दाब (Pressure)
इस अध्याय में हम दाब, वायुमण्डलीय दाब, द्रवों में दाब,
उत्प्लावन बल, प्लवन का सिद्धान्त, आर्कमिडीज का सिद्धान्त,
तथा दाब के दैनिक जीवन में उपयोग के बारे में विस्तार से जानेंगे।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
दाब (Pressure): किसी तल पर लगने वाले अभिलम्बवत् बल (Normal Force) को क्षेत्रफल (Area) से विभाजित करने पर प्राप्त मान को दाब कहते हैं।
- सूत्र: दाब = बल / क्षेत्रफल अर्थात् P = F/A
- SI मात्रक: पास्कल (Pascal – Pa) = न्यूटन/मीटर² (N/m²)
- अन्य मात्रक: वायुमण्डल (atm), बार (bar), पारे का cm/cm
- बल (Force): किसी वस्तु पर लगने वाला धक्का या खिंचाव – SI मात्रक न्यूटन (N)।
- दाब क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है – क्षेत्रफल बढ़ने पर दाब घटता है और क्षेत्रफल घटने पर दाब बढ़ता है।
📌 दाब: क्षेत्रफल कम होने पर दाब अधिक होता है – उदा: चाकू की धार नुकीली होती है।
- वायुमण्डल: पृथ्वी के चारों ओर वायु का आवरण – इसका भार ही वायुमण्डलीय दाब का कारण है।
- सामान्य वायुदाब: समुद्र तल पर वायुमण्डलीय दाब 76 cm पारे के स्तम्भ के दाब के बराबर होता है।
- मान (SI): 1.013 × 10⁵ N/m² (या 1.013 × 10⁵ Pa) – इसे प्रामाणिक वायुदाब कहते हैं।
- ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब कम हो जाता है (पर्वतों पर दाब कम, समुद्र तल पर अधिक)।
- वायुदाब में परिवर्तन से मौसम पर प्रभाव पड़ता है – कम दाब → बादल/वर्षा; अधिक दाब → साफ मौसम।
🌤️ प्रामाणिक वायुदाब: 1.013 × 10⁵ Pa = पारे के 76 cm स्तम्भ का दाब।
🔹 पारा दाबमापी (Mercury Barometer)
- एक लम्बी काँच की नली (1 मीटर) जो पारे से भरी होती है।
- नली को उल्टा करके पारे से भरे पात्र में रखा जाता है।
- पारे का स्तम्भ 76 cm ऊँचाई पर स्थिर हो जाता है – वायुमण्डलीय दाब के कारण।
- वायुदाब कम होने पर पारे का स्तम्भ 76 cm से कम, अधिक होने पर 76 cm से अधिक हो जाता है।
🔹 निर्वात दाबमापी (Aneroid Barometer)
- घड़ी की आकृति का – इसमें द्रव का प्रयोग नहीं होता।
- एक धातु का डिब्बा जिसके अन्दर हवा निकाली जाती है – ऊपरी सतह लहरदार एवं सूक्ष्मग्राही।
- वायुदाब बढ़ने पर सतह अन्दर दबती है, दाब कम होने पर बाहर उठती है।
- इस गति को लीवर द्वारा संकेतक (Pointer) पर प्रदर्शित किया जाता है।
- लाभ: इसे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता है।
📏 दाबमापी: पारा दाबमापी (76 cm Hg) और निर्वात दाबमापी (यात्रा के लिए उपयुक्त)।
द्रव (Liquid) अपने भार के कारण दाब उत्पन्न करता है।
- द्रव दाब का सूत्र: P = ρgh (जहाँ ρ = द्रव का घनत्व, g = गुरुत्वीय त्वरण, h = ऊँचाई/गहराई)
- द्रव की पेंदी पर दाब: गहराई बढ़ने पर दाब बढ़ता है – (प्रयोग: गुब्बारे वाली नली – पानी डालने पर गुब्बारा फूलता है)।
- द्रव की दीवारों पर दाब: द्रव सभी दिशाओं में दाब डालता है – (प्रयोग: छिद्र वाली बोतल से पानी बाहर निकलता है)।
- द्रव के अन्दर दाब: गहराई पर दाब अधिक – पानी के अन्दर जाने पर कानों पर दाब महसूस होता है।
💧 द्रव दाब: P = ρgh – गहराई बढ़ने पर दाब बढ़ता है – द्रव सभी दिशाओं में दाब डालता है।
उत्प्लावन बल (Buoyant Force): किसी वस्तु को द्रव में डुबाने पर द्रव द्वारा ऊपर की ओर लगाया गया बल।
- अनुभव: ईट को पानी में डुबाने पर वह हल्की लगती है – उत्प्लावन बल ऊपर की ओर कार्य करता है।
- कारण: वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव का भार = उत्प्लावन बल।
- आयतन विस्थापन: वस्तु अपने आयतन के बराबर द्रव विस्थापित करती है।
🔹 प्लवन (Floating) – तैरने की स्थितियाँ
- W > उत्प्लावन बल: वस्तु डूब जाती है (घनत्व अधिक)।
- W = उत्प्लावन बल: वस्तु पूरी तरह डूबी हुई तैरती है (घनत्व बराबर)।
- W < उत्प्लावन बल: वस्तु सतह पर तैरती है – कुछ अंश डूबा, कुछ ऊपर (घनत्व कम)।
- प्लवन का सिद्धान्त: वस्तु का भार उत्प्लावन बल के बराबर या कम होने पर वस्तु तैरती रहती है।
⛵ प्लवन: वस्तु तब तैरती है जब उसका भार ≤ उत्प्लावन बल – घनत्व कम होने पर तैरती है।
आर्कमिडीज का सिद्धान्त: जब किसी वस्तु को किसी द्रव में पूर्णतः या आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो उस पर ऊपर की ओर एक बल लगता है, जो उसके द्वारा विस्थापित द्रव के भार के बराबर होता है।
- उत्प्लावन बल = विस्थापित द्रव का भार
- अनुप्रयोग: जहाज, पनडुब्बी, हाइड्रोमीटर, मछली का तैरना, आदि।
- भार में कमी: वस्तु का आभासी भार = वास्तविक भार – उत्प्लावन बल।
⚖️ आर्कमिडीज का सिद्धान्त: वस्तु द्वारा विस्थापित द्रव का भार = उत्प्लावन बल – जहाज, पनडुब्बी, हाइड्रोमीटर।
घनत्व (Density): किसी पदार्थ के एकांक आयतन में स्थित द्रव्यमान को घनत्व कहते हैं।
- सूत्र: घनत्व (ρ) = द्रव्यमान (m) / आयतन (V)
- SI मात्रक: किग्रा/मी³ (kg/m³)
- पानी का घनत्व: 1 g/cm³ = 1000 kg/m³
- पारे का घनत्व: 13.6 g/cm³ – अत्यधिक उच्च
🔹 आपेक्षिक घनत्व (Relative Density)
- किसी पदार्थ का घनत्व और पानी के घनत्व का अनुपात आपेक्षिक घनत्व कहलाता है।
- सूत्र: आपेक्षिक घनत्व = (पदार्थ का घनत्व) / (पानी का घनत्व)
- पारे का आपेक्षिक घनत्व: 13.6 (पानी से 13.6 गुना भारी)
- यह मात्रहीन (dimensionless) राशि है।
⚗️ घनत्व: द्रव्यमान/आयतन – पानी 1000 kg/m³, पारा 13600 kg/m³ – आपेक्षिक घनत्व मात्रहीन।
🔹 जल पम्प (Water Pump) – कार्यविधि
- वाल्व (Valves): दो वाल्व – V₁ (पिस्टन वाल्व) और V₂ (नली वाल्व)।
- हैंडिल ऊपर: पिस्टन नीचे → V₁ खुलता है, V₂ बंद → वायु बाहर।
- हैंडिल नीचे: पिस्टन ऊपर → V₁ बंद, V₂ खुलता → पानी अन्दर चढ़ता है।
- इस प्रकार लगातार हैंडिल ऊपर-नीचे करने से पानी निकलता रहता है।
- सीमा: वायुमण्डलीय दाब के कारण 10 मीटर से अधिक गहराई से जल नहीं निकाला जा सकता।
🔹 साइकिल पम्प (Bicycle Pump) – कार्यविधि
- पिस्टन को बाहर खींचने पर वाशर सिकुड़ता है → बाहर की वायु अन्दर भरती है।
- पिस्टन को अन्दर धकेलने पर वाल्व बन्द होता है → वायु दबाव में ट्यूब में जाती है।
🔹 दाब के अन्य व्यावहारिक उपयोग
- नुकीली वस्तुएँ: सुई, चाकू, पिन – क्षेत्रफल कम → दाब अधिक → आसानी से काट/छेद।
- चौड़ी बेल्ट: भारी वस्तुओं के लिए – क्षेत्रफल अधिक → दाब कम → सतह को नुकसान नहीं।
- स्कीइंग: स्की का क्षेत्रफल अधिक → दाब कम → बर्फ में नहीं धंसते।
- ट्रैक्टर के चौड़े टायर: कीचड़ में नहीं धंसते – दाब कम।
⚙️ दाब के उपयोग: जल पम्प (2 वाल्व), साइकिल पम्प, नुकीली वस्तुएँ (उच्च दाब), चौड़ी सतहें (कम दाब)।
📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)
🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)
📝 अभ्यास क्विज़
✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।