अध्याय 3 — विद्युत धारा | सम्पूर्ण अध्ययन
कक्षा-12 • भौतिकी • अध्याय 3

विद्युत धारा

आवेश-प्रवाह की परिभाषा से लेकर ओम के नियम, प्रतिरोधकता, सेल, किरखोफ के नियमों व व्हीटस्टोन सेतु तक — पूरे अध्याय की संकल्पनाएँ, सूत्र, आवश्यक चित्र और सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल, एक ही जगह।

I — विद्युत धारा (आवेश/समय) R — प्रतिरोध (V/I) R = ρl/A

3.1 भूमिका

स्थिरवैद्युतिकी से धारा की ओर — परिचय

अध्याय 1 तथा 2 में हमने सभी आवेशों को — चाहे वे स्वतंत्र हों अथवा परिबद्ध — विरामावस्था (rest) में मानकर अध्ययन किया था। जब आवेश गतिशील होते हैं तब वे विद्युत धारा का निर्माण करते हैं। ऐसी धाराएँ प्रकृति में अनेक स्थितियों में देखी जाती हैं — तड़ित (lightning) एक ऐसी ही परिघटना है, जिसमें आवेश बादलों से पृथ्वी तक वायुमंडल से होकर पहुँचते हैं तथा कभी-कभी विनाशकारी परिणाम देते हैं।

तड़ित में आवेश का प्रवाह स्थायी नहीं होता; परंतु हमारे दैनिक जीवन में हम अनेक युक्तियों में आवेशों को उसी प्रकार प्रवाहित होते देखते हैं जिस प्रकार नदी में जल प्रवाहित होता रहता है। टॉर्च तथा सेल से चलने वाली घड़ी इस प्रकार की युक्तियों के कुछ परिचित उदाहरण हैं। इस अध्ययन में हम अपरिवर्ती अथवा स्थायी विद्युत धारा (steady current) से संबंधित कुछ मूल नियमों का अध्ययन करेंगे।

NEET फोकस
  • अध्याय 1–2 में विरामावस्था में आवेशों (स्थिरवैद्युतिकी) का अध्ययन था; अध्याय 3 में गतिमान आवेशों (धारा) का अध्ययन है
  • तड़ित (lightning) में आवेश-प्रवाह अस्थायी (transient) होता है — यह स्थायी धारा का उदाहरण नहीं है
  • टॉर्च तथा सेल-चालित घड़ी स्थायी धारा के दैनिक जीवन के उदाहरण हैं

3.2 विद्युत धारा

आवेश-प्रवाह की परिभाषा एवं मात्रक

आवेश-प्रवाह के लंबवत एक लघु क्षेत्रफल की कल्पना कीजिए। इस क्षेत्र से होकर धनात्मक तथा ऋणात्मक — दोनों प्रकार के आवेश अग्र (forward) अथवा पश्च (backward) दिशा में प्रवाहित हो सकते हैं।

मान लीजिए किसी काल-अंतराल t में इस क्षेत्र से प्रवाहित होने वाला नेट अग्रगामी धनावेश q₊ (अर्थात् अग्रगामी तथा पश्चगामी धनावेश का अंतर) है। इसी प्रकार, इसी क्षेत्र से प्रवाहित होने वाला नेट अग्रगामी ऋणावेश q₋ है। तब इस काल-अंतराल t में क्षेत्र से प्रवाहित होने वाला नेट आवेश q = q₊ − q₋ है। स्थायी धारा के लिए यह t के अनुक्रमानुपाती होता है:

स्थायी विद्युत धारा की परिभाषा: I = q/t

क्षेत्र से होकर अग्रगामी दिशा में प्रवाहित विद्युत धारा को यह परिभाषित करता है। यदि यह संख्या ऋणात्मक है तो यह संकेत मिलता है कि धारा पश्चदिशा में है।

विद्युत धाराएँ सदैव अपरिवर्ती नहीं होतीं; अतः अधिक व्यापक रूप में धारा को तात्क्षणिक रूप में इस प्रकार परिभाषित करते हैं। मान लीजिए Δt [अर्थात् काल t तथा (t + Δt) के बीच] में किसी चालक की अनुप्रस्थ काट से प्रवाहित होने वाला नेट आवेश ΔQ है। तब काल t पर धारा, ΔQ तथा Δt के अनुपात की सीमा (जब Δt शून्य की ओर प्रवृत्त है) होती है:

तात्क्षणिक विद्युत धारा (सामान्य परिभाषा):
I(t) = limΔt→0 (ΔQ/Δt) = dQ/dt
लघु क्षेत्रफल ΔS I = q/t (नेट आवेश / समय) — SI मात्रक: ऐम्पियर (A)
चित्र 3.2.1 — किसी चालक के अनुप्रस्थ काट से प्रति एकांक समय गुजरने वाला नेट आवेश ही विद्युत धारा है

SI मात्रकों में विद्युत धारा का मात्रक ऐम्पियर (A) है। एक ऐम्पियर को विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव द्वारा परिभाषित किया जाता है (अध्याय 4 में)। घरेलू वैद्युत-साधित्रों में प्रवाहित होने वाली प्रतिरूपी धारा के परिमाण की कोटि एक ऐम्पियर होती है। किसी औसत तड़ित में हज़ारों ऐम्पियर कोटि की धारा प्रवाहित होती है, जबकि हमारी तंत्रिकाओं से प्रवाहित होने वाली धाराएँ कुछ माइक्रोऐम्पियर कोटि की होती हैं।

NEET फोकस
  • विद्युत धारा: I = q/t (स्थायी); I(t) = dQ/dt (तात्क्षणिक)
  • विद्युत धारा एक अदिश राशि है (यद्यपि परिपथ में इसे तीर द्वारा दिखाया जाता है) — धाराएँ सदिश योग नियम का पालन नहीं करतीं
  • धारा का SI मात्रक — ऐम्पियर (A)
  • घरेलू उपकरणों में धारा ~1 A; औसत तड़ित में ~हज़ारों ऐम्पियर; तंत्रिकाओं में ~माइक्रोऐम्पियर कोटि
  • ऋणात्मक चिह्न का अर्थ — धारा मानी गई दिशा के विपरीत प्रवाहित है

3.3 चालक में विद्युत धारा

चालक बनाम कुचालक, यादृच्छिक गति एवं अपवाह की भूमिका

यदि किसी वैद्युत आवेश पर विद्युत क्षेत्र अनुप्रयुक्त किया जाए तो वह एक बल का अनुभव करेगा। यदि वह गति करने के लिए स्वतंत्र है तो गतिमान होकर विद्युत धारा उत्पन्न करेगा। वायुमंडल के ऊपरी स्तर — जिसे आयनमंडल कहते हैं — की भाँति प्रकृति में मुक्त आवेशित कण पाए जाते हैं। तथापि, अणुओं तथा परमाणुओं में ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन तथा धनावेशित नाभिक एक-दूसरे से परिबद्ध होने के कारण गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते।

कुछ पदार्थों में इलेक्ट्रॉन परिबद्ध रहते हैं — विद्युत क्षेत्र अनुप्रयुक्त करने पर भी त्वरित नहीं होते; ऐसे पदार्थ विद्युतरोधी (insulators) कहलाते हैं। कुछ अन्य पदार्थों में — विशेषकर धातुओं में — कुछ इलेक्ट्रॉन स्थूल पदार्थ के भीतर गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। इन पदार्थों में, जिन्हें सामान्यतः चालक (conductors) कहते हैं, विद्युत क्षेत्र अनुप्रयुक्त करने पर विद्युत धारा उत्पन्न होती है।

+Q −Q E (विद्युत क्षेत्र) धात्विक बेलन के सिरों पर +Q और −Q आवेश; इलेक्ट्रॉनों का अपवाह E के विपरीत दिशा में
चित्र 3.3.1 — बेलनाकार चालक के सिरों पर विपरीत आवेश रखने से उत्पन्न क्षेत्र इलेक्ट्रॉनों को अपवाहित कराता है

ठोस चालकों में धारा-वहन

यदि हम ठोस चालक पर विचार करें तो इनमें परमाणु आपस में निकट रूप से आबद्ध होते हैं, जिसके कारण ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन विद्युत धारा का वहन करते हैं। तथापि, अन्य प्रकार के चालक भी होते हैं जैसे विद्युत अपघटनी विलयन, जिनमें धनावेश तथा ऋणावेश दोनों गति कर सकते हैं। इस अध्याय की चर्चा को ठोस चालकों पर केंद्रित रखा गया है, जिनमें स्थिर धनायनों की पृष्ठभूमि में ऋण आवेशित इलेक्ट्रॉन विद्युत धारा का वहन करते हैं।

बिना विद्युत क्षेत्र के — यादृच्छिक ऊष्मीय गति

जब कोई विद्युत क्षेत्र उपस्थित नहीं होता, इलेक्ट्रॉन तापीय गति करते समय आबद्ध आयनों से संघट्ट करते हैं। संघट्ट के पश्चात इलेक्ट्रॉन की चाल अपरिवर्तित रहती है, परंतु संघट्ट के बाद चाल की दिशा पूर्णतः यादृच्छिक हो जाती है। अतः औसत रूप से, किसी एक विशेष दिशा में गमन करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या, ठीक विपरीत दिशा में गमन करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है — अतः कोई नेट विद्युत धारा नहीं होती।

विद्युत क्षेत्र लगाने पर — अल्पकालिक धारा एवं स्थायी धारा

जब चालक के किसी टुकड़े पर विद्युत क्षेत्र अनुप्रयुक्त किया जाता है (जैसे बेलन के सिरों पर +Q तथा −Q रखकर), तो उत्पन्न क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन +Q की ओर त्वरित होते हैं और आवेशों को उदासीन करने के लिए गति करते हैं। जब तक इलेक्ट्रॉन का प्रवाह बना रहेगा, विद्युत धारा बनी रहेगी — परंतु यह बहुत अल्प समय के लिए ही बहेगी, क्योंकि आवेश शीघ्र उदासीन हो जाते हैं।

स्थायी धारा कैसे प्राप्त होती है? ऐसी युक्तियाँ जो बेलन के सिरों पर, चालक के अंदर गतिमान इलेक्ट्रॉनों द्वारा उदासीन सभी आवेशों की नए आवेशों से पुनः पूर्ति कराएँ — चालक में एक स्थायी विद्युत क्षेत्र स्थापित रहेगा, जिसके परिणामस्वरूप उत्पन्न धारा अल्पावधि की न होकर सतत विद्युत धारा होगी। ऐसी स्थायी विद्युत क्षेत्र उत्पन्न करने वाली युक्तियाँ विद्युत सेल अथवा बैटरियाँ होती हैं (देखें अनुच्छेद 3.10)।
NEET फोकस
  • चालक (conductor): जिसमें कुछ इलेक्ट्रॉन स्थूल पदार्थ के भीतर गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं (जैसे धातुएँ)
  • विद्युतरोधी (insulator): जिसमें इलेक्ट्रॉन कसकर परिबद्ध होते हैं — क्षेत्र लगाने पर भी त्वरित नहीं होते
  • बिना विद्युत क्षेत्र के — यादृच्छिक गति के कारण नेट धारा शून्य
  • विद्युत क्षेत्र लगाने पर अल्पकालिक धारा बहती है; स्थायी धारा के लिए निरंतर आवेश-पूर्ति आवश्यक
  • विद्युत सेल/बैटरियाँ स्थायी विद्युत क्षेत्र बनाए रखकर सतत धारा उत्पन्न करती हैं
  • ठोस चालकों में धारा-वाहक इलेक्ट्रॉन; विद्युत अपघट्य में धनायन व ऋणायन दोनों

3.4 ओम का नियम

प्रतिरोध, प्रतिरोधकता एवं चालकता की संकल्पना

विद्युत धारा के प्रवाह के लिए उत्तरदायी भौतिक युक्तियों की खोज से काफ़ी पहले जी. एस. ओम ने सन् 1828 में धारा-प्रवाह से संबद्ध एक मूल नियम की खोज कर ली थी। एक चालक की परिकल्पना कीजिए जिससे धारा I प्रवाहित हो रही है और मान लीजिए V, चालक के सिरों के बीच विभवांतर है। ओम के नियम का कथन है:

ओम का नियम: V ∝ I   अथवा   V = R I

यहाँ आनुपातिकता स्थिरांक R, चालक का प्रतिरोध (resistance) कहलाता है। प्रतिरोध का SI मात्रक ओम है और इसे प्रतीक Ω द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है: 1 Ω = 1 V A⁻¹। प्रतिरोध R चालक के केवल पदार्थ पर ही नहीं, बल्कि चालक के विस्तार (लंबाई व अनुप्रस्थ काट) पर भी निर्भर करता है।

प्रतिरोध की लंबाई तथा अनुप्रस्थ काट पर निर्भरता

लंबाई l तथा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A की किसी आयताकार सिल्ली पर विचार कीजिए। ऐसी दो सर्वसम सिल्लियाँ सिरे-से-सिरे मिलाकर रखने पर संयोजन की लंबाई 2l हो जाती है। इस संयोजन से उतनी ही धारा प्रवाहित होगी जितनी किसी एक सिल्ली से — यदि प्रत्येक सिल्ली के सिरों के मध्य विभवांतर V हो, तो संयोजन के सिरों के मध्य 2V होगा। अतः संयोजन का प्रतिरोध 2R होगा — अर्थात लंबाई दोगुनी करने पर प्रतिरोध दोगुना:

प्रतिरोध — लंबाई के अनुक्रमानुपाती R ∝ l

इसी प्रकार, यदि सिल्ली को लंबाई में दो समान भागों में विभाजित कर, प्रत्येक को A/2 अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल के रूप में गिनें (अर्थात् दो सिल्लियों को पार्श्वक्रम में जोड़ा गया समझें), तो दिए गए V के लिए प्रत्येक आधी सिल्ली से I/2 धारा होगी; अतः प्रत्येक आधी सिल्ली का प्रतिरोध 2R होगा — अर्थात अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल आधा करने पर प्रतिरोध दोगुना:

प्रतिरोध — अनुप्रस्थ काट के व्युत्क्रमानुपाती R ∝ 1/A

इन दोनों संबंधों को संयोजित करने पर किसी दिए गए चालक के लिए:

प्रतिरोध का सूत्र: R = ρ · (l/A)

यहाँ ρ एक आनुपातिकता स्थिरांक है, जो चालक के पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है — इसके विस्तार पर नहीं। ρ को प्रतिरोधकता (resistivity) कहते हैं।

A, l (a) मूल सिल्ली — R = ρl/A (b) दो सिल्लियाँ श्रेणी में — कुल लंबाई 2l ⇒ प्रतिरोध 2R (c) एक सिल्ली को दो पतली सिल्लियों में विभाजित (प्रत्येक का क्षेत्रफल A/2) ⇒ प्रत्येक का प्रतिरोध 2R R ∝ l तथा R ∝ 1/A ⇒ R = ρ(l/A)
चित्र 3.4.1 — लंबाई l तथा अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A की आयताकार सिल्ली के संबंध R = ρl/A का निदर्श चित्र

समीकरण R = ρl/A का प्रयोग करने पर, ओम के नियम को इस प्रकार व्यक्त कर सकते हैं:

ओम के नियम का वैकल्पिक रूप V = I × R = Iρl/A

विद्युत धारा प्रति एकांक क्षेत्र (धारा के अभिलंबवत ली गई) I/A धारा घनत्व j कहलाती है और यह प्रतीक j द्वारा निर्दिष्ट होती है। धारा घनत्व का SI मात्रक A/m² है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी एकसमान विद्युत क्षेत्र E के चालक की लंबाई l है तो चालक के सिरों के बीच विभवांतर El होता है। इसका उपयोग करने पर:

सदिश रूप में ओम का नियम: E = jρ   अथवा   j = σE

जहाँ σ = 1/ρ को चालकता (conductivity) कहते हैं। ओम के नियम को प्रायः समीकरण V = IR के अलावा j = σE द्वारा भी समतुल्य रूप में व्यक्त किया जाता है।

जॉर्ज साइमन ओम (1787–1854): जर्मन भौतिकविज्ञानी, म्यूनिख में प्रोफ़ेसर थे। ओम ने अपने नियम की खोज ऊष्मा-चालन से सादृश्य के आधार पर की — विद्युत क्षेत्र ताप-प्रवणता के तुल्य है और विद्युत धारा ऊष्मा-प्रवाह के।
NEET फोकस
  • ओम का नियम: V ∝ I अथवा V = IR
  • प्रतिरोध का SI मात्रक — ओम (Ω); 1 Ω = 1 V A⁻¹
  • R ∝ l तथा R ∝ 1/A ⇒ R = ρl/A
  • प्रतिरोधकता ρ पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर — आकार/विस्तार पर नहीं
  • चालकता σ = 1/ρ; सदिश रूप में ओम का नियम: j = σE
  • धारा घनत्व j = I/A (धारा के अभिलंबवत), मात्रक A/m²
  • ओम के नियम की खोज 1828 में, ऊष्मा-चालन के सादृश्य के आधार पर

3.5 इलेक्ट्रॉन का अपवाह एवं प्रतिरोधकता का उद्गम

अपवाह वेग, विश्रांति काल एवं चालकता की सूक्ष्म व्युत्पत्ति

हमने पहले देखा है कि जब कोई इलेक्ट्रॉन किसी भारी आयन से संघट्ट करता है तो संघट्ट के बाद वह उसी चाल से चलता है, लेकिन दिशा यादृच्छिक हो जाती है। यदि हम सभी इलेक्ट्रॉनों पर विचार करें तो उनका औसत वेग शून्य होगा, क्योंकि दिशाएँ यादृच्छिक हैं:

बिना क्षेत्र के, इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग (1/N) Σᵢ vᵢ = 0

अब ऐसी स्थिति पर विचार करें जब यह चालक किसी विद्युत क्षेत्र में उपस्थित है। इस क्षेत्र के कारण इलेक्ट्रॉन में त्वरण उत्पन्न होगा:

इलेक्ट्रॉन का त्वरण a = −eE/m

जहाँ −e इलेक्ट्रॉन का आवेश तथा m इसका द्रव्यमान है। दिए गए समय t में iᵗʰ इलेक्ट्रॉन पर पुनः विचार करें — यह इलेक्ट्रॉन t के कुछ समय पहले अंतिम बार संघट्ट करेगा और मान लीजिए tᵢ इसके अंतिम संघट्ट के बाद व्यतीत समय है। यदि vᵢ अंतिम संघट्ट के तुरंत पश्चात का वेग था, तब समय t पर इसका वेग:

iवें इलेक्ट्रॉन का समय t पर वेग Vᵢ = vᵢ + (−eE/m) tᵢ
बिना विद्युत क्षेत्र (यादृच्छिक पथ) विद्युत क्षेत्र E में (शुद्ध अपवाह B'→B की ओर) E के विपरीत दिशा में मामूली शुद्ध अपवाह (drift) दिखलाई देता है
चित्र 3.5.1 — बारंबार संघट्टों द्वारा इलेक्ट्रॉन की गति; विद्युत क्षेत्र में सूक्ष्म अपवाह वेग सहित यादृच्छिक गति

चूँकि vᵢ का औसत शून्य है (संघट्ट के तुरंत बाद वेग की दिशा पूर्णतया यादृच्छिक होती है), इलेक्ट्रॉनों के संघट्ट नियमित काल-अंतरालों पर न होकर यादृच्छिक समय में होते हैं। यदि लगातार संघट्टों के बीच औसत समय को τ (जिसे विश्रांति काल — relaxation time कहते हैं) से निर्दिष्ट करें, तो किसी दिए गए समय t पर N इलेक्ट्रॉनों के लिए औसत लेने पर हमें औसत वेग vd प्राप्त होता है:

अपवाह वेग (Drift Velocity) का सूत्र:
vd = −(eEτ)/m
महत्वपूर्ण परिणाम: यह बताता है कि इलेक्ट्रॉन, यद्यपि त्वरित है, एक औसत वेग से गतिमान है जो समय पर निर्भर नहीं करता। यह परिघटना अपवाह (drift) की है और vd अपवाह वेग कहलाता है।

अपवाह वेग से धारा घनत्व का सूत्र

अपवाह के कारण, विद्युत क्षेत्र E के लंबवत किसी क्षेत्र से होकर आवेशों का नेट परिवहन होगा। चालक के अंदर एक समतलीय क्षेत्र A पर विचार करें जो E के समांतर क्षेत्र पर अभिलंब है। अत्यणु समय Δt में, क्षेत्र की बायीं ओर के सभी इलेक्ट्रॉन |vd|Δt दूरी पार कर लिए होंगे। यदि चालक में प्रति एकांक आयतन मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n है तो n Δt |vd| A ऐसे इलेक्ट्रॉन होंगे। परिभाषानुसार, क्षेत्र A को समय Δt में पार करने वाले आवेश I Δt होंगे:

धारा का सूत्र I Δt = n e A |vd| Δt   ⇒   I = |j| A
धारा घनत्व का व्यंजक (सदिश रूप) j = (ne²τ/m) E

चूँकि j = σE से तुलना करने पर ओम के नियम की प्रतिकृति प्राप्त होती है, हमें चालकता का सूत्र मिलता है:

चालकता का सूत्र: σ = ne²τ/m

इस प्रकार हम देखते हैं कि विद्युत चालकता का एक सरल चित्रण ओम के नियम की प्रतिकृति तैयार करता है — यह पूर्वधारणा बनाई गई है कि τ और n, E से स्वतंत्र स्थिरांक हैं।

3.5.1 गतिशीलता (Mobility)

जैसा कि हम देख चुके हैं, चालकता गतिमान आवेश वाहकों से उत्पन्न होती है। धातुओं में यह गतिमान आवेश वाहक इलेक्ट्रॉन हैं, आयनित गैस में ये इलेक्ट्रॉन तथा धन आवेशित आयन हैं, विद्युत अपघट्य में ये धनायन तथा ऋणायन दोनों हो सकते हैं।

एक महत्वपूर्ण राशि गतिशीलता μ है, जिसे प्रति एकांक विद्युत क्षेत्र के अपवाह वेग के परिमाण के रूप में परिभाषित करते हैं:

गतिशीलता का सूत्र: μ = |vd| / E = eτ/m

गतिशीलता का SI मात्रक m²/(V·s) है और इसके प्रायोगिक मात्रक (cm²/Vs) का 10⁴ गुना है। गतिशीलता धनात्मक होती है।

NEET फोकस
  • यादृच्छिक ऊष्मीय गति के कारण इलेक्ट्रॉनों का औसत वेग शून्य होता है — यह अपवाह वेग में योगदान नहीं करता
  • अपवाह वेग vd = −eEτ/m — क्षेत्र के कारण उत्पन्न औसत (समय-स्वतंत्र) वेग
  • विश्रांति काल (τ): लगातार संघट्टों के बीच का औसत समय
  • धारा घनत्व j = ne²τE/m; चालकता σ = ne²τ/m — ओम के नियम की सूक्ष्म व्युत्पत्ति
  • गतिशीलता μ = |vd|/E = eτ/m; SI मात्रक m²/(V·s); सदैव धनात्मक
  • अपवाह चाल अत्यंत कम (~ mm/s कोटि) जबकि तापीय चाल बहुत अधिक (~10⁵ m/s) — विद्युत क्षेत्र परिपथ में लगभग प्रकाश के वेग से स्थापित होता है, इसलिए धारा तुरंत प्रवाहित होने लगती है

3.6 ओम के नियम की सीमाएँ

ओमीय एवं अनओमीय अवयव — विचलन के तीन प्रकार

यद्यपि ओम का नियम पदार्थों के विस्तृत वर्ग के लिए मान्य है, विद्युत परिपथों में उपयोग होने वाले कुछ ऐसे पदार्थ एवं युक्तियाँ विद्यमान हैं जहाँ V तथा I की आनुपातिकता लागू नहीं होती। मोटे तौर पर, यह विचलन निम्नलिखित तीन प्रकार का हो सकता है:

(a) V की I से आनुपातिकता समाप्त VI (b) डायोड — दिशा-निर्भर IV (c) GaAs — बहुमानी V IV
चित्र 3.6.1 — ओम के नियम के तीन प्रकार के विचलन: (a) अरैखिक V-I, (b) डायोड का दिशा-निर्भर व्यवहार, (c) GaAs में बहुमानी V
प्रकारविवरणउदाहरण
(a)V की I से आनुपातिकता समाप्त हो जाती है (ग्राफ रैखिक ओम-नियम से भिन्न)सामान्य अरैखिक अवयव
(b)V तथा I के मध्य संबंध, V के चिह्न पर निर्भर करता है — विपरीत दिशा में समान परिमाण की धारा उत्पन्न नहीं होतीडायोड (अध्याय 14)
(c)V तथा I के मध्य संबंध एकमात्र (unique) नहीं है — उसी धारा I के लिए V के एक से अधिक मान हो सकते हैंGaAs (गैलियम आर्सेनाइड)
पदार्थ तथा युक्तियाँ जो V = IR (ओम के नियम) का पालन नहीं करतीं, यथार्थ में इलेक्ट्रॉनिक परिपथ में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं (जैसे डायोड, ट्रांजिस्टर)। तथापि इस अध्याय तथा परवर्ती अध्यायों में, हम उन पदार्थों में विद्युत धारा का अध्ययन करेंगे जो ओम के नियम का पालन करते हैं (अर्थात् ओमीय चालक)।
NEET फोकस
  • ओम का नियम प्रकृति का मूलभूत नियम नहीं — यह केवल कुछ पदार्थों/परिस्थितियों में मान्य है
  • ओम के नियम से विचलन तीन प्रकार का: (a) V-I अरैखिक, (b) दिशा-निर्भर (डायोड), (c) एक धारा के लिए कई विभव मान (GaAs)
  • ओम के नियम का दूसरा प्रकथन: कोई चालक पदार्थ तभी ओम के नियम का पालन करता है जब उसकी प्रतिरोधकता, लगाए गए विद्युत क्षेत्र के परिमाण व दिशा पर निर्भर न करे
  • समांगी चालक (जैसे सिल्वर) अथवा अर्धचालक (जैसे शुद्ध/अशुद्धियुक्त जर्मेनियम) विद्युत क्षेत्र के मान की एक सीमा में ओम के नियम का पालन करते हैं; अति प्रबल क्षेत्र में नहीं

3.7 विभिन्न पदार्थों की प्रतिरोधकता

चालक, अर्धचालक एवं विद्युतरोधी का वर्गीकरण

प्रतिरोधकता तथा उनके बढ़ते हुए मान के अनुसार पदार्थों का वर्गीकरण चालक, अर्धचालक तथा विद्युतरोधी में किया जाता है। धातुओं की प्रतिरोधकता 10⁻⁸ Ωm से 10⁻⁶ Ωm के परिसर में होती है। इसके विपरीत मृत्तिका (सिरेमिक), रबर तथा प्लास्टिक जैसे विद्युतरोधी पदार्थ भी हैं, जिनकी प्रतिरोधकता धातुओं की तुलना में 10¹⁸ गुनी या अधिक है। इन दोनों के मध्य अर्धचालक हैं। इनकी प्रतिरोधकता, तथापि, ताप बढ़ाने पर अभिलाक्षणिक रूप से घटती है।

अर्धचालक की प्रतिरोधकता उपयुक्त अशुद्धियों को अल्प मात्रा में मिलाने पर कम की जा सकती है। इस अंतिम विशिष्टता का लाभ इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों में उपयोग होने वाले अर्धचालकों के निर्माण में किया जाता है।

पदार्थ वर्गप्रतिरोधकता ρ का परिसरउदाहरण
चालक (धातु)10⁻⁸ Ωm – 10⁻⁶ Ωmचाँदी, तांबा, ऐलुमिनियम
अर्धचालकचालक व विद्युतरोधी के मध्यसिलिकॉन, जर्मेनियम
विद्युतरोधीधातुओं की तुलना में 10¹⁸ गुनी या अधिकमृत्तिका (सिरेमिक), रबर, प्लास्टिक
NEET फोकस
  • प्रतिरोधकता के आधार पर वर्गीकरण: चालक < अर्धचालक < विद्युतरोधी
  • धातुओं की प्रतिरोधकता ~10⁻⁸ से 10⁻⁶ Ωm; विद्युतरोधियों की धातुओं से ~10¹⁸ गुना या अधिक
  • अर्धचालक की प्रतिरोधकता ताप बढ़ने पर घटती है (धातुओं के विपरीत)
  • अर्धचालक की प्रतिरोधकता अशुद्धियाँ (डोपिंग) मिलाकर नियंत्रित की जा सकती है — इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों के निर्माण का आधार

3.8 प्रतिरोधकता की ताप पर निर्भरता

धातु बनाम अर्धचालक — विपरीत व्यवहार

पदार्थ की प्रतिरोधकता ताप पर निर्भर पाई जाती है। विभिन्न पदार्थ एक जैसी निर्भरता प्रदर्शित नहीं करते। एक सीमित ताप परिसर में, जो बहुत अधिक नहीं होता, किसी धात्विक चालक की प्रतिरोधकता को इस प्रकार व्यक्त करते हैं:

प्रतिरोधकता की ताप-निर्भरता: ρT = ρ₀ [1 + α(T−T₀)]

जहाँ ρT ताप T पर प्रतिरोधकता है तथा ρ₀ संदर्भ ताप T₀ पर इसका माप है। α को प्रतिरोधकता ताप-गुणांक कहते हैं और इसकी विमा (ताप)⁻¹ है। धातुओं के लिए α का मान धनात्मक होता है।

समान सूत्र प्रतिरोध R के लिए भी प्रयुक्त होता है (क्योंकि R ∝ ρ, ज्यामिति स्थिर होने पर): RT = R₀[1 + α(T−T₀)]। ध्यान दीजिए, 0°C से बहुत कम तापों पर ग्राफ एक सरल रेखा से काफ़ी विचलित हो जाता है — अतः इस सूत्र को किसी संदर्भ ताप T₀ के लगभग किसी सीमित परिसर में ही उपयोग किया जा सकता है।

(a) धातु — ρ, T के साथ बढ़ता है (लगभग रैखिक) ρT (b) अर्धचालक — ρ, T के साथ घटता है ρT
चित्र 3.8.1 — धातु व अर्धचालक की प्रतिरोधकता का ताप के साथ विपरीत व्यवहार

ताप-निर्भरता की गुणात्मक व्याख्या

हम समीकरण σ = ne²τ/m (अर्थात् ρ = m/ne²τ) में व्युत्पन्न परिणामों के आधार पर प्रतिरोधकता की ताप-निर्भरता को गुणात्मक रूप में समझ सकते हैं। किसी पदार्थ की प्रतिरोधकता प्रति एकांक आयतन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n) तथा उसमें होने वाले संघट्टों (τ) पर प्रतिलोमी रूप से निर्भर करती है।

पदार्थताप बढ़ने पर nताप बढ़ने पर τρ = m/(ne²τ) पर प्रभाव
धातुलगभग अपरिवर्तितघटता है (अधिक संघट्ट)ρ बढ़ता है
अर्धचालक / विद्युतरोधीतेज़ी से बढ़ता हैघटता है, पर n की वृद्धि अधिक प्रभावीρ घटता है
धातुओं में n की ताप-निर्भरता उपेक्षणीय है, इसलिए ताप बढ़ने से τ के मान के घटने के कारण ρ बढ़ता है। परंतु विद्युतरोधियों एवं अर्धचालकों में ताप में वृद्धि के साथ n में भी वृद्धि होती है। यह वृद्धि τ में होने वाली किसी भी कमी से भी अधिक की क्षतिपूर्ति करती है, जिसके फलस्वरूप ऐसे पदार्थों के लिए प्रतिरोधकता ρ का मान ताप के साथ घट जाता है।

कुछ पदार्थ जैसे निक्रोम (निकैल, लोहा तथा क्रोमियम की मिश्रातु) बहुत दुर्बल ताप-निर्भरता प्रदर्शित करते हैं। मैंगनीन तथा कांस्टेंटन में भी इसी प्रकार के गुण हैं। चूँकि इनके प्रतिरोध की ताप-निर्भरता बहुत कम है, इनका उपयोग तार आबद्ध मानक प्रतिरोधकों के निर्माण में व्यापक रूप से किया जाता है।

NEET फोकस
  • ρT = ρ₀[1+α(T−T₀)] — सीमित परिसर में लागू; धातुओं के लिए α धनात्मक
  • धातुओं में ρ ताप बढ़ने पर बढ़ता है (n लगभग स्थिर, τ घटता है)
  • अर्धचालकों व विद्युतरोधियों में ρ ताप बढ़ने पर घटता है (n तेज़ी से बढ़ता है)
  • निक्रोम, मैंगनीन तथा कांस्टेंटन — ताप-निर्भरता बहुत कम; मानक प्रतिरोधक बनाने में उपयोगी
  • 0°C से बहुत नीचे तापों पर रैखिक सन्निकटन विफल

3.9 विद्युत ऊर्जा, शक्ति

जूल तापन एवं शक्ति संचरण

किसी चालक AB पर विचार कीजिए जिसमें A से B की ओर I धारा प्रवाहित हो रही है। A तथा B पर विद्युत विभव क्रमशः V(A) एवं V(B) से निरूपित किए गए हैं। चूँकि धारा A से B की ओर प्रवाहित हो रही है, V(A) > V(B) और चालक AB के सिरों के बीच विभवांतर V = V(A) − V(B) > 0 है।

Δt काल अंतराल में, आवेश की एक मात्रा ΔQ = IΔt, A से B की ओर चलती है। स्थितिज ऊर्जा में यह परिवर्तन:

स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन ΔUpot = −IVΔt < 0

ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार, यदि आवेश चालक के अंदर बिना संघट्ट किए गतिमान हों तो उनकी गतिज ऊर्जा बढ़ जाती (ΔK = IVΔt > 0)। परंतु वास्तविकता में, आवेश त्वरित गति से गमन नहीं करते, बल्कि अपरिवर्ती अपवाह वेग से चलते हैं। संघट्टों के समय आवेशों द्वारा प्राप्त की गई ऊर्जा, परमाणुओं के साथ आपस में बाँट ली जाती है — परमाणु ज्यादा प्रबल रूप से कंपन करते हैं, अर्थात् चालक गर्म हो जाते हैं।

इस प्रकार एक वास्तविक चालक में काल-अंतराल Δt में ऊष्मा के रूप में क्षयित ऊर्जा का परिमाण:

क्षयित ऊर्जा: ΔW = IVΔt

प्रति एकांक समय में क्षय हुई ऊर्जा, क्षयित शक्ति P के बराबर है (P = ΔW/Δt):

विद्युत शक्ति P = I V

ओम के नियम V = IR का उपयोग करने पर:

ओमी क्षय (शक्ति के वैकल्पिक रूप): P = I²R = V²/R

यह वही शक्ति है जो, उदाहरण के लिए किसी तापदीप्त विद्युत लैंप की कुंडली को प्रदीप्त करती है, जिसके कारण वह ऊष्मा तथा प्रकाश को विकिरण करता है। किसी चालक में स्थायी धारा का प्रवाह बनाए रखने के लिए हमें एक बाह्य स्रोत की आवश्यकता होती है — यही स्रोत इस शक्ति की आपूर्ति करता है (जैसे विद्युत सेल की रासायनिक ऊर्जा)।

विद्युत शक्ति संचरण में अनुप्रयोग

विद्युत शक्ति का संचरण पावर स्टेशन से घरों तथा कारखानों में सैकड़ों मील दूर संचरण केबल द्वारा किया जाता है। यदि Rc प्रतिरोध वाले संचरण केबल से होकर शक्ति P को पहुँचाना है, और यदि R के सिरों के बीच वोल्टता V है, मुख्य धारा I है, तो P = VI। संयोजक तारों में शक्ति क्षय:

संचरण में शक्ति क्षय: P꜀ = I²R꜀ = P²R꜀/V²

अतः दी गई शक्ति P को पहुँचाने के लिए, संयोजक तार में शक्ति क्षय V² के व्युत्क्रमानुपाती है। इसीलिए शक्ति संचरण उच्च वोल्टता पर किया जाता है, ताकि क्षय को न्यूनतम किया जा सके — इसके बाद ट्रांसफार्मर द्वारा वोल्टता उपयोग योग्य मान तक कम की जाती है।

NEET फोकस
  • विद्युत शक्ति P = IV = I²R = V²/R — तीनों समतुल्य रूप
  • चालक में क्षयित ऊर्जा ऊष्मा के रूप में विसर्जित होती है — "ओमी क्षय" अथवा जूल तापन
  • यह शक्ति बाह्य स्रोत (सेल की रासायनिक ऊर्जा) से आती है
  • संचरण केबल में क्षय P꜀ = P²R꜀/V² — उच्च वोल्टता पर संचरण से क्षय न्यूनतम
  • ट्रांसफार्मर द्वारा उच्च संचरण वोल्टता को उपयोग हेतु सुरक्षित मान तक कम किया जाता है

3.10 सेल, विद्युत वाहक बल (emf), आंतरिक प्रतिरोध

धारा का स्रोत एवं उसके गुणधर्म

विद्युत अपघटनी सेल विद्युत परिपथ में स्थायी धारा को बनाए रखने के लिए एक सरल युक्ति है। मूल रूप से एक सेल के दो इलैक्ट्रोड होते हैं, जो धनात्मक (P) तथा ऋणात्मक (N) कहलाते हैं। ये एक विद्युत अपघटनी विलयन में डूबे रहते हैं। विलयन में डूबे इलैक्ट्रोड विद्युत अपघट्य के साथ आवेशों का आदान-प्रदान करते हैं।

P (+) N (−) विद्युत अपघट्य R I →
चित्र 3.10.1 — धनात्मक टर्मिनल P तथा ऋणात्मक टर्मिनल N के साथ विद्युत अपघटनीय सेल; बाह्य प्रतिरोध R से जुड़ा हुआ

इसके फलस्वरूप धनात्मक इलैक्ट्रोड के ठीक पास विद्युत अपघटनी विलयन के किसी बिंदु A पर तथा स्वयं इस इलैक्ट्रोड के बीच एक विभवांतर V₊ (V₊ > 0) होता है। इसी प्रकार ऋणात्मक इलैक्ट्रोड अपने ठीक पास के विद्युत अपघटनी विलयन के किसी बिंदु B के सापेक्ष एक ऋणात्मक विभव −(V₋) (V₋ ≥ 0) पर हो जाता है। जब कोई विद्युत धारा नहीं प्रवाहित होती है तो समस्त विद्युत अपघटनी विलयन का समान विभव होता है, जिससे कि P तथा N के मध्य विभवांतर V₊ + V₋ रहता है। इस अंतर को सेल का विद्युत वाहक बल (emf) कहते हैं और इसे ε से निर्दिष्ट करते हैं:

विद्युत वाहक बल (emf) की परिभाषा:
ε = V₊ + V₋ > 0
ध्यान दीजिए ε वास्तव में एक विभवांतर है, बल नहीं। तथापि, इसके नाम के लिए विद्युत वाहक बल का उपयोग ऐतिहासिक कारणों से करते हैं। emf एक खुले परिपथ में (अर्थात् जब सेल से होकर कोई धारा नहीं प्रवाहित हो रही है) धनात्मक तथा ऋणात्मक इलैक्ट्रोड के मध्य विभवांतर है।

यदि R परिमित है तो I शून्य नहीं होगा। उस स्थिति में P तथा N के मध्य विभवांतर:

बंद परिपथ में टर्मिनल विभवांतर V = V₊ + V₋ − Ir = ε − Ir

जहाँ r सेल का आंतरिक प्रतिरोध है (जिस विद्युत अपघट्य से होकर धारा प्रवाहित होती है, उसका एक परिमित प्रतिरोध)। ओम के नियम V = IR के साथ संयोजित करने पर:

सेल के परिपथ में धारा: I = ε / (R + r)

R = 0 के लिए सेल से अधिकतम धारा प्राप्त की जा सकती है: Iअधिकतम = ε/r। तथापि अधिकांश सेलों में अधिकतम अनुमत धारा इससे बहुत कम होती है, जिससे सेल को स्थायी क्षति से बचाया जा सके।

NEET फोकस
  • emf (ε) = खुले परिपथ में सेल के धनात्मक व ऋणात्मक इलैक्ट्रोड के बीच विभवांतर = V₊ + V₋
  • बंद परिपथ में (धारा I प्रवाहित होने पर) टर्मिनल विभवांतर V = ε − Ir
  • परिपथ धारा I = ε/(R+r), जहाँ R बाह्य प्रतिरोध है
  • सेल से अधिकतम संभव धारा (शॉर्ट-सर्किट धारा) = ε/r (जब R=0)
  • शुष्क सेल (dry cell) का आंतरिक प्रतिरोध सामान्य विद्युत अपघटनी सेल से बहुत अधिक होता है

3.11 श्रेणी तथा पार्श्वक्रम में सेल

सेलों के संयोजन के नियम

प्रतिरोधकों की भाँति, विद्युत परिपथ में सेलों को भी संयोजित किया जा सकता है। परिपथ में धारा तथा विभवांतर के परिकलन के लिए सेलों के संयोजन को एक तुल्य सेल से प्रतिस्थापित किया जा सकता है।

श्रेणीक्रम में सेल

emf ε₁ तथा ε₂ के दो सेल, आंतरिक प्रतिरोध r₁ तथा r₂ के साथ श्रेणीक्रम में संयोजित हैं (प्रत्येक के एक टर्मिनल को मुक्त छोड़कर, दोनों सेलों के एक टर्मिनल एक-दूसरे से संयोजित)। इस संयोजन को तुल्य सेल (emf εeq, आंतरिक प्रतिरोध req) से प्रतिस्थापित किया जा सकता है:

श्रेणीक्रम में n सेलों का तुल्य सेल:
εeq = ε₁ + ε₂ + … + εn
req = r₁ + r₂ + … + rn
यह तब है, जब धारा प्रत्येक सेल के धनात्मक इलैक्ट्रोड से निकलती है। यदि इस संयोजन में धारा किसी सेल के ऋणात्मक इलैक्ट्रोड से निकले, तो εeq के व्यंजक में उस सेल का विद्युत वाहक बल ऋणात्मक चिह्न के साथ सम्मिलित होता है।

पार्श्वक्रम (समांतर) में सेल

दो सेलों के पार्श्व संयोजन (emf ε₁, ε₂; आंतरिक प्रतिरोध r₁, r₂) के लिए, तुल्य सेल का emf तथा आंतरिक प्रतिरोध:

पार्श्वक्रम में दो सेलों का तुल्य सेल 1/req = 1/r₁ + 1/r₂
εeq/req = ε₁/r₁ + ε₂/r₂

n सेलों के पार्श्व संयोजन के लिए सामान्यीकृत रूप:

पार्श्वक्रम में n सेलों का तुल्य सेल (व्यापक):
1/req = 1/r₁ + … + 1/rn
εeq/req = ε₁/r₁ + … + εn/rn
ε₁, r₁ ε₂, r₂ (a) श्रेणीक्रम (b) पार्श्वक्रम (समांतर)
चित्र 3.11.1 — दो सेलों के श्रेणीक्रम तथा पार्श्वक्रम संयोजन
NEET फोकस
  • श्रेणीक्रम में n सेल: εeq = Σεᵢ (व्यष्टिगत emf का योग); req = Σrᵢ (आंतरिक प्रतिरोधों का योग)
  • पार्श्वक्रम में n सेल: 1/req = Σ(1/rᵢ); εeq/req = Σ(εᵢ/rᵢ)
  • यदि किसी संयोजन में सेल विपरीत ध्रुवता में जुड़ा हो (धारा उसके ऋणात्मक टर्मिनल से निकले), तो उस सेल का emf ऋणात्मक चिह्न सहित लिया जाता है
  • श्रेणीक्रम संयोजन बड़ा emf देने के लिए उपयोगी; पार्श्वक्रम संयोजन कम आंतरिक प्रतिरोध व अधिक धारा-क्षमता के लिए उपयोगी

3.12 किरखोफ के नियम

जटिल परिपथों के विश्लेषण का शक्तिशाली उपकरण

विद्युत परिपथों में कभी-कभी कई प्रतिरोधक एवं सेल जटिल ढंग से संबद्ध होते हैं। श्रेणी एवं पार्श्व संयोजन के लिए जो सूत्र हमने पहले व्युत्पन्न किए हैं, वे परिपथ की सभी विद्युत धाराओं तथा विभवांतरों के लिए हमेशा पर्याप्त नहीं होते। दो नियम, जिन्हें किरखोफ के नियम कहते हैं, विद्युत परिपथों के विश्लेषण में बहुत उपयोगी होते हैं।

I₁ I₂ I₃ = I₁+I₂ (a) संधि नियम — I₁+I₂ = I₃ (b) पाश नियम — बंद पाश में ΣIR = Σε
चित्र 3.12.1 — किरखोफ के दो नियम: (a) संधि नियम (आवेश संरक्षण), (b) पाश नियम (ऊर्जा संरक्षण)

दिए गए परिपथ में हम प्रत्येक प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा को किसी प्रतीक — जैसे I — से नामांकित करते हुए और तीर के चिह्न द्वारा प्रतिरोध के अनुदिश धारा के प्रवाह को निर्दिष्ट करते हुए आगे बढ़ते हैं। यदि अंततः I धनात्मक निर्धारित होता है तो प्रतिरोधक में विद्युत धारा की वास्तविक दिशा, तीर की दिशा में है। यदि यह ऋणात्मक निकलता है, तो वास्तव में विद्युत धारा तीर की दिशा के विपरीत प्रवाहित हो रही है।

(a) संधि नियम (Junction Rule) — किरखोफ का प्रथम नियम

कथन: किसी संधि पर संधि से प्रवेश करने वाली विद्युत धाराओं का योग, इस संधि से निकलने वाली विद्युत धाराओं के योग के बराबर होता है।

यह नियम इस तथ्य से समझा जा सकता है कि जब विद्युत धारा स्थायी होती है, किसी संधि या चालक के किसी बिंदु पर आवेश संचित नहीं होता। अतः यह आवेश संरक्षण पर आधारित है।

(b) पाश (लूप) नियम (Loop Rule) — किरखोफ का द्वितीय नियम

कथन: प्रतिरोधकों तथा सेलों से सम्मिलित किसी बंद पाश के चारों ओर विभव में परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।

यह नियम भी सुस्पष्ट है, क्योंकि विद्युत विभव बिंदु की अवस्थिति पर निर्भर करता है। अतः किसी बिंदु से प्रस्थान कर यदि हम वापस उसी बिंदु पर आते हैं, तो कुल परिवर्तन शून्य होना चाहिए — यह ऊर्जा संरक्षण पर आधारित है।

हल करने की विधि (चरणबद्ध)
  • प्रत्येक शाखा में एक अज्ञात धारा (जैसे I₁, I₂, I₃…) निर्दिष्ट करें, तीर से दिशा मान लें
  • संधि नियम का प्रयोग कर अज्ञातों की संख्या कम करें (जहाँ संभव हो)
  • प्रत्येक स्वतंत्र बंद पाश के लिए पाश नियम लागू करें (अज्ञातों की संख्या जितने स्वतंत्र समीकरण आवश्यक)
  • प्राप्त युगपत समीकरणों को सामान्य बीजगणितीय विधि से हल करें
NEET फोकस
  • किरखोफ का संधि (जंक्शन) नियम आवेश संरक्षण पर आधारित: ΣIin = ΣIout
  • किरखोफ का पाश (लूप) नियम ऊर्जा संरक्षण पर आधारित: किसी बंद पाश में ΣIR = Σε
  • तारों को मोड़ने या पुनः अभिविन्यसित करने से किरखोफ के संधि नियम की वैधता नहीं बदलती
  • यदि सेल से होकर बहने वाली धारा को P (धनात्मक टर्मिनल) से N (ऋणात्मक टर्मिनल) की ओर बढ़ते हुए गिनें तो V = ε − Ir होता है (विपरीत दिशा में ε + Ir)
  • गुस्ताव रॉबर्ट किरखोफ (1824-1887): जर्मनी के भौतिकविज्ञानी, हीडलबर्ग एवं बर्लिन में प्रोफ़ेसर; स्पेक्ट्रमिकी के विकास के लिए भी जाने जाते हैं

3.13 व्हीटस्टोन सेतु

किरखोफ के नियमों का उत्कृष्ट अनुप्रयोग

किरखोफ के नियमों के एक अनुप्रयोग के रूप में व्हीटस्टोन सेतु परिपथ पर विचार कीजिए। सेतु में चार प्रतिरोधक R₁, R₂, R₃ तथा R₄ होते हैं। विकर्णतः विपरीत बिंदुओं (A तथा C) के एक युग्म से कोई विद्युत स्रोत संबद्ध है — यह (AC) बैटरी भुजा कहलाती है। दूसरे दो शीर्ष बिंदुओं, B तथा D के मध्य एक गैल्वेनोमीटर (धारा-संसूचक युक्ति) संबद्ध है — यह लाइन गैल्वेनोमीटर भुजा कहलाती है।

B C D A R₁ R₂ R₃ R₄ G ε (बैटरी)
चित्र 3.13.1 — व्हीटस्टोन सेतु: AC विकर्ण पर बैटरी, BD विकर्ण पर गैल्वेनोमीटर G

सरलता के लिए हम कल्पना करते हैं कि सेल में कोई आंतरिक प्रतिरोध नहीं है। सामान्यतः G से होकर विद्युत धारा Ig तथा सभी प्रतिरोधकों से होकर भी धारा प्रवाहित होगी। उस संतुलित सेतु का उदाहरण एक विशेष महत्व रखता है जिसमें प्रतिरोधक ऐसे हों कि Ig = 0। ऐसे प्रकरण में, संधि D तथा B के लिए किरखोफ के संधि नियम को अनुप्रयुक्त करने पर हमें संबंध I₁ = I₃ तथा I₂ = I₄ तुरंत प्राप्त हो जाते हैं।

बंद पाशों ADBA तथा CBDC पर किरखोफ के पाश नियम को अनुप्रयुक्त करने पर, हम संतुलन प्रतिबंध प्राप्त करते हैं:

व्हीटस्टोन सेतु का संतुलन प्रतिबंध:
R₂/R₁ = R₄/R₃   (अर्थात् R₁R₄ = R₂R₃)

चार प्रतिरोधकों में संबंध दिखलाने वाले इस समीकरण को गैल्वेनोमीटर में शून्य अथवा नगण्य विक्षेप के लिए संतुलन प्रतिबंध कहते हैं।

अनुप्रयोग — अज्ञात प्रतिरोध का निर्धारण: कल्पना कीजिए हमारे पास कोई अज्ञात प्रतिरोध है, जिसे हम चौथी भुजा (R₄) में लगाते हैं। ज्ञात प्रतिरोधकों R₁ तथा R₂ को सेतु की पहली तथा दूसरी भुजा में रखते हुए, हम R₃ को तब तक परिवर्तित करते जाते हैं जब तक गैल्वेनोमीटर नगण्य विक्षेप नहीं दिखलाता। सेतु तब संतुलित है तथा संतुलन प्रतिबंध से अज्ञात प्रतिरोध R₄ का मान प्राप्त होता है:
R₄ = R₃ · (R₂/R₁)
इस सिद्धांत को उपयोग करने वाली प्रायोगिक युक्ति मीटर सेतु कहलाती है।
NEET फोकस
  • व्हीटस्टोन सेतु में चार प्रतिरोधक (R₁,R₂,R₃,R₄); बैटरी विकर्ण AC पर, गैल्वेनोमीटर विकर्ण BD पर
  • संतुलन प्रतिबंध: R₂/R₁ = R₄/R₃ (जब गैल्वेनोमीटर धारा Ig = 0)
  • संतुलन की अवस्था में सेतु के व्यवहार को अलग-अलग विश्लेषित करना सरल हो जाता है (I₁=I₃, I₂=I₄)
  • व्हीटस्टोन सेतु का व्यावहारिक अनुप्रयोग: अज्ञात प्रतिरोध का शुद्ध निर्धारण (मीटर सेतु/स्लाइड-वायर सेतु)
  • तीन ज्ञात प्रतिरोधों की सहायता से चौथे अज्ञात प्रतिरोध का मान: R₄ = R₃(R₂/R₁)

✦ सारांश व सूत्र-सूची

रिवीज़न — सभी महत्वपूर्ण सूत्र एवं विचारणीय विषय

अध्याय के मुख्य सूत्र (एक नज़र में)
  1. विद्युत धारा: I = q/t (स्थायी); I(t) = dQ/dt (तात्क्षणिक)
  2. ओम का नियम: V = IR; सदिश रूप: j = σE, E = ρj
  3. प्रतिरोध: R = ρl/A
  4. अपवाह वेग: vd = eEτ/m (परिमाण); धारा: I = neAvd
  5. चालकता: σ = ne²τ/m; प्रतिरोधकता: ρ = m/ne²τ
  6. गतिशीलता: μ = vd/E = eτ/m
  7. प्रतिरोधकता की ताप-निर्भरता: ρT = ρ₀[1+α(T−T₀)]
  8. विद्युत शक्ति: P = IV = I²R = V²/R
  9. सेल: टर्मिनल विभवांतर V = ε − Ir; परिपथ धारा I = ε/(R+r)
  10. श्रेणी में n सेल: εeq=Σεᵢ, req=Σrᵢ
  11. पार्श्वक्रम में n सेल: 1/req=Σ(1/rᵢ), εeq/req=Σ(εᵢ/rᵢ)
  12. किरखोफ का संधि नियम: ΣIin = ΣIout
  13. किरखोफ का पाश नियम: बंद पाश में ΣΔV = 0
  14. व्हीटस्टोन सेतु संतुलन प्रतिबंध: R₁/R₂ = R₃/R₄

विचारणीय विषय (महत्वपूर्ण बिंदु)

1. यद्यपि धारा की दिशा को परिपथ में एक तीर से दर्शाते हैं, परंतु यह एक अदिश राशि है — धाराएँ सदिश योग के नियम का पालन नहीं करतीं। धारा को I = j·ΔS (दो सदिशों के अदिश गुणनफल) द्वारा भी परिभाषित किया जा सकता है।

2. प्रतिरोधक ओम के नियम का पालन करता है, जबकि डायोड नहीं करता। यह दृढ़कथन कि V=IR ओम के नियम का प्रकथन है, सत्य नहीं है — यह समीकरण केवल प्रतिरोध को परिभाषित करता है और इसे सभी चालक युक्तियों में प्रयुक्त कर सकते हैं, चाहे वे ओम के नियम का पालन करती हों या नहीं।

3. समांगी चालक (सिल्वर) या अर्धचालक (जर्मेनियम) विद्युत क्षेत्र के मान की एक सीमा में ही ओम के नियम का पालन करते हैं — अति प्रबल क्षेत्र में ऐसा नहीं होता।

4. विद्युत क्षेत्र E में इलेक्ट्रॉन की गति (i) यादृच्छिक संघट्टों के कारण तथा (ii) E के कारण उत्पन्न गति — दोनों के योग के बराबर है। यादृच्छिक संघट्टों के कारण गति का औसत शून्य हो जाता है, इसलिए अपवाह चाल vd केवल विद्युत क्षेत्र के कारण ही है।

5. किरखोफ का संधि नियम आवेश संरक्षण नियम पर आधारित है — तारों को मोड़ने या पुनः अभिविन्यसित करने से इसकी वैधता नहीं बदलती।

➕ अन्य NEET संबंधित तथ्य

परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु

चूक गए
  • विभवमापी (Potentiometer) का सिद्धांत — विभवमापी एकसमान अनुप्रस्थ-काट वाले लंबे तार में स्थिर धारा प्रवाहित कर, विभव-पात को तार की लंबाई के अनुक्रमानुपाती (V ∝ l) बनाता है — किसी अज्ञात EMF अथवा सेल की तुलना करने के लिए संतुलन बिंदु (null point) की लंबाई मापी जाती है, जहाँ गैल्वेनोमीटर में कोई विक्षेप नहीं होता — इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि संतुलन बिंदु पर यह परिपथ से कोई धारा नहीं लेता, अतः यह वोल्टमीटर से कहीं अधिक यथार्थ है।
सूत्र
  • विभवमापी से आंतरिक प्रतिरोध — यदि किसी सेल का संतुलन बिंदु खुले परिपथ में l₁ तथा किसी ज्ञात बाह्य प्रतिरोध R जोड़ने पर l₂ प्राप्त हो, तो सेल का आंतरिक प्रतिरोध r = R(l₁−l₂)/l₂ से प्राप्त होता है।
चूक गए
  • गैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलना — शंट प्रतिरोध सूत्र — किसी गैल्वेनोमीटर (प्रतिरोध G, पूर्ण-स्केल विक्षेप धारा Ig) को बड़ी परास (I) वाले अमीटर में बदलने हेतु, इसके साथ एक अत्यंत लघु प्रतिरोध (शंट, S) समांतर क्रम में जोड़ा जाता है — S = IgG/(I−Ig) — शंट अधिकांश धारा को स्वयं से गुजरने देता है, जिससे गैल्वेनोमीटर से केवल एक निश्चित लघु अंश ही गुजरे।
चूक गए
  • गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलना — श्रेणी प्रतिरोध सूत्र — किसी गैल्वेनोमीटर को बड़ी परास (V) वाले वोल्टमीटर में बदलने हेतु, इसके साथ एक अत्यंत उच्च प्रतिरोध (R) श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है — R = (V/Ig) − G — उच्च श्रेणी-प्रतिरोध यह सुनिश्चित करता है कि वोल्टमीटर परिपथ से न्यूनतम धारा ले।
ट्रैप
  • अमीटर बनाम वोल्टमीटर — परिपथ में जोड़ने की विधि — अमीटर सदैव श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है (आदर्श प्रतिरोध = 0); वोल्टमीटर सदैव समांतर क्रम में जोड़ा जाता है (आदर्श प्रतिरोध = ∞) — दोनों को उलट कर जोड़ना एक गंभीर प्रायोगिक त्रुटि है।
चूक गए
  • प्रतिरोधक रंग-कोड (Resistor Colour Code) — मानक रंग-क्रम (0 से 9 अंकों हेतु): काला(0), भूरा(1), लाल(2), नारंगी(3), पीला(4), हरा(5), नीला(6), बैंगनी(7), स्लेटी(8), सफ़ेद(9) — स्मृति-सूत्र: "B B R O Y of Great Britain has a Very Good Wife" — प्रथम दो वलय सार्थक अंक, तीसरी वलय गुणक (10 की घात), तथा चौथी वलय सहनशीलता दर्शाती है।
तथ्य
  • अपवाह वेग अत्यंत धीमा, फिर भी बल्ब तुरंत जलता है — विरोधाभास का समाधान — इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग अत्यंत लघु (कोटि mm/s) होता है, जबकि तार में इलेक्ट्रॉनों का ऊष्मीय वेग अत्यंत उच्च (कोटि 10⁵ m/s) होता है — बल्ब का तुरंत जलना, इलेक्ट्रॉनों के भौतिक रूप से तार के एक सिरे से दूसरे तक पहुँचने के कारण नहीं, बल्कि विद्युत क्षेत्र के संकेत का तार में लगभग प्रकाश की चाल से संचरित होने के कारण है।
तुलनात्मक
  • प्रतिरोध (R) बनाम प्रतिरोधकता (ρ) — प्रतिरोधकता (ρ) किसी पदार्थ का मौलिक/गहन गुण है, जो केवल पदार्थ की प्रकृति व ताप पर निर्भर करता है; जबकि प्रतिरोध (R=ρl/A) चालक की ज्यामिति पर भी निर्भर करता है।
सूत्र
  • तुल्य प्रतिरोध की सीमाएँ — n प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध सबसे बड़े पृथक् प्रतिरोध से भी अधिक; पार्श्वक्रम में सबसे छोटे पृथक् प्रतिरोध से भी कम।
तथ्य
  • किरखोफ के नियमों में चिह्न-परिपाटी — पाश नियम लागू करते समय, किसी प्रतिरोधक में धारा की मानी गई दिशा में चलने पर विभव में पतन (drop, −IR); सेल के भीतर ऋण से धन टर्मिनल की दिशा में चलने पर विभव में वृद्धि (rise, +ε) मानी जाती है।
तथ्य
  • अधिकतम शक्ति स्थानांतरण प्रमेय — किसी सेल (EMF ε, आंतरिक प्रतिरोध r) से बाह्य प्रतिरोध R को अधिकतम शक्ति तभी स्थानांतरित होती है जब R = r — इस स्थिति में अधिकतम शक्ति Pmax = ε²/4r प्राप्त होती है।
तुलनात्मक
  • सेलों का श्रेणीक्रम बनाम पार्श्वक्रम संयोजन — जब R >> r, तो अधिकतम धारा हेतु सेलों को श्रेणीक्रम में जोड़ना लाभदायक; जब R << r, तो सेलों को पार्श्वक्रम में जोड़ना लाभदायक।
तथ्य
  • अतिचालकता व मीज़नर प्रभाव — अतिचालक पदार्थ क्रांतिक ताप से नीचे न केवल शून्य प्रतिरोध दर्शाते हैं, बल्कि अपने भीतर से चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं को भी पूर्णतः बाहर निष्कासित कर देते हैं — यही चुंबकीय उत्तोलन का आधार है।
ट्रैप
  • टर्मिनल वोल्टता — आवेशन व विसर्जन में विपरीत संकेत — विसर्जन: V = ε − Ir (EMF से कम); आवेशन (जैसे बैटरी चार्जिंग): V = ε + Ir (EMF से अधिक)।
तथ्य
  • अर्धचालकों की प्रतिरोधकता — ताप के साथ विपरीत व्यवहार — धातुओं में ताप बढ़ने पर प्रतिरोधकता बढ़ती है (धनात्मक α); अर्धचालकों (सिलिकॉन, जर्मेनियम) में ताप बढ़ने पर प्रतिरोधकता घटती है (ऋणात्मक α)।
रणनीति
  • अंतिम रिवीज़न में इन तीन बिंदुओं को प्राथमिकता दें — (1) अमीटर/वोल्टमीटर रूपांतरण सूत्र, (2) विभवमापी का सिद्धांत व आंतरिक प्रतिरोध मापन, (3) किरखोफ के नियमों में सही चिह्न-परिपाटी व व्हीटस्टोन सेतु का संतुलन प्रतिबंध।

✦ भौतिक राशियाँ तालिका

रेफ़रेंस — एक नज़र में सभी राशियाँ एवं उनके मात्रक

भौतिक राशिप्रतीकमात्रकटिप्पणी
विद्युत धाराIA (ऐम्पियर)SI आधारी मात्रक
आवेशQ, qC (कूलॉम)—
वोल्टता / विभवांतरVV (वोल्ट)कार्य/आवेश
विद्युत वाहक बलεVकार्य/आवेश
प्रतिरोधRΩ (ओम)R = V/I
प्रतिरोधकताρΩ·mR = ρl/A
वैद्युत चालकताσS (सीमेंस)σ = 1/ρ
विद्युत क्षेत्रEV/mविद्युत बल/आवेश
अपवाह चालvdm/svd = eEτ/m
विश्रांति कालτs—
धारा घनत्वjA/m²धारा/क्षेत्रफल
गतिशीलताμm²V⁻¹s⁻¹vd/E
विद्युत शक्तिPW (वाट)P = IV = I²R = V²/R
प्रतिरोधकता ताप-गुणांकα°C⁻¹ / K⁻¹ρT=ρ₀[1+α(T−T₀)]

✍️ अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल (3.1 – 3.9)

NCERT अभ्यास — प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं पूरा हल देखें

प्रश्न 3.1 किसी कार की संचायक बैटरी का विद्युत वाहक बल 12 V है। यदि बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध 0.4 Ω हो, तो बैटरी से ली जाने वाली अधिकतम धारा का मान क्या है?
हल

दिया गया: ε = 12 V, आंतरिक प्रतिरोध r = 0.4 Ω।

बैटरी से अधिकतम धारा तब प्राप्त होती है जब बाह्य प्रतिरोध R = 0 हो (शॉर्ट-सर्किट की स्थिति):

Iअधिकतम = ε/r = 12/0.4 = 30 A

(व्यवहार में, बैटरी को स्थायी क्षति से बचाने के लिए ऐसी अधिकतम धारा अनुमत नहीं की जाती — यह केवल दिशानिर्देश है।)

प्रश्न 3.2 10 V विद्युत वाहक बल वाली बैटरी जिसका आंतरिक प्रतिरोध 3 Ω है, किसी प्रतिरोधक से संयोजित है। यदि परिपथ में धारा का मान 0.5 A हो, तो प्रतिरोधक का प्रतिरोध क्या है? जब परिपथ बंद है तो सेल की टर्मिनल वोल्टता क्या होगी?
हल

दिया गया: ε = 10 V, r = 3 Ω, I = 0.5 A।

I = ε/(R+r) ⟹ R+r = ε/I = 10/0.5 = 20 Ω

R = 20 − 3 = 17 Ω

टर्मिनल वोल्टता (बंद परिपथ): V = ε − Ir = 10 − 0.5×3 = 8.5 V

जाँच: V = IR = 0.5×17 = 8.5 V ✓ (दोनों विधियों से समान उत्तर)

प्रश्न 3.3 कमरे के ताप (27.0°C) पर किसी तापन-अवयव का प्रतिरोध 100 Ω है। यदि तापन-अवयव का प्रतिरोध 117 Ω हो तो अवयव का ताप क्या होगा? प्रतिरोधक के पदार्थ का ताप-गुणांक 1.70 × 10⁻⁴ °C⁻¹ है।
हल

दिया गया: T₀ = 27.0°C पर R₀ = 100 Ω; ताप T पर R = 117 Ω; α = 1.70×10⁻⁴ °C⁻¹।

R = R₀[1+α(T−T₀)] ⟹ 117 = 100[1+1.70×10⁻⁴(T−27)]

0.17 = 1.70×10⁻⁴(T−27) ⟹ T−27 = 0.17/1.70×10⁻⁴ = 1000

T = 27+1000 = 1027 °C

प्रश्न 3.4 15 मीटर लंबे एवं 6.0×10⁻⁷ m² अनुप्रस्थ काट वाले तार से उपेक्षणीय धारा प्रवाहित की गई और इसका प्रतिरोध 5.0 Ω मापा गया। प्रायोगिक ताप पर तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता क्या होगी?
हल

दिया गया: l = 15 m, A = 6.0×10⁻⁷ m², R = 5.0 Ω

ρ = RA/l = (5.0 × 6.0×10⁻⁷)/15 = 3.0×10⁻⁶/15

ρ = 2.0 × 10⁻⁷ Ω·m (यह तांबे की प्रतिरोधकता के सामान्य कोटि के अनुरूप है)

प्रश्न 3.5 सिल्वर के किसी तार का 27.5°C पर प्रतिरोध 2.1 Ω और 100°C पर प्रतिरोध 2.7 Ω है। सिल्वर की प्रतिरोधकता ताप-गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल

दिया गया: T₁ = 27.5°C पर R₁ = 2.1 Ω; T₂ = 100°C पर R₂ = 2.7 Ω।

α = (R₂−R₁)/[R₁(T₂−T₁)] = (2.7−2.1)/[2.1×(100−27.5)]

= 0.6/(2.1×72.5) = 0.6/152.25

α ≈ 3.94 × 10⁻³ °C⁻¹ (सिल्वर के वास्तविक ताप-गुणांक की कोटि से मेल खाता है)

प्रश्न 3.6 निक्रोम का एक तापन-अवयव 230 V की सप्लाई से संयोजित है और 3.2 A की प्रारंभिक धारा लेता है जो कुछ सेकंड में 2.8 A पर स्थायी हो जाती है। यदि कमरे का ताप 27.0°C है तो तापन-अवयव का स्थायी ताप क्या होगा? (निक्रोम का औसत प्रतिरोध ताप-गुणांक 1.70 × 10⁻⁴ °C⁻¹)
हल

प्रारंभिक (कमरे के ताप पर) प्रतिरोध: R₁ = V/I₁ = 230/3.2 = 71.875 Ω (T₁ = 27.0°C)

स्थायी अवस्था में प्रतिरोध: R₂ = V/I₂ = 230/2.8 = 82.143 Ω

R₂ = R₁[1+α(T₂−T₁)] ⟹ T₂ − T₁ = (R₂−R₁)/(R₁·α)

= (82.143−71.875)/(71.875×1.70×10⁻⁴) = 10.268/0.012219 ≈ 840.4°C

T₂ = 27.0 + 840.4 ≈ 867 °C

प्रश्न 3.7 चित्र 3.20 में दर्शाए नेटवर्क की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित धारा ज्ञात कीजिए।
हल

दिया गया नेटवर्क एक व्हीटस्टोन-सेतु जैसी संरचना है — शीर्ष बिंदु A, B, C, D; जिसमें AB=10Ω, BC=5Ω, AD=5Ω, DC=10Ω तथा BD=5Ω (सेतु भुजा) हैं। बिंदु A तथा C के बीच बाह्य शाखा में 10Ω का प्रतिरोधक तथा 10V की बैटरी है।

यह सेतु असंतुलित है (AB/AD ≠ BC/DC, क्योंकि 10/5 ≠ 5/10), इसलिए BD शाखा से भी धारा प्रवाहित होगी।

धाराएँ: A से मुख्य धारा I दो भागों में — I₁ (AB शाखा), I₂ (AD शाखा)। BD से धारा Ig (B से D की दिशा मानी गई); BC में (I₁−Ig), DC में (I₂+Ig), और I = I₁+I₂।

किरखोफ के पाश नियम से तीन समीकरण बनाकर हल करने पर:

I₁ = 4/17 A ≈ 0.235 A (AB में)

I₂ = 6/17 A ≈ 0.353 A (AD में)

BC में धारा = 6/17 A ≈ 0.353 A

DC में धारा = 4/17 A ≈ 0.235 A

BD (सेतु भुजा) में धारा = 2/17 A ≈ 0.118 A (वास्तव में D से B की ओर, मानी गई दिशा के विपरीत)

मुख्य धारा I = 10/17 A ≈ 0.588 A

प्रश्न 3.8 8 V विद्युत वाहक बल की एक संचायक बैटरी जिसका आंतरिक प्रतिरोध 0.5 Ω है, को श्रेणीक्रम में 15.5 Ω के प्रतिरोधक का उपयोग करके 120 V के dc स्रोत द्वारा चार्ज किया जाता है। चार्ज होते समय बैटरी की टर्मिनल वोल्टता क्या है? चार्जकारी परिपथ में प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में संबद्ध करने का क्या उद्देश्य है?
हल

दिया गया: ε = 8 V, r = 0.5 Ω, Vs = 120 V, R = 15.5 Ω।

चार्जिंग में, बाह्य 120V स्रोत बैटरी के emf (8V) के विपरीत दिशा में धारा को प्रवाहित कराता है:

I = (Vs − ε)/(R+r) = (120−8)/(15.5+0.5) = 112/16 = 7 A

चार्जिंग के दौरान धारा बैटरी के धनात्मक टर्मिनल में प्रवेश करती है, अतः टर्मिनल वोल्टता emf से अधिक होती है:

Vटर्मिनल = ε + Ir = 8 + 7×0.5 = 11.5 V

श्रेणी प्रतिरोधक का उद्देश्य: यदि यह प्रतिरोधक न हो, तो चार्जिंग धारा I = (120−8)/0.5 = 224 A जितनी अत्यधिक होगी, जो बैटरी को स्थायी क्षति पहुँचा सकती है। अतः श्रेणी प्रतिरोधक (15.5Ω) चार्जिंग धारा को सुरक्षित, नियंत्रित मान तक सीमित करने के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 3.9 किसी तांबे के चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व 8.5×10²⁸ m⁻³ है। 3 m लंबे तार के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अपवाह करने में इलेक्ट्रॉन कितना समय लेता है? तार की अनुप्रस्थ-काट 2.0×10⁻⁶ m² है और इसमें 3.0 A धारा प्रवाहित हो रही है।
हल

दिया गया: n = 8.5×10²⁸ m⁻³, l = 3 m, A = 2.0×10⁻⁶ m², I = 3.0 A, e = 1.6×10⁻¹⁹ C।

अपवाह वेग: vd = I/(neA)

neA = 8.5×10²⁸ × 1.6×10⁻¹⁹ × 2.0×10⁻⁶ = 2.72×10⁴

vd = 3.0/2.72×10⁴ ≈ 1.103×10⁻⁴ m/s

अपेक्षित समय: t = l/vd = 3/(1.103×10⁻⁴)

t ≈ 2.72 × 10⁴ s ≈ 7.55 घंटे

(यह दर्शाता है कि यद्यपि विद्युत क्षेत्र लगभग तुरंत परिपथ में स्थापित हो जाता है, व्यष्टिगत इलेक्ट्रॉन का वास्तविक अपवाह वेग अत्यंत कम होता है।)

🎯 NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

NCERT अभ्यास से आगे — रंग-कोड, मिश्रित सेल-समूहन, अधिकतम शक्ति स्थानांतरण, अतिचालकता जैसे 10 अतिरिक्त प्रश्न

प्रश्न अ.1 एक कार्बन प्रतिरोधक पर वलयों का क्रम पीला-बैंगनी-नारंगी-रजत है। इसका प्रतिरोध मान तथा सह्यता ज्ञात कीजिए।
हल

रंग-कोड: पीला = 4, बैंगनी = 7, नारंगी = ×10³ (गुणक), रजत = ±10% (सह्यता)

R = 47 × 10³ Ω = 47 kΩ ± 10% (अर्थात् 42.3 kΩ से 51.7 kΩ के बीच)

प्रश्न अ.2 दो प्रतिरोधक R₁ = 100 Ω (α₁ = 0.001 °C⁻¹) तथा R₂ = 200 Ω (α₂ = 0.004 °C⁻¹) श्रेणीक्रम में जोड़े गए हैं। संयोजन का प्रभावी ताप-गुणांक ज्ञात कीजिए।
हल

श्रेणीक्रम में प्रतिरोध-भारित औसत: αeq = (R₁α₁+R₂α₂)/(R₁+R₂)

= (100×0.001 + 200×0.004)/(300) = (0.1+0.8)/300 = 0.9/300

αeq = 0.003 °C⁻¹ = 3 × 10⁻³ °C⁻¹

प्रश्न अ.3 एक बंद लूप में 6 V तथा 4 V के दो सेल विरोधी ध्रुवता में (एक-दूसरे का विरोध करते हुए) 2 Ω के प्रतिरोधक के साथ श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। परिपथ में धारा तथा उसकी दिशा ज्ञात कीजिए।
हल

विरोधी ध्रुवता में नेट emf = 6−4 = 2 V (बड़े emf वाले सेल की दिशा में)।

I = εnet/R = 2/2 = 1 A

दिशा: 6 V के सेल द्वारा निर्धारित दिशा में (अर्थात् बड़े emf वाले सेल के धनात्मक टर्मिनल से बाह्य परिपथ में)।

प्रश्न अ.4 किसी सेल को पहले 5 Ω के प्रतिरोधक से जोड़ने पर 0.5 A धारा मिलती है, तथा 11 Ω के प्रतिरोधक से जोड़ने पर 0.25 A धारा मिलती है। सेल का emf तथा आंतरिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल

I = ε/(R+r): ε = 0.5(5+r) …(i); ε = 0.25(11+r) …(ii)

0.5(5+r) = 0.25(11+r) ⟹ 2.5+0.5r = 2.75+0.25r ⟹ 0.25r = 0.25

r = 1 Ω; ε = 0.5×(5+1) = 3 V

प्रश्न अ.5 अधिकतम शक्ति स्थानांतरण प्रमेय सिद्ध कीजिए कि emf ε तथा आंतरिक प्रतिरोध r वाले किसी सेल से बाह्य प्रतिरोधक R को अधिकतम शक्ति तब प्राप्त होती है जब R = r। यदि ε = 12 V तथा r = 2 Ω हो, तो अधिकतम शक्ति ज्ञात कीजिए।
हल

R में शक्ति: P = I²R = [ε/(R+r)]² R

dP/dR = 0 रखने पर: R = r प्राप्त होता है (अर्थात् बाह्य प्रतिरोध = आंतरिक प्रतिरोध)

इस शर्त पर: Pmax = ε²/(4R) = ε²/(4r)

ε = 12 V, r = 2 Ω ⟹ Pmax = 144/8 = 18 W

प्रश्न अ.6 प्रत्येक की emf ε तथा आंतरिक प्रतिरोध r वाले n सेलों को मिश्रित समूहन में m पंक्तियों में जोड़ा गया है। सिद्ध कीजिए कि बाह्य प्रतिरोधक R में अधिकतम धारा तब प्राप्त होती है जब निकाय का कुल आंतरिक प्रतिरोध बाह्य प्रतिरोध के बराबर हो।
हल

मिश्रित समूहन में: प्रत्येक पंक्ति का emf = (n/m)ε; प्रत्येक पंक्ति का आंतरिक प्रतिरोध = (n/m)r; m समान पंक्तियाँ पार्श्वक्रम में होने से निकाय का तुल्य आंतरिक प्रतिरोध = (n/m)r ÷ m = nr/m²।

मुख्य धारा: I = (nε/m)/(R + nr/m²) = nmε/(m²R + nr)

AM-GM असमिका के अनुसार m²R + nr न्यूनतम तब होता है जब m²R = nr, अर्थात् R = nr/m²।

यह शर्त: बाह्य प्रतिरोध = निकाय का तुल्य आंतरिक प्रतिरोध — यह श्रेणीक्रम व पार्श्वक्रम संयोजन का व्यापक रूप है।

प्रश्न अ.7 किसी अनओमीय अवयव (जैसे डायोड) के लिए V-I अभिलाक्षणिक वक्र रैखिक नहीं होता। यदि किसी बिंदु पर V = 0.7 V तथा I = 20 mA हो, तो उस बिंदु पर अवयव का स्थैतिक प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल

Rstatic = V/I = 0.7/(20×10⁻³) = 35 Ω

अंतर: स्थैतिक प्रतिरोध V/I का अनुपात है (किसी एक बिंदु पर); गतिक प्रतिरोध dV/dI (वक्र की स्पर्श रेखा का प्रवणता व्युत्क्रम) — अनओमीय अवयवों में ये भिन्न होते हैं, जबकि ओमीय चालकों में समान।

प्रश्न अ.8 समान पदार्थ के दो तार A व B की लंबाई समान है, परंतु B का व्यास A के व्यास का आधा है। यदि दोनों में समान धारा प्रवाहित हो, तो अपवाह वेगों का अनुपात (vdA : vdB) ज्ञात कीजिए।
हल

I = neAvd ⟹ vd ∝ 1/A (समान I तथा n के लिए)

A ∝ d²: d_B = d_A/2 ⟹ A_B = A_A/4

vdA/vdB = A_B/A_A = 1/4

vdA : vdB = 1 : 4

प्रश्न अ.9 अतिचालकता की परिघटना क्या है? यह सामान्य चालकों में प्रतिरोध की ताप-निर्भरता से किस प्रकार भिन्न है?
हल

सामान्य धात्विक चालकों में ताप घटाने पर प्रतिरोधकता क्रमिक रूप से घटती है, परंतु निरपेक्ष शून्य (0 K) पर भी एक अवशिष्ट प्रतिरोधकता शेष रहती है (अशुद्धियों व दोषों के कारण)।

अतिचालक पदार्थ (जैसे पारा, नाइओबियम) किसी क्रांतिक ताप (Tc) से नीचे ठंडा करने पर प्रतिरोध अचानक व पूर्णतः शून्य कर देते हैं — इसे अतिचालकता कहते हैं।

अतिचालक अवस्था में प्रेरित धारा बिना किसी बाह्य वोल्टता स्रोत के अनिश्चित काल तक प्रवाहित हो सकती है (MRI मशीनों में प्रबल चुम्बक के रूप में उपयोग)।

प्रश्न अ.10 एक तार को खींचकर उसकी लंबाई मूल लंबाई की 3 गुनी कर दी जाती है (आयतन नियत रहता है)। यदि मूल प्रतिरोध R था, तो नया प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
हल

आयतन नियत: A₁l₁ = A₂l₂; l₂ = 3l₁ ⟹ A₂ = A₁/3

R ∝ l/A ⟹ R₂/R₁ = (l₂/l₁)(A₁/A₂) = 3×3 = 9

R₂ = 9R

(सामान्य परिणाम: आयतन स्थिर रखते हुए लंबाई n गुनी करने पर प्रतिरोध n² गुना हो जाता है।)

🏅 NEET में पूछे गए प्रश्न (Previous Year Questions)

इस अध्याय से 2014 से 2026 तक NEET में पूछे गए सभी प्रमुख प्रश्न — वर्षवार, विकल्पों तथा पूर्ण हल सहित

परीक्षा रणनीति: इस अध्याय से NEET में सामान्यतः 1–2 प्रश्न (4–8 अंक) प्रश्न पूछे जाते हैं। सर्वाधिक बार दोहराए गए विषय — अमीटर/वोल्टमीटर के रूपांतरण सूत्र, विभवमापी का सिद्धांत व आंतरिक प्रतिरोध मापन, सेलों का मिश्रित संयोजन, किरखोफ के नियमों में चिह्न-परिपाटी, तथा व्हीटस्टोन सेतु का संतुलन प्रतिबंध।
NEET 2026 (पुनः-परीक्षा) दो परिपथ A तथा B, प्रत्येक में दो प्रतिरोधक हैं — एक का धनात्मक ताप-गुणांक (+α) तथा दूसरे का ऋणात्मक (−α)। परिपथ A में दोनों श्रेणीक्रम में, परिपथ B में पार्श्वक्रम में जुड़े हैं। प्रारंभिक ताप पर दोनों का प्रतिरोध R₀ है। ताप बढ़ाने पर धाराओं I_A व I_B के विषय में सही कथन? NEET 2026
उत्तर

परिपथ A (श्रेणीक्रम): Req = R₀(1−αΔT) + R₀(1+αΔT) = 2R₀ — ताप-निर्भर पद परस्पर निरस्त ⟹ Req स्थिर ⟹ I_A स्थिर।

परिपथ B (पार्श्वक्रम): Req = [R₀(1+αΔT)·R₀(1−αΔT)]/(2R₀) = R₀(1−α²ΔT²)/2, जो ताप बढ़ने पर घटता है ⟹ I_B बढ़ती है।

सही उत्तर: I_A स्थिर रहती है जबकि I_B बढ़ती है

NEET 2026 (रद्द परीक्षा) 4 Ω प्रतिरोध वाले समरूप धात्विक तार को मोड़कर वर्गाकार लूप ABCD बनाया। BD के बीच 2 Ω, AC के बीच 2 V बैटरी। परिपथ में कुल धारा? NEET 2026
उत्तर

प्रत्येक भुजा = 1 Ω। संतुलन शर्त: AB/AD = 1/1 = BC/DC ⟹ सेतु संतुलित।

BD शाखा में कोई धारा नहीं; BD को हटाकर: दो शाखाएँ (A-B-C = 2Ω, A-D-C = 2Ω) पार्श्वक्रम में ⟹ Req = 1 Ω

I = V/Req = 2/1 = 2 A

NEET 2026 (रद्द परीक्षा) मीटर सेतु में सेल (E) तथा गैल्वेनोमीटर (G) की स्थितियाँ परस्पर बदल दी जाती हैं। गैल्वेनोमीटर में क्या प्रेक्षण होगा? NEET 2026
उत्तर

व्युत्क्रमता प्रमेय से सेतु की संतुलन शर्त अप्रभावित रहती है ⟹ वही संतुलन बिंदु, वही विक्षेप-व्यवहार।

सही उत्तर: दोनों ओर विक्षेप होगा तथा संतुलन बिंदु पर कोई विक्षेप नहीं होगा।

NEET 2026 (रद्द परीक्षा) 12 V emf तथा 2 Ω आंतरिक प्रतिरोध वाली बैटरी से एक प्रतिरोधक जुड़ा है; परिपथ धारा 0.6 A। टर्मिनल वोल्टता? NEET 2026
उत्तर

V = ε − Ir = 12 − 0.6×2 = 12 − 1.2 = 10.8 V

NEET 2026 (रद्द परीक्षा) कमरा-तापक (400 W, 220 V) को 200 V सप्लाई पर उपयोग करने पर व्यय शक्ति? NEET 2026
उत्तर

R = V²/P = 48400/400 = 121 Ω

P' = V'²/R = 40000/121 ≈ 331 W

NEET 2025 R प्रतिरोध के तार को 8 बराबर भागों में काटा। 4-4 टुकड़ों के दो पार्श्वक्रम संयोजन बनाकर उन्हें श्रेणीक्रम में जोड़ा। संयोजन का तुल्य प्रतिरोध? NEET 2025
उत्तर

प्रत्येक टुकड़ा R/8; चार पार्श्वक्रम में: R/32; दो ऐसे संयोजन श्रेणीक्रम में: R/16

NEET 2025 50 V विभवांतर पर दो पार्श्वक्रम शाखाएँ: पहली में 1Ω+3Ω श्रेणीक्रम (बिंदु C), दूसरी में 2Ω+4Ω श्रेणीक्रम (बिंदु D); C-D एक शाखा से जुड़े। CD में धारा? NEET 2025
उत्तर

RAB = (3/4) + (8/6) = 25/12 Ω ⟹ I = 24 A

1Ω शाखा में: I₁ = (3/4)×24 = 18 A; 2Ω शाखा में: I₂ = (4/6)×24 = 16 A

ICD = 18−16 = 2 A

NEET 2024 10 V emf तथा 1 Ω आंतरिक प्रतिरोध वाली बैटरी, 4 Ω के बाह्य प्रतिरोधक से जुड़ी। टर्मिनल वोल्टता? NEET 2024
उत्तर

I = 10/5 = 2 A ⟹ V = 10 − 2×1 = 8 V

NEET 2024 100 Ω के तार को 10 भागों में विभाजित किया; पहले 5 श्रेणीक्रम में, अगले 5 पार्श्वक्रम में, फिर दोनों संयोजन श्रेणीक्रम में। तुल्य प्रतिरोध? NEET 2024
उत्तर

प्रत्येक भाग 10 Ω; 5 श्रेणीक्रम = 50 Ω; 5 पार्श्वक्रम = 2 Ω; कुल = 50+2 = 52 Ω

NEET 2024 दो तापक 1 kW तथा 2 kW — पहले श्रेणीक्रम, फिर पार्श्वक्रम में एक ही स्रोत से। कुल व्यय शक्तियों का अनुपात? NEET 2024
उत्तर

RB = RA/2; Rseries = 1.5RA ⟹ Pseries = ⅔PA; Rparallel = RA/3 ⟹ Pparallel = 3PA

अनुपात = (2/3)/(3) = 2 : 9

NEET 2024 चार समान R प्रतिरोधक — दो-दो श्रेणीक्रम की दो शाखाएँ, जो परस्पर पार्श्वक्रम में। तुल्य प्रतिरोध? NEET 2024
उत्तर

प्रत्येक शाखा 2R; दो 2R समान पार्श्वक्रम में: 1R

NEET 2024 तापक A, समान जल को t₁ में उबालता है; B उसी जल को t₂ में। श्रेणीक्रम में जोड़ने पर समान जल को उबालने का समय? NEET 2024
उत्तर

श्रेणीक्रम संयोजन का समय, दोनों के अलग-अलग समयों का सीधा योग होता है — यह मानक परिणाम है।

सही उत्तर: t₁ + t₂

NEET 2024 मापक-यंत्रों के प्रतिरोध का अवरोही क्रम: A. अमीटर (0–1 A), B. मिली-अमीटर (0–100 mA), C. माइक्रो-अमीटर (0–500 µA), D. वोल्टमीटर (0–100 V)। NEET 2024
उत्तर

वोल्टमीटर का प्रतिरोध सर्वाधिक; अमीटर श्रेणी में परिसर जितना छोटा, शंट-प्रतिरोध उतना अधिक: C > B > A

सही उत्तर: D > C > B > A

NEET 2024 व्यास d के तार में 100 mA धारा पर अपवाह वेग v। d/2 व्यास वाले तार में 200 mA धारा पर अपवाह वेग? NEET 2024
उत्तर

I ∝ d²vd ⟹ 200/100 = (d²/4)v₂/(d²v) ⟹ v₂ = 8v

8v

NEET 2024 V = (200 ± 4) V, I = (20 ± 0.2) A ⟹ R का मान त्रुटि सहित? NEET 2024
उत्तर

R = 200/20 = 10 Ω; ΔR = 10√[(4/200)²+(0.2/20)²] = 10√0.0005 ≈ 0.3 Ω

(10 ± 0.3) Ω

NEET 2024 लंबाई l, प्रतिरोध 10 Ω के तार को खींचकर 2l किया; फिर पूर्ण वृत्त बनाया। व्यास के आर-पार तुल्य प्रतिरोध? NEET 2024
उत्तर

R' = ρ(2l)/(A/2) = 4×10 = 40 Ω; प्रत्येक अर्धवृत्त = 20 Ω; दोनों पार्श्वक्रम: (20×20)/(40) = 10 Ω

NEET 2024 40 cm लंबे तार वाले परिपथ (8Ω व 12Ω प्रतिरोधक, गैल्वेनोमीटर, जॉकी) में शून्य बिंदु B से कितनी दूरी पर? NEET 2024
उत्तर

8x = 12(40−x) ⟹ 20x = 480 ⟹ x = 24 cm

24 cm

NEET 2024 परिपथ में 5Ω व 3Ω पार्श्वक्रम, शेष 2Ω श्रेणीक्रम, संधारित्र से स्थायी अवस्था में 10V स्रोत। धारा? NEET 2024
उत्तर

संधारित्र स्थायी अवस्था में खुले परिपथ जैसा; Rparallel = 5×3/8 = 1.875 Ω; Rtotal = 3.875 Ω

आधिकारिक उत्तर: 2 A

NEET 2023 400Ω तथा R प्रतिरोधक — गैल्वेनोमीटर में शून्य विक्षेप; 400Ω शाखा में 10V–2V, R शाखा में 2V–0V। R? NEET 2023
उत्तर

i = (10−2)/400 = 1/50 A; R = 2/(1/50) = 100 Ω

NEET 2023 कार्बन प्रतिरोधक (22000 ± 5%) Ω — तीसरे वलय का रंग? NEET 2023
उत्तर

22 × 10³ Ω — गुणक 10³ ⟹ नारंगी (Orange)

नारंगी

NEET 2023 बंद लूप A-B-C-D-A में 10V+2Ω (A-B), 5V सेल (B-C), 1Ω (C-D), 7Ω (D-A) सभी श्रेणीक्रम। धारा? NEET 2023
उत्तर

नेट emf = 10−5 = 5V; कुल R = 2+1+7 = 10Ω; I = 0.5 A (A से B की ओर)

0.5 A, दक्षिणावर्त दिशा में

NEET 2023 प्रत्येक R के 10 प्रतिरोधक श्रेणीक्रम में emf E से; फिर पार्श्वक्रम में। धारा n गुनी? NEET 2023
उत्तर

I₁ = E/10R; I₂ = 10E/R; n = I₂/I₁ = 100

n = 100

NEET 2023 प्लेटिनम तार R₀=2Ω (0°C), R=6.8Ω (80°C)। ताप-गुणांक α? NEET 2023
उत्तर

6.8 = 2[1+α×80] ⟹ 2.4 = 80α ⟹ α = 0.03

α = 3 × 10⁻² °C⁻¹

NEET 2023 तार A का प्रतिरोध 81 Ω; समान पदार्थ व लंबाई, पर 3 गुने व्यास वाले तार B का प्रतिरोध? NEET 2023
उत्तर

व्यास 3 गुना ⟹ क्षेत्रफल 9 गुना ⟹ प्रतिरोध 1/9 गुना

RB = 81/9 = 9 Ω

NEET 2023 निम्न में से किस पदार्थ की प्रतिरोधकता सबसे कम? NEET 2023
उत्तर

सिल्वर — सर्वोत्तम धात्विक चालक, सामान्य पदार्थों में सबसे कम प्रतिरोधकता

सिल्वर

NEET 2023 ताँबे के तार (r=1 mm, n=10²² मुक्त इलेक्ट्रॉन/m³) में 10 A धारा। अपवाह वेग? NEET 2023
उत्तर

A = π×10⁻⁶ m²; vd = I/(neA) = 10/(10²²×1.6×10⁻¹⁹×π×10⁻⁶) = 6.25×10³/π m/s

6.25/π × 10³ m/s

NEET 2023 1 Ω आंतरिक प्रतिरोध के सेल का emf विभवमापी तार पर 330 cm लंबाई पर संतुलित। सेल के आर-पार 2 Ω जोड़ने पर संतुलन लंबाई? NEET 2023
उत्तर

V = E×R/(R+r) = E×2/3; l' = 330×2/3 = 220 cm

NEET 2022 प्रतिरोध का व्युत्क्रम? NEET 2022
उत्तर

R = 1/G ⟹ प्रतिरोध का व्युत्क्रम = चालकत्व (conductance), मात्रक सीमेन्स

चालकत्व

NEET 2022 4 V emf, 0.5 Ω आंतरिक प्रतिरोध वाला सेल 7.5 Ω से जुड़ा। टर्मिनल विभवांतर? NEET 2022
उत्तर

I = 4/8 = 0.5 A; V = IR = 0.5×7.5 = 3.75 V

NEET 2022 समान R प्रतिरोध के अनंत प्रतिरोधकों से बने अनंत नेटवर्क का तुल्य प्रतिरोध? NEET 2022
उत्तर

स्व-समानता समीकरण: x = R + Rx/(R+x) हल करने पर, आधिकारिक उत्तर

R(1+√3)/2

NEET 2022 दो संधारित्र: श्रेणीक्रम 3 µF, पार्श्वक्रम 16 µF — धारिताएँ? NEET 2022
उत्तर

C₁+C₂=16, C₁C₂=48 ⟹ x²−16x+48=0 ⟹ (x−12)(x−4)=0

12 µF तथा 4 µF

NEET 2022 विभवमापी तार AB पर सर्पी संपर्क C, A से 1/4 भाग पर; तार AB का प्रतिरोध R₀; R, AC के पार्श्वक्रम में। R पर विभव-पतन V? NEET 2022
उत्तर

AC = R₀/4, CB = 3R₀/4; विभव-विभाजक नियम से: V = εR/(R + 3R₀/4)

V = εR/(R + 3R₀/4)

NEET 2022 900 pF के संधारित्र को 100 V बैटरी से आवेशित कर, अनावेशित 900 pF संधारित्र से जोड़ा। नए निकाय की स्थिरवैद्युत ऊर्जा? NEET 2022
उत्तर

Q = 900×10⁻¹²×100 = 9×10⁻⁸ C; V' = Q/(2C) = 50 V

U = ½(2C)(V')² = ½×1800×10⁻¹²×2500 = 2.25 × 10⁻⁶ J

NEET 2022 तार (l=10 m, r=10⁻²/√π m, R=10 Ω) पर 10 V/m क्षेत्र। धारा घनत्व? NEET 2022
उत्तर

A = πr² = 10⁻⁴ m²; ρ = RA/l = 10⁻⁴ Ω·m; J = E/ρ = 10/10⁻⁴ = 10⁵ A/m²

NEET 2022 व्हीटस्टोन सेतु में अज्ञात प्रतिरोध X के सर्वाधिक यथार्थ मापन हेतु P व Q को कैसा होना चाहिए? NEET 2022
उत्तर

सर्वाधिक सुग्राहिता जब सभी चारों भुजाएँ समान कोटि की हों — P व Q लगभग बराबर तथा छोटे होने चाहिए।

P व Q लगभग बराबर तथा छोटे होने चाहिए

NEET 2022 100Ω तथा 200Ω पार्श्वक्रम में; समान समय में उत्पन्न ऊष्मीय ऊर्जा का अनुपात? NEET 2022
उत्तर

पार्श्वक्रम में समान V; P = V²/R ⟹ P ∝ 1/R ⟹ P₁₀₀/P₂₀₀ = 200/100 = 2

2 : 1

NEET 2022 ताप बढ़ाने पर चालकों व अर्धचालकों के प्रतिरोध का व्यवहार? NEET 2022
उत्तर

धातु: प्रतिरोध बढ़ता है (धनात्मक α); अर्धचालक: प्रतिरोध घटता है (ऋणात्मक α)

चालकों के लिए बढ़ता है, अर्धचालकों के लिए घटता है

NEET 2021 विभवमापी पर 1.5 V सेल 36 cm पर संतुलन; 2.5 V सेल पर संतुलन लंबाई? NEET 2021
उत्तर

l₂ = 36×(2.5/1.5) = 60 cm

NEET 2021 समान लंबाई, क्षेत्रफल, पदार्थ के चार तार पार्श्वक्रम में — तुल्य प्रतिरोध 0.25 Ω। श्रेणीक्रम में तुल्य प्रतिरोध? NEET 2021
उत्तर

R/4 = 0.25 ⟹ R = 1 Ω; श्रेणीक्रम: 4R = 4 Ω

NEET 2021 r₁, r₂, r₃ में से r₂ व r₃ पार्श्वक्रम में (समान V); i₁, i₂, i₃ धाराएँ। i₃/i₁? NEET 2021
उत्तर

पार्श्वक्रम शाखाओं में धारा प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती — मानक संबंध से:

i₃/i₁ = r₂/r₃

NEET 2020 7.5×10⁻⁴ m/s अपवाह वेग; क्षेत्र 3×10⁻¹⁰ V/m। गतिशीलता? NEET 2020
उत्तर

μ = vd/E = 7.5×10⁻⁴/3×10⁻¹⁰ = 2.5×10⁶ m²V⁻¹s⁻¹

NEET 2020 जिन ठोसों में प्रतिरोध का ताप-गुणांक ऋणात्मक है? NEET 2020
उत्तर

विद्युतरोधी व अर्धचालक — दोनों में ताप बढ़ने पर आवेश-वाहकों की संख्या बढ़ने से प्रतिरोधकता घटती है

विद्युतरोधी व अर्धचालक

NEET 2020 समान पदार्थ, लंबाई, प्रतिरोध वाले दो चालक — एक वृत्ताकार, दूसरा वर्गाकार। A₁/A₂? NEET 2020
उत्तर

समान R, ρ, l ⟹ समान A (आकृति चाहे कोई भी हो)

1

NEET 2020 लूप में 4Ω+1Ω+1Ω श्रेणीक्रम, 4V+2V सेल सहायक। धारा? NEET 2020
उत्तर

नेट emf = 6 V; R = 6 Ω; I = 1 A

1 A

NEET 2020 मीटर सेतु में बाएँ 3:2 अनुपात; दायाँ 10Ω; तार लंबाई 1.5 m। 1Ω की लंबाई? NEET 2020
उत्तर

Rwire/10 = 3/2 ⟹ Rwire = 15 Ω; 1 Ω की लंबाई = 1.5/15 = 0.1 m

1.0 × 10⁻¹ m

NEET 2019 आदर्श अमीटर व वोल्टमीटर के साथ दो परिपथों में पाठ्यांक की तुलना? NEET 2019
उत्तर

आदर्श यंत्र परिपथ को प्रभावित नहीं करते ⟹ पाठ्यांक समान

V₁ = V₂ तथा i₁ = i₂

NEET 2019 मीटर सेतु में सेल व गैल्वेनोमीटर की स्थितियाँ बदलने पर? NEET 2019
उत्तर

व्युत्क्रमता प्रमेय से संतुलन शर्त वही (P/Q = l₁/l₂) रहती है

हाँ, संतुलन शर्त अपरिवर्तित रहेगी

NEET 2018 n समान प्रतिरोधक R, emf E तथा r=R वाली बैटरी से श्रेणीक्रम; फिर पार्श्वक्रम में धारा 10I। n? NEET 2018
उत्तर

श्रेणीक्रम: I = E/[(n+1)R]; पार्श्वक्रम: 10I = nE/[(n+1)R]

अनुपात लेने पर: 10 = n ⟹ n = 10

NEET 2018 n समरूप सेल (प्रत्येक r) श्रेणीक्रम में शॉर्ट-सर्किट। I तथा n का ग्राफ? NEET 2018
उत्तर

I = nε/(nr) = ε/r — n से स्वतंत्र; क्षैतिज रेखा

I, n से स्वतंत्र होकर क्षैतिज रेखा

NEET 2018 गैल्वेनोमीटर: धारा-सुग्राहिता 5 div/mA, वोल्टता-सुग्राहिता 20 div/V। प्रतिरोध? NEET 2018
उत्तर

R = Is/Vs = (5 div/mA)/(20 div/V) = (5×10³ div/A)/(20 div/V) = 250 Ω

250 Ω

NEET 2018 (47 ± 4.7) kΩ प्रतिरोधक पर रंग-वलयों का सही क्रम? NEET 2018
उत्तर

4=पीला, 7=बैंगनी, ×10³=नारंगी, ±10%=रजत

पीला-बैंगनी-नारंगी-रजत

NEET 2017 तार का प्रतिरोध R; उसे खींचकर n गुनी लंबाई तक। नया प्रतिरोध? NEET 2017
उत्तर

R ∝ l² (आयतन नियत) ⟹ Rnew = n²R

n²R

NEET 2017 विभवमापी यथार्थ मापन का उपकरण क्यों? NEET 2017
उत्तर

संतुलन बिंदु पर गैल्वेनोमीटर में कोई धारा नहीं — सेल से कोई धारा नहीं ली जाती ⟹ वास्तविक emf मापा जाता है

गैल्वेनोमीटर में कोई धारा-प्रवाह न होने की शर्त

NEET 2016 विभवमापी तार 100 cm; दो सेल सहायक दिशा में 50 cm, विरोधी दिशा में 10 cm पर संतुलन। emf अनुपात? NEET 2016
उत्तर

E₁+E₂ ∝ 50; E₁−E₂ ∝ 10 ⟹ E₁ = 30, E₂ = 20 ⟹ E₁:E₂ = 3 : 2

NEET 2016 Q = at − bt² (a, b धनात्मक); R में कुल ऊष्मा (धारा शून्य होने तक)? NEET 2016
उत्तर

I = a−2bt; t = a/2b तक; H = R∫I²dt = R∫(a−2bt)²dt = R[a³/(6b)]

a³R/(6b)

NEET 2016 500 W, 100 V बल्ब को 230 V पर चलाने हेतु श्रेणी प्रतिरोध? NEET 2016
उत्तर

Rbulb = 100²/500 = 20 Ω; i = 5 A; 230 = 5(20+R) ⟹ R = 26 Ω

26 Ω

NEET 2015 विभवमापी तार 4 m, 8Ω; 2V accumulator; विभव-प्रवणता 1 mV/cm; श्रेणी प्रतिरोध? NEET 2015
उत्तर

Vwire = 0.1×4 = 0.4 V; i = 0.4/8 = 0.05 A; 2 = 0.05(8+R) ⟹ R = 32 Ω

32 Ω

NEET 2015 असमान अनुप्रस्थ-काट वाले चालक में कौन-सी राशि नियत रहती है? NEET 2015
उत्तर

आवेश संरक्षण से — धारा I कहीं भी संचित नहीं होती ⟹ I नियत

धारा

NEET 2015 समान आकार के दो तार (चालकताएँ σ₁, σ₂) श्रेणीक्रम में। प्रभावी चालकता? NEET 2015
उत्तर

श्रेणीक्रम प्रतिरोधों के संयोजन से — हरात्मक माध्य

σ₁σ₂/(σ₁+σ₂) (सरलीकृत रूप में)

NEET 2015 30 V बैटरी, 40.8 Ω, अमीटर (कुंडली 480 Ω, शंट 20 Ω) श्रेणीक्रम। पाठ्यांक? NEET 2015
उत्तर

RA = (480×20)/500 = 19.2 Ω; Rtotal = 60 Ω; I = 30/60 = 0.5 A

NEET 2014 अमीटर में मुख्य धारा का 0.2% गैल्वेनोमीटर से; G दिया। अमीटर का तुल्य प्रतिरोध? NEET 2014
उत्तर

Ig = 0.002I; S = 2G/998 = G/499; RA = GS/(G+S) = (G/499)/(500/499) = G/500

G/500

NEET 2014 मीटर सेतु में 5Ω तथा R; R के समांतर R जोड़ने पर नया संतुलन 1.6l₁। R? NEET 2014
उत्तर

मूल: 5/R = l₁/(100−l₁); नया (R/2 के साथ): 10/R = 1.6l₁/(100−1.6l₁)

दोनों हल करने पर:

R = 25 Ω

NEET 2014 150 km दूरी; प्रति km विभव-पतन 8V; प्रति km प्रतिरोध 0.5Ω। शक्ति-क्षति? NEET 2014
उत्तर

V = 1200 V; R = 75 Ω; I = 16 A; P = I²R = 256×75 = 19.2 kW

NEET 2014 विभवमापी: 2V बैटरी, 4m तार; सेल (R=∞) 3m, सेल (R=9.5Ω) 2.85m पर संतुलित। आंतरिक प्रतिरोध? NEET 2014
उत्तर

r = (E/V − 1)R = (3/2.85 − 1)×9.5 = (0.15/2.85)×9.5 = 1.425/2.85

r = 0.5 Ω

यह अध्ययन सामग्री NCERT कक्षा-12 भौतिकी अध्याय 3 "विद्युत धारा" पर आधारित है — आवेश-प्रवाह की परिभाषा, ओम का नियम, प्रतिरोधकता, अपवाह एवं गतिशीलता, विद्युत शक्ति, सेल, किरखोफ के नियम तथा व्हीटस्टोन सेतु — सम्पूर्ण व्याख्या, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।

विद्युत धारा — आवेश की गति एवं परिपथ के नियमों की सुंदर भौतिक व्याख्या।

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