ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 7)
रसायन विज्ञान • कक्षा-12 • अध्याय 7

ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर

वर्गीकरण व नामपद्धति से लेकर विरचन की विधियाँ, भौतिक-रासायनिक गुण, अम्लता, विलियम्सन संश्लेषण तथा फ़ीनॉल की विशेष अभिक्रियाओं तक — संपूर्ण अध्याय की अवधारणाएँ, रंगीन तालिकाएँ, आरेख, तथा सभी पाठ्यनिहित एवं अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।

R–OH ऐल्कोहॉल
Ar–OH फ़ीनॉल
R–O–R′ ईथर
★ NEET फोकस तथ्य
अवधारणा

7.1 परिचय

जब किसी एलिफैटिक हाइड्रोकार्बन का हाइड्रोजन परमाणु हाइड्रॉक्सिल (–OH) समूह द्वारा प्रतिस्थापित होता है तो ऐल्कोहॉल बनता है; जब यही प्रतिस्थापन किसी ऐरोमैटिक तंत्र पर सीधे होता है तो फ़ीनॉल प्राप्त होता है। ऐल्कोहॉल में –OH समूह sp³ संकरित ऐलिफैटिक कार्बन से जुड़ा रहता है (R–OH), जबकि फ़ीनॉल में यह ऐरोमैटिक वलय के sp² संकरित कार्बन से सीधे जुड़ा रहता है (Ar–OH)।

यदि किसी ऐल्कोहॉल या फ़ीनॉल के हाइड्रॉक्सिल हाइड्रोजन का प्रतिस्थापन किसी ऐल्किल या ऐरिल समूह से हो जाए, तो ईथर बनते हैं (R–O–R′)। सरल उदाहरण डाइमेथिल ईथर (CH₃OCH₃) है।

दैनिक जीवन में महत्व: फर्नीचर की पॉलिश में प्रयुक्त स्पिरिट मुख्यतः एथेनॉल है; खाद्य शर्करा, वस्त्रों में प्रयुक्त कपास, तथा कागज़ जैसे अनेक प्राकृतिक पदार्थ –OH समूह युक्त यौगिकों (कार्बोहाइड्रेट/सेलुलोज़) से बने होते हैं। ऐस्पिरिन (सैलिसिलिक अम्ल का एसीटिलन उत्पाद) जैसी पीड़ाहारी दवा भी फ़ीनॉल-श्रेणी के यौगिक से बनती है।
वर्गीकरण

7.2 वर्गीकरण

7.2.1 ऐल्कोहॉल — हाइड्रॉक्सिल समूहों की संख्या के आधार पर

अणु में उपस्थित –OH समूहों की संख्या (एक, दो, तीन या अधिक) के अनुसार ऐल्कोहॉल को मोनोहाइड्रिक, डाइहाइड्रिक, ट्राइहाइड्रिक अथवा पॉलीहाइड्रिक में बाँटा जाता है — जैसे C₂H₅OH (मोनोहाइड्रिक), एथिलीन ग्लाइकॉल (डाइहाइड्रिक), ग्लिसरॉल (ट्राइहाइड्रिक)।

7.2.2 मोनोहाइड्रिक ऐल्कोहॉल — कार्बन के संकरण के आधार पर

(क) यौगिक जिनमें (Csp³–OH) आबंध हो

यहाँ –OH समूह ऐल्किल समूह के sp³ संकरित कार्बन से जुड़ा होता है। इस वर्ग को उस कार्बन की प्रकृति के अनुसार आगे तीन उप-वर्गों में बाँटा जाता है:

प्रकार–OH वाहक कार्बन से जुड़े अन्य कार्बनों की संख्या
प्राथमिक (1°)1 कार्बन — R–CH₂–OH
द्वितीयक (2°)2 कार्बन — R₂CH–OH
तृतीयक (3°)3 कार्बन — R₃C–OH

ऐलिलिक ऐल्कोहॉल: –OH समूह द्विआबंध से अगले sp³ संकरित कार्बन (ऐलिलिक कार्बन) पर होता है — जैसे CH₂=CH–CH₂OH

बेन्ज़िलिक ऐल्कोहॉल: –OH समूह ऐरोमैटिक वलय से अगले sp³ संकरित कार्बन पर होता है — जैसे C₆H₅–CH₂OH।

(ख) यौगिक जिनमें (Csp²–OH) आबंध हो

इनमें –OH समूह कार्बन-कार्बन द्विआबंध (वाइनिलिक कार्बन) से सीधे जुड़ा होता है — इन्हें वाइनिलिक ऐल्कोहॉल कहते हैं। उदाहरण: CH₂=CH–OH

7.2.3 फ़ीनॉल का वर्गीकरण

फ़ीनॉलों को भी –OH समूहों की संख्या के अनुसार मोनोहाइड्रिक, डाइहाइड्रिक व ट्राइहाइड्रिक फ़ीनॉलों में वर्गीकृत किया जाता है। कैटेकॉल, रिसॉर्सिनॉल तथा हाइड्रोक्विनोन क्रमशः बेन्ज़ीन-1,2-डाइऑल, बेन्ज़ीन-1,3-डाइऑल तथा बेन्ज़ीन-1,4-डाइऑल के सामान्य नाम हैं।

7.2.4 ईथर का वर्गीकरण

ईथर में ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े दोनों ऐल्किल/ऐरिल समूहों की प्रकृति के आधार पर वर्गीकरण होता है — यदि दोनों समूह समान हों तो सरल (सममित) ईथर कहलाते हैं, और यदि भिन्न हों तो मिश्रित (असममित) ईथर कहलाते हैं।

उदाहरण: C₂H₅–O–C₂H₅ (डाइएथिल ईथर) एक सममित ईथर है, जबकि C₂H₅–O–CH₃ (एथिल मेथिल ईथर) व C₂H₅–O–C₆H₅ (फेनिल एथिल ईथर) असममित ईथर हैं।

त्वरित तथ्य
  • ऐल्कोहॉल में –OH sp³ कार्बन पर; फ़ीनॉल में –OH सीधे ऐरोमैटिक sp² कार्बन पर होता है।
  • वाइनिलिक ऐल्कोहॉल में –OH स्वयं द्विआबंधी sp² कार्बन पर, जबकि ऐलिलिक ऐल्कोहॉल में –OH द्विआबंध से सटे sp³ कार्बन पर होता है।
  • सरल ईथर में दोनों R समूह समान; मिश्रित ईथर में भिन्न होते हैं।
नामपद्धति

7.3 नामपद्धति

7.3.1 ऐल्कोहॉल

सामान्य नाम: ऐल्किल समूह के नाम के साथ "ऐल्कोहॉल" शब्द जोड़ते हैं — जैसे मेथिल ऐल्कोहॉल।

IUPAC नाम: मूल ऐल्केन के नाम के अंतिम 'e' को 'ol' प्रत्यय से बदला जाता है, तथा सबसे लंबी शृंखला (जनक शृंखला) का क्रमांकन –OH के निकटतम सिरे से किया जाता है। पॉलिहाइड्रिक ऐल्कोहॉल के लिए 'ऑल' से पहले डाइ, ट्राइ आदि गुणात्मक पूर्वलग्न जोड़े जाते हैं (जैसे एथेन-1,2-डाइऑल)।

यौगिकसामान्य नामIUPAC नाम
CH₃OHमेथिल ऐल्कोहॉलमेथेनॉल
CH₃CH₂CH₂OHn-प्रोपिल ऐल्कोहॉलप्रोपेन-1-ऑल
(CH₃)₂CHOHआइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉलप्रोपेन-2-ऑल
(CH₃)₃COHतृतीयक-ब्यूटिल ऐल्कोहॉल2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल
HOCH₂CH₂OHएथिलीन ग्लाइकॉलएथेन-1,2-डाइऑल
HOCH₂CH(OH)CH₂OHग्लिसरॉलप्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल

7.3.2 फ़ीनॉल

बेन्ज़ीन का सरलतम हाइड्रॉक्सिल व्युत्पन्न फ़ीनॉल कहलाता है — यही इसका सामान्य व IUPAC-अनुमोदित नाम है। इसके प्रतिस्थापित यौगिकों में o-, m-, p- पूर्वलग्न सामान्य नामकरण में प्रयुक्त होते हैं (जैसे o-क्रीसॉल = 2-मेथिलफ़ीनॉल)।

7.3.3 ईथर

सामान्य नाम: दोनों ऐल्किल/ऐरिल समूहों के नाम अंग्रेज़ी वर्णानुक्रम में लिखकर अंत में "ईथर" शब्द जोड़ा जाता है (यदि समान हों तो पूर्वलग्न "डाइ")।

IUPAC नाम: ईथर को हाइड्रोकार्बन का व्युत्पन्न माना जाता है जिसमें एक हाइड्रोजन –OR या –OAr समूह से प्रतिस्थापित होता है (बड़े ऐल्किल समूह को मूल शृंखला चुना जाता है)।

यौगिकसामान्य नामIUPAC नाम
CH₃OCH₃डाइमेथिल ईथरमेथॉक्सीमेथेन
C₂H₅OC₂H₅डाइएथिल ईथरएथॉक्सीएथेन
C₆H₅OCH₃मेथिल फेनिल ईथर (ऐनिसोल)मेथॉक्सीबेन्ज़ीन
C₆H₅OCH₂CH₃एथिल फेनिल ईथर (फेनीटॉल)एथॉक्सीबेन्ज़ीन
संरचना

7.4 प्रकार्यात्मक समूहों की संरचनाएँ

ऐल्कोहॉल में –OH की ऑक्सीजन, कार्बन के sp³ कक्षक व ऑक्सीजन के sp³ कक्षक के अतिव्यापन से बने सिग्मा (σ) आबंध द्वारा कार्बन से जुड़ी होती है। आबंध कोण (∠C–O–H) चतुष्फलकीय कोण (109°28′) से थोड़ा कम होता है — इसका कारण ऑक्सीजन पर उपस्थित असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगलों के मध्य प्रतिकर्षण है।

फ़ीनॉल में –OH समूह ऐरोमैटिक वलय के sp² कार्बन से जुड़ा होता है। यहाँ C–O आबंध की लंबाई (136 pm) मेथेनॉल के C–O आबंध (142 pm) से कम होती है, क्योंकि: (i) ऑक्सीजन का असहभाजित इलेक्ट्रॉन युगल वलय के साथ संयुग्मित होकर आबंध को आंशिक द्विआबंध गुण देता है, तथा (ii) sp² कार्बन में उच्च s-गुण के कारण अधिक विद्युतऋणात्मकता होती है।

ईथर में ऑक्सीजन पर चार इलेक्ट्रॉन युगल (दो आबंधी, दो अनाबंधित) लगभग चतुष्फलकीय रूप में व्यवस्थित रहते हैं; दो स्थूल R समूहों के मध्य प्रतिकर्षण के कारण आबंध कोण चतुष्फलकीय कोण से थोड़ा अधिक होता है।

यौगिकC–O आबंध लंबाई∠C–O–H / ∠C–O–C
मेथेनॉल142 pm108.9°
फ़ीनॉल136 pm109° (लगभग)
मेथॉक्सीमेथेन (ईथर)141 pm111.7°
विरचन

7.5 ऐल्कोहॉल व फ़ीनॉल का विरचन

7.5.1 ऐल्कोहॉलों का विरचन — ऐल्कीनों से

(i) अम्ल उत्प्रेरित जलयोजन: ऐल्कीन तनु अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में जल के साथ मार्कोनीकॉफ नियमानुसार अभिक्रिया कर ऐल्कोहॉल बनाती है।

CH₃CH=CH₂ + H₂O ⇌ (H₃O⁺) CH₃CH(OH)CH₃

(ii) हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण: डाइबोरेन (BH₃)₂ ऐल्कीन से योगज कर ट्राइऐल्किल बोरेन बनाता है, जो H₂O₂/NaOH द्वारा ऑक्सीकृत होकर प्रति-मार्कोनीकॉफ ऐल्कोहॉल देता है।

CH₃CH=CH₂ + (BH₃)₂ → (CH₃CH₂CH₂)₃B —(H₂O₂/OH⁻)→ 3CH₃CH₂CH₂OH
ऐतिहासिक टिप्पणी: हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण का विवरण सर्वप्रथम एच.सी. ब्राउन ने 1959 में दिया था; इस कार्य हेतु 1979 में नोबेल पुरस्कार मिला।

7.5.2 कार्बोनिल यौगिकों से

(i) ऐल्डिहाइड व कीटोन का अपचयन: उत्प्रेरकी हाइड्रोजनन या NaBH₄/LiAlH₄ द्वारा अपचयित करने पर ऐल्डिहाइड प्राथमिक ऐल्कोहॉल तथा कीटोन द्वितीयक ऐल्कोहॉल देते हैं।

RCHO + H₂ —(Pd)→ RCH₂OH
RCOR′ —(NaBH₄)→ R–CH(OH)–R′

(ii) कार्बोक्सिलिक अम्ल व एस्टरों का अपचयन: LiAlH₄ द्वारा कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राथमिक ऐल्कोहॉल में अपचयित होते हैं।

RCOOH —(i)LiAlH₄ (ii)H₂O→ RCH₂OH

7.5.3 ग्रीन्यार अभिकर्मकों से

ग्रीन्यार अभिकर्मक कार्बोनिल समूह पर नाभिकरागी संयोजन कर योगोत्पाद बनाता है, जिसके जल-अपघटन से ऐल्कोहॉल प्राप्त होती है। मेथेनैल → प्राथमिक, अन्य ऐल्डिहाइड → द्वितीयक, कीटोन → तृतीयक ऐल्कोहॉल।

R′MgX + HCHO → RCH₂OH (प्राथमिक)
R′MgX + RCHO → RCH(OH)R′ (द्वितीयक)
R′MgX + RCOR″ → R–C(OH)(R′)(R″) (तृतीयक)

7.5.4 फ़ीनॉलों का विरचन

(i) हैलोऐरीनों से: क्लोरोबेन्ज़ीन को NaOH के साथ 623K व 300 atm पर संगलित कर सोडियम फ़ीनॉक्साइड, फिर अम्लन से फ़ीनॉल प्राप्त होती है (डाओ प्रक्रम)।

(ii) बेन्ज़ीन सल्फोनिक अम्लों से: बेन्ज़ीन का ओलियम द्वारा सल्फोनेशन कर बना सल्फोनिक अम्ल, गलित NaOH के साथ गरम करके फ़ीनॉल में बदला जाता है।

(iii) डाइऐज़ोनियम लवणों से: प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन से बने डाइऐज़ोनियम लवण का जल-अपघटन फ़ीनॉल देता है।

(iv) क्यूमीन से (औद्योगिक विधि): क्यूमीन (आइसोप्रोपिल बेन्ज़ीन) को वायु द्वारा क्यूमीन हाइड्रोपरऑक्साइड में ऑक्सीकृत किया जाता है, जिसे तनु अम्ल से क्रिया कराकर फ़ीनॉल तथा ऐसीटोन (उपोत्पाद) में विघटित किया जाता है।

क्यूमीन प्रक्रम क्यूमीन —(O₂)→ क्यूमीन हाइड्रोपरऑक्साइड —(H⁺/H₂O)→ फ़ीनॉल + CH₃COCH₃ (ऐसीटोन)
त्वरित तथ्य
  • अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन मार्कोनीकॉफ नियम का पालन करता है; हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण प्रति-मार्कोनीकॉफ उत्पाद देता है।
  • ग्रीन्यार + मेथेनैल → प्राथमिक ऐल्कोहॉल; + अन्य ऐल्डिहाइड → द्वितीयक; + कीटोन → तृतीयक ऐल्कोहॉल।
  • क्यूमीन प्रक्रम विश्व में फ़ीनॉल के औद्योगिक उत्पादन की मुख्य विधि है।
गुण

7.6 भौतिक गुणधर्म

ऐल्कोहॉल व फ़ीनॉल के गुण मुख्यतः –OH समूह के कारण होते हैं, जबकि ऐल्किल/ऐरिल भाग इन्हें सामान्यतः संशोधित करता है।

अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंध R–O–H⋯O–H⋯O–H⋯ R R यही हाइड्रोजन आबंध ऐल्कोहॉल/फ़ीनॉल के उच्च क्वथनांक व जल-विलेयता का कारण है
चित्र 7.1 — ऐल्कोहॉलों में अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन

क्वथनांक: कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने के साथ क्वथनांक बढ़ता है, परंतु शाखन बढ़ने से क्वथनांक घटता है। ऐल्कोहॉलों व फ़ीनॉलों के क्वथनांक तुल्य द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बनों/ईथरों/हैलोऐल्केनों से अधिक होते हैं — अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंध के कारण।

विलेयता: ऐल्कोहॉल व फ़ीनॉल जल के साथ हाइड्रोजन आबंध बना सकते हैं, अतः जल में विलेय होते हैं। यह विलेयता ऐल्किल/ऐरिल समूह का आकार बढ़ने के साथ घटती है।

यौगिकआण्विक द्रव्यमानक्वथनांक (K)
एथेनॉल46351
मेथॉक्सीमेथेन (ईथर)46248
प्रोपेन44231
त्वरित तथ्य
  • समान आण्विक द्रव्यमान होने पर भी हाइड्रोजन आबंध के कारण एथेनॉल का क्वथनांक मेथॉक्सीमेथेन से बहुत अधिक है।
  • ऐल्कोहॉलों में शाखन बढ़ने से क्वथनांक घटता है।
  • फ़ीनॉल व एथॉक्सीएथेन दोनों जल के साथ हाइड्रोजन आबंध बनाकर विलेय हो सकते हैं।
अभिक्रियाशीलता

7.7 ऐल्कोहॉल व फ़ीनॉल की रासायनिक अभिक्रियाएँ

ऐल्कोहॉल सर्वतोमुखी यौगिक हैं — ये नाभिकरागी (O–H आबंध टूटता है) तथा इलेक्ट्रॉनरागी (C–O आबंध टूटता है, प्रोटॉनित अवस्था में) दोनों रूपों में अभिक्रिया करते हैं।

7.7.1 (क) O–H आबंध विदलन की अभिक्रियाएँ

अम्लता — धातुओं के साथ अभिक्रिया

ऐल्कोहॉल व फ़ीनॉल सक्रिय धातुओं (Na, K) से अभिक्रिया कर संगत ऐल्कॉक्साइड/फ़ीनॉक्साइड तथा H₂ देते हैं।

2R–OH + 2Na → 2R–ONa + H₂
2C₆H₅OH + 2Na → 2C₆H₅ONa + H₂

ऐल्कोहॉलों की अम्ल-सामर्थ्य: अम्ल-सामर्थ्य क्रम: प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक (+I प्रभाव के कारण)। ऐल्कोहॉल जल से दुर्बल अम्ल होते हैं।

फ़ीनॉलों की अम्लता

फ़ीनॉल में –OH ऐरोमैटिक वलय के sp² कार्बन से जुड़ा होता है, जो इलेक्ट्रॉन-अपनयक की तरह कार्य करता है — फ़ीनॉक्साइड आयन अनुनाद द्वारा स्थायीकृत होता है, इसलिए फ़ीनॉल जल तथा ऐल्कोहॉल दोनों से प्रबल अम्ल होती है।

यौगिकpKa
o-नाइट्रोफ़ीनॉल7.2
p-नाइट्रोफ़ीनॉल7.1
m-नाइट्रोफ़ीनॉल8.3
फ़ीनॉल10.0
o/m/p-क्रीसॉल≈10.1–10.2
एथेनॉल15.9
प्रतिस्थापी समूहों का प्रभाव: ऑर्थो/पैरा –NO₂ अम्लता बढ़ाता है; ऐल्किल समूह घटाता है। मेटा –NO₂ का अनुनाद द्वारा प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं मिलता।

एस्टरीकरण

ऐल्कोहॉल/फ़ीनॉल कार्बोक्सिलिक अम्लों, अम्ल क्लोराइडों तथा अम्ल ऐनहाइड्राइडों के साथ एस्टर बनाते हैं। ऐस्पिरिन सैलिसिलिक अम्ल के एसीटिलन से प्राप्त होती है।

R/ArOH + R′COOH ⇌ R/ArOCOR′ + H₂O
सैलिसिलिक अम्ल + (CH₃CO)₂O —(H⁺)→ ऐस्पिरिन + CH₃COOH

7.7.2 (ख) C–O आबंध विदलन की अभिक्रियाएँ (केवल ऐल्कोहॉलों में)

1. हाइड्रोजन हैलाइडों के साथ: ऐल्कोहॉल HX से अभिक्रिया कर ऐल्किल हैलाइड बनाती है। ल्यूकास परीक्षण में तृतीयक ऐल्कोहॉल तुरंत धुँधलापन देती है; प्राथमिक नहीं।

2. निर्जलन: सांद्र अम्लों की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल का निर्जलन होकर ऐल्कीन बनती है। निर्जलन-सुगमता क्रम: तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक

चरण 1 प्रोटॉनित ऐल्कोहॉल बनना चरण 2 (धीमा) कार्बोकैटायन बनना चरण 3 प्रोटॉन निकलकर ऐल्कीन चरण 2 सबसे धीमा है — यही दर-निर्धारक चरण है
चित्र 7.2 — ऐल्कोहॉल के अम्ल-उत्प्रेरित निर्जलन (E1) की तीन-चरण क्रियाविधि

4. ऑक्सीकरण (विहाइड्रोजनन)

ऐल्कोहॉलऑक्सीकरण कर्मकउत्पाद
प्राथमिकPCC (हल्का)ऐल्डिहाइड
प्राथमिकअम्लीकृत KMnO₄कार्बोक्सिलिक अम्ल
द्वितीयकCrO₃कीटोन
तृतीयकसामान्यतः ऑक्सीकरण नहीं
PCC का महत्व: प्राथमिक ऐल्कोहॉल को केवल ऐल्डिहाइड तक ऑक्सीकृत करता है, KMnO₄ सीधे कार्बोक्सिलिक अम्ल बनाता है।
त्वरित तथ्य
  • अम्ल-सामर्थ्य क्रम: प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक ऐल्कोहॉल (+I प्रभाव के कारण)।
  • फ़ीनॉल जल व ऐल्कोहॉल दोनों से अधिक अम्लीय है (फ़ीनॉक्साइड आयन अनुनाद-स्थायीकृत)।
  • ऑर्थो/पैरा –NO₂ फ़ीनॉल की अम्लता बढ़ाता है; ऐल्किल समूह घटाता है।
  • PCC प्राथमिक ऐल्कोहॉल को केवल ऐल्डिहाइड तक ऑक्सीकृत करता है।
  • निर्जलन-सुगमता क्रम: तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक ऐल्कोहॉल।
फ़ीनॉल की विशेष अभिक्रियाएँ

7.8 फ़ीनॉल की विशेष अभिक्रियाएँ

फ़ीनॉल के –OH समूह का अनुनाद प्रभाव ऐरोमैटिक वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति सक्रिय करता है तथा आने वाले समूह को ऑर्थो व पैरा स्थिति पर निर्दिष्ट करता है।

7.8.1 इलेक्ट्रॉनरागी ऐरोमैटिक प्रतिस्थापन

नाइट्रोकरण: तनु HNO₃ से o- व p-नाइट्रोफ़ीनॉल; सांद्र HNO₃ से पिक्रिक अम्ल (2,4,6-ट्राइनाइट्रोफ़ीनॉल) बनती है।

हैलोजनन: कम-ध्रुवीय विलायकों में मोनोब्रोमोफ़ीनॉल; ब्रोमीन-जल से 2,4,6-ट्राइब्रोमोफ़ीनॉल श्वेत अवक्षेप।

7.8.2 कोल्बे अभिक्रिया

फ़ीनॉक्साइड आयन CO₂ के साथ अभिक्रिया कर सैलिसिलिक अम्ल (o-हाइड्रॉक्सीबेन्ज़ोइक अम्ल) बनाता है।

C₆H₅ONa —(i)CO₂ (ii)H⁺→ o-HOC₆H₄COOH (सैलिसिलिक अम्ल)

7.8.3 राइमर-टीमन अभिक्रिया

फ़ीनॉल की NaOH की उपस्थिति में CHCl₃ से अभिक्रिया कराने पर –CHO समूह ऑर्थो स्थिति पर प्रवेश करता है — सैलिसैल्डिहाइड बनता है।

7.8.4 यशदरज (Zn dust) व ऑक्सीकरण

यशदरज के साथ गरम करने पर फ़ीनॉल बेन्ज़ीन में परिवर्तित हो जाती है। क्रोमिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण से बेन्ज़ोक्विनोन बनता है।

त्वरित तथ्य
  • o-नाइट्रोफ़ीनॉल भाप-वाष्पशील (आंतरआण्विक H-आबंध); p-नाइट्रोफ़ीनॉल कम वाष्पशील (अंतराआण्विक H-आबंध)।
  • कोल्बे अभिक्रिया → सैलिसिलिक अम्ल; राइमर-टीमन अभिक्रिया → सैलिसैल्डिहाइड।
  • फ़ीनॉल + यशदरज → बेन्ज़ीन (संरचना-सिद्धि की क्लासिक विधि)।
उपयोग

7.9 औद्योगिक महत्व के ऐल्कोहॉल

मेथेनॉल (काष्ठ स्पिरिट)

पहले लकड़ी के भंजक आसवन द्वारा; वर्तमान में CO + 2H₂ —(ZnO-Cr₂O₃)→ CH₃OH द्वारा उत्पादित (उच्च ताप-दाब)। अत्यंत विषैली — थोड़ी मात्रा से अंधापन, अधिक से मृत्यु।

CO + 2H₂ —(ZnO-Cr₂O₃, 200-300atm, 573-673K)→ CH₃OH

एथेनॉल

औद्योगिक स्तर पर शर्करा के किण्वन द्वारा — इनवर्टेस एन्ज़ाइम सुक्रोज़ को ग्लूकोस व फ्रक्टोज़ में, फिर जाइमेज़ एन्ज़ाइम इन्हें किण्वित कर एथेनॉल व CO₂ बनाता है।

C₁₂H₂₂O₁₁ + H₂O —(इनवर्टेस)→ C₆H₁₂O₆ + C₆H₁₂O₆
C₆H₁₂O₆ —(जाइमेज़)→ 2C₂H₅OH + 2CO₂

औद्योगिक ऐल्कोहॉल को कॉपर सल्फेट (रंग) व पिरिडीन (दुर्गंध) मिलाकर विकृतीकरण किया जाता है।

ईथर

7.10 ईथर — विरचन, गुण व अभिक्रियाएँ

7.10.1 विरचन

(i) ऐल्कोहॉलों के निर्जलन द्वारा: प्रोटिक अम्ल की उपस्थिति में ऐल्कोहॉल का निर्जलन — एथेनॉल 443K पर एथीन, 413K पर ईथर देता है।

2CH₃CH₂OH —(सांद्र H₂SO₄, 413K)→ C₂H₅OC₂H₅ + H₂O

(ii) विलियम्सन संश्लेषण: ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड/फ़ीनॉक्साइड के साथ SN2 अभिक्रिया — हैलाइड सदैव प्राथमिक होना चाहिए।

R–X + R′–ONa → R–O–R′ + NaX

7.10.2 भौतिक गुण

ईथर के क्वथनांक तुल्य आणविक द्रव्यमान वाले ऐल्केनों के लगभग समान परंतु संगत ऐल्कोहॉलों से काफी कम होते हैं (कोई हाइड्रोजन आबंध नहीं)। जल में मिश्रणीयता समान आणविक द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉलों से मिलती-जुलती है।

7.10.3 रासायनिक अभिक्रियाएँ

C–O आबंध का विदलन: ईथर का C–O आबंध HX (HI > HBr > HCl) की अधिकता व उच्च ताप पर ही विदलित होता है। डाइऐल्किल ईथर → दो ऐल्किल हैलाइड; ऐल्किल ऐरिल ईथर → फ़ीनॉल + ऐल्किल हैलाइड।

क्रियाविधि सारांश R–O–R + HX (आधिक्य) → RX + R–OH → RX + R–X
Ar–O–R + HX → Ar–OH + R–X (ऐरिल–O आबंध सुरक्षित)

इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन (ऐरिल ऐल्किल ईथर)

–OR समूह फ़ीनॉल के –OH के समान ही ऑर्थो-पैरा निर्देशक व सक्रियकारी होता है। ऐनिसोल हैलोजनन, नाइट्रोकरण, फ्रीडेल-क्राफ्ट अभिक्रियाएँ देता है।

त्वरित तथ्य
  • विलियम्सन संश्लेषण में ऐल्किल हैलाइड सदैव प्राथमिक होना चाहिए।
  • ईथर का C–O आबंध विदलन HX की अधिकता व उच्च ताप पर होता है; HI सबसे क्रियाशील।
  • ऐल्किल ऐरिल ईथर में सदैव ऐल्किल–O आबंध टूटता है, ऐरिल–O सुरक्षित।
  • –OR समूह वलय को इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन के प्रति सक्रिय व ऑर्थो-पैरा निर्देशक बनाता है।
रिवीज़न

7.11 संपूर्ण अध्याय के महत्वपूर्ण वन-लाइनर तथ्य

वर्गीकरण व नामपद्धति
  • ऐल्कोहॉल में –OH sp³ कार्बन पर; फ़ीनॉल में –OH सीधे ऐरोमैटिक sp² कार्बन पर होता है।
  • वाइनिलिक ऐल्कोहॉल: –OH स्वयं sp² द्विआबंधी कार्बन पर; ऐलिलिक: –OH द्विआबंध से सटे sp³ कार्बन पर।
  • सरल (सममित) ईथर में दोनों R समूह समान; मिश्रित (असममित) में भिन्न।
  • IUPAC में ऐल्केन के 'e' को 'ol' से बदलें; –OH को निकटतम क्रमांक।
विरचन
  • अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन मार्कोनीकॉफ; हाइड्रोबोरॉनन-ऑक्सीकरण प्रति-मार्कोनीकॉफ।
  • ग्रीन्यार + मेथेनैल → प्राथमिक; + अन्य ऐल्डिहाइड → द्वितीयक; + कीटोन → तृतीयक ऐल्कोहॉल।
  • क्यूमीन प्रक्रम विश्व में फ़ीनॉल के उत्पादन की मुख्य विधि (उपोत्पाद: ऐसीटोन)।
  • क्लोरोबेन्ज़ीन → फ़ीनॉल: 623K, 300 atm, NaOH (डाओ प्रक्रम)।
  • डाइऐज़ोनियम लवण का जल-अपघटन फ़ीनॉल देता है।
भौतिक गुण
  • हाइड्रोजन आबंध के कारण ऐल्कोहॉल/फ़ीनॉल के क्वथनांक तुल्य द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बन/ईथर/हैलोऐल्केन से अधिक होते हैं।
  • शाखन बढ़ने से क्वथनांक घटता है; कार्बन संख्या बढ़ने से बढ़ता है।
  • जल-विलेयता ऐल्किल/ऐरिल भाग के आकार बढ़ने के साथ घटती है।
अम्लता व अभिक्रियाएँ
  • अम्ल-सामर्थ्य क्रम: प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक ऐल्कोहॉल (+I प्रभाव के कारण)।
  • फ़ीनॉल जल व ऐल्कोहॉल दोनों से अधिक अम्लीय है (फ़ीनॉक्साइड आयन अनुनाद-स्थायीकृत)।
  • ऑर्थो/पैरा –NO₂ फ़ीनॉल की अम्लता बढ़ाता है; ऐल्किल समूह घटाता है।
  • PCC प्राथमिक ऐल्कोहॉल को केवल ऐल्डिहाइड तक ऑक्सीकृत करता है; KMnO₄ सीधे अम्ल तक।
  • निर्जलन-सुगमता क्रम: तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक ऐल्कोहॉल।
फ़ीनॉल की विशेष अभिक्रियाएँ
  • कोल्बे अभिक्रिया → सैलिसिलिक अम्ल; राइमर-टीमन → सैलिसैल्डिहाइड।
  • o-नाइट्रोफ़ीनॉल भाप-वाष्पशील (आंतरआण्विक H-आबंध); p- नहीं (अंतराआण्विक)।
  • फ़ीनॉल + यशदरज → बेन्ज़ीन (संरचना-सिद्धि की क्लासिक विधि)।
ईथर
  • विलियम्सन संश्लेषण में ऐल्किल हैलाइड सदैव प्राथमिक होना चाहिए।
  • ईथर सबसे कम अभिक्रियाशील प्रकार्यात्मक समूह है; C–O विदलन HX की अधिकता में ही होता है।
  • ऐल्किल ऐरिल ईथर में सदैव ऐल्किल–O आबंध टूटता है, ऐरिल–O सुरक्षित।
  • –OR समूह वलय को ऑर्थो-पैरा निर्देशक बनाता है (फ़ीनॉल के –OH के समान)।

पाठ्यनिहित प्रश्न (7.1 – 7.12) — विस्तृत हल

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके हल देखें।

7.1 निम्नलिखित को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐल्कोहॉल में वर्गीकृत कीजिए।

(i) (CH₃)₃C–CH₂OH — प्राथमिक (1°)

(ii) H₂C=CH–CH₂OH — प्राथमिक (1°)

(iii) CH₃–CH₂–CH₂–OH — प्राथमिक (1°)

(iv) C₆H₅–CH(OH)–CH₃ — द्वितीयक (2°)

(v) C₆H₅–CH₂–CH(OH)–CH₃ — द्वितीयक (2°)

(vi) C₆H₅–CH=CH–C(OH)(CH₃)₂ — तृतीयक (3°)

प्राथमिक: (i), (ii), (iii)  •  द्वितीयक: (iv), (v)  •  तृतीयक: (vi)
7.2 उपरोक्त उदाहरणों में से ऐलिलिक ऐल्कोहॉलों को पहचानिए।

ऐलिलिक ऐल्कोहॉल वे हैं जिनमें –OH समूह द्विआबंध से सटे sp³ कार्बन पर हो — (ii) H₂C=CH–CH₂OH तथा (vi) C₆H₅–CH=CH–C(OH)(CH₃)₂ दोनों ऐलिलिक हैं।

ऐलिलिक ऐल्कोहॉल: (ii) तथा (vi)
7.3 निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नामपद्धति से नाम दीजिए।

(i) 4-क्लोरो-3-एथिल-2-(1-मेथिल एथिल)ब्यूटेन-1-ऑल

(ii) 2,5-डाइमेथिलहेक्सेन-1,3-डाइऑल

(iii) 3-ब्रोमोसाइक्लोहेक्सेनॉल

(iv) हेक्स-1-ईन-3-ऑल

(v) 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूट-2-ईन-1-ऑल

7.4 दर्शाइए कि मेथेनैल पर उपयुक्त ग्रीन्यार अभिकर्मक से अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित ऐल्कोहॉल कैसे विरचित किए जाते हैं?

(i) आइसोब्यूटेनॉल: CH₃–CH(CH₃)–MgBr + HCHO → CH₃–CH(CH₃)–CH₂OH

(ii) साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल: साइक्लोहेक्सिल–MgBr + HCHO → साइक्लोहेक्सिल–CH₂OH

मेथेनैल के साथ ग्रीन्यार अभिकर्मक से सदैव प्राथमिक ऐल्कोहॉल प्राप्त होती है।
7.5 निम्नलिखित अभिक्रिया के उत्पादों की संरचना लिखिए।

(i) CH₃–CH=CH₂ + H₂O/H⁺ → CH₃–CH(OH)–CH₃ (प्रोपेन-2-ऑल)

(ii) साइक्लोहेक्सेनोन-एस्टर + NaBH₄ → कीटोन का OH में अपचयन, एस्टर अप्रभावित

(iii) CH₃CH₂CH(CH₃)CHO + NaBH₄ → CH₃CH₂CH(CH₃)CH₂OH

7.6 यदि निम्नलिखित ऐल्कोहॉल क्रमशः (क) HCl–ZnCl₂ (ख) HBr (ग) SOCl₂ से अभिक्रिया करें तो अपेक्षित उत्पादों की संरचनाएँ दीजिए।

(i) ब्यूटेन-1-ऑल → (क) 1-क्लोरोब्यूटेन (ख) 1-ब्रोमोब्यूटेन (ग) 1-क्लोरोब्यूटेन

(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल → (क) 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन (ख) 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन (ग) 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन

अध्याय अभ्यास (7.1 – 7.33) — विस्तृत हल

NCERT पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों के चरण-दर-चरण हल — प्रश्न पर क्लिक करके देखें।

अभ्यास प्रश्न (Exercise 7.1–7.33)
7.1 निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए।

(i) 2,3,4-ट्राइमेथिलपेन्टेन-2-ऑल

(ii) 5-एथिलहेप्टेन-2,4-डाइऑल

(iii) ब्यूटेन-2,3-डाइऑल

(iv) प्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल (ग्लिसरॉल)

(v) 2-मेथिलफ़ीनॉल

(vi) 4-मेथिलफ़ीनॉल

(vii) 3,4-डाइमेथिलफ़ीनॉल

(viii) 2,6-डाइमेथिलफ़ीनॉल

(ix) 1-मेथॉक्सी-2-मेथिलप्रोपेन

(x) एथॉक्सीबेन्ज़ीन

(xi) (हेप्टिलॉक्सी)बेन्ज़ीन

(xii) 2-एथॉक्सीब्यूटेन

7.2 निम्नलिखित IUPAC नाम वाले यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए।

(i) (CH₃)₂C(OH)CH₂CH₃

(ii) C₆H₅–CH₂–CH(OH)–CH₃

(iii) HOCH₂–CH₂–C(OH)(CH₃)–CH₂–CH(OH)(CH₃)–CH₃

(iv) बेन्ज़ीन वलय — C1 OH, C2 व C3 एथिल

(v) CH₃CH₂CH₂–O–C₂H₅

(vi) CH₃CH₂CH(CH₃)CH(OC₂H₅)CH₃

(vii) साइक्लोहेक्सिल–CH₂OH

(viii) (C₂H₅)₂C(OH)(साइक्लोहेक्सिल)

(ix) साइक्लोपेन्ट-3-ईन-1-ऑल

(x) ClCH₂–CH(C₂H₅)–CH₂–CH₂OH

7.3 (i) C₅H₁₂O सूत्र वाले ऐल्कोहॉलों के सभी समावयवियों की संरचना व IUPAC नाम लिखिए। (ii) वर्गीकृत कीजिए।
#संरचनाIUPAC नामवर्ग
1CH₃CH₂CH₂CH₂CH₂OHपेन्टेन-1-ऑल
2CH₃CH₂CH₂CH(OH)CH₃पेन्टेन-2-ऑल
3CH₃CH₂CH(OH)CH₂CH₃पेन्टेन-3-ऑल
4(CH₃)₂CHCH₂CH₂OH3-मेथिलब्यूटेन-1-ऑल
5(CH₃)₂CHCH(OH)CH₃3-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल
6(CH₃)₂C(OH)CH₂CH₃2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल
7CH₃CH₂CH(CH₃)CH₂OH2-मेथिलब्यूटेन-1-ऑल
8(CH₃)₃CCH₂OH2,2-डाइमेथिलप्रोपेन-1-ऑल
7.4 समझाइए कि प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक क्यों होता है?

प्रोपेनॉल में –OH समूह के कारण अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंध बनता है, जिससे अणु परस्पर दृढ़ता से जुड़े रहते हैं — उबालने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा आवश्यक होती है। ब्यूटेन में केवल दुर्बल वांडरवाल्स बल कार्य करते हैं।

7.33 3-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल को HBr से अभिकृत कराने पर पुनर्विन्यासित उत्पाद 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया की क्रियाविधि दीजिए।

प्रोटॉनन → जल निष्कासन → द्वितीयक कार्बोकैटायन → 1,2-हाइड्राइड विचलन से तृतीयक कार्बोकैटायन → Br⁻ आक्रमण से 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन

🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर)

NEET/AIPMT में इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

NEET 2024
NEET 2024 · Q1 निम्नलिखित में से कौन-सा ऐल्कोहॉल ल्यूकास अभिकर्मक के साथ तात्क्षणिक अभिक्रिया करता है?

ल्यूकास परीक्षण SN1 क्रियाविधि पर — तृतीयक ऐल्कोहॉल सबसे स्थायी कार्बोकैटायन बनाता है, अतः तुरंत अभिक्रिया करता है।

  • (a) एथेनॉल
  • (b) प्रोपेन-2-ऑल
  • (c) 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल
  • (d) प्रोपेन-1-ऑल
उत्तर: (c) 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल (तृतीयक)
NEET 2023
NEET 2023 · Q1 निम्नलिखित में से कौन-सा अम्लीय परिस्थितियों में सबसे सुगमता से निर्जलित होगा?

निर्जलन-सुगमता क्रम: तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक (कार्बोकैटायन स्थायित्व के अनुसार)।

  • (a) एथेनॉल
  • (b) ब्यूटेन-1-ऑल
  • (c) ब्यूटेन-2-ऑल
  • (d) 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऑल
उत्तर: (d)
NEET 2022
NEET 2022 · Q1 कथन I: o-, m-, p-नाइट्रोफ़ीनॉल की अम्लीयता समान है। कथन II: –NO₂ समूह का प्रभाव स्थिति-निरपेक्ष है।

ऑर्थो/पैरा –NO₂ अनुनाद द्वारा ऋणावेश को स्थायी करता है; मेटा –NO₂ ऐसा नहीं कर सकता — अम्लीयता भिन्न है।

  • (a) दोनों सत्य
  • (b) कथन I असत्य, II असत्य
  • (c) I सत्य, II असत्य
  • (d) I असत्य, II सत्य
उत्तर: (b)
NEET 2020
NEET 2020 · Q1 ऐनिसोल का HI के साथ विदलन करने पर क्या प्राप्त होता है?

ऐरिल–O आबंध सुरक्षित, ऐल्किल–O टूटता है — फ़ीनॉल + मेथिल आयोडाइड।

  • (a) C₆H₅I + CH₃OH
  • (b) C₆H₅OH + CH₃I
  • (c) C₆H₅OH + CH₃OH
  • (d) C₆H₆ + HCOOCH₃
उत्तर: (b)
NEET 2017
NEET 2017 · Q1 सर्वाधिक अम्लीय यौगिक:
  • (a) एथेनॉल
  • (b) p-क्रीसॉल
  • (c) फ़ीनॉल
  • (d) p-नाइट्रोफ़ीनॉल
उत्तर: (d) p-नाइट्रोफ़ीनॉल — –NO₂ का प्रबल −I/−M प्रभाव अम्लता बढ़ाता है।
AIPMT 2015
AIPMT 2015 · Q1 तनु NaOH की उपस्थिति में फ़ीनॉल की CHCl₃ से अभिक्रिया कौन-सा समूह प्रविष्ट कराती है?
  • (a) −CHO
  • (b) −COOH
  • (c) −CH₃
  • (d) −OCH₃
उत्तर: (a) −CHO — राइमर-टीमन अभिक्रिया से सैलिसैल्डिहाइड बनता है।
AIPMT 2014
AIPMT 2014 · Q1 ऐनिसोल उत्पन्न करने वाले अभिकारक:
  • (a) C₆H₅ONa + C₂H₅Br
  • (b) C₆H₅ONa + CH₃Br
  • (c) C₆H₅Br + CH₃ONa
  • (d) C₆H₅CH₂Br + NaOH
उत्तर: (b) — विलियम्सन संश्लेषण, हैलाइड प्राथमिक/मेथिल होना चाहिए।

⚡ NEET हेतु विशेष तथ्य-सूची — त्वरित रिवीज़न

परीक्षा से ठीक पहले दोहराने योग्य तथ्य, संख्याएँ व ट्रिक्स।

परीक्षण व पहचान
  • ल्यूकास परीक्षण गति क्रम: 3° (तुरंत) > 2° (5-10 मिनट) > 1° (गरम करने पर)
  • आयोडोफॉर्म परीक्षण: CH₃CO−R अथवा CH₃CH(OH)−R वाले यौगिक पीला CHI₃ अवक्षेप देते हैं — एथेनॉल भी धनात्मक (अपवाद)।
  • फ्थैलीन डाई परीक्षण: फ़ीनॉल + फ्थैलिक एनहाइड्राइड + H₂SO₄ → फीनॉल्फ्थेलीन (क्षार में गुलाबी)
  • FeCl₃ परीक्षण: फ़ीनॉल → बैंगनी/नीला संकुल रंग (ऐल्कोहॉल नहीं देते)
अम्लीयता — pKa मान
  • पिक्रिक अम्ल (2,4,6-ट्राइनाइट्रोफ़ीनॉल): pKa ≈ 0.4
  • कार्बोक्सिलिक अम्ल (ऐसीटिक): pKa ≈ 4.76
  • कार्बोनिक अम्ल: pKa ≈ 6.3 — फ़ीनॉल NaHCO₃ में नहीं घुलता
  • फ़ीनॉल: pKa ≈ 10; जल: pKa ≈ 15.7; ऐल्कोहॉल: pKa ≈ 16
नामांकित अभिक्रियाएँ
  • रीमर-टीमन: फ़ीनॉल + CHCl₃ + NaOH → सैलिसैल्डिहाइड
  • कोल्बे: सोडियम फ़ीनॉक्साइड + CO₂ → सैलिसिलिक अम्ल
  • विलियम्सन: सोडियम ऐल्कॉक्साइड + प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड → ईथर
  • क्यूमीन प्रक्रम: क्यूमीन → क्यूमीन हाइड्रोपेरॉक्साइड → फ़ीनॉल + ऐसीटोन
तैयारी हेतु सुझाव: इन प्रश्नों को बिना उत्तर देखे हल करें, गलती होने पर संबंधित अनुभाग में वापस जाएँ।

अन्य NEET संबंधित तथ्य

तुलनात्मक
  • PCC प्राथमिक ऐल्कोहॉल → ऐल्डिहाइड; KMnO₄ → कार्बोक्सिलिक अम्ल (प्रबल ऑक्सीकारक)।
  • तृतीयक ऐल्कोहॉल सामान्य ऑक्सीकारकों से ऑक्सीकृत नहीं होते (α-H न होने के कारण)।
ट्रैप
  • फ़ीनॉल नीले लिटमस को लाल नहीं करता (pKa ≈ 10, बहुत दुर्बल अम्ल)।
  • विलियम्सन संश्लेषण में हैलाइड घटक सदैव प्राथमिक होना चाहिए, अन्यथा विलोपन होकर ऐल्कीन बनेगी।
तथ्य
  • o-नाइट्रोफ़ीनॉल भाप-वाष्पशील (आंतरआण्विक H-आबंध); p-नहीं (अंतराआण्विक)।
  • ईथरों में C–O आबंध विदलन HI > HBr > HCl क्रम में होता है।
  • ऐनिसोल में –OCH₃ समूह ऑर्थो-पैरा निर्देशक व सक्रियकारी होता है।
रणनीति
  • अंतिम रिवीज़न में (1) ल्यूकास/आयोडोफॉर्म/FeCl₃ परीक्षण, (2) फ़ीनॉल व ऐल्कोहॉल की अम्लीयता तुलना, (3) ईथर विदलन व विलियम्सन संश्लेषण की सीमाएँ — इन तीन विषयों पर विशेष ध्यान दें।

ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर — NCERT कक्षा 12, अध्याय 7 · संपूर्ण अध्ययन नोट्स, सूत्र, आरेख, सभी पाठ्यनिहित तथा अभ्यास प्रश्नों के हल, तथा NEET में पूछे गए सभी प्रश्न सहित।

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