अध्याय 13: भोजन – खराब होना एवं परिरक्षण – Junior School Online
🔬 Science – Class 7 – Chapter 13

🍲 भोजन – खराब होना एवं परिरक्षण

जानें कि भोजन क्यों खराब होता है, खराब करने वाले कारक – कवक, जीवाणु, यीस्ट, कीट-पतंगे, भोजन परिरक्षण की विधियाँ – सुखाना, उबालना, प्रशीतन, डिब्बाबंदी, पाशुरीकरण, खराब भोजन से होने वाले रोग, संचारी एवं असंचारी रोग, तथा संक्रामक रोगों के बारे में विस्तार से।

📖 अध्याय सामग्री (Chapter Content)

1 🥫 भोजन का खराब होना – परिचय

भोजन का खराब होना – जब भोजन के रंग, रूप, आकार व स्वाद में अन्तर आ जाए और वह खाने योग्य न रहे, तो वह दूषित कहलाता है।

  • दूषित भोजन: शरीर में विभिन्न रोगों तथा कभी-कभी मृत्यु का कारण भी बन जाता है।
  • मुख्य कारण: सूक्ष्मजीव (जीवाणु, यीस्ट, फफूंद) तथा कीट-पतंगे।

⚠️ दूषित भोजन के लक्षण: रंग-रूप में परिवर्तन, दुर्गन्ध, खट्टा या बदला हुआ स्वाद – ऐसा भोजन कदापि न खाएँ।

2 🦠 भोज्य पदार्थों को खराब करने वाले मुख्य कारक

खराब करने वाले मुख्य कारक:

  • कवक (Fungi): फफूंद – नम स्थान पर रखी रोटी, डबलरोटी, अचार, फल, जैम, चमड़ा आदि पर सफेद जालों जैसी रचना बना लेते हैं। उदा. – राइजोपस, म्यूकर, ऐस्पिरजिलस।
  • जीवाणु (Bacteria): हानिकारक जीवाणु भोज्य पदार्थों को दूषित कर देते हैं – जिससे निमोनिया, हैजा, पेचिस, पेट दर्द, उल्टी आदि बीमारियाँ होती हैं।
  • यीस्ट (खमीर): एककोशिक सूक्ष्म जीव – कार्बोहाइड्रेट युक्त पदार्थों पर क्रिया करके उन्हें अल्कोहल में बदल देते हैं और खट्टापन आ जाता है। (लाभदायक भी – डबलरोटी, जलेबी में प्रयुक्त)
  • घुन, कीट-पतंगे: अनाजों (गेहूँ, चना, मटर) को घुन खाकर नष्ट कर देते हैं। चूहे (रोडन्ट) भी अनाज खाते हैं। सब्जियाँ – गोभी कीट, बैगन छेदक कीट आदि।

🔬 सूक्ष्मजीवों की वृद्धि के लिए आवश्यक शर्तें

  • नमी (Moisture)
  • उचित तापमान
  • पोषक तत्वों की उपलब्धता
3 🧊 भोजन के परिरक्षण की विधियाँ

परिरक्षण (Preservation) – भोज्य पदार्थों को खराब होने से बचाने की विधियाँ।

  • 1. सुखाना (निर्वलीकरण): धूप में भोज्य पदार्थों को सुखाना – पुरानी एवं सरल विधि। सूर्य की ऊष्मा से नमी नष्ट होती है। उदा. – मिर्च, आम, मछली, मांस।
  • 2. उबालना (Boiling): उच्च तापमान पर हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। दूध, पानी उबालना।
  • 3. प्रशीतन एवं हिमीभूत (Refrigeration & Freezing): 7°C-10°C (प्रशीतन) या -18°C (हिमीभूत) पर सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक जाती है। फ्रिज/रेफ्रिजरेटर।
  • 4. हिमीकरण से सुखाना (Freeze Drying): कस्टर्ड पाउडर, सूप, कॉफी – इस विधि से संरक्षित किये जाते हैं।
  • 5. रासायनिक पदार्थ: सोडियम मेटाबाईसल्फाइट, पोटेशियम मेटाबाईसल्फाइट, सोडियम बैंजोएट, सिरका – ये सूक्ष्मजीवों को उत्पन्न होने से रोकते हैं। नमक, शक्कर, तेल भी – अचार, मुरब्बा, जैम, जैली।
  • 6. डिब्बाबंदी (Canning): वायुरुद्ध डिब्बों में बन्द कर संरक्षित करना – मटर, अनन्नास आदि।
  • 7. पाशुरीकरण (Pasteurization): दूध को 63°C पर 30 मिनट या 72°C पर 15 सेकण्ड गर्म करके तुरन्त 10°C तक ठण्डा करना – दूध के जीवाणु नष्ट हो जाते हैं।

💡 परिरक्षण का उद्देश्य: सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकना, भोजन के पोषक तत्वों को सुरक्षित रखना, तथा भोजन की शेल्फ लाइफ बढ़ाना।

4 🥦 भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय
  • अधिक न पकायें: अधिक पकाने से पोषक तत्व नष्ट होते हैं (दाल की प्रोटीन)।
  • चोकर न निकालें: गेहूँ के आटे की चोकर में विटामिन्स पाये जाते हैं – मैदा (बिना चोकर) नुकसानदायक।
  • विटामिन A और C: अधिक ताप पर नष्ट हो जाते हैं – नींबू, टमाटर, गाजर, आँवला, हरी मिर्च, पपीता कच्चे खाएँ।
  • कम पानी में उबालें: आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग न करें – पोषक तत्व बह जाते हैं।
  • ढंककर पकायें: ईंधन की बचत तथा पोषक तत्व सुरक्षित।
  • भाप द्वारा पकाना: पोषक तत्वों को सुरक्षित रखने में सहायक।
  • प्रेशर कुकर: पोषक तत्वों की बचत तथा ऊर्जा की बचत।
  • साफ, सूखे बन्द बर्तनों में रखें: भोज्य सामग्री को।
  • सब्जियों के छिलके: विटामिन और खनिज होते हैं – अति आवश्यक होने पर ही महीन छिलका उतारें।
  • सब्जियाँ काटने से पहले धोएँ: काट कर धोने से पोषक तत्व बह जाते हैं।
  • लोहे की कढ़ाई में पकायें: लौह तत्व सब्जी में मिलता है – हीमोग्लोबिन निर्माण सहायक।

🍔 फास्ट फूड से बचाव: बाजार में मिलने वाले तैयार खाद्य पदार्थ (नूडल्स, पिज्जा) में संरक्षक रासायनिक पदार्थ मिलाये जाते हैं – स्वास्थ्य के लिए हानिकारक।

5 ⚠️ खराब भोजन एवं दूषित जल से होने वाले रोग

खराब भोजन से होने वाले रोग: जीवाणुओं द्वारा – हैजा, टी.बी. (तपेदिक), निमोनिया, टाइफाइड, डिप्थीरिया (रोहिणी रोग), आन्त्रशोथ, रूजाक, पीलिया, प्लेग, काली खाँसी, धनुष्टंकार (टिटनेस) आदि।

  • कवक (फफूंद) द्वारा: राइजोपस, म्यूकर, एस्पिरजिलस – भोजन को खराब करते हैं तथा दाद (त्वचा रोग) उत्पन्न करते हैं।
  • दूषित जल से: हैजा, टाइफाइड, पीलिया – प्रमुख रोग।

🆘 खराब भोजन खाने से क्या हो सकता है?

  • पेट दर्द, उल्टी, दस्त
  • गंभीर संक्रमण
  • कभी-कभी मृत्यु भी
6 🔄 संचारी एवं असंचारी रोग

संचारी रोग (Communicable Diseases) – वे रोग जो सूक्ष्मजीवों द्वारा होते हैं तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक छुआ-छूत के माध्यम से फैलते हैं।

  • उदाहरण: हैजा, चेचक, टी.बी., इनफ्लूएंजा, पोलियो, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कोविड-19।
  • फैलने के माध्यम: वायु, जल, प्रत्यक्ष सम्पर्क, रक्त, कीट-पतंगे (वाहक)।

असंचारी रोग (Non-Communicable Diseases) – वे रोग जो शरीर में किसी कमी या खराबी के कारण होते हैं तथा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलते।

  • कारण: पोषक तत्वों की कमी, अनुवांशिक, जीवनशैली।
  • उदाहरण: एनीमिया (खून की कमी), जोड़ों का दर्द (कैल्सियम की कमी), उच्च रक्त चाप, कैंसर, डायबिटीज (मधुमेह), एलर्जी।

📌 संचारी रोग: हैजा, चेचक, टी.बी., पोलियो, मलेरिया, कोविड-19
असंचारी रोग: कैंसर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, एनीमिया

7 🏥 संक्रामक रोग – कारण, लक्षण, बचाव

संक्रामक रोग (Infectious Diseases) – संचारी रोग ही संक्रामक रोग होते हैं। ये रोगाणुओं द्वारा स्वस्थ शरीर में प्रवेश करने से होते हैं।

क्र.संक्रामक रोगरोगाणुफैलने का माध्यमलक्षणबचाव
1जुकामएडनो वायरसप्रत्यक्ष सम्पर्कआँख से पानी, नाक से तरलजल की कमी से बचें
2चेचकवेरियोला वायरसवायुबुखार, लाल दानेटीका, रोगी को अलग रखें
3इनफ्लूएंजाइनफ्लूएंजा वायरसवायुकफ, चक्कर, बुखार, मांसपेशियों में दर्दगर्म पानी, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएँ
4पोलियोपोलियो वायरसभोजन/जल (मक्खी)सिरदर्द, कमरदर्द, अंगघातटीका, मल खुले में न छोड़ें
5मलेरियाप्लाज्मोडियममादा एनाफिलीज मच्छरतीव्र ज्वर, कपकपी, सिरदर्दमच्छरदानी, कीटनाशक
6डेंगूडेंगू वायरसमच्छर (एडीज)तेज बुखार, सिरदर्द, जोड़ों में दर्दमच्छरदानी, कीटनाशक
7हैजाविब्रियो कॉलेरीदूषित जलसफेद पतले दस्त, ऐंठन, दुर्बलतानमक-चीनी का घोल, टीका
8डायरियाविषाणु/जीवाणुदूषित जल/भोजननिरन्तर दस्त, जल की कमीसाफ-सफाई, ओ.आर.एस., उबला पानी
9टाइफाइडसाल्मोनेला टाइफीदूषित जल/भोजनतेज बुखार, सिरदर्द, पेट दर्दसाफ-सफाई, टीका
10कोविड-19कोरोना वायरसप्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष सम्पर्कबुखार, सूखी खांसी, थकान, गंध न आनामास्क, सैनिटाइजर, शारीरिक दूरी

🧪 निर:संक्रामण (Disinfection): रोगाणुओं को नष्ट करने की प्रक्रिया – फिनाइल, कार्बोलिक एसिड, क्लोरीन, जलाना, भाप, सूखी गर्म हवा आदि।

8 📖 सारांश – हमने क्या सीखा
  • भोजन खराब होना: रंग, रूप, स्वाद में परिवर्तन – सूक्ष्मजीवों व कीटों के कारण।
  • खराब करने वाले कारक: कवक (फफूंद), जीवाणु, यीस्ट, घुन/कीट-पतंगे।
  • परिरक्षण विधियाँ: सुखाना, उबालना, प्रशीतन/हिमीभूत, हिमीकरण से सुखाना, रासायनिक पदार्थ, डिब्बाबंदी, पाशुरीकरण।
  • गुणवत्ता बनाए रखने के उपाय: अधिक न पकायें, चोकर न निकालें, विटामिन A,C कच्चे खाएँ, कम पानी में उबालें, ढंककर पकायें, लोहे की कढ़ाई, साफ-सफाई।
  • खराब भोजन से रोग: हैजा, टाइफाइड, पेचिस, निमोनिया, टी.बी., पीलिया, प्लेग आदि।
  • संचारी रोग: एक से दूसरे में फैलते हैं – हैजा, चेचक, टी.बी., मलेरिया, डेंगू, कोविड-19।
  • असंचारी रोग: नहीं फैलते – कैंसर, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, एनीमिया।
  • निर:संक्रामण: रोगाणुओं को नष्ट करना – फिनाइल, क्लोरीन, भाप, जलाना।

✅ मुख्य बिंदु

स्वस्थ रहने के लिए साफ-सुथरा, ताजा भोजन खाएँ, भोजन को सही विधियों से संरक्षित करें,
और संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण, साफ-सफाई एवं सावधानियाँ बरतें।

🧩 मिलान अभ्यास – 13: भोजन – खराब होना एवं परिरक्षण

✅ प्रत्येक row में 6 विकल्प दिखेंगे – सही चुनें और तुरंत परिणाम देखें।

🧠 Practice Quiz – 13: भोजन – खराब होना एवं परिरक्षण

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📝 इस इकाई में हमने सीखा

दूषित भोजन – रंग/स्वाद बदलना, खाने योग्य न होना
कवक – फफूंद (राइजोपस, म्यूकर)
जीवाणु – हैजा, टायफाइड, निमोनिया
यीस्ट – खमीर, डबलरोटी/जलेबी में
परिरक्षण – सुखाना, उबालना, प्रशीतन, डिब्बाबंदी
पाशुरीकरण – दूध को 72°C पर 15 सेकण्ड
फास्ट फूड – रासायनिक संरक्षक हानिकारक
संचारी रोग – हैजा, चेचक, टी.बी., मलेरिया
असंचारी रोग – कैंसर, डायबिटीज, एनीमिया
रोगवाहक – मच्छर, मक्खी
निर:संक्रामण – फिनाइल, क्लोरीन, भाप
कोविड-19 – मास्क, दूरी, सैनिटाइज़र
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