जैव प्रौद्योगिकी — सिद्धांत व प्रक्रम
आनुवंशिक इंजीनियरिंग से लेकर बायोरिएक्टर तक — प्रतिबंधन एंजाइम, पैलिंड्रोमिक अनुक्रम, pBR322, PCR, जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, क्लोनिंग संवाहक तथा जैव प्रक्रम इंजीनियरिंग की संपूर्ण समझ — सभी NEET-उपयोगी तथ्यों व विस्तृत अभ्यास हलों के साथ।
★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित1 जैव प्रौद्योगिकी का परिचय
जीवधारियों व एंजाइमों का उपयोग कर उपयोगी उत्पादों का निर्माण
जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) वह विज्ञान है, जिसमें जीवधारियों (सूक्ष्मजीवों, पादपों, जंतुओं) या उनसे प्राप्त एंजाइमों का उपयोग करके मानव-उपयोगी उत्पाद या प्रक्रम विकसित किए जाते हैं। रोटी, दही, शराब जैसे पारंपरिक उत्पाद भी सूक्ष्मजीवी क्रियाओं से बनते हैं — यह भी जैव प्रौद्योगिकी का ही एक रूप है।
आधुनिक दृष्टि में जैव प्रौद्योगिकी में आनुवंशिक रूप से संशोधित (जेनेटिकली मोडिफाइड) जीवों का उपयोग करके उच्च उत्पादन प्राप्त किया जाता है — जैसे परखनली शिशु (इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन), जीन संश्लेषण, डीएनए टीके, तथा दोषपूर्ण जीनों का सुधार (जीन थेरेपी)।
वन-लाइनर तथ्य
- जैव प्रौद्योगिकी = जीवधारियों/एंजाइमों से उपयोगी उत्पाद/प्रक्रम।
- EFB परिभाषा — परंपरागत व आधुनिक दोनों को समाहित करती है।
- 1972 — कोहेन व बोयर द्वारा प्रथम पुनर्योगज DNA का निर्माण।
2 जैव प्रौद्योगिकी के मूल सिद्धांत
आनुवंशिक इंजीनियरिंग व जैव प्रक्रम इंजीनियरिंग
आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी दो प्रमुख तकनीकों पर आधारित है:
| तकनीक | विवरण |
|---|---|
| आनुवंशिक इंजीनियरिंग | DNA/RNA के रासायनिक परिवर्तन, विदेशी जीन को परपोषी में प्रवेश कराकर लक्षणों में बदलाव |
| जैव प्रक्रम इंजीनियरिंग | रोगाणुरहित वातावरण में केवल वांछित सूक्ष्मजीवों/कोशिकाओं को बड़े पैमाने पर संवर्धित कर उत्पाद (एंटीबायोटिक, टीके, एंजाइम) बनाना |
2.1 आनुवंशिक इंजीनियरिंग की आवश्यकता
पारंपरिक संकरण विधियों में वांछित जीन के साथ-साथ अवांछित जीन भी स्थानांतरित हो जाते हैं — इस कमी को दूर करने के लिए जीन क्लोनिंग व जीन स्थानांतरण द्वारा पुनर्योगज DNA का निर्माण किया जाता है, जिसमें केवल लक्ष्य जीन ही परपोषी में जाता है।
2.2 क्लोनिंग — विदेशी DNA का गुणन
जब विदेशी DNA किसी परपोषी (होस्ट) के जीनोम में सम्मिलित हो जाता है, तो वह उसके साथ प्रतिकृति कर वंशागत होता है। इसके लिए आवश्यक है कि DNA में प्रतिकृतीयन का उद्भव (ori — origin of replication) हो — यह अनुक्रम ही प्रतिकृति की शुरुआत करता है। इस प्रकार विदेशी DNA की समान प्रतियाँ बनाने की प्रक्रिया क्लोनिंग कहलाती है।
वन-लाइनर तथ्य
- दो मुख्य तकनीकें — आनुवंशिक इंजीनियरिंग व जैव प्रक्रम इंजीनियरिंग।
- ori (Origin of replication) — प्रतिकृति आरंभ स्थल।
- क्लोनिंग = विदेशी DNA की समान प्रतियाँ बनाना।
- आनुवंशिक रूपांतरण के 3 चरण — जीन पहचान, स्थानांतरण, संतति में बनाए रखना।
3 पुनर्योगज DNA तकनीक के साधन
प्रतिबंधन एंजाइम, संवाहक, परपोषी — तीन अनिवार्य उपकरण
3.1 प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज (Restriction Enzymes)
वर्ष 1963 में जीवाणुओं में ऐसे एंजाइम खोजे गए जो बैक्टीरियोफेज DNA को नष्ट कर देते थे — इन्हें प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज कहा गया। पहला पहचाना गया प्रतिबंधन एंजाइम हिंड II था, जो डीएनए में एक विशिष्ट छह-क्षारक युग्म (पैलिंड्रोमिक) अनुक्रम को पहचानता है — इस अनुक्रम को पहचान अनुक्रम कहते हैं।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| ज्ञात प्रतिबंधन एंजाइम | 900 से अधिक |
| जीवाणु स्ट्रेन | 230 से अधिक |
| न्यूक्लिएज के प्रकार | एक्सोन्यूक्लिएज (सिरे से) व एंडोन्यूक्लिएज (भीतर से काटते हैं) |
| प्रतिबंधन एंजाइम | एंडोन्यूक्लिएज का ही एक विशिष्ट वर्ग — पैलिंड्रोमिक अनुक्रम पर काटते हैं |
3.2 DNA खंडों का पृथक्करण — जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस
प्रतिबंधन एंजाइम द्वारा काटे गए DNA खंडों को ऐगारोज़ जेल वैद्युत का संचलन (जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस) द्वारा आकार के आधार पर अलग किया जाता है — छोटे खंड तेज़ गति से आगे बढ़ते हैं। DNA को इथीडियम ब्रोमाइड से रंगकर UV प्रकाश में नारंगी पट्टियों के रूप में देखा जाता है। इन पट्टियों को काटकर निकालने की प्रक्रिया क्षालन (इल्यूसन) कहलाती है।
3.3 क्लोनिंग संवाहक (Cloning Vectors)
संवाहक (जैसे प्लाज्मिड, बैक्टीरियोफेज) वे DNA अणु हैं जो विदेशी DNA को परपोषी कोशिका तक पहुँचाते हैं। एक आदर्श संवाहक में तीन अनिवार्य विशेषताएँ होती हैं:
| विशेषता | कार्य |
|---|---|
| ori (प्रतिकृतीयन का उद्भव) | प्रतिकृति आरंभ स्थल; जोड़े गए DNA की प्रतियों की संख्या नियंत्रित करता है। |
| वरणयोग्य चिह्नक (Selectable Marker) | प्रतिजैविक प्रतिरोध जीन (जैसे ampR, tetR) — रूपांतरित कोशिकाओं को चुनने में सहायक। |
| क्लोनिंग स्थल | एक या अधिक प्रतिबंधन एंजाइमों के लिए अद्वितीय स्थल, जहाँ विदेशी DNA जोड़ा जा सके। |
3.4 सक्षम परपोषी (Competent Host)
DNA जलरागी (हाइड्रोफिलिक) होने के कारण कोशिका झिल्ली पार नहीं कर सकता। इसे प्रवेश कराने के लिए कोशिकाओं को कैल्सियम क्लोराइड से उपचारित कर, 42°C पर तापाघात (हीट शॉक) देकर सक्षम (competent) बनाया जाता है। अन्य विधियाँ — सूक्ष्म अंत:क्षेपण (माइक्रोइंजेक्शन) जंतु कोशिकाओं हेतु, बायोलिस्टिक्स (जीन गन) पादपों हेतु, तथा एग्रोबैक्टीरियम Ti प्लाज्मिड प्राकृतिक रूप से पादप कोशिकाओं में जीन स्थानांतरित करता है।
वन-लाइनर तथ्य
- प्रथम प्रतिबंधन एंजाइम — हिंड II (1970 पहचाना गया, खोज 1963)।
- पैलिंड्रोमिक अनुक्रम — दोनों दिशाओं में समान पढ़ा जाने वाला अनुक्रम (जैसे GAATTC)।
- न्यूक्लिएज — एक्सो (सिरे से) व एंडो (भीतर)।
- DNA पृथक्करण — जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस (ऐगारोज, EtBr अभिरंजन)।
- pBR322 — ori, ampR, tetR, rop जीन युक्त लोकप्रिय संवाहक।
- Ti प्लाज्मिड — एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशिएंस से, पादप जीन स्थानांतरण हेतु।
4 पुनर्योगज DNA तकनीक के प्रक्रम
DNA पृथक्करण से लेकर उत्पाद निष्कर्षण तक के चरण
4.1 DNA का पृथक्करण (Isolation of DNA)
कोशिका को तोड़कर DNA को अन्य वृहद-अणुओं (RNA, प्रोटीन, पॉलीसैकराइड) से मुक्त किया जाता है — इसके लिए कोशिका-प्रकार के अनुसार एंजाइमों (लाइसोज़ाइम — जीवाणु; सेल्युलेज़ — पादप; काइटिनेज़ — कवक) का उपयोग होता है। RNA को राइबोन्यूक्लिएज़, प्रोटीन को प्रोटीएज़ द्वारा हटाया जाता है। अंततः द्रुतशीतित एथेनॉल से DNA अवक्षेपित (प्रेसिपिटेट) होकर महीन धागों के रूप में दिखाई देता है।
4.2 DNA का विशिष्ट कटान
शुद्ध DNA को प्रतिबंधन एंजाइम के साथ ऑप्टिमम परिस्थितियों में उपचारित कर पाचित (digest) किया जाता है। वांछित जीन वाले DNA खंड व संवाहक DNA को एक ही एंजाइम से काटने पर दोनों पर चिपचिपे सिरे बनते हैं, जिन्हें DNA लाइगेज (जो ATP से ऊर्जा लेता है) द्वारा जोड़कर पुनर्योगज DNA बनाया जाता है।
4.3 PCR — लक्ष्य जीन का प्रवर्धन
पॉलिमरेज़ शृंखला अभिक्रिया (PCR) — एक इन विट्रो तकनीक, जिसमें दो उपक्रमक (प्राइमर्स) व एक तापस्थायी DNA पॉलिमरेज़ (टैक पॉलिमरेज़, थर्मस एक्वेटिकस से) का उपयोग कर किसी विशिष्ट DNA खंड की अरबों प्रतियाँ बनाई जाती हैं। तीन चरण ~30 बार दोहराए जाते हैं:
- निष्क्रियकरण (Denaturation) — ~95°C: द्विलड़ी DNA एकल-लड़ी में पृथक होता है।
- तापानुशीलन (Annealing) — ~55°C: उपक्रमक पूरक अनुक्रमों से जुड़ते हैं।
- प्रसार (Extension) — ~72°C: टैक पॉलिमरेज़ द्वारा नई DNA लड़ी का संश्लेषण।
4.4 पुनर्योगज DNA का परपोषी में निवेशन
पुनर्योगज DNA (प्रतिजैविक प्रतिरोध जीन युक्त) को सक्षम परपोषी कोशिकाओं (जैसे ई. कोलाई) में प्रवेश कराया जाता है। रूपांतरित कोशिकाएँ एंटीबायोटिक युक्त माध्यम में जीवित रहती हैं — यही वरणयोग्य चिह्नक का उपयोग है।
4.5 बायोरिएक्टर व अनुप्रवाह संसाधन
बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए बायोरिएक्टर (100–1000 लीटर) का उपयोग होता है — सबसे सामान्य विलोडन-हौज़ (stirred-tank) प्रकार। इसमें तापमान, pH, ऑक्सीजन, फेन-नियंत्रण, प्रतिचयन प्रद्वार आदि सुविधाएँ होती हैं। उत्पादन के बाद अनुप्रवाह संसाधन — पृथक्करण, शुद्धीकरण, संरूपण, गुणवत्ता नियंत्रण व चिकित्सीय परीक्षण — द्वारा उत्पाद को विपणन योग्य बनाया जाता है।
वन-लाइनर तथ्य
- DNA पृथक्करण एंजाइम — लाइसोज़ाइम (जीवाणु), सेल्युलेज़ (पादप), काइटिनेज़ (कवक)।
- चिल्ड एथेनॉल से DNA अवक्षेपित होकर धागों के रूप में दिखता है।
- PCR के तीन चरण — Denaturation (~95°C), Annealing (~55°C), Extension (~72°C)।
- टैक पॉलिमरेज़ — थर्मस एक्वेटिकस से प्राप्त तापस्थायी एंजाइम।
- 30 चक्रों में DNA खंड ~1 अरब गुना प्रवर्धित होता है।
- बायोरिएक्टर आयतन — 100–1000 लीटर; विलोडन प्रकार सबसे सामान्य।
- अनुप्रवाह संसाधन — पृथक्करण, शुद्धीकरण, संरूपण, गुणवत्ता नियंत्रण।
📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न (2011–2026)
इस अध्याय से हर वर्ष औसतन 2–3 प्रश्न (~4% वेटेज) आते हैं — नीचे वास्तविक प्रश्न विकल्पों व उत्तरों सहित, क्लिक करें और देखें।
1NEET 2011 प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज 'EcoRI' के नाम में 'co' भाग किसे दर्शाता है?
उत्तर: (अ) कोलाई। EcoRI में 'co' = कोलाई (E. coli की जाति का संक्षिप्त रूप), पहला 'E' = एशरिशिया, 'R' = स्ट्रेन, 'I' = खोज क्रम।
2NEET 2011 समुद्री शैवाल से निष्कर्षित ऐगारोज़ का उपयोग किसमें किया जाता है?
उत्तर: (ब) जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस। ऐगारोज़ जेल DNA खंडों को आकार के आधार पर पृथक करने का माध्यम है।
3NEET 2012 रेडियोऐक्टिव अणु से टैग किए गए न्यूक्लिक अम्ल की एकल रज्जुक को क्या कहते हैं?
उत्तर: (ब) प्रोब। यह विशिष्ट DNA/RNA अनुक्रम की पहचान हेतु हाइब्रिडाइज़ेशन में प्रयुक्त होता है (जैसे सदर्न ब्लॉटिंग)।
4NEET 2016 टैक पॉलिमरेज़ एंजाइम किस जीवाणु से प्राप्त किया जाता है?
उत्तर: (अ) थर्मस एक्वेटिकस। यह गरम पानी के झरनों का तापरागी जीवाणु है, जिसका पॉलिमरेज़ PCR के उच्च ताप (95°C) पर भी सक्रिय रहता है।
5NEET 2016 निम्नलिखित में से कौन एक एंडोन्यूक्लिएज है?
उत्तर: (ब) हिंड II। यह एक प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज है, जो DNA को विशिष्ट अनुक्रम पर काटता है।
6NEET 2016 निम्नलिखित में से कौन-सा प्रतिबंधन एंजाइम कुंठित (blunt) सिरे उत्पन्न करता है?
उत्तर: (स) EcoRV। यह पैलिंड्रोमिक स्थल के ठीक मध्य में काटता है, जिससे कुंठित सिरे बनते हैं।
7NEET 2016 निम्नलिखित में से कौन-सा अनुप्रवाह संसाधन का घटक नहीं है?
उत्तर: (अ) अभिव्यक्ति (Expression)। यह उत्पादन अवस्था का भाग है, अनुप्रवाह संसाधन में पृथक्करण, शुद्धीकरण, संरूपण आदि आते हैं।
8NEET 2016 समान प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज से काटे गए विजातीय DNA व प्लाज्मिड को जोड़कर पुनर्योगज प्लाज्मिड बनाने के लिए किसका उपयोग किया जाता है?
उत्तर: (स) लाइगेज। DNA लाइगेज (ATP का उपयोग कर) फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाकर DNA खंडों को जोड़ता है।
9NEET 2016-II विलोडन-हौज़ (Stirred-tank) बायोरिएक्टर किस उद्देश्य से डिज़ाइन किए गए हैं?
उत्तर: (स) ऑक्सीजन की उपलब्धता। विलोडक मिश्रण व ऑक्सीजन-आपूर्ति सुनिश्चित करता है।
10NEET 2017 ऐगारोज़ जेल पर पृथक किए गए DNA खंडों को किसके साथ अभिरंजित करने के बाद देखा जा सकता है?
उत्तर: (अ) एथीडियम ब्रोमाइड (EtBr)। EtBr DNA में अंतर्स्थापित होकर UV प्रकाश में नारंगी पट्टियाँ देता है।
11NEET 2017 वह जीन जिसकी अभिव्यक्ति रूपांतरित कोशिकाओं की पहचान में मदद करती है, क्या कहलाता है?
उत्तर: (ब) वरणयोग्य चिह्नक (Selectable marker)। यह रूपांतरित व अरूपांतरित कोशिकाओं को अलग करता है।
12NEET 2017 विपणन से पूर्व अभिव्यक्त प्रोटीन के पृथक्करण व शुद्धीकरण की प्रक्रिया को क्या कहा जाता है?
उत्तर: (ब) अनुप्रवाह संसाधन (Downstream processing)।
13NEET 2019 प्रतिबंधन एंजाइमों के संबंध में सही कथन चुनें:
उत्तर: (द)। प्रत्येक प्रतिबंधन एंजाइम एक विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रम को पहचानता है और दोनों रज्जुकों पर काटता है।
14NEET 2022 कथन-I: प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज DNA को विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रम पर काटते हैं। कथन-II: वे पैलिंड्रोमिक स्थल के केंद्र से थोड़ा हटकर काटते हैं।
उत्तर: (द) दोनों सही। प्रतिबंधन एंजाइम विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रम पहचानते हैं और केंद्र से हटकर काटते हैं, जिससे चिपचिपे सिरे बनते हैं।
15NEET 2022 Phase 2 DNA खंडों का पृथक्करण किस तकनीक द्वारा किया जाता है?
उत्तर: (अ) जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस।
16NEET 2023 पुनर्योगज DNA निर्माण के मुख्य चरणों का सही क्रम चुनें — A. निवेशन B. कटान C. पृथक्करण D. प्रवर्धन (PCR)
उत्तर: (ब) कटान → पृथक्करण → प्रवर्धन → निवेशन।
17NEET 2024 बायोरिएक्टरों के संबंध में गलत कथन चुनें:
उत्तर: (ब) गलत है — बायोरिएक्टर बड़े पैमाने (100–1000 लीटर) के लिए होते हैं, छोटे पैमाने के लिए नहीं।
18NEET 2026 PCR के चरणों को सही क्रम में लगाएँ — 1. प्रसार 2. निष्क्रियकरण 3. पुनरावृत्ति 4. तापानुशीलन
उत्तर: (ब) निष्क्रियकरण (2) → तापानुशीलन (4) → प्रसार (1) → पुनरावृत्ति (3)।
19NEET 2026 EcoRI की क्रिया के चरणों को सही क्रम में लगाएँ — 1. कटान 2. बंधन 3. चिपचिपे सिरों का निर्माण 4. लाइगेज से जुड़ाव
उत्तर: (अ) बंधन → कटान → चिपचिपे सिरे → लाइगेज जुड़ाव।
20NEET 2019 मानव लसीकाणुओं में DNA प्रवेश कराने हेतु सामान्यतः किस संवाहक का उपयोग होता है?
उत्तर: (अ) रेट्रोवायरल संवाहक — जीन थेरेपी (जैसे ADA न्यूनता) में प्रयुक्त।
✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य
परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य सूक्ष्म बिंदु — अक्सर भ्रामक विकल्पों के रूप में आते हैं
- यह अध्याय NEET में 2000 से अब तक लगातार पूछा गया है — कुल मिलाकर 60+ प्रश्न, प्रतिवर्ष औसतन 2–3 प्रश्न (~4% वेटेज)।
- एक्सोन्यूक्लिएज बनाम एंडोन्यूक्लिएज: एक्सो — सिरे से काटता है; एंडो — भीतर विशिष्ट स्थल पर काटता है। प्रतिबंधन एंजाइम एंडोन्यूक्लिएज का ही एक विशिष्ट वर्ग है।
- चिपचिपे (sticky) बनाम कुंठित (blunt) सिरे: EcoRI, HindIII → चिपचिपे (staggered cut); EcoRV, SmaI → कुंठित (blunt)।
- पृथक्करण एंजाइम व कोशिका-प्रकार: लाइसोज़ाइम (जीवाणु), सेल्युलेज़ (पादप), काइटिनेज़ (कवक)।
- निवेशी निष्क्रियता (Insertional inactivation): β-गैलेक्टोसाइडेज़ जीन निष्क्रिय कर X-gal पर नीला-सफेद स्क्रीनिंग — नीली (गैर-पुनर्योगज), सफेद (पुनर्योगज)।
- प्रोब (Probe) बनाम प्राइमर (Primer): प्राइमर — DNA संश्लेषण प्रारंभ करता है (PCR); प्रोब — रेडियोधर्मी/फ्लोरोसेंट टैग युक्त, विशिष्ट अनुक्रम की पहचान हेतु (हाइब्रिडाइज़ेशन)।
- बायोरिएक्टर — केवल बड़े पैमाने (100–1000 L) के लिए — छोटे पैमाने का कथन गलत है (NEET 2024 में पूछा गया)।
- PCR तापमान त्रिक — 95°C (निष्क्रियकरण), 55°C (तापानुशीलन), 72°C (प्रसार) — यह क्रम अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- pBR322 की चार विशेषताएँ — ori, ampR, tetR, rop (प्रतिरूप संख्या नियंत्रक)।
- Ti प्लाज्मिड — एग्रोबैक्टीरियम ट्यूमीफेशिएंस से, मुख्यतः द्विबीजपत्री (dicot) पादपों में जीन स्थानांतरण हेतु; एकबीजपत्रियों में जीन गन (बायोलिस्टिक्स) अधिक प्रभावी।
- DNA लाइगेज — फॉस्फोडाइएस्टर बंध बनाता है तथा इस क्रिया के लिए ATP (या NAD+) की आवश्यकता होती है।
- सक्षम कोशिका — कैल्सियम क्लोराइड + 42°C तापाघात + बर्फ पर रखना — यह क्रम NEET में बार-बार पूछा जाता है।
- इस अध्याय की 75% पूछताछ केवल 4 उप-विषयों से — (1) प्रतिबंधन एंजाइम व पैलिंड्रोमिक अनुक्रम, (2) संवाहक व निवेशी निष्क्रियता, (3) PCR के चरण व तापमान, (4) बायोरिएक्टर व अनुप्रवाह संसाधन — इन्हें प्राथमिकता दें।
? अध्याय अभ्यास — विस्तृत हल
अध्याय 9 के सभी 12 प्रश्नों के step-by-step, स्पष्ट व परीक्षा-उपयोगी उत्तर — क्लिक करें और देखें।
प्रश्न 1 दस पुनर्योगज प्रोटीनों के नाम बताइए जो चिकित्सा में उपयोग किए जाते हैं।
- मानव इंसुलिन (मधुमेह)
- वृद्धि हार्मोन (बौनापन)
- एरिथ्रोपोइटिन (एनीमिया)
- इंटरफेरॉन (विषाणु संक्रमण, कैंसर)
- फैक्टर VIII (हीमोफीलिया)
- t-PA (हृदयाघात/स्ट्रोक में रक्त स्कंद घोलने हेतु)
- हेपेटाइटिस B टीका
- G-CSF (कीमोथेरेपी उपरांत न्यूट्रोपेनिया)
- मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (कैंसर, स्वप्रतिरक्षी रोग)
- DNase (सिस्टिक फाइब्रोसिस)
प्रश्न 2 प्रतिबंधन एंजाइम की क्रिया का सचित्र वर्णन करें।
प्रतिबंधन एंजाइम (जैसे EcoRI) DNA पर एक विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रम (जैसे 5'-GAATTC-3') को पहचानता है। यह दोनों रज्जुकों पर G और A के बीच काटता है, जिससे एकल-लड़ी वाले प्रलंबी (5'-AATT) सिरे बनते हैं — इन्हें चिपचिपे सिरे कहते हैं। ये सिरे पूरक अनुक्रम वाले दूसरे DNA खंड के साथ हाइड्रोजन बंध बनाकर जुड़ सकते हैं, और फिर लाइगेज उन्हें स्थायी रूप से बाँध देता है (चित्र 9.1 देखें)।
प्रश्न 3 एंजाइम (प्रोटीन) व DNA — आणविक आकार की तुलना कैसे करेंगे?
DNA, एंजाइम प्रोटीन की तुलना में आणविक आकार में कहीं बड़ा होता है — एक जीवाणु जीनोम में लाखों क्षारक युग्म होते हैं, जबकि एक एंजाइम सैकड़ों अमीनो अम्लों का बना होता है। तुलना हेतु जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस, अल्ट्रासेंट्रीफ्यूजेशन या इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी का उपयोग कर सकते हैं।
प्रश्न 4 मानव कोशिका में DNA की मोलर सांद्रता का अनुमान कैसे लगाएँ?
मानव द्विगुणित कोशिका में DNA ~6.4 pg (≈6.4×10⁹ क्षारक युग्म) होता है। DNA का अणुभार ≈650 g/mol प्रति क्षारक युग्म। कोशिका का आयतन ~200–1000 µm³ (1 µm³ = 10⁻¹⁵ L) मानकर, मोल्स = द्रव्यमान/अणुभार, फिर आयतन से भाग देकर सांद्रता (mol/L) निकाली जा सकती है — यह नैनोमोलर से माइक्रोमोलर परास में होती है। (इस गणना को कक्षा में अध्यापक के साथ विस्तार से करें।)
प्रश्न 5 क्या सुकेंद्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज मिलते हैं?
नहीं, प्राकृतिक रूप से प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज केवल प्राकेंद्रकी (जीवाणु) कोशिकाओं में पाए जाते हैं — ये जीवाणुओं की बैक्टीरियोफेज से रक्षा करने वाली प्रतिबंधन-रूपांतरण (restriction-modification) प्रणाली का हिस्सा हैं। सुकेंद्रकी कोशिकाओं में वायरस से बचाव के भिन्न तंत्र (प्रतिरक्षा तंत्र, RNAi) होते हैं।
प्रश्न 6 बायोरिएक्टर में संवर्धन फ्लास्क की तुलना में कौन-कौन सी अतिरिक्त सुविधाएँ होती हैं?
- तापमान नियंत्रण — इष्टतम ताप स्थिर रखना।
- pH नियंत्रण — अम्ल/क्षार के स्वचालित समावेशन से।
- ऑक्सीजन प्रदाय — बड़े आयतन में समान वायुवीय परिस्थितियाँ।
- झाग नियंत्रण (फेन तोड़ने वाला) — अतिरिक्त झाग हटाना।
- प्रतिचयन प्रद्वार — समय-समय पर नमूना निकालना।
- निर्जीवीकरण व्यवस्था — वाष्प द्वारा स्टरलाइज़ेशन।
- प्रक्षोभक (स्टिरर) — समरूप मिश्रण व ऑक्सीजन विसरण।
प्रश्न 7 पाँच पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों के उदाहरण दीजिए।
- GAATTC (EcoRI)
- GGATCC (BamHI)
- AAGCTT (HindIII)
- CTGCAG (PstI)
- GTCGAC (SalI)
ये सभी अनुक्रम 5'→3' दिशा में दोनों लड़ियों पर समान पढ़े जाते हैं तथा A-T, G-C क्षारक युग्मन नियम का पालन करते हैं।
प्रश्न 8 अर्धसूत्री विभाजन में पुनर्योगज DNA किस अवस्था में बनता है?
अर्धसूत्री विभाजन के प्रोफेज-I की पैकाइटीन (Pachytene) अवस्था में समजात गुणसूत्रों के बीच क्रॉसिंग ओवर (जीन विनिमय) होता है, जिससे पुनर्योगज (recombinant) गुणसूत्र/ DNA बनते हैं। (यह प्राकृतिक पुनर्योगज DNA है, जबकि जैव प्रौद्योगिकी में कृत्रिम पुनर्योगज DNA प्रयोगशाला में बनाया जाता है।)
प्रश्न 9 रिपोर्टर एंजाइम (बीटा-गैलेक्टोसाइडेज़) का उपयोग वरणयोग्य चिह्न के रूप में कैसे करते हैं?
संवाहक (जैसे pUC) में बीटा-गैलेक्टोसाइडेज़ जीन (lacZ) के भीतर क्लोनिंग स्थल होता है। जब विदेशी DNA इस स्थल पर जुड़ता है, तो lacZ जीन निष्क्रिय हो जाता है (निवेशी निष्क्रियता)। X-gal युक्त माध्यम पर — नीली कॉलोनी (बिना इंसर्ट, एंजाइम सक्रिय) तथा सफेद कॉलोनी (पुनर्योगज, इंसर्ट के कारण एंजाइम निष्क्रिय) — इस दृश्य अंतर से सफल पुनर्योगजों का चयन किया जाता है।
प्रश्न 10 संक्षेप में वर्णन करें — (क) ori (ख) बायोरिएक्टर (ग) अनुप्रवाह संसाधन
(क) ori (Origin of Replication): DNA का वह अनुक्रम जहाँ से प्रतिकृतीयन (replication) प्रारंभ होता है; यह जोड़े गए DNA के प्रतिरूपों की संख्या नियंत्रित करता है।
(ख) बायोरिएक्टर: 100–1000 लीटर क्षमता वाला बड़ा पात्र जिसमें इष्टतम ताप, pH, ऑक्सीजन आदि पर कोशिकाओं/सूक्ष्मजीवों को संवर्धित कर वांछित जैव उत्पाद (एंजाइम, टीके, हार्मोन) बनाए जाते हैं। सबसे सामान्य विलोडन-हौज़ प्रकार है।
(ग) अनुप्रवाह संसाधन: जैव संश्लेषण के बाद उत्पाद के पृथक्करण, शुद्धीकरण, संरूपण, चिकित्सीय परीक्षण व गुणवत्ता नियंत्रण की समग्र प्रक्रिया — उत्पाद को विपणन योग्य बनाने हेतु।
प्रश्न 11 संक्षेप में बताएँ — (क) PCR (ख) प्रतिबंधन एंजाइम व DNA (ग) काइटिनेज
(क) PCR: इन विट्रो तकनीक — दो उपक्रमकों (प्राइमर्स) व तापस्थायी टैक पॉलिमरेज़ का उपयोग कर किसी DNA खंड की अरबों प्रतियाँ बनाना; चरण: Denaturation (95°C) → Annealing (55°C) → Extension (72°C) ~30 चक्र।
(ख) प्रतिबंधन एंजाइम व DNA: प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज DNA के विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रम को पहचानकर काटते हैं (आणविक कैंची); इससे चिपचिपे सिरे बनते हैं, जो पुनर्योगज DNA निर्माण हेतु उपयोगी होते हैं।
(ग) काइटिनेज: कवक (फंजाई) की कोशिका भित्ति के घटक काइटिन को तोड़ने वाला एंजाइम — DNA पृथक्करण के दौरान कवक कोशिकाओं को खोलने के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 12 भेद करें — (क) प्लाज्मिड DNA व गुणसूत्रीय DNA (ख) RNA व DNA (ग) एक्सोन्यूक्लिएज व एंडोन्यूक्लिएज
(क) प्लाज्मिड DNA: छोटा, वृत्ताकार, स्वतंत्र प्रतिकृति, कोशिका हेतु अनिवार्य नहीं, अतिरिक्त जीन (जैसे एंटीबायोटिक प्रतिरोध) रखता है। गुणसूत्रीय DNA: बड़ा, रैखिक (यूकैरियोट) या वृत्ताकार (प्रोकैरियोट), कोशिका के जीवन हेतु अनिवार्य, सभी मूल जीन वहन करता है।
(ख) RNA: राइबोज शर्करा, एकल-लड़ी (सामान्यतः), यूरेसिल क्षारक, अस्थायी, प्रोटीन संश्लेषण में मध्यस्थ। DNA: डीऑक्सीराइबोज, द्विलड़ी, थाइमीन, स्थायी, आनुवंशिक पदार्थ।
(ग) एक्सोन्यूक्लिएज: न्यूक्लिक अम्ल के सिरों (टर्मिनल) से न्यूक्लियोटाइड हटाता है। एंडोन्यूक्लिएज: अणु के भीतर विशिष्ट स्थलों पर काटता है — प्रतिबंधन एंजाइम एंडोन्यूक्लिएज का ही एक वर्ग है।
✓ सारांश — एक नज़र में
जैव प्रौद्योगिकी
जीवों/एंजाइमों से उपयोगी उत्पाद/प्रक्रम; EFB परिभाषा; 1972 — कोहेन-बोयर द्वारा प्रथम पुनर्योगज DNA।
सिद्धांत व उपकरण
आनुवंशिक इंजीनियरिंग + जैव प्रक्रम इंजीनियरिंग। प्रतिबंधन एंजाइम (पैलिंड्रोमिक अनुक्रम), संवाहक (pBR322, Ti), लाइगेज, वरणयोग्य चिह्नक।
प्रक्रम
DNA पृथक्करण → कटान → PCR (प्रवर्धन) → संवाहक से बंधन → परपोषी में निवेशन → बायोरिएक्टर में बड़े पैमाने पर उत्पादन → अनुप्रवाह संसाधन (पृथक्करण, शुद्धीकरण, संरूपण)।
NEET महत्वपूर्ण
प्रतिबंधन एंजाइम नामकरण, चिपचिपे/कुंठित सिरे, PCR तापमान (95-55-72), pBR322, निवेशी निष्क्रियता (नीला-सफेद), बायोरिएक्टर विशेषताएँ — हर वर्ष 2-3 प्रश्न।