ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 8)
रसायन विज्ञान • कक्षा-12 • अध्याय 8

ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल

कार्बोनिल रसायन की नींव — नामकरण, संरचना, विरचन विधियाँ, अभिक्रियाशीलता, महत्वपूर्ण अभिक्रियाएँ, तथ्य, तालिकाएँ, आरेख, पाठ्यनिहित प्रश्न (8.1–8.8) तथा अभ्यास प्रश्न (8.1–8.20) के विस्तृत हल — एक ही स्थान पर।

R–CHO ऐल्डिहाइड
R–CO–R′ कीटोन
R–COOH कार्बोक्सिलिक अम्ल
★ NEET फोकस तथ्य
अवधारणा

8.1 परिचय

कार्बनिक रसायन में कार्बोनिल समूह (>C=O) से युक्त यौगिकों का बहुत बड़ा महत्व है। यह समूह वस्त्र उद्योग, सुगंध-निर्माण, प्लास्टिक और औषध-उद्योग जैसे अनेक क्षेत्रों में प्रयुक्त होने वाले यौगिकों का प्रकार्यात्मक केंद्र है। जब कार्बन-ऑक्सीजन द्विआबंध वाला यह समूह किसी अणु में उपस्थित होता है, तो अणु के गुणधर्म — ध्रुवता, क्वथनांक, अभिक्रियाशीलता — सब कुछ इसी समूह से नियंत्रित होते हैं।

इस एकक में तीन निकट-संबंधी वर्गों का अध्ययन किया जाता है — ऐल्डिहाइड (जिनमें कार्बोनिल कार्बन, हाइड्रोजन तथा कार्बन/हाइड्रोजन से जुड़ा रहता है), कीटोन (जिनमें कार्बोनिल कार्बन दो कार्बन परमाणुओं से जुड़ा रहता है) और कार्बोक्सिलिक अम्ल (जिनमें कार्बोनिल कार्बन एक हाइड्रॉक्सिल समूह से भी जुड़ा रहता है)।

याद रखने की तरकीब: "एक कार्बोनिल कार्बन पर जो भी तीसरा समूह जुड़ा है, वही यौगिक की श्रेणी तय करता है" — H/C = ऐल्डिहाइड-कीटोन परिवार, OH = अम्ल, NH₂ = ऐमाइड, हैलोजन = अम्ल हैलाइड, OR = एस्टर।
वर्गीकरण

8.2 कार्बोनिल-परिवार के सामान्य सूत्र

नीचे दिए गए सामान्य सूत्रों से यह स्पष्ट है कि कार्बोनिल कार्बन (>C=O) पर जुड़े तीसरे परमाणु/समूह के बदलने भर से पूरी यौगिक-श्रेणी बदल जाती है।

O R H C ऐल्डिहाइड O R R' C कीटोन O R OH C कार्बोक्सिलिक अम्ल O R NH₂ C ऐमाइड O R X C ऐसिल हैलाइड (X=हैलोजन) O R OR' C एस्टर R–C(=O)–O–C(=O)–R' अम्ल एनहाइड्राइड
चित्र: कार्बोनिल-परिवार के छह प्रमुख वर्गों के सामान्य सूत्र
वर्गतीसरा समूह (R के अतिरिक्त)सामान्य सूत्र
ऐल्डिहाइडHR–CHO
कीटोनR' (कार्बन)R–CO–R'
कार्बोक्सिलिक अम्लOHR–COOH
ऐमाइडNH₂R–CONH₂
ऐसिल हैलाइडX (हैलोजन)R–COX
एस्टरOR'R–COOR'

प्राकृतिक स्रोत: वेनेलिन (बेनीला सेम), सैलिसिल ऐल्डिहाइड (मेडोस्वीट) तथा सिनैमैल्डिहाइड (दालचीनी) — ये तीनों प्राकृतिक ऐल्डिहाइड अपनी विशिष्ट रुचिकर सुगंध के लिए जाने जाते हैं।

नामपद्धति

8.3 ऐल्डिहाइड व कीटोन का नामकरण

8.3.1 सामान्य नाम

ऐल्डिहाइड प्रायः IUPAC नामों की तुलना में अपने पारंपरिक सामान्य नामों से अधिक जाने जाते हैं। ये नाम संगत कार्बोक्सिलिक अम्ल के अंग्रेज़ी सामान्य नाम में अंत के "-ic" के स्थान पर "-aldehyde" जोड़कर बनाए जाते हैं — जैसे फॉर्मिक अम्ल → फॉर्मेल्डिहाइड, ऐसीटिक अम्ल → ऐसीटैल्डिहाइड।

कीटोन के सामान्य नाम कार्बोनिल कार्बन से जुड़े दोनों ऐल्किल/ऐरिल समूहों के नाम लिखकर तथा अंत में "कीटोन" शब्द जोड़कर बनाए जाते हैं (जैसे मेथिल एथिल कीटोन)।

8.3.2 IUPAC नामकरण

खुली शृंखला वाले ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइड व कीटोन के IUPAC नाम प्राप्त करने के लिए संगत ऐल्केन के नाम के अंत में स्थित "-e" के स्थान पर क्रमशः "-al" (ऐल्डिहाइड हेतु) तथा "-one" (कीटोन हेतु) अनुलग्न लगाया जाता है।

अंकन के नियम
  • ऐल्डिहाइड में शृंखला का अंकन उस सिरे से शुरू होता है जहाँ –CHO समूह स्थित है (उसे कार्बन संख्या 1 मिलती है)।
  • कीटोन में अंकन उस सिरे से किया जाता है जो कार्बोनिल समूह के निकटतम हो।
  • चक्रीय कीटोन में कार्बोनिल कार्बन को सदैव संख्या 1 दी जाती है।
  • जब –CHO समूह किसी वलय से सीधे जुड़ा हो, तो "कार्बैल्डिहाइड" अनुलग्न जोड़ा जाता है।
  • सरलतम ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड का IUPAC नाम बेन्ज़ीनकार्बैल्डिहाइड है; सामान्य नाम बेन्ज़ैल्डिहाइड भी स्वीकृत है।
संरचनासामान्य नामIUPAC नाम
HCHOफॉर्मेल्डिहाइडमेथेनैल
CH₃CHOऐसीटैल्डिहाइडएथेनैल
(CH₃)₂CHCHOआइसोब्यूटिरैल्डिहाइड2-मेथिलप्रोपेनैल
CH₃CH₂CH₂CH₂CHOवैलेरैल्डिहाइडपेन्टेनैल
CH₂=CHCHOऐक्रोलीनप्रोप-2-ईनैल
C₆H₅CHOबेन्ज़ैल्डिहाइडबेन्ज़ीनकार्बैल्डिहाइड
CH₃COCH₂CH₂CH₃मेथिल-n-प्रोपिल कीटोनपेन्टेन-2-ऑन
(CH₃)₂CHCOCH(CH₃)₂डाईआइसोप्रोपिल कीटोन2,4-डाईमेथिलपेन्टेन-3-ऑन
CH₃COCH₃ऐसीटोनप्रोपेनोन
संरचना

8.4 कार्बोनिल समूह की संरचना

कार्बोनिल समूह में कार्बन परमाणु sp² संकरित अवस्था में रहता है तथा तीन सिग्मा (σ) आबंध बनाता है — एक R समूह से, एक H/R' से तथा एक ऑक्सीजन से। कार्बन का चौथा संयोजकता इलेक्ट्रॉन असंकरित p-कक्षक में रहकर ऑक्सीजन के p-कक्षक से अतिव्यापन करता है और π आबंध बनाता है। ऑक्सीजन पर दो अबंधी इलेक्ट्रॉन युग्म भी उपस्थित रहते हैं।

इस प्रकार कार्बोनिल कार्बन तथा उससे जुड़े तीनों परमाणु एक ही समतल में होते हैं, तथा π इलेक्ट्रॉन अभ्र इस समतल के ऊपर व नीचे फैला रहता है। आबंध कोण लगभग 120° का होता है।

sp² C O R H/R' अनुनाद संरचनाएँ: R₂C=O ↔ R₂C⁺–O⁻ (उदासीन) (द्विध्रुव) आबंध कोण ≈ 120°, सभी परमाणु एक ही समतल में स्थित
चित्र: कार्बोनिल समूह निर्माण का क्षीय आरेख तथा अनुनाद संरचनाएँ
त्वरित तथ्य
  • कार्बोनिल कार्बन: sp² संकरण, बंध कोण ≈ 120°।
  • C=O बंध, C–C बंध से अधिक ध्रुवीय होता है क्योंकि O की विद्युत्ऋणात्मकता अधिक है।
  • कार्बोनिल कार्बन इलेक्ट्रॉनरागी, कार्बोनिल ऑक्सीजन न्यूक्लियोफिलिक केंद्र है।
संश्लेषण

8.5 ऐल्डिहाइड एवं कीटोन के विरचन की विधियाँ

8.5.1 सामान्य विधियाँ (दोनों वर्गों के लिए)

(i) ऐल्कोहॉलों के ऑक्सीकरण से — प्राथमिक ऐल्कोहॉल का नियंत्रित ऑक्सीकरण ऐल्डिहाइड देता है तथा द्वितीयक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण कीटोन देता है (PCC जैसे मृदु ऑक्सीकारक इसके लिए उपयुक्त हैं)।

(ii) ऐल्कोहॉलों के विहाइड्रोजनन से — वाष्पशील ऐल्कोहॉल के वाष्प को गरम ताँबे/चाँदी उत्प्रेरक के ऊपर से प्रवाहित करने पर प्राथमिक ऐल्कोहॉल ऐल्डिहाइड में तथा द्वितीयक ऐल्कोहॉल कीटोन में परिवर्तित हो जाता है।

(iii) ऐल्कीनों के ओज़ोनी अपघटन से — ऐल्कीन पहले ओज़ोन के साथ ओज़ोनाइड बनाती है, जिसे Zn/H₂O के साथ अपघटित करने पर ऐल्डिहाइड, कीटोन अथवा दोनों का मिश्रण प्राप्त होता है।

(iv) ऐल्काइनों के जलयोजन से — H₂SO₄ व HgSO₄ की उपस्थिति में एथाइन के जलयोजन से ऐसीटैल्डिहाइड मिलता है; अन्य ऐल्काइनें कीटोन देती हैं।

8.5.2 केवल ऐल्डिहाइड के विरचन की विशेष विधियाँ

विधिअभिकर्मक/परिस्थितिविशेष नाम
ऐसिल क्लोराइड का चयनात्मक अपचयनH₂ / Pd–BaSO₄रोज़ेनमुंड अपचयन
नाइट्राइल का अपचयनSnCl₂ + HCl, फिर जलअपघटनस्टीफेन अभिक्रिया
नाइट्राइल/एस्टर का चयनात्मक अपचयनDIBAL-H, फिर H₂O
टॉलूईन का ऑक्सीकरण (नियंत्रित)CrO₂Cl₂ / CS₂ईटार्ड अभिक्रिया
बेन्ज़ीन/व्युत्पन्न का फॉर्मिलीकरणCO + HCl, निर्जल AlCl₃/CuClगाटरमान-कॉख अभिक्रिया
रोज़ेनमुंड अपचयन में Pd-BaSO₄ उत्प्रेरक को आंशिक रूप से विषाक्त किया जाता है, जिससे अभिक्रिया ऐल्डिहाइड स्तर पर ही रुक जाती है।

8.5.3 केवल कीटोन के विरचन की विशेष विधियाँ

(i) ऐसिल क्लोराइड से — ग्रीन्यार अभिकर्मक व कैडमियम क्लोराइड से डाईऐल्किलकैडमियम बनता है, जो ऐसिल क्लोराइड से अभिक्रिया कर कीटोन देता है।

(ii) नाइट्राइल से — नाइट्राइल व ग्रीन्यार अभिकर्मक की क्रिया से प्राप्त इमीनियम मध्यवर्ती के जलअपघटन से कीटोन प्राप्त होते हैं।

(iii) बेन्ज़ीन/प्रतिस्थापित बेन्ज़ीन से — निर्जल AlCl₃ की उपस्थिति में बेन्ज़ीन, अम्ल क्लोराइड के साथ क्रिया कर संगत ऐरोमैटिक कीटोन देता है — फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण

त्वरित तथ्य
  • रोज़ेनमुंड अपचयन: ऐसिल क्लोराइड + H₂/Pd–BaSO₄ → ऐल्डिहाइड।
  • स्टीफेन अभिक्रिया: नाइट्राइल + SnCl₂/HCl → ऐल्डिहाइड।
  • ईटार्ड अभिक्रिया: टॉलूईन + CrO₂Cl₂ → बेन्ज़ैल्डिहाइड।
  • गाटरमान-कॉख अभिक्रिया: बेन्ज़ीन + CO + HCl (AlCl₃/CuCl) → बेन्ज़ैल्डिहाइड।
  • फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण से ऐरोमैटिक कीटोन बनते हैं।
भौतिक गुणधर्म

8.6 ऐल्डिहाइड व कीटोन के भौतिक गुण

कक्ष ताप पर मेथेनैल गैस, एथेनैल वाष्पशील द्रव है। शेष ऐल्डिहाइड व कीटोन सामान्यतः द्रव या ठोस होते हैं। इनके क्वथनांक समतुल्य आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों व ईथरों से अधिक होते हैं, क्योंकि कार्बोनिल समूह की ध्रुवता के कारण द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल कार्य करते हैं। किंतु ये क्वथनांक समतुल्य द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों से कम होते हैं, क्योंकि ऐल्डिहाइड/कीटोन में अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंध संभव नहीं है।

यौगिकआण्विक द्रव्यमानक्वथनांक (K)
n-ब्यूटेन58273
मेथॉक्सीएथेन60281
प्रोपेनैल58322
ऐसीटोन58329
प्रोपेन-1-ऑल60370
क्वथनांक क्रम
  • ऐल्कोहॉल > ऐल्डिहाइड/कीटोन > ईथर > समतुल्य द्रव्यमान वाला ऐल्केन।
  • निम्नतर सदस्य (मेथेनैल, एथेनैल, प्रोपेनोन) जल के साथ हाइड्रोजन आबंध बना सकते हैं, अतः सभी अनुपातों में जल में मिश्रणीय हैं।
क्रियाविधि

8.7 न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रिया की क्रियाविधि

ऐल्डिहाइड व कीटोन न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रियाएँ प्रदर्शित करते हैं — क्योंकि कार्बोनिल कार्बन आंशिक धनावेशित (इलेक्ट्रॉनरागी) होता है।

न्यूक्लियोफाइल ध्रुवीय कार्बोनिल कार्बन पर उस दिशा से आक्रमण करता है, जो sp² संकरित कक्षकों के तल के लगभग लंब हो। कार्बन की संकरण अवस्था sp² से sp³ हो जाती है और एक चतुष्फलकीय ऐल्कॉक्साइड मध्यवर्ती बनता है, जो प्रोटॉन प्राप्त कर योगात्मक उत्पाद देता है।

चरण 1 (मंद, दर-निर्धारक): Nu:⁻ + C=O(δ+/δ−) → चतुष्फलकीय ऐल्कॉक्साइड मध्यवर्ती [Nu–C–O⁻] चरण 2 (तीव्र): [Nu–C–O⁻] + H⁺ → Nu–C–OH (योगात्मक उत्पाद)
चित्र: न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रिया के दो चरण
तुलना

8.8 ऐल्डिहाइड व कीटोन की अभिक्रियाशीलता की तुलना

इलेक्ट्रॉनिक व त्रिविम — दोनों प्रभावों के कारण न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रियाओं में ऐल्डिहाइड, कीटोन की अपेक्षा अधिक अभिक्रियाशील होते हैं।

प्रभावऐल्डिहाइड में स्थितिकीटोन में स्थितिपरिणाम
त्रिविमकेवल एक बड़ा समूह (R)दो बड़े समूह (R, R')ऐल्डिहाइड में कम बाधा
इलेक्ट्रॉनिकएक ऐल्किल समूह (+I)दो ऐल्किल समूह (+I)कीटोन का कार्बोनिल कार्बन कम इलेक्ट्रॉनरागी
अभिक्रियाशीलता का सामान्य क्रम
  • HCHO > अन्य ऐलिफैटिक ऐल्डिहाइड > ऐलिफैटिक कीटोन > ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड > ऐरोमैटिक कीटोन।
  • इलेक्ट्रॉन-अपनयन समूह अभिक्रियाशीलता बढ़ाते हैं; इलेक्ट्रॉन-दाता समूह घटाते हैं।
प्रमुख अभिक्रियाएँ

8.9 महत्वपूर्ण न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रियाएँ

8.9.1 हाइड्रोजन सायनाइड (HCN) का योग

ऐल्डिहाइड व कीटोन HCN से अभिकृत होकर सायनोहाइड्रिन (α-हाइड्रॉक्सी नाइट्राइल) देते हैं। क्षार द्वारा उत्प्रेरित किया जाता है — CN⁻ आयन कार्बोनिल यौगिकों पर आसानी से संयोजित होता है।

8.9.2 सोडियम बाइसल्फाइट (NaHSO₃) का योग

ऐल्डिहाइड व अधिकांश मेथिल कीटोन NaHSO₃ के साथ श्वेत क्रिस्टलीय योगात्मक यौगिक बनाते हैं, जो तनु अम्ल/क्षार से पुनः मूल कार्बोनिल यौगिक देता है — शुद्धिकरण में उपयोगी।

8.9.3 ग्रीन्यार अभिकर्मक का योग

ग्रीन्यार अभिकर्मक (R–MgX) कार्बोनिल पर योग होकर ऐल्कॉक्साइड बनाता है, जिसका जलअपघटन ऐल्कोहॉल देता है — फॉर्मेल्डिहाइड से प्राथमिक, अन्य ऐल्डिहाइड से द्वितीयक, कीटोन से तृतीयक ऐल्कोहॉल।

8.9.4 ऐल्कोहॉलों का योग — हेमीऐसीटल व ऐसीटल

शुष्क HCl गैस में ऐल्डिहाइड, एक मोल ऐल्कोहॉल से हेमीऐसीटल बनाता है, जो पुनः एक मोल ऐल्कोहॉल से ऐसीटल (जैम-डाइऐल्कॉक्सी यौगिक) बनाता है। कीटोन एथिलीन ग्लाइकॉल के साथ कीटेल बनाते हैं।

R–CHO + R'OH →(HCl गैस)→ R–CH(OH)(OR') [हेमीऐसीटल] R–CH(OH)(OR') + R'OH → R–CH(OR')₂ + H₂O [ऐसीटल] >C=O + HOCH₂CH₂OH →(HCl)→ चक्रीय कीटेल + H₂O
चित्र: हेमीऐसीटल, ऐसीटल तथा कीटेल का निर्माण

8.9.5 अमोनिया व इसके व्युत्पन्नों का योग

Z (H₂N–Z में)अभिकर्मकउत्पाद (>C=N–Z)उत्पाद का नाम
–Hअमोनिया>C=NHइमीन
–Rऐमीन>C=NRशिफ क्षारक
–OHहाइड्रॉक्सिल ऐमीन>C=N–OHऑक्सिम
–NH₂हाइड्रैज़ीन>C=N–NH₂हाइड्रैज़ोन
–HN–C₆H₅फीनिल हाइड्रैज़ीन>C=N–NH–C₆H₅फीनिलहाइड्रैज़ोन
2,4-DNP2,4-DNP>C=N–NH–Ar2,4-DNP व्युत्पन्न
–NH–CO–NH₂सेमीकार्बेज़ाइड>C=N–NH–CONH₂सेमीकार्बेज़ोन
त्वरित तथ्य
  • 2,4-DNP व्युत्पन्न पीले/नारंगी/लाल ठोस — ऐल्डिहाइड/कीटोन की पहचान में प्रयुक्त।
  • सेमीकार्बेज़ाइड में टर्मिनल NH₂ ही कार्बोनिल से अभिक्रिया करता है।
  • शिफ क्षारक = >C=N–R प्रकार की प्रतिस्थापित इमीन।
एल्डोल रसायन

8.10 α-हाइड्रोजन के कारण होने वाली अभिक्रियाएँ

कार्बोनिल समूह से जुड़े कार्बन पर उपस्थित हाइड्रोजन को α-हाइड्रोजन कहते हैं। ये असामान्य रूप से अम्लीय होते हैं — (1) कार्बोनिल समूह का प्रबल इलेक्ट्रॉन-अपनयन प्रभाव, तथा (2) एनोलेट आयन का अनुनाद-स्थायीकरण।

–C(=O)–CH– + क्षार → [–C(=O)–C⁻– ↔ –C(–O⁻)=C–] (एनोलेट आयन — ऋणावेश ऑक्सीजन व कार्बन दोनों पर विस्थानित)
चित्र: α-हाइड्रोजन के निष्कासन से एनोलेट आयन का अनुनाद-स्थायीकरण

8.10.1 ऐल्डोल संघनन

α-हाइड्रोजन युक्त ऐल्डिहाइड/कीटोन तनु क्षार में ऐल्डोल (β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड) अथवा कीटोल (β-हाइड्रॉक्सी कीटोन) प्रदान करते हैं, जो जल निष्कासित कर α,β-असंतृप्त कार्बोनिल यौगिक देते हैं।

2 CH₃CHO →(तनु NaOH)→ CH₃–CH(OH)–CH₂–CHO →(Δ, −H₂O)→ CH₃–CH=CH–CHO एथेनैल 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल (ऐल्डोल) ब्यूट-2-ईनैल 2 CH₃COCH₃ →(Ba(OH)₂)→ (CH₃)₂C(OH)–CH₂–CO–CH₃ →(Δ, −H₂O)→ (CH₃)₂C=CH–CO–CH₃ प्रोपेनोन 4-हाइड्रॉक्सी-4-मेथिलपेन्टेन-2-ऑन (कीटोल) 4-मेथिलपेन्ट-3-ईन-2-ऑन
चित्र: एथेनैल व प्रोपेनोन का स्व-ऐल्डोल संघनन

8.10.2 क्रॉस ऐल्डोल संघनन

जब दो भिन्न ऐल्डिहाइड/कीटोन के मध्य ऐल्डोल संघनन होता है, तो क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहलाता है। यदि एक घटक में α-H नहीं है (जैसे बेन्ज़ैल्डिहाइड), तो एक ही मुख्य उत्पाद बनता है।

त्वरित तथ्य
  • ऐल्डोल संघनन के लिए α-हाइड्रोजन अनिवार्य है।
  • ऐल्डोल = β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड; कीटोल = β-हाइड्रॉक्सी कीटोन।
  • निर्जलीकरण से α,β-असंतृप्त कार्बोनिल यौगिक बनता है।
रेडॉक्स रसायन

8.11 अपचयन व ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ

8.11.1 ऐल्कोहॉलों में अपचयन

NaBH₄, LiAlH₄ या उत्प्रेरकीय हाइड्रोजनन द्वारा ऐल्डिहाइड → प्राथमिक ऐल्कोहॉल, कीटोन → द्वितीयक ऐल्कोहॉल।

8.11.2 हाइड्रोकार्बनों में अपचयन (कार्बोनिल → CH₂)

विधिअभिकर्मकपरिणाम
क्लीमेन्सन अपचयनअमलगमित Zn + सांद्र HCl>C=O → >CH₂ (अम्लीय माध्यम)
वोल्फ-किश्नर अपचयनNH₂NH₂ फिर KOH/एथिलीन ग्लाइकॉल, ऊष्मा>C=O → >CH₂ (क्षारीय माध्यम)
अम्ल-संवेदनशील यौगिकों के लिए वोल्फ-किश्नर, क्षार-संवेदनशील के लिए क्लीमेन्सन उपयुक्त है।

8.11.3 ऑक्सीकरण अभिक्रियाएँ

ऐल्डिहाइड सामान्य व मृदु ऑक्सीकारकों (टॉलेन, फेहलिंग) से ऑक्सीकृत होकर कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाते हैं। कीटोन का ऑक्सीकरण केवल प्रबल परिस्थितियों में ही होता है।

परीक्षणअभिकर्मकऐल्डिहाइडकीटोन
टॉलेन परीक्षणअमोनियामय AgNO₃सिल्वर दर्पणनहीं
फेहलिंग परीक्षणCuSO₄ + रोशेल लवणलाल-भूरा Cu₂Oनहीं (ऐरोमैटिक भी नहीं)
हैलोफॉर्म परीक्षणNaOI (NaOH + I₂)केवल CH₃CHOमेथिल कीटोन
त्वरित तथ्य
  • टॉलेन व फेहलिंग — ऐल्डिहाइड को कीटोन से विभेदित करते हैं।
  • हैलोफॉर्म अभिक्रिया — CH₃CO– या CH₃CH(OH)– समूह की पहचान।
  • NaBH₄ कार्बोनिल को अपचित करता है, C=C को नहीं।
विशेष अभिक्रियाएँ

8.12 कैनिज़ारो अभिक्रिया व इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन

8.12.1 कैनिज़ारो अभिक्रिया

α-हाइड्रोजन रहित ऐल्डिहाइड (HCHO, बेन्ज़ैल्डिहाइड) सांद्र क्षार में स्व-ऑक्सीकरण-अपचयन (असमानुपातन) द्वारा ऐल्कोहॉल व कार्बोक्सिलिक अम्ल का लवण बनाते हैं — कैनिज़ारो अभिक्रिया

2 HCHO →(सांद्र NaOH, गरम)→ CH₃OH + HCOONa 2 C₆H₅CHO →(सांद्र NaOH, गरम)→ C₆H₅CH₂OH + C₆H₅COONa
चित्र: फॉर्मेल्डिहाइड व बेन्ज़ैल्डिहाइड की कैनिज़ारो अभिक्रिया

8.12.2 इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन

ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड/कीटोन वलय पर इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन देते हैं, जिसमें कार्बोनिल समूह निष्क्रियक व मेटा-निर्देशी होता है।

ऐरोमैटिक कार्बोनिल यौगिक फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देते, क्योंकि कार्बोनिल समूह AlCl₃ से संकुल बनाकर उसे निष्क्रिय कर देता है।
अनुप्रयोग

8.13 ऐल्डिहाइड व कीटोन के उपयोग

फॉर्मेल्डिहाइड का 40% जलीय विलयन "फॉर्मेलिन" — जैविक प्रतिदर्श परिरक्षण, बैकालाइट व यूरिया-फॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन निर्माण में।

ऐसीटैल्डिहाइड — ऐसीटिक अम्ल, एथिल ऐसीटेट, वाइनिल ऐसीटेट-बहुलक तथा औषधियों के उत्पादन में।

बेन्ज़ैल्डिहाइड — सुगंध व रंजक उद्योग में।

ऐसीटोन — औद्योगिक विलायक।

कार्बोक्सिलिक अम्ल

8.14 परिचय एवं नामकरण

जिन यौगिकों में –COOH (कार्बोक्सिल) समूह उपस्थित होता है, वे कार्बोक्सिलिक अम्ल कहलाते हैं। कार्बोक्सिल समूह में कार्बोनिल समूह एक हाइड्रॉक्सिल समूह के साथ जुड़ा रहता है — "कार्बोक्सिल" नाम कार्बोनिल + हाइड्रॉक्सिल से बना है।

14.1 सामान्य नाम

फॉर्मिक अम्ल (लैटिन "formica" = चींटी), ऐसीटिक अम्ल (लैटिन "acetum" = सिरका), ब्यूटैरिक अम्ल (लैटिन "butyrum" = मक्खन) — ये सामान्य नामों से अधिक जाने जाते हैं।

14.2 IUPAC नामकरण

ऐल्केन के नाम के अंत में "-oic acid" अनुलग्न लगाया जाता है। शृंखला का अंकन कार्बोक्सिलिक कार्बन से शुरू होता है (संख्या 1)।

संरचनासामान्य नामIUPAC नाम
HCOOHफॉर्मिक अम्लमेथेनॉइक अम्ल
CH₃COOHऐसीटिक अम्लएथेनॉइक अम्ल
CH₃CH₂COOHप्रोपिओनिक अम्लप्रोपेनॉइक अम्ल
CH₃(CH₂)₂COOHब्यूटाइरिक अम्लब्यूटेनॉइक अम्ल
HOOC–COOHऑक्सैलिक अम्लएथेनडाइओइक अम्ल
C₆H₅COOHबेन्ज़ोइक अम्लबेन्ज़ीनकार्बोक्सिलिक अम्ल
संरचना

8.15 कार्बोक्सिल समूह की संरचना

कार्बोक्सिल कार्बन sp² संकरित है। सभी आबंध एक तल में, ~120° कोण पर। कार्बोक्सिल कार्बन, विशुद्ध कार्बोनिल कार्बन की तुलना में कम इलेक्ट्रॉनरागी होता है — हाइड्रॉक्सिल ऑक्सीजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन-युग्म के कार्बोनिल कार्बन की ओर दान के कारण।

R–C(=O)–O–H ↔ R–C(–O⁻)=O⁺–H ↔ R–C⁺(–O⁻)–OH (हाइड्रॉक्सिल ऑक्सीजन का दान कार्बोनिल कार्बन की इलेक्ट्रॉनरागिता को कम करता है)
चित्र: कार्बोक्सिल समूह की अनुनादी संरचनाएँ
संश्लेषण

8.16 कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाने की विधियाँ

1. प्राथमिक ऐल्कोहॉल व ऐल्डिहाइड से — KMnO₄/K₂Cr₂O₇ द्वारा ऑक्सीकरण।

2. ऐल्किल बेन्ज़ीनों से — प्रबल ऑक्सीकरण (KMnO₄/KOH) से ऐरोमैटिक अम्ल।

3. नाइट्राइल व ऐमाइड से — H⁺/OH⁻ द्वारा जलअपघटन।

4. ग्रीन्यार अभिकर्मक से — RMgX + CO₂ → RCOOH (श्रेणी आरोहण)।

5. एस्टर से — अम्लीय/क्षारीय जलअपघटन।

भौतिक गुणधर्म

8.17 कार्बोक्सिलिक अम्ल के भौतिक गुण

9 कार्बन तक के ऐलिफैटिक अम्ल द्रव; उच्चतर ठोस। क्वथनांक समतुल्य द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों से भी अधिक — अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन व द्वितय (dimer) निर्माण के कारण।

R–C O O–H⋯ ⋯H–O O C–R द्वितय (dimer) — दो हाइड्रोजन आबंधों द्वारा जुड़े दो RCOOH अणु
चित्र: कार्बोक्सिलिक अम्ल का द्वितयन
त्वरित तथ्य
  • कार्बोक्सिलिक अम्ल का क्वथनांक: अम्ल > ऐल्कोहॉल > ऐल्डिहाइड/कीटोन > ईथर > ऐल्केन।
  • 4 कार्बन तक के अम्ल जल में मिश्रणीय; उच्चतर अविलेय।
अम्ल-क्षार रसायन

8.18 अम्लता व pKₐ

कार्बोक्सिलिक अम्ल धातुओं, क्षारकों, कार्बोनेट व बाइकार्बोनेट से अभिक्रिया कर लवण + H₂/CO₂ देते हैं। ये कार्बनिक यौगिकों में सर्वाधिक अम्लीय हैं — कार्बोक्सिलेट आयन के अनुनाद-स्थायीकरण के कारण।

2R–COOH + 2Na → 2R–COONa + H₂↑ R–COOH + NaOH → R–COONa + H₂O R–COOH + NaHCO₃ → R–COONa + H₂O + CO₂↑
चित्र: कार्बोक्सिलिक अम्ल की धातु व क्षारकों से अभिक्रिया
अम्लpKₐवर्गीकरण
HCl−7.0प्रबल खनिज अम्ल
ट्राइफ्लुओरोऐसीटिक0.23प्रबलतम कार्बोक्सिलिक
बेन्ज़ोइक अम्ल4.19मध्यम
ऐसीटिक अम्ल4.76मध्यम
फीनॉल~10दुर्बल
एथेनॉल~16अति दुर्बल
कार्बोक्सिलिक अम्ल, फीनॉल से अधिक प्रबल है — कार्बोक्सिलेट आयन में ऋणावेश दो समतुल्य ऑक्सीजनों पर विस्थानित होता है, जबकि फीनॉक्साइड आयन में ऋणावेश वलय पर भी होता है (असमान अनुनाद)।
संरचना-गुण संबंध

8.19 कार्बोक्सिलिक अम्लों की अम्लता पर प्रतिस्थापियों का प्रभाव

इलेक्ट्रॉन-अपनयन समूह (EWG) — कार्बोक्सिलेट आयन को स्थायी बनाकर अम्लता बढ़ाते हैं। इलेक्ट्रॉन-दाता समूह (EDG) — अम्लता घटाते हैं।

−I प्रभाव — COOH से दूरी बढ़ने पर घटता है (α > β > γ)।

EWG का बढ़ता प्रभाव
  • Ph < I < Br < Cl < F < CN < NO₂ < CF₃
रासायनिक अभिक्रियाएँ

8.20 O–H आबंध विदलन संबंधी अभिक्रियाएँ

20.1 एनहाइड्राइड का विरचन

कार्बोक्सिलिक अम्ल + सांद्र H₂SO₄/P₂O₅ → अम्ल एनहाइड्राइड।

20.2 एस्टरीकरण

RCOOH + R′OH ⇌(H⁺)⇌ RCOOR′ + H₂O — उत्क्रमणीय अभिक्रिया।

20.3 PCl₅, PCl₃ व SOCl₂ के साथ अभिक्रिया

RCOOH + SOCl₂ → RCOCl + SO₂↑ + HCl↑ — ऐसिल क्लोराइड बनाने की सर्वोत्तम विधि (उपोत्पाद गैसें हैं)।

20.4 अमोनिया के साथ अभिक्रिया

RCOOH + NH₃ → RCOONH₄ →(Δ, −H₂O)→ RCONH₂ (ऐमाइड)।

–COOH समूह

8.21 कार्बोक्सिलिक समूह (–COOH) संबंधी अभिक्रियाएँ

21.1 अपचयन

RCOOH —(LiAlH₄/ईथर या B₂H₆)→ RCH₂OH (प्राथमिक ऐल्कोहॉल)। NaBH₄ –COOH को अपचित नहीं करता।

21.2 विकार्बोक्सिलन

RCOONa —(NaOH+CaO, Δ)→ R–H + Na₂CO₃ (सोडा-लाइम विधि)।

कोल्बे वैद्युत-अपघटन: 2RCOO⁻ → R–R + 2CO₂ + 2e⁻ (सम-संख्या कार्बन शृंखला वाला हाइड्रोकार्बन)।
प्रतिस्थापन

8.22 हाइड्रोकार्बन भाग में प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ

22.1 HVZ अभिक्रिया

R–CH₂–COOH + X₂/लाल P → R–CHX–COOH (α-हैलोकार्बोक्सिलिक अम्ल)।

22.2 वलय प्रतिस्थापन

ऐरोमैटिक कार्बोक्सिलिक अम्ल इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन देते हैं — COOH निष्क्रियक व मेटा-निर्देशी है। फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देते (AlCl₃ COOH से संकुल बनाकर निष्क्रिय हो जाता है)।

अनुप्रयोग

8.23 कार्बोक्सिलिक अम्लों के उपयोग

फॉर्मिक अम्ल — रबर, वस्त्र, रँगाई, चमड़ा, इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योग।

ऐसीटिक अम्ल — सिरका, विलायक।

ऐडिपिक अम्ल — नाइलोन-6,6 निर्माण।

बेन्ज़ोइक अम्ल के एस्टर — सुगंध द्रव्य; सोडियम बेन्ज़ोएट — खाद्य परिरक्षण।

रिवीज़न

8.24 पूरे अध्याय के महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य

नामकरण व संरचना
  • ऐल्डिहाइड: कार्बोनिल कार्बन H व R से जुड़ा; कीटोन: दो कार्बनों से।
  • IUPAC: ऐल्डिहाइड में "-al", कीटोन में "-one" अनुलग्न।
  • कार्बोनिल कार्बन sp² संकरित; आबंध कोण ≈ 120°।
  • कार्बोक्सिलिक अम्ल IUPAC: "-oic acid" अनुलग्न।
विरचन
  • रोज़ेनमुंड: ऐसिल क्लोराइड + H₂/Pd-BaSO₄ → ऐल्डिहाइड।
  • स्टीफेन: नाइट्राइल + SnCl₂/HCl → ऐल्डिहाइड।
  • ईटार्ड: टॉलूईन + CrO₂Cl₂ → बेन्ज़ैल्डिहाइड।
  • गाटरमान-कॉख: बेन्ज़ीन + CO + HCl → बेन्ज़ैल्डिहाइड।
  • फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐसिलीकरण → ऐरोमैटिक कीटोन।
  • ग्रीन्यार + CO₂ → कार्बोक्सिलिक अम्ल (श्रेणी आरोहण)।
भौतिक गुण व अभिक्रियाशीलता
  • क्वथनांक: कार्बोक्सिलिक अम्ल > ऐल्कोहॉल > ऐल्डिहाइड/कीटोन > ईथर > ऐल्केन।
  • ऐल्डिहाइड, कीटोन से अधिक अभिक्रियाशील (त्रिविम + इलेक्ट्रॉनिक कारण)।
  • कार्बोक्सिलिक अम्ल वाष्प में द्वितय (dimer) रूप में।
विशिष्ट अभिक्रियाएँ व परीक्षण
  • टॉलेन/फेहलिंग — केवल ऐल्डिहाइड (ऐरोमैटिक फेहलिंग में नहीं)।
  • हैलोफॉर्म (आयोडोफॉर्म) — CH₃CO– या CH₃CH(OH)– समूह।
  • कैनिज़ारो — α-H रहित ऐल्डिहाइड (HCHO, बेन्ज़ैल्डिहाइड)।
  • ऐल्डोल संघनन — α-H अनिवार्य।
  • क्लीमेन्सन (Zn-Hg/HCl) व वोल्फ-किश्नर (N₂H₄/KOH) — कार्बोनिल → CH₂।
  • HVZ — α-हैलोजनन (लाल P + X₂)।
  • कोल्बे वैद्युत-अपघटन — कार्बोक्सिलेट → हाइड्रोकार्बन।
  • कार्बोनिल/कार्बोक्सिल — दोनों मेटा-निर्देशी व निष्क्रियक।
  • NaBH₄ कार्बोनिल को अपचित करता है, –COOH को नहीं; LiAlH₄/B₂H₆ दोनों को।

पाठ्यनिहित प्रश्न (8.1 – 8.8) — विस्तृत हल

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके हल देखें।

8.1 निम्न यौगिकों की संरचना लिखिए — (i) α-मेथॉक्सीप्रोपिऑनऐल्डिहाइड (ii) 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनैल (iii) 2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोपेन्टेन कार्बैल्डिहाइड (iv) 4-ऑक्सोपेन्टेनैल (v) डाइ-द्वितीयकब्यूटिल कीटोन (vi) 4-क्लोरोऐसीटोफीनोन
(i) CH₃–CH(OCH₃)–CHO
(ii) CH₃–CH(OH)–CH₂–CHO
(iii) साइक्लोपेन्टेन वलय — C1 पर –CHO, C2 पर –OH
(iv) CH₃–CO–CH₂–CH₂–CHO
(v) (CH₃CH₂CH(CH₃))₂C=O
(vi) 4-Cl-C₆H₄-CO-CH₃
8.2 निम्न अभिक्रियाओं के उत्पादों की संरचना लिखिए — (i) बेन्ज़ीन + C₂H₅COCl/AlCl₃ (ii) (C₆H₅CH₂)₂Cd + CH₃COCl (iii) ब्यूट-2-आइन + Hg²⁺/H₂SO₄ (iv) p-नाइट्रोटॉलूईन + CrO₂Cl₂ फिर H₃O⁺
(i) C₆H₅–CO–C₂H₅ (प्रोपिओफीनोन)
(ii) C₆H₅CH₂–CO–CH₃ (फेनिलऐसीटोन)
(iii) CH₃–CO–CH₃ (ऐसीटोन)
(iv) p-नाइट्रोबेन्ज़ैल्डिहाइड
8.3 निम्न यौगिकों को क्वथनांकों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए — CH₃CHO, CH₃CH₂OH, CH₃OCH₃, CH₃CH₂CH₃
CH₃CH₂CH₃ < CH₃OCH₃ < CH₃CHO < CH₃CH₂OH
8.4 निम्न यौगिकों को न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रियाओं में बढ़ती अभिक्रियाशीलता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए — (क) एथेनैल, प्रोपेनैल, प्रोपेनोन, ब्यूटेनोन (ख) बेन्ज़ैल्डिहाइड, p-टॉलूऐल्डिहाइड, p-नाइट्रोबेन्ज़ैल्डिहाइड, ऐसीटोफीनोन
(क) ब्यूटेनोन < प्रोपेनोन < प्रोपेनैल < एथेनैल
(ख) ऐसीटोफीनोन < p-टॉलूऐल्डिहाइड < बेन्ज़ैल्डिहाइड < p-नाइट्रोबेन्ज़ैल्डिहाइड
8.5 निम्न अभिक्रियाओं के उत्पादों को पहचानिए — साइक्लोपेन्टेनोन + HO–NH₂/H⁺; साइक्लोहेक्सेनोन + 2,4-DNP; R–CH=CH–CHO + सेमीकार्बेज़ाइड/H⁺; ऐसीटोफीनोन + CH₃CH₂NH₂/H⁺
(i) साइक्लोपेन्टेनोन ऑक्सिम (>C=N–OH)
(ii) साइक्लोहेक्सेनोन का 2,4-DNP व्युत्पन्न
(iii) R–CH=CH–CH=N–NH–CO–NH₂ (सेमीकार्बेज़ोन)
(iv) C₆H₅–C(CH₃)=N–C₂H₅ (शिफ क्षारक)
8.6 साइक्लोहेक्सेनकार्बैल्डिहाइड की अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया — (i) PhMgBr फिर H₃O⁺ (ii) टॉलेन अभिकर्मक (iii) सेमीकार्बेज़ाइड व दुर्बल अम्ल (iv) एथेनॉल का आधिक्य व अम्ल (v) जिंक अमलगम व तनु HCl
(i) साइक्लोहेक्सिल-CH(OH)-C₆H₅ (द्वितीयक ऐल्कोहॉल)
(ii) साइक्लोहेक्सेनकार्बोक्सिलिक अम्ल + सिल्वर दर्पण
(iii) साइक्लोहेक्सेनकार्बैल्डिहाइड सेमीकार्बेज़ोन
(iv) डाईएथिल ऐसीटल
(v) मेथिलसाइक्लोहेक्सेन
8.7 निम्न में से कौन से यौगिकों में ऐल्डोल संघनन होगा, किनमें कैनिज़ारो अभिक्रिया होगी और किनमें कोई क्रिया नहीं होगी? (मेथेनैल, 2-मेथिलपेन्टेनैल, बेन्ज़ैल्डिहाइड, बेन्ज़ोफीनोन, साइक्लोहेक्सेनोन, 1-फेनिलप्रोपेनोन, फेनिलऐसीटैल्डिहाइड, ब्यूटेन-1-ऑल, 2,2-डाइमेथिलब्यूटेनैल)
ऐल्डोल (α-H): 2-मेथिलपेन्टेनैल, साइक्लोहेक्सेनोन, 1-फेनिलप्रोपेनोन, फेनिलऐसीटैल्डिहाइड
कैनिज़ारो (α-H नहीं): मेथेनैल, बेन्ज़ैल्डिहाइड, 2,2-डाइमेथिलब्यूटेनैल
कोई नहीं: बेन्ज़ोफीनोन, ब्यूटेन-1-ऑल
8.8 निम्न अभिकर्मकों के प्रत्येक युग्म में कौन सा अम्ल अधिक प्रबल है? (i) CH₃CO₂H अथवा CH₂FCO₂H (ii) CH₂FCO₂H अथवा CH₂ClCO₂H (iii) CH₂FCH₂CH₂CO₂H अथवा CH₃CHFCH₂CO₂H (iv) F₃C-C₆H₄-COOH अथवा H₃C-C₆H₄-COOH
(i) CH₂FCOOH (F का प्रबल −I प्रभाव)
(ii) CH₂FCOOH (F, Cl से अधिक विद्युत्ऋणी)
(iii) CH₃CHFCH₂COOH (F अधिक निकट, β-स्थिति)
(iv) F₃C-C₆H₄-COOH (CF₃ प्रबल EWG, CH₃ EDG)

अध्याय अभ्यास (8.1 – 8.20) — विस्तृत हल

NCERT पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।

8.1 निम्नलिखित पदों से आप क्या समझते हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए — सायनोहाइड्रिन, ऐसीटल, सेमीकार्बेज़ोन, ऐल्डोल, हेमीऐसीटल, ऑक्सिम, कीटैल, इमीन, 2,4-DNP व्युत्पन्न, शिफ-क्षारक
सायनोहाइड्रिन: α-हाइड्रॉक्सी नाइट्राइल — CH₃CH(OH)CN
ऐसीटल: जैम-डाइऐल्कॉक्सी यौगिक — CH₃CH(OC₂H₅)₂
सेमीकार्बेज़ोन: >C=N–NH–CO–NH₂ — ऐसीटोन सेमीकार्बेज़ोन
ऐल्डोल: β-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड — CH₃CH(OH)CH₂CHO
हेमीऐसीटल: ऐल्कॉक्सी ऐल्कोहॉल — CH₃CH(OH)(OC₂H₅)
ऑक्सिम: >C=N–OH — (CH₃)₂C=NOH
कीटैल: कीटोन का चक्रीय जैम-डाइऐल्कॉक्सी व्युत्पन्न
इमीन: >C=NH या >C=NR — (CH₃)₂C=NH
2,4-DNP व्युत्पन्न: नारंगी/लाल ठोस — ऐसीटोन-2,4-DNP
शिफ क्षारक: >C=N–R — CH₃CH=N–C₆H₅
8.2 निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए — (i) CH₃CH(CH₃)CH₂CH₂CHO (ii) CH₃CH₂COCH(C₂H₅)CH₂CH₂Cl (iii) CH₃CH=CHCHO (iv) CH₃COCH₂COCH₃ (v) CH₃CH(CH₃)CH₂C(CH₃)₂COCH₃ (vi) (CH₃)₃CCH₂COOH (vii) OHC–C₆H₄–CHO (पैरा)
(i) 4-मेथिलपेन्टेनैल
(ii) 6-क्लोरो-4-एथिलहेक्सेन-3-ओन
(iii) ब्यूट-2-ईनैल
(iv) पेन्टेन-2,4-डाईओन
(v) 3,3,5-ट्राइमेथिलहेक्सेन-2-ओन
(vi) 3,3-डाइमेथिलब्यूटेनॉइक अम्ल
(vii) बेन्ज़ीन-1,4-डाईकार्बैल्डिहाइड
8.3 निम्नलिखित यौगिकों की संरचना बनाइए — (i) 3-मेथिलब्यूटेनैल (ii) p-नाइट्रोप्रोपिओफीनोन (iii) p-मेथिलबेन्ज़ैल्डिहाइड (iv) 4-मेथिलपेन्ट-3-ईन-2-ऑन (v) 4-क्लोरोपेन्टेन-2-ऑन (vi) 3-ब्रोमो-4-फेनिलपेन्टेनॉइक अम्ल (vii) p,p′-डाईहाइड्रॉक्सीबेन्ज़ोफीनोन (viii) हेक्स-2-ईन-4-आइनोइक अम्ल
(i) (CH₃)₂CH–CH₂–CHO
(ii) p-O₂N–C₆H₄–CO–CH₂CH₃
(iii) p-CH₃–C₆H₄–CHO
(iv) (CH₃)₂C=CH–CO–CH₃
(v) CH₃–CO–CH₂–CHCl–CH₃
(vi) CH₃–CH(C₆H₅)–CHBr–CH₂–COOH
(vii) (4-HO–C₆H₄)₂C=O
(viii) HOOC–CH=CH–C≡C–CH₃
8.20 यद्यपि फीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक हैं, परंतु कार्बोक्सिलिक अम्ल फीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है। क्यों?
कार्बोक्सिलेट आयन की दोनों अनुनादी संरचनाएँ तुल्य (समान ऊर्जा) हैं — ऋणावेश दो विद्युत्ऋणी ऑक्सीजनों पर समान रूप से विस्थानित है।
फीनॉक्साइड आयन की पाँच संरचनाएँ अतुल्य हैं — चार में ऋणावेश कम विद्युत्ऋणी कार्बन पर होता है, अतः कम स्थायी।
तुल्य अनुनादी संरचनाएँ अधिक प्रभावी स्थायीकरण प्रदान करती हैं — अतः कार्बोक्सिलिक अम्ल अधिक प्रबल है।

🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (ऐल्डिहाइड-कीटोन-कार्बोक्सिलिक अम्ल)

NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

NEET 2026
2026 · Q1 यौगिक P (C₈H₈O), 2,4-DNP देता है परंतु फेहलिंग नहीं। प्रबल ऑक्सीकरण पर Q देता है जो NaHCO₃ से बुदबुदाता है। P व Q क्या हैं?
P = C₆H₅COCH₃ (ऐसीटोफीनोन) — कीटोन, फेहलिंग ऋणात्मक
Q = C₆H₅COOH (बेन्ज़ोइक अम्ल)
NEET 2025
NEET 2025 · Q1 एस्टर को चयनात्मक रूप से ऐल्डिहाइड में परिवर्तित करने हेतु अभिकर्मक:
  • (a) NaBH₄/H⁺
  • (b) H₂/Pd-BaSO₄
  • (c) LiAlH₄/H⁺
  • (d) DIBAL-H/H₂O
उत्तर: (d) DIBAL-H
NEET 2024
NEET 2024 · Q1 फेहलिंग विलयन 'A' है:
  • (a) जलीय कॉपर सल्फेट
  • (b) क्षारीय कॉपर सल्फेट
  • (c) सोडियम पोटैशियम टार्ट्रेट का क्षारीय विलयन
  • (d) जलीय सोडियम सिट्रेट
उत्तर: (a) जलीय कॉपर सल्फेट
NEET 2023
NEET 2023 · Q1 CH₃COONa को सोडा-लाइम के साथ गर्म करने पर प्राप्त यौगिक के 2 मोल का द्रव्यमान:
CH₃COONa → CH₄ (मेथेन)
2 मोल CH₄ = 2×16 = 32 g
  • (a) 18 g
  • (b) 16 g
  • (c) 32 g
  • (d) 30 g
उत्तर: (c) 32 g
NEET 2022
NEET 2022 · Q1 ऐल्डिहाइड/कीटोन तथा ऐल्कोहॉल की तुलनात्मक क्वथनांक संबंधी दो कथन दिए हैं।
कथन-I: ऐल्डिहाइड-कीटोन का क्वथनांक हाइड्रोकार्बन से अधिक (द्विध्रुव-द्विध्रुव) — सत्य
कथन-II: ऐल्कोहॉल से कम (H-बंधन नहीं) — सत्य
  • (a) I सत्य, II असत्य
  • (b) I असत्य, II सत्य
  • (c) दोनों सत्य
  • (d) दोनों असत्य
उत्तर: (c) दोनों सत्य
NEET 2021
NEET 2021 · Q1 सोडियम ऐसीटेट के सोडा-लाइम से अपघटन में लुप्त अभिकर्मक:
  • (a) CaO
  • (b) DIBAL-H
  • (c) B₂H₆
  • (d) लाल P
उत्तर: (a) CaO
NEET 2020
NEET 2020 · Q1 बेन्ज़ैल्डिहाइड व ऐसीटोफीनोन की तनु NaOH से अभिक्रिया कहलाती है:
  • (a) क्रॉस कैनिज़ारो
  • (b) क्रॉस ऐल्डोल संघनन
  • (c) ऐल्डोल संघनन
  • (d) कैनिज़ारो
उत्तर: (b) क्रॉस ऐल्डोल संघनन
NEET 2018
NEET 2018 · Q1 कार्बोक्सिलिक अम्लों का क्वथनांक ऐल्कोहॉलों से भी अधिक — कारण?
  • (a) अंतराआण्विक H-बंधन
  • (b) कार्बोक्सिलेट आयन
  • (c) वान्डरवाल्स
  • (d) अंतराआण्विक हाइड्रोजन-बंधन (द्वितय)
उत्तर: (d)
NEET 2017
NEET 2017 · Q1 A ऐल्कोहॉलिक KOH से X देता है; X टॉलेन परीक्षण देता है; Y की सेमीकार्बेज़ाइड से Z बनता है। पहचानिए:
  • (a) A-मेथॉक्सीमेथेन, X-एथेनॉल, Y-अम्ल, Z-सेमीकार्बेज़ाइड
  • (b) A-एथेनैल, X-एथेनॉल, Y-बट-2-ईनैल, Z-सेमीकार्बेज़ोन
  • (c) A-एथेनॉल, X-ऐसीटैल्डिहाइड, Y-ब्यूटेनोन, Z-हाइड्राज़ोन
  • (d) A-मेथॉक्सीमेथेन, X-अम्ल, Y-एसीटेट, Z-हाइड्राज़ीन
उत्तर: (b)

NEET सम्बंधित तथ्य Anya तथ्य

प्रश्न-पैटर्न, भार-विभाजन व बार-बार दोहराई जाने वाली अवधारणाएँ।

प्रश्न-पैटर्न व भार-विभाजन
  • 2014–2025 में यह अध्याय हर वर्ष प्रश्न देता रहा है — 2023, 2024 व 2022 में सर्वाधिक (5–9 प्रश्न)।
  • प्रश्न मुख्यतः बहु-चरणीय अभिक्रिया अनुक्रम, नामित अभिक्रियाएँ, तथा अम्लता व परीक्षणों पर केंद्रित।
बार-बार पूछी जाने वाली अवधारणाएँ
  • अपचायक-चयनात्मकता: DIBAL-H (एस्टर→ऐल्डिहाइड), LiAlH₄ (पूर्ण अपचयन), NaBH₄ (केवल कार्बोनिल), H₂/Pd-BaSO₄ (ऐसिल क्लोराइड→ऐल्डिहाइड)।
  • परीक्षण: टॉलेन/फेहलिंग (ऐल्डिहाइड), आयोडोफॉर्म (CH₃CO–), 2,4-DNP (सभी कार्बोनिल), NaHCO₃ (कार्बोक्सिलिक अम्ल)।
  • नामित अभिक्रियाएँ: रोज़ेनमुंड, एटार्ड, गैटरमन-कोच, रीमर-टीमन, कैनिज़ारो, क्लेमेंसन, HVZ, वोल्फ-किश्नर, कोल्बे वैद्युत-अपघटन।
  • अम्लता: EWG अम्लता बढ़ाता है, EDG घटाता है; −I प्रभाव α > β > γ क्रम में घटता है।
  • ऐल्डोल संघनन — α-H अनिवार्य; कैनिज़ारो — α-H रहित ऐल्डिहाइड।
तैयारी हेतु सुझाव: इन प्रश्नों को बिना उत्तर देखे हल करें, गलती होने पर संबंधित अनुभाग में वापस जाएँ।

अन्य NEET संबंधित तथ्य

तुलनात्मक
  • न्यूक्लियोफिलिक योगात्मक अभिक्रियाशीलता: HCHO > अन्य ऐल्डिहाइड > कीटोन (त्रिविम + इलेक्ट्रॉनिक कारण)।
  • +I समूह क्रियाशीलता घटाता है, −I बढ़ाता है — ट्राइक्लोरोऐसीटैल्डिहाइड (क्लोरल) अत्यधिक क्रियाशील।
तथ्य
  • कार्बोनिल कार्बन sp², त्रिकोणीय समतलीय, C=O बंध ध्रुवीय (C δ+, O δ−)।
  • टॉलेन परीक्षण: [Ag(NH₃)₂]⁺ → Ag (सिल्वर मिरर) — कीटोन नहीं देते।
तुलनात्मक
  • ऐसीटल (दो मोल ऐल्कोहॉल) बनाम हेमीऐसीटल (एक मोल) — दोनों में अंतर सुरक्षा-समूह अनुप्रयोग में महत्वपूर्ण।
  • ऐल्डोल (समान अभिकारक) बनाम क्रॉस-ऐल्डोल (भिन्न अभिकारक) — मिश्रण की जटिलता में अंतर।
तथ्य
  • पर्किन संघनन — ऐरोमैटिक ऐल्डिहाइड + ऐसिटिक एनहाइड्राइड → सिनैमिक अम्ल-प्रकार उत्पाद।
  • फॉर्मिक अम्ल (pKa 3.75) ऐसिटिक अम्ल (pKa 4.76) से अधिक प्रबल — कोई +I समूह नहीं।
तुलनात्मक
  • कार्बोक्सिलिक अम्ल > फीनॉल (अम्लता) — कार्बोक्सिलेट आयन अधिक स्थायी (दो समतुल्य O पर ऋणावेश)।
  • NaHCO₃ परीक्षण — कार्बोक्सिलिक अम्ल CO₂ देता है, फीनॉल नहीं।
रणनीति
  • विगत वर्षों में सर्वाधिक दोहराए गए तीन विषय: (1) अपचायक-चयनात्मकता, (2) विभेदक परीक्षण, (3) अम्लता व pKa।
तथ्य
  • वुल्फ-किश्नर (क्षारीय) बनाम क्लेमेंसन (अम्लीय) — दोनों कार्बोनिल को CH₂ में बदलते हैं, अभिकर्मक का चुनाव यौगिक की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है।
  • एटार्ड अभिक्रिया — टॉलूईन → बेन्ज़ैल्डिहाइड (केवल एक H का ऑक्सीकरण, अम्ल तक नहीं बढ़ता)।
तुलनात्मक
  • कार्बोक्सिलिक अम्ल विरचन — प्राथमिक ऐल्कोहॉल ऑक्सीकरण, नाइट्राइल जल-अपघटन, ग्रीन्यार + CO₂ (एक कार्बन बढ़ता है)।
  • कीटो-एनॉल चलावयवता — α-H युक्त कार्बोनिल यौगिकों में गतिक साम्य; 1,3-डाइकार्बोनिल यौगिकों में एनॉल रूप अधिक स्थायी।

ऐल्डिहाइड, कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल — NCERT कक्षा 12, अध्याय 8 · संपूर्ण अध्ययन नोट्स, सूत्र, आरेख, सभी पाठ्यनिहित तथा अभ्यास प्रश्नों के हल, तथा NEET में पूछे गए सभी प्रश्न सहित।

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