विद्युत (Electricity)
इस अध्याय में हम विद्युत धारा, विभवान्तर, प्रतिरोध, विद्युत धारा के स्रोत, प्रभाव, परिपथ, चालक/रोधी, सुरक्षा उपाय तथा मापन यंत्रों के बारे में जानेंगे।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
विद्युत धारा (Electric Current): आवेश के प्रवाह की दर को विद्युत धारा कहते हैं।
- सूत्र: I = Q / t (जहाँ I = धारा, Q = आवेश, t = समय)
- SI मात्रक: ऐम्पियर (A) – 1 ऐम्पियर = 1 कूलॉम/सेकण्ड
- आवेश का SI मात्रक कूलॉम (C) है।
- धारा की दिशा – धनावेश के प्रवाह की दिशा में (इलेक्ट्रॉनों के विपरीत)।
- विभवान्तर (Potential Difference): दो बिन्दुओं के बीच विद्युत विभव का अन्तर – मात्रक वोल्ट (V)।
- प्रतिरोध (Resistance): धारा के प्रवाह में विरोध – मात्रक ओम (Ω) – ओम का नियम: V = I R
⚡ विद्युत धारा: I = Q/t – SI मात्रक ऐम्पियर (A) – ओम का नियम: V = IR
🔹 प्राथमिक सेल (Primary Cell)
- परिभाषा: जिन्हें पुनः आवेशित नहीं किया जा सकता – रासायनिक क्रिया अनुक्रमणीय।
- उदाहरण: लेक्लांशी सेल, डेनियल सेल, वोल्टीय सेल, शुष्क सेल (Dry Cell), बटन सेल।
- आन्तरिक प्रतिरोध: अधिक होता है।
- शुष्क सेल की संरचना:
- बाहरी धातु (जस्ता) – ऋण (-) ध्रुव
- केन्द्र में कार्बन की छड़ – ऊपर पीतल की टोपी – धन (+) ध्रुव
- भरे हुए पदार्थ: MnO₂ + कार्बन चूर्ण (काला), NH₄Cl (सफेद पेस्ट)
🔹 द्वितीयक सेल (Secondary Cell)
- परिभाषा: जिन्हें पुनः आवेशित किया जा सकता है – विद्युत ऊर्जा → रासायनिक ऊर्जा (आवेशन), रासायनिक → विद्युत (निरावेशन)।
- उदाहरण: सीसा संचायक सेल (Lead accumulator), निकेल-कैडमियम सेल (Ni-Cd)।
- आन्तरिक प्रतिरोध: कम होता है।
- बैटरी: दो या अधिक सेलों का संयोजन – सीसा संचायक सेल को बैटरी कहा जाता है।
| प्राथमिक सेल | द्वितीयक सेल |
|---|---|
| आंतरिक प्रतिरोध अधिक | आंतरिक प्रतिरोध कम |
| पुनः आवेशित नहीं कर सकते | पुनः आवेशित कर सकते हैं |
| घड़ी, टॉर्च, रिमोट में | कार, ट्रक, इनवर्टर में |
🔹 जनरेटर (Generator)
- कार्य: यांत्रिक ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
- बड़े पावर स्टेशनों में जनरेटर चलाने के लिए जल ऊर्जा या भाप ऊर्जा का उपयोग।
- उत्पादित धारा प्रत्यावर्ती धारा (AC) होती है – 220/440 वोल्ट पर घरों तक पहुँचती है।
🔋 स्रोत: प्राथमिक सेल (शुष्क सेल), द्वितीयक (संचायक), जनरेटर – AC धारा।
🔹 1. ऊष्मीय प्रभाव (Heating Effect)
- चालक में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर ऊष्मा उत्पन्न होती है।
- विद्युत बल्ब: टंगस्टन के तन्तु (फिलामेन्ट) का उपयोग – गर्म होकर श्वेत तप्त → प्रकाश।
- बल्ब में नाइट्रोजन/आर्गन गैस भरी जाती है (वायु निकालकर)।
- उपकरण: हीटर, इस्त्री, टोस्टर, आदि।
🔹 2. चुम्बकीय प्रभाव (Magnetic Effect)
- धारावाही चालक के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है।
- अमीटर, वोल्टमीटर इसी प्रभाव पर कार्य करते हैं।
- विद्युत चुम्बक: कुंडली में धारा प्रवाहित करके चुम्बक बनाना।
🔹 3. रासायनिक प्रभाव (Chemical Effect)
- कुछ द्रवों (नमक का घोल, अम्ल, क्षार) में धारा प्रवाहित करने पर रासायनिक विघटन होता है।
- विद्युत लेपन (Electroplating), धातुओं का निष्कर्षण एवं शोधन।
- वोल्टामीटर (Voltameter): रासायनिक प्रभाव पर आधारित उपकरण।
🔥 प्रभाव: ऊष्मीय (बल्ब), चुम्बकीय (अमीटर), रासायनिक (विद्युत लेपन)।
विद्युत परिपथ (Electric Circuit): विद्युत धारा के प्रवाह के बन्द मार्ग को विद्युत परिपथ कहते हैं।
🔹 परिपथ में प्रयुक्त अवयव एवं उनके संकेत (प्रतीक)
| अवयव | प्रतीक |
|---|---|
| सेल (Cell) | + | | - |
| बैटरी (Battery) | + | | | | - |
| प्रतिरोध (Resistor) | —\/\/\/— |
| बल्ब (Bulb) | —(💡)— |
| कुंजी (Switch – खुली) | —o o— |
| कुंजी (Switch – बंद) | —o— |
| अमीटर (Ammeter) | —(A)— |
| वोल्टमीटर (Voltmeter) | —(V)— |
| संयोजक तार (Wire) | ——— |
🔌 परिपथ: बन्द मार्ग – सेल, बल्ब, कुंजी, अमीटर, वोल्टमीटर – प्रतीकों द्वारा प्रदर्शित।
विद्युत चालक (Conductors): जिन पदार्थों में विद्युत धारा का प्रवाह हो सकता है।
- उदाहरण: ताँबा, ऐलुमीनियम, चाँदी, ग्रेफाइट, पारा, लोहा।
- धातुएँ प्रायः चालक होती हैं (आयनों/इलेक्ट्रॉनों के कारण)।
विद्युतरोधी (Insulators): जिन पदार्थों में विद्युत धारा का प्रवाह नहीं होता।
- उदाहरण: रबर, प्लास्टिक, सूखा कपड़ा, लकड़ी, काँच, चीनी मिट्टी।
- इनका उपयोग सुरक्षा के लिए किया जाता है (तारों पर इन्सुलेशन)।
🔌 चालक: ताँबा, ऐलुमीनियम – रोधी: रबर, प्लास्टिक – सुरक्षा हेतु रोधी का उपयोग।
फ्यूज (Fuse): कम गलनांक वाले मिश्र धातु का तार – परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
- जब अत्यधिक धारा बहती है, तो फ्यूज गर्म होकर पिघल जाता है – परिपथ टूट जाता है – उपकरण सुरक्षित रहते हैं।
🔹 सुरक्षा सावधानियाँ
- ⚠️ खुले तारों को न छूएँ – विद्युत आघात का खतरा।
- ⚠️ भीगे हाथों से स्विच न छूएँ – पानी विद्युत का चालक है।
- ⚠️ तारों पर अच्छे विद्युत रोधी लेप (इन्सुलेशन) हो।
- ⚠️ मानक (ISI) उपकरणों का ही प्रयोग करें।
- ⚠️ अर्थिंग (Earthing) – उदासीन तार को पृथ्वी से जोड़ना – आवश्यक।
- ⚠️ विद्युत कार्य करते समय रबड़ के दस्ताने पहनें।
- ⚠️ प्रत्येक परिपथ में फ्यूज अवश्य लगाएँ।
- ⚠️ खतरे की स्थिति में मेन्स स्विच ऑफ कर दें।
🛡️ सुरक्षा: फ्यूज (श्रेणीक्रम), रोधी लेप, भीगे हाथों से बचें, अर्थिंग, मेन्स ऑफ।
🔹 अमीटर (Ammeter)
- कार्य: विद्युत परिपथ में धारा का मापन – मात्रक ऐम्पियर (A)।
- संयोजन: परिपथ में श्रेणीक्रम (Series) में जोड़ा जाता है।
- प्रतीक: —(A)—
- धारा के चुम्बकीय प्रभाव पर आधारित।
🔹 वोल्टमीटर (Voltmeter)
- कार्य: परिपथ के दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर का मापन – मात्रक वोल्ट (V)।
- संयोजन: परिपथ में समान्तर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है।
- प्रतीक: —(V)—
- धारा के चुम्बकीय प्रभाव पर आधारित।
| अमीटर (Ammeter) | वोल्टमीटर (Voltmeter) |
|---|---|
| धारा मापता है (A) | विभवान्तर मापता है (V) |
| श्रेणीक्रम में जोड़ते हैं | समान्तर क्रम में जोड़ते हैं |
| प्रतीक (A) | प्रतीक (V) |
📊 अमीटर: श्रेणी में (धारा) – वोल्टमीटर: समान्तर में (विभवान्तर)।
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