🍲 भोजन – खराब होना एवं परिरक्षण
जानें कि भोजन क्यों खराब होता है, खराब करने वाले कारक – कवक, जीवाणु, यीस्ट, कीट-पतंगे, भोजन परिरक्षण की विधियाँ – सुखाना, उबालना, प्रशीतन, डिब्बाबंदी, पाशुरीकरण, खराब भोजन से होने वाले रोग, संचारी एवं असंचारी रोग, तथा संक्रामक रोगों के बारे में विस्तार से।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
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📖 अध्याय सामग्री (Chapter Content)
भोजन का खराब होना – जब भोजन के रंग, रूप, आकार व स्वाद में अन्तर आ जाए और वह खाने योग्य न रहे, तो वह दूषित कहलाता है।
- दूषित भोजन: शरीर में विभिन्न रोगों तथा कभी-कभी मृत्यु का कारण भी बन जाता है।
- मुख्य कारण: सूक्ष्मजीव (जीवाणु, यीस्ट, फफूंद) तथा कीट-पतंगे।
⚠️ दूषित भोजन के लक्षण: रंग-रूप में परिवर्तन, दुर्गन्ध, खट्टा या बदला हुआ स्वाद – ऐसा भोजन कदापि न खाएँ।
खराब करने वाले मुख्य कारक:
- कवक (Fungi): फफूंद – नम स्थान पर रखी रोटी, डबलरोटी, अचार, फल, जैम, चमड़ा आदि पर सफेद जालों जैसी रचना बना लेते हैं। उदा. – राइजोपस, म्यूकर, ऐस्पिरजिलस।
- जीवाणु (Bacteria): हानिकारक जीवाणु भोज्य पदार्थों को दूषित कर देते हैं – जिससे निमोनिया, हैजा, पेचिस, पेट दर्द, उल्टी आदि बीमारियाँ होती हैं।
- यीस्ट (खमीर): एककोशिक सूक्ष्म जीव – कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थों पर क्रिया करके उन्हें अल्कोहल में बदल देते हैं और खट्टापन आ जाता है। (लाभदायक भी – डबलरोटी, जलेबी में प्रयुक्त)
- घुन, कीट-पतंगे: अनाजों (गेहूँ, चना, मटर) को घुन खाकर नष्ट कर देते हैं। चूहे (रोडन्ट) भी अनाज खाते हैं। सब्जियाँ – गोभी कीट, बैगन छेदक कीट आदि।
🔬 सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए आवश्यक शर्तें
- नमी (Moisture)
- उचित तापमान
- पोषक तत्वों की उपलब्धता
परिरक्षण (Preservation) – भोज्य पदार्थों को खराब होने से बचाने की विधियाँ।
- 1. सुखाना (निर्वलीकरण): धूप में भोज्य पदार्थों को सुखाना – पुरानी एवं सरल विधि। सूर्य की ऊष्मा से नमी नष्ट होती है। उदा. – मिर्च, आम, मछली, मांस।
- 2. उबालना (Boiling): उच्च तापमान पर हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। दूध, पानी उबालना।
- 3. प्रशीतन एवं हिमीभूत (Refrigeration & Freezing): 7°C-10°C (प्रशीतन) या -18°C (हिमीभूत) पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक जाती है। फ्रिज/रेफ्रिजरेटर।
- 4. हिमीकरण से सुखाना (Freeze Drying): कस्टर्ड पाउडर, सूप, कॉफी – इस विधि से संरक्षित किये जाते हैं।
- 5. रासायनिक पदार्थ: सोडियम मेटाबाईसल्फाइट, पोटेशियम मेटाबाईसल्फाइट, सोडियम बैंजोएट, सिरका – ये सूक्ष्मजीवों को उत्पन्न होने से रोकते हैं। नमक, शक्कर, तेल भी – अचार, मुरब्बा, जैम, जैली।
- 6. डिब्बाबंदी (Canning): वायुरुद्ध डिब्बों में बन्द कर संरक्षित करना – मटर, अनन्नास आदि।
- 7. पाशुरीकरण (Pasteurization): दूध को 63°C पर 30 मिनट या 72°C पर 15 सेकण्ड गर्म करके तुरन्त 10°C तक ठण्डा करना – दूध के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।
💡 परिरक्षण का उद्देश्य: सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकना, भोजन के पोषक तत्वों को सुरक्षित रखना, तथा भोजन की शेल्फ लाइफ बढ़ाना।
- अधिक न पकायें: अधिक पकाने से पोषक तत्व नष्ट होते हैं (दाल की प्रोटीन)।
- चोकर न निकालें: गेहूँ के आटे की चोकर में विटामिन्स पाये जाते हैं – मैदा (बिना चोकर) नुकसानदायक।
- विटामिन A और C: अधिक ताप पर नष्ट हो जाते हैं – नींबू, टमाटर, गाजर, आँवला, हरी मिर्च, पपीता कच्चे खाएँ।
- कम पानी में उबालें: आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग न करें – पोषक तत्व बह जाते हैं।
- ढंककर पकायें: ईंधन की बचत तथा पोषक तत्व सुरक्षित।
- भाप द्वारा पकाना: पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने में सहायक।
- प्रेशर कुकर: पोषक तत्वों की बचत तथा ऊर्जा की बचत।
- साफ, सूखे बन्द बर्तनों में रखें: भोज्य सामग्री को।
- सब्जियों के छिलके: विटामिन और खनिज होते हैं – अति आवश्यक होने पर ही महीन छिलका उतारें।
- सब्जियाँ काटने से पहले धोएँ: काट कर धोने से पोषक तत्व बह जाते हैं।
- लोहे की कढ़ाई में पकायें: लौह तत्व सब्जी में मिलता है – हीमोग्लोबिन निर्माण सहायक।
🍔 फास्ट फूड से बचाव: बाजार में मिलने वाले तैयार खाद्य पदार्थ (नूडल्स, पिज्जा) में संरक्षक रासायनिक पदार्थ मिलाये जाते हैं – स्वास्थ्य के लिए हानिकारक।
खराब भोजन से होने वाले रोग: जीवाणुओं द्वारा – हैजा, टी.बी. (तपेदिक), निमोनिया, टाइफाइड, डिप्थीरिया (रोहिणी रोग), आन्त्रशोथ, रूजाक, पीलिया, प्लेग, काली खाँसी, धनुष्टंकार (टिटनेस) आदि।
- कवक (फफूंद) द्वारा: राइजोपस, म्यूकर, एस्पिरजिलस – भोजन को खराब करते हैं तथा दाद (त्वचा रोग) उत्पन्न करते हैं।
- दूषित जल से: हैजा, टाइफाइड, पीलिया – प्रमुख रोग।
🆘 खराब भोजन खाने से क्या हो सकता है?
- पेट दर्द, उल्टी, दस्त
- गंभीर संक्रमण
- कभी-कभी मृत्यु भी
संचारी रोग (Communicable Diseases) – वे रोग जो सूक्ष्मजीवों द्वारा होते हैं तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक छुआ-छूत के माध्यम से फैलते हैं।
- उदाहरण: हैजा, चेचक, टी.बी., इनफ्लूएंजा, पोलियो, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कोविड-19।
- फैलने के माध्यम: वायु, जल, प्रत्यक्ष सम्पर्क, रक्त, कीट-पतंगे (वाहक)।
असंचारी रोग (Non-Communicable Diseases) – वे रोग जो शरीर में किसी कमी या खराबी के कारण होते हैं तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते।
- कारण: पोषक तत्वों की कमी, अनुवांशिक, जीवनशैली।
- उदाहरण: एनीमिया (खून की कमी), जोड़ों का दर्द (कैल्सियम की कमी), उच्च रक्त चाप, कैंसर, डायबिटीज (मधुमेह), एलर्जी।
📌 संचारी रोग: हैजा, चेचक, टी.बी., पोलियो, मलेरिया, कोविड-19
असंचारी रोग: कैंसर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, एनीमिया
संक्रामक रोग (Infectious Diseases) – संचारी रोग ही संक्रामक रोग होते हैं। ये रोगाणुओं द्वारा स्वस्थ शरीर में प्रवेश करने से होते हैं।
| क्र. | संक्रामक रोग | रोगाणु | फैलने का माध्यम | लक्षण | बचाव |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | जुकाम | एडनो वायरस | प्रत्यक्ष सम्पर्क | आँख से पानी, नाक से तरल | जल की कमी से बचें |
| 2 | चेचक | वेरियोला वायरस | वायु | बुखार, लाल दाने | टीका, रोगी को अलग रखें |
| 3 | इनफ्लूएंजा | इनफ्लूएंजा वायरस | वायु | कफ, चक्कर, बुखार, मांसपेशियों में दर्द | गर्म पानी, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएँ |
| 4 | पोलियो | पोलियो वायरस | भोजन/जल (मक्खी) | सिरदर्द, कमरदर्द, अंगघात | टीका, मल खुले में न छोड़ें |
| 5 | मलेरिया | प्लाज्मोडियम | मादा एनाफिलीज मच्छर | तीव्र ज्वर, कपकपी, सिरदर्द | मच्छरदानी, कीटनाशक |
| 6 | डेंगू | डेंगू वायरस | मच्छर (एडीज) | तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्द | मच्छरदानी, कीटनाशक |
| 7 | हैजा | विब्रियो कॉलेरी | दूषित जल | सफेद पतले दस्त, ऐंठन, दुर्बलता | नमक-चीनी का घोल, टीका |
| 8 | डायरिया | विषाणु/जीवाणु | दूषित जल/भोजन | निरन्तर दस्त, जल की कमी | साफ-सफाई, ओ.आर.एस., उबला पानी |
| 9 | टाइफाइड | साल्मोनेला टाइफी | दूषित जल/भोजन | तेज बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द | साफ-सफाई, टीका |
| 10 | कोविड-19 | कोरोना वायरस | प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष सम्पर्क | बुखार, सूखी खांसी, थकान, गंध न आना | मास्क, सैनिटाइजर, शारीरिक दूरी |
🧪 निर:संक्रामण (Disinfection): रोगाणुओं को नष्ट करने की प्रक्रिया – फिनाइल, कार्बोलिक एसिड, क्लोरीन, जलाना, भाप, सूखी गर्म हवा आदि।
- भोजन खराब होना: रंग, रूप, स्वाद में परिवर्तन – सूक्ष्मजीवों व कीटों के कारण।
- खराब करने वाले कारक: कवक (फफूंद), जीवाणु, यीस्ट, घुन/कीट-पतंगे।
- परिरक्षण विधियाँ: सुखाना, उबालना, प्रशीतन/हिमीभूत, हिमीकरण से सुखाना, रासायनिक पदार्थ, डिब्बाबंदी, पाशुरीकरण।
- गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय: अधिक न पकायें, चोकर न निकालें, विटामिन A,C कच्चे खाएँ, कम पानी में उबालें, ढंककर पकायें, लोहे की कढ़ाई, साफ-सफाई।
- खराब भोजन से रोग: हैजा, टाइफाइड, पेचिस, निमोनिया, टी.बी., पीलिया, प्लेग आदि।
- संचारी रोग: एक से दूसरे में फैलते हैं – हैजा, चेचक, टी.बी., मलेरिया, डेंगू, कोविड-19।
- असंचारी रोग: नहीं फैलते – कैंसर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, एनीमिया।
- निर:संक्रामण: रोगाणुओं को नष्ट करना – फिनाइल, क्लोरीन, भाप, जलाना।
✅ मुख्य बिंदु
स्वस्थ रहने के लिए साफ-सुथरा, ताजा भोजन खाएँ, भोजन को सही विधियों से संरक्षित करें,
और संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण, साफ-सफाई एवं सावधानियाँ बरतें।
🧩 मिलान अभ्यास – 13: भोजन – खराब होना एवं परिरक्षण
✅ प्रत्येक row में 6 विकल्प दिखेंगे – सही चुनें और तुरंत परिणाम देखें।
🧠 Practice Quiz – 13: भोजन – खराब होना एवं परिरक्षण
✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।