मानव कल्याण में सूक्ष्मजीव
दही-इडली से लेकर एंटीबायोटिक, वाहितमल उपचार, बायोगैस, जैव नियंत्रण एवं जैव उर्वरक तक — सूक्ष्मजीवों की मानव जीवन में अनगिनत लाभकारी भूमिकाओं का विस्तृत विवेचन।
★ NEET फोकस फैक्ट्स सम्मिलित1 सूक्ष्मजीव — सर्वव्यापी एवं लाभकारी
अदृश्य, किन्तु जीवन के हर क्षेत्र में उपस्थित
सूक्ष्मजीव पृथ्वी पर सर्वव्यापी हैं — ये मृदा, जल, वायु, हमारे शरीर के भीतर, तथा अन्य प्राणियों एवं पादपों में पाए जाते हैं। यहाँ तक कि अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी — जैसे गीज़र में 100°C ताप, बर्फ की परतों के नीचे, तथा अत्यधिक अम्लीय वातावरण में — सूक्ष्मजीव जीवित रह सकते हैं।
सूक्ष्मजीवों में प्रोटोजोआ, जीवाणु, कवक, सूक्ष्मदर्शीय पादप एवं प्राणी शामिल हैं। विषाणु, विरायड (viroids) तथा प्रायोन (prions) — ये प्रोटीनीय संक्रामक कारक हैं, जिन्हें सजीव-निर्जीव की सीमा-रेखा पर माना जाता है। अधिकांश जीवाणु एवं कवकों को पोषक माध्यमों पर संवर्धित (कल्चर) किया जा सकता है, जिससे उनकी कालोनियाँ नग्न नेत्रों से दिखाई देती हैं।
- विषाणु, विरायड व प्रायोन — प्रोटीनीय संक्रामक कारक, सजीव-निर्जीव सीमा पर — यह भेद objective प्रश्न में आता है।
- अत्यधिक ताप, ठंड व अम्लीय परिस्थितियों में जीवित रहने वाले सूक्ष्मजीव — एक्स्ट्रीमोफाइल कहलाते हैं।
2 घरेलू उत्पादों में सूक्ष्मजीव
रसोई में रोज़ काम आने वाले सूक्ष्मजीव
हम प्रतिदिन सूक्ष्मजीवों या उनसे व्युत्पन्न उत्पादों का प्रयोग करते हैं। दही — दूध में लैक्टोबैसिलस तथा अन्य लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया (LAB) की वृद्धि से बनता है। ये बैक्टीरिया अम्ल उत्पन्न करते हैं, जो दुग्ध प्रोटीन को स्कंदित (जमा) कर देता है। दही की थोड़ी सी मात्रा आरंभक (स्टार्टर कल्चर) के रूप में ताज़े दूध में मिलाई जाती है, जिसमें लाखों-करोड़ों LAB होते हैं। दही बनने के दौरान विटामिन B₁₂ की मात्रा भी बढ़ जाती है, जिससे दही पोषण की दृष्टि से दूध से बेहतर हो जाता है। LAB हमारी आंतों में भी लाभकारी प्रोबायोटिक की भूमिका निभाते हैं।
दाल-चावल के आटे (जिससे इडली व डोसा बनते हैं) में बैक्टीरिया द्वारा किण्वन से CO₂ गैस उत्पन्न होती है, जिससे आटा फूल जाता है। ब्रेड बनाने में सैकेरोमाइसीज़ सैरीविसी (बैकर यीस्ट) का प्रयोग किया जाता है। टोडी (ताड़वृक्ष के तने का किण्वित स्राव) एक पारंपरिक पेय है। सूक्ष्मजीव किण्वित मछली, सोयाबीन व बाँस प्ररोह जैसे भोजनों में भी प्रयुक्त होते हैं।
विभिन्न सूक्ष्मजीवों के प्रयोग से अलग-अलग प्रकार की चीज़ बनती है। स्विस चीज़ में पाए जाने वाले बड़े-बड़े छिद्र प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई द्वारा उत्पन्न CO₂ के कारण होते हैं। रॉक्यूफोर्ट चीज़ एक विशेष कवक की वृद्धि से परिपक्व होती है, जिससे विशेष सुगंध आती है।
- दही निर्माण का मुख्य जीवाणु = लैक्टोबैसिलस (LAB)
- ब्रेड बनाने का यीस्ट = सैकेरोमाइसीज़ सैरीविसी
- इडली/डोसा में फूलावट = बैक्टीरिया द्वारा CO₂
- स्विस चीज़ के छिद्र = प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई
- दही में विटामिन B₁₂ की मात्रा बढ़ती है — यह FACT परीक्षा में पूछा जाता है।
3 औद्योगिक उत्पादों में सूक्ष्मजीव
बड़े पैमाने पर मूल्यवान उत्पादों का संश्लेषण
उद्योगों में सूक्ष्मजीवों का प्रयोग बहुत से मूल्यवान उत्पादों के संश्लेषण में किया जाता है — मादक पेय तथा प्रतिजैविक इसके प्रमुख उदाहरण हैं। व्यावसायिक पैमाने पर सूक्ष्मजीवों को पैदा करने के लिए बड़े बर्तनों — किण्वक (फरमैंटर) — का उपयोग किया जाता है।
किण्वित पेय
सैकेरोमाइसीज़ सैरीविसी (ब्रीवर्स यीस्ट) का प्रयोग प्राचीन काल से वाइन, बियर, व्हिस्की, ब्रांडी तथा रम जैसे पेयों के उत्पादन में किया जाता रहा है। वाइन तथा बियर बिना आसवन के बनते हैं, जबकि व्हिस्की, ब्रांडी व रम किण्वित रस के आसवन द्वारा तैयार किए जाते हैं।
- वाइन/बियर = बिना आसवन; व्हिस्की/ब्रांडी/रम = आसवन द्वारा
- सभी अल्कोहलीय पेयों व ब्रेड का सामान्य यीस्ट = सैकेरोमाइसीज़ सैरीविसी
प्रतिजैविक — पेनिसिलिन
पेनिसिलिन — सबसे पहला एंटीबायोटिक था, जिसकी खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग (1928) ने एक प्रकार की "हादसा" (आकस्मिक घटना) के रूप में की थी। उन्होंने देखा कि पेनीसीलियम नोटेटम नामक मोल्ड (कवक) स्टैफिलोकोकस बैक्टीरिया की वृद्धि को रोक रहा है। बाद में अर्नेस्ट चैन तथा हॉवर्ड फ्लोरे ने इसे एक शक्तिशाली एंटीबायोटिक के रूप में स्थापित किया। इसका प्रयोग द्वितीय विश्व युद्ध में घायल सैनिकों के उपचार में व्यापक रूप से किया गया। तीनों को 1945 में नोबल पुरस्कार प्रदान किया गया।
पेनिसिलिन के बाद कई अन्य एंटीबायोटिक भी विभिन्न सूक्ष्मजीवों से परिशुद्ध किए गए। एंटीबायोटिकों ने प्लेग, काली खाँसी, डिप्थीरिया, कुष्ठरोग जैसे भयानक जीवाणुजनित रोगों के उपचार में हमारी क्षमता में भारी वृद्धि की है।
- पेनिसिलिन की खोज — अलेक्जेंडर फ्लेमिंग (1928)
- चिकित्सीय उपयोग हेतु स्थापित करने वाले — अर्नेस्ट चैन व हॉवर्ड फ्लोरे
- नोबल पुरस्कार — 1945
- स्रोत कवक — पेनीसीलियम नोटेटम
रसायन, एंजाइम तथा जैवसक्रिय अणु
| उत्पाद | सूक्ष्मजीव | वर्ग |
|---|---|---|
| सिट्रिक अम्ल | एस्परजिलस नाइगर | कवक |
| एसीटिक अम्ल | एसीटोबैक्टर एसिटाई | जीवाणु |
| ब्युटिक अम्ल | क्लोस्ट्रीडियम ब्यूटायलिकम | जीवाणु |
| लैक्टिक अम्ल | लैक्टोबैसिलस | जीवाणु |
| एथेनॉल | सैकेरोमाइसीज़ सैरीविसी | यीस्ट |
लाइपेस एंजाइम का प्रयोग डिटर्जेंट निर्माण में कपड़ों से तेल के धब्बे हटाने के लिए किया जाता है। पैक्टीनेज तथा प्रोटीएज के प्रयोग से बोतलबंद फल-रस अधिक साफ एवं पारदर्शी हो जाते हैं।
स्ट्रैप्टोकाइनेज — स्ट्रैप्टोकोकस जीवाणु से प्राप्त, आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा रूपांतरित — का प्रयोग हृदयाघात रोगियों में रक्त वाहिकाओं से थक्का (क्लॉट) हटाने (क्लॉट बस्टर) के रूप में किया जाता है।
- साइक्लोस्पोरिन-ए — ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम (कवक) से, प्रतिरक्षा निरोधक (इम्यूनोसप्रेसिव) — अंग प्रतिरोपण में प्रयुक्त।
- स्टैटिन — मोनॉस्कस परप्यूरीअस (यीस्ट) से, रक्त-कोलेस्ट्रॉल घटाने वाला — कोलेस्ट्रॉल संश्लेषण एंजाइम को स्पर्धात्मक रूप से रोकता है।
- साइक्लोस्पोरिन-ए — स्रोत: ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम
- स्टैटिन — स्रोत: मोनॉस्कस परप्यूरीअस
- स्ट्रैप्टोकाइनेज — स्रोत: स्ट्रैप्टोकोकस (क्लॉट बस्टर)
- अम्ल-सूक्ष्मजीव जोड़े: सिट्रिक→एस्परजिलस, एसीटिक→एसीटोबैक्टर, ब्युटिक→क्लोस्ट्रीडियम, लैक्टिक→लैक्टोबैसिलस
4 वाहितमल उपचार में सूक्ष्मजीव
शहरी व्यर्थ जल को प्रदूषण-मुक्त बनाने की प्राकृतिक प्रक्रिया
प्रतिदिन नगरों व शहरों से उत्पन्न व्यर्थ जल — वाहितमल (सीवेज) — में कार्बनिक पदार्थों की बड़ी मात्रा तथा रोगजनक सूक्ष्मजीव होते हैं। इसे नदियों व झरनों में सीधे नहीं छोड़ा जा सकता — अतः वाहितमल का उपचार वाहितमल उपचार संयंत्र में किया जाता है। यह उपचार प्राथमिक (भौतिक) तथा द्वितीयक (जैविक) — दो चरणों में संपन्न होता है।
प्राथमिक उपचार — भौतिक निष्कासन
इसमें वाहितमल से बड़े-छोटे कणों को निस्यंदन (फिल्ट्रेशन) तथा अवसादन (सेडीमेंटेशन) द्वारा भौतिक रूप से अलग किया जाता है — तैरता कूड़ा-करकट, फिर ग्रिट (रेत/मृदा), फिर प्राथमिक आंपक (स्लज) नीचे बैठ जाता है। बहिःस्राव (सुपरनैटेंट) द्वितीयक उपचार के लिए भेजा जाता है।
द्वितीयक उपचार — जैविक उपचार
प्राथमिक बहिःस्राव को बड़े वायुवीय टैंकों में भेजा जाता है, जहाँ इसे लगातार हिलाया जाता है और वायु पंप की जाती है। इससे वायुवीय सूक्ष्मजीवों की प्रबल वृद्धि ऊर्णक (फ्लॉक) के रूप में होती है — ये सूक्ष्मजीव बहिःस्राव में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत करते हैं, जिससे बहिःस्राव का BOD (Biochemical Oxygen Demand) महत्वपूर्ण रूप से घट जाता है।
जितना अधिक BOD, उतना अधिक प्रदूषण
BOD पर्याप्त घटने पर बहिःस्राव को निःसादन टैंक में भेजा जाता है, जहाँ फ्लॉक अवसादित होकर सक्रियीत आंपक (activated sludge) बनाता है। इसका एक छोटा भाग पुनः वायुवीय टैंक में निवेशद्रव्य के रूप में लौटाया जाता है। शेष आंपक को अवायवीय आंपक संपाचित्र में भेजा जाता है, जहाँ अवायवीय जीवाणु इसे पचाकर मीथेन, H₂S, CO₂ — बायोगैस — उत्पन्न करते हैं। उपचारित बहिःस्राव को नदियों व झरनों में छोड़ा जा सकता है।
- प्राथमिक उपचार = भौतिक (निस्यंदन+अवसादन); द्वितीयक = जैविक
- BOD — अधिक BOD = अधिक प्रदूषण
- सक्रियीत आंपक का एक भाग पुनः वायुवीय टैंक में (निवेशद्रव्य), शेष अवायवीय आंपक संपाचित्र में
- अवायवीय पाचन से बनने वाली गैसें — मीथेन, H₂S, CO₂ (बायोगैस)
5 बायोगैस उत्पादन
'गोबर गैस' — ग्रामीण ऊर्जा का प्राकृतिक स्रोत
बायोगैस — गैसों का मिश्रण (मुख्यतः मीथेन), जो सूक्ष्मजीवी सक्रियता द्वारा उत्पन्न होता है। मीथैनोजेन (जैसे मीथैनोबैक्टीरियम) नामक जीवाणु सैल्यूलोजीय पदार्थों पर अवायवीय रूप से वृद्धि कर CO₂ व H₂ के साथ बड़ी मात्रा में मीथेन उत्पन्न करते हैं।
मीथैनोजेन पशुओं के रूमेन (प्रथम आमाशय) में भी पाए जाते हैं, जहाँ वे सैल्यूलोज तोड़ने में सहायक होते हैं। पशुओं के मल (गोबर) में ये प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं — इसी कारण गोबर से 'गोबर गैस' बनाई जाती है।
बायोगैस संयंत्र (10–15 फीट गहरा टैंक) में गोबर की कर्दम भरी जाती है। सूक्ष्मजीवी सक्रियता से गैस बनती है, जिससे ऊपर रखा सचल ढक्कन ऊपर उठता है। गैस पाइप द्वारा आस-पास के घरों में आपूर्ति की जाती है — खाना बनाने व प्रकाश उत्पन्न करने में प्रयुक्त। उपयोग की गई कर्दम उर्वरक के रूप में प्रयुक्त होती है।
- बायोगैस का मुख्य घटक = मीथेन (CH₄)
- मीथेन उत्पादक जीवाणु = मीथैनोजेन (जैसे मीथैनोबैक्टीरियम)
- मीथैनोजेन पशुओं के रूमेन में पाए जाते हैं
- भारत में बायोगैस तकनीक विकास — IARI व KVIC
6 जैव नियंत्रण कारक
रसायनों के बिना कीट व रोग नियंत्रण
पीड़कों व पादप रोगों के नियंत्रण के लिए जैव वैज्ञानिक विधि का प्रयोग जैव नियंत्रण कहलाता है। यह रासायनिक कीटनाशियों — जो मनुष्यों, जीव-जन्तुओं व पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं — का विकल्प प्रदान करता है।
- बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bt) — जीवाणु, बटरफ्लाई केटरपिलर नियंत्रण हेतु। इसका टॉक्सिन लार्वा की पाचननली में निकलता है, जिससे लार्वा की मृत्यु हो जाती है। Bt-कॉटन आनुवंशिक इंजीनियरिंग द्वारा Bt टॉक्सिन जीन युक्त पादप का उदाहरण है।
- ट्राइकोडर्मा — मुक्त-जीवित कवक, पादप रोगजनकों के विरुद्ध जैव नियंत्रण कारक।
- बैक्यूलोवायरस (न्यूक्लियोपॉलीहीड्रोसिस वायरस) — प्रजाति-विशिष्ट कीटनाशी, गैर-लक्ष्य जीवों के लिए हानिरहित, पर्यावरण-अनुकूल।
- बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bt) — Bt-कॉटन, आनुवंशिक इंजीनियरिंग से जुड़ा
- ट्राइकोडर्मा — मुक्त-जीवित कवक, पादप रोग नियंत्रण
- बैक्यूलोवायरस — प्रजाति-विशिष्ट, संकीर्ण-स्पेक्ट्रम
- लेडीबर्ड बीटल व ड्रैगनफ्लाई — गैर-सूक्ष्मजीवी जैव नियंत्रण
7 जैव उर्वरक
रासायनिक उर्वरकों का प्राकृतिक विकल्प
जैव उर्वरक — वे सूक्ष्मजीव जो मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं। इनका मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा सायनोबैक्टीरिया होते हैं।
| जैव उर्वरक | प्रकार | भूमिका |
|---|---|---|
| राइज़ोबियम | जीवाणु (सहजीवी) | लैग्यूमिनस पादपों की जड़ों में ग्रंथियाँ बनाकर नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
| ऐज़ोस्पाइरिलम, ऐज़ोबैक्टर | जीवाणु (मुक्तजीवी) | मृदा में मुक्तावस्था में नाइट्रोजन स्थिरीकरण |
| माइकोराइज़ा (ग्लोमस) | कवक (सहजीवी) | पादप जड़ों से सहजीवी संबंध, फॉस्फोरस अवशोषण |
| सायनोबैक्टीरिया (ऐनाबीना, नॉस्टॉक, ऑसिलेटोरिया) | सायनोबैक्टीरिया | धान के खेतों में नाइट्रोजन स्थिरीकरण + कार्बनिक पदार्थ वृद्धि |
- मृदा की उर्वरता बढ़ाते हैं, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाते हैं।
- माइकोराइज़ा (ग्लोमस) फॉस्फोरस अवशोषण बढ़ाता है, मूलवातोढ़ रोगजनकों के प्रति प्रतिरोधकता, लवणता-सूखा सहनशीलता भी प्रदान करता है।
- सायनोबैक्टीरिया मृदा में कार्बनिक पदार्थ बढ़ाकर उसकी उर्वरता बढ़ाते हैं।
- राइज़ोबियम — सहजीवी (लैग्यूमिनस पादपों के साथ)
- ऐज़ोस्पाइरिलम, ऐज़ोबैक्टर — मुक्तजीवी (मृदा में)
- माइकोराइज़ा — कवक-पादप सहजीवी, फॉस्फोरस अवशोषण
- सायनोबैक्टीरिया — ऐनाबीना, नॉस्टॉक, ऑसिलेटोरिया
- वॉल्वॉक्स — नाइट्रोजन स्थिरीकरण नहीं कर सकता (यह हरित शैवाल है)
★ NEET फैक्ट‑शीट
त्वरित पुनरावृत्ति हेतु प्रमुख बिंदु
| अवधारणा | प्रमुख तथ्य |
|---|---|
| दही निर्माण | लैक्टोबैसिलस (LAB) — विटामिन B₁₂ बढ़ाता है |
| ब्रेड/अल्कोहलीय पेय | सैकेरोमाइसीज़ सैरीविसी |
| स्विस चीज़ छिद्र | प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई → CO₂ |
| पेनिसिलिन | पेनीसीलियम नोटेटम → फ्लेमिंग (1928), नोबल 1945 |
| सिट्रिक अम्ल | एस्परजिलस नाइगर |
| साइक्लोस्पोरिन-ए | ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम (इम्यूनोसप्रेसिव) |
| स्टैटिन | मोनॉस्कस परप्यूरीअस (कोलेस्ट्रॉल घटाना) |
| स्ट्रैप्टोकाइनेज | स्ट्रैप्टोकोकस (क्लॉट बस्टर) |
| BOD | अधिक BOD = अधिक प्रदूषण |
| सक्रियीत आंपक | द्वितीयक उपचार में बना अवसाद |
| बायोगैस (मुख्य) | मीथेन (CH₄) — मीथैनोजेन द्वारा |
| जैव नियंत्रण | Bt, ट्राइकोडर्मा, बैक्यूलोवायरस |
| नाइट्रोजन स्थिरीकरण (सहजीवी) | राइज़ोबियम |
| नाइट्रोजन स्थिरीकरण (मुक्तजीवी) | ऐज़ोस्पाइरिलम, ऐज़ोबैक्टर |
| माइकोराइज़ा | ग्लोमस (फॉस्फोरस अवशोषण) |
| सायनोबैक्टीरिया | ऐनाबीना, नॉस्टॉक, ऑसिलेटोरिया |
📝 NEET में पूछे जा चुके प्रश्न
विगत वर्षों के प्रश्नों की शैली — अभ्यास हेतु
1 स्तंभ-I को स्तंभ-II से सुमेलित करें — (a) साइट्रिक अम्ल (b) साइक्लोस्पोरिन A (c) स्टैटिन (d) ब्युटिरिक अम्ल; स्तंभ-II — (i) ट्राइकोडर्मा (ii) क्लॉस्ट्रीडियम (iii) एस्परजिलस (iv) मोनॉस्कस।
उत्तर: a-iii, b-i, c-iv, d-ii
साइट्रिक अम्ल → एस्परजिलस नाइगर (iii); साइक्लोस्पोरिन A → ट्राइकोडर्मा (i); स्टैटिन → मोनॉस्कस (iv); ब्युटिरिक अम्ल → क्लॉस्ट्रीडियम (ii)।
2 जुगाली करने वाले पशुओं (रुमिनेंट) के गोबर से बायोगैस उत्पादन के लिए उत्तरदायी आदिम प्रोकैरियोट कौन-से हैं?
उत्तर: मीथैनोजेन
मीथैनोजेन अवायवीय आर्किबैक्टीरिया हैं, जो गोबर व कार्बनिक अपशिष्ट से मीथेन गैस बनाते हैं।
3 मीथैनोजेन के संबंध में कौन-सा कथन सही नहीं है?
उत्तर: ये वायवीय रूप से वृद्धि करते हुए सैल्यूलोज-समृद्ध भोजन तोड़ते हैं
मीथैनोजेन अवायवीय परिस्थितियों में वृद्धि करते हैं — यह इस अध्याय का सबसे बार दोहराया जाने वाला भ्रामक विकल्प है (2016 व 2019 दोनों में पूछा गया)।
4 वाहितमल उपचार का कौन-सा चरण निलंबित ठोस कणों (suspended solids) को हटाता है?
उत्तर: प्राथमिक उपचार
प्राथमिक उपचार में निस्यंदन व अवसादन जैसी भौतिक विधियों से ठोस कण अलग किए जाते हैं — कोई जैविक हस्तक्षेप नहीं।
5 दूध का दही में परिवर्तन उसकी पोषण गुणवत्ता को किस विटामिन की मात्रा बढ़ाकर सुधारता है?
उत्तर: विटामिन B₁₂
LAB (लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया) की वृद्धि के दौरान विटामिन B₁₂ की मात्रा बढ़ जाती है।
6 जैव नियंत्रण कारकों का सही समूह चुनें।
उत्तर: ट्राइकोडर्मा, बैक्यूलोवायरस, बैसिलस थुरिंजिएंसिस
ये तीनों वास्तविक जैव नियंत्रण कारक हैं। शेष विकल्पों में राइज़ोबियम/नॉस्टॉक जैसे जैव उर्वरक मिश्रित कर दिए गए हैं।
7 निम्नलिखित जीवों को उनके उत्पादों से सुमेलित करें — (a) लैक्टोबैसिलस (b) सैकेरोमाइसीज़ (c) एस्परजिलस नाइगर (d) एसीटोबैक्टर; उत्पाद — (i) चीज़ (ii) दही (iii) साइट्रिक अम्ल (iv) ब्रेड (v) एसीटिक अम्ल।
उत्तर: a-ii, b-iv, c-iii, d-v
लैक्टोबैसिलस-दही (ii), सैकेरोमाइसीज़-ब्रेड (iv), एस्परजिलस-साइट्रिक अम्ल (iii), एसीटोबैक्टर-एसीटिक अम्ल (v)।
8 एक व्यावसायिक रक्त-कोलेस्ट्रॉल घटाने वाला कारक क्या है?
उत्तर: स्टैटिन
मोनॉस्कस परप्यूरीअस यीस्ट से प्राप्त स्टैटिन, कोलेस्ट्रॉल-संश्लेषण एंजाइम को स्पर्धात्मक रूप से रोकता है।
9 'स्विस चीज़' में बड़े-बड़े छिद्र बनने का कारण क्या है?
उत्तर: प्रोपिओनिबैक्टीरियम शारमैनाई द्वारा प्रचुर CO₂ उत्पादन
यह जीवाणु बड़ी मात्रा में CO₂ उत्पन्न करता है, जो स्विस चीज़ में विशिष्ट बड़े छिद्र बनाता है।
10 निम्नलिखित में से किस जोड़े के दोनों सूक्ष्मजीव जैव उर्वरक के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं?
उत्तर: सायनोबैक्टीरिया व राइज़ोबियम
दोनों नाइट्रोजन-स्थिरीकरण द्वारा मृदा-उर्वरता बढ़ाते हैं। राइज़ोपस व एस्परजिलस जैव उर्वरक नहीं हैं।
➕ अतिरिक्त NEET तथ्य
सूक्ष्म बिंदु जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं
- इस अध्याय से NEET में प्रतिवर्ष 2–3 प्रश्न (~8–12 अंक) पूछे जाते हैं — 2016 व 2026 में सर्वाधिक 5-6 प्रश्न आए थे।
- सबसे अधिक पूछे जाने वाले टॉपिक — सूक्ष्मजीव-उत्पाद सुमेलन, वाहितमल उपचार का क्रम, जैव उर्वरक व जैव नियंत्रण।
- चार कार्बनिक अम्ल: साइट्रिक→एस्परजिलस, एसीटिक→एसीटोबैक्टर, लैक्टिक→लैक्टोबैसिलस, ब्युटिक→क्लोस्ट्रीडियम — इन्हें NEET में हर वर्ष सुमेलित करके पूछा जाता है।
- सहजीवी vs मुक्तजीवी: सहजीवी → राइज़ोबियम (लैग्यूमिनस जड़ों में); मुक्तजीवी → ऐज़ोस्पाइरिलम, ऐज़ोबैक्टर (मृदा में)।
- मीथैनोजेन सदैव अवायवीय होते हैं — "वायवीय रूप से वृद्धि" वाला कथन हमेशा गलत है (2016 व 2019 दोनों में यह ट्रैप दोहराया गया)।
- मीथैनोजेन रूमेन में पाए जाते हैं और सैल्यूलोज तोड़ने में मदद करते हैं।
- वॉल्वॉक्स — हरित शैवाल है, नाइट्रोजन स्थिरीकरण नहीं कर सकता (2025 में पूछा गया)।
- Bt-कॉटन — आनुवंशिक इंजीनियरिंग (अध्याय 10) से जुड़ा है, Bt जीवाणु से प्राप्त टॉक्सिन जीन पादप में डाला जाता है।
- इस अध्याय की पुनरावृत्ति के लिए — सूक्ष्मजीव-उत्पाद तालिका, वाहितमल उपचार का क्रम, जैव उर्वरक व जैव नियंत्रण का वर्गीकरण — इन तीनों पर विशेष ध्यान दें, इससे अध्याय का अधिकांश भारांश कवर हो जाता है।
✓ संक्षिप्त सार
घरेलू उत्पाद
लैक्टोबैसिलस (दही), सैकेरोमाइसीज़ (ब्रेड), प्रोपिओनिबैक्टीरियम (स्विस चीज़) — रोज़मर्रा के खाद्य पदार्थों में सूक्ष्मजीवों की भूमिका।
औद्योगिक उत्पाद
पेनिसिलिन (पहला एंटीबायोटिक), कार्बनिक अम्ल, साइक्लोस्पोरिन-ए, स्टैटिन, स्ट्रैप्टोकाइनेज — सूक्ष्मजीवों से प्राप्त मूल्यवान जैवसक्रिय अणु।
वाहितमल उपचार
प्राथमिक (भौतिक) + द्वितीयक (जैविक) उपचार से BOD घटाकर जल को प्रदूषण-मुक्त किया जाता है।
बायोगैस
मीथैनोजेन (मीथैनोबैक्टीरियम) अवायवीय परिस्थितियों में मीथेन-प्रधान बायोगैस उत्पन्न करते हैं — ग्रामीण ऊर्जा का सस्ता स्रोत।
जैव नियंत्रण
Bt (बैसिलस थुरिंजिएंसिस), ट्राइकोडर्मा, बैक्यूलोवायरस — रसायनों के बिना पीड़क व रोग नियंत्रण, पर्यावरण-अनुकूल।
जैव उर्वरक
राइज़ोबियम (सहजीवी), ऐज़ोस्पाइरिलम (मुक्तजीवी), माइकोराइज़ा (फॉस्फोरस), सायनोबैक्टीरिया — मृदा-पोषकता बढ़ाने वाले सूक्ष्मजीव।
? अभ्यास प्रश्न-उत्तर
प्रत्येक प्रश्न पर क्लिक करें एवं उत्तर देखें
प्रश्न 1 जीवाणुओं को नग्न नेत्रों से नहीं देखा जा सकता, परंतु सूक्ष्मदर्शी की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको घर से प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो, तो कौन-सा नमूना ले जायेंगे और क्यों?
दही या इडली/डोसा का किण्वित आटा — इसमें लाखों-करोड़ों लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया जीवित अवस्था में मौजूद होते हैं। इस नमूने को पोषक माध्यम पर संवर्धित (कल्चर) करके कालोनियाँ बनाई जा सकती हैं, जिन्हें नग्न नेत्र से देखा जा सकता है — इस तरह सूक्ष्मदर्शी के बिना भी सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति सिद्ध की जा सकती है।
प्रश्न 2 उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध करें।
- इडली/डोसा के आटे में बैक्टीरिया किण्वन के दौरान CO₂ उत्पन्न करते हैं, जिससे आटा फूल जाता है।
- अवायवीय आंपक संपाचित्र में मीथैनोजेन मीथेन, H₂S, CO₂ (बायोगैस) उत्पन्न करते हैं।
प्रश्न 3 किस भोजन में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन करें।
- दही — LAB मुख्य रूप से दही में पाए जाते हैं।
- लाभ: (1) दूध प्रोटीन को स्कंदित कर दही बनाते हैं, (2) विटामिन B₁₂ बढ़ाते हैं, (3) आंतों में प्राकृतिक प्रोबायोटिक की तरह हानिकारक रोगजनकों की वृद्धि रोकते हैं।
प्रश्न 4 कुछ पारंपरिक भारतीय आहार जो गेहूँ, चावल व चना से बनते हैं और जिनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताएँ।
इडली व डोसा — चावल व दाल के किण्वित आटे से बनते हैं। ब्रेड — गेहूँ के आटे में सैकेरोमाइसीज़ सैरीविसी (बैकर यीस्ट) द्वारा किण्वन। इन सभी में सूक्ष्मजीवों की किण्वन-क्रिया भोजन की बनावट, स्वाद व पोषण गुणवत्ता बेहतर बनाती है।
प्रश्न 5 हानिप्रद जीवाणुओं द्वारा उत्पन्न रोगों के नियंत्रण में सूक्ष्मजीव किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
कुछ सूक्ष्मजीव प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) नामक रासायनिक पदार्थ बनाते हैं, जो हानिकारक जीवाणुओं की वृद्धि को रोकते या उन्हें मार देते हैं। उदाहरण — पेनीसीलियम नोटेटम से प्राप्त पेनिसिलिन ने प्लेग, डिप्थीरिया, कुष्ठरोग जैसे भयानक जीवाणुजनित रोगों के उपचार में मानव की क्षमता में भारी वृद्धि की है।
प्रश्न 6 किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखें, जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों के उत्पादन में किया जाता है।
- पेनीसीलियम नोटेटम — पेनिसिलिन (प्रतिजैविक) का स्रोत।
- ट्राइकोडर्मा पॉलोस्पोरम — साइक्लोस्पोरिन-ए (इम्यूनोसप्रेसिव) का स्रोत (यद्यपि यह प्रतिजैविक नहीं, जैवसक्रिय अणु है)।
प्रश्न 7 वाहितमल से आप क्या समझते हैं? वाहितमल हमारे लिए किस प्रकार हानिप्रद हैं?
वाहितमल (सीवेज) — नगरों-शहरों से उत्पन्न व्यर्थ जल, जिसमें मलमूत्र, कार्बनिक पदार्थ व रोगजनक सूक्ष्मजीव होते हैं। यदि बिना उपचारित नदियों में छोड़ा जाए तो — (1) जल प्रदूषित होता है, (2) BOD बढ़ने से ऑक्सीजन घटती है, (3) जल-जनित रोग (हैज़ा, टाइफाइड) फैलते हैं।