अध्याय 18: विद्युत – Junior School Online
🔬 Science – Class 7 – Chapter 18

⚡ विद्युत (Electricity)

जानें कि घर्षण द्वारा वस्तुएँ कैसे आवेशित होती हैं, आवेशों के प्रकार – धन एवं ऋण, आवेशों का आकर्षण एवं प्रतिकर्षण, विद्युतदर्शी, चालक एवं कुचालक, स्थिर विद्युत प्रेरण, आकाशीय विद्युत (तड़ित) तथा तड़ित चालक के बारे में विस्तार से।

📖 अध्याय सामग्री (Chapter Content)

1 घर्षण द्वारा वस्तुओं का आवेशन

आवेशन (Charging) – कुछ वस्तुओं को आपस में रगड़ने पर उनमें अन्य हल्की वस्तुओं को आकर्षित करने का गुण आ जाता है।

  • घर्षण द्वारा आवेशन: जब किसी वस्तु को किसी दूसरी वस्तु से रगड़ा जाता है तो वह आवेशित हो जाती है।
  • उदाहरण: कंघे को सूखे बालों में रगड़ने पर वह कागज के टुकड़ों को आकर्षित करता है। प्लास्टिक की स्केल को रगड़ने पर भी ऐसा ही होता है।
  • गुब्बारा प्रयोग: फूले हुए गुब्बारे को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर वह दीवार से चिपक जाता है – यह आवेशन का प्रमाण है।
  • स्थिर विद्युत (Static Electricity): आवेश जो किसी वस्तु की सतह पर स्थिर रहता है, स्थिर विद्युत आवेश कहलाता है।
⚡ घर्षण द्वारा आवेशन
गुब्बारा ऊन आवेशित + + + दीवार चिपकता
चित्र 18.1: गुब्बारे को ऊन से रगड़कर आवेशित करना

💡 घर्षण द्वारा आवेशन: जब दो वस्तुओं को रगड़ा जाता है, तो दोनों आवेशित हो जाती हैं – एक पर धन (+) तथा दूसरी पर ऋण (-) आवेश।

2 आवेशों के प्रकार – धन एवं ऋण

आवेश (Charge) – वस्तुओं पर उत्पन्न होने वाला विशिष्ट गुण जो आकर्षण/प्रतिकर्षण उत्पन्न करता है।

🔬 बेंजामिन फ्रेंकलिन का नामकरण (1750)

  • धनात्मक आवेश (+): काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ने पर काँच पर उत्पन्न आवेश।
  • ऋणात्मक आवेश (-): एबोनाइट (अम्बर) को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर एबोनाइट पर उत्पन्न आवेश।
क्र.सं.पारस्परिक घर्षणधन आवेशऋण आवेश
1काँच + रेशमकाँच पररेशम पर
2एबोनाइट + ऊनऊन परएबोनाइट पर
3प्लास्टिक स्केल + ऊनऊन परप्लास्टिक स्केल पर
धनात्मक आवेश (+)
काँच + रेशम → काँच पर
ऋणात्मक आवेश (-)
एबोनाइट + ऊन → एबोनाइट पर
⚖️
समान परिमाण, विपरीत आवेश
दोनों वस्तुओं पर समान मात्रा में

📌 महत्वपूर्ण: आवेश दो प्रकार के होते हैं – धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-)। समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।

3 🧲 आकर्षण एवं प्रतिकर्षण – आवेशों के बीच क्रिया
➕ ➕
समान आवेश → प्रतिकर्षण
धन + धन = प्रतिकर्षण
➖ ➖
समान आवेश → प्रतिकर्षण
ऋण + ऋण = प्रतिकर्षण
➕ ➖
विपरीत आवेश → आकर्षण
धन + ऋण = आकर्षण
  • समान आवेश (Like Charges): एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं।
  • विपरीत आवेश (Unlike Charges): एक-दूसरे को आकर्षित (attract) करते हैं।
  • आवेशित एवं अनावेशित: आवेशित वस्तु अनावेशित वस्तु को आकर्षित करती है (प्रतिकर्षित नहीं)।
  • प्रतिकर्षण आवेशन का निश्चित प्रमाण है – यदि दो वस्तुएँ प्रतिकर्षित करें तो दोनों आवेशित हैं।
🧲 आवेशों के बीच आकर्षण एवं प्रतिकर्षण
समान आवेश → प्रतिकर्षण + + प्रतिकर्षण विपरीत आवेश → आकर्षण + - →← आकर्षण आवेशित + अनावेशित → आकर्षण + 0
चित्र 18.2: समान आवेश – प्रतिकर्षण, विपरीत आवेश – आकर्षण

💡 नियम: समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।
प्रतिकर्षण आवेशन का निश्चित प्रमाण है – यदि दो वस्तुएँ प्रतिकर्षित करें तो दोनों आवेशित हैं।

4 🔬 विद्युतदर्शी (Electroscope)

विद्युतदर्शी (Electroscope) – एक उपकरण जो किसी वस्तु पर आवेश की उपस्थिति के बारे में बताता है।

  • संरचना: धातु की छड़ के निचले सिरे पर ताँबा/पीतल की बारीक पत्री (पत्तियाँ) लगी होती हैं। छड़ के ऊपरी सिरे पर धातु की वृत्ताकार चकती होती है। पूरी व्यवस्था काँच के जार में रखी होती है।
  • कार्य विधि: जब आवेशित वस्तु को चकती से स्पर्श कराते हैं, तो आवेश चालन द्वारा पत्तियों तक पहुँचता है। समान आवेश आने पर पत्तियाँ प्रतिकर्षित होकर फैल जाती हैं।
  • आवेश की मात्रा: पत्तियाँ जितना अधिक फैलती हैं, आवेश उतना ही अधिक होता है।
  • अनावेशित अवस्था: पत्तियाँ एक-दूसरे के समान्तर लटकी रहती हैं।
🔬 विद्युतदर्शी (Electroscope)
θ चकती धातु की छड़ पत्तियाँ (फैली हुई) आवेशित होने पर
चित्र 18.3: साधारण विद्युतदर्शी – आवेशित होने पर पत्तियाँ फैल जाती हैं

🔬 विद्युतदर्शी का उपयोग: किसी वस्तु पर आवेश की उपस्थिति तथा आवेश की प्रकृति (धन/ऋण) जानने के लिए।

5 🔌 विद्युत चालक एवं विद्युतरोधी

सुचालक (Conductor) – वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत आवेश प्रवाहित हो सकता है।

  • उदाहरण: लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, चाँदी, सोना, मानव शरीर, जल (अशुद्ध)।

कुचालक / विद्युतरोधी (Insulator) – वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत आवेश प्रवाहित नहीं हो सकता।

  • उदाहरण: लकड़ी, रबर, प्लास्टिक, काँच, थर्मोकोल, सूखा कागज़, मोम, चीनी मिट्टी (पोर्सिलिन)।
🔌 चालक एवं कुचालक – आवेश का प्रवाह
(अ) धातु का तार – चालक A तार B आवेश प्रवाहित → (ब) प्लास्टिक – कुचालक A प्लास्टिक B आवेश प्रवाहित नहीं →
चित्र 18.4: (अ) धातु का तार चालक है – आवेश प्रवाहित होता है; (ब) प्लास्टिक कुचालक है

चालक: धातुएँ (लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम) – आवेश प्रवाहित होता है।
कुचालक: लकड़ी, रबर, प्लास्टिक, काँच – आवेश प्रवाहित नहीं होता।

6 🔄 स्थिर विद्युत प्रेरण (Electrostatic Induction)

स्थिर विद्युत प्रेरण – जब किसी चालक के पास कोई आवेशित वस्तु लाई जाती है, तो चालक भी आवेशित हो जाता है – निकट के सिरे पर विपरीत आवेश तथा दूर के सिरे पर समान आवेश उत्पन्न होता है।

  • प्रक्रिया:
    1. धन आवेशित छड़ को चालक के समीप रखें → निकटवर्ती सिरा ऋणात्मक, दूर वाला धनात्मक हो जाता है।
    2. चालक के दूर वाले सिरे को अंगुली से छू दें → पृथ्वी से ऋणावेश (इलेक्ट्रॉन) आकर धन आवेश को उदासीन कर देते हैं।
    3. अब चालक को हटा लें → चालक ऋणावेशित हो जाता है।
  • इसी प्रकार ऋण आवेशित छड़ से चालक को धनावेशित किया जा सकता है।
🔄 स्थिर विद्युत प्रेरण
+ + + धन आवेशित छड़ - - - + + + ऋण आवेश धन आवेश अंगुली से स्पर्श - - - अंगुली पृथ्वी
चित्र 18.5: स्थिर विद्युत प्रेरण द्वारा आवेशन

🔄 प्रेरण द्वारा आवेशन: बिना स्पर्श के किसी चालक को आवेशित करना – निकट के सिरे पर विपरीत, दूर के सिरे पर समान आवेश।

7 ⛈️ आकाशीय विद्युत (तड़ित) – बिजली कैसे गिरती है

आकाशीय विद्युत (तड़ित) – बादलों में घर्षण के कारण उत्पन्न विद्युत विसर्जन।

  • कारण: हवाओं और बादलों में घर्षण के कारण बादल आवेशित हो जाते हैं – ऊपरी बादल धन (+) तथा नीचे वाले ऋण (-) आवेशित हो जाते हैं।
  • विद्युत विसर्जन: जब आवेशित बादलों के बीच या बादल और पृथ्वी के बीच नम वायु चालक बन जाती है, तो तीव्र विद्युत धारा प्रवाहित होती है – यही बिजली (तड़ित दमक) है।
  • ताप: तड़ित के स्थान पर ताप 30,000°C तक हो जाता है।
  • गर्जन: अत्यधिक ऊष्मा के कारण वायु का तीव्र प्रसार होता है – जिससे मेघ गर्जन की ध्वनि उत्पन्न होती है।
  • प्रथम अध्ययन: बेंजामिन फ्रेंकलिन ने 1752 में आकाशीय विद्युत का अध्ययन किया।
⛈️ आकाशीय विद्युत – तड़ित
+ + - - तड़ित
चित्र 18.6: बादलों के मध्य विद्युत विसर्जन – तड़ित

⚡ तड़ित से हानियाँ एवं लाभ

❌ हानियाँ
  • भवनों, पेड़ों, जीव-जन्तुओं पर घातक प्रभाव
  • विद्युत उपकरणों के जल जाने की सम्भावना
✅ लाभ
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड बनकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाता है
  • ओजोन (O₃) बनाता है जो सूर्य की हानिकारक किरणों से रक्षा करता है

⚡ तड़ित आघात से सुरक्षा के उपाय

  • खुले मैदान में जमीन पर लेट जाएँ
  • पेड़ के नीचे खड़े न हों
  • बड़े भवनों के पास खड़े न हों
  • ऊँचे स्थानों पर लगे धातु के उपकरणों को न छूएँ
  • कार में हों तो खिड़कियाँ बंद करके अन्दर बैठें
  • ऊँचे भवनों पर तड़ित चालक (Lightning Conductor) लगाएँ

⛈️ तड़ित चालक: ताँबे की मोटी पत्ती जो भवन के ऊपरी सिरे से पृथ्वी के अन्दर तक जाती है – बिजली को पृथ्वी में विसर्जित करके भवन की रक्षा करती है।

8 📖 सारांश – हमने क्या सीखा
  • घर्षण द्वारा आवेशन: वस्तुओं को रगड़कर आवेशित किया जा सकता है – यह स्थिर विद्युत है।
  • आवेश के प्रकार: धनात्मक (+) एवं ऋणात्मक (-) – बेंजामिन फ्रेंकलिन द्वारा नामकरण।
  • आवेशों का नियम: समान आवेश प्रतिकर्षण, विपरीत आवेश आकर्षण।
  • प्रतिकर्षण: आवेशन का निश्चित प्रमाण है।
  • विद्युतदर्शी: आवेश की उपस्थिति जानने का उपकरण – पत्तियाँ फैलती हैं।
  • चालक: धातुएँ – आवेश प्रवाहित होता है।
  • कुचालक: लकड़ी, रबर, प्लास्टिक – आवेश प्रवाहित नहीं होता।
  • प्रेरण: बिना स्पर्श के चालक को आवेशित करना।
  • तड़ित: बादलों में घर्षण से उत्पन्न विद्युत विसर्जन – तड़ित चालक से सुरक्षा।

✅ मुख्य बिंदु

विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं – धन एवं ऋण।
घर्षण, चालन एवं प्रेरण – आवेशन की तीन विधियाँ।
तड़ित आघात से बचाव के लिए तड़ित चालक का उपयोग करें।

🧩 मिलान अभ्यास – 18: विद्युत

✅ प्रत्येक row में 6 विकल्प दिखेंगे – सही चुनें और तुरंत परिणाम देखें।

🧠 Practice Quiz – 18: विद्युत

🎯 आपकी प्रगति
स्कोर: 0/0

✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।

📝 इस इकाई में हमने सीखा

घर्षण द्वारा आवेशन – रगड़ने पर वस्तुएँ आवेशित होती हैं
धनात्मक आवेश (+) – काँच + रेशम → काँच पर
ऋणात्मक आवेश (-) – एबोनाइट + ऊन → एबोनाइट पर
समान आवेश – प्रतिकर्षण (repel)
विपरीत आवेश – आकर्षण (attract)
विद्युतदर्शी – आवेश का पता लगाना
चालक – लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम
कुचालक – लकड़ी, रबर, प्लास्टिक
प्रेरण – बिना स्पर्श आवेशन
तड़ित – बादलों में विद्युत विसर्जन
तड़ित चालक – ताँबे की पत्ती, भवन सुरक्षा
फ्रेंकलिन – आवेशों का नामकरण, तड़ित अध्ययन
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