तरलों के यांत्रिकी गुण
जल की एक बूँद गोलाकार क्यों बनती है? साबुन के बुलबुले इंद्रधनुषी रंग क्यों दिखाते हैं? हाइड्रॉलिक ब्रेक में छोटा बल इतना प्रभावी कैसे हो जाता है? यह अध्याय द्रवों व गैसों के उन यांत्रिक गुणों को उजागर करता है जो इन सवालों के पीछे के भौतिक नियम बताते हैं — दाब, बर्नूली सिद्धांत, श्यानता एवं पृष्ठ तनाव — तथा NEET/JEE में बार-बार पूछे जाने वाले सभी संबंधित प्रश्नों के विस्तृत हल।
9.1 भूमिका
द्रव एवं गैस — दोनों प्रवाहित होते हैं, इसीलिए इन्हें "तरल" कहा जाता है।
द्रव तथा गैस — दोनों में प्रवाहित होने की क्षमता होती है, अतः इन दोनों को सम्मिलित रूप से तरल (Fluid) कहा जाता है। ठोस के विपरीत, तरल की अपनी कोई निश्चित आकृति नहीं होती — जिस पात्र में डालें, तरल उसी की आकृति ग्रहण कर लेता है।
- द्रव: निश्चित आयतन होता है, स्वतंत्र पृष्ठ बनाता है, तथा असंपीड्य (incompressible) होता है।
- गैस: निश्चित आयतन नहीं होता, पात्र के सम्पूर्ण आयतन को भर देती है, तथा अत्यधिक संपीड्य (compressible) होती है।
अपरूपण प्रतिबल (Shear stress): ठोस के आयतन में परिवर्तन किए बिना उसकी आकृति बदल सकती है। तरल इस अपरूपण प्रतिबल का बहुत ही न्यून प्रतिरोध करते हैं — थोड़े से विरूपण प्रतिबल से ही तरल की आकृति बदल जाती है। ठोसों की तुलना में तरलों का अपरूपक प्रतिबल लगभग 10 लाख गुना (106) कम होता है।
9.2 दाब
प्रति एकांक क्षेत्रफल पर आरोपित अभिलंबवत् बल।
जब किसी क्षेत्रफल पर बल लगता है, तो प्रति एकांक क्षेत्रफल पर लगने वाला अभिलंबवत् (perpendicular) बल दाब कहलाता है। क्षेत्रफल जितना छोटा होगा, प्रतिघात (impact) उतना ही अधिक होगा — इसी कारण नुकीली सुई त्वचा को भेद देती है, जबकि कुंद वस्तु नहीं भेद पाती।
दाब की विमा: [ML-1T-2]
दाब के मात्रक
| दाब के मात्रक | मान |
|---|---|
| SI मात्रक: पास्कल (Pa) | 1 Pa = 1 N m-2 |
| 1 वायुमंडल (atm) | 1 atm = 1.013 × 105 Pa |
| 1 बार (bar) | 1 bar = 105 Pa |
| 1 टॉर (torr) = 1 mm Hg | 1 torr = 133 Pa |
घनत्व (Density): ρ = m/V , विमा [ML-3], SI मात्रक kg m-3। द्रव असंपीड्य होते हैं अतः द्रव का घनत्व लगभग सभी दाबों पर अचर रहता है; गैसों का घनत्व दाब बदलने पर बहुत अधिक बदलता है। 4°C पर जल का घनत्व = 1.0 × 103 kg m-3।
आपेक्षिक घनत्व (Relative Density): = पदार्थ का घनत्व / जल का घनत्व (4°C पर) — यह एक विमाहीन धनात्मक अदिश राशि है।
9.2.1 पास्कल का नियम
प्रिज्मीय अवयव (त्रिभुजाकार) के विश्लेषण से सिद्ध होता है: Pa = Pb = Pc — अर्थात् विरामावस्था में द्रव के अभ्यंतर में सभी दिशाओं में दाब समान रूप से कार्य करता है।
9.2.2 गहराई के साथ दाब में परिवर्तन
यहाँ h गहराई पर स्थित बिंदु पर निरपेक्ष (परम) दाब P है। P − Pa को उस बिंदु का गेज़ दाब (gauge pressure) कहते हैं। दाब परिकलन के लिए तरल स्तंभ की ऊँचाई महत्वपूर्ण है, न कि पात्र की आकृति, आधार अथवा अनुप्रस्थ काट — इसे द्रवस्थैतिक विरोधोक्ति (Hydrostatic Paradox) कहते हैं। समान क्षैतिज तल (समान गहराई) के सभी बिंदुओं पर दाब समान होता है।
9.2.3 वायुमंडलीय दाब तथा गेज़ दाब
वायुमंडलीय दाब: किसी बिंदु पर उस बिंदु से वायुमंडल के शीर्ष तक वायु के स्तंभ के भार के बराबर दाब। समुद्र तल पर इसका मान = 1.013 × 105 Pa (1 atm)। सर्वप्रथम टॉरिसेली (इटली) ने पारे के बैरोमीटर से इसे मापा।
गेज़ दाब: P − Pa — व्यवहार में सामान्यतः जो दाब मापा जाता है वह गेज़/प्रमापी दाब ही होता है (जैसे टायर दाब, रक्तचाप गेज़)। खुली-नली मैनोमीटर दाबांतर मापने की एक युक्ति है — U-आकार की नली जिसमें उपयुक्त द्रव भरा होता है।
9.2.4 द्रव चालित मशीन
पास्कल के नियम पर आधारित — पात्र में रखे तरल के किसी भाग पर जब बाह्य दाब आपतित होता है, तो यह बिना ह्रास के सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित हो जाता है।
अनुपात A2/A1 को युक्ति का यांत्रिक लाभ (Mechanical Advantage) कहते हैं। उदाहरण — द्रव चालित उत्थापक (हाइड्रॉलिक लिफ्ट), द्रव चालित ब्रेक — मोटर कार के ब्रेक पैडल पर छोटा बल लगाने से सभी पहियों में समान दाब संचरित होकर ब्रेक प्रभाव सभी पहियों पर बराबर पड़ता है।
9.3 धारारेखी प्रभाव
अपरिवर्ती प्रवाह, धारारेखाएँ तथा सांतत्य समीकरण।
तरल गतिकी (Fluid Dynamics): तरल प्रवाह के अध्ययन को तरल गतिकी कहते हैं।
अपरिवर्ती प्रवाह (Steady flow): किसी तरल का प्रवाह अपरिवर्ती कहलाता है यदि किसी स्थान से गुज़रने वाले तरल के प्रत्येक कण का वेग समय में अचर रहता है (स्थान के विभिन्न बिंदुओं पर वेग भिन्न-भिन्न हो सकता है)।
धारारेखा (Streamline): वह पथ, जिस पर अपरिवर्ती प्रवाह में तरल कण गमन करता है। किसी बिंदु पर तरल कण का वेग सदैव उस बिंदु पर खींची गई धारारेखा की स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है। कोई भी दो धारारेखाएँ एक-दूसरे को नहीं काटतीं — यदि काटें तो कटान बिंदु पर तरल कण के दो संभव वेग होंगे, जो असंभव है।
सांतत्य समीकरण (Equation of Continuity)
असंपीड्य तरल के लिए (ρ अचर):
यह संहति संरक्षण का नियम है। Av (आयतन अभिवाह / प्रवाह दर) नली में सर्वत्र स्थिर रहता है — अतः संकरे स्थानों पर (जहाँ धारारेखाएँ पास-पास हों) वेग बढ़ जाता है, चौड़े स्थान पर वेग घटता है।
प्रक्षुब्ध प्रवाह (Turbulent flow): तरल की चाल एक क्रांतिक वेग (critical velocity) पार करने के बाद धारा प्रवाह प्रक्षुब्ध प्रवाह में बदल जाता है — छोटे-छोटे फेन (foam), भँवर बनते हैं जिन्हें दूध-धारा (white water rapids) कहते हैं।
9.4 बर्नूली का सिद्धांत
स्विस भौतिकविद् डेनियल बर्नूली द्वारा विकसित — ऊर्जा संरक्षण पर आधारित।
ऊर्जा संरक्षण (कार्य-ऊर्जा प्रमेय) के उपयोग से अपरिवर्ती/धारा-प्रवाह के गुण प्राप्त होते हैं:
प्रतिबंध (शर्तें)
- तरल असंपीड्य होना चाहिए (प्रत्यास्थ ऊर्जा नहीं ली गई)।
- प्रवाह अपरिवर्ती (स्थायी) होना चाहिए — अस्थिर/विक्षोभ प्रवाह में यह लागू नहीं होता, क्योंकि वेग व दाब समय में अस्थिर रहते हैं।
- तरल की श्यानता शून्य (आदर्श तरल) माननी होगी — वास्तव में श्यानता के कारण गतिज ऊर्जा का ह्रास होकर ऊष्मा ऊर्जा में बदल जाती है, इसलिए यह शून्य श्यानता तरलों पर ही सही लागू होता है।
जब तरल विरामावस्था में है: P1 + ρgh1 = P2 + ρgh2 — यह गहराई के साथ दाब परिवर्तन के समीकरण (9.6) के समान है।
9.4.1 चाल का बहिर्वाह — टॉरिसेली का नियम
बहिर्वाह का अर्थ है तरल का बहिर्गमन (outflow)। किसी खुली टंकी के छिद्र से तरल के बहिर्वाह की चाल को मुक्त रूप से गिरते पिंड की चाल के सूत्र के समरूप सूत्र से प्रदर्शित किया जा सकता है।
यह किसी मुक्त रूप से गिरते पिंड की चाल के समान है — यही टॉरिसेली का सिद्धांत है। (शर्त: A2 >> A1, यानी टंकी का क्षेत्रफल छिद्र से बहुत अधिक हो, ताकि शीर्ष पर तरल विराम में माना जा सके)
9.4.2 गतिक उत्थापक / लिफ्ट
किसी पिंड पर गति के कारण लगने वाला ऊर्ध्वमुखी बल — जैसे वायुयान के पंख, जलपर्णी, घूमती हुई गेंद पर।
- बिना घूमे गेंद: गेंद के ऊपर तथा नीचे वेग समान होने से दाबांतर शून्य — कोई ऊर्ध्वमुखी बल नहीं।
- घूमती हुई गेंद (Magnus Effect): गेंद अपने साथ वायु को घसीटती है, जिससे ऊपर वायु का वेग बढ़ जाता है (और दाब घटता है) तथा नीचे वेग घट जाता है (दाब बढ़ता है)। इस दाबांतर से उत्पन्न ऊर्ध्वमुखी बल को मेगनस प्रभाव (Magnus Effect) कहते हैं — यही स्पिन गेंद के वक्र पथ (स्विंग) का कारण है।
- ऐरोफॉयल (वायुयान पंख): पंख की विशिष्ट आकृति के कारण ऊपरी पृष्ठ पर वायु की चाल अधिक (दाब कम) तथा निचले पृष्ठ पर चाल कम (दाब अधिक) होती है — इस दाबांतर से गतिक उत्थापक उत्पन्न होकर वायुयान के भार को संतुलित करता है।
9.5 श्यानता
तरल गति में उत्पन्न आंतरिक घर्षण जैसा प्रतिरोध।
द्रव की परतों में सापेक्ष गति होने पर उत्पन्न होने वाला आंतरिक प्रतिरोध श्यानता कहलाता है — इसे परत प्रवाह कहते हैं। पाइप के अक्ष पर वेग अधिकतम, दीवारों पर वेग शून्य होता है।
9.5.1 स्टोक का नियम
यहाँ a गोले की त्रिज्या, v वेग, η माध्यम की श्यानता। यह अवमंदक (retarding) बल है, जो गति के अनुपाती तथा दिशा में विपरीत कार्य करता है।
यहाँ ρ = गोले का घनत्व, σ = तरल का घनत्व। सीमांत वेग गोले की त्रिज्या के वर्ग के अनुक्रमानुपाती तथा माध्यम की श्यानता के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
9.6 पृष्ठ तनाव
द्रव का वह गुण, जिसके कारण वह अपने पृष्ठ क्षेत्रफल को न्यूनतम रखने का प्रयास करता है।
द्रव अपने अणुओं के बीच आकर्षण के कारण स्थायी है। द्रव के पृष्ठ के अणु में भीतरी अणुओं की तुलना में अधिक स्थितिज ऊर्जा होती है (क्योंकि पृष्ठ पर अणु को घेरने वाले पड़ोसी अणु कम होते हैं)। द्रव इस अतिरिक्त ऊर्जा के कारण अपने पृष्ठ क्षेत्रफल को न्यूनतम रखने का प्रयास करता है — यह घटना पृष्ठ तनाव कहलाती है। यह केवल द्रवों में हो सकती है, क्योंकि गैसों का कोई स्वतंत्र पृष्ठ नहीं होता।
पृष्ठीय ऊर्जा तथा पृष्ठ तनाव
S = द्रव की प्रति एकांक क्षेत्रफल की पृष्ठीय ऊर्जा = चालित छड़ की प्रति एकांक लंबाई पर तरल द्वारा आरोपित बल। पृष्ठ तनाव का मान क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता — केवल ताप व द्रव की प्रकृति पर निर्भर करता है। ताप बढ़ने पर पृष्ठ तनाव घटता है।
संपर्क कोण (Angle of Contact, θ)
यह द्रव पृष्ठ पर स्पर्शज्या तथा ठोस पृष्ठ पर स्पर्शज्या के बीच का कोण है। θ बृहद (obtuse) → द्रव ठोस को गीला नहीं करता (जैसे पारा-काँच); θ न्यून (acute) → द्रव ठोस को गीला करता/फैलता है (जैसे जल-काँच)।
बूँद तथा बुलबुले में दाबांतर
बूँद के भीतर का दाब सदैव बाहर के दाब से अधिक होता है (उत्तल पार्श्व की ओर दाब अवतल पार्श्व से अधिक)। गुरुत्व बल की उपेक्षा करने पर, न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल के कारण मुक्त द्रव बूँदें व बुलबुले सदैव गोलाकार होते हैं।
केशिकीय उन्नयन (Capillary Rise)
जहाँ a केशनली की त्रिज्या, h केशिकीय उन्नयन। यदि द्रव-नवचंद्रक (मेनिस्कस) उत्तल है (जैसे पारा, cos θ ऋणात्मक), तो केशनली में द्रव का तल नीचे गिर जाता है — इसे केशिकीय अपनयन (capillary depression) कहते हैं।
✦ एक-पंक्ति तथ्य सूची
अध्याय के हर वे तथ्य व सूत्र जो प्रश्नों को हल करने के लिए आवश्यक हैं।
➕ अन्य NEET संबंधित तथ्य
परीक्षा की दृष्टि से याद रखने योग्य कुछ और महत्वपूर्ण बिंदु, सूत्र व तुलनाएँ — ऊपर दी गई एक-पंक्ति तथ्य सूची से अलग।
- आर्किमिडीज़ का सिद्धांत — जब कोई पिंड किसी तरल में पूर्णतः अथवा आंशिक रूप से डुबोया जाता है, तो उस पर लगने वाला उत्प्लावन बल, उस पिंड द्वारा विस्थापित तरल के भार के ठीक बराबर होता है — B = Vविस्थापित × ρतरल × g — यह तरल-स्थैतिकी का मूलभूत स्तंभ है, जिस पर उत्प्लावन, तैरने की शर्त व हाइड्रोमीटर जैसे अनुप्रयोग आधारित होते हैं।
- तैरने की शर्त — कोई पिंड तरल में तैरेगा, डूबेगा अथवा संतुलित रहेगा — यह पिंड के घनत्व (ρपिंड) व तरल के घनत्व (ρतरल) की तुलना पर निर्भर है — ρपिंड < ρतरल → पिंड तैरेगा; ρपिंड = ρतरल → तरल के भीतर कहीं भी संतुलित; ρपिंड > ρतरल → डूबेगा।
- हाइड्रॉलिक प्रेस — बल-गुणन, ऊर्जा-गुणन नहीं — पास्कल के नियम पर आधारित हाइड्रॉलिक मशीन छोटे बल को बड़े बल में परिवर्तित तो कर सकती है (यांत्रिक लाभ = A₂/A₁), परंतु यह ऊर्जा-संरक्षण का उल्लंघन नहीं करती — छोटे पिस्टन को बड़ी दूरी तक धकेलना पड़ता है, जबकि बड़ा पिस्टन छोटी दूरी तय करता है, ताकि दोनों तरफ किया गया कार्य (बल × दूरी) बराबर बना रहे।
- रेनॉल्ड्स संख्या (Re) — Re = ρvd/η (ρ=घनत्व, v=चाल, d=नली का व्यास, η=श्यानता) — यह एक विमाहीन राशि है। Re < 1000 → स्तरीय, Re > 2000 → प्रक्षुब्ध, 1000–2000 → संक्रमणकालीन।
- पृष्ठ तनाव व पृष्ठ ऊर्जा की तुल्यता — दोनों राशियाँ केवल संकल्पनात्मक रूप से भिन्न प्रतीत होती हैं, परंतु विमीय विश्लेषण पर दोनों की विमाएँ (तथा SI मात्रक — N/m तथा J/m²) संख्यात्मक व विमीय रूप से पूर्णतः तुल्य हैं।
- पॉइज़्युली नियम का चिकित्सा-अनुप्रयोग — Q = πr⁴ΔP/8ηl — प्रवाह-दर, नली की त्रिज्या की चतुर्थ घात (r⁴) के अनुक्रमानुपाती — रक्त-वाहिनियों में मामूली रुकावट भी रक्तचाप में भारी वृद्धि कर देती है।
- पूर्णतः डूबे व आंशिक रूप से डूबे पिंड के लिए उत्प्लावन बल में भेद — यदि पिंड पूर्णतः डूबा हो, तो उत्प्लावन बल में पिंड का संपूर्ण आयतन लिया जाता है (B=Vसंपूर्णρg); यदि पिंड आंशिक रूप से तैर रहा हो, तो केवल डूबे हुए भाग का आयतन ही सम्मिलित होता है (B=Vडूबा हुआρg)।
- बल (Force) बनाम प्रणोद (Thrust) बनाम दाब (Pressure) — किसी पृष्ठ पर लंबवत् आरोपित बल को "प्रणोद" कहा जाता है (सदिश राशि, मात्रक न्यूटन); दाब = प्रणोद/क्षेत्रफल (अदिश राशि, मात्रक पास्कल)।
- पृष्ठ तनाव का जैविक अनुप्रयोग — जल-स्ट्राइडर कीट — कुछ कीट जल के पृष्ठ तनाव के कारण उत्पन्न "पृष्ठ-फिल्म" के सहारे बिना डूबे जल की सतह पर चल सकते हैं।
- न्यूटन का श्यानता नियम — F/A = η(dv/dx) — श्यान अपरूपण प्रतिबल, वेग-प्रवणता (dv/dx) के अनुक्रमानुपाती होता है।
- आभासी भार — तरल में डूबे पिंड का आभासी भार = वास्तविक भार − उत्प्लावन बल।
- हाइड्रोमीटर — आर्किमिडीज़ सिद्धांत पर आधारित, द्रव के आपेक्षिक घनत्व मापने हेतु — यह द्रव में तैरता है, तथा डूबने की गहराई द्रव के घनत्व से व्युत्क्रमानुपाती होती है।
- हिमखंड का जल में तैरना — बर्फ का घनत्व (≈917 kg/m³) समुद्री जल के घनत्व (≈1025 kg/m³) से कम होने से लगभग 90% भाग पानी के भीतर डूबा रहता है।
- चूँकि यह अध्याय सूत्र-प्रधान व अनुप्रयोग-आधारित दोनों है, अंतिम रिवीज़न में इन तीन बिंदुओं को प्राथमिकता दें — (1) आर्किमिडीज़ सिद्धांत व तैरने की शर्त से जुड़े संख्यात्मक प्रश्न, (2) बर्नूली सिद्धांत के सभी अनुप्रयोग व उनकी शर्तें, (3) श्यानता व पृष्ठ तनाव से जुड़े सभी सूत्र व ताप-निर्भरता।
✏️ NCERT अभ्यास प्रश्न — पूर्ण हल (9.1 – 9.20)
हर प्रश्न पर क्लिक करके उत्तर देखें।
9.1(a) मस्तिष्क की अपेक्षा पैरों पर रक्त चाप अधिक क्यों होता है?
रक्त एक द्रव है और शरीर के भीतर द्रवस्थैतिक दाब सूत्र P = Pa + ρgh का पालन करता है। पैर, मस्तिष्क की तुलना में हृदय से नीचे (अधिक गहराई पर, h अधिक) स्थित होते हैं। चूँकि दाब गहराई के साथ बढ़ता है (ρgh पद के कारण), अतः पैरों पर रक्त-स्तंभ की ऊँचाई अधिक होने से वहाँ रक्त चाप मस्तिष्क की अपेक्षा अधिक होता है।
निष्कर्ष: गहराई (h) अधिक ⟹ दाब अधिक — इसी कारण पैरों में रक्त चाप ज्यादा है।
9.1(b) 6 km ऊँचाई पर वायुमंडलीय दाब आधा क्यों हो जाता है?
वायुमंडलीय दाब व वायु का घनत्व ऊँचाई के साथ घातांकीय रूप (exponentially) से घटते हैं, रैखिक रूप से नहीं। वायु स्वयं संपीड्य है और गुरुत्व के कारण अधिकांश वायुभार निचली परतों में ही संकेंद्रित है — जैसे-जैसे ऊपर जाते हैं, वायु अत्यंत विरल होती जाती है। इसलिए वायुमंडल का सम्पूर्ण विस्तार भले ही 100 km से अधिक हो, परंतु अधिकांश द्रव्यमान निचले कुछ किलोमीटर में ही सीमित होने के कारण 6 km पर ही दाब आधा रह जाता है।
निष्कर्ष: वायु घनत्व ऊँचाई के साथ घातांकीय रूप से घटता है, अतः दाब भी तेज़ी से घटता है।
9.1(c) द्रवस्थैतिक दाब अदिश राशि क्यों है?
दाब की परिभाषा में प्रयुक्त 'बल' वास्तव में संपूर्ण सदिश बल नहीं है, बल्कि यह उस बल का एक घटक है जो पृष्ठ के क्षेत्रफल पर अभिलंबवत् (perpendicular) आरोपित होता है। विरामावस्था में तरल द्वारा किसी बिंदु पर लगाया गया बल सदैव उस पृष्ठ के अभिलंब की दिशा में होता है, चाहे वह पृष्ठ किसी भी अभिविन्यास (orientation) में क्यों न हो — पास्कल के नियमानुसार सभी दिशाओं में दाब समान रहता है। चूँकि दाब को कोई विशेष दिशा नहीं दी जा सकती (यह केवल परिमाण से पूर्णतः वर्णित है), अतः यह एक अदिश राशि है।
निष्कर्ष: दाब बिंदु का एक गुण है जो सभी दिशाओं में समान होता है, इसलिए स्केलर है।
9.2(a) पारे का संपर्क कोण बृहद, जल का न्यून क्यों?
संपर्क कोण Slacosθ + Ssl = Ssa समीकरण से निर्धारित होता है। पारे के अणुओं के बीच संसंजक बल (cohesive force) काँच के अणुओं के प्रति आसंजक बल (adhesive force) से कहीं अधिक प्रबल होता है। इसीलिए Ssl > Sla होने से संपर्क कोण बृहद (obtuse) हो जाता है। इसके विपरीत जल-काँच में आसंजक बल संसंजक बल से अधिक प्रबल होता है जिससे कोण न्यून हो जाता है।
निष्कर्ष: पारे में संसंजक बल प्रबल (बृहद कोण); जल में आसंजक बल प्रबल (न्यून कोण)।
9.2(b) जल फैलता है, पारा बूँदें बनाता है — क्यों?
जल का काँच के साथ न्यून संपर्क कोण होता है, अर्थात् जल के अणु काँच की ओर प्रबल रूप से आकर्षित होकर पृष्ठ पर फैल जाते हैं (जल काँच को गीला कर देता है)। पारे का काँच के साथ बृहद संपर्क कोण होता है — पारे के अणु आपस में इतने प्रबलता से जुड़े रहते हैं कि वे काँच से चिपकने की बजाय अपनी न्यूनतम-पृष्ठ (गोलाकार बूँद) आकृति बनाए रखना पसंद करते हैं।
निष्कर्ष: संपर्क कोण का मान ही यह निर्धारित करता है कि द्रव फैलेगा (गीला करेगा) या बूँद बनाएगा।
9.2(c) पृष्ठ तनाव क्षेत्रफल पर निर्भर क्यों नहीं करता?
पृष्ठ तनाव द्रव के अणुओं के बीच अंतराआण्विक आकर्षण बलों का परिणाम है — यह द्रव की प्रति एकांक क्षेत्रफल की पृष्ठीय ऊर्जा है, जो केवल द्रव की प्रकृति व ताप पर निर्भर करता है। पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ाने से नए अणु पृष्ठ पर आते हैं लेकिन प्रति अणु पृष्ठीय ऊर्जा वही रहती है, इसलिए एकांक क्षेत्रफल पर पृष्ठ तनाव का मान अपरिवर्तित रहता है।
निष्कर्ष: पृष्ठ तनाव एक गहन (intensive) गुण है, विस्तीर्ण (extensive) नहीं।
9.2(d) अपमार्जकों का स्पर्श कोण कम क्यों होना चाहिए?
अपमार्जक गीले कर्मक (wetting agents) होते हैं — इन्हें मिलाने से जल व रेशों/गंदगी के बीच संपर्क कोण छोटा हो जाता है, जिससे जल भलीभांति अंदर घुसकर (केशिकीय क्रिया द्वारा) रेशों के भीतर की मैल तक पहुँच पाता है और उसे प्रभावी ढंग से हटा पाता है।
निष्कर्ष: छोटा संपर्क कोण ⟹ बेहतर भिगोना (wetting) ⟹ प्रभावी सफाई।
9.2(e) द्रव बूँद की आकृति सदैव गोलाकार क्यों?
पृष्ठ तनाव के कारण द्रव अपने पृष्ठ की ऊर्जा को न्यूनतम रखने का प्रयास करता है, जिसका अर्थ है कि दिए गए आयतन के लिए द्रव अपना पृष्ठ क्षेत्रफल न्यूनतम रखना चाहता है। ज्यामितीय रूप से, किसी दिए गए आयतन के लिए गोला (sphere) ही वह आकृति है जिसका पृष्ठ क्षेत्रफल न्यूनतम होता है।
निष्कर्ष: गोला = न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल की आकृति ⟹ न्यूनतम पृष्ठीय ऊर्जा ⟹ सर्वाधिक स्थायी आकृति।
9.3 रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
(a) व्यापक रूप में द्रवों का पृष्ठ तनाव ताप बढ़ने पर घटता है।
(b) गैसों की श्यानता ताप बढ़ने पर बढ़ती है, जबकि द्रवों की श्यानता ताप बढ़ने पर घटती है।
(c) दृढ़ता प्रत्यास्थता गुणांक वाले ठोसों के लिए अपरूपण प्रतिबल अपरूपण विकृति के अनुक्रमानुपाती होता है, जबकि द्रवों के लिए वह अपरूपण विकृति की दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
(d) किसी तरल के अपरिवर्ती प्रवाह में आए किसी संकीर्णन पर प्रवाह की चाल में वृद्धि में संहति के संरक्षण (सांतत्य समीकरण) का अनुसरण होता है।
(e) किसी वायु सुरंग में किसी वायुयान के मॉडल में प्रक्षोभ की चाल, वास्तविक वायुयान के प्रक्षोभ के लिए क्रांतिक चाल की तुलना में अधिक होती है।
9.4(a) कागज़ की पट्टी पर ऊपर हवा फूँकनी चाहिए, नीचे नहीं
जब पट्टी के ऊपरी पृष्ठ के समांतर तेज़ हवा फूँकी जाती है, तो बर्नूली के सिद्धांत के अनुसार ऊपरी पृष्ठ पर वायु का वेग अधिक होने से वहाँ का दाब कम हो जाता है। नीचे की वायु स्थिर (कम वेग) रहने से वहाँ दाब अधिक (वायुमंडलीय) ही रहता है। इस दाबांतर के कारण एक निवल ऊर्ध्वमुखी बल पट्टी पर लगता है जो उसे क्षैतिज बनाए रखने में मदद करता है।
निष्कर्ष: ऊपर हवा फूँकने से बर्नूली प्रभाव द्वारा ऊपरी दाब कम हो जाता है, जिससे नीचे का अधिक दाब पट्टी को ऊपर धकेलकर क्षैतिज रखता है।
9.4(b) उँगलियों के बीच से तीव्र जल धाराएँ क्यों फूटती हैं?
सांतत्य समीकरण (A1v1 = A2v2) के अनुसार, जब उँगलियों द्वारा टोंटी के खुलने का प्रभावी क्षेत्रफल A कम कर दिया जाता है, तो उसी आयतन प्रवाह दर को बनाए रखने के लिए वहाँ से निकलने वाले जल का वेग v बढ़ जाना अनिवार्य है (क्योंकि Av स्थिर रहना चाहिए)। इसीलिए उँगलियों के बीच बचे संकरे रिक्त स्थानों से जल बहुत तेज़ चाल से फूट निकलता है।
निष्कर्ष: क्षेत्रफल घटने पर वेग बढ़ता है (A₁v₁ = A₂v₂) — यह सांतत्य समीकरण का प्रत्यक्ष प्रभाव है।
9.4(c) इंजेक्शन में सुई का आकार धारा को अधिक नियंत्रित करता है
सांतत्य समीकरण के अनुसार प्रवाह दर (Av) पिस्टन के बड़े क्षेत्रफल तथा सुई के अत्यंत छोटे बोर (छिद्र) क्षेत्रफल दोनों पर निर्भर करती है। चूँकि सुई का छिद्र बहुत संकरा होता है, इस संकरे मार्ग से निकलने वाले द्रव का वेग अत्यंत बड़ा तथा अत्यंत संवेदनशील रूप से सुई के आकार (त्रिज्या की चौथी घात के व्युत्क्रमानुपाती — Poiseuille के अनुसार) पर निर्भर करता है, जबकि अँगूठे द्वारा लगाया गया बल केवल पिस्टन पर समग्र दाब उत्पन्न करता है।
निष्कर्ष: संकरी सुई का त्रिज्या-आधारित प्रभाव (r⁴ के अनुपाती) अँगूठे के बल से अधिक संवेदनशील रूप से प्रवाह-दर नियंत्रित करता है।
9.4(d) छिद्र से निकलने वाला तरल पीछे की ओर प्रणोद क्यों आरोपित करता है?
यह न्यूटन के तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) का परिणाम है — बिल्कुल रॉकेट प्रणोदन के समान। जब तरल छिद्र से आगे की दिशा में तीव्र वेग से बाहर निकलता है (संवेग प्राप्त करता है), तो प्रतिक्रिया स्वरूप पात्र पर बराबर परिमाण का, विपरीत दिशा (पीछे की ओर) में संवेग/बल आरोपित होता है।
निष्कर्ष: द्रव के आगे बहिर्गमन की प्रतिक्रिया स्वरूप पात्र पर पीछे की ओर प्रणोद लगता है (न्यूटन का तृतीय नियम)।
9.4(e) प्रचक्रमान क्रिकेट गेंद परवलयिक पथ का अनुसरण क्यों नहीं करती?
सामान्य (बिना घूमे) प्रक्षेप्य केवल गुरुत्व बल के अधीन परवलयिक पथ पर चलता है। परंतु घूमती (spinning) गेंद अपने साथ वायु की परत को घसीटती है, जिससे गेंद के एक पार्श्व पर वायु का सापेक्ष वेग बढ़ जाता है (दाब घटता है) तथा दूसरे पार्श्व पर वेग घटता है (दाब बढ़ता है) — बर्नूली सिद्धांतानुसार इस दाबांतर से एक अतिरिक्त पार्श्व बल (मेगनस प्रभाव) उत्पन्न होता है। यह अतिरिक्त बल गुरुत्व बल के साथ मिलकर गेंद के पथ को परवलय से विचलित कर वक्र पथ बना देता है।
निष्कर्ष: मेगनस प्रभाव के कारण अतिरिक्त पार्श्व बल गुरुत्व-जनित परवलयिक पथ को वक्र पथ में बदल देता है।
9.5 ऊँची एड़ी के जूते से फर्श पर दाब (50 kg बालिका, 1 cm व्यास की एड़ी)
दिया है: m = 50 kg, व्यास d = 1.0 cm = 0.01 m ⟹ त्रिज्या r = 0.005 m, g = 9.8 m/s²
बल F = mg = 50 × 9.8 = 490 N
उत्तर: P ≈ 6.24 × 10⁶ Pa (यह वायुमंडलीय दाब से लगभग 61 गुना अधिक है!)
9.6 फ्रेंच शराब के वायुदाब मापी में स्तंभ की ऊँचाई
सामान्य वायुमंडलीय दाब Pa = ρgh के बराबर होना चाहिए।
1.013 × 10⁵ Pa = 984 × 9.8 × h
उत्तर: h ≈ 10.5 m (शराब का स्तंभ पारे की तुलना में बहुत लंबा होगा, क्योंकि इसका घनत्व बहुत कम है)
9.7 महासागर की गहराई में संरचना की उपयुक्तता
3 km गहराई पर समुद्री जल का दाब: P = ρgh
ρसमुद्री जल = 1.03 × 10³ kg/m³, g = 9.8 m/s², h = 3000 m
यह प्राप्त दाब (≈ 3.03 × 10⁷ Pa), संरचना की अधिकतम सहन क्षमता (10⁹ Pa) से बहुत कम है — लगभग 33 गुना कम।
उत्तर: हाँ, संरचना उपयुक्त है, क्योंकि 3 km गहराई पर वास्तविक दाब (≈3.03×10⁷ Pa) संरचना की अधिकतम क्षमता (10⁹ Pa) से बहुत कम है।
9.8 द्रवचालित आटोमोबाइल लिफ्ट का अधिकतम दाब
पास्कल के नियमानुसार पूरे द्रव में दाब समान संचरित होता है, अतः छोटे पिस्टन पर भी वही दाब होगा जो बड़े पिस्टन पर कार का भार सँभालने हेतु आवश्यक है।
अधिकतम बल F = mg = 3000 × 9.8 = 29400 N
बड़े पिस्टन का क्षेत्रफल A = 425 cm² = 425 × 10⁻⁴ m² = 0.0425 m²
उत्तर: P ≈ 6.92 × 10⁵ Pa — छोटे पिस्टन को यह अधिकतम दाब सहन करना होगा।
9.9 U-नली: स्पिरिट का आपेक्षिक घनत्व
चूँकि दोनों भुजाओं में पारे का स्तर समान है, अतः पारे के उभयनिष्ठ तल पर दोनों भुजाओं से आरोपित दाब समान होना चाहिए:
1000 × 10 = ρस्पिरिट × 12.5 ⟹ ρस्पिरिट = 800 kg/m³
आपेक्षिक घनत्व = 800/1000 = 0.8
9.10 U-नली में स्तंभ 15 cm बढ़ाने पर पारे के स्तरों में अंतर
अब जल तथा स्पिरिट के स्तंभों की ऊँचाई दोनों ओर 15 cm = 0.15 m हो गई है।
जल की ओर से दाब: Pजल = 1000 × 9.8 × 0.15 = 1470 Pa
स्पिरिट की ओर से दाब: Pस्पिरिट = 800 × 9.8 × 0.15 = 1176 Pa
दाबांतर ΔP = 1470 − 1176 = 294 Pa
यह पारे के स्तंभ के अंतर से संतुलित होगा: 294 = 13600 × 9.8 × Δh
उत्तर: पारे के स्तरों में अंतर ≈ 0.221 cm (जल वाली भुजा में पारे का स्तर नीचे तथा स्पिरिट वाली भुजा में ऊपर होगा)
9.11 नदी की क्षिप्रिका पर बर्नूली समीकरण लागू क्यों नहीं?
नहीं। बर्नूली समीकरण केवल अपरिवर्ती (steady), असंपीड्य तथा अश्यान (आदर्श) धारा-प्रवाह के लिए मान्य है, जहाँ धारारेखाएँ सुव्यवस्थित होती हैं और आपस में नहीं कटतीं। नदी की क्षिप्रिका (rapids) में जल-प्रवाह अत्यंत अनियमित, भँवरयुक्त तथा प्रक्षुब्ध (turbulent) होता है, जिसमें वेग व दाब समय व स्थान के साथ अनियमित रूप से बदलते रहते हैं।
उत्तर: नहीं — क्योंकि rapids में प्रवाह प्रक्षुब्ध (turbulent) होता है, अपरिवर्ती/धारा-प्रवाह नहीं।
9.12 गेज़ दाब से बर्नूली समीकरण में अंतर नहीं पड़ता
नहीं, कोई अंतर नहीं पड़ेगा। बर्नूली समीकरण में यदि हम P को गेज़ दाब (P − Pa) से प्रतिस्थापित करें, तो चूँकि Pa (वायुमंडलीय दाब) एक स्थिरांक है, यह समीकरण के दोनों ओर से समान रूप से घट/जुड़ जाता है और परस्पर निरस्त (cancel out) हो जाता है।
उत्तर: नहीं, कोई अंतर नहीं पड़ता — क्योंकि Pa स्थिरांक होने से समीकरण के दोनों पक्षों में निरस्त हो जाता है।
9.13 ग्लिसरीन की क्षैतिज नली में दाबांतर
पॉइज़्युली (Poiseuille) के समीकरण का उपयोग: Q = πr⁴ΔP / (8ηl)
आयतन प्रवाह दर Q = द्रव्यमान दर/घनत्व = (4.0×10⁻³)/(1.3×10³) = 3.077×10⁻⁶ m³/s
r = 1.0 cm = 0.01 m ⟹ r⁴ = 1×10⁻⁸ m⁴; l = 1.5 m; η = 0.83 Pa s
स्तरीय प्रवाह की जाँच: Reynolds संख्या Re = ρvd/η ≈ 0.31 — यह 1000 से बहुत कम है, अतः स्तरीय प्रवाह की परिकल्पना सही है।
उत्तर: दाबांतर ΔP ≈ 9.8 × 10² Pa
9.14 वायुयान के पंख पर उत्थापक बल
बर्नूली समीकरण से दाबांतर: ΔP = ½ρ(v2² − v1²)
v2 = 70 m/s (ऊपर), v1 = 63 m/s (नीचे)
उत्तर: उत्थापक बल F ≈ 1.5 × 10³ N
9.15 कौन-सा प्रवाह चित्र सही नहीं है?
चित्र (b) सही नहीं है। सांतत्य समीकरण (A1v1 = A2v2) के अनुसार, नली के संकरे (constricted) भाग में जहाँ अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल कम होता है, वहाँ असंपीड्य तरल का वेग बढ़ना अनिवार्य है — इसका अर्थ है कि उस संकरे भाग में धारारेखाएँ पास-पास (सघन) होकर आनी चाहिए। चित्र (a) में यह सही ढंग से दिखाया गया है, परंतु चित्र (b) में संकीर्णन पर धारारेखाएँ उचित रूप से सघन नहीं दिखाई गई हैं।
उत्तर: चित्र (b) असंगत है — संकीर्णन पर धारारेखाओं का घनत्व सांतत्य समीकरण के अनुसार नहीं बढ़ा है।
9.16 स्प्रे पंप की निष्कासन-चाल
मुख्य नली: A1 = 8.0 cm² = 8.0×10⁻⁴ m², v1 = 1.5 m/min = 0.025 m/s
आयतन प्रवाह दर Q = A1v1 = 8.0×10⁻⁴ × 0.025 = 2.0×10⁻⁵ m³/s
प्रत्येक छिद्र की त्रिज्या = 0.5 mm = 0.0005 m; प्रत्येक छिद्र का क्षेत्रफल = 7.854×10⁻⁷ m²
40 छिद्रों का कुल क्षेत्रफल A2 = 40 × 7.854×10⁻⁷ = 3.1416×10⁻⁵ m²
उत्तर: निष्कासन चाल v2 ≈ 0.64 m/s
9.17 साबुन की फिल्म का पृष्ठ तनाव
साबुन की फिल्म के दो पृष्ठ होते हैं, अतः S = F/(2l)
F = 1.5×10⁻² N, l = 30 cm = 0.30 m
उत्तर: पृष्ठ तनाव S = 2.5 × 10⁻² N/m
9.18 विभिन्न आकृति की फिल्में समान भार क्यों सँभालती हैं?
पृष्ठ तनाव S केवल द्रव की प्रकृति व ताप पर निर्भर करता है, आकृति या क्षेत्रफल पर नहीं। तीनों चित्रों में फ्रेम की चौड़ाई (फिसलने वाले तार की लंबाई) समान (40 cm) है, तथा द्रव व ताप भी समान हैं — इसलिए तीनों फिल्मों का पृष्ठ तनाव S समान रहेगा।
चूँकि भार F = S × 2l, और S व l तीनों में समान हैं, अतः तीनों फिल्में समान भार ही सँभाल सकती हैं, चाहे उनकी ऊपरी आकृति भिन्न-भिन्न क्यों न हो।
उत्तर: चित्र (b) व (c) की फिल्में भी वही भार सँभाल सकती हैं जो (a) सँभालती है, अर्थात् 4.5 × 10⁻² N।
9.19 पारे की बूँद के भीतर दाब
बूँद के लिए (एक ही पृष्ठ): ΔP = 2S/r
r = 3.00 mm = 0.003 m, S = 4.65×10⁻¹ N/m
उत्तर: बूँद के भीतर दाब ≈ 1.0131 × 10⁵ Pa; दाब-आधिक्य = 310 Pa
9.20 साबुन के बुलबुले व द्रव में वायु-बुलबुले का दाब
भाग 1 — साबुन का बुलबुला (हवा में, दो पृष्ठ):
भाग 2 — द्रव के भीतर वायु का बुलबुला (केवल एक पृष्ठ):
ρविलयन = 1.20 × 1000 = 1200 kg/m³
उत्तर: साबुन के बुलबुले का दाब-आधिक्य = 20 Pa; द्रव में 40 cm गहराई पर वायु-बुलबुले के भीतर दाब ≈ 1.057 × 10⁵ Pa
🚀 NEET/JEE स्तरीय अतिरिक्त प्रश्न
NCERT अभ्यास से आगे बढ़कर — वे प्रश्न-प्रकार जो NEET/JEE में बार-बार पूछे जाते हैं।
1 1000 छोटी बूँदों के मिलने से मुक्त ऊर्जा
त्रिज्या r की 1000 छोटी जल-बूँदें मिलकर एक बड़ी बूँद बनाती हैं। यदि जल का पृष्ठ तनाव S है, तो मुक्त ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
हल: आयतन संरक्षण: 1000 × (4/3)πr³ = (4/3)πR³ ⟹ R = 10r
प्रारंभिक पृष्ठ क्षेत्रफल = 1000 × 4πr² = 4000πr²; अंतिम = 4π(10r)² = 400πr²
ΔA = 3600πr²
उत्तर: मुक्त ऊर्जा = 3600πr²S
2 केशनली की लंबाई आधी करने पर जल बहेगा या नहीं
जल नली से बाहर नहीं बहेगा। यदि नली की उपलब्ध लंबाई (h/2) आवश्यक उन्नयन (h) से कम है, तो जल h/2 ऊँचाई तक ही चढ़ेगा, परंतु इस स्थिति में मेनिस्कस की वक्रता त्रिज्या बढ़ जाएगी (मेनिस्कस चपटा हो जाएगा) जिससे संपर्क कोण θ बढ़ जाता है — द्रव अपने आप को नई परिस्थिति में समायोजित कर लेता है।
उत्तर: जल h/2 ऊँचाई तक स्थिर रहेगा, बाहर नहीं बहेगा।
3 दो साबुन बुलबुलों के उभयनिष्ठ पृष्ठ की त्रिज्या
त्रिज्या r1 तथा r2 (r1 > r2) के दो बुलबुले नली से जोड़े जाते हैं। उभयनिष्ठ पृष्ठ पर दाबांतर = दोनों के दाब-आधिक्यों का अंतर:
उत्तर: r = r1r2/(r1−r2), छोटे बुलबुले की ओर उत्तल
4 सिद्ध कीजिए h1r1 = h2r2
केशिकीय उन्नयन सूत्र: h = 2Scosθ/(ρgr)
चूँकि द्रव, S, ρ, θ दोनों नलियों के लिए समान हैं: h1r1 = 2Scosθ/ρg = h2r2
उत्तर: सिद्ध — केशिकीय उन्नयन त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है
5 दो गोलों के सीमांत वेगों का अनुपात (श्यान द्रव में)
vt = 2a²(ρ−σ)g/(9η)
गोला P: a=0.5cm, ρ=8000, σ=800, η=3 ⟹ vP ∝ 0.25×7200/3 = 600
गोला Q: a=0.25cm, ρ=8000, σ=1600, η=2 ⟹ vQ ∝ 0.0625×6400/2 = 200
उत्तर: vP : vQ = 3 : 1
6 वेंचुरीमीटर द्वारा प्रवाह दर
दाबांतर ΔP = 13600 × 9.8 × 0.20 = 26656 Pa
v2 = 4v1 (क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती); ΔP = ½ρ(v2²−v1²) = 7500v1²
v1 ≈ 1.885 m/s
उत्तर: प्रवाह दर Q ≈ 5.3 × 10⁻³ m³/s (लगभग 5.3 लीटर/सेकंड)
7 हाइड्रॉलिक लिफ्ट में यांत्रिक लाभ
F2 = F1(A2/A1) = F1(d2/d1)²
उत्तर: अधिकतम भार F₂ = 5000 N (यांत्रिक लाभ = 100)
8 टंकी से बहिर्वाह — चाल व क्षैतिज परास
(a) टॉरिसेली: v = √(2gh) = √(2×10×4) = √80 ≈ 8.94 m/s
(b) ऊर्ध्वाधर पतन: 5 = ½ × 10 × t² ⟹ t = 1 s
उत्तर: बहिर्वाह चाल ≈ 8.94 m/s; परास ≈ 8.94 m
9 बुलबुले का सामान्य सूत्र ΔP = 2nS/r
बूँद: n=1 ⟹ ΔP=2S/r ✓; बुलबुला: n=2 ⟹ ΔP=4S/r ✓
त्रिज्या r₀ से 2r₀ करने पर: A₂ − A₁ = 32πr₀² − 8πr₀² = 24πr₀²
उत्तर: सामान्य सूत्र ΔP = 2nS/r; त्रिज्या दोगुनी करने पर कार्य = 24πr₀²S
10 रेनॉल्ड्स संख्या के बारे में सही कथन
Re = ρvd/η — यह एक विमाहीन राशि है। Re < 1000 → स्तरीय; Re > 2000 → प्रक्षुब्ध।
उत्तर: उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं
🏅 NEET में पूछे गए प्रश्न (2014–2023)
इस अध्याय से NEET में वास्तव में पूछे गए प्रश्न, मूल विकल्पों व विस्तृत हल के साथ।
1 श्यानता, पृष्ठ तनाव, दाब व आपेक्षिक घनत्व की अदिश/सदिश प्रकृति NEET 2023
निम्न में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
- (a) श्यानता गुणांक एक अदिश राशि है
- (b) पृष्ठ तनाव एक अदिश राशि है
- (c) दाब एक सदिश राशि है ✅ (यही असत्य कथन है)
- (d) आपेक्षिक घनत्व एक अदिश राशि है
श्यानता गुणांक, पृष्ठ तनाव तथा आपेक्षिक घनत्व — ये सभी केवल परिमाण से पूर्णतः वर्णित होते हैं, अतः अदिश राशियाँ हैं। जबकि दाब भी वास्तव में एक अदिश राशि है, सदिश नहीं — यद्यपि इसकी परिभाषा में बल (सदिश) प्रयुक्त होता है, दाब का सूत्र P=F/A में केवल पृष्ठ के अभिलंबवत् घटक का परिमाण लिया जाता है, और यह सभी दिशाओं में समान रूप से कार्य करता है।
असत्य कथन: (c) → सही उत्तर (c)
2 केशनली में जल का द्रव्यमान त्रिज्या दोगुनी करने पर NEET 2021
त्रिज्या r की केशनली में जल h ऊँचाई तक चढ़ता है और चढ़े जल का द्रव्यमान M है। त्रिज्या 2r करने पर द्रव्यमान?
हल: h ∝ 1/r; M = ρ × πr²h ∝ r² × (1/r) = r
त्रिज्या दोगुनी ⟹ M' = 2M
उत्तर: 2M (विकल्प c)
3 ग्लिसरीन में डूबी गेंद पर श्यान बल (सीमांत वेग) NEET 2021
द्रव्यमान M व घनत्व d की गेंद ग्लिसरीन (घनत्व d/2) में गिराई जाती है। सीमांत वेग पर श्यान बल?
हल: सीमांत वेग पर: Mg = B + F; उत्प्लावन B = (M/d) × (d/2) × g = Mg/2
उत्तर: F = Mg/2 (विकल्प b)
4 खुले टैंक के छिद्र से प्रवाह दर NEET 2019
2 m ऊँचाई के खुले टैंक के तल के निकट 2 mm² क्षेत्रफल के छिद्र से प्रवाह दर?
हल: v = √(2×10×2) = √40 ≈ 6.32 m/s
उत्तर: 12.6 × 10⁻⁶ m³/s (विकल्प 2)
5 स्प्रे पंप की नली से निष्कासन चाल NEET 2015 (Re)
त्रिज्या R की मुख्य नली में चाल v; n छिद्र (प्रत्येक त्रिज्या r) से निष्कासन चाल?
हल: सांतत्य समीकरण: πR²v = n × πr² × vej
उत्तर: vR²/(nr²) (विकल्प c)
6 छत पर तेज़ वायु से उत्थापक बल (बर्नूली) NEET 2015
छत के समांतर 40 m/s चाल से वायु बह रही है, छत क्षेत्रफल 250 m²। बल व दिशा?
हल: ΔP = ½ρv² = ½ × 1.2 × 1600 = 960 Pa
दिशा: ऊपर की ओर (भीतर का अधिक दाब छत को ऊपर धकेलता है — छत उड़ने का कारण)
उत्तर: F = 2.4 × 10⁵ N, ऊपर की ओर
7 छोटी बूँदों के मिलने से बड़ी बूँद — ऊर्जा मुक्ति NEET 2014
त्रिज्या r की n छोटी बूँदें मिलकर त्रिज्या R व आयतन V की बड़ी बूँद बनाती हैं। पृष्ठ तनाव T है। मुक्त ऊर्जा?
हल: n छोटी बूँदों के लिए n×(4/3)πr³ = (4/3)πR³ ⟹ n = R³/r³
प्रारंभिक पृष्ठ क्षेत्रफल = n × 4πr² = 4πR³/r; अंतिम = 4πR²
उत्तर: 4πTR²(R−r)/r