कार्बनिक रसायन: कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 8)
रसायन विज्ञान • कक्षा-11 • अध्याय 8

कार्बनिक रसायन: कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें

कार्बन की चतुःसंयोजकता व संकरण से लेकर IUPAC नामपद्धति, समावयवता, क्रियाविधि की मूलभूत संकल्पनाओं (इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रभाव), शोधन तकनीकों तथा गुणात्मक-मात्रात्मक विश्लेषण तक — संपूर्ण अध्याय की रंगीन तालिकाएँ, तथ्य तथा सभी 40 अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।

sp³, sp², sp — संकरण
IUPAC — नामपद्धति
Rf — वर्णलेखन
★ NEET फोकस तथ्य

1 सामान्य प्रस्तावना

पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने के लिए कार्बनिक यौगिक अनिवार्य हैं। हमारे शरीर की आनुवंशिक सूचना रखने वाला डी.एन.ए. (DNA), माँसपेशी व त्वचा बनाने वाला प्रोटीन — ये सभी जटिल कार्बनिक अणु हैं। इसके अतिरिक्त कपड़े, ईंधन, बहुलक (प्लास्टिक), रंजक तथा दवाओं जैसे अनगिनत उपयोगी पदार्थ भी कार्बनिक यौगिकों से ही बनते हैं।

कार्बनिक रसायन का विज्ञान लगभग 200 वर्ष पुराना है। सन् 1780 के आसपास यह धारणा प्रचलित थी कि पौधों व जंतुओं से प्राप्त "कार्बनिक" यौगिक केवल किसी रहस्यमयी "जैवशक्ति" (Vital force) से ही बन सकते हैं, और इन्हें प्रयोगशाला में अकार्बनिक स्रोतों से संश्लेषित नहीं किया जा सकता। सन् 1828 में जर्मन वैज्ञानिक फ्रेडरिक वोलर ने अकार्बनिक अमोनियम सायनेट को गरम करके कार्बनिक यौगिक यूरिया का संश्लेषण करके इस धारणा को गलत सिद्ध कर दिया।

वोलर का यूरिया संश्लेषण NH₄CNO (अमोनियम सायनेट) —(गरम करने पर)→ NH₂CONH₂ (यूरिया)
इसके बाद कोल्बे (1845) ने ऐसिटिक अम्ल तथा बर्थलोट (1856) ने मैथेन के संश्लेषण से यह और पुख्ता कर दिया कि कार्बनिक यौगिकों को प्रयोगशाला में अकार्बनिक स्रोतों से बनाया जा सकता है।
त्वरित तथ्य
  • वोलर ने 1828 में अमोनियम सायनेट से यूरिया बनाकर "जैवशक्ति सिद्धांत" को गलत सिद्ध किया।
  • कार्बनिक रसायन कार्बन के सहसंयोजक यौगिकों के अध्ययन का विज्ञान है।
  • कार्बन का सबसे बड़ा गुण है श्रृंखलन (Catenation) — स्वयं अपने ही परमाणुओं से लंबी शृंखलाएँ व वलय बनाने की क्षमता।

2 कार्बन की चतुःसंयोजकता : कार्बनिक यौगिकों की आकृतियाँ

2.1 संकरण के तीन प्रकार

मेथेन (CH₄), एथीन (C₂H₄) तथा एथाइन (C₂H₂) जैसे अणुओं की आकृतियों को कार्बन परमाणुओं द्वारा निर्मित क्रमशः sp³, sp² तथा sp संकर कक्षकों की सहायता से समझाया जा सकता है। संकरण किसी आबंध की लंबाई तथा आबंध-एंथैल्पी (आबंध-सामर्थ्य) को प्रभावित करता है — sp संकरित कक्षक में s गुण अधिक होने के कारण यह नाभिक के अधिक समीप होता है, जिससे इससे बने आबंध की एंथैल्पी sp² तथा sp³ की अपेक्षा अधिक होती है।

संकरणआकृतिबंध कोणउदाहरणs-लक्षण
sp³चतुष्फलकीय109.5°CH₄25%
sp²त्रिकोणीय समतल120°C₂H₄33.3%
spरैखीय180°C₂H₂50%
संकरित कक्षक की विद्युत्-ऋणात्मकता उसके s-लक्षण के साथ बढ़ती है — sp संकरित कार्बन (50% s-लक्षण) sp² तथा sp³ संकरित कार्बन की अपेक्षा अधिक विद्युत्-ऋणात्मक होता है।

2.2 π आबंधों के अभिलक्षण

π (पाई) आबंध के निर्माण में दो निकटवर्ती परमाणुओं के असंकरित p-कक्षकों का समांतर (पार्श्व) अतिव्यापन आवश्यक होता है। इस कारण CH₂=CH₂ अणु में सभी परमाणु एक ही तल में होने चाहिए। π आबंध का इलेक्ट्रॉन आवेशाभ्र आबंधित परमाणुओं के तल के ऊपर व नीचे स्थित होता है, और यह π आबंध कार्बन-कार्बन द्विआबंध के चारों ओर घूर्णन को प्रतिबंधित (Restricted rotation) कर देता है।

त्वरित तथ्य
  • sp हाइब्रिड कार्बन का s-लक्षण सर्वाधिक (50%) होता है — सबसे अधिक विद्युत्-ऋणात्मक।
  • π आबंध के कारण द्विआबंध के चारों ओर मुक्त घूर्णन नहीं हो पाता (Restricted rotation)।
  • σ आबंध अक्षीय अतिव्यापन से तथा π आबंध पार्श्व अतिव्यापन से बनता है।
  • एकल आबंध = 1σ; द्विआबंध = 1σ + 1π; त्रिआबंध = 1σ + 2π।

3 कार्बनिक यौगिक का संरचनात्मक निरूपण

3.1 तीन प्रकार के संरचनात्मक सूत्र

सूत्र प्रकारविशेषताउदाहरण (एथेनॉल)
पूर्ण संरचनात्मक सूत्रसभी आबंध पूर्ण रूप से दर्शाए जाते हैंH-C(H)(H)-C(H)(H)-O-H
संघनित सूत्रसमान समूहों को कोष्ठक में पादांक द्वारा संक्षिप्त किया जाता हैCH₃CH₂OH
आबंध-रेखा सूत्रकार्बन व हाइड्रोजन नहीं लिखे जाते; केवल जिग-जैग रेखाएँज़िग-ज़ैग रेखा, अंत में -OH

3.2 कार्बनिक यौगिकों का त्रिविमी (3D) सूत्र

कागज़ पर त्रिविमी संरचना दर्शाने के लिए ठोस रेखा (सामान्य आबंध, कागज़ के तल में) तथा वेज-डैश सूत्र का प्रयोग होता है। ठोस वेज (▲) उस आबंध को दर्शाता है, जो कागज़ के तल से दर्शक की ओर प्रक्षेपी है, जबकि डैश वेज (छोटी-छोटी रेखाएँ) दर्शक से दूर जाने वाले आबंध को दर्शाता है।

C H H H (दर्शक की ओर) H (दर्शक से दूर)
चित्र 3.1 — CH₄ का वेज तथा डैश सूत्र प्रदर्शन

3.3 आणविक मॉडल

मॉडल प्रकारविशेषता
फ्रेमवर्क मॉडलकेवल आबंधों को दर्शाता है
बॉल तथा स्टिक मॉडलपरमाणु (गेंद) व आबंध (छड़ी)—दोनों दर्शाता है
स्पेस-फिलिंग मॉडलप्रत्येक परमाणु का आपेक्षिक आकार दर्शाता है
त्वरित तथ्य
  • बॉल-स्टिक मॉडल में असंतृप्त अणुओं (C=C) के लिए स्प्रिंग युक्त छड़ी का प्रयोग होता है।
  • स्पेस-फिलिंग मॉडल में परमाणु द्वारा घेरे गए आयतन को दर्शाया जाता है।
  • ठोस वेज दर्शक की ओर, तथा डैश दर्शक से दूर जाने वाले आबंध को दर्शाता है।

4 कार्बनिक यौगिकों का वर्गीकरण

I. अचक्रीय अथवा विवृत शृंखला यौगिक (ऐलिफेटिक)

उदाहरण CH₃CH₃ (एथेन) — सीधी शृंखला
CH₃-CH(CH₃)-CH₃ (आइसोब्यूटेन) — शाखित शृंखला
CH₃-CHO (ऐसीटैल्डिहाइड), CH₃COOH (ऐसीटिक अम्ल)

II. चक्रीय अथवा बंद शृंखला यौगिक

उपवर्गविवरणउदाहरण
ऐलिसाइक्लिकसमचक्रीय वलय, ऐलिफेटिक-सदृश गुणसाइक्लोप्रोपेन
विषमचक्रीयवलय में कार्बन के अतिरिक्त अन्य परमाणुटेट्राहाइड्रोप्यूरैन
बेन्ज़िनॉइड ऐरोमैटिकबेन्ज़ीन तथा उसके संबंधित यौगिकबेन्ज़ीन, ऐनीलीन
अबेन्ज़िनॉइड ऐरोमैटिकबेन्ज़ीन-सदृश गुण, परंतु 6-सदस्यीय वलय नहींट्रोपोन
विषमचक्रीय ऐरोमैटिकवलय में विषम परमाणुफ्यूरैन, थायोफीन

4.1 क्रियात्मक समूह (Functional Group)

किसी कार्बनिक यौगिक की कार्बन शृंखला से जुड़ा वह परमाणु या परमाणुओं का समूह, जो कार्बनिक यौगिक के अभिलाक्षणिक रासायनिक गुणों के लिए उत्तरदायी होता है, क्रियात्मक समूह कहलाता है। उदाहरणार्थ — हाइड्रॉक्सिल समूह (−OH), ऐल्डिहाइड समूह (−CHO), कार्बोक्सिलिक अम्ल-समूह (−COOH)।

त्वरित तथ्य
  • ऐलिफेटिक (अचक्रीय) यौगिक सीधी या शाखित शृंखला वाले होते हैं।
  • ऐलिसाइक्लिक यौगिक ऐलिफेटिक-सदृश गुण दर्शाते हैं, भले ही वे चक्रीय हों।
  • सजातीय श्रेणी के क्रमागत सदस्यों में CH₂ इकाई का अंतर होता है।

5 कार्बनिक यौगिकों की नामपद्धति

कार्बनिक रसायन लाखों यौगिकों से संबंधित है। इनकी स्पष्ट पहचान के लिए नामांकन की एक सुव्यवस्थित विधि विकसित की गई है, जिसे IUPAC (International Union of Pure and Applied Chemistry) विधि कहते हैं।

5.1 IUPAC नाम की संरचना

सामान्य ढाँचा पूर्वलग्न (शाखा/क्रियात्मक समूह) + जनक शृंखला + अनुलग्न (क्रियात्मक समूह प्रत्यय)

5.2 सीधी शृंखला ऐल्केनों के IUPAC नाम

नामअणुसूत्रनामअणुसूत्र
मेथेनCH₄हेप्टेनC₇H₁₆
एथेनC₂H₆ऑक्टेनC₈H₁₈
प्रोपेनC₃H₈नोनेनC₉H₂₀
ब्यूटेनC₄H₁₀डेकेनC₁₀H₂₂
पेंटेनC₅H₁₂आइकोसेनC₂₀H₄₂
हेक्सेनC₆H₁₄ट्राइकोन्टेनC₃₀H₆₂

5.3 क्रियात्मक समूह प्राथमिकता क्रम

−COOH > −SO₃H > −COOR > −COCl > −CONH₂ > −CN > −HC=O > >C=O > −OH > −NH₂ > >C=C< > −C≡C−

सबसे उच्च प्राथमिकता वाले समूह को अनुलग्न (प्रत्यय) रूप में तथा शेष समूहों को पूर्वलग्न (उपसर्ग) के रूप में नाम में शामिल किया जाता है।

5.4 बेन्ज़ीन व्युत्पन्नों की नामपद्धति

IUPAC पद्धति में बेन्ज़ीन व्युत्पन्न का नाम प्रतिस्थापी समूह के नाम को पूर्वलग्न रूप में "बेन्ज़ीन" शब्द से पूर्व लिखकर बनाया जाता है। द्विप्रतिस्थापी बेन्ज़ीन में स्थितियाँ 1,2− (ऑर्थो), 1,3− (मेटा), 1,4− (पैरा) द्वारा दर्शाई जाती हैं।

त्वरित तथ्य
  • मूल हाइड्रोकार्बन जनक शृंखला के आधार पर अनुलग्न "−ऐन" (alkane) दिया जाता है।
  • 1,2− = ऑर्थो (o); 1,3− = मेटा (m); 1,4− = पैरा (p)।
  • प्रतिस्थापियों के नाम पूर्वलग्न में सदैव अंग्रेज़ी वर्णमाला क्रम में लिखे जाते हैं।
  • बेन्ज़ीन का प्रतिस्थापी रूप में नाम "फेनिल" (Ph) है।

6 समावयवता (Isomerism)

दो या दो से अधिक यौगिक, जिनके अणुसूत्र समान होते हैं किंतु गुण भिन्न होते हैं, "समावयव" कहलाते हैं और इस परिघटना को "समावयवता" कहते हैं।

वर्गउपप्रकारविवरणउदाहरण
संरचनात्मक समावयवताशृंखला समावयवताकार्बन ढाँचे में भिन्नताn-पेंटेन, आइसोपेन्टेन, नीओपेन्टेन
स्थिति समावयवताप्रतिस्थापी की स्थिति में भिन्नताप्रोपेन-1-ऑल, प्रोपेन-2-ऑल
क्रियात्मक समूह समावयवताभिन्न क्रियात्मक समूह, समान अणुसूत्रप्रोपेनोन, प्रोपेनैल
मध्यावयवताक्रियात्मक समूह से जुड़ी भिन्न ऐल्किल शृंखलाएँमेथॉक्सीप्रोपेन, एथॉक्सीएथेन
त्रिविम समावयवताज्यामितीय समावयवताद्विआबंध के इर्द-गिर्द प्रतिबंधित घूर्णनसिस/ट्रांस-2-ब्यूटीन
प्रकाशीय समावयवतादर्पण प्रतिबिंब जो अध्यारोपित न हो सकेंलैक्टिक अम्ल के D व L रूप
संरचनात्मक समावयवों में परमाणुओं के जुड़ाव का क्रम भिन्न होता है; त्रिविम समावयवों में जुड़ाव क्रम समान किंतु त्रिविम व्यवस्था भिन्न होती है।

7 कार्बनिक अभिक्रियाओं की क्रियाविधि में मूलभूत संकल्पनाएँ

7.1 सहसंयोजक आबंध का विदलन

विदलन प्रकारप्रक्रियाउत्पन्न स्पीशीज़
विषमअपघटनी (Heterolytic)दोनों इलेक्ट्रॉन एक ही परमाणु की ओरकार्बधनायन/कार्बऋणायन
समापघटनी (Homolytic)प्रत्येक परमाणु को एक-एक इलेक्ट्रॉनमुक्त मूलक
विषमअपघटनी विदलन H₃C−Br → H₃C⁺ + Br⁻
समापघटनी विदलन R−X →(ताप/प्रकाश)→ R• + X•
कार्बधनायनों की स्थायित्व क्रम: CH₃⁺ < CH₃CH₂⁺ < (CH₃)₂CH⁺ < (CH₃)₃C⁺ — तृतीयक सर्वाधिक स्थायी।
मुक्त मूलकों की स्थायित्व क्रम: •CH₃ < •CH₂CH₃ < •CH(CH₃)₂ < •C(CH₃)₃

7.2 नाभिकरागी व इलेक्ट्रॉनरागी

पदअर्थउदाहरण
नाभिकरागी (Nucleophile)इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान करने वालाOH⁻, CN⁻, NH₃
इलेक्ट्रॉनरागी (Electrophile)इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वालाH⁺, NO₂⁺, कार्बधनायन

7.3 प्रेरणिक प्रभाव (Inductive Effect)

भिन्न विद्युत्-ऋणात्मकता वाले दो परमाणुओं के मध्य सहसंयोजक आबंध में इलेक्ट्रॉन असमान रूप से सहभाजित होते हैं। इलेक्ट्रॉन-घनत्व अधिक विद्युत्-ऋणात्मकता वाले परमाणु की ओर अधिक होता है, जिससे आबंध ध्रुवीय हो जाता है।

−I (इलेक्ट्रॉन-आकर्षी) व +I (इलेक्ट्रॉनदाता) समूह −NO₂, −CN, −COOH, हैलोजन → −I प्रभाव
−CH₃, −C₂H₅ → +I प्रभाव

7.4 अनुनाद-प्रभाव (+R व −R)

प्रभावविवरणसमूह उदाहरण
+R (इलेक्ट्रॉनदाता)इलेक्ट्रॉन संयुग्मित अणु से दूर विस्थापित−OH, −OR, −NH₂, हैलोजन
−R (इलेक्ट्रॉन-आकर्षी)इलेक्ट्रॉन बंधित परमाणु की ओर विस्थापित−COOH, −CHO, >C=O, −NO₂

7.5 अतिसंयुग्मन (Hyperconjugation)

अतिसंयुग्मन एक सामान्य स्थायीकरण अन्योन्य क्रिया है, जिसमें किसी असंतृप्त निकाय से सीधे बंधित ऐल्किल समूह के C−H आबंध के σ-इलेक्ट्रॉनों का असंतृप्त निकाय के साथ आंशिक विस्थापन होता है। जितने अधिक C−H आबंध, उतनी अधिक अतिसंयुग्मन संरचनाएँ।

त्वरित तथ्य
  • प्रेरणिक प्रभाव σ-आबंधों से होकर संचरित होता है; अनुनाद प्रभाव π-आबंधों व एकाकी युग्मों से।
  • अतिसंयुग्मन को "आबंधरहित अनुनाद" (No-bond resonance) भी कहते हैं।
  • तृतीयक कार्बधनायन सबसे स्थायी — नौ β-हाइड्रोजन के कारण अधिकतम अतिसंयुग्मन।

8 कार्बनिक यौगिकों के शोधन की विधियाँ

विधिसिद्धांतउपयोग
ऊर्ध्वपातनठोस सीधे वाष्प में बदल जाता हैऊर्ध्वपातनीय यौगिक को अशुद्धियों से पृथक् करना
क्रिस्टलनविलेयता के अंतर पर आधारितठोस कार्बनिक पदार्थों का शोधन
आसवनभिन्न क्वथनांक वाले द्रववाष्पशील व अवाष्पशील अशुद्धियों को पृथक् करना
प्रभाजी आसवननिकट क्वथनांक वाले द्रवपेट्रोलियम शोधन
निम्न दाब आसवनदाब घटाकर क्वथनांक कमउच्च क्वथनांक या ऊष्मा-असंवेदी द्रव
भाप आसवनभाप-वाष्पशील, जल-अमिश्रणीय द्रवऐनिलीन जैसे यौगिकों का शोधन
विभेदी निष्कर्षणकार्बनिक विलायक द्वारा निष्कर्षणकार्बनिक विलायक में अधिक विलेय यौगिक
वर्णलेखनस्थिर प्रावस्था पर विभेदी अधिशोषण/वितरणमिश्रण के अवयवों को पृथक् करना
मन्दन-गुणक (Rf) Rf = (आधार-रेखा से यौगिक के बढ़ने की दूरी) / (आधार-रेखा से विलायक अग्र की दूरी)
त्वरित तथ्य
  • प्रभाजी आसवन का प्रमुख औद्योगिक उपयोग पेट्रोलियम शोधन है।
  • TLC में प्लेट पर सिलिका जेल या ऐलुमिना की लगभग 0.2mm मोटी परत फैलाई जाती है।
  • Rf मान का उपयोग यौगिकों के सापेक्ष अधिशोषण को दर्शाने के लिए होता है।

9 कार्बनिक यौगिकों का गुणात्मक विश्लेषण

9.1 कार्बन तथा हाइड्रोजन की पहचान

कॉपर (II) ऑक्साइड परीक्षण C + 2CuO →(Δ)→ 2Cu + CO₂ (चूने के पानी को दूधिया करता है)
2H + CuO →(Δ)→ Cu + H₂O (निर्जल कॉपर सल्फेट को नीला करता है)

9.2 लैसें-परीक्षण (Lassaigne's Test)

नाइट्रोजन, हैलोजन तथा फॉस्फोरस की पहचान "लैसें-परीक्षण" द्वारा की जाती है। यौगिक को सोडियम धातु के साथ संगलित करने पर ये तत्व सहसंयोजी रूप से आयनिक रूप में परिवर्तित हो जाते हैं ("सोडियम संगलन निष्कर्ष")।

तत्वपरीक्षण विधिसकारात्मक परिणाम
नाइट्रोजनFeSO₄ के साथ उबालकर H₂SO₄ से अम्लीकृतप्रशियन ब्लू रंग
सल्फरऐसीटिक अम्ल से अम्लीकृत कर लैड ऐसीटेटकाला अवक्षेप
सल्फरसोडियम नाइट्रोप्रुसाइडबैंगनी रंग
N व S दोनोंFeSO₄ सेरक्त-लाल रंग
हैलोजनHNO₃ से अम्लीकृत AgNO₃AgCl (श्वेत), AgBr (पीला-विलेय), AgI (पीला-अविलेय)
फॉस्फोरसअमोनियम मॉलिब्डेटपीला अवक्षेप
यदि यौगिक में नाइट्रोजन अथवा सल्फर उपस्थित हो, तो हैलोजन परीक्षण से पूर्व सोडियम संगलन निष्कर्ष को नाइट्रिक अम्ल के साथ उबालकर सायनाइड व सल्फाइड आयनों को नष्ट करना आवश्यक है।

10 कार्बनिक यौगिकों का मात्रात्मक विश्लेषण

10.1 कार्बन तथा हाइड्रोजन (लीबिग विधि)

सूत्र कार्बन का % = (12 × m₂ × 100) / (44 × m)
हाइड्रोजन का % = (2 × m₁ × 100) / (18 × m)
(m = यौगिक का द्रव्यमान, m₁ = प्राप्त जल, m₂ = प्राप्त CO₂)

10.2 नाइट्रोजन का आकलन

विधिसिद्धांत
ड्यूमा विधिCuO के साथ गरम कर N₂ मुक्त, आयतन मापक %
कैल्डॉल विधिसांद्र H₂SO₄ से (NH₄)₂SO₄ बनाकर NaOH से NH₃ मुक्त, अनुमापन
कैल्डॉल विधि सूत्र नाइट्रोजन % = 1.4 × M × (V − V₁/2) / m
वलयीय N-यौगिकों (जैसे पिरिडीन) में नाइट्रोजन कैल्डॉल विधि से आकलित नहीं की जा सकती।

10.3 हैलोजन, सल्फर व फॉस्फोरस (कैरिअस विधि)

हैलोजन सूत्र हैलोजन % = (X का परमाण्विक द्रव्यमान × m₁ × 100) / (AgX का आण्विक द्रव्यमान × m)
सल्फर सूत्र (BaSO₄) सल्फर % = (32 × m₁ × 100) / (233 × m)
फॉस्फोरस सूत्र (Mg₂P₂O₇) फॉस्फोरस % = (62 × m₁ × 100) / (222 × m)
त्वरित तथ्य
  • कार्बन-हाइड्रोजन आकलन: लीबिग विधि (CuO के साथ ऑक्सीकरण)।
  • नाइट्रोजन आकलन: ड्यूमा विधि (आयतनमिति) व कैल्डॉल विधि (अनुमापन)।
  • हैलोजन, सल्फर, फॉस्फोरस — तीनों का आकलन कैरिअस विधि द्वारा।

संपूर्ण अध्याय की एक-पंक्ति तथ्य सूची

परीक्षा-उपयोगी संकलन
  • कार्बन की चतुःसंयोजकता तथा श्रृंखलन गुण ही कार्बनिक यौगिकों की विशाल संख्या का कारण है।
  • sp³, sp², sp संकरण क्रमशः चतुष्फलकीय, त्रिकोणीय समतल तथा रैखीय आकृति देते हैं।
  • बॉल-स्टिक, फ्रेमवर्क तथा स्पेस-फिलिंग — तीन प्रकार के आणविक मॉडल।
  • ऐलिफेटिक = अचक्रीय; ऐलिसाइक्लिक = चक्रीय पर ऐलिफेटिक-सदृश गुण; ऐरोमैटिक = बेन्ज़ीन-सदृश।
  • संरचनात्मक समावयवता के 4 प्रकार, त्रिविम समावयवता के 2 प्रकार।
  • विषमअपघटनी विदलन → कार्बधनायन/कार्बऋणायन; समापघटनी विदलन → मुक्त मूलक।
  • कार्बधनायन स्थायित्व: 3° > 2° > 1° > मेथिल।
  • प्रेरणिक प्रभाव σ-आबंधों से; अनुनाद प्रभाव π-निकाय व एकाकी युग्मों से।
  • अतिसंयुग्मन एक स्थायी प्रभाव है; इलेक्ट्रोमेरी प्रभाव अस्थायी।
  • शोधन विधियाँ: ऊर्ध्वपातन, क्रिस्टलन, आसवन, विभेदी निष्कर्षण, वर्णलेखन।
  • लैसें परीक्षण से N, S, हैलोजन तथा P की गुणात्मक पहचान होती है।
  • C, H आकलन: लीबिग विधि; N आकलन: ड्यूमा/कैल्डॉल विधि; हैलोजन/S/P आकलन: कैरिअस विधि।

सूत्र सारांश तालिका

संकल्पनासूत्र
Rf (वर्णलेखन)दूरी(यौगिक) / दूरी(विलायक)
कार्बन % (लीबिग)12×m(CO₂)×100 / (44×m)
हाइड्रोजन % (लीबिग)2×m(H₂O)×100 / (18×m)
नाइट्रोजन % (कैल्डॉल)1.4 × M × (V − V₁/2) / m
नाइट्रोजन % (ड्यूमा)28 × V × 100 / (22400 × m)
हैलोजन % (कैरिअस)M(X) × m(AgX) × 100 / (M(AgX) × m)
सल्फर % (कैरिअस)32 × m(BaSO₄) × 100 / (233 × m)
फॉस्फोरस % (कैरिअस)62 × m(Mg₂P₂O₇) × 100 / (222 × m)
IHD / असंतृप्तता कोटि(2n+2−m)/2 (CₙHₘ के लिए)

अध्याय अभ्यास — प्रश्न 8.1 से 8.40 तक (विस्तृत हल सहित)

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके विस्तृत हल देखें। सभी उत्तरों में उपरोक्त 'सूत्र-सूची' व 'तथ्य-सूची' का उपयोग किया गया है।

संकरण, σ व π आबंध
8.1 CH₂=C=O, CH₃CH=CH₂, (CH₃)₂CO, CH₂=CHCN, C₆H₆ में प्रत्येक कार्बन की संकरण अवस्था बताइए।
CH₂=C=O: टर्मिनल =CH₂ कार्बन sp²; मध्य कार्बन sp
CH₃CH=CH₂: C1 sp³; C2 sp²; C3 sp²
(CH₃)₂CO: मेथिल कार्बन sp³; कार्बोनिल कार्बन sp²
CH₂=CHCN: =CH₂ व =CH− sp²; C≡N का कार्बन sp
C₆H₆: सभी छह कार्बन sp²
उत्तर: प्रत्येक यौगिक के हर कार्बन की संकरण अवस्था ऊपर दी गई है।
8.2 C₆H₆, C₆H₁₂, CH₂Cl₂, CH₂=C=CH₂, CH₃NO₂, HCONHCH₃ में σ तथा π आबंध दर्शाइए।
C₆H₆ (बेन्ज़ीन): 12σ, 3π
C₆H₁₂ (साइक्लोहेक्सेन): 18σ, 0π
CH₂Cl₂: 4σ, 0π
CH₂=C=CH₂ (ऐलीन): 6σ, 2π
CH₃NO₂: 6σ, 1π
HCONHCH₃: 8σ, 1π
उत्तर: क्रमशः σ-π संख्याएँ ऊपर दी गई हैं।
IUPAC नामकरण
8.4 निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए (छह संरचनाएँ दी गई हैं)।
(क) प्रोपिलबेन्ज़ीन (1-फेनिलप्रोपेन)
(ख) 3-मेथिलहेक्सेननाइट्राइल
(ग) 2,4-डाइमेथिलहेक्सेन
(घ) 4-ब्रोमो-3-क्लोरोहेप्टेन
(ङ) 3-क्लोरोप्रोपेनैल
(च) 2,2-डाइक्लोरोएथेन-1-ऑल
उत्तर: ऊपर IUPAC नाम दिए गए हैं।
कार्बधनायन स्थायित्व
8.38 निम्नलिखित कार्बधनायनों में से कौन सा सबसे अधिक स्थायी है? (CH₃)₃C−CH₂⁺, (CH₃)₃C⁺, CH₃CH⁺CH₂CH₃, CH₃⁺
(CH₃)₃C⁺ — तृतीयक कार्बधनायन, अधिकतम अतिसंयुग्मन (9 β-H) व +I प्रभाव के कारण सर्वाधिक स्थायी।
द्वितीयक (CH₃CH⁺CH₂CH₃) तृतीयक से कम, प्राथमिक से अधिक स्थायी।
(CH₃)₃C−CH₂⁺ एक प्राथमिक कार्बधनायन है।
उत्तर: (CH₃)₃C⁺ (तृतीयक) सबसे अधिक स्थायी है।
संख्यात्मक गणना
8.32 0.20g यौगिक (69% C, 4.8% H, शेष O) के दहन से उत्पन्न CO₂ व जल की मात्राएँ ज्ञात करें।
C का द्रव्यमान = 0.20 × 69/100 = 0.138 g
CO₂ = (44 × 0.138)/12 = 0.506 g
H का द्रव्यमान = 0.20 × 4.8/100 = 0.0096 g
H₂O = (18 × 0.0096)/2 = 0.0864 g
उत्तर: CO₂ = 0.506 g, H₂O = 0.0864 g
8.34 0.3780 g यौगिक से 0.5740 g AgCl प्राप्त हुआ। क्लोरीन % ज्ञात करें।
Cl % = (35.5 × 0.5740 × 100) / (143.5 × 0.3780)
उत्तर: Cl % ≈ 37.55%
8.35 0.468 g यौगिक से 0.668 g BaSO₄ प्राप्त हुआ। सल्फर % ज्ञात करें।
S % = (32 × 0.668 × 100) / (233 × 0.468)
उत्तर: S % ≈ 19.62%

अन्य NEET संबंधित तथ्य

महत्वपूर्ण
  • यह अध्याय NEET में लगभग हर वर्ष 3–4 प्रश्न (5–7% वेटेज) के साथ आता है, और संकरण, इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रभाव तथा नाम-पद्धति पर आधारित प्रश्न सबसे अधिक बार दोहराए जाते हैं।
  • कार्बन के तीन संकरणों में आबंध कोण: sp³ (109.5°, चतुष्फलकीय), sp² (120°, त्रिकोणीय समतलीय), sp (180°, रैखिक)।
तुलनात्मक
  • प्रेरणिक (−I/+I) बनाम अनुनाद (−M/+M) — प्रेरणिक σ-बंध से स्थायी रूप से; अनुनाद π इलेक्ट्रॉनों के विस्थापन से संयुग्मित निकाय में।
  • अतिसंयुग्मन बनाम अनुनाद — अतिसंयुग्मन में C−H σ-बंध के इलेक्ट्रॉन रिक्त p-कक्षक से अतिव्यापन करते हैं; अनुनाद में π इलेक्ट्रॉन विस्थापित होते हैं।
तथ्य
  • कार्बोकैटायन: sp², त्रिकोणीय समतलीय; कार्बएनायन: sp³, पिरामिडी; मुक्त मूलक: sp², त्रिकोणीय समतलीय।
  • स्थायित्व क्रम: कार्बोकैटायन: 3° > 2° > 1° > मेथिल; कार्बएनायन: मेथिल > 1° > 2° > 3°।
तुलनात्मक
  • ड्यूमा बनाम कैल्डॉल (नाइट्रोजन आकलन) — ड्यूमा: CuO के साथ गरम कर N₂ गैस मापी जाती है (सभी N युक्त यौगिकों हेतु); कैल्डॉल: सांद्र H₂SO₄ से NH₃ बनाकर अनुमापन (नाइट्रो, ऐज़ो व वलय-N यौगिकों पर नहीं)।
  • समावयवता के प्रकार — संरचनात्मक (शृंखला, स्थिति, क्रियात्मक समूह, मध्यावयवता) vs त्रिविम (ज्यामितीय व प्रकाशिक)।
तथ्य
  • IUPAC वरीयता क्रम: −COOH > −SO₃H > −COOR > −COCl > −CONH₂ > −CN > −CHO > >C=O > −OH > −NH₂
  • ज्यामितीय समावयवता द्वि-आबंध के परितः घूर्णन की बाधा के कारण; प्रकाशिक समावयवता काइरल कार्बन की उपस्थिति के कारण।
सूत्र
  • IHD (असंतृप्तता कोटि): (2n+2−m)/2 — प्रत्येक वलय व π-आबंध (द्वि/त्रि) 1 का योगदान देता है। बेन्ज़ीन (C₆H₆): (14−6)/2 = 4 (1 वलय + 3 द्वि-आबंध)।
चूक गए
  • समजातीय श्रेणी — एक ही क्रियात्मक समूह वाले यौगिकों की श्रृंखला जिसमें क्रमागत सदस्य CH₂ (14 इकाई) से भिन्न होते हैं — समान सामान्य सूत्र, समान रासायनिक गुण, भौतिक गुणों में नियमित परिवर्तन।
रणनीति
  • सर्वाधिक बार दोहराए गए तीन उप-विषय: (1) इलेक्ट्रॉन विस्थापन प्रभाव व कार्बोकैटायन स्थायित्व, (2) IUPAC नामपद्धति व समावयवता, (3) गुणात्मक-मात्रात्मक विश्लेषण — इन तीनों पर विशेष अभ्यास सर्वाधिक लाभकारी है।

🎯 NEET में अब तक आए प्रश्न (2014–2026)

इस अध्याय से पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

NEET 2026
26.1 लैसें परीक्षण में कार्बनिक यौगिक में उपस्थित तत्व किस रूप से किस रूप में परिवर्तित होते हैं?
कार्बनिक यौगिकों में N, S, X सामान्यतः सहसंयोजक रूप में बंधे होते हैं
सोडियम फ्यूज़न से ये आयनिक लवण (NaCN, Na₂S, NaX) में बदल जाते हैं
उत्तर: सहसंयोजक से आयनिक रूप में
NEET 2024
24.1 तीन समावयवी पेन्टेनों का क्वथनांक क्रम n-पेन्टेन > आइसोपेन्टेन > निओपेन्टेन है। कथनों की सत्यता जाँचिए।
शाखन बढ़ने पर अणु गोलाकार आकृति लेता है, पृष्ठीय क्षेत्रफल घटता है, वान्डरवाल बल कम होते हैं
उत्तर: दोनों कथन सत्य हैं, तथा कथन II, कथन I की सही व्याख्या करता है
24.2 ठोस से सीधे वाष्प में बदलने वाले पदार्थों के शुद्धिकरण की तकनीक का नाम बताइए।
उत्तर: ऊर्ध्वपातन (Sublimation)
NEET 2023
23.2 लैसें निष्कर्ष में N व S दोनों उपस्थित हों तो Fe³⁺ के साथ रक्त-लाल रंग किस यौगिक से प्राप्त होता है?
Na + C + N + S → NaSCN (सोडियम थायोसायनेट)
Fe³⁺ + SCN⁻ → [Fe(SCN)]²⁺ (रक्त-लाल)
उत्तर: फेरिक थायोसायनेट [Fe(SCN)]²⁺
NEET 2022
22P1.1 कैल्डॉल विधि किस प्रकार के यौगिकों के लिए उपयुक्त है?
उत्तर: ऐमीन/ऐमाइड नाइट्रोजन युक्त यौगिकों के लिए; वलय-N, नाइट्रो व ऐज़ो यौगिकों के लिए नहीं
NEET 2021
21.2 एथेन के सबसे कम स्थायी संरूपण का द्विफलक कोण कितना होता है?
उत्तर: 0° (एक्लिप्स्ड संरूपण)
AIPMT 2014
14.1 0.75 g मृदा नमूने से प्राप्त अमोनिया ने 1M H₂SO₄ के 10 mL को उदासीन किया। N % ज्ञात करें।
N % = (1.4 × 2 × 10) / 0.75
उत्तर: ≈ 37.33%

स्रोत: NCERT रसायन विज्ञान, कक्षा 11, एकक 8 — "कार्बनिक रसायन: कुछ आधारभूत सिद्धांत तथा तकनीकें" (Reprint 2026‑27) पर आधारित पूर्ण अध्याय नोट्स। NEET प्रश्न-संग्रह आधिकारिक AIPMT/NEET प्रश्नपत्रों पर आधारित है।

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