जनन स्वास्थ्य — सम्पूर्ण अध्ययन
जीव विज्ञान • अध्याय 3

जनन स्वास्थ्य

जनन स्वास्थ्य की अवधारणा, जनसंख्या स्थायीकरण, गर्भनिरोधक विधियाँ, चिकित्सीय गर्भ समापन, यौन संचारित संक्रमण, बंध्यता एवं सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ — परीक्षा‑केंद्रित विस्तृत विवेचन।

★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित

1 जनन स्वास्थ्य — एक समग्र संकल्पना

WHO की परिभाषा एवं राष्ट्रीय कार्यनीतियाँ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार जनन स्वास्थ्य का अर्थ जनन से संबंधित सभी पहलुओं में शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य की संपूर्ण स्थिति है। एक जननात्मक रूप से स्वस्थ समाज वह है जिसमें जनन अंग शारीरिक एवं कार्यात्मक रूप से सामान्य हों तथा यौन संबंधी पारस्परिक क्रियाएँ भी स्वस्थ एवं सुरक्षित हों।

भारत — विश्व में पहला देश: भारत ने सन् 1951 में 'परिवार नियोजन' कार्यक्रम के रूप में जनन स्वास्थ्य को राष्ट्रीय लक्ष्य बनाया — यह विश्व का पहला ऐसा प्रयास था। वर्तमान में यह व्यापक कार्यक्रम जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम (RCH) के नाम से जाना जाता है।

RCH कार्यक्रम के प्रमुख स्तंभ
  • जागरूकता: श्रव्य-दृश्य एवं मुद्रित माध्यमों से जनन-संबंधी शिक्षा।
  • यौन शिक्षा: विद्यालयों में वैज्ञानिक एवं सही जानकारी प्रदान करना।
  • चिकित्सा सुविधाएँ: गर्भावस्था, प्रसव, गर्भनिरोधक, बंध्यता एवं STI संबंधी देखभाल।
  • कानूनी उपाय: उल्बवेधन (एमनियोसेंटेसिस) द्वारा लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध — मादा भ्रूण हत्या रोकने हेतु।
  • टीकाकरण: व्यापक शिशु प्रतिरक्षण कार्यक्रम।
उल्बवेधन (एमनियोसेंटेसिस) में एमनियोटिक द्रव्य के विश्लेषण द्वारा डाउन सिंड्रोम, हीमोफीलिया, सिकल सैल एनीमिया जैसे आनुवंशिक विकारों का पता लगाया जाता है। इसके लिंग-निर्धारण हेतु दुरुपयोग को रोकने के लिए भारत में यह कानूनतः प्रतिबंधित है।
NEET फोकस
  • जनन स्वास्थ्य कार्यक्रम की शुरुआत — 1951 (परिवार नियोजन)।
  • वर्तमान कार्यक्रम — RCH (जनन एवं बाल स्वास्थ्य सेवा)
  • WHO के अनुसार जनन स्वास्थ्य = शारीरिक + भावनात्मक + व्यवहारिक + सामाजिक स्वास्थ्य।
  • उल्बवेधन — आनुवंशिक विकारों की जाँच हेतु वैध, लिंग-निर्धारण हेतु प्रतिबंधित

2 जनसंख्या स्थायीकरण एवं गर्भनिरोधक

जनसंख्या विस्फोट, नियंत्रण के उपाय एवं गर्भनिरोधक विधियों का वर्गीकरण

सन् 1900 में विश्व जनसंख्या लगभग 2 अरब थी, जो सन् 2000 में 6 अरब तथा सन् 2011 में 7.2 अरब हो गई। भारत की जनसंख्या आजादी के समय ~35 करोड़ थी, जो सन् 2000 में 1 अरब से अधिक हो गई — आज विश्व का प्रत्येक छठा व्यक्ति भारतीय है। 2001 की जनगणना के अनुसार भारत की वार्षिक वृद्धि दर लगभग 2% (प्रति 1000 में 20 व्यक्ति) थी।

जनसंख्या विस्फोट के कारण
  • मृत्युदर में गिरावट: बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, औषधियों एवं टीकाकरण के कारण।
  • मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी: प्रसवकालीन देखभाल में सुधार।
  • जनन आयु वर्ग में वृद्धि: युवा जनसंख्या का बड़ा अनुपात।

विवाह की वैधानिक न्यूनतम आयु: स्त्री — 18 वर्ष, पुरुष — 21 वर्ष। प्रचलित नारे — "हम दो हमारे दो" (लघु परिवार) तथा "हम दो हमारा एक" (शहरी कामकाजी दंपतियों में)। राष्ट्रीय जनसंख्या नीति (NPP) 2000 का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2045 तक जनसंख्या को स्थिर स्तर पर लाना है।

गर्भनिरोधक विधियाँ — वर्गीकरण एवं क्रियाविधि

एक आदर्श गर्भनिरोधक — प्रभावी, सुगम, आसानी से उपलब्ध, न्यूनतम दुष्प्रभाव वाला तथा कामेच्छा व मैथुन में बाधक न होने वाला होना चाहिए।

श्रेणीउदाहरणक्रियाविधि
प्राकृतिक विधियाँ आवधिक संयम, बाह्य स्खलन, स्तनपान अनार्तव (LAM) शुक्राणु-अंडाणु मिलन की संभावना से बचाव; कोई दवा/साधन नहीं
रोधक (बैरियर) विधियाँ पुरुष/स्त्री कंडोम, डायाफ्राम, ग्रीवा टोपी, वॉल्ट शुक्राणु को गर्भाशय में प्रवेश से भौतिक रूप से रोकना; STI से भी सुरक्षा
अंत:गर्भाशयी युक्ति (IUD) लिप्पेस लूप (औषधिरहित), कॉपर-T/मल्टीलोड (ताँबा-मोचक), प्रोजेस्टासर्ट/LNG-20 (हॉर्मोन-मोचक) Cu²⁺ आयन शुक्राणु गतिशीलता घटाते हैं; हॉर्मोन भ्रूण-रोपण को अवरुद्ध करते हैं
मुख गर्भनिरोधक (गोलियाँ) प्रोजेस्टोजन अकेले/प्रोजेस्टोजन-एस्ट्रोजन संयोजन, सहेली (साप्ताहिक, गैर-स्टेरॉइडली) अंडोत्सर्ग एवं रोपण को संदमित करना; ग्रीवा श्लेष्मा को शुक्राणु-अवरोधी बनाना
शल्यक्रिया विधियाँ (बंध्यकरण) वैसेक्टोमी (पुरुष), ट्यूबेक्टोमी (स्त्री) शुक्रवाहक/फैलोपी नलिका को शल्यक्रिया द्वारा अवरुद्ध करना — स्थायी विधि
आपातकालीन गर्भनिरोधक: असुरक्षित मैथुन के 72 घंटों के भीतर प्रोजेस्टोजन या IUD का उपयोग — अत्यंत प्रभावी।
NEET फोकस — IUD प्रकार
  • औषधिरहित: लिप्पेस लूप (यांत्रिक बाधा)
  • ताँबा-मोचक: कॉपर-T, कॉपर-7, मल्टीलोड 375 (Cu²⁺ आयन शुक्राणु-गतिशीलता दबाते हैं)
  • हॉर्मोन-मोचक: प्रोजेस्टासर्ट, LNG-20 (हॉर्मोन द्वारा रोपण अवरुद्ध)
NEET फोकस — सहेली गोली
  • गैर-स्टेरॉइडली, सप्ताह में एक बार ली जाने वाली मुख गर्भनिरोधक गोली।
  • उच्च प्रभावशीलता एवं न्यून दुष्प्रभाव।
  • विकसित की — लखनऊ के CDRI (केंद्रीय औषध अनुसंधान संस्थान) द्वारा।

3 चिकित्सीय सगर्भता समापन (MTP)

कानूनी प्रावधान, समय-सीमा एवं सुरक्षा

MTP (चिकित्सीय सगर्भता समापन) — गर्भावस्था पूर्ण होने से पहले जानबूझकर गर्भ का समापन। विश्व भर में प्रतिवर्ष लगभग 4.5–5 करोड़ MTP कराए जाते हैं, जो विश्व की कुल सगर्भताओं का लगभग 1/5 भाग है।

कानूनी इतिहास: भारत में MTP को 1971 में कानूनी मान्यता दी गई। बाद में 2017 में 'सगर्भता का चिकित्सकीय समापन अधिनियम (संशोधन)' लागू किया गया, जिसने समय-सीमा एवं शर्तों में संशोधन किया।

अवधिआवश्यक अनुमतिसुरक्षा स्तर
0–12 सप्ताह (प्रथम तिमाही) 1 पंजीकृत चिकित्सक की राय अपेक्षाकृत सुरक्षित
12–24 सप्ताह (द्वितीय तिमाही) 2 पंजीकृत चिकित्सकों की एकराय (विशेष आधार पर) संकटपूर्ण एवं घातक हो सकता है
MTP के विशेष आधार (2017 संशोधन)
  • गर्भावस्था की निरंतरता से माता के जीवन को गंभीर खतरा या गंभीर शारीरिक चोट की आशंका।
  • भ्रूण में गंभीर शारीरिक या मानसिक असामान्यता पाई जाने की संभावना।
MTP के सामान्य कारण — असुरक्षित यौन संबंध, गर्भनिरोधक विफलता, बलात्कार, अथवा माता/भ्रूण के स्वास्थ्य हेतु जोखिम। गैरकानूनी MTP तथा लिंग-निर्धारण हेतु इसका दुरुपयोग — पूर्णतः प्रतिबंधित।
NEET फोकस
  • MTP को कानूनी मान्यता — 1971; संशोधन अधिनियम — 2017
  • प्रथम तिमाही (12 सप्ताह तक) — 1 चिकित्सक की राय पर्याप्त।
  • द्वितीय तिमाही (12–24 सप्ताह) — 2 चिकित्सकों की एकराय आवश्यक।
  • विश्व की कुल सगर्भताओं का ~1/5 भाग MTP द्वारा समाप्त होता है।

4 यौन संचारित संक्रमण (STI)

परिभाषा, प्रकार, उपचार क्षमता एवं बचाव

मैथुन द्वारा संचारित होने वाले रोगों/संक्रमणों को यौन संचारित संक्रमण (STI), रतिजरोग (VD) अथवा जनन मार्ग संक्रमण (RTI) कहा जाता है।

रोगकारक जीवउपचार योग्य?
सुजाक (गोनोरिया)जीवाणु (नीसेरिया)हाँ
सिफिलिसजीवाणु (ट्रेपोनीमा)हाँ
क्लेमिडियताजीवाणुहाँ
ट्राइकोमोनसताप्रोटोजोआहाँ
लैंगिक मस्सेविषाणु (HPV)हाँ
हर्पीसविषाणुहाँ
जननिक परिसर्पविषाणुनहीं
यकृतशोथ-बीविषाणुनहीं
HIV/एड्सविषाणुनहीं (सर्वाधिक खतरनाक)
महत्वपूर्ण: केवल यकृतशोथ-बी, जननिक परिसर्प एवं HIV को छोड़कर, शेष सभी STI पूर्णतः उपचार योग्य हैं — यदि प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर उचित उपचार किया जाए।
लक्षण एवं जटिलताएँ
  • प्रारंभिक लक्षण: जननिक क्षेत्र में खुजली, तरल स्राव, हल्का दर्द, सूजन।
  • स्त्रियों में अलक्षणी: अधिकांश स्त्रियाँ लक्षण रहित होती हैं, जिससे निदान में देरी होती है।
  • जटिलताएँ: श्रोणि-शोथज रोग (PID), गर्भपात, मृतशिशु जन्म, अस्थानिक सगर्भता, बंध्यता, जनन मार्ग कैंसर।
सर्वाधिक प्रभावित आयु वर्ग: STI की अधिकांश घटनाएँ 15–24 वर्ष (किशोर/युवा) आयु वर्ग में दर्ज की गई हैं।
NEET फोकस — बचाव के उपाय
  • अनजान या अनेक यौन साथियों से संबंध न रखें।
  • मैथुन के दौरान सदैव कंडोम का प्रयोग करें।
  • संदेह होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें एवं पूर्ण उपचार कराएँ।
  • संक्रमित सुइयाँ/उपकरण साझा न करें — यकृतशोथ-बी व HIV रक्त द्वारा भी संचारित हो सकते हैं।

5 बंध्यता एवं सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ

बंध्यता की परिभाषा, कारण एवं ART तकनीकें

बंध्यता (बाँझपन): दो वर्षों तक नियमित असुरक्षित सहवास के बावजूद गर्भाधान न हो पाना। इसके कारण — शारीरिक, जन्मजात, रोगजन्य, औषधिक, प्रतिरक्षात्मक अथवा मनोवैज्ञानिक हो सकते हैं। यह समस्या पुरुष एवं स्त्री दोनों में समान रूप से हो सकती है — स्त्री को एकाकी दोषी ठहराना वैज्ञानिक दृष्टि से अनुचित है।

सहायक जनन प्रौद्योगिकियाँ (ART) — संक्षिप्त नाम एवं अर्थ

संक्षिप्त नामपूरा नामप्रक्रिया/उपयोग
IVF इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रयोगशाला में निषेचन — "टेस्ट ट्यूब बेबी"
ET एम्ब्रियो ट्रांसफर भ्रूण का स्त्री जनन मार्ग में स्थानांतरण
ZIFT ज़ाइगोट इंट्रा फैलोपियन ट्रांसफर ≤8 ब्लास्टोमियर भ्रूण → फैलोपी नलिका में
IUT इंट्रा यूटेराइन ट्रांसफर >8 ब्लास्टोमियर भ्रूण → गर्भाशय में
GIFT गैमीट इंट्रा फैलोपियन ट्रांसफर दाता अंडाणु → फैलोपी नलिका (जब स्त्री स्वयं अंडाणु न बना पाए)
ICSI इंट्रा साइटोप्लाज़मिक स्पर्म इंजेक्शन शुक्राणु को सीधे अंडाणु में अंत:क्षेपित करना
AI कृत्रिम वीर्यसेचन (आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन) शुक्राणु को कृत्रिम रूप से योनि/गर्भाशय में प्रविष्ट कराना
IUI इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन शुक्राणु सीधे गर्भाशय में (AI का एक प्रकार)
महत्वपूर्ण भेद: ZIFT (≤8 ब्लास्टोमियर → फैलोपी नलिका) बनाम IUT (>8 ब्लास्टोमियर → गर्भाशय)। GIFT में अंडाणु (भ्रूण नहीं) का स्थानांतरण होता है। ICSI इन-विट्रो निषेचन की विशेष प्रक्रिया है, इन-विवो नहीं।
NEET फोकस — ART तकनीकें
  • IVF-ET — "टेस्ट ट्यूब बेबी" कार्यक्रम।
  • ZIFT — ≤8 ब्लास्टोमियर भ्रूण → फैलोपी नलिका।
  • IUT — >8 ब्लास्टोमियर भ्रूण → गर्भाशय।
  • GIFT — दाता अंडाणु → फैलोपी नलिका (स्त्री को अंडाणु निर्माण में असमर्थता)।
  • ICSI — शुक्राणु का अंडाणु में सीधा अंत:क्षेपण (इन-विट्रो)।
  • AI/IUI — कृत्रिम वीर्यसेचन (IUI = सीधे गर्भाशय में)।
ART तकनीकें अत्यंत महँगी एवं विशेषज्ञता की माँग करती हैं; भारत में ये केवल कुछ शहरों में ही उपलब्ध हैं। निःसंतान दंपतियों के लिए कानूनी गोद लेना भी एक सर्वोत्तम विकल्प है।

NEET फैक्ट‑शीट

त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु

अवधारणाप्रमुख तथ्य
जनन स्वास्थ्य कार्यक्रम1951 (परिवार नियोजन) → RCH (वर्तमान)
WHO परिभाषाशारीरिक + भावनात्मक + व्यवहारिक + सामाजिक स्वास्थ्य
उल्बवेधनआनुवंशिक विकार जाँच; लिंग-निर्धारण प्रतिबंधित
विवाह न्यूनतम आयुस्त्री 18, पुरुष 21 वर्ष
NPP 2000 लक्ष्य2045 तक जनसंख्या स्थिर
प्राकृतिक विधियाँआवधिक संयम, बाह्य स्खलन, LAM (स्तनपान अनार्तव)
IUD प्रकारऔषधिरहित (लिप्पेस), ताँबा-मोचक (कॉपर-T), हॉर्मोन-मोचक (प्रोजेस्टासर्ट)
सहेली गोलीगैर-स्टेरॉइडली, साप्ताहिक, CDRI लखनऊ
आपातकालीन गर्भनिरोधक72 घंटे के भीतर प्रभावी
MTP कानूनी मान्यता1971; संशोधन 2017
MTP अवधि0–12 सप्ताह (1 चिकित्सक), 12–24 सप्ताह (2 चिकित्सक)
STI अनुपचार्ययकृतशोथ-बी, जननिक परिसर्प, HIV
STI प्रभावित आयु15–24 वर्ष (सर्वाधिक)
बंध्यता2 वर्ष सहवास पर भी गर्भाधान न होना
ZIFT b/w IUT≤8 ब्लास्टोमियर → ZIFT (नलिका); >8 → IUT (गर्भाशय)
GIFTदाता अंडाणु → फैलोपी नलिका
ICSIशुक्राणु → सीधे अंडाणु में (इन-विट्रो)
वैसेक्टोमी/ट्यूबेक्टोमीस्थायी शल्यक्रिया; युग्मक-परिवहन रोकती है, निर्माण नहीं

📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न

विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु

1 सहायक जनन प्रौद्योगिकी में शुक्राणु को सीधे अंडाणु में अंत:क्षेपित करने की विधि क्या कहलाती है?

उत्तर: ICSI (इंट्रा साइटोप्लाज़मिक स्पर्म इंजेक्शन)

ICSI तब प्रयोग की जाती है जब सामान्य निषेचन (शुक्राणु का स्वतः अंडाणु में प्रवेश) कठिन हो। इसमें शुक्राणु को माइक्रो-सुई द्वारा सीधे अंडाणु के कोशिकाद्रव्य में अंत:क्षेपित किया जाता है।

2 GIFT तकनीक का पूरा नाम एवं कार्य बताइए।

उत्तर: GIFT — Gamete Intra Fallopian Transfer (गैमीट इंट्रा फैलोपियन ट्रांसफर)

यह तकनीक उन स्त्रियों के लिए है जो स्वयं अंडाणु उत्पन्न नहीं कर सकतीं, परंतु निषेचन व भ्रूण-परिवर्धन हेतु उपयुक्त वातावरण प्रदान कर सकती हैं। इसमें दाता से प्राप्त अंडाणु को सीधे फैलोपी नलिका में स्थानांतरित किया जाता है।

3 IUD के तीन प्रकारों के उदाहरण सहित वर्णन कीजिए।

उत्तर:

  • औषधिरहित: लिप्पेस लूप — केवल यांत्रिक बाधा।
  • ताँबा-मोचक: कॉपर-T, कॉपर-7, मल्टीलोड 375 — Cu²⁺ आयन शुक्राणु-गतिशीलता एवं निषेचन-क्षमता दबाते हैं।
  • हॉर्मोन-मोचक: प्रोजेस्टासर्ट, LNG-20 — हॉर्मोन द्वारा भ्रूण-रोपण अवरुद्ध।
4 "सहेली" गोली के संदर्भ में सही कथन चुनें — (a) स्टेरॉइडली, दैनिक (b) गैर-स्टेरॉइडली, साप्ताहिक (c) IUD (d) बैरियर विधि

उत्तर: (b) गैर-स्टेरॉइडली, सप्ताह में एक बार ली जाने वाली गोली

सहेली गोली CDRI लखनऊ द्वारा विकसित की गई है। इसकी निरोधक क्षमता अत्यंत उच्च तथा दुष्प्रभाव न्यूनतम हैं — यह इसे परंपरागत दैनिक गोलियों से अलग बनाता है।

5 MTP से संबंधित 2017 संशोधन अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  • 0–12 सप्ताह: 1 पंजीकृत चिकित्सक की राय पर्याप्त।
  • 12–24 सप्ताह: 2 पंजीकृत चिकित्सकों की एकराय आवश्यक (विशेष आधार पर — माता/भ्रूण के जीवन को गंभीर खतरा या भ्रूण में गंभीर असामान्यता की आशंका)।
6 STI के संदर्भ में बताएँ कि कौन-से रोग पूर्णतः उपचार योग्य नहीं हैं?

उत्तर: यकृतशोथ-बी, जननिक परिसर्प (हर्पीज़) एवं HIV/एड्स

इन तीनों को छोड़कर शेष सभी यौन संचारित संक्रमण (जैसे सुजाक, सिफिलिस, क्लेमिडियता, ट्राइकोमोनसता, लैंगिक मस्से, हर्पीस) पूर्णतः उपचार योग्य हैं — बशर्ते प्रारंभिक अवस्था में पहचान कर सही उपचार किया जाए।

7 वैसेक्टोमी एवं ट्यूबेक्टोमी में अंतर बताइए।

उत्तर:

  • वैसेक्टोमी: पुरुष नसबंदी — शुक्रवाहक (वास डेफरेंस) को शल्यक्रिया द्वारा काटकर/बाँधकर अवरुद्ध किया जाता है। शुक्राणु-निर्माण (वृषण में) सामान्य रहता है, परंतु परिवहन अवरुद्ध हो जाता है।
  • ट्यूबेक्टोमी: स्त्री नसबंदी — फैलोपी नलिका को काटकर/बाँधकर अवरुद्ध किया जाता है, जिससे अंडाणु व शुक्राणु का मिलन नहीं हो पाता।

अतिरिक्त NEET तथ्य

सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं

महत्वपूर्ण
  • इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 1–3 प्रश्न (~4–12 अंक) पूछे जाते हैं।
  • सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — IUD प्रकार, ART तकनीकें, STI कारक जीव, MTP अवधि
तुलनात्मक
  • ZIFT बनाम IUT: ZIFT में ≤8 ब्लास्टोमियर भ्रूण → फैलोपी नलिका; IUT में >8 ब्लास्टोमियर → गर्भाशय।
  • GIFT बनाम IVF: GIFT में अंडाणु (भ्रूण नहीं) का स्थानांतरण होता है, तथा यह इन-विवो है; IVF इन-विट्रो है।
तथ्य
  • कॉपर आयन (Cu²⁺) — IUD द्वारा मुक्त होकर शुक्राणुओं की गतिशीलता एवं निषेचन-क्षमता को दबाते हैं तथा भक्षकाणुक्रिया (फैगोसाइटोसिस) बढ़ाते हैं।
  • PNDT अधिनियम, 1994 — प्रसवपूर्व लिंग-निर्धारण पर प्रतिबंध हेतु भारत में लागू।
ट्रैप
  • ICSIइन-विट्रो निषेचन की विशेष प्रक्रिया है, इन-विवो नहीं — यह भ्रम NEET में बार-बार परखा जाता है।
  • वैसेक्टोमी — शुक्राणु-निर्माण नहीं रोकती, केवल परिवहन रोकती है।
  • स्तनपान अनार्तव (LAM) — प्रसव बाद अधिकतम 6 माह तक ही कारगर, 2 वर्ष तक नहीं।

संक्षिप्त सार

जनन स्वास्थ्य

WHO परिभाषा — शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारिक, सामाजिक स्वास्थ्य। भारत में RCH कार्यक्रम (1951 से)।

गर्भनिरोधक

प्राकृतिक, बैरियर, IUD, मुख गोलियाँ, शल्यक्रिया — विविध विधियाँ; IUD तीन प्रकार की होती हैं।

MTP

1971 में कानूनी, 2017 संशोधन; 0–12 सप्ताह (1 चिकित्सक), 12–24 सप्ताह (2 चिकित्सक)।

STI

यौन संचारित संक्रमण; यकृतशोथ-बी, हर्पीज़, HIV को छोड़कर सभी उपचार योग्य; 15–24 वर्ष सर्वाधिक प्रभावित।

बंध्यता & ART

2 वर्ष सहवास पर गर्भाधान न होना; IVF, ZIFT, IUT, GIFT, ICSI, AI/IUI — विभिन्न सहायक तकनीकें।

NEET फोकस

IUD प्रकार, ART संक्षिप्त नाम, STI कारक जीव, MTP अवधि — सर्वाधिक पूछे जाने वाले विषय।

? अभ्यास प्रश्न-उत्तर

प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें

प्रश्न 1 जनन स्वास्थ्य क्या है? इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर

जनन स्वास्थ्य — WHO के अनुसार जनन के सभी पहलुओं में शारीरिक, भावनात्मक, व्यवहारिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य की संपूर्ण स्थिति।

महत्व: मातृ एवं शिशु मृत्युदर घटाना, अनचाही सगर्भता रोकना, STI/एड्स के प्रसार पर रोक, जनसंख्या नियंत्रण, बंध्य दंपतियों की सहायता, लिंग-भेद एवं कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों को रोकना।

प्रश्न 2 गर्भनिरोधक विधियों का वर्गीकरण उदाहरण सहित लिखिए।
उत्तर
  • प्राकृतिक: आवधिक संयम, बाह्य स्खलन, स्तनपान अनार्तव (LAM) — बिना दवा/साधन के।
  • रोधक (बैरियर): कंडोम, डायाफ्राम, ग्रीवा टोपी, वॉल्ट — शुक्राणु प्रवेश भौतिक रूप से रोकना।
  • IUD: लिप्पेस लूप (औषधिरहित), कॉपर-T (ताँबा-मोचक), प्रोजेस्टासर्ट (हॉर्मोन-मोचक)।
  • मुख गोलियाँ: प्रोजेस्टोजन/संयोजन, सहेली (साप्ताहिक, गैर-स्टेरॉइडली)।
  • शल्यक्रिया: वैसेक्टोमी (पुरुष), ट्यूबेक्टोमी (स्त्री) — स्थायी विधियाँ।
प्रश्न 3 MTP से संबंधित 2017 संशोधन अधिनियम की मुख्य बातें लिखिए।
उत्तर
  • 0–12 सप्ताह: 1 पंजीकृत चिकित्सक की राय पर्याप्त — अपेक्षाकृत सुरक्षित।
  • 12–24 सप्ताह: 2 पंजीकृत चिकित्सकों की एकराय आवश्यक (विशेष आधार पर — माता/भ्रूण के जीवन को गंभीर खतरा या भ्रूण में गंभीर असामान्यता की आशंका) — द्वितीय तिमाही में गर्भपात संकटपूर्ण व घातक हो सकता है।
प्रश्न 4 STI क्या हैं? इनसे बचाव के उपाय बताइए।
उत्तर

STI (यौन संचारित संक्रमण): मैथुन द्वारा संचारित होने वाले रोग/संक्रमण।

बचाव के उपाय:

  • अनजान/अनेक यौन साथियों से संबंध न रखें।
  • मैथुन के दौरान सदैव कंडोम का प्रयोग करें।
  • संदेह होने पर तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें एवं पूर्ण उपचार कराएँ।
  • संक्रमित सुइयाँ/उपकरण साझा न करें (यकृतशोथ-बी व HIV रक्त द्वारा भी संचारित हो सकते हैं)।
प्रश्न 5 बंध्यता की परिभाषा एवं ART तकनीकों के नाम व उनके अर्थ लिखिए।
उत्तर

बंध्यता: दो वर्षों तक नियमित असुरक्षित सहवास के बावजूद गर्भाधान न हो पाना।

ART तकनीकें:

  • IVF: इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन — "टेस्ट ट्यूब बेबी"
  • ZIFT: ≤8 ब्लास्टोमियर भ्रूण → फैलोपी नलिका
  • IUT: >8 ब्लास्टोमियर भ्रूण → गर्भाशय
  • GIFT: दाता अंडाणु → फैलोपी नलिका
  • ICSI: शुक्राणु → सीधे अंडाणु में अंत:क्षेपित
  • AI/IUI: कृत्रिम वीर्यसेचन (IUI = सीधे गर्भाशय में)

यह अध्ययन सामग्री जनन स्वास्थ्य के सभी आवश्यक पहलुओं — जनसंख्या नियंत्रण, गर्भनिरोधक विधियाँ, MTP, STI, बंध्यता एवं ART — को सरल, मौलिक एवं परीक्षा-अनुकूल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिसमें NEET-स्तरीय तथ्य, तुलनात्मक तालिकाएँ एवं विस्तृत प्रश्नोत्तर सम्मिलित हैं।

स्वस्थ जनन, स्वस्थ समाज — यही जीवन की सततता का आधार है।

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