अध्याय 14 — तरंगें | सम्पूर्ण अध्ययन
कक्षा-11 • भौतिकी • अध्याय 14

तरंगें (Waves)

अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य तरंगें, प्रगामी तरंग का गणितीय विवरण, तरंग-चाल (डोरी, ठोस, द्रव, गैस), अध्यारोपण का सिद्धांत, अप्रगामी तरंगें, अनुनाद, आर्गन पाइप एवं विस्पंद — सम्पूर्ण व्याख्या, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।

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14.1 भूमिका

तरंग गति की संकल्पना एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले अध्याय में हमने ऐसे पिंडों की गति का अध्ययन किया जो एकाकी दोलन करते हैं। यदि कोई निकाय इसी प्रकार के पिंडों (द्रव्यमान युक्त माध्यम) का समूह है, तो इस माध्यम में प्रत्यास्थ बल माध्यम के अवयवों को एक-दूसरे से बाँध रखते हैं जिसके कारण किसी एक अवयव की गति दूसरे अवयव की गति को प्रभावित करती है। तालाब के शांत जल में कंकड़ गिराने पर उत्पन्न विक्षोभ वृत्त के अनुदिश बाहर की ओर संचरित होता है — जल स्वयं गति नहीं करता, केवल एक गतिशील विक्षोभ उत्पन्न होता है (कॉर्क के टुकड़े ऊपर-नीचे गति करते हैं, विक्षोभ के केंद्र से दूर नहीं जाते)।

इस प्रकार के विक्षोभों के प्रतिरूप या पैटर्न जो द्रव्य के वास्तविक भौतिक स्थानांतरण अथवा समूचे द्रव्य के प्रवाह के बिना ही माध्यम के एक स्थान से दूसरे स्थान तक गति करते हैं, तरंग कहलाते हैं। तरंगों द्वारा एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ऊर्जा तथा विक्षोभ के पैटर्न की सूचना का संचरण होता है — हमारा समस्त संचार-तंत्र तरंगों द्वारा संकेतों के संचरण पर निर्भर करता है।

महत्वपूर्ण: सभी तरंगों को संचरण के लिए माध्यम की आवश्यकता नहीं होती। प्रकाश तरंगें निर्वात से गमन कर सकती हैं। निर्वात में सभी विद्युत-चुंबकीय तरंगों की चाल c = 2.998×10⁸ m/s (एकसमान) होती है।

डोरी, जल, ध्वनि, भूकंपी तरंगें जैसी तरंगें यांत्रिक तरंगें कहलाती हैं — इनके संचरण के लिए माध्यम आवश्यक है, ये माध्यम के कणों के दोलनों तथा माध्यम के प्रत्यास्थ गुणों पर निर्भर करती हैं। विद्युत-चुंबकीय तरंगें इनसे सर्वथा भिन्न हैं (निर्वात में भी संचरित होती हैं)। एक तीसरी प्रकार की तरंग द्रव्य तरंग है, जो इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, परमाणु व अणु जैसे कणों से संबद्ध है (क्वांटम यांत्रिकी में)। इस अध्याय में हम केवल यांत्रिक तरंगों का अध्ययन करेंगे।

NEET फोकस
  • तरंग — द्रव्य के स्थानांतरण के बिना ऊर्जा/विक्षोभ का संचरण
  • यांत्रिक तरंगों को माध्यम आवश्यक; विद्युत-चुंबकीय तरंगों को नहीं
  • निर्वात में सभी EM तरंगों की चाल — c = 3×10⁸ m/s

14.2 अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्घ्य तरंगें

तरंगों का वर्गीकरण एवं उनके गुणधर्म

यांत्रिक तरंगों की गति में माध्यम के घटक दोलन करते हैं। यदि माध्यम के घटक तरंग की गति की दिशा के लंबवत् दोलन करते हैं तो ऐसी तरंग को अनुप्रस्थ तरंग कहते हैं। यदि माध्यम के घटक तरंग की गति की दिशा के अनुदिश दोलन करते हैं तो तरंग को अनुदैर्घ्य तरंग कहते हैं।

तरंग प्रकारकणों का दोलनउदाहरण
अनुप्रस्थतरंग-संचरण की दिशा के लंबवत्डोरी में स्पंद, प्रकाश तरंगें, भूकंपी S-तरंगें
अनुदैर्घ्यतरंग-संचरण की दिशा के समांतरध्वनि तरंगें, वायु-स्तंभ में तरंगें, भूकंपी P-तरंगें

प्रगामी तरंगें (चाहे अनुप्रस्थ हों या अनुदैर्घ्य) माध्यम के एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक गमन करती हैं, परंतु द्रव्य स्वयं गति नहीं करता। वायु में केवल अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंगों का ही संचरण संभव है, जबकि स्टील जैसे माध्यमों में अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य दोनों प्रकार की तरंगें संचरित हो सकती हैं। जल के पृष्ठ पर दो प्रकार की तरंग होती हैं: केशिकात्वीय (पृष्ठ तनावी) तरंगें तथा गुरुत्व तरंगें।

महत्वपूर्ण: अनुप्रस्थ तरंगों का संचरण केवल उन्हीं माध्यमों में हो सकता है जिनमें अपरूपण प्रत्यास्थता गुणांक (rigidity) हो, जैसे ठोस। अनुदैर्घ्य तरंगों को आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की आवश्यकता होती है, अतः ये तरंगें सभी माध्यमों — ठोस, द्रव तथा गैस — में संभव होती हैं। एक ही माध्यम में अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्घ्य तरंगों की चाल भिन्न-भिन्न होती है।
उदाहरण 14.1: नीचे तरंग गति के कुछ उदाहरण दिए गए हैं, प्रत्येक स्थिति में बताइए कि क्या तरंग गति अनुप्रस्थ है, अनुदैर्घ्य है अथवा दोनों का संयोजन है:
(a) किसी लंबी कुंडलित कमानी के एक सिरे को एक ओर विस्थापित करने पर उस कमानी की किसी विभंग (ऐंठन) की गति।
(b) द्रव से भरे किसी सिलिंडर में इसके पिस्टन को आगे-पीछे करके सिलिंडर में उत्पन्न तरंगें।
(c) जल के पृष्ठ पर चलती मोटरबोट द्वारा उत्पन्न तरंगें।
(d) किसी कंपायमान क्वार्ट्ज़ क्रिस्टल द्वारा वायु में उत्पन्न पराश्रव्य तरंगें।

हल: (a) अनुप्रस्थ  (b) अनुदैर्घ्य  (c) अनुप्रस्थ तथा अनुदैर्घ्य दोनों  (d) अनुदैर्घ्य
NEET फोकस
  • अनुप्रस्थ — दोलन लंबवत्; केवल ठोसों में संभव (अपरूपण प्रत्यास्थता आवश्यक)
  • अनुदैर्घ्य — दोलन समांतर; सभी माध्यमों में संभव
  • वायु में केवल अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंगें
  • जल के पृष्ठ पर — केशिकात्वीय + गुरुत्व तरंगें

14.3 प्रगामी तरंगों में विस्थापन संबंध

तरंग समीकरण, आयाम, कला, तरंगदैर्ध्य एवं आवृत्ति

किसी प्रगामी तरंग के गणितीय विवरण के लिए, हमें स्थिति x तथा समय t दोनों के किसी फलन की आवश्यकता होती है। किसी ज्यावक्रीय प्रगामी तरंग को निम्न रूप से वर्णित करते हैं:

y(x,t) = a sin(kx − ωt + φ)  (14.2)

यह प्रत्येक स्थिर काल-क्षण पर तरंग की उस क्षण पर आकृति देता है, तथा प्रत्येक स्थिति पर माध्यम के अवयव की गति का विवरण देता है। समीकरण (14.2), x-अक्ष की धनात्मक दिशा में गमन करती तरंग को दर्शाता है, जबकि y(x,t)=a sin(kx+ωt+φ) ऋणात्मक दिशा में गमन करती तरंग को निरूपित करता है।

प्रतीकअर्थ
y(x,t)विस्थापन, स्थिति x तथा समय t के फलन के रूप में
aआयाम — तरंग का अधिकतम विस्थापन
ωकोणीय आवृत्ति, मात्रक rad/s
kकोणीय तरंग संख्या (संचरण स्थिरांक), मात्रक rad/m
(kx−ωt+φ)कला
φकला-नियतांक अथवा प्रारंभिक कला कोण

14.3.1 आयाम तथा कला

चूँकि ज्या फलन का मान +1 तथा −1 के बीच परिवर्तित होता है, विस्थापन y(x,t) का मान a तथा −a के बीच परिवर्तित होता है। a को धनात्मक अचर माना जाता है — यह आयाम कहलाता है। समीकरण के कोणांक की राशि (kx−ωt+φ) को तरंग की कला कहते हैं।

14.3.2 तरंगदैर्ध्य तथा कोणीय तरंग संख्या

समान कला के दो बिंदुओं के बीच की न्यूनतम दूरी को तरंगदैर्ध्य (λ) कहते हैं — यह दो क्रमागत शीर्षों अथवा गर्तों के बीच की दूरी है।

तरंगदैर्ध्य और तरंग संख्या λ = 2π/k,  या  k = 2π/λ  (14.6)

k को संचरण स्थिरांक अथवा कोणीय तरंग संख्या कहते हैं; SI मात्रक rad/m।

14.3.3 आवर्तकाल, कोणीय आवृत्ति तथा आवृत्ति

तरंग के दोलन का आवर्तकाल T डोरी के किसी अवयव द्वारा एक पूर्ण दोलन में लिया गया समय है:

आवर्तकाल और कोणीय आवृत्ति ωT = 2π,  या  ω = 2π/T  (14.7)

ω को तरंग की कोणीय आवृत्ति कहते हैं (मात्रक rad/s)। किसी तरंग की आवृत्ति ν प्रति सेकंड दोलनों की संख्या है:

ν = 1/T = ω/2π  (14.8), मात्रक हर्ट्ज़ (Hz)

अनुदैर्घ्य तरंग में माध्यम के किसी अवयव में तरंग संचरण की दिशा के समांतर विस्थापन होता है, फलन इस प्रकार लिखा जाता है: s(x,t) = a sin(kx−ωt+φ)  (14.9)।

उदाहरण 14.2: किसी डोरी के अनुदिश गमन करती तरंग का विवरण इस प्रकार दिया गया है, y(x,t)=0.005 sin(80.0x−3.0t), जहाँ आंकिक स्थिरांक SI मात्रकों में हैं। तरंग का (a) आयाम, (b) तरंगदैर्ध्य (c) आवर्तकाल एवं आवृत्ति परिकलित कीजिए।

हल: तुलना y(x,t)=a sin(kx−ωt) से:
(a) आयाम = 0.005 m = 5 mm
(b) k=80.0 m⁻¹, λ=2π/k=2π/80.0 = 7.85 cm
(c) ω=3.0 s⁻¹, T=2π/ω=2.09s; ν=1/T=0.48 Hz
NEET फोकस
  • तरंग समीकरण — y = a sin(kx−ωt+φ) (धनात्मक x-दिशा)
  • तरंगदैर्ध्य — λ = 2π/k; आवृत्ति — ν = ω/2π
  • आयाम a — तरंग का अधिकतम विस्थापन
  • कला — (kx−ωt+φ); कला-नियतांक — φ

14.4 प्रगामी तरंग की चाल

तरंग-चाल के सूत्र — डोरी, ठोस, द्रव, गैस

तरंग पर किसी निश्चित कला बिंदु की गति को दिया जाता है: kx − ωt = नियतांक  (14.10)। इससे प्राप्त होता है:

v = ω/k = λ/T = λν  (14.11, 14.12)

यह समीकरण सभी प्रगामी तरंगों के लिए व्यापक संबंध है — माध्यम के किसी अवयव के एक पूर्ण दोलन काल में तरंग पैटर्न एक तरंगदैर्ध्य के बराबर दूरी तय करती है।

14.4.1 तानित डोरी पर अनुप्रस्थ तरंग की चाल

विमीय विश्लेषण से (T बल की विमा [MLT⁻²], μ रैखिक द्रव्यमान घनत्व की विमा [ML⁻¹]):

v = √(T/μ)  (14.14)

यह चाल केवल T तथा μ (माध्यम के गुण) पर निर्भर करती है, तरंगदैर्ध्य या आवृत्ति पर स्वतः निर्भर नहीं करती।

उदाहरण 14.3: 0.72 m लंबे किसी स्टील के तार का द्रव्यमान 5.0×10⁻³ kg है। यदि तार पर तनाव 60N है, तो तार पर अनुप्रस्थ तरंगों की चाल क्या है?

हल: μ=5.0×10⁻³/0.72=6.9×10⁻³ kg/m
v=√(T/μ)=√(60/6.9×10⁻³)=93 m/s

14.4.2 अनुदैर्घ्य तरंग की चाल — ध्वनि की चाल

माध्यम के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक B = −ΔP/(ΔV/V)  (14.16) के आधार पर:

सामान्य द्रव/गैस माध्यम के लिए v = √(B/ρ)  (14.19)
ठोस छड़ के लिए v = √(Y/ρ)  (14.20), जहाँ Y यंग गुणांक

न्यूटन का सूत्र: आदर्श गैस के लिए PV=NkBT से समतापी परिवर्तन में B=P, अतः v=√(P/ρ)  (14.22)। इससे STP पर वायु में ध्वनि की चाल 280 m/s प्राप्त होती है, जो मापित मान 331 m/s से 15% कम है।

लाप्लास संशोधन (रुद्धोष्म): v = √(γP/ρ)  (14.24)
जहाँ γ = Cp/Cv; वायु के लिए γ=7/5

ध्वनि संचरण रुद्धोष्म (adiabatic) प्रक्रिया है (समतापी नहीं), अतः रुद्धोष्म आयतन प्रत्यास्थता गुणांक Bad=γP; इस संशोधन से STP पर चाल 331.3 m/s प्राप्त होती है, जो मापित मान से मेल खाती है।

उदाहरण 14.4: न्यूटन के सूत्र का उपयोग करके STP पर वायु में ध्वनि की चाल का आकलन कीजिए। वायु के 1 मोल का द्रव्यमान 29.0×10⁻³ kg है।

हल: ρ₀=29.0×10⁻³/22.4×10⁻³=1.29 kg/m³
v=√(P/ρ)=√(1.01×10⁵/1.29)=280 m/s
NEET फोकस
  • सामान्य संबंध — v = ω/k = λν
  • तानित डोरी — v = √(T/μ)
  • द्रव/गैस — v = √(B/ρ); ठोस छड़ — v = √(Y/ρ)
  • न्यूटन — v = √(P/ρ) (कम आँकता है)
  • लाप्लास — v = √(γP/ρ) (सही मान देता है)

14.5 तरंगों के अध्यारोपण का सिद्धांत

व्यतिकरण एवं संपोषी-विनाशी व्यतिकरण

जब विपरीत दिशाओं में गमन करती दो तरंग स्पंद एक-दूसरे को पार करते हैं, तो पार करने के बाद भी तरंग स्पंद अपना व्यष्टित्व बनाए रखती है, परंतु अतिव्यापन के दौरान ऊर्जा और विस्थापन में विशेष परिणाम होता है। अध्यारोपण के सिद्धांत के अनुसार, नेट विस्थापन दोनों के कारण विस्थापनों का बीजगणितीय योग होता है:

y(x,t) = y₁(x,t) + y₂(x,t)  (14.25)
सामान्य रूप: y = Σfᵢ(x−vt)  (14.26)

अध्यारोपण का सिद्धांत व्यतिकरण की परिघटना का मूल है। यदि समान कोणीय आवृत्ति ω, समान कोणीय तरंग संख्या k तथा समान आयाम a की दो आवर्ती प्रगामी तरंगें (कला-अंतर φ) एक ही दिशा में गतिमान हैं, तो अध्यारोपण से:

परिणामी तरंग y(x,t) = [2a cos(φ/2)] sin(kx − ωt + φ/2)  (14.31)
परिणामी आयाम: A(φ) = 2a cos(φ/2)  (14.32)
कलांतर φपरिणामी आयामव्यतिकरण का प्रकार
0 (समान कला में)2a (अधिकतम)संपोषी व्यतिकरण
π (विपरीत कला में)0 (शून्य)विनाशी व्यतिकरण
π/2√2·aमध्यवर्ती
NEET फोकस
  • अध्यारोपण सिद्धांत — नेट विस्थापन = व्यक्तिगत विस्थापनों का बीजगणितीय योग
  • परिणामी आयाम — A = 2a cos(φ/2)
  • φ=0 पर संपोषी व्यतिकरण (आयाम 2a अधिकतम)
  • φ=π पर विनाशी व्यतिकरण (आयाम शून्य)

14.6 तरंगों का परावर्तन

दृढ़/खुली सीमा से परावर्तन एवं अप्रगामी तरंगें

जब कोई स्पंद अथवा तरंग किसी परिसीमा का सामना करती है: यदि परिसीमा दृढ़ है तो स्पंद परावर्तित हो जाती है, और परावर्तन से कला में π (180°) का अंतर उत्पन्न हो जाता है (क्योंकि परिसीमा पर विक्षोभ का विस्थापन शून्य होना चाहिए)। यदि परिसीमा खुली/अदृढ़ है तो परावर्तित स्पंद की कला तथा आयाम आपतित स्पंद के समान ही रहते हैं (कोई कलांतर नहीं होता), और नेट परिसीमा पर अधिकतम विस्थापन प्रत्येक स्पंद के आयाम का दो गुना होता है।

दृढ़ परिसीमा से परावर्तन (π कलांतर) yr(x,t) = −a sin(kx+ωt)  (14.35)
खुली परिसीमा से परावर्तन (कोई कलांतर नहीं) yr(x,t) = a sin(kx+ωt)  (14.36)

14.6.1 अप्रगामी तरंगें तथा प्रसामान्य विधाएँ

विपरीत दिशाओं में गतिशील दो सर्वसम तरंगों के व्यतिकरण से अप्रगामी तरंगें उत्पन्न होती हैं:

y(x,t) = [2a sin kx] cos ωt  (14.37)

यहाँ आयाम प्रत्येक बिंदु पर भिन्न (2a sin kx) होता है, परंतु डोरी का प्रत्येक अवयव समान कोणीय आवृत्ति ω से दोलन करता है — कोई कलांतर नहीं होता। जिन बिंदुओं पर आयाम शून्य होता है उन्हें निस्पंद कहते हैं, जिन पर अधिकतम होता है उन्हें प्रस्पंद कहते हैं। दो क्रमागत निस्पंदों (अथवा दो क्रमागत प्रस्पंदों) के बीच की दूरी λ/2 होती है।

दोनों सिरों पर परिबद्ध डोरी (तानित डोरी / खुला पाइप) λ = 2L/n,   ν = nv/(2L),   n = 1, 2, 3...  (14.41, 14.42)

न्यूनतम आवृत्ति (n=1) को मूल विधा अथवा प्रथम गुणावृत्ति कहते हैं (ν=v/2L)। n=2 को द्वितीय गुणावृत्ति, n=3 को तृतीय गुणावृत्ति कहते हैं आदि। यहाँ सभी गुणावृत्तियाँ (सम व विषम दोनों) संभव होती हैं।

एक सिरे पर बंद पाइप ν = (n + ½)v/(2L),   n = 0, 1, 2, 3...  (14.44)

यहाँ मूल विधा (n=0) ν₁=v/4L है, और केवल विषम गुणावृत्तियाँ (3v/4L, 5v/4L...) ही संभव होती हैं। दोनों सिरों पर खुले पाइप में सभी गुणावृत्तियाँ (सम व विषम दोनों) संभव होती हैं।

उदाहरण 14.5: दोनों सिरों से खुले किसी पाइप की लंबाई 30.0cm है। 1.1kHz आवृत्ति के स्रोत द्वारा इस पाइप की कौन-सी गुणावृत्ति विधा को अनुनाद द्वारा उत्तेजित किया जाता है? यदि पाइप के एक सिरे को बंद कर दिया जाए तो क्या फिर भी अनुनाद सुन सकते हैं? वायु में ध्वनि की चाल 330 m/s है।

हल: खुला पाइप: νₙ=nv/2L=n×330/(2×0.3)=550n Hz। 1.1kHz≈550×2, अतः n=2 (द्वितीय गुणावृत्ति) उत्तेजित होगी।
बंद पाइप: ν₁=v/4L=330/1.2=275Hz; केवल विषम गुणावृत्तियाँ ν₃=825Hz, ν₅=1375Hz... 1.1kHz इनमें से किसी से मेल नहीं खाता — अतः इस स्रोत के साथ कोई अनुनाद सुनाई नहीं देगा।
NEET फोकस
  • दृढ़ सीमा से परावर्तन — π कलांतर
  • खुली सीमा से परावर्तन — कोई कलांतर नहीं
  • अप्रगामी तरंग — y = 2a sin kx cos ωt
  • निस्पंद-प्रस्पंद के बीच दूरी — λ/4; दो निस्पंदों के बीच — λ/2
  • तानित डोरी/खुला पाइप — ν = nv/2L (सभी गुणावृत्तियाँ)
  • बंद पाइप — ν = (n+½)v/2L (केवल विषम गुणावृत्तियाँ)

14.7 विस्पंद

समीपवर्ती आवृत्तियों के व्यतिकरण की परिघटना

विस्पंद तरंगों के व्यतिकरण से उत्पन्न एक रोचक परिघटना है। जब लगभग सन्निकट आवृत्ति (परंतु बराबर नहीं) वाली दो आवर्त ध्वनि तरंगें एक ही समय सुनाई देती हैं तो हमें ध्वनि की तीव्रता में धीरे-धीरे घटाव-बढ़ाव सुनाई देता है जिसकी आवृत्ति दो सन्निकट आवृत्तियों के अंतर के बराबर होती है।

विस्पंद का गणितीय रूप s = s₁+s₂ = [2a cos ωbt] cos ωat  (14.47)
जहाँ ωb=(ω₁−ω₂)/2, ωa=(ω₁+ω₂)/2
विस्पंद आवृत्ति: νbeat = ν₁ − ν₂  (14.48)
उदाहरण 14.6: दो सितारों की डोरियाँ A तथा B एक साथ 'धा' स्वर बजा रहीं हैं तथा 5Hz आवृत्ति के विस्पंद उत्पन्न कर रही हैं। डोरी B के तनाव में वृद्धि करने पर विस्पंद की आवृत्ति घटकर 3Hz रह जाती है। यदि A की आवृत्ति 427Hz है, तो B की मूल आवृत्ति ज्ञात कीजिए।

हल: तनाव बढ़ाने पर आवृत्ति बढ़ती है। यदि νB बढ़ने पर विस्पंद घटा, तो νB<νA होना चाहिए। νA−νB=5Hz ⟹ νB=427−5=422Hz
NEET फोकस
  • विस्पंद आवृत्ति — νbeat = |ν₁ − ν₂|
  • मानव कान — सामान्यतः 10 Hz तक के विस्पंद ही अलग-अलग सुन सकता है
  • तनाव बढ़ाने पर डोरी की आवृत्ति बढ़ती है
  • वाद्य यंत्रों को स्वरबद्ध करने में विस्पंद का उपयोग

🎯 एक-पंक्ति तथ्य — त्वरित पुनरावृत्ति

Quick Revision Facts — सभी महत्वपूर्ण बिंदु एक स्थान पर

  1. तरंग द्रव्य के वास्तविक स्थानांतरण के बिना माध्यम के एक स्थान से दूसरे स्थान तक विक्षोभ के पैटर्न को संचरित करती है।
  2. निर्वात में सभी विद्युत-चुंबकीय तरंगों की चाल c = 2.998×10⁸ m/s (एकसमान)।
  3. यांत्रिक तरंगों (डोरी, ध्वनि, जल, भूकंपी) के संचरण के लिए द्रव्यात्मक माध्यम आवश्यक है।
  4. माध्यम के घटक तरंग गति की दिशा के लंबवत् दोलन करें → अनुप्रस्थ तरंग; अनुदिश दोलन करें → अनुदैर्घ्य तरंग।
  5. वायु में केवल अनुदैर्घ्य यांत्रिक तरंगें संभव हैं; स्टील जैसे ठोसों में अनुप्रस्थ व अनुदैर्घ्य दोनों संभव हैं।
  6. अनुप्रस्थ तरंग के संचरण के लिए माध्यम में अपरूपण प्रत्यास्थता गुणांक होना चाहिए (केवल ठोसों में)।
  7. अनुदैर्घ्य तरंग के संचरण के लिए आयतन प्रत्यास्थता गुणांक चाहिए — यह ठोस, द्रव, गैस तीनों में संभव है।
  8. प्रगामी तरंग समीकरण: y(x,t) = a sin(kx − ωt + φ) (धनात्मक x-दिशा), y(x,t)=a sin(kx+ωt+φ) (ऋणात्मक x-दिशा)।
  9. a (आयाम) = तरंग का अधिकतम विस्थापन; (kx−ωt+φ) = कला; φ = कला-नियतांक।
  10. तरंगदैर्ध्य λ = समान कला के दो क्रमागत बिंदुओं (शीर्षों/गर्तों) के बीच की न्यूनतम दूरी; λ=2π/k।
  11. k (कोणीय तरंग संख्या) = 2π/λ, मात्रक rad/m।
  12. आवर्तकाल T = 2π/ω; आवृत्ति ν = 1/T = ω/2π, मात्रक हर्ट्ज़।
  13. प्रगामी तरंग की चाल: v = ω/k = λ/T = λν — यह सभी प्रगामी तरंगों के लिए व्यापक संबंध है।
  14. तानित डोरी में अनुप्रस्थ तरंग की चाल: v = √(T/μ), जहाँ T तनाव, μ रैखिक द्रव्यमान घनत्व।
  15. तरंग चाल केवल माध्यम के गुणों (T, μ) पर निर्भर करती है, तरंगदैर्ध्य/आवृत्ति पर स्वतः निर्भर नहीं करती।
  16. किसी माध्यम में अनुदैर्घ्य तरंग (ध्वनि) की चाल: v = √(B/ρ), जहाँ B आयतन प्रत्यास्थता गुणांक, ρ घनत्व।
  17. ठोस छड़ में अनुदैर्घ्य तरंग की चाल: v = √(Y/ρ), Y यंग गुणांक।
  18. न्यूटन का सूत्र (समतापी): v=√(P/ρ) — STP पर वायु के लिए यह 280 m/s देता है (मापित मान से 15% कम, गलत)।
  19. लाप्लास संशोधन (रुद्धोष्म): v = √(γP/ρ), γ=Cp/Cv — वायु के लिए γ=7/5, सही मान 331.3 m/s देता है।
  20. द्रवों तथा ठोसों में ध्वनि की चाल गैसों से अधिक होती है (आयतन प्रत्यास्थता गुणांक अधिक होने के कारण)।
  21. अध्यारोपण का सिद्धांत: जब दो या अधिक तरंगें एक साथ गमन करती हैं, नेट विस्थापन प्रत्येक तरंग के विस्थापनों का बीजगणितीय योग होता है — यह व्यतिकरण की परिघटना का मूल है।
  22. दो समान आयाम-आवृत्ति की तरंगों का व्यतिकरण: कलांतर φ=0 पर संपोषी (आयाम अधिकतम 2a); φ=π पर विनाशी (आयाम शून्य)।
  23. प्रगामी तरंग का दृढ़ परिसीमा (बंद सिरे) से परावर्तन में π (180°) कलांतर उत्पन्न होता है।
  24. प्रगामी तरंग का खुली परिसीमा से परावर्तन में कोई कलांतर नहीं होता।
  25. विपरीत दिशाओं में गतिशील दो सर्वसम तरंगों के व्यतिकरण से अप्रगामी तरंगें उत्पन्न होती हैं: y=[2a sin kx] cos ωt।
  26. अप्रगामी तरंग में शून्य विस्थापन के बिंदु निस्पंद, अधिकतम विस्थापन के बिंदु प्रस्पंद कहलाते हैं; दोनों में क्रमागत बीच की दूरी λ/2।
  27. दोनों सिरों पर परिबद्ध डोरी: ν = nv/2L (n=1,2,3...); मूल विधा (n=1) = v/2L; सभी (सम व विषम) गुणावृत्तियाँ संभव।
  28. एक सिरे पर बंद, दूसरे पर खुले वायु-स्तंभ: ν = (n+½)v/2L (n=0,1,2...); मूल विधा = v/4L; केवल विषम गुणावृत्तियाँ संभव।
  29. दोनों सिरों पर खुले वायु-स्तंभ में भी सभी गुणावृत्तियाँ (सम व विषम) संभव होती हैं, ठीक तानित डोरी की तरह।
  30. बाह्य आवृत्ति निकाय की स्वाभाविक आवृत्ति के बराबर होने पर अनुनाद उत्पन्न होता है।
  31. विस्पंद तब उत्पन्न होते हैं जब बहुत कम अंतर की दो आवृत्तियों ν₁,ν₂ की तरंगें एक साथ संसूचित होती हैं: विस्पंद आवृत्ति = ν₁ − ν₂।
  32. ध्वनि तरंग में विस्थापन निस्पंद = दाब प्रस्पंद, तथा विस्थापन प्रस्पंद = दाब निस्पंद (90° का कलांतर होने के कारण)।

✍️ अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल (14.1 – 14.19)

NCERT अभ्यास — प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें

प्रश्न 14.1 2.50 kg द्रव्यमान की 20.0 m लंबी तानित डोरी पर 200 N बल का तनाव है। यदि इस डोरी के एक सिरे को अनुप्रस्थ झटका दिया जाए तो उत्पन्न विक्षोभ कितने समय में दूसरे सिरे तक पहुँचेगा?
हल

रैखिक द्रव्यमान घनत्व: μ = द्रव्यमान/लंबाई = 2.50/20.0 = 0.125 kg/m

अनुप्रस्थ तरंग की चाल: v = √(T/μ) = √(200/0.125) = √1600 = 40 m/s

समय = दूरी/चाल = 20.0/40 = 0.5 s

प्रश्न 14.2 300 m ऊँची मीनार के शीर्ष से गिराया गया पत्थर मीनार के आधार पर बने तालाब के पानी से टकराता है। यदि वायु में ध्वनि की चाल 340 m/s है तो पत्थर के टकराने की ध्वनि मीनार के शीर्ष पर पत्थर गिराने के कितनी देर बाद सुनाई देगी? (g=9.8 m/s²)
हल

चरण 1: पत्थर के गिरने में लगा समय (t₁)

h = ½gt₁² ⟹ 300 = ½×9.8×t₁²

t₁² = 600/9.8 = 61.22; t₁ = √61.22 = 7.82 s

चरण 2: ध्वनि के ऊपर आने में लगा समय (t₂)

t₂ = h/v = 300/340 = 0.882 s

कुल समय = t₁ + t₂ = 7.82 + 0.882 = 8.70 s

प्रश्न 14.3 12.0 m लंबे स्टील के तार का द्रव्यमान 2.10 kg है। तार में तनाव कितना होना चाहिए ताकि उस तार पर किसी अनुप्रस्थ तरंग की चाल 20°C पर शुष्क वायु में ध्वनि की चाल (343 m/s) के बराबर हो।
हल

रैखिक द्रव्यमान घनत्व: μ = 2.10/12.0 = 0.175 kg/m

हमें चाहिए: v = √(T/μ) = 343 m/s

T = v²μ = (343)² × 0.175 = 117649 × 0.175 = 20588.6 N ≈ 2.06 × 10⁴ N

प्रश्न 14.4 सूत्र v=√(γP/ρ) का उपयोग करके स्पष्ट कीजिए कि वायु में ध्वनि की चाल क्यों (a) दाब पर निर्भर नहीं करती, (b) ताप के साथ बढ़ जाती है, तथा (c) आर्द्रता के साथ बढ़ जाती है?
हल

(a) दाब पर निर्भर नहीं करती: आदर्श गैस समीकरण से, स्थिर ताप T पर P/ρ = RT/M होता है, जो केवल ताप T व मोलर द्रव्यमान M पर निर्भर करता है, दाब P पर नहीं। अतः v=√(γP/ρ) में P/ρ स्थिर ताप पर अचर रहता है — v दाब पर निर्भर नहीं करती।

(b) ताप के साथ बढ़ती है: ρ=PM/RT प्रतिस्थापित करने पर v=√(γRT/M) प्राप्त होता है। स्पष्ट है कि v ∝ √T — अतः ताप T बढ़ने पर ध्वनि की चाल बढ़ती है।

(c) आर्द्रता के साथ बढ़ती है: नम वायु में जलवाष्प (M=18) मिश्रित होने से वायु का प्रभावी मोलर द्रव्यमान M घटता है। चूँकि v=√(γRT/M) में v, M के व्युत्क्रमानुपाती है, M घटने से आर्द्र वायु में ध्वनि की चाल शुष्क वायु से अधिक हो जाती है।

प्रश्न 14.5 क्या y=f(x±vt) रूप में होना प्रगामी तरंग के लिए पर्याप्त है? परीक्षण कीजिए: (a) (x−vt)² (b) log[(x+vt)/x₀] (c) 1/(x+vt)
हल

प्रगामी तरंग को निरूपित करने के लिए, फलन का (x±vt) के रूप में होना आवश्यक शर्त है, परंतु पर्याप्त शर्त नहीं है — फलन को सभी x और t के मानों के लिए परिमित (finite) भी रहना चाहिए।

(a) y=(x−vt)²: x−vt का फलन है, परंतु x→±∞ पर y→∞। प्रगामी तरंग को निरूपित नहीं करता।

(b) y=log[(x+vt)/x₀]: x+vt का फलन है, परंतु x→∞ पर log फलन भी अपरिमित; x+vt≤0 पर अपरिभाषित। प्रगामी तरंग को निरूपित नहीं करता।

(c) y=1/(x+vt): x+vt का फलन है, परंतु x+vt=0 पर y अपरिमित (∞)। प्रगामी तरंग को निरूपित नहीं करता।

निष्कर्ष: प्रतिलोम कथन सत्य नहीं है — तीनों (a), (b), (c) में से कोई भी किसी वास्तविक प्रगामी तरंग को निरूपित नहीं करता।

प्रश्न 14.6 कोई चमगादड़ वायु में 1000 kHz आवृत्ति की पराश्रव्य ध्वनि उत्सर्जित करता है। यदि यह ध्वनि जल के पृष्ठ से टकराती है, तो (a) परावर्तित ध्वनि तथा (b) पारगमित ध्वनि की तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। वायु तथा जल में ध्वनि की चाल क्रमशः 340 m/s तथा 1486 m/s है।
हल

आवृत्ति f = 1000 kHz = 1×10⁶ Hz (परावर्तन और पारगमन दोनों में अपरिवर्तित रहती है)

(a) परावर्तित ध्वनि (वायु में ही रहती है):

λ = vवायु/f = 340/(1×10⁶) = 3.4 × 10⁻⁴ m = 0.34 mm

(b) पारगमित ध्वनि (जल में प्रवेश करती है):

λ = vजल/f = 1486/(1×10⁶) = 1.486 × 10⁻³ m ≈ 1.49 mm

प्रश्न 14.7 किसी अस्पताल में ऊतकों में ट्यूमरों का पता लगाने के लिए पराश्रव्य स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। उस ऊतक में ध्वनि की तरंगदैर्ध्य कितनी है जिसमें ध्वनि की चाल 1.7 km/s है? स्कैनर की प्रचालन आवृत्ति 4.2 MHz है।
हल

v = 1.7 km/s = 1700 m/s; f = 4.2 MHz = 4.2×10⁶ Hz

λ = v/f = 1700/(4.2×10⁶) = 4.05 × 10⁻⁴ m ≈ 0.405 mm

प्रश्न 14.8 किसी डोरी पर अनुप्रस्थ गुणावृत्ति तरंग का वर्णन y(x,t)=3.0 sin(36t+0.018x+π/4) द्वारा (x,y cm में, t s में)। (a) प्रगामी/अप्रगामी? चाल व दिशा? (b) आयाम व आवृत्ति? (c) आरंभिक कला? (d) दो क्रमागत शिखरों के बीच न्यूनतम दूरी?
हल

समीकरण kx+ωt रूप में है — ऋणात्मक x-दिशा में गमन करती प्रगामी तरंग।

(a) प्रगामी तरंग, ऋणात्मक x-दिशा में। चाल: v = ω/k = 36/0.018 = 2000 cm/s = 20 m/s

(b) आयाम = 3.0 cm; ω=36 rad/s, ν = 36/2π = 5.73 Hz

(c) प्रारंभिक कला (x=0, t=0): φ = π/4 rad (45°)

(d) दो क्रमागत शिखरों के बीच न्यूनतम दूरी = λ:

k = 0.018 rad/cm, λ = 2π/k = 2π/0.018 = 349.07 cm ≈ 3.49 m

प्रश्न 14.9 प्रश्न 14.8 में वर्णित तरंग के लिए x=0cm, 2cm तथा 4cm के लिए विस्थापन (y) और समय (t) के बीच ग्राफ आलेखित कीजिए। इन ग्राफों की आकृति क्या है?
हल

प्रत्येक स्थिर x मान के लिए y(t)=3.0 sin(36t+0.018x+π/4) एक ज्यावक्रीय (sinusoidal) फलन है — तीनों ग्राफ समान ज्यावक्रीय आकृति के होंगे।

समान: आयाम (3.0 cm) तथा आवृत्ति (ω=36 rad/s) — तीनों बिंदुओं पर।

भिन्न: केवल कला (phase) — प्रत्येक x मान के लिए कला-कोण (0.018x + π/4) अलग होगा, जिससे तीनों ग्राफ समय-अक्ष पर एक-दूसरे के सापेक्ष खिसके हुए दिखाई देंगे।

निष्कर्ष: प्रगामी तरंग में विभिन्न बिंदुओं पर दोलन केवल कला में भिन्न होता है, आयाम व आवृत्ति में नहीं।

प्रश्न 14.10 प्रगामी गुणावृत्ति तरंग y(x,t)=2.0 cos 2π(10t−0.0080x+0.35) (x,y m में, t s में) के लिए उन दो दोलनी बिंदुओं के बीच कलांतर कितना है जिनके बीच की दूरी है (a) 4m (b) 0.5m (c) λ/2 (d) 3λ/4
हल

k = 2π×0.0080 rad/m ⟹ λ = 1/0.0080 = 125 m

कलांतर: Δφ = (2π/λ)Δx

(a) Δx=4m: Δφ = 2π×4/125 = 8π/125 = 0.201 rad (≈11.52°)

(b) Δx=0.5m: Δφ = 2π×0.5/125 = π/125 = 0.0251 rad (≈1.44°)

(c) Δx=λ/2: Δφ = π rad (180°)

(d) Δx=3λ/4: Δφ = 3π/2 rad (270°)

प्रश्न 14.11 दोनों सिरों पर परिबद्ध तानित डोरी पर y(x,t)=0.06 sin(2π/3 x)cos(120πt), x,y m में, t s में। डोरी लंबाई 1.5m, संहति 3.0×10⁻² kg। (a) प्रगामी अथवा अप्रगामी? (b) तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, चाल? (c) डोरी में तनाव?
हल

(a) फलन sin(kx) × cos(ωt) रूप में है — अप्रगामी तरंग (standing wave)।

(b) 2a sin(kx)cos(ωt) = a sin(kx−ωt) + a sin(kx+ωt), जहाँ a=0.03m

k=2π/3 rad/m ⟹ λ = 2π/k = 3 m; ω=120π rad/s ⟹ ν = ω/2π = 60 Hz

प्रत्येक घटक तरंग की चाल: v = ω/k = 120π/(2π/3) = 180 m/s

(c) μ = 3.0×10⁻²/1.5 = 0.02 kg/m

तनाव: T = v²μ = (180)²×0.02 = 32400×0.02 = 648 N

प्रश्न 14.12 प्रश्न 14.11 में वर्णित डोरी पर तरंग के लिए: क्या डोरी के सभी बिंदु समान (a) आवृत्ति (b) कला (c) आयाम से कंपन करते हैं? (ii) एक सिरे से 0.375 m दूर के बिंदु का आयाम कितना है?
हल

(i)(a) आवृत्ति: हाँ, अप्रगामी तरंग में सभी बिंदु समान आवृत्ति (60 Hz) से दोलन करते हैं।

(i)(b) कला: दो क्रमागत निस्पंदों के बीच सभी बिंदु समान कला में; परंतु किसी निस्पंद के दोनों ओर π (180°) का अंतर।

(i)(c) आयाम: नहीं, आयाम(x) = 0.06 sin(2πx/3) m; निस्पंदों पर शून्य, प्रस्पंदों पर अधिकतम।

(ii) x=0.375m पर आयाम = 0.06 sin(2π×0.375/3) = 0.06 sin(π/4) = 0.06×0.7071 = 0.0424 m = 4.24 cm

प्रश्न 14.13 निम्न में से कौन (i) प्रगामी तरंग (ii) अप्रगामी तरंग (iii) इनमें से कोई भी नहीं: (a) y=2cos(3x)sin10t (b) y=2√(x−vt) (c) y=3sin(5x−0.5t)+4cos(5x−0.5t) (d) y=cosx sint + cos2x sin2t
हल

(a) y=2cos(3x)sin(10t): sin(kx) व cos(ωt) गुणनफल रूप। सर्वसमिका से: = sin(10t+3x) − sin(3x−10t) — विपरीत दिशाओं की दो तरंगों का योग। अप्रगामी तरंग।

(b) y=2√(x−vt): अनावर्ती (non-periodic) — दोलनी प्रकृति का नहीं, x<vt पर अपरिभाषित। किसी वास्तविक तरंग को निरूपित नहीं करता।

(c) y=3sin(5x−0.5t)+4cos(5x−0.5t): दोनों पद समान कोणांक (5x−0.5t), अतः R sin(5x−0.5t+θ) रूप में (R=√(3²+4²)=5)। प्रगामी तरंग।

(d) y=cosx sint + cos2x sin2t: दो अलग-अलग पद, प्रत्येक अप्रगामी तरंग। दो अप्रगामी तरंगों का अध्यारोपण।

प्रश्न 14.14 दो दृढ़ टेकों के बीच तानित तार अपनी मूल विधा में 45 Hz आवृत्ति से कंपन करता है। द्रव्यमान 3.5×10⁻² kg, रैखिक द्रव्यमान घनत्व 4.0×10⁻² kg/m। (a) अनुप्रस्थ तरंग की चाल? (b) तार में तनाव?
हल

चरण 1: तार की लंबाई: L = 3.5×10⁻²/4.0×10⁻² = 0.875 m

(a) मूल विधा (n=1): ν₁ = v/2L

v = 2Lν₁ = 2×0.875×45 = 78.75 m/s

(b) T = v²μ = (78.75)²×0.04 = 248.06 N ≈ 248 N

प्रश्न 14.15 एक सिरे पर खुली तथा दूसरे सिरे पर चलायमान पिस्टन लगी 1m लंबी नलिका, 340 Hz के स्रोत के साथ 25.5cm अथवा 79.3cm वायु कॉलम पर अनुनाद दर्शाती है। वायु में ध्वनि की चाल का आकलन कीजिए।
हल

नलिका एक सिरे से बंद (पिस्टन) व दूसरे से खुली — बंद पाइप जैसी।

दो क्रमागत अनुनाद लंबाइयों के बीच अंतर = λ/2:

79.3 − 25.5 = 53.8 cm = λ/2 ⟹ λ = 107.6 cm = 1.076 m

v = λ × f = 1.076 × 340 = 365.84 m/s ≈ 366 m/s

प्रश्न 14.16 100cm लंबी स्टील-छड़ अपने मध्य बिंदु पर परिबद्ध है। इसके अनुदैर्घ्य कंपनों की मूल आवृत्ति 2.53 kHz है। स्टील में ध्वनि की चाल क्या है?
हल

छड़ मध्य बिंदु पर परिबद्ध — वहाँ निस्पंद, दोनों सिरों पर प्रस्पंद।

मूल विधा: L = 2×(λ/4) = λ/2 ⟹ λ = 2L = 2×1.00 = 2.00 m

v = λ × f = 2.00 × 2530 = 5060 m/s

प्रश्न 14.17 20cm लंबाई के पाइप का एक सिरा बंद है। 430Hz स्रोत से कौन-सी गुणावृत्ति उत्तेजित होगी? दोनों सिरे खुले हों तो भी अनुनाद होगा? (v = 340 m/s)
हल

बंद पाइप: νₙ = (2n−1)v/4L (केवल विषम)

मूल आवृत्ति: ν₁ = 340/(4×0.2) = 340/0.8 = 425 Hz

430Hz ≈ 425Hz ⟹ प्रथम गुणावृत्ति (मूल विधा) उत्तेजित होगी।

यदि दोनों सिरे खुले: νₙ = nv/2L; ν₁ = 340/0.4 = 850 Hz; अन्य: 1700Hz, 2550Hz...

430Hz इनमें से किसी से मेल नहीं ⟹ कोई अनुनाद नहीं।

प्रश्न 14.18 सितार की दो डोरियाँ A तथा B 'गा' स्वर बजा रही हैं तथा 6Hz के विस्पंद उत्पन्न कर रही हैं। डोरी A का तनाव कुछ घटाने पर विस्पंद 3Hz रह जाती है। यदि A की आवृत्ति 324Hz है तो B की आवृत्ति क्या है?
हल

तनाव घटाने पर डोरी की आवृत्ति घटती है (ν∝√T)।

यहाँ A का तनाव घटाया गया, अतः ν_A घटी; विस्पंद भी 6→3Hz हुई।

यदि ν_A > ν_B होती, तो ν_A घटने से यह ν_B के करीब आती — अंतर घटता (✓ मेल खाता है)।

यदि ν_A < ν_B होती, तो अंतर बढ़ता (✗ मेल नहीं खाता)।

अतः ν_A > ν_B; ν_B = 324 − 6 = 318 Hz

प्रश्न 14.19 स्पष्ट कीजिए क्यों: (a) ध्वनि तरंग में विस्थापन निस्पंद = दाब प्रस्पंद (b) चमगादड़ अवरोधकों की दूरी/दिशा/प्रकृति/आकार निर्धारित करते हैं (c) वायलिन व सितार के स्वरों में भेद (d) ठोस में दोनों तरंगें, गैसों में केवल अनुदैर्घ्य (e) परिक्षेपी माध्यम में स्पंद की आकृति विकृत।
हल

(a) दाब-परिवर्तन विस्थापन के स्थानिक अवकलज के समानुपाती होता है। जहाँ विस्थापन शून्य (निस्पंद), वहाँ ढाल अधिकतम ⟹ दाब-परिवर्तन अधिकतम (प्रस्पंद)। जहाँ विस्थापन अधिकतम (प्रस्पंद), वहाँ ढाल शून्य ⟹ दाब-निस्पंद।

(b) चमगादड़ पराश्रव्य तरंगें उत्सर्जित करता है जो अवरोधक से परावर्तित होती हैं। लौटने के समय से दूरी, आगमन-दिशा से दिशा, तीव्रता व आवृत्ति-परिवर्तन से प्रकृति व आकार का पता चलता है।

(c) दोनों वाद्यों की मूल आवृत्ति समान हो सकती है, परंतु अधिस्वरों (overtones) के अनुपात भिन्न होते हैं — इससे अंतिम तरंग-आकृति भिन्न होती है, जिससे गुणात्मक भेद (timbre) महसूस होता है।

(d) अनुप्रस्थ तरंगों के लिए अपरूपण प्रत्यास्थता गुणांक आवश्यक है — केवल ठोसों में। गैसों/द्रवों में यह नहीं होता, अतः वहाँ केवल आयतन प्रत्यास्थता आधारित अनुदैर्घ्य तरंगें संभव हैं।

(e) स्पंद कई आवृत्ति-घटकों का अध्यारोपण है। परिक्षेपी माध्यम में विभिन्न आवृत्तियों की चाल भिन्न होती है — अतः घटक अलग-अलग गति से चलकर कलांतरित होते हैं, जिससे स्पंद का आकार विकृत/फैल जाता है।

🌡️ NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

तरंग चाल, नलिका/डोरी अनुनाद, डॉप्लर प्रभाव व विस्पंद पर आधारित 10 उच्च-स्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1 किसी डोरी में तनाव को चार गुना कर दिया जाए (द्रव्यमान घनत्व अपरिवर्तित), तो अनुप्रस्थ तरंग की चाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
हल

v = √(T/μ) ⟹ v ∝ √T

T चार गुना ⟹ v = √4 = 2 गुना हो जाएगी

प्रश्न 2 दोनों सिरों पर खुले किसी वायु-स्तंभ की मूल आवृत्ति, समान लंबाई के एक सिरे पर बंद वायु-स्तंभ की मूल आवृत्ति से कितने गुना है?
हल

खुले पाइप: νखुला = v/2L; बंद पाइप: νबंद = v/4L

νखुला/νबंद = (v/2L)/(v/4L) = 2

खुले पाइप की मूल आवृत्ति, बंद पाइप से 2 गुना होती है।

प्रश्न 3 दो कलामेल तरंगें y₁=asin(ωt) तथा y₂=asin(ωt+π/2), समान दिशा में अध्यारोपित होती हैं। परिणामी आयाम ज्ञात कीजिए।
हल

परिणामी आयाम A = 2a cos(φ/2), जहाँ φ=π/2

A = 2a cos(π/4) = 2a×(1/√2) = a√2

प्रश्न 4 400Hz व 404Hz आवृत्ति की दो ध्वनि तरंगें एक साथ बजाई जाती हैं। विस्पंद आवृत्ति तथा 1 सेकंड में सुनाई देने वाले उच्चतम-तीव्रता के क्षणों की संख्या ज्ञात कीजिए।
हल

विस्पंद आवृत्ति = |ν₁−ν₂| = |404−400| = 4 Hz

1 सेकंड में ध्वनि की तीव्रता 4 बार अधिकतम (प्रबल) होगी।

प्रश्न 5 STP पर वायु में ध्वनि की चाल 332 m/s है। यदि ताप 0°C से बढ़ाकर 91°C कर दिया जाए, तो नई चाल ज्ञात कीजिए।
हल

v ∝ √T (T परम ताप में); T₁=273K, T₂=364K

v₂ = v₁×√(T₂/T₁) = 332×√(364/273) = 332×1.1547 = ≈ 383.4 m/s

प्रश्न 6 कोई स्रोत विरामावस्था में स्थित प्रेक्षक की ओर vs चाल से गतिमान है। यदि स्रोत की वास्तविक आवृत्ति ν हो, तो प्रेक्षक द्वारा सुनी गई आवृत्ति के लिए व्यंजक लिखिए (ध्वनि की चाल v)।
हल

डॉप्लर प्रभाव: ν' = ν × v/(v−vs)

स्रोत प्रेक्षक की ओर आ रहा है, अतः आवृत्ति बढ़ती है (हर में ऋणात्मक चिह्न)।

प्रश्न 7 किसी डोरी पर बनी अप्रगामी तरंग y=4sin(πx/15)cos(96πt) है (x,y सेमी में, t सेकंड में)। दो क्रमागत निस्पंदों के बीच की दूरी ज्ञात कीजिए।
हल

k = π/15 rad/cm ⟹ λ = 2π/k = 2π/(π/15) = 30 cm

दो क्रमागत निस्पंदों के बीच दूरी = λ/2 = 15 cm

प्रश्न 8 समुद्र के जल (आयतन प्रत्यास्थता गुणांक B=2×10⁹ Pa, घनत्व ρ=1000 kg/m³) में ध्वनि की चाल ज्ञात कीजिए।
हल

v = √(B/ρ) = √(2×10⁹/1000) = √(2×10⁶) = ≈ 1414 m/s

प्रश्न 9 किसी डोरी की मूल आवृत्ति 256 Hz है। यदि डोरी की लंबाई को अपरिवर्तित रखते हुए तनाव को दोगुना कर दिया जाए, तो नई मूल आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल

ν = (1/2L)√(T/μ) ⟹ ν ∝ √T

ν' = 256×√2 = ≈ 362 Hz

प्रश्न 10 किसी अनुप्रस्थ प्रगामी तरंग के लिए अधिकतम कण-वेग तथा तरंग-चाल समान हों, तो तरंगदैर्ध्य व आयाम में संबंध ज्ञात कीजिए।
हल

अधिकतम कण-वेग vparticle,max = aω; तरंग-चाल vwave = ω/k

शर्त: aω = ω/k ⟹ ak = 1 ⟹ a×(2π/λ) = 1

⟹ λ = 2πa (तरंगदैर्ध्य, आयाम की 2π गुनी होनी चाहिए)

🏆 NEET में पूछे गए प्रश्न

AIPMT/NEET परीक्षाओं में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, वर्ष-क्रमानुसार, पूर्ण हल सहित

परीक्षा रणनीति: इस अध्याय से NEET में सामान्यतः 2–3 प्रश्न (8–12 अंक) पूछे जाते हैं। सर्वाधिक बार दोहराए गए विषय: (1) बंद/खुली नलिका (आर्गन पाइप) की अनुनाद व गुणावृत्तियाँ, (2) विस्पंद (Beats), (3) ताप के साथ ध्वनि की चाल में परिवर्तन, तथा (4) डॉप्लर प्रभाव।
प्रश्न 1 एक सिरे पर बंद आर्गन पाइप को अपने तीसरे अधिस्वर में उत्तेजित किया जाता है। पाइप में वायु की स्थिति के बारे में सही तथ्य? AIPMT 1991
उत्तर

बंद पाइप में केवल विषम गुणावृत्तियाँ बनती हैं: मूल=1ν, प्रथम अधिस्वर=3ν, द्वितीय अधिस्वर=5ν, तृतीय अधिस्वर=7ν।

आवृत्ति 7ν का अर्थ है 3 पूर्ण लूप + 1 अर्ध लूप, जिससे कुल 4 निस्पंद तथा 4 प्रस्पंद बनते हैं।

प्रश्न 2 0.5 m लंबाई की तानित डोरी 512 Hz के स्वरित्र द्विभुज के साथ अनुनाद करती है। 256 Hz आवृत्ति के स्वरित्र द्विभुज के साथ अनुनाद के लिए डोरी की आवश्यक लंबाई ज्ञात कीजिए। AIPMT 1993
उत्तर

ν = (1/2L)√(T/μ) ⟹ ν ∝ 1/L (समान T, μ पर)

L' = L×(ν/ν') = 0.5×(512/256) = 0.5×2 = 1.0 m

आवृत्ति आधी होने पर डोरी की लंबाई दोगुनी (1.0 m) करनी होगी।

प्रश्न 3 किसी अप्रगामी तरंग को y = A sin(100t) cos(0.01x) द्वारा निरूपित किया जाता है। घटक तरंगों की चाल ज्ञात कीजिए। AIPMT 1994
उत्तर

ω = 100 rad/s, k = 0.01 rad/m

v = ω/k = 100/0.01 = 10⁴ m/s

प्रश्न 4 किसी डोरी में आरंभिक तनाव को दोगुना करने पर अनुप्रस्थ तरंग की आरंभिक चाल तथा अंतिम चाल का अनुपात ज्ञात कीजिए।
उत्तर

v = √(T/μ) ⟹ v ∝ √T

v₁/v₂ = √(T₁/T₂) = √(T/2T) = 1/√2 ⟹ v₁ : v₂ = 1 : √2

प्रश्न 5 किसी वियोज्य पिस्टन वाली नली में एक स्वरित्र द्विभुज से अनुनाद, 27°C ताप पर, 20 cm व 73 cm वायु-स्तंभ लंबाई पर उत्पन्न होता है। यदि स्वरित्र द्विभुज की आवृत्ति 320 Hz है, तो 27°C पर वायु में ध्वनि की चाल ज्ञात कीजिए। NEET 2018
उत्तर

बंद पाइप में क्रमागत अनुनाद लंबाइयों के बीच अंतर = λ/2

λ/2 = 73−20 = 53 cm ⟹ λ = 106 cm = 1.06 m

v = λν = 1.06×320 = 339.2 m/s ≈ 339 m/s

प्रश्न 6 सितार की दो डोरियाँ A व B 'गा' स्वर बजा रही हैं तथा 6Hz विस्पंद उत्पन्न कर रही हैं। A का तनाव थोड़ा घटाने पर विस्पंद आवृत्ति घटकर 3Hz रह जाती है। यदि A की आवृत्ति 324Hz है, तो B की आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
उत्तर

तनाव घटाने पर A की आवृत्ति घटी। चूँकि विस्पंद घटा (6→3Hz), अतः A, B के करीब आ रहा था — इसका अर्थ νA>νB था।

νB = νA − 6 = 324 − 6 = 318 Hz

प्रश्न 7 किसी गैस से भरी आर्गन पाइप 27°C पर अपनी मूल विधा में 400 Hz आवृत्ति पर अनुनाद करती है। यदि उसी गैस को 90°C पर भर दिया जाए, तो नई अनुनाद आवृत्ति ज्ञात कीजिए। NEET 2022
उत्तर

ध्वनि की चाल v∝√T, तथा मूल आवृत्ति ν∝v (लंबाई अपरिवर्तित)

T₁=300K, T₂=363K

ν₂ = 400×√(363/300) = 400×1.1 ≈ 440 Hz

प्रश्न 8 किसी बंद पाइप (एक सिरा बंद), लंबाई 85 cm, में 1250 Hz से नीचे कितनी संभावित प्राकृतिक दोलन आवृत्तियाँ हो सकती हैं? (ध्वनि की चाल = 340 m/s) NEET 2014
उत्तर

बंद पाइप: νn=(2n−1)v/4L; मूल आवृत्ति ν₁ = 340/(4×0.85) = 100 Hz

संभावित आवृत्तियाँ (केवल विषम): 100, 300, 500, 700, 900, 1100, 1300... Hz

1250 Hz से नीचे: 100, 300, 500, 700, 900, 1100 — कुल 6 आवृत्तियाँ

प्रश्न 9 किसी डोरी को तीन भागों में बाँटा गया है जिनकी मूल आवृत्तियाँ क्रमशः n₁, n₂, n₃ हैं। मूल (अखंडित) डोरी की मूल आवृत्ति n क्या होगी? NEET 2014
उत्तर

प्रत्येक खंड: ni = v/(2li) ⟹ li = v/(2ni)

L = l₁+l₂+l₃ तथा n = v/2L, अतः 1/n = 2L/v = 1/n₁+1/n₂+1/n₃

1/n = 1/n₁ + 1/n₂ + 1/n₃

प्रश्न 10 एक मोटरसाइकिल चालक 36 km/h की चाल से आगे बढ़ रही एक कार (चाल 18 km/h) के पीछे है, जो 1392 Hz आवृत्ति का हॉर्न बजा रही है। यदि ध्वनि की चाल 343 m/s हो, तो मोटरसाइकिल चालक को सुनाई देने वाली आवृत्ति ज्ञात कीजिए। NEET 2014
उत्तर

मोटरसाइकिल (प्रेक्षक): vo=10 m/s (स्रोत की ओर); कार (स्रोत): vs=5 m/s (प्रेक्षक से दूर)

ν' = ν × (v+vo)/(v+vs) = 1392 × (343+10)/(343+5) = 1392 × 353/348

ν' = 1392 × 1.01437 = ≈ 1412 Hz

✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य

परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु

महत्वपूर्ण
  • यह अध्याय NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (8–12 अंक) रखता है; सर्वाधिक बार दोहराए गए विषय — बंद/खुली नलिका (आर्गन पाइप) की अनुनाद व गुणावृत्तियाँ, विस्पंद, ताप के साथ ध्वनि की चाल में परिवर्तन तथा डॉप्लर प्रभाव हैं।
तथ्य
  • डॉप्लर प्रभाव — स्रोत की गति — जब ध्वनि स्रोत प्रेक्षक की ओर चाल vs से गतिमान हो (प्रेक्षक स्थिर), तो प्रेक्षित आवृत्ति ν'=ν×v/(v−vs) (आवृत्ति बढ़ती है); स्रोत दूर जा रहा हो तो ν'=ν×v/(v+vs) (आवृत्ति घटती है)।
  • डॉप्लर प्रभाव — प्रेक्षक की गति — जब प्रेक्षक स्रोत की ओर चाल vo से गतिमान हो (स्रोत स्थिर), तो प्रेक्षित आवृत्ति ν'=ν×(v+vo)/v (आवृत्ति बढ़ती है); प्रेक्षक दूर जा रहा हो तो ν'=ν×(v−vo)/v (आवृत्ति घटती है)।
तथ्य
  • सामान्य डॉप्लर सूत्र व चिह्न परिपाटी — दोनों (स्रोत व प्रेक्षक) गतिमान होने पर ν'=ν×(v±vo)/(v∓vs); दिशा की जटिलता से बचने हेतु मानक परिपाटी — स्रोत से प्रेक्षक की दिशा को धनात्मक मानें, तदनुसार vo व vs के चिह्न निर्धारित करें।
तुलनात्मक
  • डॉप्लर प्रभाव में अपवाद — यदि स्रोत व प्रेक्षक के बीच की आपेक्षिक दूरी नियत रहे (जैसे दोनों समान गति से समान दिशा में गतिमान हों, या स्रोत की गति प्रेक्षक-स्रोत रेखा के ठीक लंबवत् हो), तो कोई डॉप्लर प्रभाव उत्पन्न नहीं होता (ν'=ν)।
तथ्य
  • विवृत (खुली) नलिका के संनादी — दोनों सिरों पर विवृत नलिका में सभी संनादी उपस्थित होते हैं (मूल स्वर + प्रथम अधिस्वर + द्वितीय अधिस्वर...), आवृत्तियाँ ν=nv/2L (n=1,2,3...) — अर्थात् 1:2:3:4... के अनुपात में।
  • संवृत (बंद) नलिका के संनादी — एक सिरे पर बंद नलिका में केवल विषम संनादी उपस्थित होते हैं, आवृत्तियाँ ν=(2n−1)v/4L (n=1,2,3...) — अर्थात् 1:3:5:7... के अनुपात में।
तुलनात्मक
  • नलिकाओं में अंत्य संशोधन (end correction) — व्यावहारिक रूप से नलिका के खुले सिरे पर निस्पंद ठीक सिरे पर नहीं, बल्कि सिरे से थोड़ी दूरी e≈0.6r (r=नलिका की त्रिज्या) बाहर बनता है; अतः प्रभावी लंबाई (L+e) प्रयुक्त होती है।
तथ्य
  • ध्वनि चाल का न्यूटन बनाम लाप्लास सूत्र — न्यूटन ने ध्वनि संचरण को समतापी प्रक्रम मानकर v=√(P/ρ) प्राप्त किया, जो प्रायोगिक मान से लगभग 16% कम था; लाप्लास ने इसे रुद्धोष्म प्रक्रम मानते हुए v=√(γP/ρ) दिया, जो प्रायोगिक मान से बेहतर मेल खाता है।
तथ्य
  • परावर्तन पर कला-परिवर्तन — दृढ़ (rigid) सीमा से परावर्तित तरंग में π rad (180°) का अतिरिक्त कला-परिवर्तन होता है; मुक्त (free) सीमा से परावर्तन में कोई कला-परिवर्तन नहीं होता।
तुलनात्मक
  • डोरी में तरंग-चाल को प्रभावित करने वाले कारक — v=√(T/μ); तनाव बढ़ाने पर चाल बढ़ती है, मोटी/भारी डोरी (अधिक μ) में चाल घटती है — यह सूत्र डोरी वाद्य यंत्रों में तार कसने-ढीला करने से स्वर बदलने का सैद्धांतिक आधार है।
तथ्य
  • विस्पंद (beats) की आवृत्ति व श्रव्य सीमा — जब दो निकट आवृत्तियों (ν₁, ν₂) की ध्वनियाँ एक साथ सुनी जाएँ, तो विस्पंद आवृत्ति = |ν₁−ν₂|; मानव कान सामान्यतः 10 Hz से कम विस्पंद आवृत्ति को ही पृथक स्पंदनों के रूप में पहचान पाता है।
तथ्य
  • अध्यारोपण सिद्धांत व व्यतिकरण — जब दो या अधिक तरंगें किसी माध्यम में एक साथ अध्यारोपित होती हैं, तो परिणामी विस्थापन प्रत्येक तरंग के पृथक-पृथक विस्थापनों के सदिश योग के बराबर होता है; समान कला में अध्यारोपण रचनात्मक व्यतिकरण तथा विपरीत कला में विनाशी व्यतिकरण उत्पन्न करता है।
तुलनात्मक
  • अनुप्रस्थ बनाम अनुदैर्घ्य तरंगों में अंतर — अनुप्रस्थ तरंगों में कणों का कंपन तरंग-संचरण की दिशा के लंबवत् होता है (जैसे डोरी में तरंग, प्रकाश तरंगें); अनुदैर्घ्य तरंगों में कणों का कंपन तरंग-संचरण की दिशा के समांतर होता है (जैसे ध्वनि तरंगें); केवल अनुदैर्घ्य तरंगें ही द्रव व गैसों में संचरित हो सकती हैं।
रणनीति
  • तरंग समीकरण में संचरण-दिशा पहचानने की युक्ति — किसी भी तरंग समीकरण y=a sin(kx∓ωt) में ऋणात्मक चिह्न (kx−ωt) धनात्मक x-दिशा में संचरण तथा धनात्मक चिह्न (kx+ωt) ऋणात्मक x-दिशा में संचरण दर्शाता है — यह त्वरित पहचान वाला नियम अनेक वैचारिक प्रश्नों में समय बचाता है।
तथ्य
  • प्रतिध्वनि (echo) हेतु न्यूनतम दूरी — मानव कान लगभग 0.1 सेकंड तक की ध्वनि को स्मृति में बनाए रखता है (persistence of hearing); अतः स्पष्ट प्रतिध्वनि सुनने के लिए परावर्तक सतह इतनी दूरी पर होनी चाहिए कि ध्वनि को वहाँ तक जाने व वापस आने में कम से कम 0.1s लगे — वायु में यह न्यूनतम दूरी लगभग 17 m होती है।
तुलनात्मक
  • तीव्रता बनाम प्रबलता — तीव्रता (intensity) आयाम के वर्ग के समानुपाती (I∝A²) एक वस्तुनिष्ठ भौतिक राशि है (मापन योग्य, इकाई W/m²), जबकि प्रबलता (loudness) मानव कान की व्यक्तिनिष्ठ अनुभूति है, जो तीव्रता के साथ लघुगणकीय रूप से (डेसीबल पैमाने पर) बदलती है।
💡 याद रखने योग्य सूत्र-सार: y(x,t)=a sin(kx−ωt+φ) | k=2π/λ | T=2π/ω, ν=1/T | v=ω/k=λν | तानित डोरी: v=√(T/μ) | ध्वनि (सामान्य): v=√(B/ρ) | ठोस छड़: v=√(Y/ρ) | गैस (लाप्लास): v=√(γP/ρ), v∝√T | अप्रगामी तरंग: y=2a sinkx cosωt | दोनों सिरे बंद/खुले डोरी व पाइप: ν=nv/2L | एक सिरा बंद पाइप: ν=(n+½)v/2L (केवल विषम गुणावृत्ति) | विस्पंद आवृत्ति=ν₁−ν₂ | डॉप्लर प्रभाव: ν'=ν(v±vo)/(v∓vs)

यह अध्ययन सामग्री NCERT कक्षा-11 भौतिकी अध्याय 14 "तरंगें" पर आधारित है — अनुप्रस्थ एवं अनुदैर्घ्य तरंगें, प्रगामी तरंग का गणितीय विवरण, तरंग-चाल, अध्यारोपण का सिद्धांत, अप्रगामी तरंगें, अनुनाद, आर्गन पाइप एवं विस्पंद — सम्पूर्ण व्याख्या, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।

तरंगें — ऊर्जा एवं सूचना के संचरण की सुंदर भौतिक व्याख्या।

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