ऐमीन (Amines)
अमोनिया के कार्बनिक व्युत्पन्नों से लेकर डाइऐज़ोनियम लवणों तक — नामकरण, संरचना, विरचन विधियाँ, क्षारकता, महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ, तथ्य, तालिकाएँ, आरेख, पाठ्यनिहित प्रश्न (9.1–9.9) तथा अभ्यास प्रश्न (9.1–9.14) के विस्तृत हल — एक ही स्थान पर।
9.1 परिचय
ऐमीन, अमोनिया (NH₃) अणु से एक अथवा अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं के ऐल्किल अथवा ऐरिल समूहों द्वारा विस्थापन से प्राप्त कार्बनिक यौगिकों का एक महत्वपूर्ण वर्ग बनाती है। प्रकृति में ये प्रोटीन, विटामिन, ऐल्केलॉइड तथा हॉर्मोनों में पाई जाती हैं। संश्लेषित उदाहरणों में बहुलक, रंजक और औषध सम्मिलित हैं।
दो जैव-सक्रिय यौगिक — ऐड्रीनलिन तथा इफेड्रिन — रक्त-चाप बढ़ाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, दोनों में ही द्वितीयक ऐमीनो समूह होता है। संश्लेषित यौगिक "नोवोकेन" का उपयोग दंतचिकित्सा में निश्चेतक (anaesthetic) के रूप में होता है। प्रसिद्ध प्रतिहिस्टैमिन "बैनैड्रिल" में तृतीयक ऐमीनो समूह उपस्थित है। चतुष्क अमोनियम लवणों का प्रयोग पृष्ठसक्रियक के रूप में होता है। डाइऐज़ोनियम लवण, रंजकों सहित विभिन्न ऐरोमैटिक यौगिकों को बनाने में मध्यवर्ती होते हैं।
9.2 ऐमीनों की संरचना
अमोनिया की भाँति, ऐमीन का नाइट्रोजन परमाणु त्रिसंयोजी है एवं इस पर एक असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल है। ऐमीन में नाइट्रोजन के कक्षक sp³ संकरित होते हैं तथा ऐमीन की आकृति पिरैमिडी (pyramidal) होती है। नाइट्रोजन के तीनों sp³ संकरित कक्षकों में से प्रत्येक, ऐमीन के संगठन के अनुसार, हाइड्रोजन अथवा कार्बन के कक्षकों से अतिव्यापन करता है। सभी ऐमीनों में नाइट्रोजन के चौथे कक्षक में एक असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल स्थित रहता है।
असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल की उपस्थिति के कारण C–N–E कोण (जहाँ E = C अथवा H है) 109.5° से कम होता है — उदाहरण के लिए ट्राईमेथिलऐमीन में यह कोण 108° होता है।
9.3 ऐमीनों का वर्गीकरण
अमोनिया अणु में ऐल्किल अथवा ऐरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या के आधार पर ऐमीनों का वर्गीकरण प्राथमिक (1°), द्वितीयक (2°) तथा तृतीयक (3°) में किया जाता है।
| वर्ग | सामान्य संरचना | विवरण |
|---|---|---|
| प्राथमिक (1°) | R–NH₂ अथवा Ar–NH₂ | एक H, ऐल्किल/ऐरिल से प्रतिस्थापित |
| द्वितीयक (2°) | R–NH–R' | दो H, ऐल्किल/ऐरिल से प्रतिस्थापित |
| तृतीयक (3°) | R–N(R')–R'' | तीनों H, ऐल्किल/ऐरिल से प्रतिस्थापित |
यदि सभी ऐल्किल अथवा ऐरिल समूह समान हों तो ऐमीन को "सरल" तथा भिन्न होने पर "मिश्रित" कहते हैं।
9.4 ऐमीनों का नामकरण
9.4.1 सामान्य पद्धति
ऐलिफैटिक ऐमीन का नामकरण "ऐमीन" शब्द में पूर्वलग्न ऐल्किल लगाकर एक शब्द में किया जाता है — जैसे मेथिलऐमीन। द्वितीयक व तृतीयक ऐमीनों में जब दो अथवा अधिक समूह समान होते हैं तब ऐल्किल समूह के नाम से पहले पूर्वलग्न "डाइ" अथवा "ट्राइ" का प्रयोग किया जाता है।
9.4.2 IUPAC पद्धति
IUPAC पद्धति में ऐमीनों का नामकरण ऐल्केनऐमीन के रूप में होता है — संगत ऐल्केन के नाम के अंत में "ऐमीन" प्रत्यय जोड़ा जाता है (जैसे CH₃NH₂ का नाम मेथेनैमीन है)।
द्वितीयक तथा तृतीयक ऐमीन में N को छोटे ऐल्किल समूह के साथ जोड़कर विस्थापक के रूप में प्रयुक्त करते हैं — उदाहरणार्थ CH₃NHCH₂CH₃ का नाम N-मेथिलएथेनामीन है।
ऐरिल ऐमीनों में –NH₂ समूह बेन्ज़ीन वलय से सीधे जुड़ा रहता है — सरलतम उदाहरण C₆H₅NH₂ है, जिसे सामान्य पद्धति में ऐनिलीन कहते हैं (यह IUPAC पद्धति में भी स्वीकार्य नाम है)।
| ऐमीन | सामान्य नाम | IUPAC नाम |
|---|---|---|
| CH₃CH₂NH₂ | एथिलऐमीन | एथेनैमीन |
| CH₃CH₂CH₂NH₂ | n-प्रोपिलऐमीन | प्रोपेन-1-ऐमीन |
| (CH₃)₂CHNH₂ | iso-प्रोपिलऐमीन | प्रोपेन-2-ऐमीन |
| CH₃NHCH₂CH₃ | एथिलमेथिलऐमीन | N-मेथिलएथेनैमीन |
| (CH₃)₃N | ट्राईमेथिलऐमीन | N,N-डाइमेथिलमेथेनैमीन |
| C₆H₅NH₂ | ऐनिलीन | ऐनिलीन अथवा बेन्ज़ीनऐमीन |
| o-CH₃-C₆H₄-NH₂ | o-टॉलूडीन | 2-मेथिलऐनीलीन |
| p-Br-C₆H₄-NH₂ | p-ब्रोमोऐनिलीन | 4-ब्रोमोबेन्ज़ीनऐमीन |
9.5 ऐमीनों का विरचन
1. नाइट्रो यौगिकों का अपचयन — नाइट्रो यौगिक सूक्ष्म विभाजित निकैल, पैलेडियम अथवा प्लैटिनम की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस प्रवाहित करने से ऐमीनों में अपचित हो जाते हैं। अम्लीय माध्यम में धातुओं द्वारा भी अपचयन हो सकता है। रद्दी लोहे व हाइड्रोक्लोरिक अम्ल द्वारा अपचयन को वरीयता दी जाती है।
2. ऐल्किल हैलाइडों का अमोनीअपघटन (Ammonolysis) — ऐल्किल/बेन्ज़िल हैलाइड, अमोनिया के एथेनॉलिक विलयन से नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं — यह अभिक्रिया 373 K पर सील बंद नालिका में कराई जाती है।
3. नाइट्राइलों का अपचयन — नाइट्राइल LiAlH₄ अथवा उत्प्रेरकी हाइड्रोजनन द्वारा अपचित होकर प्राथमिक ऐमीन बनाते हैं (शृंखला आरोहण)।
4. ऐमाइडों का अपचयन — ऐमाइड LiAlH₄ द्वारा अपचित होकर ऐमीन देते हैं (R–CONH₂ → R–CH₂–NH₂)।
5. गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण — इसका प्रयोग केवल प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीनों के विरचन के लिए होता है। ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन इस विधि से नहीं बनाई जा सकतीं क्योंकि ऐरिल हैलाइड, थैलिमाइड से प्राप्त ऋणायन के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन नहीं कर सकते।
6. हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया — किसी ऐमाइड की NaOH के जलीय अथवा एथेनॉलिक विलयन में ब्रोमीन से अभिक्रिया कराई जाती है। प्राप्त ऐमीन में ऐमाइड से एक कार्बन कम होता है।
- गैब्रिएल संश्लेषण शुद्ध, अपमिश्रण-रहित प्राथमिक ऐमीन देता है — केवल ऐलिफैटिक के लिए उपयुक्त।
- हॉफमान निम्नीकरण में उत्पाद ऐमीन, मूल ऐमाइड से एक कार्बन कम होता है (श्रेणी अवरोहण)।
- नाइट्राइल अपचयन (LiAlH₄) से ऐमीन श्रेणी का आरोहण होता है (एक कार्बन अधिक)।
- अमोनीअपघटन विधि से 1°, 2°, 3° ऐमीन तथा चतुष्क लवण का मिश्रण प्राप्त होता है।
9.6 ऐमीनों के भौतिक गुणधर्म
निम्नतर ऐलिफैटिक ऐमीन मत्स्य गंध वाली गैसें हैं। तीन अथवा अधिक कार्बन परमाणु वाली प्राथमिक ऐमीन द्रव तथा इससे उच्चतर ऐमीन ठोस हैं। ऐनिलीन तथा अन्य ऐरिलऐमीन प्रायः रंगहीन होती हैं, परंतु भंडारण के दौरान वायुमंडलीय ऑक्सीकरण से रंगीन हो जाती हैं।
निम्नतर ऐलिफैटिक ऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध बना सकने के कारण जल में विलेय होती हैं; अणुभार में वृद्धि के साथ जलविरागी भाग बढ़ जाने से विलेयता घटती है। ऐमीन कार्बनिक विलायकों — ऐल्कोहॉल, ईथर, बेन्ज़ीन — में विलेय होती हैं।
| यौगिक | अणु द्रव्यमान | क्वथनांक (K) |
|---|---|---|
| n-C₄H₉NH₂ (1°) | 73 | 350.8 |
| (C₂H₅)₂NH (2°) | 73 | 329.3 |
| C₂H₅N(CH₃)₂ (3°) | 73 | 310.5 |
| n-C₄H₉OH (ऐल्कोहॉल) | 74 | 390.3 |
- क्वथनांक क्रम: ऐल्कोहॉल > प्राथमिक ऐमीन > द्वितीयक ऐमीन > तृतीयक ऐमीन ≈ ऐल्केन (समतुल्य द्रव्यमान पर)।
- ऐमीन की नाइट्रोजन (विद्युत्ऋणात्मकता 3.0) ऐल्कोहॉल की ऑक्सीजन (3.5) से कम विद्युत्ऋणी होने के कारण ऐमीन में ऐल्कोहॉल से दुर्बल हाइड्रोजन आबंध बनते हैं।
9.7 ऐमीनों का क्षारकीय गुण
नाइट्रोजन परमाणु पर असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल की उपस्थिति के कारण ऐमीन लूईस क्षारक की भाँति व्यवहार करती है और अम्लों से अभिक्रिया कर लवण बनाती है।
Kb = [R–NH₃⁺][OH⁻] / [R–NH₂]
pKb = −log Kb
| ऐमीन का नाम | pKb (जलीय) |
|---|---|
| मेथेनैमीन | 3.38 |
| N,N-डाइमेथिलमेथेनैमीन | 4.22 |
| एथेनैमीन | 3.29 |
| N,N-डाइएथिलएथेनैमीन | 3.25 |
| बेन्ज़ीनऐमीन (ऐनिलीन) | 9.38 |
| फेनिलमेथेनैमीन | 4.70 |
| N-मेथिलऐनिलीन | 9.30 |
| N,N-डाइमेथिलऐनिलीन | 8.92 |
ऐलिफैटिक ऐमीन, नाइट्रोजन परमाणु पर ऐल्किल समूहों के +I प्रभाव के कारण अमोनिया से प्रबल क्षारक होते हैं। ऐरोमैटिक ऐमीन, ऐरिल समूह की इलेक्ट्रॉन-खींचने की प्रवृत्ति के कारण अमोनिया से दुर्बल क्षारक होते हैं।
9.8 संरचना तथा क्षारकता में संबंध
ऐमीन का क्षारीय गुण अम्ल से प्रोटॉन ग्रहण कर धनायन बनाने की सहजता पर निर्भर करता है — ऐमीन की तुलना में धनायन जितना अधिक स्थायी होता है, ऐमीन उतनी ही अधिक क्षारकीय होती है।
8.1 ऐल्केनैमीन बनाम अमोनिया
ऐल्किल समूह के +I प्रभाव से नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है। गैसीय प्रावस्था में क्षारकता क्रम: तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक > अमोनिया।
जलीय प्रावस्था में विलायकयोजन (solvation) व त्रिविम बाधा (steric hindrance) के कारण क्रम बदल जाता है: द्वितीयक > प्राथमिक > तृतीयक > अमोनिया (एथिल-प्रतिस्थापित के लिए)।
जलीय विलयन में क्षारकीय प्राबल्य का क्रम:
(C₂H₅)₂NH > C₂H₅NH₂ > (C₂H₅)₃N > NH₃ (एथिल-प्रतिस्थापित)
(CH₃)₂NH > CH₃NH₂ > (CH₃)₃N > NH₃ (मेथिल-प्रतिस्थापित)
8.2 ऐरिलऐमीन बनाम अमोनिया
ऐनिलीन (pKb = 9.38) अमोनिया से बहुत दुर्बल क्षारक है। इसका कारण है कि –NH₂ समूह सीधे बेन्ज़ीन वलय से जुड़ा होता है, जिससे नाइट्रोजन परमाणु पर उपस्थित असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल, बेन्ज़ीन वलय के साथ संयुग्मन (conjugation) के कारण प्रोटॉनन के लिए कम उपलब्ध होता है।
ऐनिलीन पाँच अनुनादी संरचनाओं का संकर होती है, जबकि प्रोटॉन ग्रहण से परिणित ऐनिलीनियम धनायन की केवल दो अनुनाद संरचनाएँ होती हैं — अतः ऐनिलीन अधिक स्थायी है, इसीलिए इसकी क्षारकता कम है।
9.9 ऐल्किलन, ऐसिलन व अन्य अभिक्रियाएँ
9.9.1 ऐल्किलन
ऐमीन ऐल्किल हैलाइडों के साथ ऐल्किलन अभिक्रिया देती हैं, जिससे क्रमशः उच्चतर ऐमीन तथा अंततः चतुष्क अमोनियम लवण प्राप्त होते हैं।
9.9.2 ऐसिलन
ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक एवं द्वितीयक ऐमीन, ऐसिड क्लोराइड, एनहाइड्राइड और एस्टर से नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया करते हैं — इसे ऐसिलन कहते हैं।
9.9.3 कार्बिलऐमीन अभिक्रिया
ऐलिफैटिक तथा ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन, क्लोरोफ़ॉर्म और एथेनॉलिक पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गरम करने पर दुर्गंधयुक्त पदार्थ आइसोसायनाइड अथवा कार्बिलऐमीन का विरचन करती हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन यह अभिक्रिया नहीं दर्शातीं।
9.9.4 नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया
| ऐमीन का वर्ग | उत्पाद | विशेष टिप्पणी |
|---|---|---|
| प्राथमिक ऐलिफैटिक | ऐल्कोहॉल + N₂ | अस्थायी डाइऐज़ोनियम लवण |
| प्राथमिक ऐरोमैटिक | डाइऐज़ोनियम लवण | 273–278K पर स्थायी |
| द्वितीयक | N-नाइट्रोसो ऐमीन | पीला तेल/ठोस |
| तृतीयक | अस्थायी नाइट्राइट लवण | कोई स्थायी उत्पाद नहीं |
9.9.5 हिन्सबर्ग परीक्षण
| ऐमीन का वर्ग | उत्पाद | N पर H | क्षार में विलेयता |
|---|---|---|---|
| प्राथमिक | N-ऐल्किलबेन्ज़ीनसल्फोनैमाइड | है | विलेय |
| द्वितीयक | N,N-डाइऐल्किलबेन्ज़ीनसल्फोनैमाइड | नहीं | अविलेय |
| तृतीयक | कोई अभिक्रिया नहीं | — | — |
9.10 इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ
–NH₂ समूह ऑर्थो-पैरा निर्देशक एवं शक्तिशाली सक्रियक समूह है। ऐनिलीन कक्ष ताप पर ब्रोमीन जल से अभिक्रिया करके 2,4,6-ट्राईब्रोमोऐनिलीन का श्वेत अवक्षेप देती है।
यदि एकल प्रतिस्थापी व्युत्पन्न चाहिए, तो पहले –NH₂ समूह को ऐसीटिक एनहाइड्राइड द्वारा ऐसीटिलन से परिरक्षित किया जाता है।
9.11 डाइऐज़ोनियम लवणों का विरचन
डाइऐज़ोनियम लवणों का सामान्य सूत्र R–N₂⁺X⁻ होता है, जहाँ R एक ऐरिल समूह है तथा X⁻ आयन Cl⁻, Br⁻, HSO₄⁻, BF₄⁻ आदि में से कोई भी हो सकता है।
बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड को ऐनिलीन एवं नाइट्रस अम्ल की अभिक्रिया द्वारा 273–278K ताप पर बनाया जाता है।
9.12 डाइऐज़ोनियम लवणों के भौतिक गुण
बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड एक रंगहीन क्रिस्टलीय ठोस है — यह जल में विलेय तथा ठंडे में स्थायी है, किंतु गरम करने पर जल से अभिक्रिया करता है और ठोस अवस्था में आसानी से विघटित हो जाता है।
बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम फ्लुओरोबोरेट जल में अविलेय तथा कक्ष ताप पर स्थायी होता है — भंडारण योग्य और Balz-Schiemann अभिक्रिया में उपयोगी।
9.13 नाइट्रोजन प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ
| अभिक्रिया का नाम | अभिकर्मक | प्राप्त उत्पाद |
|---|---|---|
| सैंडमायर अभिक्रिया | Cu₂Cl₂/HCl, Cu₂Br₂/HBr, CuCN/KCN | ArCl, ArBr, ArCN |
| गाटरमान अभिक्रिया | ताम्रचूर्ण + संगत हैलोजन अम्ल | ArCl, ArBr |
| आयोडाइड प्रतिस्थापन | KI | ArI |
| फ्लुओराइड प्रतिस्थापन | HBF₄, फिर Δ | ArF (Balz-Schiemann) |
| H द्वारा प्रतिस्थापन | H₃PO₂/H₂O अथवा C₂H₅OH | ArH |
| हाइड्रॉक्सिल प्रतिस्थापन | H₂O, गरम (283K) | ArOH |
| –NO₂ द्वारा प्रतिस्थापन | NaNO₂/Cu, Δ | ArNO₂ |
- गाटरमान अभिक्रिया की तुलना में सैंडमायर अभिक्रिया की लब्धि अधिक होती है।
- आयोडीन को सीधे बेन्ज़ीन वलय में सरलता से नहीं जोड़ा जा सकता — डाइऐज़ोनियम मार्ग से ही आयोडोबेन्ज़ीन आसानी से बनती है।
- ऐरिल फ्लुओराइड व आयोडाइड को सीधे हैलोजनन द्वारा नहीं बनाया जा सकता — डाइऐज़ोनियम मार्ग ही उपयुक्त है।
9.14 युग्मन अभिक्रियाएँ
युग्मन अभिक्रिया से प्राप्त ऐज़ो उत्पादों में दोनों ऐरोमैटिक वलयों एवं –N=N– आबंध के बीच विस्तारित संयुग्मन होता है। ये यौगिक प्रायः रंगीन होते हैं तथा रंजकों की तरह प्रयोग में आते हैं।
9.15 ऐरोमैटिक संश्लेषण में डाइऐज़ोलवणों का महत्व
डाइऐज़ोनियम लवण बेन्ज़ीन वलय में –F, –Cl, –Br, –I, –CN, –OH, –NO₂ आदि समूहों के प्रवेश के लिए उत्तम माध्यमिक हैं।
ऐरिल फ्लुओराइड एवं आयोडाइड को सीधे हैलोजनन द्वारा नहीं बनाया जा सकता; क्लोरोबेन्ज़ीन में क्लोरीन के नाभिकरागी प्रतिस्थापन द्वारा सायनाइड समूह का प्रवेश नहीं कराया जा सकता, किंतु डाइऐज़ोनियम लवण से सायनोबेन्ज़ीन को सरलता से बनाया जा सकता है।
9.16 पूरे अध्याय के महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य
- ऐमीन में N sp³ संकरित है; आकृति पिरैमिडी है; बंध कोण 109.5° से कम।
- वर्गीकरण: 1° (R-NH₂), 2° (R-NH-R'), 3° (R₃N) — प्रतिस्थापित H परमाणुओं की संख्या के आधार पर।
- IUPAC नाम में "-ऐमीन" अनुलग्न; ऐनिलीन (C₆H₅NH₂) दोनों पद्धतियों में स्वीकार्य है।
- गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण — केवल शुद्ध प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन देता है, ऐरोमैटिक के लिए अनुपयुक्त।
- हॉफमान ब्रोमामाइड निम्नीकरण — ऐमाइड से एक कार्बन कम वाला प्राथमिक ऐमीन देता है।
- नाइट्राइल अपचयन (LiAlH₄) — ऐमीन शृंखला का आरोहण (एक कार्बन अधिक)।
- अमोनीअपघटन — 1°, 2°, 3° ऐमीन व चतुष्क लवण का मिश्रण देता है।
- क्वथनांक क्रम: प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक ऐमीन (अंतराआण्विक H-आबंधन के कारण)।
- गैसीय क्षारकता: 3° > 2° > 1° > NH₃; जलीय: विलायकयोजन व त्रिविम बाधा के कारण क्रम बदल जाता है।
- ऐनिलीन अमोनिया से दुर्बल क्षारक है — N का एकाकी युगल वलय के साथ संयुग्मित (5 अनुनादी संरचनाएँ)।
- ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देती — AlCl₃ से लवण बनने पर N निष्क्रियक बन जाता है।
- कार्बिलऐमीन परीक्षण — केवल प्राथमिक ऐमीन (CHCl₃/KOH से दुर्गंधयुक्त आइसोसायनाइड)।
- हिन्सबर्ग परीक्षण (C₆H₅SO₂Cl) — 1° विलेय, 2° अविलेय, 3° कोई अभिक्रिया नहीं।
- प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन + HNO₂ → ऐल्कोहॉल + N₂; प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन + HNO₂ (273-278K) → डाइऐज़ोनियम लवण।
- सैंडमायर अभिक्रिया की लब्धि गाटरमान अभिक्रिया से अधिक होती है।
- युग्मन अभिक्रिया से रंगीन ऐज़ो यौगिक (रंजक) प्राप्त होते हैं।
पाठ्यनिहित प्रश्न (9.1 – 9.9) — विस्तृत हल
प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके हल देखें।
9.1 निम्नलिखित ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए — (i) 1-नैफ्थिलऐमीन (ii) N,N-डाइमेथिल-2-नैफ्थिलऐमीन (iii) (C₂H₅)₂CHNH₂ (iv) (C₂H₅)₂NH
9.2 (i) अणु सूत्र C₄H₁₁N से प्राप्त विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना लिखिए। (ii) सभी समावयवों के IUPAC नाम लिखिए। (iii) विभिन्न युग्मों द्वारा कौन से प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है?
9.3 आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे? (i) बेन्ज़ीन से ऐनिलीन (ii) बेन्ज़ीन से N,N-डाइमेथिलऐनिलीन (iii) Cl-(CH₂)₄-Cl से हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन
9.4 निम्नलिखित को बढ़ते हुए क्षारकीय प्रबलता के क्रम में लिखिए
9.5 निम्नलिखित अम्ल-क्षारक अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए — (i) CH₃CH₂CH₂NH₂ + HCl → (ii) (C₂H₅)₃N + HCl →
9.6 सोडियम कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में मेथिल आयोडाइड के आधिक्य द्वारा ऐनिलीन के ऐल्किलन में उत्पन्न होने वाले उत्पादों के लिए अभिक्रिया लिखिए
9.7 ऐनिलीन की बेन्ज़ॉयल क्लोराइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न उत्पादों के नाम लिखिए
9.8 अणुसूत्र C₃H₉N से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिए। उन समावयवों के IUPAC नाम लिखिए जो नाइट्रस अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं
9.9 निम्नलिखित परिवर्तन कीजिए — (i) 3-मेथिलऐनिलीन से 3-नाइट्रोटॉलूईन (ii) ऐनिलीन से 1,3,5-ट्राइब्रोमोबेन्ज़ीन
अध्याय अभ्यास (9.1 – 9.14) — विस्तृत हल
NCERT पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।
9.1 निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए तथा इनके IUPAC नाम लिखिए
9.2 निम्नलिखित युगलों के यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए
9.3 निम्नलिखित के कारण बताइए
9.4 निम्नलिखित को क्रम में लिखिए
9.5 इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे?
9.6 प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए
9.7 निम्न पर लघु टिप्पणी लिखिए
9.8 निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए
9.14 निम्नलिखित में प्रत्येक का संभावित कारण बताइए
🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (ऐमीन)
NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, हल सहित।
NEET 2026 कथन I: p-नाइट्रोटॉलूईन का KMnO₄ से ऑक्सीकरण करने पर बना अम्ल बेन्ज़ोइक अम्ल से अधिक प्रबल होता है। कथन II: p-नाइट्रोटॉलूईन का Sn/HCl से अपचयन कर उदासीनीकरण करने पर बनी ऐमीन ऐनिलीन से अधिक क्षारकीय होती है।
NEET 2026 नाइट्राइल (R−C≡N) को प्राथमिक ऐमीन में अपचयित करने हेतु अभिकर्मक:
NEET 2025 निम्नलिखित ऐमीनों की क्षारकीय प्रबलता का घटता क्रम जलीय विलयन में: ऐनिलीन, N-मेथिलऐनिलीन, एथेनैमीन, N-एथिलएथेनैमीन
NEET 2024 कथन I: ऐनिलीन फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐल्किलन नहीं देती। कथन II: ऐनिलीन गैब्रिएल संश्लेषण द्वारा नहीं बनाई जा सकती।
NEET 2022 क्लोरोबेन्ज़ीन के संश्लेषण हेतु उपयुक्त अभिक्रिया अनुक्रम:
NEET 2021 कौन-सा यौगिक हिन्सबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया कर क्षार में विलेय ठोस देगा?
NEET 2020 कौन-सी ऐमीन कार्बिलऐमीन परीक्षण देगी?
NEET 2019 जलीय विलयन में मेथिल-प्रतिस्थापित ऐमीनों की क्षारकीय प्रबलता का सही क्रम:
NEET 2018 प्रबल अम्लीय माध्यम में ऐनिलीन के नाइट्रोकरण से m-नाइट्रोऐनिलीन भी क्यों प्राप्त होता है?
NEET 2017 ऐसीटैमाइड को मेथेनैमीन में परिवर्तित करने हेतु अभिक्रिया:
✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य
- क्षारकीय प्रबलता जलीय बनाम गैसीय प्रावस्था में भिन्न — यह अंतर बार-बार पूछा गया है।
- हिन्सबर्ग परीक्षण — 1° विलेय, 2° अविलेय, 3° कोई अभिक्रिया नहीं।
- सैंडमेयर बनाम गाटरमैन — दोनों डाइऐज़ोनियम से ऐरिल हैलाइड बनाते हैं; सैंडमेयर में Cu₂X₂, गाटरमैन में Cu/HX।
- गैब्रिएल संश्लेषण — केवल प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन के लिए।
- ऐनिलीन का प्रत्यक्ष नाइट्रीकरण या फ्रीडेल-क्राफ्ट्स असफल — पहले ऐसीटिलन कर परिरक्षण आवश्यक।
- डाइऐज़ोनियम लवण 273–278K पर बनाए जाते हैं — ताप-असंवेदी।
- ऐज़ो युग्मन केवल सक्रियित ऐरोमैटिक वलयों पर होता है (फीनॉल, ऐमीन)।
- अंतिम रिवीज़न में (1) क्षारकता (जलीय/गैसीय), (2) हिन्सबर्ग/कार्बिलऐमीन परीक्षण, (3) डाइऐज़ोनियम अभिक्रियाएँ — इन तीन विषयों पर विशेष ध्यान दें।
- नाइट्रो यौगिकों का अपचयन (समान कार्बन) बनाम नाइट्राइल का अपचयन (एक कार्बन अधिक)।
- हॉफमान ब्रोमामाइड अवनयन — शृंखला-अवनयन (एक कार्बन कम)।
- चतुष्क अमोनियम लवण (R₄N⁺X⁻) — कोई एकाकी युगल नहीं, क्षारकीय गुण नहीं।
- प्राथमिक ऐलिफैटिक ऐमीन + HNO₂ → N₂ के बुलबुले (brisk effervescence)।
- बाल्ज़-शीमन अभिक्रिया — ऐरिल फ्लुओराइड बनाने की एकमात्र व्यावहारिक विधि।
- ऐनिलीन + Br₂ जल → 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलीन का श्वेत अवक्षेप।