📚 कक्षा 8 · विज्ञान · अध्याय 14

चुम्बक (Magnet)

इस अध्याय में हम चुम्बक के प्रकार, गुण, चुम्बकीय क्षेत्र, विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव, विद्युत चुम्बक, विद्युत घंटी एवं पृथ्वी के चुम्बकीय व्यवहार के बारे में जानेंगे।

🧲 1 चुम्बक – परिचय एवं इतिहास

चुम्बक (Magnet): वे पदार्थ जो लोहे या लोहे से बनी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं, चुम्बक कहलाते हैं।

  • प्राकृतिक चुम्बक: प्रकृति में पाया जाने वाला चुम्बक – मैग्नेटाइट (लौह चुम्बकीय अयस्क) – Fe₃O₄।
  • कृत्रिम चुम्बक: मानव द्वारा निर्मित – लोहा, निकिल, कोबाल्ट आदि से बनाए जाते हैं।
  • आकृति के आधार पर: दंड चुम्बक, नाल चुम्बक, चुम्बकीय सुई, चुम्बकीय कम्पास।
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दंड चुम्बक
नाल चुम्बक
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चुम्बकीय सुई
🧭
चुम्बकीय कम्पास
चित्र 14.3: विभिन्न प्रकार के कृत्रिम चुम्बक

🧲 चुम्बक: लोहे को आकर्षित करने वाले पदार्थ – प्राकृतिक (मैग्नेटाइट) एवं कृत्रिम।

🔘 2 चुम्बक के प्रकार – स्थाई एवं अस्थाई

🔹 स्थाई चुम्बक (Permanent Magnet)

  • परिभाषा: जिस चुम्बक में चुम्बकत्व का गुण स्थाई होता है।
  • सामग्री: लोहा, निकिल, कोबाल्ट – इनके मिश्र धातु (अल्निको, फेराइट)।
  • विशेषता: चुम्बकत्व शीघ्र नष्ट नहीं होता – लम्बे समय तक उपयोगी।
  • उदाहरण: दंड चुम्बक, नाल चुम्बक।

🔹 अस्थाई चुम्बक (Temporary Magnet)

  • परिभाषा: जिस चुम्बक में चुम्बकत्व का गुण स्थाई नहीं रहता।
  • सामग्री: नर्म (मुलायम) लोहा
  • निर्माण: नर्म लोहे के चारों ओर कुण्डली में धारा प्रवाहित करके – विद्युत चुम्बक
  • विशेषता: धारा चालू होने पर चुम्बकत्व उत्पन्न, धारा बन्द करने पर समाप्त
स्थाई चुम्बकअस्थाई चुम्बक
चुम्बकत्व स्थाईचुम्बकत्व स्थाई नहीं
लोहा, निकिल, कोबाल्टनर्म लोहा
धारा की आवश्यकता नहींधारा की आवश्यकता
दंड चुम्बक, नाल चुम्बकविद्युत चुम्बक

🔘 स्थाई चुम्बक: सदैव चुम्बकीय – अस्थाई चुम्बक: विद्युत चुम्बक (धारा पर निर्भर)।

3 चुम्बक के महत्वपूर्ण गुण

🔹 1. चुम्बक में सदैव दो ध्रुव होते हैं

  • उत्तरी ध्रुव (N): उत्तर दिशा की ओर रुकने वाला सिरा।
  • दक्षिणी ध्रुव (S): दक्षिण दिशा की ओर रुकने वाला सिरा।
  • महत्व: ध्रुवों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।
  • चुम्बक को तोड़ने पर भी प्रत्येक टुकड़ा नया चुम्बक (N-S) बन जाता है।

🔹 2. आकर्षण एवं प्रतिकर्षण

  • असमान ध्रुव (N-S): आकर्षण होता है।
  • समान ध्रुव (N-N या S-S): प्रतिकर्षण होता है।

🔹 3. आकर्षण बल – ध्रुवों पर अधिकतम

  • चुम्बक के सिरों (ध्रुवों) पर आकर्षण बल सबसे अधिक होता है।
  • मध्य भाग में न्यूनतम आकर्षण।

🔹 4. चुम्बक दिशा निर्देशित करता है

  • स्वतंत्रतापूर्वक लटकाने पर उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकता है।
N S
आकर्षण (N–S)
N N
प्रतिकर्षण (N–N)
चुम्बक का आकर्षण एवं प्रतिकर्षण

चुम्बक के गुण: दो ध्रुव (N/S), असमान में आकर्षण, समान में प्रतिकर्षण, सिरों पर बल अधिकतम।

🌀 4 चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field)

चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field): चुम्बक के चारों ओर का वह क्षेत्र जिसमें चुम्बकीय प्रभाव का अनुभव होता है।

  • कम्पास सुई द्वारा चुम्बकीय क्षेत्र का पता लगाया जा सकता है।
  • चुम्बक से दूर जाने पर क्षेत्र का मान कम होता जाता है।
  • चुम्बक के ध्रुव के पास क्षेत्र अधिक होता है।
  • चुम्बकीय प्रभाव लोहे की चादर के आर-पार नहीं निकलता, परन्तु काँच, दफ्ती के आर-पार निकल जाता है।

🌀 चुम्बकीय क्षेत्र: चुम्बक के चारों ओर प्रभाव का क्षेत्र – कम्पास सुई द्वारा ज्ञात।

〰️ 5 चुम्बकीय बल रेखाएँ (Magnetic Field Lines)

चुम्बकीय बल रेखाएँ: वे काल्पनिक रेखाएँ जो चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को निरूपित करती हैं।

  • परिभाषा: चुम्बकीय बल रेखा के किसी बिन्दु पर खींची गयी स्पर्श रेखा उस बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती है।
  • लोहे के बुरादे द्वारा प्रदर्शित – नियमित वृत्ताकार आकृति।
  • दिशा: चुम्बक के बाहर N से S की ओर, अन्दर S से N की ओर।
  • रेखाएँ कभी एक-दूसरे को नहीं काटतीं
N S N→S S→N
चुम्बकीय बल रेखाएँ
चित्र 14.11: चुम्बकीय बल रेखाएँ (लोहे के बुरादे द्वारा)

〰️ बल रेखाएँ: काल्पनिक रेखाएँ – दिशा N से S (बाहर), S से N (अन्दर) – कभी नहीं काटतीं।

6 विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

खोज: सन् 1820 में हैंस क्रिश्चियन ओरस्टेड (डेनमार्क) ने पाया कि विद्युत धारा तथा चुम्बकत्व का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है।

  • प्रयोग: चालक तार में धारा प्रवाहित करने पर उसके चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है।
  • चुम्बकीय सुई विचलित हो जाती है – धारा का चुम्बकीय प्रभाव।
  • धारा की दिशा बदलने पर सुई विपरीत दिशा में विचलित होती है।
तार सुई विचलित सुई
ओरस्टेड का प्रयोग
चित्र 14.13: विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव

ओरस्टेड का प्रयोग: धारावाही तार के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है – विद्युत चुम्बकत्व का आधार।

🔋 7 विद्युत चुम्बक – निर्माण एवं उपयोग

विद्युत चुम्बक (Electromagnet): लोहे के बेलन (नर्म लोहे की पट्टी) पर कुण्डली में धारा प्रवाहित करने पर बनने वाला अस्थाई चुम्बक

  • निर्माण: नर्म लोहे के चारों ओर ताँबे के तार की कुण्डली लपेटकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।
  • कार्य: धारा प्रवाहित होने पर चुम्बक बन जाता है, धारा रुकने पर चुम्बकत्व समाप्त हो जाता है।

🔹 विद्युत चुम्बक के उपयोग

  • भारी सामान (लोहे की छीलन, टुकड़े) उठाना।
  • विद्युत उपकरण: विद्युत घंटी, टेलीफोन, पंखा, मिक्सर-ग्राइंडर, कपड़े धोने की मशीन।
  • उद्योगों में: अचुम्बकीय पदार्थों से चुम्बकीय पदार्थ (लोहा, निकिल, कोबाल्ट) अलग करना।
  • चिकित्सा में: घाव/आँख में लोहे के छोटे-छोटे कण निकालना।

🔋 विद्युत चुम्बक: नर्म लोहा + कुण्डली + धारा – अस्थाई चुम्बक – अनेक उपयोग।

🔔 8 विद्युत घंटी (Electric Bell) – कार्यविधि

विद्युत घंटी (Electric Bell): विद्युत चुम्बक पर आधारित उपकरण जो ध्वनि उत्पन्न करता है।

🔹 संरचना

  • लोह-क्रोड (Iron Core): जिस पर ताँबे के तार की कुण्डली लिपटी है – विद्युत चुम्बक।
  • आर्मेचर (Armature): लोहे का बना, एक सिरे पर हथौड़ा जुड़ा होता है।
  • घंटी (Gong/Bell): ध्वनि उत्पन्न करने वाला भाग।
  • अन्तरायित्र (Interrupter): परिपथ को बार-बार खोलने-बंद करने की युक्ति।

🔹 कार्यविधि

  • 1. कुंजी दबाने पर कुण्डली में धारा प्रवाहित होती है → विद्युत चुम्बक बनता है।
  • 2. विद्युत चुम्बक आर्मेचर को अपनी ओर आकर्षित करता है → हथौड़ा घंटी पर टकराता है → ध्वनि
  • 3. आर्मेचर के खिंचने पर सम्पर्क टूट जाता है → धारा रुक जाती है → चुम्बकत्व समाप्त
  • 4. कमानी आर्मेचर को वापस लाती है → सम्पर्क पुनः जुड़ता है → धारा पुनः प्रवाहित।
  • 5. यह चक्र स्वतः चलता रहता है – घंटी लगातार बजती है।
🔔
विद्युत घंटी
विद्युत चुम्बक + आर्मेचर + अन्तरायित्र
चित्र 14.14: विद्युत घंटी की कार्यविधि

🔔 विद्युत घंटी: विद्युत चुम्बक, आर्मेचर, अन्तरायित्र – स्वतः बजने वाला परिपथ।

🌍 9 पृथ्वी का चुम्बक की भाँति व्यवहार

पृथ्वी – एक विशाल चुम्बक: पृथ्वी इस प्रकार व्यवहार करती है जैसे इसके अन्दर एक बहुत शक्तिशाली चुम्बक रखा हो।

  • ध्रुवों की स्थिति:
    • चुम्बक का दक्षिणी ध्रुव → पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव (भौगोलिक उत्तर) की ओर।
    • चुम्बक का उत्तरी ध्रुव → पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव (भौगोलिक दक्षिण) की ओर।

🔹 प्रमाण/तथ्य

  • 1. स्वतंत्रतापूर्वक लटकी चुम्बकीय सुई उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकती है।
  • 2. पृथ्वी में गड़े लोहे के टुकड़े चुम्बक बन जाते हैं।
  • 3. प्रयोग द्वारा – बड़े चुम्बक के ऊपर छोटे चुम्बक को लटकाने पर उसकी स्थिति पृथ्वी पर चुम्बक के व्यवहार के समान होती है।
S N भौगोलिक उत्तर भौगोलिक दक्षिण
पृथ्वी – चुम्बक
चित्र 14.15: पृथ्वी चुम्बक की भाँति व्यवहार करती है

🌍 पृथ्वी – चुम्बक: चुम्बक का S ध्रुव उत्तर की ओर, N ध्रुव दक्षिण की ओर – कम्पास इसी पर आधारित।

📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)

🧲 चुम्बक: लोहे को आकर्षित करने वाले पदार्थ – प्राकृतिक (मैग्नेटाइट) एवं कृत्रिम।
🔘 स्थाई चुम्बक: सदैव चुम्बकीय – अस्थाई: विद्युत चुम्बक (धारा पर निर्भर)।
गुण: दो ध्रुव (N/S), असमान में आकर्षण, समान में प्रतिकर्षण।
🌀 चुम्बकीय क्षेत्र: चुम्बक के चारों ओर प्रभाव का क्षेत्र – कम्पास द्वारा ज्ञात।
〰️ बल रेखाएँ: काल्पनिक – N से S (बाहर), S से N (अन्दर) – कभी नहीं काटतीं।
ओरस्टेड: धारावाही तार के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र – विद्युत चुम्बकत्व का आधार।
🔋 विद्युत चुम्बक: नर्म लोहा + कुण्डली + धारा – भारी सामान उठाना, उपकरण।
🔔 विद्युत घंटी: विद्युत चुम्बक + आर्मेचर + अन्तरायित्र – स्वतः बजने वाला परिपथ।
🌍 पृथ्वी – चुम्बक: S ध्रुव उत्तर की ओर, N ध्रुव दक्षिण की ओर – कम्पास इसी पर आधारित।

🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)

📝 अभ्यास क्विज़

स्कोर: 0/0

✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।

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