📚 कक्षा 8 · विज्ञान · अध्याय 6

कोशिका एवं ऊतक

इस अध्याय में हम कोशिका की संरचना एवं कार्य, पादप एवं जन्तु कोशिका में अन्तर,
ऊतक, तंत्रिका तंत्र, अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ तथा पौधों में समन्वयन के बारे में विस्तार से जानेंगे।

🧬 1 कोशिका – रचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई

कोशिका (Cell): शरीर की रचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई – जीवन की आधारभूत संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई।

🔹 मकान और कोशिका की तुलना

  • ईंट → कोशिका
  • ईंटों का समूह → ऊतक
  • दीवार → अंग
  • कमरा → अंग तंत्र
  • मकान → पूरा शरीर

🔹 एककोशिकीय एवं बहुकोशिकीय जीव

  • एककोशिकीय (Unicellular): अमीबा, पैरामीशियम, यूग्लीना – एक ही कोशिका से बने।
  • बहुकोशिकीय (Multicellular): केंचुआ, हाथी, मनुष्य, बंदर, बरगद – अनेक कोशिकाओं से बने।
  • सभी जीवों में पोषण, उत्सर्जन, वृद्धि, श्वसन तथा जनन जैसी क्रियाएँ होती हैं।
🟢 अमीबा (एककोशिकीय) 🟣 पैरामीशियम (एककोशिकीय) 🧑 मनुष्य (बहुकोशिकीय) 🌳 बरगद (बहुकोशिकीय)

💡 कोशिका: जीवन की आधारभूत संरचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई है।

🔬 2 कोशिका की संरचना

सामान्यतः एक कोशिका में तीन मुख्य भाग होते हैं:

🔹 1. कोशिका झिल्ली (Cell Membrane)

  • प्रत्येक कोशिका के चारों ओर पाई जाने वाली पतली झिल्ली।
  • कोशिका को स्थिर रखती है तथा पदार्थों के आदान-प्रदान को नियंत्रित करती है।
  • सभी कोशिकाओं में अवश्य उपस्थित।

🔹 2. कोशिका भित्ति (Cell Wall)

  • पौधों की कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली के बाहर मोटी एवं मजबूत परत।
  • कोशिका की रक्षा करती है एवं दृढ़ता प्रदान करती है।
  • केवल पादप कोशिकाओं में पायी जाती है – जन्तु कोशिकाओं में नहीं।

🔹 3. केन्द्रक (Nucleus)

  • कोशिका का सबसे महत्वपूर्ण कोशिकांग।
  • जन्तु कोशिका में मध्य में, पादप कोशिका में परिधि की ओर।
  • कार्य: कोशिका की वृद्धि एवं विभाजन, पूरी कोशिका पर नियंत्रण।

🔹 4. कोशिका द्रव्य (Cytoplasm)

  • केन्द्रक तथा कोशिका झिल्ली के बीच का जीवद्रव्य।
  • इसमें कोशिकांग (Organelles) पाए जाते हैं – माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जीकाय, हरितलवक आदि।
🌿 पादप कोशिका
कोशिका भित्ति
कोशिका झिल्ली
🧬
केन्द्रक
कोशिका द्रव्य में कोशिकांग
🐾 जन्तु कोशिका
कोशिका झिल्ली
🧬
केन्द्रक
कोशिका द्रव्य में कोशिकांग
चित्र 6.4: पादप एवं जन्तु कोशिका की संरचना
3 कोशिकांग (Organelles) एवं उनके कार्य

कोशिका द्रव्य में पाए जाने वाले छोटे-छोटे अंग कोशिकांग कहलाते हैं।

🔹 प्रमुख कोशिकांग एवं कार्य

1. माइटोकॉण्ड्रिया
श्वसन द्वारा ऊर्जा उत्पन्न करता है – कोशिका का पावर हाउस
2. हरितलवक (Chloroplast)
केवल हरी पादप कोशिकाओं में – प्रकाश-संश्लेषण का कार्य।
3. तारककाय (Centrosome)
कोशिका विभाजन में सहयोग – केवल जन्तु कोशिकाओं में।
4. रिक्तिका (Vacuole)
पानी, लवण आदि का संग्रह – पौधों में बड़ी, जन्तुओं में छोटी
5. गॉल्जीकाय (Golgi Apparatus)
पदार्थों का संश्लेषण, भण्डारण एवं स्रावण
6. लाइसोसोम (Lysosome)
कोशिका में आने वाले पदार्थों को पचाना
7. राइबोसोम (Ribosome)
प्रोटीन संश्लेषण में सहायक।
8. अन्तःप्रद्रव्यी जालिका (ER)
केन्द्रक झिल्ली व कोशिकाद्रव्य के बीच सम्बन्ध – प्रोटीन संश्लेषण।

माइटोकॉण्ड्रिया: कोशिका का पावर हाउस – ऊर्जा का उत्पादन एवं संग्रह।

🌿 4 पादप एवं जन्तु कोशिका में अन्तर

अधिकांश कोशिकांग पादप एवं जन्तु कोशिका में समान होते हैं, परन्तु कुछ अन्तर निम्नलिखित हैं:

पादप कोशिकाजन्तु कोशिका
कोशिका भित्ति पाई जाती है।❌ कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती है।
हरितलवक पाए जाते हैं (प्रकाश-संश्लेषण)।❌ हरितलवक नहीं पाए जाते हैं।
सेन्ट्रोसोम अनुपस्थित होते हैं।सेन्ट्रोसोम उपस्थित होते हैं (कोशिका विभाजन)।
रिक्तिका बड़ी तथा संख्या में एक होती है।✅ रिक्तिकाएँ छोटी तथा संख्या में अधिक होती हैं।
✅ केन्द्रक परिधि की ओर हो सकता है।✅ अधिकांश में केन्द्रक मध्य में होता है।

📌 महत्वपूर्ण: कोशिका भित्ति एवं हरितलवक केवल पादप कोशिका में पाए जाते हैं – यही मुख्य अन्तर है।

🧫 5 ऊतक (Tissues) – परिचय एवं प्रकार

ऊतक (Tissue): समान रचना व उत्पत्ति वाली कोशिकाओं का समूह जिनके द्वारा विशिष्ट कार्य होते हैं।

🔹 पादप ऊतक (Plant Tissues)

1. प्रविभाजी ऊतक (Meristematic Tissue)
  • कोशिकाएँ विभाजित होने की क्षमता रखती हैं।
  • पौधों की जड़ों एवं तनों के शीर्ष (शीर्षस्थ विभज्योतक) तथा पार्श्व में (पार्श्वस्थ विभज्योतक) पाया जाता है।
  • पौधे की वृद्धि के लिए उत्तरदायी।
  • प्रयोग: प्याज की जड़ के अग्र सिरे को काटने पर वह बढ़ना बन्द कर देती है – प्रविभाजी ऊतक की उपस्थिति का प्रमाण।
2. स्थायी ऊतक (Permanent Tissue)
  • विभाजन क्षमता खोकर विशिष्ट कार्य करते हैं।
  • सरल ऊतक: एक प्रकार की कोशिकाओं से बने – जैसे: पैरेन्काइमा, कोलेन्काइमा, स्क्लेरेन्काइमा।
  • जटिल ऊतक (संवहन ऊतक): एक से अधिक प्रकार की कोशिकाओं से बने – जाइलम (Xylem) एवं फ्लोएम (Phloem)
  • जाइलम: जड़ों द्वारा अवशोषित जल एवं खनिज लवण को पत्तियों तक पहुँचाता है।
  • फ्लोएम: पत्तियों में निर्मित भोज्य पदार्थ को पौधे के विभिन्न अंगों तक पहुँचाता है।

🔹 जन्तु ऊतक (Animal Tissues)

1. एपीथिलियम ऊतक (Epithelial Tissue)
  • शरीर और अंगों का बाह्य आवरण – आवरण ऊतक।
  • मुखगुहा, आमाशय, आंत, श्वास नली, फेफड़े, रक्त नलिकाओं की भीतरी सतह।
2. संयोजी ऊतक (Connective Tissue)
  • अंतरालीय ऊतक: त्वचा के नीचे, पेशियों के बीच-बीच में।
  • अस्थि (Bone): सबसे कठोर ऊतक – कैल्सियम एवं खनिज – शरीर को ढाँचा प्रदान करता है।
  • उपास्थि (Cartilage): लचीला – बाह्य कर्ण उपास्थि का बना होता है।
  • रक्त (Blood): एकमात्र तरल संयोजी ऊतक – प्लाज्मा + लाल/श्वेत रक्त कणिकाएँ + प्लेटलेट्स।
3. पेशी ऊतक (Muscular Tissue)
  • ऐच्छिक (रेखित) पेशी: हाथ, पैर – हम इच्छानुसार गति करा सकते हैं – कंकाल से जुड़ी।
  • अनैच्छिक (अरेखित) पेशी: आहार नाल, रक्त नलिकाएँ, मूत्रवाहिनी – इच्छानुसार गति नहीं करा सकते।
  • हृदय पेशी: रचना में रेखित (मजबूत), कार्य में अरेखित (अनैच्छिक) – जीवन भर लयबद्ध संकुचन-प्रसार।
4. तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue)
  • न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका): तंत्रिका तंत्र की कार्यात्मक इकाई।
  • संदेशों का संवहन एवं नियंत्रण का कार्य।
🌊
जाइलम (Xylem)
जल + खनिज लवण ↑
🍃
फ्लोएम (Phloem)
भोज्य पदार्थ ↓
संवहन ऊतक – जाइलम एवं फ्लोएम

💡 ऊतक: समान रचना एवं कार्य वाली कोशिकाओं का समूह – ये अंगों का निर्माण करते हैं।

🧠 6 तंत्रिका तंत्र (Nervous System)

तंत्रिका तंत्र: शरीर के सभी कार्यों का नियंत्रण एवं समन्वयन करता है।

🔹 तंत्रिका तंत्र के तीन मुख्य भाग

  • 1. मस्तिष्क (Brain): कपाल में सुरक्षित – कोमल एवं महत्वपूर्ण अंग – समस्त ऐच्छिक क्रियाओं का निर्णय – सुगन्ध, श्रवण, रंगों का निर्णय। मानव मस्तिष्क सबसे श्रेष्ठ – सर्वाधिक तर्कशक्ति।
  • 2. रीढ़-रज्जु (Spinal Cord): मस्तिष्क का पिछला भाग – बेलनाकार, खोखली रचना – रीढ़ की हड्डी के अन्दर सुरक्षित – समस्त अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण।
  • 3. तंत्रिकाएँ (Nerves): शरीर में तंत्रिकाओं का जाल – किसी भी भाग में उद्दीपन ग्रहण होने पर तुरन्त अनुभव।

🔹 तंत्रिकाओं के प्रकार

  • कपाल तंत्रिकाएँ (Cranial Nerves): ज्ञानेन्द्रियों से उद्दीपन ग्रहण कर मस्तिष्क तक सूचना पहुँचाती हैं – सुनना, सूँधना, छूना, स्वाद जानना।
  • रीढ़ तंत्रिकाएँ (Spinal Nerves): रीढ़-रज्जु से निकलती हैं – समस्त अनैच्छिक क्रियाओं का नियंत्रण – आन्तरिक अंगों एवं त्वचा में फैला जाल।

🔹 सूक्ष्म जन्तुओं में तंत्रिका तंत्र

  • अमीबा, पैरामीशियम: कोई तंत्रिका तंत्र नहीं – समस्त शरीर द्वारा संवेदना ग्रहण।
  • हाइड्रा, एस्केरिस, केंचुआ: तंत्रिका तंत्र पाया जाता है, परन्तु कशेरूकी प्राणियों की तरह पूर्ण विकसित नहीं।

🧠 मस्तिष्क: शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग – कपाल में सुरक्षित – सभी ऐच्छिक क्रियाओं का नियंत्रक।

🧪 7 अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine Glands) एवं हॉर्मोन्स

हॉर्मोन्स (Hormones): रासायनिक संदेश वाहक – रक्त द्वारा पूरे शरीर में संचारित।

अन्तःस्रावी ग्रन्थियाँ (Endocrine Glands): वे ग्रन्थियाँ जो हॉर्मोन्स का स्राव करती हैं (चित्र 6.13)।

ग्रन्थिहॉर्मोनकार्य
पीयूष ग्रन्थिवृद्धि हॉर्मोनशरीर की वृद्धि; कमी से बच्चों की वृद्धि रुक जाती है।
थायरॉइडथायरॉक्सिनउपापचयी क्रियाओं का नियंत्रण; कमी से घेंघा रोग।
पैराथायरॉइडपैराथारमोनरक्त में कैल्सियम व फॉस्फोरस का नियंत्रण।
अधिवृक्क (एड्रीनल)एड्रेनेलिनक्रोध, चिन्ता, उत्तेजना में तनाव का संयोजन।
अग्नाशय (पैक्रियाज)इन्सुलिनरक्त में शर्करा का नियंत्रण; कमी से मधुमेह
वृषण (नर)टेस्टोस्टीरॉननर जननांगों का विकास, शुक्राणु निर्माण।
अण्डाशय (मादा)एस्ट्रोजनमादा जननांगों का विकास, अण्डाणु निर्माण।

💡 हॉर्मोन: रासायनिक संदेश वाहक – रक्त द्वारा शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचते हैं।

🌱 8 पौधों में समन्वयन – पादप हॉर्मोन्स

पौधों में तंत्रिका तंत्र नहीं होता, परन्तु हॉर्मोन्स द्वारा समन्वयन होता है।

🔹 पादप हॉर्मोन्स एवं कार्य

1. ऑक्सिन (Auxin)
कोशिकाओं में दीर्घीकरण – तने के शीर्ष पर शाखायें नहीं निकलतीं।
2. जिब्रेलिन (Gibberellin)
तने के पर्व लम्बे करना – अंगूरों का आकार एवं गुच्छों की लम्बाई बढ़ाना।
3. साइटोकाइनिन (Cytokinin)
कोशिका विभाजन को प्रेरित करता है।
4. एबसिसिक अम्ल (Abscisic Acid)
रन्ध्र बन्द कर वाष्पोत्सर्जन का नियंत्रण – पत्तियों का झड़ना
5. एथिलीन (Ethylene)
कच्चे फलों (केला, आम, संतरा) को शीघ्र पकाना

🔹 किसान पौधों को क्यों खोंटते हैं?

  • चना/मटर के खेतों में किसान पौधों को ऊपर से खोंट लेते हैं।
  • कारण: पौधे में उपस्थित ऑक्सिन के कारण जगह-जगह और अधिक शाखाएँ निकलती हैं।
  • इससे पौधे की उपज बढ़ जाती है।

🌱 पादप हॉर्मोन्स: ऑक्सिन, जिब्रेलिन, साइटोकाइनिन, एबसिसिक अम्ल, एथिलीन – वृद्धि, फल पकाना, वाष्पोत्सर्जन आदि का नियंत्रण।

📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)

🧬 कोशिका – जीवन की रचनात्मक एवं कार्यात्मक इकाई।
🔬 कोशिका भाग: झिल्ली, भित्ति (पौधों में), केन्द्रक, कोशिका द्रव्य।
माइटोकॉण्ड्रिया: कोशिका का पावर हाउस – ऊर्जा उत्पादन।
🌿 पादप/जन्तु अन्तर: कोशिका भित्ति, हरितलवक, सेन्ट्रोसोम, रिक्तिका।
🧫 ऊतक: समान कोशिकाओं का समूह – जाइलम, फ्लोएम, रक्त, पेशी, तंत्रिका।
🧠 तंत्रिका तंत्र: मस्तिष्क, रीढ़-रज्जु, तंत्रिकाएँ – नियंत्रण एवं समन्वयन।
🧪 हॉर्मोन्स: रासायनिक संदेशवाहक – इन्सुलिन, एड्रेनेलिन, थायरॉक्सिन, टेस्टोस्टीरॉन।
🌱 पादप हॉर्मोन्स: ऑक्सिन, जिब्रेलिन, साइटोकाइनिन, एबसिसिक अम्ल, एथिलीन।

🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)

📝 अभ्यास क्विज़

स्कोर: 0/0

✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।

Scroll to Top