अध्याय 5: पाइथागोरस प्रमेय – Junior School Online
📐 गणित – कक्षा 7 – अध्याय 5

📐 पाइथागोरस प्रमेय एवं त्रिभुजों की अन्य विशेषताएँ

इस अध्याय में हम पाइथागोरस प्रमेय, उसका विलोम, पाइथागोरियन त्रिक, त्रिभुज के शीर्षलम्ब, माध्यिकाएँ, लम्ब समद्विभाजक, कोण समद्विभाजक तथा त्रिभुजों की समरूपता का अध्ययन करेंगे।

📖 अध्याय सामग्री (Chapter Content)

1 📖 पाइथागोरस प्रमेय का परिचय

पाइथागोरस (Pythagoras) – यूनानी गणितज्ञ (570–500 ईसा पूर्व) जिन्होंने समकोण त्रिभुज का महत्वपूर्ण गुण खोजा।

  • बौधायन (800 ईसा पूर्व) – भारतीय गणितज्ञ जिन्होंने पाइथागोरस से 300 वर्ष पूर्व इस प्रमेय का उल्लेख किया।
  • समकोण त्रिभुज में कर्ण (Hypotenuse) सबसे बड़ी भुजा होती है।
B C A c (कर्ण) a b
📌 समकोण त्रिभुज: वह त्रिभुज जिसका एक कोण 90° का हो।
कर्ण: समकोण के सामने वाली भुजा (सबसे बड़ी भुजा)।
2 📐 पाइथागोरस प्रमेय (Pythagoras Theorem)
किसी समकोण त्रिभुज में,
कर्ण² = लम्ब² + आधार²
📌 कथन: "समकोण त्रिभुज में कर्ण पर बना वर्ग, शेष दो भुजाओं पर बने वर्गों के योग के बराबर होता है।"
B C A

📌 उदाहरण – 3-4-5 त्रिभुज

समकोण त्रिभुज में, AB = 3 सेमी, BC = 4 सेमी

कर्ण AC = √(3² + 4²) = √(9+16) = √25 = 5 सेमी

∴ 3² + 4² = 5²

📌 महत्वपूर्ण

  • पाइथागोरस प्रमेय केवल समकोण त्रिभुज में लागू होता है।
  • यदि a² + b² = c² हो, तो त्रिभुज समकोण होता है।
3 🔄 पाइथागोरस प्रमेय का विलोम (Converse)
यदि किसी त्रिभुज में,
एक भुजा² = शेष दो भुजाओं के वर्गों का योग,
तो वह त्रिभुज समकोण होता है।

📌 उदाहरण – 6, 2.5, 6.5

PQ = 6 सेमी, QR = 2.5 सेमी, PR = 6.5 सेमी

(2.5)² + 6² = 6.25 + 36 = 42.25 = (6.5)²

∴ ∠PQR = 90° (समकोण त्रिभुज)

📌 सत्यापन

PQ = 6 सेमी, QR = 2.5 सेमी, PR = 6.5 सेमी

चाँदे से ∠PQR मापने पर 90° प्राप्त होता है।

अतः यह समकोण त्रिभुज है।

📌 निष्कर्ष: यदि किसी त्रिभुज में a² + b² = c² हो, तो वह समकोण त्रिभुज होता है।
4 🔢 पाइथागोरियन त्रिक (Pythagorean Triplets)

पाइथागोरियन त्रिक – तीन धनात्मक पूर्णांक (a, b, c) जिनके लिए a² + b² = c² हो।

n2nn²-1n²+1सत्यापन
24353²+4²=5²
368106²+8²=10²
4815178²+15²=17²
510242610²+24²=26²
सूत्र: यदि n > 1, तो
(2n, n²-1, n²+1) एक पाइथागोरियन त्रिक है।

📌 उदाहरण – 8, 9, 12

8² + 9² = 64 + 81 = 145

12² = 144

∴ 8² + 9² ≠ 12² – अतः 8, 9, 12 पाइथागोरियन त्रिक नहीं है।

📌 गुण

  • यदि (a, b, c) एक त्रिक है, तो (ka, kb, kc) भी त्रिक होता है।
  • उदाहरण: (3,4,5) → (6,8,10), (9,12,15), (12,16,20) आदि
5 📏 समकोण त्रिभुज का कर्ण ज्ञात करना

📌 उदाहरण 1 – भुजाएँ 8 सेमी और 15 सेमी

माना कर्ण = a सेमी

a² = 8² + 15² = 64 + 225 = 289

a = √289 = 17 सेमी

📌 उदाहरण 2 – सीढ़ी और दीवार

10 मीटर लम्बी सीढ़ी दीवार से 8 मीटर दूर लगाई गई।

सीढ़ी की ऊँचाई = h

10² = 8² + h² → h² = 100 - 64 = 36

h = √36 = 6 मीटर

दीवार जमीन 10 मी 8 मी h
📌 लम्ब सबसे छोटा होता है:

किसी रेखा के बाहर दिए गए बिन्दु से रेखा तक खींचे गए सभी रेखाखंडों में लम्ब सबसे छोटा होता है।

6 ⬆️ शीर्षलम्ब एवं लम्बकेन्द्र

शीर्षलम्ब (Altitude) – त्रिभुज के किसी शीर्ष से सम्मुख भुजा पर डाला गया लम्ब

A B C D AD ⊥ BC
  • त्रिभुज में तीन शीर्षलम्ब होते हैं।
  • तीनों शीर्षलम्ब संगामी (एक बिन्दु पर मिलने वाले) होते हैं।
  • इस संगामी बिन्दु को लम्बकेन्द्र (Orthocentre) कहते हैं।
📌 निष्कर्ष:
  • त्रिभुज के शीर्षलम्ब संगामी होते हैं।
  • लम्बकेन्द्र ज्ञात करने के लिए दो शीर्षलम्ब खींचना पर्याप्त है।

📌 विशेष स्थिति

यदि त्रिभुज समकोण है, तो लम्बकेन्द्र समकोण वाले शीर्ष पर होता है।

समबाहु त्रिभुज में लम्बकेन्द्र, केन्द्रक, परिकेन्द्र और अंतःकेन्द्र संपाती होते हैं।

7 📊 माध्यिकाएँ एवं केन्द्रक

माध्यिका (Median) – त्रिभुज के किसी शीर्ष को सम्मुख भुजा के मध्य बिन्दु से मिलाने वाला रेखाखंड।

  • त्रिभुज में तीन माध्यिकाएँ होती हैं।
  • तीनों माध्यिकाएँ संगामी होती हैं।
  • संगामी बिन्दु को केन्द्रक (Centroid) कहते हैं।
  • केन्द्रक प्रत्येक माध्यिका को 2:1 के अनुपात में विभाजित करता है (शीर्ष से 2, आधार से 1)।
A B C D E F G
📌 निष्कर्ष:
  • त्रिभुज की माध्यिकाएँ संगामी होती हैं।
  • संगामी बिन्दु केन्द्रक (Centroid) कहलाता है।
  • केन्द्रक, माध्यिका को 2:1 में विभाजित करता है।
8 परिकेन्द्र एवं अंतःकेन्द्र

परिकेन्द्र (Circumcentre) – त्रिभुज की भुजाओं के लम्ब समद्विभाजकों का संगामी बिन्दु।

  • यह त्रिभुज के तीनों शीर्षों से समान दूरी पर होता है।
  • इसे त्रिभुज के परिवृत्त का केन्द्र भी कहते हैं।

अंतःकेन्द्र (Incentre) – त्रिभुज के कोण समद्विभाजकों का संगामी बिन्दु।

  • यह त्रिभुज की तीनों भुजाओं से समान दूरी पर होता है।
  • इसे त्रिभुज के अन्तःवृत्त का केन्द्र भी कहते हैं।
केन्द्रकिसके संगामी बिन्दु सेविशेषता
लम्बकेन्द्रशीर्षलम्बशीर्षों पर लम्ब
केन्द्रकमाध्यिकाएँ2:1 में विभाजन
परिकेन्द्रभुजाओं के लम्ब समद्विभाजकशीर्षों से समान दूरी
अंतःकेन्द्रकोण समद्विभाजकभुजाओं से समान दूरी
📌 समबाहु त्रिभुज में:

लम्बकेन्द्र, केन्द्रक, परिकेन्द्र और अंतःकेन्द्र संपाती होते हैं (एक ही बिन्दु पर)।

9 🔄 त्रिभुजों की समरूपता (Similarity of Triangles)

समरूप त्रिभुज (Similar Triangles) – वे त्रिभुज जिनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ समान अनुपात में हों।

A B C P Q R 6 5 4 9 7.5 6
समरूपता की शर्तें:
1. संगत कोण बराबर हों (AAA)
2. संगत भुजाएँ समान अनुपात में हों (SSS)
3. दो भुजाएँ समान अनुपात में और अंतर्गत कोण बराबर (SAS)

📌 उदाहरण – ΔABC और ΔDEF

AB=3, BC=5, CA=4; DE=6, EF=10, FD=8

AB/DE = 3/6 = 1/2, BC/EF = 5/10 = 1/2, CA/FD = 4/8 = 1/2

∴ ΔABC ∼ ΔDEF

📌 महत्वपूर्ण

  • यदि दो त्रिभुजों की संगत भुजाओं का अनुपात समान हो, तो संगत कोण भी समान होते हैं।
  • यदि दो त्रिभुजों के कोण समान हों, तो संगत भुजाओं का अनुपात समान होता है।

🧩 मिलान अभ्यास – 25 Pairs

कॉलम A का कॉलम B से सही मिलान करें – हर पंक्ति में केवल 6 विकल्प दिखेंगे।
सही उत्तर चुनते ही ✅/❌ का निशान और गलत पर सही उत्तर दिख जाएगा।

🧠 Practice Quiz – पाइथागोरस प्रमेय एवं त्रिभुज

🎯 आपकी प्रगति
स्कोर: 0/0

✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।

📝 हमने सीखा – सारांश

पाइथागोरस प्रमेय – कर्ण² = लम्ब² + आधार²
कर्ण – समकोण के सामने की भुजा, सबसे बड़ी
विलोम – यदि a² + b² = c², तो समकोण
पाइथागोरियन त्रिक – (2n, n²-1, n²+1)
शीर्षलम्ब – शीर्ष से सम्मुख भुजा पर लम्ब
लम्बकेन्द्र – शीर्षलम्बों का संगामी बिन्दु
माध्यिका – शीर्ष को भुजा के मध्य बिन्दु से मिलाना
केन्द्रक – माध्यिकाओं का संगामी बिन्दु (2:1)
परिकेन्द्र – भुजाओं के लम्ब समद्विभाजकों का संगामी
अंतःकेन्द्र – कोण समद्विभाजकों का संगामी
समरूप त्रिभुज – संगत कोण बराबर, भुजाएँ समान अनुपात
समबाहु त्रिभुज – सभी केन्द्र संपाती
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