🧪 जीवों में उत्सर्जन (Excretion in Organisms)
जानें कि उत्सर्जन क्या है, मानव उत्सर्जन तंत्र – वृक्क, मूत्रवाहिनियाँ, मूत्राशय, अन्य जन्तुओं के उत्सर्जन अंग, तथा पौधों में उत्सर्जन (बिन्दुस्वाव, लैटेक्स, गोंद आदि) के बारे में विस्तार से।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
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📖 अध्याय सामग्री (Chapter Content)
उत्सर्जन (Excretion) – शरीर में बने अनावश्यक एवं हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने की क्रिया।
- आवश्यकता: श्वसन, पाचन, परिसंचरण आदि क्रियाओं में नाइट्रोजनयुक्त पदार्थ (यूरिया, अमोनिया) बनते हैं, जो विषैले होते हैं।
- यूरिया का निर्माण: प्रोटीन के पाचन से अमीनो अम्ल बनता है – अतिरिक्त अमीनो अम्ल यकृत द्वारा यूरिया में बदल दिया जाता है।
- यूरिमिया: रक्त में यूरिया की अधिक मात्रा होने पर होने वाला रोग।
- अपचित भोजन: यदि बड़ी आंत में रुके तो कब्ज हो सकती है।
📌 उत्सर्जन का उद्देश्य: शरीर को विषैले पदार्थों से मुक्त रखना तथा आन्तरिक वातावरण को संतुलित बनाए रखना।
मानव उत्सर्जन तंत्र के अंग:
- वृक्क (Kidney): सेम के बीज के आकार के, रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित। रक्त को छानने का कार्य।
- मूत्रवाहिनियाँ (Ureters): वृक्क से मूत्राशय तक मूत्र पहुँचाती हैं।
- मूत्राशय (Urinary Bladder): मूत्र को एकत्रित करता है।
- मूत्रमार्ग (Urethra): मूत्र को बाहर निकालने का मार्ग।
सहायक उत्सर्जी अंग: त्वचा (पसीना), फेफड़े (CO₂), यकृत, बड़ी आंत।
🌡️ गर्मियों में कम मूत्र क्यों? – पसीने के रूप में अधिक जल निकल जाता है, इसलिए मूत्र कम बनता है।
💧 मूत्र की मात्रा
एक वयस्क व्यक्ति प्रतिदिन 1.0 – 1.5 लीटर मूत्र उत्सर्जित करता है।
मूत्र में 95% जल, 2.5% यूरिया तथा 2.5% अन्य पदार्थ होते हैं।
वृक्क (Kidney) – रक्त की प्रमुख छन्नी।
- रक्त वृक्क में आता है – इसमें उपयोगी व अपशिष्ट दोनों पदार्थ होते हैं।
- छनन (Filtration): उपयोगी पदार्थ (ग्लूकोज, लवण, विटामिन, अमीनो अम्ल) पुनः अवशोषित कर लिये जाते हैं।
- अपशिष्ट (यूरिया): जल में घुलकर मूत्र के रूप में बाहर निकाल दी जाती है।
- वृक्क खराब होने पर: रक्त के अपोहन (डायलिसिस) की आवश्यकता होती है।
🧪 मूत्र का रंग: हल्का पीला – यूरोक्रोम वर्णक के कारण। मूत्र हल्का अम्लीय होता है।
| जन्तु | उत्सर्जी अंग | उत्सर्जी पदार्थ |
|---|---|---|
| अमीबा, पैरामीशियम (एककोशिक) | कोई विशेष अंग नहीं (विसरण) | अमोनिया |
| चपटे कृमि | आदिवृक्क (Protonephridia) | — |
| केंचुआ | उत्सर्गिका (Nephridia) | — |
| कीट (कॉकरोच) | मैल्पीघी नलिकाएँ (Malpighian tubules) | यूरिक अम्ल |
| मछली (अलवणीय जलीय) | गलफड़े + वृक्क | अमोनिया |
| सीप, घोंघा | — | अमीनो अम्ल |
| स्तनधारी, वयस्क उभयचर | वृक्क | यूरिया |
| पक्षी, सरीसृप | वृक्क | यूरिक अम्ल |
🔎 विभिन्न जीवों में उत्सर्जी पदार्थ: अमोनिया (जलीय), यूरिया (स्तनधारी), यूरिक अम्ल (पक्षी/सरीसृप) – यह उनके पर्यावरण एवं जल संरक्षण पर निर्भर करता है।
पौधों में उत्सर्जन – पौधों में कोई विशेष उत्सर्जी अंग नहीं, फिर भी वे उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकालते हैं।
- लैटेक्स (दूध): महुआ, पीपल, बरगद, कनेर, आक आदि से निकलता है।
- गोंद (Gum): बबूल, आम, नीम आदि के तनों से चिपचिपा पदार्थ।
- रेजिन्स (Resins): चीड़ के तने से तारपीन का तेल।
- टैनिन (Tannin): कत्था की छाल से प्राप्त।
- हींग (Asafoetida): हींग के पौधे से प्राप्त उत्सर्जी पदार्थ।
- CO₂: रंध्रों द्वारा बाहर निकाली जाती है।
🌳 पौधों के उत्सर्जी पदार्थ मानव के लिए उपयोगी: रबर, गोंद, तारपीन, टैनिन, औषधियाँ आदि।
बिन्दुस्वाव (Guttation) – पौधों द्वारा अनावश्यक जल एवं लवण को पत्तियों की शिराओं पर बूँद के रूप में बाहर निकालना।
- उदाहरण: टमाटर, अरबी, नैस्ट्रेशियम, मकोय आदि के पौधे।
- समय: रात्रि में (जब प्रकाश-संश्लेषण बंद होता है तथा जल अवशोषण जारी रहता है)।
- विशेषता: यह पौधों में उत्सर्जन की एक विशिष्ट विधि है।
🌿 बिन्दुस्वाव और स्वेद (Transpiration) में अंतर: बिन्दुस्वाव जल की बूँदें होती हैं (द्रव), जबकि स्वेद जलवाष्प के रूप में होता है।
🧩 मिलान अभ्यास – 10: जीवों में उत्सर्जन
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🧠 Practice Quiz – 10: जीवों में उत्सर्जन
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