स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
आवेश की स्थितिज ऊर्जा से लेकर संधारित्रों के संयोजन तक — सम्पूर्ण व्याख्या, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।
2.1 भूमिका
विभव की संकल्पना एवं स्थितिज ऊर्जा की नींव
जब कोई बाह्य बल किसी वस्तु को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक, किसी अन्य बल (जैसे स्प्रिंग बल, गुरुत्वीय बल) के विरुद्ध ले जाता है, तो उस बल द्वारा किया गया कार्य वस्तु में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। ऐसे बलों को संरक्षी बल कहते हैं।
गुरुत्वाकर्षण बल की भाँति दो स्थिर आवेशों के बीच लगने वाला कूलॉम बल भी संरक्षी बल होता है। इसी कारण स्थिरवैद्युत क्षेत्र में आवेश की स्थिरवैद्युत स्थितिज ऊर्जा को परिभाषित किया जा सकता है।
(i) किसी संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य केवल आवेश की आरंभिक तथा अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है, पथ पर नहीं।
(ii) स्थितिज ऊर्जा किसी योज्यता स्थिरांक के अंतर्गत अनिश्चित होती है — केवल स्थितिज ऊर्जा का अंतर ही भौतिक रूप से महत्वपूर्ण होता है।
- कूलॉम बल एक संरक्षी बल है
- संरक्षी बल द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता
- स्थितिज ऊर्जा का वास्तविक मान महत्वपूर्ण नहीं — केवल स्थितिज ऊर्जा का अंतर
2.2 स्थिरवैद्युत विभव
विभव की परिभाषा एवं मात्रक
किसी आवेश q पर स्थितिज ऊर्जा को दिए गए कार्य के पदों में परिभाषित किया गया था। यह कार्य q के अनुक्रमानुपाती है, अतः किए गए कार्य को आवेश q से विभाजित करना सुविधाजनक है — इसी से स्थिरवैद्युत विभव V की धारणा प्राप्त होती है।
- स्थिरवैद्युत विभव V = एकांक धनावेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य
- विभव का SI मात्रक वोल्ट (V) है; 1 V = 1 J/C
- विभव का वास्तविक मान महत्वपूर्ण नहीं — विभवांतर भौतिक रूप से सार्थक राशि है
2.3 बिंदु आवेश के कारण विभव
सरलतम प्रकरण एवं दूरी पर निर्भरता
मूल बिंदु पर स्थित बिंदु आवेश Q के कारण, इससे r दूरी पर स्थित किसी बिंदु P पर विभव:
यह सूत्र Q के किसी भी चिह्न (धनात्मक या ऋणात्मक) के लिए सत्य है। विभव 1/r के अनुसार तथा विद्युत क्षेत्र 1/r² के अनुसार दूरी के साथ परिवर्तित होते हैं — अर्थात विभव क्षेत्र की तुलना में दूरी के साथ अधिक धीरे-धीरे घटता है।
- बिंदु आवेश का विभव V(r) = kQ/r — दूरी के व्युत्क्रमानुपाती
- बिंदु आवेश का विद्युत क्षेत्र E(r) = kQ/r²
- अतः V, E की तुलना में दूरी के साथ धीमी गति से घटता है
2.4 वैद्युत द्विध्रुव के कारण विभव
अक्ष, निरक्षीय तल एवं सामान्य बिंदु पर विभव
द्विध्रुव आघूर्ण p (परिमाण q×2a, दिशा −q से q की ओर) के द्विध्रुव के केंद्र से r दूरी (r ≫ a) पर, स्थिति सदिश r तथा p के बीच कोण θ के फलन के रूप में:
निरक्षीय (विषुवत) तल (θ = π/2) में विभव शून्य होता है।
(i) द्विध्रुव के कारण विभव केवल दूरी r पर ही नहीं, कोण पर भी निर्भर करता है।
(ii) अधिक दूरियों पर द्विध्रुव के कारण विभव 1/r² के अनुपात में घटता है, न कि 1/r के अनुपात में।
- द्विध्रुव विभव V ∝ 1/r²
- द्विध्रुव विभव कोण θ पर भी निर्भर करता है
- निरक्षीय तल (θ=π/2): V=0
2.5 आवेशों के निकाय के कारण विभव
अध्यारोपण सिद्धांत का उपयोग
अध्यारोपण सिद्धांत के अनुसार, आवेशों q₁, q₂, …, qₙ के विन्यास के कारण किसी बिंदु P पर विभव, व्यष्टिगत आवेशों के कारण विभवों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है।
- विभव अदिश राशि है, अतः निकाय का विभव बीजगणितीय योग से मिलता है
- इसी सरलता के कारण अक्सर पहले विभव परिकलित कर, फिर E = −dV/dr से क्षेत्र ज्ञात करना अधिक सुविधाजनक होता है
2.6 समविभव पृष्ठ
परिभाषा, गुणधर्म एवं विद्युत क्षेत्र से संबंध
कोई समविभव पृष्ठ ऐसा पृष्ठ होता है जिसके पृष्ठ के हर बिंदु पर विभव नियत रहता है। किसी एकल आवेश q के लिए, समविभव पृष्ठ संकेंद्री गोले होते हैं।
2.6.1 विद्युत क्षेत्र तथा वैद्युत विभव में संबंध
- समविभव पृष्ठ पर विभव नियत
- एकल आवेश के लिए समविभव पृष्ठ संकेंद्री गोले
- दो समविभव पृष्ठ कभी नहीं काटते
- E = −dV/dl: विद्युत क्षेत्र विभव के प्रवणता का ऋणात्मक
2.7 आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा
दो एवं तीन आवेशों के निकाय की ऊर्जा
यदि q₁q₂ > 0 (सजातीय), स्थितिज ऊर्जा धनात्मक; यदि q₁q₂ < 0 (विजातीय), स्थितिज ऊर्जा ऋणात्मक।
- U(q₁,q₂) = kq₁q₂/r₁₂
- स्थितिज ऊर्जा उस क्रम पर निर्भर नहीं करती जिसमें आवेशों को लाया गया
2.8 बाह्य क्षेत्र में स्थितिज ऊर्जा
एकल आवेश, आवेश-युग्म एवं द्विध्रुव
2.8.1 एकल आवेश की स्थितिज ऊर्जा
2.8.3 बाह्य क्षेत्र में द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा
- बाह्य क्षेत्र में आवेश q की स्थितिज ऊर्जा = qV(r)
- 1 eV = 1.6×10⁻¹⁹ J
- द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा U(θ) = −p·E
2.9 चालक-स्थिरवैद्युतिकी
चालक के पाँच महत्वपूर्ण गुणधर्म एवं परिरक्षण
- परिणाम 1: चालक के भीतर स्थिरवैद्युत क्षेत्र शून्य (E=0)
- परिणाम 2: पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र अभिलंबवत
- परिणाम 3: अतिरिक्त आवेश केवल पृष्ठ पर
- परिणाम 4: चालक का पूरा आयतन नियत विभव पर
- परिणाम 5: पृष्ठ पर E = (σ/ε₀) n̂
2.9.1 स्थिरवैद्युत परिरक्षण
चालक की कोटर के भीतर विद्युत क्षेत्र सदैव शून्य होता है — इसे स्थिरवैद्युत परिरक्षण कहते हैं।
2.10 परावैद्युत तथा ध्रुवण
ध्रुवी एवं अध्रुवी अणु, ध्रुवण की संकल्पना
परावैद्युत अचालक पदार्थ होते हैं। बाह्य क्षेत्र इनमें ध्रुवण उत्पन्न करता है जो बाह्य क्षेत्र का विरोध करता है, परंतु पूर्णतः निरस्त नहीं करता।
| अणु का प्रकार | विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| अध्रुवी अणु | धन-ऋण आवेश केंद्र संपाती; प्रेरित द्विध्रुव | O₂, H₂, CO₂ |
| ध्रुवी अणु | आवेश केंद्र पृथक; स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण | HCl, H₂O |
- परावैद्युत विद्युतरोधी पदार्थ
- ध्रुवण P = ε₀χₑE
- परावैद्युत के पृष्ठीय आवेश परिबद्ध (bound) आवेश
2.11 संधारित्र तथा धारिता
परिभाषा, मात्रक एवं परावैद्युत सामर्थ्य
धारिता केवल ज्यामितीय विन्यास तथा माध्यम पर निर्भर करती है।
- C = Q/V; मात्रक फैरड (F)
- धारिता C केवल ज्यामिति तथा माध्यम पर निर्भर — Q या V पर नहीं
2.12 समांतर पट्टिका संधारित्र
सर्वाधिक सामान्य प्रकार एवं धारिता का सूत्र
- समांतर पट्टिका संधारित्र (निर्वात) C = ε₀A/d
- पट्टिकाओं के बाहर क्षेत्र शून्य
- A बड़ा और d छोटा → C अधिक
2.13 धारिता पर परावैद्युत का प्रभाव
परावैद्युतांक एवं धारिता में वृद्धि
- परावैद्युत भरने पर C = KC₀ (K सदैव >1)
- निर्वात के लिए K=1
2.14 संधारित्रों का संयोजन
श्रेणीक्रम एवं पार्श्वक्रम संयोजन
2.14.1 श्रेणीक्रम संयोजन
2.14.2 पार्श्वक्रम संयोजन
- श्रेणीक्रम: 1/C = Σ(1/Cᵢ) (आवेश समान)
- पार्श्वक्रम: C = ΣCᵢ (विभव समान)
2.15 संधारित्र में संचित ऊर्जा
संचित ऊर्जा एवं ऊर्जा घनत्व
- U = Q²/2C = ½CV² = ½QV
- ऊर्जा घनत्व u = ½ε₀E²
★ सम्पूर्ण अध्याय के एक-पंक्ति तथ्य
Quick Revision — सभी महत्वपूर्ण बिंदु एक स्थान पर
- कूलॉम बल संरक्षी है; कार्य पथ-स्वतंत्र।
- V = kQ/r (बिंदु आवेश); V ∝ 1/r, जबकि E ∝ 1/r²।
- द्विध्रुव विभव V ∝ 1/r² तथा कोण θ पर निर्भर; निरक्षीय तल में V = 0।
- अध्यारोपण से आवेशों के निकाय का विभव = बीजगणितीय योग।
- U(q₁,q₂) = kq₁q₂/r₁₂।
- बाह्य क्षेत्र में आवेश की स्थितिज ऊर्जा = qV(r); द्विध्रुव की = −p·E।
- 1 eV = 1.6×10⁻¹⁹ J।
- समविभव पृष्ठ पर विभव नियत; E सदैव पृष्ठ के अभिलंबवत।
- चालक के भीतर E=0; अतिरिक्त आवेश केवल पृष्ठ पर।
- चालक की कोटर में क्षेत्र शून्य — स्थिरवैद्युत परिरक्षण।
- चालक पृष्ठ पर E = σ/ε₀।
- ध्रुवी अणु: स्थायी द्विध्रुव (H₂O, HCl); अध्रुवी: प्रेरित (O₂, CO₂)।
- P = ε₀χₑE।
- समांतर पट्टिका C = ε₀A/d।
- परावैद्युत भरने पर C = KC₀ (K >1)।
- श्रेणीक्रम: 1/C = Σ1/Cᵢ; पार्श्वक्रम: C = ΣCᵢ।
- ऊर्जा U = ½CV² = ½QV = Q²/2C; ऊर्जा घनत्व u = ½ε₀E²।
➕ अन्य NEET संबंधित तथ्य
परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु
- समविभव पृष्ठ कभी परस्पर प्रतिच्छेद नहीं करते — किसी भी बिंदु पर विभव का मान सदैव अद्वितीय होता है।
- भूसंपर्कण/पृथ्वीकरण (Grounding) — पृथ्वी को अनंत आवेश-भंडार व अनंत धारिता वाला विशाल चालक माना जाता है।
- वान डी ग्राफ जनित्र — खोखले गोलीय चालक के गुण पर आधारित — लाखों वोल्ट तक विभव उत्पन्न किया जा सकता है।
- कोरोना विसर्जन व तड़ित चालक — नुकीले सिरों पर σ अधिक, अतः E=σ/ε₀ भी अधिक।
- विद्युत विभव का संदर्भ-बिंदु — अनंत पर शून्य विभव की परिपाटी सुविधाजनक संदर्भ-बिंदु मात्र है।
- विद्युत क्षेत्र की दिशा — विभव के अधिकतम ह्रास की दिशा — E = −dV/dl।
- समविभव पृष्ठों के मध्य दूरी — क्षेत्र की तीव्रता का सूचक।
- मानव शरीर व वाहन — प्राकृतिक फैराडे पिंजर।
- गोलीय संधारित्र — C = 4πε₀ab/(b−a); b→∞ पर C=4πε₀a।
- बैटरी संयोजित बनाम बैटरी हटाई — बैटरी जुड़ी: V स्थिर, Q बदलता; बैटरी हटाई: Q स्थिर, V बदलता।
- संधारित्रों के संयोजन की सीमा-जाँच — श्रेणीक्रम में सबसे छोटी से भी कम; पार्श्वक्रम में सबसे बड़ी से भी अधिक।
- संधारित्रों को जोड़ने पर ऊर्जा-हानि — ऊष्मा तथा विद्युतचुंबकीय विकिरण के रूप में।
- परावैद्युत सामर्थ्य बनाम परावैद्युतांक (K) — दोनों भिन्न भौतिक गुणधर्म।
§ महत्वपूर्ण सूत्रों की तालिका
एक जगह सभी उपयोगी सूत्र एवं स्थिरांक
| संकल्पना | सूत्र |
|---|---|
| बिंदु आवेश का विभव | V(r) = (1/4πε₀)(Q/r) |
| द्विध्रुव का विभव | V(r) = (1/4πε₀)(p cosθ/r²) |
| विद्युत क्षेत्र-विभव संबंध | E = −dV/dl |
| दो आवेशों की स्थितिज ऊर्जा | U = (1/4πε₀)(q₁q₂/r₁₂) |
| द्विध्रुव की स्थितिज ऊर्जा | U(θ) = −p·E |
| चालक पृष्ठ पर क्षेत्र | E = (σ/ε₀)n̂ |
| ध्रुवण | P = ε₀χₑE |
| धारिता | C = Q/V |
| समांतर पट्टिका (निर्वात) | C₀ = ε₀A/d |
| परावैद्युत भरे संधारित्र | C = Kε₀A/d = KC₀ |
| श्रेणीक्रम | 1/C = 1/C₁ + 1/C₂ + … |
| पार्श्वक्रम | C = C₁ + C₂ + … |
| संधारित्र ऊर्जा | U = Q²/2C = ½CV² = ½QV |
| ऊर्जा घनत्व | u = ½ε₀E² |
| स्थिरांक | मान |
|---|---|
| k = 1/4πε₀ | 9 × 10⁹ N m² C⁻² |
| ε₀ | 8.854 × 10⁻¹² C² N⁻¹ m⁻² |
| 1 eV | 1.6 × 10⁻¹⁹ J |
| 1 फैरड (F) | 1 C V⁻¹ |
| वायु की परावैद्युत सामर्थ्य | ≈ 3 × 10⁶ V/m |
✍️ अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल (2.1 – 2.11)
NCERT अभ्यास — प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं पूरा हल देखें
प्रश्न 2.1 5×10⁻⁸ C तथा −3×10⁻⁸ C के दो आवेश 16 cm दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किस बिंदु पर वैद्युत विभव शून्य होगा?
माना धनावेश q₁ = 5×10⁻⁸ C बिंदु A पर, ऋणावेश q₂ = −3×10⁻⁸ C बिंदु B पर, AB = 16 cm।
(i) दोनों आवेशों के बीच: A से x दूरी पर:
5×10⁻⁸/x = 3×10⁻⁸/(16−x) ⟹ 5(16−x) = 3x ⟹ 80 = 8x ⟹ x = 10 cm
(ii) विस्तारित रेखा पर (ऋणावेश से आगे): A से x दूरी पर (x > 16):
5×10⁻⁸/x = 3×10⁻⁸/(x−16) ⟹ 5(x−16) = 3x ⟹ 5x − 80 = 3x ⟹ x = 40 cm
निष्कर्ष: कुल दो बिंदु हैं: धनावेश से 10 cm तथा 40 cm दूरी पर।
प्रश्न 2.2 10 cm भुजा वाले एक सम-षट्भुज के प्रत्येक शीर्ष पर 5 µC का आवेश है। षट्भुज के केंद्र पर विभव परिकलित कीजिए।
सम-षट्भुज में केंद्र से प्रत्येक शीर्ष की दूरी भुजा के बराबर: r = 10 cm = 0.1 m।
V = 6 × kq/r = 6 × (9×10⁹ × 5×10⁻⁶)/0.1 = 6 × 4.5×10⁵
V = 2.7 × 10⁶ V
प्रश्न 2.3 6 cm की दूरी पर अवस्थित दो बिंदुओं A एवं B पर दो आवेश 2 µC तथा −2 µC रखे हैं। (a) निकाय के सम विभव पृष्ठ की पहचान कीजिए। (b) इस पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा क्या है?
(a) यह द्विध्रुव जैसा निकाय है। A तथा B से समदूरस्थ बिंदुओं का बिंदुपथ, AB रेखा के मध्य बिंदु से गुजरने वाला तथा AB के लंबवत तल है — इस पूरे तल पर V=0।
(b) समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर E उस पृष्ठ के अभिलंबवत होता है, अर्थात AB रेखा के समांतर — धनावेश A से ऋणावेश B की ओर।
प्रश्न 2.4 12 cm त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक के पृष्ठ पर 1.6×10⁻⁷ C का आवेश एकसमान रूप से वितरित है। (a) गोले के अंदर, (b) गोले के ठीक बाहर, (c) गोले के केंद्र से 18 cm पर अवस्थित बिंदु पर विद्युत क्षेत्र?
R = 12 cm = 0.12 m, q = 1.6×10⁻⁷ C
(a) चालक के भीतर E = 0। गोले के अंदर E = 0
(b) गोले के ठीक बाहर (r=R): E = kq/R² = (9×10⁹ × 1.6×10⁻⁷)/(0.12)² = 1440/0.0144 = 1 × 10⁵ N/C
(c) r = 18 cm = 0.18 m: E = kq/r² = 1440/0.0324 = 4.44 × 10⁴ N/C
प्रश्न 2.5 एक समांतर पट्टिका संधारित्र, जिसकी पट्टिकाओं के बीच वायु है, की धारिता 8 pF है। यदि पट्टिकाओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए और 6 परावैद्युतांक का पदार्थ भर दिया जाए तो धारिता?
C₀ = 8 pF, नई दूरी d' = d/2, K = 6
C' = Kε₀A/d' = 2K × C₀ = 2 × 6 × 8 pF
C' = 96 pF
प्रश्न 2.6 9 pF धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। (a) कुल धारिता? (b) 120 V के संभरण से जोड़ने पर प्रत्येक पर विभवांतर?
(a) 1/C = 1/9 + 1/9 + 1/9 = 3/9 = 1/3 ⟹ C = 3 pF
(b) Q = CV = 3×120 = 360 pC; प्रत्येक पर V_i = 360/9 = 40 V
(तीनों का योग 40+40+40 = 120 V, कुल संभरण के बराबर)
प्रश्न 2.7 2 pF, 3 pF और 4 pF के तीन संधारित्र पार्श्वक्रम में जोड़े गए हैं। (a) कुल धारिता? (b) 100 V के संभरण से जोड़ने पर प्रत्येक पर आवेश?
(a) C = 2+3+4 = 9 pF
(b) प्रत्येक पर V = 100 V:
Q₁ = 2×100 = 200 pC; Q₂ = 3×100 = 300 pC; Q₃ = 4×100 = 400 pC
प्रश्न 2.8 समांतर पट्टिका संधारित्र: A = 6×10⁻³ m², d = 3 mm। (a) धारिता? (b) 100 V पर आवेश?
C = ε₀A/d = (8.854×10⁻¹² × 6×10⁻³)/(3×10⁻³) = 1.77 × 10⁻¹¹ F = 17.7 pF
Q = CV = 1.77×10⁻¹¹ × 100 = 1.77 × 10⁻⁹ C
प्रश्न 2.9 प्रश्न 2.8 के संधारित्र में 3 mm मोटी अभ्रक शीट (K=6) रखने पर (a) बैटरी जुड़ी रहे, (b) बैटरी हटा ली जाए — क्या होगा?
परावैद्युत भरने पर C' = KC = 6 × 17.7 ≈ 106.2 pF
(a) बैटरी जुड़ी: V = 100 V अपरिवर्तित; C, Q दोनों 6 गुना बढ़ेंगे।
Q' = C'V = 106.2 pF × 100 V ≈ 1.06×10⁻⁸ C
(b) बैटरी हटाई: Q अपरिवर्तित (1.77×10⁻⁹ C); V, K गुना घटकर V' = 100/6 ≈ 16.7 V
प्रश्न 2.10 12 pF का संधारित्र 50 V की बैटरी से जुड़ा है। संचित ऊर्जा?
U = ½CV² = ½ × 12×10⁻¹² × 2500 = 6 × 2500 × 10⁻¹²
U = 1.5 × 10⁻⁸ J
प्रश्न 2.11 200 V संभरण से 600 pF के संधारित्र को आवेशित किया गया, फिर 600 pF के अनावेशित संधारित्र से जोड़ा गया। ऊर्जा का ह्रास?
U_i = ½CV² = ½ × 600×10⁻¹² × 40000 = 1.2×10⁻⁵ J
दोनों समान हैं, अतः V' = 100 V; U_f = ½(2C)(V')² = ½ × 1200×10⁻¹² × 10000 = 6×10⁻⁶ J
ΔU = U_i − U_f = 1.2×10⁻⁵ − 6×10⁻⁶ = 6 × 10⁻⁶ J (= 6 µJ)
यह ऊर्जा तार में ऊष्मा तथा विद्युतचुंबकीय विकिरण के रूप में क्षय हो जाती है।
🎯 NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले प्रकार के 8 अतिरिक्त प्रश्न, पूर्ण हल सहित
प्रश्न अ.1 एक वैद्युत द्विध्रुव का द्विध्रुव आघूर्ण 2×10⁻⁶ C·m है। द्विध्रुव अक्ष से 60° के कोण पर, केंद्र से 1 m दूरी पर स्थित बिंदु पर विभव?
V = kp cosθ/r²; p = 2×10⁻⁶, r = 1 m, θ = 60° (cos60° = 0.5)
V = (9×10⁹ × 2×10⁻⁶ × 0.5)/(1)² = 9×10⁹ × 10⁻⁶
V = 9 × 10³ V = 9000 V
प्रश्न अ.2 4×10⁻⁶ C·m आघूर्ण का द्विध्रुव 5×10⁵ N/C के एकसमान क्षेत्र में θ=0° पर है। इसे θ=90° करने में कार्य?
W = pE(cosθ₁ − cosθ₂) = 4×10⁻⁶ × 5×10⁵ × (1−0) = 2 J
प्रश्न अ.3 सिद्ध कीजिए कि किन्हीं दो समविभव पृष्ठ एक-दूसरे को कभी नहीं काट सकते।
यदि V₁ ≠ V₂ वाले दो समविभव पृष्ठ किसी बिंदु P पर काटें, तो P पर विभव एक साथ V₁ भी और V₂ भी होगा — जो असंभव है, क्योंकि विभव का मान सदैव अद्वितीय होता है।
निष्कर्ष: दो असमान-विभव वाले समविभव पृष्ठ कभी नहीं काटते।
प्रश्न अ.4 चार समान 4 µF के संधारित्र व्हीटस्टोन-सेतु में जुड़े हैं तथा सेतु की भुजा में एक पाँचवाँ संधारित्र C₅ लगा है। तुल्य धारिता?
चारों भुजाएँ समान (4 µF), यह संतुलित सेतु है। C₅ को हटाया जा सकता है।
दो शाखाएँ, प्रत्येक में दो 4 µF श्रेणीक्रम: 2 µF प्रत्येक। ये पार्श्वक्रम में:
C_eq = 2+2 = 4 µF (C₅ से स्वतंत्र)
प्रश्न अ.5 समांतर पट्टिका संधारित्र में E = 1×10⁵ V/m, माध्यम वायु। ऊर्जा घनत्व?
u = ½ε₀E² = ½ × 8.85×10⁻¹² × 10¹⁰
u ≈ 4.43 × 10⁻² J/m³
प्रश्न अ.6 वियुक्त संधारित्र (A = 0.01 m²) पर 2 µC आवेश है। एक पट्टिका द्वारा दूसरी पर आकर्षण बल?
F = Q²/2ε₀A = (2×10⁻⁶)²/(2 × 8.85×10⁻¹² × 0.01)
= 4×10⁻¹²/1.77×10⁻¹³ = ≈ 22.6 N
प्रश्न अ.7 दो चालक गोले (R₁ = 10 cm, Q₁ = 2 µC; R₂ = 20 cm, Q₂ = 1 µC) तार से जोड़े जाते हैं। उभयनिष्ठ विभव तथा पुनर्वितरित आवेश?
V = k(Q₁+Q₂)/(R₁+R₂) = (9×10⁹ × 3×10⁻⁶)/0.30 = 9 × 10⁴ V
Q' ∝ R: Q₁'/Q₂' = 1/2; Q₁'+Q₂' = 3 µC
छोटे पर Q₁' = 1 µC, बड़े पर Q₂' = 2 µC
प्रश्न अ.8 दो संकेंद्रित गोलीय पृष्ठों की त्रिज्याएँ a = 10 cm व b = 12 cm हैं। गोलीय संधारित्र की धारिता?
C = 4πε₀ab/(b−a) = 4π × 8.85×10⁻¹² × (0.10×0.12)/0.02
= 1.113×10⁻¹⁰ × 6 = ≈ 6.68 × 10⁻¹¹ F = 66.8 pF
🏅 NEET में पूछे गए प्रश्न
इस अध्याय से 2015 से 2026 तक NEET में पूछे गए प्रतिनिधि प्रश्नों का चयन, वर्षवार, पूर्ण हल सहित
प्रश्न 1 तीन समान संधारित्र P, Q, S (प्रत्येक धारिता C): P व Q श्रेणीक्रम में, यह संयोजन S के समांतर, बैटरी V से जुड़ा है। U_P/U_T? NEET 2026 (पुनः-परीक्षा)
P व Q पर V/2 प्रत्येक; S पर V। U_P = ½C(V/2)² = CV²/8
U_T = CV²/8 + CV²/8 + ½CV² = ¾CV²
U_P/U_T = 1/6
प्रश्न 2 200 pF के दो समान संधारित्र: एक को 100 V से आवेशित कर दूसरे से जोड़ा। ऊर्जा-ह्रास? NEET 2026 (रद्द परीक्षा)
U_i = ½CV² = ½ × 200×10⁻¹² × 10000 = 1×10⁻⁶ J
V' = V/2 = 50 V; U_f = ½(2C)(V')² = ½ × 400×10⁻¹² × 2500 = 0.5×10⁻⁶ J
ΔU = 0.5 × 10⁻⁶ J
प्रश्न 3 5×10⁻⁶ C·m आघूर्ण का द्विध्रुव 4×10⁵ N/C क्षेत्र के समांतर रखा है। 60° घुमाने पर स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन? NEET 2025
ΔU = pE(cosθᵢ − cosθ_f) = 5×10⁻⁶ × 4×10⁵ × (1−0.5)
ΔU = 1 J
प्रश्न 4 समांतर पट्टिका संधारित्र (पृथकन d) में: 3d/8 मोटाई का परावैद्युत (K₁), d/2 मोटाई का परावैद्युत (K₂), शेष d/8 वायु। धारिता दोगुनी हो जाती है। K₁ = 1.25K₂ → K₁? NEET 2025
2 = 1/(3/(8K₁) + 5/(8K₁) + 1/8)
2(1/K₁ + 1/8) = 1 ⟹ 2/K₁ = 3/4
K₁ = 8/3 ≈ 2.66
प्रश्न 5 चार समान 2 µF के संधारित्र व्हीटस्टोन-सेतु में हैं, सेतु की भुजा में भी एक संधारित्र। C_AB? NEET 2024
संतुलित सेतु — विकर्ण भुजा हटाई जा सकती है।
दो शाखाएँ, प्रत्येक में 2 µF + 2 µF श्रेणीक्रम = 1 µF प्रत्येक। पार्श्वक्रम में:
C_AB = 2 µF
प्रश्न 6 बैटरी से जुड़े समांतर पट्टिका संधारित्र की पट्टिकाएँ पास लाई जाएँ — कौन-से कथन सही? (A) Q बढ़ेगा (B) U घटेगी (C) C बढ़ेगी (D) Q/V अपरिवर्तित (E) QV बढ़ेगा। NEET 2024
बैटरी जुड़ी → V स्थिर, d↓ → C↑ → (C) सही। Q = CV → Q↑ → (A) सही। U = ½CV² → U↑ → (B) गलत। Q/V = C बदल रहा → (D) गलत। QV = 2U बढ़ेगा → (E) सही।
सही: A, C, E
प्रश्न 7 K=3 का परावैद्युत स्लैब, मोटाई पृथकन की केवल 3/4। बिना परावैद्युत तथा परावैद्युत सहित विभवांतरों का अनुपात? NEET 2024
C_air = 4ε₀A/d; C_diel = 4ε₀A/d; C_eq = 2ε₀A/d
V₀ = Qd/ε₀A; V_diel = Qd/2ε₀A
V₀ : V_diel = 2 : 1
प्रश्न 8 दो 3 µF पार्श्वक्रम में, यह संयोजन तीसरे 3 µF से श्रेणीक्रम में। तुल्य धारिता? NEET 2023
3+3 = 6 µF; 1/C = 1/6 + 1/3 = 1/2
C_eq = 2 µF
प्रश्न 9 दो खोखले चालक गोले (R₁ ≫ R₂) पर समान आवेश Q। विभव अधिक किसका? NEET 2022
V = kQ/R, अर्थात V ∝ 1/R
छोटे गोले (R₂) का विभव अधिक
प्रश्न 10 दो आवेशित चालक गोले (R₁, R₂) तार से जोड़े गए। σ₁/σ₂? NEET 2021
V₁ = V₂ ⟹ Q₁/Q₂ = R₁/R₂
σ = Q/4πR² ⟹ σ₁/σ₂ = (Q₁/Q₂)(R₂²/R₁²) = R₂/R₁
σ₁/σ₂ = R₂/R₁
प्रश्न 11 धनावेशित पतले धात्विक कोश (त्रिज्या R) के लिए V(r) का ग्राफ? NEET 2020
भीतर (r<R): E=0 → V नियत (क्षैतिज रेखा)। बाहर (r≥R): V ∝ 1/r → अतिपरवलयिक क्षय।
सही ग्राफ: r=0 से r=R तक क्षैतिज, r=R से आगे 1/r के अनुसार घटता हुआ वक्र
प्रश्न 12 16×10⁻⁹ C·m आघूर्ण के द्विध्रुव से 0.6 m दूरी पर, अक्ष से 60° कोण पर विभव? NEET 2020
V = kp cosθ/r² = (9×10⁹ × 16×10⁻⁹ × 0.5)/(0.36) = 72/0.36
V = 200 V
प्रश्न 13 दो समान संधारित्र, एक आवेशित, दूसरा अनावेशित, पार्श्वक्रम में जोड़े। ऊर्जा-ह्रास प्रतिशत? NEET 2019
U_i = ½CV²; V' = V/2; U_f = ½(2C)(V/2)² = ¼CV²
ΔU/U_i = (½ − ¼)/(½) = 1/2
ऊर्जा-ह्रास = 50%
प्रश्न 14 V(x,y,z) = 6xy − y + 2yz वोल्ट में। बिंदु (1,1,0) पर विद्युत क्षेत्र? NEET 2015
E = −(∂V/∂x î + ∂V/∂y ĵ + ∂V/∂z k̂)
∂V/∂x = 6y = 6; ∂V/∂y = 6x−1+2z = 5; ∂V/∂z = 2y = 2
E = −(6î + 5ĵ + 2k̂) N/C