मानव निर्मित वस्तुएँ
इस अध्याय में हम मानव निर्मित वस्तुओं की उपयोगिता, संश्लेषित रेशे,
प्लास्टिक के प्रकार, काँच, मृतिका तथा साबुन के बारे में विस्तार से जानेंगे।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
प्राकृतिक वस्तुएँ: जीव-जन्तु, पेड़-पौधे, मिट्टी, खनिज – प्रकृति प्रदत्त।
मानव निर्मित वस्तुएँ: मकान, गाड़ी, साइकिल, साबुन, कपड़ा, काँच, बर्तन, घड़ी, स्कूटर, फर्नीचर आदि।
- घरेलू कार्य: बर्तन, पेंट, प्लास्टिक, काँच, सौन्दर्य प्रसाधन, बिजली के उपकरण।
- कृषि कार्य: हँसिया, खुरपी, फावड़ा, कुदाल, ट्रैक्टर, सिंचाई उपकरण।
- औषधियाँ: प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से लेकर रासायनिक दवाएँ, एंटीबायोटिक (जैव प्रतिरोधी) – टीबी, हैजा, निमोनिया आदि का उपचार।
💡 महत्व: मानव निर्मित वस्तुएँ जीवन को सुविधाजनक, सुरक्षित एवं आरामदायक बनाती हैं।
संश्लेषित रेशे – मानव निर्मित, उच्च अणुभार वाले बहुलक यौगिक।
- उदाहरण: नायलॉन, पॉलिस्टर, डेक्रॉन, रेयॉन, टेरिलीन।
- गुण: मजबूत, टिकाऊ, जल्दी सूखने वाले, आकर्षक, हाथ से फाइ़ने पर कठिन (सूती की तुलना में)।
- उपयोग: कपड़े, रस्सियाँ, पैराशूट, मछली पकड़ने के जाल, आदि।
प्लास्टिक – असंतृप्त हाइड्रोकार्बनों के उच्च अणुभार बहुलक। (उदा: बैकेलाइट, पॉलीथीन, टेफ्लॉन, PVC)
🔹 थर्मोप्लास्टिक
- गरम करने पर मुलायम, ठंडा करने पर कड़ा – बार-बार दोहराया जा सकता है।
- उदा: पॉलीथीन, PVC
- पुनः चक्रण (recycling) संभव।
🔸 थर्मोसेटिंग प्लास्टिक
- गरम करने पर मुलायम, ठंडा करने पर कठोर – पुनः गरम करने पर मुलायम नहीं होते।
- उदा: बैकेलाइट
- पुनः चक्रण संभव नहीं।
🌍 पर्यावरणीय प्रभाव
- प्लास्टिक जैव अनिम्नीकरणीय – सड़ता नहीं, वर्षों तक रहता है।
- जलाने पर विषैला धुआँ; नालियों में फँसकर जल प्रवाह रोकता है।
- जानवर खाकर बीमार होते हैं।
⚠️ चेतावनी: प्लास्टिक का दुरुपयोग पर्यावरण के लिए हानिकारक – उचित उपयोग करें और पुनः चक्रण को बढ़ावा दें।
काँच – धातुओं के सिलिकेटों का विलयन (मिश्रण)।
- संघटन: सिलिका + सोडियम सिलिकेट + कैल्सियम सिलिकेट।
- गुण: निश्चित गलनांक नहीं, क्रिस्टलीय संरचना नहीं – अतिशीतित द्रव कहलाता है।
- प्रकार:
- साधारण (मृदु) काँच: खिड़कियों, बोतलों में।
- कठोर काँच: रासायनिक उपकरण, प्रयोगशाला।
- फोटोक्रोमिक काँच: धूप के चश्में – पराबैंगनी किरणों से बचाता है (सिल्वर आयोडाइड मिलाते हैं)।
- रंगीन काँच: फेरिक ऑक्साइड (हरा), कोबाल्ट (नीला), आदि।
मृतिका – पृथ्वी की सतह पर पाई जाने वाली सूक्ष्म कणों वाली मिट्टी, जो जल के साथ प्लास्टिक (लचीली) हो जाती है।
- उपयोग: बर्तन, ईंट, टाइल्स, सीमेन्ट, मूर्तियाँ, पकी हुई मिट्टी के खिलौने, इन्सुलेटर, आदि।
- मृतिका को पकाकर (कुंभकार) मजबूत बनाया जाता है।
🏺 मृतिका से बनी वस्तुएँ: गमले, मिट्टी के बर्तन, मूर्तियाँ, ईंटें, टाइल्स।
साबुन – सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और वनस्पति तेल/वसा की क्रिया से बनता है।
- गुण: कठोर जल में झाग नहीं देता (कैल्शियम और मैग्नीशियम लवण अवक्षेप बनाते हैं)।
- अपमार्जक (Detergents): साबुन से अलग – कठोर जल में भी झाग देते हैं, अधिक प्रभावी।
- उपयोग: सफाई, कपड़े धोना, स्नान, बर्तन साफ करना।
📝 हमने सीखा (अध्याय सारांश)
🧩 मिलान अभ्यास (25 पेयर)
📝 अभ्यास क्विज़
✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।