वंशागति के आणविक आधार — सम्पूर्ण अध्ययन
जीव विज्ञान • अध्याय 5

वंशागति के आणविक आधार

DNA की संरचना, पैकेजिंग, आनुवंशिक पदार्थ की खोज, प्रतिकृति, अनुलेखन, आनुवंशिक कूट, स्थानांतरण, जीन नियमन (लैक ओपेरॉन), मानव जीनोम परियोजना एवं DNA अंगुलिछापी — परीक्षा‑केंद्रित विस्तृत विवेचन।

★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित

1 DNA — संरचना एवं पैकेजिंग

न्यूक्लियोटाइड, द्विकुंडली एवं क्रोमेटिन पैकेजिंग

DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) न्यूक्लियोटाइड्स का एक दीर्घ बहुलक है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में तीन घटक होते हैं — नाइट्रोजनी क्षार, पेंटोस शर्करा (DNA में डीऑक्सीराइबोज, RNA में राइबोज) तथा एक फॉस्फेट समूह

नाइट्रोजनी क्षार दो प्रकार के:

  • प्यूरीन: एडेनीन (A), ग्वानीन (G)
  • पिरिमिडीन: साइटोसीन (C), थाइमीन (T), यूरेसिल (U)
महत्वपूर्ण: साइटोसीन DNA व RNA दोनों में मिलता है; थाइमीन केवल DNA में; यूरेसिल केवल RNA में। क्षार + शर्करा = न्यूक्लियोसाइड; न्यूक्लियोसाइड + फॉस्फेट = न्यूक्लियोटाइड

वाटसन-क्रिक द्विकुंडली मॉडल (1953)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

  • फ्रेडरिक मेस्चर (1869): केंद्रक में अम्लीय पदार्थ 'न्यूक्लिन' (DNA) की खोज।
  • चारगाफ़ का नियम: A = T तथा G = C (प्यूरीन = पिरिमिडीन)।
  • मॉरिस विल्किंस एवं रोजलिंड फ्रैंकलिन: X-रे विवर्तन आँकड़े।
  • जेम्स वाटसन एवं फ्रांसिस क्रिक (1953): DNA की द्विकुंडली संरचना का प्रस्ताव।
विशेषतामान
संरचनादो पॉलीन्यूक्लियोटाइड शृंखलाएँ (प्रतिसमानांतर)
क्षार युग्मनA=T (2 H-बंध), G≡C (3 H-बंध)
कुंडली पिच3.4 nm (प्रति घुमाव ~10 क्षार युग्म)
क्षार युग्म दूरी0.34 nm
कुंडली दिशादक्षिणावर्ती (सर्पिल)
DNA — क्षार युग्मन 5' 3' एडेनीन थाइमीन 2 H-बंध ग्वानीन साइटोसीन 3 H-बंध थाइमीन एडेनीन साइटोसीन ग्वानीन 3' 5'
चित्र 5.1 — DNA में A=T (2 H-बंध) व G≡C (3 H-बंध) का क्षार युग्मन (स्वनिर्मित)

DNA की पैकेजिंग — न्यूक्लियोसोम

मानव कोशिका में DNA की लंबाई लगभग 2.2 मीटर होती है, जो केंद्रक (~10⁻⁶ मीटर) में समा जाती है। DNA ऋणावेशित होता है, जो धनावेशित हिस्टोन प्रोटीनों से बँधकर क्रोमेटिन बनाता है।

न्यूक्लियोसोम
  • हिस्टोन अष्टक: 8 हिस्टोन अणु (2 प्रत्येक H2A, H2B, H3, H4)
  • DNA: ~200 क्षार युग्म हिस्टोन अष्टक के चारों ओर लिपटा
  • दृश्यता: इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में "डोरी पर बीड्स" जैसी
यूक्रोमैटिन बनाम हेटरोक्रोमैटिन: यूक्रोमैटिन (हल्का अभिरंजित) — अनुलेखनिक रूप से सक्रिय; हेटरोक्रोमैटिन (गहरा अभिरंजित) — निष्क्रिय।
NEET फोकस
  • मेस्चर (1869) — DNA/न्यूक्लिन की खोज; वाटसन-क्रिक (1953) — द्विकुंडली मॉडल।
  • चारगाफ़ का नियम — A = T, G = C (A+G = T+C)
  • न्यूक्लियोसोम — ~200 bp DNA + हिस्टोन अष्टक
  • यूक्रोमैटिन (सक्रिय) बनाम हेटरोक्रोमैटिन (निष्क्रिय)

2 आनुवंशिक पदार्थ की खोज

ग्रिफिथ, एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी तथा हर्षे-चेस प्रयोग

ग्रिफिथ का रूपांतरण प्रयोग (1928)

ग्रिफिथ ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनी पर प्रयोग किया।

प्रयोगपरिणाम
S-प्रभेद (जीवित, विषाणुजनित)चूहा मरता है
R-प्रभेद (जीवित, अविषाणुजनित)चूहा जीवित रहता है
S-प्रभेद (ताप-मृत)चूहा जीवित रहता है
S (ताप-मृत) + R (जीवित)चूहा मरता है — रूपांतरण
निष्कर्ष: R-प्रभेद जीवाणु, ताप-मृत S-प्रभेद द्वारा "रूपांतरित" हुए — कोई "रूपांतरण कारक" आनुवंशिक सूचना स्थानांतरित करता है।

एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी (1933-44)

ताप-मृत S कोशिकाओं से विभिन्न जैव रसायन अलग किए:

  • प्रोटीन-पाचक (प्रोटीएज़): रूपांतरण प्रभावित नहीं
  • RNA-पाचक (RNase): रूपांतरण प्रभावित नहीं
  • DNA-पाचक (DNase): रूपांतरण रुक गया
निष्कर्ष: रूपांतरण कारक DNA है।

हर्षे-चेस प्रयोग (1952) — निर्णायक प्रमाण

अल्फ्रेड हर्षे एवं मार्था चेस ने जीवाणुभोजी (T2 फेज) पर प्रयोग किया।

लेबलरेडियोधर्मी तत्वपरिणाम
³²P (DNA-लेबल)फॉस्फोरस (DNA में)जीवाणु में रेडियोधर्मी पाया गया
³⁵S (प्रोटीन-लेबल)सल्फर (प्रोटीन में)जीवाणु में रेडियोधर्मी नहीं पाया गया
निष्कर्ष: DNA ही विषाणु से जीवाणु में प्रवेश करता है — DNA आनुवंशिक पदार्थ है
NEET फोकस
  • ग्रिफिथ (1928) — रूपांतरण सिद्धांत
  • एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी — DNA रूपांतरण कारक
  • हर्षे-चेस (1952) — DNA आनुवंशिक पदार्थ का निर्णायक प्रमाण
  • कुछ विषाणुओं (TMV, रेट्रोवायरस) में RNA आनुवंशिक पदार्थ होता है

3 DNA प्रतिकृति

अर्धसंरक्षी प्रतिकृति, मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग

अर्धसंरक्षी प्रतिकृति

वाटसन एवं क्रिक ने प्रस्तावित किया कि DNA प्रतिकृति अर्धसंरक्षी (सेमीकंजरवेटिव) है — प्रत्येक संतति DNA अणु में एक पैतृक रज्जुक व एक नवसंश्लेषित रज्जुक होती है।

मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग (1958)

मैथ्यू मेसेल्सन एवं फ्रैंकलिन स्टाल ने E. coli में अर्धसंरक्षी प्रतिकृति सिद्ध की:

  • चरण 1: E. coli को ¹⁵NH₄Cl (भारी नाइट्रोजन) में वृद्धि → ¹⁵N-DNA
  • चरण 2: ¹⁴NH₄Cl (सामान्य नाइट्रोजन) में स्थानांतरण
  • चरण 3: विभिन्न समयों पर DNA निकालकर सीज़ियम क्लोराइड घनत्व प्रवणता में अपकेंद्रीकरण
पीढ़ीDNA प्रकार
0 (पैतृक)भारी (¹⁵N/¹⁵N)
I (20 मिनट)संकर (¹⁵N/¹⁴N) — एक पट्टी
II (40 मिनट)संकर + हल्का (¹⁴N/¹⁴N) — दो पट्टियाँ
निष्कर्ष: DNA प्रतिकृति अर्धसंरक्षी है। टेलट एवं सहयोगियों (1958) ने विसिया फाबा (पादप) में भी इसकी पुष्टि की।

प्रतिकृति की क्रियाविधि

एंजाइम/कारककार्य
DNA पॉलीमरेज़न्यूक्लियोटाइडों का बहुलकन (5'→3' दिशा)
DNA लाइगेजओकाज़ाकी खंडों को जोड़ना
प्रतिकृति उद्गम (ori)प्रतिकृति आरंभ का स्थल
अग्रगामी रज्जुकनिरंतर (सतत्) संश्लेषण
पश्चगामी रज्जुकअसंतत संश्लेषण (ओकाज़ाकी खंड)
NEET फोकस
  • DNA प्रतिकृति — अर्धसंरक्षी; प्रमाण — मेसेल्सन-स्टाल (1958, E. coli)
  • DNA पॉलीमरेज़ — केवल 5'→3' दिशा में संश्लेषण
  • ओकाज़ाकी खंड — पश्चगामी रज्जुक पर बनते हैं
  • E. coli में यह कार्य ~2000 bp/सेकंड की दर से ~18 मिनट में पूर्ण

4 अनुलेखन (ट्रांसक्रिप्शन)

DNA से RNA का निर्माण

अनुलेखन DNA की एक रज्जुक से RNA में सूचना के प्रतिलिपिकरण की प्रक्रिया है। इसमें भी पूरकता का सिद्धांत लागू होता है — एडेनिन (A) यूरेसिल (U) के साथ युग्म बनाता है (थाइमीन नहीं)।

अनुलेखन इकाई

भागकार्य
उन्नायक (प्रोमोटर)RNA पॉलीमरेज़ बंधन स्थल; 5' सिरे पर
संरचनात्मक जीनअनुलेखित होने वाला DNA खंड
समापक (टर्मिनेटर)अनुलेखन समाप्ति का संकेत
टेम्पलेट रज्जु3'→5' — RNA संश्लेषण का साँचा
कोडिंग रज्जु5'→3' — mRNA के समान (T→U)

सुकेंद्रकी में RNA प्रक्रमण

सुकेंद्रकी में जीन विखंडित होते हैं — एक्जॉन (व्यक्त/अभिव्यक्त) एवं इंट्रॉन (अव्यक्त/मध्यवर्ती)।

hnRNA प्रक्रमण के चरण
  • कैपिंग: 5' सिरे पर मेथिल ग्वानोसीन ट्राइफॉस्फेट जुड़ना
  • टेलिंग: 3' सिरे पर पॉली-A पुच्छ (200–300 एडेनीन) जुड़ना
  • स्प्लाइसिंग: इंट्रॉन हटाकर एक्जॉन जोड़ना
RNA पॉलीमरेज़उत्पाद
RNA पॉलीमरेज़ IrRNA (28S, 18S, 5.8S)
RNA पॉलीमरेज़ IIhnRNA → mRNA
RNA पॉलीमरेज़ IIItRNA, 5S rRNA, snRNA
NEET फोकस
  • RNA में एडेनिन-यूरेसिल क्षार युग्म (A=U)
  • सुकेंद्री में 3 RNA पॉलीमरेज़ (I, II, III)
  • एक्जॉन — अभिव्यक्त (परिपक्व RNA में); इंट्रॉन — हटाए जाते हैं
  • जीवाणु में अनुलेखन व स्थानांतरण एक साथ (केंद्रक झिल्ली नहीं)

5 आनुवंशिक कूट एवं स्थानांतरण

कोडोन, tRNA, प्रोटीन संश्लेषण

आनुवंशिक कूट

आनुवंशिक कूट न्यूक्लियोटाइड त्रिक (कोडोन) तथा एमीनो अम्लों के बीच संबंध है।

कूट की प्रमुख विशेषताएँ
  • त्रिक: 3 क्षार एक कोडोन बनाते हैं
  • असंदिग्ध: एक कोडोन = एक अमीनो अम्ल
  • अपह्रासित: एक अमीनो अम्ल के लिए >1 कोडोन
  • अल्पविराम-रहित: कोडोन लगातार पढ़े जाते हैं
  • सार्वभौमिक: लगभग सभी जीवों में समान
  • AUG: मेथियोनीन + प्रारंभक कोडोन
  • स्टॉप कोडोन: UAA, UAG, UGA
योगदानकर्ता:
  • जॉर्ज गेमो: कूट त्रिक की परिकल्पना
  • हर गोविंद खुराना: RNA का रासायनिक संश्लेषण
  • मार्शल नीरेनबर्ग: कूट का अर्थ निकालना
  • सेवेरो ओकोआ: पॉलीन्यूक्लियोटाइड फॉस्फोरीलेज़ एंजाइम

tRNA — अनुकूलक अणु

tRNA (अंतरण RNA) फ्रांसिस क्रिक द्वारा परिकल्पित "अनुकूलक अणु" है।

tRNA की संरचना
  • अमीनो अम्ल स्वीकार्य छोर: 3' सिरा — विशिष्ट एमीनो अम्ल जुड़ता है
  • एंटीकोडान फंदा: mRNA कोडोन का पूरक त्रिक
  • द्वितीयक संरचना: क्लोवर पत्ती (तिपतिया) जैसी
  • तृतीयक संरचना: उल्टे L (L) जैसी सघन

स्थानांतरण (ट्रांसलेशन) — प्रोटीन संश्लेषण

चरणविवरण
अमीनोएसिलेशनएमीनो अम्ल + ATP + tRNA → अमीनोएसिल-tRNA
प्रारंभनराइबोसोम mRNA के AUG (स्टार्ट) से बँधता है
दीर्घीकरणपेप्टाइड बंध निर्माण, राइबोसोम कोडोन-दर-कोडोन बढ़ता है
समापनस्टॉप कोडोन पर रिलीज़ फैक्टर जुड़ता है; पॉलीपेप्टाइड मुक्त
राइबोसोम: rRNA (राइबोज़ाइम) पेप्टाइड बंध निर्माण में उत्प्रेरक का कार्य करता है।
NEET फोकस
  • 64 कोडोन में 61 अर्थपूर्ण + 3 स्टॉप (UAA, UAG, UGA)
  • AUG — मेथियोनीन + स्टार्ट कोडोन (दोहरा कार्य)
  • tRNA — "अनुकूलक अणु" (क्रिक द्वारा परिकल्पित)
  • rRNA — राइबोज़ाइम (उत्प्रेरक) का कार्य

6 जीन अभिव्यक्ति का नियमन — लैक ओपेरॉन

प्रोकैरियोट्स में अनुलेखन नियमन का मॉडल

फ्रेंक्वास जैकब एवं जैक्वे मोनाड ने E. coli में लैक ओपेरॉन की खोज की — अनुलेखन स्तर पर जीन नियमन का प्रथम स्पष्ट मॉडल।

लैक ओपेरॉन की संरचना

जीनउत्पादकार्य
i (आई) जीनदमनकारी (रिप्रेसर) प्रोटीनप्रचालक स्थल से बँधकर अनुलेखन रोकता है
Z (जेड) जीनβ-गैलेक्टोसाइडेज़लैक्टोज → ग्लूकोज + गैलेक्टोज
Y (वाई) जीनपरमिएज़लैक्टोज को कोशिका में प्रवेश कराता है
A (ए) जीनट्रांसएसिटाइलेज़लैक्टोज उपापचय में गौण भूमिका

क्रियाविधि

प्रेरक (लैक्टोज) की अनुपस्थिति में
  • दमनकारी प्रोटीन प्रचालक (ऑपरेटर) से बँधता है
  • RNA पॉलीमरेज़ उन्नायक से नहीं बँध पाता
  • अनुलेखन बंद — एंजाइम नहीं बनते
प्रेरक (लैक्टोज) की उपस्थिति में
  • लैक्टोज (प्रेरक) दमनकारी से बँधता है
  • दमनकारी निष्क्रिय हो जाता है
  • RNA पॉलीमरेज़ उन्नायक से बँधता है
  • अनुलेखन सक्रिय — Z, Y, A जीन अभिव्यक्त
ऋणात्मक नियमन: दमनकारी द्वारा नियमन को ऋणात्मक नियमन (नेगेटिव रेगुलेशन) कहते हैं।
NEET फोकस
  • लैक ओपेरॉन — जैकब एवं मोनाड द्वारा खोजा गया
  • 1 नियामक जीन (i) + 3 संरचनात्मक जीन (Z, Y, A)
  • प्रेरक (इंड्यूसर): लैक्टोज (या एलोलैक्टोज)
  • नियमन — ऋणात्मक (नेगेटिव रेगुलेशन)

7 मानव जीनोम परियोजना (HGP)

13 वर्षीय महापरियोजना — 1990 से 2003

HGP एक अंतर्राष्ट्रीय महापरियोजना थी, जिसका उद्देश्य मानव जीनोम के सभी क्षारों का अनुक्रमण करना था।

HGP के लक्ष्य
  • मानव जीनोम में ~20,000–25,000 जीनों की पहचान
  • 3 अरब क्षार युग्मों का अनुक्रमण
  • आँकड़ों का संग्रहण एवं विश्लेषण
  • नई तकनीकों का विकास
  • नैतिक, कानूनी एवं सामाजिक मुद्दों (ELSI) पर विचार
विशेषतातथ्य
कुल क्षार युग्म~3164.7 करोड़ (3.16×10⁹)
जीन संख्या~30,000 (पूर्व अनुमान 80,000–1,40,000 से कम)
प्रोटीन-कोडिंग भाग2% से कम
समरूपता~99.9% न्यूक्लियोटाइड सभी मनुष्यों में समान
सबसे बड़ी जीनडिस्ट्रॉफिन (~2.4 करोड़ क्षार)
सर्वाधिक जीनक्रोमोसोम 1 (2968 जीन)
न्यूनतम जीनY क्रोमोसोम (231 जीन)
SNPs~1.4 करोड़ एकल न्यूक्लियोटाइड बहुरूपता
संवाहक (वेक्टर): DNA खंडों के प्रवर्धन हेतु BAC (बैक्टीरियल आर्टिफिशियल क्रोमोसोम) एवं YAC (यीस्ट आर्टिफिशियल क्रोमोसोम) प्रयुक्त हुए। DNA सीक्वेंसर फ्रेडरिक सेंगर की विधि पर आधारित है।
NEET फोकस
  • HGP — 1990–2003 (13 वर्ष)
  • जीन संख्या — ~30,000 (न कि 80,000–1,40,000)
  • सर्वाधिक जीन — क्रोमोसोम 1 (2968); न्यूनतम — Y (231)
  • प्रोटीन-कोडिंग DNA — 2% से कम
  • संवाहक — BAC, YAC; सीक्वेंसर — सेंगर विधि पर आधारित

8 DNA अंगुलिछापी

VNTR, सदर्न ब्लॉट, व्यक्ति-विशिष्ट प्रोफाइल

DNA अंगुलिछापी (फिंगरप्रिंटिंग) व्यक्ति-विशिष्ट DNA प्रोफाइल बनाने की तकनीक है, जो VNTR (Variable Number of Tandem Repeats — अनुबद्ध पुनरार्तक की विभिन्न संख्या) स्थलों पर बहुरूपता पर आधारित है।

तकनीक के चरण
  • DNA विलगन: नमूने से DNA निकालना
  • प्रतिबंधन एंजाइम पाचन: DNA को खंडों में काटना
  • वैद्युतकणसंचलन (इलेक्ट्रोफोरेसिस): खंडों को आकारानुसार पृथक करना
  • ब्लॉटिंग: खंडों को झिल्ली पर स्थानांतरित करना (सदर्न ब्लॉट)
  • संकरण (हाइब्रिडाइजेशन): लेबल्ड VNTR प्रोब का उपयोग
  • स्वविकिरण चित्रण (ऑटोरेडियोग्राफी): पट्टी प्रारूप का पता लगाना
VNTR: लघुअनुषंगी DNA (मिनी-सेटेलाइट) श्रेणी से संबंधित, प्रत्येक व्यक्ति में भिन्न पुनरावृत्ति संख्या।
उपयोग
  • न्यायालयीन विज्ञान (फोरेंसिक): अपराध स्थल पर मिले DNA से संदिग्ध की पहचान
  • पैतृत्व परीक्षण: जैविक माता-पिता की पुष्टि
  • जनसंख्या एवं विविधता अध्ययन
  • आपदा पीड़ितों की पहचान
NEET फोकस
  • DNA अंगुलिछापी — एलेक जेफ़रीज द्वारा विकसित
  • आधार — VNTR (अनुबद्ध पुनरार्तक की विभिन्न संख्या)
  • विधि — सदर्न ब्लॉट हाइब्रिडाइजेशन पर आधारित
  • PCR से संवेदनशीलता में वृद्धि

NEET फैक्ट‑शीट

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

अवधारणाप्रमुख तथ्य
DNA संरचनावाटसन-क्रिक (1953), द्विकुंडली, A=T, G≡C
न्यूक्लियोसोम~200 bp DNA + हिस्टोन अष्टक (8 अणु)
रूपांतरण खोजग्रिफिथ (1928) — S/R प्रभेद
DNA आनुवंशिक पदार्थएवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी; हर्षे-चेस (1952)
प्रतिकृतिअर्धसंरक्षी — मेसेल्सन-स्टाल (1958)
अनुलेखनDNA→RNA; A→U; 3 RNA पॉलीमरेज़ (सुकेंद्री)
आनुवंशिक कूट61 अर्थपूर्ण + 3 स्टॉप (UAA, UAG, UGA); AUG = स्टार्ट
लैक ओपेरॉनजैकब-मोनाड; i, Z, Y, A; प्रेरक = लैक्टोज
HGP1990–2003; ~30,000 जीन; 2% कोडिंग
DNA अंगुलिछापीएलेक जेफ़रीज; VNTR; सदर्न ब्लॉट

📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न

विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु

1 DNA की अर्धसंरक्षी प्रतिकृति सर्वप्रथम किस जीव में प्रदर्शित की गई?

उत्तर: E. coli

मेसेल्सन एवं स्टाल (1958) ने E. coli में ¹⁵N/¹⁴N समस्थानिक विधि द्वारा अर्धसंरक्षी प्रतिकृति सिद्ध की।

2 रूपांतरण (ट्रांसफॉर्मेशन) की खोज किसने की?

उत्तर: फ्रेडरिक ग्रिफिथ (1928)

ग्रिफिथ ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनी पर प्रयोग कर रूपांतरण सिद्धांत प्रस्तुत किया।

3 हर्षे-चेस प्रयोग में किस रेडियोधर्मी समस्थानिक का उपयोग DNA को लेबल करने के लिए किया गया?

उत्तर: ³²P (फॉस्फोरस)

³²P केवल DNA में मिलता है (प्रोटीन में नहीं); ³⁵S का उपयोग प्रोटीन को लेबल करने के लिए किया गया।

4 AUG कोडोन का क्या विशेष कार्य है?

उत्तर: मेथियोनीन कोडोन + प्रारंभक कोडोन

AUG एकमात्र कोडोन है जो मेथियोनीन कोड करता है तथा स्थानांतरण का प्रारंभ (स्टार्ट) भी करता है।

5 स्टॉप कोडोन कौन-से हैं?

उत्तर: UAA, UAG, UGA

ये तीनों कोडोन किसी भी एमीनो अम्ल को कोड नहीं करते; ये स्थानांतरण की समाप्ति का संकेत देते हैं।

6 लैक ओपेरॉन में Z जीन किस एंजाइम को कोड करता है?

उत्तर: β-गैलेक्टोसाइडेज़

Z जीन β-गैलेक्टोसाइडेज़ को कोड करता है, जो लैक्टोज को ग्लूकोज एवं गैलेक्टोज में तोड़ता है।

7 मानव जीनोम में प्रोटीन-कोडिंग DNA का प्रतिशत कितना है?

उत्तर: 2% से कम

मानव जीनोम का अत्यधिक बड़ा भाग गैर-कोडिंग (इंट्रॉन, पुनरावृत्ति अनुक्रम आदि) है।

8 DNA अंगुलिछापी का आधार क्या है?

उत्तर: VNTR (Variable Number of Tandem Repeats)

VNTR स्थलों पर पुनरावृत्ति संख्या में बहुरूपता (व्यक्ति-विशिष्ट भिन्नता) DNA अंगुलिछापी का आधार है।

9 सुकेंद्रकी में कितने प्रकार के RNA पॉलीमरेज़ पाए जाते हैं?

उत्तर: 3 (RNA पॉलीमरेज़ I, II, III)

RNA पॉलीमरेज़ I (rRNA), II (mRNA), III (tRNA, 5S rRNA, snRNA) का संश्लेषण करता है।

10 DNA में क्षार युग्मों के बीच की दूरी क्या होती है?

उत्तर: 0.34 nm

DNA द्विकुंडली में लगातार दो क्षार युग्मों के बीच 0.34 nm की दूरी होती है; एक पूर्ण घुमाव (3.4 nm) में 10 क्षार युग्म होते हैं।

अतिरिक्त NEET तथ्य

सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं

महत्वपूर्ण
  • इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (~8–12 अंक) पूछे जाते हैं — सर्वाधिक प्रश्न-घनत्व वाले अध्यायों में से एक।
  • सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — आनुवंशिक पदार्थ की खोज (ग्रिफिथ, हर्षे-चेस), प्रतिकृति (मेसेल्सन-स्टाल), आनुवंशिक कूट की विशेषताएँ, लैक ओपेरॉन
तुलनात्मक
  • DNA बनाम RNA: DNA अधिक स्थायी (2'-OH नहीं, थाइमीन); RNA अस्थायी, सूचना स्थानांतरण हेतु उपयुक्त।
  • एक्जॉन बनाम इंट्रॉन: एक्जॉन परिपक्व mRNA में रहते हैं; इंट्रॉन स्प्लाइसिंग द्वारा हटाए जाते हैं।
तथ्य
  • डगमगाहट परिकल्पना (Wobble hypothesis): कोडोन का तीसरा क्षार लचीला होता है, जिससे एक tRNA एक से अधिक कोडोन पहचान सकता है।
  • केंद्रीय सिद्धांत (Central Dogma): DNA → RNA → प्रोटीन; रेट्रोवायरस में RNA → DNA (रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन) भी संभव।
ट्रैप
  • चारगाफ़ का नियम: केवल द्विरज्जुकीय DNA पर लागू — एकरज्जुकीय RNA/DNA पर नहीं।
  • लैक ओपेरॉन: नियमन ऋणात्मक है (दमनकारी द्वारा), धनात्मक नहीं।
रणनीति
  • इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — प्रयोगों के परिणाम (ग्रिफिथ, हर्षे-चेस, मेसेल्सन-स्टाल), आनुवंशिक कूट सारणी की विशेषताएँ, तथा लैक ओपेरॉन की संरचना — इन तीनों पर विशेष ध्यान दें।

संक्षिप्त सार

DNA संरचना

वाटसन-क्रिक द्विकुंडली; A=T, G≡C; न्यूक्लियोसोम (हिस्टोन अष्टक + ~200 bp DNA)

आनुवंशिक पदार्थ

ग्रिफिथ (रूपांतरण), एवेरी-मैकलिओड-मैककार्टी (DNA), हर्षे-चेस (DNA निर्णायक)

प्रतिकृति एवं अनुलेखन

अर्धसंरक्षी प्रतिकृति (मेसेल्सन-स्टाल); अनुलेखन (DNA→RNA); 3 RNA पॉलीमरेज़

आनुवंशिक कूट

61 कोडोन (20 अमीनो अम्ल), 3 स्टॉप (UAA, UAG, UGA); AUG = स्टार्ट + मेथियोनीन

लैक ओपेरॉन

जैकब-मोनाड; i, Z, Y, A; प्रेरक = लैक्टोज; ऋणात्मक नियमन

HGP & DNA फिंगरप्रिंटिंग

HGP (1990-2003, ~30,000 जीन); DNA अंगुलिछापी (VNTR, एलेक जेफ़रीज)

? अभ्यास प्रश्न-उत्तर

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें

प्रश्न 1 DNA में पाए जाने वाले चार नाइट्रोजनी क्षारों के नाम लिखिए तथा उनके युग्मन नियम बताइए।
उत्तर

चार क्षार: एडेनीन (A), थाइमीन (T), ग्वानीन (G), साइटोसीन (C)

क्षार युग्मन नियम:

  • एडेनीन (A) ⇔ थाइमीन (T) — 2 हाइड्रोजन बंध
  • ग्वानीन (G) ⇔ साइटोसीन (C) — 3 हाइड्रोजन बंध
  • चारगाफ़ नियम: A = T, G = C (अतः A+G = T+C)
प्रश्न 2 ग्रिफिथ के रूपांतरण प्रयोग की व्याख्या कीजिए।
उत्तर

ग्रिफिथ (1928) ने स्ट्रेप्टोकोकस निमोनी के दो प्रभेदों पर प्रयोग किया:

  • S-प्रभेद: विषाणुजनित, चिकनी कैप्सूलयुक्त — चूहे की मृत्यु
  • R-प्रभेद: अविषाणुजनित, कैप्सूल-रहित — चूहा जीवित
  • ताप-मृत S-प्रभेद — चूहा जीवित
  • ताप-मृत S + जीवित R — चूहा मरता है; मृत चूहे से जीवित S-प्रभेद प्राप्त

निष्कर्ष: R-प्रभेद, ताप-मृत S-प्रभेद द्वारा "रूपांतरित" हुआ — कोई "रूपांतरण कारक" आनुवंशिक सूचना स्थानांतरित करता है।

प्रश्न 3 हर्षे-चेस प्रयोग से DNA आनुवंशिक पदार्थ कैसे सिद्ध हुआ?
उत्तर

हर्षे एवं चेस (1952) ने T2 जीवाणुभोजी पर प्रयोग किया:

  • ³²P-लेबल्ड फेज: DNA रेडियोधर्मी (प्रोटीन नहीं) — जीवाणु रेडियोधर्मी पाया गया
  • ³⁵S-लेबल्ड फेज: प्रोटीन रेडियोधर्मी (DNA नहीं) — जीवाणु रेडियोधर्मी नहीं पाया गया

निष्कर्ष: केवल DNA ही विषाणु से जीवाणु में प्रवेश करता है — DNA आनुवंशिक पदार्थ है

प्रश्न 4 DNA प्रतिकृति की अर्धसंरक्षी प्रकृति को मेसेल्सन-स्टाल प्रयोग द्वारा कैसे सिद्ध किया गया?
उत्तर
  • चरण 1: E. coli को ¹⁵NH₄Cl (भारी नाइट्रोजन) में वृद्धि → DNA भारी (¹⁵N/¹⁵N)
  • चरण 2: ¹⁴NH₄Cl (सामान्य) माध्यम में स्थानांतरण
  • चरण 3: विभिन्न समयों पर DNA निकालकर सीज़ियम क्लोराइड घनत्व प्रवणता में अपकेंद्रीकरण

परिणाम:

  • पीढ़ी I (20 मिनट) — एक पट्टी (संकर ¹⁵N/¹⁴N)
  • पीढ़ी II (40 मिनट) — दो पट्टियाँ (संकर + हल्का ¹⁴N/¹⁴N)

निष्कर्ष: DNA प्रतिकृति अर्धसंरक्षी है — प्रत्येक संतति DNA में एक पैतृक व एक नई रज्जुक।

प्रश्न 5 अनुलेखन इकाई के विभिन्न भागों के नाम एवं उनके कार्य लिखिए।
उत्तर
  • उन्नायक (प्रोमोटर): 5' सिरे पर — RNA पॉलीमरेज़ बंधन स्थल
  • संरचनात्मक जीन: अनुलेखित होने वाला DNA खंड
  • समापक (टर्मिनेटर): 3' सिरे पर — अनुलेखन समाप्ति का संकेत
  • टेम्पलेट रज्जु: 3'→5' — RNA संश्लेषण का साँचा
  • कोडिंग रज्जु: 5'→3' — mRNA के समान अनुक्रम (T→U)
प्रश्न 6 आनुवंशिक कूट की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर
  • त्रिक: 3 न्यूक्लियोटाइड एक कोडोन बनाते हैं
  • असंदिग्ध: एक कोडोन केवल एक एमीनो अम्ल कोड करता है
  • अपह्रासित (डिजेनेरेट): एक एमीनो अम्ल के लिए एक से अधिक कोडोन
  • अल्पविराम-रहित: कोडोन लगातार, बिना अंतराल के पढ़े जाते हैं
  • सार्वभौमिक: लगभग सभी जीवों में समान
  • AUG: मेथियोनीन + प्रारंभक कोडोन (दोहरा कार्य)
  • स्टॉप कोडोन: UAA, UAG, UGA — स्थानांतरण समाप्ति
प्रश्न 7 लैक ओपेरॉन की संरचना एवं क्रियाविधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर

संरचना:

  • i जीन: दमनकारी (रिप्रेसर) प्रोटीन को कोड करता है
  • Z जीन: β-गैलेक्टोसाइडेज़
  • Y जीन: परमिएज़
  • A जीन: ट्रांसएसिटाइलेज़

क्रियाविधि:

  • प्रेरक (लैक्टोज) अनुपस्थित: दमनकारी प्रचालक (ऑपरेटर) से बँधता है → अनुलेखन बंद
  • प्रेरक (लैक्टोज) उपस्थित: लैक्टोज दमनकारी को निष्क्रिय करता है → RNA पॉलीमरेज़ उन्नायक से बँधता है → अनुलेखन सक्रिय

नियमन ऋणात्मक (नेगेटिव) है।

यह अध्ययन सामग्री वंशागति के आणविक आधार — DNA संरचना, आनुवंशिक पदार्थ की खोज, प्रतिकृति, अनुलेखन, आनुवंशिक कूट, स्थानांतरण, लैक ओपेरॉन, HGP एवं DNA अंगुलिछापी — को सरल, मौलिक एवं परीक्षा-अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिसमें NEET-स्तरीय तथ्य, तुलनात्मक तालिकाएँ एवं विस्तृत प्रश्नोत्तर सम्मिलित हैं।

DNA की यह अद्भुत यात्रा — जीवन की आणविक कहानी।

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