अपचयोपचय अभिक्रियाएँ — सम्पूर्ण अध्याय नोट्स (अध्याय 7)
रसायन विज्ञान • कक्षा-11 • अध्याय 7

अपचयोपचय अभिक्रियाएँ (Redox Reactions)

ऑक्सीकरण व अपचयन की चिरप्रतिष्ठित, इलेक्ट्रॉनिक तथा ऑक्सीकरण-संख्या अवधारणाओं से लेकर संतुलन की दोनों विधियों, अपचयोपचय अनुमापन तथा मानक इलेक्ट्रोड विभव तक — संपूर्ण अध्याय की रंगीन तालिकाएँ, आरेख, तथ्य तथा सभी 30 अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही स्थान पर।

OIL RIG — ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन त्याग
— मानक इलेक्ट्रोड विभव
ΔG° = −nFE° — ऊष्मागतिकी संबंध
★ NEET फोकस तथ्य

1 परिचय

रसायन विज्ञान मूल रूप से पदार्थों के आपसी रूपांतरण का अध्ययन है, और इन रूपांतरणों को अलग-अलग प्रकार की रासायनिक अभिक्रियाओं के जरिए समझाया जाता है। इन्हीं में से एक बेहद व्यापक और महत्वपूर्ण वर्ग है — अपचयोपचय (Redox) अभिक्रियाएँ, जिनमें ऑक्सीकरण (Oxidation) और अपचयन (Reduction) दोनों प्रक्रियाएँ हमेशा एक साथ, एक-दूसरे के पूरक के रूप में घटित होती हैं। "Redox" शब्द वास्तव में REDuction + OXidation से मिलकर बना है।

दैनिक जीवन से लेकर उद्योग तक, अपचयोपचय अभिक्रियाओं की भूमिका सर्वव्यापी है — ईंधन के दहन से ऊर्जा प्राप्त करना, बैटरियों का संचालन, धातुओं का निष्कर्षण एवं संक्षारण, प्रकाश-संश्लेषण एवं श्वसन जैसी जैविक प्रक्रियाएँ, और यहाँ तक कि वायुमंडलीय ओज़ोन क्षरण भी इसी श्रेणी में आते हैं।

क्यों पढ़ें: इस अध्याय में हम ऑक्सीकरण-अपचयन को समझने के तीन अलग-अलग नज़रियों — परंपरागत (ऑक्सीजन/हाइड्रोजन आधारित), इलेक्ट्रॉनिक (इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण आधारित) तथा ऑक्सीकरण-संख्या आधारित — का क्रमिक विकास देखेंगे, और सीखेंगे कि जटिल रासायनिक समीकरणों को व्यवस्थित ढंग से कैसे संतुलित किया जाए।

2 चिरप्रतिष्ठित अवधारणा

2.1 प्रारंभिक (सीमित) परिभाषा

ऐतिहासिक रूप से "ऑक्सीकरण" शब्द का प्रयोग केवल तत्वों या यौगिकों के ऑक्सीजन से संयोग के लिए किया जाता था। चूँकि वायुमंडल में लगभग 20% ऑक्सीजन गैस उपस्थित रहती है, इसलिए अधिकांश तत्व स्वाभाविक रूप से इससे संयोग करके ऑक्साइड बना लेते हैं।

प्रारंभिक ऑक्सीकरण के उदाहरण 2 Mg (s) + O₂ (g) → 2 MgO (s)
S (s) + O₂ (g) → SO₂ (g)
CH₄ (g) + 2O₂ (g) → CO₂ (g) + 2H₂O (l)

2.2 परिभाषा का विस्तार — हाइड्रोजन का निष्कासन

जब मीथेन के दहन को ध्यान से देखा गया, तो पता चला कि उसमें हाइड्रोजन के स्थान पर ऑक्सीजन आ जाती है — यानी हाइड्रोजन बाहर निकल जाती है। इस अवलोकन से रसायनशास्त्रियों को यह सोचने की प्रेरणा मिली कि किसी पदार्थ से हाइड्रोजन के निष्कासन को भी "ऑक्सीकरण" कहा जाए। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन सल्फाइड से हाइड्रोजन निकलकर सल्फर बनना भी ऑक्सीकरण का ही एक उदाहरण माना गया।

हाइड्रोजन-निष्कासन आधारित ऑक्सीकरण 2 H₂S (g) + O₂ (g) → 2 S (s) + 2 H₂O (l)

2.3 और विस्तार — ऋणविद्युती तत्वों का समावेश

ज्ञान बढ़ने के साथ-साथ, फ्लुओरीन, क्लोरीन तथा सल्फर जैसे अन्य ऋणविद्युती तत्वों के साथ होने वाले संयोग को भी "ऑक्सीकरण" कहा जाने लगा — क्योंकि इनका व्यवहार ऑक्सीजन जैसा ही था। इस प्रकार ऑक्सीकरण की परिष्कृत परिभाषा बनी: किसी पदार्थ में ऑक्सीजन/ऋणविद्युती तत्व का समावेश, या हाइड्रोजन/धनविद्युती तत्व का निष्कासन ऑक्सीकरण कहलाता है।

विस्तारित उदाहरण Mg (s) + F₂ (g) → MgF₂ (s)
Mg (s) + Cl₂ (g) → MgCl₂ (s)
Mg (s) + S (s) → MgS (s)

2.4 अपचयन की समानांतर परिभाषा

पहले किसी यौगिक से ऑक्सीजन हटने को ही अपचयन माना जाता था, लेकिन अब इसे भी विस्तृत करके परिभाषित किया जाता है: किसी पदार्थ से ऑक्सीजन/ऋणविद्युती तत्व का निष्कासन, या हाइड्रोजन/धनविद्युती तत्व का समावेश अपचयन कहलाता है।

अपचयन के उदाहरण 2 HgO (s) →(Δ) 2 Hg (l) + O₂ (g)  (ऑक्सीजन का निष्कासन)
2 FeCl₃ (aq) + H₂ (g) → 2 FeCl₂ (aq) + 2 HCl (aq)  (क्लोरीन का निष्कासन)
CH₂=CH₂ (g) + H₂ (g) → H₃C–CH₃ (g)  (हाइड्रोजन का योग)
महत्वपूर्ण अवलोकन: उपरोक्त सभी अभिक्रियाओं को ध्यान से देखने पर स्पष्ट होता है कि ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा एक साथ ही घटित होते हैं — इसीलिए इन्हें संयुक्त रूप से "अपचयोपचय" (Redox) कहा गया।
त्वरित तथ्य
  • प्रारंभ में ऑक्सीकरण का अर्थ केवल ऑक्सीजन से संयोग था; अब यह ऑक्सीजन/ऋणविद्युती तत्व के समावेश तथा हाइड्रोजन/धनविद्युती तत्व के निष्कासन दोनों को दर्शाता है।
  • अपचयन ऑक्सीकरण की ठीक विपरीत प्रक्रिया है — ऑक्सीजन/ऋणविद्युती तत्व का निष्कासन या हाइड्रोजन/धनविद्युती तत्व का समावेश।
  • जहाँ ऑक्सीकरण होता है, वहाँ अपचयन अनिवार्य रूप से साथ-साथ होता है — इसीलिए नाम "अपचयोपचय" पड़ा।

3 इलेक्ट्रॉन-स्थानांतरण अभिक्रियाओं के रूप में

3.1 अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजन

सोडियम क्लोराइड, सोडियम ऑक्साइड तथा सोडियम सल्फाइड जैसे आयनिक यौगिकों के बनने की प्रक्रिया को देखें तो स्पष्ट होता है कि इनमें सोडियम इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाता है, जबकि क्लोरीन, ऑक्सीजन या सल्फर वे इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाते हैं। सुविधा के लिए ऐसी हर अभिक्रिया को दो अलग-अलग चरणों — अर्ध-अभिक्रियाओं — में लिखा जा सकता है।

सोडियम क्लोराइड बनने की अर्ध-अभिक्रियाएँ 2 Na(s) → 2 Na⁺(g) + 2e⁻  (ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया)
Cl₂(g) + 2e⁻ → 2 Cl⁻(g)  (अपचयन अर्ध-अभिक्रिया)
———————————————
2 Na(s) + Cl₂(g) → 2 NaCl(s)  (पूर्ण अभिक्रिया)

3.2 आधुनिक परिभाषाएँ

पदपरिभाषा
ऑक्सीकरणकिसी स्पीशीज़ द्वारा इलेक्ट्रॉन का निष्कासन (त्याग)
अपचयनकिसी स्पीशीज़ द्वारा इलेक्ट्रॉन की प्राप्ति (ग्रहण)
ऑक्सीकारकइलेक्ट्रॉन-ग्राही अभिकारक — स्वयं अपचयित होता है
अपचायकइलेक्ट्रॉन-दाता अभिकारक — स्वयं ऑक्सीकृत होता है
प्रारंभिक अवस्था कॉपर नाइट्रेट विलयन में Zn छड़ मध्यवर्ती अवस्था नीले रंग की तीव्रता में कमी Cu निक्षेपण
चित्र 3.1 — बीकर में रखे कॉपर नाइट्रेट तथा जिंक के बीच होने वाली अपचयोपचय अभिक्रिया
त्वरित तथ्य
  • ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन का त्याग; अपचयन = इलेक्ट्रॉन का ग्रहण — याद रखने की युक्ति "OIL RIG" (Oxidation Is Loss, Reduction Is Gain).
  • ऑक्सीकारक स्वयं अपचयित होता है; अपचायक स्वयं ऑक्सीकृत होता है।
  • इलेक्ट्रॉन-निष्कासन प्रवृत्ति का क्रम Zn > Cu > Ag है, जो धातु सक्रियता श्रेणी का आधार है।

4 ऑक्सीकरण-संख्या (Oxidation Number)

सहसंयोजक यौगिकों (जैसे H₂O, HCl) में इलेक्ट्रॉन का पूर्ण स्थानांतरण नहीं होता, बल्कि आंशिक विस्थापन (शिफ्ट) होता है — फिर भी इसे लेखा-जोखा रखने के लिए काल्पनिक रूप से पूर्ण स्थानांतरण मान लिया जाता है। इसी आधार पर विकसित हुई है ऑक्सीकरण-संख्या विधि, जिसमें यह मान लिया जाता है कि सहसंयोजक आबंध में इलेक्ट्रॉन युगल हमेशा अधिक ऋणविद्युती परमाणु से संबद्ध रहता है।

आवेश आबंटन के उदाहरण 2H₂(g) + O₂(g) → 2H₂O(l)  [0,0 → +1,−2]
H₂(g) + Cl₂(g) → 2HCl(g)  [0,0 → +1,−1]
CH₄(g) + 4Cl₂(g) → CCl₄(l) + 4HCl(g)  [−4,+1,0 → +4,−1,+1,−1]
ध्यान रहे: इलेक्ट्रॉन-स्थानांतरण की यह कल्पना केवल हिसाब रखने के लिए है, वास्तविकता में सहसंयोजक यौगिकों में यह स्थानांतरण आंशिक ही होता है।

4.1 ऑक्सीकरण-संख्या ज्ञात करने के छह नियम

क्र.नियमउदाहरण
1स्वतंत्र/असंयुक्त अवस्था में तत्व की ऑक्सीकरण-संख्या शून्य होती हैH₂, O₂, Cl₂, P₄, S₈, Na, Mg, Al
2एक-परमाणुक आयन की ऑक्सीकरण-संख्या उसके आवेश के बराबर होती हैNa⁺ = +1, Mg²⁺ = +2, Cl⁻ = −1
3अधिकांश यौगिकों में ऑक्सीजन की संख्या −2 (परॉक्साइड में −1, सुपर ऑक्साइड में −½, OF₂ में +2)H₂O₂ में O = −1; KO₂ में O = −½
4हाइड्रोजन की संख्या +1 (धातु हाइड्राइडों में −1)NaH, CaH₂ में H = −1
5फ्लुओरीन की संख्या सदैव −1; अन्य हैलोजन प्रायः −1Cl, Br, I हैलाइड में −1
6तटस्थ यौगिक में सभी संख्याओं का बीजीय योग शून्य; बहुपरमाणुक आयन में यह आयन के आवेश के बराबर(CO₃)²⁻ में योग = −2
त्वरित तथ्य
  • तत्वों की मुक्त अवस्था में ऑक्सीकरण-संख्या हमेशा शून्य होती है।
  • फ्लुओरीन की ऑक्सीकरण-संख्या सदैव −1 होती है — इससे अधिक ऋणविद्युती कोई तत्व नहीं है।
  • क्षार धातुओं की संख्या सदैव +1 तथा क्षारीय मृदा धातुओं की सदैव +2 होती है।
  • भिन्नात्मक ऑक्सीकरण-संख्या केवल औसत मान है — वास्तविक संरचना में प्रत्येक परमाणु की संख्या पूर्णांक ही होती है।

5 अपचयोपचय अभिक्रियाओं के चार प्रारूप

5.1 योग (संयोजन) अभिक्रियाएँ

सामान्य रूप A + B → C प्रकार की अभिक्रिया। यह अपचयोपचय तभी होगी जब A या B (या दोनों) तत्व रूप में हों। सभी दहन अभिक्रियाएँ, जिनमें तत्व रूप में ऑक्सीजन का प्रयोग होता है, इसी वर्ग में आती हैं।

C(s) + O₂(g) → CO₂(g)  [0,0 → +4,−2]
3Mg(s) + N₂(g) → Mg₃N₂(s)  [0,0 → +2,−3]

5.2 अपघटन अभिक्रियाएँ

ये संयोजन अभिक्रियाओं के ठीक विपरीत होती हैं — इनमें कोई यौगिक दो या अधिक भागों में टूटता है, जिसमें कम-से-कम एक भाग तत्व रूप में होता है।

2H₂O(l) →(Δ) 2H₂(g) + O₂(g)
2NaH(s) →(Δ) 2Na(s) + H₂(g)
2KClO₃(s) →(Δ) 2KCl(s) + 3O₂(g)
ध्यान दें: सभी अपघटन अभिक्रियाएँ अपचयोपचय नहीं होतीं। उदाहरण के लिए CaCO₃(s) →(Δ) CaO(s) + CO₂(g) में किसी भी तत्व की ऑक्सीकरण-संख्या नहीं बदलती, इसलिए यह अपचयोपचय अभिक्रिया नहीं है।

5.3 विस्थापन अभिक्रियाएँ

इनमें यौगिक का एक आयन (या परमाणु) दूसरे तत्व के आयन (या परमाणु) द्वारा विस्थापित हो जाता है: X + YZ → XZ + Y। इसके दो उपप्रकार हैं —

(अ) धातु विस्थापन

यौगिक में एक धातु दूसरी धातु को मुक्त अवस्था में विस्थापित कर देती है। धातुकर्मीय प्रक्रमों में अयस्कों से शुद्ध धातु प्राप्त करने के लिए इनका व्यापक उपयोग होता है।

CuSO₄(aq) + Zn(s) → Cu(s) + ZnSO₄(aq)
TiCl₄(l) + 2Mg(s) →(Δ) Ti(s) + 2MgCl₂(s)
Cr₂O₃(s) + 2Al(s) →(Δ) Al₂O₃(s) + 2Cr(s)

5.4 असमानुपातन अभिक्रियाएँ (Disproportionation)

यह विशेष प्रकार की अपचयोपचय अभिक्रिया है, जिसमें एक ही तत्व की एक ऑक्सीकरण-अवस्था एक साथ ऑक्सीकृत तथा अपचयित होती है। इसके लिए आवश्यक है कि सक्रिय पदार्थ में वह तत्व कम-से-कम तीन ऑक्सीकरण-अवस्थाएँ प्राप्त कर सके — अभिकारक में यह मध्यमान अवस्था में हो, तथा उत्पादों में उच्चतर व निम्नतर दोनों अवस्थाएँ बने।

हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन 2H₂O₂(aq) → 2H₂O(l) + O₂(g)  [O: −1 → −2 और 0]
क्षारीय माध्यम में क्लोरीन (घरेलू विरंजक) Cl₂(g) + 2OH⁻(aq) → ClO⁻(aq) + Cl⁻(aq) + H₂O(l)  [Cl: 0 → +1 और −1]
अपवाद: फ्लुओरीन असमानुपातन प्रवृत्ति कभी नहीं दर्शाती, क्योंकि सर्वाधिक ऋणविद्युती तत्व होने के कारण यह धनात्मक ऑक्सीकरण-अवस्था प्रदर्शित नहीं कर सकती।
त्वरित तथ्य
  • अपचयोपचय अभिक्रियाओं के चार प्रारूप हैं — योग, अपघटन, विस्थापन तथा असमानुपातन।
  • सभी अपघटन अभिक्रियाएँ अपचयोपचय नहीं होतीं (जैसे CaCO₃ का अपघटन)।
  • असमानुपातन में एक ही तत्व एक साथ ऑक्सीकृत व अपचयित होता है; तत्व की कम-से-कम 3 ऑक्सीकरण-अवस्थाएँ होनी चाहिए।
  • फ्लुओरीन कभी असमानुपातन नहीं दिखाती।

6 अपचयोपचय अभिक्रियाओं का संतुलन

अपचयोपचय अभिक्रियाओं के संतुलन के लिए दो विधियों का प्रयोग होता है — ऑक्सीकरण-संख्या विधि तथा अर्ध-अभिक्रिया (आयन-इलेक्ट्रॉन) विधि। दोनों ही प्रचलन में हैं और व्यक्ति अपनी सुविधा के अनुसार इनका प्रयोग करता है।

त्वरित तथ्य
  • अम्लीय माध्यम में O संतुलन के लिए H₂O तथा H संतुलन के लिए H⁺ जोड़ा जाता है।
  • क्षारीय माध्यम में पहले अम्लीय की तरह संतुलित करके, बाद में H⁺ के बराबर संख्या में OH⁻ जोड़ा जाता है।
  • दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान करने के बाद ही उन्हें जोड़ा जाता है।

7 अपचयोपचय अनुमापन

जिस प्रकार अम्ल-क्षार अनुमापन में pH-संवेदनशील संसूचक का प्रयोग होता है, उसी प्रकार अपचयोपचय निकाय में भी अनुमापन विधि अपनाई जा सकती है, जिसमें अपचयोपचय-संवेदनशील संसूचक की सहायता से अपचायक/ऑक्सीकारक की सांद्रता ज्ञात की जाती है।

विधिविवरणउदाहरण
स्वयंसूचकगहरे रंग का अभिकारक स्वयं संसूचक की तरह कार्य करता हैKMnO₄ (गुलाबी अंत्यबिंदु)
बाह्य संसूचकतुल्यबिंदु के बाद अभिकारक स्वयं ऑक्सीकृत होकर संसूचक को रंग-परिवर्तन देता हैK₂Cr₂O₇ + डाइफेनिल एमीन
आयोडोमिति विधिआयोडीन का स्टार्च से गहरा नीला रंग2Cu²⁺ + 4I⁻ → Cu₂I₂ + I₂

8 इलेक्ट्रोड विभव

ऐनोड (Zn) ऑक्सीकरण: Zn → Zn²⁺ + 2e⁻ कैथोड (Cu) अपचयन: Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu A लवण सेतु (Salt Bridge)
चित्र 8.1 — डेनियल सेल की संरचना
अभिक्रिया (ऑक्सीकृत + ne⁻ → अपचयित)E° / V
F₂(g) + 2e⁻ → 2F⁻+2.87
MnO₄⁻ + 8H⁺ + 5e⁻ → Mn²⁺ + 4H₂O+1.51
Cl₂(g) + 2e⁻ → 2Cl⁻+1.36
Cr₂O₇²⁻ + 14H⁺ + 6e⁻ → 2Cr³⁺ + 7H₂O+1.33
Ag⁺ + e⁻ → Ag(s)+0.80
Fe³⁺ + e⁻ → Fe²⁺+0.77
I₂(s) + 2e⁻ → 2I⁻+0.54
Cu²⁺ + 2e⁻ → Cu(s)+0.34
2H⁺ + 2e⁻ → H₂(g)0.00
Fe²⁺ + 2e⁻ → Fe(s)−0.44
Zn²⁺ + 2e⁻ → Zn(s)−0.76
Mg²⁺ + 2e⁻ → Mg(s)−2.36
K⁺ + e⁻ → K(s)−2.93
Li⁺ + e⁻ → Li(s)−3.05
त्वरित तथ्य
  • हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का मानक विभव मान्यता के अनुसार 0.00 V होता है।
  • ऋणात्मक E° प्रबल अपचायक को, धनात्मक E° प्रबल ऑक्सीकारक को दर्शाता है।
  • डेनियल सेल में विद्युत्-प्रवाह की दिशा इलेक्ट्रॉन प्रवाह के विपरीत होती है।
  • ΔG° = −nFE° — यह ऊष्मागतिकी व रेडॉक्स को जोड़ता है (F = 96500 C/mol).

संपूर्ण अध्याय की एक-पंक्ति तथ्य सूची

परीक्षा-उपयोगी संकलन
  • अपचयोपचय अभिक्रिया में ऑक्सीकरण व अपचयन हमेशा साथ-साथ घटित होते हैं।
  • ऑक्सीकरण = इलेक्ट्रॉन त्याग / ऑक्सीकरण-संख्या में वृद्धि; अपचयन = इलेक्ट्रॉन ग्रहण / ऑक्सीकरण-संख्या में ह्रास।
  • ऑक्सीकारक स्वयं अपचयित होता है, अपचायक स्वयं ऑक्सीकृत होता है।
  • मुक्त तत्व की ऑक्सीकरण-संख्या सदैव शून्य होती है।
  • फ्लुओरीन की ऑक्सीकरण-संख्या सदैव −1 होती है, यह कभी धनात्मक नहीं होती।
  • क्षार धातुओं की संख्या +1, क्षारीय मृदा धातुओं की +2 होती है।
  • चार प्रारूप — योग, अपघटन, विस्थापन तथा असमानुपातन अभिक्रियाएँ।
  • असमानुपातन के लिए तत्व की कम-से-कम तीन ऑक्सीकरण-अवस्थाएँ आवश्यक हैं।
  • फ्लुओरीन कभी असमानुपातन प्रवृत्ति नहीं दिखाती।
  • सभी अपघटन अभिक्रियाएँ अपचयोपचय नहीं होतीं।
  • अम्लीय माध्यम में संतुलन हेतु H⁺ व H₂O; क्षारीय माध्यम में OH⁻ का प्रयोग होता है।
  • KMnO₄ स्वयंसूचक है; K₂Cr₂O₇ बाह्य संसूचक (डाइफेनिल एमीन) की आवश्यकता रखता है।
  • हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का मानक विभव 0.00 V (संदर्भ मान)।
  • धातु सक्रियता क्रम: इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति जितनी अधिक, धातु उतनी ही प्रबल अपचायक।
  • हैलोजनों की ऑक्सीकारक क्षमता का क्रम: F₂ > Cl₂ > Br₂ > I₂
  • ΔG° = −nFE° — मानक गिब्ज़ ऊर्जा व सेल विभव में संबंध (F = 96500 C/mol).

सूत्र सारांश तालिका

संकल्पनासूत्र
ऑक्सीकरण-संख्या (तटस्थ यौगिक)Σ(ऑक्सीकरण संख्या × परमाणु) = 0
ऑक्सीकरण-संख्या (बहुपरमाणुक आयन)Σ(ऑक्सीकरण संख्या × परमाणु) = आयन-आवेश
आबंध कोटि (MOT)= ½(Nb − Na)
मानक सेल विभवcell = E°cathode − E°anode
गिब्ज़ ऊर्जा व सेल विभवΔG° = −nFE°cell
नर्न्स्ट समीकरण (25°C)E = E° − (0.059/n) log Q
तुल्यांक सिद्धांतN₁V₁ = N₂V₂
n-गुणांक (KMnO₄ अम्लीय)n = 5 (Mn⁷⁺→Mn²⁺)
n-गुणांक (KMnO₄ उदासीन)n = 3 (Mn⁷⁺→Mn⁴⁺, MnO₂)
n-गुणांक (KMnO₄ क्षारीय)n = 1 (Mn⁷⁺→Mn⁶⁺, MnO₄²⁻)
n-गुणांक (K₂Cr₂O₇ अम्लीय)n = 6 (2Cr⁶⁺→2Cr³⁺)

अध्याय अभ्यास — प्रश्न 7.1 से 7.30 तक (विस्तृत हल सहित)

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करके विस्तृत हल देखें। सभी उत्तरों में उपरोक्त 'सूत्र-सूची' व 'तथ्य सूची' का उपयोग किया गया है।

ऑक्सीकरण-संख्या आधारित प्रश्न
7.1 निम्नलिखित स्पीशीज़ में प्रत्येक रेखांकित तत्व की ऑक्सीकरण-संख्या का निर्धारण कीजिए — NaH₂PO₄, NaHSO₄, H₄P₂O₇, K₂MnO₄, CaO₂, NaBH₄, H₂S₂O₇, KAl(SO₄)₂·12H₂O
NaH₂PO₄ — Na=+1, H(x2)=+2, O=4×(−2)=−8: 1+2+P−8=0 ⇒ P=+5
NaHSO₄ — Na=+1, H=+1, O=4×(−2)=−8: 1+1+S−8=0 ⇒ S=+6
H₄P₂O₇ — 4(1)+2P+7(−2)=0 ⇒ 4+2P−14=0 ⇒ P=+5
K₂MnO₄ — 2(1)+Mn+4(−2)=0 ⇒ Mn=+6
CaO₂ — कैल्शियम परॉक्साइड: Ca+2(−1)=0 ⇒ Ca=+2
NaBH₄ — Na=+1, H (hydride)=−1: 1+B+4(−1)=0 ⇒ B=+3
H₂S₂O₇ — 2(1)+2S+7(−2)=0 ⇒ 2+2S−14=0 ⇒ S=+6
KAl(SO₄)₂·12H₂O — K=+1, Al=+3, O=8(−2)=−16: 1+3+2S−16=0 ⇒ S=+6
उत्तर: (क) P=+5 (ख) S=+6 (ग) P=+5 (घ) Mn=+6 (ङ) Ca=+2 (च) B=+3 (छ) S=+6 (ज) S=+6
7.2 निम्नलिखित यौगिकों के रेखांकित तत्वों की ऑक्सीकरण-संख्या क्या है — KI₃, H₂S₄O₆, Fe₃O₄, CH₃CH₂OH, CH₃COOH
KI₃ — K=+1, I₃⁻ आयन का औसत = −1/3; वास्तव में 2 I = 0, 1 I = −1
H₂S₄O₆ — 2(1)+4S+6(−2)=0 ⇒ S = 5/2 (औसत); वास्तव में 2 S = +5, 2 S = 0
Fe₃O₄ — 3Fe+4(−2)=0 ⇒ Fe = 8/3 (औसत); वास्तव में 1 Fe = +2, 2 Fe = +3
CH₃CH₂OH — CH₃ का C = −3, CH₂OH का C = −1 (औसत −2)
CH₃COOH — CH₃ का C = −3, COOH का C = +3 (औसत 0)
उत्तर: (क) I का औसत −1/3 (ख) S का औसत 5/2 (ग) Fe का औसत 8/3 (घ) C का औसत −2 (ङ) C का औसत 0 — भिन्नात्मक औसत मान हैं, वास्तविक संरचना में पूर्णांक अवस्थाएँ होती हैं।
अपचयोपचय औचित्य व प्रकार
7.3 निम्नलिखित अभिक्रियाओं का अपचयोपचय अभिक्रियाओं के रूप में औचित्य स्थापित करें — CuO+H₂→Cu+H₂O, Fe₂O₃+3CO→2Fe+3CO₂, 4BCl₃+3LiAlH₄→2B₂H₆+3LiCl+3AlCl₃, 2K+F₂→2KF, 4NH₃+5O₂→4NO+6H₂O
(क) CuO+H₂→Cu+H₂O — Cu: +2→0 (अपचयन); H: 0→+1 (ऑक्सीकरण) ✓
(ख) Fe₂O₃+3CO→2Fe+3CO₂ — Fe: +3→0 (अपचयन); C: +2→+4 (ऑक्सीकरण) ✓
(ग) 4BCl₃+3LiAlH₄→2B₂H₆+3LiCl+3AlCl₃ — B: +3→−3 (अपचयन); H: −1→+1 (ऑक्सीकरण) ✓
(घ) 2K+F₂→2KF — K: 0→+1 (ऑक्सीकरण); F: 0→−1 (अपचयन) ✓
(ङ) 4NH₃+5O₂→4NO+6H₂O — N: −3→+2 (ऑक्सीकरण); O: 0→−2 (अपचयन) ✓
उत्तर: सभी पाँचों अभिक्रियाएँ अपचयोपचय अभिक्रियाएँ हैं, क्योंकि हर एक में कम-से-कम एक तत्व की ऑक्सीकरण-संख्या बढ़ती है तथा दूसरे की घटती है।
7.4 H₂O(s)+F₂(g)→HF(g)+HOF(g) अभिक्रिया का अपचयोपचय औचित्य स्थापित करें।
H₂O में H=+1, O=−2; F₂ में F=0। HF में F=−1 (अपचयन); HOF में F=+1 (ऑक्सीकरण)।
उत्तर: यह एक असमानुपातन अभिक्रिया है, जिसमें फ्लुओरीन का एक परमाणु अपचयित (0→−1) तथा दूसरा ऑक्सीकृत (0→+1) होता है।
7.25 10.0g अमोनिया तथा 20.00g ऑक्सीजन द्वारा नाइट्रिक ऑक्साइड की अधिकतम मात्रा ज्ञात करें (ऑस्टवाल्ड विधि का प्रथम पद)।
समीकरण: 4NH₃(g)+5O₂(g)→4NO(g)+6H₂O(g)
NH₃ के मोल = 10.0/17 = 0.588; O₂ के मोल = 20.00/32 = 0.625
0.588 mol NH₃ हेतु आवश्यक O₂ = (5/4)×0.588 = 0.735 mol, परंतु उपलब्ध O₂ केवल 0.625 mol — O₂ सीमांत अभिकारक है।
NO = (4/5)×0.625 = 0.5 mol = 0.5×30 = 15.0 g
उत्तर: अधिकतम 15.0 ग्राम नाइट्रिक ऑक्साइड प्राप्त हो सकता है (O₂ सीमांत अभिकारक है)।
7.26 मानक विभवों की सहायता से बताएँ कि क्या अभिक्रिया संभव है — Fe³⁺+I⁻, Ag⁺+Cu, Fe³⁺+Br⁻, Ag+Fe³⁺, Br₂+Fe²⁺
नियम: यदि ऑक्सीकारक का E° अपचायक के E° से अधिक हो, तो अभिक्रिया संभव है।
(क) Fe³⁺(0.77V) + I⁻(0.54V) — 0.77>0.54 ⇒ संभव
(ख) Ag⁺(0.80V) + Cu(0.34V) — 0.80>0.34 ⇒ संभव
(ग) Fe³⁺(0.77V) + Br⁻(1.09V) — 0.77<1.09 ⇒ संभव नहीं
(घ) Ag(0.80V) + Fe³⁺(0.77V) — 0.80>0.77 ⇒ Ag को Fe³⁺ ऑक्सीकृत नहीं कर सकता ⇒ संभव नहीं
(ङ) Br₂(1.09V) + Fe²⁺(0.77V) — 1.09>0.77 ⇒ संभव
उत्तर: (क) संभव (ख) संभव (ग) संभव नहीं (घ) संभव नहीं (ङ) संभव
7.30 Zn(s)+2Ag⁺(aq)→Zn²⁺(aq)+2Ag(s) के लिए गैल्वेनी सेल चित्रित करें तथा बताएँ — (क) कौन सा इलेक्ट्रोड ऋण आवेशित? (ख) विद्युत्धारा के वाहक कौन? (ग) इलेक्ट्रोड अभिक्रियाएँ?
सेल संरचना: Zn(s) | Zn²⁺(aq) || Ag⁺(aq) | Ag(s)
(क) Zn (ऐनोड) ऋण आवेशित है, क्योंकि ऑक्सीकरण से इलेक्ट्रॉन उत्पन्न होते हैं।
(ख) बाहरी परिपथ में इलेक्ट्रॉन; आंतरिक (विलयन/लवण-सेतु) में आयन।
(ग) ऐनोड: Zn→Zn²⁺+2e⁻; कैथोड: 2Ag⁺+2e⁻→2Ag
उत्तर: (क) ऐनोड (Zn) ऋण आवेशित (ख) बाहरी: इलेक्ट्रॉन, आंतरिक: आयन (ग) ऐनोड: Zn→Zn²⁺+2e⁻; कैथोड: 2Ag⁺+2e⁻→2Ag

अन्य NEET संबंधित तथ्य

महत्वपूर्ण
  • यह अध्याय NEET में लगभग 2% वेटेज रखता है (प्रायः 1 प्रश्न/वर्ष), परंतु ऑक्सीकरण संख्या के अपवाद व संतुलन की गणना में गलतियाँ सबसे अधिक अंक गँवाने का कारण बनती हैं।
  • ऑक्सीजन की ऑक्सीकरण संख्या के अपवाद — सामान्यतः −2, परंतु परऑक्साइड (H₂O₂, Na₂O₂) में −1, सुपरऑक्साइड (KO₂) में −½, OF₂ में +2 तथा F₂O₂ में +1 होती है (F, O से अधिक वैद्युतऋणात्मक होने के कारण)।
  • हाइड्रोजन की ऑक्सीकरण संख्या का अपवाद — सामान्यतः +1, परंतु धात्विक हाइड्राइडों (NaH, CaH₂, LiAlH₄) में −1 होती है।
तथ्य
  • असमानुपातन — एक ही तत्व का एक भाग ऑक्सीकृत तथा दूसरा भाग अपचयित होता है; यह तभी संभव है जब तत्व अपनी मध्यवर्ती ऑक्सीकरण अवस्था में उपस्थित हो — उच्चतम या निम्नतम अवस्था वाला तत्व कभी असमानुपातित नहीं हो सकता।
  • संगुणित-अपचयोपचय (comproportionation) असमानुपातन की विपरीत प्रक्रिया है — इसमें एक ही तत्व की दो भिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाएँ अभिक्रिया करके एकल मध्यवर्ती अवस्था वाला उत्पाद बनाती हैं।
तुलनात्मक
  • KMnO₄ का n-गुणांक माध्यम के अनुसार बदलता है — अम्लीय: n = 5 (Mn⁷⁺→Mn²⁺), उदासीन/मंद-क्षारीय: n = 3 (Mn⁷⁺→Mn⁴⁺), प्रबल क्षारीय: n = 1 (Mn⁷⁺→Mn⁶⁺) — यह NEET में सबसे बार-बार पूछा जाने वाला ट्रैप है।
  • K₂Cr₂O₇ का n-गुणांक अम्लीय माध्यम में n = 6 (2Cr⁶⁺→2Cr³⁺) होता है।
  • तुल्यांकी भार = मोलर द्रव्यमान/n-गुणांक; अनुमापन में तुल्यांक-समता (N₁V₁ = N₂V₂) का सिद्धांत इसी पर आधारित है।
तथ्य
  • आयोडिमिति बनाम आयोडोमितिआयोडिमिति (प्रत्यक्ष): I₂ को सीधे थायोसल्फेट से अनुमापित किया जाता है; आयोडोमिति (अप्रत्यक्ष): प्रबल ऑक्सीकारक को KI के साथ अभिक्रिया कराकर I₂ मुक्त कराया जाता है, फिर उसे अनुमापित किया जाता है।
  • स्टार्च संकेतक आयोडीन के साथ गहरा नीला संकुल बनाता है, जो अंतिम बिंदु (रंग का लुप्त होना) दर्शाता है।
ट्रैप
  • चिरप्रतिष्ठित (classical) संकल्पना की सीमा — Zn + Cu²⁺ → Zn²⁺ + Cu जैसी अभिक्रिया में न तो ऑक्सीजन शामिल है, न हाइड्रोजन, फिर भी यह स्पष्टतः एक रेडॉक्स अभिक्रिया है — इसी सीमा के कारण इलेक्ट्रॉन-स्थानांतरण संकल्पना को अपनाया गया।
रणनीति
  • ऑक्सीकारक (oxidising agent) स्वयं अपचयित होता है (इसकी ऑक्सीकरण संख्या घटती है), जबकि अपचायक (reducing agent) स्वयं ऑक्सीकृत होता है (इसकी ऑक्सीकरण संख्या बढ़ती है) — छात्र प्रायः इसे विपरीत समझने की भूल करते हैं।
  • अनुमापन गणनाओं में सदैव तुल्यांकों की समानता (मोल × n-गुणांक) याद रखें, न कि केवल मोलों की।

NEET विगत वर्ष प्रश्न (2000–2026)

इस अध्याय से NTA/CBSE द्वारा अब तक पूछे गए प्रश्न, हल सहित।

RE-NEET 2026 अम्लीय माध्यम में 10 mL, 0.25 M ऑक्ज़ैलिक अम्ल को KMnO₄ विलयन से अनुमापित किया जाता है। यदि अंतिम बिंदु तक 10 mL KMnO₄ लगे, तो उसकी सांद्रता ज्ञात करें।
ऑक्ज़ैलिक अम्ल (H₂C₂O₄) का n-गुणांक = 2 (C₂O₄²⁻→2CO₂); KMnO₄ (अम्लीय) का n-गुणांक = 5
तुल्यांकों की समानता: M₁V₁n₁ = M₂V₂n₂ ⇒ 0.25×10×2 = M×10×5
उत्तर: M(KMnO₄) = 0.10 M
NEET 2025 KO₂, H₂O₂ व H₂SO₄ में क्रमशः K, O, S की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करें।
KO₂ (पोटैशियम सुपरऑक्साइड): K = +1 (क्षार धातु)
H₂O₂ (पेरॉक्साइड): O = −1 (सामान्य −2 के बजाय)
H₂SO₄: 2(+1)+x+4(−2)=0 ⇒ x=+6
उत्तर: K = +1, O = −1, S = +6
NEET 2024 3MnO₄²⁻+4H⁺→2MnO₄⁻+MnO₂+2H₂O अभिक्रिया में Mn की कौन-सी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित नहीं होतीं? (+6,+2,+4,+7,+3)
अभिकारक MnO₄²⁻: Mn=+6; उत्पाद MnO₄⁻: Mn=+7; उत्पाद MnO₂: Mn=+4
असमानुपातन अभिक्रिया में केवल +6, +7 व +4 दिखते हैं।
उत्तर: +2 तथा +3 — ये दोनों अवस्थाएँ इस अभिक्रिया में प्रदर्शित नहीं होतीं।
NEET 2019 कौन-सी असमानुपातन (disproportionation) अभिक्रियाएँ हैं? (a)2Cu⁺→Cu²⁺+Cu⁰ (b)3MnO₄²⁻+4H⁺→2MnO₄⁻+MnO₂+2H₂O (c)2KMnO₄→K₂MnO₄+MnO₂+O₂ (d)2MnO₄⁻+3Mn²⁺+2H₂O→5MnO₂+4H⁺
(a) Cu⁺(+1)→Cu²⁺(+2)+Cu⁰(0) — असमानुपातन
(b) Mn(+6)→Mn(+7)+Mn(+4) — असमानुपातन
(c) Mn(+7)→Mn(+6)+Mn(+4) — असमानुपातन
(d) दो भिन्न अभिकारक मिलकर एक उत्पाद बनाते हैं — सम-अनुपातन (comproportionation), असमानुपातन नहीं
उत्तर: (a), (b) व (c) असमानुपातन अभिक्रियाएँ हैं; (d) नहीं है।
NEET 2018 MnO₄⁻+C₂O₄²⁻+H⁺→Mn²⁺+CO₂+H₂O को संतुलित करने पर अभिकारकों के गुणांक ज्ञात करें।
MnO₄⁻ का n-गुणांक=5; C₂O₄²⁻ का n-गुणांक=2
LCM(5,2)=10 ⇒ 2 MnO₄⁻ व 5 C₂O₄²⁻; आवेश/परमाणु संतुलन से H⁺=16
उत्तर: 2 MnO₄⁻ + 5 C₂O₄²⁻ + 16 H⁺ → 2 Mn²⁺ + 10 CO₂ + 8 H₂O
AIPMT 2014 H₂O₂+O₃→H₂O+2O₂ तथा H₂O₂+Ag₂O→2Ag+H₂O+O₂ — इन अभिक्रियाओं में H₂O₂ की भूमिका क्या है?
दोनों अभिक्रियाओं में H₂O₂ में O: −1→0 (O₂ में) — H₂O₂ स्वयं ऑक्सीकृत होता है
(I) में O₃ अपचयित होता है; (II) में Ag₂O का Ag⁺, Ag⁰ में अपचयित होता है
उत्तर: दोनों अभिक्रियाओं में H₂O₂, अपचायक (reducing agent) के रूप में कार्य करता है।
AIPMT 2012 (प्रारंभिक) गर्म सांद्र NaOH के साथ Cl₂ की अभिक्रिया में क्लोरीन की ऑक्सीकरण संख्या किन मानों में बदलती है?
गर्म सांद्र क्षार: Cl₂+6NaOH(गर्म,सांद्र)→5NaCl+NaClO₃+3H₂O
Cl₂ में Cl=0; NaCl में Cl=−1; NaClO₃ में Cl=+5
उत्तर: क्लोरीन 0 से −1 तथा +5 में बदलता है (असमानुपातन)।
AIPMT 2008 1 मोल फेरस ऑक्ज़ैलेट (FeC₂O₄) को अम्लीय माध्यम में पूर्णतः ऑक्सीकृत करने हेतु आवश्यक MnO₄⁻ के मोल ज्ञात करें।
FeC₂O₄ में: Fe²⁺→Fe³⁺ (n=1) + C₂O₄²⁻→2CO₂ (n=2) ⇒ कुल n=3
MnO₄⁻ का n=5 (अम्लीय माध्यम में)
तुल्यांक बराबर: 1×3 = मोल(MnO₄⁻)×5
उत्तर: MnO₄⁻ = 3/5 = 0.6 mol

स्रोत: NCERT रसायन विज्ञान, कक्षा 11, एकक 7 — "अपचयोपचय अभिक्रियाएँ" (Reprint 2026‑27) पर आधारित पूर्ण अध्याय नोट्स। NEET प्रश्न-संग्रह आधिकारिक AIPMT/NEET प्रश्नपत्रों पर आधारित है।

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