशः भौगोलिक उत्तर व दक्षिण की ओर संकेत करते हैं। धारावाही परिनालिका के चारों ओर भी लगभग समान प्रतिरूप बनता है।
चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ
लौह-रेतन के प्रतिरूपों के आधार पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ खींची जा सकती हैं।
- चुंबक (या धारावाही परिनालिका) की चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संतत बंद लूप बनाती हैं। यह विद्युत द्विध्रुव से भिन्न है, जहाँ रेखाएँ धनावेश से आरंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं।
- किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर परिणामी चुंबकीय क्षेत्र B की दिशा बताती है।
- क्षेत्र के लंबवत तल के प्रति इकाई क्षेत्रफल से गुजरने वाली क्षेत्र रेखाओं की संख्या जितनी अधिक होती है, उतना ही अधिक उस स्थान पर B का परिमाण होता है।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं, क्योंकि कटान बिंदु पर क्षेत्र की दिशा एक ही नहीं रह पाती।
छड़ चुंबक का धारावाही परिनालिका की तरह व्यवहार
पिछले अध्याय में हमने देखा कि धारा लूप चुंबकीय द्विध्रुव की भाँति व्यवहार करता है। ऐम्पियर की परिकल्पना के अनुसार सभी चुंबकीय परिघटनाओं को परिवाही धाराओं के प्रभावों से समझाया जा सकता है।
छड़ चुंबक व धारावाही परिनालिका की क्षेत्र रेखाओं की समानता यह सुझाती है कि छड़ चुंबक भी अनेक परिसंचारी धाराओं का योग हो सकता है। छड़ चुंबक को दो भागों में तोड़ना वैसा ही है जैसे परिनालिका को काटना — जिससे दो छोटी परिनालिकाएँ प्राप्त होती हैं, जिनके क्षेत्र अपेक्षाकृत दुर्बल होते हैं।
यही समीकरण छड़ चुंबक की अक्ष पर दूर स्थित बिंदु के लिए भी लागू होता है। अतः छड़ चुंबक का चुंबकीय आघूर्ण, उतना ही क्षेत्र उत्पन्न करने वाली समतुल्य धारावाही परिनालिका के चुंबकीय आघूर्ण के बराबर होता है।
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में द्विध्रुव
एकसमान चुंबकीय क्षेत्र B में रखी चुंबकीय सुई (चुंबकीय आघूर्ण m) पर लगने वाला बल आघूर्ण:
यहाँ τ प्रत्यानयन बल आघूर्ण है तथा θ, m और B के बीच का कोण है। चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक विद्युत स्थितिज ऊर्जा की भाँति प्राप्त किया जा सकता है:
स्थिरवैद्युत अनुरूप
विद्युत द्विध्रुव के संगत समीकरणों से तुलना करने पर यह निष्कर्ष निकलता है कि m चुंबकीय आघूर्ण वाले छड़ चुंबक का दूर स्थित बिंदु पर क्षेत्र ज्ञात करने के लिए, विद्युत द्विध्रुव के क्षेत्र समीकरण में निम्नलिखित प्रतिस्थापन करने होते हैं:
विशेष रूप से, r दूरी (r >> l, जहाँ l चुंबक की लंबाई है) पर छड़ चुंबक का विषुवतीय चुंबकीय क्षेत्र:
इसी प्रकार, r दूरी (r >> l) पर अक्षीय चुंबकीय क्षेत्र:
| स्थिर वैद्युत | चुंबकीय | |
|---|---|---|
| द्विध्रुव आघूर्ण | p | m |
| नियतांक | 1/ε₀ | μ₀ |
| विषुवतीय क्षेत्र | −p/4πε₀r³ | −μ₀m/4πr³ |
| अक्षीय क्षेत्र | 2p/4πε₀r³ | μ₀2m/4πr³ |
| बाह्य क्षेत्र—बल आघूर्ण | p × E | m × B |
| बाह्य क्षेत्र—स्थितिज ऊर्जा | −p·E | −m·B |
सारणी 5.1 — विद्युत एवं चुंबकीय द्विध्रुवों के मध्य समानता
- छड़ चुंबक की क्षेत्र रेखाएँ बंद लूप बनाती हैं
- τ = m×B; U = −m·B
- θ = 0° पर न्यूनतम ऊर्जा = −mB; θ = 180° पर अधिकतम ऊर्जा = +mB
- अक्षीय क्षेत्र = 2 × विषुवतीय क्षेत्र
3 चुंबकत्व एवं गाउस नियम
बंद सतह से गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स सदैव शून्य
अध्याय 1 में हमने स्थिरवैद्युत के लिए गाउस नियम का अध्ययन किया था — किसी बंद गाउसीय सतह से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स, सतह द्वारा परिवेष्ठित कुल आवेश q/ε₀ के बराबर होता है। चुंबकीय क्षेत्रों के लिए स्थिति पूर्णतः भिन्न है, क्योंकि ये संतत होते हैं और बंद लूप बनाते हैं।
किसी बंद सतह S का एक छोटा सदिश क्षेत्रफल अवयव ΔS लीजिए। इससे गुजरने वाला चुंबकीय फ्लक्स ΔφB = B·ΔS होता है, जहाँ B, ΔS पर चुंबकीय क्षेत्र है। S को अनेक छोटे अवयवों में विभाजित करके सभी फ्लक्सों का योग करने पर:
इसकी तुलना विद्युतस्थैतिकी के गाउस नियम से कीजिए, जहाँ ΣE·ΔS = q/ε₀ होता है, q बंद सतह द्वारा परिबद्ध आवेश है।
- चुंबकत्व के लिए गाउस नियम: φB = ΣB·ΔS = 0
- चुंबकीय एकध्रुव का अस्तित्व नहीं
- B रेखाओं का न उद्गम, न अभिगम
4 चुंबकीकरण एवं चुंबकीय तीव्रता
M, H, χ एवं μ के बीच संबंध
परमाणु में परिक्रमण करते इलेक्ट्रॉन का चुंबकीय आघूर्ण होता है। किसी पदार्थ के बड़े टुकड़े में ये आघूर्ण सदिश रूप से समाकलित होकर शून्येतर परिणामी चुंबकीय आघूर्ण प्रदान कर सकते हैं। प्रति इकाई आयतन परिणामी चुंबकीय आघूर्ण को चुंबकन M कहते हैं:
M एक सदिश राशि है, जिसका विमीय सूत्र L⁻¹A तथा मात्रक A m⁻¹ है।
एक लंबी परिनालिका लीजिए जिसमें प्रति इकाई लंबाई n फेरे हों और धारा I प्रवाहित हो। परिनालिका के अंदर क्षेत्र B₀ = μ₀nI होता है। यदि परिनालिका के अंदर शून्येतर चुंबकन वाला पदार्थ भरा हो, तो क्षेत्र B₀ से अधिक होगा:
यहाँ Bm क्रोड के पदार्थ द्वारा प्रदत्त क्षेत्र है, जो चुंबकन M के अनुक्रमानुपाती होता है:
सुविधा के लिए एक अन्य सदिश क्षेत्र H परिभाषित किया जाता है, जिसे चुंबकीय तीव्रता कहते हैं:
H की विमाएँ M के समान तथा मात्रक भी A m⁻¹ है। कुल चुंबकीय क्षेत्र B को इस प्रकार लिखा जा सकता है:
यहाँ H बाह्य कारक (जैसे परिनालिका की धारा) को तथा M पदार्थ की विशेष प्रकृति को व्यक्त करता है। बाह्य कारक M को प्रभावित करता है:
यहाँ χ एक विमाविहीन राशि है, जिसे चुंबकीय प्रवृत्ति कहते हैं। यह बाह्य चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव का माप है। χ के मान के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण किया जाता है — छोटा धनात्मक मान अनुचुंबकीय, छोटा ऋणात्मक मान प्रतिचुंबकीय। प्रतिचुंबकीय पदार्थों में M एवं H विपरीत दिशाओं में होते हैं।
यहाँ μr = (1+χ) एक विमाविहीन राशि है, जिसे पदार्थ की आपेक्षिक चुंबकशीलता कहते हैं। यह स्थिरवैद्युतिकी के परावैद्युतांक के समतुल्य है। पदार्थ की चुंबकशीलता μ की विमाएँ तथा मात्रक μ₀ के समान हैं:
χ, μr एवं μ — तीनों परस्पर संबंधित हैं। किसी एक का मान ज्ञात होने पर शेष दो ज्ञात किए जा सकते हैं।
- M = mनेट/V; मात्रक A m⁻¹
- B = μ₀(H+M); M = χH
- μr = 1+χ; μ = μ₀μr
5 पदार्थों के चुंबकीय गुण
प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय एवं लौहचुंबकीय
χ के मान के आधार पर पदार्थों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है — प्रतिचुंबकीय (χ ऋणात्मक), अनुचुंबकीय (χ धनात्मक व अल्प), तथा लौहचुंबकीय (χ धनात्मक व अधिक)।
| प्रतिचुंबकीय | अनुचुंबकीय | लौहचुंबकीय | |
|---|---|---|---|
| चुंबकीय प्रवृत्ति χ | −1 ≤ χ < 0 | 0 < χ < ε | χ >> 1 |
| आपेक्षिक चुंबकशीलता μr | 0 ≤ μr < 1 | 1 < μr < 1+ε | μr >> 1 |
| चुंबकशीलता μ | μ < μ₀ | μ > μ₀ | μ >> μ₀ |
सारणी 5.2 — यहाँ ε एक छोटी धन संख्या है
प्रतिचुंबकत्व
प्रतिचुंबकीय पदार्थ बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में अधिक तीव्रता वाले भाग से कम तीव्रता वाले भाग की ओर जाने की प्रवृत्ति रखते हैं। दूसरे शब्दों में, चुंबक लोहे जैसे पदार्थों को आकर्षित करता है, परंतु प्रतिचुंबकीय पदार्थों को विकर्षित करता है।
प्रतिचुंबकत्व की सरलतम व्याख्या यह है — नाभिक के चारों ओर घूमते इलेक्ट्रॉनों के कारण कक्षीय कोणीय संवेग होता है। ये परिक्रमण करते इलेक्ट्रॉन धारावाही लूप के समतुल्य होते हैं और इनका कक्षीय चुंबकीय आघूर्ण होता है। प्रतिचुंबकीय पदार्थों के परमाणुओं में परिणामी चुंबकीय आघूर्ण शून्य होता है। बाह्य चुंबकीय क्षेत्र आरोपित करने पर, क्षेत्र की दिशा में चुंबकीय आघूर्ण वाले इलेक्ट्रॉनों की गति मंद तथा विपरीत दिशा वाले इलेक्ट्रॉनों की गति तेज हो जाती है (लेंज के नियमानुसार)। इस प्रकार पदार्थ में परिणामी चुंबकीय आघूर्ण क्षेत्र के विपरीत दिशा में विकसित होता है और पदार्थ प्रतिकर्षित होता है।
कुछ प्रतिचुंबकीय पदार्थ — बिस्मथ, ताँबा, सीसा, सिलिकन, नाइट्रोजन (STP पर), जल एवं सोडियम क्लोराइड। प्रतिचुंबकत्व सभी पदार्थों में विद्यमान होता है, परंतु अधिकांश में यह इतना दुर्बल होता है कि अनुचुंबकत्व एवं लौहचुंबकत्व जैसे प्रभाव इस पर हावी हो जाते हैं।
अनुचुंबकत्व
अनुचुंबकीय पदार्थ बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर दुर्बल चुंबकत्व प्राप्त कर लेते हैं। इनमें दुर्बल चुंबकीय क्षेत्र से सशक्त चुंबकीय क्षेत्र की ओर जाने की प्रवृत्ति होती है, अर्थात ये चुंबक की ओर दुर्बल बल से आकर्षित होते हैं।
अनुचुंबकीय पदार्थ के परमाणुओं (या आयनों/अणुओं) का अपना स्थायी चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण होता है। परमाणुओं की यादृच्छिक तापीय गति के कारण परिणामी चुंबकन दिखाई नहीं देता। शक्तिशाली बाह्य क्षेत्र B₀ तथा निम्न ताप पर परमाण्वीय द्विध्रुव आघूर्ण B₀ की दिशा में संरेखित हो जाते हैं। चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ पदार्थ के अंदर संकेंद्रित हो जाती हैं और क्षेत्र बढ़ जाता है।
कुछ अनुचुंबकीय पदार्थ — ऐलुमिनियम, सोडियम, कैल्शियम, ऑक्सीजन (STP पर) एवं कॉपर क्लोराइड। अनुचुंबकीय पदार्थ के लिए χ एवं μr का मान पदार्थ तथा ताप दोनों पर निर्भर करता है। अत्यधिक उच्च क्षेत्रों या अत्यंत निम्न ताप पर चुंबकन अधिकतम मान ग्रहण करता है, जब सभी परमाण्वीय द्विध्रुव क्षेत्र के अनुदिश संरेखित हो जाते हैं। इसे संतृप्त चुंबकन मान कहते हैं।
लौह चुंबकत्व
लौह चुंबकीय पदार्थ बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर शक्तिशाली चुंबक बन जाते हैं। इनमें क्षेत्र के दुर्बल भाग से सशक्त भाग की ओर जाने की तीव्र प्रवृत्ति होती है, अर्थात ये चुंबक की ओर भारी आकर्षण बल अनुभव करते हैं। इनके परमाणुओं (या आयनों/अणुओं) का भी चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण होता है, परंतु वे परस्पर इस प्रकार अन्योन्य क्रिया करते हैं कि स्थूल आयतन में (जिसे डोमेन कहते हैं) सभी एक ही दिशा में संरेखित हो जाते हैं।
इस सहकारी प्रभाव की व्याख्या के लिए क्वांटम यांत्रिकी की आवश्यकता होती है। प्रत्येक डोमेन का अपना परिणामी चुंबकन होता है। प्रारूपी डोमेन का आकार लगभग 1 mm होता है और एक डोमेन में लगभग 10¹¹ परमाणु होते हैं। प्रारंभ में चुंबकन एक डोमेन से दूसरे डोमेन तक यादृच्छिक रूप से बदलता है और कुल पदार्थ में कोई चुंबकन नहीं होता। बाह्य चुंबकीय क्षेत्र B₀ लगाने पर डोमेन B₀ के अनुदिश उन्मुख होने लगते हैं तथा B₀ की दिशा वाले डोमेन आकार में बढ़ने लगते हैं।
इस प्रकार लौह चुंबकीय पदार्थ में चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ अत्यधिक संकेंद्रित हो जाती हैं। असमान चुंबकीय क्षेत्र में यह पदार्थ अधिक शक्तिशाली क्षेत्र वाले भाग की ओर जाने की प्रवृत्ति दर्शाता है।
| प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| कठोर चुंबकीय पदार्थ | बाह्य क्षेत्र हटाने पर भी चुंबकन बना रहता है — स्थायी चुंबक बनते हैं | एलनिको (लोहा, ऐलुमिनियम, निकल, कोबाल्ट, ताँबे का मिश्रातु), लोडस्टोन |
| नर्म लौह चुंबकीय पदार्थ | बाह्य क्षेत्र हटाते ही चुंबकन समाप्त हो जाता है | नर्म लोहा |
अनेक तत्व लौह चुंबकीय हैं — लोहा, कोबाल्ट, निकल, गैडोलिनियम आदि। इनकी आपेक्षिक चुंबकशीलता 1000 से अधिक होती है। लौह चुंबकीय गुण ताप पर भी निर्भर करता है। पर्याप्त उच्च ताप पर लौह चुंबक अनुचुंबक बन जाता है, क्योंकि डोमेन संरचनाएँ विघटित होने लगती हैं।
- प्रतिचुंबकीय: χ ऋणात्मक; अनुचुंबकीय: χ धनात्मक व अल्प; लौहचुंबकीय: χ धनात्मक व अधिक
- अतिचालक: χ = −1, μr = 0 (माइस्नर प्रभाव)
- कठोर पदार्थ → स्थायी चुंबक; नर्म पदार्थ → विद्युत चुंबक
- उच्च ताप पर लौह चुंबक → अनुचुंबक
✓ सारांश व सूत्र-सूची
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
चुंबकीय द्विध्रुव पर बल आघूर्ण
τ = m×B; परिमाण τ = mB sinθ
स्थितिज ऊर्जा
Um = −m·B = −mB cosθ
अक्षीय क्षेत्र
BA = μ₀2m/4πr³
विषुवतीय क्षेत्र
BE = −μ₀m/4πr³
गाउस नियम
φB = ΣB·ΔS = 0
चुंबकन एवं तीव्रता
M = χH; B = μ₀(H+M); μr = 1+χ
प्रतिचुंबकीय
χ ऋणात्मक व अल्प; बाह्य क्षेत्र द्वारा विकर्षण
अनुचुंबकीय
χ धनात्मक व अल्प; क्षेत्र की ओर दुर्बल आकर्षण
लौहचुंबकीय
χ धनात्मक व अधिक; डोमेन संरचना; सशक्त आकर्षण
विचारणीय विषय
- गतिमान आवेशों/धाराओं के माध्यम से चुंबकीय प्रक्रमों की समझ 1800 ई. के बाद विकसित हुई, परंतु चुंबकों का प्रौद्योगिकीय उपयोग इससे दो हज़ार वर्ष पूर्व से हो रहा था।
- एकल चुंबकीय ध्रुवों का अस्तित्व नहीं होता। चुंबक को तोड़ने पर दो छोटे चुंबक प्राप्त होते हैं। विद्युत आवेश क्वांटीकृत होते हैं (|e| = 1.6×10⁻¹⁹ C), परंतु चुंबकीय एकध्रुव का अस्तित्व क्यों नहीं है, यह अभी पूर्णतः ज्ञात नहीं।
- चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ संतत बंद लूप बनाती हैं, जबकि विद्युत बल रेखाएँ धनावेश से आरंभ होकर ऋणावेश पर समाप्त होती हैं।
- χ के मान में अत्यल्प अंतर से पदार्थ के व्यवहार में मूलभूत भिन्नता होती है — प्रतिचुंबकीय के लिए χ ≈ −10⁻⁵, अनुचुंबकीय के लिए χ ≈ +10⁻⁵।
- अतिचालक पूर्ण प्रतिचुंबक होते हैं (χ = −1, μr = 0)। BCS सिद्धांत (1957) इनकी व्याख्या करता है (1970 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार)।
- चुंबकीय पदार्थों के प्रतिचुंबकीय, अनुचुंबकीय एवं लौहचुंबकीय के अतिरिक्त अन्य प्रकार भी हैं — लघु लौह चुंबकीय (फेरी चुंबकीय), प्रतिलौह चुंबकीय, स्पिन-काँच आदि, जिनके गुण असामान्य हैं।
📊 भौतिक राशियाँ तालिका
प्रतीक, प्रकृति, मात्रक एवं टिप्पणी
| भौतिक राशि | प्रतीक | प्रकृति | मात्रक | टिप्पणी |
|---|---|---|---|---|
| निर्वात की चुंबकशीलता | μ₀ | अदिश | T m A⁻¹ | μ₀/4π = 10⁻⁷ |
| चुंबकीय क्षेत्र | B | सदिश | T (टेस्ला) | 10⁴ G = 1 T |
| चुंबकीय आघूर्ण | m | सदिश | A m² | — |
| चुंबकीय फ्लक्स | φB | अदिश | Wb (वेबर) | Wb = T m² |
| चुंबकन | M | सदिश | A m⁻¹ | चुंबकीय आघूर्ण/आयतन |
| चुंबकीय तीव्रता | H | सदिश | A m⁻¹ | B = μ₀(H+M) |
| चुंबकीय प्रवृत्ति | χ | अदिश | — | M = χH |
| आपेक्षिक चुंबकशीलता | μr | अदिश | — | B = μ₀μrH |
| चुंबकशीलता | μ | अदिश | T m A⁻¹ | μ = μ₀μr; B = μH |
★ NEET फैक्ट-शीट
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
| अवधारणा | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| 'चुंबक' शब्द | मैग्नेशिया (यूनान) से व्युत्पन्न |
| चुंबकीय एकध्रुव | अस्तित्व नहीं |
| चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ | संतत बंद लूप |
| छड़ चुंबक का तुल्य | धारावाही परिनालिका |
| बल आघूर्ण | τ = m×B |
| स्थितिज ऊर्जा | U = −m·B |
| अक्षीय क्षेत्र | μ₀2m/4πr³ |
| विषुवतीय क्षेत्र | −μ₀m/4πr³ (अक्षीय का आधा) |
| चुंबकत्व का गाउस नियम | φB = 0 |
| चुंबकन | M = mनेट/V; मात्रक A m⁻¹ |
| चुंबकीय तीव्रता | H = B/μ₀ − M |
| चुंबकीय प्रवृत्ति | M = χH |
| आपेक्षिक चुंबकशीलता | μr = 1+χ |
| प्रतिचुंबकीय | χ ऋणात्मक; बिस्मथ, ताँबा, जल |
| अनुचुंबकीय | χ धनात्मक व अल्प; ऐलुमिनियम, सोडियम |
| लौहचुंबकीय | χ धनात्मक व अधिक; लोहा, कोबाल्ट, निकल |
| अतिचालक | χ = −1, μr = 0; माइस्नर प्रभाव |
| कठोर चुंबक | एलनिको, लोडस्टोन → स्थायी चुंबक |
| नर्म चुंबक | नर्म लोहा → विद्युत चुंबक |
| डोमेन | लौह चुंबकीय पदार्थ में संरेखित क्षेत्र |
📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु
1 किसी दंड चुंबक (चुंबकीय आघूर्ण m) को चुंबकीय क्षेत्र B के लंबवत रखा जाता है। इस स्थिति में चुंबक की चुंबकीय स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: शून्य
U = −mB cosθ; लंबवत स्थिति में θ = 90°, अतः cos90° = 0 ⇒ U = 0
2 0.049 T तीव्रता के एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में एक चुंबकीय सुई 5 सेकंड में 20 पूर्ण दोलन करती है। सुई का जड़त्व आघूर्ण 9.8×10⁻⁶ kg·m² है। यदि सुई के चुंबकीय आघूर्ण का परिमाण x×10⁻⁵ A·m² हो, तो 'x' का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 1280π²
दोलनकाल T = 5/20 = 0.25 s; T = 2π√(I/MB) ⇒ M = 4π²I/(T²B) = 1280π²×10⁻⁵ A·m²
3 L लंबाई तथा चुंबकीय आघूर्ण M वाली एक लौह-छड़ को उसके मध्य-बिंदु से इस प्रकार मोड़ा जाता है कि दोनों भुजाएँ परस्पर 60° का कोण बनाती हैं। नए चुंबक का चुंबकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर: M/2
प्रत्येक भुजा का आघूर्ण M/2; प्रभावी कोण 120°; परिणामी = 2×(M/2)×cos60° = M/2
4 L लंबाई तथा चुंबकीय आघूर्ण M वाली एक लौह-छड़ को मोड़कर एक चाप का रूप दिया जाता है, जो केंद्र पर 60° का कोण अंतरित करता है। नए चुंबक का चुंबकीय आघूर्ण ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 3M/π
व्यापक सूत्र: Mnew = M×(2/θ)sin(θ/2); θ = π/3 ⇒ Mnew = M×(6/π)×0.5 = 3M/π
5 किसी अनुचुंबकीय पदार्थ के लिए, चुंबकीय प्रवृत्ति (χ) का निरपेक्ष ताप (T) के साथ परिवर्तन किस ग्राफ द्वारा सही रूप से निरूपित होता है?
उत्तर: χ, T के व्युत्क्रमानुपाती (अतिपरवलयिक कमी)
क्यूरी नियम: χ = C/T; अतः χ, T के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
6 1000 फेरों वाली एक बड़ी वृत्ताकार कुंडली (औसत त्रिज्या 10 m) अपने क्षैतिज व्यास के परितः 2 rad/s के कोणीय वेग से घूर्णन कर रही है। यदि उस स्थान पर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक 2×10⁻⁵ T तथा कुंडली का विद्युत प्रतिरोध 12.56 Ω हो, तो कुंडली में अधिकतम प्रेरित धारा ज्ञात कीजिए।
उत्तर: 1 A
εmax = NABω = 1000×100π×2×10⁻⁵×2 = 4π V; Imax = 4π/12.56 = 1 A
7 599 चुंबकीय प्रवृत्ति (susceptibility) वाली एक लौह-छड़ को 1200 A/m तीव्रता के चुंबकनकारी क्षेत्र में रखा जाता है। छड़ के पदार्थ की चुंबकनशीलता (permeability) ज्ञात कीजिए (μ₀ = 4π×10⁻⁷ T·m·A⁻¹)।
उत्तर: 2.4π × 10⁻⁴ T·m·A⁻¹
μ = μ₀(1+χ) = 4π×10⁻⁷×600 = 2.4π×10⁻⁴ T·m·A⁻¹
8 पृथ्वी के पृष्ठ पर बिंदु A पर नति कोण δ = +25° है, तथा बिंदु B पर नति कोण δ = −25° है। इससे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
उत्तर: A उत्तरी गोलार्ध में तथा B दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है
धनात्मक नति कोण उत्तरी गोलार्ध तथा ऋणात्मक नति कोण दक्षिणी गोलार्ध को दर्शाता है।
9 एक पतली प्रति-चुंबकीय छड़ किसी विद्युत चुंबक के ध्रुवों के बीच ऊर्ध्वाधर रूप से रखी गई है। जब विद्युत चुंबक में धारा प्रवाहित की जाती है, तो प्रति-चुंबकीय छड़ क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र से बाहर, ऊपर की ओर धकेल दी जाती है। इसके लिए आवश्यक कार्य किस स्रोत से प्राप्त होता है?
उत्तर: विद्युत चुंबक को धारा प्रदान करने वाले धारा-स्रोत (बैटरी) से
प्रति-चुंबकीय पदार्थ क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होता है; ऊर्जा का मूल स्रोत बैटरी है।
10 यदि किसी स्थान पर, परस्पर लंबवत दो ऊर्ध्वाधर तलों में मापे गए आभासी नति कोण क्रमशः θ₁ तथा θ₂ हों, तो वास्तविक नति कोण θ को इनसे किस संबंध द्वारा ज्ञात किया जा सकता है?
उत्तर: cot²θ = cot²θ₁ + cot²θ₂
परस्पर लंबवत तलों में मापे गए आभासी नति कोणों से वास्तविक नति कोण का संबंध।
11 निम्नलिखित में से किस/किन पदार्थों के लिए चुंबकीय प्रवृत्ति (magnetic susceptibility) ऋणात्मक होती है?
उत्तर: केवल प्रति-चुंबकीय पदार्थ
प्रति-चुंबकीय पदार्थों के लिए χ ऋणात्मक होती है; अनुचुंबकीय व लौह-चुंबकीय के लिए धनात्मक।
12 M चुंबकीय आघूर्ण वाले किसी दंड चुंबक को चुंबकीय प्रेरण B के लंबवत रखा गया है। यदि प्रत्येक ध्रुव पर F बल अनुभव होता हो, तो चुंबक की लंबाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर: MB/F
qm = F/B; M = qm×l ⇒ l = M/qm = MB/F
➕ अतिरिक्त NEET तथ्य
सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं
- इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (~8–12 अंक) पूछे जाते हैं। सर्वाधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — प्रति/अनु/लौह-चुंबकीय पदार्थों का वर्गीकरण, क्यूरी नियम, चुंबकीय द्विध्रुव आघूर्ण व बल-आघूर्ण संबंधी संख्यात्मक प्रश्न, तथा पृथ्वी के चुंबकीय अवयव।
- जाइरोचुंबकीय अनुपात व बोर मैग्नेटॉन — किसी इलेक्ट्रॉन का कक्षीय चुंबकीय आघूर्ण (μl) व कक्षीय कोणीय संवेग (l) के मध्य अनुपात जाइरोचुंबकीय अनुपात कहलाता है: μl/l = e/2m (नियत); बोर मैग्नेटॉन (μB = eh/4πm ≈ 9.27×10⁻²⁴ J/T) चुंबकीय आघूर्ण की मूल इकाई है।
- प्रति/अनु/लौह-चुंबकीय पदार्थों की व्यापक तुलना — प्रतिचुंबकीय: χ छोटी व ऋणात्मक, μr थोड़ा 1 से कम, ताप-निरपेक्ष; अनुचुंबकीय: χ छोटी व धनात्मक, μr थोड़ा 1 से अधिक, χ∝1/T (क्यूरी नियम); लौह-चुंबकीय: χ बहुत बड़ी व धनात्मक, μr≫1, क्यूरी ताप तक अत्यधिक ताप-निर्भर।
- क्यूरी-वाइस नियम — लौह-चुंबकीय पदार्थ के लिए क्यूरी ताप (Tc) से ऊपर, χ = C/(T−Tc); यह सामान्य क्यूरी नियम (χ = C/T) का संशोधित रूप है।
- धारणशीलता व निग्राहिता — शैथिल्य लूप में, क्षेत्र हटाने पर शेष चुंबकन धारणशीलता; चुंबकन शून्य करने हेतु आवश्यक विपरीत क्षेत्र निग्राहिता; स्थायी चुंबक (इस्पात) में उच्च धारणशीलता व उच्च निग्राहिता दोनों वांछित।
- नर्म लोहा बनाम इस्पात — नर्म लोहा: संकीर्ण शैथिल्य लूप, विद्युत चुंबक हेतु आदर्श; इस्पात: चौड़ा लूप, उच्च निग्राहिता, स्थायी चुंबक हेतु उपयुक्त।
- पृथ्वी के चुंबकीय अवयव — H = B cosδ, Z = B sinδ, tanδ = Z/H; दिकपात (declination) भौगोलिक उत्तर व चुंबकीय उत्तर के मध्य कोण है; ये तीनों अवयव पृथ्वी के क्षेत्र को पूर्णतः निर्दिष्ट करते हैं।
- स्पर्शज्या नियम — दो परस्पर लंबवत् चुंबकीय क्षेत्रों में साम्यावस्था में B = BH tanθ; यह स्पर्शज्या गैल्वेनोमीटर का आधार है।
- उदासीन बिंदु — जहाँ छड़ चुंबक का क्षेत्र पृथ्वी के क्षेत्र को ठीक निरस्त कर दे; N-ध्रुव उत्तर की ओर होने पर निरक्षीय रेखा पर, S-ध्रुव उत्तर की ओर होने पर अक्षीय रेखा पर।
- इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — प्रति/अनु/लौह-चुंबकीय का वर्गीकरण, क्यूरी नियम, चुंबकीय द्विध्रुव के संख्यात्मक प्रश्न, पृथ्वी के चुंबकीय अवयव, गाउस नियम — इन पाँचों पर विशेष ध्यान दें, इनसे 80%+ प्रश्न कवर हो जाते हैं।
? अभ्यास प्रश्न-उत्तर
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प्रश्न 5.1 एक छोटा छड़ चुंबक जो एकसमान बाह्य चुंबकीय क्षेत्र 0.25 T के साथ 30° का कोण बनाता है, पर 4.5×10⁻² J का बल आघूर्ण लगता है। चुंबक के चुंबकीय आघूर्ण का परिमाण क्या है?
दिया गया: B = 0.25 T, θ = 30°, τ = 4.5×10⁻² J
τ = mB sinθ ⇒ m = τ/(B sinθ) = 4.5×10⁻²/(0.25×0.5) = 0.36 J/T
चुंबकीय आघूर्ण m = 0.36 A·m²
प्रश्न 5.2 चुंबकीय आघूर्ण m = 0.32 JT⁻¹ वाला एक छोटा छड़ चुंबक, 0.15 T के एकसमान बाह्य चुंबकीय क्षेत्र में रखा है। यदि यह छड़ क्षेत्र के तल में घूमने के लिए स्वतंत्र हो, तो क्षेत्र के किस विन्यास में यह (i) स्थायी संतुलन और (ii) अस्थायी संतुलन में होगा? प्रत्येक स्थिति में चुंबक की स्थितिज ऊर्जा का मान बताइए।
m = 0.32 JT⁻¹, B = 0.15 T
(i) स्थायी संतुलन: m व B समांतर, θ = 0°; U = −mB = −0.048 J
(ii) अस्थायी संतुलन: m व B प्रतिसमांतर, θ = 180°; U = +mB = +0.048 J
प्रश्न 5.3 एक परिनालिका में पास-पास लपेटे गए 800 फेरे हैं, तथा इसका अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 2.5×10⁻⁴ m² है और इसमें 3.0 A धारा प्रवाहित हो रही है। समझाइए कि किस अर्थ में यह परिनालिका एक छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है? इसके साथ जुड़ा हुआ चुंबकीय आघूर्ण कितना है?
परिनालिका की क्षेत्र रेखाएँ छड़ चुंबक जैसी होती हैं; दूर स्थित बिंदु पर क्षेत्र का सूत्र समान है।
m = NIA = 800×3.0×2.5×10⁻⁴ = 0.6 A·m²
चुंबकीय आघूर्ण m = 0.6 A·m²
प्रश्न 5.4 यदि प्रश्न 5.3 में बताई गई परिनालिका ऊर्ध्वाधर दिशा के परित: घूमने के लिए स्वतंत्र हो और इस पर क्षैतिज दिशा में एक 0.25 T का एकसमान चुंबकीय क्षेत्र लगाया जाए, तो इस परिनालिका पर लगने वाले बल आघूर्ण का परिमाण उस समय क्या होगा, जब इसकी अक्ष आरोपित क्षेत्र की दिशा से 30° का कोण बना रही हो?
m = 0.6 A·m², B = 0.25 T, θ = 30°
τ = mB sinθ = 0.6×0.25×0.5 = 0.075 N·m
बल आघूर्ण τ = 0.075 N·m
प्रश्न 5.5 एक छड़ चुंबक जिसका चुंबकीय आघूर्ण 1.5 J T⁻¹ है, 0.22 T के एक एकसमान चुंबकीय क्षेत्र के अनुदिश रखा है। (a) एक बाह्य बल आघूर्ण कितना कार्य करेगा यदि यह चुंबक को चुंबकीय क्षेत्र के (i) लंबवत (ii) विपरीत दिशा में सरेखित करने के लिए घुमा दे। (b) स्थिति (i) एवं (ii) में चुंबक पर कितना बल आघूर्ण होता है?
m = 1.5 J T⁻¹, B = 0.22 T; प्रारंभिक θ = 0°
(a)(i) θf = 90°: W = Uf − Ui = 0 − (−0.33) = 0.33 J
(a)(ii) θf = 180°: W = 0.33 − (−0.33) = 0.66 J
(b) (i) θ = 90°: τ = mB sin90° = 0.33 N·m
(b) (ii) θ = 180°: τ = mB sin180° = 0 N·m
प्रश्न 5.6 एक परिनालिका जिसमें पास-पास 2000 फेरे लपेटे गए हैं तथा जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल 1.6×10⁻⁴ m² है और जिसमें 4.0 A की धारा प्रवाहित हो रही है, इसके केंद्र से इस प्रकार लटकायी गई है कि यह एक क्षैतिज तल में घूम सके। (a) परिनालिका के चुंबकीय आघूर्ण का मान क्या है? (b) परिनालिका पर लगने वाला बल एवं बल आघूर्ण क्या है, यदि इस पर, इसकी अक्ष से 30° का कोण बनाता हुआ 7.5×10⁻² T का एकसमान क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र लगाया जाए?
(a) m = NIA = 2000×4.0×1.6×10⁻⁴ = 1.28 A·m²
(b) एकसमान क्षेत्र में नेट बल शून्य; τ = mB sinθ = 1.28×7.5×10⁻²×0.5 = 0.048 N·m
m = 1.28 A·m²; F = 0; τ = 0.048 N·m
प्रश्न 5.7 किसी छोटे छड़ चुंबक का चुंबकीय आघूर्ण 0.48 JT⁻¹ है। चुंबक के केंद्र से 10 cm की दूरी पर स्थित किसी बिंदु पर इसके चुंबकीय क्षेत्र का परिमाण एवं दिशा बताइए यदि यह बिंदु (i) चुंबक के अक्ष पर स्थित हो (ii) चुंबक के अभिलंब समद्विभाजक पर स्थित हो।
m = 0.48 J T⁻¹, r = 0.1 m
(i) अक्षीय: B = (μ₀/4π)×2m/r³ = 10⁻⁷×2×0.48/10⁻³ = 9.6×10⁻⁵ T (m की दिशा में)
(ii) विषुवतीय: B = (μ₀/4π)×m/r³ = 10⁻⁷×0.48/10⁻³ = 4.8×10⁻⁵ T (m की विपरीत दिशा में)
B(अक्षीय) = 9.6×10⁻⁵ T; B(विषुवतीय) = 4.8×10⁻⁵ T