मानव स्वास्थ्य तथा रोग — सम्पूर्ण अध्ययन
जीव विज्ञान • अध्याय 7

मानव स्वास्थ्य तथा रोग

संक्रामक एवं असंक्रामक रोग, प्रतिरक्षा तंत्र, एड्स, कैंसर, ड्रग एवं ऐल्कोहल कुप्रयोग — परीक्षा‑केंद्रित विस्तृत विवेचन।

★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित

1 स्वास्थ्य एवं रोग — मूल अवधारणा

स्वास्थ्य की परिभाषा, प्रभावित करने वाले कारक

प्राचीन काल में स्वास्थ्य को शरीर के भीतरी द्रवों (ह्यूमर) के संतुलन के रूप में देखा जाता था। बाद में विलियम हार्वे के रक्त-परिसंचरण संबंधी शोध ने इस धारणा को बदल दिया। आधुनिक दृष्टिकोण के अनुसार, तंत्रिका तंत्र, अंतःस्रावी तंत्र तथा प्रतिरक्षा तंत्र — तीनों मिलकर हमारे स्वास्थ्य को बनाए रखते हैं।

स्वास्थ्य की आधुनिक परिभाषा

स्वास्थ्य केवल "रोग की अनुपस्थिति" नहीं है, बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक स्वस्थता की अवस्था है। स्वस्थ व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ती है, आयु-प्रत्याशा बढ़ती है, तथा शिशु एवं मातृ मृत्यु-दर घटती है।

कारकविवरण
आनुवंशिक विकारजन्म से माता-पिता से वंशागत अपूर्णताएँ (जैसे थैलेसीमिया, हीमोफीलिया)
संक्रमणबाहरी रोगाणुओं (जीवाणु, विषाणु, कवक, प्रोटोजोआ, कृमि) के कारण
जीवन शैलीआहार, जल, विश्राम, व्यायाम, स्वभाव एवं आदतें
स्वस्थ जीवन हेतु उपाय: संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता, नियमित व्यायाम, योग, टीकाकरण, अपशिष्ट का समुचित निपटान, रोगवाहकों का नियंत्रण तथा स्वच्छ जल-खाद्य की व्यवस्था।

संक्रामक रोग

ऐसे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकते हैं। उदाहरण — टाइफॉइड, न्यूमोनिया, सामान्य जुकाम, एड्स।

असंक्रामक रोग

ऐसे रोग जो एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते। उदाहरण — कैंसर, हृदय रोग, नशीले पदार्थों से उत्पन्न रोग।

NEET फोकस
  • स्वास्थ्य = शारीरिक + मानसिक + सामाजिक स्वस्थता
  • विलियम हार्वे — रक्त-परिसंचरण की खोज
  • रोग — संक्रामक एवं असंक्रामक दो मुख्य प्रकार

2 मानव में सामान्य संक्रामक रोग

जीवाणु, विषाणु, प्रोटोजोआ, कृमि एवं कवक जनित रोग

रोगजनक (पैथोजन) — वे सूक्ष्मजीव जो मनुष्य में रोग उत्पन्न करते हैं। अधिकांश परजीवी रोगजनक होते हैं, क्योंकि वे परपोषी को नुकसान पहुँचाते हैं।

जीवाणु जनित रोग

रोगरोगजनक जीवाणुसंक्रमण स्थलमुख्य लक्षण
टाइफॉइड ज्वरसाल्मोनेला टाइफीछोटी आँत → रक्ततेज ज्वर (39–40°C), कमजोरी, पेट दर्द, सिरदर्द
निमोनियास्ट्रेप्टोकोकस निमोनी, हीमोफिलस इंफ्लुएंजीफेफड़ों की वायुकोष्ठ (एल्वियोलाई)तेज ज्वर, ठिठुरन, खाँसी, गंभीर अवस्था में नीलापन
टाइफाइड मैरी: मैरी मैलॉन नामक रसोइया बिना स्वयं रोगग्रस्त हुए वर्षों तक भोजन के माध्यम से टाइफॉइड फैलाती रही — यह स्वस्थ वाहक का प्रसिद्ध उदाहरण है। टाइफॉइड की पुष्टि विडाल परीक्षण से होती है।

विषाणु जनित रोग

सामान्य जुकाम — राइनोवायरस के कारण होता है। मानव का सबसे संक्रामक रोग है। यह नाक व श्वसन पथ को प्रभावित करता है, फेफड़ों को नहीं। लक्षण — नाक बहना, कंठ में जलन, खाँसी, सिरदर्द, 3–7 दिन में ठीक होता है। संक्रमित बिंदुकों को साँस द्वारा लेने या संदूषित वस्तुओं को छूने से फैलता है।

प्रोटोजोआ जनित रोग

मलेरिया — प्लैज्मोडियम प्रोटोजोआ परजीवी के कारण। मादा एनोफेलीज मच्छर रोगवाहक है। प्लैज्मोडियम फैल्सीपेरम सबसे घातक जाति है। परजीवी यकृत एवं RBC में अलैंगिक जनन करता है; RBC फटने पर हीमोजोइन निकलता है, जिससे 3–4 दिन के अंतराल पर तीव्र ज्वर आता है।

अमीबता (अमीबियेसिस) — एंटअमीबा हिस्टोलिटिका के कारण। घरेलू मक्खी वाहक है। लक्षण — कब्ज, उदरीय पीड़ा, श्लेष्मल एवं रक्त-युक्त मल।

कृमि जनित रोग

रोगरोगजनकलक्षण
एस्केरिएसिसऐस्कैरिस (गोलकृमि)आंतरिक रक्तस्राव, पेशी पीड़ा, अरक्तता, आंत्र अवरोध
फाइलेरियेसिस (हस्तिपाद)वुचेरेरिया बैंक्रॉफ्टाईलसीका वाहिकाओं में दीर्घकालिक शोथ

कवक जनित रोग

दाद (रिंगवर्म) — माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफाइटॉन, एपिडर्मोफाइटॉन कवकों के कारण। त्वचा, नाखून व शिरोवल्क पर सूखी, शल्की, खुजलीदार विक्षतियाँ। ऊष्मा-नमी में वलनों पर पनपता है। संक्रमित तौलिए, कपड़े या कंघे से फैलता है।

रोकथाम के उपाय

व्यक्तिगत स्वच्छता

शरीर की सफाई, स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ भोजन व शाक-सब्जियाँ।

जन स्वास्थ्य उपाय

अपशिष्ट-मल का उचित निपटान, जलाशयों की सफाई व विसंक्रमण।

रोगवाहक नियंत्रण

पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी, कीटनाशक, गंबूजिया मछली।

NEET फोकस
  • टाइफॉइड — साल्मोनेला टाइफी; विडाल परीक्षण
  • निमोनिया — स्ट्रेप्टोकोकस निमोनी; एल्वियोलाई में तरल
  • सामान्य जुकाम — राइनोवायरस (फेफड़ों को नहीं)
  • मलेरिया — प्लैज्मोडियम; वाहक — मादा एनोफेलीज
  • अमीबता — एंटअमीबा; वाहक — घरेलू मक्खी
  • दाद — माइक्रोस्पोरम/ट्राइकोफाइटॉन

3 प्रतिरक्षा तंत्र

सहज एवं उपार्जित प्रतिरक्षा

प्रतिरक्षा — परपोषी की रोगकारक जीवों से लड़ने की क्षमता। दो प्रकार — सहज (जन्मजात) तथा उपार्जित (एक्वायर्ड)

सहज प्रतिरक्षा

जन्म से मौजूद अविशिष्ट (नॉन-स्पेसिफिक) रक्षा प्रणाली। चार प्रकार के रोध —

रोध प्रकारउदाहरण
शारीरिकत्वचा, श्लेष्मा आलेप (म्यूकस)
कायिकीयआमाशय अम्ल, लार, आँसू
कोशिकीयन्यूट्रोफिल, मोनोसाइट्स, मैक्रोफेज
साइटोकाइनइंटरफेरॉन (विषाणु संक्रमित कोशिकाओं द्वारा स्रावित)

उपार्जित प्रतिरक्षा

रोगजनक-विशिष्ट (स्पेसिफिक), स्मृति आधारित। प्राथमिक अनुक्रिया (पहली बार) धीमी, द्वितीयक (एनामिस्टिक) अनुक्रिया (दोबारा) तीव्र व प्रबल।

तरल (ह्यूमोरल) प्रतिरक्षा

बी-लसीकाणु द्वारा मध्यस्थ। प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) रक्त में पाई जाती हैं। IgA, IgM, IgE, IgG — विभिन्न प्रकार।

कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा

टी-लसीकाणु द्वारा मध्यस्थ। अंग-प्रतिरोपण अस्वीकृति के लिए उत्तरदायी। "स्व" व "पर" में भेद कर सकती है।

प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) — संरचना

प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) — H₂L₂ संरचना लघु शृंखला (L) लघु शृंखला (L) दीर्घ शृंखला (H) दीर्घ शृंखला (H) प्रतिजन बंधक स्थल प्रतिजन बंधक स्थल Y-आकार — 2 दीर्घ + 2 लघु शृंखलाएँ (H₂L₂)
चित्र 7.1 — प्रतिरक्षी अणु की संरचना (स्वनिर्मित)
प्रतिरक्षी अणु: Y-आकार, H₂L₂ (2 दीर्घ + 2 लघु शृंखलाएँ), शीर्ष पर प्रतिजन बंधक स्थल, शृंखलाएँ डाईसल्फाइड बंधों से जुड़ी।

सक्रिय बनाम निष्क्रिय प्रतिरक्षा

विशेषतासक्रिय प्रतिरक्षानिष्क्रिय प्रतिरक्षा
प्रतिरक्षी उत्पत्तिशरीर स्वयं बनाता हैबनी-बनाई दी जाती है
गतिधीमीतत्काल
अवधिदीर्घकालिकअल्पकालिक
उदाहरणटीकाकरण, प्राकृतिक संक्रमणकोलोस्ट्रम (IgA), प्रतिविष (एंटीवेनम)

एलर्जी एवं स्व-प्रतिरक्षा

एलर्जी

एलर्जन (धूल, पराग, डैंडर) के प्रति IgE प्रतिरक्षियों द्वारा अतिरंजित अनुक्रिया। मास्ट कोशिकाओं से हिस्टैमिनसीरोटोनिन मुक्त होते हैं।

स्व-प्रतिरक्षा

शरीर अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करता है। रूमेटॉयड आर्थराइटिस इसका प्रमुख उदाहरण है। मायस्थीनिया ग्रेविस, SLE भी स्व-प्रतिरक्षा रोग हैं।

लसीकाभ अंग

अंगप्रकारकार्य
अस्थि मज्जाप्राथमिकसभी रक्त कोशिकाओं की उत्पत्ति
थाइमसप्राथमिकटी-लसीकाणुओं का परिपक्वन
प्लीहाद्वितीयकरक्त निस्यंदक; RBC भंडार
लसीका ग्रंथियाँद्वितीयकप्रतिजन को फाँसकर संक्रियण
MALTद्वितीयकश्लेष्म-संबद्ध लसीकाभ ऊतक (~50% कुल)
NEET फोकस
  • सहज प्रतिरक्षा — 4 रोध (शारीरिक, कायिकीय, कोशिकीय, साइटोकाइन)
  • उपार्जित प्रतिरक्षा — स्मृति आधारित
  • प्रतिरक्षी — H₂L₂, Y-आकार
  • कोलोस्ट्रम — IgA प्रचुर (निष्क्रिय प्रतिरक्षा)
  • MALT — कुल लसीकाभ ऊतक का ~50%

4 एड्स (AIDS)

HIV, संचरण मार्ग, क्रियाविधि, निदान

एड्सउपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता संलक्षण (Acquired Immuno Deficiency Syndrome)। प्रथम पहचान 1981 में। यह जन्मजात नहीं, जीवनकाल में उपार्जित होता है।

कारक विषाणु — HIV

HIV (Human Immunodeficiency Virus) — एक रेट्रोवायरस (पश्चविषाणु) है। इसमें RNA जीनोम व प्रोटीन आवरण होता है। विशेष एंजाइम — विलोम ट्रांस्क्रिप्टेज (रिवर्स ट्रांस्क्रिप्टेज), जो RNA से DNA बनाता है जो परपोषी के DNA में समाविष्ट हो जाता है।

संचरण मार्ग

  • संक्रमित व्यक्ति के असुरक्षित यौन संपर्क से
  • संदूषित रक्त व रुधिर उत्पादों के आधान से
  • संक्रमित सुइयों के साझा प्रयोग से
  • संक्रमित माँ से अपरा द्वारा शिशु में
महत्वपूर्ण: HIV छूने, हाथ मिलाने या साथ खाने से नहीं फैलता — इसलिए संक्रमित व्यक्ति को समाज से अलग नहीं करना चाहिए।

क्रियाविधि

HIV की क्रियाविधि HIV मैक्रोफेज में प्रवेश विलोम ट्रांस्क्रिप्टेज → विषाणवीय DNA परपोषी DNA में समावेशन सहायक टी-लसीकाणु (TH) में संख्या में कमी प्रतिरक्षा-न्यूनता → अवसरवादी संक्रमण
चित्र 7.2 — HIV की क्रियाविधि (स्वनिर्मित)
HIV मैक्रोफेज एवं सहायक टी-लसीकाणुओं (TH) को संक्रमित करता है। TH कोशिकाओं की संख्या उत्तरोत्तर घटती है, जिससे व्यक्ति अवसरवादी संक्रमणों से रक्षा में असमर्थ हो जाता है। संक्रमण एवं लक्षणों के बीच अंतराल 5–10 वर्ष हो सकता है।

निदान एवं उपचार

निदान

ELISA (एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) — व्यापक रूप से प्रयुक्त नैदानिक परीक्षण।

उपचार

प्रति-पश्चविषाणवीय औषधियाँ — रोगी की मृत्यु को आगे सरका सकती हैं, परंतु पूर्ण इलाज नहीं।

रोकथाम

एड्स की रोकथाम ही सर्वोत्तम उपाय है। भारत में NACO (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) जागरूकता फैलाता है — सुरक्षित यौन संबंध, कंडोम का उपयोग, डिस्पोजेबल सुई-सिरिंज, रक्त जाँच।
NEET फोकस
  • एड्स — 1981 में पहली पहचान
  • HIV — रेट्रोवायरस (RNA जीनोम)
  • विशिष्ट एंजाइम — विलोम ट्रांस्क्रिप्टेज
  • लक्ष्य कोशिकाएँ — TH (सहायक टी-लसीकाणु)
  • निदान — ELISA; नियंत्रण — NACO

5 कैंसर

अर्बुद, कारण, निदान, उपचार

कैंसर मानव का सबसे भयंकर रोग है। सामान्य कोशिकाओं में संस्पर्श संदमन (कॉन्टेक्ट इनहिबिशन) गुण होता है — कैंसर कोशिकाओं में यह गुण समाप्त हो जाता है, जिससे वे अनियंत्रित रूप से विभाजित होती हैं।

अर्बुद के प्रकार

विशेषतासुदम (Benign)दुर्दम (Malignant)
वृद्धिमूल स्थान तक सीमिततेजी से बढ़ता, आक्रामक
फैलावनहीं फैलतामेटास्टेसिस — रक्त द्वारा दूर स्थलों तक
क्षतिमामूलीगंभीर; आसपास के ऊतकों पर आक्रमण
मेटास्टेसिस: दुर्दम अर्बुद कोशिकाओं का रक्त द्वारा शरीर के दूरदराज भागों तक पहुँचकर वहाँ नए अर्बुद बनाना — यह दुर्दम अर्बुदों का सबसे घातक गुण है।

कैंसर के कारण (कैंसरजन)

भौतिक

X-किरणें, γ-किरणें, पराबैंगनी विकिरण — DNA को क्षति

रासायनिक

तम्बाकू धुआँ, अभ्रक — फेफड़े के कैंसर का मुख्य कारण

जैविक

ऑन्कोजेनिक विषाणु (HPV, हेपेटाइटिस-B)

प्रोटो-ऑन्कोजीन: सामान्य कोशिकाओं में मौजूद जीन, जो उत्परिवर्तन पर ऑन्कोजीन बनकर कोशिकाओं का कैंसरी रूपांतरण करते हैं। टीलोमरेज़ कैंसर कोशिकाओं में सक्रिय होता है (अमरता प्रदान करता है)।

निदान

विधिउपयोग
बायोप्सीसंदिग्ध ऊतक का टुकड़ा लेकर जाँच
हिस्टोपैथोलॉजीऊतक संरचना में परिवर्तन
CT स्कैन / MRIआंतरिक अंगों की त्रिविम इमेजिंग
रुधिर परीक्षणल्यूकीमिया में कोशिका गणना

उपचार

शल्यक्रिया एवं विकिरण

अर्बुद कोशिकाओं को किरणित (इरेडिएट) करके नष्ट किया जाता है।

रसोचिकित्सा एवं प्रतिरक्षा चिकित्सा

कीमोथेरेपी औषधियाँ, γ-इंटरफेरॉन प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रियित करते हैं।

NEET फोकस
  • संस्पर्श संदमन — सामान्य कोशिकाओं में
  • सुदम vs दुर्दम; मेटास्टेसिस — दुर्दम का लक्षण
  • प्रोटो-ऑन्कोजीन → ऑन्कोजीन
  • निदान — बायोप्सी, CT, MRI

6 ड्रग एवं ऐल्कोहल कुप्रयोग

नशीले पदार्थ, व्यसन, निर्भरता, रोकथाम

ड्रग व ऐल्कोहल का कुप्रयोग, विशेषकर नवयुवकों में, चिंता का विषय है। मुख्य ड्रग्स — ओपिऑइड्स, कैनेबिनॉइड्स, कोका एल्केलॉइड्स

मुख्य नशीले पदार्थ

ड्रगस्रोतप्रभाव
ओपिऑइड्स (हिरोइन)पैपेवर सोम्नीफेरम (अफीम) का लेटेक्सअवसादक — शरीर प्रकार्य धीमा
कैनेबिनॉइड्स (मैरिजुआना)कैनेबिस सैटाइवा (भाँग) के पुष्पक्रमहृद-वाहिका तंत्र प्रभावित
कोकेनएरिथ्रोजाइलम कोकाउद्दीपक, डोपामिन परिवहन में बाधा
निकोटीनतम्बाकूअधिवृक्क ग्रंथि को उद्दीपित

तम्बाकू एवं धूम्रपान

तम्बाकू में निकोटीन अधिवृक्क ग्रंथि को उद्दीपित करता है, जिससे एड्रिनलीन व नॉरएड्रिनलीन मुक्त होती हैं — रक्तचाप व हृदय-स्पंदन बढ़ता है। धूम्रपान से कार्बनमोनोक्साइड बढ़ता है, ऑक्सीजन घटती है।
तम्बाकू/धूम्रपान से जुड़े रोग
फुफ्फुस, मूत्राशय, गले, मुख कोटर का कैंसर
श्वसनीशोथ (ब्रोंकाइटिस), वातस्फीति (एम्फीसिमा)
हृदयरोग, जठर व्रण

व्यसन एवं निर्भरता

व्यसन (Tolerance)

बार-बार उपयोग से शरीर के ग्राहियों का सह्य स्तर बढ़ता है — अधिक मात्रा की लत पड़ती है।

निर्भरता (Dependence)

ड्रग अचानक बंद करने पर विनिवर्तन संलक्षण (चिंता, कंपन, मिचली, पसीना) होता है।

कुप्रयोग के दुष्परिणाम

  • शारीरिक — श्वसन/हृद्-पात, कोमा, मृत्यु
  • संक्रमण — अंतःशिरा प्रयोग से एड्स, यकृतशोथ-बी का खतरा
  • व्यवहार — आक्रामकता, हिंसा, एकाकीपन
  • शैक्षिक — प्रदर्शन में कमी, अनुपस्थिति

रोकथाम

समकक्षी दबाव से बचें

बच्चे की पसंद व व्यक्तित्व का सम्मान; क्षमता से अधिक दबाव न डालें।

शिक्षा व परामर्श

असफलताओं को जीवन का हिस्सा समझाएँ; ऊर्जा को स्वस्थ गतिविधियों में लगाएँ।

व्यावसायिक सहायता

मनोवैज्ञानिक, मनोरोगविज्ञानी, व्यसन-मुक्ति कार्यक्रम।

NEET फोकस
  • हिरोइन — डाईएसिटिल मॉर्फीन (अवसादक)
  • मैरिजुआना — कैनेबिस सैटाइवा (हृद-वाहिका)
  • कोकेन — एरिथ्रोजाइलम कोका (उद्दीपक)
  • निकोटीन — तम्बाकू (एड्रिनलीन मोचन)
  • किशोरावस्था — 12–18 वर्ष

NEET फैक्ट‑शीट

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

अवधारणाप्रमुख तथ्य
टाइफॉइडसाल्मोनेला टाइफी → विडाल परीक्षण
निमोनियास्ट्रेप्टोकोकस निमोनी → एल्वियोलाई
मलेरियाप्लैज्मोडियम → मादा एनोफेलीज
अमीबताएंटअमीबा → घरेलू मक्खी
दादमाइक्रोस्पोरम/ट्राइकोफाइटॉन (कवक)
सहज प्रतिरक्षा4 रोध — शारीरिक, कायिकीय, कोशिकीय, साइटोकाइन
प्रतिरक्षीH₂L₂, Y-आकार
कोलोस्ट्रमIgA (निष्क्रिय प्रतिरक्षा)
MALTकुल लसीकाभ ऊतक का 50%
एड्सHIV (रेट्रोवायरस), विलोम ट्रांस्क्रिप्टेज, TH कोशिकाएँ
निदानELISA
हिरोइनपैपेवर सोम्नीफेरम → डाईएसिटिल मॉर्फीन
कोकेनएरिथ्रोजाइलम कोका → डोपामिन परिवहन बाधा
निकोटीनतम्बाकू → अधिवृक्क ग्रंथि उद्दीपन

📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न

विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु

1 दमा (अस्थमा) किस कारण से होता है?

उत्तर: फेफड़ों में मास्ट कोशिकाओं की एलर्जी अनुक्रिया

एलर्जन के संपर्क में आने पर मास्ट कोशिकाओं से हिस्टैमिन जैसे रसायन निकलते हैं, जिससे श्वसन मार्ग संकुचित हो जाता है — यही दमा (अस्थमा) है।

2 MALT मानव शरीर के लसीकाभ ऊतक का कितना प्रतिशत बनाता है?

उत्तर: लगभग 50%

श्लेष्म संबद्ध लसीकाभ ऊतक (MALT) मानव के कुल लसीकाभ ऊतक का ~50% भाग बनाता है।

3 "स्मैक" नामक ड्रग किस पौधे के किस भाग से प्राप्त होती है?

उत्तर: पैपेवर सोम्नीफेरम (अफीम) के लेटेक्स से

अफीम पोस्त के लेटेक्स से मॉर्फीन प्राप्त होती है, जिसके एसीटिलीकरण से हिरोइन (स्मैक) बनती है।

4 टाइफॉइड ज्वर के रोगजनक एवं पुष्टि हेतु परीक्षण का सही युग्म क्या है?

उत्तर: साल्मोनेला टाइफी / विडाल परीक्षण

टाइफॉइड जीवाणु साल्मोनेला टाइफी है, जिसकी पुष्टि विडाल परीक्षण से होती है।

5 कोलोस्ट्रम (पीयूष) में किस प्रतिरक्षी की प्रचुरता होती है?

उत्तर: IgA

दुग्धस्रवण के प्रारंभिक दिनों में माँ द्वारा स्रावित कोलोस्ट्रम में IgA प्रतिरक्षी प्रचुर मात्रा में होती है, जो नवजात शिशु को निष्क्रिय प्रतिरक्षा प्रदान करती है।

6 स्व-प्रतिरक्षा विकार का उदाहरण क्या है?

उत्तर: मायस्थीनिया ग्रेविस

यह एक स्व-प्रतिरक्षा रोग है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली न्यूरोमस्कुलर जंक्शन पर हमला करती है — पेशीय दुर्बलता उत्पन्न होती है।

7 कोकेन किस पौधे से प्राप्त होता है?

उत्तर: एरिथ्रोजाइलम कोका

यह दक्षिण अमेरिकी मूल पौधा है, जिससे कोका एल्केलॉइड (कोकेन) प्राप्त होता है।

8 निम्नलिखित में से कौन स्व-प्रतिरक्षा विकार नहीं है?

उत्तर: अल्जाइमर रोग

अल्जाइमर एक तंत्रिका-अपकर्षी रोग है, स्व-प्रतिरक्षा नहीं। रूमेटॉयड आर्थराइटिस, सोरायसिस, विटिलिगो — ये स्व-प्रतिरक्षा रोग हैं।

9 निम्नलिखित में से कौन सा रोग यौन संचरित नहीं है?

उत्तर: क्षय रोग (टीबी)

टीबी श्वसन मार्ग से फैलने वाला जीवाणु रोग है — यौन संचरित नहीं। सिफलिस, गोनोरिया, जननिक मस्से यौन संचरित हैं।

10 परिपक्वन के पश्चात् लसीकाणु किन द्वितीयक लसीकाभ अंगों में प्रतिजन के साथ पारस्परिक क्रिया करते हैं?

उत्तर: प्लीहा, लसीका ग्रंथियाँ, पेयर पैच

ये तीनों द्वितीयक लसीकाभ अंग हैं, जहाँ लसीकाणु प्रतिजन से मिलते हैं। थाइमस व अस्थि मज्जा प्राथमिक अंग हैं।

अतिरिक्त NEET तथ्य

सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं

महत्वपूर्ण
  • इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–4 प्रश्न (~8–16 अंक) पूछे जाते हैं — लगभग 9% भारांश।
  • सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — रोग-रोगजनक मिलान, प्रतिरक्षा के प्रकार, ड्रग-स्रोत-प्रभाव
तुलनात्मक
  • सक्रिय vs निष्क्रिय प्रतिरक्षा: सक्रिय — शरीर स्वयं बनाता है (टीका); निष्क्रिय — बनी-बनाई मिलती है (कोलोस्ट्रम, प्रतिविष)।
  • प्राथमिक vs द्वितीयक लसीकाभ अंग: प्राथमिक — अस्थि मज्जा, थाइमस (निर्माण/परिपक्वन); द्वितीयक — प्लीहा, लसीका ग्रंथियाँ, टॉन्सिल (प्रतिजन संपर्क)।
तथ्य
  • विडाल परीक्षण — टाइफॉइड; ELISA — एड्स (HIV) निदान।
  • हीमोजोइन — प्लैज्मोडियम द्वारा RBC फटने पर निकलने वाला वर्णक, जो 3–4 दिन के अंतराल पर ज्वर उत्पन्न करता है।
ट्रैप
  • HIV — रेट्रोवायरस: RNA जीनोम → विलोम ट्रांस्क्रिप्टेज → DNA → परपोषी DNA में समावेश।
  • कोकेन — डोपामिन परिवहन में बाधा (न कि डोपामिन उत्पादन बढ़ाना)।
  • कैंसर कोशिकाएँ — टीलोमरेज़ सक्रिय (अमरता प्रदान), निष्क्रिय नहीं।
रणनीति
  • इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — रोग-रोगजनक तालिका, प्रतिरक्षा प्रकार, ड्रग-स्रोत-प्रभाव — इन तीनों पर विशेष ध्यान दें।

संक्षिप्त सार

स्वास्थ्य व रोग

स्वास्थ्य = शारीरिक, मानसिक, सामाजिक स्वस्थता। संक्रामक व असंक्रामक — दो मुख्य रोग प्रकार।

सामान्य संक्रामक रोग

टाइफॉइड, निमोनिया, मलेरिया, अमीबता, फाइलेरियेसिस, दाद — विभिन्न रोगजनकों द्वारा।

प्रतिरक्षा तंत्र

सहज (4 रोध) व उपार्जित (स्मृति आधारित); बी-कोशिका (तरल), टी-कोशिका (CMI); प्रतिरक्षी H₂L₂।

एड्स, कैंसर

HIV (रेट्रोवायरस) → TH कोशिकाएँ नष्ट; कैंसर → संस्पर्श संदमन ह्रास, मेटास्टेसिस।

नशीले पदार्थ

हिरोइन, मैरिजुआना, कोकेन, निकोटीन — स्रोत व प्रभाव; व्यसन व निर्भरता।

NEET फोकस

रोगजनक-रोग मिलान, प्रतिरक्षा प्रकार, ड्रग-स्रोत-प्रभाव — सर्वाधिक पूछे जाने वाले टॉपिक।

? अभ्यास प्रश्न-उत्तर

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें

प्रश्न 1 जन स्वास्थ्य उपायों से संक्रामक रोगों की रोकथाम कैसे होती है?
उत्तर
  • अपशिष्ट व मल का समुचित निपटान — रोगजनकों को जल-मिट्टी में फैलने से रोकना।
  • पेयजल एवं खाद्य स्रोतों की स्वच्छता — जलाशयों की सफाई, विसंक्रमण।
  • रोगवाहकों का नियंत्रण — मच्छरों की प्रजनन स्थलियाँ नष्ट करना, मच्छरदानी, कीटनाशक।
  • टीकाकरण — चेचक का उन्मूलन, पोलियो-डिफ्थीरिया-टिटनस नियंत्रण।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता — शरीर की सफाई, स्वच्छ भोजन-जल।
प्रश्न 2 जैविकी के अध्ययन ने संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने में कैसे सहायता की?
उत्तर
  • टीके (वैक्सीन) — चेचक का उन्मूलन, पोलियो-डिफ्थीरिया-टिटनस नियंत्रण।
  • जैवप्रौद्योगिकी — पुनर्योगज DNA तकनीक से सुरक्षित टीके (जैसे हेपेटाइटिस-B)।
  • प्रतिजैविक — जीवाणु जनित रोगों का प्रभावी उपचार।
  • निदान तकनीकें — विडाल परीक्षण, ELISA से शीघ्र व सटीक निदान।
प्रश्न 3 अमीबता, मलेरिया, एस्केरिएसिस व न्यूमोनिया का संचरण कैसे होता है?
उत्तर
  • अमीबता — संदूषित भोजन/जल; घरेलू मक्खी वाहक।
  • मलेरियामादा एनोफेलीज मच्छर के दंश से।
  • एस्केरिएसिस — संदूषित मिट्टी/जल/भोजन के माध्यम से (ऐस्कैरिस के अंडे)।
  • न्यूमोनिया — संक्रमित व्यक्ति के श्वसन बिंदुक (ड्रॉपलेट्स) को साँस द्वारा लेने से।
प्रश्न 4 प्राथमिक एवं द्वितीयक लसीकाभ अंगों के नाम बताइए।
उत्तर

प्राथमिक लसीकाभ अंग: अस्थि मज्जा (जन्मस्थान), थाइमस (टी-लसीकाणुओं का परिपक्वन)।

द्वितीयक लसीकाभ अंग: प्लीहा, लसीका ग्रंथियाँ, टॉन्सिल, पेयर पैच, अपेंडिक्स।

प्रश्न 5 सक्रिय एवं निष्क्रिय प्रतिरक्षा में अंतर बताइए।
उत्तर
बिंदुसक्रियनिष्क्रिय
प्रतिरक्षी उत्पत्तिशरीर स्वयंबाहर से दी जाती हैं
गतिधीमीतत्काल
अवधिदीर्घकालिकअल्पकालिक
उदाहरणटीकाकरणकोलोस्ट्रम (IgA), प्रतिविष

यह अध्ययन सामग्री मानव स्वास्थ्य एवं रोगों — संक्रामक रोग, प्रतिरक्षा तंत्र, एड्स, कैंसर, ड्रग एवं ऐल्कोहल कुप्रयोग — को सरल, मौलिक एवं परीक्षा-अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिसमें NEET-स्तरीय तथ्य, तुलनात्मक तालिकाएँ एवं विस्तृत प्रश्नोत्तर सम्मिलित हैं।

स्वस्थ जीवन, स्वस्थ समाज — यही जीवन की सततता का आधार है।

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