⚡ विद्युत (Electricity)
जानें कि घर्षण द्वारा वस्तुएँ कैसे आवेशित होती हैं, आवेशों के प्रकार – धन एवं ऋण, आवेशों का आकर्षण एवं प्रतिकर्षण, विद्युतदर्शी, चालक एवं कुचालक, स्थिर विद्युत प्रेरण, आकाशीय विद्युत (तड़ित) तथा तड़ित चालक के बारे में विस्तार से।
📋 Chapter Overview – एक नज़र में
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📖 अध्याय सामग्री (Chapter Content)
आवेशन (Charging) – कुछ वस्तुओं को आपस में रगड़ने पर उनमें अन्य हल्की वस्तुओं को आकर्षित करने का गुण आ जाता है।
- घर्षण द्वारा आवेशन: जब किसी वस्तु को किसी दूसरी वस्तु से रगड़ा जाता है तो वह आवेशित हो जाती है।
- उदाहरण: कंघे को सूखे बालों में रगड़ने पर वह कागज के टुकड़ों को आकर्षित करता है। प्लास्टिक की स्केल को रगड़ने पर भी ऐसा ही होता है।
- गुब्बारा प्रयोग: फूले हुए गुब्बारे को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर वह दीवार से चिपक जाता है – यह आवेशन का प्रमाण है।
- स्थिर विद्युत (Static Electricity): आवेश जो किसी वस्तु की सतह पर स्थिर रहता है, स्थिर विद्युत आवेश कहलाता है।
💡 घर्षण द्वारा आवेशन: जब दो वस्तुओं को रगड़ा जाता है, तो दोनों आवेशित हो जाती हैं – एक पर धन (+) तथा दूसरी पर ऋण (-) आवेश।
आवेश (Charge) – वस्तुओं पर उत्पन्न होने वाला विशिष्ट गुण जो आकर्षण/प्रतिकर्षण उत्पन्न करता है।
🔬 बेंजामिन फ्रेंकलिन का नामकरण (1750)
- धनात्मक आवेश (+): काँच की छड़ को रेशम के कपड़े से रगड़ने पर काँच पर उत्पन्न आवेश।
- ऋणात्मक आवेश (-): एबोनाइट (अम्बर) को ऊनी कपड़े से रगड़ने पर एबोनाइट पर उत्पन्न आवेश।
| क्र.सं. | पारस्परिक घर्षण | धन आवेश | ऋण आवेश |
|---|---|---|---|
| 1 | काँच + रेशम | काँच पर | रेशम पर |
| 2 | एबोनाइट + ऊन | ऊन पर | एबोनाइट पर |
| 3 | प्लास्टिक स्केल + ऊन | ऊन पर | प्लास्टिक स्केल पर |
📌 महत्वपूर्ण: आवेश दो प्रकार के होते हैं – धनात्मक (+) और ऋणात्मक (-)। समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।
- समान आवेश (Like Charges): एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं।
- विपरीत आवेश (Unlike Charges): एक-दूसरे को आकर्षित (attract) करते हैं।
- आवेशित एवं अनावेशित: आवेशित वस्तु अनावेशित वस्तु को आकर्षित करती है (प्रतिकर्षित नहीं)।
- प्रतिकर्षण आवेशन का निश्चित प्रमाण है – यदि दो वस्तुएँ प्रतिकर्षित करें तो दोनों आवेशित हैं।
💡 नियम: समान आवेश प्रतिकर्षित करते हैं, विपरीत आवेश आकर्षित करते हैं।
प्रतिकर्षण आवेशन का निश्चित प्रमाण है – यदि दो वस्तुएँ प्रतिकर्षित करें तो दोनों आवेशित हैं।
विद्युतदर्शी (Electroscope) – एक उपकरण जो किसी वस्तु पर आवेश की उपस्थिति के बारे में बताता है।
- संरचना: धातु की छड़ के निचले सिरे पर ताँबा/पीतल की बारीक पत्री (पत्तियाँ) लगी होती हैं। छड़ के ऊपरी सिरे पर धातु की वृत्ताकार चकती होती है। पूरी व्यवस्था काँच के जार में रखी होती है।
- कार्य विधि: जब आवेशित वस्तु को चकती से स्पर्श कराते हैं, तो आवेश चालन द्वारा पत्तियों तक पहुँचता है। समान आवेश आने पर पत्तियाँ प्रतिकर्षित होकर फैल जाती हैं।
- आवेश की मात्रा: पत्तियाँ जितना अधिक फैलती हैं, आवेश उतना ही अधिक होता है।
- अनावेशित अवस्था: पत्तियाँ एक-दूसरे के समान्तर लटकी रहती हैं।
🔬 विद्युतदर्शी का उपयोग: किसी वस्तु पर आवेश की उपस्थिति तथा आवेश की प्रकृति (धन/ऋण) जानने के लिए।
सुचालक (Conductor) – वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत आवेश प्रवाहित हो सकता है।
- उदाहरण: लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम, चाँदी, सोना, मानव शरीर, जल (अशुद्ध)।
कुचालक / विद्युतरोधी (Insulator) – वे पदार्थ जिनमें से होकर विद्युत आवेश प्रवाहित नहीं हो सकता।
- उदाहरण: लकड़ी, रबर, प्लास्टिक, काँच, थर्मोकोल, सूखा कागज़, मोम, चीनी मिट्टी (पोर्सिलिन)।
⚡ चालक: धातुएँ (लोहा, ताँबा, ऐलुमिनियम) – आवेश प्रवाहित होता है।
कुचालक: लकड़ी, रबर, प्लास्टिक, काँच – आवेश प्रवाहित नहीं होता।
स्थिर विद्युत प्रेरण – जब किसी चालक के पास कोई आवेशित वस्तु लाई जाती है, तो चालक भी आवेशित हो जाता है – निकट के सिरे पर विपरीत आवेश तथा दूर के सिरे पर समान आवेश उत्पन्न होता है।
- प्रक्रिया:
- धन आवेशित छड़ को चालक के समीप रखें → निकटवर्ती सिरा ऋणात्मक, दूर वाला धनात्मक हो जाता है।
- चालक के दूर वाले सिरे को अंगुली से छू दें → पृथ्वी से ऋणावेश (इलेक्ट्रॉन) आकर धन आवेश को उदासीन कर देते हैं।
- अब चालक को हटा लें → चालक ऋणावेशित हो जाता है।
- इसी प्रकार ऋण आवेशित छड़ से चालक को धनावेशित किया जा सकता है।
🔄 प्रेरण द्वारा आवेशन: बिना स्पर्श के किसी चालक को आवेशित करना – निकट के सिरे पर विपरीत, दूर के सिरे पर समान आवेश।
आकाशीय विद्युत (तड़ित) – बादलों में घर्षण के कारण उत्पन्न विद्युत विसर्जन।
- कारण: हवाओं और बादलों में घर्षण के कारण बादल आवेशित हो जाते हैं – ऊपरी बादल धन (+) तथा नीचे वाले ऋण (-) आवेशित हो जाते हैं।
- विद्युत विसर्जन: जब आवेशित बादलों के बीच या बादल और पृथ्वी के बीच नम वायु चालक बन जाती है, तो तीव्र विद्युत धारा प्रवाहित होती है – यही बिजली (तड़ित दमक) है।
- ताप: तड़ित के स्थान पर ताप 30,000°C तक हो जाता है।
- गर्जन: अत्यधिक ऊष्मा के कारण वायु का तीव्र प्रसार होता है – जिससे मेघ गर्जन की ध्वनि उत्पन्न होती है।
- प्रथम अध्ययन: बेंजामिन फ्रेंकलिन ने 1752 में आकाशीय विद्युत का अध्ययन किया।
⚡ तड़ित से हानियाँ एवं लाभ
- भवनों, पेड़ों, जीव-जन्तुओं पर घातक प्रभाव
- विद्युत उपकरणों के जल जाने की सम्भावना
- नाइट्रोजन ऑक्साइड बनकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाता है
- ओजोन (O₃) बनाता है जो सूर्य की हानिकारक किरणों से रक्षा करता है
⚡ तड़ित आघात से सुरक्षा के उपाय
- खुले मैदान में जमीन पर लेट जाएँ
- पेड़ के नीचे खड़े न हों
- बड़े भवनों के पास खड़े न हों
- ऊँचे स्थानों पर लगे धातु के उपकरणों को न छूएँ
- कार में हों तो खिड़कियाँ बंद करके अन्दर बैठें
- ऊँचे भवनों पर तड़ित चालक (Lightning Conductor) लगाएँ
⛈️ तड़ित चालक: ताँबे की मोटी पत्ती जो भवन के ऊपरी सिरे से पृथ्वी के अन्दर तक जाती है – बिजली को पृथ्वी में विसर्जित करके भवन की रक्षा करती है।
- घर्षण द्वारा आवेशन: वस्तुओं को रगड़कर आवेशित किया जा सकता है – यह स्थिर विद्युत है।
- आवेश के प्रकार: धनात्मक (+) एवं ऋणात्मक (-) – बेंजामिन फ्रेंकलिन द्वारा नामकरण।
- आवेशों का नियम: समान आवेश प्रतिकर्षण, विपरीत आवेश आकर्षण।
- प्रतिकर्षण: आवेशन का निश्चित प्रमाण है।
- विद्युतदर्शी: आवेश की उपस्थिति जानने का उपकरण – पत्तियाँ फैलती हैं।
- चालक: धातुएँ – आवेश प्रवाहित होता है।
- कुचालक: लकड़ी, रबर, प्लास्टिक – आवेश प्रवाहित नहीं होता।
- प्रेरण: बिना स्पर्श के चालक को आवेशित करना।
- तड़ित: बादलों में घर्षण से उत्पन्न विद्युत विसर्जन – तड़ित चालक से सुरक्षा।
✅ मुख्य बिंदु
विद्युत आवेश दो प्रकार के होते हैं – धन एवं ऋण।
घर्षण, चालन एवं प्रेरण – आवेशन की तीन विधियाँ।
तड़ित आघात से बचाव के लिए तड़ित चालक का उपयोग करें।
🧩 मिलान अभ्यास – 18: विद्युत
✅ प्रत्येक row में 6 विकल्प दिखेंगे – सही चुनें और तुरंत परिणाम देखें।
🧠 Practice Quiz – 18: विद्युत
✅ एक बार उत्तर चुनने के बाद बदला नहीं जा सकता।