अध्याय 13 — दोलन | सम्पूर्ण अध्ययन
कक्षा-11 • भौतिकी • अध्याय 13

दोलन (Oscillations)

आवर्ती एवं दोलनीय गति, आवर्तकाल व आवृत्ति, सरल आवर्त गति (SHM), विस्थापन-वेग-त्वरण के संबंध, SHM का बल नियम, ऊर्जा का विवेचन तथा कमानी-गुटका और सरल लोलक — सम्पूर्ण व्याख्या, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।

📘 NCERT आधारित 🎯 NEET/JEE फोकस 📝 7+ PYQs

13.1 भूमिका

दोलन गति का परिचय एवं दैनिक जीवन में उपस्थिति

हम अपने दैनिक जीवन में विभिन्न प्रकार की गतियाँ देखते हैं। सरल रैखिक गति और प्रक्षेप्य की गति अनावर्ती होती हैं। एकसमान वर्तुल गति तथा ग्रहों की कक्षीय गति आवर्ती होती हैं — निश्चित समय-अंतराल के पश्चात् गति की पुनरावृत्ति होती है। पालने अथवा झूले पर झूलना, दीवार-घड़ी का लोलक — इन दोनों में वस्तु किसी माध्य स्थिति के इधर-उधर गति करती है। इस प्रकार की अग्र-पश्च (आगे-पीछे) आवर्ती गति को दोलन गति कहते हैं।

दोलन गति का अध्ययन भौतिकी के लिए आधारभूत है — वाद्य यंत्रों (सितार, गिटार, वायलिन) में कंपायमान डोरियाँ, ढोल की झिल्लियाँ, टेलीफोन व ध्वनि विस्तारकों के स्पीकरों में डायफ्राम, ठोस पदार्थ में परमाणुओं का कंपन (जिसकी औसत ऊर्जा तापमान के समानुपाती होती है), तथा AC पावर की दोलायमान वोल्टता — ये सभी दोलन गति के उदाहरण हैं। किसी आवर्ती/दोलन गति के विशेष विवरण के लिए आवर्तकाल, आवृत्ति, विस्थापन, आयाम और कला जैसी मूल संकल्पनाओं की आवश्यकता होती है।

NEET फोकस
  • दोलन गति — अग्र-पश्च आवर्ती गति (माध्य स्थिति के इधर-उधर)
  • दोलन गति के उदाहरण — झूला, लोलक, वाद्य यंत्रों की डोरियाँ, परमाण्विक कंपन
  • आवश्यक संकल्पनाएँ — आवर्तकाल, आवृत्ति, विस्थापन, आयाम, कला

13.2 दोलन और आवर्ती गति

आवर्तकाल, आवृत्ति, विस्थापन एवं फूरिए प्रमेय

कोई गति जो निश्चित अंतराल के बाद पुनरावृत्ति करती है, आवर्ती गति कहलाती है। सामान्यतः आवर्ती गति करने वाले पिंड की एक संतुलन अवस्था होती है जो उसके गति के पथ में स्थित होती है — इस अवस्था में पिंड पर लगने वाला कुल बाह्य बल शून्य होता है। यदि पिंड को इस अवस्था से थोड़ा विस्थापित करें, तो एक बल कार्य करने लगता है जो पिंड को पुनः संतुलन-अवस्था की ओर ले जाने का प्रयास करता है — फलस्वरूप पिंड में दोलन या कंपन उत्पन्न हो जाता है।

महत्वपूर्ण: प्रत्येक दोलन गति आवर्ती होती है, परंतु प्रत्येक आवर्ती गति दोलनीय नहीं होती (जैसे वृत्तीय गति आवर्ती है परंतु दोलनीय नहीं)। दोलन एवं कंपन में मुख्य अंतर नहीं है — साधारणतः जब आवृत्ति का मान कम होता है तो गति को दोलनीय कहते हैं (जैसे वृक्ष की टहनी की दोलन गति), और जब आवृत्ति अधिक हो तो कंपन कहते हैं (जैसे संगीत वाद्य के तार का कंपन)।

सरल आवर्त गति दोलनीय गति का एक सरल रूप है — यह तब होता है जब किसी दोलनीय वस्तु के ऊपर लगने वाला बल संतुलन अवस्था में इसके विस्थापन के समानुपाती होता है, और यह बल सदैव संतुलन अवस्था की ओर निर्दिष्ट होता है। व्यावहारिक रूप में सभी दोलनीय वस्तुएँ घर्षण व अन्य क्षयकारी बलों के कारण अवमंदन के चलते अंततः अपनी संतुलन अवस्था प्राप्त कर लेती हैं; परंतु बाह्य आवर्ती बल लगाकर वस्तु को दोलनीय अवस्था में रखा जा सकता है।

13.2.1 आवर्तकाल तथा आवृत्ति

वह न्यूनतम समय अंतराल जिसके पश्चात् गति की पुनरावृत्ति होती है, इसका आवर्तकाल (T) कहलाता है। इसका SI मात्रक सेकंड है। आवर्तकाल के व्युत्क्रम से हमें प्रति इकाई समय में दोलनों की संख्या प्राप्त होती है — यह राशि आवृत्ति (ν) कहलाती है।

आवृत्ति और आवर्तकाल में संबंध ν = 1/T   (13.1)

आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज़ (Hz) है — रेडियो तरंगों के आविष्कारक हेनरिख रुडोल्फ हर्ट्ज़ (1857-1894) के नाम पर।

हर्ट्ज़ की परिभाषा 1 हर्ट्ज़ = 1 Hz = 1 दोलन प्रति सेकंड = 1 s⁻¹   (13.2)
उदाहरण 13.1: कोई मानव हृदय एक मिनट में औसतन 75 बार धड़कन करता है। इसकी आवृत्ति तथा आवर्तकाल परिकलित कीजिए।

हल: आवृत्ति = 75/(60 s) = 1.25 s⁻¹
आवर्तकाल T = 1/(1.25 s⁻¹) = 0.8 s

13.2.2 विस्थापन

इस अध्याय में विस्थापन पद का उपयोग व्यापक अर्थ में किया जाता है — यह किसी भी विचारणीय भौतिक गुण में समय के साथ परिवर्तन को निरूपित करता है (जैसे किसी दोलायमान सरल लोलक के लिए ऊर्ध्वाधर से कोण, a.c. परिपथ में संधारित्र के सिरों के बीच "वोल्टता", ध्वनि तरंगों में "दाब", प्रकाश तरंगों में विद्युत/चुंबकीय क्षेत्र आदि)। विस्थापन को सदैव समय के गणितीय फलन द्वारा निरूपित किया जाता है, और आवर्ती गतियों में यह फलन समय का आवर्ती होता है।

आवर्ती फलन का रूप f(t) = A cos ωt   तथा   T = 2π/ω  (13.3a, 13.3b)

ज्या (sin) एवं कोज्या (cos) फलनों का घात संचय भी आवर्ती फलन होता है, जिसका आवर्तकाल T होता है:

f(t) = A sin ωt + B cos ωt = D sin(ωt + φ)
जहाँ D = √(A²+B²), φ = tan⁻¹(B/A)  (13.3c, 13.3d)
फूरिए प्रमेय (जीन बापटिस्ट जोसेफ फूरिए, 1768-1830): किसी भी आवर्ती फलन को उचित गुणांक वाले विभिन्न आवर्तकाल के ज्या व कोज्या फलनों के अध्यारोपण द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।
उदाहरण 13.2: निम्नलिखित समय के फलनों में कौन (a) आवर्ती तथा (b) अनावर्ती गति को निरूपित करते हैं? प्रत्येक आवर्ती गति का आवर्तकाल लिखिए [ω कोई धनात्मक नियतांक है]।
(i) sin ωt + cos ωt   (ii) sin ωt + cos 2ωt + sin 4ωt   (iii) e⁻ωt   (iv) log(ωt)

हल:
(i) आवर्ती फलन है, इसे √2 sin(ωt+π/4) रूप में लिख सकते हैं। आवर्तकाल T = 2π/ω।
(ii) आवर्ती है; प्रत्येक पद भिन्न कोणीय आवृत्ति का आवर्ती फलन है। sinωt का T₀=2π/ω; cos2ωt का T₀/2; sin4ωt का T₀/4 है — इनका सार्व-आवर्तकाल T₀=2π/ω है।
(iii) e⁻ωt अनावर्ती है — समय के साथ एकदिष्टत: घटता है और t→∞ पर शून्य हो जाता है, कभी पुनरावृत्ति नहीं करता।
(iv) log(ωt) भी अनावर्ती है — एकदिष्टत: बढ़ता है और t→∞ पर अपसारित हो जाता है; यह किसी भौतिक विस्थापन को निरूपित नहीं कर सकता।
NEET फोकस
  • आवर्तकाल T — एक दोलन का समय; SI मात्रक सेकंड
  • आवृत्ति ν = 1/T; SI मात्रक हर्ट्ज़ (Hz)
  • प्रत्येक दोलन गति आवर्ती है, परंतु प्रत्येक आवर्ती गति दोलनीय नहीं
  • फूरिए प्रमेय — आवर्ती फलनों का sin/cos अध्यारोपण

13.3 सरल आवर्त गति (SHM)

SHM की परिभाषा, आयाम, कोणीय आवृत्ति एवं कला

x-अक्ष के मूल बिंदु पर +A और −A चरम सीमाओं के मध्य अग्र-पश्च कंपन करने वाले किसी कण की दोलायमान गति आवर्त गति कहलाती है, यदि मूल बिंदु से कण का विस्थापन x समय के साथ निम्न समीकरण अनुसार परिवर्तित हो:

x(t) = A cos(ωt + φ)   (13.4)

यहाँ A, ω तथा φ स्थिरांक हैं। अतः प्रत्येक आवर्त गति सरल आवर्त गति (SHM) नहीं है; केवल वही आवर्त गति जिसमें विस्थापन-समय का फलन ज्यावक्रीय है, सरल आवर्त गति होती है।

प्रतीकअर्थ
x(t)विस्थापन, समय t के फलन के रूप में
Aआयाम — कण के अधिकतम विस्थापन का परिमाण (सदैव धनात्मक)
ωकोणीय आवृत्ति — मात्रक rad/s; ω=2π/T
(ωt+φ)कला (phase) — समय पर आश्रित राशि
φकला स्थिरांक (t=0 पर कला का मान, इसे कला-कोण भी कहते हैं)

कोई फलन f(t) आवर्तकाल T का आवर्ती तब होता है जब f(t)=f(t+T)। चूँकि 2π आवर्तकाल वाला कोज्या फलन आवर्ती है, ω(t+T)=ωt+2π, अतः ω = 2π/T — इसे SHM की कोणीय आवृत्ति कहते हैं। दो सरल आवर्त गतियों के A तथा φ समान लेकिन ω भिन्न हो सकते हैं, अथवा ω,φ समान लेकिन A भिन्न हो सकते हैं, अथवा A,ω समान लेकिन φ (कला-कोण) भिन्न हो सकता है।

उदाहरण 13.3: समय के निम्नलिखित फलनों में से कौन (a) सरल आवर्त गति तथा (b) आवर्ती गति को निरूपित करता है परंतु सरल आवर्त गति नहीं? प्रत्येक का आवर्तकाल निकालिए।
(a) sin ωt − cos ωt   (b) sin²ωt

हल:
(a) sinωt − cosωt = √2 sin(ωt − π/4) — यह SHM है, T = 2π/ω, कला-कोण (−π/4) rad।
(b) sin²ωt = ½ − ½cos2ωt — यह आवर्ती है (T=π/ω), किंतु संतुलन बिंदु शून्य के बदले ½ पर SHM दर्शाता है (कुल फलन SHM नहीं है क्योंकि इसमें अचर पद ½ जुड़ा है)।
NEET फोकस
  • SHM का पारिभाषिक समीकरण — x(t) = A cos(ωt+φ)
  • आयाम A — सदैव धनात्मक
  • कोणीय आवृत्ति — ω = 2π/T = 2πν
  • केवल ज्यावक्रीय (sinusoidal) आवर्ती गति ही SHM होती है

13.4 सरल आवर्त गति तथा एकसमान वृत्तीय गति

संदर्भ वृत्त विधि एवं प्रक्षेप का उपयोग

वृत्त के व्यास पर एकसमान वर्तुल गति का प्रक्षेप सरल आवर्त गति करता है। मान लीजिए कोई कण P, त्रिज्या A के किसी वृत्त पर कोणीय चाल ω से एकसमानीय गति कर रहा है। कण की प्रारंभिक 'स्थिति सदिश' t=0 पर धनात्मक x-अक्ष के साथ कोण φ बनाता है। t समय बाद यह अगला कोण ωt पूरा करता है। x-अक्ष पर स्थिति सदिश OP के प्रक्षेप की स्थिति व्यक्त होती है:

x(t) = A cos(ωt + φ)

यह SHM का पारिभाषिक समीकरण है। कण P तथा वह वृत्त जिस पर यह गति करता है, क्रमशः संदर्भ कण तथा संदर्भ वृत्त कहलाते हैं। y-अक्ष पर प्रक्षेप y(t)=A sin(ωt+φ) भी SHM है जिसका आयाम समान है लेकिन कला π/2 से भिन्न है।

ध्यान दें: रैखिक SHM में किसी कण पर लगता बल वृत्तीय गति में आवश्यक अभिकेंद्रीय बल से भिन्न है — वृत्तीय गति में बल सदैव केंद्र की ओर निर्देशित होता है जबकि SHM में बल माध्य स्थिति की ओर (रेखा के अनुदिश) निर्देशित होता है।
उदाहरण 13.4: दो वर्तुल गतियाँ दी गई हैं (a) त्रिज्या a, T=4s, आरंभिक स्थिति x-अक्ष से 45°=π/4; (b) त्रिज्या b, T=30s, आरंभिक स्थिति x-अक्ष से 90°=π/2। प्रत्येक स्थिति में घूर्णी कण P के त्रिज्या सदिश के x-प्रक्षेप की SHM ज्ञात कीजिए।

हल:
(a) x(t) = A cos[(2π/T)t + π/4] = A cos[(π/2)t + π/4], T=4s का यह A आयाम, 4s आवर्तकाल तथा प्रारंभिक कला π/4 की SHM है।
(b) x(t) = B cos[(2π/T)t + π/2] = B sin[(π/15)t], T=30s का यह B आयाम, 30s आवर्तकाल तथा प्रारंभिक कला −π/2 rad की SHM है।
NEET फोकस
  • वृत्त के व्यास पर एकसमान वर्तुल गति का प्रक्षेप — SHM
  • संदर्भ कण — वृत्त पर गतिमान कण P; संदर्भ वृत्त — त्रिज्या A का वृत्त
  • x-प्रक्षेप — Acos(ωt+φ); y-प्रक्षेप — Asin(ωt+φ)

13.5 सरल आवर्त गति में वेग तथा त्वरण

वेग-त्वरण के व्यंजक एवं कलांतर

एकसमानीय वर्तुल गति करते किसी कण की चाल v = ωA होती है। संदर्भ वृत्त की विधि प्रयोग करने पर, समय t पर कण P′ का वेग:

वेग v(t) = −ωA sin(ωt + φ)   (13.9)
जहाँ v(t) = dx(t)/dt  (13.10)
त्वरण a(t) = −ω²A cos(ωt + φ) = −ω²x(t)   (13.11)
जहाँ a(t) = dv(t)/dt  (13.12)
महत्वपूर्ण परिणाम: सरल आवर्त गति में कण का त्वरण इसके विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है और सदैव विपरीत चिह्न का (माध्य स्थिति की ओर निर्दिष्ट) होता है — x(t)>0 के लिए a(t)<0 तथा x(t)<0 के लिए a(t)>0। विस्थापन आलेख के सापेक्ष वेग आलेख की कला में π/2 का अंतर, तथा त्वरण आलेख की कला में π का अंतर होता है।
राशिमाध्य स्थिति (x=0) परचरम स्थिति (x=±A) पर
विस्थापनशून्यअधिकतम (A)
वेगअधिकतम (ωA)शून्य
त्वरणशून्यअधिकतम (ω²A)
उदाहरण 13.5: कोई पिंड x=(5.0 m)cos[(2π rad/s)t + π/4] के अनुसार SHM करता है। t=1.5s पर विस्थापन, वेग तथा त्वरण परिकलित कीजिए।

हल: ω=2π s⁻¹, T=1s
(a) विस्थापन = 5.0cos(3π+π/4) = −3.535 m
(b) वेग = −(5.0)(2π)sin(3π+π/4) = 22 m/s
(c) त्वरण = −(2π)²×(−3.535) = 130 m/s²
NEET फोकस
  • वेग — v(t) = −ωA sin(ωt+φ); vmax = ωA (माध्य पर)
  • त्वरण — a(t) = −ω²x(t); amax = ω²A (चरम पर)
  • वेग व त्वरण के बीच कलांतर — π/2
  • विस्थापन व त्वरण के बीच कलांतर — π

13.6 सरल आवर्त गति के लिए बल का नियम

प्रत्यानयन बल, कमानी स्थिरांक एवं ω का संबंध

न्यूटन के गति के दूसरे नियम तथा त्वरण के व्यंजक (समीकरण 13.11) का प्रयोग करने पर:

F(t) = ma = −mω²x(t) = −k x(t)
जहाँ k = mω²  या  ω = √(k/m)  (13.13, 13.14a, 13.14b)

त्वरण की तरह, बल हमेशा माध्य स्थिति की ओर निर्दिष्ट रहता है — इसलिए यह SHM में प्रत्यानयन बल कहलाता है। SHM को दो प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है: विस्थापन के लिए समीकरण (13.4) द्वारा, अथवा समीकरण (13.13) द्वारा जो बल का नियम प्रदान करता है। बल x(t) के रैखिकी समानुपाती होने के कारण इस प्रकार के दोलक को रैखिक आवर्ती दोलक कहते हैं; यदि बल में x², x³ आदि के समानुपाती पद हों तो उन्हें अरैखिक दोलक कहते हैं।

उदाहरण 13.6: कमानी स्थिरांक k की दो सर्वसम कमानियाँ M संहति के किसी गुटके तथा स्थिर आधारों से जुड़ी हैं (बीच में गुटका, दोनों ओर दीवारें)। दर्शाइए कि गुटका SHM करता है, आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।

हल: गुटके को दाईं ओर x दूरी तक विस्थापित करने पर बाईं कमानी दीर्घित होकर F₁=−kx बल लगाती है (माध्य की ओर खींचती है), दाईं कमानी संपीडित होकर F₂=−kx बल लगाती है (माध्य की ओर धकेलती है)। नेट बल F=−2kx।
अतः गति SHM है, आवर्तकाल T = 2π√(m/2k)
NEET फोकस
  • SHM का बल नियम — F(t) = −kx(t)
  • कोणीय आवृत्ति — ω = √(k/m); आवर्तकाल — T = 2π√(m/k)
  • k = mω² — बल स्थिरांक (कमानी स्थिरांक)
  • बल रैखिक → रैखिक दोलक; x², x³ आदि पद → अरैखिक दोलक
  • दोनों ओर की कमानियाँ — नेट बल −2kx; आवर्तकाल 2π√(m/2k)

13.7 सरल आवर्त गति में ऊर्जा

गतिज, स्थितिज एवं कुल ऊर्जा

SHM करते कण की स्थितिज तथा गतिज ऊर्जाएँ दोनों शून्य तथा अपने अधिकतम परिमाण के बीच विचरण करती हैं।

गतिज ऊर्जा K = ½mv² = ½mω²A²sin²(ωt+φ) = ½kA²sin²(ωt+φ)  (13.15)

K अधिकतम माध्य स्थिति पर तथा शून्य चरम विस्थापन पर होती है — इसका आवर्तकाल T/2 है।

स्थितिज ऊर्जा U(x) = ½kx² = ½kA²cos²(ωt+φ)  (13.16, 13.17)

U भी आवर्ती है (आवर्तकाल T/2), शून्य माध्य स्थिति में तथा अधिकतम चरम विस्थापनों पर होती है।

कुल ऊर्जा E = U + K = ½kA²  (सदैव अचर, कालाश्रित नहीं)  (13.18)

जैसा कि संरक्षी बलों के अधीन गतियों के लिए अपेक्षित है, किसी भी सरल आवर्ती दोलक की कुल यांत्रिक ऊर्जा कालाश्रित नहीं होती यद्यपि K और U अलग-अलग परिवर्तित होते रहते हैं।

उदाहरण 13.7: 1 kg संहति के गुटके को 50 N/m कमानी-स्थिरांक की कमानी से बाँधा गया है। घर्षणहीन पृष्ठ पर x=0 से x=10cm तक खींचकर छोड़ा जाता है। जब गुटका माध्य-स्थिति से 5cm दूर है, तब गतिज, स्थितिज तथा कुल ऊर्जाएँ ज्ञात कीजिए।

हल: ω=√(k/m)=√(50/1)=7.07 rad/s
x(t)=0.1cos(7.07t); 5cm पर 0.05=0.1cos(7.07t) → cos(7.07t)=0.5, sin(7.07t)=0.866
वेग = 0.1×7.07×0.866 = 0.61 m/s
गतिज ऊर्जा = ½×1×(0.6123)² = 0.19 J
स्थितिज ऊर्जा = ½×50×(0.05)² = 0.0625 J
कुल ऊर्जा = 0.19+0.0625 = 0.25 J = ½×50×(0.1)²
राशिमाध्य स्थिति (x=0) परचरम स्थिति (x=±A) पर
गतिज ऊर्जा (K)अधिकतम (½kA²)शून्य
स्थितिज ऊर्जा (U)शून्यअधिकतम (½kA²)
कुल ऊर्जा (E=K+U)सदैव नियत (½kA²)
NEET फोकस
  • गतिज ऊर्जा K = ½kA²sin²(ωt+φ)
  • स्थितिज ऊर्जा U = ½kA²cos²(ωt+φ)
  • कुल ऊर्जा E = ½kA² (सदैव अचर)
  • K व U का आवर्तकाल — T/2 (मूल आवर्तकाल का आधा)
  • x=A/2 पर U = E/4 तथा K = 3E/4

13.8 सरल आवर्त गति निष्पादित करने वाले कुछ निकाय

सरल लोलक तथा अन्य व्यावहारिक निकाय

निरपेक्षतः शुद्ध SHM के कोई भौतिक उदाहरण नहीं हैं — व्यावहारिक जीवन में हम कुछ निश्चित परिस्थितियों में लगभग सरल आवर्त गति करने वाले निकाय देखते हैं।

13.8.1 सरल लोलक

गैलीलियो ने चर्च में दोलायमान झाड़फानूस का आवर्तकाल अपनी नाड़ी की स्पंद गति द्वारा मापा और निष्कर्ष निकाला कि गति आवर्ती है। यह निकाय लोलक का ही एक प्रकार है। मध्यमान स्थिति से लघु विस्थापनों के लिए इस लोलक की आवर्त गति सरल आवर्त गति होती है।

m द्रव्यमान के गोलक, L लंबाई की द्रव्यमानहीन डोरी से लटके लोलक के लिए, डोरी ऊर्ध्वाधर से θ कोण बनाती है। धुराग्र के सापेक्ष बल आघूर्ण केवल स्पर्श रेखीय बल mg sinθ के कारण होता है:

बल आघूर्ण τ = −L(mg sinθ)  (13.19)
घूर्णी गति के नियम τ=Iα से   α = −(mgL/I) sinθ  (13.22)

लघु θ के लिए sinθ≈θ (रेडियन में), अतः:

लघु कोण सन्निकटन α = −(mgL/I) θ  (13.24)
ω = √(mgL/I)  तथा  T = 2π√(I/mgL)  (13.25)

डोरी द्रव्यमानहीन होने से जड़त्व आघूर्ण I = mL², इसलिए सरल लोलक के आवर्तकाल का सुपरिचित सूत्र:

T = 2π√(L/g)  (13.26)
महत्वपूर्ण: सरल लोलक का आवर्तकाल द्रव्यमान m पर निर्भर नहीं करता — यह केवल लंबाई L तथा गुरुत्वीय त्वरण g पर निर्भर करता है। यही कारण है कि भिन्न-भिन्न द्रव्यमान के लोलक समान आवर्तकाल से दोलन करते हैं (बशर्ते लंबाई समान हो)।
उदाहरण 13.8: उस सरल लोलक की लंबाई क्या है, जो हर सेकंड के बाद टिक करता है (अर्थात् आवर्तकाल T=2s)?

हल: T=2π√(L/g) से L = gT²/4π²
g=9.8 m/s², T=2s: L = 9.8×4/(4π²) = 1 m
NEET फोकस
  • सरल लोलक का आवर्तकाल — T = 2π√(L/g)
  • आवर्तकाल द्रव्यमान m पर निर्भर नहीं
  • SHM केवल लघु कोणीय विस्थापन के लिए (sinθ≈θ)
  • सेकंड लोलक (T=2s) की लंबाई — 1 m

🎯 एक-पंक्ति तथ्य — त्वरित पुनरावृत्ति

Quick Revision Facts — सभी महत्वपूर्ण बिंदु एक स्थान पर

  1. वह गति जो स्वयं को दोहराती है आवर्ती गति कहलाती है; निश्चित समय-अंतराल पर गति की पुनरावृत्ति होती है।
  2. आवर्तकाल T — एक दोलन/चक्र पूरा करने में लगा न्यूनतम समय; SI मात्रक सेकंड।
  3. आवृत्ति ν = 1/T, मात्रक हर्ट्ज़ (Hz); 1 Hz = 1 दोलन प्रति सेकंड।
  4. प्रत्येक दोलन गति आवर्ती होती है, परंतु प्रत्येक आवर्ती गति दोलनीय नहीं होती (जैसे वृत्तीय गति)।
  5. आवृत्ति कम → गति को दोलनीय कहते हैं; आवृत्ति अधिक → कंपन कहते हैं।
  6. SHM दोलनीय गति का सरल रूप है जिसमें बल विस्थापन के समानुपाती व सदैव माध्य स्थिति की ओर निर्दिष्ट होता है।
  7. SHM का पारिभाषिक समीकरण: x(t) = A cos(ωt + φ)।
  8. A (आयाम) = कण के अधिकतम विस्थापन का परिमाण, सदैव धनात्मक लिया जाता है।
  9. ω (कोणीय आवृत्ति) = 2π/T = 2πν, मात्रक rad/s।
  10. (ωt+φ) को कला कहते हैं; t=0 पर कला का मान φ (कला स्थिरांक) कहलाता है।
  11. केवल वही आवर्ती गति SHM है जिसका विस्थापन-समय फलन ज्यावक्रीय (sinusoidal) हो।
  12. फूरिए प्रमेय: कोई भी आवर्ती फलन विभिन्न आवर्तकाल के sin व cos फलनों के अध्यारोपण से व्यक्त किया जा सकता है।
  13. वृत्त के व्यास पर एकसमान वर्तुल गति का प्रक्षेप SHM होता है — इसे संदर्भ वृत्त विधि कहते हैं।
  14. वेग: v(t) = −ωA sin(ωt+φ); अधिकतम चाल = ωA (माध्य स्थिति पर), शून्य चरम स्थिति पर।
  15. त्वरण: a(t) = −ω²x(t) — त्वरण विस्थापन के अनुक्रमानुपाती व सदैव माध्य स्थिति की ओर निर्दिष्ट।
  16. विस्थापन व वेग आलेख में π/2 का कला-अंतर; विस्थापन व त्वरण आलेख में π का कला-अंतर।
  17. SHM के लिए बल का नियम: F(t) = −kx(t), जहाँ k = mω² (कमानी/बल स्थिरांक)।
  18. SHM की कोणीय आवृत्ति ω = √(k/m); आवर्तकाल T = 2π√(m/k)।
  19. बल विस्थापन के रैखिक समानुपाती → रैखिक दोलक; x²,x³ आदि पद हों तो अरैखिक दोलक।
  20. गतिज ऊर्जा K = ½kA²sin²(ωt+φ); अधिकतम माध्य स्थिति पर, शून्य चरम विस्थापन पर।
  21. स्थितिज ऊर्जा U = ½kA²cos²(ωt+φ) = ½kx²; अधिकतम चरम विस्थापन पर, शून्य माध्य स्थिति पर।
  22. K व U दोनों का आवर्तकाल T/2 होता है (मूल दोलन के आवर्तकाल T का आधा)।
  23. कुल ऊर्जा E = ½kA² — सदैव अचर (कालाश्रित नहीं), संरक्षी बल के कारण।
  24. दो कमानियों (स्थिरांक k प्रत्येक) से जुड़े गुटके पर नेट प्रत्यानयन बल = −2kx; आवर्तकाल T=2π√(m/2k)।
  25. सरल लोलक की गति लघु कोणीय विस्थापन के लिए ही (सन्निकट) SHM होती है (sinθ≈θ की सन्निकटि)।
  26. सरल लोलक का आवर्तकाल: T = 2π√(L/g) — यह द्रव्यमान m पर निर्भर नहीं करता।
  27. निरपेक्षतः शुद्ध SHM का कोई भौतिक उदाहरण नहीं है — व्यवहार में निकाय केवल निश्चित परिस्थितियों में सन्निकट SHM करते हैं।
  28. घर्षण/क्षयकारी बलों के कारण वास्तविक दोलक अवमंदित होते हैं; बाह्य आवर्ती बल से प्रणोदित (forced) दोलन बनाए रखे जा सकते हैं।
  29. ω के दिए मान की रैखिक SHM के लिए दो आरंभिक शर्तें आवश्यक हैं: (i) आरंभिक स्थिति व वेग, या (ii) आयाम व कला, या (iii) ऊर्जा व कला।
  30. SHM का विस्थापन तीन समतुल्य रूपों में लिखा जा सकता है: x=Acosωt+Bsinωt; x=Acos(ωt+α); x=Bsin(ωt+β)।

✍️ अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल (13.1 – 13.18)

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13.1 नीचे दिए गए उदाहरणों में कौन आवर्ती गति को निरूपित करता है? (i) तैराक द्वारा नदी पार करना और वापसी यात्रा; (ii) स्वतंत्रतापूर्वक लटकाया गया दंड चुंबक विस्थापित कर छोड़ना; (iii) द्रव्यमान केंद्र के परितः घूर्णी हाइड्रोजन अणु; (iv) कमान से छोड़ा गया तीर।

(i) यह गति आवर्ती है — तैराक बार-बार एक तट से दूसरे तट और वापस जाने की प्रक्रिया दोहराता है, यह एक नियमित समय-अंतराल पर पुनरावृत्ति करती है।

(ii) यह गति आवर्ती है — दंड चुंबक विस्थापित करने पर अपनी संतुलन (N-S) स्थिति के इधर-उधर दोलन करता है, जो एक निश्चित समय-अंतराल पर स्वयं को दोहराता है (यह लगभग SHM भी है)।

(iii) यह गति आवर्ती है — घूर्णन गति स्वयं को प्रत्येक चक्र के बाद दोहराती है।

(iv) यह गति आवर्ती नहीं है — तीर एक बार कमान से छूटने के बाद केवल आगे की ओर गति करता है और अपनी स्थिति में पुनरावृत्ति नहीं करता; यह एक अनावर्ती (एक बार की) गति है।

(i), (ii), (iii) आवर्ती गति हैं; (iv) आवर्ती गति नहीं है।
13.2 निम्न में कौन (लगभग) SHM तथा कौन आवर्ती परंतु SHM नहीं? (i) पृथ्वी का अपने अक्ष के परितः घूर्णन; (ii) U-नली में दोलायमान पारे का स्तंभ; (iii) चिकने वक्रीय कटोरे में बॉल बेयरिंग; (iv) बहुपरमाणुक अणु का व्यापक कंपन।

(i) पृथ्वी का घूर्णन एक आवर्ती गति है परंतु SHM नहीं — यह एकसमान वर्तुल गति है, इसमें कोई माध्य स्थिति के इधर-उधर दोलन (आगे-पीछे गति) नहीं होता।

(ii) U-नली में पारे के स्तंभ की गति (लगभग) SHM है — जब पारे को साम्यावस्था से विस्थापित किया जाता है, तो गुरुत्वीय पुनर्स्थापन बल विस्थापन के अनुक्रमानुपाती होता है।

(iii) चिकने वक्रीय कटोरे में बॉल बेयरिंग की गति (लगभग) SHM है, बशर्ते विस्थापन/कोण छोटा हो — यह ठीक सरल लोलक जैसी स्थिति है।

(iv) बहुपरमाणुक अणु का व्यापक कंपन आवर्ती है परंतु SHM नहीं — इसमें कई भिन्न आवृत्तियों के सामान्य विधाओं का संयोजन शामिल होता है।

SHM (लगभग): (ii) व (iii); आवर्ती परंतु SHM नहीं: (i) व (iv)
13.3 किसी कण की रैखिक गति के लिए चार x-t आरेखों में कौन आवर्ती गति का निरूपण करता है? उसका आवर्तकाल क्या है?

(a) यह आरेख आवर्ती गति नहीं दर्शाता — वक्र समय के साथ लगातार बढ़ता है, इसमें पुनरावृत्ति नहीं होती।

(b) यह आरेख आवर्ती गति दर्शाता है — पैटर्न प्रत्येक 2 सेकंड के बाद स्वयं को दोहराता है। आवर्तकाल T = 2 s।

(c) यह आरेख आवर्ती गति नहीं दर्शाता — गति का स्वरूप प्रत्येक अंतराल में बिल्कुल समान (सर्वसम) नहीं है।

(d) यह आरेख आवर्ती गति दर्शाता है — ज्यावक्रीय पैटर्न प्रत्येक 2 सेकंड के बाद स्वयं को दोहराता है। आवर्तकाल T = 2 s।

आरेख (b) व (d) आवर्ती गति दर्शाते हैं, दोनों का आवर्तकाल T = 2 सेकंड है।
13.4 समय के फलनों में कौन (a) SHM (b) आवर्ती परंतु SHM नहीं (c) अनावर्ती? (a) sinωt−cosωt (b) sin³ωt (c) 3cos(π/4−2ωt) (d) cosωt+cos3ωt+cos5ωt (e) exp(−ω²t²) (f) 1+ωt+ω²t²

(a) sinωt−cosωt: = √2 sin(ωt−π/4) — एकल ज्यावक्रीय। SHM है, T = 2π/ω।

(b) sin³ωt: = (3sinωt − sin3ωt)/4 — दो भिन्न आवृत्तियों का संयोजन। आवर्ती है परंतु SHM नहीं, T = 2π/ω।

(c) 3cos(π/4−2ωt) = 3cos(2ωt−π/4): एकल ज्यावक्रीय। SHM है, T = π/ω।

(d) cosωt+cos3ωt+cos5ωt: तीन भिन्न आवृत्तियों का योग। आवर्ती है परंतु SHM नहीं, T = 2π/ω।

(e) exp(−ω²t²): चरघातांकी क्षयकारी (गाउसियन) फलन। अनावर्ती है।

(f) 1+ωt+ω²t²: द्विघातीय, एकदिष्टत: बढ़ता। अनावर्ती है।

SHM: (a) T=2π/ω; (c) T=π/ω | आवर्ती पर SHM नहीं: (b) T=2π/ω; (d) T=2π/ω | अनावर्ती: (e), (f)
13.5 10 cm दूरी के दो बिंदुओं A व B के बीच SHM। A से B धनात्मक दिशा। विभिन्न स्थितियों में वेग, त्वरण, बल के चिह्न बताइए।

माध्य बिंदु O मूल बिंदु; A सिरा x=−5 cm, B सिरा x=+5 cm (आयाम 5 cm)। SHM में: a=−ω²x, F=−kx।

(a) A सिरे पर (x=−5cm): वेग = शून्य; त्वरण = धनात्मक (B की ओर); बल = धनात्मक।

(b) B सिरे पर (x=+5cm): वेग = शून्य; त्वरण = ऋणात्मक; बल = ऋणात्मक।

(c) मध्य बिंदु पर (x=0), A की ओर गतिमान: वेग = ऋणात्मक; त्वरण व बल = शून्य।

(d) B से 2cm दूर (x=+3cm), A की ओर: वेग = ऋणात्मक; त्वरण व बल = ऋणात्मक।

(e) A से 3cm दूर (x=−2cm), B की ओर: वेग = धनात्मक; त्वरण व बल = धनात्मक।

(f) B से 4cm दूर (x=+1cm), A की ओर: वेग = ऋणात्मक; त्वरण व बल = ऋणात्मक।

(a) v=0, a=+, F=+ | (b) v=0, a=−, F=− | (c) v=−, a=0, F=0 | (d) v=−, a=−, F=− | (e) v=+, a=+, F=+ | (f) v=−, a=−, F=−
13.6 किस संबंध से सरल आवर्त गति संबद्ध है? (a) a=0.7x (b) a=−200x² (c) a=−10x (d) a=100x³

SHM के लिए आवश्यक: a = −ω²x (ऋणात्मक रैखिक अनुक्रमानुपाती)।

(a) a=0.7x — धनात्मक चिह्न, SHM नहीं।

(b) a=−200x² — वर्ग, SHM नहीं।

(c) a=−10x — ऋणात्मक रैखिक, SHM है।

(d) a=100x³ — घन, धनात्मक, SHM नहीं।

केवल (c) a = −10x
13.7 x(t)=A cos(ωt+φ), आरंभिक स्थिति 1 cm, आरंभिक वेग π cm/s, ω=π s⁻¹। आयाम व कला ज्ञात कीजिए। ज्या फलन के लिए क्या होगा?

कोज्या रूप के लिए:

x(0) = A cosφ = 1; v(0) = −Aω sinφ = π → A sinφ = −1

A² = 1² + (−1)² = 2 ⟹ A = √2 cm; tanφ = −1, cosφ>0, sinφ<0 ⟹ φ = −π/4 rad

ज्या रूप के लिए: x(t)=B sin(ωt+α)

B sinα = 1; B cosα = 1 ⟹ B² = 2 ⟹ B = √2 cm; α = π/4 rad

कोज्या रूप: A=√2 cm, φ=−π/4 rad | ज्या रूप: B=√2 cm, α=π/4 rad
13.8 कमानीदार तुला 0–50 kg, पैमाने की लंबाई 20 cm। पिंड का आवर्तकाल 0.6 s। पिंड का भार?

k = F/x = (50×9.8)/0.2 = 2450 N/m

T = 2π√(m/k) → m = kT²/(4π²) = 2450×(0.6)²/(4π²) = 22.34 kg

भार W = mg = 22.34×9.8

भार ≈ 219 N (द्रव्यमान ≈ 22.34 kg)
13.9 k=1200 N/m कमानी, m=3 kg पिंड, 2.0 cm खींचकर छोड़ा। (i) आवृत्ति (ii) अधिकतम त्वरण (iii) अधिकतम चाल ज्ञात कीजिए।

ω = √(k/m) = √(1200/3) = 20 rad/s

(i) ν = ω/2π = 20/6.2832 = 3.18 Hz

(ii) amax = ω²A = 400×0.02 = 8 m/s²

(iii) vmax = ωA = 20×0.02 = 0.4 m/s

(i) 3.18 Hz; (ii) 8 m/s²; (iii) 0.4 m/s
13.10 प्रश्न 13.9 में x=0 अतानित स्थिति। (a) माध्य, (b) अधिकतम तानित, (c) अधिकतम संपीडन स्थिति से t=0 आरंभ करने पर x(t) लिखिए। ये फलन किस प्रकार भिन्न हैं?

A=0.02 m, ω=20 rad/s; पिंड दाईं (तानित) ओर खींचकर छोड़ा गया।

(a) माध्य स्थिति पर (बाईं ओर गतिमान): x(t) = −0.02 sin(20t) m

(b) अधिकतम तानित स्थिति पर: x(t) = 0.02 cos(20t) m

(c) अधिकतम संपीडन स्थिति पर: x(t) = −0.02 cos(20t) m

अंतर: तीनों में आयाम व आवृत्ति समान, केवल आरंभिक कला भिन्न — (a) φ=π/2, (b) φ=0, (c) φ=π।

(a) x=−0.02sin(20t); (b) x=0.02cos(20t); (c) x=−0.02cos(20t) — तीनों केवल आरंभिक कला में भिन्न हैं
13.11 वर्तुल गतियों के x-अक्ष पर प्रक्षेप की SHM ज्ञात कीजिए: (a) त्रिज्या 3cm, T=2s, 45°, दक्षिणावर्त; (b) त्रिज्या 2m, T=4s, कोण π, वामावर्त।

(a) ω = 2π/T = π rad/s; दक्षिणावर्त घूर्णन; t=0 पर कोण = π/4

x(t) = 3cos(−π/4 − πt) = 3cos(πt + π/4) cm

(b) ω = 2π/4 = π/2 rad/s; वामावर्त; φ = π

x(t) = 2cos((π/2)t + π) m

(a) x(t) = 3cos(πt+π/4) cm | (b) x(t) = 2cos((π/2)t+π) m
13.12 प्रत्येक SHM के लिए निर्देश वृत्त का आरेख बनाइए। (x cm में, t s में) (a) x=−2sin(3t+π/3) (b) x=cos(π/6−t) (c) x=3sin(2πt+π/4) (d) x=2cosπt

प्रत्येक को मानक रूप x(t)=Acos(ωt+φ) में परिवर्तित करें:

(a) x = 2cos(3t+5π/6) → त्रिज्या=2cm, ω=3 rad/s, φ=5π/6 rad

(b) x = cos(t−π/6) → त्रिज्या=1cm, ω=1 rad/s, φ=−π/6 rad

(c) x = 3cos(2πt−π/4) → त्रिज्या=3cm, ω=2π rad/s, φ=−π/4 rad

(d) x = 2cos(πt) → त्रिज्या=2cm, ω=π rad/s, φ=0 (धनात्मक x-अक्ष पर)

(a) r=2cm, ω=3rad/s, φ=5π/6 | (b) r=1cm, ω=1rad/s, φ=−π/6 | (c) r=3cm, ω=2πrad/s, φ=−π/4 | (d) r=2cm, ω=πrad/s, φ=0
13.13 (a) एक सिरा दृढ़ आधार, दूसरे पर बल F (b) दोनों सिरों पर समान बल F। (a) कमानी का अधिकतम विस्तार? (b) छोड़ने पर आवर्तकाल?

(a) अधिकतम विस्तार: दोनों प्रकरणों में कमानी का आंतरिक तनाव F ही होगा, अतः विस्तार x = F/k — दोनों प्रकरणों में समान।

(b) आवर्तकाल:

प्रकरण (a) — मानक निकाय: Ta = 2π√(m/k)

प्रकरण (b) — न्यून द्रव्यमान μ = m/2, अतः Tb = 2π√(m/2k)

(a) दोनों में विस्तार F/k | (b) Ta = 2π√(m/k); Tb = 2π√(m/2k)
13.14 पिस्टन का स्ट्रोक (आयाम का दोगुना) 1.0 m, कोणीय आवृत्ति 200 rad/min। अधिकतम चाल?

आयाम A = 0.5 m; ω = 200/60 rad/s = 3.333 rad/s

vmax = ωA = 3.333 × 0.5 = 1.667 m/s

vmax ≈ 1.67 m/s
13.15 चंद्रमा पर g=1.7 m/s²। पृथ्वी पर आवर्तकाल 3.5s। चंद्रमा पर आवर्तकाल?

T ∝ 1/√g (लंबाई समान):

Tचंद्र = 3.5 × √(9.8/1.7) = 3.5 × 2.4010

Tचंद्र ≈ 8.4 s
13.16 कार R त्रिज्या के वृत्तीय पथ पर v चाल से गतिमान। छत से लटके सरल लोलक का आवर्तकाल?

लोलक पर दो लंबवत् त्वरण — गुरुत्वीय g (नीचे) व अभिकेंद्रीय a=v²/R (क्षैतिज, केंद्र की ओर)।

प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण: geff = √(g² + (v²/R)²) = √(g² + v⁴/R²)

आवर्तकाल: T = 2π√(l/geff)

T = 2π√[ l / √(g² + v⁴/R²) ]
13.17 क्षेत्रफल A, ऊँचाई h के कॉर्क का बेलनाकार टुकड़ा ρl घनत्व के द्रव में तैरता है। सिद्ध कीजिए: T = 2π√(hρ/ρlg)।

साम्यावस्था में: Ahρg = Ah₀ρlg (संतुलन समीकरण)

साम्यावस्था से x नीचे विस्थापित करने पर अतिरिक्त उत्प्लावन बल (प्रत्यानयन बल) = Axρlg (ऊपर की ओर)

न्यूटन का द्वितीय नियम: m(d²x/dt²) = −Aρlgx

Ahρ(d²x/dt²) = −Aρlgx ⟹ d²x/dt² = −(ρlg/hρ)x

यह SHM है जहाँ ω² = ρlg/(hρ), अतः T = 2π/ω

T = 2π√(hρ/ρlg) — सिद्ध हुआ; प्रत्यानयन बल विस्थापन के ऋणात्मक अनुक्रमानुपाती है
13.18 पारे से भरी U-नली में एक सिरा चूषण पंप से जुड़ा। चूषण पंप हटाने पर पारे का स्तंभ SHM करता है — दर्शाइए।

माना U-नली में पारे के कुल स्तंभ की लंबाई L, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A, घनत्व ρ।

एक भुजा में तल y ऊपर, दूसरी में y नीचे — ऊँचाई अंतर = 2y।

अतिरिक्त दाब = ρg(2y); प्रत्यानयन बल F = −A·ρg(2y) = −2Aρgy

द्रव्यमान m = ALρ; न्यूटन से: ALρ(d²y/dt²) = −2Aρgy

d²y/dt² = −(2g/L)y ⟹ SHM, ω² = 2g/L

T = 2π√(L/2g) — सिद्ध हुआ; प्रत्यानयन बल विस्थापन के ऋणात्मक अनुक्रमानुपाती है

🌡️ NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

कला, ऊर्जा, कमानी-संयोजन, लोलक व आलेखों पर आधारित 10 उच्च-स्तरीय प्रश्न

1 किसी कण का विस्थापन x = 5sin(4t + π/3) m है। इसकी कोणीय आवृत्ति, आवर्तकाल तथा आयाम ज्ञात कीजिए।

मानक रूप x=Asin(ωt+φ) से: A=5m, ω=4 rad/s

T = 2π/ω = 2π/4 = π/2 s ≈ 1.57 s

2 किसी SHM में कण की स्थितिज ऊर्जा, इसके आयाम के आधे विस्थापन पर कुल ऊर्जा के कितने भाग के बराबर होती है?

U(x)=½kx²; E=½kA²; x=A/2 पर U = ½k(A/2)² = E/4

स्थितिज ऊर्जा = कुल ऊर्जा का 1/4 भाग
3 दो कमानियाँ, बल-स्थिरांक k₁ व k₂, श्रेणीक्रम में जोड़कर द्रव्यमान m से बाँधी गई हैं। तुल्य बल-स्थिरांक व आवर्तकाल ज्ञात कीजिए।

श्रेणीक्रम: 1/keq = 1/k₁ + 1/k₂ ⟹ keq = k₁k₂/(k₁+k₂)

T = 2π√(m/keq)

T = 2π√[m(k₁+k₂)/(k₁k₂)]
4 कमानी को 1/3 व 2/3 भागों में काटा गया। दोनों टुकड़ों के बल-स्थिरांकों का अनुपात?

कमानी का बल-स्थिरांक लंबाई के व्युत्क्रमानुपाती (kl = नियतांक)

k₁ (लंबाई l/3) = 3k; k₂ (लंबाई 2l/3) = 3k/2

k₁ : k₂ = 2 : 1
5 किसी SHM में वेग व त्वरण के बीच कलांतर क्या है?

v(t) = ωA cos(ωt+φ+π/2); a(t) = ω²A cos(ωt+φ+π)

कलांतर = (ωt+φ+π) − (ωt+φ+π/2) = π/2

π/2 rad (90°)
6 द्रव्यमान m, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A का आयताकार गुटका घनत्व ρl के द्रव में तैराया। थोड़ा दबाकर छोड़ने पर SHM — आवर्तकाल?

साम्यावस्था से x दूरी नीचे धकेलने पर अतिरिक्त उत्प्लावन बल = Aρlgx

m(d²x/dt²) = −Aρlgx ⟹ ω² = Aρlg/m

T = 2π√(m/(Aρlg))
7 सरल लोलक को जल में डुबोकर दोलन कराया (द्रव्यमान का घनत्व ρ, जल का ρ₀)। वायु में आवर्तकाल T; जल में?

उत्प्लावन बल के कारण: geff = g(1 − ρ₀/ρ)

Tजल = T × √[ρ/(ρ−ρ₀)]
8 SHM का आयाम A, आवर्तकाल T हो। vmax व amax के व्यंजक T व A के पदों में?

ω = 2π/T

vmax = 2πA/T; amax = 4π²A/T²
9 SHM में कण x=0 से x=A/2 तक समय t₁ तथा A/2 से A तक समय t₂। t₁:t₂?

x=Asinωt; x=A/2 पर ωt=π/6 ⟹ t₁=π/(6ω)

x=A पर ωt=π/2; तो t₂ = π/(2ω) − π/(6ω) = π/(3ω)

t₁ : t₂ = 1 : 2
10 द्रव्यमान m, कमानी k; साम्यावस्था से A दूरी खींचकर छोड़ा। A/2 दूरी पर चाल?

ऊर्जा संरक्षण: ½kA² = ½kx² + ½mv²

v = ω√(A²−x²) = √(k/m) × A√3/2

v = (A√3/2)√(k/m)

🏆 NEET में पूछे गए प्रश्न

AIPMT/NEET परीक्षाओं में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, वर्ष-क्रमानुसार, पूर्ण हल सहित

परीक्षा रणनीति: इस अध्याय से NEET में सामान्यतः 1–2 प्रश्न (4–8 अंक) पूछे जाते हैं। सर्वाधिक बार दोहराए गए विषय: (1) कमानी-द्रव्यमान निकाय का आवर्तकाल (कटी/जुड़ी कमानियाँ), (2) SHM में ऊर्जा (गतिज व स्थितिज), (3) वेग-त्वरण के बीच कलांतर, तथा (4) तैरते हुए गुटके व लोलक पर आधारित प्रश्न।
1 कमानी से लटके द्रव्यमान का आवर्तकाल T है। कमानी को चार बराबर भागों में काटकर वही द्रव्यमान एक भाग से लटकाया — नया आवर्तकाल? AIPMT 2003

लंबाई 1/4 होने पर बल-स्थिरांक 4 गुना: k' = 4k

T' = 2π√(m/k') = 2π√(m/4k)

नया आवर्तकाल T' = T/2
2 SHM में कण की स्थितिज ऊर्जा, जब वह चरम स्थिति के आधे रास्ते पर हो (कुल ऊर्जा E के पदों में)? AIPMT 2003

U(x) = ½kx²; x = A/2 पर: U = ½k(A/2)² = E/4

U = E/4
3 SHM में चाल v तथा त्वरण a के संबंध में सत्य कथन? AIPMT (Screening) 2004

v(t) = −ωA sin(ωt+φ); a(t) = −ω²x

v व a के बीच सदैव π/2 कलांतर; जब एक अधिकतम, दूसरा शून्य।

दोनों कभी एक साथ अधिकतम नहीं होते
4 बल-स्थिरांक k₁ व k₂ की दो कमानियाँ श्रेणीक्रम में। तुल्य बल-स्थिरांक? AIPMT (Screening) 2004

1/keq = 1/k₁ + 1/k₂

keq = k₁k₂/(k₁+k₂)
5 5 cm आयाम की SHM में कण की अधिकतम चाल 31.4 cm/s। आवृत्ति? AIPMT (Screening) 2005

vmax = 2πνA ⟹ ν = 31.4/(2×3.14×5)

ν = 1 Hz
6 द्रव्यमान m, क्षेत्रफल A का आयताकार गुटका घनत्व ρ के द्रव में तैरता है। थोड़ा नीचे दबाकर छोड़ने पर आवर्तकाल T — सत्य संबंध? AIPMT (Screening) 2006

m(d²x/dt²) = −Aρgx ⟹ ω² = Aρg/m

T = 2π√(m/(Aρg)) ⟹ T ∝ √m

T ∝ √m
7 SHM में तात्क्षणिक वेग तथा त्वरण के बीच कलांतर? AIPMT (Screening) 2007

v(t) = ωA cos(ωt+φ+π/2); a(t) = ω²A cos(ωt+φ+π)

कलांतर = π/2 rad (90°)

π/2 rad

✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य

परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु

महत्वपूर्ण
  • यह अध्याय NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (8–12 अंक) रखता है; सर्वाधिक बार पूछे गए उप-विषय — SHM का ऊर्जा विश्लेषण, स्प्रिंग-गुटका निकाय का आवर्तकाल, सरल लोलक तथा वेग/त्वरण के फेज़र (phase) संबंध हैं।
  • SHM को वृत्तीय गति के संदर्भ-वृत्त (reference circle) पर प्रक्षेप के रूप में देखा जा सकता है — यह ज्यामितीय दृष्टिकोण कला (phase) संबंधी वैचारिक प्रश्नों को शीघ्रता से हल करने में सहायक है।
तथ्य
  • अवमंदित दोलन (damped oscillations) में आयाम का क्षय — यदि अवमंदक बल = −bv (वेग के समानुपाती) हो, तो आयाम समय के साथ चरघातांकी रूप से घटता है: A(t) = A₀e^(−bt/2m); कोणीय आवृत्ति भी थोड़ी कम हो जाती है ω' = √(k/m − b²/4m²)।
  • अवमंदित दोलक की यांत्रिक ऊर्जा भी चरघातांकी रूप से क्षय होती है: E(t) = ½kA₀²e^(−bt/m) — ऊर्जा आयाम के वर्ग के समानुपाती होने से इसकी क्षय-दर आयाम-क्षय दर से दोगुनी होती है।
तथ्य
  • प्रणोदित दोलन (forced oscillations) — जब कोई निकाय अपनी प्राकृतिक आवृत्ति (ω₀) के अतिरिक्त किसी बाह्य आवर्ती बल की आवृत्ति (ω) से दोलन करने हेतु बाध्य किया जाता है, तो स्थायी अवस्था (steady state) में निकाय बाह्य बल की ही आवृत्ति ω से दोलन करता है।
  • अनुनाद (resonance) — जब प्रणोदक बल की आवृत्ति निकाय की प्राकृतिक आवृत्ति (ω=ω₀) के बराबर हो जाती है, तो दोलन का आयाम अत्यधिक (सैद्धांतिक रूप से अनवमंदित निकाय में अनंत तक) बढ़ जाता है — सैनिकों द्वारा एक लय में मार्च करते हुए पुल पार करने पर पुल के टूटने की घटनाएँ इसी सिद्धांत का प्रसिद्ध उदाहरण हैं।
तुलनात्मक
  • स्प्रिंगों के संयोजन के सामान्य नियम — समांतर क्रम (parallel) में तुल्य स्प्रिंग स्थिरांक kतुल्य = k₁+k₂ (कठोरता बढ़ती है, आवर्तकाल घटता है); श्रेणीक्रम (series) में 1/kतुल्य = 1/k₁+1/k₂ (कठोरता घटती है, आवर्तकाल बढ़ता है) — यह ठीक विद्युत धारिता के संयोजन नियमों के व्युत्क्रम अनुरूप है।
  • दो सर्वसम स्प्रिंगों (प्रत्येक स्थिरांक k) से दोनों ओर जुड़े गुटके का आवर्तकाल T=2π√(m/2k) होता है (चूँकि यह प्रभावी रूप से समांतर संयोजन है, kतुल्य=2k)।
तथ्य
  • त्वरित लिफ्ट में सरल लोलक — यदि लोलक किसी ऊपर की ओर त्वरण a से गतिमान लिफ्ट में हो, तो प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण geff=g+a (आवर्तकाल घटता है); लिफ्ट नीचे की ओर त्वरित हो तो geff=g−a (आवर्तकाल बढ़ता है); मुक्त रूप से गिरती लिफ्ट में geff=0, अतः आवर्तकाल अनंत हो जाता है।
  • क्षैतिज त्वरण के अंतर्गत सरल लोलक — यदि लोलक क्षैतिज त्वरण a से गतिमान वाहन में हो, तो प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण geff=√(g²+a²) होता है तथा लोलक की साम्यावस्था ऊर्ध्वाधर से कोण tan⁻¹(a/g) पर झुक जाती है।
तुलनात्मक
  • भौतिक लोलक (physical/compound pendulum) — किसी दृढ़ पिंड को किसी क्षैतिज अक्ष के परित: लटकाकर दोलन कराने पर इसका आवर्तकाल T=2π√(I/mgd) होता है, जहाँ I=निलंबन-अक्ष के परित: जड़त्व आघूर्ण, d=अक्ष से द्रव्यमान केंद्र की दूरी; सरल लोलक इसका एक विशेष प्रकरण है (I=mL², d=L)।
  • मरोड़ी लोलक (torsional pendulum) — किसी तार से लटके दृढ़ पिंड को मरोड़ने पर प्रत्यानयन बल-आघूर्ण τ=−κθ (κ=मरोड़ी स्थिरांक) के अनुसार कार्य करता है, जिससे आवर्तकाल T=2π√(I/κ) प्राप्त होता है — यह घूर्णी SHM का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है।
रणनीति
  • द्रव स्तंभ का दोलन (U-नली में) — किसी U-आकार की नली में भरे द्रव को थोड़ा विस्थापित करने पर यह SHM करता है, जिसका आवर्तकाल T=2π√(L/2g) होता है (L=नली में द्रव के कुल स्तंभ की लंबाई)।
  • SHM पहचानने की मानक कसौटी — कोई भी गति SHM होगी यदि व केवल यदि प्रत्यानयन बल (या बल-आघूर्ण) विस्थापन के ठीक ऋणानुपाती (F=−kx) हो; इस कसौटी की जाँच किसी भी नए दोलन तंत्र को हल करने का सबसे विश्वसनीय पहला कदम है।
तथ्य
  • SHM में वेग व त्वरण की चरम सीमाएँ — विस्थापन शून्य (माध्य स्थिति) होने पर वेग अधिकतम (vmax=Aω) व त्वरण शून्य होता है; विस्थापन अधिकतम (चरम स्थिति, x=±A) होने पर वेग शून्य व त्वरण अधिकतम (amax=Aω²) होता है।
  • एक पूर्ण चक्र में औसत मान — विस्थापन x का एक पूर्ण आवर्तकाल पर औसत मान शून्य होता है; परन्तु ⟨x²⟩ (माध्य वर्ग विस्थापन) = A²/2 होता है, जो गतिज व स्थितिज ऊर्जा के औसत मान (दोनों = ¼kA² = कुल ऊर्जा का आधा) निकालने में प्रयुक्त होता है।
तथ्य
  • अनुदैर्घ्य कंपनों में स्प्रिंग के द्रव्यमान का प्रभाव — यदि स्प्रिंग स्वयं द्रव्यमानरहित न होकर द्रव्यमान ms रखती हो, तो आवर्तकाल के सूत्र में प्रभावी द्रव्यमान (M + ms/3) प्रयुक्त होता है (T=2π√((M+ms/3)/k))।
  • उत्प्लावकता आधारित SHM — किसी बेलनाकार वस्तु (अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A, द्रव्यमान m) को द्रव (घनत्व ρ) में साम्यावस्था से थोड़ा दबाकर छोड़ने पर यह SHM करती है, जिसका आवर्तकाल T=2π√(m/Aρg) होता है।
💡 याद रखने योग्य सूत्र-सार: x(t)=Acos(ωt+φ) | ω=2π/T=2πν | v(t)=−ωAsin(ωt+φ) | a(t)=−ω²x(t) | F=−kx, ω=√(k/m), T=2π√(m/k) | K=½kA²sin²(ωt+φ) | U=½kA²cos²(ωt+φ) | E=K+U=½kA² | सरल लोलक: T=2π√(L/g) | श्रेणीक्रम: 1/keq=1/k₁+1/k₂ | समांतरक्रम: keq=k₁+k₂

यह अध्ययन सामग्री NCERT कक्षा-11 भौतिकी अध्याय 13 "दोलन" पर आधारित है — आवर्ती एवं दोलनीय गति, आवर्तकाल व आवृत्ति, सरल आवर्त गति (SHM), विस्थापन-वेग-त्वरण के संबंध, SHM का बल नियम, ऊर्जा का विवेचन तथा कमानी-गुटका और सरल लोलक — सम्पूर्ण व्याख्या, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।

दोलन — प्रकृति की सर्वव्यापी आवर्ती गति की सुंदर गणितीय व्याख्या।

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