ठोसों के यांत्रिक गुण
इस्पात की छड़ भी थोड़ा झुकती है, रबड़ अपने प्रारंभिक आकार में लौट आता है, पर पंक स्थायी रूप से विरूपित हो जाता है — आखिर क्यों? यह अध्याय बताता है कि पुल, भवन, केबल और मशीनें डिज़ाइन करते समय अभियंता द्रव्यों की प्रत्यास्थता को कैसे समझते व उपयोग करते हैं। प्रतिबल-विकृति से लेकर यंग गुणांक तक, हर अवधारणा आरेखों सहित यहाँ विस्तार से समझाई गई है।
8.1 भूमिका
कोई भी ठोस पूर्ण रूप से दृढ़ नहीं होता — हर पिंड कुछ न कुछ विरूपित हो सकता है।
अध्याय 7 में हमने पिंडों के घूर्णन का अध्ययन किया था तथा अपने विवेचन को केवल दृढ़ पिंडों की सरल स्थितियों तक सीमित रखा था। सामान्यतः दृढ़ पिंड का अर्थ होता है — एक ऐसा कठोर ठोस पदार्थ जिसकी निश्चित आकृति व आकार हो। परंतु वास्तव में पिंडों को तानित, संपीडित अथवा बंकित किया जा सकता है — यहाँ तक कि किसी काफी कठोर इस्पात की छड़ को भी पर्याप्त बाह्य बल लगाकर विरूपित किया जा सकता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि ठोस पिंड पूर्ण रूप से दृढ़ नहीं होते।
जब किसी पंक (मिट्टी जैसे नरम पदार्थ) पिंड पर बल लगाते हैं, तो उसमें अपना प्रारंभिक आकार पुनः प्राप्त करने की प्रवृत्ति ही नहीं होती और वह स्थायी रूप से विरूपित हो जाता है। इस प्रकार के पदार्थ को प्लास्टिक तथा इस गुण को प्लास्टिकता कहते हैं। पंक तथा पुटी लगभग आदर्श प्लास्टिक हैं।
8.2 प्रतिबल तथा विकृति
जब किसी पिंड पर बल लगाया जाता है तो उसमें कैसा और कितना विरूपण होता है — इसे मापने के दो मूल पद।
जब किसी पिंड पर कोई विरूपक बल लगाया जाता है, तो उसमें एक प्रत्यानयन बल विकसित हो जाता है, जो परिमाण में आरोपित बल के बराबर तथा दिशा में उसके विपरीत होता है। एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाले प्रत्यानयन बल को प्रतिबल कहते हैं।
तीन प्रकार के प्रतिबल
(a) अनुदैर्घ्य (तनन/संपीडन) प्रतिबल
बेलन को उसके अनुप्रस्थ परिच्छेद की लंबवत् दिशा में दो समान बल लगाकर तानित किया गया है। इस स्थिति में एकांक क्षेत्रफल पर प्रत्यानयन बल को तनन प्रतिबल कहते हैं। यदि आरोपित बलों के कार्य से बेलन संपीडित हो जाए तो एकांक क्षेत्रफल पर प्रत्यानयन बल को संपीडन प्रतिबल कहते हैं। इन दोनों को अनुदैर्घ्य प्रतिबल भी कहा जाता है।
(b) अपरूपण (स्पर्शी) प्रतिबल
यदि दो बराबर और विरोधी विरूपक बल बेलन के अनुप्रस्थ परिच्छेद के समांतर लगाए जाएँ, तो बेलन के सम्मुख फलकों के बीच सापेक्ष विस्थापन हो जाता है। लगाए गए स्पर्शी बलों के कारण एकांक क्षेत्रफल पर उत्पन्न प्रत्यानयन बल को स्पर्शी या अपरूपण प्रतिबल कहते हैं।
चूँकि θ बहुत कम होता है, tan θ लगभग कोण θ के बराबर ही होता है (उदाहरण के लिए यदि θ=10° हो, तो θ तथा tanθ के मानों में केवल 1% का अंतर होता है)। इस प्रकार:
(c) जलीय प्रतिबल
अधिक दाब के किसी द्रव के अंदर रखा एक ठोस गोला सभी ओर से समान रूप से संपीडित हो जाता है। द्रव द्वारा लगाया गया बल पिंड के पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर लंबवत् दिशा में कार्य करता है; ऐसी स्थिति में पिंड को जलीय संपीडन की स्थिति में कहा जाता है। एकांक क्षेत्रफल पर आंतरिक प्रत्यानयन बल को जलीय प्रतिबल कहते हैं, और इसका मान जलीय दाब के बराबर होता है।
8.3 हुक का नियम
विभिन्न स्थितियों में प्रतिबल तथा विकृति के अलग-अलग रूप हो जाते हैं। कम विरूपण के लिए प्रतिबल तथा विकृति परस्पर अनुक्रमानुपाती होते हैं। यही हुक का नियम कहलाता है।
यहाँ k अनुक्रमानुपातिकता स्थिरांक है तथा इसे प्रत्यास्थता गुणांक कहते हैं।
8.4 प्रतिबल-विकृति वक्र
किसी पदार्थ का पूरा यांत्रिक "चरित्र" एक ही ग्राफ में समाया होता है।
तनन गुणों की मानक जाँच में, किसी परीक्षण बेलन या तार को एक आरोपित बल द्वारा धीरे-धीरे क्रमबद्ध चरणों में विस्तारित किया जाता है और लंबाई में परिवर्तन नोट करते जाते हैं। प्रतिबल तथा उससे उत्पन्न विकृति के बीच एक ग्राफ खींचा जाता है।
वक्र के विभिन्न भागों का अर्थ
- O से A: वक्र रैखिक होता है — इस क्षेत्र में हुक के नियम का पालन होता है। बल हटाने पर पिंड अपनी प्रारंभिक विमाएँ पुनः प्राप्त कर लेता है (प्रत्यास्थ आचरण)।
- A से B: प्रतिबल तथा विकृति अनुक्रमानुपाती नहीं रहते, फिर भी भार हटाने पर पिंड अपनी प्रारंभिक विमाओं पर वापस आ जाता है। बिंदु B पराभव बिंदु (अथवा प्रत्यास्थ सीमा) कहलाता है, और संगत प्रतिबल को द्रव्य का पराभव सामर्थ्य (σy) कहते हैं।
- B से D: प्रतिबल पराभव सामर्थ्य से अधिक हो जाता है। यदि भार को C पर हटा दिया जाए, तो पिंड अपनी प्रारंभिक विमा पुनः प्राप्त नहीं कर पाता — स्थायी विरूपण (प्लास्टिक विरूपण) हो जाता है। बिंदु D द्रव्य की चरम तनन सामर्थ्य (σu) दर्शाता है।
- D से E: इस बिंदु के आगे आरोपित बल को घटाने पर भी अतिरिक्त विकृति उत्पन्न होती है और बिंदु E पर विभंजन (टूटना) हो जाता है।
प्रत्यास्थलक पदार्थ — रबड़ तथा महाधमनी
प्रत्यास्थलक पदार्थ (जैसे रबड़) के लिए प्रतिबल-विकृति वक्र रैखिक नहीं होता तथा कोई स्पष्ट प्लास्टिक क्षेत्र भी नहीं मिलता। महाधमनी (मानव शरीर की मुख्य धमनी) के प्रत्यास्थ ऊतक भी इसी प्रकार का व्यवहार दर्शाते हैं — इन पदार्थों को प्रत्यास्थलक (elastomers) कहा जाता है। ये हुक के नियम का पालन नहीं करते, तथापि प्रत्यास्थ होते हैं।
8.5.1 यंग गुणांक
प्रायोगिक प्रेक्षण यह दर्शाते हैं कि प्रतिबल चाहे तनन हो या संपीडक, उत्पन्न विकृति का मान समान होता है। तनक (या संपीडक) प्रतिबल (σ) तथा अनुदैर्घ्य विकृति (ε) के अनुपात से यंग गुणांक को परिभाषित करते हैं तथा इसे Y द्वारा निरूपित करते हैं:
चूँकि विकृति एक विमाविहीन राशि है, यंग गुणांक की इकाई वही होती है जो प्रतिबल की — अर्थात् N m⁻² या पास्कल (Pa)।
तालिका 8.1 — कुछ द्रव्यों के यंग गुणांक तथा पराभव सामर्थ्य
| पदार्थ | घनत्व ρ (kg m⁻³) | Y (10⁹ N m⁻²) | चरम सामर्थ्य σu (10⁶ N m⁻²) | पराभव सामर्थ्य σy (10⁶ N m⁻²) |
|---|---|---|---|---|
| ऐलुमिनियम | 2710 | 70 | 110 | 95 |
| ताँबा | 8890 | 110 | 400 | 200 |
| लोहा (पिटवाँ) | 7800-7900 | 190 | 330 | 170 |
| इस्पात | 7860 | 200 | 400 | 250 |
| काँच | 2190 | 65 | 50 | — |
| कंक्रीट | 2320 | 30 | 40 | — |
| लकड़ी | 525 | 13 | 50 | — |
| अस्थि | 1900 | 9.4 | 170 | — |
| पॉलीस्टीरीन | 1050 | 3 | 48 | — |
एक संरचनात्मक इस्पात की छड़ की त्रिज्या 10 mm तथा लंबाई 1 m है। 100 kN का बल F इसे लंबाई की दिशा में तनित करता है। छड़ में (a) प्रतिबल, (b) विस्तार, तथा (c) विकृति की गणना कीजिए। संरचनात्मक इस्पात का यंग गुणांक 2.0×10¹¹ N m⁻² है।
हल: छड़ को एक सिरे पर क्लैंप करके, बल को दूसरे सिरे पर लंबाई की दिशा में लगाया गया है।
उत्तर: प्रतिबल = 3.18×10⁸ N/m²; विस्तार = 1.59 mm; विकृति = 0.16%
ताँबे का एक 2.2 m लंबा तार तथा इस्पात का एक 1.6 m लंबा तार, जिनमें दोनों के व्यास 3.0 mm हैं, सिरे से जुड़े हुए हैं। जब इसे एक भार से तनित किया गया तो कुल विस्तार 0.7 mm हुआ। लगाए गए भार का मान प्राप्त कीजिए।
हल: ताँबे और इस्पात के तार समान तनक प्रतिबल के अंतर्गत हैं, क्योंकि उन पर समान तनाव (भार W के बराबर) लगा है तथा उनके अनुप्रस्थ परिच्छेद क्षेत्रफल A बराबर हैं।
कुल विस्तार ΔL_c+ΔL_s = 7.0×10⁻⁴ m; इन दो समीकरणों को हल करने पर:
उत्तर: लगाया गया भार W ≈ 1.8×10² N (180 N)
किसी सर्कस में एक मानवीय पिरैमिड में एक संतुलित ग्रुप का सारा भार एक व्यक्ति, जो अपनी पीठ के बल लेटा हुआ है, के पैरों पर आधारित है। इस कार्य का निष्पादन करने वाले सभी व्यक्तियों, मेजों, प्लाकों आदि का कुल द्रव्यमान 280 kg है। पिरैमिड की तली पर पीठ के बल लेटे व्यक्ति का द्रव्यमान 60 kg है। इसकी प्रत्येक ऊर्वस्थि (फीमर) की लंबाई 50 cm तथा प्रभावी त्रिज्या 2.0 cm है। अतिरिक्त भार के कारण प्रत्येक ऊर्वस्थि की संपीडन मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल: पिरैमिड की तली के निष्पादक के पैरों पर आधारित द्रव्यमान = 280−60 = 220 kg
इसका भार = 220×9.8 = 2156 N; प्रत्येक ऊर्वस्थि पर आधारित भार = 1078 N
अस्थि का Y=8.4×10⁹ N m⁻²; L=0.5 m, A=π×(2×10⁻²)²=1.26×10⁻³ m²
उत्तर: प्रत्येक ऊर्वस्थि में संपीडन ΔL ≈ 4.55×10⁻⁵ m (0.0091%)
8.5.2 अपरूपण गुणांक
अपरूपण प्रतिबल तथा संगत अपरूपण विकृति के अनुपात को द्रव्य का अपरूपण गुणांक कहते हैं तथा इसे G से निरूपित करते हैं। इसे दृढ़ता गुणांक भी कहते हैं:
अथवा G = (F/A)/θ = F/(A×θ) (8.10); σₛ = G×θ (8.11)
अपरूपण गुणांक की SI इकाई N m⁻² या Pa होती है।
तालिका 8.2 — कुछ सामान्य द्रव्यों के अपरूपण गुणांक (G)
| द्रव्य | G (10⁹ N m⁻² या GPa) |
|---|---|
| ऐलुमिनियम | 25 |
| पीतल | 36 |
| ताँबा | 42 |
| काँच | 23 |
| लोहा | 70 |
| सीसा | 5.6 |
| निकिल | 77 |
| इस्पात | 84 |
| टंगस्टन | 150 |
| लकड़ी | 10 |
सीसे के 50 cm भुजा के एक वर्गाकार स्लैब, जिसकी मोटाई 10 cm है, की पतली फलक पर 8.0×10⁴ N का अपरूपक बल लगा है। दूसरा पतला फलक फर्श से रिवेट किया हुआ है। ऊपरी फलक कितनी विस्थापित हो जाएगी?
हल: स्लैब स्थिर है तथा बल को पतली फलक के समांतर लगाया गया है। इस फलक का क्षेत्रफल A = 50 cm×10 cm = 0.05 m²
सीसे के लिए G=5.6×10⁹ N m⁻² (तालिका 8.2 से):
उत्तर: ऊपरी फलक लगभग 0.14 mm विस्थापित हो जाएगी।
8.5.3 आयतन गुणांक
जब किसी पिंड को अधिक दाब के किसी द्रव में डुबोया जाता है, तो वह जलीय प्रतिबल (जलीय दाब के मान के बराबर) के अंतर्गत चला जाता है। इससे एक आयतन विकृति उत्पन्न होती है। जलीय प्रतिबल तथा संगत आयतन विकृति के अनुपात को आयतन गुणांक कहते हैं तथा इसे B से निरूपित करते हैं:
आयतन गुणांक के व्युत्क्रम को संपीड्यता कहते हैं (k=1/B):
तालिका 8.3 — कुछ सामान्य द्रव्यों के आयतन गुणांक (B)
| द्रव्य | B (10⁹ N m⁻² या GPa) |
|---|---|
| ठोस | |
| ऐलुमिनियम | 72 |
| पीतल | 61 |
| ताँबा | 140 |
| काँच | 37 |
| लोहा | 100 |
| निकिल | 260 |
| इस्पात | 160 |
| द्रव | |
| जल | 2.2 |
| इथेनाल | 0.9 |
| कार्बन डाइसल्फाइड | 1.56 |
| ग्लिसरीन | 4.76 |
| पारा | 25 |
| गैस | |
| वायु (मानक ताप एवं दाब पर) | 1.0×10⁻⁴ |
हिन्द महासागर की औसत गहराई लगभग 3000 m है। महासागर की तली में पानी के भिन्नात्मक संपीडन ΔV/V की गणना कीजिए, दिया है कि पानी का आयतन गुणांक 2.2×10⁹ N m⁻² है (g=10 m s⁻² लीजिए)।
हल: तली की परत पर पानी के 3000 m ऊँचे स्तंभ द्वारा लगने वाला दाब:
उत्तर: भिन्नात्मक संपीडन ΔV/V ≈ 1.36%
8.5.4 प्वासों अनुपात
आरोपित बल के लंबवत् दिशा में होने वाली विकृति को पार्श्विक विकृति कहते हैं। सिमोन प्वासों ने निर्धारित किया कि प्रत्यास्थता सीमा के भीतर पार्श्विक विकृति, अनुदैर्घ्य विकृति के समानुपाती होती है। किसी तानित तार में पार्श्विक विकृति तथा अनुदैर्घ्य विकृति का अनुपात प्वासों अनुपात कहलाता है।
यह दो विकृतियों का अनुपात है, अतः यह एक संख्या है और इसकी कोई विमा अथवा मात्रक नहीं होता।
इसका मान पदार्थ की प्रकृति पर ही निर्भर करता है। स्टील के लिए इस अनुपात का मान 0.28 से 0.30 के मध्य होता है। एल्युमिनियम की मिश्रधातुओं के लिए इसका मान लगभग 0.33 होता है।
8.5.6 तानित तार में प्रत्यास्थ स्थैतिक ऊर्जा
जब किसी तार पर तनन प्रतिबल आरोपित किया जाता है, तो अंतर्परमाणविक बलों के विरुद्ध कार्य किया जाता है। यह कार्य तार में प्रत्यास्थ स्थैतिक ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है।
L मूल लंबाई तथा A अनुप्रस्थ परिच्छेद क्षेत्रफल के तार की लंबाई में l वृद्धि के लिए विरूपक बल F=YA×(l/L)। तार को l=0 से l=l तक बढ़ाने में किया गया कार्य:
यह कार्य तार में प्रत्यास्थ स्थैतिक ऊर्जा (U) के रूप में संचित हो जाता है। अतः तार में पदार्थ की प्रति एकांक आयतन प्रत्यास्थ स्थैतिक ऊर्जा (u) होती है:
यानी ½ × प्रतिबल × विकृति × तार का आयतन
8.6 द्रव्यों के प्रत्यास्थ व्यवहार के अनुप्रयोग
पुल का "I" आकार, पहाड़ की अधिकतम ऊँचाई, क्रेन की रस्सी की मोटाई — सब कुछ यहीं छिपा है।
रस्सी की मोटाई — क्रेन का उदाहरण
भारी भारों को उठाने के लिए प्रयुक्त क्रेनों में धातु का मोटा रस्सा होता है, जिससे भार जोड़ा जाता है। मान लें हमें 10 मीट्रिक टन उठाने की सामर्थ्य का क्रेन बनाना है। हम चाहते हैं कि भार रस्से को स्थायी रूप से विरूपित न कर दे — इसलिए विस्तार प्रत्यास्थ सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए।
मृदु इस्पात का पराभव सामर्थ्य (σy) लगभग 300×10⁶ N m⁻² होता है। अतः रस्से के अनुप्रस्थ परिच्छेद क्षेत्रफल का न्यूनतम मान A ≥ (10⁴×10)/(300×10⁶) = 3.3×10⁻⁴ m² — जो लगभग 1 cm त्रिज्या के वृत्ताकार रस्से के संगत है। सुरक्षा के लिए भार में बड़ा मार्जिन (लगभग दस गुना) दिया जाता है, अतः लगभग 3 cm त्रिज्या का मोटा रस्सा संस्तुत किया जाता है। व्यापारिक निर्माण में लचक तथा प्रबलता के लिए ऐसे रस्सों को हमेशा वेणी की तरह बहुत से पतले तारों को गुम्फित करके बनाया जाता है।
दंड का बंकन और I-आकार का रहस्य
फिसलों तथा भवनों में दंड के बंकन की समस्या से छुटकारा पाना बहुत महत्वपूर्ण होता है। दंड को अत्यधिक बंकित नहीं होना चाहिए और न ही टूटना चाहिए। सिरों के पास आधारित तथा जिसके मध्य बिंदु पर भार लगा हो, ऐसे l लंबाई, b चौड़ाई तथा d मोटाई की पट्टी के मध्य बिंदु पर भार W लगाने से उसमें जो झोल (bending) आएगी, उसकी मात्रा होगी:
इस संबंध से स्पष्ट है कि दिए हुए भार के लिए बंकन कम करने के लिए ऊँचे यंग गुणांक Y वाला द्रव्य चुनना चाहिए। किसी दिए हुए द्रव्य के लिए बंकन कम करने के लिए चौड़ाई b की बजाय मोटाई d बढ़ाना अधिक प्रभावी होता है, क्योंकि δ, d⁻³ के अनुक्रमानुपाती होता है जबकि b⁻¹ के।
स्तंभ का आकार — गोलीय बनाम फैलावदार सिरे
खम्भे या स्तंभ के आकार का भी इसी सिद्धांत से संबंध है। गोलीय सिरों वाले खम्भे की तुलना में फैलावदार सिरों वाले खम्भे कम भार वहन कर सकते हैं — यह चित्र 8.8 में दर्शाया गया है (यह प्रभाव प्राचीन स्तंभों तथा वृक्ष के तनों की संरचना में भी परिलक्षित होता है)।
पर्वत की अधिकतम ऊँचाई ≈ 10 km क्यों?
पृथ्वी पर किसी पर्वत की अधिकतम ऊँचाई लगभग 10 km होती है — इस प्रश्न का उत्तर भी चट्टानों के प्रत्यास्थ गुणों पर विचार करने से मिलता है। एक पर्वत का आधार समरूप संपीडन के अंतर्गत नहीं होता; यह चट्टानों को कुछ अपरूपक प्रतिबल प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत वे प्रवाहित (खिसक) हो सकती हैं।
ऊँचाई h के किसी पर्वत की तली पर, पर्वत के भार के कारण एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला बल hρg होता है, जहाँ ρ पर्वत का घनत्व तथा g गुरुत्वीय त्वरण है। यह लगभग hρg ही एक अपरूपक अवयव है। किसी प्रारूपिक चट्टान की प्रत्यास्थ सीमा 30×10⁷ N m⁻² होती है। इसे hρg के बराबर रखने पर (जहाँ ρ=3×10³ kg m⁻³):
जो माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई से अधिक है।
§ संक्षिप्त सार-चित्र
तीन प्रकार के प्रतिबल और उनके प्रत्यास्थता गुणांक — एक नज़र में।
(लंबवत् बल)
(स्पर्शी/समांतर बल)
(सभी ओर से समान बल)
Y=σ/ε
G=σₛ/θ
B=−p/(ΔV/V)
तालिका 8.4 — प्रतिबल, विकृति तथा विभिन्न प्रत्यास्थ गुणांक
| प्रतिबल का प्रकार | प्रतिबल | विकृति | आकृति/आयतन में अंतर | गुणांक | द्रव्य की अवस्था |
|---|---|---|---|---|---|
| तनक अथवा संपीडक (σ=F/A) | सम्मुख पृष्ठों के लंबवत्, दो बराबर व विरोधी बल | बल की दिशा में विस्तार या संपीडन (ΔL/L) | आकृति में हाँ, आयतन में नहीं | Y=(F×L)/(A×ΔL) | ठोस |
| अपरूपक (σₛ=F/A) | सम्मुख पृष्ठों के समांतर, दो बराबर व विरोधी बल | शुद्ध अपरूपण, θ | आकृति में हाँ, आयतन में नहीं | G=F/(A×θ) | ठोस |
| जलीय | पृष्ठ पर सभी जगह लंबवत् बल, सभी जगह समान दाब | आयतन में अंतर (ΔV/V) | आकृति में नहीं, आयतन में हाँ | B=−p/(ΔV/V) | ठोस, द्रव तथा गैस |
✦ एक-पंक्ति तथ्य सूची
अध्याय के हर वे तथ्य व सूत्र जो प्रश्न हल करने के लिए आवश्यक हैं।
§ सारांश
1. प्रतिबल व विकृति
प्रतिबल = एकांक क्षेत्रफल पर प्रत्यानयन बल। तीन प्रकार: तनन/संपीडक, अपरूपक, जलीय।
2. हुक का नियम
कम विरूपण के लिए प्रतिबल∝विकृति; अनुक्रमानुपातिकता स्थिरांक = प्रत्यास्थता गुणांक।
3. यंग गुणांक
F/A = YΔL/L — ठोस पदार्थों के लिए प्रासंगिक, क्योंकि केवल ठोसों की ही लंबाई व आकृति होती है।
4. अपरूपण गुणांक
F/A = G×ΔL/L (अपरूपण के लिए); केवल ठोसों के लिए संभव।
5. आयतन गुणांक
p = B(ΔV/V) — ठोस, द्रव तथा गैस सभी के लिए प्रासंगिक।
§ विचारणीय विषय
- किसी तार को एक छत से लटकाया गया है तथा दूसरे सिरे पर भार (F) लगाकर तनित किया गया है। छत द्वारा तार पर आरोपित बल भार के बराबर और विपरीत होता है। परंतु तार के किसी परिच्छेद A पर तनाव F होता है, 2F नहीं। अतः तनन प्रतिबल, जो प्रति इकाई क्षेत्रफल पर तनाव है, F/A होता है।
- हुक का नियम प्रतिबल-विकृति वक्र के केवल रैखिक भाग में ही वैध है।
- यंग प्रत्यास्थता गुणांक तथा अपरूपण गुणांक केवल ठोसों के लिए प्रासंगिक होते हैं, क्योंकि केवल ठोसों की ही लंबाई तथा आकृति होती है।
- आयतन प्रत्यास्थता गुणांक ठोसों, द्रवों तथा गैसों सभी के लिए प्रासंगिक होता है — यह आयतन-परिवर्तन से संबंधित है जब पिंड का प्रत्येक भाग समान प्रतिबल के अंतर्गत हो, ताकि पिंड की आकृति यथावत रहे।
- धातुओं के लिए यंग गुणांक का मान मिश्रधातुओं और प्रत्यास्थलकों की अपेक्षा अधिक होता है। यंग गुणांक के अधिक मान वाले द्रव्यों में लंबाई में थोड़ा परिवर्तन लाने के लिए भी अधिक बल की आवश्यकता होती है।
- दैनिक जीवन में हमारी यह धारणा होती है कि जो द्रव्य अधिक तनित होते हैं, वे अधिक प्रत्यास्थ होते हैं — यह मिथ्या है। वास्तव में जो द्रव्य दिए हुए भार के लिए कम तनित होते हैं, वे अधिक प्रत्यास्थ माने जाते हैं।
- व्यापक रूप में, किसी एक दिशा में आरोपित विरूपक बल अन्य दिशाओं में भी विकृति उत्पन्न कर सकता है। ऐसी परिस्थितियों में प्रतिबल एवं विकृति के बीच आनुपातिकता का वर्णन केवल एक प्रत्यास्थता नियतांक द्वारा नहीं किया जा सकता — उदाहरण के लिए अनुदैर्घ्य विकृति के अंतर्गत अनुप्रस्थ विमा (परिच्छेद की त्रिज्या) में भी अंतर हो जाएगा, जिसका वर्णन द्रव्य के दूसरे प्रत्यास्थता नियतांक (प्वासों अनुपात) से करते हैं।
- प्रतिबल एक सदिश राशि नहीं है, क्योंकि बल की तरह इसे किसी विशेष दिशा से निर्धारित नहीं किया जा सकता। किसी पिंड के एक भाग पर किसी काट की निश्चित ओर कार्यरत बल की निश्चित दिशा होती है।
✏️ NCERT अभ्यास प्रश्न — पूर्ण हल (8.1 – 8.16)
हर प्रश्न पर क्लिक करके उत्तर देखें।
8.1 4.7 m लंबे व 3.0×10⁻⁵ m² अनुप्रस्थ काट के स्टील के तार तथा 3.5 m लंबे व 4.0×10⁻⁵ m² अनुप्रस्थ काट के ताँबे के तार पर दिए गए समान परिमाण के भारों को लटकाने पर उनकी लंबाइयों में समान वृद्धि होती है। स्टील तथा ताँबे के यंग प्रत्यास्थता गुणांकों में क्या अनुपात है?
Y = FL/(AΔL); चूँकि F तथा ΔL दोनों तारों के लिए समान हैं:
उत्तर: Y_स्टील : Y_ताँबा ≈ 1.79 : 1 (लगभग 1.8 : 1)
8.2 दिए गए पदार्थ के लिए प्रतिबल-विकृति वक्र दिया है। इस पदार्थ के लिए (a) यंग प्रत्यास्थता गुणांक, तथा (b) सन्निकट पराभव सामर्थ्य क्या है?
दिए गए ग्राफ में वक्र प्रारंभ में रैखिक है और लगभग (0.002, 150×10⁶) बिंदु तक सीधी रेखा में जाता है, फिर मुड़कर लगभग (0.004, 300×10⁶) पर टूटता है।
(a) यंग गुणांक (रैखिक भाग की प्रवणता से):
(b) पराभव सामर्थ्य — जहाँ वक्र रैखिकता से विचलित होना शुरू करता है/चरम बिंदु के निकट:
उत्तर: (a) Y ≈ 7.5×10¹⁰ N/m²; (b) सन्निकट पराभव सामर्थ्य ≈ 3×10⁸ N/m²
8.3 दो पदार्थों A और B के लिए प्रतिबल-विकृति ग्राफ दर्शाए गए हैं। इन ग्राफों को एक ही पैमाने पर खींचा गया है। (a) किस पदार्थ का यंग गुणांक अधिक है? (b) दोनों में कौन अधिक मजबूत है?
दोनों ग्राफ समान पैमाने पर हैं, अतः प्रारंभिक प्रवणता की सीधे तुलना की जा सकती है।
(a) Y = प्रतिबल/विकृति = वक्र के प्रारंभिक (रैखिक) भाग की प्रवणता। चित्र में पदार्थ A का वक्र प्रारंभ में अधिक तीव्रता (steeper slope) से बढ़ता है — अर्थात् A में समान विकृति उत्पन्न करने के लिए अधिक प्रतिबल चाहिए। अतः पदार्थ A का यंग गुणांक अधिक है।
(b) किसी पदार्थ की "मजबूती" उस अधिकतम प्रतिबल से मापी जाती है जिसे वह टूटने से पहले सहन कर सकता है (चरम सामर्थ्य)। चित्र में पदार्थ A उच्चतर प्रतिबल तक टूटने से पहले पहुँचता है, अतः पदार्थ A अधिक मजबूत है।
उत्तर: (a) A का यंग गुणांक अधिक; (b) A अधिक मजबूत
8.4 निम्नलिखित दो कथनों को ध्यान से पढ़िए और कारण सहित बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य: (a) इस्पात की अपेक्षा रबड़ का यंग गुणांक अधिक है; (b) किसी कुंडली का तनन उसके अपरूपण गुणांक से निर्धारित होता है।
(a) असत्य है। Y=प्रतिबल/विकृति। रबड़ के लिए दिए गए प्रतिबल पर उत्पन्न विकृति बहुत बड़ी होती है (रबड़ आसानी से खिंच जाता है), जबकि इस्पात के लिए समान प्रतिबल पर विकृति बहुत छोटी (इस्पात कठोर होता है, आसानी से नहीं खिंचता)। चूँकि Y बड़े प्रतिबल/छोटी विकृति के लिए अधिक होता है, अतः इस्पात का यंग गुणांक रबड़ से बहुत अधिक (लगभग 1000 गुना) होता है, इसके विपरीत नहीं।
(b) सत्य है। जब किसी कुंडलित स्प्रिंग को खींचा जाता है, तो तार का प्रत्येक भाग मुख्यतः मरोड़ (twisting) से गुजरता है, सीधे तनन से नहीं। यह मरोड़ अनिवार्यतः अपरूपण विरूपण है। अतः किसी कुंडली का तनन मुख्यतः द्रव्य के अपरूपण गुणांक पर निर्भर करता है, न कि यंग गुणांक पर।
उत्तर: (a) असत्य — इस्पात का यंग गुणांक रबड़ से बहुत अधिक है; (b) सत्य — स्प्रिंग का तनन अपरूपण गुणांक द्वारा निर्धारित होता है
8.5 0.25 cm व्यास के दो तार, जिनमें एक इस्पात का तथा दूसरा पीतल का है, भारित हैं। बिना भार लटकाए इस्पात तथा पीतल के तारों की लंबाइयाँ क्रमशः 1.5 m तथा 1.0 m हैं। यदि इस्पात तथा पीतल के यंग गुणांक क्रमशः 2.0×10¹¹ Pa तथा 0.91×10¹¹ Pa हों तो दोनों तारों में विस्तार की गणना कीजिए।
चित्र के अनुसार: छत से इस्पात का तार (1.5 m) लटका है, उसके नीचे 4.0 kg द्रव्यमान, फिर पीतल का तार (1.0 m), और उसके नीचे 6.0 kg द्रव्यमान।
इस्पात के तार में तनाव = (4.0+6.0) kg का भार = 10.0×9.8 = 98 N (इस्पात का तार दोनों द्रव्यमानों को सहारा देता है)
पीतल के तार में तनाव = केवल 6.0 kg का भार = 6.0×9.8 = 58.8 N
व्यास d=0.25 cm=2.5×10⁻³ m, त्रिज्या=1.25×10⁻³ m
इस्पात में विस्तार:
पीतल में विस्तार:
उत्तर: इस्पात में विस्तार ≈ 1.49×10⁻⁴ m (0.15 mm); पीतल में विस्तार ≈ 1.32×10⁻⁴ m (0.13 mm)
8.6 ऐलुमिनियम के किसी घन के किनारे 10 cm लंबे हैं। इसकी एक फलक किसी ऊर्ध्वाधर दीवार से कसकर जड़ी हुई है। इस घन के सम्मुख फलक से 100 kg का एक द्रव्यमान जोड़ दिया गया है। एल्युमिनियम का अपरूपण गुणांक 25 GPa है। इस फलक का ऊर्ध्वाधर विस्थापन कितना होगा?
घन का किनारा L=10 cm=0.1 m; फलक का क्षेत्रफल A=(0.1)²=0.01 m²; अपरूपक बल F=100×9.8=980 N
उत्तर: फलक का ऊर्ध्वाधर विस्थापन ≈ 3.92×10⁻⁷ m (≈0.4 µm)
8.7 मृदु इस्पात के चार समरूप खोखले बेलनाकार स्तंभ 50,000 kg द्रव्यमान के किसी बड़े ढाँचे को आधार दिए हुए हैं। प्रत्येक स्तंभ की भीतरी तथा बाहरी त्रिज्याएँ क्रमशः 30 तथा 60 cm हैं। भार वितरण को एकसमान मानते हुए प्रत्येक स्तंभ की संपीडन विकृति की गणना कीजिए।
कुल भार W = 50000×9.8 = 4.9×10⁵ N; प्रत्येक स्तंभ पर भार F = 4.9×10⁵/4 = 1.225×10⁵ N
मृदु इस्पात का Y=2.0×10¹¹ N/m²:
उत्तर: प्रत्येक स्तंभ की संपीडन विकृति ≈ 7.22×10⁻⁷
8.8 ताँबे का एक टुकड़ा, जिसका अनुप्रस्थ परिच्छेद 15.2 mm × 19.1 mm का है, 44,500 N बल के तनाव से खींचा जाता है, जिससे केवल प्रत्यास्थ विरूपण उत्पन्न हो। उत्पन्न विकृति की गणना कीजिए।
A = 15.2×19.1 mm² = 290.32 mm² = 2.9032×10⁻⁴ m²
Y_ताँबा=1.1×10¹¹ N/m²:
उत्तर: उत्पन्न विकृति ≈ 1.39×10⁻³ (≈0.14%)
8.9 1.5 cm त्रिज्या का एक इस्पात का केबिल भार उठाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यदि इस्पात के लिए अधिकतम अनुज्ञेय प्रतिबल 10⁸ N m⁻² है तो उस अधिकतम भार की गणना कीजिए जिसे केबिल उठा सकता है।
A = πr² = π×(0.015)² ≈ 7.0686×10⁻⁴ m²
द्रव्यमान: m = F/g = 7.07×10⁴/9.8 ≈ 7213 kg
उत्तर: केबिल अधिकतम ≈ 7.07×10⁴ N (लगभग 7.2×10³ kg द्रव्यमान के तुल्य) भार उठा सकता है।
8.10 15 kg द्रव्यमान की एक दृढ़ पट्टी को तीन तारों, जिनमें प्रत्येक की लंबाई 2 m है, से सममित लटकाया गया है। सिरों के दोनों तार ताँबे के हैं तथा बीच वाला लोहे का है। तारों के व्यासों का अनुपात निकालिए, प्रत्येक पर तनाव उतना ही रहना चाहिए।
चूँकि पट्टी दृढ़ (rigid) है और सममित रूप से लटकाई गई है, संतुलन में रहने के लिए तीनों तारों में समान विस्तार (ΔL) होना आवश्यक है।
दिया गया है कि प्रत्येक तार में तनाव T भी समान रहना चाहिए। तीनों तारों की लंबाई L समान (2 m) है:
तालिका 8.1 से: Y_लोहा=190×10⁹ N/m², Y_ताँबा=110×10⁹ N/m²
चूँकि A∝d²:
उत्तर: d_ताँबा : d_लोहा ≈ 1.31 : 1
8.11 एक मीटर अतानित लंबाई के इस्पात के तार के एक सिरे से 14.5 kg का द्रव्यमान बाँधकर उसे एक ऊर्ध्वाधर वृत्त में घुमाया जाता है, वृत्त की तली पर उसका कोणीय वेग 2 rev/s है। तार के अनुप्रस्थ परिच्छेद का क्षेत्रफल 0.065 cm² है। तार में विस्तार की गणना कीजिए जब द्रव्यमान अपने पथ के निम्नतम बिंदु पर है।
r=1 m, m=14.5 kg, ω=2 rev/s = 4π rad/s
निम्नतम बिंदु पर तनाव केन्द्राभिमुख बल तथा भार दोनों को संतुलित करता है:
ω²=(4π)²=16π²≈157.9
A=0.065 cm²=6.5×10⁻⁶ m²; Y_इस्पात=2×10¹¹ Pa
उत्तर: तार में विस्तार ≈ 1.87×10⁻³ m (≈1.9 mm)
8.12 नीचे दिए गए आँकड़ों से जल के आयतन प्रत्यास्थता गुणांक की गणना कीजिए: प्रारंभिक आयतन = 100.0 L, दाब में वृद्धि = 100.0 atm (1 atm=1.013×10⁵ Pa), अंतिम आयतन में परिवर्तन (कमी) = 0.5 L। नियत ताप पर जल तथा वायु के आयतन प्रत्यास्थता गुणांकों की तुलना कीजिए। सरल शब्दों में समझाइए कि यह अनुपात इतना अधिक क्यों है।
V=100.0 L, Δp=100.0 atm=100×1.013×10⁵=1.013×10⁷ Pa, ΔV=0.5 L
तालिका 8.3 से B_वायु=1.0×10⁻⁴×10⁹=1.0×10⁵ Pa
यह अनुपात इतना अधिक क्यों है? जल के अणु एक-दूसरे के बहुत निकट तथा दृढ़तापूर्वक बंधे होते हैं (द्रव अवस्था), जिससे उन्हें संपीडित करना बहुत कठिन होता है। इसके विपरीत वायु (गैस) के अणुओं के बीच बहुत अधिक खाली स्थान होता है और वे बहुत हल्के से युग्मित होते हैं — अतः वायु को बहुत आसानी से संपीडित किया जा सकता है, जिससे इसका आयतन गुणांक बहुत कम होता है।
उत्तर: B_जल ≈ 2.2×10⁹ Pa; B_जल/B_वायु ≈ 2×10⁴
8.13 जल का घनत्व उस गहराई पर, जहाँ दाब 80.0 atm हो, कितना होगा? दिया गया है कि पृष्ठ पर जल का घनत्व 1.03×10³ kg m⁻³, जल की संपीड्यता 45.8×10⁻¹¹ Pa⁻¹।
k=45.8×10⁻¹¹ Pa⁻¹; ΔP=80.0 atm=80×1.013×10⁵≈8.104×10⁶ Pa
घनत्व ρ=m/V (द्रव्यमान स्थिर) — आयतन घटने पर घनत्व उसी अनुपात में बढ़ता है:
उत्तर: उस गहराई पर जल का घनत्व ≈ 1.034×10³ kg/m³
8.14 काँच के स्लैब पर 10 atm का जलीय दाब लगाने पर उसके आयतन में भिन्नात्मक अंतर की गणना कीजिए।
B_काँच=37×10⁹ Pa; ΔP=10 atm=1.013×10⁶ Pa
उत्तर: ΔV/V ≈ 2.74×10⁻⁵
8.15 ताँबे के एक ठोस घन का एक किनारा 10 cm का है। इस पर 7.0×10⁶ Pa का जलीय दाब लगाने पर इसके आयतन में संकुचन निकालिए।
V=(0.1)³=1×10⁻³ m³; B_ताँबा=140×10⁹ Pa; ΔP=7.0×10⁶ Pa
उत्तर: आयतन में संकुचन ΔV = 5×10⁻⁸ m³
8.16 एक लीटर जल पर दाब में कितना अंतर किया जाए कि वह 0.10% से संपीडित हो जाए?
ΔV/V = 0.10% = 1.0×10⁻³; B_जल=2.2×10⁹ Pa
उत्तर: आवश्यक दाब अंतर ΔP ≈ 2.2×10⁶ Pa (लगभग 22 atm)
🚀 NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त प्रश्न
ये प्रश्न NCERT अभ्यास से आगे बढ़कर NEET/JEE में बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न (यंग गुणांक, तार में ऊर्जा, आयतन गुणांक, तापीय प्रतिबल आदि) पर आधारित हैं।
1 दो तारों को श्रेणी में जोड़कर लटकाना — तुल्य यंग गुणांक
L लंबाई तथा A अनुप्रस्थ काट के दो तार, जिनके यंग गुणांक Y1 व Y2 हैं, सिरे से जोड़कर भार F से तनित किए गए हैं (श्रेणीक्रम)। तुल्य यंग गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल: श्रेणीक्रम में दोनों तारों पर समान बल F कार्य करता है। प्रत्येक का विस्तार: ΔL1 = FL/(AY1), ΔL2 = FL/(AY2)।
कुल लंबाई 2L के लिए तुल्य यंग गुणांक Yeq: ΔL = F(2L)/(AYeq); बराबर करने पर: 2/Yeq = 1/Y1 + 1/Y2
उत्तर: Yeq = 2Y1Y2/(Y1+Y2)
2 दो तारों को समांतर जोड़कर भार लटकाना — तनाव का वितरण
समान लंबाई L के दो तार, जिनके अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A1 व A2 तथा यंग गुणांक Y1 व Y2 हैं, को समांतर क्रम में जोड़कर एक दृढ़ छड़ को सहारा दिया जाता है (दोनों में समान विस्तार ΔL)। दोनों में तनाव का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल: F1 = Y1A1(ΔL/L), F2 = Y2A2(ΔL/L)
उत्तर: F1 : F2 = Y1A1 : Y2A2 — तनाव, यंग गुणांक तथा क्षेत्रफल के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती
3 तार में संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा — संख्यात्मक
1 m लंबे तथा 1 mm² अनुप्रस्थ काट के तार को F=100 N बल से तनित करने पर 1 mm का विस्तार होता है। तार में संचित प्रत्यास्थ स्थैतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
हल: U = ½ × F × ΔL = ½ × 100 × (1×10⁻³)
उत्तर: U = 0.05 J (5×10⁻² J)
4 प्रति एकांक आयतन प्रत्यास्थ ऊर्जा — Y व ε के पदों में
सिद्ध कीजिए u = Y×ε²/2 (Y=यंग गुणांक, ε=विकृति)। यदि इस्पात तार (Y=2×10¹¹ Pa) में विकृति 10⁻³ हो, तो u ज्ञात कीजिए।
हल: u = ½ × प्रतिबल × विकृति = ½ × (Y×ε) × ε = ½Yε² (चूँकि प्रतिबल=Y×विकृति)
u = ½ × 2×10¹¹ × (10⁻³)² = ½ × 2×10⁵ = 10⁵ J/m³
उत्तर: u = ½Yε² (सिद्ध); संख्यात्मक u = 10⁵ J/m³
5 गोले पर एकसमान दाब से त्रिज्या में भिन्नात्मक कमी
किसी ठोस गोले का आयतन प्रत्यास्थता गुणांक B है। इसे एकसमान दाब p के अंतर्गत रखने पर त्रिज्या में भिन्नात्मक कमी (Δr/r) ज्ञात कीजिए।
हल: V=(4/3)πr³ ⟹ ΔV/V = 3(Δr/r); B = −p/(ΔV/V) ⟹ ΔV/V = −p/B; अतः 3(Δr/r) = p/B (परिमाण में)
उत्तर: Δr/r = p/(3B)
6 ताप-प्रेरित संपीडक बल (थर्मल स्ट्रेस)
1 m लंबाई तथा 10⁻³ m² अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल की एक धात्विक छड़ को 0°C से 100°C तक बिना विस्तार व बंकन के गर्म किया जाता है। छड़ का Y=0.5×10¹¹ N/m² तथा रैखिक प्रसार गुणांक 10⁻⁵ °C⁻¹ है। संपीडक बल ज्ञात कीजिए।
हल: विकृति = αΔT = 10⁻⁵×100 = 10⁻³; प्रतिबल = Y×ε = 0.5×10¹¹×10⁻³ = 5×10⁷ N/m²; बल F = प्रतिबल × A = 5×10⁷×10⁻³
उत्तर: F = 5×10⁴ N
7 प्वासों अनुपात व आयतन में अपरिवर्तन की शर्त
यदि किसी तार को तनित करने पर उसका आयतन अपरिवर्तित रहता है, तो प्वासों अनुपात (σ) का मान ज्ञात कीजिए।
हल: V=πr²L; लघु परिवर्तनों के लिए ΔV/V = ΔL/L + 2(Δr/r) = (ΔL/L)(1−2σ); आयतन अपरिवर्तित रहने की शर्त ΔV/V=0 ⟹ σ=0.5
उत्तर: σ = 0.5
8 दंड का बंकन — Y की भूमिका (वैचारिक)
दो दंड समान लंबाई तथा समान भार वहन करते हैं, परंतु एक इस्पात (Y अधिक) का तथा दूसरा ऐलुमिनियम (Y कम) का बना है। समान मोटाई तथा चौड़ाई मानते हुए, कौन-सा दंड अधिक झुकेगा और क्यों?
हल: बंकन का सूत्र δ = Wl³/(4bd³Y) से स्पष्ट है कि झोल δ, यंग गुणांक Y के व्युत्क्रमानुपाती होता है — शेष सभी राशियाँ समान हैं। ऐलुमिनियम का Y (≈70×10⁹) इस्पात (≈200×10⁹) से कम है, अतः ऐलुमिनियम दंड अधिक झुकेगा।
उत्तर: ऐलुमिनियम का दंड अधिक झुकेगा (δ ∝ 1/Y)
9 Y, G, B व σ — किस राशि का अस्तित्व किस अवस्था में
निम्न में से कौन-सा कथन सत्य है?
(a) यंग गुणांक व अपरूपण गुणांक केवल ठोसों के लिए प्रासंगिक होते हैं
(b) आयतन गुणांक ठोस, द्रव व गैस तीनों के लिए प्रासंगिक होता है
(c) अधिकतर द्रव्यों के लिए G ≈ Y/3
(d) उपरोक्त सभी सत्य हैं
हल: (a) Y व G केवल उन पदार्थों के लिए परिभाषित होते हैं जिनकी निश्चित लंबाई व आकृति हो — केवल ठोसों के लिए ✓; (b) आयतन गुणांक केवल आयतन-परिवर्तन से संबंधित, अतः ठोस/द्रव/गैस सभी पर लागू ✓; (c) प्रयोगों से G≈Y/3 पाया गया ✓
उत्तर: सही विकल्प (d) — उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं
10 दो तारों में एक मोटा — किसमें अधिक विस्तार
समान पदार्थ व समान लंबाई के दो तार A व B हैं, जिनकी त्रिज्याएँ क्रमशः r तथा 2r हैं। दोनों पर समान बल F लगाया जाता है। इनके विस्तारों का अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल: ΔL = FL/(AY); A∝r², अतः ΔL ∝ 1/r²। ΔLA∝1/r², ΔLB∝1/(2r)²=1/4r² ⟹ ΔLA/ΔLB = 4
उत्तर: ΔLA : ΔLB = 4 : 1
11 स्तंभ की त्रिज्या व ऊँचाई के संबंध पर वैचारिक प्रश्न
भारी भवनों के भूतल के स्तंभ ऊपरी तलों के स्तंभों की तुलना में अधिक मोटे क्यों बनाए जाते हैं?
हल: स्तंभ को कुचलने (buckling) से रोकने के लिए इसकी त्रिज्या r को ऊँचाई l के साथ r∝l1/2 के अनुसार बढ़ाना पड़ता है। चूँकि भूतल के स्तंभ अधिक भार वहन करते हैं (ऊपर के सभी तलों का भार भी उन्हीं पर आता है), उन्हें अधिक मोटाई की आवश्यकता होती है।
उत्तर: अधिक भार वहन तथा कुचलन-रोधी आवश्यकता के कारण भूतल के स्तंभ अधिक मोटे बनाए जाते हैं।
12 सुरक्षा गुणांक की अवधारणा
किसी इंजीनियरिंग संरचना के डिज़ाइन में सुरक्षा गुणांक (factor of safety) से क्या तात्पर्य है? यदि किसी केबल की चरम सामर्थ्य 4×10⁸ N/m² है और अनुमत कार्यकारी प्रतिबल 10⁸ N/m² है, तो सुरक्षा गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल: सुरक्षा गुणांक = चरम सामर्थ्य/अनुमत कार्यकारी प्रतिबल = (4×10⁸)/(1×10⁸)
उत्तर: सुरक्षा गुणांक = 4 — यह सुनिश्चित करता है कि संरचना पर वास्तविक प्रतिबल उसकी चरम सीमा से बहुत कम रहे, जिससे अप्रत्याशित भार/परिस्थितियों में भी सुरक्षा बनी रहे।
🏅 NEET में अब तक पूछे गए प्रश्न
इस अध्याय से NEET/NEET में पूछे गए वास्तविक प्रश्न, मूल विकल्पों व विस्तृत हल के साथ (नवीनतम पहले)।
1 इस्पात के तार की अधिकतम विस्तार सीमा (प्रत्यास्थ सीमा आधारित) NEET 2024
1 m लंबाई के इस्पात तार का अधिकतम विस्तार क्या होगा, यदि इस्पात की प्रत्यास्थ सीमा 8×10⁸ N/m² तथा यंग गुणांक 2×10¹¹ N/m² है?
(A) 0.4 mm (B) 40 mm (C) 8 mm (D) 4 mm ✅
हल: अधिकतम विस्तार के लिए, प्रतिबल = प्रत्यास्थ सीमा:
उत्तर: ΔLmax = 4 mm
2 लटके तार का यंग गुणांक ज्ञात करना NEET 2020
L लंबाई तथा A अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल का एक तार एक दृढ़ आधार से लटका है। मुक्त सिरे पर द्रव्यमान M लटकाने पर तार की लंबाई L₁ हो जाती है। यंग गुणांक का व्यंजक:
(A) Mg(L₁−L)/AL (B) MgL/AL₁ (C) MgL/[A(L₁−L)] ✅ (D) MgL₁/AL
हल: ΔL = L₁−L; Y = (F/A)/(ΔL/L) = (Mg/A)×(L/ΔL) = MgL/[A(L₁−L)]
उत्तर: Y = MgL/[A(L₁−L)]
3 लटके तार में संचित प्रत्यास्थ स्थैतिज ऊर्जा NEET 2019
द्रव्यमान M को L लंबाई के तार से लटकाया जाता है, तो तार की लंबाई (L+l) हो जाती है। तनित तार में संचित प्रत्यास्थ स्थैतिज ऊर्जा:
(A) ½Mgl ✅ (B) ½MgL (C) Mgl (D) MgL
हल: U = ½ × (अधिकतम बल) × (विस्तार) = ½ × Mg × l (कार्य-ऊर्जा प्रमेय से, चूँकि बल रैखिक रूप से बढ़ता है 0 से Mg तक)
उत्तर: U = ½Mgl
4 प्रतिबल-विकृति वक्र से भंगुर व तन्य पदार्थों की पहचान NEET 2019 (Odisha)
पदार्थ X में चरम सामर्थ्य बिंदु तथा विभंजन बिंदु पास-पास हैं, जबकि पदार्थ Y में ये दूर-दूर हैं। X तथा Y क्रमशः हैं:
(1) तन्य व भंगुर (2) भंगुर व तन्य ✅ (3) भंगुर व प्लास्टिक (4) प्लास्टिक व तन्य
हल: चरम सामर्थ्य व विभंजन बिंदु पास-पास ⟹ पराभव के बाद बहुत कम प्लास्टिक विरूपण होकर शीघ्र टूटना ⟹ भंगुर (जैसे काँच)। इनका दूर-दूर होना ⟹ पर्याप्त प्लास्टिक विरूपण ⟹ तन्य (जैसे इस्पात)।
उत्तर: X = भंगुर, Y = तन्य
5 गोले पर एकसमान दाब से त्रिज्या में भिन्नात्मक कमी NEET 2017
किसी गोलाकार वस्तु का आयतन गुणांक B है। इसे एकसमान दाब p के अंतर्गत रखने पर त्रिज्या में भिन्नात्मक कमी होगी:
(A) B/3p (B) 3p/B (C) p/3B ✅ (D) p/B
हल: V=(4/3)πr³ ⟹ ΔV/V=3(Δr/r); B=p/(ΔV/V) ⟹ ΔV/V=p/B ⟹ Δr/r = p/(3B)
उत्तर: Δr/r = p/3B
6 इस्पात व पीतल के तारों पर भार का अनुपात NEET 2015
इस्पात का यंग गुणांक, पीतल के यंग गुणांक से दोगुना है। समान लंबाई तथा समान अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल के दो तार (एक इस्पात, दूसरा पीतल) एक छत से लटकाए गए हैं। दोनों के निचले सिरे समान तल पर हों (समान विस्तार), तो भारों का अनुपात होगा:
(1) 2:1 ✅ (2) 1:1 (3) 1:2 (4) 4:1
हल: समान विस्तार की शर्त: Wइस्पात/Yइस्पात = Wपीतल/Yपीतल (चूँकि L, A समान) ⟹ अनुपात = Yइस्पात/Yपीतल = 2
उत्तर: 2 : 1
✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य
परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु, जो अक्सर विकल्पों में उलझन पैदा करते हैं।
- यह अध्याय NEET में प्रतिवर्ष 1–3 प्रश्न (4–12 अंक) रखता है; सर्वाधिक बार पूछे गए उप-विषय — यंग गुणांक की गणना, तार में संचित प्रत्यास्थ ऊर्जा, प्रतिबल-विकृति वक्र की व्याख्या, तथा तापीय प्रतिबल हैं।
- यह अध्याय तरलों के यांत्रिक गुणों (श्यानता, पृष्ठ तनाव) से भी वैचारिक रूप से जुड़ा है — ठोसों व तरलों दोनों में "गुणांक" की अवधारणा समान सिद्धांत (प्रतिबल/विकृति) पर आधारित है, अतः दोनों अध्यायों को साथ जोड़कर पढ़ना लाभदायक होता है।
- प्रत्यास्थलक (elastomers) — रबड़ जैसे पदार्थ जिनमें अपेक्षाकृत छोटे प्रतिबल पर भी बड़ी विकृति उत्पन्न होती है तथा प्रतिबल-विकृति वक्र सरल रेखीय (हुक के नियम का पालन करने वाला) नहीं होता; इनमें कोई स्पष्ट प्लास्टिक क्षेत्र नहीं होता, फिर भी ये पूर्णतः प्रत्यास्थ होते हैं।
- प्रत्यास्थ शैथिल्य (elastic hysteresis) — रबड़ जैसे पदार्थों में भार बढ़ाने व घटाने के दौरान खींचे गए प्रतिबल-विकृति वक्र संपाती नहीं होते, बल्कि एक लूप बनाते हैं; इस लूप के भीतर का क्षेत्रफल ऊष्मा के रूप में क्षय हुई ऊर्जा दर्शाता है — यही कारण है कि रबर के टायर बार-बार दबने-फैलने पर गर्म हो जाते हैं।
- प्रत्यास्थता गुणांकों के बीच संबंध — समदैशिक पदार्थों के लिए: Y = 2G(1+σ) तथा Y = 3K(1−2σ), जहाँ σ प्वासों अनुपात है — इन सूत्रों से यदि कोई दो गुणांक ज्ञात हों तो शेष ज्ञात किए जा सकते हैं; यह संबंध NCERT में स्पष्ट सूत्र-रूप में नहीं दिया गया परन्तु NEET/JEE में संख्यात्मक प्रश्नों का आधार बनता है।
- प्वासों अनुपात (σ) का सैद्धांतिक परिसर — सैद्धांतिक रूप से −1 < σ < 0.5; अधिकांश पदार्थों के लिए σ धनात्मक (0.2–0.4 के मध्य); σ=0.5 पूर्णतः असंपीड्य पदार्थ को दर्शाता है — σ की कोई इकाई नहीं होती।
- प्रतिबल-विकृति वक्र के प्रमुख बिंदुओं का क्रम — आनुपातिकता सीमा (जहाँ तक हुक का नियम लागू) तक वक्र रैखिक; इसके पश्चात प्रत्यास्थता सीमा तक विकृति अरैखिक किंतु प्रत्यास्थ; प्रवाह बिंदु (yield point) के बाद बल हटाने पर भी स्थायी विरूपण रह जाता है (प्लास्टिक क्षेत्र); चरम सामर्थ्य बिंदु के पश्चात विभंजन बिंदु तक विकृति बढ़ती रहती है जबकि प्रतिबल घट भी सकता है।
- भंगुर बनाम तन्य पदार्थ — चरम सामर्थ्य व विभंजन बिंदु पास-पास हों (न्यून प्लास्टिक विरूपण) तो भंगुर (जैसे काँच, ढलवाँ लोहा); दूर-दूर हों (अधिक प्लास्टिक विरूपण) तो तन्य (जैसे तांबा, ऐलुमिनियम) — भंगुर पदार्थों में विभंजन-पूर्व स्पष्ट चेतावनी नहीं मिलती, जो इंजीनियरिंग अभिकल्पन में महत्वपूर्ण विचारणीय बिंदु है।
- सुरक्षा गुणांक (factor of safety) — इंजीनियरिंग अभिकल्पन (जैसे पुल, केबल, स्तंभ) में सामग्री पर वास्तविक कार्यकारी प्रतिबल को उसकी चरम सामर्थ्य (या प्रत्यास्थता सीमा) से सदैव काफी कम रखा जाता है; सुरक्षा गुणांक = चरम सामर्थ्य/अनुमत कार्यकारी प्रतिबल।
- स्तंभ की मोटाई का अभिकल्पन — किसी स्तंभ को कुचलने (buckling) से बचाने हेतु इसकी त्रिज्या r को ऊँचाई l के साथ r∝l1/2 के अनुसार बढ़ाना पड़ता है (न कि सीधे रैखिक रूप से), जिससे बड़े भवनों के भूतल के स्तंभ ऊपरी तलों से अधिक मोटे बनाए जाते हैं।
- द्रव व गैसों में अपरूपण गुणांक का अभाव — तरल व गैसें अपरूपण प्रतिबल को स्थायी रूप से सहन नहीं कर सकते (ये बहते हैं), अतः इनके लिए अपरूपण गुणांक (G) व यंग गुणांक (Y) परिभाषित नहीं होते; केवल आयतन गुणांक (K) ही परिभाषित होता है।
- गैसों का आयतन गुणांक ताप व दाब पर अत्यधिक निर्भर — यह आदर्श गैस समीकरण से सीधे प्रभावित होता है, जबकि द्रवों व ठोसों का आयतन गुणांक इन परिवर्तनों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है।
- संयुक्त तार/छड़ों में विस्तार की गणना — श्रेणीक्रम में जुड़े तारों में (समान बल F से तनित) प्रत्येक भाग का विस्तार अलग-अलग निकालकर जोड़ें (ΔL_कुल = ΔL₁+ΔL₂); समांतर क्रम में (समान विस्तार, भिन्न बल-वितरण) प्रत्येक भाग द्वारा वहन किए गए बल को क्षेत्रफल व यंग गुणांक के अनुपात में विभाजित करें।
- ऊर्ध्वाधर तार में स्वयं के भार से विस्तार — यदि कोई एकसमान तार अपने ऊपरी सिरे से लटका हो, तो स्वयं के भार से विस्तार ΔL = Mgl/(2AY) होता है (गुणांक 2 इसलिए कि तार के विभिन्न बिंदुओं पर तनाव भिन्न है, ऊपरी सिरे पर अधिकतम व निचले सिरे पर शून्य) — यह सूत्र सामान्य ΔL=Mgl/AY से भिन्न है, व अक्सर भ्रम का कारण बनता है।
- तापीय प्रतिबल (thermal stress) — यदि किसी छड़ को दोनों सिरों से दृढ़तापूर्वक जकड़ा जाए (स्वतंत्र प्रसार न हो) व तापमान में ΔT परिवर्तन किया जाए, तो उत्पन्न तापीय प्रतिबल = YαΔT (α=रैखिक प्रसार गुणांक); यह प्रतिबल छड़ की लंबाई या अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता, केवल पदार्थ के गुणों (Y, α) व ΔT पर निर्भर करता है।
- सर्ल का उपकरण (Searle's apparatus) — प्रयोगशाला में यंग गुणांक के सटीक मापन हेतु प्रयुक्त मानक उपकरण, जिसमें प्रायोगिक तार व संदर्भ तार दोनों समान परिस्थितियों (ताप आदि) में रखे जाते हैं ताकि तापीय प्रसार के कारण होने वाली त्रुटि रद्द हो जाए।