द्रव्य के तापीय गुण
ताप एवं ऊष्मा की मूल अवधारणाएँ, ताप मापन, आदर्श गैस समीकरण, तापीय प्रसार, विशिष्ट ऊष्मा धारिता, ऊष्मामिति, अवस्था परिवर्तन, ऊष्मा स्थानांतरण की तीन विधियाँ तथा न्यूटन का शीतलन नियम — सम्पूर्ण व्याख्या, एक-पंक्ति तथ्य, सभी अभ्यास प्रश्नों के हल एवं NEET PYQs सहित।
10.1 भूमिका
ताप एवं ऊष्मा की मूल अवधारणा
किसी वस्तु की तप्तता (उष्णता) की माप को हम सामान्य भाषा में ताप कहते हैं। जैसे किसी गर्म बर्तन का ताप अधिक तथा बर्फ के टुकड़े का ताप कम होता है। परंतु भौतिकी में ताप एवं ऊष्मा को अधिक सूक्ष्मता से परिभाषित करना आवश्यक है, क्योंकि केवल स्पर्श से प्राप्त ताप-बोध अविश्वसनीय तथा सीमित परिसर वाला होता है।
10.2 ताप तथा ऊष्मा
परिभाषाएँ एवं मूल अंतर
ताप: तप्तता अथवा शीतलता की आपेक्षिक माप या सूचक। जिस पिंड का ताप दूसरे पिंड की अपेक्षा अधिक होता है, वह अपेक्षाकृत अधिक तप्त कहलाता है।
जब किसी निकाय के विभिन्न भाग भिन्न-भिन्न तापों पर होते हैं, तब ऊष्मा की कुछ मात्रा उच्च ताप वाले भाग से निम्न ताप वाले भाग की ओर स्थानांतरित होती है — जब तक कि दोनों भाग समान ताप पर न आ जाएँ।
| राशि | SI मात्रक | प्रकृति |
|---|---|---|
| ऊष्मा (Q) | जूल (J) | ऊर्जा का स्थानांतरित रूप |
| ताप (T) | केल्विन (K) | तप्तता की माप |
जब किसी वस्तु को गर्म किया जाता है तो उसके ताप में वृद्धि, प्रसार अथवा अवस्था परिवर्तन — इनमें से कोई भी परिणाम संभव है।
- ऊष्मा — ऊर्जा का रूप, SI मात्रक जूल
- ताप — तप्तता की माप, SI मात्रक केल्विन
- ऊष्मा का स्थानांतरण सदैव ताप-अंतर के कारण होता है
10.3 ताप मापन
तापमापी, तापमापीय गुण एवं मापक्रम
तापमापी (थर्मामीटर): ताप मापन के लिए किसी ऐसे भौतिक गुण (तापमापीय गुण) का उपयोग किया जाता है जिसमें ताप के साथ पर्याप्त परिवर्तन होता है। सामान्यतः "ताप के साथ किसी द्रव के आयतन में परिवर्तन" का उपयोग होता है — जैसे काँच-में-द्रव तापमापी में पारा या ऐल्कोहॉल।
किसी मानक मापक्रम के लिए दो नियत संदर्भ बिंदुओं की आवश्यकता होती है — हिमांक तथा क्वथनांक (मानक दाब पर शुद्ध जल जमता व उबलता है)।
| मापक्रम | हिमांक | भाप-बिंदु | अंतराल |
|---|---|---|---|
| फारेनहाइट (°F) | 32°F | 212°F | 180 |
| सेल्सियस (°C) | 0°C | 100°C | 100 |
- तापमापीय गुण — ताप के साथ परिवर्तित होने वाला भौतिक गुण
- फारेनहाइट-सेल्सियस संबंध — (tF−32)/180 = tC/100
10.4 आदर्श गैस समीकरण तथा परम ताप
गैस तापमापी, आदर्श गैस नियम एवं परम शून्य
काँच-में-द्रव तापमापी अपने प्रसार गुणों में भिन्नता के कारण नियत बिंदुओं से अन्य तापों के भिन्न पाठ्यांक देते हैं। परंतु गैस तापमापी सदैव एक ही पाठ्यांक देते हैं, चाहे किसी भी गैस का उपयोग हो — क्योंकि कम घनत्व पर सभी गैसें समान प्रसार-आचरण दर्शाती हैं।
यहाँ μ = गैस के प्रतिदर्श में मोल की संख्या, R = सार्वत्रिक गैस नियतांक = 8.31 J mol−1 K−1।
नियत आयतन गैस तापमापी में गैस का उपयोग करते हुए, ताप को दाब के पदों में मापा जाता है (क्योंकि नियत आयतन पर P ∝ T)। निम्न ताप पर वास्तविक गैसों की मापों तथा आदर्श गैस नियम के प्राप्त मानों में अंतर पाया जाता है, परंतु विस्तृत ताप परिसर में यह संबंध रैखिक है — रेखा को बहिर्वेशित करने पर एक परम निम्निष्ठ ताप प्राप्त होता है, जिसका मान −273.15°C है, इसे परम शून्य कहते हैं।
केल्विन तथा सेल्सियस मापक्रमों में संबंध
केल्विन तथा सेल्सियस मापक्रमों के लिए मात्रक की आमाप (एकांक अंतराल) समान होती है, केवल मूल बिंदु में अंतर होता है। केल्विन (परम) ताप मापक्रम पर 0 K = −273.15°C।
- आदर्श गैस समीकरण — PV = μRT
- R = 8.31 J mol−1K−1
- परम शून्य = −273.15°C = 0 K
- T = tC + 273.15 (273.16 नहीं — 273.16 K त्रिक बिंदु है)
10.5 तापीय प्रसार
रैखिक, क्षेत्र एवं आयतन प्रसार
अधिकांश पदार्थ तप्त होने पर प्रसारित होते हैं तथा शीतलन पर सिकुड़ते हैं। तीन प्रकार के प्रसार होते हैं:
- रैखिक प्रसार (लंबाई में)
- क्षेत्र प्रसार (क्षेत्रफल में)
- आयतन प्रसार (आयतन में)
धातुओं में सामान्यतः अधिक प्रसार होता है (αl के मान अपेक्षाकृत अधिक)। जब किसी छड़ के दोनों सिरों को दृढ़ता से जड़कर तापीय प्रसार को रोका जाता है, तो छड़ में संपीडन विकृति उत्पन्न होकर उसके तदनुरूपी तापीय प्रतिबल उत्पन्न होता है:
जहाँ Y = यंग प्रत्यास्थता गुणांक
जल का असंगत व्यवहार
जल असंगत व्यवहार प्रदर्शित करता है — यह 0°C से 4°C के बीच गर्म किए जाने पर सिकुड़ता है (आयतन घटता है)। जल का घनत्व 4°C पर अधिकतम होता है। इसी कारण झीलें व तालाब शीर्ष से जमती हैं, तली से नहीं — जिससे जलीय जीवन बचा रहता है।
द्रवों के लिए आयतन प्रसार गुणांक ताप पर निर्भर नहीं करता, परंतु गैसों के लिए यह ताप पर निर्भर करता है — किसी आदर्श गैस के लिए नियत दाब पर αV = 1/T होता है।
- αV = 3αl; αA = 2αl
- तापीय प्रतिबल = Y αl ΔT
- जल का घनत्व 4°C पर अधिकतम
- जल 0°C–4°C के बीच गर्म करने पर सिकुड़ता है
- सिरे मुक्त हों तो तापीय प्रतिबल शून्य
10.6 विशिष्ट ऊष्मा धारिता
ऊष्मा धारिता, विशिष्ट ऊष्मा एवं मोलर विशिष्ट ऊष्मा
विभिन्न पदार्थों के समान द्रव्यमान को समान मात्रा में ऊष्मा प्रदान करने पर उनके ताप-परिवर्तन समान नहीं होते — इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि हर पदार्थ का ऊष्मा अवशोषित/बहिष्कृत करने का गुण अलग होता है।
| राशि | SI मात्रक |
|---|---|
| विशिष्ट ऊष्मा धारिता (s) | J kg−1 K−1 |
| मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता (C) | J mol−1 K−1 |
गैसों की विशिष्ट ऊष्मा धारिता के लिए अतिरिक्त प्रतिबंध चाहिए — नियत दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Cp) तथा नियत आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Cv) — दोनों भिन्न होते हैं। सदैव Cp > Cv।
जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (4186 J kg−1K−1) अन्य पदार्थों की तुलना में उच्चतम होती है — इसी कारण वाहनों के रेडिएटरों में शीतलक तथा तप्त जल थैलियों में तापक के रूप में जल का उपयोग होता है, तथा समुद्रतटीय क्षेत्रों में जलवायु सम रहती है।
- विशिष्ट ऊष्मा का SI मात्रक — J kg−1K−1
- मोलर विशिष्ट ऊष्मा का SI मात्रक — J mol−1K−1
- मेयर संबंध — Cp − Cv = R
- जल की विशिष्ट ऊष्मा — 4186 J kg−1K−1 (सर्वाधिक)
10.7 ऊष्मामिति
वियुक्त निकाय, ऊष्मामापी एवं मूल सिद्धांत
वियुक्त निकाय (Isolated system): जिस निकाय व उसके परिवेश के बीच कोई ऊष्मा विनिमय नहीं होता। जब वियुक्त निकाय के विभिन्न भाग भिन्न-भिन्न तापों पर हों, तो ऊष्मा उच्च ताप वाले भाग से निम्न ताप वाले भाग की ओर स्थानांतरित होती है।
("लुप्त ऊष्मा = ऊष्मा लब्धि" — ऊष्मामिति का मूल सिद्धांत)
ऊष्मामिति का अर्थ है ऊष्मा मापन। ऊष्मामापी (Calorimeter) धातु के बर्तन तथा उसी पदार्थ के विडोलक (stirrer) से बना होता है, जो ऊष्मारोधी आवरण (काँच तंतु से युक्त) के भीतर रखा जाता है ताकि ऊष्मा-हानि न्यूनतम हो।
- ऊष्मामिति का सिद्धांत — लुप्त ऊष्मा = ऊष्मा लब्धि
- ऊष्मामापी — धातु का बर्तन + विडोलक + ऊष्मारोधी आवरण
10.8 अवस्था परिवर्तन
गलन, वाष्पन, ऊर्ध्वपातन एवं गुप्त ऊष्मा
द्रव्य की तीन सामान्य अवस्थाएँ: ठोस, द्रव तथा गैस। एक अवस्था से दूसरी में संक्रमण को अवस्था परिवर्तन कहते हैं। ठोस से द्रव में परिवर्तन को गलन (पिघलना) तथा द्रव से ठोस में परिवर्तन को हिमीकरण कहते हैं।
ठोस से द्रव में अवस्था परिवर्तन की अवधि में पदार्थ की समस्त मात्रा के पिघलने तक ताप नियत रहता है (दोनों अवस्थाएँ तापीय साम्य में सहवर्ती रहती हैं)। वह ताप जिस पर ठोस व द्रव अवस्थाएँ परस्पर तापीय साम्य में होती हैं उसे गलनांक कहते हैं — यह पदार्थ का अभिलक्षण है तथा दाब पर भी निर्भर करता है। मानक वायुमंडलीय दाब पर गलनांक को प्रसामान्य गलनांक कहते हैं।
वाष्पन: द्रव से वाष्प (या गैस) में अवस्था परिवर्तन; समस्त द्रव के वाष्प में रूपांतरित होने तक ताप नियत रहता है। वह ताप जिस पर द्रव व वाष्प दोनों अवस्थाएँ तापीय साम्य में सहवर्ती होती हैं, उसे क्वथनांक कहते हैं। मानक वायुमंडलीय दाब पर क्वथनांक को प्रसामान्य क्वथनांक कहते हैं।
दाब में वृद्धि के साथ क्वथनांक भी बढ़ता है (इसीलिए पहाड़ी क्षेत्रों में — जहाँ वायुमंडलीय दाब कम है — जल का क्वथनांक घट जाता है और भोजन पकाना कठिन होता है; दाब कुकर में दाब बढ़ाकर क्वथनांक बढ़ाया जाता है जिससे पाकक्रिया तेज होती है)।
ऊर्ध्वपातन: ठोस अवस्था से, बिना द्रव अवस्था से गुजरे, सीधे वाष्प अवस्था में पहुँचना (जैसे शुष्क हिम/ठोस CO2, आयोडीन)।
10.8.1 गुप्त ऊष्मा (Latent Heat)
L को गुप्त ऊष्मा कहते हैं (SI मात्रक: J kg−1); यह पदार्थ का अभिलक्षण है व दाब पर भी निर्भर करता है। ठोस-द्रव परिवर्तन के लिए संगलन की गुप्त ऊष्मा (Lf), द्रव-गैस परिवर्तन के लिए वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Lv)।
| राशि (जल के लिए) | मान |
|---|---|
| संगलन की गुप्त ऊष्मा (Lf) | 3.33×105 J kg−1 |
| वाष्पन की गुप्त ऊष्मा (Lv) | 22.6×105 J kg−1 |
- गुप्त ऊष्मा — Q = mL; SI मात्रक J kg−1
- Lf(जल) = 3.33×105 J/kg
- Lv(जल) = 22.6×105 J/kg
- अवस्था परिवर्तन में ताप नियत रहता है
- दाब बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है
10.9 ऊष्मा स्थानांतरण
चालन, संवहन एवं विकिरण
ताप में अंतर के कारण एक निकाय से दूसरे निकाय में अथवा किसी निकाय के एक भाग से दूसरे भाग में ऊर्जा के स्थानांतरण को ऊष्मा कहते हैं। इसकी तीन स्पष्ट विधियाँ हैं: चालन, संवहन तथा विकिरण।
10.9.1 चालन (Conduction)
किसी वस्तु के दो संलग्न भागों के बीच उनके तापों में अंतर के कारण ऊष्मा स्थानांतरण की क्रियाविधि। गैसें हीन ऊष्मा चालक होती हैं तथा द्रवों की चालकता ठोसों व गैसों के बीच की होती है।
K = ऊष्मा चालकता (Thermal Conductivity), SI मात्रक: J s−1 m−1 K−1 (W m−1K−1)। धातुएँ अच्छी ऊष्मा चालक होती हैं; लकड़ी, काँच तंतु, वायु आदि ऊष्मारोधी (कम चालकता) होते हैं।
10.9.2 संवहन (Convection)
पदार्थ की वास्तविक गति द्वारा ऊष्मा स्थानांतरण — यह केवल तरलों में ही संभव है। प्राकृतिक संवहन में गुरुत्व महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है (गर्म तरल हल्का होकर ऊपर उठता है, ठंडा तरल नीचे आता है)। प्रणोदित संवहन में पदार्थ को पम्प जैसे साधन द्वारा गति करने हेतु विवश किया जाता है (जैसे मानव हृदय, वाहन इंजन शीतलन)। समुद्र समीर व स्थल समीर, तथा व्यापारिक पवनें प्राकृतिक संवहन के उदाहरण हैं।
10.9.3 विकिरण (Radiation)
चालन व संवहन को माध्यम की आवश्यकता होती है, परंतु विकिरण को किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती — विद्युत चुंबकीय तरंगों द्वारा ऊर्जा का स्थानांतरण निर्वात से भी हो सकता है (जैसे सूर्य से पृथ्वी तक)। सभी तप्त पिंड (ठोस, द्रव, गैस) विकिरण ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं।
10.9.4 कृष्णिका विकिरण (Black Body Radiation)
तरंगदैर्ध्य λm जिसके लिए विकिरित ऊर्जा सर्वाधिक है, ताप बढ़ने पर घटती है — इसी कारण गर्म लोहे का रंग पहले हल्का लाल, फिर रक्ताभ पीला, अंत में सफेद हो जाता है।
H = AeσT4 (उत्सर्जकता e वाली वस्तु के लिए)
σ = स्टेफॉन-बोल्ट्समान नियतांक = 5.67×10−8 W m−2K−4। आदर्श विकिरक के लिए e=1। किसी वस्तु द्वारा विकिरित ऊष्मा के क्षय (हानि) की नेट दर:
- चालन — H = KAΔT/L; K का मात्रक W m−1K−1
- विकिरण को माध्यम की आवश्यकता नहीं
- वीन नियम — λmT = 2.9×10−3 mK
- स्टेफॉन नियम — H = AσT4; σ = 5.67×10−8 W m−2K−4
10.10 न्यूटन का शीतलन नियम
शीतलन दर एवं तापांतर का संबंध
कथन: किसी पिंड के ऊष्मा क्षय की दर, पिंड तथा उसके परिवेश के तापों के अंतर ∆T = (T2−T1) के अनुक्रमानुपाती होती है। यह नियम केवल लघु तापांतर के लिए ही वैध है।
ग्राफ में समय t तथा loge(T2−T1) के बीच ऋणात्मक प्रवणता की एक सरल रेखा प्राप्त होती है। यह किसी विकिरक से कमरे में ऊष्मा स्थानांतरण या मेज पर रखी चाय के शीतलन में एक वैध सन्निकटन है।
- शीतलन दर ∝ तापांतर (केवल लघु तापांतर के लिए)
- −dQ/dt = k(T2−T1)
- समाकलित रूप — T2 = T1 + C′e−Kt
🎯 एक-पंक्ति तथ्य — त्वरित पुनरावृत्ति
Quick Revision Facts — सभी महत्वपूर्ण बिंदु एक स्थान पर
- ताप तप्तता/शीतलता की आपेक्षिक माप है; ऊष्मा ताप-अंतर के कारण स्थानांतरित होने वाली ऊर्जा है।
- ऊष्मा का SI मात्रक जूल (J); ताप का SI मात्रक केल्विन (K)।
- फारेनहाइट-सेल्सियस संबंध: (tF−32)/180 = tC/100।
- कम घनत्व पर सभी गैसें समान प्रसार-आचरण दर्शाती हैं — इसी कारण गैस तापमापी सर्वाधिक सुसंगत होते हैं।
- बॉयल का नियम: नियत ताप पर PV = नियतांक; चार्ल्स का नियम: नियत दाब पर V/T = नियतांक।
- आदर्श गैस समीकरण: PV = μRT; R (सार्वत्रिक गैस नियतांक) = 8.31 J mol−1K−1।
- परम शून्य ताप = −273.15°C = 0 K — वह ताप जिस पर प्रत्येक पदार्थ में न्यूनतम संभावित आणविक सक्रियता होती है।
- केल्विन व सेल्सियस मापक्रम संबंध: T = tC + 273.15 (न कि 273.16 — क्योंकि 273.16K त्रिक बिंदु है, 0°C हिमांक है)।
- जल के त्रिक बिंदु का ताप = 273.16 K (अद्वितीय दाब-ताप संयोजन होने से यह मानक नियत बिंदु है)।
- रैखिक प्रसार गुणांक: Δl/l = αlΔT; आयतन प्रसार गुणांक: ΔV/V = αVΔT; संबंध: αV = 3αl।
- क्षेत्र प्रसार गुणांक = 2αl (αA = 2αl)।
- जल असंगत व्यवहार दिखाता है — 0°C से 4°C के बीच गर्म करने पर सिकुड़ता है; जल का घनत्व 4°C पर अधिकतम होता है।
- छड़ के सिरे दृढ़ता से जकड़े होने पर तापीय प्रसार रुकने से तापीय प्रतिबल उत्पन्न होता है: ΔF/A = Y αl ΔT।
- यदि सिरे प्रसार हेतु मुक्त हों, तो कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होता, भले ही लंबाई बदल जाए।
- विशिष्ट ऊष्मा धारिता s = (1/m)(ΔQ/ΔT); इसका SI मात्रक J kg−1K−1।
- मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता C = (1/μ)(ΔQ/ΔT); मात्रक J mol−1K−1।
- गैसों की मोलर विशिष्ट ऊष्मा नियत दाब (Cp) व नियत आयतन (Cv) पर भिन्न होती है; सदैव Cp > Cv।
- एक-परमाणुक गैस की मोलर विशिष्ट ऊष्मा धारिता ≈ 2.92 cal/mol K (3/2 R); द्वि-परमाणुक गैसों की अधिक (~5 cal/mol K) क्योंकि उनमें घूर्णन ऊर्जा भी होती है।
- जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता (4186 J/kg K) सर्वाधिक होती है — इसीलिए वाहन रेडिएटर व तप्त जल थैलियों में उपयोगी है, और समुद्रतटीय जलवायु सम रहती है।
- ऊष्मामिति का सिद्धांत: उच्च ताप वाले भाग द्वारा लुप्त ऊष्मा = निम्न ताप वाले भाग द्वारा ऊष्मा लब्धि (वियुक्त निकाय में)।
- ठोस-द्रव व द्रव-गैस अवस्था परिवर्तन की अवधि में ताप नियत रहता है, भले ही ऊष्मा दी जाती रहे।
- गलनांक व क्वथनांक दाब पर निर्भर करते हैं — दाब बढ़ने पर क्वथनांक बढ़ता है (दाब कुकर) और दाब बढ़ने पर सामान्यतः गलनांक थोड़ा घटता है (हिम का पुनर्हिमायन)।
- ऊर्ध्वपातन में ठोस सीधे वाष्प में बदलता है (द्रव अवस्था के बिना) — जैसे शुष्क हिम (ठोस CO₂), आयोडीन।
- गुप्त ऊष्मा Q = mL; संगलन की गुप्त ऊष्मा Lf(जल) = 3.33×105 J/kg; वाष्पन की गुप्त ऊष्मा Lv(जल) = 22.6×105 J/kg।
- भाप (100°C) उबलते जल (100°C) से अधिक गंभीर जलन देती है क्योंकि भाप में वाष्पन की अतिरिक्त गुप्त ऊष्मा (22.6×105 J/kg) समाहित है।
- ऊष्मा स्थानांतरण की तीन विधियाँ: चालन (Conduction), संवहन (Convection), विकिरण (Radiation)।
- चालन में द्रव्य की गति नहीं होती, केवल आणविक संघट्टनों से ऊष्मा स्थानांतरित होती है। संवहन केवल तरलों में होता है (द्रव्य की वास्तविक गति द्वारा)।
- चालन समीकरण: H = KA(TC−TD)/L; K = ऊष्मा चालकता, मात्रक W m−1K−1।
- गैसें अल्प ऊष्मा चालक होती हैं; धातुएँ अच्छी चालक होती हैं; द्रव इनके बीच होते हैं।
- विकिरण को माध्यम की आवश्यकता नहीं होती — निर्वात (शून्य अंतरिक्ष) से होकर भी ऊष्मा स्थानांतरित हो सकती है (सूर्य से पृथ्वी तक)।
- वीन-विस्थापन नियम: λmT = नियतांक (2.9×10−3 m K) — ताप बढ़ने पर अधिकतम-ऊर्जा तरंगदैर्ध्य घटती है।
- स्टेफॉन-बोल्ट्समान नियम: H = AσT4 (पूर्ण उत्सर्जक); σ = 5.67×10−8 W m−2K−4।
- वास्तविक वस्तु के लिए H = AeσT4, जहाँ e = उत्सर्जकता (0≤e≤1); आदर्श कृष्णिका के लिए e=1।
- अच्छे अवशोषक अच्छे उत्सर्जक होते हैं (कृष्णिका सिद्धांत); अच्छे परावर्तक अल्प उत्सर्जक होते हैं।
- कृष्णिका विकिरण वक्र सार्वत्रिक होते हैं — केवल ताप पर निर्भर, पदार्थ/आकार पर नहीं।
- न्यूटन का शीतलन नियम: शीतलन दर, पिंड व परिवेश के तापांतर के अनुक्रमानुपाती — यह केवल लघु तापांतरों के लिए वैध है।
- न्यूटन शीतलन नियम समीकरण: −dQ/dt = k(T2−T1); समाकलित रूप T2 = T1+C′e−Kt।
- न्यूटन शीतलन सत्यापन ग्राफ: t बनाम loge(T2−T1) ऋणात्मक प्रवणता की सरल रेखा देता है।
➕ अन्य NEET संबंधित तथ्य
परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु
- द्विधात्विक पट्टी (Bimetallic Strip) — दो भिन्न धातुओं (भिन्न αl वाली) को जोड़कर बनाई गई पट्टी, गर्म करने पर मुड़ जाती है — अधिक α वाली धातु अधिक फैलती है, जिससे पट्टी कम-α वाली धातु की ओर मुड़ती है — यह सिद्धांत तापस्थायी (thermostat), विद्युत इस्त्री के तापमान-नियंत्रक में प्रयुक्त होता है।
- हरितगृह प्रभाव (Greenhouse Effect) — काँच अथवा वायुमंडलीय CO₂/जलवाष्प, सूर्य के लघु-तरंगदैर्घ्य दृश्य प्रकाश को भीतर आने देते हैं; परंतु पृथ्वी द्वारा पुनः-उत्सर्जित दीर्घ-तरंगदैर्घ्य अवरक्त विकिरण को बाहर जाने से रोक देते हैं — इसी असंतुलन से ताप बढ़ता है — यही वैश्विक तापन (global warming) का आधार है।
- थर्मस/ड्यूवर फ्लास्क — दोहरी दीवारों के मध्य निर्वात चालन व संवहन दोनों रोकता है; चाँदी की परत विकिरण परावर्तित करती है; कुचालक ढक्कन ऊपरी ऊष्मा-क्षय रोकता है — तीनों विधियों को एक साथ न्यूनतम करने का उत्कृष्ट उदाहरण।
- मेयर का संबंध — Cp − Cv = R — स्थिर दाब पर दी गई ऊष्मा का एक भाग गैस के प्रसार-कार्य (PΔV) में व्यय होता है, इसीलिए Cp, Cv से सदैव R जितना अधिक होता है।
- वास्तविक गैस बनाम आदर्श गैस — आदर्श गैस समीकरण उच्च ताप व निम्न दाब पर उत्तम सन्निकटन देता है; निम्न ताप व उच्च दाब पर वास्तविक गैसें विचलित हो जाती हैं।
- परम शून्य — एक सैद्धांतिक सीमा — ऊष्मागतिकी के तृतीय नियम के अनुसार, 0 K कभी पूर्णतः प्राप्त नहीं किया जा सकता — "परम शून्य प्रयोगशाला में प्राप्त किया जा चुका है" जैसा कथन सदैव गलत माना जाता है।
- बर्फ की विशिष्ट ऊष्मा धारिता जल से लगभग आधी — बर्फ (≈2100 J/kg K) बनाम जल (4186 J/kg K) — बर्फ-जल मिश्रण के संख्यात्मक प्रश्नों में आवश्यक आँकड़ा।
- प्रीवोस्ट का ऊष्मा-विनिमय सिद्धांत — प्रत्येक पिंड, चाहे उसका ताप कितना भी हो, निरंतर विकिरण उत्सर्जित व अवशोषित करता रहता है — "ठंडी वस्तुएँ विकिरण उत्सर्जित नहीं करतीं" जैसी सोच सदैव गलत है।
- जल के असंगत प्रसार का पारिस्थितिक महत्व — 4°C पर जल का घनत्व अधिकतम होने से, तालाबों में सबसे ठंडा (0°C) जल सतह पर बर्फ बनाता है, तली में 4°C जल रहता है — बर्फ की परत इन्सुलेटर का कार्य करती है, जिससे जलीय जीव सर्दियों में जीवित रहते हैं।
- विकिरण की तीव्रता व दूरी का व्युत्क्रम-वर्ग संबंध — I ∝ 1/d² — सूर्य से दूर जाने पर सौर विकिरण की तीव्रता तेज़ी से घटती है।
- गुप्त ऊष्मा "गुप्त (latent)" क्यों कहलाती है — अवस्था-परिवर्तन के दौरान दी गई ऊष्मा ताप में वृद्धि नहीं करती (थर्मामीटर पर "छिपी" रहती है), बल्कि अणुओं के आबंध तोड़ने में व्यय होती है — लैटिन "latere" (छिपा होना) से व्युत्पन्न।
- त्रिक बिंदु (Triple Point) — P-T आरेख पर वह अद्वितीय बिंदु जिस पर ठोस, द्रव व गैस — तीनों अवस्थाएँ साम्यावस्था में सह-अस्तित्व में रहती हैं — जल के लिए 273.16 K, 611.657 Pa।
- चालकता (K) बनाम प्रतिरोधकता (1/K) — ऊष्मा चालकता K जितनी अधिक, पदार्थ उतना ही अच्छा ऊष्मा-चालक (चाँदी, ताँबा); कुचालक (ऊन, वायु, थर्माकोल) में K कम — भवन-निर्माण में दीवारों के मध्य वायु-अंतराल इसी सिद्धांत पर आधारित।
- ऊनी वस्त्र व पशुओं के रोएं — रेशों के बीच वायु फंसी रहती है — वायु कुचालक होने से शरीर की ऊष्मा बाहर जाने से रोकती है — कई पतली परतें एक मोटी परत से अधिक प्रभावी।
- ऊष्मीय प्रतिबल — दोनों सिरे जकड़े होने पर — गर्म करने पर संपीडक प्रतिबल, ठंडा करने पर तनाव प्रतिबल — रेलवे पटरियों के मध्य ग्रीष्म ऋतु में अंतराल तथा पुलों में प्रसार-संधियों का आधार।
- अंतिम रिवीज़न में इन तीन बिंदुओं को प्राथमिकता दें — (1) तीनों ऊष्मा स्थानांतरण विधियों के सूत्र व अनुप्रयोग, (2) कैलोरीमिति व अवस्था-परिवर्तन के सभी सूत्र, (3) स्टेफॉन-बोल्ट्समान व वीन-विस्थापन नियम — इन्हीं तीन विषयों से अधिकांश प्रश्न बनते हैं।
✍️ अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत हल (10.1 – 10.20)
NCERT अभ्यास — प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं हल देखें
10.1 निऑन तथा CO₂ के त्रिक बिंदु क्रमशः 24.57 K तथा 216.55 K हैं। इन तापों को सेल्सियस तथा फारेनहाइट मापक्रमों में व्यक्त कीजिए।
हल: सेल्सियस: tC = T − 273.15
निऑन: tC = 24.57 − 273.15 = −248.58°C
CO₂: tC = 216.55 − 273.15 = −56.60°C
फारेनहाइट: tF = (9/5)tC + 32
निऑन: tF = (9/5)(−248.58) + 32 = −447.44 + 32 = −415.44°F
CO₂: tF = (9/5)(−56.60) + 32 = −101.88 + 32 = −69.88°F
10.2 दो परम ताप मापक्रमों A तथा B पर जल के त्रिक बिंदु को 200A तथा 350B द्वारा परिभाषित किया गया है। TA तथा TB में क्या संबंध है?
हल: A व B दोनों परम (absolute) मापक्रम हैं (समान परम शून्य बिंदु), अतः किसी भी ताप T (केल्विन) का मान त्रिक बिंदु के अनुपात में होगा:
TA = (200/273.16) × T; TB = (350/273.16) × T
भाग देने पर: TA/TB = 200/350 = 4/7
10.3 किसी तापमापी का विद्युत प्रतिरोध ताप के साथ R = R₀[1+α(T−T₀)] के अनुसार परिवर्तित होता है। जल त्रिक बिंदु (273.16K) पर प्रतिरोध 101.6Ω तथा लैड के संगलन बिंदु (600.5K) पर 165.5Ω है। वह ताप ज्ञात कीजिए जिस पर प्रतिरोध 123.4Ω है।
हल: R₀=101.6Ω (T₀=273.16K), R(600.5K)=165.5Ω
α ज्ञात करें: 165.5 = 101.6[1+α(600.5−273.16)]
165.5/101.6 = 1.6289 = 1 + 327.34α
α = 0.6289/327.34 = 1.9216×10−3 K−1
अब R=123.4Ω: 123.4 = 101.6[1+α(T−273.16)]
1.21457 = 1 + 1.9216×10−3(T−273.16)
0.21457 = 1.9216×10−3(T−273.16)
T−273.16 = 111.66 → T = 384.82 K
10.4 (a) आधुनिक तापमिति में जल का त्रिक बिंदु मानक नियत बिंदु क्यों है? (b) परम ताप मापक्रम पर दूसरा नियत बिंदु क्या है? (c) tC=T−273.15 में 273.15 क्यों, 273.16 क्यों नहीं? (d) फारेनहाइट के समान एकांक अंतराल वाले परम मापक्रम पर जल के त्रिक बिंदु का ताप?
(a) जल का त्रिक बिंदु ताप व दाब के अद्वितीय संयोजन पर होता है, जबकि हिमांक व क्वथनांक दोनों दाब पर निर्भर करते हैं — वायुमंडलीय दाब के उतार-चढ़ाव से परिवर्तनशील।
(b) दूसरा नियत बिंदु परम शून्य (0 K) है।
(c) क्योंकि 0°C (हिमांक) को 273.15 K के बराबर लिया गया है, जबकि त्रिक बिंदु (0.01°C) 273.16 K है।
(d) रैंकाइन मापक्रम: त्रिक बिंदु = 273.16 × (9/5) = 491.69 °R
10.5 दो आदर्श गैस तापमापियों A तथा B में क्रमशः ऑक्सीजन तथा हाइड्रोजन प्रयोग की गई है। (a) सल्फर के गलनांक का परमताप, (b) दो पाठ्यांकों में अंतर का कारण बताइए।
(a) T = 273.16 × (P/Pत्रिक)
तापमापी A: TA = 273.16 × (1.797×105/1.250×105) = 273.16 × 1.4376 = 392.69 K
तापमापी B: TB = 273.16 × (0.287×105/0.200×105) = 273.16 × 1.435 = 391.98 K
(b) अंतर इसलिए क्योंकि निम्न दाब पर भी वास्तविक गैसें आदर्श व्यवहार से थोड़ा विचलित होती हैं, तथा ऑक्सीजन व हाइड्रोजन का विचलन भिन्न है। विसंगति कम करने के लिए प्रयोग को निम्नतर दाबों पर दोहराकर शून्य दाब तक बहिर्वेशित करना चाहिए।
10.6 1m स्टील फीते का अंशांकन 27.0°C पर। 45°C पर स्टील छड़ की लंबाई 63.0 cm मापी गई। छड़ की वास्तविक लंबाई तथा 27.0°C पर लंबाई ज्ञात कीजिए।
हल: फीता व छड़ दोनों स्टील के हैं — 45°C पर दोनों समान दर से फैलते हैं, अतः फीते की माप स्वतः सही रहती है।
∴ 45°C पर छड़ की वास्तविक लंबाई = 63.0 cm
27°C पर: L(27°C) = 63.0 / [1 + 1.20×10−5×18] = 63.0/1.000216 ≈ 62.986 cm
10.7 27°C पर धुरी का व्यास 8.70 cm, पहिये के छिद्र का व्यास 8.69 cm। सूखी बर्फ द्वारा धुरी को ठंडा किया गया। धुरी के किस ताप पर पहिया चढ़ेगा?
हल: पहिया तभी चढ़ेगा जब धुरी सिकुड़कर 8.69 cm हो जाए।
8.69 = 8.70[1 + 1.20×10−5(T−27)]
0.99885 = 1 + 1.20×10−5(T−27)
−0.001149 = 1.20×10−5(T−27)
T−27 = −95.79 → T = −68.79°C
10.8 ताँबे की चादर में 27.0°C पर छिद्र का व्यास 4.24 cm है। 227°C तक तप्त करने पर छिद्र के व्यास में परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल: छिद्र भी उसी पदार्थ की भाँति प्रसारित होता है:
Δd = 4.24 × 1.70×10−5 × 200 = 4.24 × 3.4×10−3 = 0.01442 cm
10.9 27°C पर 1.8 m पीतल के तार को −39°C तक शीतित करने पर तनाव ज्ञात कीजिए। (व्यास 2.0 mm; α=2.0×10⁻⁵ K⁻¹; Y=0.91×10¹¹ Pa)
हल: ΔT = 27−(−39) = 66°C
विकृति = αΔT = 2.0×10−5 × 66 = 1.32×10−3
प्रतिबल = Y × विकृति = 0.91×1011 × 1.32×10−3 = 1.2012×108 Pa
A = π(1.0×10−3)² = 3.1416×10−6 m²
F = 1.2012×108 × 3.1416×10−6 ≈ 377 N
10.10 50 cm पीतल की छड़ + 50 cm स्टील की छड़ संयुक्त। 40°C पर मूल लंबाइयाँ, 250°C पर लंबाई परिवर्तन? संधि पर तापीय प्रतिबल?
हल: ΔT = 210°C
Δlकुल = 50×210×(2.0×10−5 + 1.2×10−5) = 50×210×3.2×10−5 = 0.336 cm
सिरे मुक्त हैं — कोई तापीय प्रतिबल उत्पन्न नहीं होगा।
10.11 ग्लिसरीन का आयतन प्रसार गुणांक 49×10⁻⁵ K⁻¹ है। 30°C वृद्धि पर घनत्व में आंशिक परिवर्तन?
हल: Δρ/ρ ≈ −αVΔT = −49×10−5 × 30 = −0.0147
10.12 8.0 kg ऐलुमिनियम ब्लॉक में छिद्र हेतु 10 kW बरमी 2.5 मिनट। 50% शक्ति ऊष्मा में। ताप वृद्धि? (s=0.91 J g⁻¹K⁻¹)
हल: कुल ऊर्जा = 10000 × 150 = 1.5×106 J
ब्लॉक को प्राप्त = 7.5×105 J
ΔT = 7.5×105/(8000 × 0.91) = 7.5×105/7280
10.13 2.5 kg ताँबा (500°C) हिम-ब्लॉक पर। गलित हिम की अधिकतम मात्रा? (sCu=0.39 J g⁻¹K⁻¹; Lf=335 J g⁻¹)
हल: Q = 2500 × 0.39 × 500 = 487500 J
गलित हिम = 487500/335 = 1455.2 g
10.14 0.20 kg धातु (150°C) को ताँबे के ऊष्मामापी (जल तुल्यांक 0.025 kg) में 27°C के 150 cm³ जल में गिराया। अंतिम ताप 40°C। धातु की विशिष्ट ऊष्मा ज्ञात कीजिए।
हल: 0.20 × s × 110 = (0.150+0.025) × 4186 × 13
22 s = 0.175 × 4186 × 13 = 9523.15
s = 9523.15/22 = 432.87 J kg−1K−1
क्षय ऊष्मा पर: यदि परिवेश में क्षय को न मानें, तो वास्तविक मान इससे अधिक होगा।
10.15 गैसों के Cv मान (H₂:4.87, N₂:4.97, O₂:5.02, NO:4.99, CO:5.01, Cl₂:6.17 cal/mol K) एक-परमाणुक (2.92) से भिन्न क्यों? Cl₂ का अधिक मान क्या दर्शाता है?
हल: एक-परमाणुक गैसों में केवल स्थानांतरीय स्वतंत्रता कोटियाँ (3) होती हैं → Cv=(3/2)R≈2.92। द्वि-परमाणुक गैसों में घूर्णी स्वतंत्रता कोटियाँ (2 अतिरिक्त) भी होती हैं → Cv≈(5/2)R≈4.97।
Cl₂ का अधिक मान: Cl₂ भारी व बड़ी अंतर-परमाणुक दूरी वाला अणु है — कंपन आवृत्ति कम होने से कक्ष ताप पर ही कुछ कंपनीय स्वतंत्रता कोटि सक्रिय हो जाती है, जिससे Cv अन्य द्वि-परमाणुक गैसों से अधिक हो जाता है।
10.16 101°F ज्वर से पीड़ित 30 kg बच्चे को एन्टीपायरिन। 20 मिनट में ज्वर 98°F। दवा द्वारा अतिरिक्त वाष्पन की औसत दर? (sशरीर≈sजल; Lवाष्पन=580 cal/g)
हल: ΔTF = 3°F → ΔTC = 5/3 ≈ 1.667°C
Q = 30000 × 1 × 5/3 = 50000 cal
वाष्पित जल = 50000/580 = 86.2 g
दर = 86.2/20 = 4.31 g/min
10.17 थर्मोकोल हिम बॉक्स (30 cm भुजा, 5 cm मोटाई) में 4.0 kg हिम। 6 h पश्चात् बचा हिम? (K=0.01 J s⁻¹m⁻¹K⁻¹; बाहरी ताप 45°C; Lf=335×10³ J/kg)
हल: A = 6×(0.30)² = 0.54 m²; L=0.05 m; ΔT=45°C
H = 0.01×0.54×45/0.05 = 4.86 W
Q = 4.86×6×3600 = 104976 J
गलित हिम = 104976/335000 = 0.3134 kg
शेष = 4.0−0.3134 = 3.6866 kg
10.18 पीतल बॉयलर (A=0.15 m², मोटाई 1.0 cm) में 6.0 kg/min जल उबलता है। ज्वाला-सतह का ताप? (K=109 J s⁻¹m⁻¹K⁻¹; Lv=2256×10³ J/kg)
हल: जल उबलने की दर = 0.1 kg/s
H = 0.1 × 2256×103 = 2.256×105 W
ΔT = HL/(KA) = 2.256×105×0.01/(109×0.15) = 2256/16.35 = 138°C
ज्वाला-सतह का ताप = 100+138 = 238°C
10.19 स्पष्ट कीजिए: (a) अधिक परावर्तकता वाले पिंड अल्प उत्सर्जक। (b) ठंडे दिन पीतल का गिलास अधिक शीतल क्यों? (c) प्रकाशिक उत्तापमापी खुले में कम मापता है। (d) बिना वायुमंडल पृथ्वी अशरणीय शीतल। (e) भाप-आधारित तापन अधिक दक्ष।
(a) किरचॉफ नियम — उत्सर्जकता = अवशोषकता। अधिक परावर्तक वस्तुएँ कम अवशोषित करती हैं → अल्प उत्सर्जक।
(b) पीतल की ऊष्मा चालकता अधिक — हाथ से ऊष्मा तेजी से खींचता है → अधिक शीतल प्रतीत।
(c) खुले में लोहे की उत्सर्जकता कृष्णिका से कम — यंत्र कम ताप दर्शाता है; भट्टी (गुहिका) लगभग कृष्णिका जैसी → सही माप।
(d) वायुमंडल अवरक्त विकिरण रोककर ऊष्मा बनाए रखता है — बिना इसके रात्रि में सब ऊष्मा अंतरिक्ष में लुप्त हो जाएगी।
(e) भाप में वाष्पन की विशाल गुप्त ऊष्मा (2256×10³ J/kg) संचित — संघनन पर यह मुक्त होती है → अधिक ऊष्मा प्रदान।
10.20 पिंड का ताप 5 मिनट में 80°C से 50°C। परिवेश 20°C। कितने समय में ताप 60°C से 30°C होगा?
हल: औसत-दर विधि: (T₁−T₂)/t = K × (औसत − परिवेश)
प्रथम अंतराल: (80−50)/5 = K×(65−20) → 6 = 45K → K = 6/45 = 0.1333
द्वितीय अंतराल: (60−30)/t = 0.1333×(45−20) = 0.1333×25 = 3.333
t = 30/3.333 = 9 मिनट
🌡️ NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त प्रश्न
NCERT अभ्यास से आगे — तापीय प्रसार, ऊष्मामिति, विकिरण व चालन पर आधारित 10 उच्च-स्तरीय प्रश्न
1 20°C पर 1m स्टील छड़ को 120°C तक गर्म। लंबाई वृद्धि? (α=12×10⁻⁶/°C)
Δl = 1 × 12×10−6 × 100 = 1.2×10−3 m = 1.2 mm
2 500 g तांबा (25°C) को 90 g बर्फ (0°C) में डाला। क्या सारी बर्फ पिघलेगी? (sCu=0.09 cal/g°C; Lf=80 cal/g)
तांबे से उपलब्ध ऊष्मा = 500×0.09×25 = 1125 cal
90 g बर्फ पिघलाने हेतु आवश्यक = 90×80 = 7200 cal
1125 < 7200 → सारी बर्फ नहीं पिघलेगी; पिघलेगी = 1125/80 = 14.06 g; अंतिम ताप 0°C
3 धातु प्लेट में 20°C पर छिद्र व्यास 5 cm। 220°C पर व्यास परिवर्तन? (α=1.7×10⁻⁵/°C)
Δd = 5 × 1.7×10−5 × 200 = 0.017 cm (छिद्र बड़ा होगा)
4 100 g पानी (25°C) + 10 g बर्फ (0°C)। अंतिम ताप? (sजल=1; Lf=80 cal/g)
10×80 + 10θ = 100×(25−θ)
800+10θ = 2500−100θ → 110θ = 1700 → θ = 15.45°C
5 गोले की त्रिज्या दोगुनी, ताप आधा। विकिरण-दर? (H=AσT⁴)
H'/H = (2)² × (1/2)⁴ = 4 × 1/16 = 1/4
6 छड़ के सिरे जकड़े। Y=2×10¹¹ N/m², α=1.1×10⁻⁵/°C, A=2 cm², ΔT=50°C। तापीय प्रतिबल बल?
F = YαΔT×A = 2×1011×1.1×10−5×50×2×10−4 = 2.2×10⁴ N
7 दीवार (A=10 m², मोटाई 20 cm, K=0.5 W/mK), अंदर 25°C, बाहर 5°C। ऊष्मा-हानि दर?
H = 0.5×10×20/0.20 = 500 W
8 80°C पिंड 5 मिनट में 60°C। परिवेश 20°C। K ज्ञात करें (औसत-दर विधि)।
(80−60)/5 = K×(70−20) → 4 = 50K → K = 0.08 min−1
9 समान आयतन के घन व गोला (समान पदार्थ, समान ताप)। किसका पृष्ठीय क्षेत्रफल अधिक? ऊष्मा-हानि पर प्रभाव?
समान आयतन के लिए गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल न्यूनतम होता है — घन का अधिक।
H = AσT⁴ से, घन की ऊष्मा-हानि दर अधिक होगी।
10 2 kg पानी (20°C) को उबालकर पूरी तरह भाप बनाने हेतु कुल ऊष्मा? (s=4186; Lv=22.6×10⁵)
Q₁ = 2×4186×80 = 669760 J
Q₂ = 2×22.6×105 = 4520000 J
Qकुल = 5189760 J ≈ 5.19×10⁶ J
🏆 NEET में पूछे गए प्रश्न (28 PYQs)
AIPMT/NEET में इस अध्याय से पूछे गए 28 प्रश्न, वर्ष-क्रमानुसार, पूर्ण हल सहित
1 Y=0.5×10¹¹ N/m², α=10⁻⁵/°C, 1m लंबाई, A=10⁻³ m² छड़ को 0°C से 100°C बिना प्रसार गर्म। संपीडक बल? NEET 2024
F = YαΔT×A = 0.5×1011×10−5×100×10−3 = 5×10⁴ N
2 ऊष्मा चालकता का मात्रक? NEET 2019
H = KAΔT/L → K = HL/(AΔT) → मात्रक = W m−1 K−1
3 88 cm तांबा छड़ + अज्ञात एल्युमिनियम छड़ — लंबाई अंतर नियत। Al छड़ की लंबाई? (αCu=1.7×10⁻⁵; αAl=2.2×10⁻⁵) NEET 2019
lCuαCu = lAlαAl
lAl = 88 × (1.7/2.2) = 68 cm
4 कृष्णिका P शक्ति λ₀ पर। ताप बदलकर (3/4)λ₀ पर अधिकतम। नई शक्ति nP। n? NEET 2018
λ₀T₁ = (3/4)λ₀T₂ → T₂/T₁ = 4/3
n = (4/3)⁴ = 256/81 ≈ 3.16
5 दो छड़ें (K₁,K₂) श्रेणीक्रम में जुड़ी। तुल्य चालकता? NEET 2017
Keq = 2K₁K₂/(K₁+K₂)
6 12 cm त्रिज्या कृष्णिका 500K पर 450 W। त्रिज्या आधी, ताप दोगुना। नई शक्ति? NEET 2017
H₂/H₁ = (1/2)² × (2)⁴ = 1/4 × 16 = 4
H₂ = 450×4 = 1800 W
7 पिंड 10 मिनट में 3T→2T (कमरा T)। अगले 10 मिनट में ताप? NEET 2016 Phase 2
(3T−2T)/10 = K(2.5T−T) → K = 1/15
(2T−x)/10 = (1/15)((2T+x)/2−T) = x/30
3(2T−x) = x → 6T = 4x → x = 1.5T
8 दो समरूप पिंड (ऊष्मा धारिता ताप के साथ बढ़ती है) — 100°C व 0°C। अंतिम ताप? NEET 2016 Phase 2
गर्म पिंड में प्रति डिग्री अधिक ऊष्मा; ठंडे में कम → संतुलन के लिए ठंडे को अधिक डिग्री चढ़ना होगा।
अंतिम ताप 50°C से अधिक होगा।
9 दो छड़ें (l₁,α₁) व (l₂,α₂) — अंतर नियत। संबंध? NEET 2016 Phase 1
l₁α₁ = l₂α₂
10 ग्लिसरीन αV=5×10⁻⁴ K⁻¹। 40°C पर घनत्व में आंशिक परिवर्तन? AIPMT 2015
Δρ/ρ = −5×10−4×40 = −0.02 (2% कमी)
11 छड़ के सिरे 100°C-110°C पर 4 J/s। 200°C-210°C पर दर? AIPMT 2015 (Cancelled)
ΔT समान (10°C) → H = 4.0 J/s (अपरिवर्तित)
12 100°C भाप 10°C के 20 g जल में। 80°C पर कुल जल? (L=540; s=1) AIPMT 2014
m×540 + m×20 = 20×70 → 560m = 1400 → m = 2.5 g
कुल = 20+2.5 = 22.5 g
13 जल 5 मिनट में 70°C→60°C, अगले 5 मिनट में 60°C→54°C। परिवेश ताप? AIPMT 2014
2 = K(65−θ₀); 1.2 = K(57−θ₀)
2/1.2 = (65−θ₀)/(57−θ₀) → 1.667(57−θ₀) = 65−θ₀
95−1.667θ₀ = 65−θ₀ → 30 = 0.667θ₀ → θ₀ = 45°C
14 समान लंबाई की दो छड़ें — छड़ 1 की चालन-दर 4 गुनी। K₁A₁ व K₂A₂ संबंध? NEET 2013 (Karnataka)
H ∝ KA → H₁=4H₂ → K₁A₁ = 4K₂A₂
15 20°C पर जल घनत्व 998 kg/m³, 40°C पर 992 kg/m³। αV? NEET 2013 (Karnataka)
−6/998 = −20αV → αV = 6/(998×20) ≈ 3.0×10−4 K−1
16 लोहे का टुकड़ा गर्म करने पर मंद-लाल → पीला → श्वेत। कौन-सा नियम? NEET 2013
वीन का विस्थापन नियम — ताप बढ़ने पर λm घटती है।
17 Cp, Cv, γ=Cp/Cv, R दिया। Cv? NEET 2013
Cv(γ−1) = R → Cv = R/(γ−1)
18 0.36 m² स्लैब, 0.1 m मोटाई। निचली सतह 100°C भाप, ऊपरी 0°C बर्फ। 1 घंटे में 4.8 kg बर्फ पिघली। K? (Lf=3.36×10⁵) AIPMT 2012 (Mains)
Q = 4.8×3.36×105 = 1.6128×106 J
H = 1.6128×106/3600 = 448 W
K = 448×0.1/(0.36×100) = 1.24 W m−1K−1
19 तारे की त्रिज्या R, कृष्णिका, ऊर्जा उत्पादन दर Q। ताप? AIPMT 2012 (Prelims)
Q = 4πR²σT⁴ → T = (Q/(4πR²σ))1/4
20 सूर्य (त्रिज्या r, ताप t°C) से R दूरी पर इकाई क्षेत्रफल पर प्राप्त शक्ति? AIPMT 2010 (Prelims)
P = σr²(t+273)⁴/R²
21 छड़ (L, A) के सिरे T₁,T₂ पर। स्थायी अवस्था में dQ/dt? AIPMT 2009
dQ/dt = KA(T₁−T₂)/L
22 227°C पर कृष्णिका 7 cal/cm²s। 727°C पर दर? AIPMT 2009
H₂/H₁ = (1000/500)⁴ = 16
H₂ = 7×16 = 112 cal/cm²s
23 W मापक्रम पर हिमांक 39°W, क्वथनांक 239°W। 39°C के संगत? AIPMT 2008
W = 39 + (239−39)/100 × 39 = 39 + 78 = 117°W
24 1227°C पर λm=5000 Å। ताप 1000°C और बढ़ाने पर नई λm? AIPMT 2006
T₁=1500K, T₂=2500K
λm2 = 5000×1500/2500 = 3000 Å
25 दो परतें (K, 2K) समान मोटाई, श्रेणीक्रम। Keq? AIPMT 2003
2d/(KeqA) = d/(KA) + d/(2KA) = (3/2)(d/KA)
Keq = 4K/3
26 स्टेफॉन नियतांक का मात्रक? AIPMT 2002
H=AσT⁴ → σ = H/(AT⁴) → W m−2K−4
27 727°C पर शक्ति 60 W, परिवेश 227°C। 1227°C पर शक्ति? AIPMT 2002
60 = σAe(1000⁴−500⁴) = σAe×0.9375×10¹²
P = σAe(1500⁴−500⁴) = σAe×5×10¹²
P/60 = 5/0.9375 = 5.333 → P ≈ 320 W
28 2000K पर λm। 3000K पर λm'? AIPMT 2000
λm' = λm×2000/3000 = (2/3)λm