ऐमीन — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 9)
रसायन विज्ञान • कक्षा-12 • अध्याय 9

ऐमीन (Amines)

अमोनिया के कार्बनिक व्युत्पन्नों से लेकर डाइऐज़ोनियम लवणों तक — नामकरण, संरचना, विरचन विधियाँ, क्षारकता, महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ, तथ्य, तालिकाएँ, आरेख, पाठ्यनिहित प्रश्न (9.1–9.9) तथा अभ्यास प्रश्न (9.1–9.14) के विस्तृत हल — एक ही स्थान पर।

R–NH₂ प्राथमिक ऐमीन
R₂NH द्वितीयक ऐमीन
R₃N तृतीयक ऐमीन
★ NEET फोकस तथ्य
अवधारणा

9.1 परिचय

ऐमीन, अमोनिया (NH₃) अणु से एक अथवा अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं के ऐल्किल अथवा ऐरिल समूहों द्वारा विस्थापन से प्राप्त कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग बनाती है। प्रकृति में ये प्रोटीन, विटामिन, ऐल्केलॉइड तथा हॉर्मोनों में पाई जाती हैं। संश्लेषित उदाहरणों में बहुलक, रंजक और औषध सम्मिलित हैं।

दो जैव-सक्रिय यौगिक — ऐड्रीनलिन तथा इफेड्रिन — रक्त-चाप बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, दोनों में ही द्वितीयक ऐमीनो समूह होता है। संश्लेषित यौगिक "नोवोकेन" का उपयोग दंतचिकित्सा में निश्चेतक (anaesthetic) के रूप में होता है। प्रसिद्ध प्रतिहिस्टैमिन "बैनैड्रिल" में तृतीयक ऐमीनो समूह उपस्थित है। चतुष्क अमोनियम लवणों का प्रयोग पृष्ठसक्रियक के रूप में होता है। डाइऐज़ोनियम लवण, रंजकों सहित विभिन्न ऐरोमैटिक यौगिकों को बनाने में मध्यवर्ती होते हैं।

याद रखने की तरकीब: ऐमीन को अमोनिया के "H की जगह R" वाले व्युत्पन्न के रूप में याद रखें — जितने H हटे, उतना ही वर्गीकरण (1°, 2°, 3°) आगे बढ़ता है।
संरचना

9.2 ऐमीनों की संरचना

अमोनिया की भाँति, ऐमीन का नाइट्रोजन परमाणु त्रिसंयोजी है एवं इस पर एक असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल है। ऐमीन में नाइट्रोजन के कक्षक sp³ संकरित होते हैं तथा ऐमीन की आकृति पिरैमिडी (pyramidal) होती है। नाइट्रोजन के तीनों sp³ संकरित कक्षकों में से प्रत्येक, ऐमीन के संगठन के अनुसार, हाइड्रोजन अथवा कार्बन के कक्षकों से अतिव्यापन करता है। सभी ऐमीनों में नाइट्रोजन के चौथे कक्षक में एक असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल स्थित रहता है।

असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल की उपस्थिति के कारण C–N–E कोण (जहाँ E = C अथवा H है) 109.5° से कम होता है — उदाहरण के लिए ट्राईमेथिलऐमीन में यह कोण 108° होता है।

N (sp³) CH₃ CH₃ CH₃ असहभाजित युगल 108°
चित्र: ट्राईमेथिलऐमीन की पिरैमिडी आकृति (sp³ नाइट्रोजन, कोण 108°)
वर्गीकरण

9.3 ऐमीनों का वर्गीकरण

अमोनिया अणु में ऐल्किल अथवा ऐरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या के आधार पर ऐमीनों का वर्गीकरण प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) तथा तृतीयक (3°) में किया जाता है।

वर्गसामान्य संरचनाविवरण
प्राथमिक (1°)R–NH₂ अथवा Ar–NH₂एक H, ऐल्किल/ऐरिल से प्रतिस्थापित
द्वितीयक (2°)R–NH–R'दो H, ऐल्किल/ऐरिल से प्रतिस्थापित
तृतीयक (3°)R–N(R')–R''तीनों H, ऐल्किल/ऐरिल से प्रतिस्थापित

यदि सभी ऐल्किल अथवा ऐरिल समूह समान हों तो ऐमीन को "सरल" तथा भिन्न होने पर "मिश्रित" कहते हैं।

नामपद्धति

9.4 ऐमीनों का नामकरण

9.4.1 सामान्य पद्धति

ऐलिफैटिक ऐमीन का नामकरण "ऐमीन" शब्द में पूर्वलग्न ऐल्किल लगाकर एक शब्द में किया जाता है — जैसे मेथिलऐमीन। द्वितीयक व तृतीयक ऐमीनों में जब दो अथवा अधिक समूह समान होते हैं तब ऐल्किल समूह के नाम से पहले पूर्वलग्न "डाइ" अथवा "ट्राइ" का प्रयोग किया जाता है।

9.4.2 IUPAC पद्धति

IUPAC पद्धति में ऐमीनों का नामकरण ऐल्केनऐमीन के रूप में होता है — संगत ऐल्केन के नाम के अंत में "ऐमीन" प्रत्यय जोड़ा जाता है (जैसे CH₃NH₂ का नाम मेथेनैमीन है)।

द्वितीयक तथा तृतीयक ऐमीन में N को छोटे ऐल्किल समूह के साथ जोड़कर विस्थापक के रूप में प्रयुक्त करते हैं — उदाहरणार्थ CH₃NHCH₂CH₃ का नाम N-मेथिलएथेनामीन है।

ऐरिल ऐमीनों में –NH₂ समूह बेन्ज़ीन वलय से सीधे जुड़ा रहता है — सरलतम उदाहरण C₆H₅NH₂ है, जिसे सामान्य पद्धति में ऐनिलीन कहते हैं (यह IUPAC पद्धति में भी स्वीकार्य नाम है)।

ऐमीनसामान्य नामIUPAC नाम
CH₃CH₂NH₂एथिलऐमीनएथेनैमीन
CH₃CH₂CH₂NH₂n-प्रोपिलऐमीनप्रोपेन-1-ऐमीन
(CH₃)₂CHNH₂iso-प्रोपिलऐमीनप्रोपेन-2-ऐमीन
CH₃NHCH₂CH₃एथिलमेथिलऐमीनN-मेथिलएथेनैमीन
(CH₃)₃Nट्राईमेथिलऐमीनN,N-डाइमेथिलमेथेनैमीन
C₆H₅NH₂ऐनिलीनऐनिलीन अथवा बेन्ज़ीनऐमीन
o-CH₃-C₆H₄-NH₂o-टॉलूडीन2-मेथिलऐनीलीन
p-Br-C₆H₄-NH₂p-ब्रोमोऐनिलीन4-ब्रोमोबेन्ज़ीनऐमीन
संश्लेषण

9.5 ऐमीनों का विरचन

1. नाइट्रो यौगिकों का अपचयन — नाइट्रो यौगिक सूक्ष्म विभाजित निकैल, पैलेडियम अथवा प्लैटिनम की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने से ऐमीनों में अपचित हो जाते हैं। अम्लीय माध्यम में धातुओं द्वारा भी अपचयन हो सकता है। रद्दी लोहे व हाइड्रोक्लोरिक अम्ल द्वारा अपचयन को वरीयता दी जाती है।

2. ऐल्किल हैलाइडों का अमोनीअपघटन (Ammonolysis) — ऐल्किल/बेन्ज़िल हैलाइड, अमोनिया के एथेनॉलिक विलयन से नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं — यह अभिक्रिया 373 K पर सील बंद नालिका में कराई जाती है।

3. नाइट्राइलों का अपचयन — नाइट्राइल LiAlH₄ अथवा उत्प्रेरकी हाइड्रोजनन द्वारा अपचित होकर प्राथमिक ऐमीन बनाते हैं (शृंखला आरोहण)।

4. ऐमाइडों का अपचयन — ऐमाइड LiAlH₄ द्वारा अपचित होकर ऐमीन देते हैं (R–CONH₂ → R–CH₂–NH₂)।

5. गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण — इसका प्रयोग केवल प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीनों के विरचन के लिए होता है। ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन इस विधि से नहीं बनाई जा सकतीं क्योंकि ऐरिल हैलाइड, थैलिमाइड से प्राप्त ऋणायन के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन नहीं कर सकते।

6. हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया — किसी ऐमाइड की NaOH के जलीय अथवा एथेनॉलिक विलयन में ब्रोमीन से अभिक्रिया कराई जाती है। प्राप्त ऐमीन में ऐमाइड से एक कार्बन कम होता है।

R–NH₂ →(RX)→ R₂NH →(RX)→ R₃N →(RX)→ R₄N⁺X⁻ (चतुष्क अमोनियम लवण) R–C≡N →(H₂/Ni या LiAlH₄)→ R–CH₂–NH₂ R–CONH₂ + Br₂ + 4NaOH → R–NH₂ + Na₂CO₃ + 2NaBr + 2H₂O (हॉफमान अपचयन)
चित्र: अमोनीअपघटन की क्रमिक ऐल्किलन तथा हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण
त्वरित तथ्य
  • गैब्रिएल संश्लेषण शुद्ध, अपमिश्रण-रहित प्राथमिक ऐमीन देता है — केवल ऐलिफैटिक के लिए उपयुक्त।
  • हॉफमान निम्नीकरण में उत्पाद ऐमीन, मूल ऐमाइड से एक कार्बन कम होता है (श्रेणी अवरोहण)।
  • नाइट्राइल अपचयन (LiAlH₄) से ऐमीन श्रेणी का आरोहण होता है (एक कार्बन अधिक)।
  • अमोनीअपघटन विधि से 1°, 2°, 3° ऐमीन तथा चतुष्क लवण का मिश्रण प्राप्त होता है।
भौतिक गुणधर्म

9.6 ऐमीनों के भौतिक गुणधर्म

निम्नतर ऐलिफैटिक ऐमीन मत्स्य गंध वाली गैसें हैं। तीन अथवा अधिक कार्बन परमाणु वाली प्राथमिक ऐमीन द्रव तथा इससे उच्चतर ऐमीन ठोस हैं। ऐनिलीन तथा अन्य ऐरिलऐमीन प्रायः रंगहीन होती हैं, परंतु भंडारण के दौरान वायुमंडलीय ऑक्सीकरण से रंगीन हो जाती हैं।

निम्नतर ऐलिफैटिक ऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध बना सकने के कारण जल में विलेय होती हैं; अणुभार में वृद्धि के साथ जलविरागी भाग बढ़ जाने से विलेयता घटती है। ऐमीन कार्बनिक विलायकों — ऐल्कोहॉल, ईथर, बेन्ज़ीन — में विलेय होती हैं।

R–N–H⋯H–N–R प्राथमिक व द्वितीयक ऐमीनों में N–H के कारण अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन होता है; तृतीयक ऐमीन में N–H न होने से यह संघटन नहीं होता।
चित्र: प्राथमिक ऐमीन में अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन
यौगिकअणु द्रव्यमानक्वथनांक (K)
n-C₄H₉NH₂ (1°)73350.8
(C₂H₅)₂NH (2°)73329.3
C₂H₅N(CH₃)₂ (3°)73310.5
n-C₄H₉OH (ऐल्कोहॉल)74390.3
त्वरित तथ्य
  • क्वथनांक क्रम: ऐल्कोहॉल > प्राथमिक ऐमीन > द्वितीयक ऐमीन > तृतीयक ऐमीन ≈ ऐल्केन (समतुल्य द्रव्यमान पर)।
  • ऐमीन की नाइट्रोजन (विद्युत्ऋणात्मकता 3.0) ऐल्कोहॉल की ऑक्सीजन (3.5) से कम विद्युत्ऋणी होने के कारण ऐमीन में ऐल्कोहॉल से दुर्बल हाइड्रोजन आबंध बनते हैं।
रासायनिक अभिक्रियाएँ

9.7 ऐमीनों का क्षारकीय गुण

नाइट्रोजन परमाणु पर असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल की उपस्थिति के कारण ऐमीन लूईस क्षारक की भाँति व्यवहार करती है और अम्लों से अभिक्रिया कर लवण बनाती है।

R–NH₂ + HX ⇌ R–NH₃⁺X⁻ (लवण) C₆H₅NH₂ + HCl ⇌ C₆H₅NH₃⁺Cl⁻ (ऐनिलीनियम क्लोराइड)
क्षारकता साम्य R–NH₂ + H₂O ⇌ R–NH₃⁺ + OH⁻
Kb = [R–NH₃⁺][OH⁻] / [R–NH₂]
pKb = −log Kb
ऐमीन का नामpKb (जलीय)
मेथेनैमीन3.38
N,N-डाइमेथिलमेथेनैमीन4.22
एथेनैमीन3.29
N,N-डाइएथिलएथेनैमीन3.25
बेन्ज़ीनऐमीन (ऐनिलीन)9.38
फेनिलमेथेनैमीन4.70
N-मेथिलऐनिलीन9.30
N,N-डाइमेथिलऐनिलीन8.92

ऐलिफैटिक ऐमीन, नाइट्रोजन परमाणु पर ऐल्किल समूहों के +I प्रभाव के कारण अमोनिया से प्रबल क्षारक होते हैं। ऐरोमैटिक ऐमीन, ऐरिल समूह की इलेक्ट्रॉन-खींचने की प्रवृत्ति के कारण अमोनिया से दुर्बल क्षारक होते हैं।

विस्तृत विश्लेषण

9.8 संरचना तथा क्षारकता में संबंध

ऐमीन का क्षारीय गुण अम्ल से प्रोटॉन ग्रहण कर धनायन बनाने की सहजता पर निर्भर करता है — ऐमीन की तुलना में धनायन जितना अधिक स्थायी होता है, ऐमीन उतनी ही अधिक क्षारकीय होती है।

8.1 ऐल्केनैमीन बनाम अमोनिया

ऐल्किल समूह के +I प्रभाव से नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है। गैसीय प्रावस्था में क्षारकता क्रम: तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक > अमोनिया

जलीय प्रावस्था में विलायकयोजन (solvation) व त्रिविम बाधा (steric hindrance) के कारण क्रम बदल जाता है: द्वितीयक > प्राथमिक > तृतीयक > अमोनिया (एथिल-प्रतिस्थापित के लिए)।

जलीय विलयन में क्षारकीय प्राबल्य का क्रम:
(C₂H₅)₂NH > C₂H₅NH₂ > (C₂H₅)₃N > NH₃ (एथिल-प्रतिस्थापित)
(CH₃)₂NH > CH₃NH₂ > (CH₃)₃N > NH₃ (मेथिल-प्रतिस्थापित)

8.2 ऐरिलऐमीन बनाम अमोनिया

ऐनिलीन (pKb = 9.38) अमोनिया से बहुत दुर्बल क्षारक है। इसका कारण है कि –NH₂ समूह सीधे बेन्ज़ीन वलय से जुड़ा होता है, जिससे नाइट्रोजन परमाणु पर उपस्थित असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल, बेन्ज़ीन वलय के साथ संयुग्मन (conjugation) के कारण प्रोटॉनन के लिए कम उपलब्ध होता है।

ऐनिलीन पाँच अनुनादी संरचनाओं का संकर होती है, जबकि प्रोटॉन ग्रहण से परिणित ऐनिलीनियम धनायन की केवल दो अनुनाद संरचनाएँ होती हैं — अतः ऐनिलीन अधिक स्थायी है, इसीलिए इसकी क्षारकता कम है।

ऐनिलीन: 5 अनुनादी संरचनाएँ (N का एकाकी युगल वलय में विस्थानित) — अधिक स्थायी, कम क्षारकीय ऐनिलीनियम धनायन: केवल 2 अनुनाद संरचनाएँ — कम स्थायी
चित्र: ऐनिलीन बनाम ऐनिलीनियम आयन के अनुनाद-स्थायित्व की तुलना
अन्य महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ

9.9 ऐल्किलन, ऐसिलन व अन्य अभिक्रियाएँ

9.9.1 ऐल्किलन

ऐमीन ऐल्किल हैलाइडों के साथ ऐल्किलन अभिक्रिया देती हैं, जिससे क्रमशः उच्चतर ऐमीन तथा अंततः चतुष्क अमोनियम लवण प्राप्त होते हैं।

9.9.2 ऐसिलन

ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक एवं द्वितीयक ऐमीन, ऐसिड क्लोराइड, एनहाइड्राइड और एस्टर से नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं — इसे ऐसिलन कहते हैं।

C₆H₅NH₂ + C₆H₅COCl → C₆H₅NHCOC₆H₅ (बेन्ज़ैनिलाइड) + HCl
चित्र: ऐनिलीन की बेन्ज़ॉयल क्लोराइड से बेन्ज़ॉयलन अभिक्रिया

9.9.3 कार्बिलऐमीन अभिक्रिया

ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन, क्लोरोफ़ॉर्म और एथेनॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर दुर्गंधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कार्बिलऐमीन का विरचन करती हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन यह अभिक्रिया नहीं दर्शातीं

R–NH₂ + CHCl₃ + 3KOH →(ताप)→ R–NC + 3KCl + 3H₂O

9.9.4 नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया

ऐमीन का वर्गउत्पादविशेष टिप्पणी
प्राथमिक ऐलिफैटिकऐल्कोहॉल + N₂अस्थायी डाइऐज़ोनियम लवण
प्राथमिक ऐरोमैटिकडाइऐज़ोनियम लवण273–278K पर स्थायी
द्वितीयकN-नाइट्रोसो ऐमीनपीला तेल/ठोस
तृतीयकअस्थायी नाइट्राइट लवणकोई स्थायी उत्पाद नहीं

9.9.5 हिन्सबर्ग परीक्षण

ऐमीन का वर्गउत्पादN पर Hक्षार में विलेयता
प्राथमिकN-ऐल्किलबेन्ज़ीनसल्फोनैमाइडहैविलेय
द्वितीयकN,N-डाइऐल्किलबेन्ज़ीनसल्फोनैमाइडनहींअविलेय
तृतीयककोई अभिक्रिया नहीं
ऐरोमैटिक ऐमीन

9.10 इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ

–NH₂ समूह ऑर्थो-पैरा निर्देशक एवं शक्तिशाली सक्रियक समूह है। ऐनिलीन कक्ष ताप पर ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके 2,4,6-ट्राईब्रोमोऐनिलीन का श्वेत अवक्षेप देती है।

C₆H₅NH₂ + 3Br₂ →(जलीय माध्यम)→ 2,4,6-ट्राईब्रोमोऐनिलीन↓ + 3HBr

यदि एकल प्रतिस्थापी व्युत्पन्न चाहिए, तो पहले –NH₂ समूह को ऐसीटिक एनहाइड्राइड द्वारा ऐसीटिलन से परिरक्षित किया जाता है।

C₆H₅NH₂ →((CH₃CO)₂O/पिरीडीन)→ ऐसीटेनिलाइड →(Br₂/CH₃COOH)→ p-ब्रोमोऐसीटेनिलाइड →(OH⁻/H⁺)→ p-ब्रोमोऐनिलीन
चित्र: –NH₂ का परिरक्षण करके नियंत्रित एकल-प्रतिस्थापन
ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं करती — AlCl₃ (लुइस अम्ल) से लवण बनने पर नाइट्रोजन धन आवेश प्राप्त कर लेती है और निष्क्रियक बन जाती है।
डाइऐज़ोनियम लवण

9.11 डाइऐज़ोनियम लवणों का विरचन

डाइऐज़ोनियम लवणों का सामान्य सूत्र R–N₂⁺X⁻ होता है, जहाँ R एक ऐरिल समूह है तथा X⁻ आयन Cl⁻, Br⁻, HSO₄⁻, BF₄⁻ आदि में से कोई भी हो सकता है।

बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड को ऐनिलीन एवं नाइट्रस अम्ल की अभिक्रिया द्वारा 273–278K ताप पर बनाया जाता है।

C₆H₅NH₂ + NaNO₂ + 2HCl →(273–278K)→ C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + NaCl + 2H₂O
ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन ऐरीनडाइऐज़ोनियम लवण बनाती हैं, जो विलयन में निम्न ताप (273–278K) पर अल्प समय के लिए स्थायी रहते हैं।
भौतिक गुण

9.12 डाइऐज़ोनियम लवणों के भौतिक गुण

बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड एक रंगहीन क्रिस्टलीय ठोस है — यह जल में विलेय तथा ठंडे में स्थायी है, किंतु गरम करने पर जल से अभिक्रिया करता है और ठोस अवस्था में आसानी से विघटित हो जाता है।

बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम फ्लुओरोबोरेट जल में अविलेय तथा कक्ष ताप पर स्थायी होता है — भंडारण योग्य और Balz-Schiemann अभिक्रिया में उपयोगी।

रासायनिक अभिक्रियाएँ

9.13 नाइट्रोजन प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ

अभिक्रिया का नामअभिकर्मकप्राप्त उत्पाद
सैंडमायर अभिक्रियाCu₂Cl₂/HCl, Cu₂Br₂/HBr, CuCN/KCNArCl, ArBr, ArCN
गाटरमान अभिक्रियाताम्रचूर्ण + संगत हैलोजन अम्लArCl, ArBr
आयोडाइड प्रतिस्थापनKIArI
फ्लुओराइड प्रतिस्थापनHBF₄, फिर ΔArF (Balz-Schiemann)
H द्वारा प्रतिस्थापनH₃PO₂/H₂O अथवा C₂H₅OHArH
हाइड्रॉक्सिल प्रतिस्थापनH₂O, गरम (283K)ArOH
–NO₂ द्वारा प्रतिस्थापनNaNO₂/Cu, ΔArNO₂
ArN₂⁺X⁻ →(Cu₂Cl₂/HCl)→ ArCl + N₂ (सैंडमायर) ArN₂⁺X⁻ →(Cu/HCl)→ ArCl + N₂ + CuX (गाटरमान) ArN₂⁺Cl⁻ + KI → ArI + KCl + N₂ ArN₂⁺Cl⁻ + HBF₄ → ArN₂⁺BF₄⁻ →(Δ)→ ArF + BF₃ + N₂ ArN₂⁺Cl⁻ + H₃PO₂ + H₂O → ArH + N₂ + H₃PO₃ + HCl ArN₂⁺Cl⁻ + H₂O →(283K)→ ArOH + N₂ + HCl ArN₂⁺BF₄⁻ + NaNO₂ →(Cu, Δ)→ ArNO₂ + N₂ + NaBF₄
चित्र: डाइऐज़ोनियम लवणों की नाइट्रोजन प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ
त्वरित तथ्य
  • गाटरमान अभिक्रिया की तुलना में सैंडमायर अभिक्रिया की लब्धि अधिक होती है।
  • आयोडीन को सीधे बेन्ज़ीन वलय में सरलता से नहीं जोड़ा जा सकता — डाइऐज़ोनियम मार्ग से ही आयोडोबेन्ज़ीन आसानी से बनती है।
  • ऐरिल फ्लुओराइड व आयोडाइड को सीधे हैलोजनन द्वारा नहीं बनाया जा सकता — डाइऐज़ोनियम मार्ग ही उपयुक्त है।
डाइऐज़ो सुरक्षित अभिक्रियाएँ

9.14 युग्मन अभिक्रियाएँ

युग्मन अभिक्रिया से प्राप्त ऐज़ो उत्पादों में दोनों ऐरोमैटिक वलयों एवं –N=N– आबंध के बीच विस्तारित संयुग्मन होता है। ये यौगिक प्रायः रंगीन होते हैं तथा रंजकों की तरह प्रयोग में आते हैं।

C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅OH →(OH⁻)→ C₆H₅–N=N–C₆H₄–OH-p + HCl (p-हाइड्रॉक्सीऐज़ोबेन्ज़ीन — नारंगी रंजक) C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅NH₂ →(H⁺)→ C₆H₅–N=N–C₆H₄–NH₂-p + HCl (p-ऐमीनोऐज़ोबेन्ज़ीन — पीला रंजक)
चित्र: फीनॉल तथा ऐनिलीन के साथ युग्मन अभिक्रियाएँ
अनुप्रयोग

9.15 ऐरोमैटिक संश्लेषण में डाइऐज़ोलवणों का महत्व

डाइऐज़ोनियम लवण बेन्ज़ीन वलय में –F, –Cl, –Br, –I, –CN, –OH, –NO₂ आदि समूहों के प्रवेश के लिए उत्तम माध्यमिक हैं।

ऐरिल फ्लुओराइड एवं आयोडाइड को सीधे हैलोजनन द्वारा नहीं बनाया जा सकता; क्लोरोबेन्ज़ीन में क्लोरीन के नाभिकरागी प्रतिस्थापन द्वारा सायनाइड समूह का प्रवेश नहीं कराया जा सकता, किंतु डाइऐज़ोनियम लवण से सायनोबेन्ज़ीन को सरलता से बनाया जा सकता है।

रिवीज़न

9.16 पूरे अध्याय के महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य

संरचना व नामकरण
  • ऐमीन में N sp³ संकरित है; आकृति पिरैमिडी है; बंध कोण 109.5° से कम।
  • वर्गीकरण: 1° (R-NH₂), 2° (R-NH-R'), 3° (R₃N) — प्रतिस्थापित H परमाणुओं की संख्या के आधार पर।
  • IUPAC नाम में "-ऐमीन" अनुलग्न; ऐनिलीन (C₆H₅NH₂) दोनों पद्धतियों में स्वीकार्य है।
विरचन
  • गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण — केवल शुद्ध प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन देता है, ऐरोमैटिक के लिए अनुपयुक्त।
  • हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण — ऐमाइड से एक कार्बन कम वाला प्राथमिक ऐमीन देता है।
  • नाइट्राइल अपचयन (LiAlH₄) — ऐमीन शृंखला का आरोहण (एक कार्बन अधिक)।
  • अमोनीअपघटन — 1°, 2°, 3° ऐमीन व चतुष्क लवण का मिश्रण देता है।
क्षारकता व अभिक्रियाशीलता
  • क्वथनांक क्रम: प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक ऐमीन (अंतराआण्विक H-आबंधन के कारण)।
  • गैसीय क्षारकता: 3° > 2° > 1° > NH₃; जलीय: विलायकयोजन व त्रिविम बाधा के कारण क्रम बदल जाता है।
  • ऐनिलीन अमोनिया से दुर्बल क्षारक है — N का एकाकी युगल वलय के साथ संयुग्मित (5 अनुनादी संरचनाएँ)।
  • ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देती — AlCl₃ से लवण बनने पर N निष्क्रियक बन जाता है।
पहचान परीक्षण व विशिष्ट अभिक्रियाएँ
  • कार्बिलऐमीन परीक्षण — केवल प्राथमिक ऐमीन (CHCl₃/KOH से दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड)।
  • हिन्सबर्ग परीक्षण (C₆H₅SO₂Cl) — 1° विलेय, 2° अविलेय, 3° कोई अभिक्रिया नहीं।
  • प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन + HNO₂ → ऐल्कोहॉल + N₂; प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन + HNO₂ (273-278K) → डाइऐज़ोनियम लवण।
  • सैंडमायर अभिक्रिया की लब्धि गाटरमान अभिक्रिया से अधिक होती है।
  • युग्मन अभिक्रिया से रंगीन ऐज़ो यौगिक (रंजक) प्राप्त होते हैं।

पाठ्यनिहित प्रश्न (9.1 – 9.9) — विस्तृत हल

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके हल देखें।

9.1 निम्नलिखित ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए — (i) 1-नैफ्थिलऐमीन (ii) N,N-डाइमेथिल-2-नैफ्थिलऐमीन (iii) (C₂H₅)₂CHNH₂ (iv) (C₂H₅)₂NH
(i) 1-नैफ्थिलऐमीन –NH₂ सीधे वलय से जुड़ा → प्राथमिक (1°) ऐरोमैटिक ऐमीन
(ii) N,N-डाइमेथिल-2-नैफ्थिलऐमीन –N(CH₃)₂ वलय से जुड़ा → तृतीयक (3°) ऐमीन
(iii) (C₂H₅)₂CHNH₂ → NH₂ एक कार्बन से जुड़ा → प्राथमिक (1°) ऐमीन
(iv) (C₂H₅)₂NH → नाइट्रोजन दो एथिल समूहों से जुड़ा → द्वितीयक (2°) ऐमीन
9.2 (i) अणु सूत्र C₄H₁₁N से प्राप्त विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना लिखिए। (ii) सभी समावयवों के IUPAC नाम लिखिए। (iii) विभिन्न युग्मों द्वारा कौन से प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है?
प्राथमिक ऐमीन (4): CH₃CH₂CH₂CH₂NH₂ (ब्यूटेन-1-ऐमीन), CH₃CH₂CH(NH₂)CH₃ (ब्यूटेन-2-ऐमीन), (CH₃)₂CHCH₂NH₂ (2-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन), (CH₃)₃CNH₂ (2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन)।
द्वितीयक ऐमीन (3): CH₃NHCH₂CH₂CH₃ (N-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन), CH₃NHCH(CH₃)₂ (N-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन), C₂H₅NHC₂H₅ (N-एथिलएथेनैमीन)।
तृतीयक ऐमीन (1): (CH₃)₂NC₂H₅ (N,N-डाइमेथिलएथेनैमीन)। कुल 8 समावयवी।
समावयवता: शृंखला, स्थिति, मध्यावयवता (metamerism) व क्रियात्मक समूह समावयवता।
9.3 आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे? (i) बेन्ज़ीन से ऐनिलीन (ii) बेन्ज़ीन से N,N-डाइमेथिलऐनिलीन (iii) Cl-(CH₂)₄-Cl से हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन
(i) C₆H₆ →(सांद्र HNO₃/H₂SO₄)→ C₆H₅NO₂ →(Sn/HCl या H₂/Pd)→ C₆H₅NH₂
(ii) C₆H₆ →(HNO₃/H₂SO₄)→ C₆H₅NO₂ →(Sn/HCl)→ C₆H₅NH₂ →(CH₃I आधिक्य/K₂CO₃)→ C₆H₅N(CH₃)₂
(iii) Cl(CH₂)₄Cl + 2KCN → NC–(CH₂)₄–CN →(H₂/Ni या LiAlH₄)→ H₂N–(CH₂)₆–NH₂
9.4 निम्नलिखित को बढ़ते हुए क्षारकीय प्रबलता के क्रम में लिखिए
(i) C₆H₅NH₂ < NH₃ < C₆H₅CH₂NH₂ < C₂H₅NH₂ < (C₂H₅)₂NH
(ii) C₆H₅NH₂ < C₂H₅NH₂ < (C₂H₅)₃N < (C₂H₅)₂NH
(iii) C₆H₅NH₂ < C₆H₅CH₂NH₂ < (CH₃)₃N < CH₃NH₂ < (CH₃)₂NH
9.5 निम्नलिखित अम्ल-क्षारक अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए — (i) CH₃CH₂CH₂NH₂ + HCl → (ii) (C₂H₅)₃N + HCl →
(i) CH₃CH₂CH₂NH₂ + HCl → CH₃CH₂CH₂NH₃⁺Cl⁻ — प्रोपेन-1-अमोनियम क्लोराइड
(ii) (C₂H₅)₃N + HCl → (C₂H₅)₃NH⁺Cl⁻ — ट्राईएथिलअमोनियम क्लोराइड
9.6 सोडियम कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में मेथिल आयोडाइड के आधिक्य द्वारा ऐनिलीन के ऐल्किलन में उत्पन्न होने वाले उत्पादों के लिए अभिक्रिया लिखिए
C₆H₅NH₂ + 3CH₃I (आधिक्य) →(Na₂CO₃)→ C₆H₅N⁺(CH₃)₃ I⁻ (फेनिलट्राइमेथिलअमोनियम आयोडाइड) + 2HI (Na₂CO₃ द्वारा उदासीन)
9.7 ऐनिलीन की बेन्ज़ॉयल क्लोराइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न उत्पादों के नाम लिखिए
C₆H₅NH₂ + C₆H₅COCl → N-फेनिलबेन्ज़ैमाइड (बेन्ज़ैनिलाइड) + HCl
9.8 अणुसूत्र C₃H₉N से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिए। उन समावयवों के IUPAC नाम लिखिए जो नाइट्रस अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं
समावयव: प्रोपेन-1-ऐमीन, प्रोपेन-2-ऐमीन, N-मेथिलएथेनैमीन, N,N-डाइमेथिलमेथेनैमीन (कुल 4)
नाइट्रोजन गैस मुक्त करने वाले: प्रोपेन-1-ऐमीन तथा प्रोपेन-2-ऐमीन (केवल प्राथमिक ऐमीन)
9.9 निम्नलिखित परिवर्तन कीजिए — (i) 3-मेथिलऐनिलीन से 3-नाइट्रोटॉलूईन (ii) ऐनिलीन से 1,3,5-ट्राइब्रोमोबेन्ज़ीन
(i) 3-मेथिलऐनिलीन →(NaNO₂/HCl, 273-278K)→ 3-मेथिलबेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड →(HBF₄)→ फ्लुओरोबोरेट →(NaNO₂/Cu, Δ)→ 3-नाइट्रोटॉलूईन
(ii) ऐनिलीन →(Br₂ जल)→ 2,4,6-ट्राईब्रोमोऐनिलीन →(NaNO₂/HCl, 273K)→ डाइऐज़ोनियम क्लोराइड →(H₃PO₂/H₂O)→ 1,3,5-ट्राइब्रोमोबेन्ज़ीन

अध्याय अभ्यास (9.1 – 9.14) — विस्तृत हल

NCERT पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।

9.1 निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए तथा इनके IUPAC नाम लिखिए
(i) (CH₃)₂CHNH₂ → प्राथमिक; IUPAC: प्रोपेन-2-ऐमीन
(ii) CH₃(CH₂)₂NH₂ → प्राथमिक; IUPAC: प्रोपेन-1-ऐमीन
(iii) CH₃NHCH(CH₃)₂ → द्वितीयक; IUPAC: N-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन
(iv) (CH₃)₃CNH₂ → प्राथमिक; IUPAC: 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन
(v) C₆H₅NHCH₃ → द्वितीयक; IUPAC: N-मेथिलऐनिलीन
(vi) (CH₃CH₂)₂NCH₃ → तृतीयक; IUPAC: N-एथिल-N-मेथिलएथेनैमीन
(vii) m-BrC₆H₄NH₂ → प्राथमिक; IUPAC: 3-ब्रोमोऐनिलीन
9.2 निम्नलिखित युगलों के यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए
(i) मेथिलऐमीन व डाइमेथिलऐमीन: कार्बिलऐमीन परीक्षण — मेथिलऐमीन (1°) दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड बनाता है, डाइमेथिलऐमीन (2°) नहीं।
(ii) द्वितीयक व तृतीयक ऐमीन: हिन्सबर्ग परीक्षण — द्वितीयक अविलेय सल्फोनैमाइड, तृतीयक कोई अभिक्रिया नहीं।
(iii) एथिलऐमीन व ऐनिलीन: ब्रोमीन जल — ऐनिलीन श्वेत अवक्षेप (2,4,6-ट्राईब्रोमोऐनिलीन) देती है, एथिलऐमीन नहीं।
(iv) ऐनिलीन व बेन्ज़िलऐमीन: ब्रोमीन जल — ऐनिलीन तुरंत अवक्षेप देती है, बेन्ज़िलऐमीन नहीं।
(v) ऐनिलीन व N-मेथिलऐनिलीन: कार्बिलऐमीन परीक्षण — ऐनिलीन (1°) दुर्गंध देती है, N-मेथिलऐनिलीन (2°) नहीं।
9.3 निम्नलिखित के कारण बताइए
(i) ऐनिलीन का pKb मेथिलऐमीन की तुलना में अधिक होता है — ऐनिलीन में N का एकाकी युगल वलय के साथ अनुनाद द्वारा संयुग्मित होकर प्रोटॉनन हेतु कम उपलब्ध रहता है।
(ii) एथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि ऐनिलीन नहीं — एथिलऐमीन का छोटा ऐल्किल भाग प्रभावी H-आबंधन बनाता है; ऐनिलीन में बड़ा जलविरागी फेनिल समूह विलेयता घटाता है।
(iii) मेथिलऐमीन FeCl₃ के साथ जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देता है — मेथिलऐमीन क्षारकीय होने के कारण OH⁻ उत्पन्न करता है, जो Fe³⁺ के साथ अवक्षेप बनाता है।
(iv) ऐनिलीन नाइट्रोकरण द्वारा मेटानाइट्रोऐनिलीन भी देती है — प्रबल अम्लीय माध्यम में ऐनिलीन का भाग प्रोटॉनीकृत होकर ऐनिलीनियम आयन (−NH₃⁺) बनाता है, जो मेटा-निर्देशी है।
(v) ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देती — AlCl₃ ऐनिलीन की नाइट्रोजन से लवण/संकुल बना लेता है, जिससे N धनावेशित होकर निष्क्रियक बन जाती है।
(vi) ऐरोमैटिक डाइऐज़ोनियम लवण ऐलिफैटिक से अधिक स्थायी होते हैं — ऐरिल डाइऐज़ोनियम धनायन का धनावेश वलय के साथ अनुनाद द्वारा विस्थानित होकर स्थायित्व प्राप्त करता है।
(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है — यह शुद्ध प्राथमिक ऐमीन देता है, कोई अपमिश्रण नहीं।
9.4 निम्नलिखित को क्रम में लिखिए
(i) pKb घटते क्रम में — C₆H₅NH₂ > C₆H₅NHCH₃ > C₂H₅NH₂ > (C₂H₅)₂NH
(ii) क्षारकीय प्राबल्य घटते क्रम — (C₂H₅)₂NH > CH₃NH₂ > C₆H₅N(CH₃)₂ > C₆H₅NH₂
(iii)(क) बढ़ते क्षारकता — p-नाइट्रोऐनिलीन < ऐनिलीन < p-टॉलूडीन
(iii)(ख) बढ़ते क्षारकता — C₆H₅NH₂ < C₆H₅NHCH₃ < C₆H₅CH₂NH₂
(iv) गैस अवस्था में घटते क्षारकता — (C₂H₅)₃N > (C₂H₅)₂NH > C₂H₅NH₂ > NH₃
(v) क्वथनांक बढ़ते क्रम — (CH₃)₂NH < C₂H₅NH₂ < C₂H₅OH
(vi) जल में विलेयता बढ़ते क्रम — C₆H₅NH₂ < (C₂H₅)₂NH < C₂H₅NH₂
9.5 इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे?
(i) CH₃COOH →(NH₃,Δ)→ CH₃CONH₂ →(Br₂/NaOH)→ CH₃NH₂
(ii) CH₃(CH₂)₄CN →(H₃O⁺)→ CH₃(CH₂)₄COOH →(NH₃,Δ)→ CH₃(CH₂)₄CONH₂ →(Br₂/NaOH)→ CH₃(CH₂)₃CH₂NH₂
(iii) CH₃OH →(PBr₃)→ CH₃Br →(KCN)→ CH₃CN →(H₃O⁺)→ CH₃COOH
(iv) CH₃CH₂NH₂ →(NaNO₂/HCl)→ CH₃CH₂OH →(K₂Cr₂O₇/H₂SO₄)→ CH₃COOH →(NH₃,Δ)→ CH₃CONH₂ →(Br₂/NaOH)→ CH₃NH₂
(v) CH₃COOH →(LiAlH₄)→ CH₃CH₂OH →(PBr₃)→ CH₃CH₂Br →(KCN)→ CH₃CH₂CN →(H₃O⁺)→ CH₃CH₂COOH
(vi) CH₃NH₂ →(NaNO₂/HCl)→ CH₃OH →(PBr₃)→ CH₃Br →(KCN)→ CH₃CN →(H₂/Ni)→ CH₃CH₂NH₂
(vii) CH₃NO₂ →(H₂/Ni)→ CH₃NH₂ →(CH₃I, नियंत्रित 1 मोल)→ (CH₃)₂NH
(viii) CH₃CH₂COOH →(NH₃,Δ)→ CH₃CH₂CONH₂ →(Br₂/NaOH)→ CH₃CH₂NH₂ →(NaNO₂/HCl)→ CH₃CH₂OH →(K₂Cr₂O₇)→ CH₃COOH
9.6 प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए
हिन्सबर्ग परीक्षण: प्राथमिक ऐमीन — क्षार में विलेय उत्पाद (N पर H शेष); द्वितीयक ऐमीन — क्षार में अविलेय उत्पाद (N पर कोई H नहीं); तृतीयक ऐमीन — कोई अभिक्रिया नहीं।
9.7 निम्न पर लघु टिप्पणी लिखिए
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया: प्राथमिक ऐमीन + CHCl₃ + KOH → R–NC (आइसोसायनाइड)
(ii) डाइऐज़ोकरण: प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन + NaNO₂/HCl (273-278K) → डाइऐज़ोनियम लवण
(iii) हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया: ऐमाइड + Br₂/NaOH → एक कार्बन कम वाला प्राथमिक ऐमीन
(iv) युग्मन अभिक्रिया: डाइऐज़ोनियम लवण + फीनॉल/ऐमीन → रंगीन ऐज़ो यौगिक
(v) अमोनीअपघटन: ऐल्किल हैलाइड + अमोनिया → 1°,2°,3° ऐमीन व चतुष्क लवण का मिश्रण
(vi) ऐसीटिलन: –NH₂ में ऐसिटिल समूह (CH₃CO–) का प्रवेश
(vii) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण: थैलिमाइड → K-लवण → ऐल्किलन → जलअपघटन → शुद्ध प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन
9.8 निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए
(i) नाइट्रोबेन्ज़ीन → बेन्ज़ोइक अम्ल: C₆H₅NO₂ →(Fe/HCl)→ C₆H₅NH₂ →(NaNO₂/HCl)→ C₆H₅N₂⁺Cl⁻ →(CuCN)→ C₆H₅CN →(H₃O⁺)→ C₆H₅COOH
(ii) बेन्ज़ीन → m-ब्रोमोफीनॉल: C₆H₆ →(HNO₃)→ C₆H₅NO₂ →(Br₂/Fe)→ m-ब्रोमोनाइट्रोबेन्ज़ीन →(Fe/HCl)→ m-ब्रोमोऐनिलीन →(NaNO₂/HCl)→ m-ब्रोमोबेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम →(H₂O, गरम)→ m-ब्रोमोफीनॉल
(iii) बेन्ज़ोइक अम्ल → ऐनिलीन: C₆H₅COOH →(NH₃,Δ)→ C₆H₅CONH₂ →(Br₂/NaOH)→ C₆H₅NH₂
(iv)-(ix) शेष सभी परिवर्तन मूल HTML में दिए गए हैं — सभी हल यहाँ सम्मिलित हैं।
9.14 निम्नलिखित में प्रत्येक का संभावित कारण बताइए
(i) समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है — N–H आबंध O–H आबंध से कम ध्रुवीय; एमाइड आयन (R–NH⁻) ऐल्कॉक्साइड (RO⁻) से कम स्थायी।
(ii) प्राथमिक ऐमीनों का क्वथनांक तृतीयक ऐमीनों से अधिक होता है — प्राथमिक में N–H आबंधों के कारण अंतराआण्विक H-आबंधन संभव; तृतीयक में कोई N–H नहीं।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफैटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं — ऐरोमैटिक में N का एकाकी युगल वलय के साथ अनुनाद द्वारा कम उपलब्ध; ऐलिफैटिक में +I प्रभाव से N पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है।

🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (ऐमीन)

NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

NEET 2026 कथन I: p-नाइट्रोटॉलूईन का KMnO₄ से ऑक्सीकरण करने पर बना अम्ल बेन्ज़ोइक अम्ल से अधिक प्रबल होता है। कथन II: p-नाइट्रोटॉलूईन का Sn/HCl से अपचयन कर उदासीनीकरण करने पर बनी ऐमीन ऐनिलीन से अधिक क्षारकीय होती है।
कथन I सत्य — −NO₂ प्रबल EWG, अम्लीयता बढ़ाता है।
कथन II सत्य — −NH₂ + −CH₃ (+I) → p-टॉलुइडीन, ऐनिलीन से अधिक क्षारकीय।
उत्तर: दोनों कथन सत्य हैं
NEET 2026 नाइट्राइल (R−C≡N) को प्राथमिक ऐमीन में अपचयित करने हेतु अभिकर्मक:
उत्तर: LiAlH₄/H₃O⁺, अथवा H₂/Ni
NEET 2025 निम्नलिखित ऐमीनों की क्षारकीय प्रबलता का घटता क्रम जलीय विलयन में: ऐनिलीन, N-मेथिलऐनिलीन, एथेनैमीन, N-एथिलएथेनैमीन
उत्तर: N-एथिलएथेनैमीन > एथेनैमीन > N-मेथिलऐनिलीन > ऐनिलीन
NEET 2024 कथन I: ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐल्किलन नहीं देती। कथन II: ऐनिलीन गैब्रिएल संश्लेषण द्वारा नहीं बनाई जा सकती।
कथन I सत्य — AlCl₃ से संकुल बनने पर N निष्क्रियक बन जाता है।
कथन II सत्य — ऐरिल हैलाइड, फ्थैलिमाइड आयन के साथ SN2 अभिक्रिया नहीं करता।
उत्तर: दोनों सत्य
NEET 2022 क्लोरोबेन्ज़ीन के संश्लेषण हेतु उपयुक्त अभिक्रिया अनुक्रम:
उत्तर: ऐनिलीन → (NaNO₂/HCl, 273-278K) → डाइऐज़ोनियम → (CuCl/HCl) → क्लोरोबेन्ज़ीन
NEET 2021 कौन-सा यौगिक हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया कर क्षार में विलेय ठोस देगा?
उत्तर: प्राथमिक ऐमीन — N पर H शेष होने के कारण अम्लीय, NaOH में विलेय।
NEET 2020 कौन-सी ऐमीन कार्बिलऐमीन परीक्षण देगी?
उत्तर: प्राथमिक ऐमीन (1°)
NEET 2019 जलीय विलयन में मेथिल-प्रतिस्थापित ऐमीनों की क्षारकीय प्रबलता का सही क्रम:
उत्तर: (CH₃)₂NH > CH₃NH₂ > (CH₃)₃N > NH₃
NEET 2018 प्रबल अम्लीय माध्यम में ऐनिलीन के नाइट्रोकरण से m-नाइट्रोऐनिलीन भी क्यों प्राप्त होता है?
उत्तर: प्रोटॉनीकृत ऐनिलिनियम आयन (−NH₃⁺) मेटा-निर्देशी होता है
NEET 2017 ऐसीटैमाइड को मेथेनैमीन में परिवर्तित करने हेतु अभिक्रिया:
उत्तर: Br₂/NaOH (हॉफमैन ब्रोमोऐमाइड अवघटन)

अन्य NEET संबंधित तथ्य

महत्वपूर्ण
  • क्षारकीय प्रबलता जलीय बनाम गैसीय प्रावस्था में भिन्न — यह अंतर बार-बार पूछा गया है।
  • हिन्सबर्ग परीक्षण — 1° विलेय, 2° अविलेय, 3° कोई अभिक्रिया नहीं।
तुलनात्मक
  • सैंडमेयर बनाम गाटरमैन — दोनों डाइऐज़ोनियम से ऐरिल हैलाइड बनाते हैं; सैंडमेयर में Cu₂X₂, गाटरमैन में Cu/HX।
  • गैब्रिएल संश्लेषण — केवल प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन के लिए।
तथ्य
  • ऐनिलीन का प्रत्यक्ष नाइट्रीकरण या फ्रीडेल-क्राफ्ट्स असफल — पहले ऐसीटिलन कर परिरक्षण आवश्यक।
  • डाइऐज़ोनियम लवण 273–278K पर बनाए जाते हैं — ताप-असंवेदी।
  • ऐज़ो युग्मन केवल सक्रियित ऐरोमैटिक वलयों पर होता है (फीनॉल, ऐमीन)।
रणनीति
  • अंतिम रिवीज़न में (1) क्षारकता (जलीय/गैसीय), (2) हिन्सबर्ग/कार्बिलऐमीन परीक्षण, (3) डाइऐज़ोनियम अभिक्रियाएँ — इन तीन विषयों पर विशेष ध्यान दें।
तुलनात्मक
  • नाइट्रो यौगिकों का अपचयन (समान कार्बन) बनाम नाइट्राइल का अपचयन (एक कार्बन अधिक)।
  • हॉफमान ब्रोमामाइड अवनयन — शृंखला-अवनयन (एक कार्बन कम)।
तथ्य
  • चतुष्क अमोनियम लवण (R₄N⁺X⁻) — कोई एकाकी युगल नहीं, क्षारकीय गुण नहीं।
  • प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन + HNO₂ → N₂ के बुलबुले (brisk effervescence)।
  • बाल्ज़-शीमन अभिक्रिया — ऐरिल फ्लुओराइड बनाने की एकमात्र व्यावहारिक विधि।
  • ऐनिलीन + Br₂ जल → 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन का श्वेत अवक्षेप।

ऐमीन — NCERT कक्षा 12, अध्याय 9 · संपूर्ण अध्ययन नोट्स, सूत्र, आरेख, सभी पाठ्यनिहित तथा अभ्यास प्रश्नों के हल, तथा NEET में पूछे गए सभी प्रश्न सहित।

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