अणुगति सिद्धांत
द्रव्य की आण्विक प्रकृति, आदर्श गैस समीकरण, अणुगति सिद्धांत की अभिधारणाएँ, दाब एवं ताप की आण्विक व्याख्या, ऊर्जा समविभाजन का नियम, विशिष्ट ऊष्मा धारिता तथा माध्य मुक्त पथ — सम्पूर्ण व्याख्या, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।
12.1 भूमिका
अणुगति सिद्धांत का उद्भव एवं महत्त्व
बॉयल ने 1661 में एक नियम की खोज की, जिसे उनके नाम से जाना जाता है। बॉयल, न्यूटन एवं अन्य वैज्ञानिकों ने गैसों के व्यवहार को यह मानकर समझाया कि गैसें अत्यंत सूक्ष्म परमाण्वीय कणों से बनी हैं। अणुगति सिद्धांत इस धारणा के आधार पर गैसों के व्यवहार की व्याख्या करता है कि गैसों में अत्यंत तीव्र गति से गतिमान परमाणु अथवा अणु होते हैं।
यह इसलिए संभव है क्योंकि ठोसों तथा द्रवों में अंतरापरमाण्विक बल (जो लघु परासी बल है) महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि गैसों में इस बल को उपेक्षणीय माना जा सकता है। यह सिद्धांत 19वीं शताब्दी में मैक्सवेल, बोल्ट्ज़मान आदि द्वारा विकसित किया गया — यह दाब एवं ताप की एक आण्विक व्याख्या प्रस्तुत करता है, आवोगाद्रो की परिकल्पना तथा गैस नियमों के अनुरूप है, गैसों की विशिष्ट ऊष्मा धारिता की सही व्याख्या करता है, तथा श्यानता, चालकता, विसरण जैसे मापनीय गुणों को आण्विक प्राचलों से जोड़ता है।
- अणुगति सिद्धांत — गैसों के व्यवहार की आण्विक व्याख्या
- विकासकर्ता — मैक्सवेल, बोल्ट्ज़मान
- ठोस/द्रव में अंतरापरमाण्विक बल महत्वपूर्ण; गैसों में उपेक्षणीय
12.2 द्रव्य की आण्विक प्रकृति
डाल्टन की परिकल्पना, गै-लुसैक का नियम, आवोगाद्रो संख्या
परमाणु परिकल्पना (डाल्टन): सभी वस्तुएँ परमाणुओं से बनी हैं — गतिमान अत्यंत सूक्ष्म कण, जो थोड़ी दूरी पर एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं पर एक-दूसरे में निष्पीड़ित होने पर प्रतिकर्षित करने लगते हैं।
डाल्टन के दो नियम:
- स्थिर अनुपात का नियम: किसी यौगिक में अवयवों के द्रव्यमानों का अनुपात नियत रहता है।
- बहुगुणक अनुपात का नियम: जब दो तत्व मिलकर दो या अधिक यौगिक बनाते हैं तो एक तत्व के निश्चित द्रव्यमान से संयोजित होने वाले दूसरे तत्व के द्रव्यमानों में एक सरल पूर्णांकीय अनुपात होता है।
गै-लुसैक का नियम: जब गैसें रासायनिक रूप से संयोजन करके कोई अन्य गैस बनाती हैं, तो उनके आयतन लघु पूर्णांकों के अनुपात में होते हैं।
आवोगाद्रो का नियम (परिकल्पना): समान ताप और दाब पर गैसों के समान आयतनों में अणुओं की संख्या समान होती है। किसी गैस के 22.4 लीटर आयतन में यह संख्या 6.02×1023 है — इसे आवोगाद्रो संख्या (NA) कहते हैं। पदार्थ की यह मात्रा मोल (mole) कहलाती है।
परमाणु का आमाप लगभग 1 ऐंग्स्ट्रॉम (1Å = 10−10 m) है। ठोसों में परमाणुओं के बीच कुछ ऐंग्स्ट्रॉम (2Å) की दूरी है; द्रवों में भी परमाणुओं के बीच इतनी ही दूरी है, परंतु परमाणु उतनी दृढ़ता से नहीं बँधे होते — इसलिए द्रवों में प्रवाह होता है। गैसों में अंतरपरमाणुक दूरी दसों एंग्स्ट्रॉम में होती है — इसीलिए गैसों में अणु अत्यधिक स्वतंत्र होते हैं और बड़ी-बड़ी दूरियों तक बिना संघट्ट किए जा सकते हैं। वह औसत दूरी जो कोई अणु बिना संघट्ट किए चल सकता है, उसकी औसत मुक्त पथ कहलाती है।
- परमाणु आमाप ≈ 1 Å = 10−10 m
- ठोस/द्रव में अंतरापरमाणुक दूरी ≈ 2 Å; गैसों में दसों Å
- आवोगाद्रो संख्या NA = 6.02×1023
- मोलर आयतन (STP) = 22.4 लीटर
12.3 गैसों का व्यवहार
आदर्श गैस समीकरण एवं मूलभूत नियम
गैसों में अणु एक-दूसरे से दूर-दूर होते हैं, इसलिए ठोसों व द्रवों की तुलना में गैसों के गुणों को समझना आसान है। निम्न दाब व उच्च ताप पर सभी गैसें अपने ताप, दाब व आयतन में लगभग निम्न संबंध दर्शाती हैं:
जहाँ K = N k, जिसमें N अणुओं की संख्या है तथा k सभी गैसों के लिए समान — इसे बोल्ट्ज़मान नियतांक (kB) कहते हैं।
PV = μRT = kBNT या P = kBnT
जहाँ μ = मोलों की संख्या, R = NAkB = सार्वत्रिक गैस नियतांक = 8.314 J mol−1K−1, n = संख्या घनत्व (प्रति एकांक आयतन में अणुओं की संख्या), kB = 1.38×10−23 J K−1।
आदर्श गैस वह गैस है जो सभी तापों व दाबों पर समीकरण PV=μRT का पूर्णतः पालन करती है। वास्तविक गैस निम्न दाब व उच्च ताप पर आदर्श गैस के सदृश व्यवहार करती है (जब अणु दूर-दूर हों तथा आण्विक अन्योन्य क्रियाएँ उपेक्षणीय हों)।
डाल्टन का आंशिक दाबों का नियम
यदि किसी पात्र में अन्योन्य क्रिया न करने वाली आदर्श गैसों का मिश्रण है (μ1 मोल गैस-1, μ2 मोल गैस-2 आदि), तो: PV = (μ1+μ2+...)RT, अर्थात् P = P1+P2+... — आदर्श गैसों के मिश्रण का कुल दाब मिश्रण में विद्यमान गैसों के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है।
- आदर्श गैस समीकरण — PV = μRT = kBNT
- R = 8.314 J mol−1K−1; kB = 1.38×10−23 J/K
- बॉयल — PV = नियतांक; चार्ल्स — V ∝ T
- डाल्टन — P = P1+P2+...
12.4 आदर्श गैसों का अणुगति सिद्धांत
दाब एवं ताप की आण्विक व्याख्या
गैसों का अणुगति सिद्धांत इस मान्यता पर आधारित है कि द्रव्य अणुओं का बना है, जो निरंतर यादृच्छिक (random) गति करते हैं तथा एक-दूसरे से व धारक पात्र की दीवारों से संघट्ट करते रहते हैं। सभी संघट्ट प्रत्यास्थ (elastic) होते हैं — कुल गतिज ऊर्जा तथा कुल संवेग संरक्षित रहते हैं।
12.4.1 किसी आदर्श गैस का दाब
यहाँ n = संख्या घनत्व, m = अणु का द्रव्यमान, ⟨v²⟩ = वर्ग चालों का माध्य। इस व्युत्पत्ति में संघट्टों को उपेक्षणीय मानकर परिकलनों में सम्मिलित नहीं किया गया, तथा गैस समदैशिक (isotropic) मानी गई है।
12.4.2 ताप की अणु गतिक व्याख्या
अर्थात् किसी अणु की औसत गतिज ऊर्जा गैस के परम ताप के अनुक्रमानुपाती होती है — यह गैस की प्रकृति, दाब या आयतन पर निर्भर नहीं करती। समान ताप पर हल्के अणुओं की rms चाल अधिक होती है (गैसों के मिश्रण में भारी अणु की चाल अपेक्षाकृत कम होती है)।
- दाब — P = (1/3)nm⟨v²⟩
- औसत गतिज ऊर्जा — (1/2)m⟨v²⟩ = (3/2)kBT (केवल ताप पर निर्भर)
- rms चाल — vrms = √(3RT/M)
- समान ताप पर हल्के अणु की rms चाल अधिक
12.5 ऊर्जा के समविभाजन का नियम
स्वातंत्र्य कोटियाँ एवं ऊर्जा वितरण
किसी संपूर्ण पिंड की एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक की गति को स्थानांतरीय गति कहते हैं। दिक्स्थान में गति के लिए स्वतंत्र किसी अणु की तीन स्वातंत्र्य कोटि होती हैं। द्विपरमाणुक अणु में द्रव्यमान केंद्र के परित: घूर्णन के कारण 2 घूर्णी स्वातंत्र्य कोटि भी होती हैं (कुल 5)। कुछ अणुओं (जैसे CO) में परमाणु अंतरापरमाणुक अक्ष के अनुदिश कंपन भी करते हैं, जिससे कंपन ऊर्जा का अतिरिक्त योगदान होता है।
तापीय साम्य में प्रत्येक स्वातंत्र्य कोटि के साथ ½kBT ऊर्जा जुड़ी होती है (चाहे यह स्थानांतरीय हो, घूर्णी हो या कंपन ऊर्जा हो)। प्रत्येक कंपन आवृत्ति दो स्वातंत्र्य कोटियों (गतिज व स्थितिज) का योगदान देती है, अतः इसकी ऊर्जा 2×½kBT = kBT होती है।
यह मैक्सवेल द्वारा सर्वप्रथम सिद्ध किया गया सांख्यिकीय यांत्रिकी का सर्वाधिक परिष्कृत सिद्धांत है — ऊर्जा समान रूप से सभी संभव ऊर्जा रूपों पर बंटती है।
- प्रति स्वातंत्र्य कोटि — ½kBT
- कंपन का योगदान — kBT (2 × ½kBT)
- एकपरमाणुक (f=3), द्विपरमाणुक (f=5), अरैखिक बहुपरमाणुक (f=6)
12.6 विशिष्ट ऊष्मा धारिता
एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक, बहुपरमाणुक गैसें एवं ठोस
12.6.1 एकपरमाणुक गैसों के लिए
केवल 3 स्थानांतरीय स्वातंत्र्य कोटि — U=(3/2)RT (1 मोल के लिए)
12.6.2 द्विपरमाणुक गैसों के लिए (दृढ़ घूर्णी)
3 स्थानांतरीय + 2 घूर्णी = 5 स्वातंत्र्य कोटि — U=(5/2)RT
यदि द्विपरमाणुक अणु में कंपन रूप भी सम्मिलित हो: Cv=(7/2)R, CP=(9/2)R, γ=9/7
12.6.3 बहुपरमाणुक गैसों के लिए
3 स्थानांतरीय + 3 घूर्णी + f कंपन रूप:
12.6.4 ठोसों की विशिष्ट ऊष्मा धारिता
N परमाणुओं वाले ठोस में प्रत्येक परमाणु त्रिविमीय रूप से कंपन करता है — औसत ऊर्जा = 3kBT प्रति परमाणु। ठोस के 1 मोल के लिए U=3RT, तथा नियत दाब पर ΔV उपेक्षणीय होने से ΔQ=ΔU:
(ड्यूलॉन्ग-पेटिट नियम — कार्बन एक अपवाद है)
- एकपरमाणुक — Cv=(3/2)R, CP=(5/2)R, γ=5/3
- द्विपरमाणुक (दृढ़) — Cv=(5/2)R, CP=(7/2)R, γ=7/5
- बहुपरमाणुक — Cv=(3+f)R, CP=(4+f)R
- ठोसों के लिए — C = 3R (ड्यूलॉन्ग-पेटिट)
- CP − Cv = R सभी आदर्श गैसों के लिए
12.7 माध्य मुक्त पथ
संघट्ट आवृत्ति एवं औसत स्वतंत्र पथ
गैसों में अणुओं की गति काफी अधिक (वायु में ध्वनि के वेग की कोटि) होती है, फिर भी रसोईघर में लीक हुई गैस को कमरे के दूसरे कोने तक विसरित होने में काफी समय लगता है — क्योंकि गैस के अणु परिमित, अत्यंत छोटी आमाप के होने के कारण परस्पर टकराते रहने के लिए बाध्य हैं और उनका पथ निरंतर परिवर्तित रहता है।
l = 1/(√2 nπd²)
जहाँ n = संख्या घनत्व, d = अणु का व्यास। माध्य मुक्त पथ अणु की आमाप एवं संख्या घनत्व पर प्रतिलोमत: निर्भर करता है — यह अंतरापरमाणुक दूरी की तुलना में लगभग 100 गुना तथा अणु की आमाप की तुलना में लगभग 1000 गुना होता है। बिना किसी धारक पात्र के गैसों को सीमित नहीं किया जा सकता — इसका कारण यही बड़ा माध्य मुक्त पथ है।
- माध्य मुक्त पथ — l = 1/(√2 nπd²)
- n व d² पर प्रतिलोमत: निर्भर
- अंतरापरमाणुक दूरी का ~100 गुना; अणु आमाप का ~1000 गुना
- λ ∝ T/P (ताप बढ़ने पर ↑, दाब बढ़ने पर ↓)
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- अणुगति सिद्धांत यह मानता है कि गैसें अत्यंत सूक्ष्म, तीव्र गति से गतिमान परमाणुओं/अणुओं से बनी हैं।
- ठोसों-द्रवों में अंतरापरमाणुक बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; गैसों में इसे उपेक्षणीय माना जा सकता है।
- परमाणु का आमाप लगभग 1 Å (10−10 m) होता है।
- ठोस व द्रव में परमाणुओं के बीच दूरी ~2 Å; गैसों में यह दूरी दसों Å होती है।
- आवोगाद्रो संख्या NA = 6.02×1023 प्रति मोल — समान ताप-दाब पर समान आयतन की सभी गैसों में अणुओं की संख्या समान।
- आदर्श गैस समीकरण: PV = μRT = kBNT; R = 8.314 J mol−1K−1; kB = 1.38×10−23 J K−1।
- STP (0°C, 1 atm) पर किसी भी आदर्श गैस के 1 मोल का मोलर आयतन = 22.4 लीटर।
- वास्तविक गैसें आदर्श गैस समीकरण का पालन निम्न दाब व उच्च ताप पर सर्वाधिक करती हैं।
- बॉयल का नियम: नियत ताप पर PV=नियतांक; चार्ल्स का नियम: नियत दाब पर V∝T।
- डाल्टन के आंशिक दाबों का नियम: अक्रिय गैसों के मिश्रण का कुल दाब = सभी अवयवी गैसों के आंशिक दाबों का योग।
- अणुगति सिद्धांत में सभी संघट्ट प्रत्यास्थ (elastic) माने जाते हैं — कुल गतिज ऊर्जा व संवेग संरक्षित रहते हैं।
- किसी आदर्श गैस का दाब: P = (1/3) n m ⟨v²⟩।
- ताप की अणुगतिक व्याख्या: (1/2)m⟨v²⟩ = (3/2)kBT — अणु की औसत गतिज ऊर्जा केवल ताप पर निर्भर करती है, गैस की प्रकृति/दाब/आयतन पर नहीं।
- rms चाल: vrms = √(3kBT/m) — समान ताप पर हल्के अणुओं की rms चाल अधिक होती है।
- गैसों के मिश्रण में सभी गैसों के अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा समान होती है (चाहे द्रव्यमान भिन्न हों)।
- ऊर्जा समविभाजन नियम: तापीय साम्य में प्रत्येक स्वातंत्र्य कोटि के साथ ½kBT ऊर्जा जुड़ी होती है।
- प्रत्येक कंपन आवृत्ति ऊर्जा में 2 पद (गतिज+स्थितिज) जोड़ती है — योगदान = kBT (न कि ½kBT)।
- एकपरमाणुक गैस: Cv=(3/2)R, CP=(5/2)R, γ=5/3।
- द्विपरमाणुक गैस (दृढ़): Cv=(5/2)R, CP=(7/2)R, γ=7/5।
- बहुपरमाणुक गैस: Cv=(3+f)R, CP=(4+f)R, जहाँ f=कंपन स्वातंत्र्य कोटि की संख्या।
- CP−Cv=R सभी आदर्श गैसों के लिए सत्य है (एकपरमाणुक/द्विपरमाणुक/बहुपरमाणुक सभी के लिए)।
- ठोसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा C=3R (ड्यूलॉन्ग-पेटिट नियम); कार्बन एक अपवाद है।
- माध्य मुक्त पथ (l): वह औसत दूरी जो अणु बिना संघट्ट किए तय करता है; l = 1/(√2 nπd²)।
- माध्य मुक्त पथ, संख्या घनत्व (n) व अणु के व्यास (d) के वर्ग पर प्रतिलोमत: निर्भर करता है।
- माध्य मुक्त पथ अंतरापरमाणुक दूरी का लगभग 100 गुना तथा अणु आमाप का लगभग 1000 गुना होता है।
- अणुगति सिद्धांत श्यानता, ऊष्मा-चालकता, विसरण जैसे स्थूल मेय गुणों को आण्विक प्राचलों से जोड़ता है।
- किसी तरल (गैस सहित) का दाब केवल धारक की दीवारों पर नहीं, बल्कि तरल में हर जगह विद्यमान रहता है।
- <v²> सदैव (<v>)² के बराबर नहीं होता — किसी राशि के वर्ग का माध्य उसके माध्य के वर्ग के बराबर होना आवश्यक नहीं।
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12.1 ऑक्सीजन के अणुओं के आयतन और STP पर इनके द्वारा घेरे गए कुल आयतन का अनुपात ज्ञात कीजिए। (O₂ का व्यास = 3 Å)
अणु की त्रिज्या r = 1.5×10−10 m
एक अणु का आयतन = (4/3)πr³ = (4/3)×3.1416×(1.5×10−10)³ = 1.414×10−29 m³
1 मोल (6.02×1023) अणुओं का कुल आयतन = 6.02×1023 × 1.414×10−29 = 8.51×10−6 m³
STP पर कुल घेरा गया आयतन = 22.4 L = 0.0224 m³
अनुपात = 8.51×10−6/0.0224
12.2 मोलर आयतन, STP पर किसी गैस (आदर्श) के 1 मोल द्वारा घेरा गया आयतन है। (STP: 1 atm, 0°C)। दर्शाइये कि यह 22.4 लीटर है।
आदर्श गैस समीकरण: PV = μRT → V = μRT/P
μ = 1 mol, R = 8.31 J mol−1K−1, T = 273 K, P = 1 atm = 1.013×105 Pa
V = (1 × 8.31 × 273) / (1.013×105) = 2268.63 / 101300 = 0.0224 m³
12.3 ऑक्सीजन के 1.00×10⁻³ kg द्रव्यमान के लिए PV/T एवं P में, दो अलग-अलग तापों पर ग्राफ — (a) बिंदुकित रेखा क्या दर्शाती है? (b) T₁>T₂ या T₁<T₂? (c) y-अक्ष पर मिलन बिंदु पर PV/T का मान? (d) H₂ के लिए भी समान मान होगा?
(a) बिंदुकित रेखा आदर्श गैस व्यवहार को दर्शाती है — यह उस स्थिर मान (μR) को इंगित करती है जो PV/T दाब के किसी भी मान पर रखता, चाहे ताप कोई भी हो।
(b) निम्न दाब व उच्च ताप पर वास्तविक गैसें आदर्श व्यवहार के अधिक निकट होती हैं। जो वक्र आदर्श (बिंदुकित) रेखा के अधिक निकट व चपटा है वह उच्च ताप को इंगित करता है। अतः T₁ > T₂।
(c) y-अक्ष पर (P→0 की सीमा में), PV/T = μR। O₂ का मोलर द्रव्यमान = 32.0 g/mol
μ = (1.00×10−3 kg)/(32.0×10−3 kg/mol) = 0.03125 mol
PV/T = μR = 0.03125 × 8.31 = 0.2597 J K−1
(d) नहीं, H₂ का मोलर द्रव्यमान O₂ से भिन्न (कम) है, इसलिए समान द्रव्यमान में मोलों की संख्या भिन्न होगी। समान PV/T मान पाने के लिए H₂ की मात्रा भी उतने ही मोल (μ=0.03125 mol) की होनी चाहिए:
H₂ का आवश्यक द्रव्यमान = 0.03125 × 2.02×10−3 kg = 6.31×10−5 kg
12.4 30 लीटर आयतन के ऑक्सीजन सिलिंडर में आरंभिक दाब 15 atm, ताप 27°C। कुछ गैस निकालने पर गेज दाब 11 atm, ताप 17°C। निकाली गई ऑक्सीजन की मात्रा? (R=8.31 J mol⁻¹K⁻¹, O₂=32 u)
आरंभिक: P₁=15 atm=1.5195×106 Pa, V=0.030 m³, T₁=300K
n₁ = P₁V/(RT₁) = (1.5195×106×0.030)/(8.31×300) = 18.285 mol
अंतिम: P₂=11 atm=1.1143×106 Pa, T₂=290K
n₂ = P₂V/(RT₂) = (1.1143×106×0.030)/(8.31×290) = 13.876 mol
निकाले गए मोल: Δn = n₁−n₂ = 4.409 mol
निकाली गई ऑक्सीजन = Δn × 32 = 4.409 × 32 = 141.1 g
12.5 वायु का बुलबुला (1.0 cm³) 40 m गहरी झील की तली (12°C) से पृष्ठ (35°C) पर आता है। नया आयतन?
तली पर दाब: P₁ = Pa + ρgh = 1.013×105 + (1000×9.8×40) = 4.933×105 Pa
पृष्ठ पर दाब: P₂ = 1.013×105 Pa
T₁ = 285 K, T₂ = 308 K
संयुक्त गैस नियम: V₂ = V₁ × (P₁/P₂) × (T₂/T₁)
V₂ = 1.0 × (4.933×105/1.013×105) × (308/285) = 1.0 × 4.870 × 1.0807
12.6 25.0 m³ धारिता के कमरे में 27°C ताप व 1 atm दाब पर वायु के कुल अणुओं की संख्या ज्ञात कीजिए।
आदर्श गैस समीकरण: PV = NkBT → N = PV/(kBT)
N = (1.013×105 × 25.0) / (1.38×10−23 × 300)
N = 2.5325×106 / 4.14×10−21
12.7 हीलियम परमाणु की औसत तापीय ऊर्जा का आकलन कीजिए — (i) कमरे के ताप (27°C) पर (ii) सूर्य के पृष्ठीय ताप (6000K) पर (iii) 100 लाख केल्विन ताप पर।
हीलियम एकपरमाणुक गैस है, अतः E = (3/2)kBT
(i) T = 300 K: E = (3/2)×1.38×10−23×300 = 6.21×10−21 J
(ii) T = 6000 K: E = (3/2)×1.38×10−23×6000 = 1.242×10−19 J
(iii) T = 107 K: E = (3/2)×1.38×10−23×107 = 2.07×10−16 J
12.8 समान धारिता के तीन बर्तनों में एक ही ताप और दाब पर नियॉन (एकपरमाणुक), क्लोरीन (द्विपरमाणुक) और UF₆ (बहुपरमाणुक) गैसें भरी हैं। क्या अणुओं की संख्या समान है? क्या vrms समान है?
अणुओं की संख्या: हाँ, समान है। आवोगाद्रो के नियम के अनुसार समान ताप, दाब व आयतन पर सभी गैसों में अणुओं की संख्या समान होती है — यह गैस की प्रकृति पर निर्भर नहीं करती।
vrms: नहीं, समान नहीं है। vrms = √(3RT/M) — समान ताप पर भी अलग-अलग मोलर द्रव्यमान के कारण vrms भिन्न होगी — भारी अणु (UF₆) की vrms सबसे कम, हल्के अणु (नियॉन) की सबसे अधिक।
12.9 किस ताप पर आर्गन गैस में अणुओं की vrms, −20°C पर हीलियम गैस परमाणुओं की vrms के बराबर होगी? (Ar=39.9 u, He=4.0 u)
vrms ∝ √(T/M) — समान चाल के लिए: TAr/MAr = THe/MHe
THe = −20°C = 253 K
TAr = 253 × (39.9/4.0) = 253 × 9.975
12.10 2.0 atm दाब एवं 17°C ताप पर नाइट्रोजन अणुओं के माध्य मुक्त पथ एवं संघट्ट आवृत्ति का आकलन कीजिए। (N₂ की त्रिज्या ≈1.0 Å, आण्विक द्रव्यमान=28.0 u)
संख्या घनत्व: n = P/(kBT) = (2.0×1.013×105)/(1.38×10−23×290) = 5.06×1025 m−3
व्यास: d = 2×1.0Å = 2.0×10−10 m
माध्य मुक्त पथ: l = 1/(√2 nπd²)
πd² = 3.1416×(2.0×10−10)² = 1.257×10−19 m²
√2 n πd² = 1.414×5.06×1025×1.257×10−19 = 8.99×106
l = 1/8.99×106 = 1.11×10−7 m
औसत चाल: vrms = √(3RT/M) = √(3×8.31×290/0.028) ≈ 508.1 m/s
संघट्ट आवृत्ति: vrms/l = 508.1/1.11×10−7 ≈ 4.58×109 संघट्ट/s
दो संघट्टों के बीच समय (τ): l/vrms = 2.19×10−10 s
संघट्ट-काल: tc = d/vrms = 2.0×10−10/508.1 = 3.94×10−13 s
अनुपात: τ/tc = 2.19×10−10/3.94×10−13 ≈ 556
🧪 NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न
rms चाल, आंतरिक ऊर्जा, माध्य मुक्त पथ व घनत्व-दाब संबंधों पर आधारित 10 उच्च-स्तरीय प्रश्न
1 किसी गैस के अणुओं की rms चाल 300K पर 400 m/s है। 1200K पर नई rms चाल?
vrms ∝ √T (द्रव्यमान व गैस की प्रकृति अपरिवर्तित):
v₂ = v₁ × √(T₂/T₁) = 400 × √(1200/300) = 400 × 2 = 800 m/s
2 2 मोल एकपरमाणुक गैस + 3 मोल द्विपरमाणुक (दृढ़) गैस के मिश्रण का Cv ज्ञात कीजिए।
U = n₁(3/2)RT + n₂(5/2)RT = 2×1.5RT + 3×2.5RT = 3RT + 7.5RT = 10.5RT
कुल मोल n = 5; Cv,mix = U/(nT) = 10.5R/5 = 2.1R ≈ 17.45 J/mol K
3 27°C पर हाइड्रोजन गैस भरी है। किस ताप पर इसके अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा दोगुनी हो जाएगी?
E ∝ T (केवल ताप पर निर्भर)
T₁ = 300K, E₂=2E₁ ⟹ T₂ = 600K = 327°C
4 गैस का आयतन नियत रखते हुए ताप दोगुना करने पर rms चाल में परिवर्तन?
vrms ∝ √T (आयतन पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर नहीं)
ताप दोगुना → vrms = √2 गुना (≈1.414 गुना)
5 किसी गैस का दाब P तथा घनत्व ρ है। सिद्ध कीजिए कि vrms = √(3P/ρ)।
P = (1/3)nm⟨v²⟩, जहाँ nm = घनत्व ρ:
P = (1/3)ρ⟨v²⟩ ⇒ ⟨v²⟩ = 3P/ρ ⇒ vrms = √⟨v²⟩ = √(3P/ρ)
6 बंद बर्तन में गैस का दाब (नियत आयतन पर) तीन गुना करने पर अणुओं की औसत गतिज ऊर्जा?
नियत आयतन पर P ∝ T — दाब 3 गुना → ताप भी 3 गुना
E ∝ T ⇒ E भी 3 गुना हो जाएगी
7 समान ताप पर हीलियम (M=4) व नाइट्रोजन (M=28) की औसत गतिज ऊर्जा एवं rms चाल की तुलना कीजिए।
औसत गतिज ऊर्जा: E = (3/2)kBT — केवल ताप पर निर्भर, द्रव्यमान पर नहीं। समान ताप होने से:
EHe = EN₂ (दोनों समान)
rms चाल: vrms = √(3RT/M):
vHe/vN₂ = √(MN₂/MHe) = √(28/4) = √7 ≈ 2.65
हीलियम की rms चाल नाइट्रोजन की तुलना में लगभग 2.65 गुना अधिक होगी, जबकि औसत गतिज ऊर्जा बराबर।
8 किसी आदर्श गैस के लिए γ = 1.4 है। Cv व CP ज्ञात कीजिए और गैस का प्रकार बताइए।
CP − Cv = R; γ = 1.4 = 7/5
Cv = R/(γ−1) = R/0.4 = 2.5R = (5/2)R
CP = γCv = 1.4 × 2.5R = 3.5R = (7/2)R
चूँकि Cv=(5/2)R (f=5 स्वातंत्र्य कोटियाँ), अतः यह एक दृढ़ द्विपरमाणुक गैस है (जैसे N₂, O₂, H₂)।
9 2 atm दाब पर गैस भरी है। आधे अणु बिना ताप बदले बाहर निकाल दिए जाएँ तो नया दाब?
नियत ताप व आयतन पर P ∝ N (अणुओं की संख्या):
N नई = N/2 → P नया = P/2 = 2/2 = 1 atm
10 यदि गैस के अणु का व्यास दोगुना कर दिया जाए (संख्या घनत्व वही), तो माध्य मुक्त पथ में परिवर्तन?
l = 1/(√2 nπd²) — यह d² के व्युत्क्रमानुपाती है:
lनया/lपुराना = (dपुराना/dनया)² = (1/2)² = 1/4
माध्य मुक्त पथ घटकर मूल मान का 1/4 रह जाएगा।
🏆 NEET में पूछे गए प्रश्न (16 PYQs)
AIPMT/NEET परीक्षाओं में इस अध्याय से पूछे गए 16 वास्तविक प्रश्न, वर्ष-क्रमानुसार, पूर्ण हल सहित
1 किसी गैस का ताप −50°C है। rms चाल को मूल मान से 3 गुना अधिक बढ़ाने के लिए किस ताप तक गर्म करना होगा? NEET 2023
"3 गुना अधिक बढ़ाना" का अर्थ है नई चाल = मूल + 3×मूल = 4×मूल चाल
T₁ = 223 K; v₂ = 4v₁ → T₂ = 16 × 223 = 3568 K
2 200 cm³ आयतन के बर्तन में 0.2 मोल H₂ तथा 0.3 मोल Ar भरी है। 200K ताप पर दाब ज्ञात कीजिए। NEET 2023
कुल मोल n = 0.5; V = 2×10−4 m³
P = nRT/V = (0.5×8.3×200)/(2×10−4) = 830/0.0002
3 समान आयतन के दो बर्तनों A व B में समान ताप पर समान आदर्श गैस भरी है। A में दाब B का दोगुना है। A व B में अणुओं की संख्याओं की तुलना कीजिए। NEET 2018
नियत V, T पर N ∝ P
4 273K पर N₂ की rms चाल 490 m/s है। समान ताप पर H₂ की rms चाल? (N₂=28, H₂=2) NEET 2017
vrms ∝ 1/√M (समान ताप पर)
vH₂ = 490 × √(28/2) = 490 × √14 = 490 × 3.742
5 गैस मिश्रण में 2 मोल O₂ (द्विपरमाणुक) तथा 4 मोल Ar (एकपरमाणुक) ताप T पर हैं। निकाय की कुल आंतरिक ऊर्जा ज्ञात कीजिए। AIPMT 2015
O₂ (f=5): U₁ = 2×(5/2)RT = 5RT
Ar (f=3): U₂ = 4×(3/2)RT = 6RT
6 गैस के अणुओं (त्रिज्या r) का माध्य मुक्त पथ किसके व्युत्क्रमानुपाती होता है? AIPMT 2015
l = 1/(√2 nπd²), जहाँ d=2r → d²=4r²
7 विशिष्ट ऊष्माओं का अनुपात γ = CP/Cv, स्वातंत्र्य कोटियों की संख्या (n) के पदों में? NEET 2015
Cv = (n/2)R; CP = [(n+2)/2]R
8 दो पात्रों A व B में समान ताप पर आदर्श गैस A का घनत्व, गैस B के घनत्व का 1.5 गुना है, जबकि A का दाब B के दाब का दोगुना है। A व B के मोलर द्रव्यमान का अनुपात? AIPMT 2015
M = ρRT/P से: MA/MB = (ρA/ρB) × (PB/PA) = 1.5 × (1/2) = 0.75
9 2 मोल आदर्श द्विपरमाणुक गैस को नियत दाब पर 30°C से 35°C तक गर्म करने में 70 cal ऊष्मा। नियत आयतन पर समान ताप-परिसर के लिए ऊष्मा? (R=2 cal/mol K) AIPMT 2011 (Mains)
नियत दाब: QP = 2×7×5 = 70 cal ✓
नियत आयतन: QV = nCVΔT = 2×5×5
10 गैस के नमूने का आयतन V, दाब P, परम ताप T, प्रत्येक अणु का द्रव्यमान m। गैस का घनत्व? NEET 2016
P = nkBT (n = संख्या घनत्व), घनत्व ρ = nm
11 300K, 1.0×10⁵ N/m² पर rms चाल 200 m/s। 400K, 0.5×10⁵ N/m² पर rms चाल? NEET 2016 (Phase 2)
rms चाल केवल ताप पर निर्भर (दाब पर नहीं):
v₂ = 200 × √(400/300) = 200 × √(4/3)
12 1g गैस की 300K पर माध्य गतिज ऊर्जा E है। 600K पर 2g गैस की कुल माध्य गतिज ऊर्जा? AIPMT 2014
Etotal ∝ (द्रव्यमान) × T
E′ = E × 2 × 2 = 4E
13 एकपरमाणुक, द्विपरमाणुक तथा त्रिपरमाणुक (गैर-रैखिक) गैसों के Cv मान? NEET 2013
एकपरमाणुक (f=3): Cv = (3/2)R
द्विपरमाणुक (f=5): Cv = (5/2)R
त्रिपरमाणुक-अरैखिक (f=6): Cv = 3R
14 आदर्श गैस के लिए CP−Cv किसके बराबर तथा किस पर निर्भर नहीं? AIPMT 2012
CP − Cv = R (मेयर का संबंध)
यह सभी आदर्श गैसों के लिए सत्य — गैस की प्रकृति पर निर्भर नहीं।
15 नियत आयतन पर गैस का दाब आधा करने पर (अणुओं की संख्या भी आधी कर दी जाए ताकि ताप अपरिवर्तित रहे) rms चाल में परिवर्तन? NEET 2020
ताप अपरिवर्तित → vrms = √(3kBT/m) केवल ताप व अणु द्रव्यमान पर निर्भर (संख्या घनत्व/दाब पर नहीं)
16 किसी गैस का γ = 1.67 है। यह किस प्रकार की गैस है? AIPMT 2005
γ=1.67≈5/3, जो एकपरमाणुक गैस के लिए विशिष्ट
γ = (5/2 R) ÷ (3/2 R) = 5/3
✦ अन्य NEET संबंधित तथ्य
परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु
- यह अध्याय NEET में प्रतिवर्ष 1–3 प्रश्न रखता है; सर्वाधिक बार पूछे गए उप-विषय — वर्ग-माध्य-मूल चाल (vrms), दाब का अणुगतिक सूत्र, समविभाजन नियम व Cv/CP/γ की गणना, तथा माध्य मुक्त पथ हैं।
- यह अध्याय ऊष्मागतिकी की नींव है — आंतरिक ऊर्जा व विशिष्ट ऊष्मा जैसी अवधारणाएँ अगले अध्याय में गहराई से प्रयुक्त होती हैं, अतः समविभाजन नियम की ठोस समझ आवश्यक है।
- ब्राउनी गति (Brownian motion) — किसी द्रव में निलंबित सूक्ष्म कणों (जैसे परागकण) की निरंतर, अनियमित (यादृच्छिक) गति; यह द्रव के अणुओं द्वारा निलंबित कणों पर होने वाले असंतुलित असंख्य टक्करों का परिणाम है — यह अणुओं की सतत गति (आणविक गति परिकल्पना) का प्रत्यक्ष प्रायोगिक प्रमाण मानी जाती है, जिसे सर्वप्रथम राबर्ट ब्राउन (1827) ने देखा था।
- ब्राउनी गति ताप बढ़ने पर अधिक तीव्र हो जाती है (चूँकि माध्यम के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है) — यह तथ्य ताप व आणविक गति के मध्य सीधे संबंध की पुष्टि करता है तथा वैचारिक प्रश्नों में पूछा जा सकता है।
- वास्तविक गैसों हेतु वान डर वाल्स समीकरण — (P + a/V²)(V−b) = RT (एक मोल के लिए), जहाँ a अणुओं के मध्य आकर्षण बल के कारण दाब-संशोधन तथा b अणुओं के सीमित आयतन (excluded volume) के कारण आयतन-संशोधन को दर्शाता है — यह समीकरण आदर्श गैस समीकरण से आगे वास्तविक गैसों के व्यवहार की व्याख्या करता है।
- क्रांतिक ताप (critical temperature, Tc) — वह ताप जिसके ऊपर किसी गैस को चाहे कितना भी दाब क्यों न दिया जाए, वह द्रवित नहीं हो सकती; प्रत्येक गैस का एक विशिष्ट क्रांतिक ताप, क्रांतिक दाब व क्रांतिक आयतन होता है — यह अवधारणा गैसों के द्रवण से संबंधित वैचारिक प्रश्नों का आधार है।
- माध्य मुक्त पथ (mean free path, λ) का सूत्र — λ = 1/(√2 π d² n), जहाँ d = अणु का व्यास, n = एकांक आयतन में अणुओं की संख्या (संख्या घनत्व); √2 गुणांक इसलिए आता है क्योंकि सापेक्ष चाल को ध्यान में रखा जाता है (सभी अणु गतिमान हैं, केवल लक्ष्य अणु नहीं)।
- माध्य मुक्त पथ पर ताप व दाब का प्रभाव — λ ताप के साथ बढ़ता है (स्थिर दाब पर, चूँकि n घटता है) तथा दाब के साथ घटता है (स्थिर ताप पर, चूँकि n बढ़ता है); λ ∝ T/P — यह संबंध विसरण व श्यानता जैसी परिवहन-परिघटनाओं की व्याख्या में प्रयुक्त होता है।
- तीन प्रकार की आण्विक चालों का क्रम — वर्ग-माध्य-मूल चाल (vrms=√(3RT/M)) > औसत चाल (vavg=√(8RT/πM)) > अतिसंभाव्य चाल (vmp=√(2RT/M)); इनका अनुपात vrms:vavg:vmp = √3 : √(8/π) : √2 ≈ 1.73:1.60:1.41 — यह क्रम NEET में बार-बार पूछा जाता है (vrms सदैव सबसे अधिक, vmp सदैव सबसे कम)।
- सभी तीन प्रकार की चालें निरपेक्ष ताप T के वर्गमूल के समानुपाती (v∝√T) तथा अणु के मोलर द्रव्यमान M के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती (v∝1/√M) होती हैं — अतः समान ताप पर हल्के अणु भारी अणुओं से अधिक तीव्र गति करते हैं।
- अणुगति सिद्धांत की प्रमुख अभिधारणाएँ — गैस के अणु निरंतर, यादृच्छिक गति में रहते हैं; अणुओं के मध्य तथा दीवार से होने वाली टक्करें पूर्णतः प्रत्यास्थ होती हैं; टक्करों के बीच अणुओं पर कोई अंतराआण्विक बल कार्य नहीं करता (आदर्श गैस के लिए); अणुओं का आकार पात्र के आकार की तुलना में नगण्य माना जाता है।
- गैस के दाब का अणुगतिक सूत्र व निहितार्थ — P = (1/3)ρv²rms = (1/3)(M/V)v²rms, जिससे PV = (1/3)Mv²rms = (2/3)×(कुल स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा) भी सिद्ध होता है; इसे आदर्श गैस समीकरण से जोड़कर तापमान की अणुगतिक व्याख्या (T ∝ माध्य गतिज ऊर्जा) प्राप्त की जाती है।
- परमताप का अणुगतिक अर्थ — निरपेक्ष शून्य ताप (0 K) पर, सैद्धांतिक रूप से अणुओं की स्थानांतरीय गतिज ऊर्जा शून्य हो जाती है (अणु गति करना बंद कर देते हैं) — यह अणुगति सिद्धांत के अनुसार परमताप की भौतिक व्याख्या है।
- स्वातंत्र्य कोटि निर्धारित करने की युक्ति — किसी अणु के लिए स्वतंत्र निर्देशांकों की न्यूनतम संख्या जो उसकी स्थिति पूर्णतः निर्दिष्ट करने हेतु आवश्यक हो; एकपरमाण्विक अणु के लिए f=3 (केवल स्थानांतरीय), दृढ़ द्विपरमाण्विक अणु के लिए f=5 (3 स्थानांतरीय+2 घूर्णी), रैखिक बहुपरमाण्विक अणु के लिए भी घूर्णी स्वातंत्र्य कोटि 2 (जबकि अरैखिक के लिए 3) होती है।
- ग्राहम का विसरण नियम — किसी गैस के विसरण की दर उसके घनत्व (या मोलर द्रव्यमान) के वर्गमूल के व्युत्क्रमानुपाती होती है: r₁/r₂ = √(M₂/M₁); चूँकि विसरण दर vrms से सीधे संबंधित है (r∝vrms∝1/√M), अतः यह नियम अणुगति सिद्धांत से प्रत्यक्ष रूप से व्युत्पन्न होता है।
- गैसीय विसरण का एक प्रसिद्ध व्यावहारिक उदाहरण — हल्के अणु (जैसे H₂, He) भारी अणुओं (जैसे O₂, CO₂) की तुलना में अधिक तीव्रता से विसरित होते हैं, यही कारण है कि गुब्बारों में भरी हीलियम गैस समय के साथ रबर की झिल्ली से रिसकर धीरे-धीरे पिचक जाती है।